LATEST NEWS

राज्यसभा से दूरी पर आनंद शर्मा का बड़ा बयान, ‘सच बोलो तो राजनीति में जगह नहीं’

हिमाचल प्रदेश हिमाचल प्रदेश में इस बार राज्यसभा चुनाव कांग्रेस के लिए बेहद आसान और सुखद नजर आ रहा है। भाजपा की ओर से कोई भी उम्मीदवार नहीं उतारे जाने के कारण कांग्रेस उम्मीदवार अनुराग शर्मा का निर्विरोध चुना जाना लगभग तय है। इस बार राज्यसभा कैंडिडेट के तौर पर मौका नहीं दिए जाने पर कांग्रेस लीडर आनंद शर्मा की प्रतिक्रिया सामने आई है। उन्होंने कहा है कि पॉलिटिक्स में सेल्फ रिस्पेक्ट बहुत महंगी पड़ती है। सच बोलना अक्सर गुनाह माना जाता है। मैं इस मामले को हाईकमान के पास नहीं ले जाऊंगा। सुप्रीम कमांड ही देगा जवाब यह पूछे जाने पर कि ऐसा लग रहा है कि टिकट नहीं मिलने से निराश हैं। इस पर आनंद शर्मा ने कहा कि मुझे कुछ नहीं पता… मुझे कोई जानकारी नहीं है। आगे एएनआई संवाददाता के यह पूछे जाने पर कि सेंट्रल लीडरशिप ऐसे फैसले ले रही हैं क्योंकि कांग्रेस बैकफुट पर जा रही है? इस पर आनंद शर्मा ने कहा कि इसका जवाब तो सुप्रीम कमांड जिन्होंने फैसला लिया है वही दे सकते हैं और जिनके कहने पर फैसला होता है वह बता सकते हैं। राजनीति में आत्मसम्मन बहुत महंगा, सच बोलना अपराध आनंद शर्मा ने कहा कि मैं इस पर कोई टिप्पणी करने की स्थिति में नहीं हूं। इस बात पर कि हिमाचल प्रदेश में आनंद शर्मा का राजनीतिक सफर 50 साल का रहा है। ऐसे में इस घटनाक्रम को आप किस तरह देखते हैं। इस पर आनंद शर्मा ने कहा कि देखिए निराशा तो नहीं कहूंगा लेकिन एकबार जरूर कहना चाहूंगा कि राजनीति में आत्मसम्मान बहुत महंगी चीज होता है। इसकी कीमत चुकानी पड़ती है और सच बोलना एक अपराध और अभिशाप समझा जाता है। इसके आगे मैं कुछ नहीं कह सकता हूं। हिमाचल प्रदेश को रिप्रेजेंट करना मेरे लिए गर्व की बात आनंद शर्मा ने आगे कहा कि दशकों से हिमाचल प्रदेश और देश को रिप्रेजेंट करना मेरे लिए गर्व की बात रही है। मैं हमेशा हिमाचल प्रदेश के लोगों के साथ रहूंगा। आनंद शर्मा को सच बोलने से कभी नहीं रोका जा सकता है। मैं यह मामला हाईकमान के पास नहीं ले जाऊंगा। मैं इस मुद्दे पर उनके साथ कोई बात नहीं करूंगा। पिछली बार कांग्रेस को लगा था झटका बता दें कि हिमाचल प्रदेश में राज्यसभा सीट भाजपा की राज्यसभा सांसद इंदु गोस्वामी का छह साल का कार्यकाल पूरा होने के बाद खाली हुई है। करीब दो साल पहले हुए राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस को बड़ा झटका लगा था। उस समय कांग्रेस उम्मीदवार अभिषेक मनु सिंघवी हार गए थे और भाजपा के हर्ष महाजन राज्यसभा पहुंचे थे। उस चुनाव में कांग्रेस नेताओं की ओर से क्रॉस वोटिंग सामने आई थी। हालांकि इस बार स्थिति अलग है। कांग्रेस के लिए यह चुनाव आसान है। भाजपा ने इस बार अपना कंडिडेट नहीं उतारा है।

‘जंगलराज खत्म कर विकास की राह दिखाई’ – नीतीश कुमार की उम्मीदवारी पर अमित शाह की खुलकर सराहना

नई दिल्ली नीतीश कुमार बिहार के मुख्यमंत्री का पद छोड़कर अब दिल्ली की राह पर निकल रहे हैं। उन्होंने बिहार विधानसभा परिसर में गुरुवार को राज्यसभा के लिए नामांकन किया। इस दौरान होम मिनिस्टर अमित शाह, डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी समेत कई नेता मौजूद थे। नीतीश कुमार के साथ ही भाजपा के अध्यक्ष नितिन नवीन ने भी नामांकन दाखिल कर दिया है। शिवेश राम और उपेंद्र कुशवाहा ने भी नामांकन दाखिल कर दिया। इस मौके पर गृह मंत्री अमित शाह लगातार नीतीश कुमार के साथ मौजूद रहे। उन्होंने नीतीश कुमार की सराहना भी की है और कहा कि बिहार के लोग उनके कार्यकाल को हमेशा याद करेंगे। अमित शाह ने कहा कि हम और भाजपा के करोड़ों कार्यकर्ता नितिन नवीन जी का संसद में स्वागत करते हैं। इसके अलावा उन्होंने नीतीश कुमार की जमकर तारीफ की। शाह ने कहा, ‘नीतीश कुमार जी ने भी अपना नामांकन किया है। लंबे अरसे के बाद नीतीश कुमार राज्यसभा में प्रवेश करेंगे। 2005 से अब तक वह सीएम रहे। उनका यह कार्य़काल बिहार के इतिहास में स्वर्णि म अक्षरों में लिखा जाएगा। उन्होंने अपने काल में राज्य को जंगलराज से मुक्त किया। उन्होंने सड़कों का जाल बिछाया। उनके कुर्ते पर भी कभी दाग नहीं लगा।’ होम मिनिस्टर ने कहा कि बिना किसी आरोप के उन्होंने इतना लंबा सफर शायद ही किसी नेता ने तय किया होगा। हर घर में बिजली पहुंचाने में उनका बड़ा रोल है। उन्होंने सार्वजनिक जीवन में हमेशा शुचिता और ईमानदारी बरती। उनकी लीडरशिप में ही पीएम मोदी की भेजी हुई हर योजना जन-जन तक पहुंची। वह जेपी आंदोलन से निकले प्रमुख नेता थे। उन्होंने पूरी जिंदगी जेपी के सिद्धांतों पर चलकर गुजारी है। हम उनका दिल से स्वागत करते हैं। उनके कार्यकाल को बिहार के लोग हमेशा याद रखेंगे और उसका सम्मान भी करेंगे। गौरतलब है कि नीतीश कुमार ने एक फेसबुक पोस्ट लिखकर अपनी राज्यसभा की इच्छा जाहिर की है। उनका कहना था कि अपनी संसदीय राजनीति में वह लोकसभा में रहे, विधानसभा के दोनों सत्रों में रहे और अब राज्यसभा जाने की इच्छा है। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि बिहार में नई बनने वाली सरकार को मेरा पूरा समर्थन और मार्गदर्शन मिलेगा। गौरतलब है कि नीतीश कुमार के हटने के बाद उनके बेटे निशांत कुमार को डिप्टी सीएम का पद मिल सकता है। वहीं बिहार के राजनीतिक इतिहास में पहली बार भाजपा का मुख्यमंत्री हो सकता है। हालांकि यह तय नहीं है कि भाजपा की ओर से कौन सा नेता कमान संभालेगा।  

