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उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने स्वास्थ्य अधोसंरचना विकास कार्यों की वृहद समीक्षा

भोपाल उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि प्रदेश में स्वास्थ्य सुविधाओं को सुदृढ़ बनाने के लिए अधोसंरचना विकास कार्यों में गति अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा उपलब्ध कराए गए बजट का उपयोग प्राथमिकता के आधार पर सुनिश्चित किया जाए तथा निर्माण कार्यों को समयसीमा में पूर्ण किया जाए। उन्होंने निर्माण कार्यों की धीमी गति पर चिंता जताते हुए निर्देश दिए कि निर्माण एजेंसियों द्वारा किए गए कार्यों के भुगतान में किसी प्रकार की देरी नहीं होनी चाहिए, ताकि कार्यों की गति बनी रहे और गुणवत्ता भी सुनिश्चित हो। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने मंत्रालय, भोपाल में स्वास्थ्य विभाग की अधोसंरचना विकास संबंधी कार्यों की वृहद समीक्षा की। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को आधुनिक, सशक्त और जनहितकारी बनाने के लिए अधोसंरचना, मानव संसाधन, उपकरण, प्रबंधन और तकनीकी सभी स्तरों पर समन्वित प्रयास आवश्यक हैं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे कार्यों की सतत निगरानी करें और सभी परियोजनाओं को गुणवत्ता एवं समयबद्धता के साथ पूरा करें। स्वास्थ्य संस्थानों में समय पर उपलब्ध हो उपकरण एवं फर्नीचर उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने निर्देशित किया कि निर्माणाधीन और पूर्ण हो चुके सभी स्वास्थ्य संस्थानों में आवश्यक उपकरण एवं फर्नीचर की समय पर आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि यह देखा गया है कि भवन निर्माण कार्य पूर्ण हो जाने के बावजूद उपकरणों की अनुपलब्धता के कारण संस्थानों का संचालन प्रारंभ नहीं हो पाता, जो कि अत्यंत चिंताजनक है। उन्होंने इस स्थिति को सुधारने के लिए सतत मॉनिटरिंग के निर्देश दिए और कहा कि भविष्य में संचालन में किसी प्रकार की देरी नहीं होनी चाहिए। 2 हज़ार मेडिकल ऑफिसर्स एवं विशेषज्ञ डॉक्टरों की भर्ती जुलाई-अगस्त तक होगी पूर्ण उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं के बेहतर संचालन के लिए मैनपॉवर की उपलब्धता बढ़ाने पर सरकार द्वारा विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि एमपीपीएससी द्वारा जुलाई एवं अगस्त माह तक दो हजार मेडिकल ऑफिसर्स और विशेषज्ञ डॉक्टरों की भर्ती प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। एमपीईएसबी द्वारा नियमित रूप से भर्ती की जा रही है। उन्होंने कहा कि इससे प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को गति मिलेगी और दूरदराज क्षेत्रों में भी बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं सुलभ होंगी। आउटसोर्स कर्मचारियों के वेतन भुगतान में न हो देरी उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि आउटसोर्सिंग के माध्यम से कार्यरत कर्मचारी एवं फील्ड वर्कर ही आमजन तक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच का प्रथम संपर्क होते हैं। ऐसे कर्मचारियों के वेतन भुगतान में यदि देरी होती है, तो इससे उनके मनोबल पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि इन कर्मचारियों के वेतन भुगतान में किसी भी स्तर पर विलंब न हो। पे-प्रोटेक्शन आदेश शीघ्र करें जारी उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने मेडिकल कॉलेजों में कार्यरत चिकित्सकों को देय एनपीए (नॉन प्रैक्टिसिंग अलाउंस) के भुगतान में आ रही तकनीकी समस्याओं को शीघ्र सुलझाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इस संबंध में सभी बाधाओं को प्राथमिकता से दूर कर समय से भुगतान किया जाए। उन्होंने मेडिकल कॉलेजों के अधिष्ठाताओं के वेतन संरक्षण (पे-प्रोटेक्शन) से जुड़े निर्णय, जिन्हें कैबिनेट से मंजूरी प्राप्त है, के विभागीय आदेश शीघ्र जारी करने के निर्देश दिए।  

भारत को शक्ति संपन्न बनने के लिए ज्ञान, आध्यात्म, शास्त्र एवं शस्त्र सभी विधाओं की आवश्यकता है:मुख्यमंत्री

