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भोपाल में 9458 गर्भवर्ती महिलाएं हाई रिस्क पर, पूरा पोषण नहीं मिल रहा, नियमित जांच की सलाह

भोपाल एमपी के भोपाल जिले की 9458 गर्भवर्ती महिलाएं हाई रिस्क पर हैं। इन्हें पूरा पोषण नहीं मिल रहा है। ये एनीमिया समेत अन्य तरह की दिक्कतों से ग्रसित हैं। जिले की महिला एवं बाल विकास की नियमित समीक्षा रिपोर्ट में ये तथ्य सामने आया है। अगले दो से पांच माह में इनका प्रसव भी होना है। इधर, कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने इन महिलाओं की नियमित जांच करने को कहा है। हाईरिस्क की वजह आयरन और फॉलिक एसिड की कमी: इससे कमजोरी की स्थिति है। इनमें प्रोटीन, विटामिन, और मिनरल्स की कमी है। अत्यधिक वजन, पानी की कमी के साथ जीवनशैली और पर्यावरणीय कारणों से को हाइरिस्क की वजह बताया जा रहा है। बचाव के लिए इन पर फोकस ● नियमित चिकित्सीय जांच की जा रही है। प्रोटीन, आयरन, फॉलिक एसिड, कैल्शियम और अन्य आवश्यक पोषक तत्वों से भरपूर आहार देने को कहा जा रहा है। ● साफ-सफाई पर ध्यान देने के साथ दिनभर में कम से कम 8-10 गिलास पानी पीने की सलाह दी रही है। समय पर जरूरी टीकाकरण के निर्देश दिए हैं। ● 49 हजार 558 महिलाओं का रजिस्ट्रेशन हुआ। ● 38 हजार 313 का पहला चेकअप हो चुका है। ● 9 हजार 458 महिलाएं हाईरिस्क में हैं महिला एवं बाल विकास विभाग के माध्यम से जिले की महिलाओं और शिशुओं को उचित पोषण मिले इस पर काम किया जा रहा है। जहां कुछ कमी है वहां विशेष निगरानी के निर्देश दिए।– कौशलेंद्र विक्रमसिंह, कलेक्टर  स्वास्थ्य कार्यकर्ता हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं का रख रहीं हैं विशेष ध्यान हाईरिस्क गर्भवती को आशा कार्यकर्ता श्रीमती सुमन वर्मा के साथ होने पर सब ठीक होने का भरोसा, आशा के साथ ही आई स्वास्थ्य केंद्र गर्भवती महिलाओं को मैदानी स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं द्वारा हाईरिस्क के मानकों के अनुसार चिन्हित किया जाता है । ये स्वास्थ्य कार्यकर्ता गर्भावस्था के दौरान महिला की जांच एवं देखभाल में सहयोग करते हैं । साथ ही प्रसव के पश्चात मां और नवजात की देखभाल भी करते हैं। स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं का हितग्राहियों के साथ जुड़ाव और हितग्राहियों का उनके प्रति विश्वास का उदाहरण एक बार फिर उस समय देखने को मिला, जब गर्भवती महिला, आशा कार्यकर्ता के  साथ होने पर ही जांच करवाने को जाने के लिए तैयार हुई। दीक्षा नगर बागमुगलिया निवासी गर्भवती महिला को   शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र गुलाबी नगर में आयोजित विस्तारित प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान में जांच करवाने हेतु मैदानी स्वास्थ्य कार्यकर्ता द्वारा चिन्हित किया गया था। महिला का वजन कम होने और पूर्व में गर्भपात होने के कारण उसे हाईरिस्क श्रेणी में शामिल किया गया था । वार्ड क्रमांक 55 की आशा कार्यकर्ता श्रीमती सुमन वर्मा ने महिला को जांच करवाने के लिए मोबिलाइज किया था, किंतु महिला अन्य किसी के साथ जाकर जांच करवाने के लिए तैयार नहीं हुई। महिला को प्रसव पंजीयन के समय से ही आशा कार्यकर्ता द्वारा देखभाल एवं सलाह दी जा रही है। नियमित संपर्क और देखभाल के कारण महिला को ये भरोसा पैदा हुआ कि आशा कार्यकर्ता के साथ होने पर उसे और उसके बच्चे को कोई भी समस्या नहीं होगी। महिला के इस विश्वास को देखते हुए आशा कार्यकर्ता ने उसे अपने ही वाहन से लाकर उसकी जांच करवाई। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी भोपाल डॉ प्रभाकर तिवारी  

केंद्रीय वक्फ परिषद और राज्य वक्फ बोर्ड में प्रशासनिक अफसरों को भी अधिकार , निगरानी और प्रबंधन में पारदर्शिता बढ़ेगी

 बुरहानपुर वक्फ संशोधन विधेयक के लोकसभा में पेश होते ही शहर में हलचल मच गई है। भोपाल के बाद प्रदेश में सबसे अधिक वक्फ संपत्तियां बुरहानपुर में हैं, जिनकी संख्या 3,000 हेक्टेयर से अधिक है। मस्जिद, दरगाह और कब्रस्तान कमेटियों पर सीधा असर पड़ने के कारण समर्थन और विरोध की लहर तेज हो गई है। वक्फ संपत्तियों का सर्वे, सरकार की सख्ती केंद्र सरकार ने बिल पेश करने से पहले ही वक्फ संपत्तियों के सर्वेक्षण का आदेश दिया, जिसे प्रशासन ने तुरंत अमल में लाना शुरू कर दिया। सरकार का दावा है कि यह कानून वक्फ संपत्तियों के सशक्तिकरण, दक्षता और विकास के लिए लाया गया है। अब केंद्रीय वक्फ परिषद और राज्य वक्फ बोर्ड में प्रशासनिक अफसरों को भी अधिकार मिलेंगे, जिससे निगरानी और प्रबंधन में पारदर्शिता बढ़ेगी। काली पट्टी बांधकर विरोध सरकार के इस कदम से असहमति जताते हुए कुछ लोगों ने काली पट्टी बांधकर विरोध दर्ज कराया। उनका आरोप है कि सरकार धार्मिक स्थलों पर गैर-मुस्लिमों को बैठाने की साजिश कर रही है। अधिवक्ता एवं AIMIM जिलाध्यक्ष जहीरुद्दीन शेख ने कहा कि ‘सरकार अगर सच में पारदर्शिता चाहती है, तो अन्य धर्मों के ट्रस्ट में भी मुस्लिमों को स्थान दे।’अधिवक्ता मो. उजैर अंसारी ने कहा कि यह बिल मुस्लिम समाज के खिलाफ है। जो संशोधन मुस्लिमों की तरफ से सुझाए गए थे, उन्हें जेपीसी ने खारिज कर दिया।’ सांसद का पलटवार भाजपा सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल ने विरोध को खारिज करते हुए कहा कि वक्फ संपत्तियों पर अवैध कब्जा करने वालों को यह बिल रास नहीं आ रहा। उन्होंने कहा, ‘यह बिल मुस्लिम समाज के हित में है। इससे संपत्तियों की आमदनी में पारदर्शिता आएगी और उसका सही उपयोग होगा।’ अधिवक्ता शाकीर अहमद ने इस बिल का समर्थन करते हुए कहा कि ‘संपत्तियों का सर्वे होने से कब्जाधारी बेनकाब होंगे। हर साल ऑडिट होगा, जिससे आय का सही उपयोग सुनिश्चित किया जाएगा।’  

