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आज दुनिया के सबसे ऊंचे रेल पुल पर PM मोदी ने फहराया तिरंगा, कटरा से संगलदान तक वंदे भारत ट्रेन सेवा शुरू

जम्मू प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज चिनाब रेलवे ब्रिज का उद्घाटन किया। इससे पहले उन्होंने दुनिया के सबसे ऊंचे रेलवे ब्रिज का मुआयना किया। यह ब्रिज जम्मू-कश्मीर के रियासी जिले में चिनाब नदी के ऊपर बनाया गया है। इसके बाद पीएम मोदी ने अंजी ब्रिज का भी उद्घाटन किया। अंजी ब्रिज, भारत का पहला केबल रेल ब्रिज है। इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी ने कटरा-श्रीनगर वंदे भारत एक्सप्रेस को हरी झंडी दिखाई, जो घाटी को शेष भारत से जोड़ने वाली पहली ट्रेन है। प्रधानमंत्री ने कटरा रेलवे स्टेशन पर कटरा-श्रीनगर वंदे भारत ट्रेन को हरी झंडी दिखाने से पहले ट्रेन के यात्रियों और चालक दल के सदस्यों से बातचीत की। व्यू प्वॉइंट पर पहुंचे प्रधानमंत्री मोदी इससे पहले, प्रधानमंत्री मोदी चिनाब नदी पर बने विश्व के सबसे ऊंचे रेलवे पुल के निकट स्थित ‘व्यू प्वाइंट’ पर पहुंचे और उन्हें इस परियोजना के बारे में जानकारी दी गई जो कश्मीर को देश के बाकी हिस्सों से रेल द्वारा जोड़ने के लिए अहम है। प्रधानमंत्री ने केंद्रीय मंत्रियों अश्विनी वैष्णव, जितेंद्र सिंह और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के साथ प्रतिष्ठित पुल के पास स्थापित रेलवे संग्रहालय का दौरा किया। प्रधानमंत्री ‘व्यू प्वाइंट’ तक गए और उन्हें नदी से 359 मीटर की ऊंचाई पर स्थित इंजीनियरिंग के उत्कृष्ट नमूने के तौर पर चिनाब पुल के बारे में जानकारी दी गई। यह पुल पेरिस स्थित एफिल टॉवर से 35 मीटर ऊंचा है। इंजीनियरों-श्रमिकों से की बातचीत प्रधानमंत्री को संग्रहालय में इंजीनियरों और श्रमिकों के साथ बातचीत करते भी देखा गया। यह संग्रहालय रियासी जिले में चिनाब नदी पर बने दुनिया के सबसे ऊंचे मेहराब वाले रेलवे पुल का हिस्सा है। बाद में प्रधानमंत्री मोदी ने चिनाब रेलवे पुल और अंजी नदी पर भारत के पहले ‘केबल-स्टेड’ रेलवे पुल का उद्घाटन किया। ऐतिहासिक है यह वंदे भारत प्रधानमंत्री के उद्घाटन के साथ शनिवार सात जून से इन दोनों वंदे भारत ट्रेनों की वाणिज्य की यात्राएं शुरू हो जाएंगी। श्रीनगर और श्री वैष्णो देवी कटरा के बीच का सभी शुल्कों सहित किराया चेयर कार श्रेणी में 715 रुपए और एग्जीक्यूटिव क्लास में 1320 रुपए निर्धारित किया गया है। इन दोनों ट्रेनों के चलने से देश के विभिन्न हिस्सों से कटरा पहुंचने वाले पर्यटकों और रेलयात्रियों को कश्मीर पहुंचने में आसानी होगी। उनकी सात घंटे की सड़क मार्ग की यात्रा अब तीन घंटे में पूरी होगी। कटरा से संगलदान तक वंदे भारत ट्रेन सेवा शुरू इस अवसर पर PM Modi ने कटरा से संगलदान तक चलने वाली वंदे भारत ट्रेन को रवाना किया। यह ट्रेन 7 जून 2025 से आम यात्रियों के लिए शुरू कर दी जाएगी। इस नई हाई-स्पीड ट्रेन सेवा से धार्मिक और पर्यटक स्थलों के बीच की यात्रा और भी सुविधाजनक और तेज़ हो जाएगी। यह ट्रेन श्रीनगर, कटरा, और उधमपुर जैसे महत्वपूर्ण स्टेशनों को जोड़ते हुए जम्मू-कश्मीर में कनेक्टिविटी को नए स्तर पर ले जाएगी।  

RBI ने रेपो रेट में की 0.50% की बड़ी कटौती, होम लोन होंगे सस्ते! इस साल तीसरी बार

नई दिल्ली भारतीय रिजर्व बैंक ने बड़ी खुशखबरी दी है। RBI ने शुक्रवार 6 जून को रेपो रेट में 50 बेसिस प्वाइंट की कटौती का ऐलान किया है। अब रेपो रेट घटकर 5.5% पर आ गई है, जो पहले 6% थी। ये इस साल की लगातार तीसरी कटौती है। इससे पहले फरवरी और अप्रैल में भी रेपो रेट में कटौती की जा चुकी है। RBI के इस फैसले से होम लोन, ऑटो लोन और दूसरे कर्ज सस्ते हो सकते हैं। आम लोगो  मॉनिटरी पॉलिसी कमेटी के 6 में से 5 सदस्यों ने 0.50% कटौती के समर्थन में किया वोट भारतीय रिजर्व बैंक कीमॉनिटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) के 6 में से 5 सदस्यों ने रेपो रेट में 0.50% की कटौती का समर्थन किया। डॉ नागेश कुमार, प्रो. राम सिंह, डॉ राजीव रंजन, डॉ पूनम गुप्ता और गवर्नर संजय मल्होत्रा ने 50 बेसिस पॉइंट की कटौती के पक्ष में वोट किया। हालांकि, सौगाता भट्टाचार्य ने थोड़ी नरमी दिखाते हुए सिर्फ 25 बेसिस पॉइंट की कटौती की सिफारिश की। इस वोटिंग के बाद अब रेपो रेट घटकर 5.5% पर आ गई है, जो इस साल की तीसरी कटौती है। मंहगाई में भी मिलेगी राहत Repo Rate में बंपर कटौती 0.50% की कटौती के बारे में जानकारी शेयर करते हुए आरबीआई गनर्वर संजय मल्होत्रा ने बताया कि बैठक में SDF रेट 5.75% से घटाकर 5.25% किया गया है, जबकि MSF रेट को भी 6.25% से घटाकर 5.75% कर दिया गया है. उन्होंने ग्लोबल मार्केट में अनिश्चितता बरकरार रहने की बात कहते हुए FY26 महंगाई अनुमान भी जाहिर किया और ये 3.7% रखा गया है. इससे पहले ये 4 फीसदी जताया गया था. इसके साथ ही RBI Governor ने बताया कि बैठक में कैश रिजर्व रेशियो (CRR) को भी 4 फीसदी से 100 बेसिस पॉइंट घटाकर 3 फीसदी करने का फैसला किया गया है. इकोनॉमिक ग्रोथ को मिलेगा सपोर्ट रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने रेपो रेट कट का ऐलान करते हुए इस कदम को इकोनॉमिक ग्रोथ को सपोर्ट करने वाला बताया. उन्होंने आगे कहा कि भारत लगातार निवेश के लिए फेवरेट डेस्टिनेशन बन रहा है. भारत का विदेशी मुद्रा भंडार भी लगातार बढ़ रहा है और ये फिलहाल 691.5 अरब डॉलर पर पहुंच चुका है. इसके अलावा उन्होंने एक और अहम जानकारी शेयर करते हुए बताया कि आर्थिक हालात को देखते हुए आरबीआई ने अपनी मॉनिटरी पॉलिसी स्ट्रेटजी का रुख Accommodative से बदलकर अब Neutral कर दिया है. यानी अब रिजर्व बैंक रेपो रेट घटाने या बढ़ाने को लेकर कोई अक्रामक फैसला नहीं लेगा. रेपो रेट कम होने पर घटती है Loan EMI Repo Rate का सीधा कनेक्शन बैंक लोन लेने वाले ग्राहकों से होता है. इसके कम होने से लोन की ईएमआई घट जाती है और इसमें इजाफा होने से ये बढ़ जाती है. दरअसल, रेपो रेट वह दर है जिस पर किसी देश का केंद्रीय बैंक धन की किसी भी कमी की स्थिति में वाणिज्यिक बैंकों को पैसा उधार देता है. रेपो रेट का उपयोग मौद्रिक अधिकारियों द्वारा इंफ्लेशन को नियंत्रित करने के लिए किया जाता है. Repo Rate कट की लगाई हैट्रिक आरबीआई एमपीसी की बैठक बीते 4 जून को शुरू हुई थी और आज 6 जून को इसके नतीजों का ऐलान किया गया. ताजा रेपो रेट कट से पहले भी इसमें इस साल की बीती दो बैठकों में राहत दी गई थी. इससे पहले फरवरी में हुई बैठक में रेपो रेट 0.25 फीसदी घटाया गया था, जिसके बाद ये कम होकर 6.50% से कम होकर 6.25% फीसदी पर आ गया था. तो इसके बाद अप्रैल में हुई FY26 की पहली MPC बैठक में एक बार फिर 25 बेसिस पॉइंट की कटौती कर इसे 6% कर दिया गया था औऱ अब रिजर्व बैंक ने Repo Rate Cut की हैट्रिक लगाकर लोन लेने वाले ग्राहकों को बड़ा तोहफा दिया है. 50 लाख के लोन पर कितनी घटेगी EMI मान लीजिए आपने किसी बैंक से 50 लाख का होम लोन 30 सालों के लिए लिया है और इसके बदले आप 9% का ब्‍याज दे रहे हैं तो आपकी मंथली EMI 40,231 रुपये होगी. वहीं RBI के रेपो रेट में 50 बेसिस पॉइंट की कटौती के बाद यह ईएमआई घटकर 38,446 रुपये हो जाएगी. यानी मंथली ईएमआई में 2000 रुपये की कटौती होगी.

