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Cabinet:16300 करोड़ रुपये के खनिज मिशन को मंजूरी दी, केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने किया एलान

Cabinet: Mineral mission worth Rs 16300 crore approved, Union Minister Ashwini Vaishnav announced केंद्रीय मंत्रीमंडल ने 16,300 करोड़ रुपये के खनिज मिशन को मंजूरी दे दी है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बुधवार को इसका एलान किया। इसके साथ ही कैबिनेट ने सी श्रेणी के भारी गुड़ से उत्पादित इथेनॉल की एक्स-मिल कीमत 56.28 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 57.97 रुपये प्रति लीटर करने को मंजूरी दे दी है। सरकार की ओर से निर्धारित इथेनॉल की कीमतें 2022-23 इथेनॉल आपूर्ति वर्ष (नवंबर-अक्तूबर) के बाद से नहीं बढ़ाई गई हैं। गन्ने के रस, बी-हैवी गुड़ और सी-हैवी गुड़ से उत्पादित इथेनॉल की वर्तमान दरें क्रमशः 65.61 रुपये, 60.73 रुपये और 56.28 रुपये प्रति लीटर हैं। कैबिनेट के फैसले से पहले चीनी कंपनियों के शेयरों में दिखा एक्शनइस बीच, चीनी और इथेनॉल से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में तेजी दिखी है। ईआईडी-पैरी, श्री रेणुका शुगर्स, बलरामपुर चीनी मिल्स और त्रिवेणी इंजीनियरिंग के शेयरों में दोपहर 1:10 बजे तक बीएसई सेंसेक्स पर 3.7%, 4.5%, 2.5% और 2.3% की बढ़त दर्ज की गई। सेंसेक्स 0.62% की बढ़त दिखी।

विपक्ष के 10 सांसद निलंबित, वक्फ बोर्ड संसदीय समिति की बैठक में हंगामे के बाद कार्रवाई

10 opposition MPs suspended, action taken after uproar in Waqf Board Parliamentary Committee meeting Waqf Board Parliamentary Panel: वक्फ संशोधन विधेयक 2024 पर संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) की बैठक के दौरान जमकर हंगामा हुआ। इस घटनाक्रम के बाद शुक्रवार को 10 विपक्षी सांसदों को एक दिन के लिए निलंबित कर दिया गया। निलंबित सांसदों के नाम कल्याण बनर्जी, मोहम्मद जावेद, ए राजा, असदुद्दीन ओवैसी, नासिर हुसैन, मोहिबुल्लाह, एम अब्दुल्ला, अरविंद सावंत, नदीमुल हक और इमरान मसूद शामिल हैं। बैठक के बाद तृणमूल कांग्रेस के सांसद कल्याण बनर्जी ने समिति के अध्यक्ष जगदम्बिका पाल की आलोचना की और कहा कि उन्होंने विपक्ष की आवाज को नजरअंदाज किया है। कल्याण बनर्जी ने जगदम्बिका पाल पर आरोप लगाया कि वे “जमींदारी” की तरह कार्यवाही चला रहे हैं, जिसका मतलब है कि वे तानाशाही रवैया अपना रहे हैं। वहीं जेपीसी अध्यक्ष जगदम्बिका पाल ने कहा कि बैठक के दौरान विपक्ष के सांसद संसद की तरह हंगामा करने लगे। शोर मचाने के साथ ही अमर्यादित शब्दों का प्रयोग भी किया। इसके बाद सांसद निशिकांत दुबे प्रस्ताव लाए, इसके बाद सांसदों को निलंबित किया गया है। क्या बोले निशिकांत दुबे?जगदंबिका पाल ने आगे कहा कि बैठक के एजेंडे में कोई बदलाव नहीं हुआ। हमने 34 बैठकें कीं, 250 डेलिगेशन को बुलाया… किसी भी जेपीसी ने इतने लोकतांत्रिक तरीके से काम नहीं किया है। वहीं सांसद निशिकांत दुबे ने कहा कि विपक्ष, विशेष रूप से ओवेसी जी का मानना ​​था कि जम्मू-कश्मीर का पूरा प्रतिनिधित्व नहीं सुना गया और निर्वाचित प्रतिनिधियों को बुलाया जाना चाहिए था। आज की बैठक विपक्ष के सुझाव के आधार पर अध्यक्ष द्वारा स्थगित कर दी गई। मीरवाइज के सामने इन लोगों ने हंगामा किया, दुर्व्यवहार किया और संसदीय लोकतंत्र के खिलाफ काम किया।