NDA में बदला समीकरण: बिहार में BJP के सीनियर पार्टनर बनने की पूरी टाइमलाइन

नई दिल्ली बिहार की राजनीति में भाजपा और जेडीयू का गठबंधन दशकों पुराना है, लेकिन समय के साथ इस गठबंधन की शक्ति का संतुलन अब पूरी तरह बदलता दिख रहा है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्यसभा जाने का ऐलान कर दिया है। इसके साथ ही कभी ‘छोटे भाई’ की भूमिका में रहने वाली भाजपा आज बिहार में एनडीए की ‘सीनियर पार्टनर’ बनने जा रही है। 1990 के दशक में लालू प्रसाद यादव के खिलाफ नीतीश कुमार ने एक गठबंधन तैयार किया। उस समय नीतीश कुमार की समता पार्टी का आधार बड़ा माना जाता था। 2000 में झारखंड अलग होने से पहले का आखिरी चुनाव था। इस समय नीतीश कुमार की साख बिहार में निर्विवाद नेता के रूप में स्थापित हो चुकी थी। अक्टूबर 2005 में जब पहली बार नीतीश कुमार की अगुवाई में एनडीए की सरकार बनी तो जदयू ने 88 सीटें जीतीं और भाजपा ने 55 सीटें। नीतीश कुमार की पार्टी स्पष्ट रूप से सीनियर पार्टनर थी। 2010 के विधानसभा में नीतीश कुमार की लोकप्रियता का चरम था। जदयू ने 115 सीटें जीती, जबकि भाजपा 91 सीटों पर रही। सीट शेयरिंग में भी जदयू को ज्यादा सीटें मिली थीं। लेकिन जैसे ही 2014 के लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा की केंद्रीय राजनीति में नरेंद्र मोदी की एंट्री होती है तो नीतीश कुमार असहज हो गए। 2013 में भाजपा के द्वारा प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाए जाने के बाद नीतीश कुमार ने भाजपा से गठबंधन तोड़ दिया। उन्होंने राजद और कांग्रेस के साथ मिलकर महागठबंधन का गठन किया। 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने अकेले दम पर शानदार प्रदर्शन किया, जबकि जदयू मात्र 2 सीटों पर सिमट गई। यह पहला संकेत था कि बिहार में भाजपा का जनाधार अब स्वतंत्र रूप से बढ़ चुका है। 2015 के विधानसभा चुनाव में नीतीश कुमार राजद के साथ गए। हालांकि वह चुनाव जीत गए, लेकिन भाजपा ने अकेले लड़कर भी 24.4% वोट शेयर हासिल किया, जो किसी भी अकेली पार्टी से ज्यादा था। सीनियर पार्टनर बनने का सफर 2017 में नीतीश कुमार वापस एनडीए में आए, लेकिन अब भाजपा की सौदेबाजी की शक्ति बढ़ चुकी थी। 2020 के विधानसभा चुनाव में जेडीयू और भाजपा गठबंधन ने चुनाव लड़ा। इस चुनाव में भाजपा को 74 सीटें मिलीं और जेडीयू को सिर्प 43। यह पहला अवसर था जब एनडीए के भीतर भाजपा, जदयू से काफी आगे निकल गई । हालांकि नीतीश कुमार मुख्यमंत्री बने, लेकिन संख्या बल के मामले में भाजपा ‘बड़े भाई’ की भूमिका में आ गई। इस चुनाव में चिराग पासवान ने जेडीयू की अधिकांश सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे। 2024 के लोकसभा चुनाव में जेडीयू और भाजपा को बराबर की सीटें मिलीं। दोनों के 12-12 सांसद चुनाव जीते। 2025 के विधानसभा चुनाव में भाजपा 89 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी। वहीं, जेडीयू 85 सीटों के साथ दूसरे नंबर पर रही। आपको बता दें कि 2025 के चुनाव में एनडीए में रहते हुए जेडीयू पहली बार बराबर सीटों पर चुनाव लड़ा। दोनों ही दलों ने 101-101 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे। भाजपा के फैक्टर भाजपा का कोर वोट बैंक लगातार स्थिर रहा, जबकि जदयू का वोट शेयर गठबंधन बदलने और एंटी-इंकंबेंसी के कारण प्रभावित हुआ। 2020 और 2025 के चुनावों में भाजपा का स्ट्राइक रेट जदयू की तुलना में काफी बेहतर रहा। 2014 के बाद से भाजपा ने बिहार के ग्रामीण इलाकों और अति पिछड़ा वर्ग (EBC) में अपनी स्वतंत्र पैठ मजबूत की, जो पहले कभी केवल नीतीश कुमार की ताकत मानी जाती थी।  

उद्धव सेना में सत्ता खेल: आदित्य ठाकरे की योजना नहीं चली, संजय राउत ने प्रियंका चतुर्वेदी को दी प्राथमिकता

मुंबई  महाराष्ट्र में राज्यसभा चुनाव में विपक्ष महज एक सीट ही जीतने की स्थिति में है। इसके लिए वरिष्ठ नेता शरद पवार का नाम तय हुआ है। 85 वर्षीय लीडर के नाम के ऐलान के लिए जो प्रेस कॉन्फ्रेंस हुई थी, उसमें उद्धव सेना का कोई नेता शामिल नहीं था। इसे लेकर कयास लगने लगे तो शरद पवार की बेटी सुप्रिया सुले खुद सामने आईं और कहा कि उद्धव सेना की नाराजगी के सारे दावे गलत हैं। उन्होंने कहा कि इस संबंध में संजय राउत पहले ही आए थे और शरद पवार से मिलकर भरोसा दे गए थे कि यदि आप उम्मीदवार होते हैं तो हम आपके साथ होंगे। इसके बाद संजय राउत ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट भी लिखा, ‘कांग्रेस ने आखिर राज्यसभा में उम्मीदवार फाइन कर लिया। महाविकास अघाड़ी एक है और हम सभी साथ रहेंगे।’ यह बात सही है कि संजय राउत लगातार कहते रहे हैं कि शरद पवार को राज्यसभा जाना चाहिए। हालांकि उनके सुर आदित्य ठाकरे से अलग रहे हैं, जो चाहते थे कि प्रियंका चतुर्वेदी को एक मौका और मिलना चाहिए। प्रियंका चतुर्वेदी का कार्यकाल समाप्त हो गया है और उन्हें फिर से मौका नहीं मिला है। वह राज्यसभा में अपने कार्यकाल के आखिरी दिन भावुक भी नजर आई थीं। इस तरह पूरे प्रकरण को आदित्य ठाकरे और संजय राउत के बीच खींचतान के तौर पर देखा जा रहा है और इसके आधार पर लोग यह भी रहे हैं कि प्रियंका के नाम पर संजय राउत ने वीटो लगा दिया और इस तरह शरद पवार का रास्ता साफ हो गया। पूरे मामले की जानकारी रखने वालों का कहना है कि संजय राउत एक तरह से विजेता बनकर उभरे और उन्होंने उद्धव सेना का एजेंडा तय कर दिया। अब कहा जा रहा है कि उद्धव सेना के खाते में विधान परिषद की सीट आ सकती है। लेकिन पार्टी के एक वर्ग का मानना है कि सबसे बड़ा दल विपक्ष में उद्धव सेना ही है। फिर भी राज्यसभा की सीट एनसीपी-एसपी के खाते में जाना दुखद है। कांग्रेस का भी था दावा, पर खरगे ने खुद ही किया पीछे हटने का ऐलान राज्यसभा सीट के लिए तो कांग्रेस ने भी दावा किया था। इस संबंध में राहुल गांधी से भी बात की गई थी, लेकिन अंत में पार्टी शरद पवार के नाम पर ही सहमत हो गई। अब देखना होगा कि एमएलसी सीट पर क्या होता है। अगले महीने ही उद्धव ठाकरे का एमएलसी का कार्यकाल समाप्त होगा। ऐसे में नजरें इस बात पर हैं कि वह रिपीट होंगे या फिर किसी और नेता को उनके स्थान पर मौका दिया जा सकता है।

राज्यसभा चुनाव: कांग्रेस ने खोले पत्ते, सिंघवी-रेड्डी समेत छह नेताओं को बनाया उम्मीदवार

