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जल्द मध्‍य प्रदेश में विधायकों को दिया जा सकता है एक और कर्मचारी

भोपाल मध्य प्रदेश के सभी विधायकों को अभी विधायी और क्षेत्र की जनता से जुड़े कामकाज के लिए एक सरकारी कर्मचारी दिया जाता है। इनके बीमार होने या अन्य कारण से अवकाश पर चले जाने के कारण कार्य प्रभावित होता है। इसे देखते हुए विधानसभा की सदस्य सुविधा समिति ने विधायकों को एक-एक कर्मचारी और दिए जाने की सरकार से अनुशंसा की है। सामान्य प्रशासन विभाग समिति यह प्रस्ताव विचार करने के लिए उच्च स्तर पर भेजेगा। विधायकों को विधानसभा सत्र के दौरान प्रश्न या अन्य सूचनाओं समय पर विधानसभा सचिवालय भेजनी होती है।       पूरी व्यवस्था ऑनलाइन हो चुकी है। इसी तरह, स्वेच्छानुदान और निर्वाचन क्षेत्र विकास निधि से जुड़े कामों को लेकर पत्राचार करना होता है।     चूंकि, विधायक क्षेत्र के दौरे पर रहते हैं, इसलिए इस कार्य के लिए उन्हें सहायक की आवश्यकता होती है।     इसे देखते हुए सरकार ने जिला स्तर पर एक तृतीय श्रेणी कर्मचारी विधायकों को देने की व्यवस्था बनाई है।     1995 में इसको लेकर सामान्य प्रशासन विभाग ने परिपत्र भी जारी किया।     विधायकों ने सदस्य सुविधा समिति के समक्ष यह मांग रखी कि वर्तमान संदर्भ में काम बढ़ गया है।     केंद्र और राज्य सरकार की तमाम योजनाएं हैं, जिन्हें लेकर पत्राचार करने होते हैं।     विधायक कई समितियों के सदस्य भी होते हैं। ऐसे में एक कर्मचारी अपर्याप्त है।     वह कार्यालयीन समय के बाद चला जाता है या अवकाश पर होता है तो काम प्रभावित हो जाता है।     इसे देखते हुए एक कर्मचारी और दिया जाना चाहिए।     समिति ने मांग को व्यावहारिक मानते हुए सरकार से अनुशंसा की है कि विधायकों को एक-एक कर्मचारी और दिया जाए।     सामान्य प्रशासन विभाग के अधिकारियों के साथ ही समिति की बैठक में इस पर चर्चा भी हो चुकी है।     नीतिगत मामला होने के कारण यह प्रस्ताव मुख्यमंत्री तक जाएगा और अंतिम निर्णय होगा।  

ग्वालियर में डॉक्टर्स की हाजिरी अब सेल्फी और लोकेशन से! नई व्यवस्था में जानिए …

ग्वालियर एमपी के ग्वालियर शहर में जीआरएमसी और जेएएच के डॉक्टर अब हाइटेक हो रहे हैं। इन डॉक्टरों की हाजिरी अभी तक जीआरएमसी और जेएएच में लगी बायोमेट्रिक मशीन से भरी जाती थी, लेकिन अब यह डॉक्टर मोबाइल एप पर फेस आईडी से अपनी हाजिरी लगाएंगे। इसके लिए डॉक्टर ऐप डाउन लोड करके अपनी रिपोर्ट दे रहे हैं। पूरी तरह शुरु होगी व्यवस्था यह डॉक्टर अपनी- अपनी लोकेशन के 100 मीटर के दायरे में हाजिरी लगा सकेंगे। जैसे जीआरएमसी में डीन कार्यालय के पास लगी बायोमेट्रिक मशीन के 100 मीटर पहले से भी डॉक्टर अपनी हाजिरी मोबाइल के माध्यम से लगा सकते हैं। इसके लिए कुछ डॉक्टरों ने तो अपनी हाजिरी इस ऐप से लगाना शुरू कर दी है। वहीं पूरी तरह से यह व्यवस्था बहुत जल्द ही शुरू हो जाएगी। अभी तीन स्थानों पर लगाई जाती है हाजिरी डॉक्टरों द्वारा अपनी- अपनी हाजिरी तीन स्थानों पर लगाई जाती है, जिसमें मेडिकल कॉलेज, हजार बिस्तर और पुराने जेएएच में इसकी व्यवस्था है। पुराने जेएएच में कमलाराजा, कार्डियोलॉजी, न्यूरोलॉजी, कैंसर यूनिट के सभी डॉक्टर यहीं पर हाजिरी लगाते हैं।  

मां नर्मदा के दर्शन भी होंगे आसान, अब जल्द तैयार होंगे रोप वे, मंत्री गडकरी ने दी सैद्धांतिक स्वीकृति

जबलपुर एम्पायर टॉकीज से गौरीघाट तक 760 करोड़ रुपए की लागत से रोप-वे का निर्माण किया जाएगा। रोपवे के निर्माण को सैद्धांतिक स्वीकृति मिल गई है। मां नर्मदा के दर्शन करने लोग केवल सड़क मार्ग से ही ना जाएं, उन्हें विकल्प उपलब्ध हो इसके लिए रोप-वे के निर्माण का निर्णय लिया गया है। ये बात लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने विकास कार्यों के भूमिपूजन के दौरान कही। यहां बनेगा पहला रोप वे पहला रोपवे एम्पायर टॉकीज से सदर, गोरखपुर, गौरीघाट में नर्मदा के उस पार जाने के लिए तैयार होगा। इस रोप-वे की डीपीआर को अनुमति मिल गई है। दूसरा रोप वे भी होगा तैयार मंत्री सिंह ने बताया कि केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने इसके लिए सैद्धांतिक स्वीकृति भी दे दी है। इसी प्रकार दूसरा रोप-वे सिविक सेंटर से बल्देवबाग दमोहनाका होते हुए अधारताल तक बनाया जाएगा। दोनों रोप-वे में जगह-जगह स्टेशन भी बनाए जाएंगे। नागरिकों को जिस स्टेशन तक यात्रा करनी हो उस स्टेशन तक इन रोप-वे के माध्यम से पहुंच सकेंगे। दो-तीन साल में बदला नजर आएगा जबलपुर बता दें कि पश्चिम विधानसभा क्षेत्र में सवा पांच करोड़ की लागत से बनाने वानी सीसी सड़कों का मंत्री सिंह ने भूमिपूजन किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि आने वाले दो-तीन वर्षों में जबलपुर का स्वरूप बदला दिखाई देगा।

