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थाईलैंड के प्राचुआब किरी खान प्रांत में पतंग की तरह लहराते हुए समंदर में गिरा विमान क्रैश, पांच पुलिस अधिकारियों की मौत

थाईलैंड थाईलैंड के प्राचुआब किरी खान प्रांत में एक बड़ा विमान हादसा हुआ है, जिसमें पुलिस अधिकारियों से भरा एक छोटा विमान समंदर में गिर गया। हादसे में विमान में सवार पांच पुलिस अधिकारियों की मौत हो गई है। यह हादसा हुआ हिन जिले के पास हुआ, जहां विमान पैराशूट प्रशिक्षण की तैयारी के लिए परीक्षण उड़ान पर था। रॉयल थाई पुलिस के प्रवक्ता अर्चायोन क्रेथोंग ने बताया कि दुर्घटनाग्रस्त विमान ‘वाइकिंग डीएचसी-6 ट्विन ओटर’ था। घटनास्थल से प्राप्त तस्वीरों में विमान का मलबा दिखाई दे रहा है। हवाई अड्डे से कुछ ही दूर हुई यह दुर्घटना, थाईलैंड की पुलिस के लिए एक बड़ा झटका है, क्योंकि विमान में सवार सभी छह लोग पुलिस अधिकारी थे। स्थानीय जनसंपर्क विभाग के मुताबिक, पांच अधिकारियों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि एक अन्य अधिकारी गंभीर हालत में अस्पताल में है। फिलहाल, दुर्घटना के कारणों की जांच जारी है, और अधिकारियों ने विमान के ब्लैक बॉक्स से डाटा इकट्ठा करना शुरू कर दिया है।

घटती प्रजनन दर एक गंभीर विषय, अब ट्रंप ने बताया- प्रत्येक नवजात शिशु की मां को 5000 डॉलर का ‘बेबी बोनस’ देने का प्रस्ताव भी

वाशिंगटन अमेरिका में लगातार गिरती जन्मदर को लेकर डोनाल्ड ट्रंप की चिंताएं बढ़ती जा रही हैं। सुपरपावर कहे जाने वाले इस देश में घटती प्रजनन दर एक गंभीर विषय बन गई है। रिपोर्ट के अनुसार ट्रंप महिलाओं को शादी के लिए प्रोत्साहित करने के उपायों पर अपने सलाहकारों से विचार-विमर्श कर रहे हैं। इतना ही नहीं उनके करीबी सहयोगी अमेरिकियों से अधिक बच्चे पैदा करने का आग्रह कर रहे हैं और इसके लिए वित्तीय प्रोत्साहन देने की बात भी कह रहे हैं। आइए जानते हैं कि अमेरिका के अलावा दुनिया के और कौन से देश हैं जो जन्मदर बढ़ाने के लिए पैसे दे रहे हैं: व्हाइट हाउस में जन्मदर बढ़ाने को लेकर कुछ दिलचस्प सुझाव आए हैं। इनमें से एक असामान्य विचार यह है कि फुलब्राइट स्कॉलरशिप का 30% विवाहित या बच्चों वाले लोगों के लिए आरक्षित किया जाए। इसके अतिरिक्त प्रत्येक नवजात शिशु की मां को 5000 डॉलर का ‘बेबी बोनस’ देने का प्रस्ताव भी है। गौरतलब है कि ट्रंप पहले भी अमेरिका में एक नए ‘बेबी बूम’ का आह्वान कर चुके हैं। अमेरिका के अलावा कई अन्य देश भी जन्मदर बढ़ाने के लिए वित्तीय प्रोत्साहन दे रहे हैं: चीन: यहां अधिक बच्चे पैदा करने पर चाइल्डकेयर सब्सिडी मिलती है। कई शहरों में तो पहले बच्चे के लिए लगभग 13,800 डॉलर (1 लाख युआन) तक की सब्सिडी दी जाती है। स्विट्जरलैंड: अल्बिनेन गांव में घटती आबादी को रोकने के लिए सरकार नवविवाहित जोड़ों को 50 लाख रुपये से अधिक और प्रत्येक वयस्क सदस्य को 22 लाख रुपये से अधिक देती है। इसके अलावा प्रत्येक बच्चे के लिए लगभग आठ लाख रुपये दिए जाते हैं। जर्मनी: जर्मनी में माता-पिता को पहले या दूसरे हर बच्चे के लिए प्रति माह 250 यूरो (लगभग 23,572 रुपये) मिलते हैं। फिनलैंड: यहां नवजात बच्चे के लिए सरकार लगभग 7 लाख 86 हजार रुपये की सहायता राशि प्रदान करती है जिसका उद्देश्य जनसंख्या वृद्धि को प्रोत्साहित करना है। फ्रांस: फ्रांस की सरकार भी बच्चे पैदा करने के लिए वित्तीय सहायता देती है। गर्भवती महिलाओं को गर्भधारण के 28वें सप्ताह के बाद लगभग 900 यूरो मिलते हैं साथ ही 16 सप्ताह की सवेतन मातृत्व अवकाश भी मिलता है। यह देखना दिलचस्प होगा कि अमेरिका जन्मदर बढ़ाने के लिए क्या ठोस कदम उठाता है और क्या इन वित्तीय प्रोत्साहनों से देश की डेमोग्राफी में कोई महत्वपूर्ण बदलाव आता है। फिलहाल यह मुद्दा अमेरिका में एक गरमागरम बहस का विषय बना हुआ है।  

जामा मस्जिद की सीढ़ियों से पाकिस्तान को तगड़ा जवाब दिया गया, पहलगाम पर जुटे मुसलमान, पूरे देश में उबाल

