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2 अप्रैल से भारत पर लागू होगा ट्रंप टैरिफ!, ऑटो से फार्मा सेक्टर तक फोकस में, सन फार्मा से सिप्ला तक पर रखे नजर

वाशिंगटन मार्च का महीना खत्म होने वाला है और अप्रैल महीने के दूसरे दिन यानी 2 अप्रैल से भारत पर ट्रंप टैरिफ लागू किया जा सकता है. इसका व्यापक असर कारों से लेकर जेनेरिक तक होने की संभावना है. आयातित ऑटो और पार्ट्स पर 25% शुल्क लगाना अमेरिकी मैन्युफैक्चरिंग को पुनर्जीवित करने के ट्रंप के प्रयास का एक उदाहरण है. इसके अलावा फार्मा समेत कई सेक्टर पर रेसिप्रोकल टैरिफ का प्रभाव देखने को मिल सकता है और इसका असर शेयर पर भी दिख सकता है. ऑटो से फार्मा सेक्टर तक फोकस में डोनाल्ड ट्रम्प लंबे समय से भारत को टैरिफ किंग कहते रहे हैं और बीते दिनों उन्होंने भारत पर रेसिप्रोकल टैरिफ लगाने का ऐलान किया था, जिसके लिए 2 अप्रैल की तारीख निर्धारित की गई थी, जो बेहद नजदीक है. इसका असर देश के 31 अरब डॉलर के निर्यात पर देखने को मिल सकता है. कार-ऑटो पार्ट्स के साथ ही फार्मास्यूटिकल्स, इलेक्ट्रॉनिक्स और ज्वेलपी सेक्टर्स इसे लेकर सबसे ज्यादा फोकस में हैं. बिजनेस टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2024 में भारत का अमेरिका को कुल निर्यात 77.5 अरब डॉलर का रहा, जबकि अमेरिका का भारत को निर्यात 40.7 अरब डॉलर रहा. अमेरिका भारत में तीसरा सबसे बड़ा निवेशक है, जिसने 2000 से अब तक कुल 67.76 अरब डॉलर का FDI किया है.   सन फार्मा से सिप्ला तक पर रखे नजर भारत के सबसे ज्यादा जोखिम वाले सेक्टर्स में से एक है, जबकि अमेरिका वर्तमान में फार्मा आयात पर न्यूनतम शुल्क लगाता है. लेकिन बात अगर भारत की करें, तो यहां अमेरिकी फार्मा प्रोडक्ट्स पर 10% टैरिफ लगाने से वह सीधे तौर पर रेसिप्रोकल टैरिफ के दायरे में आ जाता है. उद्योग समूहों ने चिंता जताते हुए कहा है कि अतिरिक्त लागत का बोझ डिस्ट्रीब्यूटर्स और जेनेरिक मैन्युफैक्चरर के लिए वहन करना मुश्किल होगा. एक्सपर्ट्स की मानें तो इस सेक्टर पर शॉर्ट टर्म में कुछ व्यवधान की उम्मीद है. वहीं जिन सेक्टर्स पर फोकल रहेगा, उनमें Sun Pharma, Cipla, Lupin और Dr Reddy’s Lab शामिल हैं. ज्वेलरी सेक्टर के शेयरों पर दिखेगा असर इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में डिक्सन टेक्नोलॉजीज (Dixon Technologies) और Kaynes Tech जैसी कंपनियों के शेयर पर असर दिख सकता है, तो वहीं ज्वेलरी सेक्टर में मालाबार गोल्ड (Malabar Gold), रेनेसां ज्वेलरी, राजेश एक्सपोर्ट्स (Rajesh Exports) और कल्याण ज्वेलर्स (Kalyan Jewellers) समेत कई भारतीय कंपनियों की अमेरिकी बाजार में मौजूदगी बढ़ रही है और रेसिप्रोकल टैरिफ के चलते इसने शेयर पर प्रभाव देखने को मिल सकता है. वहीं आईटी सेक्टर को लेकर भी एक्सपर्ट्स सावधानी बरतने की सलाह दे रहे हैं. उनका कहना है कि अगर व्यापार तनाव बढ़ता है और अमेरिका में ग्राहक खर्च कम होता है, तो Infosys और TCS जैसी कंपनियों की फाइनेंशियल हेल्थ पर विपरीत असर दिख सकता है. नोमुरा का ये है कहना भारत पर ट्रंप टैरिफ की तारीख नजदीक आने के बीच नोमुरा (Nomura) के इकोनॉमिस्ट्स ने कहा है कि भारत ने अपने कुछ समकक्ष देशों की तुलना में ट्रंप एडमिनिस्ट्रेशन के प्रति अधिक समझौतापूर्ण रुख अपना रहा है. उन्होंने कहा है कि हालांकि BTA यानी  Bilateral Trade Agreement का अच्छा असर दिखने में कुछ समय लगेगा, लेकिन हम इसे एक उत्साहजनक संकेत के रूप में देखते हैं. यह संकेत देता है कि, जबकि भारत अमेरिका के रेसिप्रोकल टैरिफ के सीधे निशाने पर है और बीटीए भारत पर ऐसे किसी भी शुल्क के प्रभाव को कम कर सकता है.

विद्रोही कचीन आर्मी का खनिज तत्वों पर कब्जा, जिनपिंग की बढ़ेगी टेंशन, म्यांमार में चीन को तगड़ा झटका

नेपीडा म्यांमार में जुंटा शासन और विद्रोही गुटों के बीच चल रही लड़ाई में चीन को झटका लगा है। विद्रोही गुटों ने म्यांमार के दुर्लभ खनिज तत्वों पर कब्जा करते हुए इनके चीन को होने वाले व्यापार को रोक दिया है। कचीन इंडिपेंडेंस आर्मी (KIA) के विद्रोहियों ने जुंटा को हराते हुए उत्तरी म्यांमार के कचीन में दुर्लभ खनन क्षेत्र पर कब्जा किया है। एक महत्वपूर्ण संसाधन संपन्न क्षेत्र पर नियंत्रण होना विद्रोही गुट KIA के लिए बड़ी कामयाबी है। वहीं ये घटनाक्रम जुंटा कहे जाने वाले देश की सैन्य शाशकों को झटका है। KIA ने कचीन के खनन क्षेत्र पर कब्जा करते हुए चीन को होने वाली पवन टर्बाइन और इलेक्ट्रिक वाहनों में इस्तेमाल होने वाले खनिजों की आपूर्ति को रोका है। इससे इन अहम खनिजों की कीमतें आसमान छू गई हैं। KIA के इस कदम का मकसद चीन पर दबाव बनाना है। चीन ने अभी तक म्यांमार की सैन्य सरकार का समर्थन किया है। चीन का म्यांमार के कचीन राज्य में दुर्लभ पृथ्वी खनन में भारी निवेश है। खनिज संपन्न होने की वजह से भारत भी इस क्षेत्र में दिलचस्पी रखता है। चीन के सामने खनिज तत्वों की कमी कचीन इंडिपेंडेंस आर्मी (KIA) के विद्रोहियों ने बीते साल के आखिर में उन क्षेत्रों पर कब्जा किया, जहां से बड़े पैमाने पर खनिजों निकाले जाते हैं। इससे पवन टर्बाइन और इलेक्ट्रिक वाहनों में इस्तेमाल होने वाले खनिजों की चीन को आपूर्ति बाधित हो गई। चीनी सीमा शुल्क के आंकड़ों के अनुसार, म्यांमार से चीन को दुर्लभ पृथ्वी ऑक्साइड और यौगिकों का आयात फरवरी में 311 मीट्रिक टन तक गिर गया है। यह पिछले साल की तुलना में 89 फीसदी कम है। कचीनलैंड रिसर्च सेंटर के कार्यकारी निदेशक डैन सेंग लॉन का कहना है कि KIA वे दुर्लभ पृथ्वी भंडार का इस्तेमाल चीन के साथ बातचीत में दबाव बनाने के लिए करना चाहते हैं। क्षेत्र की जानकारी रखने वाले एक्सपर्ट का कहना है कि भारत भी इस क्षेत्र में दिलचस्पी दिखा रहा है, जो चीन का क्षेत्रीय प्रतिद्वंद्वी है। 2024 के अंत में भारत ने एक सरकारी स्वामित्व वाली दुर्लभ पृथ्वी खनन और शोधन कंपनी के अधिकारियों को कचीन भेजा था। KIA क्यों है आक्रामक KIA म्यांमार के कई सशस्त्र समूहों में से एक है, जो जुंटा सैन्य शासन के खिलाफ लड़ रहे हैं। KIA म्यांमार का सबसे बड़ा और सबसे पुराना जातीय मिलिशिया है। कचीन ज्यादातर ईसाई हैं, उनकी बमर बौद्ध बहुसंख्यकों से शिकायतें रही हैं। म्यांमार में 2021 से चल रहे गृह युद्ध में चीन ने जुंटा का साथ दिया है। ऐसे में KIA जैसे विद्रोही गुट चीन पर दबाव बनाकर इस स्थिति को बदलने की कोशिश में हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया नागपुर का दौरा, दीक्षाभूमि पहुंचकर डॉ. बीआर आंबेडकर को श्रद्धांजलि दी