इन्वेस्ट इन एमपी सत्र में प्रमुख उद्योग समूह होंगे शामिल

मुख्यमंत्री डॉ. यादव 14 मई को बेंगलुरु में इन्वेस्ट इन मध्यप्रदेश रोड शो में निवेशकों से होंगे रूबरू  इन्वेस्ट इन मध्यप्रदेश रोड शो में बीईएमएल के साथ औद्योगिक साझेदारी को मिलेगा नया विस्तार इन्वेस्ट इन एमपी सत्र में प्रमुख उद्योग समूह होंगे शामिल भोपाल मध्यप्रदेश में औद्योगिक निवेश को नई ऊंचाई देने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 14 मई को बेंगलुरु में सीइन्वेस्ट इन एमपीसी सत्र में शामिल होंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव बीईएमएल (भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड) परिसर का भ्रमण करेंगे, साथ ही 2100वें मेट्रो कोच के लोकार्पण समारोह में सम्मिलित होंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव, ‘इन्वेस्टमेंट अपॉर्च्युनिटीज़ इन मध्यप्रदेश’ विषय पर आयोजित इन्टरैक्टिव सेशन को संबोधित कर राज्य की औद्योगिक क्षमताओं और नीतिगत प्रतिबद्धताओं को देश के अग्रणी निवेशकों के समक्ष प्रस्तुत करेंगे। बीईएमएल परिसर में रहेगा कार्यक्रमों का सिलसिला मुख्यमंत्री डॉ. यादव बेंगलुरु पहुंचने के बाद बीईएमएल परिसर जाएंगे, जहां उनका स्वागत बीईएमएल के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक और बोर्ड के सदस्यों द्वारा किया जाएगा। बीईएमएल शॉप विज़िट के बाद मुख्यमंत्री डॉ. यादव मेट्रो कोच लोकार्पण और टेस्ट राइड में सम्मिलित होंगे। इसके उपरांत वे इंटीग्रेटेड डिज़ाइन सेंटर का भ्रमण करेंगे और बीईएमएल के भोपाल संयंत्र पर प्रस्तुति देखेंगे। बीईएमएल द्वारा मध्यप्रदेश में स्थापित की जा रही इकाई के लिए ज़मीन आवंटन पत्र सौंपे जाने की औपचारिकता भी इस अवसर पर होगी। बेंगलुरु में ‘इन्वेस्ट इन एमपी’ सत्र में होगा राज्य की औद्योगिक ताकत का प्रदर्शन ‘द लीला पैलेस’ में आयोजित इन्टरैक्टिव सत्र में मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रमुख उद्योग समूहों, निवेशकों और टेक्नोलॉजी कंपनियों से संवाद करेंगे। इस सत्र में मध्यप्रदेश की औद्योगिक नीतियों, अधोसंरचना और क्षेत्रवार निवेश अवसरों पर विभिन्न विभागों द्वारा प्रस्तुतियाँ दी जाएंगी। प्रमुख सचिव, औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन श्री राघवेंद्र सिंह, अतिरिक्त मुख्य सचिव विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग श्री संजय दुबे तथा प्रमुख सचिव संस्कृति एवं पर्यटन श्री शिव शेखर शुक्ला शामिल मध्यप्रदेश में निवेश के अवसरों पर निवेशकों जानकारी देंगे । निवेशकों के साथ होंगे वन-टू-वन मीटिंग मुख्यमंत्री डॉ. यादव निवेशकों के साथ वन-टू-वन बैठकों के माध्यम से सीधे संवाद करेंगे। इन संवादों में आईटी, इलेक्ट्रॉनिक्स, मैन्युफैक्चरिंग, डिफेंस, ऑटोमोबाइल, टूरिज्म और टेक्नोलॉजी सेक्टर के प्रमुख निवेशक शामिल होंगे। मध्यप्रदेश बन रहा है ‘मेक इन इंडिया’ का भरोसेमंद प्लेटफॉर्म मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में प्रदेश लगातार एक मजबूत औद्योगिक आधार तैयार कर रहा है। देश के बड़े औद्योगिक समूहों के साथ संवाद की यह श्रृंखला राज्य को निवेश के नए क्षितिज की ओर ले जा रही है, जहां नीति, संसाधन और नेतृत्व तीनों ही स्तर पर उद्योगों को सुरक्षित और गतिशील मंच प्राप्त हो रहा है। भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड (BEML) भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय के अंतर्गत कार्यरत एक प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम है, जो मेट्रो रेल कोच, रक्षा उपकरण, खनन एवं निर्माण मशीनरी के निर्माण में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। बेंगलुरु स्थित इसका विनिर्माण परिसर आधुनिक इंजीनियरिंग और स्वदेशी तकनीक का प्रतिनिधित्व करता है, और यह आत्मनिर्भर भारत के विजन में महत्त्वपूर्ण भागीदार है।  

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मेडिसिटी निर्माण को देख शहर को मेडिकल टूरिज्म हब के रूप में प्लानिंग कर विकास कार्य करने के निर्देश दिए

 उज्जैन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव(CM Mohan Yadav) ने उज्जैन को एक बार बड़ी सौगात दी है। उन्होंने दो एलिवेटेड कॉरिडोर(Elevated Corridors) बनाने की सैद्धांतिक सहमति दी है। यह कॉरिडोर मकोड़िया आम चौराहे से चामुंडा चौराहे, रेलवे स्टेशन होते हुए हरिफाटक ब्रिज और निकास चौराहे से दौलतगंज होते हुए इंदौरगेट बनेंगे। सिंहस्थ में यात्रियों के लिए रेलवे स्टेशनों के बीच समानांतर फोरलेन योजना बनाने को कहा। मेडिसिटी निर्माण को देख शहर को मेडिकल टूरिज्म हब के रूप में प्लानिंग कर विकास कार्य करने के निर्देश दिए हैं। कार्यों की मॉनिटरिंग आधुनिक तकनीक से करने के निर्देश सीएम ने  सिंहस्थ 2028 की तैयारियों को लेकर समीक्षा की। अधिकारियों से कहा कि सभी कार्य समय सीमा में गुणवत्ता और मापदंड के अनुसार हों। एजेंसियां समन्वय बनाकर कार्य करे। उन्होंने सिंहस्थ निर्माण कार्यों में शहर के आसपास सड़कों का जाल बिछाकर यातायात सुगम करने और संपूर्ण मेला क्षेत्र की कनेक्टिविटी 4 और 6 लेन करने की जानकारी दी। सीएम ने कार्यों की मॉनिटरिंग आधुनिक तकनीक से करने को कहा। सिंहस्थ में 30 करोड़ श्रद्धालु आने का अनुमान सीएम बोले- हमने अधिकारियों को ये भी कहा कि इसके ऊपर पिलर और जोड़ दें, ताकि भविष्य में मेट्रो निकल सके। सिंहस्थ में करीब 30 करोड़ श्रद्धालुओं के आने का अनुमान है। भीड़ प्रबंधन बड़ी चुनौती रहने वाली है। इसके लिए उज्जैन की चारों दिशाओं के मार्गों का विस्तार हो रहा है। आंतरिक मार्ग भी चौड़े हो रहे हैं। एलिवेटेड ब्रिज बनाकर भी भीड़ प्रबंधन की प्लानिंग की गई है। नागपुर में ऐसे एलिवेटेड ब्रिज हैं, जिनमें नीचे ट्रक-बस गुजरते हैं और ऊपर मेट्रो ट्रेन चलती है। लोनिवि की सेतु शाखा सर्वे कर सौपेंगी रिपोर्ट सीएम द्वारा एलिवेटेड ब्रिज की मंजूरी के बाद अब लोनिवि की सेतु शाखा का अमला जल्द ही शहर के कुछ मार्ग पर इनके निर्माण की संभावनाओं को तलाशेगा। कलेक्टर रोशन कुमार सिंह ने बताया कि मुख्य रूप से बुधवारिया से इंदौर गेट तक और मकोड़ियाआम नाका-इंदिरा नगर से रेलवे स्टेशन-हरिफाटक तक एलिवेटेड ब्रिज के लिए सर्वे किया जाएगा। इधर इसके अलावा इन ब्रिज से नीलगंगा-पेशवाई स्थल, मंछामन गणेश मंदिर क्षेत्र को भी जोड़ने के लिए सर्वे होगा। इसके बाद ही फाइनल हो पाएगा कि वास्तव में किस मार्ग पर ये एलिवेटेड ब्रिज बनेंगे, क्योंकि समय सीमा की भी चुनौती रहने वाली है। कलेक्टर ने यह भी बताया कि हवाई पट्टी का भी विस्तार किया जाना है। इसके लिए एयरपोर्ट अथॉरिटी सर्वे कर चुकी है। बुधवारिया से इंदौर गेट तक के मार्ग को चौड़ा करने के लिए नगर निगम की टीम ने सर्वे कर लिया था। इसमें बड़ी संख्या में मार्ग के दोनों तरफ के व्यापारी प्रभावित हो रहे थे। चूंकि, अब इस मार्ग के ऊपर एलिवेटेड ब्रिज की मंजूरी सीएम ने दे दी है तो चौड़ीकरण नहीं होगा। कोई टूट-फूट नहीं होगी। बोले कि जब हमारे प्रधानमंत्री एक भी सैनिक को पार कराए बगैर रावलपिंडी में अटैक कर सकते हैं तो हमने भी सोचा कि निकास चौराहा (बुधवारिया) से इंदौर गेट तक बगैर किसी मकान को हाथ लगाए ऊपर रोड-ब्रिज बना दिए जाएं, ताकि नीचे कारोबार होता रहे और ऊपर से बस-ट्रक गुजरते रहे। इससे अच्छा क्या प्लान हो सकता हैं। ये हमारे शहर का सर्वाधिक व्यस्ततम मार्ग भी है। नीचे महाकाल की सवारी, जलसे-जुलूस निकलेंगे और ऊपर से वाहन गुजरते रहेंगे। तैयारी के निर्देश     सभी मुख्य देवस्थानों को जल्द ही देवलोक के रूप में विकसित करने की कार्ययोजना बनाएं।     न्यायिक संस्था शुरू की जाएगी। कार्ययोजना पाइपलाइन में रखें।     इंदौर मेट्रोपॉलिटन सिटी की कार्ययोजना में उज्जैन में विकास कार्य का ब्लूप्रिंट तैयार करें।

