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मंत्रियों के नामों पर मंथन, ऐसी हो सकती है मोहन कैबिनेट.

A Brainstorming on the names of ministers, this could be the Mohan Cabinet. मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री का फेस तय करने के बाद भाजपा अब मंत्रियों के नामों पर मंथन कर रही है। भोपाल। मुख्यमंत्री का कार्यभार संभालने के बाद डा. मोहन यादव ने कैबिनेट विस्तार के लिए मंत्रियों के नाम तय करने की कवायद आरंभ कर दी है। ऐसा माना जा रहा है कि लोकसभा चुनाव तक कैबिनेट में मंत्रियों की संख्या सीमित रहेगी। नियमानुसार 35 सदस्यों की कैबिनेट हो सकती है लेकिन पहले विस्तार में इसमें 18-20 मंत्रियों को ही शामिल किया जाएगा। दरअसल, इसकी वजह यह है कि लोकसभा चुनाव के बाद रिक्त पद विधायकों के प्रदर्शन के आधार पर भरे जाएंगे। मुख्यमंत्री चयन की तरह समानांतर रूप से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के दिग्गज नेता अपनी कवायद कर रहे हैं। वे अपनी सूची भाजपा के राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री शिव प्रकाश को सौंपेंगे। मुख्यमंत्री और संगठन की पसंद की भी सूची तैयार होगी। इसके बाद हाईकमान इसकी हरी झंडी देगी। चर्चाओं का दौर जारीपार्टी हाईकमान दो विकल्पों पर विचार कर रहा है कि मंत्रिमंडल का विस्तार मलमास के पहले किया जाए या फिर उसके बाद। संगठन के स्तर पर राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री शिव प्रकाश, प्रदेश संगठन महामंत्री हितानंद, प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा आदि के बीच इस मुद्दे पर चर्चाओं का दौर चला है। दावेदार भी इनसे मिल रहे हैं। हालांकि, माना यही जा रहा है कि मंत्रियों के नाम दिल्ली से ही तय होंगे। कुछ लोग यह भी अनुमान लगा रहे हैं कि मलमास की वजह से अभी नए मंत्रियों की शपथ नहीं होगी। क्या बोले प्रदेश अध्यक्ष?भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष विष्णु दत्त शर्मा भी फिलहाल नए मंत्रियों की शपथ के कार्यक्रम से अनभिज्ञ हैं। वे कहते हैं कि पार्टी सामूहिक निर्णय पर भरोसा करती है और इस बारे में भी आगे बातचीत होगी।

संसद मामला : पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा ने किया हमलावरों का समर्थन, भाजपा ने किया विरोध.

Parliament Case: Former Minister Sajjan Singh Verma expressed support for the attackers; BJP opposed the statement. कहा-देश की युवाओं की बात को संसद तक पहुंचाने की कोशिश की भोपाल। पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा ने संसद में हुए हमले को लेकर हमलावरों का समर्थन किया है। सज्जन सिंह वर्मा का कहना है कि जो हमलावर सदन के अंदर दाखिल हुए थे उन्होंने अपने विरोध की आवाज उठाई थी। बेरोजगारी सहित कई मुद्दों को लेकर अब उनके पास कोई चारा नहीं था। इसलिए सदन के अंदर दाखिल होकर ऐसा कदम उठाया है। आज देश की यही स्थिति बन रही है। उन्होंने देश की युवाओं की बात को संसद तक पहुंचाने की कोशिश की है। भाजपा के प्रदेश मीडिया प्रभारी ने कांग्रेस नेता सज्जन सिंह वर्मा के बयानों पर किया पलटवारभाजपा के प्रदेश मीडिया प्रभारी आशीष अग्रवाल ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता व विधायक सज्जन सिंह वर्मा के संसद के सुरक्षा घेरे को तोड़कर उत्पात मचाने वालों का समर्थन करने पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कांग्रेस नेता को नसीहत देते हुए कहा कि कांग्रेसी सदैव जिहादी, अपराधी और अराजक मानसिकता का समर्थन करते हैं। उन्होंने सवाल किया कि क्या इनके विचारों का समर्थन सोनिया गांधी व राहुल गांधी भी करते हैं, इसे स्पष्ट करना चाहिए। अग्रवाल ने अपने ट़्वीटर एक्स हैंडल पर किए गए ट्वीट में कहा कि इनके दुर्जन विचारों को सुनिए…। उन्होंने लिखा कि वर्मा संसद के सुरक्षा घेरे को तोड़कर उत्पात मचाने वालों का समर्थन कर रहे हैं। आखिर क्यों कांग्रेसी सदैव जिहादी, अपराधी और अराजक मानसिकता का समर्थन करती है। क्या इनके विचारों का समर्थन सोनिया गांधी और राहुल गांधी भी करते हैं उन्हें स्पष्ट करना चाहिए।

मप्र के विपक्ष का नेता दिल्ली में तय करेगा पार्टी सुप्रीमो, रिपोर्ट भेजी.

The opposition leader of Madhya Pradesh will decide the party supremo in Delhi, as per the sent report. उदित नारायण भोपाल। मध्यप्रदेश में कांग्रेस विधायक दल की पहली बैठक भोपाल स्थित प्रदेश कार्यालय में गुरुवार को हुई। चुरहट विधायक अजय सिंह ने कहा कि बैठक में एक लाइन का प्रस्ताव पारित हुआ है कि नेता प्रतिपक्ष का फैसला दिल्ली हाईकमान करेगा। करीब 40 मिनट की बैठक में दिग्विजय सिंह ने लोकसभा चुनाव के बारे में विधायकों को सक्रिय होने के लिए कहा। कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी रणदीप सुरजेवाला और स्क्रीनिंग कमेटी के अध्यक्ष जितेंद्र सिंह ने विधायकों से वन टू वन चर्चा की। सुरजेवाला ने कहा कि आर्ब्जवर भंवर जीतेंद्र सिंह ने बैठक में कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ शामिल नहीं हुए।कांग्रेस के एक पदाधिकारी ने बताया कि कमलनाथ का कार्यक्रम छिंदवाड़ा जिले में पहले से तय है। पार्टी के प्रदेश प्रभारी रणदीप सिंह सुरजेवाला, स्क्रीनिंग कमेटी के अध्यक्ष भंवर जितेंद्र सिंह, पूर्व उट दिग्विजय सिंह बैठक में पहुंचे। दिग्विजय सिंह ने मीडिया के सवालों पर बस इतना कहा कि कैबिनेट का गठन हो गया क्या। भाजपा के ओबीजी मुख्यमंत्री बनाने के साथ ही सामान्य और अनुसूचित जाति वर्ग से एक-एक डिप्टी सीएम बनाए हैं। ऐसे में कांग्रेस में आदिवासी विधायक को नेता प्रतिपक्ष पद देने पर विचार हो रहा है। हालांकि, कांग्रेस में ओबीसी चेहरे के तौर पर विजयपुर विधायक रामनिवास रावत और कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष व सतना विधायक सिद्धार्थ कुशवाह के नाम भी चर्चा में हैं। वहीं, संसदीय मामलों में अनुभवी नेताओं के तौर पर पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह राहुल भैया, पूर्व विधानसभा उपाध्यक्ष और अमरपाटन से विधायक राजेंद्र कुमार सिंह को लेकर भी अंदरखाने विचार हो रहा है। भाजपा को विधायक याद दिलाएंगे संकल्पबैठक के बाद रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि हाईकमान का संदेश विधायकों को दिया गया है। उन्हें लोकसभा चुनाव की तैयारी के लिए कहा गया है। साथ ही विपक्ष में बैठने वाले विधायक जनता के प्रहरी के तौर पर काम करेंगे। सदन के भीतर जनता के मुद्दों को उठाने की जिम्मेदारी निभाएंगे। जनता के लिए सरकार का समर्थन भी करेंगे। इसके अलावा भाजपा को विधायक संकल्प पत्र को पूरा करने के लिए भी आगाह करते रखेंगे। आदिवासी नेताओं में इनके नाम शामिल

गुंडे-अपराधी समझ लें, उनके लिए अब सुरक्षित नहीं है मध्यप्रदेश : विष्णुदत्त शर्मा.