चेन्नई/नई दिल्ली देश के 10 राज्यों की 37 राज्यसभा सीटों के नामांकन का आज यानि गुरुवार को अंतिम दिन है. कांग्रेस ने अपने उम्मीदवारों के नाम का ऐलान कर दिया है. कांग्रेस ने तेलंगाना, तमिलनाडु, हरियाणा, हिमाचल और छत्तीसगढ़ की राज्यसभा सीट के लिए अपने पत्ते खोल दिए हैं. कांग्रेस ने राज्यसभा के लिए 6 उम्मीदवार घोषित कए हैं। कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी को तेलंगाना से दुबारा राज्यसभा भेजने का फैसला किया है. तेलंगाना से कांग्रेस ने सिंघवी के अलावा वेम नरेंद्र रेड्डी को राज्यसभा भेजने का फैसला किया है. सिंघवी को जहां गांधी परिवार का करीबी माना जाता है तो वेम रेड्डी तेलंगाना सीएम रेवंत रेड्डा के भरोसेमंद माने जाते हैं. पूर्व विधायक रेड्डी तेलंगाना कांग्रेस के उपाध्यक्ष भी हैं।   कांग्रेस ने छत्तीसगढ़ से आदिवासी समुदाय से आने वाली फूलो देवी को दोबारा से राज्यसभा भेजने का निर्णय किया है. इसके अलावा कांग्रेस ने हरियाणा से करमवीर बौद्ध को राज्यसभा का टिकट दिया है, जो दलित समाज से आते हैं. हिमाचल प्रदेश से कांग्रेस ने अनुराग शर्मा को राज्यसभा का उम्मीदवार बनाया है तो तमिलनाडु से पार्टी ने एम क्रिस्टोफर तिलक को राज्यसभा का प्रत्याशी बनाया है।  हरियाणा में कर्मवीर बौद्ध के नाम पर लगी मुहर कांग्रेस के राज्यसभा उम्मीदवारों में सबसे चौंकाने वाला नाम है कर्मवीर सिंह बौद्ध का है, जिन्हें हरियाणा से राज्यसभा भेजा जा रहा है. दलित समाज से आने वाले कर्मवीर लो प्रोफाइल नेता हैं. अंबाला के रहने वाले कर्मवीर 2024 के हरियाणा विधानसभा चुनाव में मुलाना से टिकट के दावेदार रहे हैं, लेकिन उन्हें टिकट नहीं मिल पाया. अब कांग्रेस ने उन्हें संसद के उच्च सदन भेजने का फैसला किया है।  कर्मवीर बौद्ध हरियाणा सिविल सचिवालय से करीब 5 साल पहले सुपरिंटेंडेंट के पद से सेवानिवृत्त हुए थे. इनकी पत्नी लेबर डिपार्टमेंट में असिस्टेंट है. हरियाणा में दलित सामाज को संदेश देने के लिए कांग्रेस ने उनपर दांव लगाया है।  तेलंगाना से सिंघवी और रेड्डी को मिला मौका तेलंगाना की दो राज्यसभा सीटों के लिए कांग्रेस ने अपने उम्मीदवार के नाम का ऐलान किया है, जिसमें एक नाम अभिषेक मनु सिंघवी का है तो दूसरा नाम पूर्व विधायक वेम नरेंद्र रेड्डी का है. सिंघवी का नाम पहले ही तय माना जा रहा था, क्योंकि उन्हें गांधी परिवार का करीबी माना जाता है. हिमाचल से चुनाव हारने के बाद कांग्रेस नेतृत्व ने उन्हें तेलंगाना से राज्यसभा भेजा था, जिसके लिए रेवंत रेड्डी ने बीआरएस के मौजूदा राज्यसभा सांसद की सीट खाली कराई थी। छत्तीसगढ़ से फिर जाएंगी फूलो देवी राज्यसभा वहीं, कांग्रेस ने छत्तीसगढ़ में एक बार फिर से फूलो देवी नेतम को राज्यसभा भेजने का निर्णय लिया है. कांग्रेस आसानी से एक सीट जीत लेगी. फूलो देवी को दोबारा से राज्यसभा भेजने के पीछे पहला उनका अदिवासी समुदाय से होना और दूसरा पार्टी किसी भी तरह से कोई गुटबाजी नहीं चाहती है. इसीलिए किसी नए चेहरे पर भरोसा नहीं जताया है.  हालांकि, कांग्रेस ने शुरू में उनके विकल्प पर पार्टी ने विचार कर रही थी, लेकिन नेताओं की गुटबाजी से पिंड छुड़ाने के लिए फूलो देवी नेताम को ही फिर से राज्यसभा भेजने का फैसला लिया गया.  कांग्रेस ने राज्यसभा से साधा जातीय समीकरण कांग्रेस ने राज्यसभा चुनाव के लिए बहुत ही सोची-समझी रणनीति के तहत उम्मीदवारों के नाम का ऐलान किया है. कांग्रेस ने जिन पांच नेताओं को राज्यसभा भेजने का फैसला किया है, उसमें पंजाबी ब्राह्मण समुदाय से आने वाले अभिषेक मनु सिंघवी हैं तो दूसरे तेलंगाना की सबसे प्रभावी जाति रेड्डी समुदाय के वेम नरेंद्र रेड्डी हैं।  कांग्रेस ने हरियाणा में दलित समुदाय से आने वाले कर्मवीर सिंह बौद्ध को प्रत्याशी बनाया है तो छत्तीसगढ़ में आदिवासी समुदाय से आने वाली फूलो देवी को दोबारा राज्यसभा भेजा है. कांग्रेस ने हरियाणा में दलित समुदाय को साधे रखने की चुनौती थी, जिसके चलते ही कर्मवीर बौद्ध पर भरोसा जताया है. ऐसे ही हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस ने ब्राह्मण समाज से आने वाले अनुराग शर्मा को प्रत्याशी बनाया है जबकि सीएम ठाकुर समुदाय से हैं. इस तरह कांग्रेस ने ब्राह्मण और ठाकुर केमिस्ट्री बनाने की कवायद की है।

यूपी में सपा की नई पहल, 15 मार्च को सभी जिलों में कांशीराम जयंती मनाकर दलितों को लुभाएगी

लखनऊ   सपा ने 15 मार्च को सभी जिलों में कांशीराम जयंती मनाने का फैसला किया है। पार्टी का प्रयास है कि जिलास्तर पर होने वाले इन कार्यक्रमों में दलित समाज के लोगों की ज्यादा से ज्यादा भीड़ जुटाई जाए। आयोजनों में बसपा संस्थापक कांशीराम और सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव के बीच रहे रिश्तों की भी याद दिलाई जाएगी। इस संबंध में सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सभी जिला व महानगर पदाधिकारियों को कांशीराम जयंती पर कार्यक्रम आयोजित करने के निर्देश दिए हैं। जेएनयू के सेवानिवृत्त शिक्षक और समकालीन राजनीति के जानकार प्रो. रवि कहते हैं कि कभी यूपी में मुलायम-कांशीराम फैक्टर बहुत प्रभावी था। नब्बे के दशक में इस फैक्टर से दलितों और पिछड़ों की सामाजिक व राजनीतिक हैसियत में बड़ा बदलाव देखने को मिला।   अब दलित-पिछड़ों के गठजोड़ के इसी फैक्टर की बदौलत सपा ने यूपी की राजनीति में दखल बढ़ाने का निर्णय लिया है। सपा नेतृत्व का मानना है कि दलित, पिछड़े और अल्पसंख्यक (पीडीए) का फॉर्मूला उन्हें सत्ता तक पहुंचा सकता है। यही वजह है कि कांशीराम जयंती को सपा पीडीए दिवस के रूप में मनाएगी।  इसके तहत जिलों में होने वाले कार्यक्रमों के जरिये सपा याद दिलाएगी कि कांशीराम ने मंडल रिपोर्ट के समर्थन में राष्ट्रव्यापी आंदोलन खड़ा किया था। 1992 में सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव के साथ समझौता कर बहुजन समाज बनाओ अभियान को तेज किया था। कांशीराम ने ही दिसंबर 1993 में मुलायम सिंह की सरकार बनवाई।

अखिलेश की PDA बनाम बीजेपी का मास्टर प्लान, 2027 में किसकी बनेगी सरकार?

