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सिवनी मालवा में मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म कर हत्या मामले में कोर्ट नेफैसला सुनाया और बच्ची को केवल 88 दिन में न्याय दिला दिया

सिवनी मालवा . सिवनी मालवा स्थित नयापुरा में 6 साल की मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म कर हत्या मामले में कोर्ट ने शुक्रवार को फैसला सुनाया और बच्ची को केवल 88 दिन में न्याय दिला दिया। महिला जज ने आरोपी को फांसी सजा सुनाई। इस घटना ने रिकॉर्ड करते हुए महज् 88 दिन में फैसला सुना दिया और आरोपी पर 3 हजार रुपए जुर्माना और बच्ची के माता-पिता को 4 लाख रुपए का प्रतिकर स्वरूप दिए जाने का आदेश दिया। बच्ची को सोता हुआ ले गया था आरोपी 2 जनवरी 2025 की रात एक 6 वर्षीय मासूम के साथ दुष्कर्म और हत्या की घटना सामने आई है। आरोपी अजय बाडिवा, जिसे धुर्वे के नाम से भी जाना जाता है, उसने इस वारदात को अंजाम दिया। वह पीड़ित बच्ची के मामा के घर में पलंग के नीचे सो रहा था, जहां बच्ची आई हुई थी। जब बच्ची की मां और मामा ने उसे घर से भगा दिया, तो वह रात में फिर से घर में घुस आया और सोती हुई बच्ची को जंगल में ले गया। वहां उसने नहर किनारे बच्ची के साथ दुष्कर्म किया और उसकी हत्या कर दी। जिला अभियोजन अधिकारी राजकुमार नेमा ने इस मामले की जानकारी दी है। 2 जनवरी की रात घर में सो रही बच्ची को आरोपी अजय बाडिवा (धुर्वे) जंगल में ले गया था। नहर किनारे दुष्कर्म किया और मुंह दबाकर उसकी हत्या कर दी। जिला अभियोजन अधिकारी राजकुमार नेमा ने बताया 2 जनवरी 2025 को बच्ची अपने मामा के घर आई थी। आरोपी उसी घर में पलंग के नीचे सो रहा था, जिसे बच्ची की मां और मामा ने भगा दिया था। अजय जाते-जाते कहकर गया कि एक लड़की मुझे दे दो। इसके बाद बच्ची को मां ने सुला दिया। कुछ देर बाद बच्ची को आरोपी उठाकर ले गया। जंगल में ले जाकर दुष्कर्म किया और हत्या कर दी। बच्ची की मां ने आरोपी पर शंका जताई थी। पुलिस ने उसी रात आरोपी को गांव से गिरफ्तार किया। उसने दुष्कर्म कर हत्या करना कबूल किया। जज ने फैसले में बच्ची के दर्द पर कविता भी लिखी… शासन की ओर से पक्ष विशेष लोक अभियोजक मनोज जाट ने रखा। सिवनीमालवा के अधिवक्ताओं ने आरोपी का केस नहीं लड़ने का ऐलान किया था। आरोपी को फांसी की सजा दिलाने लोगों ने प्रदर्शन भी किया था। जज की कविता… हां, फिर एक निर्भया 2 और 3 जनवरी की थी वो दरमियानी रात जब कोई नहीं था मेरे साथ। इठलाती, नाचती छः साल की परी थी, मैं अपने मम्मी-पापा की लाडली थी। सुला दिया था उस रात बड़े प्यार से मां ने मुझे घर पर, पता नहीं था नींद में मुझे ले जाएगा।। “वो” मौत का साया बनकर। जब नींद से जागी तो बहुत अकेली और डरी थी मैं, सि​सकियां लेकर मम्मी-पापा को याद बहुत कर रही थी मैं। न जाने क्या-क्या किया मेरे साथ, मैं चीखती थी, चिल्लाती थी, लेकिन किसी ने न सुनी मेरी आवाज़। थी गुड़ियों से खेलने की उम्र मेरी, पर उसने मुझे खिलौना बना दिया। “वो” भी तो था तीन बच्चों का पिता, फिर मुझे क्यों किया अपनों से जुदा। खेल-खेलकर मुझे तोड़ दिया, फिर मेरा मुंह दबाकर, मसला हुआ झाड़ियों में छोड़ दिया। हां मैं हूं निर्भया, हां फिर एक निर्भया, एक छोटा सा प्रश्न उठा रही हूं जो नारी का अपमान करे क्या इंसाफ निर्भया को मिला वह मुझे मिल सकता है। -तबस्सुम खान, विशेष न्यायाधीश जज ने लिखी बच्ची के दर्द पर कविता बताया जा रहा है कि बच्ची की मां और मामा ने आरोपी अजय को भगा दिया था, लेकिन वो जाते-जाते कहकर गया था कि लड़की मुझे दे दो। इसके बाद बच्ची को मां ने सुला दिया और कुछ देर बाद बच्ची को आरोपी उठाकर ले गया और जंगल में ले जाकर दुष्कर्म किया कर हत्या कर दी। बच्ची की मां ने आरोपी पर शंका जताई थी। पुलिस ने उसी रात आरोपी को गांव से गिरफ्तार किया। उसने दुष्कर्म कर हत्या करना कबूल किया। जज ने फैसले में बच्ची के दर्द पर कविता भी लिखी… शासन की ओर से पक्ष विशेष लोक अभियोजक मनोज जाट ने रखा। सिवनी मालवा के अधिवक्ताओं ने आरोपी का केस नहीं लड़ने का ऐलान किया था। आरोपी को फांसी की सजा दिलाने लोगों ने प्रदर्शन भी किया था।

मंत्री सारंग ने गर्मी की तीव्रता को देखते हुए पेयजल व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिये

भोपाल केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह के मुख्य आतिथ्य और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में रविवार 13 अप्रैल को रवीन्द्र भवन सभागार में दोपहर 12 बजे से अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता वर्ष-2025 के अंतर्गत होने वाले राज्य स्तरीय सहकारी सम्मेलन होगा। सम्मेलन में सांसद वी.डी. शर्मा विशेष अतिथि होंगे।सहकारिता मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने शुक्रवार को मंत्रालय में सम्मेलन की तैयारियों की समीक्षा की। बैठक में पशुपालन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) लखन पटेल, अपर मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल, प्रमुख सचिव उमाकांत उमराव, सहकारिता, पशुपालन, नगर निगम, पुलिस और जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। मंत्री सारंग ने निर्देश दिये कि कार्यक्रम सुव्यवस्थित हो, इसके लिये अलग-अलग काम के लिये अलग-अलग अधिकारी की ड्यूटी निर्धारित की जाये। साथ ही एक कंट्रोल-रूम स्थापित किया जाये, जिसके लिये एक नोडल अधिकारी नियुक्त करें। उन्होंने बैठक व्यवस्था, पास, निमंत्रण-पत्र, वाहन पार्किंग के लिये संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिये। मंत्री सारंग ने गर्मी की तीव्रता को देखते हुए पेयजल व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिये हैं। उन्होंने अधिकारियों को दी गयी जिम्मेदारियों की लिस्टिंग करने को भी कहा। उन्होंने कार्यक्रम स्थल पर मेडिकल टीम और पॉवर बैक-अप रखने के लिये निर्देश दिये। बैठक में बताया गया कि सम्मेलन में राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड अध्यक्ष मीनेश शाह, मुख्य सचिव अनुराग जैन, केन्द्रीय सहकारिता सचिव डॉ. आशीष कुमार भूटानी भी शामिल होंगे।

मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने ई-केवायसी समय सीमा में पूर्ण कराने के दिए निर्देश, राशन हितग्राहियों के पास 30 अप्रैल तक का समय

भोपाल खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने राष्ट्रीय खाद्य, सुरक्षा अधिनियम के पात्र हितग्राहियों की ई-केवायसी 30 अप्रैल तक विशेष अभियान चलाकर करने के निर्देश दिए हैं। 543.31 लाख पात्र हितग्राहियों में से शेष 108.27 लाख हितग्राहियों की ई-केवायसी 30 अप्रैल तक पूर्ण करने के निर्देश भारत सरकार द्वारा प्राप्त हुए हैं। समय सीमा में समस्त पात्र हितग्राहियों की ई-केवायसी न होने पर हितग्राहियों को खाद्यान्न प्राप्त करने में कठिनाई हो सकती है। इसलिए समस्त पात्र हितग्राहियों के ई-केवायसी समय सीमा में पूर्ण कराने के निर्देश दिए गए हैं। मंत्री राजपूत ने बताया कि 9 से 30 अप्रैल तक प्रदेश में ई-केवायसी कराने का विशेष अभियान चलाया जा रहा है। विशेष अभियान में ई-केवायसी से शेष रह गये सभी पात्र हितग्राहियों की सूची पीओएस मशीन, स्थानीय निकाय, जेएसओ लागिन पर उपलब्ध कराई गई है। उन्होंने बताया कि विशेष अभियान में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग तथा नगरीय प्रशासन विभाग के स्थानीय अमले का सहयोग लिया जा रहा है। अभियान में हितग्राहियों की ई-केवायसी ग्रामवार एवं मुहल्लेवार कैंप लगाकर की जाएंगे।  

सम्राट विक्रमादित्य महानाट्य: स्वयं डॉ. मोहन यादव ने सम्राट महेन्द्रादित्य के जीवंत किया था

