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बफर स्टॉक से ज्यादा कर ली खरीदी मगर उठान नहीं, छत्तीसगढ़-बीजापुर में धान खरीद पर छह जनवरी से रोक

बीजापुर। बफर लिमिट से अधिक खरीद के बावजूद जिले के धान उपार्जन केंद्रों में धान की उठान ना होने से खरीदी केंद्रों में धान जामा की स्थिति बन गई है। आलम ये है कि कई केंद्रों में क्विंटल भर तो दूर किलो भर धान रखने की जगह नहीं हैं, इससे परेशान खरीदी केंद्र प्रभारियों ने सीधे कलेक्टर से धान उठान के लिए गुहार लगाने के साथ मियाद भी दी है कि 5 जनवरी तक बफर लिमिट के ऊपर धान का परिवहन संतोषजनक ना होने की स्थिति में 6 जनवरी से जिले के सभी धान उपार्जन केंद्रों में खरीदी बंद कर दी जाएगी। मिली जानकारी अनुसार 29 दिसंबर तक जिले के 30 उपार्जन केंद्रों में चार लाख 37 हजार 737 क्विंटल धान की खरीद हुई है। जिसमें से महज 51 हजार 850 क्विंटल की उठान हुई है यानि जिले भरी में अब तक महज 11.85 फीसदी धान की उठान हुई है। जबकि 3 लाख 85 हजार 886 क्विंटल धान की उठान होनी बाकी है। ये आंकड़े 29 दिसंबर के हैं। ऐसे में 30 और 31 दिसंबर में हुई खरीदी से शेष मात्रा के आंकड़ों में बढ़ोतरी होनी निश्चित है। उठान में हो रही देरी से धान खरीद करने वाली समितियों की चिंता बढ़ गई है। मार्कफेड की नीति के बावजूद एक महीने से ज्यादा होने की वजह से सूखत बढ़ रही है। लगभग समितियों में बफर स्टॉक से ज्यादा धान की खरीद हो चुकी है। समितियों की मानें तो जिले में एक ही मिलर्स होने से ऐसी स्थिति बनी हुई है। उठान के लिए अंतरजिला डीओ और टीओ जारी किया जाता है तो समस्या से छुटकारा पाया जा सकता है। बहरहाल उठान में हो रही देरी से खरीदी केंद्रों में धान जामा होने की स्थिति बनी हुई है, वहीं कई केंद्रों में धान रखने की जगह ना होने से खरीद भी प्रभावित हो रही है, इतना ही नहीं समितियों को सुखत की चिंता भी सता रही है। हालांकि जिला सहकारी समिति संघ ने ज्ञापन के जरिए प्रशासन का ध्यानाकर्षण जरूर कराया है, लेकिन वस्तुस्थिति से पूरी तरह वाकिफ संघ के पदाधिकारियों ने प्रशासन को साफ चेतावनी भी दी है कि बफर स्टॉक से ऊपर धान उठान को लेकर प्रशासन कोई कदम नहीं उठाता है तो 6 जनवरी से जिले के सभी उपार्जन केंद्रों में खरीद बंद कर दी जाएगी।

‘अनुकम्पा नियुक्ति 10 जनवरी तक करें पूरी’, 353 नए पद मंजूर, छत्तीसगढ़-डिप्टी सीएम साव ने समीक्षा बैठक में दिये निर्देश

रायपुर। छत्तीसगढ़ में सभी नगरीय निकायों को अनुकम्पा नियुक्ति की प्रक्रियाएं 10 जनवरी तक पूरी करने के निर्देश दिये गये हैं। ये निर्देश उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने नगर निगमों, नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों की समीक्षा बैठक में दिये।  नगरीय प्रशासन विभाग ने अनुकम्पा नियुक्ति के लिए प्रदेशभर के नगरीय निकायों में 353 नए पद मंजूर किए हैं। डिप्टी सीएम साव ने बैठक में नगर निगमों के आयुक्तों तथा नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों के मुख्य नगर पालिका अधिकारियों को रोजाना वार्डों का भ्रमण कर निर्माण कार्यों, साफ-सफाई और प्रकाश व्यवस्था की मॉनिटरिंग करने को कहा। उन्होंने नगरीय निकायों में बन रहे अटल परिसरों और नालंदा परिसरों के काम में तेजी लाने और इनके उत्कृष्ट निर्माण के निर्देश दिए। श्री साव ने अधिकारियों को गंभीरता और सक्रियता से काम करते हुए राज्य के शहरों को साफ, सुंदर और सुविधापूर्ण बनाने को कहा। नगरीय प्रशासन विभाग के सचिव डॉ. बसवराजु एस., विशेष सचिव श्री आर. एक्का और संचालक श्री कुंदन कुमार भी समीक्षा बैठक में शामिल हुए। उन्होंने  समीक्षा बैठक में सभी नगरीय निकायों में अटल परिसर के निर्माण कार्यों में तेजी लाते हुए अच्छी गुणवत्ता की उत्कृष्ट मूर्ति स्थापित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अटल परिसर का इस तरह निर्माण करें कि शहर में इसकी विशेष पहचान और दर्शनीय स्थल बनें। उन्होंने प्रदेश के 12 शहरों में बनाए जा रहे नालंदा परिसर के लिए निविदा की प्रक्रिया पूरी कर शीघ्र काम प्रारंभ करने को कहा। साव ने अधिकारियों से कहा कि नालंदा परिसर का शानदार और आइकॉनिक निर्माण होना चाहिए। नालंदा परिसर और अटल परिसर का निर्माण सरकार के महत्वाकांक्षी कार्य हैं। उन्होंने आयुक्तों और मुख्य नगर पालिका अधिकारियों को खुद इनकी मॉनिटरिंग करने और प्रगति की नियमित समीक्षा करने के निर्देश दिए। बैठक में अधोसंरचना मद और 15वें वित्त आयोग के तहत स्वीकृत कार्यों के साथ ही प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी), अमृत मिशन 2.0, एसटीपी निर्माण और आकांक्षी शौचालयों के कार्यों में भी तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने निर्माण कार्यों में सामग्री और निर्माण की गुणवत्ता सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने सभी नगरीय निकायों के अधिकारियों को रोजाना प्रातः भ्रमण कर निर्माण कार्यों, साफ-सफाई और प्रकाश व्यवस्था की मॉनिटरिंग करने के निर्देश दिए। उन्होंने 01 जनवरी से ही इसकी शुरूआत कर शहरों में प्रकाश और सफाई की व्यवस्था दुरूस्त करने को कहा। श्री साव ने इसमें किसी भी तरह की कोताही न बरतते हुए गंभीरता और सक्रियता से प्रतिदिन कार्यों की मॉनिटरिंग करने को कहा। इसमें किसी तरह का हीला-हवाला पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