छोटे बच्चों को पिलाते हैं बॉटल से दूध तो जान लें खतरे, हो सकती हैं ये बीमारियां

Baby Bottle Feeding Risks : छोटे बच्चों के लिए मां का दूध सबसे पौष्टिक माना जाता है. यह उनकी ओवरऑल हेल्थ की ग्रोथ में अहम रोल निभाता है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि बच्चा मां का दूध जितना ज्यादा करेगा, उसका विकास उतना ही ज्यादा होता है. इससे बीमारियों का खतरा भी कम होता है. हालांकि, आजकल बिजी लाइफस्टाइल की वजह से कई बार वर्किंग वुमन अपने बच्चे को ब्रेस्ट फीडिंग कीबजाय बॉटल का दूध पिलाती हैं, जो बच्चे की सेहत (Child Health) के लिए बिल्कुल ठीक नहीं है. यह उन्हें कई तरह से प्रभावित कर सकती है और ग्रोथ में भी समस्याएं पैदा कर सकती है. इससे कई तरह की बीमारियां हो सकती हैं. कितने समय बाद बच्चे को दे सकते हैं बॉटल का दूध वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) के अनुसार, न्यूबॉर्न बच्चे को पहले 6 महीने तक सिर्फ मां का दूध (mother’s milk) ही पिलाना चाहिए. इससे बच्चों का डेवलपमेंट सही तरह होता है. उनकी बॉडी स्ट्रॉन्ग होती है और इम्यूनिटी बढ़ती है.अगर किसी वजह से मां को दूध कम बन रहा है या नहीं मिल पा रहा है यानी ब्रेस्ट फीडिंग पॉसिबल नहीं हो पा रहा है तो जन्म के दो या तीन हफ्ते बाद बॉटल का दूध दे सकते हैं. हालांकि, यह सिर्फ अस्थायी उपाय ही है, कम से कम छह महीने तक इससे बचने की ही कोशिश करनी चाहिए. बच्चे को बॉटल का दूध पिलाने के खतरे बच्चे जब मां का दूध पीते हैं तो उनकी इम्यूनिटी मजबूत होती है. जब बच्चे को ब्रेस्ट फीडिंग की बजाय बॉटल से दूध पिलाया जाता है, तो उसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो सकती है. जिससे वह बार-बार सर्दी-खांसी, बुखार जैसी समस्याओं की चपेट में आ सकता है. छोटे बच्चों को बॉटल का दूध पिलाने से उनमें मोटापा बढ़ सकता है. खासकर तब जब बच्चों को जानवरों या पाउडर वाले दूध ही पिलाए जाए. दरअसल, जानवरों के दूध में फैट ज्यादा होती है,जो बच्चे के वजन को काफी ज्यादा बढ़ा सकता है. बॉटल का दूध पीने से बच्चों की ग्रोथ धीमी हो सकती है. बॉटल दूध से बच्चों के शरीर में माइक्रोप्लास्टिक प्रवेश कर सकता है, जो उनके शारीरिक और मानसिक विकास को स्लो कर सकता है. इससे उनकी ओवरऑल हेल्थ कमजोर हो सकती है. रबड़ के निप्पल वाले बॉटल से दूध पीने से बच्चों के फेफड़ों को नुकसान पहुंच सकता है. इससे लंग्स कमजोर हो सकते हैं. जिससे बच्चे को सांस की समस्याएं हो सकती हैं. कई मामलों में यह निमोनिया का खतरा भी बढ़ा सकता है. Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

Mahakumbh 2025: सबसे बड़ा अखाड़ा कौन सा है, कुंभ मेला का होते हैं मुख्य आकर्षण

mahakumbh 2025 biggest juna akhara in india kumbh mela akhadas history Mahakumbh 2025: महाकुंभ सनातन धर्म का सबसे बड़ा मेला है. इस मेले में देश-दुनिया से लाखों-करोड़ों लोग आते हैं. महाकुंभ में अखाड़े आकर्षण का प्रमुख केंद्र होते हैं. इस दौरान अखाड़ों का पेशवाई और नगरप्रवेश होता है. सभी अखाड़ों की अपनी भूमिका होती है. महाकुंभ 2025 प्रयागराज में साधु-संतों के अखाड़े प्रवेश कर रहे हैं. आइए जानते हैं महाकुंभ का सबसे बड़ा अखाड़ा कौन सा है. महाकुंभ शुरू – 13 जनवरी 2025महाकुंभ समाप्त – 26 फरवरी 2025अखाड़ा क्या है ? (What is Akhara) अखाड़ा नाम सुनते ही मन में कुश्ती की तस्वीर आती है लेकिन साधु-संतों के संदर्भ में अखाड़े एक तरह से हिंदू धर्म के मठ कहे जा सकते हैं. अखाड़ा साधुओं का वह दल होता है जो शस्त्र विद्या में निपुण होता है. किसने की अखाड़े की शुरुआत अखाड़ों की शुरुआत आदि शंकराचार्य ने की थी। कहा जाता है कि उन्होंने हिंदू धर्म की रक्षा के लिए शस्त्र विद्या में निपुण साधुओं के संगठन बनाए थे. अभी कुल 13 अखाड़े हैं, जिन्हें 3 कैटेगरी शैव, वैष्णव और उदासीन में बांटा गया है. कितने अखाड़े हैं शैव अखाड़े- शैव संप्रदाय के कुल सात अखाड़े हैं। इनके अनुयायी भगवान शिव की पूजा करते हैं.वैष्णव अखाड़े – वैष्णव संप्रदाय के तीन अखाड़े हैं, जो भगवान विष्णु और उनके अवतारों की पूजा करते हैं.उदासीन अखाड़े – उदासीन संप्रदाय के भी तीन अखाड़े हैं, इस अखाड़े की अनुयायी ‘ॐ’ की पूजा करते हैं.महाकुंभ में सबसे बड़ा अखाड़ा कौन सा है ? श्री पंचदशनाम जूना आखाड़ा को शैव संप्रदाय का सबसे बड़ा अखाड़ा माना गया है. महा इसकी स्थापना उत्तराखंड के कर्णप्रयाग में 1145 में हुई.इस अखाड़े के इष्ट देव शिव और रुद्रावतार दत्तात्रेय हैं. इसका मुख्यालय वाराणसी में हैं.यह अखाड़ा नागा साधुओं के लिए विशेष रूप से जाना जाता है.नागा साधुओं की सर्वाधिक संख्या इसी अखाड़े में पाई जाती है. इसमें लगभग 5 लाख नागा साधु और महामंडलेश्वर संन्यासी हैं.इस अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि महाराज हैं और अंतरराष्ट्रीय संरक्षक श्रीमहंत हरिगिरी हैं.जूना अखाड़े की पेशवाई महाराजाओं की शान-ओ-शौकत जैसी होती है. इसमें स्वर्ण रथ समेत कई तरह के वैभव नजर आते हैं. इस अखाड़े की पेशवाई में हाथी भी शामिल होता है.

