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पश्चिम बंगाल में गैस सिलेंडर फटने से 7 लोगों की मौत, बम बनाने की अवैध फैक्ट्री चल रही थी

कोलकाता पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले के पाथर प्रतिमा में सोमवार रात एक घर में गैस सिलेंडर में विस्फोट होने से चार बच्चों और दो महिलाओं समेत सात लोगों की मौत हो गई. पुलिस के एक अधिकारी ने यह जानकारी दी. उन्होंने बताया कि पथार प्रतिमा प्रखंड के धोलाघाट गांव में रात करीब नौ बजे हुए विस्फोट में एक महिला झुलस भी गई. सुंदरबन पुलिस जिले के पुलिस अधीक्षक कोटेश्वर राव ने पीटीआई-भाषा से कहा, ‘‘सभी शवों को घर से निकाल लिया गया है. झुलसी महिला को अस्पताल में भर्ती कराया गया है.” हादसे की चपेट में आने वाले सभी लोगों के एक ही परिवार से होने की संभावना है. उन्होंने बताया कि पुलिस को संदेह है कि घर में दो गैस सिलेंडर थे और अंदर रखे पटाखों में आग लगने के बाद आग फैल गई. राव ने कहा, ‘‘स्थिति नियंत्रण में है और बचाव अभियान पूरा हो गया है. इलाके की घेराबंदी कर दी गई है और जांच जारी है.” वहीं, एक अन्य अधिकारी ने बताया कि यह भी पता लगाने के लिए जांच की जाएगी कि क्या पटाखों का निर्माण घर के अंदर ही किया गया था. पुलिस के मुताबिक शुरुआती जांच में 2 गैस सिलेंडर में ब्लास्ट की जानकारी है। वहीं भाजपा विधायक और विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि यहां क्रूड बम बनाने की अवैध फैक्ट्री चल रही थी। शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि सरकार मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और पुलिस प्रशासन घटना को दबाने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि SP कोटेश्वर राव ने कहा कि घर में कोई अवैध पटाखा फैक्ट्री नहीं थी। TMC विधायक समीर कुमार ने कहा कि पीड़ित परिवार का घर से कुछ मीटर की दूरी पर लाइसेंसी पटाखा फैक्ट्री थी। हो सकता है कि घर में पटाखों का कच्चा माल रखा गया हो, जिससे यह हादसा हुआ हो। ब्लास्ट में मरने वालों की पहचान हुई हादसे में मरने वालों की पहचान प्रभावती बनिक (80 वर्ष), अरविंद बनिक (65 वर्ष), स्वांतना बनिक (28 वर्ष), अर्नब बनिक (9 वर्ष), अनुष्का बनिक (6 वर्ष), अस्मिता (6 महीने), अंकित (6 महीने) और सुतापा जाना (मंगलवार सुबह अस्पताल में मौत) के रूप में की गई है। रेस्क्यू काम खत्म, पुलिस जांच में जुटी पुलिस ने कहा- आग लगने की सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड और पुलिस की टीम मौके पर पहुंची। स्थानीय प्रशासन की मदद से राहत और बचाव कार्य शुरू किया गया। अब स्थिति कंट्रोल में है। आग पर काबू पा लिया गया है। रेस्क्यू ऑपरेशन खत्म हो गया है। फिलहाल इलाके की घेराबंद की गई है। जांच जारी है। घर में पटाखे का काम चलता था रिपोर्ट के मुताबिक, हादसे वाले घर में कई सालों से पटाखे बनाने का काम होता था। बनिक परिवार में कुल 11 सदस्य रहते थे। जिनमें से 4 अभी भी लापता हैं। प्रारंभिक जांच से पता चलता है कि आग सिलेंडर में विस्फोट के कारण लगी थी।  

13 लोगों में ब्रेन चिप इम्प्लांट करने की योजना बना रही चीनी कंपनी न्यूसाइबर

 बीजिंग एक चीनी रिसर्च इंस्टीट्यूट और टेक कंपनी ने सोमवार को घोषणा की कि वे इस साल के अंत तक 13 लोगों में अपनी ब्रेन चिप इम्प्लांट करने की योजना बना रहे हैं। यह कदम एलन मस्क की न्यूरालिंक को मरीजों के डेटा संग्रह में पीछे छोड़ सकता है। बीजिंग स्थित चाइनीज इंस्टीट्यूट फॉर ब्रेन रिसर्च (सीआईबीआर) और न्यूसाइबर न्यूरोटेक ने पिछले एक महीने में तीन मरीजों में अपनी सेमी-इनवैसिव वायरलेस ब्रेन चिप ‘बेनाओ नंबर 1’ इम्प्लांट की है। इस साल 10 और मरीजों के लिए तैयारी कर रही है। सीआईबीआर के डायरेक्टर और न्यूसाइबर के मुख्य वैज्ञानिक लुओ मिनमिन ने यह जानकारी दी। 50 लोगों पर क्लिनिकल ट्रायल की योजना न्यूसाइबर चीनी सरकार की कंपनी है। अब इसकी नजर और बड़े ट्रायल पर है। लुओ ने बीजिंग में टेक-केंद्रित झोंगगुआनकुन फोरम के मौके पर पत्रकारों से कहा कि अगले साल मंजूरी मिलने के बाद हम औपचारिक क्लिनिकल ट्रायल शुरू करेंगे, जिसमें करीब 50 मरीज शामिल होंगे। कौन हैं इस दौड़ में? अमेरिकी बीसीआई कंपनी सिंक्रॉन, जिसमें अरबपति जेफ बेजोस और बिल गेट्स जैसे निवेशक शामिल हैं। वर्तमान में मानव ट्रायल के मामले में वैश्विक नेता है। इसके पास कुल 10 मरीज हैं, जिसमें छह अमेरिका में और चार ऑस्ट्रेलिया में हैं। मस्क की न्यूरालिंक के पास अभी तीन मरीज हैं, जिनमें उसकी चिप इम्प्लांट की गई है। वायरलेस ब्रेन चिप्स का विकास न्यूरालिंक पूरी तरह से वायरलेस ब्रेन चिप्स पर काम कर रही है, जो मस्तिष्क के अंदर इम्प्लांट की जाती हैं, जिससे सिग्नल की गुणवत्ता अधिकतम हो। दूसरी ओर, इसके प्रतिद्वंद्वी सेमी-इनवैसिव चिप्स पर ध्यान दे रहे हैं, जो मस्तिष्क की सतह पर लगाई जाती हैं। इससे सिग्नल की गुणवत्ता में कमी आती है, लेकिन मस्तिष्क के ऊतकों को नुकसान और सर्जरी के बाद की जटिलताओं का जोखिम कम होता है। इस महीने चीनी राज्य मीडिया द्वारा जारी वीडियो में दिखाया गया कि पक्षाघात से पीड़ित मरीज ‘बेनाओ नंबर 1’ का उपयोग कर रोबोटिक आर्म से पानी का कप डाल रहे हैं। अपनी सोच को कंप्यूटर स्क्रीन पर ट्रांसमिट कर रहे हैं। लुओ ने कहा “बेनाओ नंबर 1 के सफल मानव ट्रायल की खबर के बाद हमें मदद के लिए अनगिनत अनुरोध मिले हैं।” बंदर पर परीक्षण     पिछले साल सीआईबीआर और न्यूसाइबर ने मानव ट्रायल शुरू नहीं किया था। उस समय उन्होंने घोषणा की थी कि उनकी एक इनवेसिव चिप ‘बेनाओ नंबर 2’ को एक बंदर पर सफलतापूर्वक टेस्ट किया गया, जिसके बाद वह रोबोटिक आर्म को नियंत्रित करने में सक्षम हुआ।     लुओ ने बताया ‘बेनाओ नंबर 2’ का वायरलेस संस्करण है, जो न्यूरालिंक के उत्पाद से मिलता-जुलता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि अगले 12 से 18 महीनों में इसका पहला मानव परीक्षण होगा। भविष्य की योजनाएं     सिंक्रॉन ने हाल ही में एनवीडिया के साथ साझेदारी की घोषणा की, जिसमें चिपमेकर की एआई प्लेटफॉर्म को कंपनी के बीसीआई सिस्टम में एकीकृत किया जाएगा। लुओ ने कहा कि सीआईबीआर और न्यूसाइबर निवेशकों के साथ सक्रिय बातचीत कर रहे हैं। फंड जुटाने के लिए उत्सुक हैं, लेकिन ‘बेनाओ’ के साथ साझेदारी करने वाली कंपनियों को “दूरदर्शी” होना चाहिए।     उन्होंने कहा, “बीसीआई के मामले में निकट भविष्य में बिक्री की संभावना बहुत सीमित है।” लुओ ने यह भी स्पष्ट किया कि ‘बेनाओ’ का चीनी सेना से कोई संबंध नहीं है और यह विभिन्न प्रकार के पक्षाघात से पीड़ित मरीजों की मदद पर केंद्रित है। न्यूसाइबर का स्वामित्व झोंगगुआनकुन डेवलपमेंट कॉरपोरेशन के पास है, जिसने 2023 में 9 बिलियन युआन (1.24 बिलियन डॉलर) से अधिक का राजस्व अर्जित किया।  