एकात्म पर्व का हुआ समापन ओंकारेश्वर माँ नर्मदा के पावन तट पर स्थित ओंकारेश्वर आज एक दिव्य और आध्यात्मिक  समागम का साक्षी बना। आचार्य शंकर सांस्कृतिक एकता न्यास, संस्कृति विभाग मप्र शासन द्वारा एकात्म धाम, ओंकारेश्वर में आदि शंकराचार्य के प्रकटोत्सव पर पंच दिवसीय ‘एकात्म पर्व‘ कार्यक्रम का समापन शुक्रवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मुख्य आतिथ्य एवं जूनापीठाधीश्वर आचार्य महामण्डलेश्वर स्वामी अवधेशानन्द गिरि की अध्यक्षता में संपन्न हुआ। इस अवसर पर महर्षि संदीपनी वेद विद्या पीठ द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के साथ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का स्वागत किया गया। उन्होंने एकात्म धाम की यज्ञशाला के पवित्र यज्ञ में आहुति दी। इस दौरान उन्होंने यज्ञशाला की परिक्रमा कर प्रदेशवासियों की सुख, समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आदि शंकराचार्य की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन एवं पुष्पांजलि अर्पित कर किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ओंकारेश्वर स्थित एकात्म धाम में संबोधित करते हुए कहा कि ओंकार पर्वत पर स्थापित आदि गुरु शंकराचार्य की 108 फीट ऊंची प्रतिमा व आदि गुरु शंकराचार्य की दीक्षा स्थली को प्रदेश सरकार एकात्म धाम के रूप में विकसित कर रही है। उन्होंने एकात्म धाम को चरणबद्ध तरीके से पूर्ण करने के बात कही। उन्होंने कहा कि आदि गुरु शंकराचार्य ने अपने जीवन काल में अनेक महान कार्य किए। उन्होंने कहा कि आदि गुरु शंकराचार्य की चेतना शास्त्र परंपरा से हमारा परिचय कराती है। भारत को शक्ति संपन्न बनने के लिए ज्ञान, आध्यात्म, शास्त्र एवं शस्त्र सभी विधाओं की आवश्यकता है। हमारे संतों एवं संन्यासियों ने धर्म की स्थापना के लिए अपने प्राण न्योछावर किए। शस्त्र के साथ शास्त्र की परंपरा का अद्भुत तालमेल किया है। सरकार ने धार्मिक नगरों में शराब बंदी की शुरुआत की है एवं सरकार दुग्ध उत्पादन को कामधेनु योजना के माध्यम से बढ़ावा दे रही है। सरकार सांस्कृतिक पर्वों एवं त्योहारों को समाज के साथ समारोहपूर्वक मनाएगी। बताया कि सम्पूर्ण प्रदेश में सभी नगरीय निकायों में गीता भवन बनाये जा रहे हैं। अध्यक्षीय प्रबोधन देते हुए स्वामी अवधेशानंद गिरि ने कहा कि आद्य जगद्गुरु शंकराचार्य ने अद्वैत वेदान्त द्वारा आत्मा और ब्रह्म की एकता का उद्घोष करते हुए उपनिषद, गीता और ब्रह्मसूत्र पर भाष्य रचे तथा चार मठों की स्थाIपना से भारत को सांस्कृतिक एकता के सूत्र में बाँधा। उनका दर्शन व्यक्ति की मुक्ति और समाज की एकता का मार्ग प्रशस्त करता है। अद्वैत दर्शन ईश्वरीय दर्शन है, पूरे विश्व को शान्ति-समाधान और एकात्मकता प्रदान करने की सामर्थ्य अद्वैत दर्शन में है, जो सारे भेद, विभिन्नता का भंजन कर एकत्व प्रदान करता है। गौरांग दास प्रभु (इस्कॉन) ने कहा “आज विश्व विरोधाभासों और मानसिक तनाव से जूझ रहा है। ऐसे समय में एकात्म का विचार ही संयम, समरसता और संतुलन का समाधान प्रस्तुत करता है। जब विचार उत्कृष्ट होंगे, तभी विकार मुक्त होंगे और विवेक जागृत होगा।”  स्वामी प्रणव चैतन्य पुरी ने कहा, “आचार्य शंकर केवल ज्ञानी ही नहीं, परम भक्त भी थे। उन्होंने जगन्नाथ अष्टकम्, नर्मदा स्तोत्र, गंगा स्तोत्र जैसे स्तोत्रों की रचना कर भक्ति व उपासना को जीवंत रखा। एकात्मधाम प्रकल्प उनके चार मठों के तुल्य है।”   स्वामी विदितात्मानंद सरस्वती ने स्पष्ट किया कि “समस्त समस्याओं की जड़ भेदभाव है और उसका समाधान अद्वैत वेदांत में निहित है।” आचार्य मिथिलेशनंदिनी शरण, अयोध्या ने कहा, “यह संसार हमसे अलग नहीं, हमारा ही विस्तार है। आचार्य शंकर का अवदान किसी मत तक सीमित नहीं। उन्होंने बिना भेद किए समस्त जनों का मार्गदर्शन किया, उनका आचार्यत्व मातृत्व के तुल्य है।”  प्रो. वी. कुटुंब शास्त्री ने कहा, “मध्यप्रदेश शासन द्वारा अद्वैत वेदांत को जनमानस तक पहुँचाने का यह प्रयास अद्वितीय है। वर्ष 2017 में आरंभ हुई एकात्म यात्रा आज सशक्त आंदोलन बन चुकी है। यह कार्य तोटकाचार्य के मार्गदर्शन के अनुरूप है।” स्वामी परमानंद गिरि ने कहा कि मध्यप्रदेश केवल भारत का नहीं, अब पूरे विश्व का केन्द्र बिंदु बन रहा है। शंकरदूतों का दायित्व केवल प्रचार का नहीं, बल्कि समर्पण का भी है। शाम को भव्य शोभायात्रा एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम समारोह की संध्या में ओंकारेश्वर नगर में आदि शंकराचार्य की पालकी पारंपरिक वाद्य यंत्रों और ‘शिवोहम’ घोष के साथ निकली। शोभायात्रा ज्योतिर्लिंग मंदिर से होते हुए अभय घाट पर समाप्त हुई, जहाँ माँ नर्मदा की आरती तथा नर्मदाष्टकम् का सस्वर पाठ हुआ। कार्यक्रम में भरतनाट्यम् नृत्यांगना लता सिंह मुंशी और कर्नाटक संगीत गायिका सुधा रघुरामन द्वारा सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ दी गईं। समापन पर आचार्य शंकर सांस्कृतिक एकता न्यास द्वारा एकात्मधाम के भावी चरणों — अद्वैत लोक, अन्तर्राष्ट्रीय अद्वैत वेदांत संस्थान आदि की योजनाओं की जानकारी दी गई। यह आयोजन केवल एक पर्व नहीं बल्कि वैश्विक वैचारिक पुनर्जागरण की शुरुआत है, जिसकी प्रेरणा अद्वैत वेदांत और आचार्य शंकर के विचारों से प्राप्त हुई है। एकात्म पर्व के समापन पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पूज्य संतों का स्वागत किया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पूज्य संतों के साथ “एकात्म धाम : एकात्मता की यात्रा’’ पुस्तक का विमोचन किया। साथ ही अद्वैत वेदांत के प्रचार प्रसार हेतु स्वामी विदितात्मानंद सरस्वती, अमेरिका एवं प्रो. व्ही कुटुम्ब शास्त्री, चैन्नई को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में अद्वैत जागरण युवा शिविर पर केन्द्रित फिल्म का प्रदर्शन किया गया। कार्यक्रम में पूज्य स्वामी अवधेशानन्द गिरि जी द्वारा एकात्मता का संकल्प कराया गया। कार्यक्रम में शुभम चौहान द्वारा अद्वैत जागरण युवा शिविर पर परिचय दिया गया। देश-विदेश के 500 युवाओं का नर्मदा तट पर हुआ दीक्षा संस्कार एकात्मता का लिया संकल्प ओंकारेश्वर के पावन नर्मदा तट पर चल रहे एकात्म पर्व के 5वें दिन प्रातः 6 बजे से जूना अखाड़ा के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि की उपस्थिति में नर्मदा तट  पर लगभग देश विदेश के लगभग 500 युवाओं का शंकरदूतों के रूप में  दीक्षा संस्कार संपन्न हुआ। IIT, IIM, MBBS जैसे विषयों में ग्रेजुएट तथा इसके साथ ही यंग प्रोफेशनल्स, सेना के जवान, राष्ट्रीय -अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी, कलाकार, शोधार्थी सम्मिलित है।  यह युवा शंकरदूत के रूप में अब एकात्म बोध के जागरण एवं अद्वैत वेदांत के प्रचार हेतु संकल्पबद्ध होंगे। मध्यप्रदेश शासन द्वारा एकात्म धाम के उन्नयन का कार्य चार चरणों में किया जा रहा है, जिसमें प्रथम चरण में आदि शंकराचार्य की मूर्ति की स्थापना की गई है, द्वितीय चरण में आचार्य शंकर के जीवन दर्शन पर आधारित संग्रहालय, अद्वैतलोक हेतु अतिशीघ्र निविदा जारी की जा रही है। इसमें उनके जीवन … Read more

मुख्यमंत्री ने उपयंत्री मनोज पटेल को सीएम हेल्पलाइन प्रकरणों के शत-प्रतिशत निराकरण के लिए बधाई दी

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि नागरिकों की सुविधा के लिए प्रारंभ किए गए प्लेटफार्म निरंतर उपयोगी रहें इसके लिए इनके संचालन और प्रबंधन से जुड़े सभी अधिकारियों का सजग सक्रिय रहना आवश्यक है। सीएम हेल्पलाइन एक ऐसा माध्यम है, जिससे नागरिकों की लंबित समस्याओं का समाधान संभव होता है। इसे प्रभावी बनाने के लिए सक्रिय भूमिका निभाने वाले अधिकारी-कर्मचारी बधाई के पात्र हैं। दो यंत्रियों को‍मिली मुख्यमंत्री की बधाई मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आज समत्व भवन (मुख्यमंत्री निवास) से वीडियो कॉन्फ्रेंस द्वारा जबलपुर के नगरीय विकास और आवास विभाग के उपयंत्री मनोज पटेल को सीएम हेल्पलाइन प्रकरणों के शत-प्रतिशत निराकरण के लिए बधाई दी। इसी तरह सीहोर जिले में पदस्थ ऊर्जा विभाग के सहायक यंत्री रवि चौहान को सीएम हेल्पलाइन के 98.57 प्रतिशत प्रकरणों के निराकरण के लिए मुख्यमंत्री डॉ. यादव की बधाई मिली। विभागों में ऊर्जा और जिलों में रायसेन, सीहोर, कटनी, सागर, सिंगरौली की हुई प्रशंसा मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सीएम हेल्पलाइन के प्रकरणों को गंभीरतापूर्वक लेते हुए उनके निराकरण के लिए किए गए कार्य में प्रथम आए ऊर्जा विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों को बधाई दी। प्रदेश के‍जिन जिलों का प्रदर्शन उत्कृष्ट रहा है, उनमें रायसेन, सीहोर, कटनी, सागर और सिंगरौली के नाम शामिल हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इन जिलों के कलेक्टर्स और उनकी टीम को श्रेष्ठ कार्य की प्रशंसा करते हुए बधाई दी। जबलपुर में लैंड रिकार्ड के नवाचार की प्रशंसा मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वे गुरूवार को जबलपुर में राजस्व अभिलेखागार के शुभारंभ में गए थे, जहां बरसों पुराने लैंड रिकार्ड को प्लास्टिक बैग में सुरक्षित करने, उनकी हार्डकॉपी और सॉफ्ट कॉपी की व्यवस्था करने का कार्य किया गया है। समस्त रिकार्ड का लोकेशन निर्धारित कर यह जानने की ऑनलाईन व्यवस्था की गई है कि दस्तावेज किस जगह संधारित किया गया है। यह नवाचार प्रशंसनीय है और अन्य जिलों के लिए प्रेरणा का कारण भी बन सकता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के आग्रह पर कलेक्टर जबलपुर दीपक सक्सेना को इस नवाचार की जानकारी वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से प्रदेश के सभी जिलों को प्रदान की।  

