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बजार में गिरावट आगे भी देखने को मिल सकती है, 5 बड़े फैक्टर्स तय करेंगे शेयर बाजार की दिशा

नई दिल्ली शुक्रवार निफ्टी बैंकिंग स्टॉक और एफएमसीजी कंपनियों की वजह से 0.14 प्रतिशत की गिरावट के साथ 24965.25 अंक पर बंद हुआ। 25000 के नीचे निफ्टी का बंद होना मार्केट के लिए अच्छी खबर नहीं मानी जा रही है। ऐसे में एक्सपर्ट्स उम्मीद जता रहे हैं कि बजार में गिरावट आगे भी देखने को मिल सकती है। आइए जानते हैं वो प्रमुख फैक्टर्स जिनकी वजह से शेयर बाजार प्रभावित हो सकता है। 1- कंपनियों के तिमाही नतीजे इस हफ्ते करीब 120 कंपनियों के तिमाही नतीजे जारी होंगे। इन कंपनियों की लिस्ट में एचसीएल टेक्नोलॉजीज, रिलायंस इंडस्ट्रीज, एचडीएफसी लाइफ इंश्योरेंस, बजाज ऑटो, एक्सिस बैंक, इंफोसिस, विप्रो, नेस्ले इंडिया, एचडीएफसी बैंक, कोटक महिंद्रा बैंक और टेक महिंद्रा बैंक शामिल है। 2- हुंडई आईपीओ हुंडई आईपीओ इसी हफ्ते खुलने जा रहा है। इकनॉमिक्स टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार एक्सपर्ट्स को उम्मीद है कि देश के सबसे बड़ा आईपीओ के ओपनिंग का असर भी मार्केट पर पड़ेगा। कंपनी के आईपीओ का साइज 27,870 करोड़ रुपये का है। कंपनी इसके जरिए 14.2 करोड़ शेयर बेचेगी। बता दें, आईपीओ के लिए प्राइस बैंड 1865 रुपये से 1960 रुपये प्रति शेयर तय किया है। 3- FIIs ने निकाले 58711 करोड़ रुपये विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) ने अक्टूबर में अबतक 8 कारोबारी सत्रों में 587111 करोड़ रुपये निकाले हैं। शुक्रवार को FIIs ने 4162.66 करोड़ रुपये की बिकवाली की। हालांकि, घरेलू संस्थागत निवेशक लगातार खरीदारी कर रहे हैं। 4- डॉलर के मुकाबले रुपये का कमजोर होना एक डॉलर की कीमत पहली बार 84 रुपये के पार पहुंच गई। शुक्रवार को यह 84.06 पर बंद हुआ। सेंट्रल बैंक की तरफ से लगातार किमतों को स्थिर बनाने के लिए प्रयास किया जा रहा है। वहीं, यूएस फेड रिजर्व के फैसले का असर भी दिखने लगा है। जिसकी वजह से डॉलर मजबूत हो रहा है। 5- कच्चे तेल की कीमतें तेल की कीमतों का असर भारतीय शेयर बाजार पर साफ-साफ दिखता है। मिडिल-ईस्ट में बढ़ते तनाव की वजह से कच्चे तेल की कीमतों के लिए अस्थिरता का दौर है। कच्चे तेल की कीमतों में इजाफा भारतीय शेयर बाजार की सेहत के लिए अच्छी खबर नहीं है। इससे मंहगाई का डर रहता है।

अगस्त के मुकाबले सितंबर महीने में खुदरा महंगाई में 1.38 फीसदी बढ़ सकती है

नई दिल्ली खाने-पीने की वस्तुओं और खासकर प्याज-टमाटर की कीमतों में तेज उछाल से खुदरा महंगाई सितंबर, 2024 में बढ़कर दो महीने बाद फिर आरबीआई के 4 फीसदी के दायरे बाहर निकलकर 5.03 फीसदी के स्तर पर पहुंच सकती है। इससे पहले जून में खुदरा महंगाई 5.08 फीसदी रही थी, जबकि जुलाई और अगस्त में यह घटकर क्रमशः 3.60 फीसदी एवं 3.65 फीसदी रही थी। सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकनॉमी (सीएमआईई) की रिपोर्ट के मुताबिक, अगस्त के मुकाबले सितंबर में यानी एक महीने में खुदरा महंगाई में 1.38 फीसदी बढ़ सकती है। खाने-पीने की वस्तुओं की महंगाई दर भी 2.3 फीसदी की बढ़ोतरी के साथ 8 फीसदी के स्तर पर पहुंच सकती है। अगस्त में खाद्य महंगाई 5.7 फीसदी रही थी। रिपोर्ट में कहा गया है कि दिसंबर, 2023 से जून, 2024 के बीच सब्जियों की महंगाई दर 27-30 फीसदी के दायरे में बनी हुई थी। इस साल जुलाई और अगस्त में यह घटकर क्रमशः 6.8 फीसदी और 10.7 फीसदी रह गई। इससे इन दोनों महीनों में खुदरा महंगाई में गिरावट देखने को मिली थी। सरकार 14 अक्तूबर को सितंबर के लिए खुदरा महंगाई के आंकड़े जारी कर सकती है। सितंबर के दूसरे पखवाड़े में टमाटर 10% महंगा सीएमआईई के मुताबिक, जून से लगातार बढ़ रहे प्याज के दाम सितंबर में 13.4 फीसदी और बढ़ गए हैं। इस दौरान खुदरा बाजार में प्याज की कीमत 36 रुपये से बढ़कर 51 रुपये प्रति किलोग्राम के भाव पहुंच गई है। उपभोक्ता मामलों के विभाग (डीसीए) की ओर से जारी आंकड़ों का हवाला देते हुए रिपोर्ट में कहा गया है कि टमाटर की कीमतों में थोड़ी गिरावट देखने को मिली थी, लेकिन सितंबर के पहले पखवाड़े की तुलना में दूसरे में यह 10 फीसदी से अधिक महंगा हो गया है। सब्जियों की कीमतों में आएगी मामूली गिरावट रिपोर्ट में कहा गया है कि खुदरा महंगाई में 1.2 फीसदी का योगदान देने वाली सब्जियों की कीमतों में सितंबर में मामूली कमी आने की उम्मीद है। कुछ सब्जियों के दाम घटे हैं। आलू की खुदरा कीमत कम हुई है। बैंगन, गोभी और भिंडी जैसी सब्जियों की मंडी कीमतों में भी सात फीसदी से अधिक की गिरावट आई है। हालांकि, प्याज और टमाटर की कीमतों में तेज बढ़ोतरी से अन्य सब्जियों के दाम में गिरावट का असर कम हो सकता है। दाल-फल के घटे हैं दाम रिपोर्ट के मुताबिक, खरीफ की अच्छी फसल के कारण दालों की महंगाई घटने की उम्मीद है। इसकी महंगाई दर सितंबर में पिछले महीने के 13.6 फीसदी से घटकर 9.5 फीसदी रह सकती है। अनाज, मांस, फल, मसाले और चीनी पर महंगाई का दबाव कम हुआ है। तेल-वसा की महंगाई दर बढ़ सकती है।    

त्योहारी सीजन में ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से खरीदी, पिछले वर्ष की तुलना में यह 26 फीसदी अधिक

