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जिला मुख्यालय पर जिला पुलिस लाईन ग्राउंड के साथ-साथ खंड स्तर पर मनाया जाएगा अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस-नगराधीश पूजा कुमारी

विशेष कैंपों के माध्यम से लोगों की परिवार पहचान पत्र की डाटा वेरिफिकेशन व अपडेशन की समस्याओं का किया जा रहा है समाधान : एडीसी अंकिता चौधरी सोनीपत  परिवार पहचान पत्र की डाटा वेरिफिकेशन व अपडेशन को लेकर आने वाली समस्याओं को दूर करने के लिए उपायुक्त डॉ. मनोज कुमार के निर्देश में जिला प्रशासन ने एक पहल शुरू की है, जिसके अंतर्गत लोगों की इन समस्याओं का समाधान उनके घर द्वार पर किया जा रहा है। इसी कड़ी में नागरिक संसाधन सूचना विभाग की और से लोगों की सुविधा के लिए जिला में ग्रामीण व शहरी स्तर पर 22 जून तक लगभग 328 लोकेशन पर विशेष कैंप आयोजित किए जा रहे हैं। अतिरिक्त उपायुक्त अंकिता चौधरी ने बताया कि विशेष कैंपों के माध्यम से लोगों की परिवार पहचान पत्र की डाटा वेरिफिकेशन व अपडेशन को लेकर आ रही समस्याओं का समाधान किया जा रहा है। इन विशेष कैंपों में फैमिली आईडी में बच्चे का नाम जुड़वाना, व्यवसाय, डुप्लिकेट मोबाईल नंबर, बैंक खाता से संबंधित कार्य, जन्म तिथि संबंधित कार्य, वैवाहिक स्थिति, परिवार पहचान पत्र से सदस्य का नाम हटवाना, सदस्य का नाम जुड़वाना, जाति, दिव्यांग डाटा दर्ज करवाना, पिता, माता, पत्नी या पति का नाम ठीक करवाने से संबंधित कार्य किए जा रहे हैं। एडीसी ने जिलावासियों का आह्वïान किया कि अगर किसी व्यक्ति को अपने परिवार पहचान पत्र में डाटा वेरिफिकेशन व अपडेशन करवाना है तो वह अपने गांव व वार्ड में लगने वाले इन कैंपों में पहुंचकर इस सुविधा का अवश्य लाभ उठाएं ताकि भविष्य में उन्हें किसी प्रकार की परेशानी न हो। उन्होंने कहा कि हरियाणा सरकार ने अनेक योजनाओं को परिवार पहचान पत्र से जोड़ दिया है, जिसकी मदद से अब लोगों को कहीं जाने की जरूरत नहीं पड़ती जब वे किसी योजना के लिए पात्र हो जाते हैं तो उन्हें घर बैठे ही उन योजनाओं का लाभ प्रदान किया जा रहा है। इसलिए सभी व्यक्ति तुरंत अपने परिवार पहचान पत्र के डाटा की वेरिफिकेशन और अपडेशन के कार्य को करवाएं ताकि उन्हें भी घर बैठे सरकार की योजनाओं का लाभ मिल सके। उन्होंने बताया कि शनिवार को आयोजित विशेष कैंपों में 1820 लोगों के बुढ़ापा से संबंधित कागजात अपलोड किए गए। इसके अलावा 551 लोगों ने आय ठीक करने, 84 लोगों ने जाति वैरिफाई, 212 लोगों ने पेंशन सहमति अपलोड करने, 2332 लोगों ने अन्य डाटा सें संबंधित आवेदन किया। जिला मुख्यालय पर जिला पुलिस लाईन ग्राउंड के साथ-साथ खंड स्तर पर मनाया जाएगा अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस-नगराधीश पूजा कुमारी  21 जून को आयोजित किए जाने वाले अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस कार्यक्रम के तहत अधिकारियों और कर्मचारियों को आयुष विभाग के योग सहायकों द्वारा योगा का प्रशिक्षण दिया गया। लघु सचिवालय स्थित हैबीटेट क्लब में आयोजित तीन दिवसीय योगा प्रशिक्षण का  समापन किया गया। इस दौरान नगराधीश पूजा कुमारी ने बताया कि 21 जून को जिला पुलिस लाईन ग्राउंड में जिला स्तरीय कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा, इसके साथ-साथ सभी खंड स्तर पर भी अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाया जाएगा और कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। नगराधीश ने बताया कि अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस कार्यक्रम को लेकर 19 जून को पायलट रिहर्सल के साथ-साथ मैराथन का भी आयोजन किया जाएगा, जिसमें शहरवासी भाग लेंगे और लोगों को अपनी दिनचर्या में योग को शामिल करने के लिए प्रेरित करेंगे। उन्होंने जिलावासियों का आह्वान किया कि 19 जून को योगा मैराथन और 21 जून को पुलिस लाईन ग्राउंड में आयोजित होने वाले योग दिवस कार्यक्रम में बढ़-चढक़र भाग लें और संदेश दें कि हमारे शरीर को स्वस्थ रखने के लिए योग बहुत जरूरी है। शनिवार को आयोजित योग प्रशिक्षण में विभिन्न विभागों के अधिकारियों व कर्मचारियों, एनसीसी कैडेट, स्काउट कैडेट, नेहरू युवा केन्द्र स्टाफ एवं इच्छुक जन-साधारण सहित 630 प्रतिभागियों ने भाग लेते हुए योग की क्रियाएं का प्रशिक्षण लिया। इस मौके पर उपायुक्त कार्यालय से पीए एवं सहायक सुनील, आयुष विभाग से डॉ. रजनीश वर्मा, डॉ. अमित सिंह, जिला योग विशेषज्ञ संगीता देवी सहित शिक्षा विभाग और खेल विभाग के सरकारी एवं प्राईवेट स्कूलों के प्रवक्ता शारीरिक शिक्षा, पीटीआई व डीपीआई, पतंजलि योग समिति, लक्ष्य स्वस्थ सोनीपत एवं योग भारती संस्था के सदस्य मौजूद रहे। 14 जून को जिला में मनाया जाएगा विश्व रक्तदाता दिवस : डॉ. मनोज कुमार  उपायुक्त डॉ. मनोज कुमार ने बताया कि पिछले वर्षों की भांति इस वर्ष भी रक्तदाताओं का आभार व्यक्त करने के उद्देश्य से 14 जून को विश्व रक्तदाता दिवस का आयोजन किया जाएगा। उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा 14 जून से 27 जून तक एक जागरूकता पखवाड़ा अभियान चलाया जाएगा, जिसके तहत लोगों को रक्तदान करने के लिए प्रेरित किया जाएगा। इस पखवाड़े के दौरान अनेक गतिविधियां आयोजित की जाएंगी, जिसमें रक्तदान शिविर व रक्तदान शपथ समारोह आदि शामिल हैं। उपायुक्त ने बताया कि रक्तदान जागरूकता पखवाड़े के दौरान रक्तदाताओं का ई-रक्तकोश पोर्टल पर पंजीकरण किया जाएगा। लोगों के लिए अपने रक्त समूह को जानने के लिए सभी पीएचसी, सीएचसी, उप-जिला और जिला अस्पतालों, रक्त केन्द्रों पर रक्त समूह परीक्षण की सुविधा प्रदान की जाएगी जो आपात स्थिति में रक्तदान के लिए उपयोगी होगी। इस दौरान आयोजित रक्तदान शिविरों में मशहूर हस्तियों, स्थानीय नेताओं को रक्तदान के लिए प्रेरित करने के लिए आमंत्रित किया जाएगा। उन्होंने बताया कि इस पखवाड़े के तहत प्रमुख स्थानों पर पेंटिंग, बैनर व पोस्टर लगवाएं जाएंगे ताकि ज्यादा से ज्यादा युवाओं को रक्तदान करने के लिए प्रेरित किया जा सके।  