2 अप्रैल को Lok Sabha में पेश हो सकता है Waqf Amendment Bill

 नई दिल्ली संसद के बजट सत्र का दूसरा चरण चल रहा है. इस चरण की कार्यवाही के भी चार दिन बाकी हैं और अब सरकार वक्फ बिल लाने की तैयारी में है. वक्फ बिल 2 अप्रैल को संसद में आ सकता है. सूत्रों की मानें तो वक्फ बिल 2 अप्रैल को लोकसभा में पेश किया जा सकता है. सरकार अगर 2 अप्रैल को वक्फ बिल संसद में लाती है तो उसे दोनों सदनों से पारित कराने के लिए इस सत्र में केवल दो ही दिन का समय मिलेगा. वक्फ संशोधन विधेयक संसद के पिछले सत्र में लोकसभा में पेश किया गया था. विपक्षी सदस्यों के भारी हंगामे के बीच पेश हुए विधेयक को संयुक्त संसदीय समिति के पास भेज दिया गया था. वक्फ बिल को लेकर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के सांसद जगदंबिका पाल की अगुवाई में जेपीसी गठित की गई थी. वक्फ संशोधन विधेयक को जेपीसी के पास भेजा गया था बताया जा रहा है कि उसी आधार पर सरकार की ओर से ईद के बाद संभवत: मंगलवार को लोकसभा में वक्फ विधेयक पेश किया जा सकता है। कोशिश यह होगी कि इसी सत्र में कम-से-कम एक सदन से विधेयक पारित हो जाए। अगस्त 2024 में वक्फ संशोधन विधेयक को जेपीसी के पास भेजा गया था। विधेयक को पारित कराने के लिए पर्याप्त संख्या जरूरी बजट सत्र के पहले सप्ताह में जेपीसी ने अपनी रिपोर्ट भी दे दी थी। बताते हैं कि सरकार ने रिपोर्ट देख ली है और उसी अनुसार पुराने विधेयक में कुछ बदलाव की तैयारी हो गई है। विपक्षी दलों को इसका अहसास है कि सरकार के पास किसी विधेयक को पारित कराने के लिए पर्याप्त संख्या है। भाजपा बना रही यह योजना ऐसे में विपक्षी दलों की ओर से भाजपा के सहयोगी दलों-जदयू, तेदेपा और लोकजनशक्ति पार्टी के नेताओं से संपर्क साधने की कोशिश हो रही है और सार्वजनिक बयानों में उन्हें आगाह भी करने की कोशिश हो रही है। भाजपा सूत्रों के अनुसार सहयोगी दलों में किसी तरह का संशय नहीं है। उनके नेता जेपीसी में भी मौजूद थे और उनके सुझावों पर अच्छे से विचार किया गया। फिर भी विधेयक पेश होने से पहले सहयोगी दलों के नेताओं को औपचारिक रूप से इस बारे में बताया जा सकता है। विधेयक पारित कराने मे सरकार कोई जल्दबाजी नहीं करेगी सूत्रों के अनुसार, कोशिश यह होगी कि कम-से-कम एक सदन से विधेयक पारित करा लिया जाए। यह तय है कि इस पर संसद गर्म रहेगी। वैसे यह भी तय है कि विधेयक पारित कराने मे सरकार कोई जल्दबाजी नहीं करेगी और चर्चा के लिए पर्याप्त समय दिया जाएगा। बजट सत्र चार अप्रैल को खत्म हो रहा है। अमित शाह बोले- संसद के इसी सत्र में पेश होगा वक्फ विधेयक गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को स्पष्ट किया कि वक्फ (संशोधन) विधेयक संसद के इसी सत्र में फिर से पेश किया जाएगा। अगस्त 2024 में इस विधेयक को संयुक्त संसदीय समिति के पास भेजा गया था। चार अप्रैल को समाप्त होने वाले मौजूदा बजट सत्र में अब केवल चार कार्यदिवस बचे हैं। विपक्ष मुसलमानों को गुमराह कर रहा है- शाह अमित शाह ने एक निजी चैनल द्वारा आयोजित कार्यक्रम में कहा कि हम इसी सत्र में संसद में वक्फ विधेयक पेश करेंगे। प्रस्तावित कानून से किसी को डरना नहीं चाहिए, क्योंकि नरेन्द्र मोदी सरकार संविधान के दायरे में रहकर वक्फ अधिनियम में संशोधन कर रही है। विपक्ष मुसलमानों को गुमराह कर रहा है। मुसलमानों के किसी भी अधिकार पर अंकुश नहीं लगाया जाएगा। विपक्ष सिर्फ झूठ पर झूठ बोल रहा है। एनडीए के दो घटक दलों जेडीयू और टीडीपी के रुख की भी चर्चा हो रही है लेकिन माना जा रहा है कि इस बिल को लेकर दोनों दलों की चिंताओं का निवारण हो गया है. जेपीसी में भी दोनों दलों के सदस्य थे ही, जेपीसी की रिपोर्ट के आधार पर कैबिनेट की जिस बैठक में संशोधित रिपोर्ट के आधार तैयार नए बिल को मंजूरी दी गई थी, उसमें भी एनडीए के दोनों घटक दलों के कोटे के मंत्री मौजूद थे. राज्यसभा में छोटे दलों के समर्थन की उम्मीद राज्यसभा में एनडीए वक्फ बिल पारित कराने के लिए जरूरी बहुमत के आंकड़े से थोड़ा पीछे है. ऐसे में सरकार को कुछ छोटे दलों के समर्थन की उम्मीद है. राज्यसभा में बहुमत नहीं होने के बावजूद सरकार ने पहले भी कई महत्वपूर्ण विधेयक पारित कराए हैं और इस बार भी नजर फ्लोर मैनेजमेंट पर होगी.

केंद्र सरकार का बड़ा कदम, इन लोगों को मिलेगा 5 लाख की लिमिट वाला क्रेडिट कार्ड

नईदिल्ली नए फाइनेंशियल ईयर में कई ऐसे नियम लागू होंगे, जो बजट में लागू हुए थे। बीते एक फरवरी को बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने किसानों के हित में भी कई बड़े ऐलान किए थे। इनमें से एक ऐलान- किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) का है। किसान क्रेडिट कार्ड से लोन की लिमिट को तीन लाख रुपये से बढ़ाकर पांच लाख रुपये कर दिया गया है। किस तरह की जरूरतों के लिए मददगार बता दें कि किसान क्रेडिट कार्ड एक बैंकिंग उत्पाद है जो किसानों को बीज, उर्वरक और कीटनाशक जैसी कृषि वस्तुएं खरीदने में मददगार है। इसके साथ ही फसल उत्पादन और इससे जुड़ी गतिविधियों से संबंधित नकदी जरूरतों को पूरा करने के लिए समय पर और किफायती क्रेडिट प्रदान करता है। 2019 में केसीसी योजना को पशुपालन, डेयरी और मत्स्य पालन से जुड़ी गतिविधियों की कार्यशील पूंजी आवश्यकताओं को कवर करने के लिए विस्तारित किया गया था। बता दें कि चालू किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) खातों के तहत राशि 31 दिसंबर, 2024 तक 10 लाख करोड़ रुपये को पार कर गई है। इससे 7.72 करोड़ किसानों को फायदा हुआ है। मार्च, 2014 में चालू केसीसी की राशि 4.26 लाख करोड़ रुपये थी। बजट में कटौती बीते एक फरवरी को पेश बजट में सरकार ने कृषि क्षेत्र के बजट में कटौती की थी। केंद्र सरकार ने अगले वित्त वर्ष के लिए कृषि मंत्रालय का बजट आवंटन 2.75 प्रतिशत घटाकर 1.37 लाख करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव रखा है। हालांकि, इस कमी की भरपाई संबद्ध क्षेत्रों के लिए बढ़े हुए आवंटन से हुई है, जिसमें मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी क्षेत्र के लिए आवंटन को 37 प्रतिशत बढ़ाकर 7,544 करोड़ रुपये और खाद्य प्रसंस्करण के लिए आवंटन को 56 प्रतिशत बढ़ाकर 4,364 करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव है। कृषि, संबद्ध क्षेत्रों और खाद्य प्रसंस्करण के लिए कुल बजट आवंटन वित्त वर्ष 2025-26 के लिए 1.45 लाख करोड़ रुपये आंका गया है। नई योजनाओं के लिए आवंटन विस्तृत होने के बाद इसके चालू वर्ष के संशोधित अनुमान 1.47 लाख करोड़ रुपये को पार करने की उम्मीद है।

1 अप्रैल से बदले पैसे और टैक्स से जुड़े ये नियम, 12 लाख तक की इनकम टैक्स फ्री, UPI, GST, क्रेडिट कार्ड रूल्स भी चेंज

