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मुख्यमंत्री ने किया विज्ञान मंथन यात्रा का शुभारंभ, भावी वैज्ञानिक नई दिल्ली एवं चंडीगढ़ के प्रतिष्ठित 11 संस्थानों का करेंगे भ्रमण

विज्ञान मंथन यात्रा विद्यार्थियों के लिये उपयोगी सिद्ध होगी : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री ने निभाई शिक्षक की भूमिका और भावी वैज्ञानिकों से किया संवाद मैपकॉस्ट की 17वीं विज्ञान मंथन यात्रा 27 अप्रैल तक प्रदेश के 375 भावी वैज्ञानिकों का हुआ चयन, वंदे भारत ट्रेन से होगी यात्रा भावी वैज्ञानिक नई दिल्ली एवं चंडीगढ़ के प्रतिष्ठित 11 संस्थानों का करेंगे भ्रमण मुख्यमंत्री ने किया विज्ञान मंथन यात्रा का शुभारंभ भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोमवार की शाम मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद् (मैपकॉस्ट) की 17वीं “विज्ञान मंथन यात्रा” का मुख्यमंत्री निवास परिसर से शुभारंभ किया। उन्होंने इस यात्रा के लिए चयनित प्रतिभाशाली भावी वैज्ञानिक बच्चों को बधाई देते हुए उनके साथ संवाद भी किया। उन्होंने एक शिक्षक के रूप में बच्चों से सवाल-जवाब भी किए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस अवसर पर विद्यार्थियों के साथ मुख्यमंत्री निवास परिसर से टेलीस्कोप द्वारा विभिन्न ग्रहों को देखा। उन्होंने विद्यार्थियों से अंतरिक्ष विज्ञान पर विस्तार पूर्वक संवाद किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मैं आप सभी के बीच मुख्यमंत्री या किसी शिक्षक नहीं मित्र के रूप में उपस्थित हूँ। आपके जीवन के लिए यह विज्ञान मंथन यात्रा उपयोगी सिद्ध होगी। पाठ्य पुस्तकों के अध्ययन के साथ विद्यार्थी जब विज्ञान से जुड़े नामी-गिरामी संस्थानों का प्रत्यक्ष अवलोकन कर वहां की कार्य पद्धति की जानकारी प्राप्त करते हैं तो यह ज्ञान सिर्फ नौकरी के लिए नहीं बल्कि जीवन के लिए उपयोगी सिद्ध होता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मानव शरीर और प्रकृति का भी समन्वय है। मनुष्य के जन्म से लेकर मृत्यु तक सभी प्रक्रियाएं जानने और समझने का विषय है। प्राण भी 5 प्रकार के हैं, जो श्वसन प्रणाली, हृदय, वाणी, पाचन प्रणाली, उत्सर्जन और प्रजनन प्रणाली और मांसपेशी के साथ परिसंचरण प्रणाली के रूप में जाने जाते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मैपकॉस्ट जैसी संस्थाएं विद्यार्थियों को सैद्धांतिक ज्ञान के साथ व्यावहारिक ज्ञान उपलब्ध करवाने की दिशा में सार्थक भूमिका निभा रही हैं। अंतरिक्ष विज्ञान पर बच्चों से बातचीत मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने बच्चों से प्रश्न किए कि पृथ्वी और चंद्रमा में से परिक्रमा कौन करता है? ग्रह और उपग्रह में क्या अंतर है? गुरुत्वाकर्षण शक्ति क्या है? ग्रहों की परस्पर दूरी का आकलन किस तरह होता है? विद्यार्थियों के सारगर्भित उत्तर से मुख्यमंत्री डॉ. यादव बहुत प्रभावित हुए। उन्होंने यात्रा के लिए चयनित विद्यार्थियों के ज्ञान स्तर की प्रशंसा की। अपर मुख्य सचिव विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग संजय दुबे, मैपकॉस्ट के महानिदेशक डॉ. अनिल कोठारी, मध्यप्रदेश हिन्दी ग्रंथ अकादमी के संचालक अशोक कड़ेल, विभिन्न विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षा संस्थानों के कुलगुरू एवं पदाधिकारी, शिक्षकगण उपस्थित थे। विज्ञान मंथन यात्रा पर जाने वाले विद्यार्थियों को विज्ञान और प्रौद्योगिकी परिषद् द्वारा आयोजित स्कॉलरशिप परीक्षा में भाग लेने का अवसर भी मिलेगा। परीक्षा में सफल होने वाले प्रत्येक कक्षा के 20 चयनित विद्यार्थियों को 5 वर्ष तक 12 हजार रुपए प्रति वर्ष की स्कॉलरशिप प्रदान की जाएगी। यात्रा के लिए इस वर्ष कक्षा 10वीं से 12वीं विज्ञान विषय में अध्यनरत पूरे प्रदेश के कुल 375 विद्यार्थियों का चयन किया गया है। इन चयनित विद्यार्थी में से दिल्ली जाने वाले समूह में प्रौद्योगिकी परिषद के आमंत्रण पर नेशनल साइंस सेन्टर, नेशनल इंस्टीटयूट ऑफ प्लांट जीनोमिक रिसर्च, इंडियन एग्रीकल्चर रिसर्च इंस्टीटयूट, राष्ट्रपति भवन और नई दिल्ली के संस्थानों का भ्रमण करेंगे। चंडीगढ़ जाने वाले समूह के विद्यार्थी सेन्ट्रल साइंटिफिक इंस्ट्रुमेंटस ऑर्गेनाइजेशन, इंडियन इंस्टीटयूट ऑफ साइंस एजुकेशन एंड रिसर्च, पंजाब स्टेट काउंसिल ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी, नेशनल इंस्टीटयूट ऑफ फॉर्मास्युटिकल एजुकेशन एंड रिसर्च, गवर्नमेंट म्युजियम एंड आर्ट गैलरी संस्थानों का भ्रमण और वैज्ञानिकों से साक्षात्कार करेंगे। विद्यार्थी वन्दे भारत ट्रेन से नई दिल्ली के लिए रवाना होंगे। दिल्ली पहुँचने पर विज्ञान भारती द्वारा इन सभी भावी वैज्ञानिकों का स्वागत किया जायेगा। मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद् ने स्कूली छात्र-छात्राओं में प्रदेश की भावी वैज्ञानिकों को तलाशने और उनमें विज्ञान शिक्षा के प्रति रुझान पैदा करने के लिए गत 16 वर्ष से मिशन एक्सीलेंस का आयोजन किया जा रहा है। कार्यक्रम में प्रदेश से चयनित विद्यार्थियों के दल को किताबी ज्ञान से अलग व्यावहारिक विज्ञान की दुनिया से रूबरू कराया जायेगा। विज्ञान मंथन यात्रा का मुख्य उद्देश्य उन प्रतिभावान विद्यार्थियों को, जिनमें विज्ञान के प्रति अभिरुचि है, उनकी पहचान करना एवं उनके द्वारा चयनित क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिये प्रोत्साहित करना है। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के सहयोग से चलाये जाने वाले इस कार्यक्रम से चयनित विद्यार्थियों को प्रशिक्षित कर उनकी वैज्ञानिक प्रतिभा को चिन्हित कर अनुसंधान एवं विकास के माध्यम से आगे बढ़ाए जाने का कार्य किया जा रहा है।  