नववर्ष के उपलक्ष में काली बाड़ी में श्री राम अखण्ड कीर्तन और भंडारे का आयोजन संपन्न

झगराखांड/एमसीबी नव वर्ष के उपलक्ष में झगराखांड वार्ड क्रमांक 07 काली बाड़ी में श्री राम अखण्ड कीर्तन और भंडारे का आयोजन किया गया जिसमें वार्ड के समस्त परिवार जानो ने मिलकर कीर्तन का भरपूर आनंद लिया। इस कार्यक्रम को सफल बनाने में श्री काली बड़ी सत्यम संघ के युवा प्रतिनिधियों का मुख्य रूप से सहयोग मे दीपक तिवारी, नीरज चतुर्वेदी, विवेक यादव, धीरज चतुर्वेदी, संजीव पांडे, अभिषेक पांडे, अक्षय मुखर्जी आदि शामिल थे।

निशुल्क शारीरिक हेल्थ इवोल्यूशन-” के लिए किरण वर्मा सम्मानित, पतंजलि योग परिवार ने किया सम्मानित

मनेन्द्रगढ़/एमसीबी योग, प्राणायाम के साथ पारस्परिक सहयोग, पर्यावरण जागरूकता एवं भारतीय संस्कृति के प्रति आदर भाव जगाने के लिए समर्पित -“पतंजलि योग समिति”द्वारा नए वर्ष की पहले प्रभात बेला में स्वास्थ्य कल्याण ,शिक्षा एवं सेवाओं के लिए निशुल्क हेल्थ चेकअप कैंप का आयोजन हेल्थ वेलनेस इवोल्यूशन की सुप्रसिद्ध चिकित्सक किरण वर्मा की उपस्थिति में किया गया। पतंजलि योग समिति की ओर से वरिष्ठ योग प्रशिक्षक सतीश उपाध्याय, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के सहायक नेत्र अधिकारी आर डी दीवान, एवं ईरा कर के द्वारा वेलनेस कोच एवं मिशन स्वास्थ्य परिवार की चिकित्सक किरण वर्मा का पुष्पगुच्छ द्वारा स्वागत किया गया। स्वास्थ्य कल्याण शिक्षा और सेवा के तहत निशुल्क परामर्श देते हुए किरण वर्मा ने वजन घटाने, ऊर्जा और स्वास्थ्य फिटनेस, स्वस्थ आहार योजना, स्वस्थ खान पान, त्वचा का स्वास्थ, मस्तिष्क एवं हड्डियों और जोड़ों का स्वास्थ हृदय एवं पाचन आंखों के स्वास्थ्य आदि के लिए उचित परामर्श दिया। कार्यक्रम में  जगदंबा अग्रवाल, रोशन जहां धर्मराज वर्मा, विवेक तिवारी,रामसेवक विश्वकर्मा , कोपनाथ शर्मा ,नसीमा बेगम, दिवाकर, आदि योग साधक उपस्थित थे। कार्यक्रम के अंत में वेलनेस कोच एवं मिशन स्वास्थ्य परिवार से जुड़ी एवं शारीरिक हेल्थ इवोल्यूशन और परामर्श देने के लिए किरण वर्मा का पतंजलि योग समिति जिला एमसी बी परिवार की ओर से शाल श्रीफल से सम्मान किया गया। आभार प्रदर्शन कर डी दीवान एवं सतीश उपाध्याय द्वारा किया गया। संपूर्ण कार्यक्रम का संचालन पतंजलि योग समिति के जिला प्रभारी एवं वरिष्ठ योग प्रशिक्षक द्वारा किया गया।

राष्ट्रीय युवा महोत्सव में भाग लेने के लिए छत्तीसगढ़ से 45 बच्चों का चयन

राष्ट्रीय युवा महोत्सव में भाग लेने के लिए छत्तीसगढ़ से 45 बच्चों का चयन  विकसित भारत यंग लीडर डायलॉग प्रतियोगिता में रायपुर से सौम्या दुबे हुई चयनित रायपुर  28वां राष्ट्रीय युवा महोत्सव 11एवं 12 जनवरी को नई दिल्ली के भारतमंडपम में आयोजित होने जा रहा है। इस आयोजन में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी युवाओं से संवाद करेंगे। युवा महोत्सव में भाग लेने के लिए छत्तीसगढ़ से 45 बच्चों का चयन किया गया है। यह चयन तीन स्तरों पर सम्पन्न हुआ और राष्ट्रीय स्तर पर चयनित इन युवाओं को प्रधानमंत्री से संवाद करने का अवसर मिलेगा। राष्ट्रीय युवा महोत्सव की ‘एंपावरिंग यूथ फॉर विकसित भारत’ प्रतियोगिता में  केंद्रीय पेट्रोरसायन अभियंत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी संस्थान (सीपेट), रायपुर की बीटेक पांचवें सेमेस्टर की छात्रा सौम्या दुबे का भी चयन हुआ है। उल्लेखनीय है कि सन् 2047 के पूर्व भारत को विकसित बनाने की मुहिम के अंतर्गत ‘विकसित भारत यंग लीडर डायलॉग’  कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। इसी कड़ी में संचालनालय खेल एवं युवा कल्याण विभाग छत्तीसगढ़ शासन द्वारा अलग-अलग स्पर्धाएं आयोजित कर अभ्यर्थियों का चयन किया गया। इस स्पर्धा के अंतर्गत “विकसित भारत क्विज में उत्तीर्ण होने के बाद प्रतिभागियों द्वारा विकसित भास्त चैलेज के 10 विषयों में से किसी एक विषय पर निबंध लिखा गया। निबंधों के मूल्यांकन किये जाने के उपरांत प्रत्येक विषय से अधिकतम 25 प्रतिभागियों का चयन राज्य चैंपियनशीप के लिए किया गया। राज्य स्तरीय चैंपियनशीप में प्रतिभागियों द्वारा अपने संबंधित निबंध के विषय के आधार पर पी.पी.टी. (विजन ट्रैक) का प्रदर्शन किया गया। इस पी.पी.टी. (विजन ट्रैक) के मूल्यांकन के बाद 45 अभ्यर्थियों को राष्ट्रीय युवा उत्सव में भाग लेने के लिए चुना गया। विश्वविद्यालयों की सेमेस्टर परीक्षाएं युवा महोत्सव पर पड़ रही भारी जिन युवाओं का राष्ट्रीय युवा महोत्सव के लिए चयन हुआ है उनमें से कुछ अपने विश्वविद्यालयों की परीक्षाओं के कारण असमंजस की स्थिति में आ गए हैं। दरअसल, कुछ विश्वविद्यालय की परीक्षाएं इन्हीं तिथियों में ही पड़ रही हैं। केंद्रीय पेट्रोरसायन अभियंत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी संस्थान (सीपेट), रायपुर की छात्रा सौम्या दुबे भी उन्हीं प्रभावितों में से एक हैं। उन्होंने बताया की सीपेट की परीक्षाएं स्वामी विवेकानंद तकनीकी विश्वविद्यालय द्वारा संचालित होती हैं। उनके पांचवें सेमेस्टर की  परीक्षाएं 7 जनवरी से 16 जनवरी तक आयोजित हो रही हैं और इसी दौरान युवा महोत्सव भी है, जिसके लिए युवा कल्याण विभाग संभवतः 8 या 9 जनवरी को दिल्ली ले जायेगा। ऐसे में उन्होंने इसकी जानकारी सीपेट के डायरेक्ट को दी है और विश्वविद्यालय से परीक्षा तिथि परिवर्तन करने का आग्रह किया है।