इंदौर के चंदन नगर से सिरपुर तक पचास करोड़ की लगात से एक ब्रिज भी बनाया जाएगा

इंदौर इंदौर नगर निगम का आठ हजार 174 करोड़ का बजट पेश हुआ। मेयर पुष्यमित्र भार्गव ने कहा कि इंदौर में मास्टर प्लान की 33 नई सड़कों का निर्माण किया जाएगा। इसके अलावा हर वार्ड में एक ग्लोबल गार्डन बनेगा और उनमें योग शालाएं संचालित होंगी। इसके अलावा चंदन नगर से सिरपुर तक पचास करोड़ की लगात से एक ब्रिज भी बनाया जाएगा। नदी नालों पर पुराने ब्रिजों को हटाकर पंद्रह नए ब्रिज बनाए जाएंगे। नर्मदा के चौथे चरण के लिए भी बजट में बड़ी राशि रखी जाएगी। इस साल इस प्रोजेक्ट पर काम शुरू होगा। शहर में 38 नए टंकियों का निर्माण होगा। 100 एकड़ का लैंड बैंक दो सालों में नगर निगम ने 100 एकड़ का लैंड बैंक बनाया है। मेयर ने कहा कि लैंड बैंक में कर्बला मैदान की जमीन भी निगम के नाम पर हुई है। ड्रेनेज घोटाले पर मेयर ने कहा कि आरोपी जेल में हैं। इस सिस्टम में जिसने गड़बड़ की है, जिसने पैसे निकालने का काम किया। उनके 100 करोड़ से ज्यादा का बिल रोक कर रखा है। उस राशि से घोटाले के पैसे को वसूला जाएगा।   पचास साल तक काम आएगा पोर्टल मेयर ने कहा कि नगर निगम ने ऑनलाइन टैक्स भरने वन्य सुविधाओं के लिए अपना एक पोर्टल बनाया है। यह पोर्टल दो माह में काम शुरू कर देगा। अगले 50 साल तक यह पोर्टल नगर निगम के काम आएगा। एप के माध्यम से कचरा उठाने बुला सकेंगे मेयर ने कहा कि इंदौर स्वच्छता में नवाचार करने की मामले में हमेशा आगे रहा है। सड़कों की सफाई के लिए आधुनिक मशीन खरीदने के अलावा शहरवासी एप के माध्यम से भी डोर-टू-रोड कचरा कलेक्शन गाड़ियों को अपने घर बुला सकेंगे। इसकी सुविधा भी जल्दी दी जाएगी। इंदौर के चिड़ियाघर को जीरो वेस्ट बनाया जाएगा। हरियाली में भी नंबर वन बने नगर निगम के बजट बैठक में नगरी प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की भी शामिल हुए। उन्होंने कहा कि मैं मंत्री की हैसियत से नहीं आया हूं। मुझे विधायक होने के नाते इस बैठक में शामिल होने का अधिकार है। इस बार इंदौर नगर निगम ने एक हजार करोड़ का टैक्स वसूला है। यह आत्मनिर्भर की तरफ कदम बढ़ाने जैसा है। कई नगर निगमों में तनख्वाह भोपाल से आए पैसों से मिलने के बाद बांटी जाती है। कोई नगर निगम इतना टैक्स अभी तक वसूल नहीं कर पाया। उन्होंने कहा कि इंदौर स्वच्छता में नंबर वन है। हरियाली में भी नंबर वन बने। हम पेड़ बचाने का भी रिकॉर्ड बनाएंगे। इस बार फिर इंदौर में 51 लाख पेड़ लगाने का संकल्प ले रहे हैं।  

राज्य सरकार-प्रदेशवासी और अधिकारी-कर्मचारी एकजुट-एकभाव होकर प्रगति पर हो रहे हैं अग्रसर: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

कुशल वित्तीय प्रबंधन से संभव हो रहा है, विकास के साथ औद्योगिक गतिविधियों और जन हितैषी कार्यों का विस्तार : मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रधानमंत्री मोदी के मार्गदर्शन में डबल इंजन की सरकार सुशासन के मूल भाव को कर रही साकार: मुख्यमंत्री डॉ. यादव राज्य सरकार-प्रदेशवासी और अधिकारी-कर्मचारी एकजुट-एकभाव होकर प्रगति पर हो रहे हैं अग्रसर: मुख्यमंत्री डॉ. यादव पुरानी देनदारी चुका कर विकास के विविध पैमानों पर आगे बढ़ रहा है राज्य ताप विद्युत गृहों के लिए किया गया 11.73 लाख मैट्रिक टन कोयले का भंडारण अधिकारी-कर्मचारियों के हित में लिए गए महत्वपूर्ण निर्णय मुख्यमंत्री ने कुशल वित्तीय प्रबंधन के संबंध में विचार व्यक्त किए भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में प्रदेश में डबल इंजन की सरकार जनहितैषी संकल्पों के साथ अग्रसर है। उद्योग-व्यापार से लेकर खेलों तक राज्य में विकास के नए कीर्तिमान स्थापित किए जा रहे हैं। केंद्र सरकार के मार्गदर्शन और नीति आयोग के निर्देशों के अनुरूप प्रत्येक विभाग में सुशासन के मूल भाव के साथ गतिविधियों की मॉनिटरिंग जारी है। राज्य सरकार के हर विभाग ने अपने-अपने क्षेत्र में श्रेष्ठतम कार्य करने का संकल्प लिया है। राज्य सरकार कुशल वित्तीय प्रबंधन के आधार पर अपनी पुरानी देनदारी चुका कर, नई दृष्टि से विकास के पैमानों पर आगे बढ़ रही है। विकास के साथ औद्योगिक गतिविधियों और जन हितैषी कार्यों का विस्तार इन्हीं दृढ़संकल्पों की परिणीती है। राज्य सरकार, प्रदेशवासी और अधिकारी- कर्मचारी एकजुट होकर एक भावना के साथ प्रगति पर अग्रसर हों, इसी मंशा के साथ हम आगे बढ़ रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश सरकार ने इस वर्ष बजट में कोई नया टैक्स नहीं लगाया, बावजूद इसके गत वर्ष की तुलना में बजट में 16 प्रतिशत की वृद्धि की गई। कुशल वित्तीय प्रबंधन और सभी के सहयोग से सरकार हर क्षेत्र में अपने तय लक्ष्यों को प्राप्त कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मीडिया को जारी संदेश में यह विचार व्यक्त किए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि राज्य सरकार ने शासकीय कर्मचारियों के हित में लगभग 10-15 वर्ष तक पुराने भत्तों की राशि बढ़ाने का निर्णय लिया है। इसके लिए वर्ष 2025-26 के बजट में राशि आवंटित की गई है, जिससे सरकार पर करीब 1500 करोड़ रुपए का व्यय भार आएगा। उन्होंने कहा कि सरकार कुशल वित्तीय प्रबंधन के आधार पर ही अपने अधिकारी-कर्मचारियों की बेहतरी का ध्यान रख पा रही है। उन्होंने कहा कि विकास और जनकल्याण के क्षेत्र में प्रदेश को प्राप्त हो रही उपलब्धियों का श्रेय अधिकारी-कर्मचारियों को जाता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि पूरे देश में मध्यप्रदेश एकमात्र ऐसा राज्य है, जिसने अपनी 7-8 साल पुरानी सारी देनदारी चुकाने का कार्य किया। हमारी सरकार ने एमएसएमई और हैवी इंडस्ट्रीज सहित सभी प्रकार की इकाइयों को गत एक वर्ष में लगभग 5 हजार 225 करोड़ रुपए की राशि देने का काम किया है। हमारी सरकार नवीन पहलों के माध्यम से उद्योगों के लिए निरंतर सकारात्मक वातावरण बना रही है। राज्य सरकार विकास के लिए प्रदेश से जुड़ने वाले उद्योगों से किये गये अपने सभी संकल्पों को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कुशल वित्तीय प्रबंधन के आधार पर सभी केंद्रीय कोयला कंपनियों की देनदारियों का शत-प्रतिशत भुगतान कर दिया है। जेनरेशन कंपनी के चारों ताप विद्युत गृहों के कुशल प्रबंधन के फलस्वरूप अब तक का सर्वाधिक 11.73 लाख मैट्रिक टन कोयले का भंडारण किया गया है। ताप विद्युत गृहों में उपयोग के लिए कोयला भंडारण का अग्रिम भुगतान भी सरकार की ओर से किया जा चुका है।  