World Hindi Day 2025 : वैश्विक पटल पर हिन्दी की बढ़ती प्रतिष्ठा

हर साल 10 जनवरी को विश्व हिन्दी दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस दिन का उद्देश्य हिन्दी भाषा को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रोत्साहित करना और इसकी महत्ता को उजागर करना है। World Hindi Day 2025 की थीम “हिन्दी: वैश्विक संवाद का सेतु” है, जो हिन्दी को एक अंतरराष्ट्रीय संवाद की भाषा के रूप में पहचान दिलाने की दिशा में एक और कदम है। इतिहास और महत्व: World Hindi Day 2025 की शुरुआत 10 जनवरी 2006 में हुई थी। यह दिन 1975 में नागपुर में आयोजित पहले विश्व हिन्दी सम्मेलन की स्मृति में मनाया जाता है। इस दिन, दुनिया भर में हिन्दी भाषा के प्रचार-प्रसार और इसके महत्व को लेकर कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। हिन्दी दुनिया की सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषाओं में से एक है। 50 से अधिक देशों में इसे पढ़ाया जाता है और लगभग 60 करोड़ लोग इसे अपनी मातृभाषा के रूप में बोलते हैं। संयुक्त राष्ट्र में हिन्दी को आधिकारिक भाषा बनाने के लिए भी लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। 2025 में हिन्दी की भूमिका: इस वर्ष विश्व हिन्दी दिवस पर तकनीक, शिक्षा, और सांस्कृतिक संवाद के क्षेत्र में हिन्दी की भूमिका पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। डिजिटल युग में हिन्दी की स्वीकार्यता तेजी से बढ़ रही है। सोशल मीडिया, ब्लॉगिंग, और कंटेंट क्रिएशन में हिन्दी की प्रमुखता ने इसे नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है। वैश्विक मंच पर हिन्दी:-संयुक्त राष्ट्र में हिन्दी:** संयुक्त राष्ट्र के कई मंचों पर हिन्दी में वक्तव्य दिए जा रहे हैं, जिससे इसकी प्रतिष्ठा बढ़ी है।-शिक्षा और तकनीक:** दुनिया भर के विश्वविद्यालयों में हिन्दी भाषा को प्रमुख विषय के रूप में अपनाया जा रहा है।-सिनेमा और साहित्य:** हिन्दी सिनेमा और साहित्य ने वैश्विक दर्शकों को प्रभावित किया है। हिन्दी में अनुवादित साहित्य अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लोकप्रिय हो रहा है। भारत सरकार और हिन्दी का प्रचार-प्रसार: भारत सरकार ने हिन्दी के प्रचार के लिए कई योजनाएं शुरू की हैं, जिनमें ई-हिन्दी पोर्टल, विश्व हिन्दी सम्मेलन, और विदेशी विश्वविद्यालयों में हिन्दी के शिक्षण को बढ़ावा देना शामिल है। विश्व हिन्दी दिवस के कार्यक्रम: 2025 में इस दिन को विशेष बनाने के लिए विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं: विश्व हिन्दी दिवस हमें हमारी मातृभाषा की शक्ति और महत्ता का एहसास कराता है। यह केवल एक भाषा नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति, पहचान और विश्व से जुड़ने का माध्यम है। 2025 में, हमें हिन्दी को वैश्विक स्तर पर स्थापित करने के लिए प्रयासरत रहना चाहिए। आइए, इस दिन संकल्प लें कि हिन्दी को हर क्षेत्र में नई ऊंचाइयों पर पहुंचाएंगे। “हिन्दी है हमारी पहचान, इसे बनाएं विश्व की शान!”

चुनाव आयोग में ही गड़बड़ी… EVM का बचाव करने पर राजीव कुमार पर भड़के संजय राउत

sanjay raut said on evm hack election commission महाराष्ट्र में शिवसेना यूबीटी सांसद संजय राउत ने चुनाव आयोग पर आरोप लगाए हैं. संजय राउत ने मीडिया से बातचीत में कहा कि पूरी दुनिया कहती है कि ईवीएम में गड़बड़ी है. चुनाव आयोग कहता है कि इसमें कोई गड़बड़ी नहीं है. उन्होंने कहा कि हमें तो लगता है कि आयोग में ही सारी गड़बड़ी है. मुख्य चुनाव आयुक्त का नाम लेते हुए संजय राउत ने कहा कि राजीव कुमार रिटायर होंगे, इसके बाद भी उनके पास बढ़िया काम रहेगा. रिटायरमेंट के बाद मोदी-शाह उन्हें किसी राज्य का राज्यपाल बना देंगे. उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र और हरियाणा में ईवीएम में गड़बड़ी हुई है. चुनाव आयोग को गांवों में जाकर बैठना चाहिए, तभी उन्हें ईवीएम और बैलेट पेपर की सच्चाई उन्हें वाकई में समझ आएगी. उन्होंने कहा कि बीजेपी ने लोकतंत्र का अपहरण कर लिया है. हजारों नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए. चुनाव आयोग अब बीजेपी के ‘ताट के नीचे बैठा बिल्ली’ बन गया है. दिल्ली विधानसभा चुनाव के तिथियों के ऐलान के समय उन सभी सवालों का जवाब दिया, जिसके लेकर इलेक्शन कमीशन पर सवाल उठाए जा रहे थे. मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार ने कहा कि चुनाव में वोट देने वाले किसी वोटर का नाम किसी भी तरीके से हटाया ही नहीं सकता है. उन्होंने कहा कि अगर फॉर्म साथ में न हो. यहां तक कि अगर किसी की मौत हो गई हो तो उसका रिकॉर्ड भी इलेक्शन कमीशन की तरफ से रखा जाता है. इसके लिए सभी मृतकों के डेथ सर्टिफिकेट को रिकॉर्ड में रखा जाता है. उन्होंने कहा कि अगर इसके बाद भी किसी का नाम गलती से हट जाता है तो हमारी तरफ से उसे नोटिस भेजा जाता है. मुख्य चुनाव आयुक्त ने एक शायरी के जरिए कहा कि आरोपों और इल्जामातों का दौर चले कोई गिला नहीं…हर परिणाम में प्रमाण देते है…शक का इलाज तो हकिम लुकमान के पास भी नहीं है.