नई दिल्ली 1 अप्रैल से नया वित्तीय वर्ष चालू हो रहा है। आज  यानी एक अप्रैल से पैसे और टैक्स से जुड़े कुछ नियमों में बड़ा बदलाव हो जाएगा। इनमें से अधिकतर बदलावों की जानकारी पिछले महीने यानी मार्च 2025 में ही दे दी गई थी। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Finance Minister Nirmala Sitharaman) ने फरवरी में आए बजट के दौरान इनकम टैक्स (Income Tax) से जुड़े कुछ बड़े ऐलान किए थे और अब इन नियमों को 1 अप्रैल 2025 यानी आज  से लागू किया जाएगा। प्रमुख वित्तीय और टैक्स परिवर्तनों में 12 लाख रुपये तक की सालाना आय पर इनकम टैक्स छूट, लंबे समय तक इस्तेमाल न किए गए मोबाइल नंबरों के लिए यूपीआई को डीएक्टिवेट करना और पैन-आधार लिंक नहीं होने पर कोई डिविडेंड (लाभांश) नहीं देना शामिल है। 1 अप्रैल से लागू हो रहे पैसे और टैक्स से जुड़े ये बदलाव… नया इनकम टैक्स नियम: New income tax rule     वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2025 में नए टैक्स रेट और स्लैब का ऐलान किया था, जो 1 अप्रैल से लागू होगा। इसके तहत 12 लाख रुपये तक सालाना इनकम पर कोई टैक्स नहीं लगेगा। इसके अलावा 75,000 रुपये का स्टैंडर्ड डिडक्शन भी वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए होगा। यानी इस तरह न्यू टैक्स रिजीम में 12.75 लाख रुपये तक की आय पर कोई टैक्स नहीं देना होगा। यूपीआई नियमों में बदलाव: Changes in UPI rules नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने UPI को और अधिक सुरक्षित बनाने के लिए नए दिशानिर्देश जारी किए हैं। 1 अप्रैल से लंबे समय से इस्तेमाल नहीं किए गए यूपीआई नंबर निष्क्रिय यानी डीएक्टिवेट हो जाएंगे। अगर आपका मोबाइल नंबर यूपीआई से लिंक है और आप लंबे समय से इसका इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं तो 1 अप्रैल से पहले इसे अपडेट कर लें, नहीं तो आपका यूपीआई अकाउंट एक्सेस नहीं हो पाएगा। क्रेडिट कार्ड रिवार्ड पॉइन्ट में बदलाव: Changes in credit card reward points     कुछ क्रेडिट कार्ड यूजर्स के लिए रिवॉर्ड प्वाइंट के नियम बदलने जा रहे हैं। एसबीआई सिंपलीक्लिक और एयर इंडिया एसबीआई प्लैटिनम क्रेडिट कार्ड धारकों को नए रिवॉर्ड स्ट्रक्चर के तहत बदलाव देखने को मिलेंगे। इसके अलावा, एक्सिस बैंक एयर इंडिया और विस्तारा के विलय के कारण विस्तारा क्रेडिट कार्ड के लाभों को भी रिवाइज करेगा। यूनिफाइड पेंशन स्कीम (यूपीएस): Unified Pension Scheme (UPS) सरकार द्वारा अगस्त 2024 में लॉन्च की गई यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) 1 अप्रैल से लागू होगी। यह पुरानी पेंशन स्कीम की जगह लेगी और लगभग 23 लाख केंद्रीय कर्मचारियों को प्रभावित करेगी। इसके तहत 25 साल या उससे अधिक की सेवा अवधि वाले कर्मचारियों को पिछले 12 महीनों के औसत मूल वेतन का 50% पेंशन के रूप में मिलेगा। जीएसटी नियमों में बदलाव: Changes in GST rules     1 अप्रैल से जीएसटी पोर्टल पर मल्टी-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (MFA) अनिवार्य कर दिया जाएगा, जिससे सुरक्षा और मजबूत होगी। इसके अलावा अब केवल उन्हीं दस्तावेजों पर ई-वे बिल जेनरेट किया जा सकेगा जो 180 दिन से ज्यादा पुराने न हों। होटल रूम टैरिफ और जीएसटी: Hotel room tariff and GST अब, किसी भी वित्तीय वर्ष में प्रतिदिन 7,500 रुपये से ज्यादा कमरे का किराया रखने वाले होटलों को ‘Specified Premises’ माना जाएगा। ऐसे होटलों में ऑफर की जाने वाली रेस्तरां सेवाओं पर 18% जीएसटी लगेगा, लेकिन इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ मिलेगा। बैंक अकाउंट में न्यूनतम बैलेंस का नियम: Bank account minimum balance rules     एसबीआई, पंजाब नेशनल बैंक, केनरा बैंक और अन्य बड़े बैंकों ने न्यूनतम बैलेंस की जरूरतों को अपडेट किया है। अगर आपके बैंक खाते में मिनिमम बैलेंस नहीं है तो 1 अप्रैल से आपको जुर्माना भरना पड़ सकता है। पैन-आधार लिंक नहीं तो डिविडेंड भी नहीं: Dividend will not be received if PAN-Aadhaar is not linked अगर आपने 31 मार्च तक अपने पैन और आधार को लिंक नहीं किया तो 1 अप्रैल से आपको डिविडेंड इनकम नहीं मिलेगी। इसके अलावा टीडीएस भी बढ़ जाएगा और फॉर्म 26AS में कोई क्रेडिट नहीं मिलेगा। म्यूचुअल फंड और डीमैट केवाईसी अनिवार्य: Mutual fund and demat KYC mandatory 1 अप्रैल, 2025 से म्यूचुअल फंड और डीमैट खातों के लिए केवाईसी अनिवार्य हो जाएगी। इसके तहत सभी नामांकित विवरणों (nominee details) को फिर से सत्यापित किया जाएगा। चेक क्लियरेंस के लिए पॉजिटिव पे सिस्टम बैंक फ्रॉड रोकने के लिए पॉजिटिव पे सिस्टम लागू किया जाएगा। अब 50,000 रुपये से अधिक के चेक भुगतान के लिए खाताधारक को चेक का विवरण इलेक्ट्रॉनिक रूप से बैंक को देना होगा, जिसे बैंक भुगतान से पहले सत्यापित करेगा। प्रायोरिटी सेक्टर लेंडिंग में बदलाव: Changes in Priority Sector Lending 1 अप्रैल से होम लोन लेने वाले लोग प्रायोरिटी सेक्टर लोन के तहत बड़े शहरों में 50 लाख रुपये, मीडियम-साइज वाले शहरों में 45 लाख रुपये और छोटे शहरों में 35 लाख रुपये तक का लोन ले सकेंगे। टीडीएस लिमिट में बढ़ोतरी: Increase in TDS limit     वरिष्ठ नागरिकों के लिए ब्याज आय पर टीडीएस की सीमा बढ़ाकर 1 लाख रुपये कर दी गई है। टीसीएस नियमों में बदलाव: Changes in TCS rules टीसीएस (टैक्स कलेक्शन एट सोर्स) की नई दरें 1 अप्रैल, 2025 से लागू होंगी। अब विदेश यात्रा, निवेश और अन्य बड़े लेनदेन पर टीसीएस की सीमा 7 लाख रुपये से बढ़ाकर 10 लाख रुपये कर दी गई है। गौर करने वाली बात है कि इन सभी बदलावों का सीधा असर आपकी जेब और वित्तीय लेनदेन पर पड़ेगा। इसलिए जरूरी वित्तीय कामों को 1 अप्रैल से पहले पूरा कर लें ताकि कोई परेशानी न हो।  

आ चुकी है दुनिया में मंदी…, रिच डैड पुअर डैड के लेखक रॉबर्ट कियोसाकी ने दी चेतावनी

नई दिल्‍ली. जाने-माने लेखक रॉबर्ट कियोसाकी ने एक बार फिर दुनिया में आर्थिक मंदी की चेतावनी दी है। कियोसाकी ‘रिच डैड पुअर डैड’ किताब के लेखक हैं। उन्‍होंने कहा है कि दुनिया पहले से ही मंदी में है। उन्होंने यह बात सोशल मीडिया प्‍लेटफॉर्म ‘एक्‍स’ पर एक पोस्ट में कही। कियोसाकी 2012 में ‘रिच डैड्स प्रोफेसी’ लिखने के बाद से ही लोगों को चेतावनी दे रहे हैं। उन्होंने लोगों को सीखने और बदलाव करने के लिए प्रोत्साहित किया। साथ ही वित्तीय सलाहकारों से सावधान रहने को कहा। क‍ियोसाकी ने क‍िया लोगों का आगाह रॉबर्ट कियोसाकी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्‍स पर लिखा, ‘क्या दुनिया मंदी में है? मेरा जवाब है, हां।’ उन्होंने कहा कि वह 2012 से ही लोगों को आगाह करने की कोशिश कर रहे हैं। कियोसाकी ने लोगों से पूछा, ‘क्या सीखने और बदलाव करने में बहुत देर हो चुकी है?’ उन्होंने खुद ही जवाब दिया, ‘नहीं। आपके पास समय है और समय हमेशा आपके लिए एक संपत्ति है।’ कियोसाकी ने FOMO यानी ‘फियर ऑफ मिसिंग आउट’ (किसी चीज से छूट जाने का डर) की तुलना FOMM यानी ‘फियर ऑफ मेकिंग मिस्टेक्स’ (गलती करने का डर) से की। उन्होंने कहा कि स्कूल FOMM का डर पैदा करते हैं। उन्होंने लोगों को यूट्यूब जैसे प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करके खुद को शिक्षित करने के लिए प्रोत्साहित किया। साथ ही, उन्होंने भ्रामक वित्तीय सलाहकारों से सावधान रहने की चेतावनी दी। उन्होंने कहा, ‘सबसे अच्छी और सबसे खराब शिक्षा मुफ्त है।’ कियोसाकी ने आगे कहा, ‘तथ्य यह है कि दुनिया मंदी में है। तथ्य यह है कि महंगाई बढ़ रही है। बेरोजगारी भी बढ़ रही है।’ उन्होंने पाठकों से सोचने के लिए कहा, ‘क्या यह मंदी आपको अमीर बनाएगी या गरीब? यह चुनाव आपका है और आपकी शिक्षा का चुनाव मुफ्त हो सकता है।’ उन्होंने अंत में कहा, ‘ध्यान रखें और इस मंदी को अपने जीवन की सबसे अच्छी चीज बनाएं। यह शक्ति केवल आपके पास है।’ कियोसाकी के इन विचारों से दुनिया भर में मंदी को लेकर चिंता और बढ़ गई है। मुश्‍क‍िल दौर से गुजर रही है दुनिया की अर्थव्‍यवस्‍था जे.पी. मॉर्गन के मुख्य वैश्विक अर्थशास्त्री ब्रूस कासमैन ने अमेरिका में मंदी की आशंका को बढ़ा दिया है। उन्होंने कहा कि ‘व्यवसाय-विरोधी नीतियां’ इस खतरे को और बढ़ा सकती हैं। कासमैन ने यह भी चेतावनी दी कि अगर शासन पर भरोसा कम होता रहा तो अमेरिका में निवेश पर बुरा असर पड़ सकता है। गोल्डमैन सैक्स और मॉर्गन स्टेनली दोनों ने ही 2025 के लिए अमेरिका के GDP विकास के अनुमान को कम कर दिया है। उनका अनुमान है कि यह 1.5% से 1.7% के बीच रहेगा। इसका मतलब है कि अमेरिका की अर्थव्यवस्था धीमी गति से बढ़ेगी। कियोसाकी की चेतावनी और अर्थशास्त्रियों के बदलते अनुमानों से पता चलता है कि दुनिया की अर्थव्यवस्था मुश्किल दौर से गुजर रही है। लोगों को अपनी वित्तीय स्थिति को लेकर सावधान रहने और सोच-समझकर फैसले लेने की जरूरत है। कियोसाकी का कहना है कि सही शिक्षा और तैयारी से लोग इस मंदी का सामना कर सकते हैं और इससे लाभ भी उठा सकते हैं।

