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न्यूयॉर्क में ‘भारत दिवस’ पर राम मंदिर की प्रतिकृति प्रदर्शित की जाएगी

न्यूयार्क राम मंदिर की झलक अमेरिका में भी देखने को मिलेगी।  न्यूयॉर्क में ‘भारत दिवस’ के मौके पर 18 अगस्त को होने वाली परेड में राम मंदिर की प्रतिकृति प्रदर्शित की जाएगी। इस आयोजन में न्यूयॉर्क और उसके आसपास से हजारों भारतीय अमेरिकी शामिल होंगे। विश्व हिन्दू परिषद अमेरिका (विहिप) के महासचिव अमिताभ मित्तल के अनुसाऱ मंदिर की प्रतिकृति 18 फुट लंबी, नौ फुट चौड़ी और आठ फुट ऊंची होगी। यह पहली बार होगा जब राम मंदिर की प्रतिकृति अमेरिका में प्रदर्शित की जाएगी। न्यूयॉर्क में हर वर्ष ‘भारत दिवस’ पर होने वाली यह परेड भारत के बाहर स्वतंत्रता दिवस के उपलक्ष्य पर सबसे बड़ा आयोजन है। यह परेड हर साल मिडटाउन न्यूयॉर्क में ‘ईस्ट 38 स्ट्रीट’ से ‘ईस्ट 27 स्ट्रीट’ तक निकाली जाती है जिसे 1,50,000 से अधिक लोग देखने आते हैं। ‘फेडरेशन ऑफ इंडियन एसोसिएशन’ (एफआईए) द्वारा आयोजित की जाने वाली इस परेड में विभिन्न भारतीय अमेरिकी समुदायों और उनकी संस्कृति की विविधता का प्रतिनिधित्व करने वाली ढेर सारी झांकियां न्यूयॉर्क की सड़कों पर देखने को मिलेंगी। विहिप-अमेरिका ने हाल में राम मंदिर रथ यात्रा का आयोजन किया था जिसने 60 दिन में 48 राज्यों के 851 मंदिरों को कवर किया था।  

उपचुनाव में जीत की तैयारी तेज, मुरादाबाद में मुस्लिम कैंडिडेट उतारेगी भाजपा

Rahul Gandhi told RSS's plan on caste census

मुरादाबाद. उत्तर प्रदेश में अब 10 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव की तैयारी तेज हो गई है। ये सीटें विधायकों के निधन या फिर उनके सांसद चुने जाने के चलते खाली हुई हैं। इनमें से ही एक सीट मुरादाबाद की कुंदरकी भी है, जो जिया उर रहमान के इस्तीफे से खाली हुई है। रहमान अब संभल लोकसभा सीट से सपा के सांसद हो गए हैं। इस बीच सूत्रों का कहना है कि भाजपा इस सीट से किसी मुस्लिम नेता को उतारने पर विचार कर रही है। भाजपा सूत्रों के हवाले से टाइम्स ऑफ इंडिया ने अपनी रिपोर्ट में यह जानकारी दी है। रिपोर्ट के अनुसार फिलहाल मुस्लिम नेता के नाम पर मंथन चल रहा है। राज्य नेतृत्व इस पर विचार करेगा। इसके बाद संभावित नामों का एक पैनल केंद्रीय नेतृत्व के समक्ष विचार के लिए भेजा जाएगा। ऐसा हुआ तो 2019 के बाद यह पहला मौका होगा, जब यूपी में भाजपा किसी मुस्लिम नेता को टिकट देगी। इससे पहले मुख्तार अब्बास नकवी को पार्टी ने टिकट दिया था। वहीं 2024 के आम चुनाव में भाजपा ने यूपी समेत उत्तर भारत के किसी भी राज्य में मुस्लिम कैंडिडेट नहीं दिया था। हालांकि केरल की मलप्पुरम लोकसभा सीट से कालिकट यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर अब्दुल सलाम को उतारा गया था, जिन्हें हार मिली है। वहीं उत्तर प्रदेश की बात करें तो भाजपा से 1998 में मुख्तार अब्बास नकवी रामपुर लोकसभा सीट से जीते थे। हालांकि अगले साल फिर जब 1999 में चुनाव हुए तो उन्हें कांग्रेस की नूर बानो के आगे हार का सामना करना पड़ा। यह उपचुनाव इसलिए भी अहम है क्योंकि हाल के लोकसभा चुनाव में यूपी में भाजपा को करारा झटका लगा है। ऐसी स्थिति में यह देखना अहम होगा कि विधानसभा उपचुनाव में जनता किसे समर्थन देती है। कुंदरकी के अलावा अयोध्या की मिल्कीपुर सीट पर भी उपचुनाव है। इसकी वजह यह है कि विधायक अवधेश प्रसाद अब फैजाबाद सीट से सांसद बन चुके हैं। इसके अलावा गाजियाबाद सदर की सीट पर भी उपचुनाव होना है।

सर्वे और दिशा-निर्देश कमेटी बनाने की मांग, हाथरस सत्संग में भगदड़ का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा

नई दिल्ली/हाथरस। उत्तर प्रदेश के हाथरस में सत्संग के बाद मची भगदड़ में कम से कम 121 लोगों की मौत का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा है। देश की सबसे बड़ी अदालत में एक जनहित याचिका दायर की गई है। अधिवक्ता विशाल तिवारी द्वारा दायर जनहित याचिका में जांच शुरू करने और भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचने के लिए सर्वे कराने और दिशा-निर्देश तैयार करने के लिए समिति बनाने की मांग की गई है। उन्होंने मांग की है कि सुप्रीम कोर्ट के रिटायर जज की अध्यक्षता में इस विशेषज्ञ समिति की नियुक्ति की जाए। आपको बता दें कि हाथरस जिले के सिकंदराराऊ इलाके में सत्संग के दौरान हुई भगदड़ के मामले में पुलिस ने ‘मुख्य सेवादार’ और अन्य के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बुधवार को यह जानकारी दी। मंगलवार को हुई भगदड़ की इस घटना में 121 लोगों की मौत हो गई थी। अधिकारी ने बताया कि पोरा पुलिस चौकी के प्रभारी उप निरीक्षक बृजेश पांडे की तहरीर पर मंगलवार देर रात सिकंदराराऊ थाने में मुख्य सेवादार देवप्रकाश मधुकर और अन्य सेवादारों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। उन्होंने बताया कि भारतीय न्याय संहिता की धारा 105 (गैर इरादतन हत्या), 110 (गैर इरादतन हत्या करने का प्रयास), 126 (2) (गलत तरीके से रोकना), 223 (लोक सेवक द्वारा जारी आदेश की अवज्ञा), 238 (साक्ष्यों को मिटाना) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। तहरीर में कहा गया, ‘‘आयोजकों ने पिछले कार्यक्रमों में पहुंची लाखों लोगों की भीड़ की स्थिति को छिपाते हुए इस बार 80 हजार अनुयायियों के इकट्ठा होने की बात प्रशासन को बताई थी। इसके अनुसार ही सुरक्षा की व्यवस्था की थी लेकिन सत्संग में ढाई लाख से ज्यादा लोग पहुंचे थे जिससे अव्यवस्था पैदा हो गई।’’ आरोप लगाया गया, ‘‘सत्संग के मुख्य प्रवचनकर्ता सूरजपाल उर्फ ‘भोले बाबा’ के प्रवचन के बाद वह अपनी गाड़ी में सवार होकर आयोजन स्थल से निकल रहे थे तभी अनुयायियों ने उनकी गाड़ी के मार्ग से धूल समेटना शुरू कर दिया। इस दौरान लाखों की भीड़ के दबाव के कारण कुछ लोग कुचल गए।’’ इसमें कहा गया, ‘‘भीड़ को आयोजन समिति और सेवादारों ने जबरन रोक दिया जिसकी वजह से भीड़ का दबाव बढ़ता गया और महिलाएं, बच्चे तथा पुरुष उसमें दबते-कुचलते चले गए। आयोजकों और सेवादारों के कारण बड़ी संख्या में निर्दोष लोग मारे गए और गंभीर रूप से घायल हुए।’’ शिकायत में आरोप लगाया गया, ‘‘मौके पर मौजूद पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों ने घायल तथा बेहोश लोगों को अस्पताल पहुंचाया लेकिन आयोजनकर्ताओं तथा सेवादारों ने कोई सहयोग नहीं किया। कार्यक्रम स्थल पर यातायात नियंत्रण संबंधी अनुमति की शर्तों का पालन नहीं किया। आयोजनकर्ताओं ने मौके पर छूटे लोगों के सामान, कपड़े और जूते-चप्पल को उठाकर पास के ही खेत में फेंक कर साक्ष्य मिटाये।’’ हाथरस जिले के फुलरई गांव में ‘भोले बाबा’ द्वारा आयोजित सत्संग में मंगलवार को भगदड़ मच गई थी जिसमें 121 लोगों की मौत हो गई।

मसीहा बनके आए सेना के जवान अमरनाथ यात्रा से लौट रही बस के अचानक ब्रेक हुआ फेल, सबकी जान हलक में अटकी

Farmers movement, agricultural law; Is Kangana Ranaut creating problems for BJP?

होशियारपुर सुरक्षा बलों की सूझबूझ ने अमरनाथ यात्रा से लौट रही बस के साथ बड़े हादसे को टाल दिया। इस बस में करीब 40 लोग सवार थे। यह बस अमरनाथ से होशियारपुर के रास्ते पर थी। इसी दौरान नेशनल हाईवे 44 पर बस ने रामबन के पास कंट्रोल खो दिया। इसकी वजह थी कि बस के ब्रेक फेल हो गए थे और ड्राइवर इसे रोक नहीं पा रहा था। हालात ऐसे बन गए थे कि बस खाई में जाकर गिरने वाली थी। इसी डर से यात्री चलती बस से ही छलांग लगाने लगे थे ताकि जान बचाई जा सके। इसी बीच हाईवे पर तैनात सुरक्षाबलों की नजर पड़ी तो वे हादसे को टालने के लिए सक्रिय हो गए। इसका वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। वीडियो में दिखता है कि लोग चिल्ला रहे हैं कि बस के ब्रेक फेल हो गए हैं। इसके साथ ही हाईवे पर पेट्रोलिंग में तैनात सैनिक और जम्मू-कश्मीर पुलिस के जवान सक्रिय हो जाते हैं। आगे की टीम को अलर्ट किया जाता है और पीछे से भी कुछ सैनिक मदद के लिए भागते हैं। बस के रास्ते में पत्थर लगा दिए जाते हैं ताकि वह रुक जाए और सड़क से नीचे फिसलकर खाई में न गिर जाए। सौभाग्य रहा कि सैनिकों की मेहनत रंग लाई और बस को हादसे से बचा लिया गया। बस में सभी सवार यात्री पंजाब के होशियारपुर जिले के रहने वाले थे। सोशल मीडिया पर जो वीडियो दिख रहा है, उसमें कई यात्री खिड़की और दरवाजे से कूदते दिख रहे हैं। इस हादसे में 10 लोग जख्मी हुए हैं, जो चलती बस से कूदे थे। इसके अलावा अन्य सभी 30 यात्री पूरी तरह से सुरक्षित हैं। यात्रियों ने बताया कि बनिहाल के पास नचलाना में बस के ब्रेक फेल हो गए और ड्राइवर उसे रोक नहीं पाता है। इस घटना में घायल लोगों में 6 पुरुष, 3 महिला और एक बच्चा शामिल हैं। सैनिकों और पुलिसकर्मियों ने इस घटना को देखते हुए तुरंत ही ऐक्शन लिया और बस के रास्ते में पत्थर लगा दिए।  

अमरनाथ यात्रा में चार दिन में 74 हजार से ज्यादा श्रद्धालुओं ने किये बाबा बर्फानी के दर्शन