नई दिल्ली पहलगाम में आतंकवादी हमले के विरोध में पूरे देश में उबाल है। दिल्ली की ऐतिहासिक जामा मस्जिद की सीढ़ियों से शुक्रवार को पाकिस्तान को तगड़ा जवाब दिया गया। जुमे की नमाज के बाद सैकड़ों मुसलमानों ने दहशतगर्दी के खिलाफ लड़ने की आवाज बुलंद की और कहा कि पाकिस्तान भारतीय मुसलमानों का भी दुश्मन है। कश्मीर के पहलगाम में धर्म पूछकर मारे गए 26 पर्यटकों के लिए देशभर में गम और गुस्से की लहर है। कश्मीर से कन्याकुमारी तक जगह-जगह विरोध प्रदर्शन किए जा रहे हैं और सरकार से सख्त ऐक्शन की मांग की जा रही है। शुक्रवार को दिल्ली की जामा मस्जिद पर भी जबरदस्त आक्रोश जाहिर किया गया। सैकड़ों मुसलमानों ने हाथों में तिरंगे और ‘पाकिस्तान मुर्दाबाद’ के पोस्टर लेकर अपनी भावनाओं का इजहार किया। जामा मस्जिद से कहा गया, ‘जो हमारी मुल्क के ऊपर बुरी नजर रखेगा, सबसे पहले हिन्दुस्तान के एक-एक मुसलमान का खून बहेगा। अपने मुल्क में दहशतगर्दी पनपने नहीं देंगे। सरकार जल्द से जल्द सख्त फैसले ले, कड़े फैसले ले। उसके बाद देश को सुकून मिलेगा। कश्मीर के उन भाइयों को भी सलाम जिन्होंने दहशतगर्दों का मुकाबला किया और जानें बचाईं। हम उन 26 परिवारों के साथ हैं जिनके बच्चों की जान गई।’ उन्होंने कहा कि हिन्दुस्तान का एक एक नागरिक, 140 करोड़ देशवासी, हिंदू हो मुस्लिम हो या सिख, ईसाई, गरीब हो या अमीर, आतंकवाद को हिन्दुस्तान के अंदर पनपने नहीं देगा। इस जामा मस्जिद से कहना चाहते हैं कि जो कह रहे हैं कि लड़ाई लड़ रहे हैं, वो हिन्दुस्तान के मुसलमानों के साथ भी अत्याचार और अन्याय कर रहे हैं। ये आपस में नफरत पैदा करना चाहते हैं। भाई को भाई से लड़वाना चाहते हैं। इस मुल्क में 75 साल पहले हिंदुओं और मुसलमानों ने आजादी के लिए लड़ाई लड़ी थी और अब आतंकवाद के खिलाफ एकसाथ लड़ेगा।

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन के पूर्व प्रमुख कृष्णास्वामी कस्तूरीरंगन का निधन, 84 साल की आयु में बेंगलुरु में ली अंतिम सांस

बेंगलुरु भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के पूर्व प्रमुख और प्रख्यात अंतरिक्ष वैज्ञानिक डॉ. के. कस्तूरीरंगन का 84 साल की उम्र में निधन हो गया। उन्होंने बेंगलुरु में अंतिम सांस ली। 27 अप्रैल को लोग कर सकेंगे अंतिम दर्शन के कस्तूरीरंगन नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के मसौदा समिति के अध्यक्ष भी थे। अधिकरियों ने बताया कि आज सुबह उनका निधान हुआ है। 27 अप्रैल को अंतिम दर्शन के लिए उनका पार्थिव शरीर रमन रिसर्च इंस्टीट्यूट (RRI) में रखा जाएगा। एनईपी में सूचीबद्ध शिक्षा सुधारों के पीछे के व्यक्ति के रूप में जाने जाने वाले कस्तूरीरंगन ने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के कुलाधिपति और कर्नाटक ज्ञान आयोग के अध्यक्ष के रूप में भी कार्य किया था। राज्यसभा के सदस्य भी रह चुके हैं कस्तूरीरंगन डॉ. कस्तूरीरंगन साल 2003 से लेकर 2009 तक राज्यसभा के सदस्य भी रहे और तत्कालीन भारतीय योजना आयोग के सदस्य के रूप में भी कार्य किया था। कस्तूरीरंगन अप्रैल 2004 से 2009 तक नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस्ड स्टडीज, बैंगलोर के निदेशक भी रहे। डॉ. कस्तूरीरंगन के नेतृत्व में इसरो ने रचा इतिहास डॉ. कस्तूरीरंगन के नेतृत्व में इसरो ने भारत के ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान (पीएसएलवी) के सफल प्रक्षेपण और संचालन सहित कई उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की। डॉ. कस्तूरीरंगन ने जियोसिंक्रोनस सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (जीएसएलवी) के पहले सफल उड़ान परीक्षण की भी देखरेख की। उनके कार्यकाल में आईआरएस-1सी और 1डी सहित प्रमुख उपग्रहों का विकास और प्रक्षेपण और दूसरी और तीसरी पीढ़ी के इनसैट उपग्रहों की शुरुआत हुई। इन प्रगति ने भारत को वैश्विक अंतरिक्ष क्षेत्र में एक प्रमुख शक्ति के रूप में मजबूती से स्थापित कर दिया।  इसरो के अध्यक्ष बनने से पहले डॉ. कस्तूरीरंगन इसरो उपग्रह केंद्र के निदेशक थे, जहां उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय उपग्रह (इनसैट-2) और भारतीय सुदूर संवेदन उपग्रहों (आईआरएस-1ए और आईआरएस-1बी) जैसे अगली पीढ़ी के अंतरिक्ष यान के विकास का नेतृत्व किया। उपग्रह आईआरएस-1ए के विकास में उनका योगदान भारत की उपग्रह क्षमताओं के विस्तार में महत्वपूर्ण था।

आरएसएस चीफ ने आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई की बात पर बल देते हुए कहा- हमारे पास शक्ति है तो यह दिखानी होगी