नई दिल्ली  त्योहारी सीजन में ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से जमकर खरीदी हो रही है। एक हफ्ते में ऑनलाइन प्लेटफॉर्म ने 55,000 करोड़ के सामान बेचे हैं। पिछले वर्ष की तुलना में यह 26 फीसदी अधिक है। ऑनलाइन से सर्वाधिक खरीदी मोबाइल फोन, कंज्यूमर ड्यूरेबल, इलेक्ट्रॉनिक्स व जनरल मर्चेंडाइज की हो रही है। कुल बिक्री में इनका योगदान तीन चौथाई है। इस साल त्योहारी सीजन में होने वाली बिक्री की करीब 55 फीसदी बिक्री 26 सितंबर के बाद से अब तक हुई है। पिछले साल त्योहारों में ऑनलाइन खरीदी का मूल्य 9.7 अरब डॉलर था। इस बार 23 फीसदी बढ़कर 12 अरब डॉलर हो सकता है। खरीदारों में छोटे कस्बों व शहरों का बड़ा हिस्सा है। कुछ ब्रांडों ने कहा, आपूर्ति से ज्यादा मांग आ रही है। सालाना आधार पर 40 फीसदी तक बढ़ गई मांग फ्लिपकार्ट, मीशो और अमेजन इंडिया की 26 सितंबर से वार्षिक त्योहारी सीजन की बिक्री शुरू है। मीशो ने कहा, सालाना आधार पर बिक्री में 40% की वृद्धि देखी गई। यह उछाल दूसरे स्तर के शहरों की मजबूत मांग से आया है। इसमें लगभग 45% खरीदार चौथे स्तर के शहर और उससे आगे से आए थे। छोटे शहरों पर ज्यादा जोर फ्लिपकार्ट का कहना है कि बड़े शहरों के साथ मेदिनीपुर, हिसार, बेरहामपुर, बांकुरा और अगरतला जैसे दूसरे स्तर के क्षेत्रों में भी ग्राहकों की ओर से मजबूत मांग है। कुछ वर्षों से त्योहारी बिक्री पहले शुरू हो जाती है। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म ने जब सेल की शुरुआत की तो बिक्री बहुत तेज थी। आखिरी दिन में धीमी हो गई। दशहरा से दिवाली के बीच फिर बढ़ेगी बिक्री व्यापारियों का मानना है कि बिक्री की एक और लहर आएगी। यह दशहरा से दिवाली के बीच होगी। अमेजन इंडिया का कहना है कि जो 30,000 रुपये से ज्यादा के इलेक्ट्रॉनिक्स सामान हैं, उनकी बिक्री 30% बढ़ी है। मूलरूप से महंगे स्मार्टफोन ज्यादा बिक रहे हैं। खासकर आईफोन 13, वनप्लस और सैमसंग एस 23 अल्ट्रा है। कुल ऑर्डर का 75 फीसदी ऑर्डर दूसरे और उसके आगे के शहरों से आ रहा है। नवरात्र में इन सामानों की मांग में बढ़ोतरी नवरात्र शुरू होने के साथ घरेलू सजावट इलेक्ट्रॉनिक्स व गेमिंग सहायक उपकरण जैसी अन्य श्रेणियों ने इस अवधि के दौरान वॉल्यूम में 100% से अधिक वृद्धि दर्ज की है। सबसे ज्यादा मांग इनकी रही है। इसलिए खरीदी में आ रही तेजी ऑनलाइन बिक्री में तेजी का बड़ा कारण किस्त पर सामान मिलना है। 50 फीसदी से ज्यादा खरीदार, जो टीवी, फ्रिज, वॉशिंग मशीन, लैपटॉप खरीद रहे हैं वे किस्त पर भुगतान कर रहे हैं। ये महंगे उत्पाद खरीद रहे हैं। दूसरे और तीसरे स्तर के शहर स्मार्टफोन और टीवी बिक्री में 70 फीसदी का योगदान दे रहे हैं।  

बोइंग ने अपने 10 फीसदी कर्मचारियों को नौकरी से निकालने का फैसला लिया

न्यूयॉर्क  हवाई जहाज बनाने वाली कंपनी बोइंग के कर्मचारियों के लिए बुरी खबर सामने आई है। बताया जा रहा कि कंपनी ने अपने 10 फीसदी कर्मचारियों को नौकरी से निकालने का फैसला लिया है। इसके पीछे का कारण कारोबार में लगातार जारी दबाव और कर्मचारियों की हड़ताल से बढ़ता नुकसान है। इन अधिकारियों को भी निकाला जा सकता है कंपनी के इस फैसले से लगभग 17 हजार कर्मचारियों को अपनी नौकरी से हाथ धोना पड़ेगा। बोइंग के इस फैसले से उसके उत्पादन में भी देरी होगी। मुख्य कार्यकारी केली ऑर्टबर्ग ने ईमेल के जरिए कहा, वैश्विक स्तर पर होने वाली इस छंटनी में हर स्तर के कर्मचारी, जिसमें एग्जीक्यूटिव, मैनेजर और कर्मचारी सभी शामिल होंगे। यहां तक कि बोइंग ने अपने हथियार और सैन्य उपकरण बनाने वाले व्यापार में भी घाटे की चेतावनी दी है। साथ ही कंपनी ने अपने नए जहाज 777एक्स की डिलिवरी तारीखों को भी आगे बढ़ा दिया है। इंटरनेशनल एसोसिएशन ऑफ मशीनिस्ट्स एंड एयरोस्पेस वर्कर्स के बोइंग कर्मचारियों ने अनुबंध प्रस्ताव को भारी बहुमत से अस्वीकार कर 13 सितंबर को काम छोड़ दिया। क्या है मामला? कंपनी फिलहाल करीब 33 हजार कर्मचारियों की हड़ताल से जूझ रही है जो बीते तीन हफ्ते से जारी है। इससे कामकाज पर बुरा असर पड़ा है। इस हड़ताल का असर कंपनी के सबसे ज्यादा बिकने वाले विमानों के उत्पादन पर भी देखने को मिला है। कर्मचारी की यूनियन 14 सितंबर से हड़ताल पर हैं। कंपनी और यूनियन के बीच बातचीत का भी कोई हल नहीं निकला है। स्थिति ये है कि पिछले महीने ही बोईंग नेशनल लेबर रिलेटेड बोर्ड के सामने यूनियन के खिलाफ अर्जी देकर शिकायत की है कि यूनियन हितों की अनदेखी करते हुए अड़ियल रवैया अपना रही है। प्रति शेयर 9.97 डॉलर का नुकसान बोइंग ने कहा कि हड़ताल के कारण तीसरी तिमाही में उसके वाणिज्यिक विमानन परिणामों पर पूर्व कर तीन अरब डॉलर का बोझ पड़ा, जो प्रति शेयर 9.97 डॉलर के अनुमानित नुकसान का एक हिस्सा है। हमारी कंपनी के भविष्य के लिए यह जरूरी: ऑर्टबर्ग ऑर्टबर्ग ने बताया, ‘जब हमारा कारोबार चुनौतियों का सामना कर रहा है, ऐसे में हम अपने भविष्य के लिए महत्वपूर्ण फैसले ले रहे हैं और हमारी कंपनी को फिर से खड़ा करने के लिए हमें जो काम करना चाहिए, उस पर यही विचार है। ये जरूरी कदम हमारे कारोबार में महत्वपूर्ण संरचनात्मक बदलावों के साथ लंबे समय तक प्रतिस्पर्धी बने रहने के लिए जरूरी हैं।’ 777एक्स की डिलीवरी भी आगे बढ़ी हड़ताल के कारण हुए नुकसान पर बोइंग ने कहा कि नए जहाज 777एक्स की डिलीवरी तारीखों को भी आगे बढ़ा दिया है। पहली डिलीवरी 2025 को होनी थी, मगर अब 2026 में की जाएगी। इसकी साथ ही कंपनी ने साल 2027 में 767 मालवाही का उत्पादन बंद करने की भी योजना बनाई है। उसका कहना है कि अपने सभी ऑर्डर को पूरा करने के बाद उत्पादन बंद किया जाएगा।  

