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गर्मी के सबसे ज्यादा सताए हुए राज्य उत्तर प्रदेश पर मॉनसून खासा मेहरबान नजर आ रहा

नई दिल्ली गर्मी के सबसे ज्यादा सताए हुए राज्य उत्तर प्रदेश पर मॉनसून खासा मेहरबान नजर आ रहा है। राज्य के कई हिस्सों में इस सप्ताह झमाझम बारिश होने की संभावनाएं जताई जा रही हैं। IMD यानी भारत मौसम विज्ञान विभाग ने शुक्रवार को बताया है कि अगले 5 दिनों के दौरान उत्तर पश्चिम और मध्य भारत में हल्की से मध्यम बारिश होने जा रही है। साथ ही पूर्वोत्तर भारत भी जमकर भीगने वाला है। आज कहां होगी बारिश IMD का पूर्वानुमान है कि हिमाचल प्रदेश में 6 और 7 जुलाई, उत्तराखंड में 8 जुलाई, पंजाब में 6 और 7 जुलाई, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली में 5-6 जुलाई, उत्तर प्रदेश में 9 जुलाई तक, पूर्वी राजस्थान में 5-6 जुलाई, पश्चिम और पूर्वी मध्य प्रदेश में 5 जुलाई, छत्तीसगढ़ में 7 और 8 जुलाई को भारी बारिश हो सकती है। जम्मू-कश्मीर, गिलगिट, लद्दाख, बाल्टिस्तान, मुजफ्फराबाद में शनिवार यानी 6 जुलाई को भारी बारिश के आसार हैं। भारत के पूर्वी और पूर्वोत्तर क्षेत्र में अगले 5 दिनों तक जोरदार बारिश की उम्मीद है। मौसम विभाग ने बताया है कि झारखंड में 5 जुलाई, ओडिशा में 6, 8 और 9 जुलाई, बिहार में 6 से 9 जुलाई तक, उप हिमालयी पश्चिम बंगाल, सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश, नगालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा में 7 से 9 जुलाई तक और असम, मेघालय में 8-9 जुलाई को बहुत भारी बारिश होने के आसार हैं। इधर, दक्षिण भारत में केरल, माहे, लक्षद्वीप, तटीय कर्नाटक, कोंकण, गोवा, गुजरात राज्य में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। मध्य महाराष्ट्र, मराठवाड़ा, तटीय आंध्र प्रदेश, यानम, आंतरिक कर्नाटक, तमिलनाडु, पुडुचेरी, करईकल, रायलसीमा, तेलंगाना में भी अगले पांच दिनों के दौरान बारिश हो सकती है। मॉनसून ने 2 जुलाई को ही पूरे देश को कवर कर लिया था।  

सोशल मीडिया पर मेडिकल ग्रेजुएट परीक्षा के प्रश्नपत्र और उत्तर कुंजी बिक्री के लिए …..

 नई दिल्ली सोशल मीडिया पर मेडिकल परीक्षा के प्रश्नपत्रों की बिक्री की घोषणा करने के एक मामले में केरल की साइबर पुलिस ने गुरुवार को एक केस दर्ज किया है. सोशल मीडिया पर यह घोषणा की गई थी कि विदेशी मेडिकल ग्रेजुएट परीक्षा (एफएमजीई) के प्रश्नपत्र (Question Paper) और उत्तर कुंजी (Answer Key) बिक्री के लिए उपलब्ध हैं. यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब देश में नीट सहित अन्य परीक्षाओं के प्रश्न पत्र लीक होने के मामले सामने आ रहे हैं और कुछ मामलों में सीबीआई की जांच चल रही है. आपको बता दें कि विदेश में एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी करने के बाद, जो लोग भारत में प्रैक्टिस करना चाहते हैं, उन्हें राष्ट्रीय परीक्षा बोर्ड द्वारा आयोजित एफएमजीई परीक्षा उत्तीर्ण करना आवश्यक है. टेलीग्राम पर वायरल हुआ था मैसेज  राज्य पुलिस के एक प्रवक्ता ने कहा कि तिरुवनंतपुरम में सिटी साइबर क्राइम पुलिस ने टेलीग्राम समूहों पर 6 जुलाई की परीक्षा के लिए प्रश्नपत्रों की बिक्री का विज्ञापन देने वाले समूहों के खिलाफ मामला दर्ज किया है. प्रवक्ता ने एक बयान में कहा कि मामला सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम 2024 के तहत दर्ज किया गया है, जो इस कानून के तहत दर्ज होने वाला राज्य में अपनी तरह का पहला मामला है. इस तरह की धोखाधड़ी का पता लगाने के प्रयासों के तहत, पुलिस के साइबर डिवीजन ने विभिन्न टेलीग्राम चैनलों सहित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर 24×7 साइबर गश्त शुरू कर दी है.

नैनीताल में भारी बारिश के चलते सभी स्कूल आज भी बंद

नैनीताल मौसम विभाग द्वारा भारी बारिश की चेतावनी के बाद नैनीताल के स्कूल 5 जुलाई को भी बंद हैं. उत्तराखंड के नैनीताल में मौसम विभाग द्वारा भारी बारिश की चेतावनी जारी किए जाने के बाद शुक्रवार को सभी स्कूलों को बंद रखने का फैसला लिया गया है. मौसम विभाग ने शुक्रवार और शनिवार को नैनीताल जिले के अलग-अलग स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश के साथ गरज और बिजली गिरने की भविष्यवाणी की है. नैनीताल के जिला मजिस्ट्रेट द्वारा जारी आदेश के अनुसार, पूर्वानुमान के मद्देनजर, जिले में कक्षा 1 से 12 तक के सभी सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त और निजी स्कूल और आंगनवाड़ी केंद्र शुक्रवार को भी बंद रहेंगे. जिलाधिकारी वंदना सिंह ने कहा कि मौसम विभाग द्वारा जारी अलर्ट को देखते हुए 5 जुलाई (शुक्रवार) को जनपद नैनीताल क्षेत्र अंतर्गत आने वाले सभी शासकीय, अर्द्धशासकीय और निजी विद्यालय (कक्षा 01 से 12 तक संचालित समस्त शैक्षणिक संस्थाएं) समेत सभी आंगनबाड़ी केन्द्रों को शैक्षणिक कार्यों हेतु बंद करने के निर्देश दिए गए हैं. उन्होंने कहा कि आदेशों का पालन नहीं किया गया, तो संबंधित के खिलाफ कार्रवाई अमल में लाई जाएगी. प्रशासन ने सभी विभागों के अधिकारियों और कर्मचारियों को सतर्क रहने के सख्त निर्देश दिए हैं. मौसम विभाग देहरादून की ओर से जारी पूर्वानुमान के अनुसार 5 और 6 जुलाई को जनपद नैनीताल में कुछ जगह पर भारी बारिश और कहीं-कही गर्जन के साथ-साथ आकाशीय बिजली चमकने की संभावना व्यक्त की गई है. भारी बारिश के चलते कई जगहों पर जबरदस्त जलभराव हुआ, जिसके कारण लोगों को आवाजाही में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. लंबे जाम ने लोगों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं. बता दें कि गुरुवार (4 जुलाई 2024) को IMD की ओर से उत्तराखंड में भारी बारिश की चेतावनी के बाद दो जिलों उधमसिंह नगर और नैनीताल के सभी स्कूलों की छुट्टी कर दी गई थी. पौड़ी, अल्मोड़ा, नैनीताल और उधमसिंह नगर जिले में 4 जुलाई को स्कूलों को बंद करने का फैसला लिया था. जिला प्रशासन की ओर से जारी निर्देश में कहा गया था कि मौसम विज्ञान विभाग की ओर से गुरुवार को भारी बारिश का अंदेशा जताने के साथ ही ‘रेड अलर्ट’ जारी किया गया है. ऐसे में छात्रों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए दोनों जिलों में आंगनबाड़ी केंद्रों के साथ कक्षा 12वीं तक के सभी सरकारी, अशासकीय और प्राइवेट स्कूलों को बंद करने का फैसला लिया गया है. अपर जिलाधिकारी की ओर से कहा गया कि आदेश का उल्लघंन करने वाले स्कूलों को खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सकती है.  