सरकार ने ग्रीन सिटी पायलट प्रोजेक्ट सांची और खजुराहो में शुरू कर दिया, जल्द ही अन्य नगरों में भी काम शुरू हो जाएगा

भोपाल  मध्यप्रदेश में दो वर्ष के अंदर 10 शहरों को ग्रीन सिटी(Green Cities) के तौर पर विकसित करने की कोशिश है। इसके लिए मुख्यत: हेरिटेज टाउन, पर्यटन स्थल और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय महत्त्व के नगरों को चुना जाएगा। इन नगरों में 75% नवीकरणीय ऊर्जा (आरई) का उपयोग किया जाएगा। सरकार ने पायलट प्रोजेक्ट सांची और खजुराहो में शुरू कर दिया है। जल्द ही अन्य नगरों में भी काम शुरू हो जाएगा। ग्रीन सिटी के तौर पर विकास के लिए नगरों के चयन की प्रक्रिया जारी है। इसमें महेश्वर, चंदेरी, मांडू, ओरछा, अमरकंटक, भीमबेटका, ओंकारेश्वर, चित्रकूट जैसे नगरों के चयन पर विचार चल रहा है। नवीकरणीय ऊर्जा नीति 2025 की गाइडलाइन में इस संबंध में प्रावधान किया गया है। नवीकरणीय ऊर्जा विभाग के एसीएस मनु श्रीवास्तव के अनुसार चयनित नगरों में सालभर घरेलू व व्यावसायिक उपभोक्ता जितनी बिजली का उपयोग करते हैं उसका 75त्न हिस्सा नवीकरणीय ऊर्जा से सप्लाई करने की व्यवस्था बनाई जाएगी। धार्मिक, सांस्कृतिक महत्त्व के भवनों में शत प्रतिशत नवीकरणीय ऊर्जा का उपयोग होगा। 6 किलोवाट से अधिक लोड वाले उपभोक्ता आरई पर होंगे शिफ्ट अधिकारियों के अनुसार ग्रीन सिटीज में 6 किलोवाट से अधिक लोड के कनेक्शन वाले उपभोक्ताओं को नवीकरणीय ऊर्जा पर शिफ्ट किया जाएगा। उन्हें प्रोत्साहित किया जाएगा। नीति के तहत सहायता भी उपलब्ध कराई जाएगी। धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों के लिए १००त्न नवीकरणीय ऊर्जा का उपयोग अनिवार्य होगा। स्कूल, राशन दुकान, आंगनबाड़ी, स्वास्थ्य केंद्र आदि में जहां सुबह 6 से रात 8 बजे तक काम होता है, वहां भी नवीकरणीय ऊर्जा की सप्लाई होगी। इस तरह बदलेंगे ग्रीन सिटी में     इन नगरों में अलग ग्रीन सबस्टेशन बनाए जाएंगे।     हॉकर्स और वेंडर्स भी सोलर लैंटर्न का उपयोग करेंगे, इसके लिए सहायता भी मिलेगी।     सभी स्ट्रीट लाइट्स सोलर से संचालित होंगी। इन्हें ग्रीन स्ट्रीट्समें बदला जाएगा।     रहवासी समितियां और बहुमंजिला भवनों में कॉमन एरिया में नवीकरणीय ऊर्जा का उपयोग बढ़ेगा।     6 किलोवाट से अधिक लोड वाले घरेलू और व्यावसायिक उपभोक्ताओं को अपनी छत पर उपयोग किए जा रहे लोड के 50 फीसदी क्षमता का सोलर रूफ टॉप लगानाअनिवार्य होगा।     ग्रीन सिटीज में इलेक्ट्रिक व्हीकल को बढ़ावा दिया जाएगा। चार्जिंग स्टेशनों को भी 50 फीसदी बिजली नवकरणीय स्रोतों से लेना होगी।     ग्रीन सिटीज में कम्युनिटी बेस्ड रीन्यूवेबल फार्मिंग को बढ़ावा देकर वहां आरई पावर प्लांट लगाया जाएगा। इसे पॉलिसी के तहतइंसेंटिव और सब्सिडी मिलेगी।     इसी प्रकार कम्युनिटी बेस्ड बायोगैस प्लांट भी विकसितकिए जाएंगे। इसे भी सरकारइंसेंटिव देगी।

एमपी में मृतक खा गए करोड़ों का गेहूं-चावल, जांच में हुआ बड़ा खुलासा

 गुना मध्यप्रदेश के गुना शहर के वार्ड आठ में रहने वाली कला बाई, लक्ष्मण सिंह अब इस संसार में नहीं हैं। इसी तरह बमोरी के प्रेमा, प्रताप, और मारकीमहू की पिंकी भी दुनिया छोड़कर जा चुक है। लेकिन इन लोगों के नाम से आज भी प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना(Pradhan Mantri Garib Kalyan Yojana) का राशन जारी होता रहा। जिले में ऐसे कई मामले हैं जहां इस प्रकार का फर्जीवाड़ा किया जा रहा है। जिले में 4989 मृतकों के नाम राशन जारी होने की जानकारी सामने आई है। इससे महीने करीब 8.43 लाख रुपए चपत सरकार को लग रही है। यह स्थिति पिछले तीन से चार साल से चल रही है। लेकिन कभी विभाग की नजर में यह नहीं आया। केंद्र सरकार ने स्मार्ट पीडीएस सिस्टम लागू कराने के लिए जैसे ही उपभोक्ताओं की ईकेवायसी कराई तो पूरी गड़बड़ी सामने आ गई। इसके बाद अब ऐसे लोगों के नाम उड़ाए जा रहे हैं, जिनका निधन हो चुका है, लेकिन उनके परिवार के सदस्य इनके नाम से राशन ले रहे थे। इस तरह एक साल में एक करोड़ से अधिक की चपत शासन को लग रही थी। अगर पिछले पांच साल की स्थिति देखे तो तीन से चार करोड़ रुपए का नुकसान सरकार को उठाना पड़ा है। इस तरह पकड़ी गई पूरी गड़बड़ी दरअसल केंद्र सरकार ने पीडीएस सिस्टम को ऑनलाइन करने को लेकर स्मार्ट राशन व्यवस्था लागू की है। इसके तहत जिले के प्रत्येक वह व्यक्ति जिसके नाम से राशन जारी होता है, उसकी बायोमैट्रिक ईकेवायसी होनी है। यह प्रक्रिया जिले में पिछले दो साल से चल रही है। इस दौरान जिला आपूर्ति विभाग का अमला, पंचायत के कर्मचारी और मैदानी अमला जांच कर रहा है। परिवार के यहां पहुंचकर जब सभी सदस्यों की जानकारी ली जाती है तो पता चलता है कि कई लोगों की मौत हो चुकी है, लेकिन किसी ने भी पात्रता पर्ची से नाम नहीं कटवाया है। इस वजह से राशन जारी होता रहा। हालांकि जिले में दिवंगत 4989 लोगों के नाम से राशन जारी होता रहा। यह स्थिति लंबे समय से चल रही है। मृतकों की संख्या हर साल बढ़ती गई, लेकिन पात्रता पर्ची से नहीं घटी। इसलिए इन सभी के नाम अब उड़ा दिए गए हैं। शहर से लेकर गांव तक फैला है जंजाल शहर के वार्ड क्रमांक आठ में कला बाई, लक्ष्मण की डेढ़ साल पहले ही मौत हो चुकी है। लेकिन इनके नाम से राशन जारी हो रहा था। इसी तरह मारकीमहू बाली बाई, पिंकी का भी निधन हो चुका है, लेकिन परिवार के लोग राशन ले रहे थे। वहीं बमोरी के डोगरी में प्रेमा, करोला में प्रताप के नाम से भी राशन जारी होता रहा, जबकि इनका निधन काफी समय पहले हो चुका है। फर्जीवाड़े का पूरा गणित गरीब कल्याण योजना के तहत जिले भर में 2 लाख 17 हजार परिवारों को मुत अनाज दिया जाता है। इन परिवारों में सदस्य संया 9 लाख 50 हजार है। इस तरह प्रत्येक सदस्य के नाम पर दो किलो गेहूं और तीन किलो चावल दिए जाते हैं। वहीं एक रुपए किलो नमक दिया जाता है। शासन द्वारा प्रत्येक सदस्य को 30 रुपए किलो कीमत का गेहूं और 40 रुपए किलो कीमत का चावल मुत दिया जाता है। इस तरह एक सदस्य पर प्रतिमाह 170 रुपए खर्च किए जाते हैं। लेकिन जिले में 4989 सदस्यों जो मृत हो चुके हैं, उनके नाम पर भी राशन जारी हुआ। इस तरह इन मृत सदस्यों के राशन पर शासन ने हर माह 8.43 लाख रुपए खर्च किए। अगर साल का आंकड़ा देखें तो यह एक करोड़ से अधिक पर पहुंच जाता है। इस तरह यह गड़बड़ी पिछले तीन से चार साल से चल रही है। केंद्र सरकार का स्मार्ट पीडीएस सिस्टम लागू होने वाला है, इस दौरान हर परिवार के सदस्यों की ईकेवायसी कराई जा रही है। इसी दौरान पता चला है कि दिवंगत लोगों के नाम से भी परिवार के लोगों ने राशन ले लिया है। अब इनके नाम काटे जा रहे हैं। वहीं लोगों से अपील की गई है कि वह अपनी पात्रता पर्ची को दुरुस्त कराएं।- अवधेश पांडे, जिला आपूर्ति अधिकारी