बेंगलुरु भगदड़ मामले में सख्त एक्शन, RCB के मार्केटिंग हेड समेत 4 गिरफ्तार

बेंगलुरु रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) के मार्केटिंग हेड निखिल सोसले को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है. बेंगलरु में 4 जून को RCB की व‍िक्ट्री परेड से पहले हुई भगदड़ मामले में पुल‍िस ने यह पहली ग‍िरफ्तारी की है. वहीं 3 लोगों को ह‍िरासत में ल‍िया गया है. इस मामले में पुल‍िस ने FIR दर्ज की थी. ज‍िसके बाद यह एक्शन हुआ है. जानकारी के मुताबिक, निखिल सोसले मुंबई भागने की फिराक में थे और जैसे ही वह एयरपोर्ट पहुंचे, पुलिस ने उन्हें धर दबोचा. निखिल से पूछताछ की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि बेंगलुरु में RCB की जीत के बाद हुई व‍िक्ट्री परेड से पहले हुई भगदड़ में और अव्यवस्था में उनकी भूमिका कितनी गंभीर थी. इस घटना में 11 लोगों की जान चली गई थी और कई घायल हुए थे. यह गिरफ्तारी इस मामले में बड़ी कार्रवाई मानी जा रही है और इससे आने वाले दिनों में और भी खुलासे हो सकते हैं. वहीं कर्नाटक क्रिकेट संघ के सचिव शंकर और कोषाध्यक्ष जयराम फरार हैं. पुलिस उनके घर पहुंची, लेकिन वे वहां नहीं मिले. इससे पहले, आरसीबी ने भगदड़ में जान गंवाने वाले 11 समर्थकों के परिवारों को 10-10 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की थी. 3 डीएनए स्टाफ  हिरासत में ध्यान रहे बेंगलुरु के एम चिन्नास्वामी स्टेडियम के पास हाल ही में मची भगदड़ में 11 लोगों की मौत और कई लोगों के घायल होने के मामले में कब्बन पार्क पुलिस थाने में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB), डीएनए एंटरटेनमेंट नेटवर्क्स (जो इवेंट की आयोजन कंपनी थी), कर्नाटक राज्य क्रिकेट संघ (KSCA) और अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी. डीएनए के तीन स्टाफ मेंबर्स किरण, सुमंथ और सुनील मैथ्यू को पुलिस ने हिरासत में लिया है. फिलहाल इनसे क्यूबन पार्क थाने में पूछताछ जारी है. सूत्रों के मुताबिक, पूछताछ की कमान शेषाद्रिपुरम एसीपी प्रकाश संभाल रहे हैं. मामले से जुड़ी और जानकारी का इंतजार किया जा रहा है. CM स‍िद्धारमैया ने ल‍िया था पुल‍िस पर एक्शन इस मामले में इससे पहले सीएम सीएम सिद्धारमैया ने पुलिस को बेंगलुरु भगदड़ का जिम्मेदार माना था. जिसके बाद पुलिस कमिश्नर समेत कई अफसर सस्पेंड कर दिए गए थे. बाद में कर्नाटक के IPS अधिकारी सीमांत कुमार सिंह को बेंगलुरु का नया पुलिस कमिश्नर नियुक्त किया गया था.  बेंगलुरु भगदड़ को लेकर BJP नेता गिरिराज सिंह ने मांगी कर्नाटक CM का इस्तीफा कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में 18 साल के इंतजार के बाद आईपीएल ट्रॉफी उठाने वाली रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (आरसीबी) की जीत के जश्न के दौरान बुधवार को एम. चिन्नास्वामी स्टेडियम के बाहर मची भगदड़ में कई लोगों की मौत पर केंद्रीय मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता गिरिराज सिंह ने कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के इस्तीफे की मांग की है। केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने गुरुवार को कहा कि कर्नाटक के मुख्यमंत्री निर्दयी हैं। उन्हें अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए। उन्होंने मुख्यमंत्री के उस बयान की निंदा की, जिसमें उन्होंने इस घटना की तुलना कुंभ मेले से की। केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा कि उन्होंने जिन शब्दों का प्रयोग किया है, उन्हें शर्म आनी चाहिए। आखिर वे भी राहुल गांधी का ही कुनबा हैं, जो देश की सेना का सम्मान नहीं करते, देश का सम्मान नहीं करते। आईपीएल ट्रॉफी जीतने के बाद रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (आरसीबी) की टीम जीत के जश्न के लिए बुधवार को बेंगलुरु में एम. चिन्नास्वामी स्टेडियम पहुंची थी। स्टेडियम खचाखच भरा था और लाखों की संख्या में बाहर इंतजार कर रहे फैंस अंदर घुसने की कोशिश कर रहे थे। इसी दौरान भगदड़ मच गई। इस भगदड़ में 11 लोगों की मौत हो गई और कई अन्य लोग घायल हो गए। घटना के बाद बयानबाजियों का दौर शुरू हो गया। जदयू ने भी कर्नाटक के मुख्यमंत्री से इस्तीफा मांगा है। जदयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन ने कर्नाटक के मुख्यमंत्री के बयान की निंदा की। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री का इस मामले पर दिया गया बयान गैर-जिम्मेदाराना है। ऐसे बयानों से वह लोकतंत्र और जिम्मेदारियों का अपमान कर रहे हैं। जिस तरह से अनुमान लगाने में कर्नाटक सरकार विफल रही कि जीत के जश्न में कितने लोग आ सकते हैं, इसे लेकर एहतियाती कदम नहीं उठाए गए और अनेक इंसानी जिंदगियों की बलि चढ़ गई। कई लोग घायल हुए। अफरा-तफरी का वातावरण लंबे समय तक चलता रहा लेकिन कोई प्रभावी इंतजाम घटना घटने के बाद भी कर्नाटक के अधिकारी करते नहीं दिख रहे थे। उन्होंने कहा, “यह घटना कर्नाटक सरकार की विफलता है और जदयू मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के इस्तीफे की मांग करती है।”

पीएम मोदी ने चिनाब रेलवे ब्रिज का किया उद्घाटन, वंदे भारत ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर श्रीनगर किया रवाना

 जम्मू-कश्मीर आज जम्मू-कश्मीर एक महत्वपूर्ण क्षण का साक्षी बनेगा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चिनाब नदी पर बने अद्वितीय चिनाब पुल को राष्ट्र को समर्पित किया. इसके साथ ही, कटरा से वंदे भारत ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर श्रीनगर के लिए रवाना किया. इस परियोजना के माध्यम से कश्मीर का रेल मार्ग कन्याकुमारी तक जुड़ जाएगा, जिससे दिल्ली और कश्मीर के बीच की दूरी कम होगी. चिनाब ब्रिज विश्व का सबसे ऊँचा रेल आर्च ब्रिज है, जो भूकंपीय क्षेत्र पांच में स्थित है. यह पुल दो पहाड़ों के बीच निर्मित है, जहाँ तेज हवाओं के कारण विंड टनल फिनोमेना का अनुभव होता है. इस चुनौती को ध्यान में रखते हुए, पुल को 260 किलोमीटर प्रति घंटा की हवा की गति का सामना करने के लिए विशेष रूप से डिज़ाइन किया गया है. चिनाब ब्रिज 359 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है और पेरिस के एफिल टॉवर से भी ऊंचा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आज कटरा से श्रीनगर तक उधमपुर-श्रीनगर-बारामूला रेल लिंक (USBRL) पर वंदे भारत एक्सप्रेस को हरी झंडी दिखाएंगे. इस अवसर पर वे दुनिया के सबसे ऊंचे रेलवे पुल, चेनाब ब्रिज और अंजी ब्रिज का उद्घाटन भी करेंगे. इसके साथ ही, कई विकास परियोजनाओं की आधारशिला भी रखी जाएगी. आजादी के 77 साल बाद भी कश्मीर बर्फबारी के मौसम में देश के अन्य हिस्सों से कट जाता है, खासकर नेशनल हाईवे-44 के बंद होने के कारण. इस स्थिति में जम्मू से कश्मीर पहुंचने में 8 से 10 घंटे का समय लग जाता था. लेकिन अब ट्रेन सेवा शुरू होने से यह यात्रा मात्र तीन घंटे में पूरी हो सकेगी. रेलवे बोर्ड के सूचना एवं प्रचार के कार्यकारी निदेशक दिलीप कुमार ने बताया कि रेलवे ने उधमपुर-श्रीनगर-बारामुल्ला रेल लिंक पर दो वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेनें चलाने का निर्णय लिया है. ये ट्रेनें श्री माता वैष्णो देवी, कटरा से श्रीनगर के बीच प्रतिदिन संचालित होंगी. पहली ट्रेन सुबह 8:10 बजे और दूसरी 14:55 बजे (दोपहर 2:55 बजे) रवाना होगी. सुबह 8:10 बजे चलने वाली ट्रेन बनिहाल से होते हुए लगभग तीन घंटे में सुबह 11:10 बजे श्रीनगर पहुंचेगी, जबकि दूसरी ट्रेन शाम 6 बजे श्रीनगर पहुंचेगी. इसके विपरीत, 26404 ट्रेन प्रतिदिन सुबह 8 बजे श्रीनगर से चलकर श्री माता वैष्णो देवी, कटरा स्टेशन पहुंचेगी. दूसरी ट्रेन दोपहर 2 बजे श्रीनगर से रवाना होकर प्रतिदिन शाम 5:05 बजे कटरा पहुंचेगी. इन ट्रेनों में आठ कोच होंगे, जिसमें एक्जीक्यूटिव क्लास और चेयर कार की सुविधा उपलब्ध होगी. चिनाब ब्रिज प्रोजेक्ट को पूरा होने में लगे 22 साल कश्मीर घाटी को देश के अन्य हिस्सों से साल भर रेलवे के माध्यम से जोड़ने के लिए 1997 में USBRL प्रोजेक्ट की शुरुआत की गई थी, जिसे पूरा करने में 28 साल से अधिक का समय लगा. चिनाब ब्रिज इसी उधमपुर-श्रीनगर-बारामुला रेल लिंक (USBRL) प्रोजेक्ट का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसकी लागत 43 हजार 780 करोड़ रुपये है. इस 272 किमी लंबी रेललाइन में 36 सुरंगें शामिल हैं, जिनकी कुल लंबाई 119 किमी है. इसमें 12.77 किमी लंबी T-49 टनल देश की सबसे लंबी ट्रांसपोर्ट टनल मानी जाती है. इसके अलावा, इस ट्रैक पर 943 पुल हैं, जिनकी कुल लंबाई 13 किमी है. कश्मीर को रेल नेटवर्क से जोड़ने की योजना का कार्य 1997 में आरंभ हुआ था. हालांकि, भूवैज्ञानिक और मौसम से संबंधित कठिनाइयों के कारण इस परियोजना की समयसीमा कई बार बढ़ाई गई, जिससे इसकी लागत में भी वृद्धि हुई. अंततः यह परियोजना 41,000 करोड़ रुपये से अधिक की राशि में पूरी हुई. कुल 272 किलोमीटर लंबी यूएसबीआरएल परियोजना के 209 किलोमीटर हिस्से का कार्य विभिन्न चरणों में सफलतापूर्वक पूरा किया गया है. अक्टूबर 2009 में 118 किलोमीटर लंबे काजीगुंड-बारामूला खंड का पहला चरण समाप्त हुआ. इसके बाद, जून 2013 में 18 किलोमीटर लंबा बनिहाल-काजीगुंड खंड, जुलाई 2014 में 25 किलोमीटर लंबा उधमपुर-कटरा खंड, और पिछले वर्ष फरवरी में 48.1 किलोमीटर लंबा बनिहाल-संगलदान खंड पूरा किया गया. इसके अतिरिक्त, 46 किलोमीटर लंबे संगलदान-रियासी खंड का कार्य भी पिछले साल जून में समाप्त हुआ, जबकि रियासी और कटरा के बीच 17 किलोमीटर का शेष हिस्सा अंततः पिछले साल दिसंबर में पूरा हुआ.