लेबर पार्टी 318 से अधिक पर विजय, ऋषि सुनक की ऐतिहासिक हार

लंदन ब्रिटेन चुनाव के लिए शुक्रवार को वोटों की गिनती जारी है. एग्जिट पोल के अनुरूप मुख्य विपक्षी लेबर पार्टी प्रचंड जीत की ओर बढ़ रही है. शुरुआती नतीजों में लेबर पार्टी 318 सीटें जीत चुकी हैं जबकि सत्तारूढ़ कंजर्वेटिव पार्टी अभी तक सिर्फ 67 सीटें ही जीत पाई है. अभी तक 650 में से 454 सीटों पर नतीजों का ऐलान किया जा चुका है. लिबरल डेमोक्रेट्स ने अभी तक 32 सीटों, स्कॉटिश नेशनल पार्टी ने चार सीटों और रिफॉर्म यूके ने चार सीटों पर जीत दर्ज की है. जबकि ग्रीन पार्टी अभी तक एक ही सीट पर जीत हासिल कर पाई है. – प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ने आम चुनाव में पार्टी के खराब प्रदर्शन के बीच अपनी हार स्वीकार कर ली है. उन्होंने इस हार की खुद जिम्मेदारी ली है. उन्होंने कहा कि मैं इस हार की जिम्मेदारी लेता हूं और किएर स्टार्मर को जीत की बधाई देता हूं. – स्कॉटलैंड में भी लेबर पार्टी की प्रचंड जीत के आसार हैं. सूत्रों के मुताबिक, वहां लेबर पार्टी 30 से अधिक सीटें जीत सकती है. लेबर पार्टी के स्कॉटिश नेता अनस अनवर ने कहा कि हमें पूरा यकीन हैं कि हम स्कॉटलैंड में भी बहुमत हासिल करेंगे. यह बदलाव का दौर है. हमारी पहली प्राथमिकता 14 साल के कंजर्वेटिव सरकार के शासन को खत्म करना है, जिससे देश को नुकसान पहुंचा है. महत्वपूर्ण काम कल से शुरू होगा. हमारा अगला कदम 2026 में स्कॉटिश संसदीय चुनाव पर ध्यान केंद्रित करना होगा. – लेबर पार्टी के नेता किएर स्टार्मर ने कहा कि मतदाताओं ने फैसला सुना दिया है कि वे बदलाव के लिए तैयार हैं. स्टार्मर अपनी सीट पर भी चुनाव जीत गए हैं. पार्टी की जीत के बाद वह देश के अगले प्रधानमंत्री होंगे. – मतगणना के शुरुआती नतीजों के मुताबिक, लेबर पार्टी के नेता किएर स्टार्मर का प्रधानमंत्री बनना तय नजर आ रहा है. वहीं, हार की आशंका के बीच ऋषि सुनक ने ऐलान कर दिया है कि वह कल प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दे देंगे. – इससे पहले वोटिंग खत्म होने के बाद एग्जिट पोल में भी लेबर पार्टी की प्रचंड जीत का अनुमान जताय गया था. बीबीसी-इप्सोस एग्जिट पोल में किएर स्टार्मर (Keir Starmer) के नेतृत्व वाली लेबर पार्टी के 410 सीटें जीतने का दावा किया गया जबकि मौजूदा पीएम ऋषि सुनक के नेतृत्व वाली कंजर्वेटिव पार्टी को महज 131 सीटें मिलने का अनुमान जताया गया. बहुमत के लिए क्या है आंकड़ा? 650 सांसदों वाले सदन (हाउस ऑफ कॉमन्स) में बहुमत की सरकार बनाने के लिए किसी पार्टी को 326 सीटों की आवश्यकता होती है. हार का संकेत मिलने के बाद प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ने इस्तीफे का ऐलान कर दिया है. एग्जिट पोल के अनुमान अगर वास्तविक नतीजों में तब्दील होते हैं, तो लेबर पार्टी प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता में वापसी कर सकती है और केर स्टार्मर ब्रिटेन के अगले प्रधानमंत्री हो सकते हैं. यूके में मतदान समाप्त होते ही वोटों की गिनती शुरू हो गई थी, लेकिन 650 सीटों वाली संसद में स्पष्ट विजेता कौन होगा यह सामने आने में कुछ घंटे लगेंगे. एक अन्य सर्वे एजेंसी YouGov ने केर स्टार्मर की लेबर पार्टी को 431 सीटें मिलने और पीएम ऋषि सुनक की कंजर्वेटिव पार्टी के लिए सिर्फ 102 सीटों की भविष्यवाणी की है. यदि सर्वेक्षण सटीक होते हैं, तो इससे लेबर पार्टी को 650 सीटों वाले हाउस ऑफ कॉमन्स में जबरदस्त बहुमत मिल जाएगा. YouGov ने 89 करीबी मुकाबले वाली सीटों की भी पहचान की है. एग्जिट पोल के अनुमान कंजर्वेटिव पार्टी के लिए 1906 के बाद से उसकी संभावित सबसे बुरी हार के संकेत देते हैं, जब उसे 156 सीटों पर जीत मिली थी. लिबरल डेमोक्रेट्स पार्टी को 72 सीटें और रिफॉर्म यूके पार्टी को 3 सीटें मिलने का अनुमान जताया गया है. कंजर्वेटिव पार्टी 14 वर्षों से सत्ता में ​काबिज बता दें कि कंजर्वेटिव पार्टी पिछले 14 वर्षों से सत्ता में ​काबिज है. इस दौरान यूनाइटेड किंगडम ने 5 प्रधानमंत्री देख लिए. साल 2010 में हुए आम चुनावों में मिली कंजर्वेटिव्स को मिली जीत के बाद डेविड कैमरन पीएम बने थे. उसके बाद 2015 के यूके इलेक्शन में कंजर्वेटिव पार्टी को लगातार दूसरी बार जीत मिली और कैमरन फिर पीएम बने. लेकिन 2016 में उन्हें पद छोड़ना पड़ा था. उनकी जगह कंजर्वे​टिव्स ने टेरेसा मे को प्रधानमंत्री बनाया. वह 2019 तक इस पद पर रहीं. 2019 में बोरिस जॉनसन यूके के प्रधानमंत्री बने. फिर बीच में उन्हें पद छोड़ना पड़ा और लिज ट्रस प्रधानमंत्री बनीं. लेकिन वह सिर्फ 50 दिन ही पद पर रह सकीं. उनकी जगह ऋषि सुनक प्रधानमंत्री बने. भारत के लिए यूके इलेक्शन महत्व भारत और ब्रिटेन दोनों देशों के बीच व्यापार को बढ़ावा देने के लिए दो साल से अधिक समय से प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर बातचीत कर रहे हैं. लेबर पार्टी की प्रचंड जीत से दोनों देशों के बीच एफटीए पर चल रही वार्ता के डायनामिक्स में बदलाव आ सकता है. यदि सर्वेक्षण सटीक होते हैं, तो अन्य यूरोपीय देशों की तरह ब्रिटेन में भी वर्तमान सरकार बदल जाएगी. बता दें कि कोविड महामारी और यूक्रेन पर रूस के आक्रमण के कारण उत्पन्न संकट के बाद कई यूरोपीय देशों में हुए चुनाव में सत्ता परिवर्तन देखने को मिला है. एग्जिट पोल के आंकड़े ब्रिटेन में भी यह चलन कायम रहने के संकेत देते हैं. यूके मतलब- इंग्लैंड, स्कॉटलैंड, वेल्स और नॉर्दर्न आयरलैंड यूनाइटेड किंगडम- इंग्लैंड, वेल्स, स्कॉटलैंड और उत्तरी आयरलैंड से मिलकर बनता है और आम चुनाव इन सभी देशों पर लागू होते हैं. यूके में कुल 650 निर्वाचन क्षेत्र हैं, इनमें से 533 सीटें इंग्लैंड, 59 सीटें स्कॉटलैंड, 40 सीटों वेल्स और 18 सीटें उत्तरी आयरलैंड में पड़ती हैं. हालांकि, यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि यूके के भीतर आने वाले प्रत्येक देश की अपनी सरकार भी होती है और वहां चुनाव होते हैं. ब्रिटेन में कितनी सीटें जीतने पर प्रधानमंत्री बनने का मौका मिलता है वोट डालने के बाद ब्रिटेन के एक अन्य निवासी ने कहा, ‘अगर मौजूदा राजनीतिक रुझान जारी रहे तो मुझे लगता है कि लेबर पार्टी को शानदार जीत के साथ 15 साल बाद सत्ता में वापस आना चाहिए। बता दें कि इंग्लैंड, वेल्स, स्कॉटलैंड और उत्तरी आयरलैंड के कुल 650 निर्वाचन क्षेत्रों … Read more