नई दिल्ली राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने पहलगाम आतंकी हमले के संदर्भ में बड़ा बयान देते हुए कहा है कि मौजूदा संघर्ष धर्म और अधर्म के बीच है, न कि केवल किसी संप्रदाय या धर्म के नाम पर। उन्होंने यह भी कहा कि जो लोग धर्म पूछकर लोगों की हत्या करते हैं, वे कट्टरपंथी हैं, और ऐसा आचरण राक्षसी प्रवृत्ति का परिचायक है। आरएसएस चीफ ने आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई की बात पर बल देते हुए कहा कि अगर हमारे पास शक्ति है तो यह दिखानी होगी। आरएसएस चीफ ने कहा, “यह लड़ाई संप्रदायों या धर्मों के बीच नहीं है। इसका आधार जरूर धर्म और संप्रदाय है, लेकिन यह वास्तव में धर्म और अधर्म के बीच की लड़ाई है।” उन्होंने आगे कहा, ”भारतीय सैनिकों या नागरिकों ने कभी किसी की धर्म पूछकर हत्या नहीं की। हिंदू कभी भी धर्म पूछकर हत्या नहीं करते। जो लोग धर्म पूछकर लोगों की हत्या करते हैं, वे कट्टरपंथी हैं, और ऐसा आचरण राक्षसी प्रवृत्ति का परिचायक है।” उन्होंने कहा, ‘‘ हमारे दिल में दर्द है। हम गुस्से में हैं लेकिन बुराई को नष्ट करने के लिए ताकत दिखानी होगी। रावण ने अपना इरादा नहीं बदला तो और कोई विकल्प नहीं था। राम ने उसे सुधारने का मौका दिया था और उसके बाद मारा था।’’ राम-रावण प्रसंग से दी मिसाल मोहन भागवत ने रावण के प्रसंग का उदाहरण देते हुए कहा, “रावण भगवान शिव का भक्त था, वेद जानता था, लेकिन उसका मन और बुद्धि परिवर्तन को तैयार नहीं थे। ऐसे राक्षस का अंत राम ने किया, क्योंकि परिवर्तन के लिए कभी-कभी विनाश आवश्यक होता है।” उन्होंने कहा कि राक्षसी प्रवृत्ति के लोगों का अंत ही देश और धर्म की रक्षा के लिए जरूरी है। मोहन भागवत ने कहा, “देश के हर नागरिक के मन में दुख और क्रोध होना स्वाभाविक है, क्योंकि राक्षसों के विनाश के लिए अपरिमित शक्ति की आवश्यकता होती है।” उन्होंने ने इस बात पर भी जोर दिया कि कुछ लोग चेतना और तर्क से परे होते हैं और ऐसे लोगों में कोई सुधार संभव नहीं होता, सिर्फ कठोर कार्रवाई ही उनका समाधान है।

वीर सावरकर पर SC की राहुल गांधी को नसीहत, हमें आजादी दिलाई थी और आप ऐसा बर्ताव कर रहे हैं, दोबारा ऐसा ना हो

नई दिल्ली स्वतंत्रता सेनानी विनायक दामोदर सावरकर पर आपत्तिजनक टिप्पणी किए जाने के मामले में राहुल गांधी को सुप्रीम कोर्ट ने नसीहत दी है। शुक्रवार को अदालत ने कांग्रेस नेता से कहा कि वीर सावरकर जैसे लोगों ने हमें आजादी दिलाई थी और आप उनके साथ इस तरह का बर्ताव कर रहे हैं। यही नहीं राहुल गांधी को नसीहत देते हुए अदालत ने कहा कि भविष्य में कभी ऐसी टिप्पणी मत करना, अन्यथा अदालत उसका स्वत: संज्ञान ले सकती है। वीर सावरकर पर राहुल गांधी की माफीवीर वाली टिप्पणी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि स्वतंत्रता सेनानियों का मजाक न उड़ाएं। बेंच ने राहुल गांधी के वकील अभिषेक मनु सिंघवी से पूछा कि क्या राहुल गांधी को पता है कि महात्मा गांधी ने भी अंग्रेजों से संवाद में खुद के लिए ‘आपका वफादार सेवक’ शब्द का इस्तेमाल किया था। शीर्ष अदालत ने साफ कहा कि वीर सावरकर को लेकर राहुल गांधी की टिप्पणी गैरजिम्मेदाराना थी। उन्हें ऐसा नहीं बोलना चाहिए था। हालांकि अदालत ने इस मामले में उन्हें राहत भी दी है। बेंच ने सावरकर के खिलाफ टिप्पणी को लेकर मानहानि के मामले में राहुल गांधी के खिलाफ जारी समन रद्द करने से इनकार करने वाले इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले पर रोक लगाई है। इसके साथ ही इस मामले में यूपी सरकार को भी सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी किया है। राहुल गांधी ने एक रैली के दौरान वीर सावरकर पर विवादित बयान दिया था। अदालत बोली- महात्मा गांधी ने भी खुद को बताया था ‘अंग्रेजों का वफादार नौकर’ दरअसल यह पूरा मामला 2022 में शुरू हुआ था। तब राहुल गांधी ने अपनी भारत जोड़ो यात्रा के दौरान महाराष्ट्र के अकोला में एक रैली की थी। इसमें उन्होंने वीर सावरकर पर विवादित टिप्पणी कर दी थी। उन्होंने एक चिट्ठी दिखाते हुए कहा था कि सावरकर ने अंग्रेजों का नौकर बने रहने की बात कही थी। इसके साथ ही डरकर माफी भी मांगी थी। गांधी-नेहरू ने ऐसा नहीं किया, इसलिए वे सालों तक जेल में रहे। इस मामले में राहुल गांधी के खिलाफ एक अधिवक्ता ने केस कर दिया था। हालांकि अदालत ने केस की सुनवाई के दौरान राहुल गांधी को नसीहत दी और ऐतिहासिक तथ्य भी गिनाए। बेंच ने कहा कि क्या आपको पता है कि महात्मा गांधी ने भी अंग्रेजों के साथ संवाद में खुद को ‘वफादार नौकर’ बताया था।

मुशाहिद हुसैन ने कहा- पानी के मामले में भारत कोई खास ऐक्शन नहीं ले सकता, ऐक्शन तत्काल असर नहीं दिखाएगा