माढ़ोताल सबस्टेशन में एम.पी. ट्रांसको ने किए दो नए सर्किटों का ऊर्जीकरण : ऊर्जा मंत्री तोमर

भोपाल ऊर्जा मंत्री श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने जानकारी दी है कि मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी (एम.पी. ट्रांसको) ने जबलपुर शहर और ग्रामीण क्षेत्र की पारेषण प्रणाली को और अधिक सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। कंपनी ने माढ़ोताल (रिमझा) स्थित 132 के.व्ही. सबस्टेशन में दो नए 132 के.व्ही. सर्किटों का निर्माण कर उन्हें सफलतापूर्वक ऊर्जीकृत किया है। इससे पहले इस सबस्टेशन में दो 132 के.व्ही. सर्किट पहले से ही क्रियाशील थे। अब यहां कुल चार सर्किट उपलब्ध हो गए हैं। 235 लाख रुपये की लागत से हुआ कार्यान्वयन ऊर्जा मंत्री श्री तोमर ने बताया कि इस परियोजना के तहत लगभग 235 लाख रुपये की लागत से डबल सर्किट डबल स्ट्रिंगिंग ट्रांसमिशन टावर और सबस्टेशन में दो नए सर्किटों का निर्माण कर उन्हें ऊर्जीकृत किया गया है। इस उन्नयन से जबलपुर शहर की विद्युत आपूर्ति पहले से अधिक लचीली और विश्वसनीय हो गई है। उन्होंने इस सफलता के लिए एम.पी. ट्रांसको के समस्त कार्मिकों को बधाई दी है। अब चार सर्किटों से होगी माढ़ोताल सबस्टेशन को आपूर्ति एम.पी. ट्रांसको के मुख्य अभियंता श्री अमर कीर्ति सक्सेना ने बताया कि नई व्यवस्था के अंतर्गत अब माढ़ोताल सबस्टेशन को जबलपुर एवं पनागर स्थित 220 के.व्ही. सबस्टेशनों से डबल सर्किट के माध्यम से कुल चार 132 के.व्ही. सर्किटों से विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी। इससे किसी एक फीडर के रखरखाव या तकनीकी बाधा के दौरान भी माढ़ोताल की विद्युत व्यवस्था पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। इन क्षेत्रों को मिलेगा फायदा इस परियोजना के पूर्ण होने से माढ़ोताल, जे.पी. नगर, लेमा गार्डन, कठौंदा, रामेश्वरम सहित ग्रामीण क्षेत्रों के कटंगा और सिहोरा जैसे इलाकों के उपभोक्ताओं को बेहतर और निर्बाध विद्युत आपूर्ति का लाभ मिलेगा।  

राज्य सरकार ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के प्रथम त्रैमास तक के लिए ब्याज दर का निर्धारण कर दिया

भोपाल मध्य प्रदेश के कर्मचारियों के लिए राहत भरी खबर है। 5 फीसदी महंगाई भत्ता वृद्धि और नई तबादला नीति के बाद अब मोहन सरकार ने एक और बड़ा फैसला किया है।राज्य सरकार ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के प्रथम त्रैमास (अप्रैल से जून) तक के लिए ब्याज दर का निर्धारण कर दिया है। इसके तहत कर्मचारियों की उनकी जमा राशि पर 7.1 प्रतिशत की दर से ब्याज मिलेगा।वित्त विभाग ने एक जनवरी से 31 मार्च 2025 तक के लिए ब्याज की दर निर्धारित कर दी है।यह कर्मचारियों की विभिन्न जमा निधियों पर लागू होगी।राहत की बात ये है कि पिछले वर्ष भी यही दर थी, यानि इस बार दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इन निधियों पर मिलेगा ब्याज     दरअसल, सामान्य भविष्य निधि, अंशदायी भविष्य निधि, पटवारी विशेष भविष्य निधि, मध्य भारत जीवन बीमा निधि, विभागीय भविष्य निधि, मध्य प्रदेश शासकीय सेवक कर्मचारी बीमा-सह-बच सत योजना में जमा होने वाली राशि पर ब्याज मिलता है है।     प्रति तीन माह में इसकी दर निर्धारित की जाती है। इस बार जनवरी से मार्च 2025 तक के लिए यह दर 7.1 प्रतिशत रखी गई है। अब अप्रैल से जून 2025 तक इन निधियों पर ब्याज दर 7.1 प्रतिशत रहेगी। पिछले त्रैमास में भी इसी दर से ब्याज अदायगी की गई थी।

मुख्यमंत्री कन्या विवाह-निकाह योजना में अब न्यूनतम 11 और अधिकतम 200 जोड़ों की शादी हो सकेगी, संशोधन 15 मई से लागू होंगे

भोपाल  मध्य प्रदेश की डॉ मोहन यादव की सरकार ने मुख्यमंत्री कन्या विवाह-निकाह योजना में संशोधन किया है। अब सालभर में सिर्फ चार दिन ही सामूहिक विवाह होगा। वहीं इस स्कीम के तहत अब न्यूनतम 11 और अधिकतम 200 जोड़ों की शादी हो सकेगी। यह संशोधन 15 मई से लागू होंगे। प्रदेश सरकार ने मुख्यमंत्री कन्या विवाह/निकाह योजना में संशोधन किया है। नये संशोधन में इस योजना के लिये चार तिथियां बसंत पंचमी, अक्षय तृतीया और तुलसी विवाह (देवउठनी ग्यारस), एक अन्य तिथि विभाग के अनुसार निर्धारित की जाएगी। योजना के अंतर्गत अब सामूहिक विवाह सालभर में चार बार इन्हीं तिथियों में आयोजित होंगे। शासन ने योजना के प्रभावी क्रियान्वयन और मॉनिटरिंग की दृष्टि से तिथियों का निर्धारण किया है। साथ ही सामूहिक विवाह समारोह में जोड़ों की न्यूनतम संख्या 11 और अधिकतम 200 निर्धारित की गई है। योजना का लाभ लेने के लिए बाकी की शर्तें पहले की ही तरह है। आपको बता दें कि डॉ मोहन यादव की सरकार मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के तहत 49 हजार रुपये सीधे वधु के खाते में ट्रांसफर किये जाते हैं और 6 हजार रुपये की राशि आयोजनकर्ताओं को व्यवस्थाओं के लिए दिया जाता है।  

डिंडौरी में बॉक्साइट खनन को लेकर बैगा आदिवासी ग्रामीणों में उबाल, पंचायत ने खनन निरस्तीकरण का प्रस्ताव पारित किया