लखनऊ  उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर अब सरगर्मी बढ़ने लगी है। भारतीय जनता पार्टी ने वर्ष 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर रणनीति तैयार की है। इसके तहत 15 दलित महापुरुषों का कैलेंडर तैयार कराया गया है। इनकी जयंती-पूण्यतिथि के बहाने इस समाज के लोगों से सालों भर मुलाकात का कार्यक्रम तैयार किया गया है। इनमें कांशीराम से लेकर संत रविदास तक शामिल हैं। पहले ही भाजपा ने मायावती पर सीधे हमले से परहेज किया है। पार्टी किसी भी दलित महापुरुष और नेता से सीधे उलझती नहीं दिख रही है। यह संदेश जमीन तक पहुंचाने की तैयारी की जा रही है। दरअसल, अखिलेश यादव की पिछड़ा दलित अल्पसंख्यक यानी पीडीए पॉलिटिक्स की काट के तौर पर रणनीति को तैयार किया जा रहा है। योगी आदित्यनाथ सरकार भी समाज के हर वर्ग तक सरकार की योजनाओं के पहुंचाए जाने की जानकारी पहुंचाने की रणनीति में जुटी है। दलित वोट बैंक है जरूरी यूपी की राजनीति में सत्ता की सीढ़ी चढ़ने के लिए दलित वोट बैंक को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। एक तरफ अखिलेश यादव यादव, गैर यादव पिछड़ा यानी पीडीए पॉलिटिक्स के जरिए प्रदेश की सत्ता में एक बार फिर वापसी की कोशिशों में जुटे हुए हैं। दूसरी तरफ, भारतीय जनता पार्टी लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी का प्रयास कर रही है। इसको लेकर पार्टी की ओर से रणनीति को तैयार किया जा रहा है। इसमें दलित वोट बैंक को अहम माना जा रहा है।हाल के वर्षों में दलित वोट बैंक में बिखराव होता दिखा है। वर्ष 2014 से 2019 तक के चुनावों में प्रदेश में मोदी लहर और भाजपा के उफान के बाद भी बहुजन समाज पार्टी दलित वोट बैंक पर कब्जा जमाती दिखी थी। करीब 20 फीसदी के वोट बैंक पर मायावती का कब्जा दिखता रहा था। हालांकि, यूपी चुनाव 2022 के बाद से दलित वोट बैंक छिटकना शुरू हुआ। लोकसभा चुनाव 2024 में मायावती का वोट प्रतिशत प्रदेश में 10 फीसदी के आसपास सिमटता दिखा है। यूपी चुनाव 2022 में योगी-मोदी सरकार की नीतियों, कोरोना काल में अन्न योजना के प्रभाव ने दलित वोट बैंक के एक बड़े हिस्से को भाजपा से जोड़ा। ऐसे में सॉलिड गैर-यादव ओबीसी वोट बैंक में भटकाव से अधिक असर पार्टी को नहीं हुआ। हालांकि, लोकसभा चुनाव में संविधान बदलने के मुद्दे को जोरदार तरीके से उठाकर और पीडीए पॉलिटिक्स के जरिए बसपा से छिटकने वाले दलित वोट के एक बड़े हिस्से को पार्टी के साथ जोड़ने में अखिलेश यादव कामयाब रहे। 2027 के लिए डी पॉलिटिक्स यूपी चुनाव 2027 के लिए भाजपा ने अब दलित पॉलिटिक्स पर जोर देना शुरू कर दिया है। लोकसभा चुनाव में छिटके दलित वोटरों को साधने की रणनीति तैयार की जा रही है। भाजपा ने इसके लिए नए सिरे से सोशल इंजीनियरिंग शुरू कर दी है। पार्टी की रणनीति के केंद्र में दलित महापुरुष, उनकी विरासत और समाज के लोगों से लगातार संवाद है। इस संवाद के जरिए समाज के निचले हिस्से तक पार्टी अपने संदेश और कार्यों को पहुंचाने की तैयारी में है। बीजेपी ने इसके लिए कांशीराम, संत रविदास, संत गाडगे, डॉ. भीमराव अंबेडकर, ज्योतिबा फुले, सावित्रीबाई फुले, उदा देवी, झलकारी बाई, वीरा पासी, लखन पासी, रमाबाई अंबेडकर और अहिल्याबाई होल्कर जैसी करीब 15 दलित और वंचित समाज के महापुरुषों का एक वार्षिक कैलेंडर तैयार किया है। इन महापुरुषों की जयंती और पुण्यतिथि पर प्रदेश भर में कार्यक्रमों की श्रृंखला तैयार की गई है। लगातार संपर्क पर जोर बीजेपी नेताओं का कहना है कि समाज के लोगों से लगातार संपर्क पर जोर दिया जा रहा है। अगर हमारे कार्यकर्ता समाज के लोगों से मिलेंगे। उनकी सुख-दुख सुनेंगे। उसको लेकर काम करेंगे तो निश्चित तौर पर स्थिति को फिर से बहाल किया जा सकेगा। भाजपा इन वोटरों के दरवाजे पर बार- बार दस्तक देकर इन्हें फिर से भाजपा के पाले में लाने की कवायद में जुट गई है। लोकसभा चुनाव 2024 में भाजपा 2017 के 62 सीटों के आंकड़े से घटकर 33 पर आ गई थी। रिजर्व सीटों पर पार्टी का प्रदर्शन खराब हुआ। इसके बाद रणनीति में बदलाव होता दिख रहा है।

महाराष्ट्र में राज्यसभा चुनाव का ऐलान: नामांकन से लेकर मतदान तक की पूरी जानकारी एक जगह

 मुंबई महाराष्ट्र में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है, क्योंकि राज्य से सात राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव की अधिसूचना बुधवार को जारी कर दी गई है। सदस्यों के चुनाव के लिए 16 मार्च को होगा। इस बात की जानकारी रिटर्निंग ऑफिसर विलास अठवाले ने दी। उन्होंने बताया कि नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख 5 मार्च है। इसके बाद 6 मार्च को नामांकनों की जांच (स्क्रूटनी) होगी और 9 मार्च तक उम्मीदवार अपना नाम वापस ले सकते हैं। बता दें कि महाराष्ट्र विधानसभा के सदस्य इस चुनाव में मतदान करेंगे। राज्य से सात राज्यसभा सांसदों की अवधि अप्रैल में समाप्त हो रही है, जिसमें एनसीपी प्रमुख शरद पवार भी शामिल हैं। अभी तक पवार ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि वे पुनः उम्मीदवार होंगे या नहीं। ऐसे में यदि आवश्यकता हुई, तो 16 मार्च को सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक विधान भवन में मतदान होगा और उसके बाद मतगणना की जाएगी। राज्यसभा का चुनाव कैसे होता है? राज्यसभा के सदस्य का चुनाव उस राज्य की विधानसभा के चुने हुए विधायक करते हैं, जिस राज्य से वह उम्मीदवार है। राज्यसभा चुनाव की प्रक्रिया लोकसभा और विधानसभा चुनाव से काफी अलग है, क्योंकि इस सदन के लिए मतदान सीधे जनता नहीं करती, बल्कि जनता के द्वारा चुने हुए प्रतिनिधि करते हैं। राज्यसभा के सदस्यों का कार्यकाल छह साल का होता है। राज्यसभा चुनावों के नतीजों के लिए एक फॉर्मूला भी तय किया गया है। जीतने के लिए कितने वोट की जरूरत? गौरतलब है कि महाराष्ट्र के फॉर्मूला के हिसाब से यहां किसी उम्मीदवार को जिताने के लिए कम से कम 37 विधायकों के समर्थन की जरूरत होगी। विधानसभा के मौजूदा संख्याबल के मुताबिक सत्ताधारी गठबंधन सात में छह सीटों  पर आसानी से जीत दर्ज कर सकता है। विपक्ष एकजुट नहीं होता तो सातवें उम्मीदवार के लिए मुकाबला रोचक हो सकता है।   राष्ट्रीय गोलमेज सम्मेलन में मिलकर काम करने का संकल्प लिया भारत निर्वाचन आयोग और राज्य चुनाव आयोगों का राष्ट्रीय गोलमेज सम्मेलन मंगलवार 24 फरवरी 2026 को भारत मंडपम, नई दिल्ली में संपन्न हुआ। यह सम्मेलन 27 वर्षों के बाद आयोजित किया गया था और इसमें 30 राज्यों के राज्य चुनाव आयोगों ने भाग लिया। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की अध्यक्षता में हुए इस सम्मेलन में चुनाव आयुक्त डॉ. सुखबीर सिंह संधू और डॉ. विवेक जोशी भी उपस्थित रहे। सम्मेलन में राज्य चुनाव आयुक्तों ने इस आयोजन की सराहना की और इसे सफल बताया। सभी ने हर साल ऐसे राष्ट्रीय गोलमेज सम्मेलन आयोजित करने का संकल्प लिया। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व में सभी ने राष्ट्रीय घोषणा 2026 को अपनाया। घोषणा में जोर दिया गया कि शुद्ध मतदाता सूची तैयार करना लोकतंत्र की मजबूत नींव है और चुनावों का पारदर्शी तथा सुचारू संचालन लोकतांत्रिक संस्थाओं को और मजबूत बनाता है।

बंगाल रणनीति के बीच नितिन नवीन राज्यसभा उम्मीदवार, BJP ने 7 और नामों पर लगाई मुहर