नई जनगणना के सारे आंकड़े 2029 से पहले आना मुश्किल, परिसीमन में सीटें घटने को लेकर आशंकित हैं दक्षिणी राज्य

नई दिल्ली  केंद्र सरकार 16 जून को अगली जनगणना को लेकर अधिसूचना जारी कर सकती है। वैसे जमीन पर ‘जनगणना-2027’ की प्रक्रिया 2026 में शुरू होगी और इस तरह से इसमें छह साल की देरी होगी, जिसके लिए मुख्य तौर पर कोविड महामारी को जिम्मेदार माना जा सकता है। क्योंकि, जनगणना का काम तब जो लटका, वह लटकता ही चला गया। इस बार की जनगणना के भरोसे राजनीतिक तौर पर कम से कम दो अहम चीजें लटकी हुई हैं। एक तो कानून के मुताबिक 2026 के बाद होने वाली जनगणना को ही आधार मानकर निर्वाचन क्षेत्रों का नए सिरे से परिसीमन होना है। क्योंकि, देश में आबादी के हिसाब से जनप्रतिनिधियों की संख्या काफी कम है और निर्वाचन क्षेत्रों की जनसंख्या के आंकड़ों में भी बड़ी असमानताएं उभर रही हैं। दूसरी तरफ संसद ने लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में 33% महिला आरक्षण की व्यवस्था की है, यह भी तभी संभव है जब निर्वाचन क्षेत्रों का नए सिरे से परिसीमन हो। लेकिन, मौजूदा परिस्थितियों में कहना मुश्किल है कि यह सब 2029 के लोकसभा चुनावों के लिए संभव हो सकेगा। केंद्र सरकार की घोषणा के अनुसार 1 अप्रैल, 2026 से जनगणना शुरू हो सकती है। पिछली जनगणना 2011 में हुई थी, इस हिसाब से यह काम 2021 में ही हो जाना था। सरकार ने नई जनगणना के लिए 1 मार्च, 2027 को रेफ्रेंस डेट के रूप में तय किया है। मतलब, जनगणना के आंकड़ों के लिए यही तारीख आधार होगी। हालांकि, अभी यह नहीं बताया गया है कि जनगणना के आंकड़े कब जारी होंगे। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या जनगणना से जुड़े सभी आवश्यक आंकड़े 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले आ जाएंगे? अगर सरकारी सूत्रों की मानें तो इसका जवाब है नहीं। मसलन, एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने कहा है कि जातिगत आंकड़े तीन साल में जारी किए जा सकते हैं। हालांकि, यह संभावना नहीं है कि जातिगत गणना ही आरक्षण का आधार बनेगी। पिछली जनगणना में आंकड़े जारी होने में करीब दो साल लगे अगर पिछली जनगणना को देखें तो अंतिम जनसंख्या गणना के आंकड़े जारी होने में लगभग 2 साल लग गए थे। हालांकि, यह देखने वाली बात है कि क्या सरकार इसकी कोई तारीख बताती है, जब जनगणना के आंकड़े आने की संभावना है। क्योंकि, बेहतर तकनीक और डिजिटल डेटा के इस्तेमाल से अब जनगणना में उतना वक्त लगने की संभावना नहीं है, जितना की पहले लगा करता था। पिछले परिसीमन में लगा था करीब साढ़े तीन साल का वक्त मान लिया जाए कि जनगणना के आंकड़े पहले के मुकाबले जल्द भी आ जाएं और परिसीमन आयोग 2029 के चुनाव से पहले अपना काम शुरू भी कर देता है, तो भी इसे परिसीमन के काम में लंबा वक्त लग सकता है। जैसे 2001 की जनगणना के बाद 2002 में परिसीमन आयोग बना था। उसने उसी जनगणना के आंकड़ों को आधार बनाया और इसके गठन से लेकर काम पूरा करने में मोटे तौर पर साढ़े तीन साल लग गए और 2007 में जाकर काम पूरा हुआ, जो कि 2008 से प्रभावी हुआ। मतलब, 2009 के लोकसभा चुनावों इसकी ओर से किया गया बदलाव अमल में आ पाया। परिसीमन में सीटें घटने को लेकर आशंकित हैं दक्षिणी राज्य अगर राजनीतिक तौर पर देखें तो इस बार के परिसीमन को लेकर दक्षिण भारतीय राज्य पहले से ही चिंतित बैठे हुए हैं। उनको डर है कि उन्होंने जनसंख्या नियंत्रण पर बहुत काम किया है और उसे काफी नियंत्रण में रखा है। लेकिन, अगर आबादी परिसीमन की आधार बनी तो उनकी लोकसभा सीटें घट सकती हैं और बिहार और यूपी जैसे राज्यों को इसका फायदा ज्यादा सीटों के तौर पर मिल सकता है। इसलिए, परिसीमन के काम को लेकर भारी विरोध भी दिख रहा है। सरकार को यह भी देखना है कि कहीं यह मुद्दा उत्तर और दक्षिण भारतीय राज्यों में बड़ी विवाद की वजह न बन जाए। केंद्र में बीजेपी की अगुवाई वाली सरकार है, जो आंध्र प्रदेश की सत्ताधारी दल टीडीपी के समर्थन पर टिकी है। ऐसे में मोदी सरकार के लिए इसपर तेजी से बढ़ना राजनीतिक रूप से भी आसान नहीं होगा। इन सारे हालातों को देखने के बाद यही लगता है कि नई जनगणना के आंकड़े 2034 के लोकसभा चुनावों से पहले काम में आना मुश्किल है।  

भारत ने रूस के साथ 5वीं पीढ़ी के फाइटर जेट प्रोजेक्ट छोड़ा, भारतीय वायु सेना को 2035 से पहले नहीं मिल पाएंगे