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को नागपुर का दौरा किया। इस दौरान पीएम मोदी ने संघ मुख्यालय जाकर संघ के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार और द्वितीय सरसंघचालक माधव सदाशिव गोलवलकर को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने माधव नेत्रालय आई इंस्टीट्यूट एंड रिसर्च सेंटर के नए भवन ‘माधव नेत्रालय प्रीमियम सेंटर’ की आधारशिला भी रखी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को नागपुर का दौरा किया। इस दौरान पीएम मोदी संघ के स्मृति मंदिर गए। यहां से उन्होंने दीक्षाभूमि पहुंचकर डॉ. बीआर आंबेडकर को श्रद्धांजलि दी। यहां डॉ. आंबेडकर ने 1956 में अपने हजारों अनुयायियों के साथ बौद्ध धर्म अपना लिया था। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि विकसित और समावेशी भारत का निर्माण ही भारतीय संविधान के मुख्य निर्माता डॉ. बी.आर. अंबेडकर को सच्ची श्रद्धांजलि होगी।   पीएम मोदी ने दीक्षाभूमि पर श्रद्धांजलि अर्पित की नागपुर की अपनी यात्रा के दौरान पीएम मोदी ने दीक्षाभूमि पर श्रद्धांजलि अर्पित की, जहां अंबेडकर ने 1956 में अपने अनुयायियों के साथ बौद्ध धर्म अपनाया था। वे दीक्षाभूमि में स्तूप के अंदर गए और वहां रखी आंबेडकर की अस्थियों को श्रद्धांजलि दी।   ‘सामाजिक सद्भाव, समानता और न्याय के सिद्धांतों को महसूस किया जा सकता है’ कार्यक्रम स्थल पर आगंतुकों की डायरी में हिंदी में लिखे अपने संदेश में मोदी ने कहा, ‘मैं अभिभूत हूं कि मुझे नागपुर में डॉ. बाबासाहब आंबेडकर के पांच ‘पंचतीर्थ’ में से एक दीक्षाभूमि पर जाने का अवसर मिला। यहां के पवित्र वातावरण में बाबासाहब के सामाजिक सद्भाव, समानता और न्याय के सिद्धांतों को महसूस किया जा सकता है।’   उन्होंने आगे लिखा कि दीक्षाभूमि लोगों को गरीबों, वंचितों और जरूरतमंदों के लिए समान अधिकार और न्याय की व्यवस्था के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती है। पीएम मोदी ने कहा, ‘मुझे पूरा विश्वास है कि इस अमृत कालखंड में हम बाबासाहब के मूल्यों और शिक्षाओं के साथ देश को प्रगति की नई ऊंचाइयों पर ले जाएंगे। एक विकसित और समावेशी भारत का निर्माण करना ही बाबासाहब को सच्ची श्रद्धांजलि होगी।’ पीएम मोदी ने आखिरी बार 2017 में दीक्षाभूमि का दौरा किया था।

पीएम की यात्रा के बीच आरएसएस ने कहा संघ-भाजपा के बीच नहीं है कोई मतभेद, हमारी विचारधारा को आगे बढ़ाएंगे मोदी

नई दिल्ली प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेंद्र मोदी पहली बार रविवार को नागपुर स्थित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के हेडक्वार्टर पहुंचे। किसी भी प्रधानमंत्री की पहली यात्रा है। पीएम की यात्रा के बीच आरएसएस ने कहा है कि भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के साथ कोई मतभेद नहीं है। पीएम मोदी के इस दौरे को बहुत महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक बताते हुए आरएसएस के शेषाद्रि चारी ने कहा, “लोग हमेशा आरएसएस और बीजेपी के संबंधों के बारे में बात करते हैं। पहले भी बात करते रहे हैं। बीजेपी और आरएसएस के बीच कोई मतभेद नहीं है।” आरएसएस नेता ने कहा, “जो लोग संघ और बीजेपी के बारे में कुछ नहीं जानते वही लोग कहते हैं कि बीजेपी और आरएसएस के बीच मतभेद हैं। जो लोग इन झूठी बातों को फैलाते हैं वे अपनी राजनीतिक लाभ के लिए ऐसा करते हैं।” आपको बता दें कि प्रधानमंत्री मोदी ने अपने दौरे की शुरुआत नागपुर स्थित स्मृति मंदिर में संघ के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार को श्रद्धांजलि अर्पित करके की। आरएसएस नेता ने कहा, “यह पहली बार है जब प्रधानमंत्री मोदी पीएम बनने के बाद यहां आ रहे हैं। यह एक बहुत महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक दौरा है। यह आरएसएस के 100 वर्षों का उत्सव है। इसके लिए कई कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।” उन्होंने आगे कहा, “संघ के पास देश के मुद्दों पर बहुत सारी राय है। इन मुद्दों को पीएम मोदी आगे बढ़ाएंगे। वे पहले भी ऐसा कर चुके हैं। सरकार का काम भारत को एक मजबूत देश बनाना है। एक विकसित भारत बनाना है।” प्रधानमंत्री मोदी के नागपुर दौरे के दौरान स्मृति मंदिर (आरएसएस), दीक्षाभूमि, माधव नेत्रालय और सोलर इंडस्ट्रियल एक्सप्लोसिव्स का दौरा करने के अलावा वे माधव नेत्रालय प्रीमियम सेंटर का शिलान्यास करने के लिए पहुंचे। यहां उन्होंने एक सार्वजनिक सभा को संबोधित करेंगे। प्रधानमंत्री सोलर डिफेंस एंड एयरोस्पेस लिमिटेड में लॉइटरिंग म्युनिशन टेस्टिंग रेंज और UAV रनवे का उद्घाटन भी करेंगे।

खत्म हुआ 20 साल का इंतजार, US की कंपनी भारत में ही बनाएगी परमाणु रिएक्टर, चीन के खिलाफ एक और चाल