अडानी ने केन्या के साथ किया एक और बड़ा समझौता, ₹62000000000 की डील, जानें क्या करेगी कंपनी

नई दिल्ली  गौतम अडानी दुनिया के कई देशों के साथ एक से बढ़कर एक डील कर रहे हैं। अब उन्होंने केन्या सरकार के साथ एक नई डील की है। हालांकि उनकी केन्या के एयरपोर्ट को लेकर हुई डील अभी भी फंसी हुई है। लेकिन नई डील को अडानी का मास्टरस्ट्रोक माना जा रहा है। यह डील 736 मिलियन डॉलर (करीब 6200 करोड़ रुपये) की है। नई डील के तहत अडानी ग्रुप की कंपनी अडानी एनर्जी केन्या में बिजली ट्रांसमिशन लाइनों का संचालन करेगी। इसके लिए अडानी एनर्जी सॉल्यूशंस लिमिटेड ने केन्या इलेक्ट्रिसिटी ट्रांसमिशन कंपनी लिमिटेड (केट्राको) के साथ एक समझौते पर साइन किए हैं। यह डील 30 वर्षों के लिए हुई है। केन्या के ऊर्जा मामलों के कैबिनेट सचिव ओपियो वांडाई ने इसकी जानकारी दी। क्या होगा डील में? मौजूदा समय में केन्या बिजली के संकट से जूझ रहा है। इस डील के मुताबिक अडानी एनर्जी केन्या में प्रमुख ट्रांसमिशन लाइनों और सबस्टेशनों को विकसित करेगी। साथ ही कंपनी वित्तपोषण, निर्माण, संचालन और रखरखाव करेगी। इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य विश्वसनीय बिजली सुनिश्चित करने के लिए देश के ट्रांसमिशन इंफ्रास्ट्रक्चर को अपग्रेड करना है। केन्या सरकार खर्च नहीं करेगी चवन्नी भी केन्या सरकार इस प्रोजेक्ट पर कोई पैसा खर्च नहीं करेगी। पर कोई वित्तीय व्यय नहीं करेगी। ओपियो वांडाई के अनुसार इस इंफ्रास्ट्रक्चर को विकसित करने के लिए प्रोजेक्ट कंपनी (AESL) लोन और इक्विटी के माध्यम से फंडिंग जुटाएगी। इस रकम को 30 साल की अवधि में चुकाया जाएगा। प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया के माध्यम से तय की जाएगी, जिसे केट्राको और AESL द्वारा संयुक्त रूप से संभाला जाएगा। AESL तीन ट्रांसमिशन लाइन और दो सबस्टेशन विकसित करेगी। अटका हुआ है एयरपोर्ट का संचालन अडानी ग्रुप का केन्या में यह दूसरा बड़ा प्रोजेक्ट है। इससे पहले यह ग्रुप केन्या के मुख्य एयरपोर्ट के संचालन के लिए डील कर चुका है। हालांकि स्थानीय लोगों के विरोध के बाद प्रस्ताव को रोक दिया गया है। बता दें कि केन्या सरकार ने देश के सबसे बड़े एयरपोर्ट जोमो केन्याटा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (JKIA) को अडानी ग्रुप को 30 साल के लिए लीड पर देने की घोषणा की थी। केन्या एविएशन वर्कर्स यूनियन (KAWU) अडानी की इस डील के खिलाफ हैं। इस यूनियन की मांग है कि इस डील को रद्द किया जाए।

Hyundai IPO के आने से पहले ही ग्रे मार्केट में खराब शुरुआत, जीएमपी में तगड़ी गिरावट

मुंबई अगले हफ्ते देश का सबसे बड़ा आईपीओ आ रहा है, जो LIC, पेटीएम और कोल इंडिया जैसे आईपीओ की रिकॉर्ड तोड़ देगा. यह आईपीओ 15 अक्‍टूबर को सब्‍सक्रिप्‍शन के लिए खुल रहा है और 17 अक्‍टूबर को बंद हो जाएगा. कंपनी ने इस IPO के तहत 1865-1960 रुपये प्रति शेयर के प्राइस बैंड (Hyundai IPO Price Band) का ऐलान किया है. Hyundai IPO के साइज की बात करें तो ये 27870.16 करोड़ रुपये का है, जो इसे देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी LIC के आईपीओ से भी बड़ा बनाता है, जो कि 21000 करोड़ रुपये का था. इस आईपीओ के तहत अलॉटमेंट प्रोसेस के लिए 18 अक्टूबर, तो रिफंड प्रोसेस के लिए कंपनी ने 21 अक्टूबर की तारीख तय है. इसके शेयरों की लिस्टिंग 22 अक्टूबर को होनी है. हुंडई आईपीओ जीएमपी में तगड़ी गिरावट Hyundai IPO के आने से पहले ही ग्रे मार्केट में इसकी खराब शुरुआत दिख रही है. ऑटो सेक्‍टर की इस कंपनी के जीएमपी में तगड़ी गिरावट देखी जा रही है. आईपीओ का साइज और प्राइस बैंड तय किए जाने के बाद से ही इसका ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) लगातार टूट रहा है और करीब 80 फीसदी टूट चुका है. सितंबर के आखिरी दिनों में 570 रुपये से गिरकर 12 अक्‍टूबर को इसका जीएमपी 75 रुपये पर आ चुका है. किसके लिए कितना रिजर्व? Hyundai का इश्यू 50 फीसदी हिस्सा क्वालिफाईड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB), 15 फीसदी नॉन-इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स (NII) और 35 फीसदी खुदरा निवेशकों के लिए रिजर्व है. IPO के तहत शेयरों का अलॉटमेंट 18 अक्टूबर को फाइनल होगा. फिर BSE और NSE पर 22 अक्टूबर को एंट्री होगी.  इस आईपीओ के तहत 10 रुपये की फेस वैल्यू वाले 14,21,94,700 शेयर ऑफर फॉर सेल विंडो के तहत जारी होंगे और ये शेयर इसकी पैरैंट कंपनी बेचेगी. क्‍या करें निवेशक? हुंडई आईपीओ के जीएमपी में गिरावट को देखते हुए ज्‍यादातर लोगों के मन में यही सवाल है कि आखिरी अब क्‍या करना चाहिए? ऐसे में कुछ एक्‍सपर्ट्स का कहना है कि यह फाइनेंशियल तौर पर ज्‍यादा मजबूत दिखाई देता है. ऐसे में निवेश किया जा सकता है. हालांकि निवेशकों को अपने रिस्‍क और फंडामेंटल समेत सभी फैक्‍टर्स को अच्‍छी तरह से समझकर ही निवेश करना चाहिए. दो दशक बाद ऑटोमेकर कंपनी का IPO पैसेंजर व्हीकल सेल्स वॉल्यूम के आधार पर Hyundai Motors India कंपनी वित्त वर्ष 2024 में मारुति सुजूकी के बाद देश की दूसरी सबसे बड़ी कंपनी है. मारुति सुजूकी का मार्केट कैप 48 अरब डॉलर के करीब है. मारुति सुजुकी का आईपीओ 2003 में आया था. ऐसे में 20 साल बाद भारत में किसी ऑटो मेकर कंपनी का आईपीओ आ रहा है और इसका साइज देश में अब तक पेश किए गए सबसे बड़ी आईपीओ से भी ज्यादा है. वहीं आईपीओ के जरिए हुंडई मोटर इंडिया 18 से 20 अरब डॉलर के बीच वैल्यूएशन पाने का लक्ष्य लेकर चल रही है.