विश्व के 20 देशों में 65% बच्चों को जरूरी पोषक आहार नहीं मिल पा रहा :रिपोर्ट

नई दिल्ली  फूड सिक्योरिटी के मामले में भारत दुनिया का 8वां सबसे खराब देश है. साउथ एशिया में अफगानिस्तान के बाद सबसे बदतर स्थिति भारत की ही है.  यूनिसेफ की ताजा रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है. UNICEF 2024 बाल पोषण रिपोर्ट, ‘Child Food Poverty : बचपन के शुरुआती दिनों में पोषण का अभाव’ रिपोर्ट से पता चला है कि भारत उन 20 देशों में से एक है, जहां 2018-2022 तक 65% बच्चों को जरूरी पोषक आहार नहीं मिल पा रहा है. जबकि दुनिया में हर चौथा बच्चा भूख से बिलख रहा है. जानिए क्या कहती है यूनिसेफ की रिपोर्ट और भारत में बच्चों की स्थिति कितनी गंभीर है… किस देश में चाइल्ड प्रॉवर्टी सबसे ज्यादा यूनिसेफ के आंकड़ों के अनुसार, भारत में चाइल्ड पॉवर्टी 40 प्रतिशत है, जो हाई लेवल पर है. उससे पहले सोमालिया (63%), गिनी (54%), गिनी-बिसाऊ (53%), अफगानिस्तान (49%), सिएरा लियोन (47%), इथियोपिया (46%) और लाइबेरिया (43%) है. इन आंकड़ों से पता चलता है कि भारत में बड़ी संख्या में बच्चों को खाना तक उपलब्ध नहीं हो पा रहा है. पाकिस्तान की बात करें तो वहां का आंकड़ा 38% है, जबकि चीन 10% पर है. साउथ एशिया में दूसरा सबसे खराब देश गंभीर बाल खाद्य गरीबी में 40 प्रतिशत के अलावा भारत के 36 प्रतिशत बच्चे ‘मध्यम बाल खाद्य गरीबी’ (Moderate Child Food Poverty) की चपेट में हैं. इस हिसाब से दोनों का आंकड़ा 76 प्रतिशत तक पहुंच जाता है, जो बताता है कि दक्षिण एशिया में भारत अफगानिस्तान के बाद दूसरा सबसे खराब देश है. जहां गंभीर बाल खाद्य गरीबी 49% और मध्यम बाल खाद्य गरीबी 37% है. दक्षिण एशिया में बाकी देशों की स्थिति भारत से बेहतर है. हर चौथे बच्चे को नहीं मिल रहा भरपेट खाना यूनिसेफ की रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया में 5 साल से कम उम्र के करीब 18.1 करोड़ बच्चे गंभीर खाद्य गरीबी (Food Poverty) की चपेट में हैं. पूरी दुनिया में करीब 27% बच्चे ऐसे हैं, जिन्हें पोषक आहार (Nutritious Food) नसीब नहीं हो पा रहा है. इसका मतलब हर चौथा बच्चा भूख की कमी यानी कुपोषण का शिकार है, जिसका असर उसकी शारीरिक और मानसिक ग्रोथ पर पड़ रहा है. UNICEF के अनुसार गंभीर बाल खाद्य गरीबी किसे कहते हैं यूनिसेफ की तरफ से कहा गया है कि छोटे बच्चों को हर दिन 8 तरह के फूड्स में से कम से कम 5 जरूर खाने में देना चाहिए. अगर इससे कम आहार मिलते हैं तो वे गंभीर खाद्य गरीबी में आते हैं. इन फूड्स में  मां का दूध, अनाज, जड़ें (गाजर, चुकंदर, आलू, लहसुन), कंद और केले, दालें (मेवे और बीज), डेयरी प्रोडक्ट्स, मांस (मुर्गी और मछली), अंडे, विटामिन ए से भरपूर फल और सब्जियां और अन्य फल-सब्जियां शामिल हैं. खाद्य गरीबी में 44 करोड़ बच्चे यूनिसेफ की रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 100 निम्न और मध्यम आय वाले देशों में रहने वाले 5 साल से कम उम्र वाले करीब 44 करोड़ बच्चे खाद्य गरीबी से जूझ रहे हैं, यानी उन्हें रोजना 5 तरह के पोषण आहार वाले फूड्स नहीं मिल रहे हैं. इनमें से 18.1 करोड़ बच्चे गंभीर खाद्य गरीबी में हैं, जो रोजाना दो खाद्य समूहों वाला खाना ही ले पा रहे हैं. वहीं, कई देश ऐसे भी हैं जो अब भी महामारी के असर से पूरी तरह नहीं उबरे हैं। ऊपर से बढ़ते टकराव, जलवायु परिवर्तन और विषम परिस्थितियों के चलते स्थिति बद से बदतर होती जा रही है। कई देशों में पोषण तो दूर की बात बच्चों को भरपेट भोजन भी नहीं मिल रहा। इसकी वजह से न केवल यह बच्चे बल्कि उनके परिवार भी गरीबी और अभावों के भंवर जाल में फंस जाते हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, खाद्य निर्धनता के कुल मामलों में से करीब आधे ऐसे परिवारों में दर्ज किए गए हैं जो पहले ही गरीबी से जूझ रहे हैं। बाजारों में स्वास्थ्य के लिहाज से हानिकारक खाद्य पदार्थों का बढ़ता बोलबाला भी इसके पीछे की एक वजह है। ऊपर से खाद्य कंपनियों जिस तरह से स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाने वाले खाद्य पदार्थों की मार्केटिंग कर रही हैं वो भी बच्चों को खाद्य निर्धनता के दलदल में धकेल रहा है। देखा जाए तो बढ़ते बाजारीकरण ने सबके हाथों में फास्ट-फूड तो दिया लेकिन पोषण छीन लिया।

भूस्खलन में लाचुंग और आसपास के क्षेत्रों से 15 और पर्यटकों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया गया