केंद्रीय कर्मचारियों को लाभ मिलने के बाद मध्य प्रदेश सरकार 8वें वेतनमान की सिफारिशों को लागू करेगी, जाने कितना बढ़ेगा वेतन

भोपाल केंद्र सरकार के 8वें वेतन आयोग का कार्य जल्द शुरू होने जा रहा है. इससे केंद्रीय कर्मचारियों को सैलरी में बंपर बढ़त मिलेगी. इसी के साथ मध्य प्रदेश के सरकारी कर्मचारियों की भी उम्मीदें बढ़ने लगी हैं. कर्मचारियों के मन में अब यही सवाल है कि केंद्र समान अगर 8वां वेतन मान लागू हुआ तो महंगाई भत्ता और उनकी पूरी सैलरी पर क्या फर्क पड़ेगा? तो बता दें कि केंद्र सरकार के कर्मचारियों की सैलरी में हर महीने 19,000 रु तक की बढ़ोतरी हो सकती है. हालांकि, 8वां वेतनमान लागू होने में अभी काफी समय बाकी है. ऐसे में आप इस आर्टिकल में जान सकते हैं कि केंद्र के समान 8वां वेतनमान मिलने पर मध्य प्रदेश के सरकारी कर्मचारियों की संभावित सैलरी क्या हो सकती है. 8वें वेतनमान का लाभ कब मिलेगा? सबसे पहले जान लें कि केंद्र सरकार की 8वें वेतनमान की सिफारिशों कब लागू होंगी. तो बता दें कि अप्रैल में सरकार के 8वें वेतनमान आयोग का गठन हो रहा है. गठन के बाद आयोग अपना काम शुरू करेगा और कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति, महंगाई और जीवन यापन समेत कई फैक्टर्स के आधार पर सैलरी में बदलाव की सिफारिश करेगा. अगर पुराना रिकॉर्ड देखें तो आयोग को वेतनमान की सिफारिशें सरकार को भेजने में एक से डेढ़ साल तक का वक्त लगता है. ऐसे में केंद्रीय कर्मचारियों को 8वें वेतनमान का लाभ 2026 के बाद ही मिल पाएगा. वहीं केंद्रीय कर्मचारियों को लाभ मिलने के बाद मध्य प्रदेश सरकार 8वें वेतनमान की सिफारिशों को लागू करेगी. 8वें वेतनमान से कितनी बढ़ेगी सैलरी? 7वें वेतन आयोग की सिफारिशों पर गौर करें तो उस दौरान आयोग ने फिटमेंट फैक्टर 2.57 गुना बढ़ाया था. ऐसे में बेसिक सैलरी 7000 रु से बढ़कर 17,990 रु हो गई थी. गौरतलब है कि फिटमेंट फैक्टर एक मल्टीप्लायर होता है, जो महंगाई, कर्मचारियों के प्रदर्शन आदि कई फैक्टर्स पर निर्भर करता है. इस संख्या को बेसिक सैलरी से गुणा करके नई बेसिक सैलरी तय की जाती है. उदाहरण के तौर पर अगर मध्य प्रदेश के सरकारी कर्मचारी की बेसिक सैलरी 15 हजार रु है और नया फिटमेंट फैक्टर 2.60 के करीब होता है तो नई बेसिक सैलरी 39,000 रु हो सकती है. हालांकि, राज्य सरकार केंद्र सरकार की तरह वेतन आयोग की सिफारिशों को शत प्रतिशत लागू करने के लिए बाध्य नहीं रहती. क्योंकि राज्य सरकार की वित्तीय स्थिति केंद्र सरकार से काफी अलग होती है. वेतन आयोग क्या होता है? वेतन आयोग सरकार के एक डिपार्टमेंट की तरह काम करता है, जिसका मुख्य उद्देश्य सरकार के कर्मचारियों के सैलरी स्ट्रक्चर की समीक्षा करना होता है. महंगाई, परफॉर्मेंस समेत कई फैक्टर्स को देखते हुए समय-समय पर आयोग सैलरी स्ट्रक्चर में सुधार करने की सिफारिश करता है. आमतौर पर हर 10 साल में नए वेतन आयोग का गठन होता है. वर्तमान में केंद्र सरकार के 8वें वेतनमान आयोग का गठन हो रहा है. केंद्र के वेतनमान आयोग की सिफारिशों के बाद राज्य की सरकारें भी इन सिफारिशों को अपनाती हैं या अलग से राज्य वेतन आयोग का गठन कर सकती हैं. 11 हजार रु तक बढ़ सकती है मध्य प्रदेश में सैलरी 8वें वेतनमान की सिफारिशों को लागू होने में एक साल से ज्यादा का वक्त लग सकता है. ऐसे में मध्य प्रदेश के कर्मचारियों को केंद्र बराबर लाभ मिलना फिलहाल संभव नहीं है. दरअसल, पहले ही मध्य प्रदेश के कर्मचारी डीए यानी महंगाई भत्ते के मामले में केंद्रीय कर्मचारियों से 5 प्रतिशत तक पीछे हैं. हाल ही में मध्य प्रदेश की मोहन सरकार ने कर्मचारियों के कई भत्तों को बढ़ाया लेकिन ये फिर भी केंद्रीय कर्मचारियों के बराबर नहीं हैं. माना जा रहा है कि 8वां वेतनमान लागू होने पर केंद्रीय कर्मचारियों की सैलरी 19 हजार रु प्रतिमाह तक बढ़ सकती है. वहीं, मध्य प्रदेश में ये लागू होता है तो कर्मचारियों की सैलरी 11 हजार रु तक बढ़ सकती है. एमपी में 13 साल बाद बढ़े भत्ते लेकिन केंद्र से कम मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार ने राज्य के कर्मचारियों को 13 साल बाद 13 तरह के भत्तों में लाभ दिया है. इसमें DA यानी महंगई भत्ता , HRA यानी हाउस रेंट अलाउंस समेत कई भत्ते शामिल हैं लेकिन कर्मचारी संगठन इससे खुश नहीं हैं. तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ के प्रदेश महामंत्री उमाशंकर तिवारी कहते हैं, ” 13 साल बाद भत्ते बढ़ाए लेकिन ये पर्याप्त नहीं है. कर्मचारियों को उचित लाभ मिलने की उम्मीद थी.अगर ये भत्ते केंद्र के हिसाब से बढ़ाए गए होते तो मध्य प्रदेश के कर्मचारियों को बड़ी राहत मिलती.” मध्य प्रदेश में DA होगा 60 प्रतिशत? बात करें मध्य प्रदेश के कर्मचारियों के DA की, तो छठवें वेतनमान की तुलना में सातवें वेतनमान में सैलरी में 14% की बढ़ोतरी हुई थी और इसके साथ मध्यप्रदेश में DA फिलहाल 50% मिल रहा है. अगले साल 8वें वेतनमान की सिफारिशें अगर लागू होती हैं तो मध्य प्रदेश के कर्मचारियों की कुल सैलरी 15 प्रतिशत तक बढ़ सकती है. इसमें कर्मचारियों का डीए 50 प्रतिशत से बढ़कर 60 प्रतिशत होने का अनुमान है. इस दौरान कर्मचारियों को 3 प्रतिशत का परफॉर्मेंस इंक्रीमेंट भी दिया जा सकता है. कुल मिलाकर मध्य प्रदेश के कर्मचारियों की सैलरी में बंपर बढ़त हो सकती है. 50% हुआ डीए फिर बेसिक सैलरी में क्यों नहीं जुड़ा? मध्य प्रदेश सरकार द्वारा हाल ही बढ़ाए गए महंगाई भत्ते से अब प्रदेश के कर्मचारियों को 50 प्रतिशत डीए मिल रहा है. लंबे समय से कर्मचारी संगठनों की मांग थी कि नियम मुताबिक 50 प्रतिशत से ज्यादा डीए होने पर इसे कर्मचारियों की बेसिक सैलरी से जोड़ दिया जाए. हालांकि, सरकार ने इस मांग को पूर्व में ही ठुकरा दिया था. दरअसल, सरकार ने छठवें वेतनमान की सिफारिश मानते हुए डीए को बेसिक सैलरी में नहीं जोड़ने का फैसला लिया था. सरकार का तर्क था कि ऐसा करने से प्रदेश की सरकार पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ बढ़ सकता था.