नई दिल्ली लड़ाकू विमानों की कमी से जूझ रहा भारत पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान बनाने को मंजूरी दे चुका है. लेकिन, ये विमान भारतीय वायु सेना को 2035 से पहले नहीं मिल पाएंगे. प्रोडक्शन शुरू करने से पहले विमान को अभी डिजाइन, विकास और परीक्षण की एक लंबी प्रक्रिया से गुजरना पड़ेगा, जो एक बड़ी चुनौती वाला और समय खाने वाला काम है. ऐसे में भारत सरकार के सामने तुरंत इस जरूरत को पूरा करने की चुनौती है. भारतीय एयरफोर्स अब सार्वजनिक तौर पर फाइटर जेट की कमी की बात करने लगी है. दरअसल, चीन और पाकिस्तान से दो मोर्चों पर चुनौतियों का सामना कर रही इंडियन एयरफोर्स को अपनी लड़ाकू क्षमता बनाए रखने के लिए फाइटर जेट्स की 42 स्क्वायड्रन की जरूरत है. एक स्क्वायड्रन में 18 विमान होते हैं. लेकिन, मौजूदा वक्त में एयरफोर्स के पास 32 स्क्वायड्रन बचे हैं. दूसरी तरफ चीन और पाकिस्तान की एयर फोर्स अब पांचवीं पीढ़ी के विमानों से लैस हो रही है. ऐसे में चुनौती तो है. हालांकि, इस चुनौती को सरकार और वायुसेना दोनों समझती है और इसके लिए उचित कदम भी उठाए जा रहे हैं. चुनौती का दूसरा पहलू खैर, आज हम इस चुनौती की नहीं बल्कि इससे जुड़े एक अन्य पहलू की बात कर रहे हैं. इसे पहलू भी नहीं बल्कि एक चूक कही जा सकती है. दरअसल, भारत सरकार ने 2007 में रूस के साथ पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट के निर्माण के लिए एक अंतर सरकारी समझौता किया था. इस समझौते के तहत रूस में सुखोई फाइटर जेट बनाने वाली कंपनी और भारत की सरकारी कंपनी एचएएल एक पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट का विकास करने वाली थी. इस प्रोजेक्ट को ब्रह्मोस मिसाइल की तरफ आगे बढ़ाना था. ज्ञात हो कि बीते दिनों ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान की एयरफोर्स की कमर तोड़ने वाली ब्रह्मोस मिसाइल को रूस के साथ ही मिलकर डेवलप किया गया था. रिपोर्ट के मुताबिक भारत और रूस ने जिस पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट की कल्पना की थी वह एक स्टील्थ जेट था. उसमें दो इंजन लगाए जाने थे. उसको हवाई, जमीनी और नौसैनिक टारगेट्स को नष्ट करने के लिए बनाया जाना था. इसके लिए भारत ने 2006 में ही अपनी एक टीम रूस भेज दी थी. समझौते के बाद दिसंबर 2008 में फाइटर जेट की डिजाइन और दिसंबर 2010 में खर्च को लेकर समझौते भी हो गए. भारत और रूस ने 6-6 अरब डॉलर के निवेश से 154 विमानों के उत्पादन की योजना बनाई. परियोजना में आने लगी अड़चनें भारत ने रूस से इस परियोजना की तकनीकी समानता और सोर्स कोर्ड साझा करने की मांगी की. सोर्स कोड किसी विमान में सॉफ्टवेयर नियंत्रण प्रणाली होती है. उसी के जरिए भविष्य में विमान में किसी बदलाव को अंजाम दिया जा सकता है. लेकिन, रूस ने इस सोर्स कोड को देने से इनकार कर दिया. फिर बातचीत हुई और इसके लिए रूस ने अतिरिक्त 7 अरब डॉलर की राशि की मांग की. विमानों की संख्या, सोर्स कोड, तकनीकी हस्तांतरण जैसे मुद्दों पर असहमति के कारण 2016 तक भारत की इस परियोजना में दिलचस्पी कम हो गई. फिर भारत ने 2018 में आधिकारिक तौर पर इस परियोजना से निकलने की घोषणा कर दी. भारत ने देसी एएमसीए प्रोग्राम पर ध्यान केंद्रित करने का फैसला किया. इसके साथ ही एयरफोर्स की तत्कालिक जरूरतों को पूरा करने के लिए फ्रांस से 36 राफेल विमान खरीदे गए. जिस पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट परियोजना से भारत बाहर हुआ उस पर रूस ने काम जारी रखा. फिर यह सुखोई-57 के रूप में सामने आया. इस विमान में कई ऐसी चीजें हैं जो भारत की जरूरतों के अनुकूल है. इस तरह रूस पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट बनाने वाला तीसरा मुल्क बन गया. इससे पहले अमेरिका और चीन के पास पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट हैं.   अब दोनों की मजबूरी 2018 से 2025 आते-आते काफी चीजें बदल चुकी हैं. एक तरफ भारत को इस वक्त पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट्स की सख्त जरूरत है. वहीं यूक्रेन युद्ध के कारण रूस की आर्थिक स्थिति पूरी तरह चरमरा गई है. वह पैसे के अभाव में इस फाइटर जेट्स का उत्पादन नहीं कर पा रहा है. अभी तक वह इसका केवल 40 यूनिट ही बना पाया है. ऐसे में वह भारत को अब सोर्स कोड और तकनीक ट्रांसफर के साथ इसे देना चाहता है. भारत की जरूरत के हिसाब से बनने वाले फाइटर जेट को सुखोई-57ई नाम दिया गया है. उसने इसका उत्पादन भी भारत ने करने की बात कही है. इसे एचयूएल के मौजूदा प्लांट में आसानी से बनाया भी जा सकता है. क्या एफ-35 और जे-20 से कमतर है सुखाई-57 परियोजना से बाहर निकलने के वक्त से कुछ जानकार इस फाइटर जेट्स की कमी को उजागर करते रहे हैं. द हिंदू और द इंडियन एक्सप्रेस अखबार की कुछ रिपोर्ट को मानें तो वायु सेना ने इस फाइटर जेट्स की रडार क्रॉस-सेक्शन और स्टील्थ क्षमता पर सवाल उठाया था. भारत ने इस विमान में ऐसे 43 तकनीकी सुधार की मांग की थी, जिसे रूस ने स्वीकार करने से इनकार कर दिया था. राजनीतिक कारण एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत ने रूस के साथ संबंधों को संतुलित करने के लिए पश्चिमी देशों के साथ रक्षा सहयोग बढ़ाया. इसके पीछे का एक कारण चीन के साथ रूस का गठजोड़ रहा है. रूस और चीन के बीच लगातार मजबूत होते गठजोड़ के कारण भारत चिंतित रहता है. ऐसे में भारत को डर था कि रूस कहीं इस पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट की तकनीक को चीन के साझा न कर दे.

चारधाम यात्रा में सेहत बन रही जानलेवा चुनौती, खराब स्वास्थ्य ने ली 80 ज़िंदगियां

देहरादून हर साल लाखों लोग पवित्र चारधाम यात्रा के लिए जाते हैं। इस बार भी यह यात्रा शुरू हो चुकी है। हालांकि इस बार की चारधाम यात्रा एक दुखद वजह से भी चर्चा में है। इस साल यात्रा के दौरान अब तक 80 लोगों की जान जा चुकी है। आखिर ऐसा क्या हो रहा है कि पहाड़ों की ऊंचाइयों पर सांसें अटक रही हैं? अगर आप भी पहाड़ पर किसी यात्रा का प्लान बना रहे हैं तो किन बातों का ख्याल रखें? आइए समझते हैं। लाखों लोग करते हैं चारधाम यात्रा हर साल मई से शुरू होने वाली चारधाम यात्रा (केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री) श्रद्धालुओं के लिए आस्था का सबसे बड़ा पड़ाव मानी जाती है। लेकिन इस बार यात्रा शुरू होने के बाद से ही मौत के आंकड़े डराने वाले हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस साल अब तक 80 श्रद्धालु अपनी जान गंवा चुके हैं। इनमें से ज्यादातर मौतें ऊंचाई पर ऑक्सीजन की कमी, हार्ट अटैक और सांस लेने में तकलीफ की वजह से हुई हैं। पहाड़ों की ऊंचाई है सांसों का दुश्मन! चारधाम के मंदिर समुद्र तल से 3 हजार से साढ़े 3 हजार मीटर की ऊंचाई पर स्थित हैं।पहाड़ों पर जैसे-जैसे ऊंचाई बढ़ती है, हवा में ऑक्सीजन का स्तर कम होता जाता है। समुद्र तल पर हवा में ऑक्सीजन की मात्रा 21% होती है, लेकिन 3,000 मीटर की ऊंचाई पर यह स्तर काफी कम हो जाता है। इसे मेडिकल भाषा में ‘हाइपोक्सिया’ कहते हैं। खासकर उन लोगों के लिए, जो मैदानी इलाकों से सीधे पहाड़ों पर चढ़ जाते हैं, यह स्थिति जानलेवा साबित हो सकती है। डॉक्टरों का कहना है कि बिना तैयारी के ऊंचाई पर चढ़ने से ‘एक्यूट माउंटेन सिकनेस’ (AMS) का खतरा बढ़ जाता है, जिसके लक्षणों में सिरदर्द, चक्कर आना, उल्टी और सांस फूलना शामिल हैं। किन लोगों को होता है सबसे ज्यादा खतरा? मौत के आंकड़ों पर नजर डालें तो सबसे ज्यादा प्रभावित बुजुर्ग और पहले से बीमार लोग हैं। हार्ट रोग, हाई ब्लड प्रेशर, शुगर और सांस की बीमारियों से जूझ रहे श्रद्धालु इस ऊंचाई पर सबसे ज्यादा जोखिम में होते हैं। इसके अलावा, कई लोग बिना मेडिकल जांच और तैयारी के यात्रा पर निकल पड़ते हैं, जो खतरे को और बढ़ा देता है। क्या है प्रशासन की तैयारी? इन मौतों के बाद सवाल उठ रहे हैं कि क्या प्रशासन इस स्थिति को संभालने के लिए तैयार है? उत्तराखंड सरकार ने यात्रा मार्गों पर मेडिकल कैंप, ऑक्सीजन सिलेंडर और आपातकालीन सेवाएं शुरू की हैं, लेकिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के सामने ये सुविधाएं नाकाफी साबित हो रही हैं। इसके अलावा, मौसम की मार भी यात्रियों के लिए मुश्किलें बढ़ा रही है। अचानक बारिश, भूस्खलन और ठंड यात्रा को और जोखिम भरा बना देती है। ये टिप्स बचा सकते हैं जान अगर आप भी चारधाम यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो कुछ सावधानियां आपकी जान बचा सकती हैं… मेडिकल जांच जरूरी: यात्रा से पहले डॉक्टर से सलाह लें और अपनी सेहत की पूरी जांच कराएं। ऊंचाई की आदत डालें: सीधे ऊंचाई पर न चढ़ें। पहले कुछ दिन कम ऊंचाई वाले इलाकों में रुकें, ताकि शरीर को ऑक्सीजन की कमी की आदत पड़ सके। सही कपड़े और दवाएं: ठंड से बचने के लिए गर्म कपड़े और जरूरी दवाएं साथ रखें। हाइड्रेशन जरूरी: खूब पानी पिएं, ताकि शरीर में ऑक्सीजन का स्तर बना रहे।

प्रधानमंत्री मोदी 6 जून को करेंगे जम्मू-कश्मीर का दौरा, चिनाब ब्रिज का करेंगे उद्घाटन, चप्पे-चप्पे पर रहेगी सुरक्षाबलों की नजर

