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मध्यप्रदेश में शासकीय वाहनों को 80 प्रतिशत तक इलेक्ट्रिक वाहनों में परिवर्तित करने का कार्यक्रम बनाया

 भोपाल  मध्य प्रदेश सरकार प्रदेश में पर्यावरण संरक्षण और हरित विकास को लेकर बहुत गंभीर है इसलिए शासन ने 750 करोड़ रुपये का प्रावधान कर मुख्यमंत्री नगरीय विकास योजना बनाई है इस पंचवर्षीय योजना में इलेक्ट्रिक व्हीकल को बढ़ावा देने के प्रयास किये जायेंगे साथ ही प्रदेश के पांच शहरों भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर और उज्जैन को ईवी मॉडल सिटी के रूप में विकसित किया जाएगा। नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने प्रदेश के नगरीय क्षेत्र में हरित स्थान विकास और सौन्दर्यपरक पर्यावरण के लिये मुख्यमंत्री नगर विकास योजना के क्रियान्वयन का निर्णय लिया है। पांच वर्ष की इस योजना में वर्ष 2028-29 तक के लिये 750 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। यह योजना राज्य सरकार द्वारा अपने वित्तीय संसाधनों से संचालित करेगी। प्रदेश में विकसित होंगे नगर वन योजना के मुताबिक विभाग द्वारा प्रत्येक नगर वन के विकास के लिये अधिकतम 2 करोड़ 50 लाख रुपये की वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जायेगी। योजना में न्यूनतम क्षेत्रफल प्रति एकड़ 10 लाख रुपये नगर वन के सृजन के लिये नगरीय निकायों को अनुदान स्वरूप दिये जाएंगे। योजना के संबंध में नगरीय निकायों को निर्धारित प्रावधान के अनुसार प्रस्ताव भेजने के निर्देश दिये गये है। मुख्यमंत्री जन सहभागिता निर्माण योजना का मिलेगा लाभ नगरीय क्षेत्रों में जन-भागीदारी से नागरिकों की सुविधा के लिये अद्योसंरचना विकास के लिये “मुख्यमंत्री जन-सहभागिता निर्माण’’ योजना चलाने का भी निर्णय लिया है। योजना में 150 करोड़ रुपये प्रति वर्ष के हिसाब से 5 वर्षों के लिये 750 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। योजना में प्रतिवर्ष नगरपालिक निगमों के लिये 5 करोड़ रुपये, नगरपालिकाओं को एक करोड़ रुपये और नगर परिषदों को 25 लाख रुपये का अनुदान दिया जाएगा। जन-भागीदारी एवं राज्य शासन की आर्थिक सहायता का अनुपात समान रूप से 50-50 प्रतिशत रहेगा। योजना में नगरीय क्षेत्र के मोहल्लों में सीमेंट- कांक्रिट निर्माण, सीवरेज की उचित व्यवस्था के साथ कचरे के निपटान की उचित व्यवस्था को वरीयता दी जाएगी। योजना का क्रियान्वयन वर्ष 2028-29 तक किया जाएगा। सरकारी वाहन इलेक्ट्रिक वाहन में बदलेंगे प्रदेश के पर्यावरण को शुद्ध रखने की दिशा में इलेक्ट्रिक वाहनों को अधिक प्रोत्साहन देने की योजना शासन ने बनाई है योजना के तहत नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने शासकीय वाहनों को 80 प्रतिशत तक इलेक्ट्रिक वाहनों में परिवर्तित करने का कार्यक्रम बनाया है। इसी क्रम में भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर और उज्जैन को ईवी मॉडल सिटी के रूप में विकसित किया जाएगा। हर 20 किलोमीटर पर होगा चार्जिंग स्टेशन योजना के तहत प्रदेश में इलेक्ट्रिक वाहन के लिये हर 20 कि.मी. पर चार्जिंग स्टेशन और हाई-वे पर 100 कि.मी. पर फास्ट चार्जिंग सुविधा स्थापित करने का कार्य शुरू कर दिया गया है। मध्य प्रदेश की ईवी नीति में सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन खोलने पर सब्सिडी का प्रावधान भी किया गया है। प्रदेश में चलेंगी 552 शहरी बस इसके अलावा प्रधानमंत्री ई-बस सेवा योजनांतर्गत 6 शहरों भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, सागर और उज्जैन में 552 शहरी बसों के संचालन पर तेजी से कार्य किया जा रहा है। केन्द्र सरकार के शहरी कार्य मंत्रालय ने भोपाल, इंदौर, जबलपुर, उज्जैन, सागर के बस डिपो, अद्योसंरचना के प्रस्ताव को भी स्वीकृति दे दी है।  

खुलासा : मध्य प्रदेश में9,000 फिजियोथेरेपिस्ट में से केवल 40 क्लीनिक सरकार के स्वास्थ्य पोर्टल पर पंजीकृत

भोपाल  मध्य प्रदेश विधानसभा में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। राज्य में 9,000 से ज़्यादा फिजियोथेरेपिस्ट काम कर रहे हैं, लेकिन सरकारी हेल्थ पोर्टल पर सिर्फ 40 फिजियोथेरेपी क्लीनिक ही रजिस्टर्ड हैं। यह जानकारी 26 मार्च तक की है। इतने कम क्लीनिकों के रजिस्ट्रेशन से अवैध और बिना रजिस्ट्रेशन वाले क्लीनिकों पर शक गहरा गया है। इसलिए इनकी जांच शुरू हो गई है। सरकार अब ऐसे क्लीनिकों पर कार्रवाई करने की तैयारी में है। राज्य के हेल्थ कमिश्नर तरुण राठी ने सभी जिलों के CMHO को एक आदेश दिया है और कहा है कि अवैध फिजियोथेरेपी क्लीनिकों को पहचाना जाए और उन्हें बंद किया जाए। साथ ही उन्होंने CMHO को यह भी सुनिश्चित करने को कहा है कि जो क्लीनिक सही हैं, वे सरकार के पोर्टल पर अपना रजिस्ट्रेशन कराएं। यह कार्रवाई विधानसभा सत्र में उठे सवालों के बाद की जा रही है। सवालों में बिना रजिस्ट्रेशन वाले क्लीनिकों की बढ़ती संख्या पर चिंता जताई गई थी। यह राज्य के नर्सिंग होम एस्टेब्लिशमेंट एक्ट का उल्लंघन है। इस एक्ट के अनुसार, सभी मेडिकल सर्विस देने वालों का रजिस्ट्रेशन होना जरूरी है। रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया और आसान बनाए सरकार MP फिजियोथेरेपिस्ट वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष सुनील पांडे ने कहा कि अवैध फिजियोथेरेपी क्लीनिकों के खिलाफ कार्रवाई जरूर होनी चाहिए, लेकिन सरकार को रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया को आसान बनाना चाहिए। साथ ही फिजियोथेरेपिस्ट को MP एलाइड एंड हेल्थ केयर काउंसिल में तुरंत रजिस्टर करना चाहिए। वादे पूरे नहीं करने का भी आरोप पहले फिजियोथेरेपिस्ट पैरामेडिकल काउंसिल में रजिस्ट्रेशन कराते थे। एक साल पहले तक इस काउंसिल में 3,028 फिजियोथेरेपिस्ट रजिस्टर्ड थे। जांच में यह भी पता चला है कि फिजियोथेरेपी शिक्षा और सेवाओं को लेकर किए गए वादे पूरे नहीं हुए हैं। पहले घोषणा की गई थी कि सभी सरकारी मेडिकल कॉलेजों में फिजियोथेरेपी डिग्री कोर्स शुरू किए जाएंगे। साथ ही सरकारी अस्पतालों में फिजियोथेरेपिस्ट की नियुक्ति भी बढ़ाई जाएगी, लेकिन अभी तक ऐसा कुछ नहीं हुआ है। सरकार की कार्रवाई से जागी उम्मीद इस पूरे मामले से कई सवाल उठ रहे हैं। क्या सरकार अवैध क्लीनिकों पर लगाम लगाने में सफल होगी? क्या फिजियोथेरेपिस्ट के लिए रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया आसान हो पाएगी? और क्या फिजियोथेरेपी शिक्षा और सेवाओं को लेकर किए गए वादे पूरे होंगे? इन सवालों के जवाब आने वाले समय में ही मिल पाएंगे, लेकिन फिलहाल, सरकार की कार्रवाई से फिजियोथेरेपी के क्षेत्र में सुधार की उम्मीद जगी है।