टाटा ग्रुप का 34 लाख करोड़ का साम्राज्य, संभालने में नोएल टाटा ने जताई उत्सुकता

नई दिल्ली रतन टाटा के निधन के बाद, उनके सौतेले भाई नोएल टाटा को टाटा ट्रस्ट का नया चेयरमैन नियुक्त किया गया है। इस नई जिम्मेदारी के बारे में बात करते हुए, नोएल टाटा ने कहा कि वे रतन टाटा और टाटा समूह के संस्थापकों की विरासत को आगे बढ़ाने के लिए उत्सुक हैं। उन्होंने इस अवसर पर अपने साथी ट्रस्टियों का आभार व्यक्त किया और कहा कि वह इस जिम्मेदारी को लेकर सम्मानित और विनम्र महसूस कर रहे हैं। नोएल टाटा ने टाटा ट्रस्ट के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि “एक सदी से भी अधिक समय पहले स्थापित टाटा ट्रस्ट सामाजिक भलाई के लिए एक अनूठा माध्यम है। हम अपने विकास और परोपकारी पहलों को आगे बढ़ाने के लिए खुद को फिर से समर्पित कर रहे हैं।” टाटा ट्रस्ट का बयान टाटा ट्रस्ट्स ने भी नोएल टाटा की नियुक्ति पर एक बयान जारी किया, जिसमें बताया गया कि टाटा ट्रस्ट्स के कई ट्रस्टियों की मुंबई में एक संयुक्त बैठक हुई। बैठक में रतन एन. टाटा के निधन पर शोक व्यक्त किया गया और उनके राष्ट्र निर्माण में योगदान को याद किया गया। सर्वसम्मति से नोएल टाटा को टाटा ट्रस्ट का चेयरमैन नियुक्त किया गया, और यह नियुक्ति तत्काल प्रभाव से लागू की गई। नोएल टाटा का परिचय नोएल टाटा, रतन टाटा के पिता नवल टाटा की दूसरी पत्नी सिमोना डुनोयर के बेटे हैं, इसलिए वे रतन टाटा के सौतेले भाई हैं। वे टाटा इंटरनेशनल लिमिटेड, वोल्टास लिमिटेड, और टाटा इन्वेस्टमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड के चेयरमैन के रूप में कार्यरत हैं। इसके अलावा, वे टाटा स्टील और टाइटन कंपनी के उपाध्यक्ष भी हैं। टाटा ट्रस्ट का महत्व टाटा ग्रुप, जो लगभग 34 लाख करोड़ रुपये के मार्केट कैप का मालिक है, की अधिकांश होल्डिंग कंपनियां टाटा संस के पास हैं। टाटा संस की 66% से अधिक हिस्सेदारी टाटा ट्रस्ट के पास है, जिससे टाटा ग्रुप का संचालन टाटा ट्रस्ट के अधीन होता है। ऐसे में नोएल टाटा का टाटा ट्रस्ट का चेयरमैन बनना एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

पार्थ प्रतिम सेनगुप्ता को बंधन बैंक का एमडी और सीईओ नियुक्त किए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी

नई दिल्ली  बंधन बैंक के शेयर में  करीब 12 प्रतिशत की तेजी आई। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के पार्थ प्रतिम सेनगुप्ता को तीन साल के लिए बंधन बैंक का प्रबंध निदेशक (एमडी) और मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) नियुक्त किए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी देने के बाद बैंक के शेयरों में तेजी आई। कोलकाता स्थित बैंक का एनएसई पर 11.61 प्रतिशत चढ़कर 209.50 रुपये प्रति शेयर पर पहुंच गया। बीएसई पर यह 11.58 प्रतिशत की बढ़त के साथ 209.50 रुपये प्रति शेयर पर रहा। वहीं, बीएसई सेंसेक्स 226.84 अंक या 0.28 प्रतिशत की गिरावट के साथ 81,384.57 अंक पर आ गया, जबकि निफ्टी 66.90 अंक या 0.27 प्रतिशत फिसलकर 24,931.55 अंक पर रहा। बंधन बैंक ने बृहस्पतिवार को शेयर बाजार को दी सूचना में बताया था कि सेनगुप्ता का तीन साल का कार्यकाल कार्यभार संभालने की तारीख से शुरू हो जाएगा। भारतीय रिजर्व बैंक ने आठ अक्टूबर 2024 के अपने पत्र के जरिये इस पद पर सेनगुप्ता की नियुक्ति को पूर्व-स्वीकृति दे दी है। बैंक ने कहा कि सेनगुप्ता बैंक के संस्थापक एमडी एवं सीईओ चंद्रशेखर घोष की जगह लेंगे जो नौ जुलाई को पद से हट गए थे। फिलहाल बैंक के एक कार्यकारी निदेशक रतन केश अंतरिम एमडी एवं सीईओ के रूप में काम कर रहे हैं। सेनगुप्ता सार्वजनिक क्षेत्र के इंडियन ओवरसीज बैंक के एमडी एवं सीईओ रह चुके हैं। वह खुदरा और कॉरपोरेट बैंकिंग दोनों क्षेत्रों में काफी अनुभव रखते हैं।

