LATEST NEWS

EV: नितिन गडकरी का एलान – लिथियम बैटरी की कीमतों में गिरावट से ईवी सेक्टर को मिलेगा बढ़ावा, जानें डिटेल्स

union minister nitin gadkari says fall in lithium battery prices will boost ev sector केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा है कि लिथियम बैटरियों की कीमतों में कमी से इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) की लागत में काफी गिरावट आएगी। जिससे वे आम लोगों के लिए ज्यादा किफायती बन जाएंगे। सोमवार को गडकरी ने कहा कि भारत में प्रदूषण सबसे बड़ी समस्या है और इसमें सबसे बड़ा योगदान ट्रांसपोर्ट सेक्टर का है। इसलिए पेट्रोल-डीजल जैसे जीवाश्म ईंधनों से हटकर वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों को अपनाना बहुत जरूरी है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री गडकरी ने कहा कि बैटरी तकनीक में हो रही प्रगति भारत को सस्टेनेबल ट्रांसपोर्ट की ओर ले जाने में अहम भूमिका निभा रही है। उन्होंने कहा कि भारत की तेल पर निर्भरता न सिर्फ आर्थिक रूप से भारी पड़ रही है। बल्कि यह पर्यावरण के लिए भी नुकसानदेह है। हर साल करीब 22 लाख करोड़ रुपये ईंधन आयात पर खर्च हो रहे हैं। इस वजह से साफ ऊर्जा को अपनाना देश के विकास के लिए जरूरी है। ठाणे में एक ईको-फ्रेंडली इलेक्ट्रिक साइकिल लॉन्च के मौके पर गडकरी ने कहा कि शहरीकरण बढ़ने के कारण साइक्लिंग को भी एक टिकाऊ शहरी परिवहन विकल्प के रूप में बढ़ावा देने की जरूरत है। उन्होंने बताया कि 2014 से अब तक भारत का ऑटोमोबाइल सेक्टर इतनी तेजी से बढ़ा है कि यह जापान को पछाड़कर दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा वाहन बाजार बन गया है। गडकरी ने कहा कि 2030 तक भारत इलेक्ट्रिक वाहन निर्माण में दुनिया का अग्रणी देश बन जाएगा, जिससे ग्लोबल ऑटो मार्केट पर बड़ा असर पड़ेगा। ईवी की लागत कम होगीगडकरी ने कहा कि लिथियम-आयन बैटरियों की कीमतों में आई तेज गिरावट (अब 100 डॉलर प्रति kWh) ने इलेक्ट्रिक वाहनों को ज्यादा सुलभ बना दिया है। और उनकी कीमतें पारंपरिक पेट्रोल-डीजल वाहनों के बराबर आने के करीब हैं। उन्होंने बताया, “कुछ साल पहले लिथियम की कीमत 150 डॉलर प्रति किलोवॉट थी, जो अब घटकर लगभग 100 डॉलर रह गई है। यह और कम होगी, तो इलेक्ट्रिक वाहनों की कीमतें भी कम हो जाएंगी, जिससे आम लोगों को ये सस्ते में मिल सकेंगे।” गडकरी ने कहा, “प्रदूषण हमारे देश की सबसे बड़ी चुनौती है और इसका एक बड़ा हिस्सा परिवहन क्षेत्र से आता है।” उन्होंने दोहराया कि इलेक्ट्रिक और वैकल्पिक ईंधन पर शिफ्ट होना सिर्फ पर्यावरण के लिहाज से ही जरूरी नहीं है। बल्कि यह आर्थिक रूप से भी फायदेमंद होगा। उन्होंने भारत में पर्यावरण अनुकूल और लागत प्रभावी परिवहन समाधान की खोज में बैटरी से चलने वाले वाहनों (BEV) के महत्व को दोहराया। नई बैटरी तकनीकों पर शोधगडकरी ने कहा कि भारत में बैटरी तकनीक पर लगातार शोध हो रहा है, जिसमें सेमी-कंडक्टर्स, लिथियम-आयन, जिंक-आयन, सोडियम-आयन और एल्युमिनियम-आयन बैटरी शामिल हैं। उन्होंने यह भी बताया कि भारतीय इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स की अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती मांग एक बड़ा निर्यात अवसर है। जिससे अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और व्यापार संतुलन सुधरेगा। गडकरी ने हाल ही में हीरो के एक संयंत्र का उद्घाटन करने के लिए पंजाब के लुधियाना की अपनी यात्रा को याद करते हुए कहा, “भारत की 50 प्रतिशत टू-व्हीलर अब निर्यात की जा रही हैं, और हमें घरेलू बाजार से ज्यादा फायदा निर्यात से हो रहा है।” मंत्री ने एक अध्ययन का हवाला देते हुए कहा, “बजाज और टीवीएस जैसे पारंपरिक दोपहिया वाहन निर्माताओं ने एक बार चार्ज करने पर 125 किलोमीटर की रेंज वाले वाहन बनाए हैं। लखनऊ और कानपुर शहरों के युवाओं ने 60 किलोमीटर की रेंज वाली बाइक का निर्माण शुरू कर दिया है।” इस अध्ययन से पता चलता है कि एक बाइक आम तौर पर प्रति दिन अधिकतम 24-26 किलोमीटर की यात्रा करती है। बायोफ्यूल और किसानों के लिए नई संभावनाएंगडकरी ने कहा कि सरकार कृषि अपशिष्ट से बायोफ्यूल बनाने की दिशा में काम कर रही है, जिसमें बायो-सीएनजी और बायो-एविएशन फ्यूल शामिल हैं। इससे किसानों को अतिरिक्त आमदनी मिलेगी और प्रदूषण कम होगा। उन्होंने कहा, “अब किसान सिर्फ अन्नदाता नहीं रहेंगे, बल्कि ऊर्जा दाता भी बनेंगे।” सरकार की नीति “आयात प्रतिस्थापन, लागत प्रभावी, प्रदूषण मुक्त और स्वदेशी” तकनीकों को बढ़ावा देने पर केंद्रित है। गडकरी ने बताया कि सरकार पराली से बायोफ्यूल बनाने की योजना पर भी काम कर रही है> जिससे किसानों को पराली जलाने की जरूरत नहीं पड़ेगी और इससे प्रदूषण कम होगा। उन्होंने कहा, “हरियाणा के किसान धान की पराली जलाते हैं, जिससे वायु प्रदूषण बढ़ता है। लेकिन अब हम इसे बायोफ्यूल में बदल रहे हैं। इस दिशा में 400 प्रोजेक्ट शुरू किए गए हैं, जिनमें से 60 पहले से ही काम कर रहे हैं।” शहरी परिवहन में साइक्लिंग को बढ़ावागडकरी ने कहा कि बढ़ते शहरीकरण के मद्देनजर साइक्लिंग को बढ़ावा देने के लिए विशेष साइकिल ट्रैक बनाए जाने चाहिए। ताकि पर्यावरण के अनुकूल यात्रा को प्रोत्साहन मिले, सड़क सुरक्षा बढ़े और ट्रैफिक जाम की समस्या कम हो। उन्होंने कहा, “भारत में नवाचार और प्रतिस्पर्धा के लिए अनुकूल माहौल तैयार किया जा रहा है, जिससे देश इलेक्ट्रिक वाहन निर्माण, वैकल्पिक ईंधन और ग्रीन मोबिलिटी समाधानों का प्रमुख केंद्र बन रहा है।” गडकरी ने दोहराया कि भारत हरित तकनीकों को अपनाकर प्रदूषण कम करने, आयात लागत घटाने और आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है। “पहले लोग विश्वास नहीं करते थे”गडकरी ने याद किया कि जब उन्होंने पहली बार इलेक्ट्रिक वाहनों और ई-बाइक्स के बारे में बात की थी, तो लोगों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया था। उन्होंने कहा, “जब मैंने इलेक्ट्रिक कार और ई-बाइक की बात की थी, तो लोग हंसते थे, लेकिन आज हालात बदल चुके हैं।” उन्होंने बताया कि हाल ही में टाटा ने हाइड्रोजन सेल से चलने वाले ट्रक पेश किए हैं, जो भारत में उन्नत तकनीक और नवाचार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। गडकरी ने कहा कि अत्याधुनिक तकनीक, युवा इंजीनियरों की प्रतिभा और कृषि नवाचारों के मेल से भारत वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बना रहेगा।