विदिशा रेलवे स्टेशन जल्द ही यात्रियों को नए भवन की चमचमाती सुविधाओं का लाभ मिलेगा, शुरू होंगी VIP सुविधाएं

 विदिशा मध्य प्रदेश के विदिशा रेलवे स्टेशन पर अमृत भारत योजना के तहत चल रहे नवीनीकरण कार्य लगभग पूर्ण हो चुके हैं। अब स्टेशन का चेहरा बदलने ही वाला है। जल्द ही यात्रियों को नए भवन की चमचमाती सुविधाओं का लाभ मिलेगा। इस बहुप्रतीक्षित आधुनिक स्टेशन का लोकार्पण जल्द ही तय होगा। उससे पहले केंद्रीय कृषि मंत्री और विदिशा सांसद शिवराज सिंह चौहान खुद निर्माण कार्यों का निरीक्षण करेंगे। निरीक्षण अगले सप्ताह संभावित माना जा रहा है। कयास यह भी लगाए जा रहे है कि इसका लोकार्पण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कर सकते है। प्लेटफॉर्म एक से चार तक नया अनुभव स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर एक से चार तक यात्रियों की सुविधाओं में जबरदस्त इजाफा किया गया है। वर्षों पुरानी व्यवस्थाओं को पूरी तरह से बदला गया है। कुल 18.6 करोड़ रुपये की लागत से रेलवे स्टेशन को नया रूप दिया गया है। अधिकतम एक से डेढ़ महीने में प्लेटफॉर्म नंबर एक की तरफ बने मुख्य द्वार को यात्रियों के लिए खोल दिया जाएगा। इसके साथ ही तीन स्तर के शानदार वीआइपी वेटिंग हॉल भी उपयोग के लिए उपलब्ध होंगे। स्टेशन होगा फाइव स्टार जैसा नए स्टेशन भवन में टिकट बुकिंग ऑफिस, वीआइपी लाउंज, इमरजेंसी गेट, टीटीई लॉबी और पार्सल रूम जैसी सुविधाएं यात्रियों को हाई-क्लास अनुभव देंगी। वहीं, स्टेशन पर आने वाले वाहनों के लिए अलग से पार्किंग की भी व्यवस्था की जा रही है। यह सभी निर्माण कार्य अब अंतिम चरण में हैं और जल्द ही यात्रियों को इनका सीधा लाभ मिलेगा। शिवराज सिंह से निरीक्षण की मांग रेलवे उपयोगकर्ता सलाहकार समिति के सदस्य कमलेश सेन ने केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखकर निर्माण कार्यों का अवलोकन करने और लोकार्पण की तिथि तय करने की मांग की है। उनका कहना है कि इससे यात्रियों को जल्द से जल्द सुविधाएं मिलने लगेंगी। विदिशा स्टेशन पर प्रतिदिन करीब 12 हजार यात्री पहुंचते हैं और यहां करीब 100 ट्रेनों का स्टॉपेज होता है। इन सभी यात्रियों को नए निर्माण कार्यों से सीधा लाभ मिलेगा। अधूरे कार्य ने बढ़ाया इंतजार जहां एक ओर स्टेशन का नवीनीकरण लगभग पूरा हो चुका है, वहीं दूसरी ओर फुट ओवरब्रिज का कार्य अभी अधूरा है। प्लेटफॉर्म नंबर एक के बाहरी हिस्से से लेकर प्लेटफॉर्म चार के छोर तक प्रस्तावित ओवरब्रिज का 50 फीसदी से ज्यादा काम अब भी बाकी है। यही नहीं, तीन स्वचालित सीढ़ियों (एस्केलेटर) का कार्य तो अब तक शुरू भी नहीं हो पाया है। यात्रियों को इन सुविधाओं के लिए अभी लंबा इंतजार करना होगा। प्रधानमंत्री कर सकते हैं उद्घाटन रेलवे स्टेशन के नए भवन के लोकार्पण को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के निरीक्षण के बाद उद्घाटन की तिथि तय की जाएगी। पूरी संभावना है कि इस भव्य और आधुनिक स्टेशन भवन का लोकार्पण स्वयं प्रधानमंत्री द्वारा किया जाएगा। इससे न सिर्फ विदिशा को गौरव मिलेगा, बल्कि यात्रियों को भी उच्चस्तरीय सुविधाओं का तोहफा मिलेगा।

स्कूल शिक्षा विभाग में कार्यों के क्रियान्वयन की मॉनीटरिंग – परिणामों की समीक्षा के लिये डिजिटल प्लेटफार्म तैयार किया गया

भोपाल स्कूल शिक्षा विभाग में अकादमिक एवं प्रशासनिक कार्यों के क्रियान्वयन की मॉनीटरिंग तथा परिणामों की समीक्षा के लिये डिजिटल प्लेटफार्म तैयार किया गया है। इस प्लेटफार्म पर विभिन्न स्तरों पर जानकारी की त्वरित उपलब्धता तथा उनके आधार पर आवश्यक सुधारात्मक कार्यवाही की व्यवस्था की गयी है। स्कूल शिक्षा विभाग ने इस वर्ष एक अप्रैल, 2025 को एजुकेशन पोर्टल-3.0 शुरू किया है। विद्यार्थी प्रवेश प्रणाली प्रदेश में एक अप्रैल से नवीन अकादमिक सत्र में सभी शासकीय और अशासकीय विद्यालयों में प्रवेश की कार्यवाही एजुकेशन पोर्टल-3.0 पर की जा रही है। इसके लिये स्टूडेंट डायरेक्ट्री मैनेजमेंट सिस्टम तैयार किया गया है। पोर्टल पर कक्षा-1 में संभावित पात्र विद्यार्थियों की सूची संबंधित शाला को उनके ग्राम और बसाहट के अनुसार प्रदर्शित की गई है। इस सुविधा से पात्र विद्यार्थियों को प्रवेश कराने में सुलभता होगी। शाला प्रभारी द्वारा सूची के अनुसार पालकों से सम्पर्क कर विद्यार्थियों को प्रवेश दिलाया जायेगा। इस वर्ष नवीन पोर्टल पर सभी शालाओं एवं उनमें पदस्थ शिक्षकों को लॉग इन आईडी दी गई है। शाला प्रवेश के समय दस्तावेज के अभाव में किसी भी विद्यार्थी को प्रवेश से वंचित नहीं रखा जायेगा। कक्षोन्नति पूर्व से शालाओं में दर्ज विद्यार्थियों की अगली कक्षा में प्रवेश के लिये विगत वर्ष 2024-25 में कक्षा-1 से 8 तक की शालाओं में अध्ययनरत विद्यार्थियों की जानकारी प्रदर्शित की गई है। शिक्षक द्वारा परीक्षा में शामिल होने वाले विद्यार्थियों की जानकारी पोर्टल पर संबंधित शिक्षक या स्कूल की आईडी से चिन्हित की जायेगी। कक्षा 9 से कक्षा 12 तक के विद्यार्थियों के समक्ष पास अथवा फेल की प्रविष्टि करते हुए प्रतिशत अंकित करने पर विद्यार्थी अगली कक्षा में पोर्टल पर स्वत: ही प्रवेशित हो जायेंगे। प्रदेश की ऐसी प्राथमिक एवं माध्यमिक शालाओं में जहाँ अगली कक्षा क्रमश: 6 और 9 उपलब्ध नहीं हैं, ऐसी स्थिति में कक्षा-5, 8 एवं कक्षा-10वीं के विद्यार्थियों को पूर्व की शाला के प्रधानाध्यापक, प्राचार्य विद्यार्थियों एवं पालकों से चर्चा कर समीप शाला में कक्षा-6, 9 एवं कक्षा 11 में ऑनलाइन प्रवेशित करायेंगे। संबंधित शाला जहाँ प्रवेश होना है, ऐसे विद्यार्थियों की सूची को समीपस्थ विद्यालय के शिक्षकों-शालाओं के लॉगइन में होगी। वरिष्ठ शाला के प्राचार्य भी विद्यार्थी पर क्लिक कर उसे अपनी संस्था में अपने स्तर से भी दर्ज कर सकेंगे। शासकीय शालाओं के अलावा अन्य सभी प्रबंधन की शालाएँ, जिनमें प्रायवेट स्कूल, मदरसा, केन्द्रीय विद्यालय और नवोदय आदि को उनकी शाला के यूडीआईएसई कोर्ट के माध्यम से लॉग इन कर संबंधित शाला के प्राचार्य द्वारा शाला के समस्त विद्यार्थियों का प्रवेश, पोर्टल पर किया जायेगा। शैक्षणिक वर्ष के 2 माह के भीतर ड्रॉप-आउट की पहचान करना, जिनमें ऐसे छात्र, जिनकी पदोन्नति या प्रवेश की सूचना अगले शैक्षणिक वर्ष में नहीं दी गयी है, उनकी पहचान कर उनका प्रवेश कराने की व्यवस्था की जायेगी। एजुकेशन पोर्टल-3.0 पर सभी शासकीय और प्रायवेट स्कूलों के लिये सुविधाएँ उपलब्ध करायी जा रही हैं। इसमें सभी बोर्ड जैसे एमपी बोर्ड, सीबीएसई, मदरसा बोर्ड और संस्कृत बोर्ड के अंतर्गत संचालित शालाएँ, केन्द्रीय विद्यालय, सैनिक स्कूल और नवोदय विद्यालय भी पंजीकृत हैं।  