रतन टाटा के बाद नोएल बने टाटा ट्रस्ट के चेयरमैन, सर्वसम्मति से लिया गया फैसला

मुंबई नोएल टाटा को टाटा ट्रस्ट्स का नया अध्यक्ष नियुक्त किया गया है. बुधवार को रतन टाटा के निधन के बाद आज मुंबई में एक बैठक हुई थी, जिसमें रतन टाटा के सौतेले भाई नोएल टाटा (Noel Tata) को Tata Tusts का नया चेयरमैन बना दिया गया है. बैठक में ये फैसला सभी के सहमति से लिया गया. इसके तहत नोएल को टाटा समूह के दो सबसे महत्वपूर्ण धर्मार्थ संस्‍थाओं सर रतन टाटा ट्रस्ट और सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट का प्रमुख नियुक्‍त किया गया है. ये पहले इन संस्‍थाओं में ट्रस्‍टी के तौर पर शामिल थे. अब इन्‍हें टाटा ट्रस्‍ट का चेयरमैन नियुक्‍त कर दिया गया है. र‍तन टाटा ने टाटा ट्रस्‍ट को बनाने में अपनी महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाई थी. टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी TATA Sons में टाटा ट्रस्‍ट की एक बड़ी हिस्‍सेदारी है. इसमें करीब 66 फीसदी की हिस्‍सेदारी है. टाटा ट्रस्‍ट के तहत ही Tata Group संचालित है. ये ट्रस्‍ट परोपकारी पहल और शासन की देखरेख के लिए काम करता है. टाटा ग्रुप में निभाते हैं ये जिम्‍मेदारियां Ratan Tata के सौतेले भाई नोएल टाटा को टाटा ट्रस्‍ट की नई जिम्‍मेदारी दे दी गई है. नोएल टाटा ट्रस्‍ट में भी ट्रस्‍टी के तौर पर शामिल थे. वहीं पिछले कुछ सालों से वे टाटा इंटरनेशनल लिमिटेड के चेयरमैन भी हैं. इनका टाटा ग्रुप के साथ चार दशकों का लंबा इतिहास रहा है. वे ट्रेंट, वोल्टास और टाटा इन्वेस्टमेंट कॉरपोरेशन जैसी कंपनियों के चेयरमैंन भी हैं. इतना ही नहीं टाटा स्टील और टाइटन कंपनी लिमिटेड के उपाध्यक्ष के रूप में कार्य करते हैं. इसके अलावा, टाटा इकोसिस्टम के साथ उनके गहरे संबंध भी हैं. 50 करोड़ डॉलर से 3 अरब डॉलर की बना दी कंपनी टाटा इंटरनेशनल लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्‍टर के तौर पर अपने कार्यकाल के दौरान, उन्होंने 2010 और 2021 के बीच कंपनी के राजस्व को 500 मिलियन डॉलर से 3 बिलियन डॉलर से ज़्यादा तक बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. ट्रेंट लिमिटेड कंपनी का साल 1998 में सिर्फ एक सिंगल  रिटेल स्टोर था, जो आज इनके लीडरशिप में पूरे भारत में 700 से अधिक स्टोर्स के साथ एक मजबूत नेटवर्क में बदल चुका है. नोएल टाटा पर्दे के पीछे रहकर करते थे काम जहां एक तरफ रतन टाटा ग्रुप का चेहरा थे। तो वहीं नोएल टाटा (Noel Tata) पर्दे के पीछे रहकर काम करना पसंद करते हैं। वो मीडिया से भी बहुत दूर रहते हैं। उनका फोकस ग्रुप के ग्लोबल वेंचर्स और रिटेल सेक्टर विशेष तौर पर रहता था। नोएल टाटा के पास है कई कंपनियों की कमान नोएल टाटा पिछले 40 साल से टाटा ग्रुप का हिस्सा हैं। मौजूदा समय में वो टाटा ग्रुप की कई कंपनियों के बोर्ड के सदस्य हैं। वह टाटा इंटरनेशनल लिमिटेड, वोल्टास और टाटा इनवेस्टमेंट कॉरपोरेशन के चैयरमैन हैं। साथ ही टाटा स्टील और टाइटन कंपनी लिमिटेड में बतौर वाइस चेयरमैन अपनी सर्विसेज दे रहे हैं। नोएल टाटा अगस्त 2010 से नवंबर 2021 तक ट्रेंट के मैनेजिंग डायरेक्टर रह चुके हैं। उनकी लीडरशिप में ट्रेंट का टर्नओवर 500 मिलियन डॉलर से बढ़कर 3 बिलियन डॉलर पहुंच गया। बता दें कि नोएल टाटा ने ससेक्स यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन किया है। माना जा रहा है कि टाटा ट्रस्ट की कमान ऐसे व्यक्ति को मिल सकती है, जिसके नाम के साथ टाटा जुड़ा हुआ है। ऐसे में नोएल टाटा ही विकल्प के तौर पर उभर कर आते हैं। मौजूदा समय में दो अन्य व्यक्ति भी टाटा ट्रस्ट के अहम सदस्य हैं। टीवीएस के वेणु श्रीनिवासन और पूर्व रक्षा सचिव विजय सिंह। साइरस मिस्त्री के चचेरे भाई भी प्रमुख दावेदार टाटा ट्रस्ट के चेयरमैन के लिए टाटा संस के पूर्व चेयरमैन दिवंगत साइरस मिस्त्री के चचेरे भाई मेहली मिस्त्री भी मजबूत विकल्प के तौर पर देखे जा रहे हैं। मेहली मिस्त्री 2000 से टाटा ट्रस्ट के चेयरमैन के साथ काम कर रहे थे। वो काफी सक्रिय भी थे। 2016 में साइरस मिस्त्री को टाटा संस के चेयरमैन के पद से हटाया गया था, तब शुरू हुए विवाद में उन्हें रतन टाटा का समर्थक माना जाता था। बता दें कि अक्टूबर 2022 में टाटा के 2 सबसे ट्रस्ट मे शामिल किया गया था। रतन टाटा, टाटा ट्रस्ट के चेयरमैन और टाटा संस के मानद चेयरमैन पर रहने वाले आखिरी व्यक्ति थे। टाटा संस 2022 में ऑर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन में बदलाव कर दिया था। जिसकी वजह से अब कोई व्यक्ति दोनों पदों पर एक साथ नहीं रह सकता है।  

TESLA के लिए भारतीयों को करना होगा इंतज़ार! नई EV नीति की घोषणा के बाद सरकार ने पॉलिसी नहीं बदली

मुंबई एलन मस्क की टेस्ला के लिए भारतीय बाजार का रास्ता एक बार फिर मुश्किल हो गया है। दरअसल, इलेक्ट्रिक व्हीकल को बढ़ावा देने के लिए लागू की गई नई EV पॉलिसी में टेस्ला और अन्य ग्लोबल व्हीकल मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों रुचि नहीं लेने के बाद भी सरकार इसमें कोई बदलाव करने का मन नहीं है। एक सरकारी अधिकारी ने साफ कहा है कि सभी कंपनियों के लिए EV नीति के मापदंड़ समान रहेंगे। विदेशी इलेक्ट्रिक व्हीकल निर्माता कंपनियों को भारत में लाने के लिए इस साल मार्च में नई EV नीति घोषित की गई थी। हैवी इंडस्ट्री मिनिस्ट्री के एक अधिकारी ने मनीकंट्रोल को बताया कि मौजूदा EV नीति का लाभ उठाने का इरादा रखने वाले कार निर्माताओं के लिए पात्रता मानदंड और अन्य शर्तें समान रहेंगी। अगर टेस्ला या किसी कार निर्माता ने इस नीति के लिए आवेदन नहीं किया है तो हमें चिंता नहीं है। हम किसी विशेष कंपनी के अनुरूप EV नीति में संशोधन नहीं करेंगे। इसे बेहतर बनाने का प्रयास किया जा रहा है। इस बयान के बाद टेस्ला की इलेक्ट्रिक कारों को भारतीय बाजार में एक्स्ट्रा छूट या दूसरे बेनिफिट्स मिलने का रास्ता भी बंद होता दिख रहा है। अधिकारी ने ये भा बताया कि हमारा रुख साफ है। आप कम टैक्स पर कारों का आयात कर सकते हैं, बशर्ते आप भारत में EV निर्माण प्लांट लिए नया निवेश करें। मार्च में सरकार ने टेस्ला जैसी कंपनियों को आकर्षित करने के लिए नई EV नीति घोषित की थी, जिसमें 5 साल तक चुनिंदा इलेक्ट्रिक कारों पर आयात शुल्क 15 फीसदी तक कम करने की छूट दी थी। इसके लिए कंपनी को 3 साल में EV निर्माण प्लांट लगाने की शर्त रखी गई। हालांकि, टेस्ला की तरफ से भी प्लांट को लेकर अभी तक कोई डिटेल नहीं आई है।