जम्मू  कश्मीर में अमरनाथ मंदिर में पिछले चार दिनों में 74 हजार से ज्यादा श्रद्धालुओं ने बाबा बर्फानी के दर्शन किए। वहीं 5 हजार 725 यात्रियों का एक और जत्था बुधवार को कश्मीर के लिए रवाना हुआ। अधिकारियों ने बताया,  सुबह भगवती नगर यात्री निवास से 5,725 यात्रियों का एक और जत्था घाटी के लिए दो सुरक्षा काफिलों में रवाना हुआ। इनमें से 2,514 यात्री 118 वाहनों के सुरक्षा काफिले में उत्तरी कश्मीर के बालटाल बेस कैंप के लिए रवाना हुए, जबकि 3,211 यात्री 120 वाहनों में सुरक्षा बलों की सुरक्षा में दक्षिण कश्मीर के नुनवान (पहलगाम) बेस कैंप के लिए रवाना हुए। मौसम विभाग ने दोनों यात्रा मार्गों पर आमतौर पर बादल छाए रहने और सुबह के समय गरज के साथ हल्की बारिश की संभावना जताई है। श्रद्धालु या तो 48 किलोमीटर लंबे पारंपरिक पहलगाम गुफा मंदिर मार्ग से यात्रा करते हैं या फिर 14 किलोमीटर लंबे बालटाल मार्ग से यात्रा करते हैं। पहलगाम मार्ग का उपयोग करने वालों को गुफा मंदिर तक पहुंचने में चार दिन लगते हैं, जबकि बालटाल मार्ग का उपयोग करने वाले लोग गुफा मंदिर के अंदर ‘दर्शन’ करने के बाद उसी दिन आधार शिविर लौट आते हैं। इस साल की यात्रा के दौरान सात हजार से ज्यादा ‘सेवादार’ (स्वयंसेवक) यात्रियों की सेवा कर रहे हैं। यात्रियों की भीड़ को नियंत्रित करने के लिए रेलवे ने तीन जुलाई से अतिरिक्त ट्रेनें जोड़ने का फैसला किया है। दोनों मार्गों पर यात्रियों के लिए हेलीकॉप्टर सेवाएं भी उपलब्ध हैं।

इजरायली हवाई हमले में मारे गए 9 फिलिस्तीनी, खान यूनिस शहर को खाली करने का आर्डर

खान यूनिस गाजा के खान यूनिस शहर से लोगों का विस्थापन फिर से शुरू हो गया है. इजरायली सेना की तरफ से मैसेज मिलने के बाद लोगों को अपनी जान बचाने के लिए पलायन को मजबूर होना पड़ रहा है. अमेरिका ने भी इजरायली कार्रवाई का समर्थन किया है. बुजुर्ग, बच्चे, महिलाएं और नौजवान सभी अपनी जान बचाने के लिए अपने हाथों में सामान लिए निकल पड़े हैं. कोई पैदल, कोई साइकिल से तो कोई दूसरे वाहन से इज़रायली हमलों से बचने के लिए खान यूनिस को छोड़ने पर मजबूर हो गया है. इनमें से इमान अबू दका नाम की महिला भी एक है. उसकी आंखों में आंसू हैं. वो यूरोपियन अस्पताल में 7 महीने रहने के बाद अपने घर लौटी थीं, लेकिन आज वो एक बार फिर से पैदल ही निकलने को मजबूर हो गई हैं. दरअसल इन्हें इजरायली फोन नंबरों से गाजा के पूर्वी खान यूनिस के लोगों को घरों को छोड़ने का ऑडियो संदेश मिला है. इसके बाद लोग यहां से जाने को मजबूर हो गए हैं. वहीं आईडीएफ का आरोप है कि इस्लामिक जिहाद ने सोमवार को करीब 20 रॉकेटों की बौछार की, लेकिन इसमें कोई हताहत नहीं हुआ. इसके बाद इजरायली सेना उनके ठिकानों पर हमले कर रही है. पूरी रात चले इस हमले में करीब 9 लोगों के मारे जाने की बात सामने आ रही है. इसके साथ ही बड़ी संख्या में लोग घायल भी हुए हैं. हमास और इजरायल के बीच संघर्ष को पूरे 9 महीने हो गए हैं. इस जंग में अब तक करीब 38 हज़ार फिलिस्तीनी मारे जा चुके हैं. पिछले साल 7 अक्टूबर को हमास ने इजरायल में हमला कर 1200 लोगों को मार डाला था, जबकि 250 लोगो को बंधक बना लिया था. इनमें कुछ को सशर्त रिहा किया गया. कुछ मारे गए और करीब 150 बंधक आज भी हमास की कैद में हैं. इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच जंग के हालात इधर, इजरायल और लेबनान के हिजबुल्लाह के बीच टकराव लगातार बढ़ता ही जा रहा है. ये टकराव कभी भी भीषण जंग में तब्दील हो सकता है. ऐसे में इजरायली रक्षा मंत्री योव गैलेंट ने लेबनान से लगती सीमा का दौरा किया और सैनिकों से मुलाकात कर ताजा हालात का जायजा लिया. बॉर्डर पर पहुंचे इजरायली रक्षा मंत्री ने कहा था कि इजरायल शांति चाहता है, लेकिन हिजबुल्लाह यदि हमले जारी रखता है तो इजरायल जंग से पीछे नहीं हटेगा. हालांकि उन्होंने ये भी कहा था कि उत्तर में सैन्य टकराव का एक राजनीतिक विकल्प भी तैयार किया जा रहा है. रक्षा मंत्री योव गैलेंट ने कहा था, “हमारे विकल्प महत्वपूर्ण हैं. हम दोनों पर काम कर रहे हैं. पहला कि सशक्त सैन्य बल को तैयार करना. दूसरा राजनीतिक विकल्प तैयार किया जा रहा है. यह हमेशा बेहतर होता है. हम युद्ध नहीं चाहते, लेकिन मजबूर किया गया तो किसी को छोड़ेंगे नहीं.” लेबनान बॉर्डर पर भारी बमबारी का दौर जारी पिछले साल 7 अक्टबूर को इजरायल पर हुए हमास के हमले के बाद से ही लेबनान बॉर्डर पर भारी बमबारी का दौर जारी है. इजरायल की सेना जहां लेबनान के अंदर घुस कर हिजबुल्लाह के ठिकानों पर बमबारी कर रही है. वहीं जवाबी कार्रवाई के तहत हिजबुल्लाह भी रॉकेट की बारिश कर रहा है. हिजबुल्लाह के हमले की वजह से इजरायल के कई शहर और गांव पूरी तरह से खाली हो चुके हैं. इसके साथ ही हिजबुल्लाह के हमले में इजरायल के एक दर्जन से ज्यादा सैनिक अबतक हताहत हुए हैं. वहीं इजरायली हमले में लेबनान में 200 से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं.  