रूपनिया डेम में एक व्यक्ति का शव ठिकाने लगाने जा रहे तीन व्यक्तियों को ग्रामीणों ने पकड़ लिया तथा उनकी पिटाई की

रतलाम  जिले के रिंगनोद थाना क्षेत्र के ग्राम मोरिया के समीप रूपनिया डेम में एक व्यक्ति का शव ठिकाने लगाने जा रहे तीन व्यक्तियों को ग्रामीणों ने पकड़ लिया तथा उनकी पिटाई की। सूचना मिलने पर पुलिस अधिकारी व जवान मौके पर पहुंचे तथा तीनों व्यक्तियों को हिरासत में ले लिया। मृतक की पहचान 32 वीं बटालियन के प्रधान आरक्षक गुलाबसिंह पंवार निवासी ग्राम डाबड़िया राजपूत थाना तराना जिला उज्जैन के रूप में हुई है। पुलिस आरोपितों से पूछताछ कर रही है।     जानकारी के अनुसार सोमवार सुबह जिला मुख्यालय से करीब 35 किलोमीटर दूर ग्राम मोरिया के समीप रूपनिया डैम में कुछ व्यक्ति कार में एक व्यक्ति का शव लेकर उसे ठिकाने लगाने पहुंचे थे।     तभी गांव के चौकीदार ने उन्हें देख लिया तो आरोपित कार लेकर वहां से भागे। वे कार लेकर पास के गांव रणायरा गुर्जर होकर जा रहे थे तभी रास्ते में कार खराब होकर रूक गई।     इसी बीच आरोपित कार से उतरे तथा कार छोड़कर भागने लगे। ग्रामीण उन्हें भागता देख कार के पास पहुंचे तो उसमें एक व्यक्ति का शव था।     सूचना मिलने पर जावरा ग्रामीण एसडीओपी संदीप मालवीय, एसआई शिवेंद्र कुमार व अन्य अधिकारी मौके पर पहुंचे तथा तीनों को हिरासत में ले लिया। जीप के सामने आकर ग्रामीणों को सौंपने की मांग     पुलिस आरोपितों को बैठाकर जीप से ले जाने लगी तो ग्रामीण जीप के सामने आकर आरोपितों को उन्हें सौंपने की मांग करने लगे।     एक एसआई पुलिस जीप के बौनट पर बैठकर गुस्ताएं ग्रामीणों को शांत करने का प्रयास करने लगे।     वे ग्रामीणों को आरोपितों को पकड़ने के लिए धन्यवाद देते हुए कहने लगे कि आपके सहयोग से ही आरोपित पकड़ में आए है।     आरोपितों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। इस पर ग्रामीण शांत हुए तथा पुलिस आरोपितों को जीप से रिंगनोद थाने पर ले गई। पूछताछ की जा रही है     प्रारंभिक पूछताछ में एक आरोपित द्वारा किसी महिला पर बुरी नजर रखने की बात को लेकर घटना सामने आई है। हत्या किस स्थान पर की गई, यह अभी स्पष्ट नहीं हो पाया है। मृतक के स्वजन को सूचना दी गई है। शव जावरा के सरकारी अस्पताल में रखवाया गया है। आरोपितों तों से पूछताछ की जा रही है-संदीप मालवीय, एसडीओपी जावरा  

इटारसी राजमार्ग पर बस पलटी, दो लोगों की मौत की खबर

इटारसी  राष्ट्रीय राजमार्ग 46 पर सोमवार दोपहर पथरौटा पुलिया के पास अनियंत्रित होकर एक यात्री बस पलट गई। हादसे में बस सवार एक महिला यात्री समेत दो लोगों की मौत की खबर है। सूचना मिलते ही एंबुलेंस एवं पथरौटा पुलिस मौके पर पहुंची। इसके बाद राहत बचाव का कार्य शुरू किया गया। बस में फंसे स्कूली बच्चों एवं अन्य यात्रियों को बाहर निकाला गया। सूचना पर एसडीएम टी प्रतीक राव, एसडीओपी वीरेंद्र मिश्रा समेत सारे अधिकारी सरकारी अस्पताल पहुंचे। ड्राइवर की लापरवाही, हो गया फरार इटारसी से ऑर्डनेंस फैक्ट्री परिसर के लिए चलने वाली छत्रपाल पहलवान ढाबा कंपनी की बस क्रमांक एमपी 39, जेडजी 4118 चालक की लापरवाही से पलट गई। बस में इटारसी आने वाले कई यात्री सवार थे, जिनमें से दो लोगों की मौत हुई है, अन्य यात्रियों को भी चोट पहुंची है। पुलिस के अनुसार बस चालक हादसे के बाद भाग गया है। हादसे में इन लोगों को ज्यादा चोटें गोकल पुरी (78) निवासी, नर्मदापुरम शाजरा खातून निवासी, ऑर्डनेंस फैक्ट्री रीना धुर्वे (35) निवासी, इटारसी इठल आदिवासी (40) निवासी, ऑर्डनेंस फैक्ट्री ज्योति इरपाचे पिता कृष्ण चन्र्द इरपाचे (22) निवासी, ऑर्डनेंस फैक्ट्री दिव्या पिता रमेश (29) निवासी, ऑर्डनेंस फैक्ट्री बिट्ठल पंवार (35) निवासी, जमाईकला ऑर्डनेंस फैक्ट्री स्वनिल वर्मा (47) निवासी, ऑर्डनेंस फैक्ट्री मनीषा कलाम (21) निवासी, ऑर्डनेंस फैक्ट्री

उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा विश्वविद्यालय महापुरुषों के निर्माण की फैक्ट्री होते हैं और शिक्षकगण इन संस्थाओं के कुशल कारीगर होते

भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि विश्वविद्यालय महापुरुषों के निर्माण की फैक्ट्री होते हैं और शिक्षकगण इन संस्थाओं के कुशल कारीगर होते हैं। उन्होंने रवींद्रनाथ टैगोर के उद्धरण का उल्लेख करते हुए कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री प्राप्त करना नहीं, बल्कि व्यक्तित्व का समग्र विकास होना चाहिए। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने रवींद्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय, भोपाल के तृतीय दीक्षांत समारोह में विद्यार्थियों को उपाधि प्रदान की और उज्जवल भविष्य की शुभकामनाएं दीं। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि अपने ज्ञान का प्रयोग समाज के उत्थान में करें। केवल व्यक्तिगत सफलता ही नहीं, समाज और देश के विकास में भी भागीदारी आवश्यक है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि बड़े पद पर पहुँचने के बाद ही असली कार्य प्रारंभ होता है। अपने योगदान से समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने का प्रयास करें। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में हो रहे राष्ट्र के तीव्र विकास का उल्लेख करते हुए कहा कि देश अधोसंरचना, आर्थिक समृद्धि, और शिक्षा के क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति कर रहा है। उन्होंने वर्ष 2047 तक भारत को विश्वगुरु बनाने के संकल्प को दोहराया और कहा कि ‘स्किल, स्केल और स्पीड’ के तीन स्तंभों पर काम किया जा रहा है। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कथन को उद्धृत करते हुए कहा कि “धरती से दौलत निकालनी होगी”- इस विचारधारा को मूर्त रूप देते हुए ‘नदी जोड़ो परियोजना’ के माध्यम से कृषि क्षेत्र में नव युग की शुरुआत हो रही है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि आज युवाओं के पास विकास के बहुत अवसर हैं। इन अवसरों का लाभ उठायें। उन्होंने युवाओं से आहवान किया कि वे नशे जैसी सामाजिक बुराइयों से दूर रहें और अपनी ऊर्जा का सदुपयोग स्वयं, समाज, देश और विश्व के कल्याण के लिये करें। उन्होंने कहा कि समाज युवाओं की ओर आशा भरी दृष्टि से देख रहा है और युवाओं को इस भरोसे पर खरा उतरना होगा। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने रवींद्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय की दीक्षांत समारोह स्मारिका तथा “कंप्यूटर एक परिचय” पुस्तक के 41वें संस्करण का विमोचन भी किया। समारोह में रवींद्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय के कुलाधिपति संतोष चौबे, कुलगुरु डॉ. आर.पी. दुबे, इसरो के वरिष्ठ एयरोस्पेस वैज्ञानिक राधाकांत पाढ़ी सहित अनेक गणमान्य नागरिक, शिक्षकगण एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।  

भिक्षा वृत्ति से मुक्त देश का सबसे स्वच्छ शहर इंदौर अब अन्य शहरों के लिए प्रेरक भूमिका निभाएगा

 इंदौर  भिक्षा वृत्ति से मुक्त देश का सबसे स्वच्छ शहर इंदौर अब अन्य शहरों के लिए प्रेरक भूमिका निभाएगा। इंदौर के इस अभियान की राष्ट्रीय स्तर पर सराहना के बाद अब सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय द्वारा सात-आठ अप्रैल को देहरादून में आयोजित चिंतन शिविर में इस अभियान का प्रजेंटेशन भी राज्य सरकार देगी, ताकि देश के अन्य प्रदेश भी इस अभियान से प्रेरित हो सकें। इंदौर इस तरह का पहला शहर भी बना जहां भिक्षा लेने और लेने पर प्रकरण दर्ज किया गया। शहर को भिक्षा मुक्त करने में प्रशासन को करीब एक वर्ष का समय लगा है। फरवरी-2024 में शुरू हुए इस अभियान को तीन चरण में चलाया गया। भिक्षा देने और लेने वालों पर आपराधिक प्रकरण दर्ज किए गए। दल ने 825 वयस्क लोगों का रेस्क्यू कर सेवाधाम आश्रम भेजा। भिखारियों को सामान देने पर होगा केस दर्ज करीब 115 बच्चों को बाल देखरेख संस्थान में रखा। इसी वर्ष दो जनवरी को कलेक्टर ने एक आदेश भी जारी किया था। आदेश के अनुसार जो व्यक्ति भिक्षुओं को भिक्षा स्वरूप कोई भी चीज देता है या इनसे कोई सामान खरीदता हैं, तो उसके विरुद्ध आपराधिक प्रकरण दर्ज किया जाएगा। इसी कड़ी में अलग-अलग जगहों पर तीन लोगों पर अब तक आपराधिक प्रकरण भी दर्ज हुआ है। अभियान में भिक्षावृत्ति में लिप्त 172 बच्चों को स्कूल में प्रवेश दिलाया जा चुका है। बच्चों के स्वजन को भी रोजगार दिलाया जा रहा है। इसी माह में 50 लोगों को रोजगार दिलाया जाएगा। एक हजार रुपये का इनाम अभियान के तहत प्रशासन ने नवाचार भी किया। इसमें भिक्षावृत्ति से जुड़े लोगों की सूचना देने पर एक हजार रुपये का इनाम देने की घोषणा हुई। प्रशासन अब तक 28 लोगों को एक हजार रुपये की राशि देकर सम्मानित भी कर चुका है। प्रशासन की यह सूचना सोशल मीडिया पर इतनी वायरल हुई कि देशभर से काल आने लगे। इंदौर को भिक्षावृत्ति से मुक्त करना आसान नहीं था इस अभियान में सबसे बड़ी कठिनाई यह थी कि पकड़े जाने पर भिक्षुक खुद को भिक्षुक नहीं मानता था। इसलिए दल ने वीडियो रिकार्डिंग की। दल के सामने यह भी समस्या थी कि रेस्क्यू किए गए भिक्षुकों में से यह छांटना कि कौन भिक्षुक आगे भिक्षावृत्ति छोड़ देगा और कौन यह नहीं छोड़ेगा, किसको अल्पकाल के लिए रखकर छोड़ दिया जाए और किसको सेवा धाम उज्जैन भेजा जाए। अभियान के कारण भिक्षुकों ने समय और जगह दोनों बदल ली। दूसरे राज्यों से आने वाले भिक्षुक समूह में वर्षो से इंदौर में रह रहे थे, उनकी काउंसिलिंग कर वापस भेजना दल के लिए चुनौतीपूर्ण काम था। कई बार टीम के साथ धक्का-मुक्की और छीना-झपटी की कोशिश भी हुई, लेकिन दल ने हर बार समझाइश देकर अपना अभियान जारी रखा। देहरादून में होगा चिंतन शिविर     प्राइम मिनिस्टर अवॉर्ड फार एक्सीलेंस के लिए इस अभियान का नाम भेजा गया है। इसके दो चरण पूरे हो चुके हैं। साथ ही देहरादून में होने वाले चिंतन शिविर में इस प्रोजेक्ट को पूरे देश के सामने रखा जाएगा। – दिनेश मिश्रा, प्रभारी, भिक्षावृत्ति उन्मूलन अभियान दूसरे राज्य ले रहे अभियान की जानकारी     अभियान में बेहतर परिणाम आए हैं। इंदौर की राह पर प्रदेश के अन्य जिलों में भी इस अभियान को लागू किया गया है। साथ ही अन्य राज्यों से भी अभियान को लेकर जानकारी ली जा रही है। – आरएन बुधोलिया, जिला कार्यक्रम अधिकारी, महिला व बाल विकास विभाग मुहिम से आम लोगों को सीधे जोड़ा     शहरवासियों की जागरूकता के कारण ही अब चौराहों पर पहले की तरह भिक्षुक नजर नहीं आते हैं। पहले भी इस तरह के प्रयास किए गए थे, लेकिन इस बार इस मुहिम से आम लोगों को सीधे जोड़ा। इसके सकारात्मक परिणाम आए। –आशीष सिंह, कलेक्टर इंदौर  