वित्तीय प्रबंधन के लिये की तारीफ, छत्तीसगढ़-नये साल पर केंद्र सरकार ने दी 250 करोड़ प्रोत्साहन राशि

रायपुर। नये साल पर छत्तीसगढ़ के लिए खुशखबरी है। छत्तीसगढ़ सरकार ने प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता और दक्षता लाने के लिए आईटी आधारित वित्तीय प्रबंधन प्रणाली को लागू कर एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। केंद्र सरकार ने इस डिजिटल सुधार की तारीफ करते हुए प्रदेश को 250 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि पूंजीगत व्यय (कैपेक्स) के रूप में दी है। छत्तीसगढ़ राज्य ने केंद्र प्रवर्तित योजनाओं के वित्तीय प्रबंधन के लिए “जस्ट इन टाइम” (जेआईटी) मॉडल और एसएनए स्पर्श प्रणाली को अपनाया है। यह प्रणाली वित्तीय प्रवाह को कुशल बनाते हुए निधियों के वितरण, ट्रैकिंग और भुगतान को आसान बनाती है। इसके तहत राज्य सरकार ने केंद्र की निधि को आरबीआई के ई-कुबेर नेटवर्क और राज्य की निधि को वित्तीय प्रबंधन एवं सूचना प्रणाली (एफएमआईएस) के माध्यम से समेकित किया है। इस पहल से निधि के सही समय पर उपयोग और वास्तविक समय में व्यय की रिपोर्टिंग भी सुनिश्चित हुई है। इस सुधार के तहत स्मार्ट भुगतान  एल्गोरिथम का उपयोग किया गया है, जिससे भुगतान ट्रिगर नियमों के आधार पर वास्तविक समय में किया जाता है। इससे सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली (पीएफएमएस) के परिणाम बेहतर हुए हैं। साथ ही, राज्य में डिजिटल प्लेटफॉर्म और पोर्टल्स का निर्माण कर आम जनता को सरकारी योजनाओं का लाभ तेजी से और पारदर्शी तरीके से पहुंचाया जा रहा है। छत्तीसगढ़ सरकार ने डिजिटल इंडिया और डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) को बढ़ावा देने के लिए अपने तकनीक आधारित सुधारों को राष्ट्रीय स्तर पर प्रासंगिक बनाया है। राज्य की अधोसंरचना परियोजनाओं और इन्फ्रास्ट्रक्चर इकोसिस्टम को इस प्रोत्साहन राशि से और अधिक मजबूती मिलेगी। मुख्यमंत्री साय ने कहा है कि तकनीक आधारित सुधार और सुशासन ही छत्तीसगढ़ के आर्थिक विकास का मूलमंत्र है। यह उपलब्धि न केवल प्रशासनिक दक्षता का प्रमाण है, बल्कि जनता के प्रति हमारी सरकार के सुशासन के संकल्प का प्रमाण है। छत्तीसगढ़ सरकार का यह प्रयास न केवल राज्य को तकनीकी रूप से सशक्त बनाएगा, बल्कि अन्य राज्यों के लिए भी एक प्रेरणा बनेगा। आईटी को बढ़ावा छत्तीसगढ़ सरकार प्रशासनिक कार्यों में तेजी लाने आईटी के प्रयोग को बढ़ावा दे रही है।इसी के तहत् केन्द्र प्रवर्तित योजनाओं के लिए राशि जारी करने, वितरित करने एवं निधियों की ट्रैकिंग करने तथा बेहतर नकद प्रबंधन के लिए राज्य शासन द्वारा एसएनए स्पर्श के अंतर्गत जेआईटी (जस्ट इन टाईम) मॉडल को अपनाया गया है। इसके माध्यम से केन्द्र प्रवर्तित योजनाओं के लिए नवीन सिस्टम के माध्यम से कार्य किया जा रहा है जिसका उद्देश्य केन्द्र और राज्य की समेकित निधि से राशि को उचित समय पर प्राप्त कर कुशल भुगतान प्रसंस्करण पर ध्यान केन्द्रित करते हुए निधि के उपयोग को अनुकूलित करना एवं व्यय की वास्तविक समय रिपोर्टिंग की सुविधा प्रदान करना है। इसमें केन्द्र प्रवर्तित योजना के राज्य की हिस्से की राशि एफएमआईएस (वित्तीय प्रबंधन एवं सूचना प्रणाली) तथा केन्द्र के हिस्से की राशि आरबीआई के ई-कुबेर नेटवर्क के माध्यम से जारी की जाती है, जिससे रियल टाईम फण्ड यूटिलाईजेशन किया जा रहा है। “जस्ट इन टाइम” पर फोकस केन्द्र प्रवर्तित योजनाओं के लिए कुशल निधि प्रवाह प्रणाली के साथ भुगतान सह लेखा नेटवर्क की स्थापना कर सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली की सुविधा प्रदान करने के लिए जस्ट इन टाईम के माध्यम से “सही समय पर” राशि हस्तांतरण की प्रक्रिया अपनायी गई है। इसमें स्मार्ट भुगतान के तहत एल्गोरिदम के माध्यम से ट्रिगर नियमों पर आधारित वास्तविक समय में कुशल भुगतान किया जा रहा है जिससे सार्वजनिक क्षेत्र में वित्तीय प्रबंधन परिणामों को बेहतर बनाने में मदद मिली है। छत्तीसगढ़ शासन केन्द्र सरकार के डिजिटल इण्डिया पहल को मजबूत करने हेतु प्रतिबद्ध है। बेहतर नकद प्रबंधन एवं सार्वजनिक वित्त प्रबंधन प्रणाली (पीएफएमएस) के लिए जस्ट इन टाईम मॉडल डिजिटल इण्डिया एवं डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) को सहयोग प्रदान करता है। “तकनीक आधारित रिफॉर्म और सुशासन तीव्र आर्थिक विकास” वित्तीय वर्ष 2024-25 के बजट वक्तव्य में शामिल स्ट्रैटेजिक स्तंभों में से एक है। केन्द्र प्रवर्तित योजनाओं के लिए वित्तीय प्रबंधन प्रणाली अपनाने हेतु किये गये इस रिफॉर्म के लिए भारत सरकार द्वारा भी पूर्ण सहयोग दिया जा रहा है। इस रिफॉर्म के लिए राज्य को भारत सरकार से 250 करोड़ प्रोत्साहन राशि पूंजीगत व्यय (कैपेक्स) के लिए प्रदान की है। इसके अतिरिक्त 250 करोड़ प्रोत्साहन राशि प्राप्त होना संभावित है। इस राशि का उपयोग राज्य के अधोसंरचना निर्माण परियोजनाओं में इन्फ्रास्ट्रक्चर इकोसिस्टम को मजबूत बनाने के लिये किया जा रहा है।