साल 2030 तक लगने वाले 10 सूर्य ग्रहण की सूचि देखें, क्या भारत में भी दिखाई देगा?

Farmers standing in line for fertilizer in Agriculture Minister's home district, empty handed even after staying awake all night

वॉशिंगटन सूर्य ग्रहण सबसे अनोखी खगोलीय घटनाओं में से एक है। दुनियाभर के लोग इस अद्भुत नजारे को देखने का इंतजार करते हैं। सूर्य ग्रहण के दौरान पृथ्वी और सूर्य के बीच से चंद्रमा गुजरता है। इससे सूर्य से धरती तक आने वाला प्रकाश ढक जाता है। इससे सूर्य की रोशनी धरती पर नहीं आ पाती। वहीं अंतरिक्ष से देखें तो एक विशाल परछाई पृथ्वी पर दिखाई देती है। साल 2024 में दो सूर्य ग्रहण हैं। इनमें से एक सूर्य ग्रहण 8 अप्रैल को लगा था। यह एक पूर्ण सूर्य ग्रहण था जो मेक्सिको, अमेरिका, और कनाडा में देखा गया था। अब अगले कुछ महीनों में दूसरा सूर्य ग्रहण भी दिखाई देगा, जो एक वलयाकार सूर्य ग्रहण होगा। वलयाकार सूर्य ग्रहण वह होता है, जिसमें चंद्रमा सूर्य को पूरी तरह नहीं ढक पाता। सूर्य का केंद्र ढका होता है, वहीं किनारे साफ दिखाई देते हैं। इससे आग की एक रिंग आसमान में दिखती है। इसे रिंग ऑफ फायर भी कहा जाता है। चंद्रमा की धरती से दूरी ही इसके सूर्य ग्रहण के प्रकार को तय करती है। इससे तय होता है कि यह एक पूर्ण सूर्य ग्रहण होगा या फिर वलयाकार सूर्य ग्रहण।   क्या भारत में दिखेगा सूर्य ग्रहण साल 2024 का दूसरा और आखिरी सूर्य ग्रहण हमें 2 अक्टूबर को दिखाई देगा। लेकिन अगर आप इसे भारत में देखने का इंतजार कर रहे हैं तो आपके लिए एक बुरी खबर है। यह सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। सूर्य ग्रहण दक्षिणी अमेरिका और प्रशांत महासागर में दिखाई देगा। भारत में देखा गया आखिरी सूर्य ग्रहण 26 दिसंबर 2019 को लगा था। वहीं अगले सूर्य ग्रहण को देखने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ेगा। भारत में अगला सूर्य ग्रहण 21 मई 2031 को दिखेगा। दक्षिण भारत के कई हिस्सों में यह दिखाई देगा।   अगले 10 सूर्य ग्रहण सूर्य ग्रहण की तारीख सूर्य ग्रहण का प्रकार 2 अक्टूबर 2024 वलयाकार सूर्य ग्रहण 29 मार्च 2025 आंशिक सूर्य ग्रहण 17 फरवरी 2026 वलयाकार सूर्य ग्रहण 12 अगस्त 2026 पूर्ण सूर्यग्रहण 6 फरवरी 2027 वलयाकार सूर्य ग्रहण 2 अगस्त 2027 पूर्ण सूर्यग्रहण 26 अगस्त 2028 वलयाकार सूर्य ग्रहण 22 जुलाई 2028 पूर्ण सूर्यग्रहण 1 जून 2030 वलयाकार सूर्य ग्रहण 25 नवंबर 2030 पूर्ण सूर्यग्रहण

तितलियों ने भरी हजारों किलोमीटर की लंबी उड़ान, इनके आगे हवाई जहाज भी फेल

न्यूयॉर्क  रंग-बिरंगी तितलियों को उड़ते देखकर हर किसी का मन उमंग से भर ही जाता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि ये तितलियां एक शानदार प्रवासी होती हैं, जो हजारों किलोमीटर दूर तक यात्रा करती हैं। वैज्ञानिकों को अब इस बात के प्रमाण मिले हैं कि तितलियों के एक समूह ने बिना रुके अटलांटिक महासागर में 4200 किलोमीटर (2600 मील) से अधिक की उड़ान भरी। इस खोज के साथ ही एक दशक से अधिक समय से चले आ रहे रहस्य से पर्दा उठ गया है। नेचर कम्युनिकेशंस जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन में शोधकर्ताओं ने पेंटेड लेडी तितलियों की इस लंबी यात्रा के बारे में जानकारी दी है। एंटोमोलॉजिस्ट और शोध के प्रमुख लेखक डॉ. जेरार्ड टैलेवेरा ने दक्षिण अमेरिका के फ्रेंच गुयाना के एक समुद्र तट पर लगभग 10 पेंटेड लेडी तितलियां देखीं थीं। टैलेवेरा के लिए ये हैरान करने वाला था, क्यों ये तितलियां आमतौर पर दक्षिण अमेरिका में नहीं पाई जाती हैं। बर्सिलोना के बॉटनिकल इंस्टीट्यूट में स्पेनिश नेशनल रिसर्च काउंसिल में वरिष्ठ शोधकर्ता टैलवेरा ने कहा, ‘तितलियों को देखकर ऐसा लग रहा था कि वे थकी हुई हैं। वे उड़ भी नहीं पा रही थीं। वे उड़ने के बजाय उछलते थे। मेरे दिमाग में यही आया कि ये लंबी दूरी की प्रवासी हैं, लेकिन तितलियों के लिए एक पूरा महासागर पार करने के बारे में कभी सुना नहीं गया था।’ इसके बाद टालवेरा और उनके सहयोगियों ने जब अध्ययन किया तो पाया कि इन तितलियों ने वह कर दिखाया जो पहले अंसभव माना जाता था। तितलियां कैसे भरती हैं उड़ान 2016 में टैलवेरा द्वारा सह-लिखित एक अध्ययन में पाया गया था कि पेंटेड लेडीज तितलियां यूरोप से लगभग 4000 किलोमीटर की दूरी तय करके उप-सहारा अफ्रीका में निवास करती हैं। इस दौरान उन्हें भूमध्य सागर और सहारा रेगिस्तान को पार करना पड़ता है, लेकिन फिर भी पूरे सफर में तितलियां ज्यादातर जमीन पर रहती हैं। जहां वे भोजन के लिए रुक सकती हैं। नया अध्ययन बताता है कि पेंटेड लेडी को अटलांटिक पार करने में पांच से आठ दिन लगे। शोधकर्ताओं ने निष्कर्ष निकाला कि तितलियां बिना रुके अधिकतक 780 किलोमीटर या उससे अधिक की उड़ान भर सकती हैं लेकिन अनुकूल हवा की स्थिति ने उन्हें लंबी यात्रा पूरी करने की अनुमति दी। उड़ान को कैसे किया गया ट्रैक शोधकर्ताओं का मानना है कि तितलियां संभवतः भूमध्य रेखा के पास पूर्व से पश्चिम की ओर बहने वाली हवाओं का सहारा लेती हैं और इस तरह वे दक्षिण अमेरिका की जमीन पर पहुंच जाती हैं। ये जानने के लिए कि क्या तितलियां वास्तव में समुद्र के पार की यात्रा करती हैं, शोधकर्ताओं ने उनके डीएनए का विश्लेषण किया। इसमें पाया गया कि यह यूरोपी-अफ्रीकी डीएनए से मेल खाता है। इसके अलावा टीम ने आइसोटोप ट्रेसिंग नामक तकनीक का इस्तेमाल किया। इससे तितलियों के पंखों की संरचना देखकर पता लगाया जाता है कि उन्होंने किस तरह के पौधे खाए थे। इस पद्धति से वैज्ञानिकों ने निष्कर्ष निकाला कि तितलियों का जन्मस्थान पश्चिमी यूरोप, उत्तरी अमेरिका या पश्चिमी अफ्रीका में से कोई एक है।