कोरावल क्षेत्र की जनता पानी के संकट से परेशान, प्रशाशन को और सक्रियता के साथ कार्य करने की जरूरत

कोरावल बगदरा अभ्यारण कोरावल क्षेत्र में भ्रमण के दौरान युवा नेता लोकसभा सीट सीधी सिंगरौली 2024के प्रत्याशी रहे लक्ष्मण सिंह ने एक दिवसीय कोरावल क्षेत्र के भ्रमण के दौरान खम्हारिया के धर्मदेवा टोला में आदिवासी परिवार के बीच जाकर प्रशासन द्वारा उपलब्ध  पानी के लिए सुविधाओं का जायजा लेते हुए उन्होंने स्थानीय सचिव सरपंच से कहा कि आप सभी सक्रियता के साथ काम करते हुए इन्हें सुबह शाम दोनों टाइम टैंकर से जल की व्यवस्था बनाए, इसमें कोई कोताही न करे साथ की साथ प्रभारी मुख्य कार्यपालन अधिकारी से बात करते हुए कहा कि आने वाले भविष्य को देखते हुए इन्हें कूप निर्माण स्थाई जल कराया कराया जाए,इस भ्रमण के दौरान, कोरावल विकास मंच के अध्यक्ष डॉ रामा शंकर सिंह, उपाध्यक्ष लाल सुंदर सिंह,सह संरक्षक संतोष सिंह,रामनरेश कोल,सुनील गुप्ता,महेंद्र सिंह,सुनील उपाध्याय सहित ग्रामीण और युवा समाजसेवी,नेता गण उपस्थित होकर समस्याओं को सुनते हुए उनके समस्याओं को प्रशासन को अवगत कराया।  

स्थानीय महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने हेतु हिंदुस्तान पावर का कदम – 200 सिलाई मशीनों का निःशुल्क वितरण

जैतहरी हिंदुस्तान पावर के सीएसआर (कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व) विभाग द्वारा स्थानीय महिलाओं को आत्म निर्भर बनाने की दिशा में एक और सराहनीय पहल की गई। कंपनी द्वारा करीब 300 स्थानीय महिलाओं के लिए सिलाई प्रशिक्षण दिलाया गया, प्रशिक्षण के सफल आयोजन उपरांत, विभाग द्वारा एक कार्यक्रम आयोजित किया गया, आयोजन में विभाग ने करीब 200 प्रशिक्षित महिलाओं को प्रमाण पत्र प्रस्तुत किए और साथ ही सभी महिलाओं को निःशुल्क सिलाई मशीनें वितरित की गईं। यह कार्यक्रम कंपनी के परिसर में आयोजित किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में ग्रामीण महिलाएं उपस्थित रहीं। कार्यक्रम में अतिथियो के रूप में उपस्थित ग्राम पंचायत झाईंताल की सरपंच महोदया, श्रीमति विद्या सिंह गोंड, ग्राम पंचायत टकहौली के सरपंच राजकुमार सिंह, ग्राम पंचायत क्योटार के उपसरपंच श्री अमर सिंह राठौर की गरिमामयी उपस्थिति रही तथा कंपनी प्रबंधन की ओर से कंपनी के एच आर-एडमिन प्रमुख श्री आर के खटाना, सीएसआर प्रमुख श्री सत्यम सलील,  सुरक्षा प्रमुख श्री अरविन्द सिंह तथा जनसंपर्क अधिकारी श्री गौरव पाठक ने भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान ग्राम अमगंवा की स्थानीय महिला श्रीमती रोशनी बाई ने बताया कि कंपनी द्वारा चलाई गई इस पहल की जितनी प्रशंसा की जाए उतनी कम है, यह पहल हमें आत्मनिर्भर बनाने की ओर प्रेरित करती है, आज हम महिलाएं जो पहले सिलाई के हर छोटे-छोटे कामों के लिए हमें बाहर जाना पड़ता था जिसमें हमारा समय और पैसा दोनों खर्च होता था, आज हम इन कार्यों को स्वयं कर पा रहे है, इस पहल के लिए हम समस्त महिलाएं, कंपनी प्रबंधन का आभार प्रकट करते हैं। ग्राम पंचायत झाईताल की सरपंच महोदया श्रीमती विद्या सिंह गोंड ने इस कार्य को महिला सशक्तिकरण और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया, ग्राम पंचायत टकहोली के सरपंच श्री राजकुमार सिंह ने इस पहल की सराहना की, ग्राम पंचायत क्योंटार के उपसरपंच श्री अमर सिंह राठौर ने कहा कि कंपनी का सी एस आर विभाग स्थानीय विकास के क्षेत्र में आवश्यक कार्य कर रहा है, प्रशिक्षण उपरांत इतनी मात्रा में निशुल्क सिलाई मशीनों का वितरण हाल ही का एक उदाहरण है, मैं इस वितरण के लिए कंपनी प्रबंधन का हार्दिक आभार व्यक्त करता हूं और मेरी क्षेत्र की महिलाओं को शुभकामनाएं देता हूं। एच आर और एडमिन प्रमुख श्री आर के खटाना ने अपने उद्बोधन में कहा, “यह पहल न केवल महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाएगी, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर जीवन जीने की प्रेरणा भी देगी। हमारी कोशिश है कि प्रत्येक महिला अपने हुनर के माध्यम से सम्मानजनक जीवनयापन कर सके।” कार्यक्रम में जीसा इंस्टीट्यूट के प्रोजेक्ट डायरेक्टर श्री मेहुल चौहान और प्रोजेक्ट कॉर्डिनेटर प्रभजोत कौर उपस्थित रहे, और उनके द्वारा महिलाओं को अपने अनुभव सांझा किए गये, उन्होंने कंपनी के द्वारा स्थानीय महिलाओं के लिए किए गए सहयोग की विशेष सराहना की। कार्यक्रम के अंत में प्रशिक्षित महिलाओं ने अपने-अपने अनुभव साझा किए और हिंदुस्तान पावर का आभार प्रकट किया और बताया कि कंपनी का यह प्रयास स्थानीय विकास और महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सड़क दुर्घटनाओं में प्रभावित परिवारों को स्वीकृत की आर्थिक सहायता