गंगटोक  सिक्किम के भूस्खलन प्रभावित मंगन जिले के लाचुंग और आसपास के क्षेत्रों से  15 और पर्यटकों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया गया। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि जिला प्रशासन सीमा सड़क संगठन (बीआरओ), राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ), राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) और अन्य स्वयंसेवकों की मदद से, फंसे हुए पर्यटकों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा रहा है। उन्होंने बताया कि दिन में और भी पर्यटकों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचा दिया जाएगा। इसके साथ ही मंगन जिला प्रशासन ने संपत्ति को हुए नुकसान और सड़क अवरुद्ध होने के मद्देनजर छात्रों की सुरक्षा को लेकर मंगलवार को जिले के सभी सरकारी स्कूलों को तत्काल प्रभाव से बंद करने का आदेश दिया। जिलाधिकारी हेम कुमार छेत्री द्वारा जारी आदेश में कहा गया कि मंगन प्रखंड के मानुल, सिंघिक, मंगन तथा मांगशिला क्षेत्र और लिंगदोंग प्रखंड के ही ग्याथांग, पासिंगदोंग, लिंग्ज़्या, तिंगवोंग और गोर क्षेत्र में सरकारी स्कूल अगले आदेश तक बंद रहेंगे। आदेश में कहा गया कि स्कूलों के प्रधानाचार्य और कर्मचारी कार्यक्षेत्र पर ही रहेंगे। अधिकारियों ने बताया कि सोमवार को उत्तरी सिक्किम के लाचुंग से 64 पर्यटकों को मंगन कस्बे तक पहुंचाया गया। उन्होंने बताया कि जिला प्रशासन ने पैदल चलने वाले लोगों के लिए तथा वाहनों के सुगम आवागमन के लिए लकड़ी के अस्थायी पुल बनाए हैं। अधिकारियों ने बताया कि 12 जून से लगातार हो रही बारिश ने मंगन में कहर बरपाया, जिससे कई जगह भूस्खलन हुआ और जिले के ज्यादातर हिस्सों से संपर्क टूट गया। कई स्थानों पर सड़कें अवरुद्ध होने के कारण लाचुंग में लगभग 1,200 पर्यटक फंस गए। पिछले कुछ दिनों में भारी बारिश के कारण हुए भूस्खलन के चलते सिक्किम में कम से कम छह लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। अधिकारियों ने बताया कि इस प्राकृतिक आपदा के कारण कई इलाकों में संपत्ति को काफी नुकसान हुआ और बिजली, खाद्य आपूर्ति तथा मोबाइल नेटवर्क भी बाधित है। उन्होंने बताया कि सांकलांग में नवनिर्मित झूला पुल के ढहने के बाद स्थिति गंभीर हो गई क्योंकि यह उत्तरी सिक्किम और जोंगु को जोड़ने वाला मुख्य मार्ग था। एक बयान में कहा गया, ‘‘मौसम और भारी वर्षा के कारण पैदा हुए हालात से निपटने की कवायद के तहत बीआरओ ने उत्तरी सिक्किम से संपर्क जल्द से जल्द बहाल करने के लिए जनशक्ति और सरकारी तंत्र जुटाकर काम शुरू कर दिया है।’’   केन्द्रीय गृहमंत्री ने की आईटीबीपी की माउंटेन रेस्क्यू टीम की सराहना, कहा-बहादुर हिमवीरों पर हमें गर्व है  केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने लाहौल और स्पीति में एक बचाव अभियान चलाने के लिए भारत तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) की माउंटेन रेस्क्यू टीम की सराहना की है। ‘एक्स’ प्लेटफॉर्म पर एक पोस्ट में अमित शाह ने कहा कि हमें अपने बहादुर हिमवीरों पर गर्व है। उन्होंने कहा कि आईटीबीपी की माउंटेन रेस्क्यू टीम ने हाल ही में लाहौल और स्पीति की दुर्गम चोटियों पर एक चुनौतीपूर्ण खोजी अभियान चलाया और एक अमरीकी नागरिक का पार्थिव शरीर वापस लेकर आए, जिनकी पैराग्लाइडिंग करते हुए एक दुर्घटना में मौत हो गई थी। शाह ने कहा कि स्थानीय प्रशासन के अनुरोध पर आईटीबीपी टीम के सदस्य 14,800 फीट की चढ़ाई कर अपनी जान जोखिम में डालते हुए मानवता की भावना दिखाते हुए पार्थिव शरीर को वापस लाए। उन्होंने कहा कि मानवता के प्रति आईटीबीपी का समर्पण प्रशंसनीय है। उल्लेखनीय है कि लाहौल और स्पीति में काजा के पास लापता हुए 31 वर्षीय अमेरिकी पैराग्लाइडर मिस्टर बॉकस्टहलर ट्रेवर के अवशेषों को 48 घंटे से अधिक समय तक चले सबसे चुनौतीपूर्ण बचाव मिशन में से एक के बाद आईटीबीपी पर्वतारोहियों द्वारा 14800 फीट से नीचे लाया गया। पार्थिव शरीर को पुलिस थाना काजा ले जाया गया है।      

डिलीवरी वाहनों में प्रगति के कारण भारत की परमाणु तिकड़ी को मजबूती मिली

Officers/employees of Central Jail Jabalpur organized a huge tricolor rally

नई दिल्ली  भारत अगले कुछ महीनों में अपनी दूसरी SSBN (परमाणु-चालित बैलिस्टिक मिसाइलों से लैस परमाणु-चालित पनडुब्बियों के लिए नौसेना की भाषा) INS अरिघात को चालू करके न्यूक्लियर ट्रायड के अपने सबसे कमजोर हिस्से को मजबूत करने की तैयारी में है। पहला INS अरिहंत 2018 में चालू हुआ था। इसके बाद नवंबर 2022 में एस-4 का प्रक्षेपण सामरिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण था। आईएनएस अरिहंत और अरिघात के बाद यह भारत की तीसरी स्वदेशी परमाणु बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी (एसएसबीएन) रही। हाल के वर्षों में डिलीवरी वाहनों में प्रगति के कारण भारत की परमाणु तिकड़ी को मजबूती मिली है। भारतीय वैज्ञानिकों की तरफ से अग्नि-V पर काम शुरू करने के एक दशक से भी अधिक समय बाद, मिसाइल परीक्षण की प्रक्रिया से गुजरकर मैच्योर हो गई है। 15 दिसंबर 2022 को, रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) ने परमाणु-सक्षम बैलिस्टिक मिसाइल का नौवां परीक्षण किया था। न्यूक्लियर ट्रायड क्या है? न्यूक्लियर ट्रायड, एक तीन पक्षीय मिलिट्री फोर्स स्ट्रक्चर है। इसमें धरती से प्रक्षेपित परमाणु मिसाइलें, परमाणु मिसाइल से लैस पनडुब्बियां, और परमाणु बम और मिसाइलों से लैस सामरिक विमान शामिल हैं। दुनिया में केवल चार देशों के पास न्यूक्लियर ट्रायड है। इनमें संयुक्त राज्य अमेरिका, रूस, भारत और चीन शामिल हैं। पाकिस्तान एक आंशिक परमाणु ट्रायड है। इजरायल के पास परमाणु ट्रायड होने का संदेह है, लेकिन इसकी स्थिति की पुष्टि नहीं हुई है। सिपरी की चीन पर रिपोर्ट ने बढ़ाई चिंता दूसरी तरफ स्वीडिश थिंक टैंक स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) की चीन पर रिपोर्ट ने चिंता बढ़ा दी है। रिपोर्ट के अनुसार चीन विश्व में किसी भी अन्य देश की तुलना में अपने न्यूक्लियर हथियार के भंडार को तेजी से बढ़ा रहा है। चीन के पास अब भारत की तुलना में तीन गुना अधिक परमाणु हथियार हैं। इसके अलावा उसने कुछ बैलिस्टिक मिसाइलों पर “हाई ऑपरेशन अलर्ट” भी तैनात किया है। वहीं, पाकिस्तान परमाणु हथियारों की संख्या के मामले में भारत के बराबर ही बना हुआ है। वहीं, रूस और अमेरिका अन्य देशों से काफी आगे हैं। इन दोनों देशों के पास कुल परमाणु हथियारों का 90% हिस्सा है।