नई दिल्ली करीब दो दशकों के लंबे इंतजार के बाद भारत-अमेरिका नागरिक परमाणु समझौते के तहत भारत में परमाणु रिएक्टरों के निर्माण और डिजाइन के लिए अमेरिकी कंपनी को एक ऐतिहासिक मंजूरी मिल गई है। अमेरिकी ऊर्जा विभाग (DoE) से 26 मार्च को मिली मंजूरी के बाद होल्टेक इंटरनेशनल को हरी झंडी मिल गई है। अब अमेरिकी कंपनी को भारत में न्यूक्लियर रिएक्टर बनाने और डिजाइन करने की अनुमति मिल सकती है। होल्टेक को भारत की तीन कंपनियों (होल्टेक एशिया, टाटा कंसल्टिंग इंजीनियर्स लिमिटेड और लार्सन एंड टुब्रो लिमिटेड) को अप्रशिक्षित छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर (SMR) तकनीक ट्रांसफर करने की अनुमति दी गई है। होल्टेक इंटरनेशनल भारतीय-अमेरिकी उद्योगपति क्रिस पी सिंह द्वारा प्रमोट की गई कंपनी है। इसने 2010 से पुणे में एक इंजीनियरिंग यूनिट और गुजरात में एक निर्माण यूनिट स्थापित की है। इस मंजूरी के बाद होल्टेक के लिए यह भी संभव है कि वह बाद में इसमें संशोधन की मांग कर सके और अन्य सरकारी संस्थाओं जैसे कि न्यूक्लियर पावर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (NPCIL), NTPC और एटॉमिक एनर्जी रिव्यू बोर्ड (AERB) को भी इस सूची में जोड़ सके। हालांकि, इसके लिए भारत सरकार से जरूरी गैर-प्रसार (Non-Proliferation) आश्वासन की आवश्यकता होगी, जो कि इन सरकारी संस्थाओं से अभी तक प्राप्त नहीं हुआ है। होल्टेक को भारतीय कंपनियों को केवल शांतिपूर्ण परमाणु गतिविधियों के लिए यह तकनीक ट्रांसफर करने की अनुमति है। यह भी सुनिश्चित किया गया है कि इसका उपयोग परमाणु हथियारों या किसी भी सैन्य उद्देश्य के लिए नहीं किया जाएगा। इस समझौते के बाद, भारत की परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में एक नई क्रांति देखने को मिल सकती है। इससे देश को नई, सुरक्षित और प्रभावी परमाणु रिएक्टर तकनीकों का लाभ मिल सकता है। वर्तमान में भारत का परमाणु कार्यक्रम मुख्य रूप से भारी पानी रिएक्टरों (PHWRs) पर आधारित है, जो अब विश्व में अधिकांश परमाणु ऊर्जा संयंत्रों में उपयोग होने वाली प्रेसराइज्ड वाटर रिएक्टर (PWRs) तकनीक से मेल नहीं खाता। होल्टेक का SMR-300 डिजाइन अमेरिका के ऊर्जा विभाग के एडवांस्ड रिएक्टर डेमॉन्स्ट्रेशन प्रोग्राम द्वारा समर्थित है। यह छोटे रिएक्टरों के निर्माण के लिए एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है। इसके अतिरिक्त होल्टेक के पास गुजरात में एक गैर-परमाणु निर्माण यूनिट है। अगर प्रस्तावित निर्माण योजनाएं मंजूर होती हैं तो कंपनी अपनी उत्पादन क्षमता को दोगुना करने की योजना बना सकती है। यह कदम भारत के ऊर्जा क्षेत्र में एक नई दिशा दिखा सकता है। भारत और अमेरिका मिलकर चीन को प्रतिस्पर्धा देने की स्थिति में आ सकते हैं। चीन भी छोटे रिएक्टरों के क्षेत्र में अग्रसर है और इसे वैश्विक दक्षिण में अपनी कूटनीतिक पहुंच बढ़ाने के लिए एक महत्वपूर्ण उपकरण के रूप में देखता है।

आतंकवाद के खिलाफ अभियान के तहत पाकिस्तानी सेना ने महिलाओं-बच्चों पर बरसा दिए बम, मच गई चीख-पुकार

इस्लामाबाद पाकिस्तानी सुरक्षाबलों द्वारा देश के अशांत खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में आतंकवादियों के एक ठिकाने पर किए गए ड्रोन हमलों में 12 आतंकवादियों मार गिराया है। वहीं इस हमले में कई आम नागरिक भी मारे गए हैं। प्रांतीय सरकार ने एक प्रेस विज्ञप्ति में बताया कि ‘आतंकवाद के खिलाफ अभियान’’ के तहत मरदान जिले में कटलांग के सुदूर पहाड़ी क्षेत्र में शनिवार सुबह आतंकवादियों के ठिकानों को निशाना बनाया गया। सरकार ने इन हमलों में आम नागरिकों के हताहत होने की पुष्टि की और संकेत दिया कि इनमें महिलाएं एवं बच्चे भी शामिल हो सकते हैं। आधिकारिक रिपोर्ट में बताया गया कि अभियान के दौरान 12 आतंकवादी मारे गए।  जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया कि यह अभियान आतंकवादियों के ठिकाने संबंधी खुफिया जानकारी मिलने के बाद चलाया गया। इसमें कहा गया कि क्षेत्र में जारी आतंकवादी गतिविधियों से जुड़े कई आतंकवादी इस अभियान के दौरान मारे गए। प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया, ‘दुर्भाग्यवश, बाद की रिपोर्ट से इस बात की पुष्टि हुई कि जिस इलाके को निशाना बनाया गया था, उसके आसपास महिलाओं और बच्चों समेत आम नागरिक मौजूद थे जिसके परिणामस्वरूप आम नागरिक हताहत हुए।’ खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के मुख्यमंत्री अली अमीन गंडापुर ने कहा कि अभियान के दौरान आम नागरिकों की मौत होना अत्यंत निंदनीय और दुखद है। सरकार ने कहा कि वह घायलों को चिकित्सकीय सहायता प्रदान कर रही है और पीड़ितों के परिवारों को राहत एवं मुआवजा उपलब्ध करा रही है। प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया कि अभियान के दौरान आम नागरिकों की मौत होने के संबंध में पूर्ण जांच की जाएगी। खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री के सूचना सलाहकार बैरिस्टर मोहम्मद अली सैफ ने भी अभियान के दौरान निर्दोष लोगों की मौत होने पर गहरा दुख व्यक्त किया।

हमास ने गाजा पट्टी में इजरायल के साथ युद्धविराम करने के प्रस्ताव को दी मंजूरी

हमास हमास ने गाजा पट्टी में इजरायल के साथ युद्धविराम प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। हमास की तरफ से कहा गया कि उसने मध्यस्थों इजिप्ट और कतर द्वारा प्रस्तावित युद्धविराम प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है लेकिन दुविधा तब पैदा हो गई जब इजरायल की तरफ से कहा गया कि उसने अमेरिका के साथ मिलकर एक नया प्रस्ताव तैयार किया है। इस प्रस्ताव में इजरायल की तरफ से रिहा होने वाले बंधकों की संख्या में बदलाव किया गया है। गाजा में युद्धविराम के लिए इजिप्ट और कतर पिछले कुछ समय से लगातार प्रयास करने में लगे हुए हैं। इसी के तहत उन्होंने हमास के सामने एक प्रस्ताव रखा था। इजिप्ट की तरफ से एक अधिकारी ने एजेंसी को बताया कि इस समझौते के तहत हमास एक अमेरिकी-इजराइली समेत पांच जीवित बंधकों को रिहा करेगा जिसके बदले में इजराइल गाजा में मानवीय सहायता को पहुंचने देगा और एक सप्ताह के लिए युद्ध रोकने पर सहमत होगा। साथ ही, इजराइल सैकड़ों फलस्तीनी कैदियों को रिहा करेगा। गाजा में हमास के नेता खलील अल-हय्या ने इसे स्वीकार करने की घोषणा की लेकिन अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि इस घोषणा से पहले प्रस्ताव में बदलाव किया गया था या नहीं। इजरायल की तरफ से पेश किए गए नए प्रस्ताव पर कोई ज्यादा जानकारी सामने नहीं आई है लेकिन पीएम नेतन्याहू ने कहा कि यह प्रस्वात शुक्रवार को हुई चर्चा के बाद सामने आया है। इससे पहले इजरायल ने करीब दस दिन पहले हमास पर बंधकों को न छोड़ने का आरोप लगाते हुए सीजफायर तोड़कर हमला कर दिया था। इन हमलों में सैकड़ों लोग मारे गए थे। व्हाइट हाउस की तरफ से इजरायल को भड़काने के लिए हमास को जिम्मेदार ठहराया गया था। इज़राइल ने चेतावनी दी है कि जब तक हमास 59 बंधकों को रिहा नहीं करता वह युद्ध नहीं रोकेगा। इसके अलावा, इजराइल हमास से सत्ता छोड़ने, अपने हथियार डालने और उसके नेताओं के निर्वासन की मांग कर रहा है। हमास का कहना है कि वह केवल तभी बंधकों को रिहा करेगा जब इज़राइल एक स्थायी युद्धविराम पर सहमत होगा, गाज़ा से अपनी सेना हटाएगा और फलस्तीनी कैदियों को रिहा करेगा।

म्यांमार में दोबारा झटकों का डर सताया, भूकंप से बेघर लाखों लोगों ने सड़कों पर गुजारी रात