Consider goons and criminals warned, Madhya Pradesh is not safe for them anymore: Vishnudatt Sharma. प्रदेश अध्यक्ष ने कहा: मोदी की गारंटी को पूरा करने प्रदेश सरकार ने बढ़ाया पहला कदम उदित नारायणभोपाल। गुंडे और अपराधी अब यह सोच लें कि मध्यप्रदेश उनके लिए सुरक्षित नहीं है और ऐसे लोगों के लिए प्रदेश में कोई स्थान नहीं है। सरकार के निर्णय से आदतन अपराधियों पर शिकंजा और कसेगा तथा वे कोई नया अपराध करने की स्थिति में नहीं होंगे। यह बात भाजपा प्रदेश अध्यक्ष व सांसद विष्णुदत्त शर्मा ने कही। जनहितैषी निर्णयों के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और उनकी सरकार के प्रति आभार जताते हुए गुरूवार को भाजपा प्रदेश अध्यक्ष शर्मा ने कहा कि 2003 में भाजपा सरकार को ऐसा मप्र मिला था, जो असुरक्षित था और जहां गुंडों-अपराधियों का बोलबाला था। भाजपा की सरकार ने गुंडों, अपराधियों और डकैतों की नकेल कसकर प्रदेश को सुरक्षित बनाया। इससे आगे बढ़कर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सरकार ने निर्णय लिया है कि ऐसे आदतन अपराधियों के द्वारा पूर्व में किए गए अपराधों में प्राप्त जमानत को दंड प्रक्रिया संहिता सीआरपीसी की धारा 437 438 439 के तहत संबंधित न्यायालयों में आवेदन प्रस्तुत करके जमानत निरस्त करने की कार्रवाई की जाए। देश के अंदर अगर कोई गारंटी है, तो वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गारंटीप्रदेश अध्यक्ष शर्मा ने कहा कि देश के अंदर अगर कोई गारंटी है, तो वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गारंटी है। विधानसभा चुनाव के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रदेश की जनता को यह विश्वास दिलाया था कि ’मोदी की गारंटी, हर गारंटी के पूरा होने की गारंटी’ है। प्रधानमंत्री के इस वादे को पूरा करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सरकार ने अपनी पहली कैबिनेट मीटिंग में ही तेंदूपत्ता की दर 4000 रुपये प्रति मानक बोरा करने का निर्णय ले लिया है, जिसके लिए भाजपा के संकल्प पत्र में वादा किया गया था। राज्य सरकार का यह निर्णय मोदी की गारंटी को पूरा करने की दिशा में उठाया गया पहला कदम है। सरकार के इस निर्णय से उन आदिवासी भाईयों का सशक्तीकरण होगा, जो वनोपज एकत्र करके अपनी आजीविका चलाते हैं। जनता की तकलीफें दूर होंगी, मिलेंगी सुविधाएं प्रदेश अध्यक्ष शर्मा ने कहा कि प्रदेश सरकार के निर्णयों से व्यवस्था पारदर्शी होगी और किसान भाईयों, ग्रामीणों, आम लोगों की परेशानियां कम होंगी। शर्मा ने कहा कि गुड गवर्नेंस का उदाहरण प्रस्तुत करते हुए राज्य सरकार ने अपनी पहली कैबिनेट में जो निर्णय लिए हैं, उनके लिए मैं मुख्यमंत्री और उनकी कैबिनेट को बधाई और शुभकामनाएं देता हूं। मोदी की गारंटी को घर-घर पहुंचाएगी विकसित भारत संकल्प यात्राप्रदेश अध्यक्ष शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास के मंत्र पर आगे बढ़ रही है। उनकी सरकार की योजनाओं के केंद्र में आम नागरिक, नौजवान, महिलाएं, किसान और गरीब होते हैं। इन योजनाओं के बारे में जनजागरूकता तथा इनका लाभ लोगों को दिलाने के उद्देश्य से मध्यप्रदेश एवं अन्य राज्यों में 16 दिसम्बर से विकसित भारत संकल्प यात्रा निकाली जा रही हैं। ये यात्राएं सभी ग्राम पंचायतों और नगरीय निकाय क्षेत्रों में भ्रमण करेंगी तथा यात्राओं में शामिल ’गारंटी रथ’ के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गारंटी घर-घर पहुंचेगी।

मंत्रिमंडल विस्तार में नहीं चलेगा पट्ठावाद, चौंकाने वाले हो सकते मंत्रियों के नाम.