जेलेंस्की के खिलाफ रूसी राष्ट्रपति के बयान पर भड़के ट्रंप, मॉस्को को दे डाली बड़ी धमकी

वॉशिंगटन यूक्रेन के राष्ट्र्पति वोलोदिमिर जेलेंस्की को लेकर पुतिन की टिप्पणी पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भड़क गए हैं। ट्रंप ने रविवार को कहा कि वह जेलेंस्की की आलोचना से बहुत नाराज हैं। इसके साथ ही ट्रंप ने धमकी दी कि अगर रूसी राष्ट्रपति युद्ध विराम के लिए सहमत नहीं होते हैं तो वे मॉस्को के तेल निर्यात पर टैरिफ लगा देंगे। एनबीसी न्यूज के साथ फोन पर दिए एक इंटरव्यू में ट्रंप ने 50% टैरिफ लगाने की बात कही, जो रूसी तेल खरीदने वाले देशों को प्रभावित करेगा। उन्होंने यूक्रेन में जंग न रोकने के लिए रूस को जिम्मेदार ठहराने की बात कही। उन्होंने कहा, ‘अगर रूस और मैं यूक्रेन में खून-खराबे को रोकने के लिए कोई समझौता करने में असमर्थ हैं और अगर मुझे लगता है कि यह रूस की गलती थी, जो कि शायद न हो- तो मैं रूस से आने वाले सभी तेल पर सेकेंडरी टैरिफ लगाने जा रहा हूं।’ पुतिन को लेकर ट्रंप की टिप्पणी रूसी नेता को लेकर उनके पिछले रुख से अलग है। जेलेंस्की को हटाने की मांग पर भड़के ट्रंप पुतिन को लेकर ट्रंप का गुस्सा तब आया, जब रूसी राष्ट्रपति ने यूक्रेन में जेलेंस्की को हटाकर एक नई सरकार बनाने की मांग की। एनबीसी के साथ फोन पर ट्रंप ने कहा, ‘यह सही जगह पर नहीं जा रहा है।’ इसके पहले ट्रंप ने जेलेंस्की को लेकर निराशा जाहिर की थी और उन्हें तानाशाह तक कह दिया था। लेकिन अब वह रूस के खिलाफ सीधे बोल रहे हैं। ट्रंप ने कहा, मैं बहुत गुस्सा था, नाराज था, जब पुतिन ने जेलेंस्की की विश्वसनीयता पर सवाल उठाना शुरू कर दिया, क्योंकि यह सही जगह पर नहीं जा रहा था, आप समझते हैं?’ रूस की अर्थव्यवस्था को धमकी अमेरिकी राष्ट्रपति ने रूस की अर्थव्यवस्था को झटका देने की चेतावनी दी और कहा कि सभी रूस तेल पर टैरिफ 25 फीसदी से बढ़ाकर 50 फीसदी किया जा सकता है। इसका मतलब यह होगा कि अगर आप रूस से तेल खरीदते हैं तो अमेरिका में व्यापार नहीं कर सकते। हालांकि, ट्रंप ने दोनों नेताओं के बीच सुलह का भी संकेत दिया और कहा, ‘पुतिन जानते हैं कि मैं गुस्से में हूं, लेकिन गुस्सा जल्दी खत्म हो जाता है, अगर वह सही काम करते हैं।’ क्या कह रहे विश्लेषक अब ऐसे में सवाल उठता है कि अगर रूस ने यूक्रेन युद्ध विराम समझौते पर अपनी सहमति नहीं दी और ट्रंप ने रूसी तेल निर्यात पर 25 से 50 फीसदी की टैरिफ लगाया तो किन-किन देशों को इसका नुकसान उठाना पड़ सकता है। इसके जवाब में विश्लेषकों और अधिकारियों का कहना है कि अगर डोनाल्ड ट्रम्प रूसी तेल खरीदने वाले देशों के खिलाफ 25-50% टैरिफ लगाते हैं, तो चीन और भारत इससे सबसे ज्यादा प्रभावित हो सकते हैं। दरअसल, 2022 में यूक्रेन और रूस के बीच युद्ध छिड़ने के बाद अमेरिका समेत तमाम पश्चिमी देशों ने रूस पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगा दिए थे। उसके तेल खरीदने पर भी बैन लगा दिया गया था लेकिन भारत और चीन के अलावा कुछ और देशों ने रूस से तेल खरीदना चालू रखा। ऐसे में अमेरिका द्वारा सीधे खरीददारों पर सेकंडरी टैरिफ लगाने से न केवल पुतिन की तेल राजस्व तक पहुंच कम हो सकती है बल्कि जो देश इसका उल्लंघन करेंगे उन्हें भी आर्थिक बोझ का सामना करना पड़ सकता है। रूस के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों में शामिल न होने के बावजूद, चीन इसका उल्लंघन करने के बारे में सावधान रहा है, क्योंकि उसे सेकंडरी टैरिफ का डर सताता रहा है। उदाहरण के लिए, कुछ चीनी बैंकों ने अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग प्रणाली से प्रतिबंधित होने के डर से रूसी कंपनियों के साथ लेन-देन कम कर दिया है। चीन को भारत ने छोड़ा पीछे मल्टीनेशनल इन्वेस्टमेंट बैंक और वित्तीय सेवा उपलब्ध कराने वाली कंपनी UBS के विश्लेषक जियोवानी स्टानोवो ने द गार्डियन से कहा, “जैसा कि ट्रम्प ने वेनेजुएला के तेल के मामले में किया है, वैसा ही रूस के मामले में खरीदारों को लक्षित करने के लिए कर सकते हैं। इस कदम से चीन और भारत प्रभावित हो सकता है। हालांकि, हमें यह देखना होगा कि आने वाले दिनों में क्या घोषणा होती है। बता दें कि भारत चीन को पीछे छोड़ते हुए समुद्री रूसी कच्चे तेल का सबसे बड़ा खरीदार बन गया है। भारत-चीन के अलावा और किन देशों पर असर 2024 में भारत के कुल कच्चे तेल के आयात का लगभग 35% रूसी कच्चा तेल था। यूक्रेन युद्ध की शुरुआत से ही भारत रूसी तेल खरीदता रहा है लेकिन अब अमेरिकी टैरिफ की चिंता होने लगी है। भारत और चीन के अलावा तुर्किए भी रूसी तेल का बड़ा खरीदार है। इसके अलावा बुल्गारिया,इंडोनेशिया, दक्षिण कोरिया, स्लोवाकिया, हंगरी भी रूसी तेल खरीदने में आगे रहा है। पाकिस्तान ने भी रूस से कच्चा तेल खरीदने के लिए डील किया है।

मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा है कि कुछ लोग वक्फ बिल को लेकर गुमराह कर रहे हैं