आम आदमी अंतरिक्ष में जाएगा? सिर्फ 209 रुपये में अंतरिक्ष की सैर कर सकते हैं भारतीय

नई दिल्‍ली अमेरिका की स्‍पेस एक्‍सप्‍लोरेशन एंड रिसर्च एजेंसी (SERA) ने भारत को अपने स्पेस मिशन में शामिल किया है। इस मिशन में भारत के लोग भी अंतरिक्ष की सैर कर सकेंगे। यह मिशन दिग्‍गज उद्योगपति जेफ बेजोस की Blue Origin कंपनी के New Shepard रॉकेट से पूरा होगा। SERA दुनियाभर के लोगों को अंतरिक्ष में भेजने के लिए काम कर रही है। SERA और Blue Origin मिलकर उन देशों को मौका दे रहे हैं जिनके पास अंतरिक्ष में जाने के लिए ज्‍यादा संसाधन नहीं हैं। इस मिशन के जरिये भारत अंतरिक्ष में अपनी जगह और मजबूत कर सकेगा। इस मिशन के लिए Blue Origin के New Shepard रॉकेट का इस्तेमाल होगा, जो दोबारा इस्तेमाल किया जा सकता है। यह रॉकेट लोगों को अंतरिक्ष की सीमा पार कराएगा, जहां से धरती का नजारा देखने लायक होगा। भारत को शाम‍िल करने से SERA उत्‍साह‍ित SERA के संस्थापक जोशुआ स्‍कुर्ला और सैम हचिसन ने इस मिशन में भारत को शामिल करने पर काफी उत्साह जताया है। उनका मानना है कि भारत की अंतरिक्ष में दिलचस्पी और उसका अनुभव इस मिशन को सफल बनाने में काफी मददगार साबित होगा। स्‍कुर्ला ने बताया, ‘हमें भारत के साथ काम करने में खुशी है क्योंकि भारत के पास अंतरिक्ष के क्षेत्र में काफी अनुभव है। भारत दूसरे देशों के लिए एक मिसाल बन सकता है। अपनी ताकत दिखा सकता है। इसलिए हमारी दिलचस्पी बनी रही।’ इस मिशन में जाने के लिए कोई भी भारतीय आवेदन कर सकता है। आवेदन करने के लिए बस 2.5 डॉलर यानी लगभग 209 रुपये देने होंगे। इसके बाद लोगों की वोटिंग के जरिये छह लोगों को चुना जाएगा जो इस मिशन का हिस्सा बनेंगे। वोटिंग तीन चरणों में होगी। हर चरण में कुछ लोग बाहर होते जाएंगे। आखिर में छह लोग चुने जाएंगे। पांच सीटों के लिए देश और क्षेत्र के हिसाब से वोटिंग होगी। जबकि छठी सीट के लिए दुनियाभर के लोग वोट कर सकेंगे। 150 से ज्‍यादा देशों के लोगों को अंतरिक्ष तक पहुंचाना मकसद SERA का मकसद दुनिया के 150 से ज्‍यादा देशों के लोगों को अंतरिक्ष तक पहुंचाना है, खासकर उन लोगों को जिनके पास अंतरिक्ष में जाने के ज्‍यादा मौके नहीं हैं। स्‍कुर्ला का कहना है, ‘हमारा मिशन है कि हम अंतरिक्ष को सभी के लिए आसान बनाएं। हम चाहते हैं कि दुनिया का हर व्यक्ति अंतरिक्ष की खोज में अपनी भूमिका निभा सके।’ इस मिशन में जाने के लिए लोगों को Blue Origin के कुछ शारीरिक मानकों पर खरा उतरना होगा। जो लोग चुने जाएंगे उन्हें Blue Origin के लॉन्च साइट पर तीन दिन की ट्रेनिंग दी जाएगी। हचिसन का कहना है कि लोगों को अपने हीरो चुनने का मौका देकर हम यह सुनिश्चित करते हैं कि यह मिशन लोगों के लिए है। यह तरीका लोगों में अंतरिक्ष के बारे में उत्सुकता जगाएगा। दुनियाभर के देशों को साथ लाएगा। New Shepard की उड़ान के लिए ज्‍यादा कड़ी शारीरिक जरूरतें नहीं हैं जिससे ज्‍यादा से ज्‍यादा लोग इसमें हिस्सा ले सकेंगे। फिल जॉयस ने बताया कि इस मिशन का मकसद सभी को साथ लेकर चलना है। यह मिशन भारत के लिए एक बड़ा मौका है। इससे न सिर्फ भारत के लोग अंतरिक्ष में जा सकेंगे बल्कि भारत दुनिया को यह भी दिखा सकेगा कि वह अंतरिक्ष के क्षेत्र में कितना आगे निकल चुका है।