प्रेमी के साथ मुलकर लाठी डंडे से पीटकर उतारा मौत के घाट, छत्तीसगढ़-दुर्ग में त्रिकोणीय प्रेम प्रसंग में पूर्व प्रेमी की हत्या

दुर्ग। पद्मनाभपुर थाना क्षेत्र त्रिकोणीय प्रेम प्रसंग में हुई युवक के हत्या मामले में पुलिस ने तीन अपचारी बालक समेत छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इस मामले में युवती रोशनी को आरोपी बनाया। पद्मनाभपुर थाना प्रभारी केशव कोसले ने बताया कि कसारीडीह पुलिस लाइन निवासी चेतन साहू नाम के युवक का प्रेम प्रसंग घर के पास रहने वाली युवती के साथ चलता था। युवक और युवती दोनों की मां पुलिस विभाग में पदस्थ है। घटना के कुछ दिन पूर्व युवती की मां का ट्रांसफर सरगुजा हो गया। युवती भी उसके साथ सरगुजा चली गई, जहां सरगुजा निवासी युवक कुलेश्वर साहू के प्रति युवती रोशनी लकड़ा आकर्षित हो गई। इस दौरान चेतन भी युवती को फोन करता था। जिससे वह परेशान हो गई थी। 24 दिसंबर को रोशनी अपनी मां के साथ दुर्ग आई थी। चेतन रोशनी से मिलने के लिए बोला। लेकिन युवती ने उससे मिलने के लिए इनकार कर दिया। चेतन की बात रोशनी ने सरगुजा वाले प्रेमी कुलेश्वर साहू को बताई। जिसके बाद आरोपी रोशनी और कुलेश्वर ने चेतन की हत्या प्लानिंग की। प्लानिंग के तहत रोशनी ने चेतन को कॉल करने ग्राउंड के पास बुलाया। जहां पहले से कुलेश्वर और उसके साथी मौजूद थे। चेतन के पहुंचाने पर कुलेश्वर उसे रोशनी से बात करने को लेकर विवाद किया। विवाद बढ़ने पर तीन अपचारी बालक कुलेश्वर,आकाश देशलहरे ने मिलकर लाठी डंडे से चेतन की दौडा-दौड़ाकर पिटाई कर दी। घटना में अपनी जान बचाते हुए घर के बाउंड्रीवाल से कूद कर पहुंचा। लेकिन पैर सिल्प होने से आरोपियों के हत्थे चढ़ने पर उसे मौत के घाट उतार दिया। पुलिस ने इस घटना की प्रेमिका रोशनी लकड़ा, कुलेश्वर साहू,आकाश देशलहरे समेत तीन नाबालिग को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया है।

ठंडी हवाओं की कंपकंपी में अलाव बना सहारा, छत्तीसगढ़-कड़ाके की ठंड से नए साल का स्वागत

रायपुर। मैकल पर्वत श्रंखला और अमरकंटक की तराई में बसे पेंड्रा गौरेला मरवाही इलाके में कड़ाके की ठंड पड़ रही है। नए साल के पहले दिन घने कोहरे से पूरा क्षेत्र कोहरे की चादर में लपटा नजर आया। मौसम साफ होते ही ठंड का एहसास कुछ ज्यादा ही हो रहा है। वहीं उत्तर भारत में हो रही बर्फबारी के चलते भी दिन के वक्त भी लोग गर्म कपड़े पहने नजर आ रहे हैं। मौसम खुलते ही तापमान नीचे की ओर लुढका और यहां न्यूनतम तापमान सात डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में ओस की बूंदे भी जमने लगी है। तो लोग ठंड से बचने के लिए अलाव का सहारा ले रहे है। नये साल के पहले दिन पेंड्रा गौरेला मरवाही इलाके में कड़ाके की ठंड शुरू हो गई। उत्तर भारत में हो रही लगातार बर्फबारी का असर इस इलाके में भी देखने को मिल रहा है। इलाके का तापमान 7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है। यहां पर लगातार तापमान में गिरावट के साथ दिन के समय भी ठंडी-ठंडी हवाएं चल रही हैं। लोग दिन के समय भी गर्म कपड़े पहनने को मजबूर हैं। हालांकि दिन के वक्त धूप निकलने की वजह से ठंड से थोड़ी राहत जरूर मिल रही है। हालांकि, ठंड की वजह से ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोग ठंड से बचने के लिए अलाव का सहारा ले रहे हैं। वहीं मैकल पर्वत श्रंखला और अमरकंटक की तराई में बसे ग्रामीण क्षेत्रों में ओस की बूंदे भी जमने लगी है। तो ठंड से बचने के लिए लोग चाय की चुस्की का सहारा भी ले रहे हैं। चाय की गर्म-गर्म चुस्कियां लेते लोग सुबह से ही ठेलो में नजर आने लग जाते हैं। हालांकि अब तक चौक चौराहों में प्रशासन के द्वारा अलाव जलाने की व्यवस्था नहीं की गई है। यह कहा जा सकता है कि उत्तर भारत में हो रही बर्फबारी के बाद उत्तरी हवाओं के असर के चलते ही इलाका कड़ाके की ठंड और शीतलहर की चपेट में है।

‘सुख,समृद्धि और खुशहाली लेकर आए नया वर्ष’, छत्तीसगढ़-सीएम साय ने दी नववर्ष की शुभकामनाएं

रायपुर। छत्तीसगढ़ के सीएम विष्णुदेव साय ने प्रदेशवासियों को नववर्ष 2025 की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने कहा कि नव वर्ष 2025 हम सभी के जीवन में तरक्की के नये अवसर लेकर लाये। सभी के जीवन में सुख-समृद्धि का वास हो। नए वर्ष में वो प्रदेश की जनता की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि नव वर्ष हम सभी के लिए शुभ संकल्प लेने का समय है। पिछले साल हमने प्रधानमंत्री मोदी की गारंटी को पूरा करने का संकल्प लिया था और प्रत्येक वर्ग को लाभ पहुंचाने में हमें सफलता मिली। नए वर्ष में भी हम प्रदेश की जनता की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने कहा कि हम इस साल हम सभी छत्तीसगढ़ की स्थापना का रजत जयंती वर्ष मना रहे हैं। इस वर्ष को हमने अटल निर्माण वर्ष के रूप में भी मनाने का निर्णय लिया है।  सभी की भागीदारी से हमें छत्तीसगढ़ को एक समृद्ध और विकसित राज्य बनायेंगे। नव वर्ष में हम सब मिलकर छत्तीसगढ़ महतारी को संवारने के लिए और अधिक संकल्पित होकर कार्य करेंगे। हम सभी के शुभसंकल्प और मनोरथ नववर्ष में पूरे हों।