अमरनाथ यात्रा के पहले पांच दिनों में रिकॉर्ड तोड़ एक लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने पवित्र गुफा में बाबा बर्फानी के दर्शन किए

जम्मू, वार्षिक अमरनाथ यात्रा के पहले पांच दिनों में रिकॉर्ड तोड़ एक लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने पवित्र गुफा में बाबा बर्फानी के दर्शन किए।5,696 तीर्थयात्रियों का एक और जत्था कश्मीर के लिए रवाना हुआ। यात्रा का प्रबंधन करने वाले श्री अमरनाथजी श्राइन बोर्ड (एसएएसबी) के अधिकारियों ने बताया कि 29 जून को यात्रा शुरू होने के बाद से एक लाख से अधिक श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं। उन्होंने कहा, ”आज 5696 यात्रियों का एक और जत्था जम्मू के भगवती नगर यात्री निवास से दो सुरक्षा काफिलों में घाटी के लिए रवाना हुआ। इनमें से 2028 यात्री 97 वाहनों के सुरक्षा काफिले में सुबह 3.13 बजे उत्तरी कश्मीर के बालटाल बेस कैंप के लिए निकले। वहीं 3,668 यात्री 122 वाहनों के सुरक्षा काफिले में सुबह 3.40 बजे दक्षिण कश्मीर के नुनवान (पहलगाम) बेस कैंप के लिए रवाना हुए।” बता दें कि पिछले वर्ष यात्रा के पहले पांच दिनों में लगभग 50,000 तीर्थ यात्री मंदिर पहुंचे थे। मौसम विभाग ने दोनों यात्रा मार्गों पर आमतौर पर बादल छाए रहने और दिन में हल्की बारिश/गरज के साथ छींटे पड़ने का अनुमान जताया है। अमरनाथ यात्रा में यात्री या तो 48 किलोमीटर लंबे पारंपरिक पहलगाम मार्ग से यात्रा करते हैं या फिर 14 किलोमीटर लंबे बालटाल मार्ग से यात्रा करते हैं। पहलगाम मार्ग से जाने वालों को गुफा मंदिर तक पहुंचने में चार दिन लगते हैं, जबकि बालटाल मार्ग का उपयोग करने वाले लोग दर्शन करने के बाद उसी दिन बेस कैंप में लौट आते हैं। इस वर्ष लगभग 300 किलोमीटर लंबे जम्मू-श्रीनगर राजमार्ग में दोनों यात्रा मार्गों पर दो बेस कैंप और पवित्र गुफा मंदिर में सुरक्षा के व्यापक प्रबंध किए गए हैं ताकि बिना किसी दुर्घटना के यात्रा को सुचारू रूप से संपन्न कराया जा सके। दोनों मार्गों पर तथा पारगमन शिविरों और गुफा मंदिर के पास 124 से अधिक लंगर (सामुदायिक रसोई) स्थापित किए गए हैं। इस वर्ष की यात्रा के दौरान 7,000 से अधिक ‘सेवादार’ (स्वयंसेवक) यात्रियों की सेवा कर रहे हैं। इसके अलावा दोनों मार्गों पर यात्रियों के लिए हेलीकॉप्टर सेवाएं भी उपलब्ध हैं।  

PM मोदी 13 जुलाई को मुंबई में करेंगे कई परियोजना का शिलान्यास

मुंबई  प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 13 जुलाई को मुंबई में विभिन्न विकास कार्यों का शिलान्यास करने के वाले हैं। इसके लिए प्रशासन की ओर से तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। लोकसभा चुनाव के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पहली बार मुंबई का दौरा करेंगे। जानकारी के अनुसार प्रधानमंत्री मोदी 13 जुलाई को मुंबई में प्रस्तावित गोरेगांव- मुलुंड लिंक रोड और बोरीवली- ठाणे लिंक रोड के सबवे की आधारशिला रखेंगे। मुंबई में गोरेगांव-मुलुंड लिंक रोड परियोजना के लिए 6,300 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। साथ ही प्रधानमंत्री 1,170 करोड़ रुपये की प्रस्तावित ऑरेंज गेट टू ग्रांट रोड एलिवेटेड रोड परियोजना का भूमि पूजन भी करेंगे। इसके साथ ही प्रधानमंत्री मोदी मुंबई नगर निगम की विभिन्न प्रस्तावित परियोजनाओं का भी शिलान्यास करने वाले हैं। इनमें सड़क कंक्रीटिंग परियोजनाएं, सीवरेज योजनाएं शामिल हैं।      

रूस के हथियार निर्यातक ने भारत में मैंगो आर्मर-पियर्सिंग टैंक राउंड्स का निर्माण शुरू किया