नई दिल्ली भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन राज्यसभा के सांसद बनेंगे। पार्टी ने उन्हें बिहार में होने वाले चुनाव में उतारा है, जहां उनका जीतना तय माना जा रहा है। इसके अलावा बिहार से शिवेश कुमार को भी राज्यसभा का टिकट दिया गया है। बंगाल से राहुल सिन्हा भी राज्यसभा जाएंगे। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन राज्यसभा के सांसद बनेंगे। पार्टी ने उन्हें बिहार में होने वाले चुनाव में उतारा है, जहां उनका जीतना तय माना जा रहा है। इसके अलावा बिहार से शिवेश कुमार को भी राज्यसभा का टिकट दिया गया है। भाजपा ने पश्चिम बंगाल से अपने पूर्व प्रदेश अध्यक्ष राहुल सिन्हा को उम्मीदवार बनाया है तो वहीं छत्तीसगढ़ से लक्ष्मी वर्मा राज्यसभा जाएंगी। इस तरह पार्टी ने कुल 9 उम्मीदवारों की लिस्ट एक साथ जारी की है। नितिन नवीन बिहार सरकार में मंत्री थे, जब उन्हें राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया था। अब उन्होंने विधायकी की बजाय राज्यसभा की राह चुनी है। असम की दो राज्यसभा सीटों के लिए सूबे के पथ निर्माण मंत्री जोगेन मोहन और विधायक तेराश गोवाला को उम्मीदवार बनाया गया है। ओडिशा से पार्टी ने मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष मोहनलाल सामल को कैंडिडेट बनाया है तो वहीं सुजीत कुमार को फिर से मौका दिया गया है। हरियाणा से संजय भाटिया को राज्यसभा भेजा जाएगा, जो पहले लोकसभा के सांसद रहे हैं। वहीं शिवेश कुमार बिहार भाजपा के महामंत्री हैं। उन्हें भी मौका मिला है। पूरी लिस्ट को देखें तो भाजपा ने ज्यादातर ऐसे लोगों को मौका दिया है, जो संगठन में काम कर रहे हैं। इसके अलावा असम से दो नेताओं को राज्यसभा भेजा है। साफ है कि अब पार्टी उनकी सेवाएं राज्य की बजाय केंद्रीय राजनीति में भी लेना चाहती है। पश्चिम बंगाल में अप्रैल-मई में ही चुनाव होने वाले हैं। ऐसे में राहुल सिन्हा को राज्यसभा भेजने का फैसला अहम माना जा रहा है। ऐसा इसलिए क्योंकि वह कायस्थ समाज से आते हैं, जिसकी बड़ी आबादी पश्चिम बंगाल में है। इस वर्ग का बड़ा हिस्सा अब तक टीएमसी को वोट डालता रहा है, लेकिन भाजपा उन्हें लुभाने की कोशिश में जुटी है। यहां तक कि जब नितिन नबीन अध्यक्ष बनाए गए तो उन्हें लेकर भी यही कहा गया था कि पार्टी ने बंगाल चुनाव को साधने के लिए यह फैसला लिया है। इसके अलावा राहुल सिन्हा पार्टी के पुराने नेता हैं और मुश्किल वक्त में राज्य में संगठन खड़ा करने के लिए भी मेहनत से काम किया है। बिहार में रोचक हुआ मुकाबला, NDA ने उतारा है पांचवां कैंडिडेट बता दें कि बिहार में एनडीए ने पांचवां कैंडिडेट राज्यसभा में खड़ा कर दिया है। उसके पास अपने दम पर 4 कैंडिडेट जिताने का बहुमत है, लेकिन पांचवां कैंडिडेट उपेंद्र कुशवाहा को उतारकर उसने मुकाबला रोचक कर दिया है। बता दें कि बिहार से जेडीयू ने नीतीश कुमार के बेटे निशांत को राजनीति में उतारने का फैसला लिया है। उन्हें राजनीति में लाने के लिए लंबे समय से कोशिशें होती रही हैं और अब जेडीयू की रणनीति सफल होती दिख रही है।  

राज्यसभा चुनाव: नितिन नवीन को टिकट, BJP की घोषणा के बाद बिहार के दूसरे कैंडिडेट पर नजर

nitin2

नई दिल्ली भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन राज्यसभा जाएंगे। वे भाजपा के बिहार से राज्यसभा उम्मीदवार बनाए गए हैं। वहीं, भाजपा के बिहार से दूसरे कैंडिडेट के नाम चौंकाने वाला है। नितिन नवीन के साथ पार्टी ने दलित नेता शिवेश कुमार राम को प्रत्याशी बनाया है। दोनों नेता 5 मार्च को अपना नामांकन करेंगे। पटना के रहने वाले नितिन नवीन हाल ही में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने गए थे। वे अभी पटना की बांकीपुर सीट से विधायक हैं। राज्यसभा चुनाव की घोषणा होने के बाद से उनके संसद जाने की चर्चा तेज थी। अब भाजपा ने उम्मीदवार सूची जारी कर स्थिति साफ कर दी है। दूसरी सीट पर भाजपा का दलित दांव वहीं, भाजपा ने बिहार से अपने कोटे की दूसरी सीट से शिवेश राम को उम्मीदवार बनाया है। वे दलित वर्ग के नेता हैं। पार्टी ने उन्हें लोकसभा चुनाव 2024 में सासाराम से टिकट दिया था। मगर वे चुनाव हार गए थे। अब उन्हें राज्यसभा भेजा जा रहा है। इससे पहले, भोजपुरी स्टार पवन सिंह को भी राज्यसभा उम्मीदवार बनाए जाने की अटकलें चल रही थीं, मगर उनका नाम कैंडिडेट लिस्ट में नहीं आया। उपेंद्र कुशवाहा का भी फिर से राज्यसभा जाना तय भाजपा के बिहार अध्यक्ष संजय सरावगी ने मंगलवार को मीडिया से बातचीत में कहा कि नितिन नवीन और शिवेश राम के अलावा राष्ट्रीय लोक मोर्चा के चीफ उपेंद्र कुशवाहा भी एनडीए के राज्यसभा उम्मीदवार होंगे। जबकि दो अन्य सीटों पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू से नाम आना अभी बाकी है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने बिहार की सभी 5 सीटों पर एनडीए प्रत्याशियों की जीत का दावा किया है। 16 मार्च को राज्यसभा चुनाव की वोटिंग बिहार की 5 समेत देश भर की 37 राज्यसभा सीटों पर नामांकन की प्रक्रिया चल रही है। 5 मार्च को नॉमिनेशन का आखिरी दिन है। 16 मार्च को राज्यसभा चुनाव के लिए मतदान होगा। बिहार में जो 5 राज्यसभा सीटें खाली हो रही हैं, उनपर अभी 3 एनडीए और दो आरजेडी के सांसद हैं। हालांकि, बिहार विधानसभा में मौजूदा संख्याबल के हिसाब से एनडीए की चार सीटों पर जीत पक्की है। पांचवीं सीट जीतने के लिए उसे 3 अतिरिक्त विधायकों का समर्थन चाहिए। विपक्ष से आरजेडी ने भी उम्मीदवार उतारने की घोषणा कर दी है। महागठबंधन के पास भी पर्याप्त संख्याबल नहीं है। ऐसे में 16 मार्च को मतदान के दौरान क्रॉस वोटिंग के आसार नजर आ रहे हैं।