वोट दिया इसका मतलब ये नहीं कि मैं आपका मजदूर… बारामती में वोटर्स पर भड़के डिप्टी CM अजित पवार

Voted does not mean that I am your laborer… Deputy CM Ajit Pawar angry at voters in Baramati महाराष्ट्र के उप-मुख्यमंत्री अजित पवार उस वक्त अपना आपा खो बैठे, जब एक वोटर ने अपनी समस्या के बारे में उन्हें बताया, और समस्या के समाधान की बात कही. जिस पर पवार भड़के और बोले कि आपने वोट दिया इसका ये मतलब नही की आप मेरे मालिक हैं. अजित पवार का ये बयान अब राजनीतिक गलियारों की सुर्खियां बन चुका है. ऐसा इसलिए क्योंकि चुनाव के पहले जनता के हित की बात करने वाले नेता चुनाव के बाद जनता के साथ कैसा व्यवहार करते हैं. इसकी चर्चा हो रही है. परेशानी के जवाब में अजित पवार ने कहा कि आपने मुझे वोट दिया है, इसका मतलब ये नहीं कि आप मेरे बॉस यानी मालिक बन गए. क्या आपने मुझे अब खेतिहर मजदूर बना दिया है? बारामती पहुंचे थी डिप्टी सीएम पवार दरअसल बारामती की इस सभा में अलग अलग तहसीलों और गांवो से किसान अपनी समस्या लेकर पहुंचे थे. जिनके समाधान की आस सबको थी. किसानों को उम्मीद थी कि जनसमस्याओं को अजित पवार सुनेंगे. और इन समस्याओं को सॉल्व करने को लेकर कुछ कदम उठाएंगे. लेकिन डिप्टी सीएम का ये रवैया देखकर हर कोई हैरान रह गया. बचाव में उतरे मंत्री संजय शिरसाट बयान के बाद वहां का माहौल कुछ गंभीर हो गया. जिसको देखते हुए कैबिनेट मंत्री संजय शिरसाट ने पूरा मोर्चा संभाला, और बचाव करते हुए कहा कि कभी-कभी जनप्रतिनिधि जब काम कर रहा होता है तो कुछ मतदाता कुछ मुद्दों पर अपनी जिद करने लगते हैं, लेकिन उसमें जनप्रतिनिधि के ही कमेंट्स या बयानों को हाईलाइट किया जाता है जबकि वोटर्स का बर्ताव कहीं नहीं दिखाया जाता. अधिकारियों से क्या बोले पवार? विदेश दौरे से लौटने के बाद डिप्टी सीएम अजित पवार ने रविवार को बारामती क्षेत्र का दौरा किया. इस दौरान उन्होंने कई नए कामों का शिलान्यास भी किया. अजित पवार ने कहा कि बारामती का रियल एस्टेट बाजार बढ़ रहा है, लेकिन मुंबई और पुणे के बड़े डेवलपर्स अभी तक इसमें एंटर नहीं कर पाए हैं. समस्याओं पर भड़कने के बाद उन्होंने अधिकारियों की भी क्लास लगा दी, और हिदायत दी कि काम में कोई कमी नहीं आनी चाहिए. हर समस्या समाधान किया जाए.

10 जनवरी को पूरे भारत में केंद्र सरकार का फूकेंगे पुतला… खन्नौरी बॉर्डर पर किसानों की महापंचायत में ऐलान

farmer protest khanauri border jagjit singh dallewal 10 january central govt effigy burning announcement खन्नौरी बॉर्डर पर आंदोलन कर रहे किसानों ने आज हुई महापंचायत में केंद्र सरकार के खिलाफ प्रदर्शन तेज करने का फैसला किया. किसानों ने ऐलान किया है कि वो 10 जनवरी को देशभर में केंद्र सरकार का पुतला फूकेंगे. इसके अलावा किसानों से आंदोलन में शामिल होने की भी अपील की गई है. पंजाब के खन्नौरी बॉर्डर पर आंदोलन कर रहे किसानों की शनिवार को महापंचायत हुई. इसमें संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) और किसान मजदूर मोर्चा ने 10 जनवरी को पूरे भारत में केंद्र सरकार का पुतला फूंकने का फैसला किया है. महापंचायत को आमरण अनशन पर बैठे किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल ने संबोधित भी किया. डल्लेवाल ने कहा कि आज आब सब दूर-दूर से चलकर आए हैं. मैं आप सभी से मिलना चाहता था. डल्लेवाल ने कहा कि ये लड़ाई मेरी नहीं है. ये सब ऊपर वाले की मर्जी से हो रहा है. ये शरीर ऊपर वाले ने दिया है. जैसा भगवान करवाना चाहते हैं वैसे ही अब हो रहा है. मुझे पुलिस उठाने का प्रयास कर रही थी, लेकिन रात को हरियाणा-पंजाब से सैकड़ों नौजवान खन्नौरी बॉर्डर पर पहुंच गए. मुझे विश्वास है कि हम लड़ाई जीतेंगे. डल्लेवाल बोले- हम शांत नहीं बैठ सकते उन्होंने कहा कि मुझे पता है कि ये कठिन काम है, लेकिन किसी काम को कठिन देखकर हम आराम से नहीं बैठ सकते हैं. हमारे किसान परिवारों के 4 लाख किसानों ने सुसाइड किया है. ये हम नहीं कह रहे बल्कि सुप्रीम कोर्ट की कमेटी की रिपोर्ट है, लेकिन असलियत में 7 लाख किसान सुसाइड कर चुके हैं. हम किसान नेता हैं, हम लोगों ने ऐसा कुछ नहीं किया सुसाइड रुक सकें. किसान नेता ने सुप्रीम कोर्ट का जिक्र करते हुए कहा कि डल्लेवाल की लाइफ काफी महत्वपूर्ण, लेकिन जिन 7 लाख किसानों ने सुसाइड किया है वो भी हमारे लिए काफी महत्वपूर्ण थे.उन 7 लाख किसानों के बच्चे के लिए हमें शहादत दे देनी चाहिए. जब हम दिल्ली से आंदोलन खत्म करके वापस आए थे तो दूसरे राज्यों के लोगों ने हमें उलाहना दिया कि पंजाब के संगठन वापस जा रहे हैं. आंदोलन तेज करने की अपील डल्लेवाल ने आगे कहा कि अब मैं दूसरे राज्यों के किसानों से कहता हूं कि अपने राज्यों में आंदोलन तेज कर दीजिए. एमएसपी सबको चाहिए. आप सब अपने-अपने गांवों से एक-एक ट्राली खन्नौरी बॉर्डर पर जरूर भेजें ताकि पुलिस आंदोलन को खत्म ना कर सके. हालांकि, महापंचायत को संबोधित करते हुए बीच में डल्लेवाल की तबीयत भी बिगड़ गई जिसके बाद भाषण को जल्दी खत्म करा दिया गया.