अब ChatGPT पर Free में बनेगी Ghibli इमेज, ट्रेंड वायरल पर Sam Altman ने की बड़ी घोषणा, जानें तरीका

Now Ghibli images can be created for free on ChatGPT, Sam Altman made a big announcement on the trend going viral, know how OpenAI का ChatGPT अभी काफी चर्चा में है. इससे Studio Ghibli स्टाइल की इमेज जनरेशन की बाढ़ आ गई है. कंपनी के नेटिव इमेज जेनरेशन फीचर रोलआउट करने के बाद से ही यूजर्स AI से फोटो को बनवा रहे हैं. Studio Ghibli को वायरल ट्रेंड बन चुका है. कंपनी ने बताया कि Studio Ghibli की वजह से महज एक घंटे में 10 लाख नए यूजर्स जुड़ गए. Sam Altman ने X पर ऐलान किया, “ChatGPT का लॉन्च 26 महीने पहले सबसे पागलपन भरे वायरल मोमेंट्स में से एक था, जब हमने 5 दिन में 10 लाख यूजर्स जोड़े थे. अब पिछले एक घंटे में ही 10 लाख यूजर्स और जुड़ गए.” उन्होंने आगे कहा, “अब इमेज जेनरेशन फ्री यूजर्स के लिए भी रोलआउट हो गया है.” यानी यूजर्स फ्री में ChatGPT से Ghibli Style Image बनवा सकते हैं. आपको बता दें कि 26 मार्च 2025 को OpenAI ने ChatGPT Plus, Pro और Team यूजर्स के लिए यह फीचर लॉन्च किया था. जापान के मशहूर Studio Ghibli स्टाइल आर्टवर्क ने सोशल मीडिया यूजर्स को इतना इंप्रेस किया कि लोग अपनी तस्वीरों को पॉपुलर ऐनिमे फिल्म्स की स्टाइल में बदलने लगे. हालांकि, फ्री यूजर्स के लिए यह फीचर कुछ देरी के बाद आज यानी 1 अप्रैल 2025 को आया है. ChatGPT पर फ्री में बनेगी Ghibli Style इमेजआपको बता दें कि अभी Ghibli Style Image की धूम मची हुई है. सभी अपनी Ghibli Style Image बनाकर सोशल मीडिया पर पोस्ट कर रहे हैं. ChatGPT के फ्री ना होने पर यूजर्स इसके अल्टरनेटिव से अपनी Ghibli Style फोटो बनवा रहे हैं. लेकिन, अब इसके फ्री होने के बाद यूजर्स ChatGPT से ही Ghibli Style इमेज बनवा सकते हैं. आपको बस ChatGPT में अपना अकाउंट बनाना होगा. इसके बाद आप अपनी फोटो को इसमें अपलोड करके Ghibli Style में कन्वर्ट करने का कमांड दे सकते हैं. इसके बाद यह आपकी इमेज को Ghibli Style में बदल देगा. हालांकि, फ्री होने की वजह से इस पर थोड़ी लिमिट हो सकती है. Studio Ghibli से OpenAI को फायदाआपको बता दें ति OpenAI ने ChatGPT को नवंबर 2022 में लॉन्च किया था. यह एक कन्वर्सेशनल AI टूल था, जो टेक्स्ट प्रॉम्प्ट्स लेकर इंसानों जैसे जवाब देता है. अब इमेज जेनरेशन जैसे फीचर्स के साथ ये और भी पावरफुल हो गया है. अब Studio Ghibli स्टाइल इमेज ने ChatGPT को नई ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया, लेकिन OpenAI के सामने अब सिस्टम को स्टेबल रखने और बिजनेस वैल्यू देने की चुनौती है

नवरात्रि के 9 दिन व्रत रखने से पहले इन बातों का जरूर रखें ध्यान, जानिए एक्सपर्ट से

chaitra navratri fasting 9 days follow these expert suggested tips chaitra navratri fasting these : हिंदू धर्म में नवरात्रि का अहम महत्व है. इस दौरान 9 दिनों तक मंदिरों में लोगों के घरों में मां दुर्गा के नौ रूपो की पूजा की जाती है. कई लोग पूरे नौ दिनों तक व्रत भी रखते हैं. आइए एक्सपर्ट से जानते हैं कि नवरात्रि के पूरे व्रत रखने के दौरान किन बातों का ख्याल रखें. Navratri Fasting Tips: रविवार 30 मार्च को चैत्र नवरात्रि का त्योहार शुरू हो रहा है. इस दिन को हिंदू नववर्ष के तौर पर भी मनाया जाता है. नवरात्रि का पर्व हिंदू धर्म में अत्यंत महत्वपूर्ण और श्रद्धा से जुड़ा हुआ है. नवरात्रि में मां दुर्गा के 9 स्वरूपों की पूजा होती है. वहीं, इस दौरान व्रत रखने का भी विधान है. कुछ लोग तो पूरे 9 दिनों तक उपवास रखते हैं. Read more: दिल्ली में बीजेपी गवर्नमेंट आते ही शुरू हुई बिजली समस्या, लोगों का धरना प्रदर्शन, आप ने दिल्ली सरकार को घेरा न्यूट्रिशनिस्ट नमामी अग्रवाल कहती हैं कि नवरात्रि के व्रत का संबंध सिर्फ अध्यात्मिकता से नहीं, बल्कि स्वास्थ्य से भी जुड़ा हुआ है। इस दौरान आपकी बॉडी को ईटिंग हैबिट से ब्रेक मिलता है. लेकिन अगर आप पूरे नवरात्रि में उपवास रखने का सोच रहे हैं तो कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है. आइए एक्सपर्ट से जानने की कोशिश करते हैं. chaitra navratri fasting these करवाएं बॉडी चेकअप अगर आप पूरे नवरात्रि व्रत रखने का सोच रहे हैं तो सबसे पहले आपको यह जानना जरूरी है कि क्या आपकी बॉडी हेल्दी है. इसके लिए आप अपना फुल बॉडी चेकअप करवाएं. इससे आपको शरीर का ब्लड शुगर लेवल और कोलेस्ट्रॉल के बारे में पता चल जाएगा. पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं एक्सपर्ट कहती हैं कि व्रत के दौरान पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं. इससे शरीर हाइड्रेट रहेगा और बॉडी का टेंपरेचर भी बैलेंस होगा. इस बार गर्मियों ने मार्च में ही दस्तक दे दी है. ऐसे में व्रत के दौरान कम पानी पीने से शरीर डिहाइड्रेट हो सकता है. ऑयली फूड से बचें नवरात्रि के व्रत से पहले आप ज्यादा मिर्च-मसाले और ऑयली चीजों को न खाएं. इससे पेट से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं. आप हल्का और सादा भोजन करें. इसके अलावा, सीमित मात्रा में मीठे और नमक को खाएं. नवरात्रि के दौरान कैसा हो खाना? नवरात्रि के व्रत के दौरान भोजन में हल्का आहार लेना चाहिए. आमतौर पर लोग फल, दूध, साबूदाना, सिंघाड़े के आटे की रोटियां, आलू, मखाना, पनीर जैसी चीजें खाते हैं. इन चीजों से शरीर को ऊर्जा मिलती है. हालांकि, इन्हें ज्यादा तेल या घी में पकाने से बचें. इसके अलावा, हाइड्रेटिंग फल को डाइट में शामिल करें. रात के समय दूध पिया जा सकता है.