नई दिल्ली संसद के मौजूदा बजट सत्र में वक्फ बिल संसोधन पेश होना है। माना जा रहा है कि केंद्र सरकार 2 अप्रैल को इसे लोकसभा में पेश कर सकती है। इससे पहले केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री और अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने वक्फ बिल का विरोध करने वालों को आड़े हाथों लिया है और कहा है कि इस बिल का विरोध वही लोग कर रहे हैं, जो वक्फ की करोड़ों की संपत्तियों पर कब्जा कर बैठे हुए हैं। ANI से बातचीत में रिजिजू ने कहा कि इसका इसका विरोध करने वाले लोग शक्तिशाली हैं और वे भोले-भाले लोगों को गुमराह कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि विधेयक की आलोचना करना हर किसी का अधिकार है, लेकिन उस आलोचना का कुछ सार होना चाहिए। रिजिजू ने कहा, “वे कौन लोग हैं जो इस विधेयक का विरोध कर रहे हैं? कुछ ताकतवर लोग हैं जिन्होंने वक्फ संपत्तियों पर अतिक्रमण कर रखा है। वे लोगों को गुमराह कर रहे हैं। वे कह रहे हैं कि विधेयक असंवैधानिक है। आलोचना करना हर किसी का अधिकार है, लेकिन आलोचना में कुछ सार होना चाहिए।” केरल कैथोलिक बिशप काउंसिल (केसीबीसी) द्वारा वक्फ संशोधन विधेयक को समर्थन देने और राज्य के सांसदों से भी ऐसा करने का अनुरोध करने वाले पत्र के बारे में रिजिजू ने कहा कि धार्मिक आधार पर कई संगठन केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित इस विधेयक का समर्थन कर रहे हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि वक्फ संशोधन विधेयक गरीब मुसलमानों, बच्चों और महिलाओं के हित में है। उन्होंने कहा कि यह वक्फ बोर्ड के तहत संपत्तियों के प्रबंधन के मामले में जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करेगा। केरल के बिशप कर रहे वक्फ का समर्थन रिजिजू ने कहा, “केरल कैथोलिक बिशप काउंसिल द्वारा भेजा गया अनुरोध पत्र सभी के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। विभिन्न समुदायों के कई संगठन वक्फ (संशोधन) विधेयक का समर्थन कर रहे हैं। हमें यह समझना चाहिए कि विधेयक मूल रूप से गरीब मुसलमानों, बच्चों और महिलाओं के हित में है और यह भी सुनिश्चित करता है कि वक्फ की संपत्तियों का प्रबंधन पारदर्शी और जवाबदेह तरीके से हो।सरकार आम लोगों का कल्याण सुनिश्चित करना चाहता है।” केरल भाजपा अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने सोमवार को कहा कि केरल कैथोलिक बिशप काउंसिल (केसीबीसी) सहित कई ईसाई संगठन केंद्र द्वारा प्रस्तावित वक्फ संशोधन विधेयक का समर्थन कर रहे हैं, क्योंकि मुनंबम उपनगर में गरीब परिवारों ने दावा किया है कि वे वक्फ बोर्ड द्वारा अपनी जमीन जब्त किए जाने के खतरे में जी रहे हैं। उन्होंने राज्य के सांसदों से “तुष्टिकरण की राजनीति” में शामिल होने के बजाय लोगों की सहायता करने का आग्रह किया। सैकड़ों गरीबों को सता रहा वक्फ का खौफ चंद्रशेखर ने भी कहा, “केरल कैथोलिक बिशप काउंसिल और कई अन्य ईसाई संगठन केरल के सांसदों से वक्फ (संशोधन) विधेयक पर अपना रुख अपनाने और इसके पक्ष में मतदान करने के लिए कह रहे हैं क्योंकि केरल में, कोचीन के पास मुनंबम नामक स्थान पर, सैकड़ों गरीब परिवारों को वक्फ द्वारा उनकी जमीन जब्त किए जाने का खतरा है।” भूमि जब्त किए जाने के खतरे के खिलाफ वर्षों से किए जा रहे आंदोलन पर प्रकाश डालते हुए, भाजपा नेता ने केरल के सांसदों से “तुष्टिकरण की राजनीति” में शामिल होने के बजाय मुसीबत में फंसे लोगों की सहायता करने के अपने कर्तव्यों को पूरा करने का आग्रह किया। जनहित में फैसला लें कांग्रेस सांसद: चंद्रशेखर उन्होंने कहा, “यह एक ऐसा मुद्दा है जिसके लिए वे महीनों और सालों से आंदोलन कर रहे हैं और अब समय आ गया है कि केरल के सांसद अपना कर्तव्य निभाएं, जो कि मुसीबत में फंसे लोगों की मदद करना, लोगों की मदद करना और उनकी समस्याओं का समाधान करना है, न कि केवल तुष्टीकरण की राजनीति करना। आज एक महत्वपूर्ण दिन है। कांग्रेस सांसदों को एक स्टैंड लेना चाहिए और फैसला लेना चाहिए। वक्फ (संशोधन) विधेयक किसी समुदाय के खिलाफ नहीं है। यह भारत के संवैधानिक मूल्यों के साथ कानून को जोड़ने के बारे में है।”

भूकंप के बाद बदल गई म्यांमार में तस्वीर, मरने वालो की सख्यां बढ़कर 1700 हुई

नेपीता  म्यांमार में आए 7.7 तीव्रता के विनाशकारी भूकंप के बाद बचाव कार्य जारी हैं. इस भूकंप में कम से कम 1,700 लोगों की मौत हो गई है जबकि हजारों की संख्या में लोग घायल हो गए हैं. साथ ही बड़े पैमाने पर ईमारतों को नुकसान पहुंचा है. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार भूकंप का असर बैंकॉक और चीनी प्रांतों तक महसूस किया गया. कई लोग घायल हो गए या मलबे में फंस गए. देश की सैन्य सरकार के अनुसार कम से कम 1700 लोग मारे गए हैं और लगभग 3,400 घायल हुए हैं. वहीं करीब 300 अन्य लापता हैं. संयुक्त राज्य भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (यूएसजीएस) ने अनुमान लगाया है कि मरने वालों की संख्या 10,000 से अधिक हो सकती है. भूकंप का केंद्र म्यांमार के मध्य सागाइंग क्षेत्र में स्थित था, जो ऐतिहासिक शहर मांडले के पास है. 1.5 मिलियन से अधिक लोगों का घर वाला यह क्षेत्र बुरी तरह प्रभावित हुआ है जहां कई इमारतें, पुल और मंदिर नष्ट हो गए हैं या क्षतिग्रस्त हो गए हैं. बैंकॉक में भूकंप का प्रभाव विनाशकारी था, जिसमें कम से कम 18 लोग मारे गए तथा दर्जनों लोग एक ढही हुई ऊंची इमारत के मलबे में फंस गए. निर्माणाधीन यह इमारत कुछ ही मिनटों में ढह गई, जिसमें 11 लोगों की जान चली गई. राजधानी में अन्य जगहों पर सात और मौतें होने की खबर है जबकि अधिकारी आपदा से निपटने में जुटे हैं. खोज और बचाव अभियान युद्धस्तर पर जारी है. लगभग 80 लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं. लापता लोगों के परिवार ढही हुई इमारत स्थल पर इकट्ठा हो रहे हैं, और अपने प्रियजनों की खबर का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं. म्यांमार में आया भूकंप देश में एक सदी से भी अधिक समय में आया सबसे शक्तिशाली भूकंप था. इसकी तीव्रता 7.7 थी. इसके बाद कई झटके आए, जिनमें 6.7 तीव्रता का भूकंप भी शामिल था, जो पूरे सप्ताहांत तक क्षेत्र में थर्राता रहा. बचाव दल प्रभावित लोगों तक पहुंचने के लिए समय की कमी से जूझ रहे हैं. खास तौर पर उन इलाकों में जहां इरावदी नदी पर एक प्रमुख पुल के ढह जाने से संपर्क टूट गया है. कई लोगों के अभी भी लापता होने के कारण विशेषज्ञों को डर है कि मृतकों की सही संख्या सामने आने में कई सप्ताह लग सकते हैं. इस बीच सैन्य शासन द्वारा सहायता के लिए अपील किए जाने के बाद विदेशी सहायता और अंतरराष्ट्रीय बचाव दल म्यांमार पहुंचना शुरू हो गए. शुक्रवार का भूकंप देश में वर्षों में आई सबसे घातक प्राकृतिक आपदा थी. यह ऐसे समय में आया है जब म्यांमार 2021 से चल रहे गृहयुद्ध से जूझ रहा है. इससे संचार नेटवर्क क्षतिग्रस्त हो गया. स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे को जबर्दस्त नुकसान पहुंचा है. लाखों लोगों को पर्याप्त भोजन नहीं मिल रहा है. वहीं बड़ी संख्या में लोग बेघर हो गए. इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ रेड क्रॉस एंड रेड क्रीसेंट सोसाइटीज (आईएफआरसी) के एक अधिकारी के अनुसार देश में जो तबाही मची है. एशिया में एक सदी से भी अधिक समय में ऐसी आपपा नहीं देखी गई है. एक रिपोर्ट में कहा गया है कि भूकंप का प्रभाव अगले कुछ सप्ताहों तक महसूस किया जाएगा. साथ ही मरने वालों और घायलों की संख्या में वृद्धि होने की संभावना है, क्योंकि कुछ लोग अभी भी ढही हुई इमारतों के नीचे फंसे हुए हैं. मांडले में दहशत और निराशा मांडले के अधिकांश निवासियों ने शुक्रवार रात सड़कों पर गुजारी, क्योंकि भूकंप के बाद घर में रहना असुरक्षित हो गया था. लोग लगातार आफ्टरशॉक्स से भयभीत थे, जिससे अस्थिर इमारतें कभी भी गिरने की संभावना थी. रविवार को भी 5.1 तीव्रता का एक और झटका आया, जिससे राहत और बचाव कार्यों में लगे लोग भी दहशत में आ गए. सैटेलाइट इमेज और बुनियादी ढांचे की तबाही म्यांमार की सैटेलाइट इमेज से पता चलता है कि भूकंप ने हवाई अड्डों, राजमार्गों और पुलों सहित कई महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त कर दिया है, जिससे राहत और बचाव कार्यों में बाधाएं उत्पन्न हो रही हैं. विशेष रूप से नेपीताव अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा भूकंप से बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया, जिसके कारण भारत और चीन से आने वाले बचाव दलों को सीधे मांडले और अन्य प्रभावित शहरों में नहीं पहुंचाया जा सका. इनवा पुल भी ढह गया, जिससे इरावदी नदी के पार आने-जाने में मुश्किलें पैदा हो गईं. राहत और बचाव कार्यों में बाधाएं राहत प्रयासों को बदहाल सड़कों, गिरे हुए पुलों और संचार व्यवस्था में गड़बड़ी के कारण कठिनाई हो रही है. साथ ही, देश में चल रहे गृहयुद्ध ने भी राहत कार्यों को प्रभावित किया है. स्थानीय निवासी बिना किसी भारी उपकरण के 41 डिग्री सेल्सियस तापमान में मलबा हटाने का प्रयास कर रहे हैं. मरने वालों की संख्या बढ़ने की आशंका म्यांमार की सत्तारूढ़ जुंटा ने रविवार को कहा कि अब तक 1,700 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 3,400 से अधिक घायल हुए हैं और 300 लोग लापता हैं. हालांकि, आपदा का सही पैमाना अभी तक स्पष्ट नहीं है. अनुमान है कि मरने वालों की संख्या में और वृद्धि हो सकती है. जुंटा प्रमुख मिन आंग ह्लाइंग ने अंतरराष्ट्रीय सहायता के लिए अपील की है, जो आमतौर पर म्यांमार में दुर्लभ है. इससे पहले की सैन्य सरकारों ने बड़ी प्राकृतिक आपदाओं के बाद भी विदेशी सहायता को अस्वीकार किया था. थाईलैंड में भी मची तबाही भूकंप का असर थाईलैंड तक पहुंचा, जहां बैंकॉक में शुक्रवार को एक 30 मंजिला निर्माणाधीन इमारत ढह गई. रविवार तक बचाव दल ने मलबे से 17 लोगों के शव बरामद किए, जबकि 83 लोग अभी भी लापता हैं. 32 लोग घायल हुए हैं, जिनमें से कई की हालत गंभीर बताई जा रही है.