The expansion of the cabinet, here are the names of the ministers who could be surprising. हर अंचल से बनाए जाएंगे 4 से 6 तक मंत्री- खाली रखे जा सकते हैं आधा दर्जन मंत्री पद, मंत्रिमंडल में जातीय संतुलन साधने की तैयारी उदित नारायण भोपाल। जिस प्रकार मुख्यमंत्री और उप मुख्यमंत्रियों के चयन में रसूखदार नेताओं की नहीं चली, ठीक इसी तर्ज पर मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के मंत्रिमंडल का गठन होगा। लोकसभा चुनाव की दृष्टि से इसमें क्षेत्रीय और जातीय संतुलन तो साधा जाएगा लेकिन पट्ठावाद बिल्कुल नहीं चलेगा। अर्थात रसूखदार नेताओं का समर्थक होने के कारण किसी को मंत्री नहीं बनाया जाएगा। सूत्रों के अनुसार पहले चरण में 26-27 मंत्रियों को शामिल कर शपथ दिलाई जाएगी और आधा दर्जन से ज्यादा मंत्री पद खाली रखे जाएंगे। हमेशा की तरह नेतृत्व मंत्रिमंडल के गठन में भी सभी को चौंका सकता है। मोहन-वीडी लेकर जाएंगे संभावित मंत्रियों की सूचीमंत्रिमंडल के गठन पर भी केंद्रीय नेतृत्व की मुहर लगेगी। जानकारी के अनुसार मुख्यमंत्री डॉ यादव और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष वीडी शर्मा संभावित मंत्रियों की सूची लेकर दिल्ली जाएंगे। वहां नेतृत्व के साथ सूची पर डिस्कशन होगा। नाम जोड़े और घटाएं जाएंगे। इसके बाद फायनल सूची के अनुसार मंत्रियों को शपथ दिलाई जाएगी।वरिष्ठ और नए के बीच होगा संतुलनमंत्रिमंडल के गठन में भी मुख्यमंत्री और उप मुख्यमंत्रियों का फार्मूला अपनाया जा सकता है। इसके तहत वरिष्ठ और नए विधायकों के बीच संतुलन साधा जा सकता है। कुछ वरिष्ठों के साथ नए मंत्री ज्यादा बनाए जा सकते हैं। जैसे 8-9 वरिष्ठ मंत्रियों के साथ 16-18 नए विधायकों को मंत्री बनाया जा सकता है। चंबल-ग्वालियर अंचल से ये बन सकते मंत्रीभाजपा सूत्रों के अुनसार अंचलों में मिली सीटों के संख्या के आधार पर मंत्रियों की संख्या तय हो सकती है। इस आधार पर चंबल- ग्वालियर, बुंदेलखंड, विंध्य और मध्य अंचल से 4-4 मंत्री बनाए जा सकते हैं। इनमें जातीय संतुलन भी साधा जाएगा। जैसे, चंबल-ग्वालियर से नेता प्रतिपक्ष को हराने वाले अंबरीश शर्मा, जनता के बीच सक्रिय प्रद्युम्न सिंह तोमर, केपी सिंह को हराने वाले देवेंद्र कुमार जैन और घनश्याम सिंह को हराने वाले प्रदीप अग्रवाल को मंत्री बनाया जा सकता है। नरेंद्र सिंह तोमर पहले ही विधानसभा अध्यक्ष घोषित किए जा चुके हैं। बुंदेलखंड, विंध्य में ये हो सकते चेहरेबुंदेलखंड और विंध्य से मंत्रिमंडल में वरिष्ठ और कनिष्ठ के बीच संतुलन के तहत चेहरे तय किए जाएंगे। बुंदेलखंड से नरयावली विधायक प्रदीप लारिया, छतरपुर की ललिता यादव और जबेरा के धर्मेंद्र लोधी को मौका मिल सकता है। इनके अलावा वरिष्ठों में गोपाल भार्गव, भूपेेंद्र सिंह, गोविंद सिंह राजपूत, जयंत मलैया और बृजेंद्र प्रताप सिंह में से 1 अथवा 2 को मौका मिल सकता है। विंध्य अंचल से सीधी की रीति पाठक, जयसिंह नगर की मनीषा सिंह, मऊगंज से प्रदीप पटेल और रामपुर बघेलान से जीते विक्रम सिंह को मौका मिल सकता है। इस अंचल के राजेंद्र शुक्ला पहले ही उप मुख्यमंत्री बन चुके हैं। महाकौशल से बनाए जा सकते हैं 5 मंत्रीमहाकौशल अंचल में भाजपा को इस बार 38 में से 21 सीटें मिली हैं। यह कमलनाथ का भी इलाका है। इसलिए यहां से 5 मंत्री बनाए जा सकते हें। इनमें बहोरीबंद के प्रणव पांडे, नरसिंहपुर के प्रहलाद पटेल और बैतूल के हेमंत खंडेलवाल को मौका मिल सकता है। इनके अलावा जबलपुर के राकेश सिंह और गाडरवारा के उदयप्रताप सिंह में से किसी एक को मौका मिल सकता है। ये दोनों पूर्व सांसद हैं। इसी प्रकार शहपुरा के ओम प्रकाश धुर्वे और मंडला की संपतिया उइके में से किसी एक को मंत्री बनाया जा सकता है। मालवा-निमाड़ से बन सकते सर्वाधिक मंत्रीमालवा- निमाड़ अंचल में सर्वाधिक 66 सीटें हैं। भाजपा ने इनमें से 48 सीटें जीती हैं। इसलिए यहां से सर्वाधिक मंत्री बनाए जा सकते हैं। इंदौर से तुलसीराम सिलावट के अलावा कैलाश विजयवर्गीय और रमेश मैंदोला में से किसी एक काे मंत्री बनाया जा सकता है। इनके अलावा सज्जन सिंह वर्मा को हराने वाले राजेश सोनकर, दीपक जोशी को हराने वाले आशीष शर्मा, हरसूद के विजय शाह, नेपानगर की मंजू राजेंद्र दादू मंत्री बन सकते हैं। भोपाल के आसपास भी कम दावेदार नहींप्रदेश के मध्य अंचल अर्थात भोपाल के आसपास मंत्री पद के दावेदारों की संख्या कम नहीं है। इस बार रामेश्वर शर्मा, विश्वास सारंग, कृष्णा गौर, विष्णु खत्री में से दो मंत्री बन सकते हैं। रायसेन जिले में प्रभुराम चौधरी और सुरेंद्र पटवा में से किसी एक को मंत्री बनाया जा सकता है। इनके अलावा सीहोर के सुदेश राय और खिलचीपुर में पूर्व मंत्री प्रियव्रत सिंह को हराने वाले हजारीलाल दांगी मंत्री बनाए जा सकते हैं। संभावित मंत्रियों की यह सूची सूत्रों पर आधारित है क्योंकि नरेंद्र मोदी और अमित शाह की जोड़ी क्या करेगी, कोई नहीं जानता।

राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के चेयरमैन डॉ. कुसमरिया ने संभाला कामकाज, अक्टूबर में हुई थी नियुक्ति.

Dr. Kusmariya assumed office as the Chairman of the State Backward Classes Commission, appointed in October. डॉ. कुसमरिया को राज्य शासन ने मध्यप्रदेश राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया था. कार्यभार ग्रहण करने के बाद डॉ. कुसमरिया ने आयोग की गतिविधि के बारे में जानकारी प्राप्त की. आयोग मुख्य रूप से प्रदेश में पिछड़ा वर्ग के लिये हितप्रहरी के रूप में कार्य करता है! मध्य प्रदेश में डॉ. रामकृष्ण कुसमरिया ने आज भोपाल के श्यामलाहिल्स हिल्स मध्यप्रदेश राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग पहुंचकर अध्यक्ष पद का कार्यभार ग्रहण किया. इस मौके पर पिछड़ा वर्ग से जुड़े जन-प्रतिनिधि भी मौजूद थे डॉ. रामकृष्ण कुसमारिया (जन्म 30 जुलाई 1942) उनका जन्म सकोर में एक किसान परिवार में हुआ था। वह 8 फरवरी 2019 को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में शामिल हुए, फिर भारतीय जनता पार्टी10वीं, 11वीं के सदस्य थे। , 12वीं, 13वीं और 14वीं लोकसभा भारत की। 10वीं, 11वीं, 12वीं और 13वीं लोकसभा में उन्होंने दमोह निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया और 14वीं लोकसभा में उन्होंने खजुराहो निर्वाचन क्षेत्र मध्य प्रदेश राज्य का। 2008 में, वह मध्य प्रदेश विधानसभा के लिए पथरिया विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुने गए। के अध्यक्ष भी हैं।। बुंदेलखंड विकास प्राधिकरण में किसान कल्याण और कृषि विकास मंत्री बने। वर्तमान में उन्हें वर्ष 2023 में राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया गया है!

शपथ के दौरान स्टेडियम के बाहर Shivraj के चाहने वालों ने काफिला रोका, मामा मामा के नारे लगाए.

During the swearing-in ceremony, supporters of Shivraj outside the stadium stopped the procession, chanting slogans in favor of Mama (referring to Shivraj Singh Chouhan).

वन एवं पर्यावरण स्वीकृति हुई आसान, केंद्र ने किया वन एवं पर्यावरण नियमों में संशोधन.