छत्तीसगढ़ सरकार ने प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता लाने आईटी आधारित वित्तीय प्रबंधन प्रणाली को लागू कर एक महत्वपूर्ण उपलब्धि की हासिल

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साथ के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार ने प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता और दक्षता लाने के लिए आईटी आधारित वित्तीय प्रबंधन प्रणाली को लागू कर एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। केंद्र सरकार ने इस डिजिटल सुधार की सराहना करते हुए राज्य को 250 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि पूंजीगत व्यय (कैपेक्स) के रूप में प्रदान की है। छत्तीसगढ़ राज्य ने केंद्र प्रवर्तित योजनाओं के वित्तीय प्रबंधन के लिए “जस्ट इन टाइम” (जेआईटी) मॉडल और एसएनए स्पर्श प्रणाली को अपनाया है। यह प्रणाली वित्तीय प्रवाह को कुशल बनाते हुए निधियों के वितरण, ट्रैकिंग और भुगतान को आसान बनाती है। इसके तहत राज्य सरकार ने केंद्र की निधि को आरबीआई के ई-कुबेर नेटवर्क और राज्य की निधि को वित्तीय प्रबंधन एवं सूचना प्रणाली (एफएमआईएस) के माध्यम से समेकित किया है। इस पहल से निधि के सही समय पर उपयोग और वास्तविक समय में व्यय की रिपोर्टिंग भी सुनिश्चित हुई है। इस सुधार के तहत स्मार्ट भुगतान एल्गोरिथम का उपयोग किया गया है, जिससे भुगतान ट्रिगर नियमों के आधार पर वास्तविक समय में किया जाता है। इससे सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली (पीएफएमएस) के परिणाम बेहतर हुए हैं। साथ ही, राज्य में डिजिटल प्लेटफॉर्म और पोर्टल्स का निर्माण कर आम जनता को सरकारी योजनाओं का लाभ तेजी से और पारदर्शी तरीके से पहुंचाया जा रहा है। छत्तीसगढ़ सरकार ने डिजिटल इंडिया और डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) को बढ़ावा देने के लिए अपने तकनीक आधारित सुधारों को राष्ट्रीय स्तर पर प्रासंगिक बनाया है। राज्य की अधोसंरचना परियोजनाओं और इन्फ्रास्ट्रक्चर इकोसिस्टम को इस प्रोत्साहन राशि से और अधिक मजबूती मिलेगी। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि तकनीक आधारित सुधार और सुशासन ही छत्तीसगढ़ के आर्थिक विकास का मूलमंत्र है। यह उपलब्धि न केवल प्रशासनिक दक्षता का प्रमाण है, बल्कि जनता के प्रति हमारी सरकार के सुशासन के संकल्प का प्रमाण है। छत्तीसगढ़ सरकार का यह प्रयास न केवल राज्य को तकनीकी रूप से सशक्त बनाएगा, बल्कि अन्य राज्यों के लिए भी एक प्रेरणा बनेगा। उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ सरकार प्रशासनिक कार्यों में तेजी लाने आईटी के प्रयोग को बढ़ावा दे रही है, इसी के तहत् केन्द्र प्रवर्तित योजनाओं के लिए राशि जारी करने, वितरित करने एवं निधियों की ट्रैकिंग करने तथा बेहतर नकद प्रबंधन के लिए राज्य शासन द्वारा एसएनए स्पर्श के अंतर्गत जेआईटी (जस्ट इन टाईम) मॉडल को अपनाया गया है। इसके माध्यम से केन्द्र प्रवर्तित योजनाओं के लिए नवीन सिस्टम के माध्यम से कार्य किया जा रहा है जिसका उद्देश्य केन्द्र और राज्य की समेकित निधि से राशि को उचित समय पर प्राप्त कर कुशल भुगतान प्रसंस्करण पर ध्यान केन्द्रित करते हुए निधि के उपयोग को अनुकूलित करना एवं व्यय की वास्तविक समय रिपोर्टिंग की सुविधा प्रदान करना है। इसमें केन्द्र प्रवर्तित योजना के राज्य की हिस्से की राशि एफएमआईएस (वित्तीय प्रबंधन एवं सूचना प्रणाली) तथा केन्द्र के हिस्से की राशि आरबीआई के ई-कुबेर नेटवर्क के माध्यम से जारी की जाती है, जिससे रियल टाईम फण्ड यूटिलाईजेशन किया जा रहा है। केन्द्र प्रवर्तित योजनाओं के लिए कुशल निधि प्रवाह प्रणाली के साथ भुगतान सह लेखा नेटवर्क की स्थापना कर सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली की सुविधा प्रदान करने के लिए जस्ट इन टाईम के माध्यम से “सही समय पर” राशि हस्तांतरण की प्रक्रिया अपनायी गई है। इसमें स्मार्ट भुगतान के तहत एल्गोरिदम के माध्यम से ट्रिगर नियमों पर आधारित वास्तविक समय में कुशल भुगतान किया जा रहा है जिससे सार्वजनिक क्षेत्र में वित्तीय प्रबंधन परिणामों को बेहतर बनाने में मदद मिली है। छत्तीसगढ़ शासन केन्द्र सरकार के डिजिटल इण्डिया पहल को मजबूत करने हेतु प्रतिबद्ध है। बेहतर नकद प्रबंधन एवं सार्वजनिक वित्त प्रबंधन प्रणाली (पीएफएमएस) के लिए जस्ट इन टाईम मॉडल डिजिटल इण्डिया एवं डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) को सहयोग प्रदान करता है। “तकनीक आधारित रिफॉर्म और सुशासन तीव्र आर्थिक विकास” वित्तीय वर्ष 2024-25 के बजट वक्तव्य में शामिल स्ट्रैटेजिक स्तंभों में से एक है। केन्द्र प्रवर्तित योजनाओं के लिए वित्तीय प्रबंधन प्रणाली अपनाने हेतु किये गये इस रिफॉर्म के लिए भारत सरकार द्वारा भी पूर्ण सहयोग दिया जा रहा है। इस रिफॉर्म के लिए राज्य को भारत सरकार से 250 करोड़ प्रोत्साहन राशि पूंजीगत व्यय (कैपेक्स) के लिए प्रदान की है। इसके अतिरिक्त 250 करोड़ प्रोत्साहन राशि प्राप्त होना संभावित है। इस राशि का उपयोग राज्य के अधोसंरचना निर्माण परियोजनाओं में इन्फ्रास्ट्रक्चर इकोसिस्टम को मजबूत बनाने हेतु किया जा रहा है।