इस्लामाबाद जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में आतंकी हमले के बाद भारत सरकार ने सख्त ऐक्शन लिया है। 1960 से चले आ रहे सिंधु जल समौझेते को पहली बार रोकने का फैसला हुआ है तो वहीं दूतावास से कर्मचारी कम करने, वीजा रद्द करने औऱ बॉर्डर बंद करने जैसे निर्णय भी हुए हैं। इन फैसलों से पाकिस्तान बौखला गया है और अब उसे चीन की याद आ रही है। पाकिस्तान ने पहले तो सिंधु जल समझौते को लेकर कहा कि वह संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में जाएगा और वहां चीन एवं रूस जैसे देशों से अपील करेगा कि वे भारत के खिलाफ ऐक्शन लें। यही नहीं अब पाकिस्तान ने सीधे चीन के नाम की धमकी ही देना शुरू कर दिया है। पाकिस्तानी पत्रकार और पूर्व सांसद मुशाहिद हुसैन सैयद ने कहा कि भारत सरकार की ओर से सिंधु जल समझौता रोकने समेत जो फैसला लिए गए हैं, वह आरएसएस के कहने पर हुए हैं। मुशाहिद हुसैन एक पाक टीवी चैनल से बातचीत में कहा कि अब पाकिस्तान ने जो फैसला लिया है, वह अच्छा है। हुसैन ने कहा कि नरेंद्र मोदी ने जो जंग शुरू की है, वह आरएसएस के कहने पर की है। उन्होंने कहा कि 2025 में आरएसएस के 100 साल पूरे हो रहे हैं और इसलिए भी ऐसा माहौल बनाया गया है। पाकिस्तान की ओर से भारतीय विमानों के लिए एयरस्पेस बंद करने के फैसले को भी मुशाहिद हुसैन ने कहा कि इससे भारत को बड़ा झटका लगेगा। हुसैन ने कहा कि इससे भारतीय जहाजों का किराया बढ़ जाएगा और लंबे वक्त में उसे नुकसान उठाना पड़ेगा। यही नहीं मुशाहिद हुसैन ने कहा कि पानी के मामले में भारत कोई खास ऐक्शन नहीं ले सकता। उसका कोई ऐक्शन तत्काल असर नहीं दिखाएगा। उन्होंने कहा कि यदि पाकिस्तान का पानी भारत रोकेगा तो चीन भी तो भारत का पानी रोक सकता है। सिंधु नदी और ब्रह्मपुत्र नदी का स्रोत तो तिब्बत से ही है, जो चीन के कब्जे में है। बता दें कि सिंधु नदी का उद्गम स्थल, तिब्बत के मानसरोवर के निकट सिन-का-बाब नामक जलधारा को माना जाता है। यह नदी तिब्बत से होते हुए लद्दाख और जम्मू-कश्मीर से होते हुए पाकिस्तान में प्रवेश करती है। यही नहीं मुशाहिद हुसैन ने कहा कि भारत की मीडिया में पाकिस्तान को लेकर नफऱत भरी हुई है। वह चाहता है कि जंग हो और हर घटना के बाद वह 5 मिनट के अंदर पाकिस्तान को दोषी ठहरा देता है। मुशाहिद हुसैन ने कहा कि मुझे नहीं लगता कि भारत की तरफ से कोई सैन्य हमला किया जाएगा। उन्होंने 2019 में जो हमला किया था, वह एक टेस्ट था। उन्होंने तब चेक कर लिया था और हम झुके नहीं थे।

रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने स्वीकार किया कि लश्कर ए तैयबा के अतीत में पाकिस्तान के साथ कुछ लिंक मिले

कराची पहलगाम में आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने एक हैरान करने वाला इकबालिया बयान दिया है. ब्रिटेन स्काई न्यूज के साथ बातचीत के दौरान ख्वाजा आसिफ ने माना है कि पाकिस्तान का आतंकवाद को सपोर्ट करने और टेरर फंडिंग करने का लंबा इतिहास रहा है. स्काई न्यूज के साथ बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि हम लोग 30 साल से इस गंदे काम को अमेरिका के लिए करते आ रहे हैं. भारत के साथ ऑल आउट वार की बात करने वाले ख्वाजा आसिफ ने कहा कि पाकिस्तान में लश्कर ए तैयबा खत्म हो चुका है. ख्वाजा आसिफ ने स्वीकार किया कि लश्कर ए तैयबा का अतीत में पाकिस्तान के साथ कुछ लिंक मिले हैं. हालांकि उन्होंने कहा कि अब ये आतंकी संगठन खत्म हो चुका है. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के साथ लश्कर का लिंक मिलने का ये मतलब नहीं है कि हम इसको मदद करते हैं. जब ख्वाजा आसिफ से पूछा गया है कि लश्कर से निकले एक दहशतगर्दी संगठन ने पहलगाम हमले की जिम्मेदारी ली है. तो उन्होंने कहा कि जब मूल संगठन ही नहीं रहा तो ऑफशूट संगठन कहां से आता है. बता दें कि लश्कर से निकले TRF नाम के आतंकी संगठन ने पहलगाम हमले की जिम्मेदारी ली है, जहां 22 अप्रैल को 26 बेगुनाह सैलानियों की आतंकवादियों ने हत्या कर दी थी. स्काई न्यूज के साथ बातचीत के दौरान जब रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ से पूछा गया कि क्या आप मानते हैं कि पाकिस्तान का इन आतंकवादी संगठनों को समर्थन, प्रशिक्षण और वित्तपोषण देने का एक लंबा इतिहास रहा है? इस प्रश्न का उत्तर देते हुए ख्वाजा आसिफ ने स्वीकार किया कि पाकिस्तान आतंकवादियों को समर्थन देता रहा है. उन्होंने कहा, “हम तीन दशकों से संयुक्त राज्य अमेरिका के लिए यह गंदा काम कर रहे हैं, ब्रिटेन के लिए भी.” ख्वाजा आसिफ ने कहा कि ये हमारी गलती थी और इससे हमें नुकसान हुआ. इसके पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ने ये कहकर अपने मुल्क की गलती को सही साबित करने की कोशिश की कि अगर पाकिस्तान सोवियत यूनियन के खिलाफ अफगानिस्तान में शामिल नहीं होता या फिर 9/11 में साथ नहीं होता तो पाकिस्तान पर कोई उंगली नहीं उठा पाता. ख्वाजा आसिफ ने कहा कि पहलगाम हमले को भारत की साजिश बताया और कहा कि हमारी एजेंसियों का मानना है कि ये काम भारत ही कर रहा है. स्काई न्यूज से बातचीत के दौरान जब उनसे पूछा गया कि पाकिस्तान का आतंकियों को साथ देने का पुराना इतिहास रहा है. इस पर उनका क्या कहना है. इसके जवाब में ख्वाजा आसिफ ने दुनिया के बड़े मुल्कों पर ही दोष मढ़ना शुरू कर दिया. उन्होंने कहा कि बड़े देशों के लिए इस क्षेत्र में जो कुछ भी हो रहा है उसके लिए पाकिस्तान को दोष देना आसान है. जब 80 के दशक में हम उनकी तरफ से सोवियत यूनियन के खिलाफ लड़ रहे थे तो आज के ये सारे आतंकी वाशिंगटन में मेहमाननवाजी के मजे ले रहे थे. ख्वाजा आसिफ ने कहा कि इसके बाद 9/11 अटैक हुआ. एक बार फिर से वही चीज रिपीट की गई. तब हमारी सरकार ने गलती की. तब इन आतंकियों का अमेरिका ने प्रॉक्सी के रूप में इस्तेमाल किया. तब अमेरिका इनको मोहरे के रूप में इस्तेमाल करता था. ये एक ही संगठन के लोग थे.