IIT मद्रास के छात्रों से मिले rahul gandhi, शिक्षा प्रणाली पर उठाए सवाल, कहा- बेहतर भविष्य के…

rahul gandhi meets iit students said responsibility of the govt to provide quality education लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने शनिवार को भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मद्रास के छात्रों से बातचीत की। इस दौरान उन्होंने कहा कि युवाओं के बेहतर भविष्य के लिए वर्तमान की शिक्षा प्रणाली पर फिर से विचार करने की जरूरत है। ‘शिक्षा पर अधिक पैसा हो खर्च’ उन्होंने आईआईटी मद्रास के छात्रों के एक समूह के साथ बातचीत में कहा कि बेहतर भविष्य और भारत को वैश्विक नेतृत्वकर्ता बनाने के लिए यह जरूरी है कि देश की मौजूदा शिक्षा प्रणाली पर पुनर्विचार किया जाए तथा शिक्षा पर अधिक पैसा खर्च किया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि निजीकरण और वित्तीय प्रोत्साहन के माध्यम से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा हासिल नहीं की जा सकती। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने बातचीत का यह वीडियो अपने यूट्यूब चैनल पर साझा किया। सफलता का असली मतलब जानने की कोशिश की: राहुल गांधी उन्होंने कहा, ‘‘मुझे हाल ही में आईआईटी मद्रास के कुछ प्रतिभाशाली युवाओं से बात करने का सौभाग्य मिला। साथ में, हमने जानने की कोशिश की कि सफलता का असली मतलब क्या है। हमने भारत के भविष्य को आकार देने में अनुसंधान और शिक्षा की महत्वपूर्ण भूमिका तथा एक ऐसे उत्पादन पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर चर्चा की जो निष्पक्षता, नवाचार और सभी के लिए अवसर को महत्व देता है।’ ‘शिक्षा प्रणआली पर विचार किया जाए’ उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अपने युवाओं को शिक्षित करने, बेहतर कल की कल्पना को साकार करने और भारत को वैश्विक नेतृत्वकर्ता में बदलने के लिए भारतीय शिक्षा प्रणाली को लेकर फिर से विचार किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘वर्तमान में, हमारा शिक्षा ढांचा अक्सर युवाओं को कुछ करियर जैसे डॉक्टर, इंजीनियर, आईएएस, आईपीएस, या सशस्त्र बल तक सीमित कर देता है।’ भारत को विश्व मंच पर समानता… राहुल गांधी ने कहा कि यह विविध अवसरों को खोलने, छात्रों को अपनी आकांक्षा को पूरा करने और नवाचार एवं पसंद से प्रेरित भविष्य बनाने के लिए सशक्त बनाने का समय है। उन्होंने कहा, ‘यह बातचीत केवल विचारों के बारे में नहीं थी, यह समझने के बारे में भी थी कि हम भारत को विश्व मंच पर समानता और प्रगति की शक्ति के रूप में स्थापित करने के लिए कैसे मिलकर काम कर सकते हैं। उनके विचारशील प्रश्नों और ताज़ा दृष्टिकोण ने इसे वास्तव में प्रेरणादायक बातचीत बना दिया।’ उन्होंने यह वीडियो ‘एक्स’ पर पोस्ट कर कहा, ‘मानना है कि अपने लोगों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की गारंटी देना किसी भी सरकार की सबसे महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों में से एक है। इसे निजीकरण और वित्तीय प्रोत्साहन के माध्यम से हासिल नहीं किया जा सकता। हमें शिक्षा पर अधिक पैसा खर्च करने तथा सरकारी संस्थानों को मजबूत करने की जरूरत है।’

Jammu Kashmir Army Vehicle Accident: बांदीपोरा में सेना का ट्रक खाई में गिरा… चार जवानों की मौत, दो घायल

Jammu Kashmir Army Vehicle Accident जम्मू-कश्मीर के बांदीपोरा जिले में बड़ा हादसा हुआ है। सेना का एक वाहन खाई में गिर गया। हादसे में चार सैनिकों की मौत हो गई। जबकि दो अन्य घायल हो गए। घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। मौके पर राहत एवं बचाव कार्य चल रहा है। जानकारी के अनुसार, जम्मू-कश्मीर के बांदीपोरा में शनिवार दोपहर यह हादसा हुआ। बताया जा रहा है कि फिसलन के कारण सेना का एक ट्रक पहाड़ी से नीचे खाई में गिर गया। इस हादसे में चार जवानों की मौत हो गई। जबकि दो घायल हो गए। इनकी हालत नाजुक बताई जा रही है। यह दुर्घटना बंदीपोरा के सदरकूट पाईन इलाके में हुई जहां सेना का ट्रक फिसलन के कारण खाई में जा गिरा। हादसे के बाद स्थानीय पुलिस और सेना के अन्य जवान राहत कार्य में जुट गए। इस घटना के कारणों की जांच की जा रही है।