म्यांमार म्यांमार में आए 7.7 तीव्रता के भूकंप के बाद जन-जीवन अस्तव्यस्त हो गया है। म्यांमार पहले से ही राजनीतिक अस्थिरता का सामना कर रहा था। वहीं भूकंप आने के बाद राहत और बचाव का काम भी ठीक से नहीं हो पा रहा है। इन्फ्रास्ट्रक्चर और सड़कों को हुए नुकसान की वजह से राहत सामग्री का पहुंचना भी मुश्किल हो गया है। वहीं भूकंप के झटकों (आफ्टरशॉक) के डर से हजारों लोग अपने घरों को छोड़कर सड़कों पर ही सोए। यूएन ऑफिस फॉर कोऑर्डिनेशन ऑफ ह्यूमनिटेरियन अफेयर्स (OCHA) के मुताबिक घरों को हुए नुकसान और भूकंप के झटकों के डर से बहुत लोगों की हिम्मत घर के अंदर जाने की भी नहीं हुई। ऐसे में उन्होंने घर के बाहर ही रात काटी। म्यांमार में आए भूकंप में कम से कम 1600 लोगों की मौत हुई है और 3400 लोग घायल हो गए हैं। OCHA ने कहा कि कई सड़कों और पुलों को भी नुकसान हुआ है जिसकी वजह से आना-जाना मुश्किल हो रहा है। घायल लोगों तक दवाइयां पहुंचाना भी मुश्किल हो गया है। हाइवे पर दरारें पड़ने की वजह से बसों को भी रोक दिया गया है। यूएन की एजेंसी ने कहा कि जरूरतमंदों को खून भी नहीं मिल पा रहा है। इसके अलावा इंटरनेट और संचार के साधन भी ठप हो गए हैं। म्यांमार की सेना ने दुनियाभर से मदद की गुहार लगाई है। भारत ने भी 15 टन राहत सामग्री पहुंचाई म्यांमार पहुंचाई है और आपातकालीन मिशन ‘ऑपरेशन ब्रह्मा’ के तहत बचाव दलों के साथ हवाई और समुद्री मार्ग से और आपूर्ति भेजी है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने म्यांमा के सैन्य जनरल मिन आंग ह्लाइंग से बात की और कहा कि भारत उनके देश में आए भीषण भूकंप से मची तबाही से निपटने के प्रयासों में उनके साथ एकजुटता से खड़ा है। भारत ने म्यांमा के लिए अपने बचाव अभियान को ‘ऑपरेशन ब्रह्मा’ नाम दिया है। अधिकारियों ने बताया कि भारत स्थानीय प्राधिकारों की मदद के लिए म्यांमा में बचाव कर्मियों को पहुंचाने वाला पहला देश बन गया है।

वैज्ञानिक तरीके से तय होने चाहिए Circle Rate : सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक फैसले में कहा है कि जमीन के सर्किल रेट वैज्ञानिक तरीके से तय होने चाहिए। उचित होगा कि जमीन की सर्किल दरें विशेषज्ञ समितियों द्वारा तय की जाएं जिनमें न केवल सरकार के अधिकारी हों बल्कि अन्य विशेषज्ञ भी हों जो बाजार की स्थितियों को समझते हों। शीर्ष अदालत ने कहा कि व्यवस्थित और वैज्ञानिक तरीके से तय की गईं सर्किल दरें अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और कर संग्रह को बढ़ाने में योगदान दे सकती हैं। भारत के प्रधान न्यायाधीश संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति संजय कुमार की पीठ ने मध्य प्रदेश रोड डेवलपमेंट कारपोरेशन की अपील खारिज करते हुए 27 मार्च को यह फैसला सुनाया है। कोर्ट ने सर्किल रेट के आधार पर अधिग्रहित जमीन का मुआवजा देने के कमिश्नर के आदेश को सही ठहराया है। सिर्फ औसत ब्रिक्री की कीमत पर भरोसा नहीं करना चाहिए: SC पीठ ने फैसले में जमीन के सर्किल रेट तय करने और भूमि अधिग्रहण कानून 2013 के प्रविधानों बारे में विस्तार से चर्चा की है। कोर्ट ने कहा है कि कलेक्टर को सिर्फ औसत ब्रिक्री की कीमत पर ही भरोसा नहीं करना चाहिए बल्कि व्यापक बाजार आधारित कारकों पर भी विचार करना चाहिए। मसलन जमीन की प्रकृति, अहमियत और विकास की कीमत आदि। फैसले में कहा गया है कि सर्किल रेट का निर्धारण जब जमीन के बाजार मूल्य में भिन्नता के कारकों को ध्यान में रख कर किया जाता है तो उससे लेन-देन में पूर्वानुमान लगाना आसान होता है और मुकदमेबाजी कम हो जाती है। कोर्ट ने कहा कि मानकीकृत (स्टैंडर्डाइज्ड) सर्किल दरों को न्यूनतम या आधार मूल्य पर तय किया जाना चाहिए, क्योंकि जनता से अधिक मूल्य वाली सर्किल दरों पर स्टाम्प शुल्क का भुगतान करने के लिए कहना बहुत अनुचित होगा। ‘सर्किल दरों से नागरिकों पर पड़ता है सीधा असर’ सर्वोच्च अदालत ने कहा कि सही सर्किल दरें ईमानदार करदाताओं के हितों का ध्यान रखने के साथ साथ अनुपालन न करने वाले करदाताओं को भी रोकेंगी। तर्कसंगत और निष्पक्ष सर्किल दरें सुशासन को दर्शाती हैं। कोर्ट ने आदेश में कहा है कि उचित और सटीक सर्किल दरें तय करने का प्रत्येक नागरिक पर सीधा प्रभाव पड़ता है। बढ़ी हुई दरें खरीदारों पर अनुचित वित्तीय बोझ डालती हैं। इसके विपरीत कम मूल्यांकित दरें अपर्याप्त स्टाम्प शुल्क की ओर ले जाती हैं, जिससे राज्य के राजस्व पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। कोर्ट ने कहा कि सर्किल दरें जो बाजार मूल्य को दर्शाती हैं, संपत्तियों के कम मूल्यांकन को रोककर राज्य के लिए उचित राजस्व संग्रह सुनिश्चित करती हैं। विभिन्न अधिकार क्षेत्रों के मुकदमों में संपत्ति के सर्किल रेट की चर्चा होने के आधार पर कोर्ट ने कहा कि सर्किल दरें अक्सर राजनीतिक और आर्थिक रूप से विवाद का मुद्दा बन जाती हैं। यह विभिन्न अधिकार क्षेत्रों में लगातार होने वाली मुकदमेबाजी में परिलक्षित होता है, जो संपत्तियों पर लागू सर्किल दरों पर चर्चा करते हैं।

भारत को एक और झटका दे सकते है डोनाल्ड ट्रंप, $8 अरब के व्यापार पर दिखेगा असर

नई दिल्ली. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक के बाद एक चीजों पर टैरिफ यानी टैक्स लगाए जा रहे हैं। ऑटो पर 25 फीसदी टैरिफ के बाद अब वह जल्द ही फार्मा कंपनियों पर टैरिफ लगाने की घोषणा कर सकते हैं। खबर है कि ट्रंप प्रशासन दवा कंपनियों से आने वाले सामान पर नया टैक्स लगाने वाला है। हालांकि अभी अभी यह साफ नहीं है कि ये टैरिफ कब से लागू होंगे और किन दवाओं पर लगेंगे। माना जा रहा है कि ट्रंप ऐसा इसलिए कर रहे हैं ताकि दवा कंपनियां अमेरिका में ही दवाएं बनाएं। टैरिफ लगने से अमेरिका में दवाओं के दाम बढ़ सकते हैं। हालांकि कुछ लोगों का मानना है कि इससे अमेरिका में दवा बनाने वाली कंपनियों को फायदा होगा। फार्मा कंपनियों पर टैरिफ लगाने से भारत को बड़ा नुकसान हो सकता है। समझौते के लिए तैयार ट्रंप एयर फोर्स वन में मीडिया से बात करते हुए ट्रंप ने यह भी कहा कि वे उन देशों के साथ समझौता करने को तैयार हैं जो अमेरिका के टैक्स से बचना चाहते हैं। लेकिन ऐसे समझौते 2 अप्रैल को उनके प्रशासन द्वारा टैक्स लगाने की घोषणा के बाद ही हो सकते हैं। ट्रंप ने कहा कि ब्रिटेन जैसे देशों ने संभावित समझौते पर बात करने के लिए अमेरिका से संपर्क किया है। उन्होंने कहा, ‘वे समझौता करना चाहते हैं। अगर हमें समझौते में कुछ मिल सकता है तो यह संभव है।’ हालांकि जब उनसे पूछा गया कि क्या ये समझौते 2 अप्रैल से पहले हो सकते हैं तो उन्होंने इनकार कर दिया। उन्होंने कहा, ‘नहीं, शायद बाद में। यह एक प्रक्रिया है।’ भारत कितनी दवाएं करता है एक्सपोर्ट? भारत अपनी दवाओं की बड़ी खेप अमेरिका में बेचता है। भारत हर साल अमेरिका को 8 अरब डॉलर से ज्यादा की दवाएं भेजता है। भारत ज्यादातर जेनेरिक दवाएं अमेरिका को भेजता है। जेनेरिक दवाएं वो होती हैं जो ब्रांडेड दवाओं की तरह ही होती हैं, लेकिन उनकी कीमत कम होती है। साल 2022 में अमेरिका में भरे जाने वाले हर दस में से चार पर्चे भारतीय कंपनियों की दवाओं के थे। अमेरिका को भारतीय दवाओं से फायदा कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक भारतीय कंपनियों की दवाओं से अमेरिकी हेल्थकेयर सिस्टम को 2022 में 219 अरब डॉलर की बचत हुई। 2013 से 2022 के बीच कुल 1.3 ट्रिलियन डॉलर की बचत हुई। अगले पांच सालों में जेनेरिक दवाओं से 1.3 ट्रिलियन डॉलर की और बचत होने का अनुमान है। भारत पर क्या पड़ेगा असर? अमेरिका अगर फार्मा कंपनियों पर टैरिफ लगाते हैं तो इसका बड़ा असर भारत दवा कंपनियों पर देखने को मिल सकता है। टैरिफ के कारण उन्हें दवाएं महंगी करनी पड़ेंगी। ऐसे में अमेरिका में इनकी बिक्री में कमी आ सकती है। वहीं ट्रंप के इस टैरिफ से भारतीय फार्मा कंपनियों के शेयरों में भी गिरावट आ सकती है। भारत का फार्मा सेक्टर वैसे भी इस समय शेयर मार्केट में बहुत ज्यादा मजबूत है।