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सड़क दुर्घटनाओं में प्रभावित परिवारों को स्वीकृत की आर्थिक सहायता रायसेन, टीकमगढ़ और राजस्थान के चित्तौड़गढ़ में हुई दुर्घटना में 14 नागरिकों का असामयिक निधन भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेश के रायसेन, टीकमगढ़ और चित्तौड़गढ़ (राजस्थान) में हुई दुर्घटनाओं में प्रदेश के नागरिकों के असामयिक निधन पर दुःख व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मुख्यमंत्री स्वेच्छानुदान से सभी मृतकों के परिजनों को 2-2 लाख रुपए एवं गंभीर घायलों को 50-50 हजार रुपए की आर्थिक सहायता राशि प्रदान करने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सोशल मीडिया ‘एक्स’ पर कहा कि वे दुःख की इस घड़ी में शोकाकुल परिजनों के साथ हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इन सड़क दुर्घटनाओं में दिवंगत नागरिकों की आत्मा की शांति के लिए बाबा महाकाल से प्रार्थना है। साथ ही घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की भी प्रार्थना है। संबंधित जिलों के प्रशासनिक अमले को प्रभावित परिवारों की सहायता के निर्देश दिए गए हैं।  उल्लेखनीय है कि चित्तौड़गढ़ के निंबाहेड़ा क्षेत्र में रविवार रात एक कार अनियंत्रित होकर ट्रक से टकरा गई, जिससे कार में सवार सात में से चार नागरिकों का निधन हो गया। दुर्घटना में मृत सभी लोग उज्जैन के निवासी थे, जो धार्मिकि यात्रा के लिए सांवलिया सेठ मंदिर जा रहे थे।   इसी तरह टीकमगढ़ जिले में रविवार को एक एसयूवी और दो मोटरसाइकिल की टक्कर में 4 लोगों की मौत हो गई। मृतकों में एक ही परिवार के तीन सदस्य भी शामिल हैं। इस दुर्घटना में बाइक सवार एक अन्य युवक की भी उपचार के दौरान मृत्यु हो गई। तीसरी दुर्घटना रायसेन जिले में भोपाल-जबलपुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर सोमवार सुबह हुई, जिसमें 6 लोगों की जान चली गई। यहां एक टेम्पो ट्रैक्स (तूफान) पहले पुलिया से टकराई, इसके बाद 10 फीट गहरी खाई में गिर गई। दुर्घटना में दूल्हा-दुल्हन समेत 3 लोग गंभीर रूप से घायल हुए। ये सभी शादी समारोह से इंदौर लौट रहे थे।  

झाबुआ कलेक्टर सुश्री नेहा मीणा लोक प्रशासन में उत्कृष्टता के लिए प्रधानमंत्री पुरस्कार 2024 से सम्मानित

भोपाल प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने आज विज्ञान भवन में आयोजित सिविल सेवा दिवस कार्यक्रम में झाबुआ कलेक्टर सुश्री नेहा मीणा को वर्ष 2024 के प्रधानमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार से सम्मानित किया। कार्यक्रम में केंद्रीय कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह तथा वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित थे। झाबुआ जिले को आकांक्षी ब्लाक श्रेणी में ब्लाक रामा में मोटी आई अभियान, सिकल सेल उन्मूलन के लिए जनजातीय क्षेत्रों में 3000 से अधिक स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन, ब्लाक के 100% किसानों को मृदा कार्ड जारी करने, हर घर जल योजना के अंतर्गत 26 हजार से अधिक घरेलू नल कनेक्शन और पीएम आवास योजना में 83.5% से अधिक लक्ष्य प्राप्ति जैसे कार्यक्रमों के लिए यह सम्मान प्रदान किया गया है। सम्मान के रूप में ट्रॉफी, स्क्रॉल और जिले में परियोजनाओं के लिए 20 लाख रुपए प्रोत्साहन राशि प्रदान की गई है।  

एमपी में 1 मई से होंगे कर्मचारियों के तबादले: अगले हफ्ते आएगी ट्रांसफर नीति

Employees will be transferred in MP from May 1: Transfer policy will come next week भोपाल । मध्यप्रदेश में करीब ढाई साल बाद 1 से 31 मई तक कर्मचारियों के तबादले होंगे। मंगलवार को डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल ने कैबिनेट बैठक की ब्रीफिंग के दौरान यह जानकारी दी। बैठक शुरू होने से पहले एक न्यूज एजेंसी से चर्चा में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी तबादलों से रोक हटाने के संकेत दिए थे। सीएम ने कहा, हमारी कोशिश रहेगी कि तबादला नीति अगली कैबिनेट बैठक तक आ जाए। से चर्चा में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी तबादलों से रोक हटाने के संकेत दिए थे। सीएम ने कहा, हमारी कोशिश रहेगी कि तबादला नीति अगली कैबिनेट बैठक तक आ जाए। बता दें, मध्यप्रदेश के कर्मचारी लंबे समय से तबादलों का इंतजार कर रहे हैं। पिछले साल के अंत में कुछ विशेष मामलों में तबादलों की छूट दी गई थी, लेकिन इससे कई कर्मचारी वंचित रह गए थे। सीएम चाहते थे शैक्षणिक सत्र के बाद हों तबादलेएक वरिष्ठ मंत्री ने बताया कि पिछले साल मुख्यमंत्री की यह मंशा थी कि शैक्षणिक सत्र के बीच में तबादले न हों। इसकी दो वजह भी बताईं… सत्र के बीच किसी शिक्षक का तबादला होता है, तो उस स्कूल के छात्रों का कोर्स प्रभावित होता है। शिक्षक को भी नई संस्था में जाने के बाद रुटीन में आने में समय लगता है। दूसरे विभागों के कर्मचारियों के बीच में तबादले होते हैं, तो उनके बच्चों को स्कूल शिफ्ट करने में परेशानी होती है। कर्मचारी और परिवार सत्र खत्म होने तक दूर-दूर रहते हैं। आखिरी बार अक्टूबर 2022 में हुए थे तबादलेबता दें, एमपी में 2022 के बाद अब तबादले हाेंगे। तब जून 2021 की तबादला नीति के आधार पर तबादले हुए थे। प्रदेश में 7.50 लाख कर्मचारी हैं। इनमें से डेढ़ से दो लाख कर्मचारी तबादलों से प्रभावित होते हैं। जनवरी 2025 में सरकार ने गंभीर बीमारी या कारण वाले मामलों में तबादले में छूट दी थी। ये तबादले प्रभारी मंत्री की सहमति से किए गए थे।