जम्मू  जम्मू-कश्मीर में आर्थिक-सामाजिक विकास के इंजन को गति देने के लिए प्रधानमत्री नरेन्द्र मोदी शुक्रवार छह जून को प्रदेश के दौरे पर आ रहे हैं। यह दौरा कश्मीर से कन्याकुमारी तक रेल संपर्क को ही सुनिश्चित नहीं बनाएगा बल्कि जम्मू-कश्मीर के बुनियादी ढांचे के विकास को भी गति देगा। कटड़ा से श्रीनगर वंदेभारत ट्रेन को हरी झंडी दिखाने सहित प्रधानमंत्री कुल 46 हजार करोड़ की परियोजनाओं का लोकार्पण व शिलान्यास करने वाले हैं। साथ ही कटड़ा में 350 करोड़ की लागत वाले श्री माता वैष्णो देवी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एक्सीलेंस की आधारशिला भी रखेंगे। बता दें कि कश्मीर से कन्याकुमारी तक रेल संपर्क की राह में कटड़ा-बनिहाल रेल लिंक ही अवरोधक थी। जम्मू-कश्मीर ही नहीं पूरा देश इस रेल लिंक पर ट्रेन परिचालन का इंतजार कर रहा था। ट्रैक का निर्माण दिसंबर 2024 में पूरा कर लिया गया था और उसके बाद तकनीकी ट्रायल जारी थे। चिनाब और अंजी रेल पुल नदी से 359 मीटर की ऊंचाई पर स्थित वास्तुकला का चमत्कार चिनाब रेल पुल दुनिया का सबसे ऊंचा रेलवे आर्च ब्रिज है. यह 1,315 मीटर लंबा स्टील आर्च ब्रिज है जिसे भूकंप और हवा की स्थिति का सामना करने के लिए डिजाइन किया गया है. इस पुल का एक प्रमुख काम जम्मू और श्रीनगर के बीच संपर्क को बढ़ाना होगा. पुल पर चलने वाली वंदे भारत ट्रेन के जरिए कटरा और श्रीनगर के बीच यात्रा करने में सिर्फ 3 घंटे लगेंगे, जिससे मौजूदा यात्रा समय में 2-3 घंटे कम हो जाएंगे. वहीं अंजी ब्रिज भारत का पहला केबल-स्टेड रेल ब्रिज है जो चुनौतीपूर्ण इलाके में देश की सेवा करेगा. पीएम मोदी 6 जून को करेंगे जम्मू-कश्मीर का दौरा, चिनाब ब्रिज का करेंगे उद्घाटन नदी से 359 मीटर की ऊंचाई पर स्थित वास्तुकला का चमत्कार चिनाब रेल पुल दुनिया का सबसे ऊंचा रेलवे आर्च ब्रिज है. यह 1,315 मीटर लंबा स्टील आर्च ब्रिज है जिसे भूकंप और हवा की स्थिति का सामना करने के लिए डिजाइन किया गया है. इस पुल का एक प्रमुख काम जम्मू और श्रीनगर के बीच संपर्क को बढ़ाना होगा.     चिनाब और अंजी रेल पुल नदी से 359 मीटर की ऊंचाई पर स्थित वास्तुकला का चमत्कार चिनाब रेल पुल दुनिया का सबसे ऊंचा रेलवे आर्च ब्रिज है. यह 1,315 मीटर लंबा स्टील आर्च ब्रिज है जिसे भूकंप और हवा की स्थिति का सामना करने के लिए डिजाइन किया गया है. इस पुल का एक प्रमुख काम जम्मू और श्रीनगर के बीच संपर्क को बढ़ाना होगा. पुल पर चलने वाली वंदे भारत ट्रेन के जरिए कटरा और श्रीनगर के बीच यात्रा करने में सिर्फ 3 घंटे लगेंगे, जिससे मौजूदा यात्रा समय में 2-3 घंटे कम हो जाएंगे. वहीं अंजी ब्रिज भारत का पहला केबल-स्टेड रेल ब्रिज है जो चुनौतीपूर्ण इलाके में देश की सेवा करेगा. कनेक्टिविटी परियोजनाएं और अन्य विकास कार्य प्रधानमंत्री उधमपुर-श्रीनगर-बारामुल्ला रेल लिंक (USBRL) परियोजना को भी राष्ट्र को समर्पित करेंगे. 272 किलोमीटर लंबी USBRL परियोजना, जिसका निर्माण लगभग 43,780 करोड़ रुपये की लागत से किया गया है, में 36 सुरंगें (119 किलोमीटर तक फैली हुई) और 943 पुल शामिल हैं. यह परियोजना कश्मीर घाटी और देश के बाकी हिस्सों के बीच सभी मौसमों में निर्बाध रेल संपर्क स्थापित करती है, जिसका उद्देश्य क्षेत्रीय गतिशीलता को बदलना और सामाजिक-आर्थिक एकीकरण को बढ़ावा देना है. प्रधानमंत्री मोदी माता वैष्णो देवी कटरा से श्रीनगर और वापस जाने वाली दो वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेनों को भी हरी झंडी दिखाएंगे. ये ट्रेनें निवासियों, पर्यटकों, तीर्थयात्रियों और अन्य लोगों के लिए एक तेज, आरामदायक और विश्वसनीय यात्रा का ऑप्शन देंगी. पीएम मोदी विशेष रूप से सीमावर्ती क्षेत्रों में अंतिम मील तक कनेक्टिविटी को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न सड़क परियोजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन करेंगे. वह राष्ट्रीय राजमार्ग-701 पर राफियाबाद से कुपवाड़ा तक सड़क चौड़ीकरण परियोजना और एनएच-444 पर शोपियां बाईपास सड़क के निर्माण की आधारशिला रखेंगे, जिसकी लागत 1,952 करोड़ रुपये से अधिक होगी. वह श्रीनगर में राष्ट्रीय राजमार्ग-1 पर संग्राम जंक्शन और राष्ट्रीय राजमार्ग-44 पर बेमिना जंक्शन पर दो फ्लाईओवर परियोजनाओं का भी उद्घाटन करेंगे. इन परियोजनाओं से यातायात की भीड़ कम होगी और यात्रियों के लिए यातायात प्रवाह में सुधार होगा. इसके साथ ही वह कटरा में 350 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाले श्री माता वैष्णो देवी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एक्सीलेंस की आधारशिला भी रखेंगे. यह रियासी जिले का पहला मेडिकल कॉलेज होगा जो इस क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवा के बुनियादी ढांचे में महत्वपूर्ण योगदान देगा. अप्रैल में भी उद्घाटन तय था पर मौसम के कारण यह कार्यक्रम टल गया। उसके बाद पहलगाम हमले के बाद लोकार्पण नहीं हो सकता था। अब यह इंतजार समाप्त हो रहा है, प्रधानमंत्री छह जून को कटड़ा पहुंच ट्रेन को हरी झंडी दिखाएंगे। यहां रेल-परिचालन शुरू होने से बाद जम्मू से श्रीनगर के बीच सदाबहार संपर्क बरकरार रहेगा और भूस्खलन और मौसम के कारण राजमार्ग प्रभावित होने के बाद ट्रेन के माध्यम से आवागमन संभव हो सकेगा। जम्मू रेलवे स्टेशन के पुनरोद्धार के चलते कश्मीर से दिल्ली या देश के अन्य हिस्सों में जाने वाले यात्रियों को कटड़ा से ट्रेन बदलनी होगी। फिलहाल विशेष तौर पर डिजाइन की गई वंदेभारत को इस ट्रैक पर चलाया जा रहा है। भविष्य में और भी ट्रेनों को हरी झंडी दिखाई जा सकती है। सात जून से कटड़ा-श्रीनगर के बीच नियमित परिचालन होगा। एक दिन दो वंदे भारत कटड़ा से श्रीनगर और दो श्रीनगर से कटड़ा आएंगी। वीरवार सुबह दस बजे के करीब शुरू होने वाले ड्राई रन के दौरान काफिले में सुरक्षा का जिम्मा संभालने वाले अधिकारी हर उस जगह तय समय पर पहुंचेंगे यहां पर पी छह जून को पीमए को जाना है। इस दौरान दौरे को लेकर हर प्रकार की चुनौती का बारीकी से आंकलन कर उसका समाधान तलाशा जाएगा। दिल्ली से उधमपुर एयरफोर्स स्टेशन में पहुंचने के बाद पीएम सभी जगहों पर हेलीकॉप्टर से पहुंचेगे। लेकिन इसके बाद ही टीमें सड़क यात्रा को लेकर रिहर्सल करेंगी। च्च पदस्थ के अनुसार बुधवार को एसपीजी, जम्मू कश्मीर पुलिस, सुरक्षाबलों, खुफिया एजेंसियों के अधिकारियों ने पीएम दौरे की सुरक्षा के हर पहलू पर बारीकी से गौर किया। दौरे की चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए उनका सामना करने के लिए आकास्मिक योजना भी बनाई गई है। प्रधानमंत्री के दौरे … Read more