भारत के सबसे अमीर उद्योगपतियों की सूची में रिलायंस इंडस्ट्रीज के सीएमडी मुकेश अंबानी लगातार पहले पायदान पर बने हुए

नई दिल्ली  भारत के सबसे अमीर उद्योगपतियों की सूची में रिलायंस इंडस्ट्रीज के सीएमडी मुकेश अंबानी लगातार पहले पायदान पर बने हुए हैं। फोर्ब्स द्वारा जारी देश के 100 सबसे धनी उद्योगपतियों की सूची में दूसरे स्थान पर अडाणी ग्रुप के प्रमुख गौतम अडाणी का नाम है। फोर्ब्स की इस सूची की जो सबसे अहम बात है, वो ये कि देश के सौ सबसे धनी लोगों की संपत्ति पहली बार कुल मिलाकर एक ट्रिलियन डॉलर के स्तर को पार कर गई है। फोर्ब्स की सूची के अनुसार मुकेश अंबानी कमाई के मामले में दुनिया के दूसरे सबसे लाभ बड़े लाभार्थी बने हैं, जिनकी संपत्ति पिछले 1 साल में 27.5 बिलियन डॉलर बढ़कर 119.5 बिलियन डॉलर के सर्वोच्च स्तर पर पहुंच गई। हालांकि शेयर बाजार में आए उतार-चढ़ाव की वजह से उनका मौजूदा नेटवर्थ 108.3 बिलियन डॉलर का है। फोर्ब्स का दावा है कि इस नेटवर्थ के साथ मुकेश अंबानी फिलहाल दुनिया के 13 सबसे अमीर व्यक्ति बने हुए हैं। हालांकि एक अन्य एजेंसी ब्लूमबर्ग के बिलियनरीज इंडेक्स ने मुकेश अंबानी को दुनिया के सबसे अमीर लोगों की सूची में 14वें स्थान पर रखा है। फोर्ब्स के मुताबिक भारत के अमीर उद्योगपतियों की लिस्ट में 116 बिलियन डॉलर की संपत्ति के साथ गौतम अडानी परिवार (संयुक्त संपत्ति) दूसरे स्थान पर, 73.7 बिलियन डॉलर की संपत्ति के साथ सावित्री जिंदल परिवार तीसरे स्थान पर, 40.2 बिलियन डॉलर की संपत्ति के साथ शिव नाडार चौथे स्थान पर और 32.4 डॉलर बिलियन डॉलर की संपत्ति के साथ दिलीप सांघवी परिवार पांचवें स्थान पर हैं। इसके अलावा राधाकृष्ण दामानी परिवार, सुनील मित्तल परिवार, कुमार मंगलम बिड़ला, साइरस पूनावाला और बजाज परिवार सबसे अमीर उद्योगपतियों की सूची में टॉप 10 में शामिल हैं। फोर्ब्स की रिपोर्ट में विशेष रूप से बताया कि देश में पहली बार सौ सबसे अमीर लोगों की संपत्ति कुल मिलाकर एक ट्रिलियन डॉलर के स्तर को पार कर गई है। फिलहाल इन सौ लोगों की कुल संपत्ति 1.1 ट्रिलियन डॉलर के स्तर पर पहुंच गई है। उद्योगपतियों की संपत्ति में आई हुई इस बढ़ोतरी के लिए फोर्ब्स ने शेयर बाजार में आई जोरदार तेजी को प्रमुख वजह बताया है।    

SEBI ने च्वाइस इक्विटी ब्रोकिंग पर ठोका 2 लाख रुपये का जुर्माना

नई दिल्ली  मार्केट रेगुलेटर सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (सेबी) ने ब्रोकरेज फर्म चॉइस इक्विटी ब्रोकिंग पर निर्धारित नियमों का पालन नहीं करने के आरोप में 2 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। सेबी के आदेश के मुताबिक चॉइस इक्विटी ब्रोकिंग ने एक्सचेंज को ऑथराइज्ड पर्सन (एपी) से जुड़े क्लाइंट्स की सही जानकारी नहीं दी। बताया गया है कि ब्रोकरेज के ऑथराइज्ड पर्सन और क्लाइंट के बीच तीन मामलों में एपी सर्विसेज के लिए फंड की लेनदेन हुई। इस दौरान एपी टर्मिनल्स का इस्तेमाल अनऑथराइज्ड लोगों द्वारा किया गया। सेबी के आदेश में जांच के परिणामों की जानकारी देते हुए बताया गया है कि ब्रोकरेज फर्म के ऑथराइज्ड पर्सन्स में से एक ने एक्सचेंज को 226 क्लाइंट्स की जानकारी नहीं दी, जबकि दूसरे ने 118 क्लाइंट्स की और तीसरे ने 7 क्लाइंट्स की जानकारी एक्सचेंज को उपलब्ध नहीं कराई। सेबी की जांच में इस बात का भी पता चला कि ब्रोकरेज फर्म के ऑथराइज्ड पर्सन्स में से एक ग्रो कैपिटल फाइनेंस सर्विसेज अपने क्लाइंट को फंड ट्रांसफर कर रहा था। हालांकि ब्रोकरेज फर्म की ओर से सफाई दी गई कि फंड ट्रांसफर का ये काम ऑथराइज्ड पर्सन ने पर्सनल कैपेसिटी में क्लाइंट के साथ किया था, जिसके लिए ब्रोकरेज फर्म को जिम्मेदार नहीं माना जाना चाहिए। उल्लेखनीय है कि सेबी के नियमों के तहत ऑथराइज्ड पर्सन को क्लाइंट के फंड और सिक्योरिटीज की किसी भी पेमेंट या डिलीवरी को स्वीकार करने से रोका गया है। इस नियम में कहा गया है कि ऑथराइज्ड पर्सन क्लाइंट से कोई भी फंड या सिक्योरिटीज कलेक्ट नहीं करेगा और एजेंट के रूप में मेंबर की ओर से दी गई सर्विसेज के लिए क्लाइंट से प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से कोई भुगतान या राशि नहीं लेगा। सेबी ने अपनी जांच में इसी नियम के उल्लंघन के कारण चॉइस इक्विटी ब्रोकिंग पर दंडात्मक कार्रवाई करते हुए जुर्माना लगाया है।    

सर्राफा बाजारों में आज 24 कैरेट सोना 77 हजार के स्तर से नीचे गिर कर 76,830 प्रति 10 ग्राम में कारोबार कर रहा