डिंडौरी मध्य प्रदेश के डिंडौरी जिले अंतर्गत ग्राम पंचायत पिपरिया माल में बॉक्साइट खदान (bauxite mining) को लेकर विरोध के स्वर मुखर होने लगे हैं। खनन कार्य पर ग्राम पंचायत ने अभिमत देते हुए आपत्ति कलेक्टर (खनिज शाखा) को सौंप दिया है। ग्राम पंचायत के माध्यम से दर्ज कराई गई आपत्ति में लगभग एक सैकड़ा ग्रामवासियों के दस्तखत और अंगूठा निशान हैं। निजी कारोबारी हड़प रहे जमीन- ग्रामीण केंद्र सरकार की तरफ कराए गए सर्वे में यहां बॉक्साइट सहित अन्य खनिजों की उपलब्धता की जानकारी आई थी, लेकिन यहां ब्लॉक की नीलामी नहीं की गई। जानकारी के बाद निजी खनन कारोबारी सक्रिय हो गए और गांव की जमीनों की खरीद फरोत बड़े पैमाने पर शुरू कर दी है। ग्राम पंचायत के आदिवासी परिवारों ने धोखाधड़ी कर कम कीमत पर और फर्जी तरीके से जमीन खरीदे जाने का आरोप लगाते हुए कलेक्टर से शिकायत की थी। खनिज कारोबारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग भूमि खरीद में गड़बड़ियों की जांच करने और खनिज कारोबारियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की गई थी। इसे लेकर अब तक प्रशासन की तरफ से की गई कार्रवाई को सार्वजनिक नहीं किया गया। ग्राम पंचायत पिपरिया माल ने खनिज शाखा से 15 अप्रैल को जारी पत्र के संदर्भ में अभिमत देते हुए 26 अप्रैल को बॉक्साइट ब्लॉक पिपरिया (ईस्ट ब्लॉक) के खनन पर आपत्ति जताई है। 700 एकड़ से ज्यादा भूमि की खरीदी खनिज विभाग को दिए गए अभिमत में कहा गया है कि ग्राम पंचायत पिपरिया माल अंर्तगत 700 एकड़ से ज्यादा भूमि की खरीदी हुई है। ग्रामीणों का आरोप है कि 5 प्रतिशत लोगों को ही अपनी भूमि बेचने की सही जानकारी है, जबकि 95 प्रतिशत भूमिस्वामी को गलत जानकारी देकर रजिस्ट्री कराई गई है। बैगा आदिवासी अशिक्षित है, उन्हें भूमि के मूल्य के संबंध में कोई जानकारी नहीं है। अधिकांश बैगा आदिवासियों को उनके खाते में पैसा जमा कराया जाएगा कह कर उन्हें रजिस्ट्रार कार्यालय ले जाकर भूमि की रजिस्ट्री करा ली गई है। जानकारी के अनुसार किसानों को औने पौने दाम देकर बेसकीमती भूमि की रजिस्ट्री कराने के आरोप लगाए गए हैं। निरस्त करने प्रस्ताव हुआ था पारित 11 अप्रैल 2025 को ग्राम में विशेष ग्रामसभा आयोजित हुई थी, जिसमें सर्वसमति से बॉक्साइट परियोजना को निरस्त करने प्रस्ताव पारित किया गया है। पिपरिया माल ग्राम पंचायत सीमा क्षेत्र व सीमावर्ती पड़ोसी ग्रामों में बॉक्साइट खनन से जल, जंगल, जमीन और जनजाति जन समुदाय को हानि हुई है। खनन प्रक्रिया से आस-पास का पर्यावरण जीव जंतु जैव विविधता खेती, जड़ी बूटी नष्ट होगीं। बैगा जनजाति की पंरपरा, रीति रिवाज संस्कृति में भी प्रभाव पड़ेगा। ग्राम पंचायत पिपरिया माल इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए बॉक्साइट खनन निरस्त करने प्रस्ताव पारित किया है। इसकी जानकारी ग्राम पंचायत ने फागूलाल अध्यक्ष पेसा ऐक्ट समिति पिपरिया, अनुविभागीय अधिकारी राजस्व, क्षेत्रीय प्रमुख, संचालनालय भौमिकी तथा खनिकर्म क्षेत्रीय कार्यालय जबलपुर को भी प्रेषित की है। अवैध तरीके से क्रय की जा रही भूमि बताया जा रहा है कि ग्राम पंचायत पिपरिया माल में 2015 से अवैध तरीक से बैगाओं की भूमि क्रय की जा रही है, जिसमें स्थानीय बजाग के बिचौलियों एवं पटवारी से लेकर भूमि पंजीयक तक सभी ने भूमि रजिस्ट्री में बैगा आदिवासियों को गलत जानकारी देकर अधिकांश रजिस्ट्री की है। भूमि स्वामी विशेष अनुसूचित जनजाति बैगा समुदाय के हैं। साथ ही भूमि पंजीयन में ग्रामसभा का अभिमत भी नहीं लिया गया।

हजारों वर्ष पुराने मुड़िया बौद्ध मठ के रास्ते से अतिक्रमण हटाने के HC ने कलेक्टर को दिए निर्देश

जबलपुर जबलपुर के गोपालपुर के पास स्थित मौर्यकालीन प्राचीन बौद्ध मठ के पहुंच मार्ग से अतिक्रमण हटाने के लिए हाईकोर्ट ने जबलपुर कलेक्टर को अंतरिम आदेश जारी किए हैं। चीफ जस्टिस सुरेश कुमार कैत और जस्टिस विवेक जैन की युगलपीठ ने यह आदेश उस जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए, जिसमें मठ से जुड़े रास्ते पर अतिक्रमण कर आवाजाही बंद करने की शिकायत की गई थी। याचिका बौद्धिस्ट सोसाइटी ऑफ इंडिया के रीजनल हेड सुखलाल वर्मा और अखिल भारतीय कुशवाहा महासभा के प्रदेश अध्यक्ष दादा बैजनाथ कुशवाहा की ओर से दायर की गई थी। इसमें कहा गया है कि लम्हेटा घाट स्थित मुड़िया बौद्ध मठ हजारों वर्ष पुराना मौर्यकालीन बौद्ध स्थल है। इसके पास की 32 एकड़ शासकीय भूमि पर कथित रूप से भूमाफियाओं ने कब्जा कर लिया है और मठ तक पहुंचने का मार्ग अवरुद्ध कर दिया है। याचिका में उल्लेख किया गया कि 27 जनवरी 2021 को तत्कालीन कलेक्टर कर्मवीर शर्मा ने मप्र टूरिज्म बोर्ड को पत्र भेजकर मठ के विकास के लिए बजट स्वीकृति का अनुरोध किया था। इससे पहले 15 जून 2012 को म.प्र. शासन के पुरातत्व अभिलेखागार एवं संग्रहालय विभाग ने इस स्थल को प्राचीन स्मारक घोषित करने की अधिसूचना जारी की थी। 1 अप्रैल 2015 को इस स्थल को अंतिम रूप से संरक्षित स्मारक घोषित करने का अनुरोध भी संस्कृति विभाग को भेजा गया, लेकिन अब तक शासन स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। अतिक्रमण के खिलाफ स्थानीय स्तर पर पत्राचार और धरना-प्रदर्शन भी हुए, लेकिन जब कार्रवाई नहीं हुई, तो यह याचिका दाखिल की गई। याचिका में मप्र शासन के प्रमुख सचिव (राजस्व), प्रमुख सचिव (पुरातत्व), प्रमुख सचिव (धार्मिक न्यास), सचिव (पर्यटन एवं संस्कृति विभाग), कलेक्टर जबलपुर, एसडीओ (राजस्व), तहसीलदार, नगर निगम अधिकारी भेड़ाघाट और निजी पक्षों रीता सेंगर, गुंजन नंदा, सोनिया नारंग व आरडीएम केयर इंडिया प्रा. लि. के मैनेजिंग डायरेक्टर अंगददीप सिंह नारंग को अनावेदक बनाया गया है।  

केंद्र सरकार मप्र को 44255.33 करोड़ रुपए देगी और 24263.71 करोड़ रुपए राज्य सरकार के अंश के शामिल होंगे