1 अप्रैल से इनएक्टिव नंबरों पर नहीं चलेगा UPI, FasTag में भी बदल जाएंगे नियम

नई दिल्ली 1 अप्रैल से नियमों में बदलाव होने जा रहा है। इसमें UPI से लेकर फास्टैग तक के नियमों में बदलाव देखने को मिल सकते हैं। आज हम आपको ऐसे ही नियमों के बारे में बताने जा रहे हैं। इसकी मदद से आपके लिए ये समझना आसान हो जाएगा कि कौन-से नंबर पर इसका सीधा असर पड़ने वाला है। साथ ही फास्टैग के नियम में ऐसा क्या बदलने वाला है। आज इसकी जानकारी भी देने वाले हैं। इनकम टैक्स के नियमों में भी कुछ बदलाव देखने को मिल सकता है। यही वजह है कि आपको इसके बारे में आज ही जान लेना चाहिए। नियमों के बारे में पूरी जानकारी लेने के बाद आप पहले ही काम निपटा सकते हैं। साथ ही इसका असर चुनिंदा यूजर्स पर पड़ने वाला है। ऐसा हम इसलिए कह रहे हैं क्योंकि इसकी वजह से सभी यूजर्स प्रभावित नहीं होंगे। साथ ही UPI ने इसे ध्यान में रखते हुए भी ऐसा किया है। तो चलिये आपको भी इसके बारे में बताते हैं- 1 अप्रैल से इन नंबरों पर नहीं चलेगी UPI Paytm, PhonePe, Google Pay जैसी ऐप्स का इस्तेमाल करने वाले यूजर्स पर सीधा असर पड़ने वाला है। खासकर ऐसे यूजर्स अब यूपीआई ऐप का इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे, जिनका नंबर इनएक्टिव हो चुका है। इनएक्टिव ऐसे नंबर होते हैं, जिसे वैलिडिटी खत्म होने के बाद रिचार्ज नहीं करवाया जाता है। इनएक्टिव होने के बाद नंबर की यूपीआई पर रोक लगा दी जाएगी। साथ ही यूपीआई आइडी को भी कंपनी की तरफ से हटाना शुरू कर दिया गया है। अगर यूजर्स फिर से ऐप पर यूपीआई का इस्तेमाल करना चाहते हैं, तो उन्हें नंबर एक्टिवेट करवाना होगा। 1 अप्रैल से लागू होने के साथ ही NPCI की तरफ से नियम को सख्ती से लागू किया जाएगा। FasTag होगा अनिवार्य महाराष्ट्र और मुंबई में रहने वाले लोगों के लिए फास्टैग अनिवार्य हो जाएगा। यानी आप महाराष्ट्र में वाहन चलाते हैं तो फास्टैग होना जरूरी होगा। ऐसा नहीं होने पर वाहन को एंट्री नहीं दी जाएगी। अगर आप बिना फास्टैग वाहन का इस्तेमाल करते हैं तो इसके लिए आपको ज्यादा टोल टैक्स देना होगा। दरअसल सरकार की तरफ से टोल प्लाजा पर लगने वाली लंबी लाइनों को कम करने के लिए ऐसा फैसला लिया गया था। ये रोल आउट होने के बाद महाराष्ट्र की ज्यादातर गाड़ियों पर फास्टैग नजर आएगा। बैंकिंग पर भी पड़ेगा असर 1 अप्रैल से मिनिमम बैलेंस को अनिवार्य कर दिया गया है। खास सेविंग्स अकाउंट वाले यूजर्स पर इसका सीधा असर पड़ेगा। अगर किसी यूजर के खाते में बैलेंस मिनिमम से कम होगा तो उस पर पैनल्टी लगाई जाएगी। 1 अप्रैल से इस नियम का सख्ती से पालन होगा। मिनिमम बैलेंस के लिए बता दें कि बैंक और खाते के आधार पर ये अलग-अलग हो सकता है। कुछ सरकारी बैंक में मिनिमम बैलेंस 3 हजार रुपए होता है जबकि कुछ बैंक खातों में मिनिमम बैलेंस 10 हजार रुपए भी रखा जाता है। लेकिन अब ग्राहकों को इसे मेंटेन रखना अनिवार्य कर दिया गया है।

अब कटरा से श्रीनगर की यात्रा होगी मात्र 3 घंटे में

जम्मू USBRL परियोजना के पश्चात अब कई सालों का इंतजार खत्म हो जाएगा। जम्मू से श्रीनगर के बीच वंदे भारत चलने से कई घंटों की समय बचत होगी। कटरा से श्रीनगर कि यात्रा अब केवल 3 घण्टे में होगी। अभी सड़क से यात्रा में 6 से 7 घंटे लगते है।  फिलहाल वंदेभारत को कटरा से श्रीनगर के बीच चलाने की योजना बनायी गयी है। अभी वैली में श्रीनगर से लेकर संगलदान तक ट्रेनों का आवागमन होता है। अब , संगलदान से कटरा तक रेललाइन चालू होने के बाद इन ट्रेनों को कटरा तक चलाया जा सकता है। USBRL परियोजना : वर्ष 2009 में काजीगुंड-बारामूला सेक्शन शुरू हो गया था। वर्ष 2013 में 18 किलोमीटर बनिहाल-काजीगुंड सेक्शन, वर्ष 2014 में 25 किलोमीटर ऊधमपुर-कटरा, वर्ष 2023 में बनिहाल से संगलदान और अब संगलदान से कटरा के बीच शुरू होने वाली है। दुनिया का सबसे ऊंचा रेल आर्च ब्रिज-   चिनाब ब्रिज इस परियोजना का हिस्सा है। टनल, पुल और वैली से अब रेल सफर और आनंदमय होगा।