मॉस्को/ नईदिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अगले हफ्ते रूस का दौरा करने वाले हैं। इससे पहले रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भारत को बड़ा तोहफा दिया है। दरअसल, पीएम मोदी की यात्रा से पहले रूस ने ऐलान किया है कि वह भारत में टैंकों के मजबूत कवच को फाड़ने वाले गोलों का निर्माण शुरू कर दिया है। इसे खास तौर पर भारतीय सेना के लिए बनाया जा रहा है। ये गोले किसी भी बख्तरबंद को पलक झपकते फाड़ सकते हैं। इसे भारत रूस के रक्षा संबंधों में मील का पत्थर माना जा रहा है। भारत रूस के बीच रक्षा संबंधों का एक लंबा और ठोस इतिहास है। इसमें भारत में हथियारों और गोला-बारूद का संयुक्त और लाइसेंस के जरिए उत्पादन भी शामिल है। भारत में ‘मैगो शेल’ बना रहा रूस रूसी राज्य के स्वामित्व वाली रक्षा निगम रोस्टेक का हिस्सा रोसोबोरोनएक्सपोर्ट हथियार निर्यातक ने भारत में मैंगो आर्मर-पियर्सिंग टैंक राउंड्स का निर्माण शुरू कर दिया है। निगम ने गुरुवार को एक बयान में कहा कि यह सहयोग भारत के मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत अभियान पहलों के साथ एलाइन किया गया है, जिसमें भारतीय रक्षा उद्योग के सहयोग से रोसोबोरोनएक्सपोर्ट ने कई फैसिलिटी स्थापित की है। आत्मनिर्भर भारत में मदद कर रहा रूस रोस्टेक ने रोसोबोरोनएक्सपोर्ट के महानिदेशक अलेक्जेंडर मिखेव के हवाले से कहा, “मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत पहल के साथ तालमेल बिठाते हुए रूसी-भारतीय सहयोग एक नए मील के पत्थर पर पहुंच गया है। भारतीय रक्षा ढांचे के आधार पर, रोसोबोरोनएक्सपोर्ट ने मैंगो टैंक राउंड के निर्माण के लिए आवश्यक उत्पादन सुविधाएं स्थापित की हैं। यह विकास भारत को प्रौद्योगिकी आत्मसात और उत्पादन संगठन की प्रक्रिया शुरू करने में सक्षम बनाता है।” भारत में रोसोबोरोनएक्सपोर्ट का काम “व्यापक औद्योगिक साझेदारी का एक शानदार उदाहरण” है। संयुक्त हथियार उत्पादन पर रूस का जोर रूस ने कहा है कि इस सहयोगी ढांचे के भीतर, विभिन्न प्रकार के हथियारों से जुड़ी संयुक्त परियोजनाओं को विकसित किया गया है, जो दो अलग-अलग देशों की कंपनियों के बीच सहयोग के एक असाधारण स्तर को प्रदर्शित करता है। इस बीच, रोस्टेक के प्रमुख सर्गेई चेमेजaव ने उसी बयान में कहा कि भारत में रूसी गोला-बारूद के उत्पादन का स्थानीयकरण भविष्य में आगे बढ़ता रहेगा। भारत के साथ रक्षा क्षेत्र में सहयोह बढ़ा रहा रूस चेमेजोव ने कहा, “रोस्टेक के पास मित्र देशों के साथ औद्योगिक साझेदारी का काफी अनुभव है। कई परियोजनाओं में प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और विशेषज्ञता साझा करना शामिल है। इस तरह की साझेदारी आयात करने वाले देश को अपना उत्पादन विकसित करने में सक्षम बनाती है, जो एक प्रमुख रक्षा समाधान आपूर्तिकर्ता के रूप में रोस्टेक के लिए एक प्रतिस्पर्धात्मक लाभ है। हम भारत के साथ ऐसी कई परियोजनाओं को लागू करने का इरादा रखते हैं।” इन परियोजनाओं में टी-90 टैंकों, कवच-भेदी सब-कैलिबर प्रोजेक्टाइल से लैस मैंगो शेल और अन्य उन्नत हथियार प्रणालियों का लाइसेंस प्राप्त उत्पादन शामिल है। टैंक भेदी गोले क्या होते हैं? 3VBM17 मैंगो शेल में 3BM42 फिन-स्टेबलाइज्ड आर्मर-पियर्सिंग सब-कैलिबर प्रोजेक्टाइल है, जो समग्र कवच से लैस आधुनिक टैंकों को प्रभावी ढंग से निशाना बनाता है। चेमेज़ोव ने कहा कि भविष्य में, मैंगो राउंड के स्थानीय उत्पादन को सुविधाजनक बनाने के लिए, कंपनी भारत में बारूद निर्माण शुरू करने की योजना बना रही है, जिसे वाहनों को संयुक्त सुरक्षा प्रदान करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। इसके अलावा, रूसी कंपनी भारत की रक्षा होल्डिंग के आधार पर भारतीय सशस्त्र बलों की क्षमताओं का निर्माण करने के लिए प्रतिबद्ध है।

HC ने कहा अगर धर्मांतरण को रोका नहीं गया तो एक दिन बहुसंख्यक आबादी अल्पसंख्यक हो जाएगी, जाने ये संकट कितना बड़ा …..