शर्मिष्ठा पनोली को HC से मिली जमानत, देश छोड़ने की इजाजत नहीं

कलकत्ता कलकत्ता हाईकोर्ट ने शर्मिष्ठा पनोली को अंतरिम जमानत दे दी है. 22 वर्षीय लॉ स्टूडेंट और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए बुधवार को जस्टिस राजा बसु ने सशर्त अंतरिम जमानत को मंजूरी दे दी. कलकत्ता हाईकोर्ट ने शर्मिष्ठा को अंतरिम जमानत देते हुए कई शर्तें लगाई है. कोर्ट ने शर्मिष्ठा के देश छोड़ने पर पूरी तरह से रोक लगा दी है. अदालत ने कहा कि शर्मिष्ठा बिना मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) की अनुमति के देश से बाहर नहीं जा सकतीं. अदालत ने ये भी कहा कि उन्हें 10 हजार रुपये के जमानत राशि जमा करनी होगी. साथ ही कोर्ट ने कोलकाता पुलिस को निर्देश दिया कि शर्मिष्ठा द्वारा गिरफ्तारी से पहले अपनी सुरक्षा को लेकर दर्ज कराई गई शिकायत के आधार पर उचित कार्रवाई की जाए. शर्मिष्ठा ने दावा किया था कि उनके सोशल मीडिया पोस्ट के बाद उन्हें धमकियां मिल रही थीं. ‘पुलिस को है गिरफ्तारी का अधिकार है’ इससे पहले हाईकोर्ट ने मंगलवार को शर्मिष्ठा की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए उनके वकील से कहा कि वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट किया गया और ऐसा सुनने में आया कि इससे एक खास वर्ग की भावनाएं आहत हुई हैं. बेंच ने कहा कि हमें अभिव्यक्ति की पूर्ण स्वतंत्रता है, इसका मतलब ये नहीं है कि आप किसी की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचा सकते हैं. अगर सजा 7 साल से कम भी हो, तो भी पुलिस को किसी को भी गिरफ़्तार करने का पूरा अधिकार है. बेंच ने कहा कि अगर कथित अपराध की सज़ा 7 साल से कम है, तो इसका मतलब यह नहीं है कि पुलिस आपको गिरफ़्तार नहीं कर सकती. भारतीय न्याय संहिता के सेक्शन 35 की कोई भी शर्त पूरी होने पर पुलिस चाहे तो किसी को भी गिरफ़्तार कर सकती है, आपको पहले प्रावधान पढ़ने चाहिए. हाईकोर्ट ने ये भी कहा कि किसी भी व्यक्ति को ऐसी टिप्पणी करते समय सावधानी बरतनी चाहिए, क्योंकि हमारे देश में विभिन्न समुदाय, जाति और धर्म के लोग एक साथ रहते हैं. कोर्ट ने तय किया है कि शर्मिष्ठा पनोली के खिलाफ कोलकाता के गार्डनरीच थाने में दर्ज केस को मुख्य मामला माना जाएगा, क्योंकि यह पहले दर्ज किया गया था. उनके खिलाफ दर्ज अन्य सभी मामलों की कार्यवाही बंद की जाएगी. क्या है मामला दरअसल, शर्मिष्ठा ने अपनी एक वीडियो में उन अभिनेताओं की आलोचना की थी, जिन्होंने ऑपरेशन सिंदूर पर अपनी प्रतिक्रिया नहीं दी. वह कथित तौर पर एक यूजर को जवाब दे रही थीं, जिसने पूछा था कि भारत ने बिना किसी कारण के पाकिस्तान पर गोलीबारी क्यों की. शर्मिष्ठा ने अपनी वीडियो में कथित तौर पर अपशब्दों का भी इस्तेमाल किया था. उन पर आरोप है कि उन्होंने एक समुदाय विशेष के खिलाफ आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया, जिससे धार्मिक भावनाएं आहत हुईं और विवाद पैदा हो गया. इसी के चलते पुलिस ने उनके खिलाफ कार्रवाई की और गिरफ्तारी हुई है. शर्मिष्ठा पनोली को 30 मई की देर रात गुरुग्राम से गिरफ्तार किया गया और कोलकाता लाया गया, जहां उन्हें मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया. जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया. हालांकि, मामले के सामने आने के बाद बीजेपी के कई नेताओं ने शर्मिष्ठा की गिरफ्तारी का विरोध करते हुए ममता सरकार की आलोचना की थी.  

श्रीनगर और कटरा के बीच वंदे भारत एक्सप्रेस की नियमित सेवाएं 7 जून से शुरू होंगी

श्रीनगर श्रीनगर और माता वैष्णो देवी कटरा के बीच यात्रा करने वालों के लिए एक बड़ी खुशखबरी है. उत्तर रेलवे ने ऐलान किया है कि 7 जून 2025 से इस रूट पर वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन सेवाएं शुरू हो रही हैं. ये ट्रेनें हफ्ते में छह दिन चलेंगी और इससे श्रीनगर से कटरा तक की दूरी बहुत कम समय में तय की जा सकेगी. खास तौर पर उन यात्रियों के लिए यह सुविधा बेहद फायदेमंद होगी, जो वैष्णो देवी के दर्शन के लिए जाते हैं या फिर कश्मीर घाटी से जम्मू क्षेत्र के बीच नियमित यात्रा करते हैं. इस रूट पर दो जोड़ी वंदे भारत ट्रेनें चलाई जाएंगी – एक जोड़ी ट्रेन नंबर 26404 और 26403 के नाम से चलेगी, जबकि दूसरी जोड़ी ट्रेन नंबर 26401 और 26402 के नाम से. ये सभी ट्रेनें श्रीनगर और कटरा के बीच चलेंगी और बीच में बनिहाल स्टेशन पर भी रुकेंगी, ताकि रास्ते के यात्रियों को भी सुविधा मिल सके. क्या है टाइमिंग पहली जोड़ी में ट्रेन नंबर 26404 श्रीनगर से सुबह 8 बजे रवाना होगी और बनिहाल होते हुए सुबह 10:58 बजे कटरा पहुंचेगी. वापसी में ट्रेन नंबर 26403 दोपहर 2:55 बजे कटरा से चलेगी और शाम 5:53 बजे श्रीनगर पहुंचेगी. दूसरी जोड़ी में ट्रेन नंबर 26401 कटरा से सुबह 8:10 बजे चलेगी और दोपहर 11:08 बजे श्रीनगर पहुंचेगी. वापसी की ट्रेन नंबर 26402 दोपहर 2:00 बजे श्रीनगर से रवाना होगी और शाम 4:58 बजे कटरा पहुंचेगी. आरामदायक सफर, होगा चहुंमुखी लाभ इन ट्रेनों की शुरुआत से घाटी और जम्मू क्षेत्र के बीच सफर करना और भी आसान हो जाएगा. वंदे भारत ट्रेनों को उनके आधुनिक डिब्बों, तेज रफ्तार और आरामदायक सफर के लिए जाना जाता है. इससे ना सिर्फ तीर्थ यात्रियों को बल्कि व्यापार, कामकाज और शिक्षा के लिए यात्रा करने वाले लोगों को भी बहुत फायदा होगा. अब यात्रियों को लंबी दूरी की ट्रेनें पकड़ने या सड़क मार्ग से घंटों का सफर करने की ज़रूरत नहीं होगी. वंदे भारत एक्सप्रेस की मदद से वे कुछ ही घंटों में कटरा या श्रीनगर पहुंच सकेंगे. इस सेवा से जम्मू-कश्मीर के दोनों हिस्सों के बीच नजदीकियां और संपर्क और भी मजबूत होंगे.

सिलेंडर फटने से घर में हुआ विस्फोट, 4 लोग घायल

सीलमपुर दिल्ली के सीलमपुर क्षेत्र में एक घर में गैस रिसाव के कारण हुए भयंकर धमाके में चार लोग घायल हो गए, जिनमें एक छोटा बच्चा भी शामिल है. यह घटना उस समय हुई जब स्थानीय लोग अपने दैनिक कार्यों में व्यस्त थे. धमाके की आवाज इतनी जोरदार थी कि आसपास के घरों में भी अफरा-तफरी मच गई. एक अधिकारी ने जानकारी दी कि सुबह 11:17 बजे कंट्रोल रूम में धमाके की सूचना प्राप्त हुई. कॉल करने वाले ने बताया कि एक घर में अचानक विस्फोट हुआ है, जिसके परिणामस्वरूप दो महिलाएं, एक पुरुष और एक बच्चा घायल हो गए हैं. इस घटना के तुरंत बाद पुलिस और आपातकालीन सेवाओं को मौके पर भेजा गया. 28 मिनट में आग पर पाया काबू दिल्ली फायर सर्विस के एक अधिकारी ने जानकारी दी कि जैसे ही उन्हें घटना की सूचना मिली, तीन दमकल गाड़ियां तुरंत मौके पर भेजी गईं. धमाके के बाद घर में आग लग गई थी, जिसे सुबह 11:45 बजे तक पूरी तरह से नियंत्रित कर लिया गया. उन्होंने बताया कि दमकलकर्मियों को आग पर काबू पाने में काफी मेहनत करनी पड़ी, क्योंकि गैस रिसाव के कारण आग तेजी से फैल रही थी. फायर ऑफिसर अनूप सिंह ने जानकारी दी कि उन्हें सिलेंडर में विस्फोट की सूचना मिली थी. वह और शास्त्री पार्क की टीम तुरंत घटनास्थल पर पहुंचे, जहां एक स्थायी झुग्गी थी. अंदर एक छोटा एलपीजी सिलेंडर था, जो पेट्रोमैक्स के साथ रखा गया था. स्थानीय निवासियों ने बताया कि गैस लीक हो रही थी, और जैसे ही किसी ने माचिस जलाई, सिलेंडर फट गया. इस घटना में चार लोग झुलस गए, और मौके पर तीन दमकल गाड़ियां पहुंचीं. हादसे की वजह तलाश रही पुलिस पुलिस और अग्निशामक सेवा की टीमें अब हादसे के कारणों की जांच में जुटी हैं. प्रारंभिक जांच से पता चला है कि धमाका रसोई में रखे गैस सिलेंडर से गैस रिसाव के कारण हुआ. हालांकि, यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि रिसाव सिलेंडर में खराबी के कारण हुआ या किसी मानवीय चूक के चलते. पुलिस ने घटनास्थल से साक्ष्य इकट्ठा करना शुरू कर दिया है और आसपास के निवासियों से भी पूछताछ की जा रही है. घायलों का इलाज जारी धमाके में घायल हुए सभी व्यक्तियों को तुरंत नजदीकी अस्पताल में भर्ती किया गया है, जहां उनका उपचार जारी है. चिकित्सकों के अनुसार, घायलों की स्थिति स्थिर है, हालांकि कुछ को गंभीर चोटें आई हैं, जिनका इलाज गहन चिकित्सा कक्ष (आईसीयू) में किया जा रहा है. धमाके के बाद सीलमपुर क्षेत्र में भय का माहौल व्याप्त है.  