एलन मस्क के खिलाफ अमेरिका में फूंक दी टेस्ला की कई कारें

वाशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के खास एलन मस्क की मुसीबतें इन दिनों जा रही है। अमेरिका की सरकार में दक्षता विभाग के प्रमुख का पद संभाल रहे मस्क के खिलाफ दुनियाभर में प्रदर्शन तेज हो गए हैं। शनिवार को हजारों लोगों ने सड़क कर उतरकर मस्क के खिलाफ नारे लगाए। इस दौरान लोगों ने टेस्ला की कारों की भी निशाना बनाया। लोगों ने टेस्ला की कई कारें को आग के हवाले कर दिया। वहीं अमेरिका के अलावा ब्रिटेन और जर्मनी जैसे देशों में भी लोग मस्क के प्रति नाराजगी कर रहे हैं। जानकारी के मुताबिक लोग DOGE प्रमुख के रूप में मस्क की नीतियों का विरोध करने के लिए यह कदम उठा रहे हैं। लोगों का कहना है कि मस्क ने इस विभाग के तहत काम कर लोगों की संवेदनशील जानकारी हासिल की है और सरकारी खर्च में कटौती करने का हवाला देते हुए एजेंसियों को बंद करने कर दिया है। इससे हजारों लोगों की नौकरी एक झटके में छीन गई है और लाखों लोग प्रभावित हुए हैं। टेस्ला के शोरूम को बनाया निशाना एलन मस्क के इन कदमों को लेकर लोग बेहद नाराज हैं और इसीलिए वे मस्क की संपत्ति को निशाना बना रहे हैं। दुनिया के सबसे अमीर शख्स एलन मस्क की अनुमानित 340 बिलियन डॉलर की संपत्ति में सबसे बड़ा हिस्सा टेस्ला कंपनी के शेयर हैं। शनिवार को अमेरिका मेंटेस्ला के सभी 277 शोरूम और सेंटर पर लोगों की भीड़ टूट पड़ी। टेक्सास, न्यूजर्सी, मैसाचुसेट्स, कनेक्टिकट, न्यूयॉर्क, मिनेसोटा और अमेरिका के कई अन्य हिस्सों में टेस्ला डीलरशिप के बाहर सैकड़ों प्रदर्शनकारियों ने प्रदर्शन किया। नारे लगाते दिखे लोग प्रदर्शन से जुड़े कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं, जिनमें लोग ‘टेस्ला को जलाओ, लोकतंत्र बचाओ’, ‘अमेरिका को मस्क से मुक्त करो’, ‘नाजी कारें न खरीदें’ जैसे पोस्टर लिए नजर आ रहे हैं। शिकागो के एक शोरूम के बाहर कई दर्जन लोगों ने “एलन मस्क को जाना होगा!” जैसे नारे लगाए हैं। वहीं ब्रिटेन में भी प्रदर्शनकारियों ने मस्क के फैसले के विरोध में ‘नाजी कार न खरीदें’, ‘दिवालिया एलन’ जैसे नारे लगाए। कुछ प्रदर्शनकारियों ने कथित तौर पर टेस्ला की कारों को आग लगा दी। मस्क को मिला है राष्ट्रपति का साथ बता दें कि अमेरिका में इससे पहले भी टेस्ला की गाड़ियों को निशाना बनाया गया है। मस्क ने कहा है कि वे हमलों से स्तब्ध हैं और यह पागलपन तुरंत रुकना चाहिए। वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी एलन मस्क का साथ देते दिखे हैं। उन्होंने कहा है कि टेस्ला की गाड़ियों पर हमले करने वालों के खिलाफ सख्त एक्शन लिया जाएगा और उन्हें 20 साल तक के लिए जेल भेज दिया जाएगा।