इलाहाबाद इलाहाबाद हाईकोर्ट ने धर्मांतरण को लेकर अहम टिप्पणी की है. हाईकोर्ट ने कहा है कि अगर धर्मांतरण को रोका नहीं गया तो एक दिन बहुसंख्यक आबादी अल्पसंख्यक हो जाएगी. जस्टिस रोहित रंजन ने ये टिप्पणी सामूहिक धर्मांतरण कराने के आरोपी की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए की. मामला एक गांव में हिंदुओं के सामूहिक रूप से धर्म बदलकर ईसाई धर्म अपनाने से जुड़ा था. सामूहिक धर्मांतरण कराने का आरोप कैलाश नाम के व्यक्ति पर लगा है. हाईकोर्ट ने कैलाश की जमानत याचिका भी खारिज कर दी. हाईकोर्ट ने कहा, ऐसे धार्मिक जमावड़ों को तुरंत रोका जाना चाहिए, जहां धर्मांतरण हो रहा है और लोगों का धर्म बदला जा रहा है. जस्टिस रोहित रंजन ने कहा कि इस तरह के धार्मिक आयोजन संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत मिले ‘धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार’ का सीधा-सीधा उल्लंघन हैं. इस दौरान हाईकोर्ट ने ये भी कहा कि उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में एससी-एसटी और आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को बड़े पैमाने पर ईसाई धर्म में बदला जा रहा है. क्या था ये मामला? रामकली प्रजापति नाम की महिला ने हमीरपुर जिले के मौदाहा गांव के रहने वाले कैलाश के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी. प्रजापति ने आरोप लगाया था कि कैलाश मानसिक रूप से बीमार उसके भाई को दिल्ली ले गया था. कैलाश ने वादा किया कि वो उसके भाई का इलाज करवाएगा और ठीक होने पर वापस गांव भेज देगा, लेकिन इसकी जगह उसे ईसाई धर्म में परिवर्तित कर दिया गया. एफआईआर के मुताबिक, जब कैलाश वापस लौटा तो वो गांव के सभी लोगों को दिल्ली में एक कार्यक्रम में ले गया, जहां उसने सभी को कथित तौर पर ईसाई धर्म में परिवर्तित कर दिया. कैलाश ने प्रजापति के भाई को ईसाई धर्म अपनाने के बदले पैसे की पेशकश की थी. वहीं, कोर्ट में कैलाश के वकील ने दावा किया कि रामकली के भाई का धर्म परिवर्तन नहीं किया गया है. हालांकि, कोर्ट ने आरोपी के खिलाफ गंभीर आरोपों को देखते हुए उसे जमानत देने से इनकार कर दिया. धर्मांतरण पर यूपी में क्या है कानून? देश के कई राज्यों में जबरन धर्मांतरण को लेकर सख्त कानून हैं. उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने 2021 में जबरन धर्मांतरण के खिलाफ कानून पास किया था. इस कानून में 10 साल तक की सजा का प्रावधान है. इस कानून के मुताबिक, अगर कोई व्यक्ति जबरदस्ती से, लालच देकर या डरा-धमकाकर किसी का धर्म परिवर्तन करवाता है तो दोषी पाए जाने पर उसे 1 से 5 साल तक की जेल और 15 हजार रुपये के जुर्माने की सजा हो सकती है. महिला, नाबालिग और एससी-एसटी के मामले में 2 से 10 साल की जेल और 25 हजार रुपये के जुर्माने की सजा का प्रावधान है. वहीं, सामूहिक धर्मांतरण पर 3 से 10 साल की जेल और कम से कम 50 हजार रुपये के जुर्माने की सजा हो सकती है. कानून कहता है कि अगर कोई व्यक्ति दूसरी बार जबरन धर्मांतरण का दोषी पाया जाता है तो सजा को दोगुना किया जा सकता है. मसलन, दूसरी बार दोषी पाए जाने पर 1 से 5 साल की जेल की बजाय 2 से 10 साल की सजा हो सकती है. किस धर्म की आबादी कितनी तेजी से बढ़ रही? 2011 की जनगणना के मुताबिक, भारत की आबादी 121 करोड़ से ज्यादा है. इसमें 96.63 करोड़ हिंदू और 17.22 करोड़ मुस्लिम हैं. भारत की कुल आबादी में 79.8% हिंदू और 14.2% मुस्लिम हैं. इनके बाद ईसाई 2.78 करोड़ (2.3%) और सिख 2.08 करोड़ (1.7%) हैं. बाकी बौद्ध और जैन धर्म को मानने वालों की आबादी 1% से भी कम है. 2001 की तुलना में 2011 में भारत की आबादी 17.7% तक बढ़ गई थी. इस दौरान मुस्लिमों की आबादी सबसे ज्यादा करीब 25% तक बढ़ी थी. जबकि, हिंदू 17% से कम बढ़े थे. इसी तरह ईसाइयों की आबादी 15.5%, सिख 8.4%, बौद्ध 6.1% और जैन 5.4% बढ़े थे. वहीं, अगर 1951 से 2011 तक की तुलना की जाए तो सबसे ज्यादा आबादी मुस्लिमों की बढ़ी है. 1951 में 3.54 करोड़ थी, जो 2011 तक 386% बढ़कर 17.22 करोड़ हो गई. जबकि, 1951 में हिंदुओं की आबादी 30.35 करोड़ थी. 2011 तक हिंदुओं की आबादी 218% बढ़कर 96.62 करोड़ पहुंच गई. इसी तरह सिखों की आबादी 235% और ईसाइयों की 232% बढ़ गई. 1951 में भारत में हिंदू 84%, मुस्लिम 9%, ईसाई 2.2% और सिख 1.7% थे. 2011 की आबादी में हिंदुओं की हिस्सेदारी 79.8%, मुस्लिमों की 14.2%, ईसाइयों की 2.3% और सिखों की 1.7% थी. अल्पसंख्यक बन रहे बहुसंख्यक? इसी साल मई में प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार समिति की एक स्टडी आई थी. इस स्टडी में दावा किया गया था 1950 से 2015 के बीच हिंदुओं की आबादी 7.8% तक घट गई. स्टडी में कहा गया था कि भारत में बहुसंख्यक आबादी घट रही है, जबकि दूसरे मुल्कों में बहुसंख्यक आबादी बढ़ रही है. भारत के अलावा म्यांमार और नेपाल में भी बहुसंख्यक आबादी घटी है. म्यांमार में बहुसंख्यक आबादी (बौद्ध) में 9.8% और नेपाल में बहुसंख्यक (हिंदू) आबादी में 3.6% की गिरावट आई है. दूसरी ओर, बांग्लादेश में बहुसंख्यक समुदाय मुसलमानों की आबादी में हिस्सेदारी 18.5% और पाकिस्तान में 3.75% तक बढ़ गई है. स्टडी में कहा गया था कि 1971 में बांग्लादेश के अलग मुल्क बनने के बाद से मुस्लिम आबादी की हिस्सेदारी 10% से ज्यादा बढ़ी है. जबरन धर्मांतरण पर क्या है कानून? फिलहाल, देश में जबरन धर्मांतरण को रोकने के खिलाफ कोई समग्र कानून नहीं है. संविधान के तहत, देश के सभी नागरिकों को धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार है और वो अपनी मर्जी से किसी भी धर्म को अपना सकता है. हालांकि, किसी की इच्छा के खिलाफ या जबरन धर्मांतरण करवाना अपराध है. जबरन धर्मांतरण के खिलाफ राष्ट्रीय स्तर पर तो कोई कानून नहीं है, लेकिन कई राज्यों में इसे लेकर कानून है. इनमें ओडिशा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, झारखंड, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, छत्तीसगढ़ जैसे राज्य शामिल हैं. भारत के पड़ोसी देशों में जबरन धर्मांतरण के खिलाफ कानून हैं. पाकिस्तान, नेपाल, म्यांमार, श्रीलंका और भूटान में इसे लेकर कानून है. नेपाल में जबरन धर्मांतरण पर 6 साल तक की कैद हो सकती है. वहीं, म्यांमार में 2 साल … Read more