मरीजों को झटका ! 1 अप्रैल से इतनी बढ़ जाएगी जरूरी दवाइयों की कीमत

cancer and diabetes and other essential medicines drugs to get costlier from 1apri अगर आप रोजाना दवाओं का इस्तेमाल करते हैं, तो 1 अप्रैल से आपका दवा का खर्च बढ़ने वाला है. राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (NPPA) ने आवश्यक दवाओं की कीमतों में इजाफा करने का फैसला किया है, जिससे आम आदमी की जेब पर असर पड़ेगा. 4 दिन बाद मरीजों को करोड़ों का झटका लगने वाला है. अगर आप नियमित रूप से दवाओं का इस्तेमाल करते हैं, तो 1 अप्रैल से आपकी दवा की लागत बढ़ने वाली है. राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (NPPA) ने आवश्यक दवाओं की कीमतों में इजाफा करने का फैसला किया है, जिससे आम आदमी की जेब पर असर पड़ेगा. दरअसल,सरकार ने दवाओं की कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए कई महत्वपूर्ण दवाओं को प्राइस कंट्रोल लिस्ट में शामिल किया है. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, इस पहल से मरीजों को हर साल लगभग 3,788 करोड़ रुपये की बचत होती है. हालांकि, अब इन नियंत्रित दवाओं के दाम बढ़ने की संभावना जताई जा रही है. कितनी बढ़ सकती है कीमतरिपोर्ट्स के मुताबिक, कैंसर, डायबिटीज, हृदय रोग और एंटीबायोटिक्स जैसी आवश्यक दवाओं की कीमतों में 1.7% तक की वृद्धि हो सकती है. यह बढ़ोतरी नेशनल फार्मास्युटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी (NPPA) द्वारा तय की जाती है, जो देश में दवाओं की कीमतों को नियंत्रित करने का काम करती है. इस कदम से दवा कंपनियों को राहत मिलेगी, क्योंकि उन्हें उत्पादन लागत में हो रही बढ़ोतरी से जूझना पड़ रहा था. हालांकि, मरीजों के लिए यह अतिरिक्त वित्तीय बोझ बन सकता है, जिससे उनकी दवाओं पर होने वाला खर्च बढ़ जाएगा. आइए जानते हैं किन दवाईयों की कीमतें बढ़ जाएंगी. क्यों बढ़ रही हैं दवाओं की कीमतें?NPPA के अनुसार, दवाओं की कीमतों में यह बढ़ोतरी मुद्रास्फीति आधारित मूल्य संशोधन के कारण की जा रही है. हर साल सरकार आवश्यक दवाओं की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए एक संशोधन करती है. इस बार थोक मूल्य सूचकांक (WPI) में वृद्धि के चलते दवा कंपनियों को कीमतें बढ़ाने की अनुमति दी गई है. किन दवाओं के दाम बढ़ेंगे?जो दवाएं राष्ट्रीय आवश्यक औषधि सूची (NLEM) में शामिल हैं, उनकी कीमतें बढ़ेंगी. इसमें एंटीबायोटिक्स, पेन किलर, हृदय रोग, डायबिटीज, ब्लड प्रेशर और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों की दवाएं शामिल हैं. सरकार के इस फैसले से जिन लोगों को नियमित रूप से दवाओं की जरूरत होती है, उनके मासिक खर्च में वृद्धि होगी. बुजुर्गों और बीमार लोगों के लिए मुश्किलें. कई वरिष्ठ नागरिक और क्रॉनिक बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को अधिक पैसे खर्च करने पड़ेंगे.हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम में बढ़ोतरी हो सकती है, जिससे प्रीमियम दरें बढ़ने की संभावना है. पिछले साल भी बढ़े थे दामयह पहली बार नहीं है जब दवाओं की कीमतें बढ़ाई जा रही हैं. 2023 में भी NPPA ने 12% तक की वृद्धि की थी, जिससे पहले से ही महंगाई से जूझ रहे लोगों को अतिरिक्त बोझ उठाना पड़ा था.

शहरों में बदलता परिदृश्य: कॉर्पोरेट में सक्रिय महिलाएँ, संघर्षरत पुरुष, क्या खड़ी होने वाली बड़ी समस्या?