जनजातीय बहुल झाबुआ जिले में स्वास्थ्य, कृषि और आवास क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य हुआ सम्मानित

जनजातीय बहुल झाबुआ जिले में स्वास्थ्य, कृषि और आवास क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य हुआ सम्मानित लोक प्रशासन में उत्कृष्टता के लिए कलेक्टर झाबुआ को मिला पुरस्कार मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दी बधाई भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सिविल सेवा दिवस के अवसर पर मध्यप्रदेश के झाबुआ जिले को प्राप्त पुरस्कार पर प्रसन्नता व्यक्त की है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह निश्चित ही गर्व का अवसर है, जब सिविल सेवा दिवस पर नई दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कर कमलों से एस्पिरेशनल ब्लॉक प्रोग्राम (एबीपी) श्रेणी के अंतर्गत मध्यप्रदेश के झाबुआ जिले के रामा ब्लॉक को पुरस्कृत किया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कलेक्टर झाबुआ सुनेहा मीणा को प्राप्त पुरस्कार के लिए बधाई दी है। मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने कहा कि आकांक्षी ब्लॉक कार्यक्रम के माध्यम से झाबुआ जिले के सुदूर और कम विकसित क्षेत्र में नागरिकों के गुणवत्तापूर्ण जीवन को सुनिश्चित करने के लिए प्रशासनिक व्यवस्थाओं में सुधार के कार्य में सफलता प्राप्त की गई है। एबीपी के अंतर्गत योजनाओं को एकीकृत कर विभिन्न क्षेत्रों में प्रगति के प्रयास किए जाते हैं। इस पुरस्कार से अन्य लोक सेवकों को भी कठोर परिश्रम और विकास के संकल्प के माध्यम से कार्य की प्रेरणा मिलेगी। मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने झाबुआ कलेक्टर के साथ ही समस्त टीम को भी बधाई दी है। झाबुआ में क्या हुआ विशेष एबीपी के अंतर्गत देश के 16 जिलों के लोक सेवकों को उत्कृष्ट कार्य के लिए चयनित किया गया। झाबुआ को प्राइम मिनिटर्स अवार्डस फॉर एक्सिलेंस इन पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन : 2024 की एस्पिरेशनल ब्लॉक प्रोग्राम श्रेणी में पुरस्कृत किया गया है। झाबुआ जिले में दूरस्थ क्षेत्रों में विकास को गति मिली है। रामा ब्लॉक में पोषण आहार, किसानों की समृद्धि के लिए प्रयास, पेयजल प्रबंध के अंतर्गत हर घर जल एवं हर वंचित को पक्के मकान का संकल्प साकार हो रहा है। झाबुआ में नवाचार के माध्यम से स्वास्थ्य एवं पोषण के क्षेत्र में जनजातीय वर्ग को लाभान्वित करने, किसानों को मृदा कार्ड उपलब्ध करवाने और आवास के क्षेत्र में विशेष प्रयास किए गए।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नव दम्पति को दिया आशीर्वाद

बुरहानपुर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बुरहानपुर विधायक एवं पूर्व मंत्री श्रीमती अर्चना चिटनिस के यहां आयोजित विवाह समारोह में शामिल होकर चिं. समर्थ और सौ.कां. नम्रता को आशीर्वाद दिया। उन्होंने उनके सुखद, स्वस्थ एवं सफल दांपत्य जीवन की मंगलकामनाएँ दीं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नव विवाहित जोड़े को रामचरित मानस महाकाव्य की प्रति भी भेंट की। समारोह में जल संसाधन एवं जिले के प्रभारी मंत्री तुलसीराम सिलावट, पंचायत एवं ग्रामीण विकास एवं श्रम मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल, सांसद ज्ञानेश्वर पाटील, नेपानगर विधायक सुमंजू दादू, महापौर श्रीमति माधुरी पटेल, जिला पंचायत अध्यक्ष गंगाराम मार्को सहित अन्य जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी, गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।  

मध्य प्रदेश में सरकारी स्कूलों में लगेंगी मस्ती की पाठशाला, मोहन सरकार का आनंद प्लान