शाहजहांपुर में टमाटर 162, कोलकाता में 152 तो दिल्ली में 120 रुपए किलो में बिका

नई दिल्ली बीते साल की तरह ही इस बार भी टमाटर 200 रुपए के पार पहुंच सकता है। देश के कई इलाकों में बारिश और बाढ़ की वजह से टमाटर समेत कई सब्जियों की सप्लाई पर असर पड़ा है, जिससे टमाटर के साथ-साथ लोगों के किचन में हमेशा विराजमान रहने वाले आलू-प्याज भी भाव खाने लगे हैं। चर्चित अमेरिकी उपन्यासकार और फूड कॉलम राइटर लॉरी कॉल्विन ने एक बार कहा था कि बिना टमाटर के दुनिया उसी तरह है, जैसे बिना तारों के वायलिन। आज भारतीय किचन में बेहद करीने से टमाटर सहेजे जाते हैं। बिना टमाटर के किसी तरीदार सब्जी की कल्पना करना भी मुश्किल है। यूपी के शाहजहांपुर में टमाटर 162 रुपए किलो में बिक रहा है। उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, महानगरों में टमाटर की खुदरा कीमतें कोलकाता में सबसे अधिक 152 रुपए प्रति किलो रहीं। वहीं, दिल्ली में यह प्रति किलो 120 रुपए, चेन्नई में 117 रुपए और मुंबई में 108 रुपए के हिसाब से बिका। बाजारों में आलू 35 से 40 रुपए किलो बिक रहा है तो प्याज भी कहीं-कहीं 45 से 50 रुपए किलो तक बिक रहा है। शाहजहांपुर में सबसे ज्यादा में बिका टमाटर खुदरा टमाटर की अखिल भारतीय औसत कीमत बृहस्पतिवार को 95.58 रुपए प्रति किलो थी। आंकड़ों से पता चलता है कि उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में इसकी सबसे अधिक कीमत 162 रुपये प्रति किलो रही, जबकि राजस्थान के चूरू जिले में न्यूनतम दर 31 रुपए प्रति किलो थी। देश के चार बड़े शहरों के अलावा भी बाकी शहरों में भी टमाटर की कीमतें ऊंची रहीं। गुरुग्राम में टमाटर की खुदरा कीमत 140 रुपए प्रति किलो, बेंगलुरु में 110 रुपए प्रति किलो, वाराणसी में 107 रुपए प्रति किलो, हैदराबाद में 98 रुपए प्रति किलो और भोपाल में 90 रुपए किलो थी। नीचे दिए ग्राफिक से जानिए टमाटर की पैदावार में कौन से राज्य आगे हैं। एक महीने में 158 फीसदी तक बढ़ गए दाम उपभोक्ता मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 3 जुलाई को टमाटर की औसत कीमत 55.04 रुपए किलो था, जो बीते 3 जून को 34.73 रुपए किलो था। बीते साल 3 जुलाई को टमाटर की कीमत 67.57 रुपए किलो थी। जूलाई खत्म होने के साथ टमाटर की कीमत 67.57 रुपए किलो थी और 2023 अगस्त के पहले हफ्ते में यह बढ़कर 250 रुपए किलो तक जा पहुंचा था। पेट्रोल से दोगुना महंगा हो सकता है टमाटर आज कई खुदरा मार्केट में टमाटर के दाम 100 रुपए के पार पहुंच चुके हैं। अभी इसके महंगे होने की रफ्तार 158 फीसदी है, जिसके और ज्यादा होने के आसार हैं। माना जा रहा है कि अभी बारिश और बाढ़, घटता उत्पादन और सप्लाई में बाधा पहुंचने की वजह से अगस्त तक इसके दाम और बढ़ सकते हैं। यह भी कहा जा रहा है कि अगर यही रफ्तार रही तो यह 200 रुपए किलो के पार भी जा सकता है। यानी पेट्रोल की मौजूदा कीमतों से दोगुने दाम पर टमाटर बिक सकते हैं, क्योंकि पेट्रोल के दाम देश के कई शहरों में 100 रुपए प्रति लीटर के करीब है। बीते साल क्यों 200 के पार पहुंचा था टमाटर बीते साल इसी वक्त टमाटर की कीमतों में बड़ा उछाल देखने को मिला था। दिल्ली-एनसीआर, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, हरियाणा, कर्नाटक और उत्तर प्रदेश में टमाटर की कीमतें काफी बढ़ गई थीं। बेमौसमी घटनाओं और किसानों के ज्यादा रिटर्न देने वाली फसलें उगाने से टमाटर की आपूर्ति अचानक गिर गई थी। इसी वजह से जुलाई के अंत तक खुदरा कीमतें मामूली 20 रुपए प्रति किलो से बढ़कर 200 रुपए प्रति किलो तक पहुंच गईं। वहीं, दिल्ली के मदर डेयरी के सफल रिटेल स्टोर पर टमाटर 259 रुपए किलो बिका था। उस वक्त केंद्र सरकार ने अपनी एजेंसियों को आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और महाराष्ट्र जैसे प्रमुख टमाटर उत्पादक राज्यों में टमाटर खरीदने का निर्देश दिया था। इस साल भी अगर टमाटर के भाव काबू से बाहर जाने लगेंगे तो सरकार ऐसा ही कुछ कर सकती है। नीचे ग्राफिक से समझिए, कहां कितना लाल हुआ टमाटर। जुलाई-अगस्त में क्यों बढ़ जाते हैं टमाटर के भाव टमाटर का उत्पादन आमतौर पर जुलाई-अगस्त और अक्टूबर-नवंबर के दौरान घट जाता है, जिससे बाजार में इसकी पैदावार में कमी आ जाती है। यह कमी टमाटर की मांग और आपूर्ति की चुनौतियों को पूरा नहीं कर पातीं। इसके अलावा, कई राज्यों में बारिश के कारण टमाटर की फसल को नुकसान पहुंचा है। देश के ज्यादातर हिस्सों में भीषण गर्मी की वजह से भी उत्पादन में गिरावट आई। इसके अलावा, पड़ोसी राज्यों से पर्याप्त मात्रा में टमाटर की आपूर्ति नहीं हो पा रही है। कुछ इलाके ऐसे हैं, जहां इस बार टमाटर की फसल कम लगाई गई थी। पड़ोसी राज्यों से कम आपूर्ति, दक्षिण से मंगाने पर लागत ज्यादा दिल्ली की आजादपुर थोक मंडी और नागपुर के कलमना मार्केट के ट्रांसपोर्टर और कारोबारी लालचंद्र पांडेय ने बताया कि दिल्ली समेत देशभर में हफ्ते भर में टमाटर की कीमतें डेढ़ से दोगुनी हो गई हैं। इसकी वजह कारण हरियाणा और उत्तर प्रदेश से टमाटर की कम आपूर्ति है। टमाटर की आपूर्ति को पूरा करने के लिए दक्षिण के राज्यों से टमाटर मंगाए जा रहे हैं जिससे टमाटर की ढुलाई की लागत बढ़ी है। कई बार किसानों ने सही कीमत नहीं मिलने की वजह से टमाटर की फसल पर कीटनाशकों और उर्वरकों का इस्तेमाल नहीं किया। इससे कई जगहों पर टमाटर की फसल बीमारियों की चपेट में आ गई। इसस टमाटर की पैदावार गिर गई और इसकी कीमतें बढ़ गईं। अभी अगस्त तक ज्यादा राहत नहीं, टमाटर बना रहेगा लाल लालचंद्र पांडेय के अनुसार, टमाटर की नई फसल आने में करीब 2 महीने का वक्त लग सकता है। ऐसे में अगस्त तक दाम में मामूली गिरावट आ सकती है। जुलाई के आखिर तक इसके भाव 200 के पार जा सकते हैं, क्योंकि यह वक्त भीषण बारिश और बाढ़ का भी है। दरअसल, टमाटर के पौधे जब तीन महीने के हो जाते हैं तो इनसे हफ्ते में दो बार टमाटर तोड़ सकते हैं। ये पौधे 1-2 महीने की अवधि तक फसल देते हैं। हालांकि टमाटर की पैदावार उसकी किस्मों, मिट्टी और बारिश पर ज्यादा निर्भर करती है। अगस्त के आखिर से टमाटर के … Read more