पहलगाम का बदला शुरू, बंदीपोरा में सेना को बड़ी सफलता लगी हाथ, मार गिराया लश्कर का बड़ा कमांडर

बंदीपोरा पहलगाम आतंकवादी हमले के बाद भारत सरकार के अलावा सेना भी ऐक्शन में है। खबर है कि शुक्रवार को बंदीपोरा में सेना को बड़ी सफलता हाथ लगी है। सेना ने LeT यानी लश्कर-ए-तैयबा के कमांडर अल्ताफ लल्ली को मुठभेड़ में मार गिराया है। खास बात है कि पहलगाम अटैक की जिम्मेदारी भी लश्कर से जुड़े द रेजिस्टेंस फोर्स ने ली थी। बुधवार को आतंकवादियों ने 26 मासूम पर्यटकों को गोलियों से भून दिया था। 22 अप्रैल को हुए नरसंहार के बाद से ही घाटी में भारतीय सेना ने अभियान तेज कर दिया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, शुक्रवार को आतंकवादियों की मौजूदगी की सूचना सेना को मिली थी। इसके बाद जम्मू और कश्मीर पुलिस के साथ मिलकर साझा तलाशी अभियान चलाया गया। लोकेशन का पता लगने के बाद आतंकियों के साथ लंबी मुठभेड़ भी हुई। मुठभेड़ में सुरक्षा बल के दो जवान घायल इससे पहले खबर आई कि जम्मू-कश्मीर के बांदीपोरा जिले में शुक्रवार को हुई मुठभेड़ में आतंकवादियों का एक सहयोगी (ओवरग्राउंड वर्कर) मारा गया. अभियान में सुरक्षा बल के दो जवान घायल हो गए. अधिकारियों ने बताया कि सुरक्षा बल ने आतंकवादियों की मौजूदगी की सूचना मिलने के बाद बांदीपोरा जिले के कुलनार बाजीपोरा इलाके में घेराबंदी एवं तलाश अभियान शुरू किया. वहां छिपे आतंकवादियों ने सुरक्षाकर्मियों पर गोली चला दी जिसके बाद मुठभेड़ शुरू हो गई. आतंकियों पर शुरू हुई कार्रवाई इस बीच, सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी श्रीनगर पहुंचे. यहां उन्हें बांदीपुरा में चल रहे ऑपरेशन के बारे में जानकारी दी गई. वह स्थिति की व्यापक सुरक्षा समीक्षा करेंगे. पहलगाम आतंकी हमले के पीछे संदिग्ध लश्कर-ए-तैयबा के आतंकवादियों का पता लगाने के उद्देश्य से चलाए जा रहे ऑपरेशन के बारे में वे जानकारी लेंगे. एक अन्य घटनाक्रम में, शुक्रवार को सुरक्षा बलों और जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने पहलगाम हमले में शामिल माने जा रहे दो आतंकवादियों के घरों को नष्ट कर दिया. बिजबेहरा में लश्कर आतंकवादी आदिल हुसैन थोकर के घर को आईईडी से उड़ा दिया गया, जबकि त्राल में आसिफ शेख के घर को बुलडोजर से ध्वस्त कर दिया गया.  

बांदीपुरा में आतंकवादियों के साथ गोलीबारी के दौरान दो सुरक्षाकर्मी घायल, इलाके को चारों तरफ से घेरा

श्रीनगर  जम्मू कश्मीर में बांदीपोरा के कुलनार बाजीपोरा इलाके में आज शुक्रवार तड़के सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच मुठभेड़ शुरू हो गई है. सेना के अधिकारियों ने जानकारी दी कि जैसे ही आतंकियों की मौजूदगी की खबर मिली वैसे ही सेना के जवानों ने इलाके को चारों तरफ से घेर लिया और तलाशी अभियान शुरू कर दिया. उन्होंने आगे बताया कि आतंकियों ने सेना पर फायरिंग शुरू कर दी. उसके जवाब में सुरक्षाबलों ने भी गोलीबारी की. जम्मू-कश्मीर पुलिस ने जानकारी देते हुए बताया कि बांदीपुरा में आतंकवादियों के साथ गोलीबारी के दौरान दो सुरक्षाकर्मी घायल हो गए हैं. बता दें, पहलगाम आतंकी हमले के बाद से अब तक का यह चौथा एनकाउंटर है. सुरक्षाबल किसी भी तरह आतंकियों को उनके मंसूबे कामयाब नहीं होने देंगे. इससे पहले उधमपुर के डूडू बसंतगढ़ इलाके में सेना और आतंकियों के बीच मुठभेड़ हुई थी. इस मुठभेड़ में सेना का एक जवान शहीद हो गया था. सेना हर समय गश्त लगा रही है और किसी भी स्थिति से निपटने को तैयार है. सीमा पर सेना के जवान हर हरकत पर नजर रखे हुए हैं. सेना और पुलिस के जवान एलओसी पर पाक सेना को मुंहतोड़ जवाब दे रहे हैं. इससे पहले सेना ने कुछ संदिग्ध लोगों को गिरफ्तार किया है. उनसे जानकारियां जुटाई जा रही हैं. बता दें, मंगलवार को पहलगाम में आतंकी संगठन टीआरएफ ने निहत्थे सैलानियों पर फायरिंग की, जिसमें 26 लोगों की मौत हो गई. इस हादसे को लेकर पूरे देश में रोष व्याप्त है.

Pahalgam Attack में शामिल आतंकियों पर कार्रवाई, एक का घर बम से उड़ाया, दूसरे के मकान पर चला बुलडोजर