रिपोर्ट : भारत के पास 172 परमाणु बम है, वहीं पाकिस्‍तान के पास 170

इस्‍लामाबाद  भारत ने 25 साल में पहली बार परमाणु हथियारों के मामले में पाकिस्‍तान को पीछे कर दिया है। स्‍वीडन की नामचीन संस्‍था सिप्री की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक भारत के पास अब 172 परमाणु बम है, वहीं पाकिस्‍तान के पास 170 हैं। सिप्री की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि चीन ने पहली बार अपने परमाणु बमों को ऑपरेशनल हाई अलर्ट पर कर दिया है। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत ने साल 2023 में अपने परमाणु हथियारों के जखीरे को 8 की संख्‍या में बढ़ाया है। सिप्री ने कहा कि भारत और पाकिस्‍तान दोनों ने साल 2023 में नये तरीके के न्‍यूक्लियर डिल‍िवरी सिस्‍टम का विकास करना जारी रखा हुआ है। पाकिस्‍तान का सबसे ज्‍यादा फोकस भारत के परमाणु प्रत‍िरोधक क्षमता पर है। वहीं भारत चीन को निशाना बनाने के लिए लंबी दूरी तक मार करने वाले हथियारों पर काम कर रहा है। भारत अभी भले ही पाकिस्‍तान से आगे निकल गया हो लेकिन पाकिस्‍तान कंगाली के बाद भी परमाणु हथियारों को लेकर बड़ी योजना पर काम कर रहा है। आइए समझते हैं… पाकिस्‍तान ने साल 2023 में 1 अरब डॉलर केवल परमाणु हथियारों और उनके डिलिवरी सिस्‍टम को बनाने पर खर्च किया है। अमेरिका के शीर्ष परमाणु वैज्ञानिकों को मानना है कि पाकिस्‍तान के पास भले ही अभी 170 परमाणु बम ही हो लेकिन जिस तेजी से वह इसे बढ़ाने पर काम कर रहा है, साल 2025 तक वह इसे बढ़ाकर 200 तक करने की तैयारी कर रहा है। उन्‍होंने ओपन सोर्स मटीरियल, सैटलाइट तस्‍वीरों और अन्‍य स्रोतों से यह जानकारी दी है। बुलेटिन ऑफ द अटामिक साइंटिस्‍ट की साल 2023 में आई रिपोर्ट में अमेरिकी परमाणु वैज्ञानिकों ने पाकिस्‍तान को लेकर बड़ी चेतावनी दी थी। पाकिस्‍तान ने अमेरिकी अनुमान को फेल किया अमेरिकी वैज्ञानिकों ने कहा था, ‘हमारा आकलन है कि पाकिस्‍तान के पास अब 170 परमाणु बमों का जखीरा है। अमेरिका की डिफेंस इंटेल‍िजेंस एजेंसी का साल 1999 में अनुमान था कि पाकिस्‍तान के पास साल 2020 तक 60 से 80 परमाणु बम होंगे लेकिन तब से लेकर अब तक कई नई हथियार प्रणालियों को शामिल किया गया है जिससे अब परमाणु बमों का आंकड़ा अब बढ़ गया है।’ फेडरेशन ऑफ अमेरिकन साइंटिस्‍ट ने कहा कि हमारा यह आंकलन अनिश्चितता पर आधारित है क्‍योंकि पाकिस्‍तान या अन्‍य देशों ने परमाणु हथियारों को लेकर इस सूचना को प्रकाशित नहीं किया है। दुनिया में किसके पास कितने परमाणु बम न्‍यूक्लियर नोटबुक के नाम से आई रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्‍तान परमाणु बमों को दागने के लिए कई नये डिलिवरी सिस्‍टम को बना रहा है। पाकिस्‍तान के पास 4 प्‍लूटोनियम प्रॉडक्‍शन रिएक्‍टर हैं और वह अपने यूरेनियम संवर्द्धन इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर का विस्‍तार कर रहा है। इससे आने वाले कई वर्षों तक पाकिस्‍तान का परमाणु जखीरा तेजी से बढ़ता रहेगा। वैज्ञानिकों ने कहा, ‘पाकिस्‍तान के परमाणु बमों की संख्‍या में यह बढ़ोत्‍तरी कई फैक्‍टर्स पर निर्भर करेगी। इसमें पाकिस्‍तान परमाणु बम लॉन्‍च करने वाले लांचर को तैनात करने की योजना बना रहा है, उसकी परमाणु रणनीति किस दिशा में आगे बढ़ती है और भारत अपनी परमाणु ताकत को किस तरह से बढ़ाता है।’ मिराज फाइटर जेट, गौरी मिसाइल से लैस है पाकिस्‍तान अमेरिकी वैज्ञानिकों ने कहा, ‘हमारा अनुमान है कि पाकिस्‍तान का परमाणु जखीरा इसी तरह से बढ़ता रहा तो साल 2025 तक 200 तक पहुंच सकता है।’ उन्‍होंने कहा कि हमारा अनुमान है कि अभी पाकिस्‍तान इतनी परमाणु सामग्री बना रहा है जिससे हर साल 14 से 27 नए परमाणु बम बनाए जा सकते हैं। पाकिस्‍तान के पास 36 ऐसे फाइटर जेट हैं जिससे परमाणु बम गिराया जा सकता है। इसमें मिराज III/IV और जेएफ 17 फाइटर जेट शामिल हैं। इसके अलावा पाकिस्‍तान के पास अब्‍दाली, गजनवी, शाहीन, गौरी और नस्र जैसी परमाणु मिसाइले हैं। पाकिस्‍तान इससे 2700 किमी दूरी तक भारतीय ठिकानों पर परमाण हमला करने की क्षमता रखता है। पाकिस्‍तान अबाबील मिसाइल बना रहा है जो कई परमाणु बम एक साथ ले जा सकती है। भारत ने हाल ही में इस तकनीक से लैस अग्नि मिसाइल का परीक्षण किया था। पाकिस्‍तान समुद्र से लांच किए जाने वाली बाबर परमाणु मिसाइल भी बना रहा है। इन मिसाइलों और परमाणु कार्यक्रम को चलाने में पाकिस्‍तान को चीन की पूरी मदद मिल रही है।