Changing scenario in cities: Women active in corporate, men struggling, is a big problem arising? शहरी क्षेत्रों में महिलाओं की बढ़ती रोजगार भागीदारी और पुरुषों में बेरोजगारी की बढ़ती दर, दोनों ही समाज के लिए एक महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत हैं. जहां एक तरफ महिलाओं ने पारंपरिक सामाजिक बाधाओं को पार करते हुए अलग-अलग क्षेत्रों में अपने कदम मजबूत किए हैं, वहीं दूसरी तरफ पुरुषों के लिए रोजगार के अवसरों की कमी बढ़ती जा रही है. यह असंतुलन न सिर्फ परिवारों के भीतर आर्थिक संरचना को प्रभावित कर रहा है, बल्कि समाज में नए सामाजिक और मानसिक दबावों को भी जन्म दे रहा है. ऐसे में इस रिपोर्ट में विस्तार से समझते हैं कि आखिर शहरी क्षेत्रों में महिलाओं के रोजगार में बढ़ रही भागेदारी का क्या कारण है और इस असंतुलन का भविष्य में हमारे समाज और अर्थव्यवस्था पर क्या असर पड़ेगा? क्या यह स्थिति समाज में नई समस्याओं को जन्म दे सकती है? क्या कहता है आंकड़ा हाल ही में ग्रेट लेक्स इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट (GLIM) के शोधकर्ताओं ने एक रिपोर्ट जारी की है. जिसके अनुसार साल 2023-24 में 20 से लेकर 24 साल की उम्र के बीच पुरुषों में बेरोजगारी की दर 10% देखी गई, जबकि महिलाओं में यही दर पुरुषों से कम यानी 7.5% देखा गया है. इसी तरह, 25-29 साल की उम्र में भी पुरुषों की बेरोजगारी दर 7.2% है, जो महिलाओं से ज्यादा है. बेरोजगारी का ये आंकड़ा दर्शाता है कि शहरी इलाकों में पुरुषों के मुकाबले महिलाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ रहे हैं, लेकिन पुरुषों के लिए यह अवसर घटते जा रहे हैं. ग्रेट लेक्स इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट (GLIM) के शोधकर्ताओं ने यह भी पाया कि पिछले कुछ सालों में शहरी भारत में महिलाओं का रोजगार 10% बढ़ा है. जबकि साल 2017-18 से लेकर 2023-24 तक, शहरी महिलाओं में रोजगार की दर 28% तक पहुंच गई है. दिलचस्प बात ये है कि इसी साल 40 साल और उससे ऊपर की उम्र वाली शहरी महिलाओं में रोजगार दर सबसे ज्यादा 38.3% दर्ज की गई. जिससे यह संकेत मिलता है कि महिलाएं अब बच्चों के बड़े होने के बाद अपने करियर पर ज्यादा ध्यान दे पा रही हैं. महिलाओं को नहीं है नौकरी की तलाश इसी रिपोर्ट के अनुसार भले ही देश में महिलाओं के लिए रोजगार के मौके बढ़ रहे हैं, लेकिन बावजूद इसके भारत की 89 मिलियन से ज्यादा शहरी महिलाएं अभी भी नौकरी की तलाश में नहीं हैं. यह संख्या जर्मनी, फ्रांस या यूनाइटेड किंगडम की पूरी जनसंख्या से भी ज्यादा है. इसका मतलब है कि अभी भी लाखों महिलाएं कामकाजी जीवन में शामिल नहीं हो पाई हैं. इस स्थिति में सबसे बड़ी चिंता यह है कि अगर पुरुषों को पर्याप्त नौकरी के मौके नहीं मिलेंगे और महिलाएं बेहतर रोजगार के अवसरों का लाभ उठाएंगी, तो आने वाले समय में समाज में असंतुलन बढ़ सकता है. एक ओर जहां महिलाओं के लिए रोजगार बढ़ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर पुरुषों की बेरोजगारी बढ़ने से समाज में तनाव और असंतोष का माहौल बन सकता है. महिला कर्मचारियों के लिए बेहतर सपोर्ट सिस्टम तैयार इसी रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कई कंपनियां महिला कर्मचारियों के लिए बेहतर सपोर्ट सिस्टम तैयार कर रही है, जैसे स्कूल और ऑफिस के घंटों को मिलाना और बच्चों के लिए चाइल्डकेयर की सुविधा देना. इसके अलावा ज्यादातर कंपनियां महिलाओं को घर से काम करने का विकल्प दे रही है, जिससे वे अधिक आराम से काम कर पा रही हैं, लेकिन घर से काम करने के दौरान नेटवर्किंग की समस्या भी खड़ी हो रही है, जिससे उनकी करियर ग्रोथ में रुकावट आ सकती है. इस शोध में यह भी बताया गया है कि अगर हम सिर्फ महिलाओं के रोजगार पर ध्यान देंगे और पुरुषों के रोजगार की चिंता नहीं करेंगे, तो भविष्य में इसे लेकर समाज में समस्याएं आ सकती हैं. इसलिए, महिलाओं और पुरुषों दोनों के लिए समान रूप से रोजगार के मौके बढ़ाने की जरूरत है, ताकि कोई भी समुदाय इससे प्रभावित न हो. पुरुषों में क्यों बढ़ रही है बेरोजगारी आजकल शहरी इलाकों में महिलाओं का रोजगार बढ़ रहा है, लेकिन पुरुषों के लिए बेरोजगारी एक बड़ी चिंता बन चुकी है. खासकर, जो पारंपरिक काम जैसे निर्माण, मैन्युफैक्चरिंग और कम कौशल वाला काम करते है. इसका मतलब है कि पहले जो काम पुरुषों के लिए आम थे, अब उनमें नौकरी के मौके कम हो गए हैं. इसके अलावा, नई तकनीकी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते इस्तेमाल ने पुरुषों के लिए और भी मुश्किलें पैदा की हैं. पहले जो लोग मैन्युअल (हाथ से काम करने वाले) या कम कौशल वाले काम करते थे, उनके लिए अब इन कामों की जगह मशीनों और रोबोट्स ने ले ली है. अब ये लोग अपनी नौकरी छूट जाने के खतरे से जूझ रहे हैं. शहरी इलाकों में यह समस्या और भी गंभीर हो रही है क्योंकि यहां रोजगार के मौके कम हो गए हैं और युवा पुरुषों को नौकरी ढूंढने में कठिनाई हो रही है. इसे एक बड़ी समस्या के रूप में देखा जा सकता है, जिसका समाधान समय रहते करना जरूरी है. असंतुलन का क्या होगा समाज पर असर? अगर यह असंतुलन जारी रहता है तो इसका समाज और अर्थव्यवस्था पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है. पहले तो, यह पारिवारिक संरचनाओं को प्रभावित करेगा. पारंपरिक समाज में पुरुषों को कमाने वाले के रूप में देखा जाता रहा है, लेकिन अब महिलाएं भी कमाने वाली बन रही हैं. इससे परिवारों के भीतर भूमिकाओं में बदलाव आएगा और कई पुरुष इस बदलाव को स्वीकार करने में मुश्किल महसूस कर सकते हैं. इसके अलावा, बेरोजगारी की बढ़ती दर से पुरुषों के बीच निराशा और मानसिक दबाव बढ़ सकता है. बेरोजगारी और आर्थिक तंगी के कारण अपराधों में वृद्धि हो सकती है और समाज में अस्थिरता पैदा हो सकती है. महिलाओं के बढ़ते रोजगार का प्रभाव पुरुषों पर महिलाओं के बढ़ते रोजगार का प्रभाव पुरुषों पर सीधा और अप्रत्यक्ष रूप से पड़ रहा है. कुछ पुरुषों को यह बदलाव चुनौतीपूर्ण लग रहा है, क्योंकि पहले वे ही परिवार के मुख्य कमाने वाले होते थे. अब जब महिलाएं भी अपने पैरों पर खड़ी हो रही हैं, तो पारंपरिक भूमिका … Read more