भोपाल  मध्य प्रदेश की मोहन सरकार अब सरकारी स्कूलों में मस्ती की पाठशाला लगाने जा रही है. दरसअल, सरकारी स्कूल की पढ़ाई बेहतर बनाने के साथ सराकार बच्चों के जीवन को बेहतर बनाने की दिशा में काम कर रही है. इसी के तहत मोहन सरकार शासकीय स्कूलों के लिए आनंद योजना लेकर आ रही है. इसके तहत अब स्कलों में कोर्स की पढ़ाई के साथ बच्चों को जीवन जीने की कला और स्ट्रेस मैनेजमेंट की ट्रेनिंग भी दी जाएगी. सरकारी स्कूलों में लगेगा आनंद पीरियड इसके लिए सरकारी स्कूलों में अलग से आनंद का एक पीरियड लगाया जाएगा, जिसमें हायर सेकंडरी के बच्चों को जीवन जीने और तनाव मुक्त रहने की कला सिखाई जाएगी. दरअसल, स्कूली बच्चों में स्ट्रेस और प्रतिस्पर्धा को देखते हुए स्कूल शिक्षा विभाग ने आनंद विभाग के साथ अनुबंध किया है. 2 हजार सरकारी स्कूलों से होगी आनंद क्लास की शुरुआत इसमें आनंद विभाग शिक्षकों को पहले ट्रेनिंग देगा, फिर वही शिक्षक बच्चों को प्रशिक्षित करेंगे. ऐसे में इसे मस्ती की पाठशाला भी कहा जा रहा है, जो बच्चों के लिए काफी फायदेमंद भी होगी. 2 हजार सरकारी स्कूलों से होगी शुरुआत बता दें कि स्कूल शिक्षा विभाग पहले भी सीएम राइज और मॉडल स्कूलों में मस्ती की पाठशाला का प्रयोग कर चुका है. इसके सकारात्मक परिणामों को देखते हुए अन्य सरकारी स्कूलों में भी मस्ती की पाठशाला लगाने का फैसला लिया गया है. हालांकि, पहले चरण में 2 हजार स्कूलों में मस्ती की पाठशाला की शुरुआत होगी. इसके बाद प्रदेश के अन्य सरकारी स्कूलों के हायर सेकंडरी के बच्चों के लिए आनंद क्लास लगाई जाएगी. इंजीनियरिंग और मेडिकल कालेजों में भी आनंद पीरियड सरकार की मंशा है कि जिस तरह सरकारी स्कूलों में आनंद की कक्षाएं शुरु की जा रही है. इसी तरह प्रदेश के इंजीनियरिंग, मेडिकल, एनटीटीटीआर और अन्य कालेजों में भी स्ट्रेस मैनेजमेंट और आर्ट आफ लिविंग की शिक्षा दी जाए. इसके लिए राज्य आनंद संस्थान ने पूरी तैयारी कर ली है. इधर सरकारी स्कूलों में बच्चों को ट्रेनिंग देने के लिए 4 हजार सरकारी शिक्षकों को प्रशिक्षित किया जाएगा. बता दें कि अभी 24 से 29 मार्च तक सरकारी स्कूलों के बच्चों के लिए वर्चुअल क्लासेस भी लगाई गई थी, जिसमें 3500 से 4 हजार बच्चों ने भाग लिया था. पहली बार हायर सेकंडरी स्कूलों में मस्ती की पाठशाला राज्य आनंद संस्थान के डायरेक्टर सत्य प्रकाश आर्य ने बताया, ” पहली बार सरकारी स्कूलों में आनंद की क्लास लगाई जाएगी. नई शिक्षा नीति के तहत बच्चों को स्कूली शिक्षा देने के साथ उनको मानवीय मूल्यों पर आधारित शिक्षा देना भी अनिवार्य है. इसी के तहत स्कूलों में आर्ट ऑफ लिविंग और स्ट्रेस मैनेजमेंट की ट्रेनिंग दी जा रही है. इसके साथ ही शिक्षकों को भी 6 दिनों का प्रशिक्षण आनंद संस्थान द्वारा किया जाएगा.”  

महाराजा छत्रसाल की घोड़े पर सवार, अष्टधातु की ये मूर्ति देश में सबसे ऊंची

छतरपुर  इतिहास के पन्नों में बुंदेलखंड के महाराजा छत्रसाल को वह स्थान नहीं मिल पाया, जिसके वे हकदार थे. ये बात अलग है कि छतरपुर जिले में लोगों के मन में महाराजा छत्रसाल के प्रति अलग ही सम्मान है. तभी तो छतरपुर में महाराजा छत्रसाल स्मृति शोध संस्थान ने 52 फीट ऊंची अष्टधातु की प्रतिमा स्थापित कर उनकी वीरता, पराक्रम और शौर्य को देश के सामने रखा. इस प्रतिमा को देखने के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं और महाराजा छत्रसाल के पराक्रम और इतिहास को जानकर हैरान हो जाते हैं. घोड़े पर सवार इतनी बड़ी प्रतिमा देश में कहीं नहीं है. छतरपुर के मऊसहानियां में स्थापित विशाल प्रतिमा इतनी विशाल प्रतिमा बनने की कहानी भी रोचक है. छतरपुर के युवा आर्टिस्ट दिनेश कुमार शर्मा द्वारा महाराजा छत्रसाल का करीब डेढ़ फुट लंबा मास्टर पीस को तैयार किया गया. इस पीस को यूपी के लखनऊ ले जाया गया. पीस को देखकर लखनऊ के कलाकारों ने मिट्टी का मॉडल तैयार किया. मॉडल पीस के करीब सौ टुकड़ों में बनाई गई डाई को ट्रकों से छतरपुर लाया गया. राजस्थान के कारीगरों ने महाराजा छत्रसाल की मूर्ति की ढलाई की. अब 52 फीट की अष्टधातु की मूर्ति सीना तानकर खड़ी है, जिसे देखने पूरे देश से लोग आ रहे हैं. छतरपुर के मऊसहानियां में ये प्रतिमा स्थापित है. छतरपुर जिले से 15 किलामीटर दूर महाराजा छत्रसाल की कर्मभूमि मऊसहानियां रही है. 1.10 करोड़ से बनी अष्टधातु की प्रतिमा महाराजा छत्रसाल की ये प्रतिमा को बनवाने में लोगों ने हर स्तर पर आर्थिक मदद की. एक करोड़ से ज्यादा राशि प्रतिमा बनवाने में खर्च हुई. इसमें से 67 लाख रुपए से ज्यादा नगद राशि 10-10 रुपए के कूपन से एकत्र की गई. महाराजा छत्रसाल की विशाल प्रतिमा बनवाने के लिए RSS के पूर्व विभाग प्रचारक पवन तिवारी ने संकल्प लिया था. इसके बाद 2 जून 2015 को महाराजा छत्रसाल स्मृति शोध संस्थान का गठन करवाया गया. महाराजा छत्रसाल के इतिहास, त्याग, बलिदान की गाथाओं की पुस्तकें निकलवाईं. कैलेंडर, डायरी, प्रतियोगिता से लेकर हर वह पहल शुरू की, जिससे घर-घर में लोग छत्रसाल की वीरता की गाथा जान सकें. महाराजा छत्रसाल की वीरता जन-जन तक पहुंचाने का लक्ष्य इसके बाद अभियान को मूल रूप देते हुए संस्थान के लोगों ने महाराजा छत्रसाल की अष्टधातु से विशाल प्रतिमा स्थापना का संकल्प लिया. 27 अक्टूबर 2015 को प्रतिमा निर्माण के लिए पूजन हुआ और फिर यह काम शुरू हो गया. 21 मार्च 2018 में आरएसएस प्रमुख डॉ. मोहन भागवत द्वारा प्रतिमा का लोकार्पण किया गया. छत्रसाल स्मृति शोध संस्थान के अध्यक्ष राधे शुक्ला का कहना है “साल 2015 में हम लोगों ने छत्रसाल स्मृति शोध संस्थान बनाया था, जिसमे संकल्प लिया गया था कि महाराजा छत्रसाल की वीरगाथा जन-जन तक पहुंचाई जाएगी.”