खेती की आधुनिक पद्धतियों, कृषि यंत्रों एवं नवीनतम तकनीकों की जानकारी कृषि विभाग के अधिकारियों को समय-समय पर दी जा रही: कृषि मंत्री कंषाना

भोपाल किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री एदल सिंह कंषाना ने कहा है कि राज्य सरकार खेती को लाभ का धंधा बनाने के लिए लगातार प्रयास रही है। खेती की आधुनिक पद्धतियों, कृषि यंत्रों एवं नवीनतम तकनीकों की जानकारी कृषि विभाग के अधिकारियों को समय-समय पर दी जा रही है, जिससे कि वे क्षेत्र में जाकर किसानों को उनसे अवगत करा सकें। राज्य कृषि विस्तार एवं प्रशिक्षण संस्थान द्वारा वर्ष 2024-25 में 57 प्रशिक्षणों के द्वारा 1530 अधिकारियों को प्रशिक्षण प्रदान किया गया। कृषि की आवश्यकता अनुसार विषयों पर प्रशिक्षण कृषि मंत्री कंषाना ने कहा कि राज्य कृषि विस्तार एवं प्रशिक्षण संस्थान बरखेड़ी कला, भोपाल कृषि की आवश्यकता अनुसार विभिन्न विषयों पर विभागीय अधिकारियों को प्रशिक्षण प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि विभाग की आत्मा योजना अंतर्गत वर्ष 2024-25 में कृषि एवं संवर्गीय विभाग के अधिकारियों के 54 प्रशिक्षण आयोजित किए गए जिससे 1338 प्रशिक्षणार्थियों को लाभ मिला। आत्मा योजना क्रियान्वयन के लिए 2 रिव्यू वर्कशॉप के माध्यम से 155 अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया गया। स्टेट लेवल वर्कशॉप ऑन ट्रेंनिंग नीड असेसमेंट के प्रशिक्षण द्वारा 37 अधिकारियों को प्रशिक्षित किया गया। पिछले एक वर्ष में 30 विषयों पर दिया गया प्रशिक्षण मंत्री कंषाना ने कहा कि पिछले एक वर्ष में 30 विषयों पर प्रशिक्षण आयोजित किए गए। इनमें सॉइल हेल्थ मैनेजमेंट, एग्रो फॉरेस्ट्री फॉर इंक्रीजिंग फार्मर्स इनकम, फार्म मैकेनाइजेशन, पोस्ट हार्वेस्ट मैनेजमेंट इन एग्रीकल्चर एंड हॉर्टिकल्चर क्रॉप्स, ऑर्गेनिक फार्मिंग एंड सर्टिफिकेशन इश्यूज एंड स्ट्रेटजीज, इंटीग्रेटेड फार्मिंग सिस्टम, स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर फॉर क्वालिटी कंट्रोल एंड लीगल एस्पेक्ट्स, ओरिएंटेशन ऑन फ्लैगशिप स्कीम्स, ऑफिस मैनेजमेंट फॉर एग्रीकल्चर एंड एलाइड डिपार्मेंट (एग्जीक्यूटिव), ऑफिस मैनेजमेंट फॉर एग्रीकल्चर एंड एलाइड डिपार्टमेंट (मिनिस्टीरियल), मार्केट लेड एक्सटेंशन एंड मार्केट लिंकेज, लीडरशिप डेवलपमेंट एंड टीम बिल्डिंग, इंटीग्रेटेड न्यूट्रिएंट मैनेजमेंट, सस्टेनेबल लाइवस्टॉक एंड फोडर प्रोडक्शन, मिलेट्स प्रोडक्शन, रिसोर्स कंजर्वेशन टेक्नोलॉजी इन एग्रीकल्चर, आईटी इन एग्रीकल्चर पर सुपरवाइजरी ऑफिसर्स, जीआई आईपीआर और डब्ल्यूटीओ, रिफ्रेशर ट्रेनिंग कम वर्कशॉप फॉर खरीफ क्रॉप्स, रिफ्रेशर ट्रेनिंग कम वर्कशॉप फॉर रबी क्रॉप्स, सॉइल ट्रेनिंग एंड न्यूट्रीशनल रिकमेंडेशन फॉर एग्रीकल्चर क्रॉप्स, जेंडर सेंसटाइजेशन एंड जेंडर बजटिंग, फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गेनाइजेशन एंड कंपनीज, मैनेजमेंट ऑफ मेजर पॉलिफेगस इंसेक्ट्स पेस्टस, आत्मनिर्भर भारत मिशन इन एग्रीकल्चर एंड एलाइड सेक्टर, स्वच्छता एक्शन प्लान, रेनफेड फार्मिंग, प्रेसीजन फार्मिंग एग्रीकल्चर, रिफ्रेशर ट्रेनिंग फॉर आत्मा फंशनरीज और रिफ्रेशर ट्रेनिंग फॉर फॉर्म मैनेजर विषयों पर प्रशिक्षण दिया गया।  

नगरीय निकायों में खेल विभाग के सहयोग से कम्युनिटी स्पोर्ट्स को मिलेगा बढ़ावा: मंत्री सारंग