श्रीमती रूणा गुप्ता ने बिहान योजना का लाभ उठाते हुए डेयरी व्यवसाय शुरू किया

रायपुर केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं ने महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और स्वरोजगार के नए अवसर प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। बगीचा ब्लॉक के ग्राम झिक्की की रहने वाली श्रीमती रूणा गुप्ता इसका उत्कृष्ट उदाहरण हैं। बिहान योजना और मुद्रा लोन का लाभ उठाते हुए, उन्होंने डेयरी व्यवसाय शुरू किया और आज वह लखपति दीदी बनकर गांव की महिलाओं के लिए प्रेरणा स्रोत बन गई हैं। सामान्य परिवार से ताल्लुक रखने वाली श्रीमती रूणा का सपना था कि वह अपने पैरों पर खड़ी होकर अपने परिवार का सहारा बनें। अपने इस सपने को साकार करने के लिए उन्होंने बिहान योजना के तहत साई स्व-सहायता समूह से जुड़कर अपना सफर शुरू किया। समूह के माध्यम से उन्हें अब तक बैंक से 4.50 लाख रुपए का सहयोग मिला, जिससे उन्होंने दो साहीवाल और एक एच.एफ नस्ल की गाय खरीदी और डेयरी व्यवसाय की शुरुआत की। डेयरी व्यवसाय से मुनाफा कमाने के बाद श्रीमती रूणा ने मुद्रा लोन के तहत एक लाख रुपए का लोन लेकर एच.एफ नस्ल की एक और गाय खरीदी। वर्तमान में उनके पास चार गायें हैं, जिनसे प्रतिदिन 22 लीटर दूध का उत्पादन होता है। दूध के साथ-साथ दही और पनीर बनाकर विक्रय करने से उन्हें हर माह लगभग 24 हजार रुपए की आय हो रही है। गायों के चारा, देखभाल और लोन चुकाने के बाद भी वह हर महीने 9 हजार रुपए का शुद्ध लाभ कमा रही हैं। डेयरी व्यवसाय से मिले अनुभवों का उपयोग करते हुए श्रीमती रूणा अब पशु क्रेडिट का कार्य भी कर रही हैं। वह बीमार गायों की देखभाल, इलाज और टीकाकरण का काम करती हैं, जिससे उन्हें हर माह अतिरिक्त 2 हजार रुपए की आमदनी हो जाती है। श्रीमती रूणा अपने इस सफर को बेहद खास मानती हैं। उन्होंने बताया कि इस आय से वह अपने बच्चों की पढ़ाई और परिवार की जरूरतों को पूरा कर रही हैं। खेती में भी उनका योगदान है। इसके साथ ही वह अन्य महिलाओं को भी स्वरोजगार के लिए प्रेरित कर रही हैं। श्रीमती रूणा ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि बिहान योजना और सरकार की अन्य योजनाओं की मदद से ही वह आज इस मुकाम पर पहुंच पाई हैं। उन्होंने बताया कि उन्हें महतारी वंदना योजना का भी लाभ मिला है। श्रीमती रूणा गुप्ता का यह सफर गांव की महिलाओं के लिए एक प्रेरणादायक कहानी है, मेहनत और सही मार्गदर्शन से कोई भी व्यक्ति आत्मनिर्भर बन सकता है।

महतारी वंदन योजना ने महिलाओं को न केवल आर्थिक संबल प्रदान किया

रायपुर महतारी वंदन योजना ने वनांचल क्षेत्र की महिलाओं के जीवन में आशा की एक नई किरण जगाई है। ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार की कमी और सीमित संसाधनों के कारण जीवन यापन करना हमेशा चुनौतीपूर्ण रहा है। इस योजना ने महिलाओं को न केवल आर्थिक संबल प्रदान किया, बल्कि आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बढ़ाने में मदद की है। कोरबा जिले के बोड़ानाला गांव की निवासी सुखमत मंझवार का जीवन कभी अभाव और संघर्ष से भरा हुआ था। उनके गांव की खेती योग्य जमीन डुबान में चली गई थी, जिससे परिवार के पास आय का कोई स्थिर स्रोत नहीं था। उनके पति मजदूरी कर परिवार का गुजारा करते थे, लेकिन दैनिक आवश्यकताओं को पूरा करना मुश्किल था। महतारी वंदन योजना के तहत मिलने वाली आर्थिक सहायता ने सुखमत के जीवन में एक सकारात्मक बदलाव लाया। इस योजना से प्राप्त राशि ने न केवल उनके घरेलू खर्चों को आसान बनाया, बल्कि उनके परिवार को भी आत्मनिर्भर बनने में मदद की। सुखमत ने साझा किया कि अब वह अपने परिवार की जरूरतों को आसानी से पूरा कर पा रही हैं और किसी पर निर्भर नहीं रहना पड़ता। बोड़ानाला की ही रहने वाली राजकुमारी मंझवार ने भी इस योजना के लाभ से अपने जीवन को सशक्त बनाया है। उन्होंने बताया कि हर माह मिलने वाली 1,000 रुपये की वित्तीय सहायता से वह अपने दैनिक खर्चों को आसानी से पूरा कर लेती हैं। इससे उनका आत्मविश्वास बढ़ा है, और अब उन्हें मुश्किल समय में किसी से मदद मांगने की आवश्यकता नहीं पड़ती। महतारी वंदन योजना ने न केवल आर्थिक रूप से, बल्कि मानसिक रूप से भी महिलाओं को मजबूत बनाया है। इस योजना ने वनांचल क्षेत्र की महिलाओं को अपनी और अपने परिवार की खुशहाली सुनिश्चित करने में सक्षम बनाया है। यह पहल उनके जीवन में एक नई दिशा और उजाला लेकर आई है, जिससे उनका भविष्य बेहतर और सशक्त हो रहा है। इस योजना का उद्देश्य ग्रामीण और वनांचल क्षेत्रों की महिलाओं को वित्तीय सहारा देकर उनके जीवन स्तर को सुधारना और आत्मनिर्भर बनाना है। महतारी वंदन योजना महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने में मददगार साबित हो रही है।