चीन अब बच्चे पैदा करने के लिए महिलाएं खरीद रहा , इतने रुपए में हो रहा सौदा

बीजिंग चीन की मैरिज रेट में भारी गिरावट आई है और 2024 में देशभर में 61 लाख शादियां की रजिस्टर्ड हुईं जो पिछले साल 77 लाख से कम हैं. इस गिरावट ने की वजह से ही एक्सपर्ट शादी की कानूनी उम्र 22 से घटाकर 18 करने की सिफारिश कर रहे हैं. चीन में मैरिज रेट में गिरावट कई फैक्टर्स की वजह से आई है, इनमें बढ़ता आर्थिक दबाव, शादी के प्रति सोच में बदलाव और शिक्षा का बढ़ता स्तर शामिल है. शादी नहीं करना चाहते युवा खास तौर पर चीन की शहरी महिलाए खुद को ऐसी पारिवारिक जिम्मेदारियों में नहीं झोंकना चाहतीं, जो शादी और बच्चे पैदा करने जैसे जीवन के अहम पड़ावों को महत्व देती हैं. रहन-सहन के बढ़ते खर्च की वजह से भी कई युवा शादी का आर्थिक बोझ उठाने के लिए तैयार नहीं हैं. साथ ही चीन लंबे समय से लैंगिक असंतुलन से जूझ रहा है, जिसकी वजह देश की ‘वन चाइल्ड पॉलिसी’ और लड़कों को वरीयता देने की विरासत को माना जाता है. साल 2000 के दशक की शुरुआत में जब यह असंतुलन अपने चरम पर था, तब चीन का जन्म के समय लिंग अनुपात हर 100 लड़कियों पर 121 लड़कों तक पहुंच गया था. कुछ प्रांतों में तो यह अनुपात 100 लड़कियों पर 130 लड़के का था. लैंगिक असंतुलन खास तौर पर 1980 के दशक में पैदा हुए लोगों ने साफ देखा है. यह 1980 के दशक के मध्य से अल्ट्रासाउंड तकनीक के इस्तेमाल के कारण हुआ, जिसने माता-पिता को यह सुविधा दी कि अगर उनका बच्चा लड़की है तो वे गर्भपात करा सकते हैं. बचे हुए पुरुषों का क्या होगा? चीन में अविवाहित पुरुष कथित तौर पर ‘बचे हुए पुरुषों का युग’ (चीनी में शेंगनान शिदाई) का हिस्सा बन गए हैं. यह एक इंटरनेट शब्द है जो मोटे तौर पर 2020 और 2050 के बीच के दौर के लिए इस्तेमाल होता है, जब अनुमान है कि 30 मिलियन से 50 मिलियन चीनी पुरुष शादी के लिए दुल्हन खोजने में असमर्थ होंगे. पहेली यह है कि इनमें से कई ‘बचे हुए’ पुरुष शादी करना चाहते हैं और पत्नी की तलाश में बेताब हैं, लेकिन जीवनसाथी पाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं. घरेलू जीवनसाथी न मिलने पर कुछ चीनी पुरुष विदेशी दुल्हनों को खरीदने की ओर मुड़ गए हैं. इन दुल्हनों की बढ़ती मांग खास तौर पर ग्रामीण इलाकों में गैरकानूनी शादियों को बढ़ावा दे रही है. इसमें बच्चों और महिलाओं की शादियां शामिल हैं, जिन्हें मुख्य रूप से दक्षिण-पूर्व एशिया के पड़ोसी देशों से चीन में तस्करी करके लाया गया है. म्यांमार से चीन में दुल्हन की तस्करी पर 2019 में जारी ह्यूमन राइट्स वॉच की रिपोर्ट के मुताबिक दोनों तरफ की कानून प्रवर्तन एजेंसियों की नाकामी ने ऐसा माहौल तैयार कर दिया है, जिसमें तस्कर फल-फूल रहे हैं. चीनी सरकार ने अब इस कारोबार पर नकेल कसने की ठान ली है. मार्च 2024 में चीन के सार्वजनिक सुरक्षा मंत्रालय ने महिलाओं और बच्चों की अंतरराष्ट्रीय तस्करी के खिलाफ़ एक अभियान शुरू किया, जिसमें इन अपराधों को खत्म करने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाने की अपील की गई है. ‘खरीदी गई’ विदेशी दुल्हनें ऐसी शादियां अक्सर अनौपचारिक नेटवर्क या व्यवसायिक एजेंसियों के जरिए कराई जाती हैं जो कि चीन की स्टेट काउंसिल के हिसाब से गैरकानूनी हैं. ह्यूमन राइट्स वॉच का कहना है कि पड़ोसी देशों में महिलाओं और लड़कियों को आमतौर पर दलाल धोखा देते हैं और चीन में अच्छी सैलरी वाली नौकरी का वादा करके लाते हैं. चीन पहुंचने के बाद वे खुद को दलालों की दया पर छोड़ देती हैं और उन्हें चीनी पुरुषों को 3,000 अमेरिकी डॉलर (करीब 2.5 लाख रुपये) से 13,000 अमेरिकी डॉलर (करीब 11 लाख रुपये) के बीच बेचा जाता है. चीन में सीमा पार से आईं लड़कियों की शादी के आंकड़े जुटा पाना चुनौतीपूर्ण है क्योंकि ये गतिविधियां सीक्रेट तरीके से होती हैं. लेकिन ब्रिटेन के सरकारी विभाग के सबसे हालिया डेटा से पता चलता है कि वियतनामी मानव-तस्करी के 75 फीसदी पीड़ितों को चीन में तस्करी करके लाया गया था, जिनमें से 90 प्रतिशत मामले महिलाओं और बच्चों के थे. साल 2022 की अवॉर्ड विनिंग डॉक्यूमेंट्री द वूमन फ्रॉम म्यांमार, तस्करी की गई म्यांमार की एक महिला की कहानी है, जिसे चीन में शादी के लिए बेच दिया गया था. यह फिल्म तस्करी की गईं दुल्हनों के सामने आने वाली चुनौतियों को दर्शाती है. महिलाओं पर जुल्म की कहानी यह न सिर्फ उन महिलाओं के साथ होने वाली जबरदस्ती और बुरे बर्ताव को दिखाती है, बल्कि एक ऐसी व्यवस्था में अस्तित्व के लिए उनके संघर्ष को भी दर्शाती है जो उन्हें प्रोडक्ट की तरह देखती है. डॉक्यूमेंट्री में दिखाई गई तस्करी की शिकार महिला लैरी ने बताया कि बच्चे पैदा करने की उसकी क्षमता ही उसका अस्तित्व तय करती है. चीनी अधिकारी लगातार विदेश से खरीदी गई दुल्हनों से जुड़े घोटालों के बारे में चेतावनी देते रहते हैं. उदाहरण के लिए नवंबर 2024 में दो लोगों पर क्रॉस-बॉर्डर मैचमेकिंग प्लान में शामिल होने के आरोप में मुकदमा चलाया गया था. चीनी पुरुषों को ‘किफायती’ विदेशी पत्नियों के वादे के साथ विदेश में बेहद महंगे मैरिज टूरिज्म में फंसाया गया है. ऐसे भी मामले सामने आए हैं, जहां शादी के पूरे इंतेजाम होने से पहले ही दुल्हनें बड़ी रकम लेकर फरार हो गईं. देश के आर्थिक विकास के मामले में लेबर फोर्स बेशक अहम है. लेकिन चीनी पीपुल्स पॉलिटिकल कंसल्टेटिव कॉन्फ्रेंस के सदस्य जस्टिन लिन यिफू के अनुसार जो चीज अधिक मायने रखती है वह है इफेक्टिव लेबर. चीन ने अपनी बूढ़ी होती आबादी से जुड़ी भविष्य की चुनौतियों की आशंका में हाल के वर्षों में शिक्षा में अपने निवेश को लगातार बढ़ाया है. लेकिन इसके बावजूद इससे भी बड़ी चिंता बड़ी संख्या में बचे हुए पुरुषों की है, क्योंकि इससे सामाजिक स्थिरता को गंभीर खतरा हो सकता है. अब बच्चे पैदा करने के लिए महिलाएं खरीद रहा चीन, इतने रुपए में हो रहा सौदा चीन के लोगों में शादी न करवाने का चलन जोरो पर चल रहा है। वहां लोग अपना अधिकतर समय अपने कामकाज में ही लगा रहे है। जिसकों लेकर सरकार परेशान है। वहीं, दूसरी तरफ, शादी के लिए विदेशी दुल्हनों की … Read more

बलूचिस्तान जल रहा, पाकिस्तान के लिए अब नियंत्रण बनाना काफी मुश्किल, विद्रोहियों ने कई शहरों पर किया कब्जा