Approval for forest and environment became easier as the central government made amendments to the forest and environmental regulations. उदित नारायण,    भोपाल। केंद्र सरकार ने पर्यावरण संरक्षण अधिनियम के प्रावधानों को सरल कर दिया है ताकि बड़े प्रोजेक्ट के क्लीयरेंस जल्द से जल्द मिल सके। नए संशोधन के तहत अब कंसलटेंट वन और पर्यावरण क्लीयरेंस के लिए सीधे तकनीकी कमेटी को फॉरेस्ट और पर्यावरण  के लिए अपना प्रस्ताव भेज सकेंगे। यानी अब सिया कमेटी की भूमिका को निष्प्रभावी बना दिया गया है।  केंद्र सरकार ने वैज्ञानिक डेटा संचालित तरीके से हितधारकों और तकनीकी मूल्यांकन को और अधिक सुविधाजनक बनाने के लिए, मंत्रालय ने जीआईएस, एडवांस डेटा एनालिटिक्स आदि जैसी उभरती तकनीकी परिवेश के दायरे का विस्तार किया है। पर्यावरण संरक्षण अधिनियम के नियमों में संशोधन करते हुए कठिन और जटिल प्रक्रियाओं को सरल बनाने की कोशिश की है। अब से, सभी नए प्रस्ताव चाहे किसी भी प्रकार के हों, प्रारंभिक जांच के लिए सदस्य सचिव (एमएस), एसईएसी ( स्टेट  एक्सपर्ट अप्रैज़ल कमेटी ) को प्रस्तुत किए जाएंगे। परिवेश पोर्टल पर ही संबंधित एसईआईएए को स्पष्ट सिफारिशें करने के लिए विशेषज्ञ समिति (एसईएसी) द्वारा जांच और आगे विचार किया जाएगा। नए संस्करण ने अब एमएस, एसईएसी को उपरोक्त ओएम में उल्लिखित प्रक्रिया के अनुसार मानक टीओआर जारी करने में सक्षम बना दिया है। क्या थी पुरानी व्यवस्था संशोधन के पहले तक व्यवस्था यह थी कि प्रोजेक्ट के कंसलटेंट को अपने प्रस्ताव को पहले सिया कमेटी के किंतु-परंतु बिंदुओं के सवालों जवाबों से गुजरना पड़ता था। इसके कारण प्रस्ताव को वन और पर्यावरण क्लीयरेंस के लिए काफी समय तक इंतजार करना पड़ता था। कई बार ऐसा भी हुआ कि सरकारी प्रोजेक्ट भी सिया कमेटी के समक्ष ही महीना और वर्षों तक लंबित रहे। इन समस्याओं को लेकर कई बार भारत सरकार केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय को शिकायत भी कई गई और इस शिकायत के आधार पर नया संशोधन आदेश जारी किया गया है।

मध्य प्रदेश के बड़े दलित नेता को मिली बड़ी जिम्मेदारी, जगदीश देवड़ा को बनाया गया उप मुख्यमंत्री।

Big Dalit Politician Jagdish Devda got Big opportunity as Deputy Chief Minister of Madhya Pradesh. संतोष सिंह तोमर भोपाल। मध्य प्रदेश में 11 दिसंबर को भाजपा विधायक दल की बैठक हुई। भाजपा विधायक दल की बैठक में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री का एलान होने के साथ ही राज्य में दो उप मुख्यमंत्री बनाने का फैसला हुआ है। मल्हारगढ़ से विधायक जगदीश देवड़ा और उज्जैन दक्षिण से विधायक राजेंद्र शुक्ला मध्य प्रदेश के नए उप मुख्यमंत्री बनाए गए हैं। यूं तो जगदीश देवड़ा मध्य प्रदेश की राजनीति में किसी परिचायक मौहताज नहीं हैं। फिर भी आपको बता दें कि जगदीश देवड़ा वर्तमान शिवराज सरकार में वित्त मंत्री का जिम्मा संभाल रहे थे ।वह मल्हारगढ़ विधानसभा सीट से विधायक हैं। देवड़ा लगातार सातवीं बार जीतकर विधानसभा पहुंचे हैं। थावरचंद गहलोत के बाद एक बड़े दलित चेहरे देवड़ा मध्यप्रदेश में थावरचंद गहलोत के बाद एक बड़े दलित चेहरे जगदीश देवड़ा को मध्य प्रदेश का उप मुख्यमंत्री बनाया गया है। 1993 में पहली बार विधायक बनने के बाद से अपने लगभग 33 वर्ष के लंबे राजनीतिक कार्यकाल में जगदीश देवड़ा 7वीं बार विधायक बने हैं। थावरचंद गहलोत के राज्यपाल बनने के बाद से जगदीश देवड़ा को मध्य प्रदेश बीजेपी में बड़े दलित चेहरे के रूप में देखा जा रहा था। उसके चलते अब उन्हें उप मुख्यमंत्री के तौर पर बड़ी जिम्मेदारी मिली है। देवड़ा को उप मुख्यमंत्री बनाने के बाद उनके समर्थकों में खुशी का माहौल है। मल्हारगढ़ क्षेत्र में भी जश्न का माहौल है। विवादों से दूर, संघठन में मजबूत पकड़ रखते हैं देवड़ा मल्हारगढ़ विधानसभा सीट से जगदीश देवड़ा विधायक हैं। वह शिवराज सरकार में वित्त मंत्री हैं। जगदीश देवड़ा 66 साल की उम्र में भी फिट हैं। शांत स्वभाव को जगदीश देवड़ा पार्टी के कद्दावर नेता हैं। साथ ही वह विवादों से दूर रहते हैं। उनकी सजगता की वजह से ही वित्त जैसे महत्वपूर्ण विभाग की कमान उनके हाथों में है। संगठन और सरकार में उनकी अच्छी पकड़ है। दरअसल, जगदीश देवड़ा का जन्म एक जुलाई 1957 को हुआ है। वह मूल रूप से नीमच जिले के रामपुरा के रहने वाले हैं। एमए के बाद उन्होंने एलएलबी किया है। जगदीश देवड़ा की शादी रेणु देवड़ा से हुई है। राजनीति के साथ-साथ जगदीश देवड़ा वकालत भी करते हैं। उनके दो पुत्र हैं। साथ ही सामाजिक कार्यों से भी जुड़े रहते हैं। वहीं, खेलकूद में भी उनकी विशेष रुचि है। इसके साथ ही वे एथलेटिक्स चैंपियन भी रहे हैं। छात्र जीवन से ही राजनीतिक पारी की शुरुआत जगदीश देवड़ा वर्तमान में मंदसौर के मल्हारगढ़ विधानसभा सीट से बीजेपी विधायक हैं। मध्य प्रदेश के नवनियुक्त उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा का ताल्लुक प्रदेश की अनुसूचित जाति से है। पेशे से जगदीश देवड़ा समाजसेवी और वकील हैं। छात्र जीवन से ही राजनीति में उनकी दिलचस्पी थी। वर्ष 1979 में वह शासकीय महाविद्यालय रामपुरा से छात्र संघ के अध्यक्ष रहे हैं। साथ ही विक्रम विश्वविद्यालय में सीनेट के सदस्य रहे हैं। इसके बाद उन्होंने भाजयुमो से जुड़कर सियासी करियर को रफ्तार दी है। वर्ष 1993 में बीजेपी ने उन्हें चुनाव लड़ने का मौका दिया। पहली बार में ही वह चुनाव जीत गए और विधायक बन गए। तब से लेकर अब तक वे लगातार चुनाव जीतते आ रहे हैं।इसके बाद विधानसभा में कई समितियों के सदस्य रहे। इसके साथ ही कई अहम मंत्रालयों की जिम्मेदारी भी उन्होंने पूरी ईमानदारी और निष्ठा पूर्वक निभाई। जगदीश देवड़ा भाजपा संगठन और सरकार के भरोसेमंद चेहरे हैं। तीन बार मंत्री और एक बार बने प्रोटेम स्पीकर मध्य प्रदेश की दसवीं विधानसभा में जगदीश देवड़ा वर्ष 1993 विधायक निर्वाचित हुए। वर्ष 2003 विधानसभा चुनाव में लगातार जीत दर्ज करने पर उन्हें प्रदेश में राज्यमंत्री बनाया गया। इसके बाद साल 2008 में शिवराज सरकार में जदीश देवड़ा को परिवहन, जेल, योजना सहित कई महत्वपूर्ण विभागों का कार्यभार सौंप कर कैबिनेट मंत्री बनाया गया। वर्ष 2020 में बनी शिवराज सरकार में उन्हें वित्तमंत्री बनाया गया। इसके साथ ही 15वीं विधानसभा में उन्हें प्रोटेम स्पीकर भी चुना गया था लेकिन कुछ समय बाद उन्होंने प्रोटेम स्पीकर का पद छोड़ दिया था। 7वीं बार जीते जगदीश देवड़ा जगदीश देवड़ा ने मध्य प्रदेश की भाजपा सरकार में तीन बर मंत्री रहते हुए कई अहम मंत्रालयों की जिम्मेदारी निभाई। 66 साल के नवनियुक्त उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा का नाम मध्य प्रदेश तेज तर्रार और कद्दावर नेताओं में शुमार होता है। मध्य प्रदेश के मालवी रीजन में उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है। इस क्षेत्र में भाजपा ने विधानसभा चुनाव में शानदार प्रदर्शन किया है। वर्ष 1993 से लेकर आज तक वे लगातार चुनाव जीतकर विधानसभा में पहुंच रहे हैं। वर्ष 2023 विधानसभा चुनाव में उन्होंने मंदसौर जिले के मल्हारगढ़ सीट से अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी श्यामलाल जोकचंद को 59,024 वोटों के अंतर से हरा कर मध्य प्रदेश के विधानसभा में 7वीं बार अपनी उपस्थिति दर्ज करवाई है।