AP में आफत की बारिश! भूस्खलन से 7 जिलों में सड़क संपर्क टूटा…कई यात्री फंसे

ईटानगर  अरुणाचल प्रदेश में बारिश के कारण हुए भूस्खलन से कम से कम सात जिलों में सड़क संपर्क टूट गया। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। भूस्खलन के कारण सियांग, पूर्वी सियांग, ऊपरी सियांग, पश्चिमी सियांग, शि योमी, लेपा रादा और ऊपरी सुबनसिरी जिले प्रभावित हैं। लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) में राजमार्ग के सहायक अभियंता गेमर पाडू ने बताया कि बृहस्पतिवार सुबह भूस्खलन के बाद पासीघाट-पंगिन-आलो सड़क पर राष्ट्रीय राजमार्ग-13 का एक हिस्सा अवरुद्ध हो गया। सियांग जिले में लोकपेंग और पांगिन तिराहे की ओर जाने वाले मार्ग पर एक विशाल पत्थर के गिर जाने से सड़क पूरी तरह से अवरुद्ध हो गई। उन्होंने कहा कि हल्के वाहनों के आवागमन के लिए सड़क को साफ किया जा रहा है। भूस्खलन के कारण निगमोई-आलो बाईपास सड़क भी अवरुद्ध हो गई। ऊपरी सियांग जिले की सूचना एवं जनसंपर्क अधिकारी वाई जेरांग ने बताया कि भूस्खलन के कारण टूटिंग उप-मंडल का संपर्क जिले के बाकी हिस्सों से कट गया है। उन्होंने बताया कि मोयिंग और मिगिंग गांवों में 29 जून को कई स्थानों पर भारी भूस्खलन होने के कारण टूटिंग से सड़क संपर्क पूरी तरह से कट गया है। उन्होंने कहा कि टूटिंग जाने वाले यात्री ऊपरी सियांग के जिला मुख्यालय यिंगकिओंग में फंसे हुए हैं। पीडब्ल्यूडी राजमार्ग विभाग के अधिकारी के हवाले से डीआईपीआरओ ने कहा कि यदि मौसम ठीक रहा तो सड़क पर आवागमन को पूरी तरह से बहाल करने में कम से कम एक सप्ताह का समय लगेगा। लगातार बारिश के कारण पश्चिमी सियांग जिले के आलो में जलापूर्ति बाधित हो गई है। अधिकारियों ने बताया कि बाढ़ और भूस्खलन के कारण सियांग जिले के लिकाबाली कस्बे में जलापूर्ति को भी भारी नुकसान पहुंचा है।    

15 अगस्त से वंदे भारत की नई स्लीपर सेवाएं शुरू की जाएंगी, जानिए किन रूटों पर ये ट्रेनें चलाई जाएगी

नई दिल्ली  देश की सबसे लोकप्रिय ट्रेन वंदे भारत के चाहने वालों के लिए खुशखबरी है। वंदे भारत की सफलता के बाद रेलवे जल्द ही वंदे भारत स्लीपर की सौगात लोगों को देने वाला है। ऐसा बताया जा रहा है कि 15 अगस्त से कई रूटों पर वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों को चलाने का प्लान है। रिपोर्ट्स की मानें तो दक्षिण मध्य रेलवे (एससीआर) के अधिकारियों ने बताया है कि 15 अगस्त से वंदे भारत की नई स्लीपर सेवाएं शुरू की जाएंगी। आइए एक नजर डालते हैं कि किन रूटों पर वंदे भारत स्लीपर ट्रेनें चलाई जा सकती हैं। इन रूटों पर दौड़ेगी वंदे भारत? समयम की रिपोर्ट के मुताबिक, दक्षिण मध्य रेलवे के अधिकारियों ने काचीगुड़ा और सिकंदराबाद स्टेशनों से वंदे भारत स्लीपर ट्रेनें चलाने का प्रस्ताव दिया है। अधिकारी चाहते हैं कि नई वंदे भारत स्लीपर एक्सप्रेस ट्रेनें काचीगुड़ा-विशाखापट्टनम, काचीगुड़ा-तिरुपति, सिकंदराबाद-पुणे जैसे व्यस्ततम मार्गों पर चलाई जाएं। नई वंदे भारत स्लीपर ट्रेन में 16 कोच होंगे और यह ट्रेनें रात में भी चलेंगी। मालूम हो कि इसमें एसी और नॉन एसी कोच होंगे। दक्षिण मध्य रेलवे के अधिकारियों ने खुलासा किया है कि टिकटों की कीमतें सभी के लिए सुलभ होंगी। कितनी होगी वंदे भारत स्लीपर की स्पीड नई वंदे भारत स्लीपर अधिकतम 160 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से चलने की संभावना है, और इसका बाहरी डिजाइन लगभग वंदे भारत एक्सप्रेस के समान बताया जा रहा है। बताया जा रहा है कि इस ट्रेन में की कुल 16 कोचों में यात्रियों के लिए 823 बर्थ होंगी। इस ट्रेन में यात्रियों को हवाई जहाज जैसी सुविधा प्रदान की जाती है। भोजन और पेयजल उपलब्ध कराने के लिए पैंट्री व्यवस्था होगी। बाहरी हिस्से में एक स्वचालित दरवाजा, एक गंध रहित शौचालय शामिल होगा। इस ट्रेन के कोच पूरी तरह से ध्वनि-रोधी होंगे और यात्रा के दौरान यात्रियों को अच्छी नींद के लिए आराम मुहैया कराएंगे। रेलवे जल्द शुरू करेगा वंदे भारत मेट्रो रेलवे विभाग द्वारा आसपास के शहरों को जोड़ने के लिए वंदे भारत मेट्रो सेवा शुरू किए जाने की प्लानिंग चल रही है। ये ट्रेनें कानपुर-लखनऊ, दिल्ली-मेरठ, मुंबई-लोनावाला, वाराणसी-प्रयागराज, पुरी-भुवनेश्वर और आगरा-मथुरा के बीच संचालित होने की संभावना है। बताया जा रहा है कि प्रत्येक कोच में 250 लोग आसानी से यात्रा कर सकते हैं। रेलवे द्वारा जल्द ही वंदे भारत मेट्रो का ट्रायल रन किया जाएगा।

हर साल दिल्ली में 12 हजार लोगों की मौत एयर पलूशन के चलते : रिपोर्ट

नई दिल्ली दिल्ली, मुंबई समेत देश के ज्यादातर बड़े शहरों में साल के काफी दिन ऐसे होते हैं, जब प्रदूषण चरम पर पहुंच जाता है। इसका असर अब लोगों की सेहत पर भी दिखने लगा है। लैंसेट की स्टडी के मुताबिक देश के 10 बड़े शहरों में होने वाली कुल मौतों में से 7 फीसदी एयर पलूशन के कारण होती हैं। देश के इन शहरों में विश्व स्वास्थ्य संगठन की ओर से तय लिमिट से ज्यादा पीएम 2.5 पार्टिकल्स का घनत्व हो जाता है। इसके चलते लोगों के लिए अच्छी हवा में सांस लेना भी मुश्किल पड़ गया है। इस बारे में लैंसेट ने अपने हेल्थ जर्नल मे रिपोर्ट प्रकाशित की है। इस रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद, कोलकाता, पुणे, शिमला, वाराणसी और चेन्नै जैसे शहरों में लोगों के फेफड़ों को खराब हवा नुकसान पहुंचा रही है। मानकों के अनुसार प्रति क्यूबिक मीटर पर PM 2.5 पार्टिकल्स का लेवल 15 माइक्रोग्राम को पार नहीं करना चाहिए। लेकिन इन शहरों में यह स्तर 99.8 फीसदी दिनों में पार कर जाता है। इसका अर्थ है कि साल में एकाध दिन ही यह लिमिट से नीचे रहता है। इसका सबसे ज्यादा असर दिल्ली में देखने को मिलता है। राजधानी में इस प्रदूषण की मुख्य वजह वाहनों और औद्योगिक संस्थानों से निकलने वाला जहरीला धुंआ है। रिपोर्ट का यह आंकड़ा डराने वाला है कि हर साल दिल्ली में करीब 12 हजार लोगों की मौत एयर पलूशन के चलते हुई किसी बीमारी से होती है। यह कुल मौतों के 11.5 फीसदी के बराबर है। शोधकर्ताओं का कहना है कि बड़े पैमाने पर PM 2.5 पार्टिकल्स की चपेट में आने से ऐसा हो रहा है। इससे लोगों को फेफड़े संबंधी गंभीर बीमारियां हो रही हैं। हैरानी की बात यह है कि मैदानी शहरों के अलावा हिल्स क्वीन कहे जाने वाले शिमला में भी हालात बिगड़ रहे हैं। शिमला की हवा भी अब पलूशन की चपेट में है और माहौल पहले जैसा नहीं रह गया है। इसकी वजह यहां बड़े पैमाने पर गाड़ियों का पहुंचना है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की हिदायत है कि माइक्रोग्राम की लिमिट प्रति क्यूबिक मीटर एक दिन में 15 के पार नहीं जानी चाहिए। वहीं भारतीय मानक 60 माइक्रोग्राम का है। फिर भी भारतीय मानकों के अनुसार ही देखें तो माइक्रोग्राम की लिमिट हर दिन अधिक होती है। रिपोर्ट कहती है कि वायु प्रदूषण के चलते दिल्ली में हर दिन होने वाली मौतों में 0.31 फीसदी का इजाफा हुआ है। इसके अलावा बेंगलुरु में यह आंकड़ा 3 पर्सेंट का है। गौरतलब है कि सर्दियों के दिनों में दिल्ली-एनसीआर में पलूशन अपने चरम पर होता है। इसके अलावा कई और मैदानी शहरों में पलूशन से सांस लेना दूभर हो जाता है। इसके अलावा विजिबिलिटी भी कम हो जाती है।  