 भोपाल मध्यप्रदेश में केंद्रीय योजनाओं के संचालन के लिए बड़ी राशि मिलने वाली है। इसी कड़ी में केंद्रीय योजनाओं के संचालन के पीएम मोदी (PM MODI) ने एमपी (MP) के लिए पिटारा खोला है। पीएम ने कुल 68519.05 करोड़ रुपए खर्च का फैसला किया है। केंद्र सरकार 44255.33 करोड़ रुपए देगी और 24263.71 करोड़ रुपए राज्य सरकार के अंश के शामिल होंगे। मोदी सरकार ने डॉ मोहन सरकार को 28 अप्रैल तक की स्थिति में 283.46 करोड़ रुपए दे भी दिए है। मप्र कृषि और ग्रामीण विकास विभाग को पिछले बजट से अधिक राशि, पिछले वित्त वर्ष में ग्रामीण विकास विभाग के लिए 8561.16 करोड़ रुपए मिले थे, इस साल 9819.34 करोड़ रुपए का प्रावधान है। कृषि विकास विभाग में पिछले साल 237.36 करोड़ रुपए का प्रावधान था, इस वित्त वर्ष में 1005.46 करोड़ रुपए देने का फैसला लिया गया है। महिला एवं बाल विकास विभाग को पिछले वित्त वर्ष में 1541 करोड़ रुपए का प्रावधान था। इस वित्त वर्ष में 4448.40 करोड़ का प्रावधान रखा गया है। पिछले वित्त वर्ष में 4400 करोड़ के प्रावधान के बावजूद प्रदेश को जल जीवन मिशन में राशि आवंटित नहीं की गई, इस वित्त वर्ष में 8561.22 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। पिछले एक महीने में केंद्र सरकार ने मोहन सरकार को 283 करोड़ रुपए दिए हैं , इसमें लोक निर्माण विभाग, किसान कल्याण और कृषि विकास विभाग को 39.14 करोड़ रुपए मिला है, जबकि वित्त विभाग को भी 217.07 करोड़ रुपए मिला है. जिसका खर्च किया जाना है. बता दें कि 2024-25 में मोदी सरकार ने केंद्रीय बजट में मोहन सरकार को 37652 करोड़ रुपए देने का प्रावधान किया था, लेकिन इसमें 16155 करोड़ कम मिले थे, प्रदेश को केवल 21497 करोड़ रुपए ही मिले थे. इन विभागों को मिलेगा सबसे ज्यादा फंड इस पैसे में सभी विभागों को फंड मिलेगा, लेकिन ग्रामीण विकास विभाग, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग, स्वास्थ्य विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग और स्कूल शिक्षा विभाग को सबसे ज्यादा फंड दिया जाएगा. इसके अलावा भी दूसरे सभी विभागों को फंड मिलेगा. लेकिन चार विभाग ऐसे हैं जिनके हिस्से में ज्यादा कुछ नहीं आने वाला है. इनमें पर्यटन संस्कृति विभाग, वित्त विभाग और भोपाल गैस त्रासदी विभाग शामिल है. 

MP कैडर के 53 IAS अफसरों को एक महीने की ट्रेनिंग के लिए मसूरी बुलाया, नए अफसरों की एंट्री सीएमओ

भोपाल  मध्यप्रदेश कैडर के 53 आईएएस अफसरों को करीब एक महीने की ट्रेनिंग के लिए मसूरी बुलाया गया है। इन अफसरों को जून से जुलाई तक मिड करियर ट्रेनिंग के लिए लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी मसूरी जाना होगा। खास बात यह है कि सूची में शामिल दो अफसर मुख्यमंत्री के सचिव सीबी चक्रवर्ती एम और डॉ. इलैया राजा टी हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय में दो पद खाली हो जाएगा तो इसके बदले में नए अफसर आमद दे सकते हैं। चार जिलों के कलेक्टर भी शामिल इसके अलावा 4 जिलों भोपाल, इंदौर, ग्वालियर समेत चार जिलों के कलेक्टर भी शामिल हैं। यह सभी 53 अफसर सचिव, अपर सचिव स्तर के हैं। हालांकि कई अफसरों ने अपनी ट्रेनिंग रद्द करवाने के लिए जुगाड़ लगाना शुरू कर दिया है। आपको बता दें कि वर्किंग एफिशिएंसी में सुधार के लिए यह ट्रेनिंग आवश्यक होती है। इन अधिकारियों को 16 जून से 11 जुलाई तक होने वाले एमसीटीपी के चौथे चरण की ट्रेनिंग के लिए सूचित किया गया है। इन अफसरों के नाम शामिल लोकेश कुमार जाटव, धनंजय सिंह भदोरिया, स्वतंत्र कुमार सिंह, शशांक मिश्रा, स्वाति मीणा नायक, आईरिन सिंथिया जेपी, विकास नरवाल, भरत यादव, सीबी चक्रवर्ती, वी. किरण गोपाल, नंदकुमारम, शिल्पा गुप्ता, सूफिया फारूकी वली, अजय गुप्ता, अविनाश लवानिया, प्रियंका दास, अभिषेक सिंह, प्रीति मैथिल, ईलैया राजा टी., तेजस्वी नायक, अमित तोमर, श्रीकांत बनोठ, मुजीर्बुर रहमान, अनय द्विवेदी, तन्वी सुंदरियाल बहुगुणा, तरुण राठी, गणेश शंकर मिश्रा, अभिजीत अग्रवाल, कर्मवीर शर्मा, कौशलेंद्र विक्रम सिंह, अनुराग चौधरी, भास्कर लक्षकार, आशीष सिंह, शण्मुगा प्रिय मिश्रा, वीरेंद्र कुमार, दिनेश जैन, गिरीश शर्मा, शिवराज सिंह वर्मा, उमाशंकर भार्गव, प्रीति जैन, उषा परमार, सरिता बाला, ओम प्रजापति, चंद्र मौली शुक्ला, मनोज पुष्य, वीएस चौधरी कोलसानी, रुचिका चौहान, सौरव कुमार सुमन, विजय कुमार जे., हरजिंदर सिंह, नेहा मराव्या, बी. विजय दत्ता, अनुगृह पी और मोहित बुंदस।

एम्स भोपाल मुंह के कैंसर की पहचान के लिए बना रहा ऐप, तंबाकू छोड़ने के लिए भी लोगों को प्रेरित करेगा