अपनी स्थापना के 75वें वर्ष में सुप्रीम कोर्ट विशेष लोक अदालत का आयोजन कर रहा है, आम लोग भी उठा सकेंगे लाभ

नई दिल्ली अपनी स्थापना के 75वें वर्ष में सुप्रीम कोर्ट 29 जुलाई, 2024 से तीन अगस्त, 2024 तक विशेष लोक अदालत का आयोजन करेगा ताकि उपयुक्त लंबित मामलों का सौहार्दपूर्ण समाधान निकाला जा सके। देश का संविधान 26 जनवरी, 1950 को लागू हुआ था और सुप्रीम कोर्ट उसी तिथि से अस्तित्व में आया था। शीर्ष अदालत ने प्रेस को जारी के बयान में बताया, ‘लोक अदालतें इस देश की न्यायिक प्रणाली का अभिन्न अंग हैं, जो सौहार्दपूर्ण समाधान में तेजी लाने और उसे प्रोत्साहित करने के एक साधन के रूप में विवादों के वैकल्पिक समाधान को बढ़ावा देती हैं।’ इन मामलों पर होगी सुनवाई शीर्ष अदालत के बयान में आगे कहा गया है कि आगामी लोक अदालत का आयोजन समाज के सभी वर्गों को सुलभ और कुशल न्याय प्रदान करने की प्रतिबद्धता के अनुरूप है। लोक अदालत में निपटारे की संभावना वाले उन मामलों पर सुनवाई की जाएगी जो सुप्रीम कोर्ट के समक्ष लंबित हैं, ताकि उनका त्वरित निपटान सुनिश्चित किया जा सके। ऐसे मामलों में वैवाहिक और संपत्ति विवाद, मोटर दुर्घटना दावे, भूमि अधिग्रहण, मुआवजा, सेवा और श्रम से संबंधित मामले शामिल हैं।

पन्नू मामले में अमेरिकी अटार्नी जनरल ने कहा, हम चुप नहीं रह सकते, निखिल गुप्ता पर चलेगा केस

वाशिंगटन न्यूयार्क में खालिस्तान समर्थक आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नू की हत्या की नाकाम साजिश के आरोपित भारतीय नागरिक निखिल गुप्ता को अमेरिकी अदालत में न्याय का सामना करना पड़ेगा। अमेरिका के अटॉर्नी जनरल मेरिक गारलैंड (Merrick Garland) ने कहा कि हम अपने नागरिकों को नुकसान पहुंचाने की कोशिश को बर्दाश्त नहीं कर सकते। अमेरिका इस पर चुप नहीं रहेगा। 30 जून को हुआ था गिरफ्तार पन्नू की हत्या की कथित साजिश रचने के आरोपित निखिल गुप्ता को पिछले वर्ष 30 जून को चेक गणराज्य में गिरफ्तार किया गया था। उसके 14 जून को अमेरिका प्रत्यर्पण के बाद सोमवार को न्यूयार्क की संघीय अदालत में पेश किया गया। कोर्ट में निखिल ने खुद को निर्दोष बताया। मामला अमेरिकी डिस्टि्रक्ट जज विक्टर मारेरो को सौंपा गया है। मामले में अगली सुनवाई 28 जून को होगी। 10-10 वर्ष की हो सकती है सजा अभियोजकों ने निखिल पर पन्नू की हत्या की सुपारी देने और हत्या की साजिश रचने का आरोप लगाया है। इन दोनों आरोपों में दोषी पाए जाने पर निखिल को अलग-अलग 10-10 वर्ष की अधिकतम सजा हो सकती है। एफबीआई निदेशक क्रिस्टोफर रे ने कहा कि एजेंसी संविधान से प्राप्त अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा में बाधा पहुंचाने की कोशिश की बर्दाश्त नहीं कर सकती। निखिल पर क्या है आरोप अदालती दस्तावेजों के अनुसार, भारत सरकार के एक कर्मचारी (सीसी-1) ने निखिल गुप्ता व अन्य के साथ मिलकर भारत में पन्नू की हत्या की साजिश रची। सीसी-1 का सहयोगी निखिल भारतीय नागरिक है, उस पर अंतरराष्ट्रीय नशीले पदार्थों और हथियारों की तस्करी का आरोप है। संघीय अभियोजकों ने आरोप लगाया कि सीसी-1 ने पिछले वर्ष मई में निखिल गुप्ता को पन्नू की हत्या कराने के लिए राजी किया था।

शोध में बताया- युवा कैंसर पीड़ितों को भविष्य में बना रहता है सभी प्रकार के कैंसर का खतरा

नई दिल्ली एक शोध से यह बात सामने आई है कि कम उम्र में कैंसर की बीमारी से पीड़ित मरीज को भविष्य में हृदय रोग (सीवीडी) के साथ अन्य तरह के कैंसर का खतरा बना रहता है। द लैंसेट रीजनल हेल्थ जर्नल में प्रकाशित शोध में 1958 के बाद से स्वीडन में 25 वर्ष से कम आयु के सभी लोगों का सर्वेक्षण किया गया, जो कैंसर के शिकार हुए थे।शोधकर्ताओं ने पाया कि कैंसर से बच गए लोगों में भविष्य में कैंसर होने की संभावना लगभग तीन गुना अधिक थी। वहीं, हृदय रोग (सीवीडी) होने की संभावना 1.23 गुना अधिक और दुर्घटनाओं, विषाक्तता और आत्महत्या का जोखिम 1.41 गुना अधिक था। लिंकोपिंग विश्वविद्यालय में शोधकर्ता और नॉरकोपिंग में व्रिन्नेवी अस्पताल के कार्डियोलॉजी क्लिनिक में सलाहकार लैला हबर्ट ने कहा, यदि आपको बचपन या किशोरावस्था में कैंसर हुआ है, तो आपको भविष्य में लगभग सभी प्रकार के कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। शोधकर्ताओं के अनुसार कैंसर से बचे लोग अपने जीवन के बाकी हिस्सों में कमजोरी का सामना करते हैं। वह कई तरह की नई बीमारियों के जोखिम से घिरे रहते हैं। मुख्य रूप से कीमोथेरेपी और रेडिएशन थेरेपी हृदय रोग के जोखिम को बढ़ाती है। हबर्ट ने कहा कि इसका मतलब यह है कि मरीजों को प्लानिंग के तहत और फॉलो-अप एक्शन के साथ ही छुट्टी दी जानी चाहिए। इन जोखिम कारकों और बीमारियों की जल्द पहचान करना महत्वपूर्ण है। इसके अलावा शोध में यह भी पता चला कि युवावस्था में कैंसर के बाद बीमारी और मृत्यु के जोखिम में सामाजिक-आर्थिक कारक भी प्रमुख भूमिका निभाते हैं। शोध में उल्लेख किया गया है कि कम शिक्षा वाले, विदेशी पृष्ठभूमि वाले या अविवाहित रहने वालों के लिए जोखिम बढ़ जाता है। साथ ही यह भी पता चला है कि बच्चों और किशोरों में कैंसर के बाद बीमारी और मृत्यु का जोखिम पूरे स्वीडन में एक समान है।