नई नवेली दुल्हन को मायके तो दामाद को ससुराल में क्यों मनानी चाहिए पहली होली, कलह और सास-बहू से जुड़ी है वजह

why newly married women should celebrate first holi in mayke know reason behind relationship between saas bahu हर साल की तरह इस साल भी भारत में होली का त्योहार धूमधाम से मनाया जाना है। लोग रंग-बिरंगे रंगों में सराबोर होने के लिए बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। रंगों की बोछार के बीच लोग गिले-शिकवे भी भूल जाते हैं। नई नवेली दुल्हन अपने मायके में जाकर होली मनाती हैं यहां तक कि दामाद को भी ससुराल में होली मनाने के लिए कहा जाता है। लेकिन आपने कभी सोचा है कि आखिर दुल्हन की पहली होली मायके तो दामाद की ससुराल में क्यों होना चाहिए। और, नई नवेली दुल्हन की तरह क्या प्रेग्नेंट महिलाओं को भी मायके में मायके में होली मनानी चाहिए। इसकी वजह सास-बहू और पति-पत्नी की रिश्तों से जुड़ी हुई है। जिसके बारे में कंटेंट क्रिएटर सोनिया चौहान ने भी बताया है।(सभी फोटो सांकेतिक हैं) सबसे पहले जानें कारण पौराणिक कथा के अनुसार, होलिका एक दिव्य वस्‍त्र को ओढ़कर प्रह्लाद को जलाने के लिए आग में बैठी थी, लेकिन जब प्रह्लाद ने भगवान विष्णु के नाम का जाप किय तो, होलिका का अग्निरोधक वस्त्र प्रह्लाद के ऊपर आ गया और वह बच गए, जबकि होलिका भस्म हो गई। कहते हैं कि जिस दिन होलिका आग में बैठी का काम किया, अगले दिन उसका विवाह भी होना था।उनके होने वाली पति का नाम इलोजी बताया जाता है, इलोजी की मां जब बेटे की बारात लेकर होलिका के घर पहुंची तो उन्होंने उसकी चिता जलते दिखी। बेटे का बसने वाला संसार उजड़ता देख बेसुध हो गईं और प्राण त्याग दिए। बस तभी से प्रथा चला आ रही है कि नई बहू को ससुराल में पहली होली नहीं देखनी चाहिए। सास बहू के झगड़े से जुड़ा कारण होली और होलिका दहन के वक्त सास-बहू का साथ में रहना ठीक नहीं माना जाता है। नई दुल्हन के लिए कहा जाता है कि उसे अपनी पहली होली ससुराल के जगह मायके में मनाना चाहिए। जब सास -बहू अगर साथ में होलिका दहन देखती हैं तो घर में कलह की शुरुआत हो जाती है। सास-ससुर के साथ रिश्ते खराब होने लगते हैं, बिना बात के झगड़े भी होने लगते हैं। सास-बहू के रिश्तों में यदि तकरार हो तो उससे आने वाले समय में तनाव बढ़ जाता है।वहीं एक और धारणा है जो कहीं न कहीं सटीक रहती है कि शादी के तुरंत बाद दुल्हन ससुराल में कंफर्टेबल महसूस नहीं करती है, इसलिए मायके में होली मनाने का चलन है जिसे प्रथा का नाम दे दिया गया है।

International Women’s Day : क्या है वुमन डे का इतिहास? जानें इसे जुड़ी खास बातें

international womens day 2025 history significance and this year theme know here हर साल 8 मार्च को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाता है. जिसे हमेशा अलग-अलग थीम के साथ सेलिब्रेट किया जाता है. आइए आर्टिकल में जानते हैं अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाने के शुरुआत कब और कैसे हुई, साथ ही इस साल की थाम के बारे में हर साल 8 मार्च को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाता है. आजकल महिलाएं घरेलू कामों के अलावा भी अलग-अलग क्षेत्रों में अपने कौशल का प्रदर्शन करती हैं. ऐसे में इस दिन महिलाओं की सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक उपलब्धियों को सम्मानित करने का अवसर होता है. इस दिन का उद्देश्य महिलाओं के अधिकारों के प्रति जागरूकता फैलाना और समानता की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करना है. ऑफिस, कॉलेज और कई जगहों पर अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस को सेलिब्रेट किया जाता है. इसकी शुरुआत के पीछे की कहानी के बारे में बहुत कम लोगों को ही पता होगा. हर साल महिला दिवस को एक थीम के साथ सेलिब्रेट किया जाता है. आइए जानते हैं इस आर्टिकल में इसका इतिहास और इस साल की थीम के बारे में. अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस का इतिहास1908 में न्यूयॉर्क शहर में महिलाएं बेहतर कार्य स्थितियों, मतदान अधिकार और समान वेतन के लिए सड़कों पर परेड निकाली थी. 1910 में कोपेनहेगन में एक अंतरराष्ट्रीय महिला सम्मेलन आयोजित किया गया, जहां क्लारा जेटकिन ने महिला दिवस मनाने का प्रस्ताव रखा. पहला अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस 19 मार्च 1911 में ऑस्ट्रिया, जर्मनी, स्विट्जरलैंड और डेनमार्क में मनाया गया था. बाद में महिला दिवस की तारीख को बदलकर 8 मार्च कर दिया गया. तब से महिला दिवस पूरी दुनिया में 8 मार्च को ही मनाया जा रहा है. 1975 में संयुक्त राष्ट्र ने पहली बार आधिकारिक रूप से अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस को मान्यता दी थी. तब से हर साल इसे एक थीम का मनाया जाता है. पहले महिलाओं को समाज में एक सीमित दायरे में रखा जाता था, लेकिन समय के साथ उनकी स्थिति में सुधार हुआ है. आज महिलाएं न केवल घर के कार्यों को संभालती हैं, बल्कि विभिन्न क्षेत्रों में अपनी कड़ी मेहनत और संघर्ष से सफलता की मिसाल भी प्रस्तुत कर रही हैं. आज के समय में महिलाएं हर क्षेत्र में सफलता की नई ऊंचाइयों को छू रही हैं, लेकिन फिर भी महिलाओं को कई प्रकार की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है. भेदभाव और घरेलू हिंसा जैसी की समस्याएं आज भी महिलाओं की जिंदगी का हिस्सा है. इस दिन का उद्देश्य इन समस्याओं के खिलाफ आवाज उठाना और समानता की दिशा में कदम बढ़ाना है. क्या है इस साल की थीम?इस साल अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की थीम “सभी महिलाओं और लड़कियों के लिए: अधिकार, समानता. सशक्तिकरण.” है. इस थीम का मतलब सभी महिलाओं के लिए सम्मान, अधिकार, शक्ति और अवसरों से उनके भविष्य को बेहतर बनाना है. इस दिन को मनाने का मतलब सिर्फ ये नहीं है कि हम महिलाओं की सराहना करें, बल्कियह भी है कि हम उन्हें सशक्त बनाने के लिए काम करें. महिलाओं के लिएसम्मान,अवसर, सुरक्षा, शिक्षा और स्वास्थ्य की स्थिति में सुधार के लिए सभी को मिलकर काम करना होगा. अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस इस दिशा में पॉजिटिव बदलाव लाने के लिए प्रेरित करता है.