भोपाल  मध्य प्रदेश में मुंह के कैंसर की पहचान अब आसान होगी। एम्स भोपाल एक मोबाइल ऐप बना रहा है। यह ऐप कुछ ही मिनटों में कैंसर की जांच कर लेगा। मध्य प्रदेश काउंसिल ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी यानि एमपीसीएसटी ने इस काम के लिए लाखों रुपए की सहायता भी दी है। यह ऐप लोगों को तंबाकू छोड़ने के लिए भी अपील करता हुआ नजर आएगा। एम्स भोपाल के डायरेक्टर डॉक्टर अजय सिंह का इसे लेकर कहना है कि यह ऐप तकनीक के माध्यम से लोगों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाएगा। यह रिसर्च 24 महीनों तक चलेगी। एम्स भोपाल के डॉक्टर अंशुल राय इस प्रोजेक्ट को लीड कर रहे हैं। वे ओरल एंड मैक्सिलोफेशियल सर्जरी विभाग में प्रोफेसर हैं। कई विभागों के डॉक्टर शामिल इस रिसर्च में कई और विभागों के डॉक्टर भी शामिल हैं। जैसे कि रेडिएशन ऑन्कोलॉजी, पैथोलॉजी और सामुदायिक चिकित्सा विभाग के विशेषज्ञ। यह ऐप कैंसर के लक्षणों को पहचानेगा। साथ ही, यह लोगों को तंबाकू, सुपारी और धूम्रपान के नुकसान बताएगा। इससे लोग इन्हें छोड़ने के लिए प्रेरित होंगे। प्रोजेक्ट के लिए लाखों की मदद एमपीसीएसटी ने इस प्रोजेक्ट के लिए 7.4 लाख रुपए दिए हैं। पहली किस्त के रूप में 3.7 लाख रुपए मिल चुके हैं। इस ऐप से मुंह के कैंसर की शुरुआती पहचान जल्दी हो सकेगी। इससे लोगों को समय पर इलाज मिल पाएगा। और उनकी जान बच सकेगी। यह ऐप एक बहुत ही उपयोगी साबित हो सकता है। खासकर उन लोगों के लिए जो गांवों में रहते हैं और जिनके पास डॉक्टर तक पहुंचने के लिए साधन नहीं हैं। शोध के लिए लिए मिली मंजूरी, 7.4 लाख स्वीकृत एम्स भोपाल के कार्यपालक निदेशक डॉ. अजय सिंह ने बताया कि “ओरल कैंसर और अन्य प्री-मेलिग्मेंट (पूर्व-कैंसर) स्थितियों की पहचान के लिए एक मोबाइल ऐप के माध्यम से स्क्रीनिंग के लिए एक अभिनव अनुसंधान परियोजना प्रारंभ की है. इसके लिए एमपी काउंसिल ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी ने दो साल के रिसर्च प्रोजेक्ट को मंजूरी दी है. इस दो वर्षीय अनुसंधान परियोजना के लिए कुल 7.4 लाख की राशि स्वीकृत की गई है, जिसमें से पहले साल के लिए 3.7 लाख रुपये की पहली किस्त जारी की जा चुकी है. जबकि बची हुई राशि दूसरी किश्त में प्रदान की जाएगी.” इस तरह मोबाइल एप से होगी कैंसर की स्क्रीनिंग एम्स के डाक्टरों ने बताया कि यह मोबाइल ऐप ओरल कैंसर, मुंह खोलने में रुकावट की बीमारी और अन्य गंभीर मुख स्थितियों की स्क्रीनिंग करने में मदद करेगा. यह एप कुछ ही मिनटों में परिणाम देगा और सभी रोगियों की जानकारी पूर्ण रूप से गोपनीय रखेगा. बता दें कि इस रिसर्च का नेतृत्व एम्स भोपाल के ओरल एंड मैक्सिलोफेशियल सर्जरी विभाग के डॉ. अंशुल राय करेंगे. उनके साथ को-प्रोजेक्ट इन्वेस्टिगेटर के रूप में डॉ. सैकत दास (रेडिएशन ऑन्कोलॉजी), प्रो. अभिनव सिंह, डॉ. दीप्ति जोशी (पैथोलॉजी) और डॉ. अंकुर जोशी (कम्युनिटी एंड फैमिली मेडिसिन) शामिल हैं. जूनियर रिसर्च फेला को मिलेंगे 4 लाख 70 हजार डॉ. अंशुल राय ने बताया कि “रिसर्च के लिए स्वीकृत राशि में से दो साल के लिए जूनियर रिसर्च फेलो की सैलरी 4 लाख 80 हजार रुपए तय की गई है. कंज्यूमेबल्स पर 60 हजार रुपए, यात्रा व्यय पर 1 लाख रुपए और पब्लिकेशन व प्रिंटिंग पर 1 लाख रुपए खर्च किए जाएंगे. बता दें कि यह रिसर्च मोबाइल ऐप के जरिए बड़ी आबादी में मुंह से जुड़ी गंभीर बीमारियों की पहचान और इलाज की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है. डॉ. अंशुल राय ने जानकारी दी कि इस मोबाइल ऐप पर वे गत एक वर्ष से कार्य कर रहे हैं.”  एक हजार मरीजों पर किया जाएगा शोध एमपी काउंसिल ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी द्वारा कुल 7.5 लाख रुपये की धनराशि इस परियोजना के लिए प्रदान की गई है. आगामी दो वर्षों में यह अनुसंधान 1,000 व्यक्तियों पर किया जाएगा. एक व्यापक रिपोर्ट सरकार को प्रस्तुत की जाएगी. जिससे ओरल कैंसर से संबंधित नीति निर्माण में सहायता मिल सके. यह ऐप उपयोगकर्ताओं को तंबाकू, सुपारी, सिगरेट और बीड़ी जैसे हानिकारक पदार्थों के प्रभावों के बारे में जागरूक करेगा और उन्हें इनका सेवन छोड़ने के लिए प्रेरित करेगा. यह ऐप अपनी तरह का पहला इनोवेशन है, जिसे सरकार ने फंडिंग दी है और यह स्पष्ट तरह से कैंसर होने के कितने चांसेस हैं उसका प्रमाण देगा.

मुरैना में 5 फुटवेयर कंपनियां लगेंगी, होगा 301 करोड़ का निवेश, 1100 से अधिक श्रमिकों को मिलेगा रोजगार