महाभारत से सीखें लाइफ मैनेजमेंट टिप्स: नए साल में 5 बातें अपनाएंगे तो मुश्किल कामों में भी मिल सकती है सफलता

Learn life management tips from Mahabharata: If you adopt these 5 things in the new year, you can get success even in difficult tasks नया साल 2025 शुरू हो गया है। पिछले साल मिली असफलताओं और अपनी गलतियों से सीख लेकर आगे बढ़ेंगे तो इस बार सफलता जरूर मिल सकती है। महाभारत के किस्सों से समझें लाइफ मैनेजमेंट की 5 टिप्स, जिन्हें फॉलो करने से आपकी प्रॉब्लम्स दूर हो जाएंगी और मुश्किल काम में भी सफलता मिलने की संभावनाएं बढ़ जाएंगी… 1. एकता बनाए रखें, साथियों पर भरोसा करें 2. अपनी जिम्मेदारी ईमानदारी से निभाएं 3. लक्ष्य बनाएं और उसी पर पूरा ध्यान लगाएं 4. समय का ही सही उपयोग जरूर करें 5. विकल्पों का चयन सतर्कता से करें

3 जनवरी से कांग्रेस शुरू करेगी ‘जय बापू, जय भीम, जय संविधान’ अभियान, इस वजह से टला था कार्यक्रम

Congress will start ‘Jai Bapu, Jai Bhim, Jai Constitution’ campaign from January 3, due to this the program was postponed. कांग्रेस शुक्रवार को पूर्व निर्धारित ‘जय बापू, जय भीम, जय संविधान’ अभियान का शुभारंभ करेगी। यह अभियान राज्यों, जिलों और ब्लॉक से शुरू होगा और 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के दिन मध्य प्रदेश के महू (वर्तमान में डॉ. आंबेडकर नगर) शहर में एक बड़ी जनसभा के साथ समाप्त होगा। डॉ. मनमोहन सिंह के निधन के कारण टला था कार्यक्रमइस अभियान की शुरुआत पहले 27 दिसंबर को होनी थी। लेकिन 26 दिसंबर को पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के निधन के कारण इसे टाल दिया गया था। मनमोहन सिंह के निधन पर सात दिनों के राष्ट्रीय शोक की घोषणा की गई थी। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने कहा, कांग्रेस कार्यकारी समिति (सीडब्ल्यूसी) की बैठक में फैसला लिया गया था कि मनमोहन सिंह को सम्मान देने के लिए इस अभियान को एक हफ्ते के लिए स्थगित किया गया था। आंबेडकर की जन्मभूमि पर होगा अभियान का समापनउन्होंने कहा, यह भरोसा करना मुश्किल है कि वह (मनमोहन सिंह) अब हमारे बीच नहीं हैं। लेकिन अब तीन जनवरी से यह अभियान फिर से शुरू किया जाएगा। इस अभियान का समापन डॉ. आंबेडकर की जन्मभूमि महू में 26 जनवरी को एक जनसभा के साथ होगा। 26 जनवरी को भारतीय संविधान को लागू हुए 75 साल भी पूरे हो रहे हैं। सीडब्ल्यूसी ने अपने प्रस्ताव में कहा था कि कांग्रेस संविधान की सुरक्षा और भारतीय स्वाधीनता संग्राम के सिद्धांतों को लेकर पूरी तरह प्रतिबद्ध है। इस अभियान के तहत 27 दिसंबर को बेलगावी में एक रैली का आयोजन किया जाना था, लेकिन शोक के कारण इसे स्थगित कर दिया गया। ‘संविधान बचाओ राष्ट्रीय पदयात्रा’ भी शुरू करेगी कांग्रेसकांग्रेस के मुताबिक, 26 जनवरी 2025 से लेकर 26 जनवरी 2026 तक एक राष्ट्रीय पदयात्रा शुरू की जाएगी, जिसे संविधान बचाओ राष्ट्रीय पदयात्रा नाम दिया जाएगा। इस यात्रा में कांग्रेस के सभी नेता शामिल होंगे और यह यात्रा गांव-गांव और शहर-शहर जाएगी। इसके अलावा, कांग्रेस ने कहा कि अप्रैल 2025 के पहले हफ्ते में गुजरात में एआईसीसी की एक बैठक आयोजित की जाएगी।