डाॅ. हरिसिंह गौर यूनिवर्सिटी को भारत सरकार ने बड़ी सौगात, 434 करोड़ से होगा इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट

सागर  डाॅ. हरिसिंह गौर यूनिवर्सिटी को भारत सरकार ने बड़ी सौगात दी है और इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट के लिए 434 करोड़ रुपए से ज्यादा की राशि की मंजूरी दी है. इस राशि से यूनिवर्सिटी में अकादमिक भवन, अस्पताल, आईटी लैब, कन्वेंशन सेंटर और लड़के और लड़कियों के लिए छात्रावास के साथ यूनिवर्सिटी के नए कैंपस, वैली कैंपस का निर्माण होगा. भारत सरकार की इस सौगात पर यूनिवर्सिटी के शिक्षकों, विद्यार्थियों और कर्मचारियों ने कुलपति प्रो. नीलिमा गुप्ता के प्रयासों की सराहना की है. यूनिवर्सिटी की प्रगति की नई उड़ान डॉ. हरिसिंह गौर यूनिवर्सिटी के लिए भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय ने बड़ी सौगात दी है. यूनिवर्सटी के अकादमिक भवनों, छात्रावासों और अन्य सुविधाओं के लिए 434.77 करोड़ रुपए स्वीकृत किए गए हैं. यूनिवर्सटी में इंस्टिट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी के नवीन भवन के निर्माण के लिए 99.71 करोड़ रुपए, होटल एंड कैटरिंग मैनेजमेंट, इंस्टिट्यूट ऑफ हॉस्पिटलिटी एंड टूरिज्म मैनेजमेंट, वाणिज्य विभाग और प्रबंधन विभाग के एकीकृत भवन के लिए 67.60 करोड़ रुपए, बालक और बालिकाओं के लिए एक-एक हजार सीट की क्षमता वाले दो नए छात्रावास के लिए 194.50 करोड़ रुपए, यूनिवर्सटी के नए अस्पताल भवन के लिए 15.42 करोड़, कंप्यूटर आधारित परीक्षा केंद्र, प्रयोगशाला, आईटी सेल एवं ऑनलाइन सेंटर के लिए 33.58 करोड़ और इसके अलावा मल्टीपर्पस कन्वेंशन सेंटर के लिए 23.96 करोड़ रुपए स्वीकृत किए गए हैं. खास बात ये है कि इन सभी भवनों का निर्माण सागर रहली मार्ग पर वैली कैम्पस में किया जाएगा. कुलपति के प्रयासों की सराहना दरअसल, यूनिवर्सिटी की इन जरूरतों को लेकर कुलपति प्रो. नीलिमा गुप्ता ने बैठक में यूनिवर्सिटी के मौजूदा संसाधनों, छात्रों और छात्रावास की संख्या, सुविधाओं का उल्लेख करते हुए विस्तृत प्रेजेंटेशन दिया था और यूनिवर्सिटी में इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट की आवश्यकताओं पर भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय का ध्यान खींचा था. भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के शास्त्री भवन में हुई इस बैठक में सागर यूनिवर्सिटी के सभी प्रस्तावों को मंजूरी दी गई है. बैठक में कुलपति ने वर्ष 2023 में यूनिवर्सिटी को नैक से मिली ए प्लस ग्रेड, यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले विद्यार्थियों की संख्या, संचालित कोर्स, शिक्षक और कर्मचारियों की संख्या, एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट के क्रियान्वयन में अग्रणी रहने और भारतीय सेना के महार रेजीमेंट के साथ अकादमिक समझौता कर अग्निवीरों के लिए डिग्री प्रदान करने जैसी उपलब्धियों को रेखांकित किया. यूनिवर्सिटी के विशाल परिसर में बनेंगी इमारतें गौरतलब है कि सागर यूनिवर्सिटी का क्षेत्रफल करीब 1400 एकड़ है. यहां फिलहाल वैली कैंपस में विस्तार की संभावनाएं है. कुलपति प्रो. नीलिमा गुप्ता ने कहा है कि “यूनिवर्सटी लगातार परिसर का विस्तार कर रहा है. यहां कई नवीन अकादमिक भवन, इंटीग्रेटेड लैब और कई विभागों के विस्तारित भवन बनकर तैयार हो चुके हैं. भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय ने 434.77 करोड़ रुपए की नवीन परियोजनाओं को मंजूरी दी है. यूनिवर्सटी प्रगति की दिशा में नई उड़ान भरने जा रही है. 2 नए छात्रावासों के बनने से छात्र-छात्राओं को सुविधा होगी. हमारा विश्वविद्यालय एक तरह से पूर्णतः आवासीय विश्वविद्यालय बनने की ओर अग्रसर है. आधुनिक अस्पताल, आई टी सेंटर और कम्प्यूटर लैब बनाया जाएगा. कॉमर्स एवं मैनेजमेंट डिपार्टमेंट बड़े भवन में संचालित होगा.”