अब नहीं सोना पड़ेगा बेंच पर, जेपी अस्पताल में बनेगा रैन बसेरा.

A Renbaseara will be built in J P Hospital. प्रस्ताव तैयार, परिसर में मंदिर के पास की जगह तय भोपाल। जेपी अस्पताल शहर का तीसरा सरकारी अस्पताल है, जहां रैन बसरे की सुविधा होगी। अब तक हमीदिया अस्पताल व एम्स में दूर दराज से आने वाले लोगों के लिए यह व्यवस्था थी। प्रबंधन से मिली जानकारी के अनुसार रोजाना जेपी में 60 से 80 मरीज भर्ती होते हैं। अस्पताल में वार्ड में एक मरीज के साथ एक परिजन के ही रुकने की अनुमति होती है। जिसके कारण रात में कई परिजन फर्श व बेंच पर सोते नजर आते हैं। ठंड के मौसम इसके चलते वे भी बीमार हो सकते हैं। इसी को देखते हुए रैन बसेरा बनाने का फैसला लिया गया है। परिसर में मौजूद हनुमान मंदिर के रैन बसेरा बनाना तय किया गया है। जिसका प्रस्ताव भी विभाग को भेज दिया गया है। मंजूरी मिलते ही इसका निर्माण शुरू किया जाएगा। नई व्यवस्था का परिजनों को ठंड से बचाने के लिए अलाव जलाया जाएगा। यह व्यवस्था तब तक रहेगी, जब तक शीतलहर का प्रकोप रहेगा। जेपी अस्पताल के अधीक्षक डॉ. राकेश श्रीवास्तव ने बताया कि अस्पताल में रूकने वाले परिजनों की सुविधा के लिए रैन बसेरा बनाया जाएगा। जमीन का चयन कर प्रस्ताव विभाग को भेज दिया गया है। मंजूरी मिलते ही रैन बसेरा तैयार किया जाएगा।

मध्य प्रदेश के उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला हैं अजेय, हर बार चुनाव जीते और मंत्री भी बने।

The Deputy Chief Minister of Madhya Pradesh is Rajendra Shukla; he is invincible in every election and has also become a minister each time. मध्य प्रदेश में डॉ. मोहन यादव मुख्यमंत्री जबकि राजेंद्र शुक्ला, जगदीश देवड़ा के साथ उप मुख्यमंत्री की कुर्सी संभालेंगे। In Madhya Pradesh, Dr. Mohan Yadav is the Chief Minister, while Rajendra Shukla and Jagdish Devda will assume the positions of Deputy Chief Ministers. संतोष सिंह तोमर भोपाल। मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री का नाम आखिरकार फाइनल हो गया है। बीजेपी ने डॉ. मोहन यादव का नाम मुख्यमंत्री के लिए चुनकर एक बार फिर सबको चौंका दिया है। उज्जैन दक्षिण से विधायक मोहन यादव मध्य प्रदेश के नए मुख्यमंत्री होंगे। वहीं राजेन्द्र शुक्ला और जगदीश देवड़ा को उत्तर प्रदेश सरकार की तर्ज पर उप मुख्यमंत्री पद पर बैठाया गया है। राजेंद्र शुक्ला मध्यप्रदेश के रीवा से विधायक हैं और विंध्य के कद्दावर नेता के तौर पर उन्हें जाना जाता है। राजेंद्र शुक्ला लगातार चुनाव जीतकर चार बार कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं। विंध्य के बड़े नेता हैं अजेय विधायक राजेंद्र शुक्ला रीवा विधानसभा क्षेत्र से विधायक राजेंद्र शुक्ला को विंध्य क्षेत्र से ब्राह्मण समाज के बड़े चैहरे और कद्दावर नेता के तौर पर जाना जाता है। अपने चुनावी कैरियर में वह 2003 से लेकर अब तक अजेय रहे हैं। खास बात है कि वह ऐसे विधायक हैं जिन्हें हर बार चुनाव जीतने पर मंत्री पंद मिला है। वर्ष 2003 में भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर चुनाव जीतकर उमा भारती की सरकार में मंत्री बने। इसके बाद बाबूलाल गौर सरकार में भी उन्हें मंत्री पद मिला। शिवराज सिंह चौहान की सरकार में भी वह राज्य में कैबिनेट मंत्री रहे। बता दें कि वह अब तक लगातार चार बार मध्य प्रदेश सरकार में मंत्री रह चुके हैं। वर्ष 2003 से लेकर अब तक राजेंद्र शुक्ला लगातार रीवा से चुनाव जीतते आए हैं। छात्र नेता के रूप में शुरू हुआ राजनैतिक जीवन मध्य प्रदेश के उप मुख्यमंत्री की कुर्सी पाने वाले राजेंद्र शुक्ला ब्राह्मण समाज से आते हैं। उनकी ब्राह्मण वोटर्स पर मजबूत पकड़ मानी जाती है। पेशे से इंजीनियर राजेंद्र शुक्ला का जन्म वर्ष 1964 को रीवा में हुआ था। उन्होंने वर्ष 1986 से छात्र नेता के तौर पर राजनैतिक जीवन की शुरुआत कर दी थी। वर्ष 1986 में राजेंद्र शुक्ला सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज में छात्र संघ के अध्यक्ष रहे थे। राजेंद्र शुक्ला ने वर्ष 1998 में पहला विधानसभा चुनाव लड़ा लेकिन वह कांग्रेस के पुष्पराज सिंह से 1394 वोटों से हार गए। वर्ष 2003 में रीवा सीट से एक बार फिर बीजेपी ने राजेंद्र शुक्ला को उम्मीदवार बनाया है, इस बार उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी पुष्पराज हराकर पहली मध्य प्रदेश विधानसभा में अपनी जगह बनाई। इससे पहले रीवा सीट से पुष्पराज सिंह ने लगातार तीन बार जीत दर्ज की थी। राजेंद्र शुक्ला ने साल 2003 में रीवा से जीत दर्ज कर उनके विजय रथ पर ब्रेक लगा दिया। इसके बाद उन्होंने यहां से साल 2003 के अलावा साल 2008, 2013, 2018 और 2023 विधानसभा चुनाव में जीत दर्जी की है कैबिनेट मंत्री से लेकर उप मुख्यमंत्री तक का सफर वर्ष 2003 में पहली बार रिकॉर्ड वोटों से विधानसभा चुनाव जीतने वाले राजेंद्र शुक्ला को आवास और पर्यावरण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) का पद दिया गया। वर्ष 2008 में वह रीवा विधानसभा क्षेत्र से दूसरी बार जीते। और इस बार उन्हें ऊर्जा और खनिज संसाधन मंत्री बनाकर मंत्रीपरिषद में शामिल किया गया। वर्ष 2013 की बात करें तो मध्य प्रदेश की 14वीं विधानसभा में चुनाव जीतकर आने वाले राजेंद्र शुक्ला को उद्योग नीति और निवेश संवर्धन मंत्री बनाया गया। इसके साथ ही उन्होंने जनसंपर्क विभाग भी संभाला।बता दें कि वर्ष 2018 में भी राजेंद्र शुक्ला रीवा से विधायक चुने गए थे लेकिन मध्य प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनी थी जो की अपना पांच वर्ष का कार्यकाल पूरा नहीं कर सकी और वर्ष 2020 में यह सरकार गिर गई। जिसके बाद एक बार फिर भाजपा सत्ता में आई। इस बार भी राजेंद्र शुक्ला लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री के दायित्व के साथ एक बार फिर यानी कुल चौथी बार शिवराज मंत्रिमंडल में जगह मिली। इसके साथ ही वर्तमान में पांचवी बार चुनाव जीतकर मध्य प्रदेश के उप मुख्यमंत्री पद पर आसीन हुए हैं। सोशल मीडिया पर एक्टिव रहते हैं विधायक सरकार राजेंद्र शुक्ला राजेंद्र शुक्ला की X (ट्विटर) प्रोफाइल देखें तो पता चलता है कि वह  सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहते हैं हैं। उन्हें 65000 से ज्यादा लोग X पर फॉलो करते हैं। इसके साथ ही विधायक राजेंद्र शुक्ला फेसबुक पर भी काफी एक्टिव रहते हैं। यहां भी उनके फॉलोवर बहुत बड़ी तादाद में हैं।