राजनांदगांव जिले में 9.72 करोड़ से 324 केज इकाइयां स्थापित

रायपुर राजनांदगांव जिले के बंद पड़ी खदानों को आजीविका के लिए उपयोगी बनाते हुए प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत केज कल्चर तकनीक से मछली पालन का कार्य तेजी से लोकप्रिय और फायदेमंद साबित हो रहा है। यह नवाचार न केवल मत्स्य पालकों के लिए आर्थिक रूप से फायदेमंद साबित हुआ है, बल्कि 150 से अधिक स्थानीय बेरोजगार युवाओं और महिलाओं के लिए रोजगार का नया जरिया भी बन गया है। जिले के ग्राम जोरातराई में बंद पड़ी खदानों को जलस्रोत के रूप में उपयोग करते हुए 9.72 करोड़ रुपए की लागत से 18 इकाइयों में कुल 324 केज लगाए गए हैं। प्रत्येक केज इकाई की लागत 3 लाख रुपए है, जिसमें से 60 प्रतिशत अनुदान के रूप में 5.83 करोड़ रुपए की राशि प्रदान की गई है। केज कल्चर, जिसे नेट पेन कल्चर भी कहा जाता है, जलाशय में फ्लोटिंग केज यूनिट स्थापित करने की एक आधुनिक तकनीक है। इसमें एक केज यूनिट में चार बाड़े होते हैं, जहां उंगली के आकार की मछलियों को पाला जाता है, जो  पांच माह में लगभग एक से सवा किलो वजन की हो जाती है। इस तकनीक में तिलापिया और पंगेसियस जैसी मछलियों का पालन किया जा रहा है। प्रत्येक केज से 2.5 से 3 टन तक मछली उत्पादन होता है, जिससे 6 से 8 हजार रुपए की मासिक आमदनी होती है। ग्राम मुढ़ीपार स्टेशन पारा की श्रीमती पूर्णिमा साहू ने बताया कि जय मां संतोष महिला स्वसहायता समूह के माध्यम से केज कल्चर तकनीक से जुड़ने के बाद उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ है। समूह की महिलाओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का आभार प्रकट किया है। जोरातराई की खदानों में 8 लाख से अधिक मछलियां पाली जा रही हैं। यह तकनीक न केवल मछलियों की तेज वृद्धि और स्वास्थ्य के लिए उपयुक्त है, बल्कि संक्रमण का खतरा भी कम रहता है। मत्स्यपालक अपनी जरूरत के अनुसार केज से मछलियां निकाल सकते हैं। राज्य सरकार की इस पहल ने बेरोजगार युवाओं और महिलाओं को रोजगार के साधन उपलब्ध कराए हैं। मत्स्य पालन की इस नवीन तकनीक से अब ताजी और स्थानीय मछलियां बाजार में उपलब्ध हो रही हैं। केज कल्चर तकनीक ने जिले में मछली उत्पादन के नए आयाम स्थापित किए हैं। जलाशयों और बंद खदानों के जलस्रोतों का यह उपयोग स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं के व्यापक मूल्य को मापकर छत्तीसगढ़ के सतत विकास में रेखांकित किया जाएगा

रायपुर वन पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं को ग्रीन जीडीपी के साथ जोड़ने की पहल शुरू करने वाला छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य बन गया है।  इस पहल  के द्वारा पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं के व्यापक मूल्य को मापकर छत्तीसगढ़ के सतत विकास में रेखांकित किया जाएगा। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत 2047 विज़न और सतत विकास लक्ष्यों के अनुरूप विज़न डॉक्यूमेंट तैयार कर रही है, जिसमें वन विभाग द्वारा संचालित पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं के मूल्यांकन की अवधारणा सम्मिलित की गई है। यह समग्र दृष्टिकोण राज्य में पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक प्रगति के बीच संतुलन बनाए रखने की प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है, जिससे आने वाली पीढ़ियों के लिए सतत और समृद्ध भविष्य सुनिश्चित हो सके। वन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं का मूल्यांकन न केवल बजटीय योजना को अधिक सुव्यवस्थित बनाएगा, बल्कि भविष्य की रणनीतियों को दिशा प्रदान करेगा, धन आवंटन को अधिक प्रभावी बनाएगा और वानिकी विकास के प्रयासों को सशक्त करेगा। यह प्रक्रिया सतत विकास और संसाधनों के बेहतर प्रबंधन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी। उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ राज्य मे संयुक्त वन प्रबंधन कार्यक्रम ने स्थानीय समुदायों को और अधिक सशक्त बनाया है। गुरु घासीदास, कांगेर घाटी और इंद्रावती जैसे राष्ट्रीय उद्यानों के साथ, छत्तीसगढ़ में प्रकृति आधारित पर्यटन के लिए असीम संभावनाएं हैं। स्थानीय निवासियों को जंगल सफारी, नेचर ट्रेल्स और इको-कैंपिंग जैसी सुविधाओं के प्रबंधन में सक्रिय रूप से शामिल किया जा रहा है, जिससे न केवल सामाजिक-आर्थिक विकास को बढ़ावा मिला है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों को भी सशक्त किया गया है। छत्तीसगढ़ का 44 प्रतिशत भू-भाग वन क्षेत्र से आच्छादित है। यह राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए एक मजबूत आधार हैं और लाखों लोगों की आजीविका में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ये वन विभिन्न प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष लाभ प्रदान करते हैं। वनों से प्राप्त होने वाले अन्य महत्वपूर्ण अमूर्त लाभ अक्सर उपेक्षित रहते हैं और उनका उचित मूल्यांकन नहीं हो पाता। इनमें जलवायु संतुलन बनाए रखने के लिए कार्बन अवशोषण, कृषि के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण परागण, पोषक तत्वों का चक्रण, मृदा उर्वरता में सुधार और जैव विविधता संरक्षण जैसी सेवाएं शामिल हैं। वनों का बाढ़ और रोग नियंत्रण, जल प्रवाह का प्रबंधन और वेक्टर जनित रोगों के जोखिम को कम करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका है। इसके अतिरिक्त, वनों से जल पुनर्भरण और शुद्धिकरण होता है, शुद्ध ऑक्सीजन प्रदान कर वायु गुणवत्ता में सुधार होता है, और सुंदर प्राकृतिक दृश्य तथा जैव विविधता-समृद्ध क्षेत्रों के माध्यम से मनोरंजन के साथ-साथ भावनात्मक संतुष्टि भी प्रदान होती है। इन वनों का गहरा आध्यात्मिक और धार्मिक महत्व भी है, क्योंकि पवित्र स्थलों और देवगुड़ी जैसे क्षेत्रों के माध्यम से ये आदिवासी विरासत और परंपराओं को संरक्षित रखते हैं। इसके अलावा छत्तीसगढ़ के वन अनेक नदियों का उद्गम स्थल हैं, जो सतत जल प्रवाह, जलग्रहण क्षेत्र संरक्षण और कृषि तथा आजीविका के लिए आवश्यक जैविक पदार्थ से मृदा को समृद्ध करने में सहायक हैं। इन प्रत्यक्ष लाभों का राज्य की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) पर व्यापक आर्थिक प्रभाव पड़ता है। ये सभी लाभ ग्रामीण उद्योगों और आजीविका को प्रोत्साहित करते हैं और राज्य के आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान करते हैं।