कैसे हैं आपके प्रदेश के मुख्यमंत्री; किस पर कितने हैं केस दर्ज, कितनी है संपत्ति

how chief minister of your state how many cases registered against whom how much property there भारत के राजनीति में मुख्यमंत्री की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। वे न केवल राज्य के सबसे प्रभावशाली नेता होते हैं, बल्कि उनके खिलाफ चल रहे मामलों और उनकी संपत्ति भी चर्चा का विषय बनते हैं। how chief minister of your state हाल ही में लोकतांत्रिक सुधार संघ (ADR) और राष्ट्रीय चुनाव निगरानी (NEW) ने देशभर के 31 मुख्यमंत्रियों के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों और उनकी संपत्ति का विश्लेषण किया है। इस रिपोर्ट में यह सामने आया है कि कई मुख्यमंत्री गंभीर आपराधिक मामलों में घिरे हुए हैं, जबकि कुछ अपनी संपत्ति के मामले में काफी संपन्न हैं। क्या आपके राज्य के मुख्यमंत्री के खिलाफ कोई आपराधिक मामले दर्ज हैं? भारत में 31 मुख्यमंत्रियों में से 13 (42%) के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं, जिनमें से 10 (32%) मुख्यमंत्रियों पर गंभीर आपराधिक मामले हैं। यह आंकड़े यह दर्शाते हैं कि भारतीय राजनीति में कई मुख्यमंत्री ऐसे हैं जिनके खिलाफ आपराधिक मामले हैं, फिर भी वे सत्ता में बने रहते हैं। किन मुख्यमंत्रियों के खिलाफ कितने गंभीर आरोप हैं? तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंथ रेड्डी: इनके खिलाफ कुल 89 मामले दर्ज हैं, जिनमें से 72 गंभीर आपराधिक मामले हैं। ये मामले भारतीय दंड संहिता (IPC) के तहत दर्ज किए गए हैं। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन: इनके खिलाफ 47 मामले हैं, जिनमें से 11 गंभीर आपराधिक मामले हैं। आरोपों में भ्रष्टाचार और जमीन कब्जाने के मामले शामिल हैं। आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू: इन पर कुल 19 मामले हैं, जिनमें 32 गंभीर IPC मामले हैं। भ्रष्टाचार के आरोपों के चलते नायडू अक्सर विवादों में रहते हैं। कर्नाटका के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया: इन पर 13 मामले हैं, जिनमें 6 गंभीर IPC मामले शामिल हैं। भारत के मुख्यमंत्रियों की संपत्ति कितनी है? भारत के 31 मुख्यमंत्रियों की औसत संपत्ति 52.59 करोड़ रुपये है। कुछ मुख्यमंत्री अरबों की संपत्ति के मालिक भी हैं। चंद्रबाबू नायडू (आंध्र प्रदेश): उनकी संपत्ति 931.83 करोड़ रुपये है।-पेमा खांडू (अरुणाचल प्रदेश): उनकी संपत्ति 332 करोड़ रुपये से अधिक है।सिद्धारमैया (कर्नाटका): उनकी संपत्ति 51 करोड़ रुपये से अधिक है। क्या मुख्यमंत्री की संपत्ति आम नागरिक से कहीं अधिक होती है?मुख्यमंत्री की संपत्ति और आय आम नागरिक की तुलना में काफी अधिक होती है। उदाहरण के लिए, भारत में औसत राष्ट्रीय आय लगभग 1.85 लाख रुपये सालाना है, जबकि मुख्यमंत्री की औसत आय 13.64 लाख रुपये सालाना होती है, यानी उनकी आय लगभग सात गुना अधिक होती है। क्या मुख्यमंत्री के खिलाफ कोई फाइनैंशियल स्कैंडल या कर्ज है? कुछ मुख्यमंत्री ऐसे हैं जिनके पास बड़ी संपत्ति के साथ-साथ कर्ज भी है। उदाहरण के लिए: पेमा खांडू (अरुणाचल प्रदेश): उनकी संपत्ति 332.56 करोड़ रुपये है, लेकिन उन्होंने 180.28 करोड़ रुपये का कर्ज लिया है। सिद्धारमैया (कर्नाटका): उनकी संपत्ति 51.94 करोड़ रुपये है, और उन्होंने 23.77 करोड़ रुपये का कर्ज लिया है। चंद्रबाबू नायडू (आंध्र प्रदेश): उनकी संपत्ति 931.83 करोड़ रुपये है, लेकिन उन्होंने 10.32 करोड़ रुपये का कर्ज लिया है। भारत में कितनी महिला मुख्यमंत्री हैं? भारत में महिला मुख्यमंत्री की संख्या बहुत कम है। रिपोर्ट के मुताबिक, 31 मुख्यमंत्रियों में से सिर्फ 2 महिला मुख्यमंत्री हैं, जो केवल 6% हैं। यह आंकड़ा भारतीय राजनीति में महिला नेतृत्व की कमी को दर्शाता है। भारत के मुख्यमंत्रियों की संपत्ति और उनके खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले दर्शाते हैं कि राजनीति में बहुत सी जटिलताएँ होती हैं। हालांकि कुछ मुख्यमंत्री अपनी संपत्ति और पारदर्शिता के मामले में काफी अग्रणी हैं, वहीं कई ऐसे भी हैं जिनके खिलाफ गंभीर आरोप हैं।

प्रयागराज महाकुंभ 2025: आध्यात्मिकता और संस्कृति का संगम

Prayagraj Mahakumbh 2025: Confluence of spirituality and culture प्रयागराज महाकुंभ 2025, भारतीय संस्कृति और धर्म का सबसे बड़ा उत्सव, 2025 में आयोजित होने जा रहा है। यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि सांस्कृतिक विविधता और भारतीयता के अद्भुत दर्शन का प्रतीक भी है। महाकुंभ मेले में लाखों श्रद्धालु गंगा, यमुना और पौराणिक सरस्वती के संगम पर स्नान करने आते हैं। महाकुंभ का महत्व महाकुंभ का आयोजन हर 12 वर्षों में प्रयागराज, हरिद्वार, उज्जैन और नासिक में होता है। यह पर्व पवित्र नदियों के संगम पर होता है, जो मोक्ष प्राप्ति का प्रतीक माना जाता है। पुराणों के अनुसार, अमृत मंथन की कथा से जुड़े इस आयोजन में स्नान, दान और तप का विशेष महत्व है। मुख्य तिथियां महाकुंभ 2025 के स्नान पर्व निम्नलिखित होंगे:मकर संक्रांति (14 जनवरी)पौष पूर्णिमा (25 जनवरी)मौनी अमावस्या (10 फरवरी)बसंत पंचमी (15 फरवरी)माघी पूर्णिमा (24 फरवरी)महाशिवरात्रि (8 मार्च) विभिन्न राज्यों से प्रयागराज आने का मार्ग उत्तर प्रदेश और उत्तर भारत से: पश्चिम भारत से: दक्षिण भारत से: पूर्व और पूर्वोत्तर भारत से: यात्रा और सुविधाएंविशेष ट्रेन और बस सेवाएं: IRCTC और राज्य परिवहन विभाग विशेष कुंभ ट्रेन और बसें चलाएंगे।स्मार्ट कार्ड: कुंभ मेला क्षेत्र में डिजिटल पेमेंट और यात्रा के लिए स्मार्ट कार्ड उपलब्ध रहेगा।स्वास्थ्य और सुरक्षा: मेले में अस्थाई अस्पताल, एंबुलेंस और सुरक्षा बल तैनात किए जाएंगे। समापनप्रयागराज महाकुंभ 2025 एक ऐसा अवसर है जो न केवल आध्यात्मिक अनुभव प्रदान करता है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति, धर्म और एकता की झलक भी प्रस्तुत करता है। देश के किसी भी कोने से आसानी से यहां पहुंचा जा सकता है। श्रद्धालु इस अवसर का लाभ उठाकर आत्मिक शांति और पुण्य लाभ अर्जित कर सकते हैं।