उज्जैन उज्जैन की पवित्र धरती पर 2000 के दशक की शुरुआत की एक अनोखी सांस्कृतिक पहल की शुरूआत “सम्राट विक्रमादित्य महामंचन” के रूप में हुई। यह महानाट्य मंचन केवल एक ऐतिहासिक पात्र का स्मरण नहीं था, बल्कि एक ऐसे युग की पुनर्प्रतिष्ठा थी जिसे भारतीय संस्कृति, न्याय, और नीति का प्रतीक माना जाता है। इस मंचन की सबसे रोचक बात यह रही कि इसमें स्वयं डॉ. मोहन यादव ने सम्राट महेन्द्रादित्य (विक्रमादित्य के पिता) के जीवंत किया था। महानाट्य के मंचन के समय किसी ने सोचा भी नहीं था कि रंगमंच पर उतरने वाला यह युवक भविष्य में वास्तविक रूप में मध्यप्रदेश के विक्रमादित्य की तरह एक नेतृत्वकर्ता, एक सांस्कृतिक अभिभावक और जनमानस का प्रतिनिधि के रूप में प्रतिष्ठित होगा। डॉ. यादव का यह सांस्कृतिक और साहित्यिक प्रेम ही उन्हें सत्ता के शीर्ष तक ले आया। सत्ता में आने के बाद भी उनका यह रुझान केवल मंचन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्होंने महानाट्य के मंचन को सामाजिक चेतना और सांस्कृतिक पुनर्जागरण का माध्यम बनाया। प्राधिकरण से प्रारंभ हुई विक्रमदर्शिता मुख्यमंत्री डॉ. यादव जब उज्जैन विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष बने, उन्होंने विकास को केवल अधोसंरचनात्मक निर्माण तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने सम्राट विक्रमादित्य की दृष्टि से उज्जैन शहर को एक ऐसे नगर के रूप में देखा जो इतिहास, आस्था और आधुनिकता का संगम बने। उनकी पहल पर शहर में चार दिशाओं में भव्य प्रवेश द्वार निर्मित किए गए, जो चार युगों के प्रतीक हैं। यह कार्य न केवल स्थापत्य की दृष्टि से अभिनव था, बल्कि सांस्कृतिक चेतना को जागृत करने वाला भी था। उज्जैन को देश का पहला ऐसा शहर बनने का गौरव प्राप्त हुआ, जिसमें दिशा-प्रेरित प्रवेश द्वारों से संस्कृति का स्वागत हुआ। विक्रम विश्वविद्यालय को नई पहचान मुख्यमंत्री डॉ. यादव का अगला महत्वपूर्ण कार्य सम्राट विक्रमादित्य के नाम से स्थापित विक्रम विश्वविद्यालय को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाना रहा। उन्होंने विश्वविद्यालय में न केवल शोध और शैक्षणिक गुणवत्ता को बढ़ावा देने की योजना बनाई गई, बल्कि सम्राट विक्रमादित्य के साहित्य, न्याय दर्शन, और सांस्कृतिक मूल्यों को नयी पीढ़ी तक पहुंचाने की दिशा में भी विशेष प्रयास प्रारंभ किए गए। लाल किले से देशव्यापी मंचन की ओर अब जब डॉ. यादव सत्ता और संस्कृति दोनों के मध्य सेतु बन चुके हैं, उन्होंने अपने पुराने सांस्कृतिक अभियान को उत्थान के एक नए सोपान पर ले जाने का संकल्प लिया है। उनके नेतृत्व में टीम अब सम्राट विक्रमादित्य महानाट्य के महामंचन को देशभर में करने के लिए तत्पर हैं। इससे सम्राट विक्रमादित्य के जीवन और दर्शन पर आधारित यह महानाट्य लाल किले जैसे ऐतिहासिक स्थल पर किया जाकर राष्ट्रीय गौरव और सांस्कृतिक धरोहर को पुनर्स्थापित कर सांसकृतिक उत्थान का नया आयाम स्थापित करेगा। “सम्राट विक्रमादित्य” केवल इतिहास के पात्र नहीं हैं, वे भारतीय मानस के आदर्श पुरुष हैं। डॉ. मोहन यादव ने उन्हें सुशासन-प्रेरणा में बदल दिया है। उनका यह अभियान केवल उज्जैन या मध्यप्रदेश तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे भारत में सांस्कृतिक चेतना की लौ जलाने वाला है। जब लाल किले की प्राचीर पर विक्रमादित्य की गाथा गूंजेगी, तब यह केवल एक नाट्य मंचन नहीं होगा। यह भारतीय अस्मिता का उत्सव होगा।  

119 साल पुरानी ग्वालियर की धरोहर नैरोगेज ट्रेन की अब यादों में ही रह गई

ग्वालियर  119 साल पुरानी ग्वालियर की धरोहर (119 year old Gwalior heritage) नैरोगेज ट्रेन (Narrow Gauge) की अब यादों में ही रह गई है। शहर के लिए हेरिटेज ट्रेन चलाने का सपना अब सपना बनकर रह जाएगा, लेकिन रेलवे अपने नैरोगेज सेक्शन में रखे इंजनों का मेंटेनेंस हर दिन करके इन्हें आज भी जिंदा रखे हुए है। इन इंजनों के लिए तैनात कर्मचारी हर दिन इनको स्टार्ट करके इनकी देखरेख कर रहे हैं। रेलवे बोर्ड के आदेशानुसार चालू हालत में इंजनों की देखरेख करते रहना है। इसको देखते हुए यहां पर पांच कर्मचारियों की ड्यूटी इन इंजनों के मेंटेनेंस के लिए ही लगाई गई है। नैरोगेज सेक्शन में तो अब ब्रॉडगेज का काम तेजी से चल रहा है। जिससे अगले वर्ष तक श्योपुर तक तेज स्पीड से ट्रेनें दौड़ती नजर आएंगी। वहीं नैरोगेज का नामोनिशान धीरे- धीरे बंद हो जाएगा। पांच इंजन भेजे जाना है दूसरे शहर जब नैरोगेज ट्रेन बंद हुई तो यहां के इंजनों को दूसरे जोन में रेलवे द्वारा भेजने का काम शुरू किया गया। इसमें अभी भी पांच इंजनों को भेजने के लिए आदेश एक साल पहले हो चुके हैं। इसमें झांसी के लिए दो, बेंगलुरु, रेवाडी़ और भुवनेश्वर को एक- एक इंजन भेजा जाना है। यह सभी इंजन इन शहरों की शान बढ़ाएगे। 13 में से 8 इंजन बचे हैं कोरोना काल से ही नैरोगेज ट्रेन बंद हो गई है। उस समय नैरोगेज सेक्शन में 13 नए व पुराने इंजन थे। इसमें से 4 इंजन पहले ही बाहर भेजे जा चुके है। जिसमे दो इंजन मॉडर्न कोच फैक्ट्री रायबरेली, एक इंजन जबलपुर मंडल और एक चितरंजन भेजा गया है। वहीं एक इंजन काफी समय से कंडम हो चुका है। इसके चलते यहां पर अभी 8 इंजन रखे हुए है। पटरियों पर हो गए कब्जे नैरोगेज के बंद होने के साथ शहर के बीच में बिछी नैरोगेज की पटरियों पर अब कब्जा होने लगा है। ग्वालियर रेलवे स्टेशन से लेकर मोतीझील तक नैरोगेज इस रेलवे ट्रैक पर ज्यादा पटरियों के ऊपर आसपास के लोगों ने कब्जा कर लिया है। वहीं कई जगहों पर तो अब पटरी दिखाई ही नहीं दे रही है।