डसॉल्ट एविएशन और टाटा ने भारत में राफेल के बॉडी पार्ट निर्माण के लिए 4 प्रोडक्शन ट्रांसफर एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर

नई दिल्ली फाइटर जेट राफेल बनाने वाली कंपनी दसॉल्ट एविएशन ने भारत की टाटा ग्रुप के साथ बड़ी डील की है. दसॉल्ट एविएशन अब टाटा ग्रुप के साथ मिलकर फाइटर प्लेन राफेल की बॉडी भारत में बनाएगी. इसके लिए दसॉल्ट एविएशन और टाटा ग्रुप ने एक डील पर साइल किया है. डसॉल्ट एविएशन और टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड ने भारत में राफेल लड़ाकू विमान के बॉडी पार्ट के निर्माण के लिए 4 प्रोडक्शन ट्रांसफर एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर किए हैं. ये समझौता देश की एयरोस्पेस विनिर्माण क्षमताओं को मजबूत करने और ग्लोबल सप्लाई चेन को मजूबत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा. यह सुविधा भारत के एयरोस्पेस बुनियादी ढांचे में एक महत्वपूर्ण निवेश को बढ़ावा देगी. इस कदम को भारत में सामरिक और सैन्य विमानों के निर्माण की दिशा में एक अहम पड़ाव माना जा रहा है. जहां राफेल फाइटर जेट के अहम हिस्सों का निर्माण किया जाएगा. इनमें विमान का fuselage, पीछे का पूरा हिस्सा, सेंट्रल fuselage और सामने का हिस्सा शामिल है. माना जा रहा है कि इस प्रोडक्शन प्लांट से 2028 तक राफेल का पहला fuselage असेंबली लाइन से बाहर आ जाएगा. जब फैक्ट्री पूरी तरह बनकर तैयार हो जाएगी तो यहां से हर महीने में 2 fuselage तैयार होंगे. क्या होता है राफेल जेट का फ्यूजलाज? राफेल फाइटर जेट में फ्यूजलाज (fuselage) विमान का मुख्य ढांचा है, जो इसका केंद्रीय संरचनात्मक हिस्सा होता है. यह पायलट कॉकपिट, इंजन, इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम, और हथियारों को जोड़ता है, साथ ही विंग्स और टेल को सहारा देता है. दसॉल्ट एविएशन के अनुसार राफेल का फ्यूजलाज हल्के और मजबूत कम्पोजिट सामग्रियों (जैसे कार्बन और केवलर फाइबर) से बना होता है, जो इसका वजन कम करता है और अधिकतम टेक-ऑफ वजन को खाली वजन के अनुपात में 40% तक बढ़ाता है. यह डिजाइन उच्च गति को संभव बनाता है. Fuselage विमान की स्थिरता, एयरो डायनामिक्स, और रडार क्रॉस-सेक्शन को कम करने में महत्वपूर्ण है. राफेल का फ्यूजलाज सर्पेन्टाइन एयर इनटेक और कम्पोजिट सामग्री के कारण रडार डिटेक्शन को कम करता है, जो इसे युद्ध में कम विजिबल बनाता है. पहली बार फ्रांस के बाहर फ्यूजलाज प्रोडक्शन दसॉल्ट एविएशन के चेयरमैन और CEO ने कहा कि, “पहली बार, राफेल के fuselage  का उत्पादन फ्रांस के बाहर किया जाएगा. यह भारत में हमारी सप्लाई चेन को मजबूत करने की दिशा में एक निर्णायक कदम है. भारतीय एयरोस्पेस उद्योग में प्रमुख खिलाड़ियों में से एक TASL (Tata Advanced Systems limited) सहित हमारे स्थानीय भागीदारों को इस विस्तार के लिए धन्यवाद, यह सप्लाई चेन राफेल के सफल निर्माण में योगदान देगी और हमारे समर्थन से हमारी गुणवत्ता और प्रतिस्पर्धात्मकता आवश्यकताओं को पूरा करेगी.” टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी और प्रबंध निदेशक सुकरन सिंह ने कहा, “यह साझेदारी भारत की एयरोस्पेस यात्रा में एक महत्वपूर्ण कदम है. भारत में संपूर्ण राफेल fuselage का उत्पादन टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स की क्षमताओं में बढ़ते भरोसे और डसॉल्ट एविएशन के साथ हमारे सहयोग की ताकत को रेखांकित करता है.  यह भारत द्वारा एक आधुनिक, मजबूत एयरोस्पेस विनिर्माण इको सिस्टम स्थापित करने की दिशा में की गई उल्लेखनीय प्रगति को भी दर्शाता है. यह डील बताती है कि भारत की तकनीक वैश्विक प्लेटफार्मों को सपोर्ट कर सकती है.” इस समझौते पर पर हस्ताक्षर भारत की ‘मेक इन इंडिया’ और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर होने की पहल के प्रति दसॉल्ट एविएशन के मजबूत कमिटमेंट को दर्शाता है. इस साझेदारी का उद्देश्य ग्लोबल एयरोस्पेस सप्लाई चेन में एक प्रमुख खिलाड़ी के रूप में भारत की स्थिति को मजबूत करना है, साथ ही अधिक आर्थिक आत्मनिर्भरता के अपने लक्ष्य को सपोर्ट करना है.  

अब किसान बेसब्री से 20वीं किस्त का इंतज़ार कर रहे हैं तो आया बड़ा अपडेट, जल्द आएंगे 2,000 रुपये खाते में

नई दिल्ली  देश के करोड़ों किसानों के लिए एक बार फिर राहत भरी खबर सामने आई है। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-Kisan) योजना के तहत किसानों को हर साल ₹6,000 की आर्थिक सहायता दी जाती है, जो तीन किस्तों में उनके बैंक खातों में ट्रांसफर की जाती है। अब किसान बेसब्री से 20वीं किस्त का इंतज़ार कर रहे हैं। इस बार की किस्त को लेकर एक बड़ा अपडेट सामने आया है – जल्द ही यह राशि किसानों के खातों में पहुंच सकती है। किस्त की तारीख, जरूरी शर्तें और eKYC से जुड़ी अहम जानकारियां जानने के लिए पढ़ें पूरी खबर। क्या है पीएम-किसान योजना? प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना का उद्देश्य देश के छोटे और सीमांत किसानों को वित्तीय सुरक्षा प्रदान करना है। इसके तहत पात्र किसानों को हर चार महीने में ₹2,000 की राशि भेजी जाती है, जिससे उन्हें कृषि कार्यों में सहायता मिल सके। 19वीं किस्त में मिले थे ₹22,000 करोड़ बीते 24 फरवरी 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिहार के भागलपुर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान योजना की 19वीं किस्त जारी की थी। इसमें 9.8 करोड़ से अधिक किसानों को कुल ₹22,000 करोड़ की राशि ट्रांसफर की गई थी। अब किस्त नंबर 20 का इंतजार चूंकि किस्तें हर चार महीने के अंतराल पर दी जाती हैं, इसलिए 20वीं किस्त जून 2025 में जारी होने की पूरी संभावना है। सरकारी सूत्रों के मुताबिक, यह किस्त जून के पहले या दूसरे सप्ताह में किसानों के खातों में आ सकती है। हालांकि, सरकार की ओर से फिलहाल इसकी आधिकारिक तारीख घोषित नहीं की गई है। e-KYC है अनिवार्य – अभी कर लें पूरा अगर आप चाहते हैं कि अगली किस्त आपके खाते में समय पर आए, तो eKYC पूरा करना बेहद ज़रूरी है। किसान दो तरीकों से यह प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं: OTP आधारित eKYC: pmkisan.gov.in पर जाकर मोबाइल OTP के ज़रिए। बायोमेट्रिक eKYC: नजदीकी जन सेवा केंद्र (CSC) पर जाकर। अपना नाम लाभार्थी सूची में ऐसे देखें pmkisan.gov.in वेबसाइट पर जाएं। “लाभार्थी सूची” (Beneficiary List) टैब पर क्लिक करें। अपने राज्य, जिला, उप-जिला, ब्लॉक और गांव का चयन करें। “Get Report” पर क्लिक कर देखें कि आपका नाम सूची में है या नहीं।    