प्रधानमंत्री मोदी 24 अप्रैल को देश की तीसरी अमृत भारत एक्सप्रेस को हरी झंडी दिखयेंगे, सतना से खंडवा होकर गुजरेगी

जबलपुर  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 24 अप्रैल को देश की तीसरी अमृत भारत एक्सप्रेस को हरी झंडी दिखाने वाले हैं. यह ट्रेन मध्य प्रदेश में सतना से खंडवा होकर गुजरेगी. इस बीच में यह कटनी जबलपुर और इटारसी रेलवे स्टेशन से भी जाएगी, लेकिन फिलहाल यह तय नहीं है कि इसका स्टॉपेज कहां होगा. वंदे भारत के बाद यह दूसरी महत्वाकांक्षी ट्रेन है, जो मोदी सरकार की बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है. एमपी से गुजरेगी तीसरी अमृत भारत एक्सप्रेस 24 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश की तीसरी अमृत भारत एक्सप्रेस को हरी झंडी दिखाने वाले हैं. यह ट्रेन बिहार के सहरसा से शुरू होकर मुंबई जाएगी. सहरसा से अमृत भारत एक्सप्रेस शाम 4:00 बजे निकलेगी और 24 घंटे में 1956 किलोमीटर का सफर तय करके यह मुंबई पहुंचेगी. अमृत भारत एक्सप्रेस सहरसा से खगड़िया, हसनपुर, समस्तीपुर, मुजफ्फरपुर, पाटलिपुत्र और दानापुर होते हुए वाराणसी के दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन पहुंचेगी. दीनदयाल जंक्शन से ये ट्रेन मध्य प्रदेश में इंटर करेगी और सतना, कटनी जबलपुर से होती हुई यह इटारसी, खंडवा और भुसावल के रास्ते मुंबई जाएगी. जल्द तय होंगे मध्य प्रदेश के स्टॉपेज पश्चिम मध्य रेलवे के अधिकारी अभी यह बताने की स्थिति में नहीं है कि यह जबलपुर से कितने बजे गुजरेगी और मध्य प्रदेश के कौन से स्टेशन पर रुकेगी, क्योंकि इस ट्रेन का पूरा नियंत्रण ईस्ट सेंट्रल रेलवे के पास में है. अभी यह भी तय नहीं है कि यह मध्य प्रदेश के किस स्टेशन पर रुकेगी. इसके पहले भी बिहार के दरभंगा से नई दिल्ली के बीच में पहली अमृत भारत एक्सप्रेस चलाई गई थी. यह ट्रेन लगभग 1137 किलोमीटर की यात्रा 21 घंटे में पूरी करती है. दूसरी अमृत भारत एक्सप्रेस पश्चिम बंगाल की मालदा टाउन से बेंगलुरु के लिए चलती है. वहीं इस बारे में पश्चिम मध्य रेलवे के सीपीआरओ हर्षित श्रीवास्तव ने बताया है कि “अमृत भारत एक्सप्रेस के मध्य प्रदेश में सतना और जबलपुर स्टॉपेज होने की संभावना है, क्योंकि अभी इसके स्टॉपेज का नोटिफिकेशन जारी नहीं हुआ है.” अमृत भारत एक्सप्रेस की बढ़ी स्पीड अमृत भारत एक्सप्रेस 2247 किलोमीटर की यात्रा 42 घंटे में पूरी करती है. इन ट्रेन की अधिकतम स्पीड 130 किलोमीटर प्रति घंटा है, लेकिन फिलहाल यह 106 किलोमीटर प्रति घंटा की स्पीड पर चल पा रही है. बता दें अमृत भारत एक्सप्रेस में वंदे भारत एक्सप्रेस जैसी ही सुविधाएं हैं, लेकिन इसमें अभी तक एसी कोच शामिल नहीं किया गया है. हालांकि इस ट्रेन में बाकी सारी सुविधा पुरानी ट्रेनों की अपेक्षा अपग्रेड कर दी गई हैं. साथ ही इसकी स्पीड भी बढ़ा दी गई है. इसकी वजह से यात्रा करने वाले लोगों का समय बच रहा है.

प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना की राज्य स्तरीय अनुमोदन समिति के कार्यकाल में वृद्धि

भोपाल राज्य शासन द्वारा आत्मनिर्भर भारत अभियान के अंतर्गत खाद्य प्र-संस्करण उद्योग मंत्रालय, भारत सरकार, नई दिल्ली द्वारा संचालित प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना (पी.एम.एफ.एम.ई. योजना) के अंतर्गत गठित राज्य स्तरीय अनुमोदन समिति के कार्यकाल को एक वर्ष (वित्तीय वर्ष 2025-26) के लिए बढ़ा दिया गया है। योजना के दिशा-निर्देशों अनुसार समिति का गठन वर्ष 2020-21 से 2024-25 तक 5 वर्षों की अवधि के लिए किया गया था। राज्य शासन द्वारा इस समिति के कार्यकाल में एक वर्ष की वृद्धि करते हुए इसे आगामी वित्तीय वर्ष तक विस्तारित किया गया है। सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा आदेश जारी कर दिये गये हैं।  

मई के पहले सप्ताह में सर्वदलीय बैठकफिर तय होगा विधानसभा में कार्यवाही का लाइव प्रसारण का फैसला

 भोपाल  मध्यप्रदेश विधानसभा में कार्यवाही का लाइव प्रसारण का फैसला सर्वदलीय बैठक के बाद होगा। मई के पहले सप्ताह में सर्वदलीय बैठक हो सकती है। इधर विधानसभा के मानसून सत्र से सदन की कार्यवाही लाइव हो सकती है। इसी कड़ी में जहां सदन में केवल बिछाने का काम शुरू हो गया है वहीं राष्ट्रीय सूचना केंद्र विधायकों के लिए लैपटॉप खरीद रहे है। देश के 13 प्रदेशों के 14 सदनों में केंद्र सरकार की विधान परियोजना लागू हो चुकी है। विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर सर्वदलीय बैठक में फैसला लेंगे। मध्य प्रदेश के लिए 19 करोड़ 36 लाख रुपए की परियोजना के कामों का अनुमोदन मिल चुका है। बता दें कि विधानसभा के लाइव प्रसारण को लेकर कांग्रेस हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटा चुकी है। कांग्रेस विधायक सचिन यादव और प्रताप सिंह ग्रेवाल की याचिका पर हाईकोर्ट सरकार को नोटिस भेज चुकी है। इंदौर हाईकोर्ट बेंच ने नोटिस भेजकर सरकार से चार हफ्ते में जवाब मांगा है। ई विधानसभा में कार्यवाही को लेकर तैयारियां जारी है। ई विधानसभा को लेकर विधानसभा की टीम (हिमाचल समिति) तीन राज्यों का कर दौरा चुकी है। विधायकों के लिए लैपटॉप खरीदने का टेंडर जल्द जारी होगा।

अब 87 स्कूलों का भविष्य कलेक्टर के हाथ में, डीपीसी स्तर पर स्कूलों की मान्यता को रद्द