मेट्रो ट्रैन : बेरिकेडिंग करने से पहले ट्रैफिक के लिए कोई योजना नहीं बनाई, आम जनता हो रही परेशान

 भोपाल मेट्रो की एम्स से करोद तक ओरेंज लाइन व भदभ्दा से रत्नागिरी तक की ब्ल्यू लाइन निर्माण ने इन दिनों डेढ़ किमी लंबाई की सडक़ को खत्म कर दिया है। ये रोड ब्ल्यू लाइन में भदभदा से रत्नागिरी तक सर्वे के लिए की बेरिकेडिंग व जिंसी पुल बोगदा से रेलवे स्टेशन प्लेटफार्म छह से लेकर सिंधी कॉलोनी, करोद तक बेरिकेडिंग में है। सामान्य स्थिति में यहां से 300 पीसीयू ट्रैफिक गुजरता था, लेकिन बेरिकेडिंग करने से पहले इस ट्रैफिक के लिए कोई योजना नहीं बनाई, जिससे ये कि पास की बची संकरी रोड पर शिफ्ट हो गया, जिससे मिंटो हॉल से लेकर पुल बोगदा, रायसने रोड से लेकर करोद तक ट्रैफिक जाम के हालात बना रहा है। ठेकेदार को करना थी व्यवस्था     मेट्रो रेल कारपोरेशन ने ट्रैफिक की सुगम आवाजाही का जिम्मा संबंधित ठेकेदार को दिया है। बंद चौराहा, सडक़ के ट्रैफिक को शिफ्ट करने का जिम्मा ठेकेदार पर था, लेकिन ठेकेदार ने जिम्मेदारी नहीं उठाई। मेटो रेल कारपोरेशन ने भी ठेकेदार पर जिम्मेदारी देकर पल्ला झाड़ लिया। अब आमजन रोड पर मेट्रो काम की वजह से परेशान हो रहे हैं। अगले दो साल में पांच किमी की सडक़ मेट्रो में     मेट्रो टे्रन प्रोजेक्ट में सर्वे व पीलर्स के लिए बेरिकेडिंग लगातार बढ़ाई जा रही है। अगले दो साल में करीब शहर के अलग-अलग हिस्से में 35 से अधिक जगह पर रास्ते व सडक़ बंद होगी। पांच किमी लंबाई की सडक़ें एक समय में प्रोजेक्ट की वजह से बंद होगी। इससे संबंधित क्षेत्र में गुजरने की जगह घटेगी, आमजन परेशान होंगे। इनका कहना प्रोजेक्ट में हम ब्ल्यू लाइन का काम भी तेज कर रहे हैं। हमारी एजेंसियां तय है और समय सीमा भी तय की है। साप्ताहिक निरीक्षण के दौरान दिक्कतों को देखकर दूर कराया जाता है। कोशिश की जा रही है कि बेरिकेडिंग ज्यादा समय पर न रहे।

ठाकुरताल से लगी पहाड़ी पर शहर का पहला सिटी फॉरेस्ट विकसित किया जा रहा

जबलपुर शहर के ठाकुरताल से लगी पहाड़ी पर शहर का पहला सिटी फॉरेस्ट विकसित किया जा रहा है। वन विभाग ने मार्च तक सभी कार्य पूरे करने का लक्ष्य रखा था। लेकिन बजट में देरी से निर्माण कार्य थम गए हैं। अभी इसे पूरा होने में दो माह और लगेंगे। कई काम अधूरे, मार्च में तय की गई थी डेड लाइन जानकारों के अनुसार सिटी फॉरेस्ट में पुलिया निर्माण का कार्य अधूरा है। पर्यटकों को फॉरेस्ट की जैव विविधता समझाने के लिए लगने वाले साइन बोर्ड तैयार नहीं हुए हैं। कई वन प्रजातियों की पहचान भी बाकी है। परिसर में विश्राम स्थल का निर्माण भी प्रस्तावित किया गया है।  पेड़ों की मिलेगी जानकारी वन विभाग के अनुसार सिटी फॉरेस्ट में पर्यटक विभिन्न पेड़-पौधों की जानकारी देख सकेंगे। हर पौधे और वृक्ष के पास सूचना पट लगाए जाएंगे। जिनमें उस प्रजाति की वैज्ञानिक व आम जानकारी होगी। इसके लिए वन विभाग और एसएफआरआई के विशेषज्ञों की मदद ली जा रही है। 125 एकड़ में वन भ्रमण पथ सिटी फॉरेस्ट 125 एकड़ क्षेत्र में विकसित किया जा रहा है। यहां वन भ्रमण पथ भी तैयार किया जा रहा है। यहां से प्रकृति और वन्य जीवों को भी देखा जा सकेगा।  सिटी फॉरेस्ट निर्माण के कुछ काम अभी शेष रह गए हैं। हमारी कोशिश है कि इसे खोलने से पहले सभी काम पूरा कर लिए जाएं।     ऋषि मिश्रा, वन मंडल अधिकारी

समूचे प्रदेश में स्कूल शिक्षा विभाग की विभिन्न खेल प्रतियोगिताओं को डिजिटल प्लेटफार्म पर शिफ्ट करते हुए पेपरलेस बनाया