महाकाल मंदिर के लड्डू की मांग राेज 30 क्विवंटल, प्रसाद पैकेट के लिये 5 करोड़ का टेंडर

उज्जैन ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर में भक्तों को 400 रुपये किलो का लड्डू प्रसाद 500 रुपये किलो में खरीदना पड़ रहा है। वजह काउंटरों पर अधिकांश समय सिर्फ 100 और 200 ग्राम के पैकेट ही उपलब्ध रहते हैं। इनकी कीमत क्रमश: 50 व 100 रुपये है। वजन के हिसाब से प्रसाद की कीमत देखें तो यह 500 रुपये किलो पड़ता है। भक्तों की संख्या बढ़ी तो गायब हो गए बड़े पैकेट     महाकालेश्वर मंदिर समिति महाकाल के लड्डू प्रसाद के रूप में शुद्ध देशी घी से निर्मित बेसन के लड्डू विक्रय करती है। मंदिर परिसर व महाकाल महालोक के काउंटरों से लड्डू प्रसाद का विक्रय किया जाता है।     समिति 100, 200, 500 ग्राम तथा एक किलो के पैकेट में प्रसाद का विक्रय करती है। इनकी कीमत क्रमश: 50,100,200 व 400 रुपये है। 100 व 200 ग्राम के छोटे पैकेट में प्रसाद 500 रुपये किलो पड़ता है।     500 ग्राम व 1 किलो के पैक में प्रसाद की कीमत 400 रुपये किलो आती है। जब लड्डू प्रसाद का दाम 400 रुपये किलो निर्धारित किया गया था। उस समय काउंटरों पर चारों पैक में प्रसाद उपलब्ध रहता था, लेकिन धीरे-धीरे समिति ने आधा किलो व एक किलो के पैकेट में प्रसाद का विक्रय बंद कर दिया।     दिखावे के लिए काउंटरों पर आधा किलो व एक किलो के पैकेट रखे जाने लगे। जैसे-जैसे भक्तों की संख्या बढ़ी मंदिर प्रशासन ने बड़े पैक में प्रसाद गायब ही कर दिया। इन दिनों काफी समय से बड़े पैक में प्रसाद उपलब्ध नहीं है। इसका कारण समय पर कच्चे माल की उपलब्धता नहीं होना बताया जा रहा है। मांग और पूर्ति में अंतर महाकाल मंदिर में लड्डू प्रसाद की कमी को मांग और पूर्ति में अंतर को बताया जा रहा है। अब यह किल्लत कच्चे माल की कमी के कारण हो रही है या समय पर हलवाई लड्डू प्रसाद तैयार नहीं कर पा रहे हैं। बताया जाता है हाथ से लड्डू बनाने तथा पैकिंग करने में समय लगता है। बावजूद इसके मंदिर समिति आधुनिक प्लांट नहीं लगा रही है। मशीन से लड्डू बनाने की योजना खटाई में महाकाल मंदिर में सिंहस्थ 2028 को देखते हुए अन्नक्षेत्र परिसर में अत्याधुनिक लड्डू प्रसाद इकाई का निर्माण किया जा रहा था। इसमें मशीन से लड्डू बनाने का अत्याधुनिक प्लांट भी स्थापित किया जाना था। आधुनिक यूनिट का आधार भाग तैयार भी हो गया था लेकिन अचानक मंदिर समिति ने यह प्लान कैंसिल कर दिया। लड्डू प्रसाद निर्माण का कभी टेंडर नहीं होता महाकाल मंदिर समिति सफाई, सुरक्षा, खाद्य सामग्री, कर्मचारियों की आउटसोर्सिंग भर्ती का साल दो साल में टेंडर जारी करती है। जिस प्रकार मंदिर की यह सभी व्यवस्था टेंडर प्रक्रिया के जरिए चलती है, उसी प्रकार लड्डू प्रसाद निर्माण का भी टेंडर होना चाहिए। पहली बार टेंडर प्रक्रिया के जरिए ही हलवाई को लड्डू बनाने का ठेका दिया गया था। उसके बाद से लड्डू प्रसाद निर्माण टेंडर प्रक्रिया से बाहर हो गया। बताया जाता है मंदिर समिति हर बार हलवाई का अनुबंध बढ़ा देती है। चार दिन पहले हुए प्रबंध समिति की बैठक में फैसिलिटी मैनेजमेंट का तो टेंडर जारी हुआ, लेकिन लड्डू प्रसाद निर्माण का टेंडर करने की बजाय फिर से अनुबंध बढ़ा दिया गया। समिति ने इसकी जानकारी भी मीडिया से साझा नहीं की है। उज्जैन के श्री महाकाल मंदिर की प्रबंध समिति ने लड्डू प्रसाद के पैकेट के लिये 5 करोड़ रुपए का टेंडर निकाला है। मंदिर के लड्‌डू प्रसाद की देशभर में मांग है। रोज करीब 30 क्विवंटल लड्डू प्रसाद का निर्माण मंदिर समिति करती है और पूरा प्रसाद दर्शनार्थी खरीदकर ले जाते हैं। श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति ने 8 मई को लड्डू पैकेट के लिए टेंडर निकाला है। जिसमें एक साल के लड्डू पैकेट सप्लाई के लिए 5 करोड़ का प्रावधान रखा गया है। यह पैकेट प्रिंटेड होंगे जिसकी डिजाइन मंदिर प्रबंध समिति द्वारा तय की जायेगी। पिछले साल ही बदली थी लड्डू पैकेट की डिजाइन गौरतलब है कि पहले प्रसाद के पैकेट पर महाकाल शिखर और ओम की तस्वीर होती था। हांलाकि, इस डिजाइन पर विवाद होने के बाद मंदिर समिति ने इसे बदलकर पैकेट पर फूल का फोटो लगाया था। इसे एक बार फिर बदल दिया गया है और नई डिजाइन के साथ पैकेट जारी किया गया है। बता दें कि प्रसाद के पैकेट की पुरानी डिजाइन पर कुछ साधु, संतों एवं धार्मिक संगठनों ने आपत्ति जताई थी। उनका कहना था कि प्रसाद के पैकेट को फेंक दिया जाता है, ऐसे में धार्मिक प्रतीकों का अपमान होता है, इसलिए पैकेट की डिजाइन बदल दी जाए। इस पर इंदौर हाईकोर्ट ने मंदिर समिति को 3 महीने में मामले का समाधान करने का निर्देश दिया था। इसके बाद मंदिर समिति ने लड्डू प्रसाद के पैकेट की डिजाइन बदल दी  थी। हर दिन करीब 30 क्विंटल लड्डू बनते हैं सूत्रों के मुताबिक श्री महाकालेश्वर मंदिर की लड्डू निर्माण ईकाई में हर दिन करीब 30 क्विंटल लड्डू बनते हैं। और रोज ही इतने लड्डू की खपत हो जाती है। विशेष पर्व जैसे सावन सोमवार, महाशिवरात्रि व अन्य मौकों पर 50-65 क्विंटल लड्डू तैयार किए जाते हैं। इनकी भी एक दिन में खपत हो जाती है। लड्डूओं के 100 ग्राम, 200 ग्राम, 500 ग्राम और एक किलो के पैकेट तैयार किए जाते हैं। जिन्हें भक्त 50, 100, 200 और 400 रुपये में खरीदते हैं। साल 2024 में 53 करोड़ का प्रसाद बिका था श्री महाकालेश्वर मंदिर का  लड्डू प्रसाद देशभर में प्रसिद्ध है। प्रसाद की गुणवत्ता को देखते हुए एफसीसीसीआई से भी फाइव स्टार रेटिंग की गई है। लंबे समय तक प्रसाद की गुणवत्ता बरकरार रहती है। साल 2024 में जनवरी से 13 दिसंबर तक मंदिर को कुल आय 165 करोड़ रुपये से अधिक हुई थी, जिसमें लड्डू  प्रसादी से करीब  53 करोड़ 50 लाख रुपये की आय शामिल थी।