इस्लामाबाद  बलूचिस्तान जल रहा है और पाकिस्तान के लिए अब नियंत्रण बनाना काफी मुश्किल हो गया है। बलूचिस्तान के पाकिस्तान से टूटकर एक अलग मुल्क बनना अब तय होता जा रहा है। सिर्फ वक्त की बात है और ऐसा इसलिए क्योंकि पाकिस्तान की सरकारों ने सालों से बलूचों के साथ जो किया है और अभी भी बलूचों के साथ जो किया जा रहा है, उसने बलूचिस्तान के टूटने का रास्ता बना दिया है। बलूच विद्रोहियों से कैसे निपटा जाए, पाकिस्तान में इसपर बहस की जा रही है। कई लोग सरकार से कठोर बनने के लिए कह रहे हैं तो कुछ लोग बलूचों से बात करने की वकालत कर रहे हैं। डॉन में छपी एक एनालिसिसि रिपोर्ट में पत्रकार मुहम्मद आमिर राणा ने कुछ वजहों का जिक्र किया है। उन्होंने जो कुछ लिखा है, उसके आधार पर विश्लेषण करने से यही पता लगता है कि बलूचिस्तान का आज नहीं तो कल, टूटना तय है। उन्होंने लिखा है कि आतंकवाद विरोधी (COIN) अभियानों के लिए ग्लोबल प्रैक्टिस के मुताबिक आतंकवाद के खतरों से निपटने के लिए सबसे पहले उसे स्वीकार किया जाना चाहिए। मुहम्मद आमिर राणा ने लिखा है कि “पाकिस्तान के तथाकथित बुद्धिजीवी अपने रिसर्च से सरकार को गलत तथ्य बताते हैं, सरकारें गलत तथ्य जानना चाहती है, और पाकिस्तान की मानसिकता ही यही रही है कि विद्रोह को हराने का एकमात्र रास्ता उसे कुचलना है। विद्रोह को कुचलना ही एकमात्र जीत की कुंजी है।” बहुत भयानक गलती कर रहा पाकिस्तान? मुहम्मद आमिर राणा ने कहा है कि RAND कॉपरेशन ने COIN थ्योरी के जरिए दूसरे विश्वयुद्ध के हाद से 2010 तक 71 विद्रोहों को लेकर रिसर्च किया गया है, जिसमें किसी विद्रोह को कुचलकर जीत हासिल करने की थ्योरी को खारिज कर दिया गया है। इसमें कहा गया है कि हर विद्रोह अपने आप में अलग होता है और 24 में से 17 विद्रोह के खिलाफ कठोर नीति फेल हुई है। जबकि ज्यादातर सरकारें विद्रोह के खिलाफ कठोर रणनीति अपनाने पर ही जोर देती हैं। 286 पन्नों के COIN रिपोर्ट में बताया गया है कि किसी विद्रोह को आप कुचलकर नहीं जीत सकते हैं। डॉन के मुताबिक पाकिस्तान में बलूच विद्रोह का सबसे ताजा दौर साल 2003 में शुरू हुआ जब पाकिस्तानी सेना के एक सीनियर अधिकारी ने बलूचिस्तान में एक बलूच महिला के साथ क्रूर बलात्कार किया। इसके बाद से बलूचों का विद्रोह आज तक खत्म करने में सरकार नाकाम रही है। उस दौरान बलूच नेता नवाब अकबर बुगती और तत्कालीन सेना प्रमुख जनरल परवेज मुशर्रफ के बीच गतिरोध तब और बढ़ गया, जब 2005 में कोहलू के पास मुशर्रफ पर रॉकेट से हमला किया गया। 26 अगस्त 2006 को कोहलू के पास एक गुफा में बुगती की पाकिस्तानी सेना ने उस वक्त हत्या कर दी, जब राष्ट्रपति जनरल मुशर्रफ ने ही उन्हें मिलने के लिए इस्लामाबाद बुलाया था और वो उनसे मिलने के लिए बाहर निकले थे। वह सुई से इस्लामाबाद के लिए रवाना होने वाले थे, तभी उनकी हत्या कर दी गई और उसके बाद से बलूचिस्तान का उजाड़ और विशाल इलाका नर्क में तब्दील हो गया है। ये साल 2000 के बाद बलूच विद्रोहियों के साथ किया गया सबसे बड़ा धोखा था। बलूच विद्रोहियों से निपटने में क्यों नाकाम रहा पाकिस्तान? मुहम्मद आमिर राणा ने कहा है कि लेकिन पाकिस्तान में सामूहिक दंड देने पर यकीन किया जाता है, बंदूक की गोली से इंसाफ किया जाता है, महिलाओं से जबरदस्ती की जाती है, दमन को बढ़ावा दिया जाता है और भ्रष्टाचार सबसे आगे रहता है। जबकि पाकिस्तान में विद्रोहियों के पास बाहरी समर्थन होता है, जिसकी वजह से हर अभियान फेल होता है। बलूचिस्तान अभियान भी फेल हो रहा है। उन्होंने कहा कि अगर पाकिस्तान ने आतंकवाद विरोधी अभियान के बाद विकास और शासन सुधारों को प्राथमिकता दी होती तो बलूचिस्तान में हालात अलग हो सकते थे। रिसर्च में पाया गया है कि विद्रोह को शांत करने के 36 मामले इसलिए फेल हुए क्योंकि सैन्य सफलता के बाद सरकार की वैधता स्थापित नहीं की गई और शिकायतों का समाधान नहीं किया गया। इसके अलावा लोकतंत्र को कुचल दिया गया और लोकतांत्रिक शासन नहीं अपनाया गया। और पाकिस्तान भी यही कर रहा है।

1 अप्रैल से बदलेंगे बैंकिंग और टैक्स नियम, जानें आपकी जेब पर क्या होगा असर

नई दिल्ली  1 अप्रैल 2025 से कई अहम बदलाव लागू होने जा रहे हैं, जो सीधे आपकी जेब और बैंकिंग से जुड़े हैं. इनमें ATM ट्रांजैक्शन शुल्क, मिनिमम बैलेंस, TDS कटौती, डेबिट कार्ड सुविधाओं और अन्य कई महत्वपूर्ण नियम शामिल हैं. इनमें से कुछ नियम ऐसे भी हैं, जिनका ऐलान बजट 2025 के दौरान किया गया था. आइए जानते हैं इन बदलावों के बारे में विस्तार से. LPG, CNG-PNG और ATF की कीमतें     हर महीने की पहली तारीख को ऑयल कंपनियां LPG, CNG-PNG और ATF की कीमतों की समीक्षा करती हैं.     1 अप्रैल से इनके दाम बढ़ सकते हैं या घट सकते हैं.     सरकार और ऑयल कंपनियों के निर्णय के अनुसार कीमतों में परिवर्तन होगा. पॉजिटिव पे सिस्टम होगा लागू     बैंकिंग फ्रॉड रोकने के लिए कई बैंक पॉजिटिव पे सिस्टम लागू कर रहे हैं.     5,000 रुपये से अधिक के चेक पेमेंट के लिए ग्राहक को चेक नंबर, डेट, पेयी का नाम और अमाउंट वेरिफाई कराना होगा.     इससे धोखाधड़ी के मामलों में कमी आने की उम्मीद है. RuPay डेबिट कार्ड में होंगे बड़े बदलाव     नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) अपने RuPay डेबिट सेलेक्ट कार्ड में नए फीचर्स जोड़ने जा रहा है.     इसमें एयरपोर्ट लाउंज एक्सेस, इंश्योरेंस कवर, ट्रेवल, फिटनेस और वेलनेस जैसी सुविधाएं शामिल होंगी.     ये बदलाव 1 अप्रैल 2025 से प्रभावी होंगे. मिनिमम बैलेंस नियमों में बदलाव     SBI, पंजाब नेशनल बैंक समेत कई बैंक अपने सेविंग अकाउंट में न्यूनतम बैलेंस नियमों को संशोधित कर रहे हैं.     अकाउंट होल्डर को अब मिनिमम बैलेंस रखने के लिए क्षेत्र (गांव, टियर वाइज शहर) के आधार पर नई सीमा तय होगी.     मिनिमम बैलेंस नहीं रखने पर जुर्माना लग सकता है. ATM से पैसे निकासी का नियम     कई बैंक 1 अप्रैल से अपनी ATM निकासी नीति में बदलाव करने जा रहे हैं.     दूसरे बैंकों के ATM से पैसे निकालने की सीमा घटा दी गई है.     नए नियम के तहत ग्राहक हर माह केवल 3 बार ही दूसरे बैंक के ATM से निशुल्क निकासी कर पाएंगे.     वहीं 1 मई से फाइनेंशियल ट्रांजैक्‍शंस के लिए अतिरिक्‍त 2 रुपये लगेंगे.     कैश विड्रॉल के लिए भी फ्री लिमिट के बाद 17 रुपये की बजाय 19 रुपया लगेगा. सीनियर सिटीजन को राहत     सीनियर सिटीजन की TDS कटौती सीमा बढ़ाकर ₹1 लाख कर दी गई है.     TDS कटौती की सीमा पहले ₹50,000 थी मकान मालिकों को भी राहत     मकान मालिकों के लिए रेंट पर TDS कटौती की सीमा बढ़ाकर ₹6 लाख/वर्ष कर दी गई है.     पहले ये सीमा ₹2.4 लाख/वर्ष थी. विदेशी ट्रांजैक्शन पर TCS सीमा बढ़ी     पहले ₹7 लाख से अधिक के विदेशी ट्रांजैक्शन पर TCS कटता था.     अब ये सीमा बढ़ाकर ₹10 लाख कर दी गई है. एजुकेशन लोन पर TCS हटा     स्पेसिफिक फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस से लिए गए एजुकेशन लोन पर अब TCS नहीं कटेगा.     पहले ₹7 लाख से अधिक के एजुकेशन ट्रांजैक्शन पर 5% TCS लागू था. डिविडेंड और म्यूचुअल फंड से कमाई पर TDS में राहत     डिविडेंड इनकम पर TDS की सीमा ₹5000 से बढ़ाकर ₹10,000 प्रति वित्त वर्ष कर दी गई है.     म्यूचुअल फंड यूनिट से कमाई पर भी यही नियम लागू होगा. इन नियमों में बदलाव का सीधा असर आप पर पड़ेगा. बैंकिंग नियमों से लेकर टैक्स और वित्तीय योजनाओं तक, ये नए नियम आपकी फाइनेंशियल प्लानिंग को प्रभावित कर सकते हैं. ये UPI अकाउंट्स होंगे बंद  1 अप्रैल से अगला बदलाव UPI से जुड़ा हुआ है और जिन मोबाइल नंबरों से जुड़े यूपीआई अकाउंट्स लंबे समय से एक्टिव नहीं हैं, बैंक रिकॉर्ड से हटाया जाएगा. अगर आपका फोन नंबर यूपीआई ऐप से जुड़ा है और आपने लंबे समय से इसका इस्तेमाल नहीं किया है तो इसकी सेवाएं बंद की जा सकती हैं.  Tax से जुड़े बदलाव बजट 2025 में मिडिल क्‍लास को राहत देते सरकार ने कई बड़े ऐलान किए गए थे, जिसमें टैक्‍स स्‍लैब में बदलाव से लेकर टीडीस, टैक्‍स रिबेट और अन्य चीजें शामिल थीं. वहीं पुराने इनकम टैक्‍स एक्‍ट 1961 की जगह पर नए इनकम टैक्‍स बिल का प्रस्‍ताव रखा था. यह सभी बदलाव 1 अप्रैल 2025 से प्रभाव में आने वाले हैं. नए टैक्‍स स्‍लैब के तहत सालाना 12 लाख रुपये तक कमाने वाले व्यक्तियों को टैक्‍स का भुगतान करने से छूट दी जाएगी. इसके अलावा, वेतनभोगी कर्मचारी 75,000 रुपये की स्‍टैंडर्ड डिडक्‍शन के लिए पात्र होंगे. इसका मतलब है कि 12.75 लाख रुपये तक की वेतन आय अब टैक्‍स से मुक्त हो सकती है. हालांकि, यह छूट केवल उन लोगों पर लागू होती है जो नया टैक्‍स विकल्‍प चुनते हैं.  इसके अलावा सोर्स पर टैक्‍स कटौती (TDS)सोर्स पर टैक्‍स कटौती (TDS) विनियमों को भी अपडेट किया गया है, जिसमें अनावश्यक कटौती को कम करने और टैक्‍सपेयर्स के लिए कैश फ्लो में सुधार करने के लिए विभिन्न वर्गों में सीमा बढ़ाई गई है. उदाहरण के लिए, वरिष्ठ नागरिकों के लिए ब्याज आय पर टीडीएस की सीमा दोगुनी करके 1 लाख रुपये कर दी गई है, जिससे बुजुर्गों के लिए वित्तीय सुरक्षा बढ़ गई है.इसी तरह, किराये की आय पर छूट की सीमा बढ़ाकर 6 लाख रुपये सालाना कर दी गई है, जिससे मकान मालिकों के लिए बोझ कम हो गया है और शहरी क्षेत्रों में किराये के बाजार को बढ़ावा मिल सकता है.