कांग्रेस के LoP पद पर संकट, ठाकरे से 1 सीट को लेकर रार, पीछे हटने की अपील

3A 37

मुंबई  महाराष्ट्र में विपक्ष के पास जीतने योग्य एक ही राज्यसभा सीट है, जिसपर कांग्रेस और शिवसेना यूबीटी दोनों ही दावा पेश कर चुके हैं। अब खबरें हैं कि कांग्रेस ने उद्धव ठाकरे से सीट पर दावेदारी छोड़ने की अपील की है। हालांकि, इसे लेकर आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा गया है। कहा जा रहा है कि कांग्रेस के लिए यह सीट राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष का पद बनाए रखने के लिए बेहद जरूरी है। राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष कांग्रेस सांसद मल्लिकार्जुन खरगे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, महाराष्ट्र कांग्रेस प्रभारी और केरल विधायक रमेश चेन्नीथला ने ठाकरे से बात की थी। उन्होंने ठाकरे से कहा कि यह सीट कांग्रेस को दी जानी चाहिए, जिसके बदले में शिवसेना यूबीटी को एमएलसी सीट दी जाएगी। खास बात है कि राज्यसभा सीट पर नामांकन की आखिरी तारीख 5 मार्च है। इसपर नतीजों का ऐलान 16 मार्च को होगा। इन नेताओं का पूरा हो रहा कार्यकाल अप्रैल में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एसपी) के प्रमुख शरद पवार, शिवसेना यूबीटी नेता प्रियंका चतुर्वेदी, राकांपा (एसपी) की फौजिया खान, आरपीआई (आठवले) के रामदास आठवले, भाजपा के भागवत कराड, कांग्रेस की रजनी पाटिल और राकांपा के धैर्यशील पाटिल का राज्यसभा कार्यकाल समाप्त हो जाएगा। सत्तारूढ़ महायुति के पक्ष में भारी बहुमत को देखते हुए एमवीए संसद के ऊपरी सदन और विधान परिषद में केवल एक-एक सदस्य को निर्वाचित कराने में सफल हो सकती है। क्या बात हुई रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया कि चेन्नीथला ने ठाकरे को बताया कि महाराष्ट्र की यह एकमात्र सीट कांग्रेस के लिए बेहद जरूरी है। क्योंकि अगर कांग्रेस को यह सीट नहीं मिलती है, तो संभावनाएं हैं कि पार्टी नेता प्रतिपक्ष के पद पर दावा गंवा सकती है। सूत्र ने कहा, ‘राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष के पद के लिए किसी भी विपक्षी दल को कुल सीटों का 10 फीसदी या कम से कम 25 सदस्य रखने होते हैं। मौजूदा स्थिति है कि कांग्रेस के पास संख्या बल 27 का है, लेकिन कई सांसद ऐसे हैं जिनका कार्यकाल समाप्त हो रहा है।ऐसे में 25 का आंकड़ा बनाए रखना चुनौती हो सकता है। ऐसे में एक राज्यसभा सीट भी अहम साबित हो सकती है।’ उन्होंने कहा, ‘इसके चलते कांग्रेस नेतृत्व ने उद्धव ठाकरे से इस मुद्दे पर नहीं अड़ने का अनुरोध किया है। इसके बदले में कांग्रेस शिवसेना यूबीटी को एक एमएलसी सीट देने के लिए तैयार है।’ MVA के तीनों दलों की नजर खास बात है कि इस सीट पर महाविकास अघाड़ी के तीनों बड़े दलों की नजर है। एक ओर जहां आदित्य ठाकरे ने एक पोस्ट में कहा, ‘राज्यसभा चुनाव के लिए हो रही वार्ता में कोई गतिरोध नहीं है; सभी दल एक-दूसरे के संपर्क में हैं। हमने एक राज्यसभा सीट पर अपना दावा पेश किया है, क्योंकि संख्यात्मक ताकत और एमवीए के लिए तय ‘रोटेशन’ नीति के अनुसार इस सीट पर शिवसेना यूबीटी को चुनाव लड़ना चाहिए।’ वहीं, कांग्रेस की महाराष्ट्र इकाई के अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने ‘पीटीआई-भाषा’ से बातचीत में कहा कि उनकी पार्टी इस सीट से चुनाव लड़ने के अपने दावे पर अडिग है, लेकिन साथ ही उन्होंने कहा कि बातचीत चल रही है और विचार-विमर्श के बाद निर्णय लिए जाएंगे। इधर, वरिष्ठ राजनेता शरद पवार भी इस सीट के दावेदारों में शामिल बताए जा रहे हैं। खबर है कि उनकी बेटी और लोकसभा सांसद सुप्रिया सुले ने गठबंधन के साथियों से पिता का समर्थन करने की अपील की है। किसके पास कितनी संख्या शिवसेना यूबीटी के पास 20, कांग्रेस के पास 16 और राकंपा शरद पवार के पास 10 विधायकों का समर्थन है। हाल ही में शिवसेना यूबीटी के वरिष्ठ नेता संजय राउत ने कहा कि 16 मार्च को होने वाले चुनावों से पहले राज्यसभा की एकमात्र सीट को लेकर एमवीए के भीतर चर्चा हो रही है, लेकिन सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी होने के नाते शिवसेना यूबीटी का रुख इस फैसले के लिए अहम होगा।

बिहार में राज्यसभा संग्राम: RJD के सामने दो चेहरे, NDA के क्लीन स्वीप की चुनौती

नई दिल्ली राज्यसभा की 37 सीटों के लिए 16 मार्च को 10 राज्यों में होने वाले चुनाव के ऐलान के साथ बिहार में यह चर्चा तेज हो गई है कि राज्य की 5वीं सीट के लिए लालू यादव और तेजस्वी यादव की पार्टी राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) कैंडिडेट उतारेगी या सीएम नीतीश कुमार की अगुवाई वाले सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) को वॉकओवर दे देगी। बिहार से 5 राज्यसभा सांसद हरिवंश, उपेंद्र कुशवाहा, रामनाथ ठाकुर, प्रेमचंद गुप्ता और एडी सिंह का कार्यकाल अप्रैल में खत्म हो रहा है। लालू यादव की पार्टी से जिन दो सांसद प्रेमचंद गुप्ता और अमरेंद्र धारी सिंह का कार्यकाल खत्म हो रहा है, वो दोनों राजद के खजाने के मजबूत खंभे हैं। बिहार विधानसभा चुनाव के बाद 243 सीटों की विधानसभा में 202 विधायक एनडीए के पास हैं। बचे हुए 41 एमएलए में महागठबंधन के 35 ही हैं। बाकी 6 असदुद्दीन ओवैसी की एआईएमआईएम और मायावती की बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) के हैं। राज्यसभा सांसद चुनाव के तय नियमों के अनुसार इन 5 सीट पर होने वाले चुनाव में 41 विधायकों का वोट हासिल करने वाला ही संसद पहुंच पाएगा। एनडीए कैंप में बीजेपी के 89, जेडीयू के 85, लोजपा-आर के 19, हम के 5 और रालोमो के 4 कुल 202 विधायक हैं। एनडीए कैंप से तीन सांसद रिटायर हो रहे हैं, जिनमें दो जेडीयू के हरिवंश और रामनाथ गुप्ता जबकि तीसरे रालोमो अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा खुद हैं। एनडीए के पास 202 विधायक हैं तो चार सीट तो उनकी पक्की है। सारा मसला 5वीं सीट को लेकर फंस रहा है, जिसे जीतने के लिए एनडीए के पास जरूरत से 3 वोट कम हैं। 41-41 वोट के हिसाब से एनडीए के 164 विधायक 4 सांसद जिता सकते हैं। इसके बाद एनडीए के पास 38 वोट बचते हैं, जो 5वीं सीट के लिए सीधे तौर पर काफी नहीं हैं। लेकिन मजेदार बात यह भी है कि एनडीए से बाहर पूरे विपक्ष के पास कुल 41 वोट ही है। तेजस्वी यादव के नेतृत्व वाले महागठबंधन के पास राजद के 25, कांग्रेस के 6, सीपीआई-एमएल के 2, सीपीएम और आईआईपी के 1-1 कुल 35 विधायक ही हैं। इसके पास एक सांसद को जिताने के 41 वोट से 6 कम वोट हैं। विपक्ष में एआईएमआईएम के 5 और बसपा के 1 विधायक हैं, लेकिन वो विपक्षी गठबंधन के साथ रहें, तभी राजद के एक सांसद की मुश्किल से बात बन सकती है। लालू और तेजस्वी के सामने मुश्किल ये है कि राज्यसभा लड़ना है तो पहले तो वो प्रेमचंद गुप्ता और एडी सिंह में से किसी को कैंडिडेट चुनें। उसके बाद ओवैसी और मायावती के विधायकों का समर्थन भी हासिल करें। लेकिन, 5वीं सीट के लिए राजद के चुनाव लड़ते ही विपक्षी विधायकों के बीच खेला होने का खतरा बहुत ज्यादा है। एनडीए का सबसे बड़ा दल भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) इस खेल में अपना हुनर पहले के राज्यसभा चुनावों में भी दिखा चुकी है। बिहार में एनडीए के नेता रह-रहकर राजद और कांग्रेस में टूट की बातें करते ही रहते हैं। इस बार राज्यसभा चुनाव में तेजस्वी के राजनीतिक सूझ-बूझ और समन्वय की परीक्षा हो सकती है, अगर वो राजद की तरफ से एक सीट के लिए कैंडिडेट देते हैं। बीजेपी की राजनीति के तौर-तरीकों से यह तय है कि एनडीए 5 की 5 सीट लड़ेगी। अगर तेजस्वी किसी को लड़ाते हैं तो चुनाव में कुल 6 कैंडिडेट होंगे और फिर वोटिंग हो जाएगी। नजदीकी नंबर के जटिल खेल में वोटिंग को अपने पक्ष में करना बीजेपी को बहुत अच्छे से आता है। महागठबंधन में तोड़-फोड़ हो या मायावती या ओवैसी की पार्टियों में, ऑपरेशन लोटस की सूरत में तेजस्वी को नुकसान के गंभीर आसार हैं। इसलिए चर्चा यह होने लगी है कि राजद विपक्ष को एकजुट रखने की कीमत पर चुनावी एडवेंचर से दूर रह सकता है।  