नगरीय निकायों की रेटिंग में ग्रीन स्पेस के लिये किये गये प्रयास महत्वपूर्ण

भोपाल आयुक्त नगरीय प्रशासन एवं विकास श्री संकेत एस. भोंडवे ने कहा है कि प्रदेश में नगरीय निकायों की रेटिंग में ग्रीन स्पेस के लिये किये जा रहे प्रयासों को कुल मूल्यांकन का महत्वपूर्ण बिन्दु माना जायेगा। उन्होंने कहा कि कार्यों की गुणवत्ता और समयबद्धता बनाये रखने के लिये योजनाओं की नियमित समीक्षा की जाये। आयुक्त श्री भोंडवे आज कार्यभार ग्रहण करने के बाद विभागीय अधिकारियों की बैठक को संबोधित कर रहे थे। आयुक्त श्री भोंडवे ने कहा कि योजनाओं का क्रियान्वयन इस तरह से किया जाये कि इसका लाभ आम नागरिकों को सरल और सुलभ तरीके से मिल सके। आयुक्त ने ई-ऑफिस के प्रभावी संचालन के लिये आवश्यक तकनीकी संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि शहरी योजनाओं पर केन्द्रित वर्तमान मुद्दों पर आधारित वर्चुअल बैठक अब हर 15 दिन में की जायेगी। बैठक में भारत ऐप का उपयोग किया जायेगा। दस्तावेजों की सुरक्षा के लिये डिजी लॉकर का उपयोग आयुक्त श्री भोंडवे ने कहा कि फायर प्रमाण-पत्र जैसे दस्तावेजों की सुरक्षा के लिये डिजी लॉकर के उपयोग को प्रोत्साहित किया जाये। उन्होंने पालिका भवन का निरीक्षण किया और कार्यालय परिसर को सुव्यवस्थित एवं स्वच्छ बनाये रखने के निर्देश दिये। नगरीय विकास आयुक्त का पद श्री सी.बी. चक्रवर्ती के स्थानांतरण के बाद रिक्त हुआ था।

जिलों में हो रहे कार्यों को देखने जाएंगे अधिकारी, मनरेगा आयुक्त को देंगे अनुश्रवण रिपोर्ट, ये अधिकारी करेंगे इन जिलों का भ्रमण

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में पानी की हर एक बूंद को बचाने और पुराने जल स्त्रोतों को संवारने के लिए प्रदेश में 30 मार्च से जल गंगा संवर्धन अभियान चलाया जा रहा है। तीन माह तक चलने वाले इस अभियान के अंतर्गत प्रदेश के सभी जिलों में मनरेगा योजना के तहत 81 हजार खेत-तालाब, 1 हजार अमृत सरोवर, 1 लाख कूप रिचार्ज और पूर्व से प्रगतिरत जल संग्रहण और भूजल संवर्धन के 70 हजार कार्यों को पूर्ण करने का लक्ष्य तय किया है। इसी उद्देश्य की पूर्ति के लिए जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत हो रहे कार्यों का निरीक्षण करने अधिकारी जिलों में जाएंगे और भ्रमण उपरांत जल गंगा संवर्धन अभियान अंतर्गत क्रियान्वित कार्यों के अनुश्रवण का प्रतिवेदन मनरेगा आयुक्त को देंगे। 44 अधिकारियों की पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने लगाई ड्यूटी जिलों में हो रहे कार्यों का निरीक्षण करने के लिए पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने 44 अधिकारियों का ड्यूटी आदेश जारी किया है। इसमें अतिरिक्त संचालक, सयुंक्त संचालक, उप संचालक, उपायुक्त, मुख्य अभियंता, अधीक्षण यंत्री और कार्यपालन यंत्री स्तर के अधिकारी शामिल है। सभी अधिकारी मई एवं जून माह में क्रमश: 2-2 बार आवंटित जिलों का भ्रमण करेंगे। ये अधिकारी करेंगे इन जिलों का भ्रमण श्री प्रद्युम्न शर्मा अतिरिक्त संचालक जबलपुर, श्री पी.सी. शर्मा अतिरिक्त संचालक बैतूल एवं नर्मदापुरम, श्री अमिताभ सिरवैया अतिरिक्त संचालक भोपाल-हरदा, श्री बी.एस. मंडलोई अतिरिक्त संचालक रतलाम, श्री अशोक चौहान संयुक्त आयुक्त खरगौन बड़वानी, श्री सुदेश मालवीय संयुक्त आयुक्त गुना, श्री बी.एस. जाटव संयुक्त आयुक्त दतिया, श्री आर.के. वर्मा संयुक्त आयुक्त रायसेन, श्रीमती शिवानी वर्मा संयुक्त आयुक्त देवास, श्री प्रभात कुमार उइके संयुक्त आयुक्त सिवनी, श्री इंदर सिंह ठाकुर संयुक्त आयुक्त सतना, श्रीमती सीमा खान संयुक्त आयुक्त सीहोर, श्री राकेश शुक्ला संयुक्त आयुक्त दमोह, श्री गोपाल खुराना संयुक्त आयुक्त छिंदवाड़ा, श्रीमती लक्ष्मी दुबे संयुक्त आयुक्त नरसिंहपुर, श्री अनिल कोचर संयुक्त आयुक्त बालाघाट, श्री दिनेश कुमार गुप्ता उप संचालक नीमच-मंदसौर, श्री नवाल मीणा उप संचालक रीवा, श्री सुधीर जैन उपसंचालक डिंडौरी, श्री वीरेंद्र त्रिपाठी उप संचालक कटनी, उमरिया, श्री के.पी. राज उप संचालक बुरहानपुर-खंडवा, श्री सुरेश झारिया उप संचालक छतरपुर, श्री शशिभूषण शर्मा उपायुक्त ग्वालियर, श्रीमती अनिता वात्सल्य उपायुक्त शाजापुर, श्रीमती सुधा भार्गव उपायुक्त इंदौर, श्री जितेंद्र जैन उपायुक्त शिवपुरी, श्री दीपक राय उपायुक्त भिंड, श्री सुधीर खांडेकर उपायुक्त सागर, श्री अनिल पवार उपायुक्त आगर मालवा, सुश्री नीरजा उपाध्याय उपायुक्त धार, श्रीमती मनीषा दवे उपायुक्त राजगढ़, श्रीमती लक्ष्मी चौधरी उपायुक्त उज्जैन, श्री राजीव खरे उपायुक्त विदिशा, श्री अजीत तिवारी उपायुक्त मंडला, श्री के.एस. मिर्धा मुख्य अभियंता अलीराजपुर, श्री नरेश रावत अधीक्षण यंत्री सीधी, श्री सतीश कुमार तिवारी अधीक्षण यंत्री सिंगरौली, श्री एस.एस. डाबर अधीक्षण यंत्री झाबुआ, श्री राजेंद्र पवार कार्यपालन यंत्री टीकमगढ़-निवाड़ी, श्री अश्विनी जायसवाल कार्यपालन यंत्री श्योपुर, सुश्री वियंका धानापुने कार्यपालन यंत्री अशोकनगर, श्री राकेश पांडेय कार्यपालन यंत्री शहडोल-अनूपपुर और श्री गुलाब कोडापे कार्यपालन यंत्री पन्ना जिले का भ्रमण करेंगे।  

मंत्री सारंग ने दिए निर्देश, प्रदेश में सीपीपीपी मॉडल के प्रभावी क्रियान्वयन के लिये सीपीपीपी विंग की स्थापना