पहलगाम पहलगाम हमले में शामिल स्थानीय आतंकी आदिल हुसैन थोकर के अनंतनाग जिले के बिजबेहरा के गोरी इलाके में स्थित घर को सुरक्षा बलों ने बम से उड़ा दिया. आदिल थोकर उर्फ ​​आदिल गुरी के रूप में पहचाने जाने वाले इस आतंकी पर पहलगाम की ​बैसरन घाटी में 22 अप्रैल को हुए हमले की योजना बनाने और उसे अंजाम देने में पाकिस्तानी आतंकवादियों की मदद करने का आरोप है. वहीं, इस हमले में शामिल दूसरे स्थानीय आतंकी आसिफ शेख के त्राल स्थित घर को जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने बुलडोजर से गिरा दिया. सैन्य सूत्रों ने बताया कि स्टील टिप वाली गोलियों, एके-47 राइफलों और बॉडी कैमरा पहने हुए लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) के चार आतंकवादियों के एक समूह ने 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में पर्यटकों के बीच हिंदुओं को निशाना बनाया और उन पर गोलियों की बौछार कर दी. इस आतंकी हमले में 26 लोगों की जान गई थी, जिनमें से अधिकांश पर्यटक थे और भारत के अलग-अलग राज्यों से जम्मू-कश्मीर घूमने पहुंचे थे. आतंकवादियों में दो स्थानीय भी शामिल थे. सूत्रों ने बताया कि दोनों स्थानीय आतंकियों की पहचान बिजबेहरा निवासी आदिल हुसैन थोकर और त्राल निवासी आसिफ शेख के रूप में हुई है. सैन्य सूत्रों के मुताबिक आदिल ने 2018 में अटारी-वाघा बॉर्डर के जरिए वैध तरीके से पाकिस्तान की यात्रा की थी. अपने पाकिस्तान प्रवास के दौरान उसने टेरर कैम्प में ट्रेनिंग पली थी और पिछले साल जम्मू-कश्मीर लौटा था. पहलगाम हमले के कुछ चश्मदीदों ने बताया​ कि कुछ आतंकी आपस में पश्तून भाषा में बातचीत कर रहे थे. सूत्रों ने इस बात पर जोर दिया कि हमले में शामिल सभी आतंकवादी पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के हैं. हालांकि द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) ने भी इस हमले की जिम्मेदारी ली है. उन्होंने कहा कि टीआरएफ लश्कर-ए-तैयबा का एक मुखौटा आतंकी संगठन है, जिसका इस्तेमाल हमले को एक स्वदेशी समूह के काम के रूप में दिखाने के लिए किया गया. आतंकवादी काफी पहले घुसपैठ कर चुके थे यह भी माना जा रहा है कि आतंकवादी काफी पहले ही घुसपैठ करके जम्मू-कश्मीर में आ गए थे और उनकी योजना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 19 अप्रैल की कटरा यात्रा के दौरान हमला करने की थी, जिसे बाद में किसी कारण से उन्होंने रद्द कर दिया था. सूत्रों ने इस बात से भी इनकार किया कि यह हमला किसी खुफिया एजेंसी के अधिकारियों के समूह को निशाना बनाने के लिए किया गया था. उन्होंने कहा कि इंटेलिजेंस ब्यूरो का एक कर्मचारी (बिहार निवासी मनीष रंजन, जो हैदराबाद में तैनात थे) परिवार के साथ छुट्टी मनाने आया था और मारे गए लोगों में वह भी शामिल था. आतंकवादियों ने हिंदुओं को निशाना बनाया बताया जा रहा है कि आतंकवादी बैसरन घाटी के घास के मैदान में आए थे, जिसे मैगी पॉइंट या मिनी स्विटजरलैंड के नाम से जाना जाता है. वे बॉडी कैमरा और एके-47 राइफलों से लैस थे. आतंकवादियों ने पर्यटकों से नाम पूछे और हिंदुओं को निशाना बनाया. हमले वाली जगह से बरामद किए गए कारतूसों में बख्तरबंद भेदी गोलियां भी मिली हैं, जिन्हें स्टील बुलेट भी कहा जाता है. सूत्रों ने बताया कि आतंकवादियों ने करीब 15 मिनट तक फायरिंग की और निर्दोष लोगों का कत्लेआम किया. सैन्य सूत्रों की मानें तो आतंकी समूह ऐसे हमलों को आमतौर पर छह सदस्यों के साथ अंजाम देते हैं, और यह संभव है कि पहलगाम हलमे में एक या दो और आतंकी शामिल हों, जो निगरानी के लिए तैनात हों. सुरक्षा बलों ने आतंकवादियों की तलाश के लिए बड़े पैमाने पर अभियान शुरू किया है. विशेष बलों को भी तैनात किया गया है. पर्यटकों पर आतंकी हमला, 26 की नृशंस हत्या जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में मंगलवार को आतंकियों ने पर्यटकों पर अंधाधुंध गोलियां बरसा कर 26 लोगों की नृशंस हत्या कर दी। सेना की वर्दी में आए दहशतगर्दों ने पहलगाम की बायसरन घाटी में पर्यटकों से पहले उनका धर्म पूछा, परिचय पत्र देखे और फिर हिंदू हो कहकर गोली मार दी। 26 मृतकों में ज्यादातर पर्यटक हैं, जबकि दो विदेशी और दो स्थानीय नागरिक शामिल हैं। टीआरएफ ने ली हमले की जिम्मेदारी हमले में करीब 14 लोग घायल हुए हैं। तीन जुलाई से शुरू होने जा रही श्रीअमरनाथ यात्रा से पहले इस कायराना हमले की जिम्मेदारी पाकिस्तानी आतंकी संगठन लश्कर-ए-ताइबा से जुड़े गुट द रेजिस्टेंस फ्रंट (टीआरएफ) ने ली है। फरवरी, 2019 में पुलवामा में हुए हमले के बाद से जम्मू-कश्मीर में यह सबसे बड़ा आतंकी हमला है। उस हमले में सीआरपीएफ के 47 जवान मारे गए थे।   

योन्सू शहर में मौजूद लकड़ी से बनी 14 मंजिला इमारत, फिनलैंड में लकड़ी पर तकनीक की ‘कारीगरी’