सेक्स वीडियो कांड में गिरफ्तार मुख्य आरोपी प्रज्वल रेवन्ना की मां भवानी रेवन्ना को अग्रिम जमानत मिली

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बेंगलुरु कर्नाटक उच्च न्यायालय ने मंगलवार को सेक्स वीडियो कांड में गिरफ्तार पूर्व सांसद और मुख्य आरोपी प्रज्वल रेवन्ना की मां भवानी रेवन्ना को अग्रिम जमानत दे दी। भवानी रेवन्ना ने सेक्स वीडियो कांड से जुड़े अपहरण मामले में अग्रिम जमानत याचिका दायर की थी। न्यायमूर्ति कृष्ण एस. दीक्षित की अध्यक्षता वाली पीठ ने अग्रिम जमानत का आदेश देते हुए मैसूर और हासन जिलों में उनके प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया। अपहरण मामले में पीड़ित मैसूर जिले की रहने वाली है और हासन भवानी रेवन्ना का पैतृक जिला है। पीठ ने कहा कि भवानी रेवन्ना ने पुलिस द्वारा पूछे गए 85 सवालों के जवाब दिए हैं, इसलिए पुलिस की इस दलील को स्वीकार नहीं किया जा सकता कि भवानी रेवन्ना जांच मेें सहयोग नहीं कर रही हैं। भवानी रेवन्ना वर्तमान में एक नौकरानी के अपहरण मामले में विशेष जांच दल (एसआईटी) की पूछताछ का सामना कर रही हैं। उन पर नौकरानी के अपहरण व यौन उत्पीड़न के आरोपी प्रज्वल रेवन्ना और अपने पति जेडी(एस) विधायक एच.डी. रेवन्ना का सहयोग करने का आरोप है। विधायक रेवन्ना इस मामले में जेल में बंद थे और सशर्त जमानत पर बाहर हैं।

माता वैष्णो देवी के तीर्थयात्रियों के लिए अब जम्मू से ही मिलेगी हेलीकॉप्टर सेवा

जम्मू जम्मू-कश्मीर की त्रिकुटा पहाड़ियों के बीच स्थित श्री माता वैष्णो देवी के भक्तों के लिए खुशखबरी है। दरअसल, जम्मू से श्री माता वैष्णो देवी की पवित्र गुफा मंदिर तक बहुप्रतीक्षित हेलीकॉप्टर सेवा 25 या 26 जून से शुरू होने की संभावना है। श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अंशुल गर्ग ने कहा, ”हेलीकॉप्टर सेवा मंगलवार से शुरू होनी थी, लेकिन परिचालन संबंधी कुछ समस्याओं के कारण अब इसे 25 या 26 जून को शुरू किए जाने की उम्मीद है।” सीईओ ने उम्मीद जताई कि तीर्थयात्रियों की ओर से इस सेवा को पॉजिटिव प्रतिक्रिया मिलेगी। श्री माता वैष्णो देवी मंदिर को हिंदू धर्म में सबसे प्रतिष्ठित तीर्थस्थलों में से एक माना जाता है। इस साल जनवरी से मई तक 40.30 लाख से अधिक तीर्थयात्री गुफा मंदिर में पूजा-अर्चना कर चुके हैं। सीईओ ने आगे कहा कि जम्मू से गुफा मंदिर तक सीधी हेलीकॉप्टर सेवा शुरू करने का निर्णय तीर्थयात्रा को सुव्यवस्थित करने और तीर्थयात्रियों को बेहतर सुविधाएं प्रदान करने के श्राइन बोर्ड के निरंतर प्रयासों का हिस्सा है। तीर्थस्थल बोर्ड ने इस सुविधा का लाभ उठाने के इच्छुक तीर्थयात्रियों के लिए दो पैकेज तैयार किए हैं। एक उसी दिन वापसी पैकेज है, जिसकी लागत प्रति तीर्थयात्री 35,000 रुपये होगी तथा दूसरा अगले दिन वापसी पैकेज, जिसकी लागत प्रति तीर्थयात्री 60,000 रुपये होगी। उसी दिन वापसी के पैकेज के तहत, जम्मू से मंदिर तक आने-जाने की हेलीकॉप्टर सेवा के अलावा, तीर्थयात्रियों को पंछी हेलीपैड से पवित्र गुफा मंदिर तक और वापस हेलीपैड तक परिवहन सुविधा, प्राथमिकता वाले दर्शन, भवन में मुफ्त भोजन, भैरों घाटी मंदिर तक रोपवे टिकट और पंचमेवा प्रसाद का एक डिब्बा भी मिलेगा। वहीं, अगले दिन वापसी वाले पैकेज के तहत, जम्मू से गुफा मंदिर तक आने-जाने की हेलीकॉप्टर सेवा के अलावा, तीर्थयात्रियों को पंछी हेलीपैड से पवित्र गुफा मंदिर तक और वापस हेलीपैड तक परिवहन सुविधा, प्राथमिकता वाले दर्शन, रात भर ठहरने के लिए आवास और भवन में तीन बार भोजन, श्रद्धा सुमन विशेष पूजा आरती, भैरों घाटी मंदिर तक रोपवे टिकट और पंचमेवा प्रसाद का डिब्बा भी मिलेगा।  

प्रज्वल रेवन्ना को नहीं मिली राहत, कोर्ट ने 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा

बेंगलुरु जनता दल (सेक्युलर) के पूर्व सांसद प्रज्वल रेवन्ना को एक विशेष अदालत ने मंगलवार को 24 जून तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया। जद-एस संरक्षक और पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा के पौत्र प्रज्वल दुष्कर्म और यौन उत्पीड़न के आरोपों का सामना कर रहे हैं। इसके पहले 12 जून को अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट कोर्ट ने उन्हें 18 जून तक एसआईटी की हिरासत में भेजा था, जो उनके विरुद्ध मामलों की जांच कर रही है। 33 वर्षीय रेवन्ना को 31 मई को जर्मनी से बेंगलुरु एयरपोर्ट पर उतरने के तुरंत बाद एसआईटी ने गिरफ्तार कर लिया था। वह कर्नाटक की हासन लोकसभा सीट के लिए चुनाव के एक दिन बाद 27 अप्रैल को जर्मनी चले गए थे। उनको इस सीट पर हार का सामना करना पड़ा। इधर, कर्नाटक हाई कोर्ट ने प्रज्वल की मां भवानी रेवन्ना को अपने बेटे द्वारा कथित यौन उत्पीड़न की शिकार एक महिला के अपहरण मामले में मंगलवार को अग्रिम जमानत दे दी। कोर्ट ने कहा कि भवानी ने जांच के दौरान पहले ही 85 सवालों के जवाब दे दिए हैं। इसलिए यह दावा करना अनुचित है कि वह प्रज्वल के विरुद्ध एसआईटी जांच में सहयोग नहीं कर रही हैं।