मुरैना मध्य प्रदेश अब फुटवेयर इंडस्ट्री का नया हब बनने जा रहा है! मुरैना के सीतापुर औद्योगिक क्षेत्र में फुटवेयर एंड एक्सेसरीज क्लस्टर के लिए पांच कंपनियों को सरकार ने जमीन आवंटित की है। इन कंपनियों के 301 करोड़ रुपये के निवेश से न सिर्फ इलाके का कायाकल्प होगा, बल्कि 1120 से ज्यादा लोगों को सीधे और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार के मौके मिलेंगे। ये खबर स्थानीय लोगों के लिए किसी बड़े तोहफे से कम नहीं है। पांच कंपनियां, बड़ा निवेश, बंपर नौकरियां सीतापुर में जिन पांच कंपनियों को जमीन दी गई है, वे हैं- बू यांग स्काईकॉर्प प्राइवेट लिमिटेड, कोलेन्स इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड, गुरुकृपा इंटरप्राइजेज, खुराना एंड कंपनी, और अशोका बूट फैक्ट्री। ये कंपनियां मिलकर 301 करोड़ रुपये का निवेश करेंगी। इससे न केवल फुटवेयर और उससे जुड़े प्रोडक्ट्स का उत्पादन बढ़ेगा, बल्कि हजारों युवाओं को नौकरी भी मिलेगी। सरकार का फोकस चंबल संभाग में औद्योगिक विकास को बढ़ावा देना है, और ये कदम उसी दिशा में एक बड़ा धमाका है। 161 एकड़ में बनेगा इंडस्ट्रियल हब मप्र सरकार ने सीतापुर में फुटवेयर क्लस्टर के लिए लगभग 161.30 एकड़ जमीन आरक्षित की है, जिसमें से 75 एकड़ से ज्यादा पर इंडस्ट्रियल भूमि तैयार होगी । करीब 55 एकड़ जमीन पर उद्योग लगाने के लिए जमीनों के आवंटन का काम शुरू हो चुका है। इसके अलावा, 10 प्लग एंड प्ले यूनिट्स भी बनाई जा रही हैं, जहां उद्यमी सिर्फ अपनी मशीनें लगाकर तुरंत प्रोडक्शन शुरू कर सकेंगे। ये सुविधा छोटे और मझोले उद्योगपतियों के लिए गेम-चेंजर साबित होगी। मैन्युफैक्चरिंग यूनिट का बड़ा निवेश , इंदौर में हुई थी शुरुआत  इंदौर ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में कई कंपनियों ने चंबल संभाग में निवेश की इच्छा जताई थी। उसी का नतीजा है कि आज मुरैना में इतना बड़ा प्रोजेक्ट शुरू हो रहा है। इसके अलावा, सीतापुर में अन्य बड़े प्रोजेक्ट्स भी चल रहे हैं। मसलन, दिल्ली की जायक्स कंपनी 150 करोड़ की लागत से एथेनॉल प्लांट बना रही है, सात्विक एग्रो 210 करोड़ के निवेश से सोयाबीन और मक्का से प्रोटीन पाउडर का प्लांट तैयार कर रही है, और मयूर यूनिकोट्स 50 करोड़ के निवेश से वाहनों के सीट कवर्स के लिए केनवास बना रही है। सीतापुर औद्योगिक क्षेत्र में काम करने वाले पुरुष और महिला कर्मचारियों के लिए अलग-अलग हॉस्टल्स भी बनाए जा रहे हैं। इससे न सिर्फ कर्मचारियों को रहने की सुविधा मिलेगी, बल्कि इलाके में काम करने की चाहत रखने वाले लोगों को भी प्रोत्साहन मिलेगा। ये कदम मध्य प्रदेश को औद्योगिक नक्शे पर और मजबूत करेगा। इसे एमपी में औद्योगिक विस्तार के नजरिये से भी देखा जा सकता है। पांचों कंपनियों को मिली जमीन का विवरण     बू यांग स्काईकार्प प्राइवेट लिमिटेड कंपनी को 35.99 एकड़ क्षेत्रफल जमीन आवंटित की गई है। इनके द्वारा 225 करोड़ रुपए का निवेश किया जाएगा तथा 300 लोगों को रोजगार मिलेगा।     कोलेन्स इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड कंपनी को 5.44 एकड़ जमीन आवंटित की गई है। इनके द्वारा 43 करोड़ रुपए का निवेश किया जाएगा तथा इसमें 220 लोगों को रोजगार मिलेगा।     गुरु कृपा इंटरप्राइजेज कंपनी को 9.13 एकड़ जमीन आवंटित की गई है। इसमें 20 करोड़ रुपए का निवेश किया जाएगा तथा 400 लोगों को रोजगार मिलेगा।     खुराना एण्ड कंपनी को 4-15 एकड़ जमीन आवंटित की गई है। इनके द्वारा 10 करोड़ रुपए का निवेश किया जाएगा तथा 100 लोगों को रोजगार मिलेगा।     अशोका बूट फैक्ट्री को 0.72 एकड़ जमीन आवंटित की गई है। इनके द्वारा तीन करोड़ रुपए का निवेश किया जाएगा तथा इसमें 100 लोगों को रोजगार मिलेगा। 75 एकड़ में लगेंगी कंपनियां राज्य की ओर से मुरैना जिला प्रशासन को पत्र लिखकर 75 एकड़ भूमि उपलब्ध कराए जाने के आदेश दिए हैं। इस भूमि में अन्य कंपनियों की यूनिट भी लगाई जाएंगी। प्रदेश सरकार ने फुटवियर तथा ऐसेसिरीज क्लस्टर के विकास के लिए 161.30 एकड़ भूमि देना प्रस्तावित किया है। फिलहाल सरकार ने उपरोक्त में से 55 एकड़ से अधिक क्षेत्रफल पर उद्योगों के लिए भू-खंण्डों के आवंटन के लिए पत्र जारी कर दिया है। सीतापुर औद्योगिक क्षेत्र, मुरैना के एरिया मैनेजर अंकित शर्मा ने कहा कि सीतापुर औद्योगिक क्षेत्र में 10 प्लग एण्ड प्ले यूनिट्स लगाने का भी प्रस्ताव आया है। इनके लिए 10 हजार वर्गफीट क्षेत्रफल का भी निर्माण किया जा सकता है। इसमें उद्योगपति सीधा अपनी मशीनें लगाकर कार्य प्रारंभ कर सकते हैं।  

इनक्यूबेशन सेंटर कम नवाचार सेंटर होगा, यहां पूरी तरह से डिपटेक स्टार्टअप पर काम होगा, अमेजन की तकनीक भी देगी मदद

इंदौर इंदौर में बीतें दिनों आयोजित मध्यप्रदेश टेक ग्रोथ कान्क्लेव 2025 में मुख्यमंत्री डा मोहन यादव ने सिंहासा आइटी पार्क में बनने वाले इनक्यूबेशन सेंटर का औपचारिक भूमिपूजन किया। अब जल्द ही यहां दस हजार वर्गफीट में इनक्यूबेशन सेंटर आकार लेगा। यह इनक्यूबेशन सेंटर आईआईटी इंदौर के दृष्टि सीपीएस फाउंडेंशन द्वारा विकसित किए जाएगा, जो इसी वर्ष अक्टूबर में काम करना शुरू कर देगा। यहां न सिर्फ इनक्यूबेटर्स को मेंटरिंग और तकनीकी सुविधाएं मिलेंगी, बल्कि अन्य अत्याधुनिक सुविधाएं भी प्रदान की जाएगी। यह संभवत: शहर का पहला ऐसा इनक्यूबेशन सेंटर होगा, जहां इनक्यूबेटर प्रोडक्ट का वैलिडेशन और टेस्टिंग करने में सक्षम होंगे, जिससे उनकी इंडस्ट्री पर निर्भरता भी खत्म होगी। यह सेंटर इनक्यूबेशन कम नवाचार सेंटर होगा। यहां पूरी तरह से डिपटेक स्टार्टअप पर काम होगा। जहां विद्यार्थियों को तकनीक विकसित करने में भी मदद मिलेगी। आईआईटी इंदौर और दृष्टि सीपीएस के प्रोफेसर और तकनीकी विशेषज्ञ विद्यार्थियों को मेंटरशिप प्रदान करेंगे। तकनीक पर काम करने के दौरान उन्हें टेक सपोर्ट भी प्रदान किया जाएगा, जिसके उन्हें तकनीक और गाइडेंस के मामले में कोई समस्या नहीं होगी। इस सेंटर में हार्डवेयर आधारित तकनीकों के साथ ही साफ्टवेयर आधारित स्टार्टप के लिए क्लाउड कंप्यूटिंग जैसी सुविधाएं देने की तैयारी है। इसके लिए सेंटर का खुद का डाटा सेंटर तैयार किया जाएगा। इसमें सेंटर के खुद के सर्वर और क्लाउड रैक होंगे। इसके साथ ही गूगल, एडबल्यूएस (अमेजन) और जाहो के एपीआइ और सीआरएम भी उपयोग के लिए उपलब्ध होंगे। सीआरएम माडल वह तकनीक है, जिसके माध्यम से जिसमें टीम और कस्टर का ट्रैक रिकार्ड स्टोर कर रखा जाता है। प्लग एंड प्ले मोड में होगी टेस्टिंग सामान्य तौर पर इनक्यूबेशन सेंटर में इनक्यूबेटर्स को मेंटरिंग और तकनीकी मदद ही दी जाती है। जबकि प्रोडक्ट की टेस्टिंग के लिए इंडस्ट्री पर निर्भर रहना पड़ता है। इस सेंटर से इंडस्ट्री पर निर्भरता भी कम होगी। सेंटर के लिए रोबोटिक आर्म माडल तैयार किया है। इसके माध्यम से इनक्यूबेटर्स प्लग एंड प्ले मोड में अपने प्रोडक्ट का वैलिडेशन और टेस्टिंग होगी। इससे मार्केट में उतरने से पूर्व ही प्रोडक्ट की गुणवत्ता की जानकारी मिल सकेगी। इससे वैलिडेशन और टेस्टिंग की लागत में भी कमी आएगी। सेंटर में इंटेलिजेंस मैन्यूफेक्चरिंग सेटअप भी होगा। ये सुविधाएं भी होंगी – वर्चुअल प्रोटोटाइपिंग- इससे डिजाइन खामियों का जल्दी पता लगाया जा सकता है, जिससे कई भौतिक प्रोटोटाइप की आवश्यकता कम हो जाती है। – डिजिटल ट्विन्स और रोबोटिक्स- ये रियल टाइम मानिटरिंग में सक्षम होते हैं, जिससे प्रोडक्ट के प्रदर्शन में सुधार होता है। 100 स्टार्ट शुरू करने की योजना इन इनक्यूबेशन सेंटर के लिए ग्लोबल इनवेस्टर समिट 2025 में दृष्टि सीपीएस और एमपी स्टेट इलेक्ट्रानिक्स डेवलपमेंट कारपोरेशन लिमिटेड (एमपीएसईडीसी) के बीच एमओयू हुआ था। इसके अंतर्गत सिंहासा आईटी पार्क, इंदौर में दस हजार वर्ग फीट में इनक्यूबेशन सेंटर बनेगा। इसमें से पांच हजार वर्गफीट क्षेत्र में को वर्किंग स्पेस और शेष पांच हजार वर्गफुट में हाई एंड लैब तैयार होगी। यही इनक्यूबेटर्स को तमाम तकनीकी सुविधाएं मिलेंगी। इसके माध्यम से अलग सात साल में यहां से 100 डीपटेक स्टार्टअप शुरू करने की योजना है।  