प्रदेश में खेलों के उन्नयन के लिये मंत्री सारंग ने ली सभी महापौरों की बैठक मंत्री सारंग ने कहा कम्युनिटी स्पोर्ट्स को बढ़ावा देने के लिए खेल एवं युवा कल्याण विभाग के सहयोग से विभिन्न पहल की जा सकती खेलों के सकारात्मक माहौल के लिये हुई बैठक नगरीय निकायों में खेल विभाग के सहयोग से कम्युनिटी स्पोर्ट्स को मिलेगा बढ़ावा: मंत्री सारंग भोपाल सहकारिता, खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने सोमवार को तात्या टोपे स्टेडियम भोपाल में खेलों के उन्नयन के लिये प्रदेश के सभी महापौरों की बैठक ली। बैठक में खेल एवं युवा कल्याण विभाग के सहयोग से नगरीय निकायों में खेलों के प्रति सकारात्मक माहौल बनाने, युवाओं को खेलों के प्रति आकर्षित करने, नगरीय निगम के खेल इंफ्रास्ट्रक्चर के उन्नयन सहित अनेक विषयों पर चर्चा हुई। मंत्री सारंग ने कहा कि नगरीय निकायों के पास पहले से मौजूद खेल मैदानों व अधोसंरचना का उन्नयन कर खेल गतिविधियों को गति दी जा सकती है। बैठक में नगरीय निकायों और खेल विभाग के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर विशेष बल दिया गया, जिससे राज्य भर में खेलों का व्यापक प्रसार और विकास सुनिश्चित किया जा सके। खेल विभाग के सहयोग से नगरीय निकायों में कम्युनिटी स्पोर्ट्स को मिलेगा बढ़ावा मंत्री सारंग ने कहा कि नगरीय निकायों में कम्युनिटी स्पोर्ट्स को बढ़ावा देने के लिए खेल एवं युवा कल्याण विभाग के सहयोग से विभिन्न पहल की जा सकती हैं। इसमें फिट इंडिया क्लब की स्थापना तथा सामुदायिक स्तर पर विभिन्न खेल गतिविधियों का आयोजन प्रमुख है। उन्होंने उपस्थित सभी महापौरों से आग्रह किया कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में खेलों के उन्नयन के लिये क्षेत्र चिन्हित कर प्रस्ताव तैयार करें। इससे खेलों के प्रति रुचि को बढ़ावा मिलेगा और स्वस्थ एवं सक्रिय समाज के निर्माण की दिशा में सार्थक कदम उठाए जा सकेंगे। हर जिले में फिट इंडिया क्लब, हर विधानसभा क्षेत्र में बनेगा आधुनिक खेल परिसर मंत्री सारंग ने बताया कि भोपाल में प्रदेश का पहला फिट इंडिया क्लब स्थापित किया गया है, जिसका द्वितीय चरण वर्तमान में निर्माणाधीन है। इसी मॉडल को अपनाते हुए प्रदेश के सभी नगरीय निकायों में सर्वसुविधायुक्त फिट इंडिया क्लब स्थापित किए जाएंगे। इन क्लबों में बच्चों, युवाओं, वरिष्ठ नागरिकों सहित सभी आयु वर्ग के नागरिकों के लिए शारीरिक, मानसिक एवं आध्यात्मिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देने वाली सुविधाएं उपलब्ध होंगी। उन्होंने महापौरों से आग्रह किया कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में इन क्लबों की स्थापना के लिए उपयुक्त स्थानों की पहचान कर शीघ्र प्रस्ताव भेजें। मंत्री सारंग ने कहा कि देश में पहली बार प्रदेश सरकार हर विधानसभा क्षेत्र में खेल परिसरों के निर्माण की दिशा में कार्य कर रही है। यह पहल युवाओं को खेलों से जोड़ने, प्रतिभाओं को तराशने और खेल के प्रति सकारात्मक माहौल को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। खेल विभाग के नवाचारों पर हुई चर्चा बैठक में खेल विभाग द्वारा प्रारंभ किये गये नवाचार- “खेलो बढ़ो अभियान, पार्थ, मध्यप्रदेश युवा प्रेरक अभियान” पर भी चर्चा हुई। मंत्री सारंग ने कहा कि नई पीढ़ी को खेलों से जोड़ने के लिये खेलो बढ़ो अभियान की शुरूआत की गई है। इसके साथ ही युवाओं को पुलिस, सेना व पैरा मिलिट्री की शारीरिक व लिखित परीक्षाओं की तैयारी के लिये पार्थ योजना प्रारंभ की गई है। इसके अतिरिक्त, मध्यप्रदेश युवा प्रेरक अभियान के माध्यम से युवाओं में नेतृत्व क्षमता, सामाजिक उत्तरदायित्व और सकारात्मक सोच विकसित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। मंत्री सारंग ने महापौरों से कहा कि वे अपने नगरीय निकाय क्षेत्रों में इन नवाचारों को सक्रिय रूप से लागू करने में सहयोग करें, जिससे अधिक से अधिक युवा लाभान्वित हो सकें। नगरीय निकायों में खेल सुविधाओं के विस्तार के लिये महापौरों ने दिये सुझाव बैठक में उपस्थित महापौरों ने अपने नगरीय निकाय क्षेत्रों में खेल सुविधाओं के विस्तार के लिये सुझाव भी दिये। भोपाल महापौर श्रीमती मालती राय, इंदौर महापौर पुष्यमित्र भार्गव, खंडवा महापौर श्रीमती अमृता यादव, बुरहानपुर महापौर श्रीमती माधुरी पटेल, छिंदवाड़ा महापौर विक्रम सिंह अहके, मुरैना महापौर श्रीमती शारदा राजेंद्र सोलंकी, उज्जैन महापौर मुकेश टेटवाल, रतलाम महापौर प्रहलाद पटेल, देवास महापौर गीता दुर्गेश अग्रवाल, सागर महापौर श्रीमती संगीता तिवारी, रीवा महापौर अजय मिश्रा बाबा, सिंगरौली श्रीमती रानी अग्रवाल, अपर मुख्य सचिव मनु श्रीवास्तव, खेल संचालक राकेश गुप्ता, संयुक्त संचालक बी.एस. यादव सहित खेल अधिकारी उपस्थित थे।  

रविंद्र पुरी महाराज ने कहा अनुयायियों को कम से कम 4 बच्चे पैदा करना चाहिए. इनमें से एक बच्चे को सन्यास के मार्ग पर लाना चाहिए.

उज्जैन  अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष रविंद्र पुरी महाराज ने इन दिनों उज्जैन में हैं. वह यहां सिंहस्थ 2028 की तैयारी का जायजा लेने आए हैं. पत्रकारों से बात करते हुए रविंद्र पुरी महाराज ने कहा “उनके अनुयायियों को सिर्फ दो बच्चों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि कम से कम 3 या 4 बच्चे पैदा करना चाहिए. इनमें से एक बच्चे को सन्यास के मार्ग पर लाना चाहिए.” हर परिवार का एक बच्चा ले संन्यास रविंद्र पुरी महाराज का कहना है “मेरे पास लगातार भक्तों के फोन आ रहे हैं कि वे अपने बच्चों में से किसी एक को संत बनाना चाहते हैं. लेकिन अगर सब दो बच्चों पर ही रुक जाएंगे तो सनातन धर्म के लिए संत कहां से आएंगे. सनातन धर्म और देशहित की सेवा के लिए जरूरी है कि हर परिवार का कम से कम एक बच्चा संन्यास ले. ये तभी संभव है जब परिवारों में 3-4 बच्चे हों. अखाड़ों में शामिल होने के लिए शिष्य परंपरा ही मान्य है.” तेजस्वी यादव पर साधा निशाना रविंद्र पुरी महाराज ने कई मुद्दों पर बात की. बिहार के राजद नेता तेजस्वी यादव पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा “तेजस्वी का मुख्यमंत्री बनने का सपना अब अधूरा ही रहेगा. गृह मंत्री ने स्पष्ट कर दिया है कि बिहार में अब भाजपा की सरकार बनेगी. लालू यादव और उनके परिवार की परेशानियां अब और बढ़ेंगी. चारा घोटाले सहित अन्य मामलों की जांच फिर से शुरू हो चुकी है, जिससे आने वाला वक्त उनके लिए कठिन होगा.”  अखिलेश यादव की भी आलोचना इसके साथ ही वक्फ बोर्ड संशोधन बिल पर भी रविंद्र पुरी महाराज ने प्रतिक्रिया दी. उनका कहना है “ये बिल गरीब मुसलमानों के हित में है. हिंदुओं को इससे कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए. सपा अध्यक्ष अखिलेश मुसलमानों के नेता बनने की कोशिश करते हैं, लेकिन हिंदू त्योहारों पर सवाल उठाते हैं. ये बहुत आपत्तिजनक है.” लालू परिवार की बढ़ेंगी मुश्किलें अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष महंत रविंद्र पुरी ने बड़ा दावा किया हैं। उन्होंने कहा कि तेजस्वी यादव बिहार के सीएम नहीं बन पाएंगे। उनका यह सपना कभी पूरा नहीं होगा। इतना ही नहीं महंत रविद्र ने यह भी दावा किया है कि आने वाले दिनों में लालू यादव परिवार की मुश्किलें बढ़ने वाली हैं। अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रविंद्र पुरी महाराज बीते तीन दिनों से मध्य प्रदेश के उज्जैन में है। वे अष्टमी पर बड़नगर रोड स्थित निरंजनी अखाड़े में कन्या पूजन और भंडारे के कार्यक्रम में शामिल हुए। जहां उन्होंने साधु-संतों और श्रद्धालुओं को प्रसादी वितरण कराया। तेजस्वी का सपना पूरा नहीं होगा- महंत रविंद्र पुरी उन्होंने मीडिया से चर्चा करते हुए बड़ा दावा किया। महंत रविंद्र ने कहा कि ‘तेजस्वी यादव भले ही मुख्यमंत्री बनने का सपना देख रहे हों, लेकिन उनका यह सपना पूरा नहीं होगा।’ उन्होंने कहा कि ‘गृहमंत्री स्पष्ट कर चुके हैं कि बिहार में अगली सरकार भारतीय जनता पार्टी की ही बनेगी। इसलिए लालू परिवार की बेचैनी बढ़ गई है।’ हिंदूओं से की 3-4 बच्चे पैदा करने की अपील वहीं महंत रविंद्र पुरी ने हिन्दू समाज से तीन से चार बच्चा पैदा करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि इनमें से एक को संत बनने के लिए प्रेरित करें, ताकि सनातन धर्म और देश की रक्षा सुनिश्चित की जा सके। महाराज का कहना है कि यह धर्म और राष्ट्र दोनों के हित में है। उन्होंने दावा किया कि देशभर से भक्त उनके पास फोन कर रहे हैं, जो अपने बच्चों को संत बनाना चाहते हैं।  