RSS नेता भैयाजी जोशी बोले- जिसकी आस्था है, वो जाएगा औरंगजेब की कब्र पर

नागपुर मुगल शासक औरंगजेब की कब्र को हटाने की कुछ दक्षिणपंथी संगठनों की मांग के बीच, वरिष्ठ आरएसएस नेता सुरेश ‘भैयाजी’ जोशी ने सोमवार को कहा कि इस विषय को अनावश्यक रूप से उठाया जा रहा है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के नेता ने नागपुर में एक कार्यक्रम के दौरान मीडिया से बात करते हुए कहा, ‘जिनकी श्रद्धा है वो उस कब्र पर जाएंगे। उन्होंने कहा, ‘औरंगजेब की कब्र का विषय अनावश्यक उठाया गया है। उसकी मृत्यु यहां हुई तो उसकी कब्र यहां बनी हुई है। जिनकी श्रद्धा है वो जाएंगे। अनावश्यक उठाया गया विषय’ उन्होंने कहा, ‘औरंगजेब की कब्र का विषय अनावश्यक उठाया गया है. उसकी मृत्यु यहां हुई तो उसकी कब्र यहां बनी हुई है. जिनकी श्रद्धा है वो जाएंगे.’ दरअसल महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे ने रविवार को औरंगजेब की कब्र को लेकर सांप्रदायिक तनाव भड़काने के प्रयासों की निंदा की और कहा कि ‘इतिहास को जाति और धर्म के चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए.’ ‘जिनकी आस्था है, वो जाएंगे’ उन्होंने कहा, ‘बीजापुर सल्तनत के सेनापति अफजल खान को प्रतापगढ़ किले के पास दफनाया गया था और छत्रपति शिवाजी महाराज की अनुमति के बिना ऐसा नहीं किया जा सकता था.’ राज ठाकरे की टिप्पणियों और मुगल शासक की कब्र के मुद्दे के बारे में पूछे जाने पर जोशी ने कहा, ‘औरंगजेब की कब्र का विषय अनावश्यक रूप से उठाया गया है. उसकी मृत्यु यहीं (भारत में) हुई थी, इसलिए उसकी कब्र यहीं बनाई गई है. जिनकी आस्था है, वे जाएंगे.’ ‘यह भारत की उदारता का प्रतीक’ पूर्व आरएसएस महासचिव ने कहा, ‘हमारे पास छत्रपति शिवाजी महाराज का आदर्श (रोल मॉडल) है. उन्होंने अफजल खान की कब्र बनवाई थी. यह भारत की उदारता और समावेशिता का प्रतीक है. कब्र बनी रहेगी, जो भी जाना चाहेगा, जाएगा.’ ‘हमें पानी और पेड़ों की नहीं, कब्र की चिंता है’ मुंबई के शिवाजी पार्क में वार्षिक गुड़ी पड़वा रैली को संबोधित करते हुए राज ठाकरे ने भ्रामक ऐतिहासिक नैरेटिव और व्हाट्सएप संदेशों के प्रति आगाह किया और इस बात पर जोर दिया कि इतिहास का अध्ययन सोशल मीडिया के बजाय विश्वसनीय स्रोतों से किया जाना चाहिए. राज ठाकरे ने छत्रपति संभाजीनगर जिले में औरंगजेब की कब्र पर विवाद पैदा करने के राजनीतिक प्रयासों की आलोचना की. इस कारण नागपुर में हिंसा हुई. राज ठाकरे ने ऐसी बहसों की प्रासंगिकता पर सवाल उठाते हुए कहा, ‘हमें पानी के स्रोतों और पेड़ों की चिंता नहीं है, लेकिन हमें औरंगजेब की कब्र की चिंता है?’ उन्होंने विभाजनकारी राजनीति का शिकार होने के खिलाफ चेतावनी देते हुए कहा, ‘लोगों को इतिहास के नाम पर लड़ाया जा रहा है और राजनेता संघर्ष को बढ़ावा देने के लिए इन मुद्दों का फायदा उठाते हैं.’ ‘औरंगजेब शिवाजी नामक एक विचार को मारना चाहता था’ ठाकरे ने इस बात पर जोर दिया कि मुगल शासक औरंगजेब ने मराठों से लड़ते हुए महाराष्ट्र में 27 साल बिताए, छत्रपति शिवाजी महाराज की विरासत को कुचलने की कोशिश की लेकिन आखिरकार असफल रहा. उन्होंने कहा, ‘औरंगजेब शिवाजी नामक एक विचार को मारना चाहता था.’ राज ठाकरे ने कहा कि शिवाजी महाराज के निधन के बावजूद, औरंगजेब उनकी विचारधारा को मिटाने के असफल प्रयास में महाराष्ट्र में रहा. उन्होंने दर्शकों को याद दिलाया कि शिवाजी के बेटे संभाजी महाराज ने आगरा से भागने पर औरंगजेब के बेटे को शरण भी दी थी.

कटरा-श्रीनगर वंदे भारत एक्सप्रेस का उद्घाटन 19 अप्रैल को होगा, पीएम मोदी हरी झंडी दिखाएंगे, घाटी के लिए स्पेशल डिजाइन की गई है ट्रेन

श्रीनगर  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 19 अप्रैल को जम्मू-श्रीनगर वंदे भारत ट्रेन को हरी झंडी दिखाएंगे। इससे कश्मीर घाटी देश के बाकी हिस्सों से जुड़ जाएगी। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने बताया कि अभी जम्मू रेलवे स्टेशन पर काम चल रहा है। इसलिए वंदे भारत ट्रेन की शुरुआत कटरा से होगी। यह व्यवस्था कुछ समय के लिए ही है। 23 जनवरी को भारतीय रेलवे ने ट्रायल वंदे भारत ट्रेन का ट्रायल किया था। यह ट्रेन श्री माता वैष्णो देवी कटरा (SVDK) रेलवे स्टेशन से श्रीनगर रेलवे स्टेशन तक चलाई गई थी। यह भारत के पहले केबल पुल अंजी खाद ब्रिज से होकर गुजरेगी। साथ ही यह चेनाब ब्रिज से भी गुजरेगी जो दुनिया का सबसे ऊंचा रेलवे पुल है। यह ट्रेन कश्मीर घाटी की ठंडी जलवायु को ध्यान में रखकर बनाई गई है। देश में पहली वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन 15 फरवरी, 2019 को नई दिल्ली और वाराणसी के बीच शुरू की गई थी। अभी देश में 50 से अधिक वंदे भारत चल रही हैं। जम्मू से श्रीनगर के बीच चलने वाली वंदे भारत से 272 किलोमीटर लंबी उधमपुर-श्रीनगर-बारामूला रेल लिंक परियोजना पूरी हो जाएगी। इस ट्रेन से जम्मू और श्रीनगर के बीच का सफर आसान हो जाएगा और लोगों की लंबे समय से चली आ रही मांग पूरी होगी। इस ट्रेन सेवा से दोनों शहरों के बीच यात्रा का समय बहुत कम हो जाएगा। यह प्रोजेक्ट 1997 में शुरू हुआ था और पिछले महीने ही पूरा हुआ है। इसे पूरा करने में कई मुश्किलें आईं। इसमें भूगर्भीय और भौगोलिक दिक्कतें भी शामिल थीं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 19 अप्रैल को जम्मू-श्रीनगर वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन का उद्घाटन करेंगे। प्रधानमंत्री 19 अप्रैल को उधमपुर पहुंचेंगे। इसके बाद वे दुनिया के सबसे ऊंचे रेलवे ब्रिज (चिनाब ब्रिज) का उद्घाटन करेंगे। फिर वे कटरा पहुंचकर वंदे भारत ट्रेन को हरी झंडी दिखाएंगे। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने बताया कि फिलहाल जम्मू रेलवे स्टेशन पर मरम्मत का काम चल रहा है, इस वजह से ट्रेन सेवा अस्थायी रूप से कटरा से शुरू की जा रही है। मरम्मत कार्य पूरा होने के बाद, अगस्त से यह ट्रेन जम्मू से भी चलेगी। कटरा- श्रीनगर पर ट्रेन का ट्रायल 25 जनवरी को किया गया था, जो सफल रहा था। ट्रेन सुबह 8 बजे कटरा से रवाना हुई और 11 बजे कश्मीर के अंतिम स्टेशन श्रीनगर पहुंची। यानी 160 किलोमीटर का सफर 3 घंटे में पूरा किया। जम्मू-कश्मीर में चलने वाली यह ट्रेन खास तौर पर कश्मीर के मौसम के हिसाब से डिजाइन की गई है। बर्फबारी में भी यह आसानी से चलेगी। ट्रेन में लगा हीटिंग सिस्टम पानी की टंकियों और बायो-टॉयलेट को जमने से रोकेगा। ड्राइवर का विंडशील्ड और एयर ब्रेक माइनस टेंपरेचर में भी काम करेगा। 11 जनवरी को रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा- जम्मू-श्रीनगर रेल लिंक प्रोजेक्ट सपना सच होने जैसा है। वंदे भारत एक्सप्रेस को कश्मीर के मौसम को ध्यान में रखकर बनाया गया है। इस ट्रेन में एंटी-फ्रीजिंग फीचर हैं। मतलब यह ट्रेन -20°C तक के तापमान में भी चल सकती है। इससे यह ट्रेन पूरे साल बिना किसी परेशानी के हर मौसम में चलेगी। यह ट्रेन भूकंप को मापने वाले यंत्रों से भी लैस है। यह बहुत जरूरी है क्योंकि यह इलाका भूकंप के लिए संवेदनशील है। ये यंत्र हिमालय के इलाके में होने वाले झटकों को कम करते हैं। इससे यात्रियों को सुरक्षित और आरामदायक सफर मिलेगा. इसके अलावा ड्राइवर के केबिन में गर्म विंडशील्ड है। इससे विंडशील्ड पर कोहरा या बर्फ नहीं जमेगी। ट्रेन के पाइप और बायो-टॉयलेट में हीटिंग एलिमेंट लगे हैं। इससे वे ठंड में भी ठीक से काम करेंगे। इस प्रोजेक्ट में 38 सुरंगें हैं। इनमें 12.75 किलोमीटर लंबी सुरंग T-49 भी शामिल है जो भारत की सबसे लंबी ट्रांसपोर्ट टनल है। इस रूट पर 927 पुल भी हैं, जिनकी कुल लंबाई 13 किलोमीटर है। इनमें चिनाब ब्रिज सबसे खास है। यह पुल नदी के तल से 359 मीटर ऊपर है और दुनिया का सबसे ऊंचा आर्च रेलवे पुल है। यह एफिल टॉवर से भी 35 मीटर ऊंचा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 19 अप्रैल को कटरा से तक चलने वाली पहली ट्रेन को हरी झंडी दिखाएंगे। यह ट्रेन रियासी जिले के कटरा कस्बे से चलेगी और पीर पंजाल पर्वत श्रृंखला को पार करते हुए श्रीनगर पहुंचेगी और फिर उत्तरी कश्मीर के बारामूला में अपने अंतिम गंतव्य तक पहुंचेगी. अधिकारियों के अनुसार, रेल लिंक परियोजना पिछले महीने पूरी हो गई थी. कटरा-बारामुल्ला मार्ग पर ट्रेन का ट्रायल रन सफलतापूर्वक किया जा चुका है. उन्होंने कहा कि रेलवे सुरक्षा आयुक्त ने जनवरी में कटरा और कश्मीर के बीच ट्रेन सेवा को मंजूरी दी थी. उन्होंने कहा कि वंदे भारत एक्सप्रेस से जम्मू और श्रीनगर के बीच यात्रा का समय काफी कम होने की उम्मीद है, जिससे इस क्षेत्र के लिए एक आधुनिक और कुशल रेल सेवा उपलब्ध होगी.  इसका ऐलान केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने किया। है। जम्मू से नहीं, कटरा से क्यों शुरू होगी सेवा? जितेंद्र सिंह ने बताया कि फिलहाल जम्मू रेलवे स्टेशन पर मरम्मत का काम चल रहा है, इसलिए ट्रेन सेवा अस्थायी रूप से कटरा से शुरू की जा रही है। मरम्मत कार्य पूरा होने के बाद, अगस्त से यह ट्रेन जम्मू से भी चलेगी। PM मोदी का कार्यक्रम प्रधानमंत्री 19 अप्रैल को सबसे पहले उधमपुर पहुंचेंगे। इसके बाद वे दुनिया के सबसे ऊंचे रेलवे ब्रिज (चिनाब ब्रिज) का निरीक्षण और उद्घाटन करेंगे। फिर वे कटरा पहुंचकर वंदे भारत ट्रेन को हरी झंडी दिखाएंगे।