भोपाल स्कूल शिक्षा विभाग ने एजुकेशन पोर्टल की तर्ज पर समूचे प्रदेश में स्कूल शिक्षा विभाग की विभिन्न खेल प्रतियोगिताओं को डिजिटल प्लेटफार्म पर शिफ्ट करते हुए पेपरलेस बनाया है। विभाग का यह एक अभिनव प्रयोग है, जो खेलों की पारदर्शी प्रक्रिया को बढ़ावा देने के लिये महत्वपूर्ण कदम है। मध्यप्रदेश में शिक्षा विभाग के अंतर्गत संचालित मान्यता प्राप्त एमपी बोर्ड के समस्त विद्यालय, सीबीएसई के ऐसे विद्यालय, जो स्कूल गेम्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के एवं स्कूल शिक्षा विभाग के तत्वावधान में आयोजित विभिन्न खेलों की प्रतियोगिताओं में शामिल होना चाहते हैं, वे इस पोर्टल पर निश्चित पंजीयन शुल्क के साथ आवश्यक अभिलेख अपलोड करते हुए पंजीयन करा सकते हैं। पंजीयन 14 से 19 वर्ष से कम आयु वर्ग की प्रतियोगिता के लिये एक ही बार कराना होगा। सिस्टम में प्रति वर्ष आवश्यकतानुसार अपग्रेड किये जाने की सुविधा प्रदाय की गई है। विद्यालय में अध्ययन कर रहे नियमित खिलाड़ियों की दर्ज संख्या के मान से निर्धारित खेल शुल्क का संकलन इसी पोर्टल के माध्यम से किया जा सकेगा, जो स्वत: ही संचालनालय, संयुक्त संचालक संभाग और जिला शिक्षा अधिकारी के खाते में शासन द्वारा निर्धारित प्रतिशत अनुसार अंतरित हो जायेगा। यह सिस्टम खेलों में निष्पक्षता, पारदर्शिता एवं खिलाड़ियों की आयु के बारे में प्रमाणीकरण के साथ अपात्र खिलाड़ी को किसी भी स्तर पर प्रतियोगिता में शामिल होने से रोकता है। खेल-कूद गतिविधियों का आयोजन स्कूल शिक्षा विभाग में कार्यरत अधिकारी शिक्षक संवर्ग कर्मचारी एवं व्यायाम शिक्षकों के जिला स्तर से राज्य स्तर की विभागीय खेल-कूद प्रतियोगिता नियमित रूप से की जा रही है। विभागीय प्रतियोगिताओं में क्रिकेट (लेदर बॉल), वालीबॉल, कबड्डी, बेडमिंटन, टेबल टेनिस और एथलेटिक्स (महिला-पुरूष) खेल शामिल हैं। उक्त प्रतियोगिता में जिले से राज्य स्तर की प्रतियोगिता चयन प्रक्रिया में टीम चयन तक करीब 8 हजार स्कूल के विद्यार्थी सहभागिता करते हैं। इस प्रक्रिया में मध्यप्रदेश को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ी प्राप्त हुए हैं। मध्यप्रदेश के 11 खिलाड़ियों ने खेलो इंडिया यूथ गेम्स को किया क्वालीफाई मध्यप्रदेश के शालाओं में पढ़ने वाले 11 खिलाड़ियों ने खेलो इंडिया यूथ गेम्स-2025 की प्रतियोगिता में शामिल होने के लिये क्वालीफाई किया है। जिन खिलाड़ियों का चयन हुआ है, उनमें जूडो में नितिन बलहारा, सुभावना जोशी, सुनैन्सी, सुएंजिल कोठारी-बॉक्सिंग, सुश्रीवल्ली श्रीवास्तव-शूटिंग, सुनव्या गुप्ता-शूटिंग, युगप्रताप सिंह राठौर-शूटिंग और एथलेटिक्स में अवधेष, प्रिंस यादव, सुसृष्टि एवं सुवर्षा का चयन भी हुआ है।  

जबलपुर में इलेक्ट्रिक बसों के लिए JCTSL का बड़ा फैसला, इन 10 रूट्स पर चलेंगी 100 बसें