दिल्ली गए नीतीश कुमार महागठबंधन में करेंगे वापसी? सियासी अटकलों पर तेजस्वी यादव की दो टूक

Will Nitish Kumar, who went to Delhi, return to the Grand Alliance? Tejashwi Yadav bluntly on political speculations बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार क्या महागठबंधन में वापसी करने जा रहे हैं? यह सवाल इन दिनों प्रदेश के सियासी गलियारों में तैर रहा है। बीते कुछ समय से जोर पकड़ रही ऐसी चर्चाओं पर अब नेता प्रतिपक्ष और राजद नेता तेजस्वी यादव ने इस पर अपना दो टूक जवाब दे दिया है।बता दें कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इन दिनों दिल्ली गए हुए हैं। तेजस्वी यादव ने इसके साथ ही बीपीएससी छात्रों के प्रदर्शन, उन पर लाठीचार्ज, परीक्षा रद कराने की मांग और भारतीय जनता पार्टी पर भी जमकर निशाना साधा। उन्होंने 2025 में होने वाले चुनावों की तैयारी पर भी अपनी बात रखी। मुख्यमंत्री टायर्ड हैं और रिटायर्ड अधिकारी चला रहे सरकार: तेजस्वी बिहार में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने सबसे पहले कहा कि मुख्यमंत्री टायर्ड हैं और रिटायर्ड अधिकारी सरकार चला रहे हैं। प्रतियोगिता परीक्षा का पेपरलीक बिहार में पहली बार नहीं हुआ है। इसके लिए कौन जिम्मेदार है?उन्होंने सवाल करते हुए कहा है कि बिहार की जनता जानना चाहती है। दोषियों पर क्या कार्रवाई हुई? वे सोमवार को शहर के राजोपट्टी स्थित परिसदन में पत्रकारों को संबोधित कर रहे थे। वे कार्यकर्ता दर्शन सह संवाद कार्यक्रम, के तहत सीतामढ़ी पहुंचे हैं। हमारे सरकार से हटने के बाद होने लगे पेपरलीक : तेजस्वी उन्होंने कहा कि हमारे सरकार से हटने के तीन माह बाद से ही पेपरलीक होने लगा। मैट्रिक से लेकर बीपीएससी तक की परीक्षा का पेपर लीक हो रहा है। उन्होंने सवाल किया कि जब शिक्षा विभाग मेरे पास था तो कहां पेपर लीक हो रहा था?उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री किसी बात का जवाब नहीं देते हैं न सदन में और न बाहर। यह सरकार जनता की नहीं है। आने वाले समय में जनता इसका मुंहतोड़ जवाब देगी। भाजपा की बी टीम ने छात्रों को गुमराह किया: यादव राजद नेता तेजस्वी यादव ने यह भी कहा कि राजधानी पटना के गर्दनीबाग में छात्र 15 दिन से शांतिपूर्ण धरना दे रहे थे। लेकिन भाजपा की बी टीम के नेताओं ने गुमराह कर उन्हें गांधी मैदान में ले गए, जो प्रतिबंधित क्षेत्र है और उन पर वहां बर्बरतापूर्ण लाठी चार्ज किया गया।पानी के बौछार हो रही है। मुकदमा हो रहा है। सभी परेशान हैं। छात्र-छात्राओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। उन्होंने आंदोलन कर रहे छात्रों से कहा कि जात-पात में नहीं बंटें, तभी सफलता मिलेगी। तेजस्वी ने नीतीश को बताया पलटू ‘चाचा’ इसके बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के फिर पलटने की चर्चा के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि पलटू चाचा के लिए महागठबंधन के दरवाजे बंद हैं। बता दें कि नीतीश कुमार इस समय दिल्ली में हैं। ऐसे में सियासी अटकलों को और हवा मिल रही है।हालांकि, तेजस्वी ने यह भी कहा कि वह पटना लौटने पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मिलने के लिए समय मांगेंगे। यदि सीएम के ऑफिस से समय मिलता है तो मुख्यमंत्री से मिलकर बीपीएससी के छात्रों की मांगों पर चर्चा जरूर करेंगे।इसके साथ ही नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर पर उनका नाम लिए बिना हमला बोला।तेजस्वी यादव ने जीतन राम मांझी, चिराग पासवान के साथ दोनों उप मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और विजय सिन्हा पर हमला बोलते हुए सवाल किया कि कहां हैं ये लोग?पेपर लीक होने पर परीक्षा रद करने की मांग कर रहे छात्रों पर लाठी चार्ज हो रहा है, समस्या आती है तो गायब रहते हैं। नहीं तो ऊंची-ऊंची बातें करते हैं।

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