पाक ने JF 17 fighter jet को न्‍यूक्लियर मिसाइल से लैस कर दिया, भारत के लिए बना सर दर्द

M/s Mentana Infracell, which is embroiled in allegations, was given a contract worth more than Rs 5000 crore

इस्‍लामाबाद  भारत के फ्रांसीसी राफेल फाइटर जेट शामिल करने के बाद पाकिस्‍तान घबराया हुआ है। पाकिस्‍तान की वायुसेना अब अपने जेएफ-17 थंडर फाइटर जेट को अपग्रेड करने में जुट गई है ताकि परमाणु मिशन के लिए उसे तैयार किया जा सके। पाकिस्‍तान लगातार अपने परमाणु हथियार कार्यक्रम को लेकर अस्‍पष्‍ट रहा है। जेएफ-17 फाइटर जेट को चीन और पाकिस्‍तान ने मिलकर बनाया है और लंबे समय से ऐसी अटकलें थीं कि इसे परमाणु हमला करने के लिए बनाया गया है। हाल ही में आई एक तस्‍वीर से इस बात की पुष्टि हुई है कि जेएफ 17 फाइटर जेट को टैक्टिकल न्‍यूक्लियर मिसाइल से लैस कर दिया गया है। इस मिसाइल का नाम राड है। अमेरिकी परमाणु वैज्ञानिकों ने पाकिस्‍तानी फाइटर जेट की क्षमता को लेकर यह खुलासा किया है। पाकिस्‍तानी जेएफ-17 विमान को लेकर यह खुलासा ऐसे समय पर हुआ है जब हाल ही में सिप्री की रिर्पोर्ट में कहा गया था कि पहली बार परमाणु बम के मामले में पाकिस्‍तान से आगे निकल गया है। भारत के पास इस समय 172 परमाणु बम हैं, वहीं पाकिस्‍तान के पास 170 ही हैं। माना जा रहा है कि भारत ने अपने भाभा एटामिक शोध केंद्र में नए परमाणु बम को प्‍लूटोनियम की मदद से बनाया है। पाकिस्‍तान के परमाणु बम यूरेनियम की डिजाइन पर आधारित है। अमेरिकी वैज्ञानिकों की संस्‍था फेडरेशन ऑफ अमेरिकन साइंटिस्‍ट ने राड 1 मिसाइल की साल 2023 की तस्‍वीरों का विश्‍लेषण किया है। रॉड पाकिस्‍तान की एकमात्र हवा से लॉन्‍च की जाने वाली परमाणु मिसाइल है और इसे जेएफ 17 फाइटर जेट के साथ लैस कर दिया गया है। मिराज की जगह ले रहे जेएफ 17 फाइटर जेट अब तक मिराज III/Vs हवा में प्रतिरोधक क्षमता की भूमिका निभाते थे। राड क्रूज मिसाइल का साल 2007 में पहली बार परीक्षण किया गया था। इसे परंपरागत या परमाणु हमले दोनों के लिए इस्‍तेमाल किया जा सकता है। पाकिस्‍तान ने मिराज विमानों को सेवा से हटाने का फैसला किया है। मिराज की जगह पर जेएफ 17 फाइटर जेट को हवा के रास्‍ते परमाणु प्रतिरोधक क्षमता के लिए इस्‍तेमाल किया जाएगा। पाकिस्‍तान के साल 2023 के पाकिस्‍तान डे परेड के दौरान जेएफ-17 की जो तस्‍वीर आई थी, उससे इसके परमाणु क्षमता से लैस होने का खुलासा हुआ था। अमेरिकी वैज्ञानिकों ने इसकी असली तस्‍वीर खरीदी और यह पाया कि जेएफ 17 को राड मिसाइल से लैस किया गया है जो परमाणु मिसाइल है। इस विश्‍लेषण से यह भी खुलासा हुआ कि राड मिसाइल में परमाणु क्षमता लाने के लिए उसके डिजाइन में बदलाव किया गया है। अमेरिकी वैज्ञानिकों ने कहा, ‘इन विश्‍लेषणों से यह पता चलता है कि पाकिस्‍तान ने संभवत: जेएफ 17 को परमाणु क्षमता से लैस करने की दिशा में महत्‍वपूर्ण प्रगति कर ली है। यह विमान मिराज से परमाणु हमले की भूमिका लेने जा रहा है। पाकिस्‍तान ने राड मिसाइल को फिर से डिजाइन किया है लेकिन उसके उद्देश्‍यों या क्षमता को लेकर कोई पुष्टि नहीं हुई है। अभी यह भी स्‍पष्‍ट नहीं है कि राड मिसाइल को तैनात किया गया है या नहीं।’ म्‍यांमार में फेल साबित हुए थे जेएफ-17 जेट जेएफ- 17 थंडर न केवल पाकिस्‍तानी वायुसेना का मुख्‍य फाइटर जेट है बल्कि जिन्‍ना का देश इसे निर्यात करने में जुटा है। जेएफ 17 फाइटर जेट को संयुक्‍त रूप से पाकिस्‍तान एयरोनॉटिकल कॉम्‍पलेक्‍स और चीन के चेंगदू एयरक्राफ्ट इंडस्‍ट्री ने बनाया है। इस विमान ने साल 2003 में पहली बार उड़ान भरी थी। शुरू में जेएफ 17 के एयरफ्रेम को चीन में ही बनाया गया था। अब इस विमान का करीब 58 फीसदी हिस्‍सा पाकिस्‍तान में ही बनाया जा रहा है। जेएफ-17 एक सिंगल इंजन वाला मल्‍टी रोल विमान है। म्‍यांमार ने इस विमान को खरीदा था लेकिन वह उड़ान ही नहीं भर पा रहा है। यही वजह है कि म्‍यांमार ने चीन और पाकिस्‍तान दोनों को जमकर सुनाया था।

केन्या में विवादास्पद कर वृद्धि विधेयक के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों में करीब 39 लोग मारे गए

A free camp for distribution of assistive devices was organized for the disabled.