सरेआम लहराई पिस्टल तो आर्म्स एक्ट के नियमों का उल्लंघन-HC

नई दिल्ली  दिल्ली हाई कोर्ट ने साफ किया कि हथियार भले लाइसेंसी हो, पर उसे किसी पब्लिक प्लेस पर ले जाना और सरेआम लहराना आर्म्स एक्ट के नियमों का उल्लंघन है। जस्टिस नवीन चावला ने यह टिप्पणी इंदर सिंह सोलंकी नाम के एक व्यक्ति की याचिका खारिज करते हुए की। याचिकाकर्ता ने उस आदेश को चुनौती देते हुए मौजूदा याचिका दायर की, जिसके जरिए उसके खिलाफ आईपीसी की धारा 336 (दूसरों के जीवन को खतरे में डालते हुए हरकत करना) और 506 (आपराधिक रूप से धमकाना) के अलावा आर्म्स एक्ट के सेक्शन 30 (पब्लिक प्लेस पर हथियार ले जाने पर प्रतिबंध) के अपराध का आरोप भी तय करने का आदेश दिया गया। क्या है पूरा मामला पटियाला हाउस कोर्ट के एक सेशन जज ने अभियोजन की पुनर्विचार याचिका पर यह आदेश पारित किया था, जो मामले में आरोप तय करने को लेकर ट्रायल कोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए दायर की गई थी। मैजिस्ट्रेट कोर्ट ने सोलंकी के खिलाफ बाकी धाराओं में अपराध के आरोप तो तय किए, पर उसे आर्म्स एक्ट के सेक्शन 30 के तहत अपराध के आरोप से बरी कर दिया था। क्या बोले जस्टिस नवीन चावला जस्टिस नवीन चावला ने अपने जजमेंट में कहा कि ट्रायल कोर्ट ने आरोपी को आर्म्स एक्ट के सेक्शन 30 के तहत अपराध के आरोप से बरी करके भारी गलती की थी, जिसे बाद में एएसजे ने ठीक कर दिया। हाई कोर्ट ने कहा कि आर्म्स एक्ट के सेक्शन 30 के तहत लाइसेंस या रूल के उल्लंघन में की गई हरकत के लिए सजा का प्रावधान है। कोर्ट ने साफ किया कि किसी भी आर्म्स रूल का उल्लंघन, जिसके लिए कहीं किसी सजा का जिक्र न हो, आर्म्स एक्ट के सेक्शन 30 के तहत अपने आप में एक दंडनीय अपराध है। क्योंकि आर्म्स एक्ट का रूल 32(3) पब्लिक प्लेस पर हथियार ले जाने से रोकता है। 26 फरवरी 2021 में दर्ज हुआ था केस मौजूदा केस 26 फरवरी 2021 में दर्ज किया गया था। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि वह जब अपने घर से बाहर आया, तो उसने देखा कि बाहर गैस पाइपलाइन बिछाने का काम चल रहा था और याचिकाकर्ता (सोलंकी) मजदूरों को काम करने से रोक रहा था। आपत्ति जताने पर वह शिकायतकर्ता से ही लड़ने लगा। आरोप के मुताबिक, उसने अपने बैग से लाइसेंसी रिवॉल्वर निकाली और शिकायतकर्ता पर तानते हुए उसे जान से मारने की धमकी दी। शिकायतकर्ता ने वहां पुलिस को बुला लिया, जिसने याचिकाकर्ता से उसकी रिवाल्वर लेकर उसे जब्त कर लिया। हाई कोर्ट ने कहा कि मौजूदा केस में, याचिकाकर्ता पर सार्वजनिक रूप से हथियार लहराने का आरोप है। उसके पास से कथित तौर पर छह कारतूस जब्त किए गए हैं। इसलिए, प्रथम दृष्टया उसके खिलाफ आईपीसी की धारा 336 के तहत अपराध का मामला बनता है।

क्लास 3 और 6 के सिलेबस में किया एनसीईआरटी ने बदलाव, जल्द बाजार में उपलब्ध होंगे आठ नई किताबें

नई दिल्ली एनसीईआरटी ने क्लास तीन और छह के सिलेबस में बदलाव किया है। सिलेबस में बदलाव को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री, धर्मेंद्र प्रधान ने शिक्षा मंत्रालय के सचिव, शिक्षा संस्थानों से जुड़े अधिकारियों के साथ बैठक की। इस समीक्षा बैठक में एनसीईआरटी के निदेशक और अध्यक्ष भी मौजूद थे। बता दें कि क्साल 6 की नई किताबों को अप्रैल से पढ़ाया जाना था, लेकिन अब तक नई सिलेबस की किताबें बाजार में उपलब्ध नहीं है। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने पहले घोषणा की थी कि क्लास 3 और 6 के लिए नई किताबें 2024-25 शैक्षणिक सत्र से पेश की जाएंगी। जल्द बाजार में उपलब्ध होंगे आठ नई किताबें शिक्षा मंत्रालय ने जानकारी दी कि किताबों में बदलाव का कार्य अंतिम फेज में है। क्लास 3 और 6 के लिए नौ किताबें पहले से ही बाजार में उपलब्ध हैं। बाकी आठ किताबें जल्द ही बाजार में मिलने लगेंगे। बता दें कि इस सप्ताह ही एनसीईआरटी ने शैक्षणिक सत्र के बीच में कक्षा 6 के लिए नई अंग्रेजी और हिंदी किताबें जारी कीं। सामाजिक विज्ञान, विज्ञान और गणित जैसे शेष विषयों की किताबें अभी तैयार नहीं है। सीबीएसई ने स्कूलों को दी ये सलाह सीबीएसई ने स्कूलों को एनसीएफ सिफारिशों का पालन करने और जहां भी संभव हो बहुभाषावाद, कला-एकीकृत शिक्षा, प्रयोगात्मक शिक्षा और शैक्षणिक योजनाओं जैसी पद्धतियों को शामिल करने की सलाह दी है। 

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