जबलपुर  शहरवासियों को जल्दी ही इलेक्ट्रिक एसी बसों की सौगात मिलेगी। 10 प्रमुख रूट पर बसों का संचालन होगा। जेसीटीएसएल ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। शहर को 100 इलेक्ट्रिक बस मिलने के बाद उनके संचालन की व्यवस्था इस प्रकार होगी कि निर्धारित मार्गों के प्रमुख स्टॉप पर हर पांच मिनट में बस उपलब्ध होगी। इलेक्ट्रिक बस उपलब्ध कराने के लिए वेंडर तय होने के बाद आइएसबीटी में चॉर्जिग स्टेशन स्थापित करने समेत संचालन की प्रक्रिया की तैयारियां शुरू हैं।  सेंट्रलाइज होगा सिस्टम पब्लिक ट्रांसपोर्ट का सेंट्रलाइज सिस्टम विकसित करने के लिए आइएसबीटी का एक्सटेंशन किया जाएगा। बसों के संचालन के लिए प्लेटफॉर्म विकसित करने के साथ ही चार्जिंग स्टेशन भी तैयार किया जाएगा। ताकि, बसों को यहां से संचालित करने के साथ समय पर उनकी चार्जिंग भी हो सके। वर्तमान में आइएसबीटी से साढ़े तीन सौ बसों का संचालन हो रहा है। सौ ई-बसों का संचालन शुरू होने पर यहां से संचालित बसों की संया बढ़कर साढ़े तीन सौ हो जाएगी।  36 सीटर होंगी ई-बस पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम में जुड़ने वाली एयरकंडीशन इलेक्ट्रिक बस 32-36 सीटर होंगी। पीएम ई-बस योजना के तहत केंद्रीय शासन से नगर सौ इलेक्ट्रिक बस मिलनी हैं। ई-बस निर्माता कंपनी ज्वाइंट वेंचर के माध्यम से बसों का संचालन करेंगी। इन ऑपरेटर पर ही संचालन से लेकर 12 साल तक मेंटेंनेंस का जिमा होगा। इन मार्गों पर होगा संचालन     तीन पत्ती से रांझी-घाना     तीन पत्ती से गोसलपुर     रेलवे स्टेशन से पनागर     रेलवे स्टेशन से भेड़ाघाट     दीनदयाल चौक से बरेला     दमोहनाका से भेड़ाघाट     त्रिमूर्ति नगर से ग्वारीघाट     रेलवे स्टेशन से भेड़ाघाट वाया सगड़ा     दमोह नाका से मेडिकल     रेलवे स्टेशन से बरगी केंद्र सरकार उपलब्ध कराएंगी बस पीएम ई-बस सेवा योजना के अंतर्गत नगर में ई-बसों का संचालन सार्वजनिक, निजी भागीदारी पद्धति पर किया जाएगा। ये बस केंद्र सरकार उपलब्ध कराएगी। निर्धारित अवधि में रखरखाव की जो लागत आएगी, वह भी केंद्र सरकार ही देगी।  प्रदूषण होगा कम विशेषज्ञों के अनुसार शहरवासियों को इलेक्ट्रिक बसों की सौगात मिलने पर शहरमें प्रदूषण मुक्त पब्लिक यातायात की सुविधा भी सुलभ होगी। शहर में सिटी बस सेवाओं के बुनियादी ढांचे के विस्तार और ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन को कम करना है।  70 से ज्यादा बस संचालित शहर में पब्लिक ट्रांसपोर्ट के नाम पर केवल मेट्रो बस ही उपलब्ध हैं। वर्तमान में 70 से ज्यादा मेट्रो बस नगर में 14 रूट पर संचालित हैं। सिटी ट्रांसपोर्ट कंपनी जेसीटीएसएल के अनुसार नई बसों की उपलब्धता होने पर नए रूट में बस संचालित की जाएंगी। इससे शहर का पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम को और बेहतर बनाया जा सके।  यह है स्थिति     100 बस संचालन के लिए आइएसबीटी में बनाई जाएगी जगह     350 बस आइएसबीटी से संचालित     2015 में बनकर तैयार हुआ था     2016 में शुरू हुआ संचालन  इलेक्ट्रिक बस मिलते ही प्रमुख 10 रूट उनका संचालन शुरू किया जाएगा। हालांकि, प्रक्रिया पूरी होने से लेकर बसों का संचालन शुरू होने में छह महीने लगेंगे।     सचिन विश्वकर्मा, सीईओ, जेसीटीएसएल    

इंदौर पश्चिमी रिंग रोड के लिए जमीन सर्वे का काम शुरू,किसानों को मिलेगा दोगुना मुआवजा

इंदौर  प्रशासन और किसानों के बीच मुआवजे को लेकर सहमति बनने के बाद पश्चिमी रिंग रोड(Paschimi Ring Road Indore) में आने वाली निजी जमीन का सर्वे कार्य शुरू किया गया है। सबसे पहले हातोद तहसील में शुरू हुआ सर्वे का काम गुरुवार को पूरा हो गया। तीन दिनों में तहसील के 12 गांवों की 164.8870 हेक्टेयर निजी जमीनों का सर्वे कर रिपोर्ट तैयार कर ली गई है। अब देपालपुर और सांवेर तहसील के 14 गांवों की 307.1829 हेक्टेयर जमीन का सर्वे कार्य किया जाएगा। इंदौर जिला प्रशासन और भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के द्वारा पश्चिम रिंग रोड बनाने के लिए सर्वे का काम शुरू किया गया है। शिप्रा से पीथमपुर नेट्रेक्स तक बनने वाली 64 किमी लंबी पश्चिमी रिंग रोड में अब किसानों को नई गाइडलाइन का दोगुना मुआवजा दिया जाएगा। इस पर सहमति बनने के बाद सर्वे हो रहा है। हातोद के गांवों से गुजरेगी सड़क मंगलवार से हातोद तहसील में सर्वे शुरू किया गया था। सड़क में आने वाली 158.1178 हेक्टेयर और 6.7692 हेक्टेयर अतिरिक्त निजी जमीन का सर्वे कार्य पूरा कर लिया गया। हातोद तहसील के 12 गांवों की 174.3415 हेक्टेयर जमीन से सड़क गुजर रही है। इसमें 164.8870 हेक्टेयर निजी और 9.4545 हेक्टेयर शासकीय जमीन है। शासकीय जमीन का सर्वे पहले पूरा हो चुका है। अब एनएचएआई के भूमि अधिग्रहण के लिए सक्षम प्राधिकारी (सीएएलए) द्वारा निजी जमीनों का सर्वे किया जा रहा है। 472 हेक्टेयर निजी जमीन का होगा सर्वे पश्चिम रिंग रोड इंदौर जिले की तीन तहसीलों की 570.5678 हेक्टेयर जमीन से गुजर रहा है। इसमें 472.0699 हेक्टेयर निजी और 98.1829 शासकीय जमीन आ रही है। एक साल से निजी जमीन के सर्वे का काम रुका हुआ था, लेकिन अब सर्वे किया जा रहा है। 998 किसानों की जमीनें पश्चिमी रिंग रोड तीन तहसील के 26 गांवों से गुजर रही है। इन गांवों के 998 किसानों की जमीनें सड़क में आ रही हैं। इसमें 864 किसानों की जमीन मुख्य सड़क और 134 किसानों की जमीन अतिरिक्त सड़क के लिए अधिग्रहित की जानी है। सबसे अधिक 512 किसान सांवेर तहसील के हैं। वहीं 333 हातोद और 153 किसान देपालपुर तहसील के हैं। सर्वे का काम पूरा किया गया     हातोद तहसील में सर्वे का काम पूरा कर लिया गया है। तीन दिन में 12 गांवों की सैकड़ों हेक्टेयर जमीन के सर्वे का काम पूरा किया गया। सर्वे के दौरान राजस्व विभाग और एनएचएआई के अधिकारी मौजूद रहे। – रवि वर्मा, एसडीएम हातोद  