योन्सू (फिनलैंड) जंगल से कैसे मंगल हो सकता है पूरी दुनिया के सामने सबसे खुशहाल देश फिनलैंड गजब का उदाहरण पेश कर रहा है। फिनलैंड में वनों से तकनीक का ऐसा संगम हुआ कि जरूरत की हर वस्तु वनों से ही मिलने लगी। वाटरप्रूफ लकड़ी से लेकर पहने के लिए कपड़े, पेट्रोल-डीजल से लेकर हाथ टूटने पर चढ़ाया जाने वाला प्लास्टर, यहां तक की प्लास्टिक का विकल्प तक तैयार कर लिया गया है। हालही में मुझे यूरोपीय यूनियंस के वनों पर आधारित एक अध्ययन दल में शामिल होने का मौका मिला।   योन्सू शहर में मौजूद लकड़ी से बनी 14 मंजिला इमारत कई दिनों तक मैंने फिनलैंड के नार्थ करेलिया,लैपलैंड और राजधानी हेल्सिंकी में वनों को लेकर हो रहे बेजोड़ कामों को करीब से जाना और समझा। ल्यूक और यूरोपीयन फोरेस्ट इंस्टीट्यूट बड़े-बड़े रिसर्च संस्थानों में वैज्ञानिक दिनरात इसी काम में जुटे हैं कि कैसे लकड़ी और वनों से निकलने वाली एक-एक कण का इस्तेमाल इस ढंग से किया जाए कि हर बदलते रूप में इसका सतत उपयोग हो सके। भारत में यदि इस दिशा में काम हो तो निश्चित तौर से बंजर जमीनों पर वन लगाकर हम भी बड़ी आबादी की जरूरतों को पूरा कर सकते हैं। देखें वनों ने कैसे दिखाई पर्यावरण संरक्षण की राह 1. कपड़े फिनलैंड की एक कंपनी मेट्सा ने पालिस्टर और काटन के विकल्प के रूप में कुर्रा टेक्सटाइल फाइबर बनाया है। इसके कपड़े बिल्कुल वैसे ही होते हैं जैसे हम अभी पहनते हैं। अगले साल तक कमर्शियल स्तर पर इसका उत्पादन होने लगेगा। यह साफ्टवुड पल्प से बनाया जाता है। कंपनी ने अपने द्वारा संरक्षित जंगलों में ही इस पेड़ को ऊंगा लिया है। 2. प्लास्टिक जैसा पैकिंग मटैरियल्स फिनलैंड में परंपरागत पैकेजिंग की जगह जैव-आधारित पैकेजिंग तैयार कर ली है। प्लास्टिंक जैसा ही मटेरियल है जिसे पेप्टिक कहा जाता है इसे ईकामर्स और अन्य चीजों की पैकेजिंग में उपयोग किया जाने लगा है। इसके अलावा सिंगल यूज के लिए प्लास्टिक जैसी प्लेट्स,कटोरी,चम्मच भी वनों से मिली संपदा से ही तैयार हो रहा है। बड़ी बात यह है कि बड़े पैमान पर यह उपयोग में भी लिया जा रहा है। 3. जल-अग्नि रोधी लकड़ी फिनलैंड ने लकड़ी को पानी न सोखने वाला (जलरोधक) बनाने में बड़ी सफलता हासिल की है। अग्निरोधी (फायरप्रूफ) लकड़ी पर शोध भी जारी है। इसके लिए लकड़ी के गत्ते पर एक विशेष दबाव और केमिकल का इस्तेमाल किया जाता है। बड़ी बात यह है कि इस विधि से लकड़ी की अधिकांश किस्मों को कंस्ट्रक्शन में उपयोग किया जा सकता है। 4.लकड़ी से निकलेगा ईंधन का विकल्प कागज बनाने की प्रक्रिया में निकलने वाला एक उप-उत्पाद ‘लिग्निन’ अब जीवाश्म ईंधनों का टिकाऊ विकल्प बनकर उभर रहा है। यह वही प्राकृतिक तत्व है जो लकड़ी के रेशों को आपस में जोड़े रखता है। जब लकड़ी से पल्प (गूदा) तैयार किया जाता है, तो यह लिग्निन एक गाढ़े तरल रूप में अलग हो जाता है, जिसे ‘ब्लैक लिकर’ कहा जाता है। योन्सू सहित पूरे फिनलैंड में इस पर रिसर्च जारी है। अब वैज्ञानिकों और पर्यावरण विशेषज्ञों की नजर इसी ब्लैक लिकर पर है, क्योंकि इसमें जैव ऊर्जा उत्पादन की जबरदस्त क्षमता है। यानी वह ऊर्जा जो पारंपरिक कोयले या पेट्रोलियम की जगह इस्तेमाल हो सके।  

विधवा पेंशन योजना: 25,000 महिलाओं की कटेगी पेंशन, मिली गड़बड़ी

नई दिल्ली गलत तरीके से सरकारी योजना का लाभ लेने वालों पर अब सरकार सख्त है। दिल्ली में पेंशन लेने वालों के दस्तावेज की जांच की गई तो हजारों की संख्या में गड़बड़ी उजागर हुई है। गलत तरीके से सरकारी योजना का लाभ लेने वालों पर अब सरकार सख्त है। दिल्ली में पेंशन लेने वालों के दस्तावेज की जांच की गई तो हजारों की संख्या में गड़बड़ी उजागर हुई है। बता दें कि दिल्ली में पेंशन के नाम पर हो रहे फर्जीवाड़े और गलत तरीके से सरकारी योजनाओं का फायदा उठाने वालों पर सिकंजा0 कसना शुरू कर दिया है। वहीं दिल्ली में 2.3 लाख महिलाओं के रिकॉर्ड की जांच की गई तो 25,000 महिलाओं के नाम ऐसे मिले जो गलत तरीके से पेंशन ले रही थीं। विधवा पेंशन में मिली गड़बड़ी  पेंशन योजना के अंतर्गत सरकार 3.8 लाख महिलाओं को हर महीने 2500 रुपये के हिसाब से पेंशन मिल रही थी। हालांकि 2025-26 में बीजेपी सरकार ने इसे बढ़ाकर 3000 रुपये महीने करने का भी ऐलान कर दिया है। जांच  में पाया गया है कि विधवा पेंशन योजना में गड़बड़ियां चल रही हैं। बता दें कि प्रशासन को लंबे समय से काफी शिकायतें मिल रहीं थीं। इसके बाद सरकार ने पिछले साल नवंबर में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के माध्यम से घर-घर जाकर जांच शुरू कराई तो फर्जीवाड़ा का खुलासा हुआ। 2.28 लाख महिलाओं के दस्तावेजों की हुई जांच दिल्ली में ‘अब तक 2.28 लाख लाभार्थियों की जांच कराई जा चुकी है, जिनमें से 25,000 अपात्र महिलाएं पेंशन का लाभ ले रहीं थीं तो वहीं कुछ महिलाओं ने तलाक के बाद दोबारा शादी कर ली। इसके बावजूद पेंशन का पैसा खाते में लगातार आ रहा था। जबकि कुछ महिलाएं  नौकरी कर रहीं हैं और उन्हें अच्छा तनख्वाह मिल रही है। गलत तरीके से ले रहे पेंशन पर लगी रोक सबसे बड़ी बात अब जो समाने आई है कि अब उन महिलाओं के खाते में पैसा भेजने की प्रक्रिया शुरू हो गई है, जो जांच में एकदम सही पाई गई हैं। अफसरों की मानें तो बाकी लाभार्थियों का सत्यापन भी जल्द करायेंगे और पात्र महिलाओं के खाते में पैसा आना शुरू हो जाएगा। बता दें कि राज्य सरकार महिलाओं की पेंशन पर हर साल 1140 करोड़ रुपये खर्च करती है। दिल्ली में विधवा पेंशन 500 रुपए राजधानी दिल्ली में विधवा पेंशन पहले साल 6288 महिलाओं को 600 रुपये महीने के हिसाब से पेंशन दी गई। यह पेंशन 18 से 59 साल की महिलाओं को दी जाती है। विधवा पेंशन योजना को लेकर दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बजट में बड़ा ऐलान किया था। उन्होंने पेंशन में 500 रुपये की गई है वहीं सरकार ने कहा था कि इसे बढ़ाकर 3000 रुपये महीने किया जाएगा। विधवा पेंशन के लिये करें सरकार के गाइड लाइन का पालन विधवा पेंशन योजना की पात्रता के लिए सरकार ने अपनी गाइड लाइन जारी की है। महिला को कम से कम 5 साल से दिल्ली का निवासी होना चाहिए। यही नहीं महिला के परिवार की वार्षिक आय 1 लाख रुपये से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। एक शर्त यह भी है कि यह पेंशन उन्हीं महिलाओं को मिलेगी, जिन्होंने दोबारा शादी नहीं की है।  