भोपाल सहकारिता मंत्री श्री विश्वास कैलाश सारंग ने प्रदेश में सीपीपीपी मॉडल के अंतर्गत इन्वेस्टर्स समिट में हुए एमओयू के प्रभावी क्रियान्वयन और सुनियोजित मॉनिटरिंग के लिये एक विशेष “सीपीपीपी विंग” की स्थापना के निर्देश दिये। यह सीपीपीपी विंग निजी निवेशकों, सहकारी समितियों और किसानों के लिए सिंगल विंडो सिस्टम के रूप में कार्य करेगा। इसके माध्यम से सभी प्रक्रियाओं को सरल, पारदर्शी और प्रभावी बनाया जाएगा। मंत्री श्री सारंग ने केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह के निर्देशों के परिपालन में मंगलवार को मंत्रालय में सहकारिता विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ को-ऑपरेटिव पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (सीपीपीपी) मॉडल की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिये है कि इस विंग के लिए पृथक कार्यालय स्थापित किया जाए तथा इसके माध्यम से एमओयू की प्रगति की सतत निगरानी सुनिश्चित की जाए। बैठक में सीपीपीपी मॉडल के सफल एवं धरातलीय क्रियान्वयन तथा सहकारी क्षेत्र में निजी निवेश को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से रणनीतियों पर विस्तृत चर्चा की गई। बैठक में प्रबंध संचालक विपणन संघ श्री आलोक कुमार सिंह, आयुक्त सहकारिता एवं पंजीयक श्री मनोज पुष्प सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। सिंगल विंडो सुविधा से सहकारी समितियों, निवेशकों और किसानों को मिलेगा त्वरित समाधान मंत्री श्री सारंग ने कहा कि “सीपीपीपी विंग” किसानों, सहकारी समितियों तथा निजी निवेशकों की समस्याओं के समाधान के लिये सिंगल विंडो प्लेटफॉर्म के रूप में कार्य करेगा। यह प्लेटफॉर्म निवेश संबंधी आवश्यक अनुमतियों, प्रक्रियाओं एवं मार्गदर्शन के लिए एक एकीकृत व्यवस्था उपलब्ध कराएगा। इसके अंतर्गत सहकारी बैंकों, समितियों, किसानों व निजी उद्यमियों के मध्य एमओयू की प्रक्रिया को सुलभ और पारदर्शी बनाया जाएगा। सीपीपीपी विंग भारतीय उद्योग परिसंघ व एमपीआईडीसी के साथ करेगा समन्वय मंत्री श्री सारंग ने कहा कि “सीपीपीपी विंग” की कार्य प्रणाली में भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) और मध्यप्रदेश औद्योगिक विकास निगम (एमपीआईडीसी) के साथ समन्वय की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। यह विंग केन्द्र एवं राज्य सरकार की सहकारी योजनाओं के साथ जुड़कर किसानों, नव उद्यमियों और सहकारी संस्थाओं को योजनाओं का लाभ दिलाने में सक्रिय भूमिका निभाएगा। कच्चा माल उत्पादक किसानों के लिये प्रशिक्षण कार्यशालाओं और वृहद सेमिनार मंत्री श्री सारंग ने निर्देश दिए कि प्रदेश के सहकारी क्षेत्र में कच्चे माल का उत्पादन करने वाले किसानों के लिए मध्यप्रदेश राज्य सहकारी संघ द्वारा कार्यशालाओं का आयोजन किया जाए। इसका उद्देश्य उत्पादन की गुणवत्ता को बेहतर बनाना और किसानों को तकनीकी ज्ञान से सशक्त बनाना होगा। साथ ही प्रदेश में एक वृहद सेमिनार का आयोजन भी किया जाए, जिसमें सफल सहकारी उद्यमियों, संस्थाओं और श्रेष्ठ कार्य करने वाले किसानों को आमंत्रित किया जाएगा। इससे सर्वोत्तम कार्य प्रणालियों और अनुभवों का आदान-प्रदान होगा। प्रदेश की सहकारी समितियों की परफॉर्मेंस आधारित ग्रेडिंग होगी मंत्री श्री सारंग ने निर्देश दिए कि प्रदर्शन के आधार पर प्रदेश की सभी सहकारी समितियों की ग्रेडिंग की जाए। यह ग्रेडिंग समितियों की वित्तीय स्थिति, प्रबंधन की पारदर्शिता, सेवाओं की गुणवत्ता, लाभांश वितरण और कृषकों तथा सदस्यों को दी जा रही सुविधाओं के आधार पर की जाएगी। उन्होंने कहा कि इस ग्रेडिंग प्रणाली के माध्यम से समितियों की कार्य प्रणाली, पारदर्शिता, वित्तीय अनुशासन, सदस्य संतुष्टि और नवाचार की क्षमताओं का मूल्यांकन किया जा सकेगा।  

मातृ मृत्युदर और शिशु मृत्युदर में सुधार के लिए समाज और सरकार दोनों के साझा प्रयासों की आवश्यकता : उप मुख्यमंत्री शुक्ल

भोपाल उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा है कि मातृ मृत्युदर और शिशु मृत्युदर में सुधार के लिए समाज और सरकार दोनों के साझा प्रयासों की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि केवल स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार पर्याप्त नहीं है, स्वास्थ्य के प्रति सामाजिक चेतना को संस्कार के रूप में विकसित करना होगा। उन्होंने कहा कि शत-प्रतिशत संस्थागत प्रसव और मातृ-शिशु स्वास्थ्य सुनिश्चित करने के लिये जन-सामान्य को प्रेरित करना अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि एक स्वस्थ किशोरी ही भविष्य में स्वस्थ माँ बनती है। किशोरियों के पोषण और स्वास्थ्य की नियमित जाँच, गर्भावस्था से पूर्व की तैयारियाँ, गर्भकालीन निगरानी और प्रसव पश्चात देखरेख अत्यंत आवश्यक है। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने यूनिसेफ भोपाल कार्यालय में प्रदेश में स्वास्थ्य एवं पोषण विषयक पहलों की समीक्षा की और सुझाव प्राप्त किए। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि मातृ-शिशु स्वास्थ्य के क्षेत्र में व्यापक सुधार तभी संभव है जब जनमानस में स्वास्थ्य के प्रति चेतना जागे और यह सामाजिक संस्कृति का रूप ले। उन्होंने कहा कि वर्तमान में केवल 50 प्रतिशत गर्भवती महिलाओं का पंजीकरण हो रहा है और लगभग 60 प्रतिशत महिलाएं नियमित एएनसी (एंटी-नेटल केयर) सेवाएं ले रही हैं। यह आँकड़े चिंता का विषय हैं। उन्होंने कहा कि शत-प्रतिशत पंजीकरण और देखरेख को हम सामाजिक आदत और उत्तरदायित्व के रूप में विकसित करना चाहते हैं। इसके लिए हमें यह एक जन-संस्कृति बनानी होगी। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि इस दिशा में राज्य सरकार ने ‘मातृ-शिशु संजीवन मिशन’ और ‘अनमोल 2.0 पोर्टल’ पहल प्रारंभ की हैं, जो सभी गर्भवती महिलाओं का समय पर पंजीकरण और निगरानी सुनिश्चित करने में सहायक सिद्ध हो रही हैं। उन्होंने जनप्रतिनिधियों, आशा, एएनएम, मैदानी स्वास्थ्य कर्ताओं और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को इस अभियान में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। यूनिसेफ विशेषज्ञों ने बताया कि गंभीर कुपोषण (एसएएम) के प्रभावी समाधान से 6 माह से 5 वर्ष तक की आयु में होने वाली 68 प्रतिशत मृत्यु को रोका जा सकता है। नवजात देखरेख को सुदृढ़ करने से 70 प्रतिशत शिशु मृत्यु दर को नियंत्रित किया जा सकता है। गर्भवती महिलाओं का समय पर पंजीकरण आवश्यक है, इससे हाई रिस्क प्रेगनेंसी की पहचान और उपचार समय पर किया जा सके। इन सुझावों पर सहमति व्यक्त करते हुए उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि राज्य सरकार महिला एवं बाल विकास विभाग के साथ समन्वय कर एकीकृत अंतर्विभागीय रणनीति के माध्यम से कुपोषण, मातृ और शिशु मृत्यु दर की चुनौती का सामना कर रही है। उन्होंने कहा कि समर्पित प्रयासों से मध्यप्रदेश को स्वास्थ्य के क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बनाया जाएगा। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि प्रदेश में संसाधनों की कमी नहीं है। स्वास्थ्य अधोसंरचना का विस्तार निरंतर किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि हमें केवल सुविधाएं नहीं देनी हैं, बल्कि उपयोग के प्रति नागरिकों को प्रेरित भी करना है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में सभी संबंधित विभागों के साथ मिलकर एक संगठित और समर्पित रणनीति पर कार्य किया जा रहा है, जिसमें जन-भागीदारी को विशेष महत्व दिया जा रहा है। बैठक में लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा राज्य मंत्री श्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल उपस्थित रहे। यूनिसेफ के ऑफिस इंचार्ज डॉ. अनिल गुलाटी एवं हेल्थ स्पेशलिस्ट डॉ. प्रशांत कुमार ने राज्य में स्वास्थ्य सुधार के लिए महत्वपूर्ण सुझाव प्रस्तुत किए।  