एमएसटी रेल टिकट बुक करना हुआ और भी आसान

यूटीएस मोबाइल ऐप से एमएसटी रेल टिकट बुकिंग: यात्रियों के लिए लाभदायक विकल्प भोपाल भोपाल मंडल में यात्री मासिक सीजन रेल टिकट (MST) भी यूटीएस ऑन मोबाइल ऐप के माध्यम से आसानी से बुक कर सकते हैं। यह सुविधा न केवल यात्रा को सरल बनाती है बल्कि समय और धन की बचत भी करती है। भोपाल मंडल में पिछले 6 महीनों में अक्टूबर 2024 से मार्च 2025 तक कुल 60,672 मासिक सीजन रेल टिकट बुक किए गए, जिनमें से 17,722 टिकट यानी करीब 30% टिकट UTS मोबाइल ऐप के माध्यम से बुक किए गए। MST क्या है? MST यानी Monthly Season Ticket एक प्रकार का मासिक रेल टिकट है जो यात्रियों को रोज़ाना आने-जाने के लिए बार-बार टिकट लेने की झंझट से मुक्ति देता है। यह टिकट एक अधिकतम 150 किलोमीटर  के लिए मान्य होता है और महीने भर रेल यात्राओं की सुविधा देता है। MST (Monthly Season Ticket) रेलवे द्वारा नियमित यात्रियों के लिए दी जाने वाली एक सुविधा है जो रोज़ रेल टिकट लेने की ज़रूरत को खत्म कर देती है। यह टिकट कई प्रकारों में उपलब्ध है जैसे – QST (Quarterly Season Ticket) जो 3 महीनों के लिए, HST (Half-Yearly Season Ticket) जो 6 महीनों के लिए और YST (Yearly Season Ticket) जो पूरे 12 महीनों के लिए मान्य होता है। ये सभी विकल्प यात्रियों को अधिक रियायत और सुविधा प्रदान करते हैं। अब ये सभी सीजन रेल टिकट UTS मोबाइल ऐप के माध्यम से डिजिटल रूप से बुक किए जा सकते हैं, जिससे रेल टिकट काउंटर की कतारों से मुक्ति, समय की बचत और पेपरलेस यात्रा का लाभ मिलता है। MST रेल टिकट लेने के लाभ: 1.    डिजिटल सुविधा: अब MST भी मोबाइल ऐप से बुक की जा सकती है, पेपरलेस और कैशलेस जिससे पेपर MST खोने का डर भी नहीं रहता क्यूंकि अब आपका मोबाइल ही आपकी MST है । 2.    रोज़ टिकट लेने की ज़रूरत नहीं: हर दिन टिकट खरीदने की झंझट से छुटकारा। 3.    पैसों की बचत: डेली रेल टिकट की तुलना में एमएसटी कहीं ज़्यादा किफायती होता है। 4.    समय की बचत: स्टेशन पर कतार में खड़े रहने की ज़रूरत नहीं।      वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक श्री सौरभ कटारिया ने बताया कि “मासिक सीजन रेल टिकट (MST) भी UTS ऑन मोबाइल ऐप से बुक किया जा सकता है, जो कि दैनिक यात्रियों के लिए बहुत ही उपयोगी सुविधा है। मैं सभी यात्रियों से आग्रह करता हूँ कि वे इस डिजिटल रेल सुविधा का अधिकतम लाभ उठाएं और डिजिटल इंडिया की दिशा में अपना योगदान दें।” यूटीएस ऑन मोबाइल ऐप: MST रेल टिकट बुकिंग की आसान प्रक्रिया 1.    ऐप डाउनलोड करें: गूगल प्ले स्टोर या एप्पल स्टोर से ‘UTS’ ऐप डाउनलोड करें। 2.    रजिस्ट्रेशन करें: मोबाइल नंबर से साइन अप करें। 3.    टिकट बुकिंग करें: o    MST विकल्प चुनें और रूट भरें। o    R-Wallet से भुगतान करें (3% बोनस भी मिलता है)। o    टिकट आपके मोबाइल पर पेपरलेस रूप में उपलब्ध रहेगा।

गुलशन बामरा ने कहा कि अधिकारियों को अपने अधिकारों के साथ अपने से वरिष्ठ अधिकारी के अधिकारों की भी जानकारियॉ होना चाहिए

भोपाल प्रमुख सचिव जनजाति गुलशन बामरा ने कहा कि अधिकारियों को अपने अधिकारों के साथ अपने से वरिष्ठ अधिकारी के अधिकारों की भी जानकारियॉ होना चाहिए। प्रमुख सचिव बामरा सोमवार को प्रशासन अकादमी में आयोजित जिला स्तरीय अधिकारियों की दो दिवसीय कार्यशाला के शुभारंभ अवसर पर अधिकारियों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि प्रदेश में जनजातीय वर्ग के 22 प्रतिशत एवं अनुसूचित जाति वर्ग के 16 प्रतिशत लोग निवास करते हैं। हमारी जिम्मेदारी और भी अधिक बढ़ जाती है, जब प्रदेश की कुल जनसंख्या के एक तिहाई से अधिक लोगों के विकास और उन्नति का दायित्व हमें सौंपा गया हो। इस अवसर पर आयुक्त श्रीमन शुक्ल एवं आयुक्त सुवंदना वैद्य भी उपस्थित थे। संभागीय आयुक्त, सहायक आयुक्त एवं जिला संयोजक जनजातीय कार्य एवं अधिसूचना जाति कल्याण विभाग की दो दिवसीय प्रशिक्षण सह-उन्मुखीकरण कार्यशाला में उपस्थित अधिकारियों के विभागीय प्रशिक्षण सत्र के प्रथम दिन प्रमुख सचिव बामरा ने अधिकारियों से उनके स्थापना संबंधी दैनंदिनी कार्य, जिसमें शासकीय सेवा में अधिकारियों-कर्मचारियों के प्रशासन संबंधी कार्य जिसमें नियुक्ति, पदस्थापना, अनुकंपा नियुक्ति,गोपनीय चरित्रावली पेंशन प्रकरणों में आने वाली समस्याओं के निराकरण पर अधिकारियों से सवाल जबाव भी किए। प्रमुख सचिव बामरा ने कहा कि हमें अपने दृष्टिकोण को प्राथमिकता देते हुए कार्य करना चाहिए। जनजातीय विभाग अन्य विभाग की तुलना में बड़ा विभाग होने के साथ शिकायतों की संख्या भी ज्यादा होती है। आपको इसे एक चुनौती के रूप में स्वीकार करना चाहिए।  

जनसामान्य के साथ शालीन व्यवहार और संवाद आवश्यक: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