नैरोबी  पूर्वी अफ्रीकी देश केन्या में विवादास्पद कर वृद्धि विधेयक के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों में करीब 39 लोग मारे गए हैं और 361 अन्य घायल हुए हैं। केन्या नेशनल कमीशन ऑन ह्यूमन राइट्स (केएनसीएचआर) ने मृतकों के बारे में जानकारी दी। इससे पहले केएनसीएचआर ने बताया था कि केन्या में चल रहे हिंसक विरोध प्रदर्शनों के दौरान करीब 30 लोग मारे गये थे। मानवाधिकार समूह ने केन्याई सुरक्षा बलों पर प्रदर्शनकारियों की भीड़ पर सीधे गोलियां चलाने का भी आरोप लगाया है। आयोग ने सोशल मीडिया ‘एक्स’ पर लिखा, “हमारे रिकॉर्ड से पता चलता है कि देश भर में विरोध प्रदर्शनों में 39 लोग मारे गए हैं और 361 अन्य घायल हुए हैं।” इसके अलावा, विरोध प्रदर्शनों के दौरान देश में 32 लोगों के लापता होने का मामला सामने आया है और 627 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। गौरतलब है कि जून के मध्य से केन्या में विरोध प्रदर्शन शुरू हुआ है। जब सरकार ने ब्रेड, चीनी परिवहन, मोबाइल और वित्तीय सेवाओं तथा विदेशी मुद्रा लेनदेन पर 16 प्रतिशत वैट लगाने के साथ-साथ कारों और वनस्पति तेल पर 2.5 प्रतिशत उत्पाद शुल्क लगाने वाला विधेयक पेश किया था। विरोध प्रदर्शनों के भड़कने पर हालांकि राष्ट्रपति विलियम रुटो ने विधेयक पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया और इसे पुनर्विचार के लिए संसद में वापस भेज दिया। केन्या में सरकार द्वारा नए टैक्स लगाने से जनता काफी गुस्से में है और बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन आयोजित किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में मंगलवार को भीड़ संसद में प्रवेश कर गई और वहां आगजनी की। इसके बाद सांसदों को संसद भवन से सुरक्षित निकाला गया। प्रदर्शनकारी नए टैक्स का विरोध कर रहे हैं जिससे डायपर जैसी वस्तुओं की कीमत बढ़ जाएगी।  

एस जयशंकर अस्ताना में एससीओ शिखर सम्मेलन में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का करेंगे नेतृत्व

Going to temple-mosque to worship or worship is not spirituality: Rajnath Singh

नई दिल्ली विदेश मंत्री एस जयशंकर चार जुलाई को कजाकिस्तान के अस्ताना में आयोजित होने वाले शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे।एससीओ परिषद के राष्ट्राध्यक्षों (एससीओ शिखर सम्मेलन) की 24वीं बैठक गुरुवार को कजाकिस्तान की अध्यक्षता में अस्ताना में हो रही है। शिखर सम्मेलन में, नेताओं को पिछले दो दशकों में संगठन की गतिविधियों की समीक्षा करने और बहुपक्षीय सहयोग की स्थिति और संभावनाओं पर चर्चा करने की उम्मीद है। एक बयान में कहा गया कि बैठक में क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय महत्व के सामयिक मुद्दों पर भी चर्चा होने की उम्मीद है। एससीओ में भारत की प्राथमिकताएं प्रधानमंत्री के ‘एसईसीयूआरई’ एससीओ के दृष्टिकोण पर हैं। एसईसीयूआरई का मतलब सुरक्षा, आर्थिक सहयोग, कनेक्टिविटी, एकता, संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के लिए सम्मान और पर्यावरण संरक्षण से है। भारत ने एससीओ की अपनी पहली अध्यक्षता के तहत 04 जुलाई, 2023 को वर्चुअल प्रारूप में एससीओ राष्ट्राध्यक्षों की परिषद की 23वीं बैठक की मेजबानी की थी। एससीओ के सदस्य देश दुनिया की आधी आबादी और वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद का लगभग एक तिहाई हिस्सा कवर करते हैं। वर्ष 2024 शिखर सम्मेलन में बेलारूस के दसवें सदस्य के रूप में शामिल होने के साथ नया विस्तार देखने की उम्मीद है। ईरान पिछले साल इस समूह में शामिल हुआ था। एससीओ एक राजनीतिक, आर्थिक, और सुरक्षा संगठन है जो 2001 में स्थापित हुआ था। संस्थापक सदस्यों में चीन, रूस, कजाकिस्तान, किर्गिजस्तान, ताजिकिस्तान, और उज्बेकिस्तान शामिल हैं। भारत, पाकिस्तान के साथ, 2017 में पूर्ण सदस्य बन गए थे, जिससे संगठन की पहुंच और प्रभाव में महत्वपूर्ण विस्तार हुआ।  

IMD के मुताबिक जुलाई में औसत बारिश सामान्य से अधिक होगी, अगस्त-सितंबर का ला नीना कनेक्शन