अचलपुरा में एक प्रेमी जोड़े ने की आत्महत्या, गाँव में मचा हड़कंप

राजगढ़ भोजपुर थाना के अंतर्गत अचलपुरा में एक प्रेमी जोड़े ने आत्महत्या कर ली। दोनों के शव साड़ी के फंदे पर मोहवा पेड़ लटके मिले। जानकारी के मुताबिक अचलपुरा गांव के मोहन लाल जब सुबह शौच के लिए खेत पर गया तो देखा कि एक प्रेमी जोड़े ने आत्महत्या कर ली। दोनों के शव मोहवा के पेड़ पर लटक देख वह गांव की ओर भागा और गांव वालो को सूचना दी। इसके बाद गांव के सैकड़ो लोग एकत्रित हो गए और पुलिस को सूचना दी। भोजपुर पुलिस मौके पर पहुंची और दोनो के शव को पेड़ से उतार कर खिलचीपुर शासकीय अस्पताल लेकर आए। जहां पर डाॅक्टर द्वारा पीएम कर शव परिजनों को सौप दिया। दोपहर को परिजनों द्वारा अंतिम संस्कार किया। लड़के की पहचान राधेश्याम पिता देवीलाल तंवर 21 व लड़की की पहचान मंजूबाई पिता भंवरलाल तंवर 19 के रूप में की गई है। जानकारी के अनुसार राधेश्याम तवर उम्र 21 वर्ष और लड़की 19 वर्ष दोनों ने सुबह के समय मोहवाँ के पेड़ पर लटककर आत्महत्या कर ली। लड़की तीन दिन पहले ससुराल से मायके आई थी। लड़के के पिताजी द्वारा बताया की लड़के की शादी डोडिया खेड़ी सीताराम की लड़की से को गई थी, लेकिन 2 साल से लड़की के पिताजी द्वारा कोर्ड केस कर रखा था और लड़की भेजने को मना किया गया था। लड़के को गांव की लड़की के साथ कोई प्रेम हुआ इसकी जानकारी मुझे नहीं थी। लेकिन लड़का उसके ससुराल वालों से परेशान था, जिसके कारण उसने यह कदम उठाया होगा। लड़की के पिताजी भंवरलाल तंवर ने बताया की लड़की की शादी दुर्जन पूरा के हरिओम से 3 साल पहले कर दी गई थी। वह ससुराल में ही 1 साल से रहती थी. हाल ही में 3 दिन पूर्व अपने मायके गांव आई थी. आज सुबह लड़की घर से पांच बजे निकली और 9 बजे हमे गांव से सूचना मिली की एक लड़का लड़की ने आत्महत्या कर ली. हम मौके पर पहुंचे तो मेरी लड़की गांव के लड़के के साथ आत्महत्या कर ली । कैलाश चंद्र दांगी, एसआई भोजपुर थाना ने बताया- गांव से सुबह के समय सूचना मिली थी की अचलपुरा गांव के एक प्रेमी जोड़े में आत्महत्या कर ली. हम मौके पर पहुंचकर कर दोनो के शव खिलचीपुर अस्पताल में आए जहा पर दोनो के शव का पीएम करवाकर परिजनों को सौप दिया और जांच की जा रही है।  

युवक की फरसा मारकर हत्या, खाली प्लाट पर एक युवक का रक्तरंजित शव मिलने से मचा हडक़म्प

सतना जिले के नागौद थाना क्षेत्र अंतर्गत सिंहपुर रोड पर सड़वा पुलिया के नजदीक स्थित निया मैरिज गार्डन के पीछे खाली प्लाट पर एक युवक का रक्तरंजित शव मिलने से हडक़म्प मच गया। स्थानीय लोगों ने निया मैरिज गार्डन के पीछे शव मिलने की नागौद पुलिस को सूचना दी। मौके पर पहुंची नागौद पुलिस ने मृतक कि शिनाख्त गोपाल श्रीवास्तव पिता बृजेश श्रीवास्तव उम्र 32वर्ष निवासी सुरदहा थाना जसो के रूप में हुई है। घटना के संबंध में नागौद पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार आरोपित नागौद के हरदुआ टोला में किराए से कमरा में रहकर रेलवे संविदाकार के यहां सुपरवाइजर की नौकरी करता था। वह सुबह करीब आठ बजे अपने दोस्त जितेन्द्र के साथ मोटर साइकिल में बैठकर सड़वा स्टेशन की ओर जा रहा था। तभी घटना स्थल पर पहले से फरसा लिए खड़े आरोपित ने बृजेश श्रीवास्तव पर एकाएक हमला कर दिया। आरोपित के ताबड़तोड़ हमले से हतप्रभ दोनों गाड़ी छोडक़र भागने लगे। हालंकि इस बीच बृजेश का पैर गड्डे में फस जाने से वह गिर गया। उसका दोस्त वहां से भाग निकला और जब वह मदद लेकर वापस लौटा। तब तक आरोपित ने बृजेश के ऊपर फरसे से कई वार करते हुए उसे मौत के घाट के उतार चुका था। पुलिस ने आरोपित की पहचान कर ली है। पुलिस के अनुसार आरोपित मृतक के गांव सुरदहा निवासी अशोक पयासी के रुप में की है। आरोपी अशोक पयासी की तलाश में प्रशिक्षु आईपीएस मनीष भारद्वाज के नेतृत्व में पुलिस टीम सुरदहा गई हुई है। फिलहाल आरोपी की गिरफ्तारी की खबर नहीं है। नाजायज संबंधों के चलते हत्या की आशंका इस मामले की तस्दीक करने मृतक व आरोपित के गांव सुरदहा पहुंची पुलिस टीम के अनुसार बृजेश श्रीवास्तव की हत्या नाजायज संबंधों के चलते अशोक पयासी द्वारा की गई है। नागौद थाना पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक आरोपित व मृतक एक ही गांव सुरदहा के रहने वाले हैं। एक साल पूर्व मृतक बृजेश ने आरोपित अशोक पयासी की पत्नी को अपने प्रेम जाल में फंसाकर अपने साथ नागौद में रख लिया था। अशोक पयासी ने जसो थाना में जिसकी लिखित शिकायत भी दर्ज कराई थी। लेकिन पुलिस के कोई एक्शन नहीं लेने पर आरोपित अशोक खुलेआम मृतक बृजेश की हत्या करने की बात कहता था। बताया यह भी जाता है कि आरोपित व उसकी पत्नी के तीन बच्चे भी है। शव के नजदीक मिला खून से सना फरसा स्थानीय लोगों से सूचना मिलने के बाद घटना स्थल पर पहुंची पुलिस को शव के नजदीक ही घटना स्थल पर खून से सना फरसा पड़ा मिला। इससे पुलिस इस बात का अंदाजा लगा रहीं है कि संभवत: आरोपित ने इसी धारदार हथियार से मृतक के ऊपर एक के बाद एक लगातार कई वार किए होंगे। इससे बृजेश की मौत हो गई होगी।

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