टीम इंडिया चैंपियंस ट्रॉफी के फाइनल में: ऑस्ट्रेलिया को 4 विकेट से सेमीफाइनल हराया

Team India in the final of Champions Trophy: Defeated Australia by 4 wickets in the semi-final विराट कोहली ने करियर की 74वीं फिफ्टी पूरी की है। टीम इंडिया ने ऑस्ट्रेलिया को 4 विकेट से हराकर चैंपियंस ट्रॉफी के फाइनल में जगह बना ली है। सेमीफाइनल में प्लेयर ऑफ द मैच बने चेज मास्टर विराट कोहली, जिन्होंने 84 रन की बेहद अहम पारी खेली। दुबई के इंटरनेशनल स्टेडियम में मंगलवार को खेले गए सेमीफाइनल में कोहली ने रन चेज में 3 बड़ी साझेदारियां भी कीं। उन्होंने श्रेयस अय्यर के साथ 91, अक्षर पटेल के साथ 44 और केएल राहुल के साथ 47 रन जोड़े। इन्हीं पार्टनरशिप ने रन चेज को आसान बनाया। आखिर में हार्दिक पंड्या ने तेजी से 28 रन बनाए और केएल राहुल ने छक्का मारकर जीत दिलाई। वे 42 रन बनाकर नाबाद लौटे। ऑस्ट्रेलिया ने पहले बल्लेबाजी की और 265 रन का टारगेट दिया। ऑस्ट्रेलिया से कप्तान स्टीव स्मिथ ने 73 और एलेक्स कैरी ने 61 रन बनाए। इंडियन बॉलर्स ने ऑस्ट्रेलिया को ऑलआउट कर दिया। मोहम्मद शमी ने 3, रवींद्र जडेजा और वरुण चक्रवर्ती ने 2-2 विकेट लिए।

चैंपियंस ट्रॉफी– भारत को 265 रन का टारगेट: सेमीफाइनल में ऑस्ट्रेलिया ऑलआउट; शमी को 3, जडेजा–वरुण को 2–2 विकेट; स्मिथ–कैरी की फिफ्टी

Champions Trophy- India has a target of 265 runs दुबई । 38वें ओवर की तीसरी बॉल पर अक्षर ने ग्लेन मैक्सवेल को बोल्ड किया। 37वें ओवर की तीसरी बॉल में मोहम्मद शमी ने स्टीव स्मिथ (73 रन) को फुलटॉस पर बोल्ड किया।चैंपियंस ट्रॉफी के सेमीफाइनल में ऑस्ट्रेलिया टॉस जीतकर बल्लेबाजी कर रहा है। 49 ओवर के बाद टीम का स्कोर 10 विकेट के नुकसान पर 264 रन है।नाथन एलिस (10 रन) को शमी ने कोहली के हाथों कैच कराया। उन्होंने स्टीव स्मिथ (73 रन) और कूपर कोनोली (शून्य) के विकेट लिए। एलेक्स कैरी (60 रन) श्रेयस अय्यर के डायरेक्ट थ्रो पर रनआउट हुए। वरुण चक्रवर्ती ने बेन ड्वारशस (19 रन) और ट्रैविस हेड (39 रन) के विकेट लिए। अक्षर ने ग्लेन मैक्सवेल को बोल्ड किया। रवींद्र जडेजा ने जोश इंग्लिस (11 रन) और मार्नस लाबुशेन (29 रन) को पवेलियन भेजा। मैच दुबई के इंटरनेशनल स्टेडियम में खेला जा रहा है।

विश्लेषण: प्रयागराज महाकुम्भ 2025 मेले में हुई त्रासदी के बाद उठ रहे हैं कई सवाल

Analysis: Many questions are being raised after the tragedy at the Prayagraj Maha Kumbh 2025 fair सम्पादकीय लेख भोपाल। यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ के समर्थक चाहे जितनी कोशिश कर लें, कुम्भ मेले में हुई त्रासदी के पीछे उनके प्रशासन की लापरवाही और कुप्रबंधन को छिपाया नहीं जा सकता। जैसे-जैसे नए विवरण सामने आ रहे हैं, हादसे की भयावहता बढ़ती ही जा रही है। यह भी पता चला है कि 29 जनवरी की सुबह पहली भगदड़ के बाद, कुछ ही घंटों के भीतर थोड़ी दूरी पर दूसरी भगदड़ भी हुई थी। इसके अलावा कुम्भ में कुछ मर्तबा आगजनी की घटनाएं भी हुई हैं, जिनमें सरकार द्वारा श्रद्धालुओं के लिए विशेष रूप से बनाए गए दर्जनों आलीशान टेंट जलकर राख हो गए। आधिकारिक तौर पर मृतकों की संख्या 30 बताई गई है। लेकिन मौनी अमावस्या के दिन स्नान के लिए जिस पैमाने पर भीड़ उमड़ी थी, उसके मद्देनजर यह संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है। कपड़ों, जूतों, कम्बलों और अन्य निजी सामानों के अवशेष हर जगह बिखरे पड़े थे, जो इस बात के जीवंत साक्ष्य थे कि भीड़ में कुचलने के भय से श्रद्धालु अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने पर मजबूर हो गए थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस त्रासदी के कुछ ही घंटों के भीतर एक्स पर अपनी शोक संवेदनाएं व्यक्त कर दी थीं, लेकिन उत्तर प्रदेश प्रशासन बहुत समय तक यही दिखावा करता रहा कि कुछ हुआ ही नहीं है। इसके बाद मोदी ने यूपी सीएम से चार बार फोन पर बात की, गृह मंत्री अमित शाह और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भी एक्स पर पोस्ट किया, तब जाकर यूपी प्रशासन को अपनी चुप्पी तोड़ने और सच्चाई स्वीकारने के लिए मजबूर होना पड़ा। हादसे के पूरे 17 घंटे बाद, 29 जनवरी को शाम 7 बजे उन्होंने भगदड़ की जिम्मेदारी लेते हुए बयान जारी किया और ऐसी घटना दोबारा होने से रोकने के इंतजाम करने का वादा किया। उसके बाद से, यूपी सरकार ने भीड़ को सफलतापूर्वक प्रबंधित करने का प्रत्यक्ष अनुभव रखने वाले दो वरिष्ठ अधिकारियों को ड्यूटी पर लगाया है, अतिरिक्त बल तैनात किए हैं और वाहनों और श्रद्धालुओं की आवाजाही को नियंत्रित करने के लिए नए सिरे से यातायात योजना बनाई है, लेकिन नुकसान पहले ही हो चुका था। जोशीमठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने हादसे के बाद योगी के इस्तीफे की मांग की है और उन पर इस मामले में देश को गुमराह करने का आरोप लगाया। अन्य प्रमुख संतों और साधुओं ने सार्वजनिक रूप से तो कुछ नहीं कहा, लेकिन माना जा रहा है कि कई लोग मन ही मन शंकराचार्य की भावनाओं को समर्थन करते हैं और वे इस बात से नाराज हैं कि मौनी अमावस्या का पवित्र दिन तीर्थयात्रियों के शवों से दागदार हो गया। शंकराचार्य ने कहा कि अगर उन्हें भगदड़ और उसके परिणामस्वरूप हुई मौतों के बारे में पता होता, तो वे मृतकों के लिए उपवास करते और आनुष्ठानिक रूप से तीर्थस्नान नहीं करते। यूपी के सीएम के रूप में आठ साल के अपने कार्यकाल में योगी ने खुद को हिंदुत्व के एक प्रखर चेहरे के रूप में स्थापित कर दिया है। इससे न केवल उन्हें संघ का समर्थन मिला जिसने लोकसभा चुनावों में यूपी में भाजपा की करारी हार के बावजूद हर परिस्थिति में उनका साथ दिया बल्कि उन्हें खुद को देश भर में एक लोकप्रिय नेता के रूप में स्थापित करने में भी मदद मिली। आज वे मोदी के बाद भाजपा के दूसरे सबसे लोकप्रिय प्रचारक हैं। लेकिन कुम्भ हादसे के बाद एक सक्षम प्रशासक के रूप में उनकी छवि को झटका लगा कुम्भ का निर्बाध आयोजन उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री की साख को मजबूत कर सकता था। किंतु प्रयागराज में हुए हादसे के बाद अब यूपी प्रशासन से सवाल पूछे जा रहे हैं। यह किसी से छुपा नहीं है कि यूपी की भाजपा में अंतर्कलह है। है। ऐसा इसलिए भी है, क्योंकि वे कुम्भ शुरू होने से पहले और बाद में लगभग हर दूसरे दिन प्रयागराज का दौरा कर रहे थे, वे व्यक्तिगत रूप से वहां की व्यवस्थाओं की निगरानी कर रहे थे और इस पर बारीकी से नजर रखे हुए थे कि कुम्भ के प्रबंधन के लिए जो प्रशासनिक मशीनरी उन्होंने लगाई थी, वह सुचारु रूप से काम कर रही है या नहीं। बीवीआईपी के लिए विशेष व्यवस्था, उनकी गाड़ियों की अनियंत्रित आवाजाही और आम श्रद्धालुओं को नदी तक पहुंचने के लिए 20 किलोमीटर से अधिक पैदल चलना, खाने-पीने की चीजों की ऊंची लागत आदि को लेकर भी अनेक श्रद्धालुओं में गुस्सा है। दुनिया के सबसे बड़े धार्मिक समागम का निर्बाध आयोजन हिंदुत्व के प्रतीक और कुशल प्रशासक के रूप में योगी की साख को मजबूत करता, किंतु प्रयागराज में अफसरों की लापरवाही से हुए हादसे के बाद अब उनके नेतृत्व वाले प्रशासन से सवाल पूछे जा रहे हैं। यह किसी से छुपा नहीं है कि यूपी की भाजपा में अंतर्कलह है। 26 फरवरी को मेला समाप्त होने के बाद यूपी की राजनीति में बहुत कुछ देखने को मिल सकता है।