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री बने डॉ. मोहन यादव, राजेंद्र शुक्ला और जगदीश देवड़ा बने उप मुख्यमंत्री।

संतोष सिंह तोमर भोपाल। मध्य प्रदेश में आठ दिन से मुख्यमंत्री पद को लेकर चल रहा सस्पेंस खत्म हो गया है। सभी अनुमानों को धता बताते हुए डॉ. मोहन यादव मध्य प्रदेश के नए सीएम चुने गए हैं। राजधानी भोपाल के भारतीय जनता पार्टी कार्यालय में तीनों पर्यवेक्षकों की मौजूदगी में हुई भाजपा के विधायक दल की पहली बैठक में डॉ. मोहन यादव के नाम का ऐलान किया गया। श्री यादव उज्जैन दक्षिण सीट से विधायक हैं। इसके साथ ही मध्य प्रदेश में दो उप मुख्यमंत्रियों के नाम का भी ऐलान किया गया है। गौरतलब है कि मध्य प्रदेश के विधानसभा चुनाव 2023 में भाजपा को 163 सीटों के साथ प्रचंड बहुमत मिला है। कांग्रेस को 66 सीटें और 1 सीट भारतीय आदिवासी पार्टी को मिली है। विधायक दल की बैठक में मोहन यादव के नाम का ऐलान मध्य प्रदेश में आज विधायक दल की बैठक में दल का नेता चुना गया। इस बैठक के बाद मध्य प्रदेश के अगले मुख्यमंत्री पद को लेकर सस्पेंस खत्म हो गया है। इस बैठक में नए मुख्यमंत्री के नाम की घोषणा की गई। मध्य प्रदेश का नया मुख्यमंत्री उज्जैन दक्षिण से निर्वाचित विधायक डॉ. मोहन यादव को बनाया गया है। यहां गौरतलब है कि बीजेपी ने इस बार का विधानसभा चुनाव अपने मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के बिना ही लड़ा था। जिसके कारण मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री पद को लेकर तमामबात अटकलें लगाई जा रही हैं कि अगला मुख्यमंत्री कौन होगा। मुख्यमंत्री पद की रेस में थे कई नाम, 9 दिन तक चला मंथन एमपी सीएम पद की रेस में कई दिग्गज नाम शामिल थे। जिसमें प्रह्लाद पटेल, नरेंद्र सिंह तोमर, वीडी शर्मा, ज्योतिरादित्य सिंधिया, कैलाश विजयवर्गीय जैसे कई नाम शामिल थे। जिसमें केंद्रिय मंत्रियों ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। बीजेपी ने सबको चौंकाते हुए मोहन यादव को नया मुख्यमंत्री बनाया गया है। उज्जैन के दक्षिण सीट से मोहन यादव ने जीत हासिल की है। बता दें कि मोहन यादव शिवराज सरकार में उच्च शिक्षा मंत्री रह चुके हैं। ये लगातार तीसरी बार चुनाव जीतकर उज्जैन दक्षिण सीट पर कब्जा किया है। बता दें कि बीजेपी ने 9 दिन मंथन करने के बाद सबको चौंका दिया है। बीजेपी के भोपाल दफ्तर में नवनिर्वाचित विधायकों ने नए मुख्यमंत्री के नाम पर मोहर लगा दी। उत्तर प्रदेश की तर्ज पर मध्य प्रदेश को भी मिले दो उप मुख्यमंत्री राज्य के नए मुख्यमंत्री के नाम का ऐलान होने के साथ ही मध्य प्रदेश सरकार का काम काज संभालने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार की तर्ज पर दो उप मुख्यमंत्रियों के नाम की भी घोषणा की गई है। घोषणा के अनुसार विधायक राजेंद्र शुक्ला और जगदीश देवड़ा को मध्य प्रदेश का उपमुख्यमंत्री बनाया गया है। जगदीश देवड़ा मंदसौर जिले की मल्हारगढ़ सीट से विधायक हैं। वह एससी वर्ग से आते हैं वहीं ब्राह्मण वर्ग से आने वाले राजेन्द्र शुक्ला रीवा सीट से विधायक हैं और विंध्य क्षेत्र का बड़ा ब्राह्मण चेहरा होकर कद्दावर नेता माने जाते हैं। 2013 में पहली बार बने विधायक, शिवराज सरकार में रहे उच्च शिक्षा मंत्री 58 साल के डॉक्टर मोहन यादव पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान की सरकार में उच्च शिक्षा मंत्री रह चुके हैं। साल 2013 में वह पहली बार उज्जैन दक्षिण सीट से विधायक चुने गए थे। इसके बाद साल 2018 में वह एक भार फिर दक्षिण उज्जैन की सीट से विधायक चुने गए थे। साल 2023 मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में मोहन यादव ने उज्जैन दक्षिण विधानसभा सीट से कांग्रेस के चेतन प्रेमनारायण यादव को 12941 वोटों से हराकरलगातार तीसरी बार विजयश्री प्राप्त की है। विधायक दल की बैठक में हरियाणा के सीएम और मध्य प्रदेश के पर्यवेक्षक मनोहर लाल खट्टर ने प्रदेश के नए मुख्यमंत्री के रूप में डॉ. मोहन यादव के नाम का ऐलान किया जबकि श्री यादव के नाम का प्रस्ताव वर्तमान मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने रखा था।