मुख्यमंत्री ने की पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण तथा विमुक्त, घुमन्तु और अर्द्ध घुमन्तु विभाग के कार्यों की समीक्षा

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि विमुक्त, घुमन्तु और अर्द्ध घुमन्तु समुदायों की प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करें। समुदाय के अनेक विद्यार्थियों ने लोक सेवा आयोग जैसी परीक्षाओं में सफलता प्राप्त की है। प्रदेश के विभिन्न जिलों में इनका निवास है। इनकी पुरानी पृष्ठभूमि अथवा पूर्व धारणा के आधार पर इन जातियों के सभी लोगों को अपराधी ना माना जाए। पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई में भी जातिगत संबोधन से संबोधित ना किया जाए। अपराधियों की जानकारी में जातियों का उल्लेख नहीं किया जाएं। इस तरह की असम्मानजनक शब्दावली से बचा जाना चाहिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंगलवार को समत्व भवन (मुख्यमंत्री निवास) में विभाग की बैठक में इस संबंध में निर्देश दिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जिला स्तर पर पुलिस प्रशासन द्वारा इन जातियों के ऐसे लोगों को अपराधों से विमुख करने के लिए प्रयास किया जाए जो विभिन्न कारणों से अपराधों से जुड़ जाते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राजगढ़ जिले में पुलिस प्रशासन द्वारा सांसी जाति के कल्याण के लिए किए गए कार्यों की सराहना की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पिछड़ा वर्ग के कल्याण के कार्यों को प्रभावी रूप से संपादित करने के निर्देश दिए। उन्होंने विभिन्न छात्रवृतियों की राशि शैक्षणिक सत्र के दौरान ही वितरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण, विमुक्त, घुमन्तु और अर्द्ध घुमन्तु कल्याण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती कृष्णा गौर ने कहा कि आगामी शिक्षण सत्र में विभिन्न जिलों में पिछड़ा वर्ग के विद्यार्थियों के छात्रवृत्ति वितरण के कार्य तय समय में किया जाएगा। इस बारे में विभाग के अधिकारियों को निर्देशित किया गया है। उन्होंने अन्य पिछड़ा वर्ग छात्रावासों में मेस सुविधा संचालन की स्वीकृति दिए जाने पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में पहली बार अन्य पिछड़ा वर्ग के छात्रावासों में मेस संचालन शुरू होगा। राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने कहा कि दिल्ली छात्र गृह योजना में वर्तमान में स्वीकृत 50 सीट की वृद्धि कर 150 सीट किया जाना प्रस्तावित किया गया है। उन्होंने कहा कि विभिन्न कन्या छात्रावास में बाउंड्री वॉल का निर्माण पूर्ण होने तक कांटेदार फेंसिंग की जाए। वक्फ सम्पत्तियों के डिजिटलाइजेशन में मध्यप्रदेश बन रहा है मॉडल राज्य मंत्री श्रीमती गौर ने बताया कि प्रदेश की वक्फ समितियों का डिजिटलाइजेशन राजस्व विभाग के सहयोग से किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश वक्फ समितियों के डिजिटलाइजेशन सहित अन्य कार्यों में मध्यप्रदेश मॉडल के रूप में कार्य कर रहा है। बैठक में प्रमुख सचिव श्री ई. रमेश कुमार ने अन्य पिछड़ा वर्ग कल्याण के विद्यार्थियों के लिए छात्रावासों के निर्माण, छात्रवृत्ति राशि के वितरण और अन्य योजनाओं की जानकारी दी। संचालक विमुक्त, घुमन्तु और अर्द्ध घुमन्तु कल्याण श्री नीरज वशिष्ठ ने जानकारी दी कि प्रदेश में विमुक्त, घुमन्तु और अर्द्ध घुमन्तु समुदाय की 51 जातियां हैं। इन जातियों में 14 जातियां अनुसूचित जाति वर्ग, 10 जातियां अन्य पिछड़ा वर्ग और 27 जातियां सामान्य वर्ग की श्रेणी में आती हैं। उन्होंने कहा कि इन सभी जातियों को विमुक्त, घुमन्तु और अर्द्ध घुमन्तु समुदाय की जाति का प्रमाण पत्र दिया जाता है और विमुक्त, घुमन्तु और अर्द्ध घुमन्तु समुदाय के लिए संचालित योजनाओं से लाभान्वित भी किया जा रहा है। बैठक में अन्य पिछड़ा वर्ग के संचालित विभिन्न स्वरोजगार योजनाओं और सामुदायिक विकास कार्यक्रमों पर भी चर्चा की गई। बैठक में मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव (मुख्यमंत्री कार्यालय) डॉ. राजेश राजौरा, आयुक्त अन्य पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण श्री सौरभ सुमन तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।  

चोर नई वारदातों का अंजाम दे रहे, रतलाम के दो सूने मकानों में चोरी, पचास लाख के जेवर ले गए

रतलाम शहर में चोरी की वारदातें थमने का नाम नहीं ले रही है। पुलिस पिछली वारदातों के आरोपितों को पकड़ रही है तो चोर नई वारदातों का अंजाम दे रहे है। तीन दिन पहले ही पुलिस ने चार मकानों से जेवर व तीन स्थानों से वाहन चुराने का आरोपित को गिरफ्तार किया था। वहीं मंगलवार तड़के पांच से छह बजे के बीच चोरों ने दीनदयाल नगर थाना क्षेत्र की शांति निकेतन कालोनी में दो सूने मकानों में ताले तोड़कर वारदात को अंजाम दिया तथा करीब पचास लाख रुपये के जेवर व 54 हजार रुपये नकद चुराकर ले गए। चोरों ने कलीमी कालोमी स्थित एक अन्य मकान में भी वारदात करने का प्रयास किया लेकिन वहां चोरों को कुछ नहीं मिला।       जानकारी के अनुसार चोरों ने शांति निकेतन कालोनी निवासी किराना व्यापारी मनीष जैन (मूणत) की झाबुआ जिले के ग्राम जामली में किराना दुकान तथा खेत है।     वे परिवार के साथ 11 मई को सुबह करीब दस बजे घर पर ताला लगाकर ग्राम जामली गए थे। वहीं उनके पड़ोसी प्रापर्टी व्यवसायी विकास वितलिया पत्नी व बच्चों के साथ 11 मई की दोपहर घूमने के लिए गोवा चले गए।     मंगलवार तड़के चोर ताला तोड़कर पहले मनीष जैन के घर घुसे तथा जेवर व रूपये चुराकर बाहर निकले। इसके बाद वे उनके पड़ोसी विकास पितलिया के घर ताले तोड़कर घुसे तथा जेवर चुराकर ले गए।     सुबह आसपास के लोगों ने दोनों मकानों के ताले टूटे देखकर मनीष जैन व विकास पितलिया को सूचना दी।     सुबह करीब साढ़े दस बजे मनीष जैन परिवार को साथ घर लौटे तो नीचे व ऊपर के कमरों में अलमारियों का सामान बिखरा हुआ था।     चेक करने पर पता चला कि चोर उनके घर से करीब साढ़े पांच सौ ग्राम वजनी सोने के जेवर, करीब छह सौ ग्राम वजनी चांदी के जेवर, सिक्के अादि तथा 54 हजार रुपये चुराकर ले गए।     वहीं सूचना मिलने पर विकास पितलिया की लोकेंद्र टाकीज क्षेत्र में रही बहन रंजना चौरड़िया, मां लाडबाई आदि घर पहुंचे। विकास के भी घर के ऊपर व नीचे के कमरों में अलमारियों का सामान बिखरा हुआ था।     रंजना चौरड़िया ने बताया कि फोन पर भाई विकास से चर्चा हुई है।     घर में रखे चालीस से पचास ग्राम वजनी सोने की दो पाटली, एक चेन, दो अंगूठी व तीन हाथ घड़ियां चोर ले गए। इसके अलावा और क्या चोरी गया है यह विकास व भाभी के आने पर पता चलेगा।     चोरों ने कलीमी कालोनी में कासिम सेफुद्दीन कादरी के सूने घर का भी ताला तोड़कर घर में प्रवेश किया। कासिम इंदौर रहते है तथा घर में जेवर व नकदी नहीं थे।इसलिए चोर खाली हाथ लौट गए।     दोनों जगह दो-दो चोर सीसीटीवी कैमरे में कैद हुए है तथा दोनों में कैद चोर एक जैसे दिख रहे है। चोरों ने पहले कासिम के यहां चोरी का प्रयास किया, लेकिन कुछ नहीं मिलने पर वे शांति निकेतन कालोनी पहुंचे तथा मनीष जैन व विकास पितलिया के यहां वारदात कर भाग निकले।  