किसान सम्मान निधि से मिलने वाली राशि पर किसानों ने जताई खुशी, सभी किसान भाइयों ने हर्ष व्यक्त किया

रोहतक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वाराणसी दौरे के दौरान किसान सम्मान निधि के अंतर्गत 20 करोड़ रुपए की 17वीं किस्त जारी की, जिससे 9 करोड़ 26 लाख किसान लाभान्वित हुए। इसके अलावा, प्रधानमंत्री की ओर से 30,000 से अधिक स्वयं सहायता समूहों को कृषि सखियों के रूप में प्रमाण पत्र वितरित किया जाएगा। पीएम मोदी के इस कदम के बाद लाभान्वित किसानों की खुशी का ठिकाना नहीं है। सभी किसान भाइयों ने प्रधानमंत्री के इस कदम पर हर्ष व्यक्त किया है। रोहतक के एक किसान ने पीएम मोदी के इस कदम पर कहा कि किसान सम्मान निधि से हम जैसे किसान भाइयों को बहुत फायदा मिला है। कई बार खाद सहित अन्य छोटी-मोटी सामग्री लेने के लिए हमारे पैसे नहीं होते हैं। यह योजना काफी उपयोगी है। हालांकि, हम इस योजना से खुश हैं, लेकिन हमारी मांग है कि इसके अंतर्गत मिलने वाली राशि को बढ़ाया जाए। हमारे खर्चे बढ़ गए हैं, जिन्हें पूरा करने के लिए कई बार अधिक राशि की आवश्यकता होती है। ऐसे में हमारी प्रधानमंत्री से मांग है कि वो इस राशि को बढ़ाएं ताकि हमारी जरूरतें पूरी हो सके। किसानों का कहना है कि किसान सम्मान निधि से मिलने वाली 6 हजार रूपए की राशि को 12 हजार रूपए किया जाए ताकि हमारी जरूरतों की पूर्ति हो सके। वहीं, हमें इस बात की भी खुशी है कि यह राशि हमें हमारे खाते में मिलती है। बीच में कोई मिडिल मैन नहीं है। रोहतक के अन्य किसान ने किसान सम्मान निधि योजना पर कहा कि हमें अच्छा लगता है, जब हमारे खाते में पैसे आते हैं। बीच में कोई मिडिल मैन नहीं होता। हमारी कई प्रकार की छोटी-मोटी जरूरतें पूरी हो जाती हैं। पहले हमें इन्हीं जरूरतों के लिए दूसरों पर आश्रित होना पड़ता था, लेकिन आज हमारी हर प्रकार की जरूरत आसानी से पूरी हो जा रही है और यह सब कुछ अगर किसी के प्रयास की वजह से हो पा रहा है, तो वो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हैं, जिनके प्रति हम सभी किसान भाई अपना आभार प्रकट करते हैं। रोहतक के एक अन्य किसान ने भी इस योजना को लेकर अपनी खुशी व्यक्त की। किसान ने कहा कि किसान सम्मान निधि से हमें बहुत फायदा हुआ है। ट्रैक्टर का किराया, खाद, बीज की कीमत की वसूली हो जाती है। पहले हमें इन सब चीजों के लिए दूसरों से पैसा लेना पड़ता था, लेकिन अब ये सारी जरूरतें हमें आसानी से प्राप्त हो जा रही हैं।

मोदी श्रीनगर में मनाएंगे योग दिवस, मंत्री जाधव ने कहा कि इस बार योग दिवस की थीम है, ‘योग स्वयं और समाज के लिए

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नई दिल्ली पीएम नरेंद्र मोदी इस साल योग दिवस के मौके पर श्रीनगर में होने वाले आयोजन में शिरकत करेंगे। यह कार्यक्रम डल झील के पास ही स्थित शेर-ए-कश्मीर इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस सेंटर में आयोजित किया जाएगा। आयुष मंत्री प्रतापराव जाधव ने मंगलवार को इसकी जानकारी दी। जाधव ने कहा कि इस बार योग दिवस की थीम है, ‘योग स्वयं और समाज के लिए।’ जाधव ने कहा कि इस थीम का अर्थ है कि कैसे हम योग से खुद की आतंरिक शक्ति बढ़ा सकते हैं और समाज का भी कल्याण इससे संभव है। मंत्री ने कहा कि योग से शारीरिक, मानसिक औक आध्यात्मिक विकास होता है। इसके अलावा समाज में भी सद्भाव को बढ़ावा मिलता है। उन्होंने कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी ने देश के सभी ग्राम प्रधानों को पत्र लिखा है। इसमें उन्होंने अपील की है कि गांवों में हर व्यक्ति तक योग दिवस का संदेश पहुंचाया जाए और उन्हें हिस्सा लेने के लिए प्रेरित करें। यही नहीं इस दौरान उन्होंने दृष्टिहीनों के लिए ब्रेल लिपि में एक पुस्तक भी रिलीज की, जो योग पर आधारित है। यह पुस्तक बच्चों को योग सीखने और उसका अभ्यास करने में मदद करेगी। बता दें कि पीएम नरेंद्र मोदी के प्रयासों से ही संयुक्त राष्ट्र संघ ने योग दिवस के प्रस्ताव को माना था और तब से ही हर साल 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया जाता है। योग दिवस के अलावा पीएम मोदी इस सप्ताह के रविवार से दोबारा ‘मन की बात’ कार्यक्रम शुरू करने वाले हैं। आगामी 30 जून को एक बार फिर आकाशवाणी पर अपने मासिक कार्यकम ‘मन की बात’ में देशवासियों के साथ विचार साझा करेंगे। मोदी ने मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर खुद यह जानकारी दी। उन्होंने कहा, ‘आपको यह बताते हुए प्रसन्न्ता हो रही है कि चुनाव के कारण कुछ महीने के अंतराल के बाद ‘मन की बात’ की एक बार फिर से वापस हो रही है। इस महीने का कार्यक्रम 30 जून को होगा। आप सब इस कार्यक्रम के लिए ‘माईगोव ओपन फोरम’ या ‘नमो एप’ पर अपने विचार साझा करें। आप 1800117800 पर अपने संदेश रिकार्ड भी कर सकते हैं।’ चुनाव से पहले बंद हुआ था ‘मन की बात’ कार्यक्रम उल्लेखनीय है कि मोदी ने वर्ष 2014 में पहली बार प्रधानमंत्री बनने के बाद देशवासियों के साथ संवाद के लिए आकाशवाणी पर मासिक कार्यक्रम ‘मन की बात’ शुरू किया था। उनके दूसरे कार्यकाल में भी यह कार्यक्रम हर महीने प्रसारित किया गया। उनका दूसरा कार्यकाल पूरा होने से पहले गत मार्च में आम चुनाव के दौरान आदर्श आचार संहिता लागू होने पर यह कार्यक्रम बंद हो गया था। मोदी ने इसी महीने तीसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ली है और इसी महीने से अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम का प्रसारण शुरू करने की घोषणा कर दी है। यह मन की बात की 111 वीं कड़ी होगी।  