रिश्ते के बाद बढ़ा विवाद: ‘हेनरी’ की कस्टडी के लिए कोर्ट पहुंचीं महुआ मोइत्रा

नई दिल्ली TMC नेता महुआ मोइत्रा ने अपने पालतू रॉटवीलर कुत्ते ‘हेनरी’ की कस्टडी के लिए दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। जय अनंत देहाद्रई के साथ चल रहे इस अनोखे कानूनी विवाद की पूरी जानकारी पढ़ें। तृणमूल कांग्रेस (TMC) की लोकसभा सांसद महुआ मोइत्रा और उनके पूर्व प्रेमी जय अनंत देहाद्रई के बीच कानूनी लड़ाई अब उनके पालतू कुत्ते ‘हेनरी’ (रॉटवीलर नस्ल) की कस्टडी तक पहुंच गई है। महुआ मोइत्रा ने दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने साकेत कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसने उन्हें उनके पालतू कुत्ते हेनरी की अंतरिम कस्टडी देने से इनकार कर दिया था। गुरुवार को जस्टिस मनोज कुमार ओहरी ने इस याचिका पर सुनवाई की। कोर्ट ने महुआ के पूर्व प्रेमी और वकील जय अनंत देहाद्रई को नोटिस जारी कर उनका जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 29 अप्रैल को तय की गई है। सुनवाई के दौरान देहाद्रई व्यक्तिगत रूप से पेश हुए और उन्होंने तर्क दिया कि मोइत्रा की इस याचिका को शुरुआत में ही खारिज कर दिया जाना चाहिए। कैश-फॉर-क्वेरी मामला यह पालतू कुत्ते का विवाद दोनों के बीच चल रही एक बड़ी कानूनी और राजनीतिक जंग का हिस्सा है। विवाद की शुरुआत तब हुई जब देहाद्रई ने आरोप लगाया कि महुआ मोइत्रा ने संसद में सवाल पूछने के बदले व्यवसायी दर्शन हिरानंदानी से रिश्वत ली थी। गंभीर आरोप: देहाद्रई और भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने दावा किया था कि मोइत्रा ने अपने लोकसभा के लॉगिन क्रेडेंशियल हिरानंदानी को दिए थे, ताकि वह अपनी पसंद के सवाल सीधे पोस्ट कर सकें। आरोप है कि उनके द्वारा पूछे गए 61 सवालों में से 50 हिरानंदानी से संबंधित थे। संसद से निष्कासन: इन आरोपों के आधार पर लोकसभा की आचार समिति ने जांच की और उन्हें निष्कासित करने की सिफारिश की। परिणामस्वरूप, 8 दिसंबर, 2023 को महुआ मोइत्रा को संसद से निष्कासित कर दिया गया। मोइत्रा का बचाव: उन्होंने सभी आरोपों को खारिज करते हुए इसे राजनीतिक प्रतिशोध बताया। उन्होंने स्वीकार किया कि हिरानंदानी उनके मित्र हैं, लेकिन किसी भी तरह के ‘क्विड प्रो क्वो’ (लेन-देन) से इनकार किया। मानहानि का मुकदमा और कोर्ट की टिप्पणी महुआ मोइत्रा ने देहाद्रई और निशिकांत दुबे के खिलाफ मानहानि का मुकदमा भी दायर किया था। हालांकि, मार्च 2024 में दिल्ली उच्च न्यायालय ने उन्हें अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया। अदालत ने तब कहा था कि यह आरोप पूरी तरह से गलत नहीं हैं कि मोइत्रा ने अपने लॉगिन क्रेडेंशियल शेयर किए और उपहार स्वीकार किए। फिलहाल यह मुख्य मामला अभी भी अदालत में लंबित है।  

महाराष्ट्र नगर राजनीति में बड़ा उलटफेर, 9 पार्षदों ने बदला खेल, कांग्रेस को फायदा

मुंबई  महाराष्ट्र के भिवंडी-निजामपुर महानगरपालिका में मेयर चुनाव से पहले सियासी उलटफेर की बड़ी खबर सामने आई है. यहां मेयर के चुनाव से पहले बीजेपी को बड़ा झटका लगा है. उसके 22 पार्षदों में से 9 ने अलग गुट बनाकर कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन को समर्थन दिया है. इसके बाद अब कांग्रेस पार्टी के लिए यहां अपना मेयर चुनने का रास्ता लगभग साफ हो गया है. इस महानगरपालिका के चुनाव में कांग्रेस को सबसे अधिक 30 सीटें मिली थीं. हालांकि किसी पार्टी को यहां बहुमत नहीं मिला है. भिवंडी-निजामपुर महानगरपालिका में कुल 90 सीटें हैं. कांग्रेस के एक पदाधिकारी ने बुधवार (18) को जानकारी देते हुए बताया कि अलग हुए पार्षदों की ओर से गठित भिवंडी सेक्युलर फ्रंट (बीएसएफ) के समर्थन से कांग्रेस-एनसीपी (एसपी) गठबंधन ने 90 सदस्यीय निकाय में 46 सीटों के बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया है. भिवंडी-निजामपुर महानगरपालिका में कांग्रेस का मेयर बनना तय? उन्होंने दावा करते हुए कहा कि 9 पार्षदों ने हमारा समर्थन करने का फैसला किया है और बीजेपी और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के बीच मतभेद पैदा हो गए हैं. गौरतलब है कि समाजवादी पार्टी ने शिवसेना का समर्थन किया था. पिछले महीने हुए भिवंडी-निज़ामपुर नगर निगम चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी कांग्रेस अब अपना मेयर और डिप्टी मेयर नियुक्त करने के लिए तैयार दिख रही है. भिवंडी-निजामपुर में किस पार्टी के पास कितनी सीटें? महाराष्ट्र में 29 महानगरपालिका के चुनाव 15 जनवरी को हुए थे, जबकि नतीजे 16 जनवरी को घोषित किए गए थे. भिवंडी-निजामपुर महानगरपालिका के चुनाव में किसी भी पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला था. कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी और इस पार्टी को सबसे अधिक 30 सीटें मिलीं थीं, उसके बाद बीजेपी को 22 सीटें मिली.  वहीं, एकनाथ शिंदे गुट की शिवसेना को 12, शरद पवार गुट की एनसीपी-एसपी 12, समाजवादी पार्टी को 6, कोनार्क विकास अघाड़ी 4 और भिवंडी विकास अघाड़ी को 3 सीटों पर जीत मिली थी. यहां एक निर्दलीय उम्मीदवार को जीत हासिल हुई.