महाकुंभ में फिर लगी आग, कई पंडाल चपेट में आए; कोई हताहत नहीं

Fire broke out again in Mahakumbh, many pandals got affected; no casualties महाकुंभ के सेक्टर 22 छतनाग झूंसी में बने टेंट सिटी में बृहस्पतिवार को आग लग गई। आग लगने नके कारणों का पता नहीं चल सका है। जब तक लोग कुछ समझ पाते आगे ने विकराल रूप धारण कर लिया। टेंट सिटी के दर्जन भर से अधिक टेंट जलकर राख हो गए। राहत की बात यह रही कि हादसे में किसी की जान नहीं गई। सूचना पाकर दमकल की कई गाड़ियां मौके पर पहुूंच गईं। काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया जा सका।

महात्मा गांधी की पुण्यतिथि: राष्ट्रपति मुर्मू ने दी बापू को दी श्रद्धांजलि; राहुल-खरगे ने भी याद किया

Mahatma Gandhi’s death anniversary: ​​President Murmu paid tribute to Bapu; Rahul-Kharge also remembered महात्मा गांधी की 77वीं पुण्यतिथी पर गुरुवार को राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू, कांग्रेस सांसद राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे समेत कई दिग्गज नेताओं ने बापू को श्रद्धांजलि अर्पित की। मुर्मू ने गांधी की समाधि राजघाट पर जाकर पुष्पांजलि अर्पित की। इसके अलावा, उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़, केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह और मनोहर लाल खट्टर समेत अन्य नेताओं ने भी गांधी को श्रद्धांजलि दी। साथ ही बापू की याद में दो मिनट का मौन भी रखा गया। राहुल गांधी ने दी श्रद्धांजलिकांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और सांसद राहुल गांधी ने बापू की 77वीं पुण्यतिथि पर उन्हें याद किया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पोस्ट कर लिखा कि गांधी जी सिर्फ एक व्यक्ति नहीं, वह भारत की आत्मा हैं, और हर भारतीय में आज भी जीवित हैं। उन्होंने आगे लिखा कि सत्य, अहिंसा और निडरता की शक्ति बड़े से बड़े साम्राज्य की जड़ें हिला सकती हैं – पूरा विश्व उनके इन आदर्शों से प्रेरणा लेता है। राष्ट्रपिता, महात्मा, हमारे बापू को उनके शहीद दिवस पर शत-शत नमन। कांग्रेस अध्यक्ष खरगे ने बापू को दी श्रद्धांजलिमहात्मा गांधी की पुण्यतिथी पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी बापू को याद किया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि आप मुझे बेड़ियों से जकड़ सकते हैं, यातना दे सकते हैं, आप इस शरीर को ख़त्म भी कर सकते हैं, लेकिन आप मेरे विचारों को क़ैद नहीं कर सकते। महात्मा गांधी बलिदान दिवस पर बापू को विनम्र श्रद्धांजलि। कर्नाटक के डिप्टी सीएम ने भी बापू को किया यादबापू की पुण्यतिथि पर कर्नाटक के डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार ने पुष्पांजलि अर्पित कर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि दी।

Cabinet:16300 करोड़ रुपये के खनिज मिशन को मंजूरी दी, केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने किया एलान

Cabinet: Mineral mission worth Rs 16300 crore approved, Union Minister Ashwini Vaishnav announced केंद्रीय मंत्रीमंडल ने 16,300 करोड़ रुपये के खनिज मिशन को मंजूरी दे दी है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बुधवार को इसका एलान किया। इसके साथ ही कैबिनेट ने सी श्रेणी के भारी गुड़ से उत्पादित इथेनॉल की एक्स-मिल कीमत 56.28 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 57.97 रुपये प्रति लीटर करने को मंजूरी दे दी है। सरकार की ओर से निर्धारित इथेनॉल की कीमतें 2022-23 इथेनॉल आपूर्ति वर्ष (नवंबर-अक्तूबर) के बाद से नहीं बढ़ाई गई हैं। गन्ने के रस, बी-हैवी गुड़ और सी-हैवी गुड़ से उत्पादित इथेनॉल की वर्तमान दरें क्रमशः 65.61 रुपये, 60.73 रुपये और 56.28 रुपये प्रति लीटर हैं। कैबिनेट के फैसले से पहले चीनी कंपनियों के शेयरों में दिखा एक्शनइस बीच, चीनी और इथेनॉल से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में तेजी दिखी है। ईआईडी-पैरी, श्री रेणुका शुगर्स, बलरामपुर चीनी मिल्स और त्रिवेणी इंजीनियरिंग के शेयरों में दोपहर 1:10 बजे तक बीएसई सेंसेक्स पर 3.7%, 4.5%, 2.5% और 2.3% की बढ़त दर्ज की गई। सेंसेक्स 0.62% की बढ़त दिखी।

विपक्ष के 10 सांसद निलंबित, वक्फ बोर्ड संसदीय समिति की बैठक में हंगामे के बाद कार्रवाई