मास्टर प्लान की सड़कें शहर के यातायात को संभालने में असमर्थ, नई सड़कों और ब्रिज की आवश्यकता, तेजी से काम करना होगा

इंदौर  मास्टर प्लान के तहत बनने वाले मेजर रोड में हुई देरी का खामियाजा लंबे समय तक शहरवासियों को भुगतना पड़ेगा। 17 पहले बनी योजना के तहत बन रही ये सड़कें भी अब शहर का यातायात संभालने में सक्षम नहीं होंगी। एजेंसियों को नई सड़कों के साथ चौराहों पर ब्रिज और रिंग रोड की योजना पर भी तेजी से काम करना होगा। इधर मास्टर प्लान के तहत सड़कों का निर्माण अधूरा होने से वाहन चालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। खोदी गई सड़कें यातायात को कर रही बाधित सड़कों का काम समय पर पूर्ण नहीं होने से लाखों लोग रोजाना जाम में फंस रहे हैं। इससे समय और ईंधन दोनों बर्बाद हो रहे हैं। अधूरी और खोदी हुई सड़कें यातायात को बाधित कर रही हैं। इनकी वजह से रोज हादसे हो रहे हैं। जिन सड़कों का निर्माण शुरू किया गया है, उनका काम भी धीमी गति से जारी है। ऐसे में लोगों को धूल और गड्ढों के कारण परेशान होना पड़ रहा है। जिन सड़कों पर काम हुआ, वह भी टुकड़ों-टुकड़ों में बनी हैं और आधी-अधूरी हालत में छोड़ दी गई हैं। एमआर-5, एमआर-11 और एमआर-12 जैसी प्रमुख सड़कों की लागत अब कई गुना बढ़ गई है। देरी से बढ़ गई निर्माण लागत मास्टर प्लान की प्रमुख सड़कें दशकों तक नहीं बनने के कारण निर्माण लागत बढ़ गई है। कई लोगों को अन्य स्थानों पर विस्थापित करना पड़ेगा। एमआर-3 की निर्माण लागत शुरुआत में 34 करोड़ थी, जो अब 50 करोड़ के पार पहुंच गई है। एमआर-4 की लागत भी 55 करोड़ के पार पहुंच चुकी है। एमआर-11 को बनाने में 75 करोड़ रुपये खर्च हो रहे हैं। एमआर-12 को बनाने में 200 करोड़ से अधिक की राशि खर्च हो रही है। अन्य शहरों को जाने वाले वाहन शहर में करते हैं प्रवेश एमआर-11 और एमआर-12 का निर्माण पूरा नहीं होने से भोपाल और अन्य शहरों से आने वाले वाहनों को उज्जैन रोड जाने के लिए शहर में प्रवेश करना पड़ता है। वर्तमान में इन वाहनों का सर्वाधिक दबाव एमआर-10 पर है। यदि एमआर-11 बन गया होता तो बायपास से वाहन एबी रोड पहुंच सकते थे। एमआर-12 के बनने से वाहनों को एबी रोड और उज्जैन रोड तक की सीधी कनेक्टिविटी मिलने लगती। इन दोनों सड़कों के अधूरे होने से अभी विजय नगर क्षेत्र में वाहनों का खासा दबाव देखा जाता है। इनका निर्माण हुआ शुरू, लेकिन कई बाधाएं -एमआर-4 : रेलवे स्टेशन और आइएसबीटी को जोड़ने वाली इस सड़क पर कई निर्माण सड़क पर आ रहे हैं। – एमआर-5 : इंदौर वायर से बड़ा बांगड़दा तक बनने वाली सड़क पर भी लक्ष्मीबाई मंडी के आगे सुपर कारिडोर की तरफ कई अतिक्रमण हैं। – एमआर-11 : बायपास से एबी रोड तक बनने वाली इस सड़क पर कई अतिक्रमण हैं। इस सड़क का समय पर निर्माण नहीं होने से कई विकास अनुमतियां जारी हो गईं। अब इसका सर्वे कर नया लेआउट तय किया जा सकता है। – एमआर-12 : बायपास से एबी रोड होते हुए उज्जैन रोड को जोड़ने वाली सड़क पर बाधाएं हैं। गत दो साल से टुकड़ों में इसका निर्माण किया जा रहा है। कैलोदहाला कांकड़ पर 100 से ज्यादा घरों की बाधा है। इनको विस्थापित करने पर विचार किया जा रहा है। टुकड़ों- टुकड़ों में बनाया     मास्टर प्लान की प्रमुख सड़क एमआर-11 को बनाने का काम शुरू हो चुका है। दो साल में इसे पूरा कर लिया जाएगा। एमआर-12 का चार किमी हिस्सा टुकड़ों-टुकड़ों में बनाया जा चुका है। शेष सड़क का काम जारी है। कान्ह नदी पर पुल का काम शुरू हो चुका है। जल्द ही कैलोदहाला रेलवे क्रासिंग पर आरओबी का काम शुरू किया जाएगा। सिंहस्थ तक इस सड़क को बनाने का लक्ष्य रखा गया है। – आरपी अहिरवार, सीईओ, आईडीए सड़कों के लिए राशि आवंटित हुई     मास्टर प्लान की कुछ सड़कों का काम शुरू हो गया है और कुछ का काम जल्द शुरू होगा। हमारा लक्ष्य सिंहस्थ से पहले मास्टर प्लान की सभी सड़कों को तैयार करने का है। हमें पूरा विश्वास है कि हम लक्ष्य हासिल कर लेंगे। सड़कों को चार पैकेज में करने का उद्देश्य भी यही है। सड़कों के लिए राशि आवंटित हो चुकी है। कार्यादेश भी जारी हो गए हैं। ऐसे में दिक्कत नहीं आएगी। – शिवम वर्मा, नगर निगम आयुक्त इंदौर    