भोपाल आवश्यक दस्तावेजों की कमी, भवन, मैदान का अभाव, शिक्षकों की कमी और योग्यता की कमी, छात्रों की जानकारी ऑनलाइन अपडेट नहीं, फायर सेफ्टी जैसे मान्यता के मुख्य मापदंड पर जिले के कई निजी स्कूल खरे नहीं उतरे हैं। इसके चलते बीआरसी के बाद डीपीसी स्तर पर भी 87 स्कूलों की मान्यता को रद्द कर दिया गया है। अब ये स्कूल कलेक्टर को मान्यता के लिए आवेदन देंगे। 671 स्कूलों का आया था आवेदन धार जिले में 671 स्कूलों ने मान्यता के लिए आवेदन दिए थे जिसका बीआरसी ने 31 मार्च तक निरीक्षण किया था। जिन स्कूलों में कमियां मिली थी उनकी मान्यता रद्द करने को लेकर बीआरसी ने अनुशंसा की थी। इसके बाद डीपीसी स्तर पर मान्यता के मापदंडों को परखा गया, लेकिन उसमें स्कूलों में कमियां मिली। जिस पर डीपीसी स्तर पर भी स्कूलों की मान्यता रद्द हो गई है। आधार सेंटरों की कमी के चलते भी प्रगति नहीं जिले में एक क्लिक पर विद्यार्थियों की संपूर्ण जानकारी उपलब्ध कराने के मकसद से 12 अंकों का अपार आइडी (Apaar ID) बनाया जा रहा है। इसमें विद्यार्थियों की संपूर्ण जानकारी होगी, लेकिन अपार में आधार अपडेशन को लेकर दिक्कतें आ रही है। कई बच्चों के आधार अपडेट नहीं हो रहे हैं, ऐसे में उनकी अपार आइडी नहीं बन रही हैं, क्योंकि शहर में सेंटरों में आधार सेंटरों की संख्या भी कम हैं। विभाग भी उदासीनता बरत रहा है, इससे लक्ष्य पूर्ति नहीं हो पा रही है। टाइम लाइन बेअसर कई बार टाइम लाइन दी गई, लेकिन लक्ष्य पूरा नहीं हो पा रहा है। पहले दिसंबर 2025 तक सभी के अपार आइडी बनाए जाने थे, लेकिन कार्य पूरा नहीं हुआ तो 31 मार्च की टाइम लाइन तय की गई। अब अप्रैल तक कार्य पूरा करने की प्लानिंग की गई है। हालांकि अब कम प्रगति को देखकर शिक्षक भी मदद कर आधार अपडेट आइडी में बनाने में मार्गदर्शन करेंगे। जिले में अब तक सिर्फ प्रतिशत विद्यार्थियों की ही आइडी बनी है। जिले में 3 लाख 27 हजार 421 आइडी बनना है, लेकिन अब तक 2 लाख 6 हजार 734 बनाई जा सकी है। आइडी बनाने का कार्य स्कूलों को दिया गया है, जो यू डाइस प्लस पोर्टल के जरिए बनाई जा रही है। हालांकि दो दिन से तकनीकी दिक्कतों से चलते पोर्टल में खुल नहीं रहा हैं। मुख्य रूप से ये दिक्कतें…     स्कूल और आधार में दर्ज नार्मो में अंतर आ रहा है     स्कूल में दर्ज जन्म तारीख और आधार में लिखी जन्म तिथि में अंतर     कई स्टूडेंट के आधार अपडेट नहीं हैं     शहर में आधार अपडेट करवाने के लिए सेंटरों की कमी इसलिए आ रही दिक्कतें अपार आइडी यू-डाइस प्लस पोर्टल के डाटा के आधार पर बन रहा है। पोर्टल और आधार कार्ड की जानकारी के डालने के बाद आईडी बनता है, लेकिन पोर्टल और आधार कार्ड की जानकारी में अड़चन आने से आइडी जनरेट नहीं हो रही है, जैसे स्टूडेंट का नाम, माता-पिता का नाम, सरनेम में बिंदी का अंतर आ रहा है, या फिर स्पेलिंग आधार और पोर्टल के डाटा में अलग अलग है। ऐसी स्थिति में अपार आइडी जनरेट नहीं होगी। ऐसी समस्याओं की वजह से अब तक 2 हजार आइडी रिजेक्ट हो चुकी है। हालांकि लोग आधार अपडेट करवाना चाहते हैं, लेकिन आधार सेंटरों पर वेटिंग चल रही है। ऐसे होती है स्कूलों की मान्यता की प्रक्रिया स्कूल द्वारा आवेदन पोर्टल पर लॉक करने के बाद जिले के बीआरसी स्कूलों का निरीक्षण कर मान्यता के मापदंडों को परखते हैं। स्कूलों की कमियां और मापदंडों को पूरा कर रिपोर्ट तैयार डीपीसी स्तर पर भेज देते हैं। डीपीसी स्तर पर वैरिफिकेशन कर प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाता है। जिसमें कमियां मिलने पर मान्यता रद्द कर दी जाती है, जबकि मापदंड पूरा करने वाले स्कूलों को मान्यता मिल जाती है। मान्यता रद्द वाले स्कूलों के पास कलेक्टर के पास अपील करने की अंतिम अवसर होता है। आवेदनों में यह कमियां आई सामने     स्कूल भवन के कागजात अधूरे     अलग-अलग शौचालय नहीं होना     पीने के पानी की सुविधा का अभाव     प्रशिक्षित शिक्षकों की नियुक्ति नहीं होना     आरटीई एक्ट के नियमों का पालन नहीं करना ये है मान्यता के मुख्य मापदंड     रजिस्टर्ड किरायानामा     प्राथमिक शाला के लिए 7 कक्षाएं और 7 शिक्षक अनिवार्य     खेल सामग्री और खेल मैदान होना चाहिए,     न्यूनतम 2400 से 4 हजार स्क्वेयर फीट साइज का खेल मैदान हो     छात्रों की संख्या पर खेल मैदान का साइज निर्धारित हो     सुरक्षा के लिहाज से स्कूल में अग्निशमन यंत्र होना चाहिए।     बालक-बालिकाओं के लिए अलग-अलग शौचालय हो।     लाइब्रेरी की सुविधा होना चाहिए।

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