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श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन ने इस्कॉन से अन्य देशों में असामयिक रथ यात्रा का आयोजन नहीं करने को कहा

भुवनेश्वर  श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (एसजेटीए) ने इस्कॉन से अन्य देशों में असामयिक रथ यात्रा का आयोजन नहीं करने को कहा है. असामयिक रथ यात्रा को लेकर उठे विवाद को सुलझाने के लिए भुवनेश्वर के स्टेट गेस्ट हाउस में बैठक हुई. गजपति महाराज दिव्य सिंह देब की अगुवाई में हुई इस बैठक में मायापुर इंटरनेशनल सोसाइटी फॉर कृष्णा कॉन्शियसनेस (इस्कॉन-अंतरराष्ट्रीय कृष्णभावनामृत संघ) मुख्यालय के वरिष्ठ पदाधिकारी शामिल हुए. एजेटीए के मुख्य प्रशासक अरबिंद पाधी ने कहा कि इस्कॉन ने 2021 में भारत में अन्य तिथियों पर रथ यात्रा का आयोजन न करने का निर्णय लिया था. उन्होंने कहा, “हम इस निर्णय के लिए उनका आभार व्यक्त करते हैं, लेकिन उनसे यह सुनिश्चित करने को कहा है कि अन्य देशों में भी अन्य तिथियों पर यात्रा का आयोजन न हो.” बैठक में पुरी गजपति, एसजेटीए सदस्य और इस्कॉन प्रतिनिधि पाधी ने कहा कि, इस्कॉन के प्रतिनिधियों से कहा गया कि शास्त्रों के अनुसार हिंदू कैलेंडर के आषाढ़ महीने में शुक्ल पक्ष की द्वितीया से दशमी तिथि के बीच रथ यात्रा आयोजित की जानी चाहिए. एसजेटीए प्रमुख ने कहा कि, इस साल भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा 27 जून को है और इस्कॉन से अनुरोध किया गया है कि वह दुनिया भर में इसी दिन रथ यात्रा का आयोजन करे. उन्होंने कहा, “हमें उम्मीद है कि इस्कॉन भक्तों की धार्मिक भावनाओं का सम्मान करेगा.” मंदिर के सेवादारों और जगन्नाथ पंथ के अनुयायियों ने इस बात पर चिंता जताई है कि इस्कॉन ने अभी तक विदेशों में असामयिक रथ यात्रा को रोकने के लिए कोई ठोस प्रतिबद्धता नहीं जताई है. उन्होंने कहा कि, केंद्र सरकार को अन्य देशों में रथ यात्रा को रोकने के लिए हस्तक्षेप करना चाहिए. बैठक में मायापुर इस्कॉन के प्रतिनिधि उन्होंने पूछा कि, अगर दुनिया भर में अन्य धर्मों के त्यौहार एक ही दिन मनाए जाते हैं, तो करोड़ों हिंदुओं की आस्था का प्रतीक रथ यात्रा दुनिया भर में एक ही दिन क्यों नहीं मनाई जा सकती? श्रीमंदिर के वरिष्ठ सेवादार गौरहरि प्रधान ने कहा कि, इस्कॉन ने भारत में असामयिक रथ यात्रा का आयोजन बंद कर दिया है, लेकिन उसने अन्य देशों में ऐसा करने की प्रतिबद्धता नहीं जताई है. उन्होंने कहा, “इस्कॉन के प्रतिनिधियों ने कहा कि वे आने वाले दिनों में इस मामले पर चर्चा करेंगे. केंद्र और राज्य सरकारों को यह सुनिश्चित करने के लिए हस्तक्षेप करना चाहिए कि विदेशों में असामयिक रथ यात्रा का आयोजन न हो.” वहीं, पुरी निवासी हेक्टर मिश्रा ने कहा कि, इस्कॉन पूरी दुनिया में मशहूर है और इस्कॉन को सोचना चाहिए कि विदेशों में बेमौसम रथ यात्रा आयोजित करना कहां तक उचित है. अगर वे भगवान जगन्नाथ को अपना भगवान मानते हैं, तो उन्हें महाप्रभु की परंपराओं का पालन करना चाहिए. क्या दुनिया भर में अन्य धार्मिक त्योहार एक ही दिन या अलग-अलग दिनों में मनाए जाते हैं? इसलिए, अगर इस्कॉन जगन्नाथ को अपना पसंदीदा देवता मानता है और इस तरह की बेमौसम रथ यात्रा आयोजित करता है, तो यह निंदनीय है.” उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार को दुनिया भर के हर राष्ट्राध्यक्ष को पत्र भेजकर यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनके देशों में बेमौसम रथ यात्रा आयोजित न की जाए. 1966 में न्यूयॉर्क शहर में स्वामी प्रभुपाद द्वारा इसकी स्थापना के बाद से इस्कॉन का व्यापक विस्तार हुआ है. दुनिया भर में इस्कॉन के 400 से ज्यादा मंदिर हैं. इस्कॉन गौड़ीय-वैष्णव संप्रदाय से संबंधित है, जो वैदिक या हिंदू संस्कृति के भीतर एकेश्वरवादी परंपरा है. दार्शनिक रूप से यह संस्कृत ग्रंथों भगवद गीता और भागवत पुराण या श्रीमद्भागवतम् पर आधारित है. ये भक्ति योग परंपरा के ऐतिहासिक ग्रंथ हैं, जो सिखाते हैं कि सभी जीवित प्राणियों के लिए अंतिम लक्ष्य भगवान या भगवान कृष्ण, जो “सर्व-आकर्षक” हैं, के प्रति अपने प्रेम को फिर से जागृत करना है.