ग्रामीण क्षेत्रों में नागरिकों के सुगम आवागमन के लिए प्रदेश की शत-प्रतिशत बसाहटों को सड़कों से जोड़ने की समय-सीमा निर्धारित

भोपाल एमपी सरकार अगले तीन साल में प्रदेश की सभी बसाहटों को सड़कों से जोड़ने के लिए काम कर रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में नागरिकों के सुगम आवागमन और बेहतर कनेक्टिविटी के लिए प्रदेश की शत-प्रतिशत बसाहटों को सड़कों से जोड़ने के लिए समय-सीमा निर्धारित कर कार्रवाई करें।  सभी जिलों में सड़कों की आवश्यकता का वैज्ञानिक आधार पर सर्वे कर कार्य-योजना बनाई जाए। सीएम डॉ. मोहन यादव ने मध्यप्रदेश ग्रामीण सड़क विकास प्राधिकरण की बैठक में पीएम ग्राम सड़क योजना के कार्यों की समीक्षा के दौरान यह निर्देश दिए। बैठक में मंत्री प्रहलाद पटेल, सीएस अनुराग जैन सहित अन्य अधिकारी मौजूद थे। एआइ का करें उपयोग सीएम ने कहा, क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्त, उन्नयन के लिए तत्काल कार्रवाई की जाए। सड़कों के रखरखाव, निरीक्षण में ऐप, जियो टैगिंग और एआइ का उपयोग कर और प्रभावी बनाया जाए। बैठक में बताया गया कि 89 हजार बसाहटों में से 50,658 बसाहटें सड़क मार्ग से जुड़ चुकी हैं। ग्राम सड़क योजना-4 के तहत बनने वाली 11,544 बसाहटों के लिए सर्वे कर लिया गया है। शेष 26,798 बसाहटों की कनेक्टिविटी के लिए राज्य सरकार द्वारा पहल की जा रही है। 89 हजार में से 50 हजार बसाहटों में सड़कें अधिकारियों ने सीएम को बताया कि जनमन योजना के अंतर्गत पाण्डाटोला से बीजाटोला तक देश की पहली सड़क का निर्माण बालाघाट जिले के परसवाड़ा क्षेत्र में किया गया है। मेंटेनेंस और उन्नयन के लिए भारत सरकार से प्रोत्साहन राशि प्राप्त करने में मध्यप्रदेश प्रथम रहा है। मार्गों के संधारण के लिए 2015-16 से लागू ई-मार्ग पोर्टल की राष्ट्रीय स्तर पर सराहना हुई तथा केंद्र द्वारा इसे पूरे देश में नेशनल ई-मार्ग के रूप में लागू किया गया है। सीएम ने कहा कि सड़कों पर वर्तमान यातायात का सर्वे कर उन्नयन और लेन विस्तारीकरण का कार्य प्राथमिकता से किया जाए।

भारतीय रेल का नया कीर्तिमान: कोच निर्माण में दुनिया का अग्रणी देश बनकर उभरा भारत

भोपाल भारतीय रेल ने वित्तीय वर्ष 2024-25 में 7,134 कोचों का निर्माण कर महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। यह संख्या पिछले वर्ष 6,541 कोचों के उत्पादन की तुलना में करीब 9 प्रतिशत अधिक है। आम आदमी का ध्यान रखते हुए गैर वातानुकूलित कोचों के उत्पादन को बढ़ावा दिया जा रहा है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए पिछले वित्त वर्ष में 4,601 नॉन एसी कोच का उत्पादन हुआ। यह ऐतिहासिक उपलब्धि भारतीय रेल की उत्पादन क्षमता में लगातार हो रही वृद्धि को दर्शाती है, जो बुनियादी ढांचे के आधुनिकीकरण और यात्रियों की बढ़ती जरूरतों को पूरा करने के लिए किए जा रहे प्रयासों का परिणाम है। इससे रेल सेवाएं अधिक सुविधाजनक, सुरक्षित और कुशल बनेंगी। जिससे यात्रियों को बेहतर यात्रा का अनुभव मिलेगा। भारतीय रेल की तीन कोच निर्माण इकाइयां हैं। जिसमें तमिलनाडु के चेन्नई में इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF), पंजाब के कपूरथला में रेल कोच फैक्ट्री (RCF) और उत्तर प्रदेश के रायबरेली में मॉडर्न कोच फैक्ट्री (MCF) शामिल है। चेन्नई स्थित इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF) ने वर्ष 2024-25 में पिछले उत्पादन रिकॉर्ड को तोड़ने हुए 3,007 कोच का उत्पादन किया है। वर्ष 2024-25 में भारतीय रेल की कोच निर्माण इकाइयों द्वारा कोच उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF), चेन्नई ने वर्ष 2023-24 में 2,829 कोचों का निर्माण किया था, जो 2024-25 में बढ़कर 3,007 हो गया है, यानी 178 कोचों की वृद्धि दर्ज की गई है। रेल कोच फैक्ट्री (RCF), कपूरथला द्वारा वर्ष 2023-24 में 1,901 कोच बनाए गए थे, जबकि 2024-25 में इसका आंकड़ा बढ़कर 2,102 कोच हो गया है, जिससे 201 कोचों की बढ़ोत्तरी हुई है। इसी प्रकार, मॉडर्न कोच फैक्ट्री (MCF), रायबरेली ने वर्ष 2023-24 में 1,684 कोचों का निर्माण किया था, जो 2024-25 में बढ़कर 2,025 कोच हो गया है। इस इकाई द्वारा 341 कोचों की सर्वाधिक वृद्धि दर्ज की गई है। यह आँकड़े भारतीय रेल की उत्पादन क्षमता और मांग के अनुसार संसाधन विस्तार के सकारात्मक संकेत प्रदान करते हैं। पिछले कुछ वर्षों के दौरान भारतीय रेल ने कोच निर्माण क्षेत्र में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की है।  2004 से 2014 के बीच प्रति वर्ष औसतन 3,300 कोच के करीब था। वहीं 2014 से 2024 के बीच कोच उत्पादन का आंकड़ा रिकॉर्ड बढ़ोतरी के साथ 54,809 पहुंच गया, जिसका औसत 5,481 कोच रहा है। कोच निर्माण क्षेत्र में यह वृद्धि भारतीय रेल द्वारा आत्मनिर्भरता हासिल करने की दिशा में निर्णायक है। इसका उद्देश्य घरेलू निर्माण क्षमता को मजबूत करना, आयात पर निर्भरता को कम करना और रेलवे संरचना में अत्याधुनिक तकनीक को अपनाना है। रेल कोच निर्माण में भारतीय रेल की यह उपलब्धि ‘मेक इन इंडिया’ पहल को नया आयाम देती है। साथ ही विश्व पटल पर भारत को एक अग्रणी देश के रूप में स्थापित करती है।   कोच उत्पादन में भारतीय रेल की सफलता ‘मेक इन इंडिया’ पहल का हिस्सा है, जो रेल ट्रांसपोर्ट व्यवस्था को और अधिक कुशल बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। एडवांस तकनीक से लैस आधुनिक कोच यात्रियों को ज्यादा आराम, अधिक स्थान और अत्याधुनिक सुविधाएं प्रदान कर रहे हैंगे। इससे यात्रा का अनुभव और ज्यादा  आरामदायक बन रहा है। इसके साथ ही उच्च उत्पादन क्षमता से ट्रेनों की संख्या में वृद्धि हो रही है।