सर्राफा बाजार में गिरावट जारी, 760 रुपये तक सस्ता हुआ सोना, चांदी की भी घटी चमक नवरात्रि के दौरान सर्राफा बाजार में गिरावट लगातार जारी सर्राफा बाजारों में आज 24 कैरेट सोना 77 हजार के स्तर से नीचे गिर कर 76,830  प्रति 10 ग्राम में कारोबार कर रहा नई दिल्ली नवरात्रि के दौरान घरेलू सर्राफा बाजार में गिरावट लगातार जारी है। आज सोना की कीमत में 700 से 760 रुपये प्रति 10 ग्राम तक की गिरावट दर्ज की गई है। इस गिरावट के कारण आज देश के अधिकांश सर्राफा बाजारों में आज 24 कैरेट सोना 77 हजार के स्तर से नीचे गिर कर 76,830 रुपये से लेकर 76,680 रुपये प्रति 10 ग्राम के दायरे में कारोबार कर रहा है। इसी तरह 22 कैरेट सोना आज 70,440 रुपये से लेकर 70,290 रुपये प्रति 10 ग्राम के बीच बिक रहा है। चांदी की कीमत में भी आज बड़ी गिरावट आई है। इस गिरावट के कारण दिल्ली सर्राफा बाजार में चांदी आज 93,900 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर कारोबार कर रही है। देश की राजधानी दिल्ली में 24 कैरेट सोना आज 76,830 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर कारोबार कर रहा है, जबकि 22 कैरेट सोने की कीमत 70,440 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज की गई है। वहीं, देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में 24 कैरेट सोना 76,680 रुपये प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट सोना 70,290 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर बिक रहा है। इसी तरह अहमदाबाद में 24 कैरेट सोने की रिटेल कीमत 76,730 रुपये प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट सोने की कीमत 70,340 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज की गई है। इन प्रमुख शहरों के अलावा चेन्नई में 24 कैरेट सोना आज 76,680 रुपये प्रति 10 ग्राम की कीमत पर और 22 कैरेट सोना 70,290 रुपये प्रति 10 ग्राम की कीमत पर बिक रहा है। इसी तरह कोलकाता में भी 24 कैरेट सोना 76,680 रुपये प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट सोना 70,290 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर कारोबार कर रहा है। लखनऊ के सर्राफा बाजार में 24 कैरेट सोना आज 76,830 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर और 22 कैरेट सोना 70,440 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर बिक रहा है। वहीं, पटना में 24 कैरेट सोने की कीमत 76,730 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गई है, जबकि 22 कैरेट सोना 70,340 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर बिक रहा है। इसी तरह जयपुर में 24 कैरेट सोना 76,830 रुपये प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट सोना 70,440 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर बिक रहा है। देश के अन्य राज्यों की तरह कर्नाटक, तेलंगाना और ओडिशा के सर्राफा बाजार में भी गिरावट आने की वजह से सोना सस्ता हुआ है। इन तीनों राज्यों की राजधानियों बेंगलुरु, हैदराबाद और भुवनेश्वर में 24 कैरेट सोना आज 76,680 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर कारोबार कर रहा है। इन तीनों शहरों के सर्राफा बाजारों में 22 कैरेट सोना 70,290 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर बिक रहा है।    

रतन टाटा ने की थी विदेशी कंपनियों को खरीदने की शुरुआत, JLR को खरीदकर टाटा मोटर्स ग्लोबल प्लेयर बन गई

नई दिल्ली दिग्गज उद्योगपति रतन टाटा का 9 अक्टूबर की देर रात देहांत हो गया। यह भारतीय कारोबार जगत के लिए एक स्वर्णिम युग के अंत सरीखा है। रतन टाटा साल 1991 में जेआरडी टाटा की जगह टाटा ग्रुप के चेयरमैन बने। उन्होंने एक के बाद एक कंपनियों को खरीदकर टाटा ग्रुप के साम्राज्य को बढ़ाया। ये सौदे न सिर्फ देश में हुए, बल्कि रतन टाटा ने कई बड़ी विदेशी कंपनियों को खरीदा। टाटा कंज्यमूर प्रोडक्ट्स पहले टाटा टी नाम से कारोबार करती थी। इसने साल 2000 में दिग्गज ब्रिटिश चाय कंपनी- टेटली (Tetley Tea) को खरीदा। यह डील 45 करोड़ डॉलर में हुई। इस डील ने दुनिया को इसलिए भी हैरान किया, क्योंकि टेटली साइज में टाटा के मुकाबले दोगुनी बड़ी थी। इस डील के बाद टाटा टी दुनिया की सबसे बड़ी चाय कंपनियों में शुमार हो गई। यह पहली दफा था, जब किसी भारतीय कंपनी ने विदेशी कंपनी का अधिग्रहण किया हो। इससे टाटा ग्रुप के वैश्विक विस्तार की शुरुआत भी हो गई। दो बड़े ऑटोमेकर की खरीद टाटा मोटर्स ने दुनिया के दो बड़े ऑटोमेकर को खरीदा। पहली डील साल 2004 में हुई दक्षिण कोरिया की देवू (Daewoo) से। टाटा मोटर्स ने देवू की कमर्शियल व्हीकल यूनिट को 10.2 करोड़ डॉलर में खरीद लिया। इससे टाटा ग्रुप के पास ट्रक बनाने वाली एडवांस तकनीक आ गई। फिर टाटा मोटर्स ने 2008 में अमेरिकी ऑटोमेकर फोर्ड से Jaguar Land Rover (JLR) की खरीदा। इस 230 करोड़ डॉलर की डील ने टाटा मोटर्स को ऑटो सेक्टर की वैश्विक कंपनी बना दिया। दो स्टील कंपनियों से डील टाटा स्टील ने रतन टाटा की अगुआई में दो बड़े सौदे करके अपना दबदबा बढ़ाया। पहली डील2004 में हुई, जब टाटा स्टील ने सिंगापुर की स्टील कंपनी NatSteel को 48.6 करोड़ डॉलर में खरीदा। वहीं, दूसरा सौदा 2007 में हुआ। इस बार टाटा स्टील ने ब्रिटेन की Corus Steel को 1290 करोड़ डॉलर में खरीदा। यह अपने समय की सबसे बड़ी डील थी और इसने टाटा स्टील की दुनिया की टॉप-10 स्टील कंपनियों में शुमार कर दिया। अमेरिकी होटल में भी चेक-इन टाटा ग्रुप की होटल कंपनी- ताज होटल ने साल 2006 में अमेरिका के The Ritz-Carlton Boston Hotel को खरीदा। यह सौदा करीब 17 करोड़ डॉलर में हुआ। इससे ताज लग्जरी ब्रांड को वैश्विक विस्तार का मौका मिला और कंपनी ग्लोबल हॉस्पिटैलिटी इंडस्ट्री में अपना दबदबा मजबूत किया। Brunner Mond को खरीदा टाटा ग्रुप की केमिकल कंपनी टाटा केमिकल्स ने 9 करोड़ पौंड में ब्रिटेन की सोडा ऐश बनाने वाली Brunner Mond को अपना बना लिया। इस अधिग्रहण की बदौलत टाटा केमिकल्स सोडा ऐश बनाने के मामले में दुनिया की सबसे बड़ी कंपनियों में शामिल हो गई। Starbucks के साथ ज्वाइंट वेंचर टाटा ग्लोबल बेवरेजेज ने अमेरिका की Starbucks के साथ फ्रेंचाइजी मॉडल की डील की। यह एक ज्वाइंट वेंचर था। इसकी बदौलत टाटा ग्रुप को भारत में स्टारबक्स आउटलेट्स लॉन्च करने की इजाजत मिल गई और उसने तेजी से बढ़ रहे कॉफी रिटेल मार्केट में एंट्री कर ली। BigBasket का अधिग्रहण रतन टाटा ने साल 2012 में रिटायर हो गए थे, लेकिन वह टाटा ग्रुप के चेयरमैन एमेरिटस बने रहे। टाटा ग्रुप ने मई 2021 में बिग बास्केट का अधिग्रहण किया। टाटा डिजिटल ने बिग बास्केट में मेजॉरिटी हिस्सेदारी खरीदी। इससे टाटा ग्रुप के लिए ई-कॉमर्स सेक्टर में एंट्री का रास्ता साफ हो गया। Air India को फिर अपना बनाया एयर इंडिया के साथ टाटा ग्रुप का भावनात्मक रिश्ता रहा है। इसकी शुरुआत 1930 के दशक में जेआरडी टाटा ने की थी। लेकिन, साल 1953 में इसका राष्ट्रीयकरण कर दिया गया। साल 2022 में टाटा सन्स ने 18,000 करोड़ में एयर इंडिया को खरीदा। तब टाटा ग्रुप के चेयरमैन नटराजन चंद्रशेखरन और चेयरमैन एमेरिटस रतन टाटा थे।