बंगाल हादसे ने उजागर की कमी- रेलवे के 69 हजार किलोमीटर नेटवर्क में महज 1500 KM में ‘कवच’

नई दिल्ली सोमवार को पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग में भीषण रेल हादसा हुआ। यहां खड़ी कंचनजंगा एक्सप्रेस को पीछे से आ रही मालगाड़ी ने टक्कर मार दिया। इस हादसे में 6 साल के बच्चे समेत कम से कम 10 लोगों की मौत हो गई। कई अन्य गंभीर रूप से घायल हैं। हादसे के बाद रेल यात्रा के दौरान यात्रियों के सुरक्षा को लेकर सवाल उठ रहे हैं। इस बीच भारत में स्वदेशी रूप से तैयार की गई  स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली ‘कवच’ चर्चा में है। इसे आरडीएसओ ने तीन भारतीय फर्मों के साथ मिलकर स्वदेशी रूप से विकसित किया है। कवच एक ही ट्रैक पर दो ट्रेनों के चलने पर दुर्घटनाओं को रोकने में मदद करने के लिए भारत में निर्मित एक प्रणाली है। दार्जिलिंग में यह पटरियों पर नहीं लगी हुई थी, जहां दो ट्रेनें टकरा गई। वर्तमान में कवच सिर्फ 1,500 किलोमीटर के ट्रेन ट्रैक (दक्षिण मध्य रेलवे क्षेत्र में) में ही काम कर रही है। भारतीय रेलवे लगभग 69,000 किलोमीटर की कुल लंबाई के मार्ग का प्रबंधन करता है। विकास के दौरान कवच को दक्षिण मध्य रेलवे क्षेत्र में वाडी-विकाराबाद-सनतनगर और विकाराबाद-बीदर में 25 स्टेशनों को कवर करते हुए 264 किलोमीटर की लंबाई के लिए लगाया गया था। 2020-21 के दौरान, सिस्टम को 32 स्टेशनों को कवर करते हुए अतिरिक्त 322 किलोमीटर के लिए इंस्टॉल किया गया था। वहीं 2021-22 में, सिस्टम को 77 स्टेशनों को कवर करते हुए और 859 किलोमीटर में लगाया गया था। इसके साथ ही कवच अब 1,445 किलोमीटर में लगाया जा चुका है। इसमें 133 स्टेशन, 29 एलसी गेट और 74 इंजनों को कवर करने वाले 68 किलोमीटर रूट में स्वचालित सिग्नलिंग शामिल हैं। मनमाड – मुदखेड़ – निजामाबाद – सीताफलमंडी – कुरनूल – गुंतकल (सिकंदराबाद और गुंतकल स्टेशनों को छोड़कर); परभणी – बीदर – विकाराबाद – वादी और वादी – सनतनगर जैसे जगहों पर कवच लगाया जा चुका है। ट्रिब्यून ने एक रेलवे अधिकारी के हवाले से बताया कि मुंबई-हावड़ा और दिल्ली-हावड़ा मार्ग पर अन्य 3,000 किलोमीटर मार्ग पर प्रगति हो रही है। कैसे काम करता है कवच? यदि ड्राइवर समय पर ब्रेक लगाने में सफल नहीं हो पाता है तो कवच स्वचालित रूप से ब्रेक लगाकर ट्रेन की गति को नियंत्रित करता है। आरएफआईडी (रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन) टैग पटरियों और स्टेशन यार्ड और सिग्नल पर पटरियों की पहचान करने और ट्रेन और उसकी दिशा का पता लगाने के लिए लगाए जाते हैं। जैसे ही सिस्टम सक्रिय होता है, ट्रेन को सुरक्षित रूप से गुजरने देने के लिए 5 किमी के दायरे की सभी ट्रेनें बगल के ट्रैक पर रुक जाती हैं। ऑन बोर्ड डिस्प्ले ऑफ सिग्नल एस्पेक्ट (OBDSA) लोको पायलटों को खराब मौसम में भी सिग्नल देखने में मदद करता है। आमतौर पर, लोको पायलटों को सिग्नल देखने के लिए खिड़की से बाहर देखना पड़ता है। सुरक्षा प्रणाली रेड सिग्नल के पास पहुंचने पर लोको पायलट को सिग्नल भेजती है और सिग्नल को ओवरशूट करने से रोकने के लिए खुद ही ब्रेक लगाती है।  

हिमंत विस्वा सरमा ने अपनी कैबिनेट में किया फेरबदल, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग रखा अपने पास

47 IAS-IPS officers transferred in the state: Sanjeev Singh becomes Commissioner of Bhopal Division

गुवाहाटी असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने मंगलवार को अपनी कैबिनेट में फेरबदल किया। इस दौरान उन्होंने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की जिम्मेदारी अपने पास ही रखा और इसका कार्यभार भी संभाल लिया। इससे पहले इस मंत्रालय का पदभार केशव महंत के पास था, जो साल 2021 से इस पद पर बने हुए थे। केशव महंत को मिली नई जिम्मेदारी आधिकारिक अधिसूचना के मुताबिक,  केशव महंत को अब नई जिम्मेदारी दी गई है। भाजपा के गठबंधन सहयोगी असम गण परिषद (AGP) के सदस्य महंत विज्ञान, प्रौद्योगिकी और जलवायु परिवर्तन तथा सूचना प्रौद्योगिकी के अपने पहले के विभागों के अलावा परिवहन, आबकारी और मत्स्य पालन विभाग की भी जिम्मेदारी संभालेंगे।   परिमल शुक्लाबैद्य ने दिया इस्तीफा मालूम हो कि परिवहन, आबकारी और मत्स्य पालन विभाग पूर्व मंत्री परिमल शुक्लाबैद्य के पास था। हालांकि, सिलचर लोकसभा सीट से चुनाव जीतने के बाद उन्होंने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है, जिसको राज्यपाल ने स्वीकार भी कर लिया है। सीएम के पास है इन मंत्रालयों की जिम्मेदारी मालूम हो कि  सीएम सरमा के पास स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के अलावा, गृह, कार्मिक, लोक निर्माण, चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान और किसी अन्य मंत्री को आवंटित न किए गए किसी अन्य विभाग का कार्यभार संभालते रहेंगे।

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