साल 2024 में इन चमत्कारिक पेड़-पौधों को लाएं घर, आर्थिक स्थिति मजबूत होगी.

In the year 2024, bringing these miraculous plants to your home will strengthen your financial situation. वास्तु शास्त्र की मानें तो घर में लगाई हर चीज में कुछ ना कुछ प्रभाव पड़ता है। यह नकारात्मक और सकारात्मक दोनों ही हो सकता है। अपने घर और दफ्तर में भूलकर भी कुछ ऐसा न लेकर आएं, जिससे नकारात्मक प्रभाव पड़े। वास्तु शास्त्र की मानें तो घर में लगाई हर चीज में कुछ ना कुछ प्रभाव पड़ता है। यह नकारात्मक और सकारात्मक दोनों ही हो सकता है। अपने घर और दफ्तर में भूलकर भी कुछ ऐसा न लेकर आएं, जिससे नकारात्मक प्रभाव पड़े। यह आपके आर्थिक, मानसिक और शारीरिक विकास के गलत हो सकता है। वास्तु शास्त्र में कुछ पेड़-पौधे ऐसे बताए गए हैं, जिनको लगाने से आर्थिक विकास में सहायता मिलती है। साल 2024 आने वाला है। आप नए साल के मौके पर इन पेड़-पौधों को अपने घर पर लगाने के लिए ला सकते हैं। रातरानी का पौधा,आप घर में पौधा लगाने के बारे में सोच रहे हैं तो रातरानी का पौधा अच्छा रहेगा। रातरानी के फूल खुशबू देते हैं, जिससे मानसिक तनाव दूर होता है। यह आपको शांति देता है। ज्योतिष की माने तो परिवार में प्रेम को बढ़ावा मिलता है। चंपा का पौधा,चंपा के पौधे में हल्के-पीले रंग के फूल निकलते हैं। यह घर में बेहद अच्छे लगते हैं। इसके होने से घर में नकारात्मक ऊर्जा नहीं होती है। घर के सदस्यों की सेहत पर सकारात्मक असर रहता है। चमेली का पौधा ,चमेली के पौधे में खूबसूरत फूल निकलते हैं, जिसमें अच्छी महक आती है। वास्तु शास्त्र की माने तो चमेली का पौधा घर में लगाना शुभ होता है। परिवार के सदस्यों में आत्मविश्वास पैदा होता है। उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होती है।

भाजपा विधायक दल की बैठक से पहले हलचल तेज, क्‍या आज घोषित होगा मप्र का मुख्‍यमंत्री या आलाकमान करेगा तय.

Excitement is high before the BJP legislative party meeting; will Madhya Pradesh’s Chief Minister be announced today, or will a consensus be reached. आज राजधानी में भाजपा विधायक दल की बैठक बुलाई गई है। मप्र भाजपा विधायक दल की बैठक से पहले हलचल तेज हो गई है। Today, a meeting of the BJP legislative party has been called in the capital. There is a flurry of activity ahead of the Madhya Pradesh BJP legislative party meeting. भोपाल। मध्‍य प्रदेश विधानसभा चुनाव 2023 में भाजपा की शानदार जीत के बाद अब मुख्‍यमंत्री चुनने की बारी है। इसके लिए आज राजधानी में भाजपा विधायक दल की बैठक बुलाई गई है। मप्र भाजपा विधायक दल की बैठक से पहले हलचल तेज हो गई है। दिल्ली: मध्य प्रदेश के नए मुख्यमंत्री के चयन पर राज्य के लिए भाजपा के केंद्रीय पर्यवेक्षक के लक्ष्मण ने कहा, “आज शाम विधायक दल की बैठक होगी। मनोहर लाल खट्टर की 3 सदस्यीय कमेटी विधायकों से चर्चा करेगी। बाद में आलाकमान उस पर निर्णय लेंगे। राजनीतिक हलकों में यह सवाल तैर रहा है कि क्‍या आज घोषित होगा मध्‍य प्रदेश का मुख्‍यमंत्री या बैठक के बाद आलाकमान इस बारे में कोई निर्णय लेगा।केंद्रीय पर्यवेक्षक ये बोले हालांकि भोपाल पहुंंचने से पहले भाजपा के केंद्रीय पर्यवेक्षक के लक्ष्‍मण ने एएनआइ से कहा है कि 3 सदस्‍यीय कमेटी विधायकों से चर्चा करेगी। बाद में आलाकमान उस पर निर्णय लेंगे। भाजपा विधायक दल की बैठक पार्टी के कार्यालय में दोपहर बाद होनी है। भाजपा विधायक दल की बैठक के लिए केंद्रीय पर्यवेक्षक के रूप में हरियाणा के मुख्‍यमंत्री मनोहर लाल खट्टर, भाजपा ओबीसी मोर्चा के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष डा के लक्ष्‍मण और भाजपा की राष्‍ट्रीय सचिव आशा लकड़ा भोपाल पहुंच चुकी हैं। मप्र भाजपा अध्‍यक्ष वीडी शर्मा ने विमानतल पर पर्यवेक्षकों का स्‍वागत किया। वीडी शर्मा ने कही ये बात भोपाल आगमन के बाद केंद्रीय पर्यवेक्षक शिवराज सिंह चौहान से मिलने सीएम हाउस पहुंचे। वहीं मीडिया से बातचीत में वीडी शर्मा ने कहा कि हम राज्‍य के लिए मुख्‍यमंत्री चुनेंगे। भाजपा विधायक दल की बैठक के लिए विधायकों के पहुंचने का सिलसिला आरंभ हो गया है। बैठक से पहले विधायकों को किसी तरह की प्रतिक्रिया देने से रोका गया है। 3 दिसंबर से ही चल रही अटकलें उल्‍लेखनीय है कि 3 दिसंबर को मध्‍य प्रदेश विधानसभा चुनाव के परिणाम घोषित होने के साथ ही मध्‍य प्रदेश में मुख्‍यमंत्री पद के लिए चर्चाओं का दौर आरंभ हो गया था।चल रही ये अटकलें , मप्र के मुख्‍यमंत्री के नाम को लेकर अनेक अटकलों का दौर जारी है। इनमें श‍िवराज सिंह चौहान के साथ ही नरेंद्र सिंह तोमर, प्रहलाद पटेल, कैलाश विजयवर्गीय, विष्‍णुदत्‍त शर्मा और ज्‍योतिरादित्‍य सिंधिया का नाम प्रमुख है। इसके साथ ही भूपेंद्र सिंह, राकेश सिंह और सुमेर सिंह सोलंकी का नाम भी सामने आया है।

विधान सभा में प्रचंड बहुमत के बाद भी भाजपा को लोक सभा में खतरा.