केंद्र सरकार द्वारा मणिपुर राज्य में कानून और व्यवस्था की स्थिति की समीक्षा करने के बाद AFSPA को छह महीने के लिए बढ़ाया

नई दिल्ली केंद्र सरकार ने मौजूदा हालातों को देखते हुए पूर्वोत्तर के तीन राज्यों मणिपुर, नागालैंड और अरुणाचल प्रदेश में सशस्त्र बल विशेष शक्तियां अधिनियम (AFSPA) को छह महीने के लिए बढ़ा दिया है.गृह मंत्रालय की अधिसूचना के अनुसार, केंद्र सरकार द्वारा मणिपुर राज्य में कानून और व्यवस्था की स्थिति की समीक्षा करने के बाद, सशस्त्र बल (विशेष शक्तियां) अधिनियम, 1958 (1958 का 28) की धारा 3 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, 5 जिलों के निम्नलिखित 13 (तेरह) पुलिस स्टेशनों के अधिकार क्षेत्र में आने वाले क्षेत्रों को छोड़कर, संपूर्ण मणिपुर राज्य को दिनांक 01.04.2025 से छः माह तक, यदि इस घोषणा को इससे पहले वापस न लिया जाए तो इलाके को ‘अशांत क्षेत्र’ के रूप में घोषित किया जाता है. अधिसूचना के मुताबिक, नागालैंड राज्य में कानून-व्यवस्था की आगे और समीक्षा की गई है और AFSPA को छह महीने के लिए बढ़ा दिया है. नगालैंड के जिन जिलों में AFSPA को फिर से लागू किया गया है, वे दीमापुर, निउलैंड, चुमौकेदिमा, मोन, किफिर, नोकलाक, फेक और पेरेन हैं. कोहिमा जिले के खुजामा, कोहिमा उत्तर, कोहिमा दक्षिण, जुबजा और केजोचा पुलिस स्टेशनों के अधिकार क्षेत्र में आने वाले नागालैंड के क्षेत्र. वहीं, मोकोकचुंग जिले के मंगकोलेम्बा, मोकोकचुंग-I, लोंगथो, तुली, लोंगचेम और अनाकी ‘सी’ पुलिस स्टेशन को भी अशांत घोषित किया गया है.   इन क्षेत्रों में भी बढ़ा AFSPA साथ ही लोंगलेंग जिले में यांगलोक पुलिस थाना क्षेत्र, और वोखा जिले में भंडारी, चांमपांग और रालान पुलिस थाने क्षेत्र. जुनहेबोटो जिले में घटासी, पुघोबोटो, सताखा, सुरूहुतो, जुनहेबोटो और अघुनाटो पुलिस थाने, के अधिकार क्षेत्र में आने वाले क्षेत्रों को सशस्त्र बल (विशेष शक्तियां) अधिनियम, 1958 की धारा 3 के अंतर्गत दिनांक 01.04.2025 से छः माह तक के लिए बढ़ा दिया गया है. क्या होता है AFSPA दरअसल, किसी अशांत क्षेत्र में सशस्त्र बलों की गतिविधियों को सुविधाजनक बनाने के लिए AFSPA के तहत अधिसूचित किया जाता है. AFSPA अशांत क्षेत्रों में काम करने वाले सशस्त्र बलों को तलाशी लेने, गिरफ्तार करने और जरूरत पड़ने पर फायरिंग करने के अधिकार देता है.  

पीएम ओली और कम्युनिस्ट सरकार के खिलाफ बड़ा मोर्चा खुल गया, राजशाही समर्थकों ने दिया 3 अप्रैल तक का अल्टीमेटम

नेपाल नेपाल में सिर्फ 16 साल तक संविधान में धर्मनिरपेक्ष शब्द लिखा रहा. इसके बाद फिर से नेपाल को हिंदू राष्ट्र बनाने की मांग उठी है जैसा 239 साल तक रहा. इस मांग के साथ जबरदस्त हिंसा हुई. पीएम ओली और कम्युनिस्ट सरकार के खिलाफ बड़ा मोर्चा खुल गया. राजशाही समर्थकों ने तीन अप्रैल तक का अल्टीमेटम दे रखा है और सरकार परेशान है. नेपाल में हिंसा ने एक बार फिर ये सवाल देश और दुनिया के सामने रखा है कि क्या इस छोटे से देश में 16 साल से जो राजा पद से हटाया चुका है, जिस राजशाही की जडे़ं उखाड़ दी गई हैं. वहां क्या एक बार फिर से राजशाही लौटेगी, लेकिन केपी शर्मा ओली की कम्युनिस्ट सरकार ने भी पूर्व राजा ज्ञानेंद्र को लेकर अपने तेवर तीखे कर लिए हैं. पूर्व राजा के खिलाफ एक्शन में ओली सरकार नेपाली सरकार ने एक के बाद एक नेपाल के पूर्व राजा ज्ञानेंद्र को लेकर कई सख्त फैसले किए. हाल में पूर्व राजा ज्ञानेंद्र ने नेपाल के एक बड़े हिस्से का दौरा करने के बाद फरवरी में जनता से सीधे समर्थन मांगा था, लेकिन अब सरकार भी एक्शन के मूड में हैं. शुक्रवार को हिंसक झड़प के बाद नेपाल की ओली सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए पूर्व राजा ज्ञानेंद्र की सुरक्षा को पूरी तरीके से बदल दिया है. जितने भी सुरक्षाकर्मी उनकी ड्यूटी पर लगे थे, उन सबको बदल दिया गया है. साथ ही उनकी सुरक्षा को घटा भी दिया है. पहले जहां ज्ञानेंद्र शाह को 25 सुरक्षाकर्मियों द्वारा सिक्योरिटी दी जाती थी, उसे घटाकर अब 16 कर दिया गया है. उधर काठमांडू नगर निगम भी राजा के खिलाफ सख्त एक्शन ले रहा है.   ज्ञानेंद्र शाह पर ठोका 7.93 लाख नेपाली रुपए का जुर्माना राजा ज्ञानेंद्र को कहा गया है कि शुक्रवार को हिंसा के दौरान जो तोड़फोड़ हुई उससे हुए नुकसान की भरपाई करे. काठमांडू नगर निगम में राजा ज्ञानेंद्र शाह पर 7.93 लाख नेपाली रुपए का जुर्माना ठोका गया है और जो भी नुकसान हुआ था उसकी भरपाई करने का आदेश दिया है. शुक्रवार की हिंसा में कई मकान, बिल्डिंग, सरकारी दफ्तर और सरकारी गाड़ियों को क्षतिग्रस्त और आग के हवाले कर दिया गया था. इस बीच नेपाल के गृहमंत्रालय ने भी राजशाही समर्थकों यानी राजा ज्ञानेंद्र का राज वापस लाने की मांग कर रहे प्रदर्शनकारियों को सख्त चेतावनी दे दी है. तस्वीर और इंटेलिजेंस इनपुट से दोषियों की पहचान हिंसा की गहन जांच जारी है, जो भी हिंसा में शामिल रहा उनके खिलाफ सख्त कानूनी एक्शन होगा. तस्वीर और इंटेलिजेंस इनपुट से दोषियों की पहचान होगी. साफ है कि नेपाल सरकार राजा ज्ञानेंद्र को बख्शने के मूड में नहीं है.

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