रतन टाटा के बाद अब कौन संभालेगा टाटा ग्रुप, जानें कैसे चुना जाएगा उत्तराधिकारी, कौन है रेस में सबसे आगे

मुंबई टाटा समूह के मानद चेयरमैन रतन टाटा अब इस दुनिया में नहीं रहे। 86 साल की उम्र में उन्होंने अंतिम सांस ली। इसके साथ ही टाटा समूह की कमान को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं कि रतन टाटा के बाद अब अगुवाई कौन करेगा। हालांकि, इस रेस में कई नाम सामने आ रहे हैं, लेकिन सबसे आगे उनके सौतेले भाई नोएल टाटा का नाम है। हालांकि, अब तक समूह की तरफ से आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा गया है। कौन हैं नोएल टाटा नवल एच टाटा और सिमोन एन टाटा के बेटे हैं। टाटा इंटरनेशनल की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, नोएल टाटा इंटरनेशनल लिमिटेड के नॉन-एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर हैं। वह टाटा समूह से 40 सालों से जुड़े हुए हैं और टाटा ग्रुप की कई कंपनियों में बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में शामिल हैं। वह ट्रेंट, टाटा इंटरनेशनल लिमिटेड, वोल्टास और टाटा इन्वेस्टमेंट कॉर्पोरेशन के चेयरमैन हैं। साथ ही वह नोएल स्टील और टाइटन कंपनी लिमिटेड के वाइस चेयरमैन हैं। वह सर रतन टाटा ट्रस्ट और सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट के बोर्ड के ट्रस्टी भी हैं। उन्होंने ब्रिटेन की ससेक्स यूनिवर्सिटी से शिक्षा हासिल की है। साथ ही INSEAD से इंटरनेशनल एग्जीक्यूटिव प्रोग्राम पूरा किया है। नोएल टाटा के 3 बच्चे टाटा ट्रस्ट्स में हैं शामिल मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, टाटा समूह ने नोएल टाटा के 3 बच्चों को परोपकारी संस्थाओं के बोर्ड में शामिल किया था। इनमें लेह, माया और नेविल का नाम शामिल है। खास बात है कि इन नियुक्तियों से ट्रस्ट्स की 132 साल पुरानी परंपरा में भी बदलाव के संकेत मिलते हैं, जहां पहले आमतौर पर दिग्गजों को ट्रस्टीशिप दी जाती थी। लेह, माया और नेविल टाटा की कई कंपनियों में मैनेजर लेवल के पदों पर भी हैं। इन ट्रस्टों में शामिल अन्य लोगों ने सिटी इंडिया के पूर्व सीईओ परमीत झावेरी सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट और रतन टाटा के छोटे भाई जिमी टाटा और जहांगीर अस्पताल के सीईओ जहांगीर एचसी जहांगीर सर रतन टाटा ट्रस्ट के ट्रस्टी हैं. कैसे चुने जाते हैं इन ट्रस्टों के चेयरमैन टाटा ट्रस्ट के प्रमुख का चुनाव ट्रस्टियों में से बहुमत के आधार पर होता है. विजय सिंह और वेणु श्रीनिवास इन दोनों ट्रस्टों के उपाध्यक्ष हैं. लेकिन इनमें से किसी एक के प्रमुख चुने जाने की संभावना अपेक्षाकृत कम है. जिस व्यक्ति को टाटा ट्रस्ट का प्रमुख बनाए जाने की अधिक संभवाना है, वो है 67 साल के नोएल टाटा. नोएल की नियुक्ति से पारसी समुदाय भी खुश होगा. रतन टाटा पारसी थे. इससे यह भी सुनिश्चित होगा कि एक पारसी है इस संगठन का नेतृ्त्व करे. इस ट्रस्ट ने वित्त वर्ष 2023 में 470 करोड़ रुपये से अधिक का दान दिया था. पारसी को प्राथमिकता एक ऐतिहासिक तय्थ यह भी है कि केवल पारसियों ने ही टाटा ट्रस्ट की कमान संभाली है. हालांकि कुछ के नाम में टाटा नहीं लगा था और उनका ट्रस्ट के संस्थापक परिवार से कोई सीधा रिश्ता नहीं था. अगर नोएल टाटा इन ट्रस्टों के प्रमुख चुने जाते हैं तो वे सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट के 11वें अध्यक्ष और सर रतन टाटा ट्रस्ट के छठे अध्यक्ष बनेंगे. नोएल चार दशक से अधिक समय से टाटा समूह से जुड़े हुए हैं. वो ट्रेंट, टाइटन और टाटा स्टील समेत छह प्रमुख कंपनियों के बोर्ड में हैं. उन्हें 2019 में सर रतन टाटा ट्रस्ट का ट्रस्टी नियुक्त किया गया था. वो 2022 में सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट के बोर्ड में शामिल किए गए थे. टाटा का कार्यकाल पूरा हो जाने के बाद माना जाता था कि वो टाटा संस के चेयरमैन का पद संभालेंगे. लेकिन उस पर नोएल के बहनोई साइरस मिस्त्री को बैठा दिया गया. टाटा संस से साइरस मिस्त्री के निकाले जाने के बाद टाटा संस के अध्यक्ष की कमान टीसीएस के सीईओ एन चंद्रशेखरन ने संभाली.नोएल और रतन टाटा कभी एक साथ नजर नहीं आए. दोनों ने अपने बीच दूरी बनाए रखी.हालांकि रतन टाटा के अंतिम दिनों में अपने सौतेले भाई से रिश्ते काफी मधुर हो गए थे.

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