केन्द्रीय मंत्री अमित शाह के मुख्य आतिथ्य में होगा राज्य स्तरीय सहकारी सम्मेलन

भोपाल केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह के मुख्य आतिथ्य और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में रविवार 13 अप्रैल को रवीन्द्र भवन सभागार में दोपहर 12 बजे से अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता वर्ष-2025 के अंतर्गत होने वाले राज्य स्तरीय सहकारी सम्मेलन होगा। सम्मेलन में सांसद श्री वी.डी. शर्मा विशेष अतिथि होंगे। सहकारिता मंत्री श्री विश्वास कैलाश सारंग ने शुक्रवार को मंत्रालय में सम्मेलन की तैयारियों की समीक्षा की। बैठक में पशुपालन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री लखन पटेल, अपर मुख्य सचिव श्री अशोक बर्णवाल, प्रमुख सचिव श्री उमाकांत उमराव, सहकारिता, पशुपालन, नगर निगम, पुलिस और जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। मंत्री श्री सारंग ने निर्देश दिये कि कार्यक्रम सुव्यवस्थित हो, इसके लिये अलग-अलग काम के लिये अलग-अलग अधिकारी की ड्यूटी निर्धारित की जाये। साथ ही एक कंट्रोल-रूम स्थापित किया जाये, जिसके लिये एक नोडल अधिकारी नियुक्त करें। उन्होंने बैठक व्यवस्था, पास, निमंत्रण-पत्र, वाहन पार्किंग के लिये संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिये। मंत्री श्री सारंग ने गर्मी की तीव्रता को देखते हुए पेयजल व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिये हैं। उन्होंने अधिकारियों को दी गयी जिम्मेदारियों की लिस्टिंग करने को भी कहा। उन्होंने कार्यक्रम स्थल पर मेडिकल टीम और पॉवर बैक-अप रखने के लिये निर्देश दिये। बैठक में बताया गया कि सम्मेलन में राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड अध्यक्ष श्री मीनेश शाह, मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन, केन्द्रीय सहकारिता सचिव डॉ. आशीष कुमार भूटानी भी शामिल होंगे।  

स्त्री शिक्षा की नींव रखने में ज्योतिबा फुले का अतुलनीय योगदान: राज्यमंत्री श्रीमती गौर

भोपाल पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती कृष्णा गौर ने कहा कि महात्मा ज्योतिबा फुले ने समाज में फैली कुरीतियों से लड़ने के लिए आंदोलन भी चलाया था। देश में स्त्री शिक्षा की नींव रखने और छुआछूत के खिलाफ अलख जगाने में उनका उल्लेखनीय योगदान है। राज्यमंत्री श्रीमती गौर शुक्रवार को भोपाल में सात नंबर बस स्टॉप ज्योतिबा फुले चौराहे पर मध्यप्रदेश पिछड़ा वर्ग कल्याण परिषद द्वारा आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रही थी। राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती गौर ने कहा कि भारतीय समाज को सशक्त बनाने तथा महिला शिक्षा की अलख जगाने में ज्योतिबा फुले का योगदान युगों-युगों तक याद किया जाएगा। श्रीमती कृष्णा गौर ने कहा कि अंग्रेजों की हुकूमत जब इस देश में चारों तरफ देश की जनता को गुलामी की बेड़ियों में जकड़े हुए थी तब ज्योतिबा फुले ने कहा था की शिक्षा का स्तर इस प्रकार से होना चाहिए की शिक्षा का प्रकाश समाज के कोने-कोने तक पहुंचे। उन्होंने कहा कि हम सब को इस बात का संकल्प लेना होगा कि शिक्षा हर एक व्यक्ति का मौलिक अधिकार है और हर एक व्यक्ति को शिक्षा मिलनी ही चाहिए। श्रीमती गौर ने कहा कि ज्योतिबा फुले ने हमारे सामाजिक ढांचे की जड़ को हिलाकर उसमें सामाजिक चेतना का संचार करने का काम किया था। राज्य मंत्री श्रीमती गौर ने कहा कि केंद्र में प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार लगातार दलितों, पिछड़ों को शिक्षा की दृष्टि से आगे बढ़ाने के लिए योजनाओं का संचालन कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के कुशल नेतृत्व में राज्य सरकार पिछड़े वर्गों को शिक्षित करने की दिशा में लगातार काम कर रही है। कार्यक्रम में भोपाल की महापौर श्रीमती मालती राय, सांसद श्री आलोक शर्मा, विधायक श्री भगवान दास सबनानी, माली समाज के अध्यक्ष श्री जी.पी. माली सहित संयुक्त माली, सैनी, मुरार समाज के प्रतिनिधि बड़ी संख्या में उपस्थित थे।  

पशुपालन राज्य मंत्री पटेल ने किया पुंगनूर संरक्षण एवं अनुसंधान केन्द्र, पालमनेर का भ्रमण