चयनित अधिकारी सेवा भाव और सकारात्मक मानसिकता के साथ करें अपने अधिकारों का उपयोग : मुख्यमंत्री डॉ. यादव जनसामान्य के साथ शालीन व्यवहार और संवाद आवश्यक मुख्यमंत्री ने राज्य सिविल सेवा अधिकारियों के 118वें संयुक्त आधारभूत प्रशिक्षण कार्यक्रम का किया शुभारंभ उप जिलाधीश, उप पुलिस अधीक्षक और नायब तहसीलदार के कुल 83 प्रशिक्षु लेंगे सात सप्ताह का संयुक्त आधारभूत प्रशिक्षण भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि भारतीय समाज स्व-नियंत्रित और सुसंस्कृत समाज है। राज्य सेवा के लिए चयनित अधिकारी पवित्र सेवा भाव और परिष्कृत मन मस्तिष्क के साथ, उन्हें मिली शक्तियों का उपयोग करते हुए अपने दायित्व निर्वहन की ओर अग्रसर हों। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रशिक्षु अधिकारियों को उनके उज्जवल भविष्य के लिए शुभकामनाएं देते हुए कहा कि अधिकारी अपनी कुशलता और दक्षता से सभी की आशाओं-आकांक्षाओं पर खरे उतरें यही कामना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव राज्य सिविल सेवा के अधिकारियों के 118वें संयुक्त आधारभूत प्रशिक्षण कार्यक्रम के शुभारंभ सत्र को प्रशासन अकादमी में संबोधित कर रहे थे। उन्होंने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का महानिदेशक प्रशासन अकादमी सचिन सिन्हा द्वारा पुष्प-गुच्छ भेंट कर स्वागत किया गया। प्रशिक्षण शुभारंभ पर अकादमी संकल्प गान की प्रस्तुति हुई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के साथ प्रशिक्षु अधिकारियों का ग्रुप फोटो भी हुआ। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रशिक्षुओं से कहा कि नर्सरी कक्षा से लेकर अब तक के शिक्षण-प्रशिक्षण से मिले ज्ञान के आत्म अवलोकन से अपनी प्रशासनिक जिम्मेदारियों और कार्यों को दक्षतापूर्वक संपन्न करें। उन्होंने कहा कि शिक्षण से व्यक्ति और प्रशिक्षण से व्यक्तित्व का निर्माण होता है। हमारी पाठ्य पुस्तकें अपार ज्ञान का भंडार हैं, लेकिन दायित्वों को पूरा करने के लिए इसी ज्ञान की मदद से अपना मार्ग स्वयं खोजना होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अपने दायित्वों के निर्वहन में पारिवारिक मूल्यों का ध्यान रखने, जनसामान्य के साथ शालीन व्यवहार और संवाद क्षमता विकसित करने तथा आउट ऑफ बॉक्स सोचते हुए समाज हित में नवाचार करने के लिए प्रेरित किया। बड़े पद की जिम्मेदारी के साथ-साथ परिवारजन और मित्रों की अपेक्षाओं पर बने रहना भी एक चुनौती है। उन्होंने कहा कि आपका व्यवहार ऐसा हो कि आप अधिक से अधिक लोगों की आशाओं व आकांक्षाओं पर खरे उतर सकें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में मिशन कर्मयोगी से विकास और जनकल्याण की दिशा में राज्य सरकार प्रतिबद्धता के साथ कार्यरत है। चयनित अधिकारियों को स्वयं के परिश्रम और ईश्वर की कृपा से जनसेवा का अवसर प्राप्त हुआ है। उन्होंने सबसे अपेक्षा की कि प्रशिक्षण उपरांत अधिकारी, मैदानी चुनौतियों को स्वीकार करते हुए आत्मविश्वास और सकारात्मक मानसिकता के साथ सुशासन और गुणवत्तापूर्ण लोक सेवाओं के लिए उत्तरदायी-जवाबदेह-पारदर्शी-स्वच्छ और संवेदनशील भूमिका का निर्वहन करें। शुभारंभ सत्र को अपर मुख्य सचिव सामान्य प्रशासन संजय दुबे, महानिदेशक प्रशासन अकादमी सचिन सिन्हा, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक राजा बाबू सिंह ने भी संबोधित किया। संचालक प्रशासन अकादमी मुजीबुर्रहमान खान ने आभार माना। मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग की राज्य सेवा परीक्षा में चयनित वर्ष 2020 और 2021 बैच के उप जिलाधीश, उप पुलिस अधीक्षक और नायब तहसीलदार पद के लिए चयनित कुल 83 प्रशिक्षुओं के सात सप्ताह का संयुक्त आधारभूत प्रशिक्षण कार्यक्रम 7 अप्रैल से 23 मई 2025 तक प्रशासन अकादमी में संचालित होगा।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने की नवीन आपराधिक कानूनों की समीक्षा

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि वर्तमान चुनौतियों को ध्यान में रखकर बनाए गए नए आपराधिक कानून, भारतीय न्याय प्रणाली को अधिक लोकतांत्रिक बनाने की दिशा में ऐतिहासिक कदम है। सभी के लिए अधिक सुलभ, सहायक और कुशल न्याय प्रणाली सुनिश्चित करने के उद्देश्य से बने इन कानूनों और नवीन प्रक्रियाओं की जानकारी जन-जन तक पहुंचाना आवश्यक है। न्याय प्रणाली से जुड़ी सभी संस्थाओं में अद्यतन व्यवस्था सुनिश्चित करते हुए जन-सामान्य को नई धाराओं और प्रक्रियाओं से शीघ्र अतिशीघ्र अवगत कराने के लिए नए आपराधिक कानूनों के बारे में जागरूकता गतिविधियां संचालित की जाएं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नवीन आपराधिक कानूनों की समीक्षा के दौरान यह निर्देश दिए। मंत्रालय में हुई बैठक में मुख्य सचिव अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव डॉ. राजेश राजौरा, अपर मुख्य सचिव गृह जे.एन. कंसोटिया, पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाना सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पुलिस, जेल, अभियोजन, न्यायिक एवं फॉरेंसिक कर्मियों के बीच अद्यतन तकनीक के उपयोग का प्रशिक्षण सुनिश्चित किया जाए। सभी हितधारकों में हर स्तर पर बेहतर समन्वय जरूरी है। प्रत्येक स्तर पर आवश्यक व्यवस्था, उपकरण और भौतिक संसाधनों की उपलब्धता प्राथमिकता के आधार पर सुनिश्चित की जाएं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अचल सम्पत्ति संबंधी अपराधों पर नियंत्रण के लिए पुलिस के साथ राजस्व का अमला भी सजग और सतर्क रहे, साथ ही दोनों विभागों में परस्पर समन्वय भी हो। प्रदेश के नगरीय क्षेत्रों सहित जिन क्षेत्रों में भूमि की दरें तेजी से बढ़ रही है, वहां विशेष सजगता बरती जाए। बैठक में बताया गया कि समयावधि में चालान के लिए नवीन डैशबोर्ड उपलब्ध है। ई-साक्ष्य की प्रक्रिया भी आरंभ की जा चुकी है। पुलिस थानों तक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के लिए न्यायश्रुति सॉफ्टवेयर तैयार कर लिया गया है और थानों व कंट्रोल रूम में साउंड प्रूफ कक्ष चिन्हित किए जा रहे हैं। ऑनलाइन समन/वारंट मॉड्यूल के अंतर्गत गतिविधियां प्रगति पर हैं। पिछले तीन महीने में 50 प्रतिशत से अधिक वारंट तिथि से पहले इलेक्ट्रानिक रूप से तामील किए गए। इनकी मॉनीटरिंग के लिए सभी जिलों में सेल गठित किए जा चुके हैं। डिजिटल इन्वेस्टिगेशन केलिए टेबलेट्स और लाइव स्कैनर थानों को उपलब्ध कराए जा रहे हैं। बैठक में डिजिटल धोखाधड़ी, डेटा चोरी जैसे सायबर अपराधों के बारे में जागरूकता के लिए की गई पहल की भी जानकारी दी गई।  

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