पीएम आज 30 मार्च को संघ के संस्थापक हेडगेवार के स्मारक जाएंगे, पीएम1987 में संघ से बीजेपी में आए थे

नागपुर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस महीने के अंत में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का मुख्यालय जाएंगे.  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 11 साल के अपने कार्यकाल मे पहली बार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के मुख्यालय जाएंगे। नागपुर में संघ का मुख्यालय रेशमबाग में स्थित है। पीएम मोदी वैसे तो इन सालों में कई बार नागपुर के दौरे पर पहुंचे हैं लेकिन वह पहली बार रेशमबाग स्थित संघ मुख्यालय जाएंगे। पीएम मोदी के दौरे को लेकर नागपुर में चाकचौबंद तैयारियां की गई है। इस महीने 17 मार्च को नागपुर के महल इलाके में हिंसा और दंगों को देखते हुए पीएम मोदी की सुरक्षा की अभेद्य इंतजाम किए गए हैं। बतौर प्रधानमंत्री पहली बार संघ मुख्यालय जाने को लेकर राजनीतिक हलकों में तरह-तरह की चर्चाएं छिड़ी हुई हैं। पीएम मोदी आज 30 मार्च को नागपुर पहुंचेंगे। पीएम मोदी अक्टूबर, 2001 में सीएम बने थे, लेकिन वह इसके बाद से कभी संघ मुख्यालय नहीं गए हैं। वह 1972 में प्रचारक बने थे। 1987 में वह भाजपा में शामिल हुए। बाद में वरिष्ठ नेताओं की ओर से मोदी को पार्टी में बड़ी जिम्‍मेदारी मिली थी। अभी तक जो जानकारी सामने आई है उसके अनुसार पीएम मोदी ने संघ मुख्यालय का आखिरी दौरा बतौर प्रचारक ही किया था। प्रधानमंत्री मोदी के दौरे को लेकर सुरक्षा एजेंसियों ने व्यापक तैयारियां की हैं। सुरक्षा व्यवस्था में 5 हजार से ज्यादा पुलिसकर्मी और अन्य एजेंसियों के जवान तैनात रहेंगे। ऐतिहासिक है PM मोदी का दौरा गुड़ी पड़वा के मौके पर नागपुर आ रहे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वागत की बीजेपी ने जोरदार तैयारी की है। जिस 30 किमी के मार्ग और 47 चौराहों से वह गुजरेंगे, उन्हें सजाया जा रहा है। पीएम मोदी का यह दौरा बेहद खास है, क्योंकि 12 साल बाद वह आरएसएस मुख्यालय का दौरा करने वाले हैं। इससे पहले 16 सितंबर 2012 को नरेंद्र मोदी ‘स्मृति मंदिर’ आए थे। तब वह गुजरात के मुख्यमंत्री थे। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्व सरसंघचालक केएस सुदर्शन के अंतिम दर्शन के लिए आए थे। जानें क्या है पूरा कार्यक्रम आधिकारिक कार्यक्रम के हिंदू नववर्ष के शुभारम्भ में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रतिपदा कार्यक्रम के साथ प्रधानमंत्री स्मृति मंदिर में दर्शन करेंगे और आरएसएस के संस्थापकों को श्रद्धांजलि देंगे। वह सुबह करीब 9 बजे स्मृति मंदिर में दर्शन करेंगे, फिर दीक्षाभूमि जाएंगे। सुबह करीब 10 बजे वे नागपुर में माधव नेत्रालय प्रीमियम सेंटर की आधारशिला रखेंगे और एक जनसभा को संबोधित करेंगे। माधव नेत्रालय आई इंस्टीट्यूट एंड रिसर्च सेंटर का नया विस्तार भवन है। 2014 में स्थापित यह संस्थान नागपुर में स्थित एक प्रमुख सुपर-स्पेशलिटी नेत्र चिकित्सा केंद्र है। संस्थान की स्थापना गुरुजी श्री माधवराव सदाशिवराव गोलवलकर की स्मृति में की गई थी। आगामी परियोजना में 250 बिस्तरों वाला अस्पताल, 14 बाह्य रोगी विभाग (ओपीडी) और 14 मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर होंगे, जिसका उद्देश्य लोगों को सस्ती और विश्व स्तरीय नेत्र उपचार सेवाएं प्रदान करना है। प्रधानमंत्री दोपहर करीब 12:30 बजे नागपुर में सोलर डिफेंस एंड एयरोस्पेस लिमिटेड में यूएवी के लिए लोइटरिंग म्यूनिशन टेस्टिंग रेंज और रनवे सुविधा का उद्घाटन करेंगे। पीएम मोदी इसके बाद छत्तीसगढ़ के लिए रवाना होंगे। 2007 में आए थे बाजपेयी गुढ़ीपाड़वा के मौके पर प्रधानमंत्री के नागपुर आगमन को लेकर काफी ज्यादा अलर्ट है। बीजेपी की तरफ से उनके स्वागत की अभूतपूर्व तैयारियां की गई हैं। पीएम मोदी के एयरपोर्ट पर आगमन से लेकर स्मृति मंदिर रेशिमबाग, दीक्षाभूमि, माधव नेत्रालय कार्यक्रम को लेकर तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। गुढ़ीपाड़वा को महाराष्ट्र में नए साल के तौर पर मनाया जाता है। 2007 में अटल बिहारी बाजपेयी ने डॉ. हेडगेवार स्मारक स्मृति मंदिर का दौरा किया था। तब वे प्रधानमंत्री नहीं थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी प्रचारक के तौर पर रेशिमबाग आ चुके हैं लेकिन बतौर प्रधानमंत्री पहली बार वह संघ मुख्यालय जाएंगे। इसको लेकर राजनीतिक तौर पर अटकलों का बाजार गर्म और कौतूहल है। उनके इस दौरे को काफी ज्यादा अहम माना जा रहा है, क्योंकि वह पहली बार बतौर पीएम रेशिमबाग में प्रवेश करेंगे। इस कार्यक्रम में महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फडणवीस, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के साथ संघ का शीष नेतृत्व मौजूद रहेगा। प्रधानमंत्री की सुरक्षा संभालने वाली एसपीपी ने तमाम प्रोटोकॉल को ध्यान में रखते हुए तैयारियों को पूरा कर लिया है।

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