Despite a sweeping majority in the legislative assembly, BJP faces a threat in the Lok Sabha. प्रदेश में हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में भले ही भाजपा को अविश्वसनीय प्रचंड जीत मिली है, लेकिन इसके बाद भी खतरे की घंटी भी बजी है। दरअसल इस जीत के बाद भी दस लोकसभा सीटें ऐसी हैं, जहां पर कांग्रेस को भाजपा की अपेक्षा अधिक मत मिले हैं, जिसकी वजह से भाजपा के सामने नई चुनौती खड़ी हो गई है। खास बात यह है कि इन दस में से नौ पर अभी भाजपा के सांसद हैं। ऐसे में इन सीटों पर भाजपा को अगले साल के शुरुआती महीनों में होने वाले लोकसभा चुनाव के लिए भाजपा को अतिरिक्त मेहनत करने की चुनौती मिल गई है। दरअसल मई माह में लोकसभा के चुनाव प्रस्तावित हैं। भाजपा के लिए छिंदवाड़ा सीट तो पहले से ही चुनौती बनी हुई थी , ऐसे में उसके सामने नौ नई सीटों की भी चुनौती दिखना शुरु हो गई है। हालांकि इसी तरह के कुछ आसार बीते विधानसभा चुनाव में भी बने थे , लेकिन लोकसभा परिणाम भाजपा के पक्ष में ही आए थे। इसको देखते हुए माना जा रहा है कि इस बार भी कुछ इसी तरह के परिणाम आ सकते हैं। दरअसल इस बार अगर विधानसभा चुनाव के परिणामों पर नज़र डालें तो , प्रदेश की 10 लोकसभा सीटें ऐसी हैं, जहां पर कांग्रेस जीती है। इनमें छिंदवाड़ा लोकसभा क्षेत्र में आने वाली सभी सातों विधानसभा सीटें भी शामिल हैं। इन सीटों पर पिछले चुनाव में भी कांग्रेस को ही जीत मिली थी। इसी तरह मुरैना की पांच, भिंड की चार, ग्वालियर की चार, टीकमगढ़ की तीन, मंडला की पांच, बालाघाट की चार, रतलाम की चार, धार की पांच और खरगोन लोकसभा क्षेत्र की आठ विधानसभा सीटों में से पांच पर भी भाजपा को हार का सामना करना पड़ा है। अहम बात यह है कि इसके बाद भी प्रदेश की पांच लोकसभा सीटें ऐसी हैं, जिनके परिणाम बताते हैं कि वे भाजपा के लिए बेहद सुरक्षित हैं। इसकी वजह है, इन सीटों की सभी विधानसभा सीटों पर भाजपा को ही जीत मिली है और वह भी बड़े अंतर से। इनमें खजुराहो, होशंगाबाद, देवास, इंदौर और खंडवा लोकसभा की सीटें शामिल हैं। इनके अलावा सागर, दमोह, रीवा, सीधी, जबलपुर, विदिशा और मंदसौर लोकसभा क्षेत्र में केवल एक-एक विधानसभा सीट पर ही भाजपा को हार का सामना करना पड़ा है। इस हिसाब से देखें तो यह सीटें भी भाजपा के लिए पूरी तरह से अनुकूल हैं। दरअसल गुना में बामोरी और अशोकनगर सीट पर कांग्रेस को जीत मिली है , जबकि शेष सीटों पर भाजपा की जीत हुई है। इसी तरह सागर में एक बीना पर कांग्रेस, दमोह में एक मलहरा पर कांग्रेस, सतना में दो सीट सतना और अमरपाटन पर कांग्रेस, रीवा में एक सेमरिया सीट पर कांग्रेस, सीधी में एक चुरहट पर कांग्रेस, शहडोल में एक पुष्पराजगढ़ पर कांग्रेस, जबलपुर में एक जबलपुर पूर्व पर कांग्रेस, विदिशा में एक सिलवानी पर कांग्रेस, भोपाल में दो भोपाल उत्तर, भोपाल मध्य पर कांग्रेस, राजगढ़ में दो राघोगढ़, सुसनेर पर कांग्रेस, उज्जैन में दो महिदपुर, तराना पर कांग्रेस, मंदसौर में एक मंदसौर पर कांग्रेस, बैतूल में दो सीटें टिमरनी और हरदा पर कांग्रेस विजयी हुई है। वहीं शेष सीटों पर भाजपा जीती है।यह हैं चुनौती वाली सीटों का गणितजिन सीटों पर चुनौती दिख रही है उनमें लोकसभा सीट मुरैना भी शामिल है। इस सीट के तहत आने वाले आठ विधानसभा क्षेत्रों में से पांच पर कांग्रेस को जीत मिल है। इन सीटों में श्योपुर, विजयपुर, जौरा, मुरैना और अम्बाह है, जबकि भाजपा को सबलगढ़, सुमावली और दिमनी में जीत मिली है। इस सीट पर मिले मतों को देखें तो कांग्रेस को 5,00666 और भाजपा को 4,11601 मत मिले। इसी तरह से लोकसभा सीट भिंड की बत की जाए तो इस सीट के तहत आने वाली आठ विस सीटों में से चार पर कांग्रेस व चार पर भाजपा को जीत मिली है। इनमें अटेर, गोहद, भांडेर और दतिया में कांग्रेस, तो सेवड़ा, भिंड, लहार और मेहगांव में भाजपा को जीत मिली है। इस सीट पर भी मतों के मामले में कांग्रेस आगे रही है। कांग्रेस को 532146 और भाजपा को 525252 वोट मिले हैं। लोकसभा सीट पर भी भिंड की ही तरह कांग्रेस ने ग्वालियर ग्रामीण, ग्वालियर पूर्व, डबरा, पोहरी पर जो भाजपा ने ग्वालियर, करैरा, ग्वालियर दक्षिण और भितरवार पर जीत दर्ज की है। इसी तरह से कांग्रेस को 700861 और भाजपा को 677611 वोट मिले हैं। लोकसभा सीट टीकमगढ़ में तीन सीटों पर कांग्रेस जीती है। इनमें टीकमगढ़, पृथ्वीपुर और खरगापुर शामिल है, जबकि भाजपा को जतारा, निवाड़ी,महाराजपुर, छतरपुर और बिजावरमें जीत मिली है। मतों की बात की जाए तो कांग्रेस को 531464 और भाजपा को 606817 मत मिले हैं। इसी तरह से मंडला लोक सभा सीट पर कांग्रेस को डिंडोरी, बिछिया, निवास, कैवलारी, लखनादौन सीटों पर , जबकि भाजपा को शहपुरा, मंडला, गोटेगांव में जीत मिली है। इसी तरह से कांग्रेस को 740509 और भाजपा को 628529 मत मिले हैं। लोकसभा सीट बालाघाट के तहत आने वाली आठ विस सीटों में से कांग्रेस को चार बैहर, परसवाड़ा, बालाघाट, वारासिवनी में जबकि भाजपा को लांजी, कटंगी, बरघाट और सिवनी सीट पर जीत मिली है। इस सीट के तहत आने वाली विस सीटों पर कांग्रेस को 735122 और भाजपा को 649037 मत मिले हैं।

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