10 opposition MPs suspended, action taken after uproar in Waqf Board Parliamentary Committee meeting Waqf Board Parliamentary Panel: वक्फ संशोधन विधेयक 2024 पर संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) की बैठक के दौरान जमकर हंगामा हुआ। इस घटनाक्रम के बाद शुक्रवार को 10 विपक्षी सांसदों को एक दिन के लिए निलंबित कर दिया गया। निलंबित सांसदों के नाम कल्याण बनर्जी, मोहम्मद जावेद, ए राजा, असदुद्दीन ओवैसी, नासिर हुसैन, मोहिबुल्लाह, एम अब्दुल्ला, अरविंद सावंत, नदीमुल हक और इमरान मसूद शामिल हैं। बैठक के बाद तृणमूल कांग्रेस के सांसद कल्याण बनर्जी ने समिति के अध्यक्ष जगदम्बिका पाल की आलोचना की और कहा कि उन्होंने विपक्ष की आवाज को नजरअंदाज किया है। कल्याण बनर्जी ने जगदम्बिका पाल पर आरोप लगाया कि वे “जमींदारी” की तरह कार्यवाही चला रहे हैं, जिसका मतलब है कि वे तानाशाही रवैया अपना रहे हैं। वहीं जेपीसी अध्यक्ष जगदम्बिका पाल ने कहा कि बैठक के दौरान विपक्ष के सांसद संसद की तरह हंगामा करने लगे। शोर मचाने के साथ ही अमर्यादित शब्दों का प्रयोग भी किया। इसके बाद सांसद निशिकांत दुबे प्रस्ताव लाए, इसके बाद सांसदों को निलंबित किया गया है। क्या बोले निशिकांत दुबे?जगदंबिका पाल ने आगे कहा कि बैठक के एजेंडे में कोई बदलाव नहीं हुआ। हमने 34 बैठकें कीं, 250 डेलिगेशन को बुलाया… किसी भी जेपीसी ने इतने लोकतांत्रिक तरीके से काम नहीं किया है। वहीं सांसद निशिकांत दुबे ने कहा कि विपक्ष, विशेष रूप से ओवेसी जी का मानना ​​था कि जम्मू-कश्मीर का पूरा प्रतिनिधित्व नहीं सुना गया और निर्वाचित प्रतिनिधियों को बुलाया जाना चाहिए था। आज की बैठक विपक्ष के सुझाव के आधार पर अध्यक्ष द्वारा स्थगित कर दी गई। मीरवाइज के सामने इन लोगों ने हंगामा किया, दुर्व्यवहार किया और संसदीय लोकतंत्र के खिलाफ काम किया।

छोटे बच्चों को पिलाते हैं बॉटल से दूध तो जान लें खतरे, हो सकती हैं ये बीमारियां

Baby Bottle Feeding Risks : छोटे बच्चों के लिए मां का दूध सबसे पौष्टिक माना जाता है. यह उनकी ओवरऑल हेल्थ की ग्रोथ में अहम रोल निभाता है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि बच्चा मां का दूध जितना ज्यादा करेगा, उसका विकास उतना ही ज्यादा होता है. इससे बीमारियों का खतरा भी कम होता है. हालांकि, आजकल बिजी लाइफस्टाइल की वजह से कई बार वर्किंग वुमन अपने बच्चे को ब्रेस्ट फीडिंग कीबजाय बॉटल का दूध पिलाती हैं, जो बच्चे की सेहत (Child Health) के लिए बिल्कुल ठीक नहीं है. यह उन्हें कई तरह से प्रभावित कर सकती है और ग्रोथ में भी समस्याएं पैदा कर सकती है. इससे कई तरह की बीमारियां हो सकती हैं. कितने समय बाद बच्चे को दे सकते हैं बॉटल का दूध वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) के अनुसार, न्यूबॉर्न बच्चे को पहले 6 महीने तक सिर्फ मां का दूध (mother’s milk) ही पिलाना चाहिए. इससे बच्चों का डेवलपमेंट सही तरह होता है. उनकी बॉडी स्ट्रॉन्ग होती है और इम्यूनिटी बढ़ती है.अगर किसी वजह से मां को दूध कम बन रहा है या नहीं मिल पा रहा है यानी ब्रेस्ट फीडिंग पॉसिबल नहीं हो पा रहा है तो जन्म के दो या तीन हफ्ते बाद बॉटल का दूध दे सकते हैं. हालांकि, यह सिर्फ अस्थायी उपाय ही है, कम से कम छह महीने तक इससे बचने की ही कोशिश करनी चाहिए. बच्चे को बॉटल का दूध पिलाने के खतरे बच्चे जब मां का दूध पीते हैं तो उनकी इम्यूनिटी मजबूत होती है. जब बच्चे को ब्रेस्ट फीडिंग की बजाय बॉटल से दूध पिलाया जाता है, तो उसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो सकती है. जिससे वह बार-बार सर्दी-खांसी, बुखार जैसी समस्याओं की चपेट में आ सकता है. छोटे बच्चों को बॉटल का दूध पिलाने से उनमें मोटापा बढ़ सकता है. खासकर तब जब बच्चों को जानवरों या पाउडर वाले दूध ही पिलाए जाए. दरअसल, जानवरों के दूध में फैट ज्यादा होती है,जो बच्चे के वजन को काफी ज्यादा बढ़ा सकता है. बॉटल का दूध पीने से बच्चों की ग्रोथ धीमी हो सकती है. बॉटल दूध से बच्चों के शरीर में माइक्रोप्लास्टिक प्रवेश कर सकता है, जो उनके शारीरिक और मानसिक विकास को स्लो कर सकता है. इससे उनकी ओवरऑल हेल्थ कमजोर हो सकती है. रबड़ के निप्पल वाले बॉटल से दूध पीने से बच्चों के फेफड़ों को नुकसान पहुंच सकता है. इससे लंग्स कमजोर हो सकते हैं. जिससे बच्चे को सांस की समस्याएं हो सकती हैं. कई मामलों में यह निमोनिया का खतरा भी बढ़ा सकता है. Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

slot server thailand super gacor

spaceman slot gacor

slot gacor 777

slot gacor

Nexus Slot Engine

bonus new member

olympus

situs slot bet 200

slot gacor

slot qris

link alternatif ceriabet

slot kamboja

slot 10 ribu

https://mediatamanews.com/

slot88 resmi

slot777

https://sandcastlefunco.com/

slot bet 100

situs judi bola

slot depo 10k

slot88

slot 777

spaceman slot pragmatic

slot bonus

slot gacor deposit pulsa

rtp slot pragmatic tertinggi hari ini

slot mahjong gacor

slot deposit 5000 tanpa potongan

mahjong

spaceman slot

https://www.deschutesjunctionpizzagrill.com/

spbo terlengkap

cmd368

368bet

roulette

ibcbet

clickbet88

clickbet88

clickbet88

bonus new member 100

slot777

https://bit.ly/m/clickbet88

https://vir.jp/clickbet88_login

https://heylink.me/daftar_clickbet88

https://lynk.id/clickbet88_slot

clickbet88

clickbet88

https://www.burgermoods.com/online-ordering/

https://www.wastenotrecycledart.com/cubes/

https://dryogipatelpi.com/contact-us/

spaceman slot gacor

ceriabet link alternatif

ceriabet rtp

ceriabet

ceriabet link alternatif

ceriabet link alternatif

ceriabet login

ceriabet login

cmd368

sicbo online live