10 जल विद्युत गृहों ने उत्पादित की 2757 मिलियन यूनिट बिजली: ऊर्जा मंत्री तोमर

भोपाल ऊर्जा मंत्री श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने बताया है कि मध्यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कंपनी के जल विद्युत गृहों ने वित्तीय वर्ष 2024-25 में मध्यप्रदेश नियामक आयोग द्वारा निर्धारित वार्षिक उत्पादन लक्ष्य को पार करते हुए बेहतरीन प्रदर्शन किया। मध्यप्रदेश विद्युत नियामक आयोग ने पॉवर जनरेटिंग कंपनी के जल विद्युत गृहों के लिए वित्तीय वर्ष 2024-25 में 2694 मिलियन यूनिट विद्युत उत्पादन करने का लक्ष्य निर्धारित किया था। जल विद्युत गृहों ने सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए 2757 मिलियन यूनिट विद्युत उत्पादन किया। जल विद्युत गृहों द्वारा वर्ष 2020-21 के बाद यह उपलब्ध‍ि हासिल की। उल्लेखनीय है कि मध्यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कंपनी की जल विद्युत उत्पादन क्षमता 915 मेगावाट है छह जल विद्युत गृहों ने वार्ष‍िक लक्ष्य से अधिक किया उत्पादन मध्यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कंपनी के इस उपलब्धि में 90 मेगावाट स्थापित क्षमता के रानी अवंतीबाई सागर जल विद्युत गृह बरगी, 160 मेगवाट स्थापित क्षमता के पेंच जल विद्युत गृह तोतलाडोह, 315 मेगावाट स्थापित क्षमता के बाणसागर-एक टोंस जल विद्युत गृह सिरमौर, 20 मेगावाट स्थापित क्षमता के बाणसागर-4 जल विद्युत गृह झिन्ना, 45 मेगावाट स्थापित क्षमता के राजघाट जल विद्युत गृह और 60 मेगावाट स्थापित क्षमता के मरहीखेड़ा जल विद्युत गृह ने प्रमुख योगदान दिया। इन सभी विद्युत गृहों ने अपने वार्ष‍िक उत्पादन लक्ष्य से अधिक विद्युत उत्पादन किया। बाणसागर–2 जल विद्युत गृह सिलपारा व बाणसागर–3 जल विद्युत गृह देवलोंद ने भी नियामक आयोग के निर्धारित लक्ष्य को हासिल किया। बरगी जल विद्युत गृह का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन मध्यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कंपनी के रानी अवंती बाई सागर जल विद्युत गृह बरगी सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए वर्ष 2013-14 के बाद पहली बार नियामक आयोग द्वारा निर्धारित वार्षिक लक्ष्य 508 मिलियन यूनिट की तुलना में 509 मिलियन यूनिट विद्युत उत्पादन किया। यह पिछले वर्ष की तुलना में 58 मिलियन यूनिट अधिक है। 37 वर्ष पुराने बरगी जल विद्युत गृह का प्लांट अवेलेबिलिटी फैक्टर 92.5 प्रतिशत रहा।  

जल गंगा संवर्धन अभियान – जनशक्ति से जलसंरक्षण की क्रांति

Amla Municipal Chairman wrote a letter to the Collector and asked

भोपाल प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने जल संरक्षण में जनता की भागीदारी का विशेष रूप से उल्लेख किया है। उन्होंने “खेत का पानी खेत में, गांव का पानी गांव में” के सिद्धांत को अपनाने पर जोर दिया है। इसी सोच को साकार करने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य- “जल गंगा संवर्धन अभियान” के द्वारा जल संरक्षण में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। इस अभियान के अंतर्गत नवीन जल संग्रहण संरचनाओं के साथ-साथ पूर्व से मौजूद जल संग्रहण संरचनाओं का जीर्णोद्धार, जल स्त्रोतों और जल वितरण प्रणालियों की साफ सफाई, जल स्त्रोतों के आस-पास पौध रोपण के कार्य प्राथमिकता पर किये जा रहे हैं। इसके साथ ही समाज की सहभागिता के लिए जल संरक्षण जागरूकता के कार्यक्रम भी आयोजित किये जा रहे हैं। प्रदेश के ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में अभियान जनप्रतिनिधि और जनमानस बढ़ चढ़कर भाग ले रहे हैं। विधायक सहित आमजन ने किया श्रमदान गुरुवार को जनपद शिवपुरी की सतेरिया पंचायत में प्राचीन तालाब की गाद निकालने, अनावश्यक झाड़ियों की सफाई के लिए विधायक शिवपुरी श्री देवेन्द्र जैन ने ग्रामवासियों के साथ श्रमदान किया। विधायक देवेन्द्र जैन ने कहा कि आप पानी बचाएंगे तभी पानी आपको बचाएगा। हम सभी को जल संरक्षण की दिशा में एकजुट प्रयास करने होंगे, तभी आगे की पीढ़ी को पानी मिल पायेगा। एक एक बूँद संरक्षित करने के लिए हर व्यक्ति को प्रयास करने होंगे, तभी इस अभियान की सार्थकता होगी। जल संरक्षण पर जन संवाद इंदौर जिले के ग्राम जलोदकेऊ में जल संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस गांव में ग्रामीणों ने श्रमदान कर तालाब का गहरीकरण भी किया। समिति सदस्यों एवं ग्रामीणों के साथ जल संवाद किया गया। जिसमें जल स्रोतों का पूजन एवं रख-रखाव के लिये श्रमदान कर पुराने जल स्रोतों को पुनर्जीवित करने हेतु चर्चा की गई। जल संरक्षण के लिये दीवार पर लेखन के माध्यम से ग्रामीणों को जागरूक किया गया। जल के अपव्यय को रोकने हेतु समाज को प्रेरित किया गया। इसी कड़ी में आज सुबह ग्राम जलोदकेऊ में स्थित छोटे तालाब में श्रमदान कर गहरीकरण किया गया। जल को सहेजने एवं उसके संरक्षण के लिये शपथ भी दिलवाई गई। गाँव-गाँव में बन रहे रिचार्ज पिट देवास जिले के टोंकखुर्द विकाखण्ड में “जलगंगा संवर्धन अभियान” के अंतर्गत बारिश के पानी को सहेजने की दिशा में कार्य प्रारंभ किया गया है। गांवों में रिचार्ज पिट के माध्यम से वर्षा जल को सहेजने का कार्य किया जा रहा है। जनपद के कई गाँवों में रिचार्ज पिट बनाए जा रहे हैं। “अमृत संचय अभियान” की टीम ने विकासखण्ड के जिरवाय, चौबाराधीरा तथा पांडी गाँवों का भ्रमण कर नवनिर्मित रिचार्ज पिट का अवलोकन किया। जल संरक्षण के संदेश लिखकर किया जागरूक छिंदवाड़ा जिले के विकासखंड जुन्नारदेव के ग्राम पंचायत जमकुंडा, में जल गंगा संवर्धन के तहत आम नागरिकों को जल को सहेजने और जल संरक्षण के प्रति जागरूक बनाने के लिये गाँव की दीवारों पर चित्र बनाकर स्लोगन लिखवाये जा रहें। ग्राम जीरापुर में तालाब की सफाई मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद के अंतर्गत जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत विकासखंड नालछा के ग्राम जीरापुर में एक विशेष श्रमदान कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान श्रमदानियों ने तालाब के किनारों से कचरा हटाने, जलभराव क्षेत्र की सफाई करने तथा जल स्रोतों को संरक्षित करने के लिये जागरूकता अभियान चलाया। इस सामूहिक प्रयास का मुख्य उद्देश्य जल संरक्षण और स्वच्छता को बढ़ावा देना था, जिससे ग्रामवासियों को स्वच्छ जल उपलब्ध हो सके एवं पर्यावरण संतुलन बना रहे। ग्रामीणों ने भी इस पहल की सराहना की और भविष्य में इस प्रकार के अभियानों में सहयोग देने का संकल्प लिया। सुबकरा में कुएं की सफाई एवं गहरीकरण श्योपुर जिले के कराहल विकासखण्ड के ग्राम सुबकरा में सार्वजनिक कुएं पर सामूहिक श्रमदान से सफाई का कार्य किया गया। ग्रामवासियों ने गाँव में स्थित कुएं के आसपास स्वच्छता कार्य करते हुए श्रमदान किया और साथ ही जल संरक्षण की शपथ ली। विजयपुर ब्लाक चांदीपुरा ग्राम स्थित तालाब के किनारे स्वच्छता अभियान चलाते हुए जल संरक्षण की शपथ ग्रामीणों को दिलाई गई। नगर पालिका परिषद भिण्ड द्वारा नागरिकों को जल संरक्षण के प्रति जागरूक करने के लिये नगर पालिका कार्यालय से सुभाष तिराहा तक जन जागरूकता रैली का आयोजन किया गया। उपस्थित लोगों को जल संरक्षण का संकल्प भी दिलाया गया। ग्राम बैठक का आयोजन एवं नदी तट की सफाई छिंदवाडा़ जिले के सौंसर विकासखण्ड की ग्राम पंचायत देवली एवं खांडसिवनी में ग्राम बैठक का आयोजन कर जल संरक्षण की विविध जानकारी दी गई। नदी तट की साफ सफाई कर स्वच्छता का संदेश दिया गकया। ग्राम सभा में जल संरक्षण के लिये सोक-पिट का निर्माण और जल स्रोतों की साफ सफाई करने के लिये प्रेरित किया गया। इस अवसर पर ग्रामीणजनों ने श्रमदान किया। सांईखेड़ी में खेत तालाब का निर्माण खरगोन जिले के भीकनगांव विकासखंड के ग्राम सांईखेड़ी में मनरेगा से किसानों के खेत में तालाब का निर्माण कार्य 03 अप्रैल को प्रारंभ किया गया है। चम्पालाल के खेत में तालाब बनने से वर्षा का पानी में उसमें संचित होगा और फसलों की सिंचाई के काम आयेगा। जनपद पंचायत भीकनगांव की मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्रीमती पूजा मलाकार सैनी ने बताया कि चम्पालाल के खेत में खेत तालाब निर्माण के लिए मनरेगा से 02 लाख 89 हजार रुपये की मंजूरी प्रदान की गई है। इस तालाब के निर्माण कार्य से चम्पालाल एवं अन्य ग्रामीणों को रोजगार मिलेगा और तालाब बनने से गांव के भू-जल स्तर में सुधार होगा। चम्पालाल के खेत में तालाब निर्माण का कार्य प्रारंभ होने से वह बहुत खुश है। वह इस तालाब में मछली पालन का काम भी करना चाहता है।  