NDA को मिलेगा फायदा? शरद और सिंघवी की सीटें खाली, राज्यसभा चुनाव में नई रणनीति

नई दिल्ली लोकसभा के बाद राज्‍यसभा में भी इंडिया अलायंस की ताकत घटने जा रही है. चुनाव आयोग ने 10 राज्यों की 37 सीटों पर 16 मार्च को चुनाव कराने का ऐलान क‍िया है. लेकिन यह महज एक रूटीन चुनाव नहीं है; यह भारतीय राजनीति के उन दिग्गजों की विदाई और नए समीकरणों के उदय की कहानी है, जो संसद के गलियारों में शक्ति संतुलन को पूरी तरह बदलने वाला है. सबसे बड़ी सुगबुगाहट उन कुर्सियों को लेकर है जो खाली होने जा रही हैं. विपक्षी एकता के चाणक्य कहे जाने वाले शरद पवार और कांग्रेस के संकटमोचक अभिषेक मनु सिंघवी जैसे चेहरों का कार्यकाल खत्म हो रहा है. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या बीजेपी इन खाली होती कुर्सियों पर अपना ‘कमल’ खिलाकर राज्‍यसभा में अपनी बादशाहत बनाने जा रही है? 10 राज्य और 37 सीटें चुनाव आयोग के मुताबिक, अप्रैल में खाली हो रही 37 सीटों के लिए 16 मार्च को मतदान और उसी दिन मतगणना होगी. ये सीटें महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश , पश्चिम बंगाल, बिहार, तमिलनाडु, ओडिशा, असम, छत्तीसगढ़, हरियाणा, तेलंगाना और हिमाचल प्रदेश जैसे महत्वपूर्ण राज्यों से आती हैं. सीटों का गणित एक नजर में महाराष्ट्र    7    असम    3 पश्चिम बंगाल    6    हरियाणा    2 बिहार    6    छत्तीसगढ़    2 तमिलनाडु    6    हिमाचल प्रदेश    1 ओडिशा    4    स्रोत-    ECI शरद पवार से सिंघवी तक… दिग्गजों की विदाई एनसीपी के संस्थापक शरद पवार का कार्यकाल समाप्त हो रहा है. महाराष्ट्र की बदली हुई राजनीति में, जहां अजित पवार की पार्टी अब एनडीए का हिस्सा हैं, शरद पवार के लिए दोबारा सदन पहुंचना एक बड़ी चुनौती है. वहीं, कांग्रेस के दिग्गज वकील और रणनीतिकार अभिषेक मनु सिंघवी की सीट भी खाली हो रही है. उनके अलावा प्रियंका चतुर्वेदी (शिवसेना-UBT), केटीएस तुलसी (कांग्रेस), और रामनाथ ठाकुर (JDU) जैसे नाम भी रिटायर होने वालों की सूची में हैं. इन दिग्गजों की विदाई विपक्ष के लिए एक बड़ा वैचारिक और रणनीतिक वैक्यूम पैदा कर सकती है. महाराष्ट्र और बिहार: एनडीए के लिए ‘लॉटरी’ का मौका महाराष्ट्र में 7 सीटों पर चुनाव होने हैं. अभी यहां बीजेपी और शरद पवार गुट के पास 2-2 सीटें हैं, जबकि कांग्रेस, शिवसेना (UBT) और रामदास आठवले के पास 1-1 सीट है. लेकिन राज्य विधानसभा के मौजूदा आंकड़ों को देखें तो एनडीए यानी बीजेपी, एकनाथ शिंदे शिवसेना और अजित पवार यहां ‘क्लीन स्वीप’ की स्थिति में दिख रहा है. जानकारों का मानना है कि बीजेपी यहां अपनी सीटों की संख्या में भारी इजाफा करेगी, जिससे शरद पवार और उद्धव ठाकरे के खेमे को बड़ा नुकसान हो सकता है. बिहार में भी 5 सीटों का समीकरण एनडीए के पक्ष में झुकता दिख रहा है. यहां जेडीयू की 2 और आरजेडी की 2 सीटें खाली हो रही हैं. नीतीश कुमार के पाला बदलने के बाद अब एनडीए यहां 3 सीटों पर मजबूत पकड़ रखता है, जबकि ‘इंडिया’ गठबंधन को नुकसान उठाना पड़ सकता है. पश्चिम बंगाल और ओडिशा: बीजेपी मारेगी सेंध? पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के गढ़ में बीजेपी अपनी पैठ मजबूत करने की तैयारी में है. यहां 6 सीटों पर चुनाव हैं. वर्तमान में TMC के पास 4 सीटें हैं और एक लेफ्ट (सीपीआई-एम) के पास. जिस तरह से बंगाल विधानसभा में वामपंथ का सफाया हुआ है, बीजेपी यहां सीपीआई-एम की सीट छीनकर अपना खाता खोलने और अपनी ताकत बढ़ाने के लिए तैयार है. ओडिशा में भी 4 सीटों पर मुकाबला दिलचस्प है. नवीन पटनायक की बीजेडी और बीजेपी के बीच यहां सीटों का बंटवारा विधानसभा की ताकत के आधार पर होगा, जहां बीजेपी अपनी मौजूदा 2 सीटों को बरकरार रखने या बढ़ाने की कोशिश करेगी. NDA vs INDIA… क‍िसके पास क‍ितने नंबर अनुमानों के मुताबिक, 16 मार्च के चुनाव एनडीए के लिए ‘सुपर संडे’ साबित हो सकते हैं. अनुमान है कि एनडीए को इन चुनावों में कम से कम 6 सीटों का फायदा होगा इससे एनडीए का आंकड़ा 21 के करीब पहुंच सकता है. दूसरी ओर, विपक्षी ‘इंडिया’ गठबंधन को लगभग 4 सीटों का नुकसान होने की संभावना है. कांग्रेस के लिए तेलंगाना, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश से अच्छी खबरें आ सकती हैं, जहाँ वह अपनी स्थिति में थोड़ा सुधार कर सकती है. बीजेपी कर रही रिकॉर्ड की तैयारी     साल 2026 बीजेपी के लिए राज्यसभा में ऐतिहासिक होने जा रहा है. मार्च के इन 37 सीटों के अलावा, पूरे साल में कुल 71 सदस्य रिटायर होने वाले हैं. अप्रैल में 32 सदस्य रिटायर होंगे. इनमें से 9 बीजेपी से हैं. जून में 22 सदस्य रिटायर होंगे. इनमें से 12 बीजेपी से हैं. इसी तरह नवंबर के अंत में 11 सदस्य रिटायर होंगे, इनमें से 9 बीजेपी से हैं.     बीजेपी न केवल अपनी सीटें बचा रही है, बल्कि क्षेत्रीय दलों और कांग्रेस के कमजोर राज्यों से अतिरिक्त सीटें खींच रही है. अगर यह ट्रेंड जारी रहा, तो बीजेपी अपने दम पर राज्यसभा में बहुमत के जादुई आंकड़े के बेहद करीब पहुंच जाएगी.     राज्यसभा में कुल 245 सीटें होती हैं. साधारण बहुमत के लिए किसी भी गठबंधन या दल को 123 सीटों की आवश्यकता होती है. वर्तमान में बीजेपी के पास लगभग 95-98 सदस्य हैं. NDA का आंकड़ा 115 से 118 के आसपास पहुंचता है.इस चुनाव के बाद राज्यसभा में एनडीए 123 के बहुमत के आंकड़े को पार कर सकती है. बदल जाएगा राज्‍यसभा का मिजाज शरद पवार और अभिषेक मनु सिंघवी जैसे कद्दावर नेताओं की कमी विपक्ष को खलेगी, जबकि बीजेपी के लिए यह अपनी विधायी ताकत को और अधिक धार देने का अवसर है. राज्यसभा में बहुमत मिलने का मतलब है कि सरकार को अब विवादास्पद बिलों को पास कराने के लिए बीजेडी या वाईएसआर कांग्रेस जैसे दलों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा. एनडीए की बढ़ती ताकत ने साफ कर दिया है कि ‘उच्च सदन’ की चाबी अब मजबूती से सत्तापक्ष के हाथों में जाने वाली है.  

slot server thailand super gacor

spaceman slot gacor

slot gacor 777

slot gacor

Nexus Slot Engine

bonus new member

olympus

situs slot bet 200

slot gacor

slot qris

link alternatif ceriabet

slot kamboja

slot 10 ribu

https://mediatamanews.com/

slot88 resmi

slot777

https://sandcastlefunco.com/

slot bet 100

situs judi bola

slot depo 10k

slot88

slot 777

spaceman slot pragmatic

slot bonus

slot gacor deposit pulsa

rtp slot pragmatic tertinggi hari ini

slot mahjong gacor

slot deposit 5000 tanpa potongan

mahjong

spaceman slot

https://www.deschutesjunctionpizzagrill.com/

spbo terlengkap

cmd368

368bet

roulette

ibcbet

clickbet88

clickbet88

clickbet88

bonus new member 100

slot777

https://bit.ly/m/clickbet88

https://vir.jp/clickbet88_login

https://heylink.me/daftar_clickbet88

https://lynk.id/clickbet88_slot

clickbet88

clickbet88

https://www.burgermoods.com/online-ordering/

https://www.wastenotrecycledart.com/cubes/

https://dryogipatelpi.com/contact-us/

spaceman slot gacor

ceriabet link alternatif

ceriabet rtp

ceriabet

ceriabet link alternatif

ceriabet link alternatif

ceriabet login

ceriabet login

cmd368

sicbo online live

Ceriabet Login

Ceriabet

Ceriabet

Ceriabet

Ceriabet