भोपाल पशुपालन एवं डेयरी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री लखन पटेल ने विगत दिनों आंध्रप्रदेश के “पुंगनूर संरक्षण एवं अनुसंधान केन्द्र, पालमनेर”, जिला चित्तूर का भ्रमण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने प्रमुख रूप से “पुंगनूर” नस्ल की गायों के पालन पोषण के बारे में जानकारी प्राप्त की तथा मध्यप्रदेश में इसके पालन की संभावनाओं को तलाशा। गायों की यह नस्ल अपने छोटे आकार, कम रखरखाव और तुलनात्मक रूप से अच्छी दूध देने वाली नस्ल के लिए जानी जाती है। भ्रमण में मंत्री श्री पटेल द्वारा अनुसंधान केन्द्र के संचालक एवं उपस्थित अन्य अधिकारियों से पुंगनूर नस्ल के बारे में विस्तृत जानकारी ली। उन्होंने पालमनेर भेड़ प्रजनन केन्द्र का निरीक्षण भी किया। पालमनेर भेड़ प्रजनन एवं संरक्षण केन्द्र में नेल्लोर प्रजाति की नस्ल का संवर्धन एवं संरक्षण किया जा रहा है। भ्रमण के दौरान उनके साथ पशुपालन एवं म.प्र. कुक्कुट विकास निगम के अधिकारी भी उपस्थित थे। पशुधन अनुसंधान केंद्र, पालमनेर पशुधन अनुसंधान केंद्र, पालमनेर, आंध्र प्रदेश मुख्य रूप से गायों की “पुंगनूर” नस्ल को सुधारने और पुनर्जीवित करने का कार्य करता है। यह गाय दुनिया की सबसे छोटी नस्लों में से एक है और मूलत: चित्तूर जिले की प्रजाति है। इस अनुसंधान केंद्र को वर्ष 1967 में पशुपालन विभाग से आंध्रप्रदेश कृषि विश्वविद्यालय को स्थानांतरित कर दिया गया। इस केंद्र पर मूल रूप से पुंगनूर नस्ल के मवेशी हैं। इस नस्ल को यूनाइटेड किंगडम से आयातित केरी बैलों के साथ क्रॉस किया गया था। इन संकर नस्लों ने बहुत अच्छा प्रदर्शन किया और इस क्षेत्र के कृषक समुदाय के बीच लोकप्रिय हो गईं, क्योंकि इनकी दूध की पैदावार बहुत अधिक थी। बाद में, केंद्र को एक मॉडल प्रदर्शन इकाई के रूप में काम करने और पुंगनूर मवेशियों के जर्मप्लाज्म, नेल्लोर भेड़ जोड़ी आदि के बेहतर प्रजनन स्टॉक की आपूर्ति करने के लिए कम्पोजिट पशुधन फार्म के रूप में विकसित किया गया। यहां नस्ल की विशेषताओं, उत्पादकता और प्रजनन प्रदर्शन का अध्ययन करने के लिए पुंगनूर मवेशियों का संरक्षण प्रगति पर है।  

सीएम राइल स्कूल के प्राचार्य को दो छात्रों के खिलाफ पुलिस में शिकायत करना महंगा पड़ा

खरगोन जिला मुख्यालय से आठ किमी दूर टेमला में संचालित हो रहे सीएम राइल स्कूल के प्राचार्य को दो छात्रों के खिलाफ पुलिस में शिकायत करना महंगा पड़ गया है। प्राचार्य ने पूर्व और वर्तमान छात्र के खिलाफ छेड़छाड़ सहित अभद्र व्यवहार की शिकायत की थी, जो छात्रों को इस कदर नागवार गुजरी की दोनों ने प्राचार्य पर शिकायत वापस लेने के दबाव में हमला कर दिया है। प्राचार्य को सिर में गंभीर चोट आई है, उन्हें लहुलुहान हालत में जिला अस्पताल में आईसीयू में भर्ती किया है। अस्पताल में भर्ती प्राचार्य के सिर में गंभीर चोट लगी। हमले की सूचना मिलने पर मप्र शिक्षक संघ के पदाधिकारियों के साथ ही विधायक बालकृष्ण पाटीदार ने भी घायल प्राचार्य के अस्पताल पहुंचकर हाल जाने और घटना पर नाराजगी दर्ज कराई। उपचाररत प्राचार्य अशोक सिंह पंवार ने बताया कि गत वर्ष अगस्त और सितंबर में उन्होंने स्कूल के पूर्व छात्र और वर्तमान छात्र के खिलाफ मेनगांव थाने में दो अलग- अलग शिकायत दर्ज कराई थी, जिसका प्रकरण विचाराधीन है। इन मामलों को लेकर शुक्रवार को सुबह करीब 10.30 बजे दोनों छात्र अपने दो दोस्तों के साथ उनसे कार्यालयीन समय में मिलने आए वे स्टाफ कक्ष में बैठे थे, दोनों ने शिकायत वापस लेने का दबाव बनाते हुए गाली- गलौच की। मौजूद स्टॉफ को वीडियो बनाने के लिए कहा तो दोनों उग्र हो गए और कुछ देर बाहर जाने के बाद दोबारा लौटे और टेबल पर लगे कांच को उठाकर मेरे सिर पर करीब छह बार वार कर दिया। शिक्षक संघ ने सौंपा ज्ञापन हमले की गंभीरता को देखते हुए मप्र शिक्षक संघ, राज्य शिक्षा संघ ने आक्रोश दर्ज कराया है। शाम को कलेक्टर- एसपी कार्यालय पहुंचे पदाधिकारी प्रांतीय उपाध्यक्ष रमेश पाटीदार, प्रांत सह संगठन मंत्री हीरालाल तिरोले, जिलाध्यक्ष सुनील भावसार, नरेंद्र चौहान, संतोष पटेल सहित बड़ी संख्या में पहुंचे महिला शिक्षकों ने भी घटना की निंदा की है। उन्होंने प्राचार्य पर हमला करने वाले लोगों की नामजद शिकायत करते हुए कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

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