बिजली चोरी के सूचनाकर्ता को पारितोषिक की 5 फीसदी राशि तुरंत मिलेगी

भोपाल मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा बिजली चोरी की रोकथाम के लिए चलाई जा रही पारितोषिक योजना के तहत बिजली के अवैध उपयोग की सूचना देने पर प्रकरण बनाने एवं राशि वसूली होने पर सूचनाकर्ता को 10 प्रतिशत प्रोत्साहन राशि दी जाती है। योजना के संशोधित प्रावधान के अनुसार 5 प्रतिशत राशि का भुगतान संबंधित सूचनाकर्ता को सूचना सही पाए जाने पर जारी किए गए अंतिम निर्धारण आदेश के तुरंत बाद किया जाएगा। शेष पांच प्रतिशत राशि पूर्ण वसूली उपरांत देय होगी। कंपनी में कार्यरत नियमित कर्मचारी/ संविदा/ आउटसोर्स कर्मचारी को भी सूचनाकर्ता के रूप में शामिल किया गया है। सूचना सही पाए जाने एवं जारी किए गए अंतिम निर्धारण आदेश की पूर्ण वसूली होने पर एक प्रतिशत प्रोत्साहन राशि के रूप में दी जाएगी। कंपनी ने कहा है कि विभिन्न परिसरों की जांच एवं जांच के बाद बनाये गये पंचनामा के आधार पर आरोपी के विरूद्ध निकाली गयी राशि की वसूली में सभी कर्मचारियों का महत्वपूर्ण योगदान रहता है। कंपनी ने विभागीय अधिकारियों एवं कर्मचारियों के साथ जांच एवं वसूली के कार्य में शामिल बाह्य स्त्रोत कर्मचारियों को भी परितोषिक योजना के तहत दी जाने वाली 2.5 (ढाई) प्रतिशत प्रोत्साहन राशि को सभी संबंधितों को समान रूप में दिया जाना निर्धारित किया गया है। कंपनी ने कहा है कि अब पारितोषिक योजना की पूरी जानकारी जैसे बिलिंग, भुगतान से संबंधित गतिविधियों को ऑनलाइन कर दिया गया है। अब सूचनाकर्ता को कंपनी के पोर्टल पर गुप्त रूप से दिए गए प्रारूप में बैंक खाता, पहचान क्र. (आधार अथवा पेन ) देना अनिवार्य कर दिया है। कंपनी द्वारा विद्युत की चोरी के प्रभावी रोकथाम एवं विद्युत के अवैध उपयोग को रोकने के लिए यह योजना चलाई गई है। योजनांतर्गत कोई भी व्यक्ति बिजली के अवैध उपयोग के संबंध में सूचना कंपनी मुख्यालय, क्षेत्रीय कार्यालय में मुख्य महाप्रबंधक, संचा.संधा/शहर वृत्त कार्यालय के महाप्रबंधकों को लिखित अथवा मोबाईल के साथ ही कंपनी की वेबसाईट  portal.pmcz.in पर ऑनलाईन सूचना दे सकते हैं। पोर्टल अथवा उपाय एप पर देनी होगी सूचना कंपनी द्वारा योजना में सूचनाकर्ता को निर्धारित शर्तों के अधीन पारितोषिक देने का प्रावधान है। इस राशि की अधिकतम सीमा नहीं है। वर्तमान में इस व्यवस्था को पूर्ण रूप से ऑनलाइन किया गया है। कंपनी की वेबसाइट  portal.mpcz.in  पर जाकर informer scheme लिंक पर क्लिक करके, सूचनाकर्ता के द्वारा गुप्त सूचना दर्ज की जा सकती है एवं उपाय ऐप के माध्यम से भी बिजली चोरी की सूचना दी जा सकती है। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा सभी नागरिकों के साथ आउटसोर्स कर्मचारियों तथा उपभोक्ताओं से अपील की गई है कि वे गुप्त सूचना देकर, पारितोषिक योजना का लाभ उठाकर कंपनी को सहयोग प्रदान अवश्य करें।

मां के जगराता मैं भजन कीर्तन का आयोजन

भोपाल चैत्र नवरात्रि के चतुर्थ दिवस पर सुंदरकांड और माता रानी की जगराते का आयोजन कर दिया। इस आयोजन में राष्ट्यदुवंशम सेना के धर्मेंद्र यादव जिला अध्यक्ष मनजीत यादव जिला उपाध्यक्ष और रोहित यादव जी राष्ट्रीय युवा अध्यक्ष उपस्थित रहे । सभी लोगों ने माता के जगराता में सभी को शुभकामनाएं दी