अब जो कदम उठाए गए हैंं, इससे पाकिस्तान को नुकसान होगा, आवाम को सरकार के खिलाफ आना होगा : एमएस बिट्टा

नई दिल्ली जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद ऑल इंडिया एंटी-टेररिस्ट फ्रंट के चेयरमैन एमएस बिट्टा ने पाकिस्तान को करारा जवाब देते हुए कहा कि कश्मीर हमारा है और हमेशा हमारा ही रहेगा। इसी तरह पीओके हमारा था और हमारा ही रहेगा। मीडिया से बातचीत के दौरान एमएस बिट्टा ने पीएम मोदी की अध्यक्षता में हुई सीसीएस की बैठक में लिए गए पांच फैसलों पर कहा कि पीएम मोदी के आने के बाद यह ऐतिहासिक फैसले लिए गए हैं। पठानकोट में जब आतंकी हमले हुए तब से पाकिस्तान से बातचीत बंद है। गोली का जवाब गोली से दिया जा रहा है। अब जो कदम उठाए गए हैंं, इससे पाकिस्तान को नुकसान होगा। पाकिस्तान की आवाम को मजबूरन सरकार के खिलाफ आना होगा। उन्होंने कहा कि भारत सरकार को और कदम उठाने की जरूरत है। ऐसे लोगों की पहचान भी होनी चाहिए जो पाकिस्तान के आईएसआई से जुड़े हुए हैं। मैं भारतीयों से अपील करूंगा कि उन्हें इजरायल की तरह मजबूत बनना पड़ेगा। मौत का कफन बांधना होगा। पीएम मोदी के साथ रहने के लिए हमें तैयार रहना होगा। पीएम मोदी ने अपने कार्यकाल में ऐतिहासिक फैसले लिए हैं। आने वाले लोगों के लिए ऐसा भारत होना चाहिए, जिसमें युवा पीढ़ी अपने पूर्वजों पर गर्व करे। उन्होंने कहा कि देश का एक-एक नागरिक पीएम मोदी से बस एक बार यह कह दें कि वह उनके सभी फैसलों के साथ हैं। मैं समझता हूं कि उसके बाद आप पाकिस्तान का अंजाम देखिए। भविष्य में हमारी आने वाली पीढ़ियों को आतंकवादी घटनाएं फेस नहीं करनी होंगी। उन्होंने कहा कि पहले की सरकारों में और पीएम मोदी की सरकारों में बहुत अंतर है। मोदी सरकार ने आतंकवाद पर कंट्रोल किया है। पहले की सरकार में तो आए दिन आतंकवादी घटनाएं होती थीं। पाकिस्तान के एकजुट वाले बयान पर एमएस बिट्टा ने कहा कि पाकिस्तान किस्मत का मारा है। उनके हर सवाल पर पर करारा जवाब दिया जाएगा। कश्मीर हमारा है और हमारा ही रहेगा। पीओके हमारा था हमारा ही रहेगा। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने फिर से वही कायराना हरकत कर दिया दिया कि जिस भारत से उसका जन्म हुआ उस मां का दामन नोंच लिया। पाकिस्तान पर यह बात शोभा नहीं देती है कि वह एकजुट है। वहां पर खाने के लाले हैं। आए दिन वहां पर दंगे होते रहते हैं और वह एकजुट होने की बात कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऑल पार्टी मीटिंग हो रही है। इसमें सभी पार्टी से राय-विचार किया जाएगा कि कैसे हम पाकिस्तान और आतंकवादियों से लड़ना है। राजनीतिक पार्टियां आएंगी और जाएंगी। लेकिन, यह देश हमेशा रहेगा।

भारतीय वायुसेना ने अभ्यास किया शुरू, पायलट पहाड़ी और जमीनी ठिकानों पर हमले का अभ्यास कर रहे हैं.

नई दिल्ली पहलगाम हमले के बाद भारत पाकिस्तान के खिलाफ कड़े एक्शन ले रहा है. इसी बीच भारतीय वायुसेना ने ‘एक्सरसाइज आक्रमण’ के तहत एक बड़ा सैन्य अभ्यास शुरू किया, जिसमें पहाड़ी और जमीनी लक्ष्यों पर हवाई हमलों का अभ्यास किया गया. युद्धाभ्यास इस वक्त सेंट्रल सेक्टर में चल रहा है. इस अभ्यास में वायुसेना के पायलट पहाड़ी और जमीनी ठिकानों पर हमले का अभ्यास कर रहे हैं. सूत्रों के मुताबिक पूर्वी सेक्टर से वायुसेना के कई उपकरणों को सेंट्र्ल सेक्टर की ओर रवाना किया गया है. जहां इस ड्रिल के तहत लंबी दूरी तक जाकर दुश्मन के ठिकानों पर सटीक बमबारी की जा रही है. पायलट रीयल वॉर सिचुएशन में अभ्यास कर रहे हैं, जिससे उन्हें जंग जैसी परिस्थितियों में काम करने का अनुभव हो सके. इस युद्धाभ्यास अभ्यास का नाम ‘आक्रमण’ (Aakraman) रखा गया है, जो इसके उद्देश्‍य को साफ तौर पर दर्शाता है. यानी हमला करना और हमले की क्षमता को मजबूत करना. इस दौरान वायुसेना के टॉप गन पायलट्स सक्रिय रूप से शामिल हैं और वरिष्ठ स्तर के अधिकारियों द्वारा इसकी निगरानी की जा रही है. पायलट्स को ग्राउंड और माउंटेन टारगेट्स पर प्रिसिशन स्ट्राइक की ट्रेनिंग दी जा रही है.  

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