नई दिल्ली मौसम विभाग ने भारतीय किसानों के लिए एक अच्छी खबर दी है। इसके मुताबिक अगले तीन महीनों में जमकर बरसात होने वाली है। जुलाई के साथ-साथ अगस्त और सितंबर में अच्छी बारिश होने का अनुमान है। भारत मौसम विज्ञान विभाग के मुताबिक जुलाई की औसत बारिश सामान्य से अधिक होने की संभावना है। गौरतलब है कि मौसम विभाग की ताजा रिपोर्ट आई है। इसमें बताया गया है कि जून महीने में औसत से कम बारिश हुई है। आईएमडी प्रमुख मृत्युंजय महापात्र ने बताया कि पूर्वोत्तर भारत में जून के महीने में 33 प्रतिशत कम बारिश हुई। उन्होंने बताया कि जून के अंत में सिर्फ एक कम दबाव वाला क्षेत्र बना। आम तौर पर महीने में तीन कम दबाव वाले क्षेत्र बनते हैं। मौसम परिस्थितियां अनुकूल नहीं होने के कारण कम दबाव वाले क्षेत्र नहीं बन सके। अगस्त-सितंबर का ला नीना कनेक्शन धनंजय महापात्र ने कहा कि हम जुलाई में मानसून के दौरान अच्छी बारिश की उम्मीद कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह लंबी अवधि के औसत (एलपीए) 28.04 सेमी से 106 प्रतिशत अधिक रह सकती है। जून में कम बारिश की खबर के बाद जुलाई, अगस्त और सितंबर में अच्छी बारिश की खबर किसानों को खुशखबरी देने वाली हो सकती है। अगस्त और सितंबर में अच्छी बारिश की वजह बनेगा ला नीना। मौसम वैज्ञानिकों ने भविष्यवाणी की है कि ला नीना के चलते इन दोनों महीनों में खूब बारिश होगी। विशेषज्ञ बताते हैं कि अल नीनो और ला नीनो नाम के दो वेदर कंडीशंस बनती हैं। जहां अल नीनो के दौरान मॉनसून कमजोर पड़ जाता है और बारिश कम होती है। वहीं, ला नीना के दौरान खूब बारिश होती है। जून की होगी भरपाई जून में उम्मीद से कम बारिश होने के चलते किसानों को काफी नुकसान हुआ है। ऐसे में जुलाई में होने वाली अच्छी बारिश उनके लिए किसी वरदान से कम नहीं होगी। एशिया की तीसरी सबसे बड़ी इकॉनमी की ग्रोथ के लिए यह बारिश काफी जरूरी है। इससे चावल, कॉटन, सोयाबीन और गन्ने की फसल को काफी फायदा मिलेगा। मॉनसून अभी तक देश के विभिन्न हिस्सों में पहुंच चुका है। आईएमडी चीफ ने बताया कि बहुत जल्द ही यह राजस्थान, हरियाणा और पंजाब तक भी पहुंच जाएगा। गौरतलब है कि भारत में जून में सामान्य से 11 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई। महापात्र ने जून में सामान्य से कम वर्षा के लिए मौसम प्रणालियों की कमी के कारण देश के उत्तरी और पूर्वी भागों में मानसून की धीमी प्रगति को जिम्मेदार ठहराया।

नए लॉ में मॉब लिंचिंग पर अलग से कानून का प्रावधान, 7 साल की कैद से लेकर फांसी तक की हो सकती है सजा

नई दिल्ली आईपीसी का दौर जा चुका है, एक जुलाई यानी सोमवार से देश में नए क्रिमिनल लॉ लागू हो चुके हैं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि तीन नए कानूनों के कार्यान्वयन से दंड की जगह न्याय होगा और देरी की जगह तुरंत सुनवाई होगी। इस दौरान उन्होंने मॉब लिंचिंग पर कानून का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि मॉब लिंचिंग के अपराध को लेकर पहले के कानून में कोई प्रावधान नहीं था। अब नए कानूनों में पहली बार मॉब लिंचिंग को परिभाषित किया गया। मॉब लिंचिंग के मामले में 7 साल की कैद या उम्रकैद यहां तक की फांसी की सजा का प्रावधान है। मॉब लिंचिंग पर अलग कानून, कितनी हो सकती है सजा अमित शाह ने कहा कि आजादी के 77 साल बाद आपराधिक न्याय प्रणाली स्वदेशी हो रही। नए कानूनों में मॉब लिंचिंग पर अलग से कानून बनाया गया है। इस कानून के तहत शरीर पर चोट पहुंचाने वाले क्राइम को धारा 100-146 तक का जिक्र है। मॉब लिंचिंग के मामले में न्यूनतम 7 साल की कैद हो सकती है। इसमें उम्रकैद या फांसी की सजा का भी प्रावधान है। इसके अलावा हत्या के मामले में धारा 103 के तहत केस दर्ज होगा। धारा 111 में संगठित अपराध के लिए सजा का प्रावधान है। धारा 113 में टेरर एक्ट बताया गया है। ये हैं नए क्रिमिनल लॉ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) 2023, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) 2023 और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (बीएसए) 2023 सोमवार से पूरे देश में प्रभावी हो गए। इन तीनों कानून ने ब्रिटिश कालीन कानूनों क्रमश: भारतीय दंड संहिता (आईपीसी), दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम की जगह ली है। अमित शाह ने कहा कि देशभर के 99.9 फीसदी पुलिस थाने कंप्यूटराइज हो चुके हैं। ई-रिकॉर्ड जनरेट करने की प्रक्रिया भी 2019 से शुरू कर दी गई थी। जीरो एफआईआर, ई-एफआईआर और चार्जशीट सभी डिजिटल होंगे। नए कानूनों में सात साल या इससे अधिक की सजा वाले अपराधों में फरेंसिक जांच अनिवार्य होगी। न्यायपालिका में भी 21 हजार सब-ऑर्डिनेट न्यायपालिका की ट्रेनिंग हो चुकी है। 20 हजार पब्लिक प्रॉसिक्यूटर को ट्रेंड किया गया है। अमित शाह ने कहा कि एक ऐसा झूठ फैलाया जा रहा है कि संसद सदस्यों को बाहर निकालने के बाद यह कानून पारित किए गए। यह गलत है। उन्होंने बताया कि 2020 में सभी सांसदों, मुख्यमंत्रियों, सुप्रीम कोर्ट, हाई कोर्ट के न्यायाधीशों को पत्र लिखकर उनसे सुझाव मांगे गए। गृह सचिव ने देश के सभी आईपीएस और जिला अधिकारियों से इस संबंध में सुझाव मांगे। शाह ने बताया कि उन्होंने खुद 158 बार इन कानूनों की समीक्षा बैठक की। इसके बाद गृह मंत्रालय की समिति के पास इन्हें भेजा गया। फिर ढाई से तीन महीने तक इन पर गहन चर्चा के बाद कुछ राजनीतिक सुझावों को छोड़ते हुए 93 बदलावों के साथ इन बिलों को फिर से कैबिनेट ने पारित किया।

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