मदन सागर तालाब में निकाली गयी जलकुंभी, किया जा रहा है श्रमदान

भोपाल प्रदेश में जल गंगा संवर्धन अभियान में पानी के महत्व को समझाने और संरक्षण के लिये सामूहिक श्रमदान के साथ संगोष्ठी, जल-रैली, दीवार-लेखन के कार्य को भी महत्व दिया जा रहा है। अभियान में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ाने के लिये भी महिला जन-प्रतिनिधियों की मदद ली जा रही है। राज्य में यह अभियान 30 जून तक लगातार जारी रहेगा। इसके साथ ही जगह-जगह पर सघन पौध-रोपण की योजना तैयार की जा रही है। सघन पौघ-रोपण का कार्य बरसात के मौसम में जन-सहभागिता से पूरा किया जायेगा। आठनेर में जल संरक्षण रैली बैतूल जिले में कलेक्टर श्री नरेन्द्र कुमार सूर्यवंशी के निर्देश पर विभिन्न गतिविधियाँ लगातार संचालित हो रही हैं। बैतूल ब्लॉक के ग्राम भडूस एवं आठनेर में महिलाओं की एक विशेष जल संगोष्ठी हुई। संगोष्ठी में जल संरचनाओं के संरक्षण, स्वच्छता और उसके महत्व के विषय में जानकारी दी गयी। संगोष्ठी के बाद तालाबों को पॉलिथिन और कचरे से मुक्त रखने की शपथ दिलायी गयी। उत्कृष्ट विद्यालय परिसर में जल संरक्षण विषय पर जागरूकता रैली निकाली गयी। ब्रह्मकुमारी संस्था की अर्चना दीदी ने जल के महत्‍व, जल-स्रोतों की स्वच्छता और संरक्षण पर विचार व्यक्त किये। कुडैल नदी के पुनर्जीवन के लिये तैयार की गयी कार्य-योजना रतलाम में जल गंगा संवर्धन अभियान में ग्रामीण विकास विभाग और ऑर्ट ऑफ लिविंग संस्था द्वारा मिलकर शहर की कुडैल नदी के पुनर्जीवन का निर्णय लिया गया। कुडैल नदी का उद्गम स्थल ग्राम पंचायत ढीकवा जनपद पंचायत रतलाम है। नदी के कैचमेंट एरिया में 24 ग्राम पंचायत और 39 ग्राम शामिल हैं। नदी के जल संरक्षण की कार्य-योजना तैयार की गयी है, जिसमें कंटूर ट्रेंच, बोल्डर बंड, खेत-तालाब, कुआँ रिचार्ज, चेकडेम और स्टॉप डेम को शामिल किया गया है। कुडैल नदी अपने उद्गम स्थल से 28 किलोमीटर का रास्ता तय कर जावरा की मलेनी नदी में मिलती है। सम्पूर्ण कैचमेंट क्षेत्र में रिज टू वैली पद्धति को ध्यान में रखते हुए जल संरक्षण एवं संवर्धन के कार्य किये जायेंगे, जिससे अधिक से अधिक वर्षा जल को रोककर जमीन में उतारा जा सके। ग्राम रामाबालोदा में तालाब का गहरीकरण मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मंशा के अनुरूप उज्जैन जिले में जल गंगा संवर्धन अभियान में विभिन्न गतिविधियाँ लगातार जारी हैं। जस्ताखेड़ी और उन्डासा तालाब की साफ-सफाई की गयी। जिले में जन-भागीदारी से नहरों की साफ-सफाई के साथ घाटों की रंगाई-पुताई का कार्य किया जा रहा है। जल संसाधन विभाग ने कोयलखेड़ी तालाब (तराना) में गहरीकरण का कार्य हाथ में लिया है। साहिबखेड़ी तालाब की साफ-सफाई का कार्य भी तेजी से किया जा रहा है। कृष्ण-सुदामा तालाब की पाल एवं नहर की सफाई का कार्य जन-भागीदारी से किया जा रहा है। काजीखेड़ी तालाब के स्लूस वेल का सफाई कार्य किया जा रहा है। मदन सागर तालाब में निकाली गयी जलकुंभी टीकमगढ़ जिले के जतारा के मदन सागर तालाब में सामूहिक श्रमदान कर जलकुंभी निकाली गयी। सामूहिक श्रमदान में शामिल ग्रामीणों को जल-स्रोतों के आसपास साफ-सफाई रखने की शपथ दिलायी गयी। ग्राम के विद्यार्थियों को उद्यानिकी विभाग की नर्सरी का भ्रमण कराया गया। विभाग के श्री धर्मेन्द्र मौर्य ने नर्सरी में तैयार किये जाने वाले पौधों की विधि और उनकी किस्मों के बारे में जानकारी दी। जतारा में सामूहिक श्रमदान में गायत्री परिवार और नवांकुर संस्था के सदस्यों ने अपनी भागीदारी दी। ब्रम्हकुंड जल चौपाल में ग्रामीणों ने लिया संकल्प सतना जिले में जल गंगा संवर्धन अभियान की बड़े पैमाने पर गतिविधियाँ चल रही हैं। जन-अभियान परिषद और दीनदयाल शोध संस्थान के संयुक्त प्रयासों से माँ मंदाकिनी नदी के पुनर्जीवन का कार्य किया जा रहा है। मझगवाँ के ग्राम भटवा में मंदाकिनी नदी के उद्गम स्थल पर जल चौपाल का आयोजन हुआ। सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मंदाकिनी नदी की वर्तमान स्थिति और चुनौतियों के संबंध में आपसी विचार-विमर्श किया। स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि ब्रम्हकुंड के पास पहले बड़ी संख्या में बगीचे थे। बगीचे होने के कारण कुंड में हमेशा जल-स्तर अच्छी स्थिति में रहा करता था। पेड़ों की कमी की वजह से कुंड का जल-स्तर लगातार कम होता जा रहा है। वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. अखिलेश ने बताया कि गाँव की समस्या का सबसे सटीक समाधान ग्रामवासी ही कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि सघन पौध-रोपण और जल संरक्षण इस समस्या का सर्वोत्तम समाधान है। उन्होंने कहा कि पानी की स्थिति में सुधार के लिये ग्रामीणों को राज्य शासन पर निर्भरता कम करनी होगी। सामूहिक श्रमदान के बाद ब्रम्हकुंड में गंगा आरती की गयी। ग्राम पंचायत जीर में खेत-तालाब का निर्माण सिंगरौली जिले में चल रहे अभियान में जल संचयन संरचनाओं, जिनमें तालाब, बावड़ी और नदियों की साफ-सफाई कर उन्हें नया स्वरूप दिया जा रहा है। ग्रामीणों को रूफवॉटर हॉर्वेस्टिंग, हैण्ड-पम्प के समीप शॉकपिट के निर्माण के लिये प्रेरित किया जा रहा है। ग्राम पंचायत जीर में खेत-तालाब का निर्माण कार्य सामूहिक श्रमदान के साथ किया गया। जिले में विद्यार्थियों को पानी बचाने की शपथ दिलायी जा रही है। चौपाल और गोष्ठी के जरिये पंचायत पदाधिकारियों और ग्रामीणों को जल का महत्व बताया जा रहा है।  

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