अटल परिसरों और नालंदा परिसरों के काम में तेजी लाने और उत्कृष्ट निर्माण के निर्देश:अरुण साव

रायपुर : साफ, सुंदर और सुविधापूर्ण बनाएं छत्तीसगढ़ के शहरों को: अरुण साव साफ, सुंदर और सुविधापूर्ण बनाएं छत्तीसगढ़ के शहरों को उप मुख्यमंत्री ने नगर निगमों, नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों के कार्यों की समीक्षा की अनुकम्पा नियुक्ति की प्रक्रियाएं 10 जनवरी तक पूर्ण करने के दिए निर्देश आयुक्तों और मुख्य नगर पालिका अधिकारियों को रोजाना वार्डों का भ्रमण कर निर्माण कार्यों, सफाई और प्रकाश व्यवस्था की मॉनिटरिंग करने कहा अटल परिसरों और नालंदा परिसरों के काम में तेजी लाने और उत्कृष्ट निर्माण के निर्देश रायपुर   उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री अरुण साव ने आज वरिष्ठ विभागीय अधिकारियों के साथ नगर निगमों, नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों के कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने मंत्रालय में वीडियो कॉन्फ्रेसिंग के माध्यम से आयोजित समीक्षा बैठक में सभी नगरीय निकायों को अनुकम्पा नियुक्ति की प्रक्रियाएं 10 जनवरी तक पूर्ण करने के निर्देश दिए। नगरीय प्रशासन विभाग द्वारा अनुकम्पा नियुक्ति के लिए प्रदेशभर के नगरीय निकायों में 353 नए पद मंजूर किए गए हैं।     उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने बैठक में नगर निगमों के आयुक्तों तथा नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों के मुख्य नगर पालिका अधिकारियों को रोजाना वार्डों का भ्रमण कर निर्माण कार्यों, साफ-सफाई और प्रकाश व्यवस्था की मॉनिटरिंग करने को कहा। उन्होंने नगरीय निकायों में बन रहे अटल परिसरों और नालंदा परिसरों के काम में तेजी लाने और इनके उत्कृष्ट निर्माण के निर्देश दिए। साव ने अधिकारियों को गंभीरता और सक्रियता से काम करते हुए राज्य के शहरों को साफ, सुंदर और सुविधापूर्ण बनाने को कहा। नगरीय प्रशासन विभाग के सचिव डॉ. बसवराजु एस., विशेष सचिव आर. एक्का और संचालक कुंदन कुमार भी समीक्षा बैठक में शामिल हुए।       उप मुख्यमंत्री साव ने समीक्षा बैठक में सभी नगरीय निकायों में अटल परिसर के निर्माण कार्यों में तेजी लाते हुए अच्छी गुणवत्ता की उत्कृष्ट मूर्ति स्थापित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अटल परिसर का इस तरह निर्माण करें कि शहर में इसकी विशेष पहचान और दर्शनीय स्थल बनें। उन्होंने प्रदेश के 12 शहरों में बनाए जा रहे नालंदा परिसर के लिए निविदा की प्रक्रिया पूरी कर शीघ्र काम प्रारंभ करने को कहा। साव ने अधिकारियों से कहा कि नालंदा परिसर का शानदार और आइकॉनिक निर्माण होना चाहिए। नालंदा परिसर और अटल परिसर का निर्माण सरकार के महत्वाकांक्षी कार्य हैं। उन्होंने आयुक्तों और मुख्य नगर पालिका अधिकारियों को खुद इनकी मॉनिटरिंग करने और प्रगति की नियमित समीक्षा करने के निर्देश दिए।     उप मुख्यमंत्री साव ने बैठक में अधोसंरचना मद और 15वें वित्त आयोग के तहत स्वीकृत कार्यों के साथ ही प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी), अमृत मिशन 2.0, एसटीपी निर्माण और आकांक्षी शौचालयों के कार्यों में भी तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने निर्माण कार्यों में सामग्री और निर्माण की गुणवत्ता सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने सभी नगरीय निकायों के अधिकारियों को रोजाना प्रातः भ्रमण कर निर्माण कार्यों, साफ-सफाई और प्रकाश व्यवस्था की मॉनिटरिंग करने के निर्देश दिए। उन्होंने 01 जनवरी से ही इसकी शुरूआत कर शहरों में प्रकाश और सफाई की व्यवस्था दुरूस्त करने को कहा। साव ने इसमें किसी भी तरह की कोताही न बरतते हुए गंभीरता और सक्रियता से प्रतिदिन कार्यों की मॉनिटरिंग करने को कहा। इसमें किसी तरह का हीला-हवाला पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।        साव ने समीक्षा बैठक में प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के निर्माणाधीन आवासों को आगामी मार्च महीने तक पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने गरीबों का आशियाना तैयार करने का काम संवेदनशीलता से करते हुए इनका निर्माण प्राथमिकता से पूर्ण करने को कहा।  उन्होंने किफायती आवास परियोजनाओं के तहत निर्मित आवासों का आबंटन हितग्राहियों को तत्काल करने के निर्देश दिए। उप मुख्यमंत्री साव ने जनसमस्या निवारण पखवाड़ा के दौरान अनिराकृत प्रकरणों की नियमित समीक्षा कर इन्हें जल्द से जल्द निराकृत करने को कहा।     साव ने नगरीय निकायों में नियमित और प्लेसमेंट कर्मचारियों के समय पर वेतन भुगतान सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने ऊर्जा की अनावश्यक खपत पर रोक लगाते हुए विद्युत देयकों का भुगतान समय पर करने के निर्देश दिए। लंबित भुगतान के कारण विद्युत देयकों पर सरचार्ज लगने की स्थिति नहीं बननी चाहिए। साव ने नगरीय निकायों में सेट-अप के पुनरीक्षण के लिए आवश्यक जानकारी संचालनालय को भेजने को कहा। उन्होंने आयुक्तों और मुख्य नगर पालिका अधिकारियों को सभी कार्यों की साप्ताहिक समीक्षा करने के निर्देश दिए। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग की संयुक्त सचिव डॉ. रेणुका श्रीवास्तव, राज्य शहरी विकास अभिकरण (सूडा) के सीईओ शशांक पाण्डेय और नगरीय प्रशासन विभाग के अपर संचालक पुलक भट्टाचार्य सहित सभी क्षेत्रीय कार्यालयों के संयुक्त संचालक एवं नगरीय निकायों के अभियंता भी समीक्षा बैठक में मौजूद थे।

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