गत वर्ष की तुलना में अब तक लगभग 13 हजार से अधिक विद्युत चोरी के मामले हुए दर्ज

भोपाल मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा वर्ष 2024-25 में विद्युत की चोरी के 88 हजार 115 प्रकरण दर्ज कर 19410.53 लाख से अधिक की बिलिंग की जाकर 11587.17 लाख से अधिक की वसूली की गई है। कंपनी ने बताया कि विजिलेंस टीम द्वारा विद्युत चोरी की अनियमितताओं से संबंधित सूचनाओं के आधार पर की गई जांच में पायी गयी विद्युत चोरी की अनियमितता के आधार पर बिल की गयी राशि तथा प्रकरणों में गत वर्ष की तुलना में इस वर्ष इजाफा हुआ है। कंपनी ने बताया कि जहां वर्ष 2024-25 में विद्युत चोरी के 88 हजार 115 प्रकरण दर्ज कर 19410.53 लाख से अधिक की बिलिंग सहित 11587.17 लाख से अधिक की वसूली की गई है।  वर्ष 2023-24 में 74 हजार 579 प्रकरण के विरुद्ध 19776.48 लाख की बिलिंग की गई,  जिसमें से 8632.95 लाख की वसूली हो चुकी है। इस तरह से गत वर्ष की तुलना में 2954.22 लाख की बढ़ोतरी हुई है।  

लगभग 11 हजार ग्रामीण कृषकों ने लिया मात्र 5 रुपये में कृषि पंप का कनेक्शन

भोपाल ऊर्जा मंत्री श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने बताया है कि ग्रामीण कृषि उपभोक्‍ताओं को विद्युत वितरण कंपनी मात्र 5 रुपये में स्‍थायी कृषि पंप कनेक्‍शन उपलब्‍ध करा रही हैं। योजना के शुरू हुई होने से अब तक मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी क्षेत्र में लाभ 10 हजार 963 उपभोक्‍ताओं को इस योजना का लाभ मिल चुका है। ऐसे कृषक जो विद्युत की उपलब्ध लाइन के समीप स्थित हैं, उनको सुविधानुसार आसानी से स्थाई कृषि पंप कनेक्शन दिया जा रहा है।  

नीति आयोग से आकांक्षी ज़िला कार्यक्रम में उत्कृष्ट प्रदर्शन पर खंडवा को मिला 3 करोड़ रुपये का पुरस्कार

भोपाल आकांक्षी ज़िला कार्यक्रम में खंडवा ज़िले ने स्वास्थ्य और पोषण के क्षेत्र में असाधारण प्रगति की है। नीति आयोग ने खंडवा के उत्कृष्ट प्रयासों की सराहना की है। नीति आयोग ने बेहतर कार्यों के लिये खंडवा ज़िले को 3 करोड़ रुपये की पुरस्कार राशि प्रदान की है। इस उपलब्धि के लिये ज़िले में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने और कुपोषण के खिलाफ व्यापक रणनीति अपनाने के प्रयास प्रमुख रहे हैं। खंडवा की उपलब्धि मध्यप्रदेश के लिए गर्व का विषय: उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि खंडवा की उपलब्धि पूरे मध्यप्रदेश के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं में लगातार सुधार हो रहा है। आकांक्षी ज़िला कार्यक्रम में इस तरह की सफलता प्रदेश के अन्य जिलों के लिए भी प्रेरणास्रोत बनेगी। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि यह उपलब्धि खंडवा प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, आशा और एएनएम के सतत प्रयासों का परिणाम है। उन्होंने सभी विभागीय अधिकारियों, मैदानी कार्यकर्ताओं की सराहना की है। फ्रंटलाइन हेल्थ वर्कर्स को निरंतर प्रशिक्षित कर कार्यक्षमता में की गई वृद्धि मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. ओ.पी. जुगतावत ने बताया कि ज़िले में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिये योजनाबद्ध प्रयास किए गए। ज़िले में प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों को आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित किया गया। आउटरीच स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार कर दूरस्थ इलाकों में चिकित्सा सुविधा पहुंचाई गई। इसके साथ ही फ्रंटलाइन हेल्थ वर्कर्स को निरंतर प्रशिक्षित कर उनकी कार्यक्षमता में वृद्धि की गई। हाई रिस्क प्रेगनेंसी की समय पर पहचान कर संस्थागत सुरक्षित प्रसव किया गया सुनिश्चित खंडवा ज़िले में मातृ स्वास्थ्य में सुधार के लिये गर्भवती महिलाओं के पंजीयन, जांच और संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने के लिए नवीन प्रसव केंद्र स्थापित किए गए। चिन्हित उप-स्वास्थ्य केंद्रों में प्रसूति संबंधी समस्त आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई गयी, इससे घर पर प्रसव के मामलों में उल्लेखनीय कमी आई। उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं की समय पर पहचान कर उनका समुचित उपचार सुनिश्चित किया गया। ‘लक्ष्य’ एवं नेशनल क्वालिटी एश्योरेंस स्टैंडर्ड्स (एनक्यूएएस) में ज़िले की 25 स्वास्थ्य संस्थाओं को उन्नत किया गया, जिससे मरीजों को गुणवत्तापूर्ण सेवाएं मिल रही हैं। छूटे हुए बच्चों का टीकाकरण और कुपोषित बच्चों की विशेष देखरेख खंडवा ज़िले में शिशु स्वास्थ्य में सुधार के लिए समेकित प्रयास किए गये। सम्पूर्ण टीकाकरण सुनिश्चित करने के साथ कुपोषण निदान की प्रभावी कार्रवाई से सकारात्मक परिणाम मिलना प्रारम्भ हुए। ‘मिशन इंद्रधनुष’ के तहत छूटे हुए बच्चों को चिन्हित कर उन्हें पूर्ण टीकाकरण के दायरे में लाया गया। कुपोषित बच्चों की पहचान कर उन्हें पूरक पोषण योजनाओं से जोड़ा गया। आंगनवाड़ी केंद्रों शिशु पोषण और देखभाल पर विशेष जागरूकता अभियान चलाया गया। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को किया सशक्त खंडवा जिले में 177 उप-स्वास्थ्य केंद्रों को ‘आयुष्मान आरोग्य मंदिर’ के रूप में क्रियाशील किया गया, जिससे ग्रामीणों को प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं सुलभ हुईं। टीबी उन्मूलन कार्यक्रम के तहत लक्ष्य से अधिक मरीजों की पहचान कर उन्हें उपचारित किया गया। नॉन-कम्युनिकेबल डिसीज़ (एनसीडी) कार्यक्रम में ब्लड प्रेशर और शुगर की जांच के लिए व्यापक अभियान चलाया गया। इससे मरीजों का समय पर उपचार संभव हुआ। स्वास्थ्य, शिक्षा और पोषण में पुरस्कार राशि से किए जायेंगे विकास कार्य कलेक्टर खंडवा श्री ऋषभ गुप्ता ने कहा कि नीति आयोग द्वारा प्राप्त 3 करोड़ रुपए की राशि को स्वास्थ्य, शिक्षा और पोषण के चिन्हित क्षेत्रों में निवेश किया जाएगा, जिससे ज़िले के विकास को और गति मिलेगी।  

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