भारतीय मूल के CEO तन्मय शर्मा, अमेरिका में 1244 करोड़ के फ्रॉड में गिरफ्तार

वाशिंगटन अमेरिका में 1244 करोड़ रुपये (149 मिलियन डॉलर) के हेल्थकेयर फ्रॉड मामले में भारतीय मूल के फार्मा कारोबारी तन्मय शर्मा को लॉस एंजेलिस इंटरनेशनल एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया गया है। वह सॉवरेन हेल्थ ग्रुप नामक एक नशा मुक्ति और मानसिक स्वास्थ्य सेवा प्रदाता संस्था के संस्थापक और पूर्व CEO हैं। यह संस्था अब बंद हो चुकी है। अमेरिकी न्याय विभाग के अनुसार, 61 वर्षीय शर्मा ने स्वास्थ्य बीमा कंपनियों को धोखा देकर करीब 149 मिलियन डॉलर के फर्जी क्लेम किए। साथ ही, मरीजों की भर्ती के लिए 21 मिलियन डॉलर (लगभग रुपए175 करोड़) की अवैध रिश्वतें भी दीं। फेडरल ग्रैंड ज्यूरी द्वारा जारी आठ बिंदुओं वाले आरोपपत्र में शर्मा पर चार वायर फ्रॉड, एक साजिश और तीन अवैध रेफरल के आरोप लगाए गए हैं। FBI की टीम वर्ष 2017 से इस मामले की जांच कर रही थी। इसके तहत सॉवरेन हेल्थ के साउथ कैलिफोर्निया स्थित इलाज केंद्रों, मुख्यालय और शर्मा के आवास पर छापेमारी भी हुई थी। संस्था ने 2018 में अपना संचालन बंद कर दिया था। इस मामले में सह-आरोपी पॉल जिन सेन को भी गिरफ्तार किया गया है, जिसने अदालत में खुद को निर्दोष बताया है। उसका ट्रायल 29 जुलाई से शुरू होगा। कौन हैं तन्मय शर्मा? तन्मय शर्मा मूल रूप से असम के गुवाहाटी के रहने वाले हैं और उन्होंने दिब्रूगढ़ मेडिकल कॉलेज से MBBS किया है। दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में इंटर्नशिप के बाद वह यूके और फिर अमेरिका में मेडिकल और रिसर्च क्षेत्र में सक्रिय रहे। वह स्किज़ोफ्रेनिया और मानसिक रोगों पर शोध के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचाने जाते हैं। उन्होंने 200 से अधिक रिसर्च लेख प्रकाशित किए हैं और 5 किताबें भी लिखी हैं। उनके पिता फणी शर्मा असम के प्रसिद्ध रंगकर्मी, अभिनेता और निर्देशक थे। अवैध कमीशन का किया भुगतान इसके अलावा उन्होंने (तन्मय) ने मरीजों को रेफर करने के लिए 21 मिलियन डॉलर से ज्यादा के अवैध कमीशन का भुगतान किया. इन भुगतानों को छिपाने के लिए, शर्मा और उनके सह-आरोपी पॉल जिन सेन खोर ने फर्जी कॉन्ट्रैक्ट बनाए. वहीं, मामले में सह-प्रतिवादी पॉल जिन सेन खोर को भी गिरफ्तार किया गया और उन्होंने खुद को निर्दोष बताया. उनके मुकदमे की सुनवाई 29 जुलाई को तय की गई है. 2017 में शुरू हुई थी जांच एनबीसी लॉस एंजिल्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, तन्मय की कंपनी सॉवरेन हेल्थ ग्रुप दक्षिणी कैलिफोर्निया और कई अन्य राज्यों में नशा उपचार केंद्र चलाती थी, के खिलाफ जांच जून 2017 में शुरू हुई थी. इस दौरान एफबीआई ने कंपनी के उपचार केंद्रों, सैन क्लेमेंटे मुख्यालय और शर्मा के सैन जुआन कैपिस्ट्रानो स्थित आवास पर छापेमारी की थी. ये कंपनी ने 2018 में बंद कर दी गई थी. कौन हैं तन्मय शर्मा तन्मय शर्मा एक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त अनुसंधान मनोचिकित्सक हैं, जिन्होंने सिजोफ्रेनिया और मानसिक बीमारियों में मस्तिष्क कार्य और मानव व्यवहार पर उल्लेखनीय शोध किया है. गुवाहाटी के बमुनिमैदम के रहने वाले शर्मा, दिवंगत थिएटर कलाकार, नाटककार, और फिल्म अभिनेता फणी शर्मा के सबसे बड़े बेटे हैं. उनके पिता अनुराधा सिनेमा हॉल और अब बंद हो चुके रूपायन और अनुपमा सिनेमा हॉल के मालिक थे. तन्मय ने 1987 में डिब्रूगढ़ मेडिकल कॉलेज से MBBS की डिग्री हासिल की और दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में इंटर्नशिप की. इसके बाद उन्होंने 1987 में भारतीय चिकित्सा परिषद और 1988 में यूनाइटेड किंगडम के जनरल मेडिकल काउंसिल से चिकित्सा लाइसेंस प्राप्त किया. उन्होंने अपने करियर में 15 अंतरराष्ट्रीय चिकित्सा पत्रिकाओं के लिए समीक्षा की, कई संपादकीय बोर्डों में काम किया और एंटीसाइकोटिक दवाओं पर सलाहकार समूहों में भाग लिया. उन्होंने 20 से अधिक नैदानिक जांचों का नेतृत्व किया, 200 से अधिक सहकर्मी-समीक्षित जर्नल लिखे और सिजोफ्रेनिया पर पांच पुस्तकें सह-लेखन किया है.

CJI बीआर गवई ने अदालत की सुनवाई को सोशल मीडिया पर गलत तरीके से साझा किए जाने पर जताई चिंता

नई दिल्ली भारत के मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई ने अदालत की सुनवाई को सोशल मीडिया पर गलत तरीके से साझा किए जाने पर चिंता व्यक्त की है. उन्होंने बताया कि भारतीय मीडिया अदालत के निर्णयों की रिपोर्टिंग में काफी सक्रिय है, लेकिन कई बार सुनवाई के दौरान कही गई बातें गलत तरीके से प्रस्तुत की जाती हैं. मुख्य न्यायाधीश ने यह भी कहा कि जब से अदालत की सुनवाई वर्चुअल प्लेटफार्मों पर होने लगी है, तब से इस तरह की घटनाओं में वृद्धि हुई है. यह एक गंभीर मुद्दा है, क्योंकि वर्चुअल सुनवाई के कुछ हिस्सों को साझा करने के साथ-साथ गलत दावे भी किए जाते हैं. उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए नियमों की आवश्यकता है. चीफ जस्टिस गवई ने यह भी बताया कि भारत में इस प्रकार की समस्याओं का समाधान करने के लिए कोई ठोस व्यवस्था नहीं है. उनका मानना है कि इस समय नियम बनाने का यह सबसे उपयुक्त अवसर है. उन्होंने सोशल मीडिया पर इस तरह की सामग्री के प्रसार पर रोक लगाने की आवश्यकता पर जोर दिया. यह टिप्पणी उन्होंने ब्रिटेन में ‘मेंटेनिंग ज्युडिशियल लेगिटिमेसी ऐंड पब्लिक कॉन्फिडेंस’ विषय पर आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान की, जिसमें इंग्लैंड और वेल्स की चीफ जस्टिस लेडी सुइ कार भी उपस्थित थीं. भारत की सर्वोच्च न्यायालय के जस्टिस विक्रम नाथ इस कार्यक्रम में उपस्थित थे, जहां सीनियर एडवोकेट गौरव बनर्जी ने मंच का संचालन किया. जस्टिस विक्रम नाथ ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि हालांकि इसमें कुछ कमियां हो सकती हैं, फिर भी वे अदालती कार्यवाही के लाइव प्रसारण के समर्थन में हैं. उन्होंने यह भी बताया कि अदालती सुनवाई की लाइव स्ट्रीमिंग को रोकने के लिए उठाए गए तर्क, जैसे कि इसके बेजा इस्तेमाल का डर, बहुत ही कमजोर हैं. उनका मानना है कि इसका लाभ केवल न्यायाधीशों, वकीलों और वादियों या प्रतिवादियों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आम जनता के लिए भी फायदेमंद है, जो कानूनी प्रणाली से सीधे जुड़े नहीं हैं. सुप्रीम कोर्ट ने यह निर्णय लिया था कि संवैधानिक महत्व के मामलों की सुनवाई का लाइव स्ट्रीमिंग किया जाएगा, जिससे इसका व्यापक लाभ हुआ है. हजारों लोग इन वीडियोज को देख रहे हैं. हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि हर मामले में ऐसा करना संभव नहीं है, क्योंकि यदि कानूनी प्रणाली को इस तरह से पूरी तरह से सार्वजनिक कर दिया गया, तो इससे गंभीर समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं. सीजेआइ ने सेवानिवृत्ति के तुरंत बाद न्यायाधीशों द्वारा सरकारी पद स्वीकार करने या चुनाव लड़ने के लिए इस्तीफा देने पर गंभीर चिंता व्यक्त की. जस्टिस गवई ने कहा कि ऐसे कदम महत्वपूर्ण नैतिक प्रश्न उठाते हैं और सार्वजनिक निगरानी को आमंत्रित करते हैं. उन्होंने बताया कि किसी न्यायाधीश का राजनीतिक पद के लिए चुनाव लड़ना न्यायपालिका की स्वतंत्रता और निष्पक्षता पर सवाल उठा सकता है. यह स्थिति हितों के टकराव या सरकार के पक्ष में खड़े होने के प्रयास के रूप में देखी जा सकती है. सेवानिवृत्ति के बाद की गतिविधियों का समय और स्वरूप न्यायपालिका की ईमानदारी पर जनता के विश्वास को कमजोर कर सकता है, जिससे यह धारणा बन सकती है कि न्यायिक निर्णय भविष्य की सरकारी नियुक्तियों या राजनीतिक भागीदारी से प्रभावित हो सकते हैं. CJI ने कोलेजियम प्रणाली को भी उचित ठहराया सीजेआइ बीआर गवई ने यूके में एक सम्मेलन के दौरान न्यायपालिका की स्वतंत्रता और स्वायत्तता पर जोर दिया. उन्होंने न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए कोलेजियम प्रणाली का समर्थन करते हुए बताया कि 1993 से पहले सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालयों में न्यायाधीशों की नियुक्ति का अंतिम निर्णय कार्यपालिका के हाथ में था. इस दौरान कार्यपालिका ने दो बार सीजेआइ की नियुक्ति में वरिष्ठ न्यायाधीशों को नजरअंदाज किया, जो कि स्थापित परंपरा के खिलाफ था. 1993 और 1998 के निर्णयों में, सुप्रीम कोर्ट ने न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए संवैधानिक प्रक्रियाओं की व्याख्या की और कोलेजियम प्रणाली की स्थापना की. इस प्रणाली का मुख्य उद्देश्य कार्यपालिका के हस्तक्षेप को कम करना और न्यायपालिका की स्वायत्तता को बनाए रखना है. उन्होंने यह भी कहा कि हालांकि कोलेजियम प्रणाली की आलोचना की जा सकती है, लेकिन किसी भी समाधान को न्यायिक स्वतंत्रता की कीमत पर नहीं लाया जाना चाहिए. न्यायाधीशों को बाहरी दबाव से स्वतंत्र रहना चाहिए. भारत के मुख्य न्यायाधीश ने न्यायपालिका में पारदर्शिता और जनता के विश्वास को बनाए रखने के लिए अपनाए गए उपायों का उल्लेख किया. इनमें न्यायाधीशों द्वारा स्वेच्छा से संपत्ति की जानकारी देना और यदि कोई न्यायाधीश किसी मामले में वकील के रूप में पहले से शामिल रहा है, तो उसे उस मामले की सुनवाई से अलग होने की परंपरा शामिल है.

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