स्कूल टीचर को एडल्ट वेबसाइट पर मॉडल के रूप में काम करते पकड़े जाने पर निलंबित कर दिया

रोम इटली में एक कैथोलिक स्कूल की टीचर को एडल्ट वेबसाइट ओनली फैंस पर मॉडल के रूप में काम करते हुए पकड़े जाने पर निलंबित कर दिया गया। दरअसल, 20 वर्षीय एलेना मारागा एक स्कूल शिक्षिका के तौर पर बच्चों को पढ़ाने के अलावा ओनली फेंस पर भी काम करती थी। एक बच्चे के माता-पिता ने उसे एडल्ट वेबसाइट पर काम करते हुए पहचान लिया। बाद में उन्होंने व्हाट्सअप ग्रुप चैट और फेसबुक के माध्यम से बाकी अभिभावकों को इस बारे में जानकारी दी। द टेलीग्राफ की रिपोर्ट के मुताबिक इन सभी ने मिलकर स्कूल प्रशासन से इसकी शिकायत की। बाद में स्कूल प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए मरागा को सस्पेंड कर दिया। मरागा ने इस कार्रवाई का विरोध किया। उन्होंने तर्क दिया कि वह अपने खाली समय में जो भी करती हैं उससे किसी को क्या ही नुकसान हो सकता है। मरागा ने कहा कि स्कूल की तरफ से उसे वर्तमान में लगभग 1200 यूरो सैलरी के तौर पर मिलते हैं जो कि अस्थाई हैं, इसलिए मैंने पहले ही अन्य करियर के बारे में सोच लिया था। मरागा ने कहा कि मैं ऐसे कई दोस्तों को जानती हूं जो इसमें मुझसे बहुत बेहतर कमाते हैं। मुझे मेरे शरीर पर गर्व है, मैंने इसे काफी मेहनत के साथ बनाया है। ऐसे में मैं इसे दिखाना पसंद करती हूं। इतावली मीडिया के अनुसार, मरागा के पास शैक्षिक रूप से विज्ञान की डिग्री है और उन्हें कैथोलिक नर्सरी स्कूल में काम करने का 5 साल का अनुभव है।

Chandrayaan-3 ने चंद्रमा की सतह तापीय भौतिकी प्रयोग से पानी और बर्फ की खोज में महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया

नई दिल्ली चंद्रयान-3 ने चंद्रमा पर पानी और बर्फ की खोज की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। चंद्रमा की सतह तापीय भौतिकी प्रयोग (ChaSTE) से पानी और बर्फ की खोज में महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है। विक्रम लैंडर द्वारा किए गए इस प्रयोग ने चांद की उच्च अक्षांश वाली मिट्टी (रेगोलिथ) से असाधारण इन-सीटू तापमान माप प्रदान किए हैं, जिससे चांद के तापीय वातावरण के साथ-साथ पानी और बर्फा के जमा होने की संभावना की उम्मीद जगी है। इसरो के भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला (PRL) से के दुर्गा प्रसाद ने टाइम्स ऑफ इंडिया से कहा, “पानी और बर्फ का पता लगाना चंद्रमा पर इंसानों के जीवन की संभावना और आगे की खोज के लिए एक अहम कदम है। चांद के तापमान न केवल पानी और बर्फ को निर्धारित करते हैं, बल्कि यह अन्य वैज्ञानिक और अन्वेषण पहलुओं को भी प्रभावित करते हैं।” चंद्रयान-3 मिशन से प्राप्त नई जानकारी को Nature Communications Earth & Environment पत्रिका में प्रकाशित किया गया है। ChaSTE ने चांद के दक्षिणी ध्रुव क्षेत्र में 355K (82°C) तक तापमान मापे हैं जो कि अपेक्षित 330K से 25K अधिक था। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह वृद्धि लैंडर के सूरज की ओर झुके 6° के स्थानीय ढलान पर स्थित होने के कारण हुई। ChaSTE द्वारा किए गए अवलोकनों के आधार पर, टीम का कहना है कि 14° से अधिक ढलान वाले बड़े पोलर क्षेत्रों में पानी और बर्फ के स्थिर जमा होने की संभावना हो सकती है। ये क्षेत्र कम सौर विकिरण प्राप्त करते हैं और इसलिए तापमान कम बनाए रखते हैं, जिससे वे भविष्य के चांदी अन्वेषण और संभावित मानव जीवन के लिए अधिक उपयुक्त बनते हैं। चांद पर पानी की खोज और इसके संभावित उपयोग के लिए कई देशों की अंतरिक्ष एजेंसियां अपनी नजरें गड़ाए हुए हैं। चंद्रयान-3 से प्राप्त ChaSTE के परिणाम भविष्य के चांद मिशनों और स्थायी मानव जीवन की संभावनाओं को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। इस डेटा को आगे विश्लेषण किया जाएगा और आगामी शोध प्रकाशित करने की उम्मीद है।

बांग्लादेश की सेना ने राजधानी ढाका में बड़ी संख्या में बख्तरबंद वाहनों और बड़ी संख्या में सैनिकों को बुलाया

ढाका  बांग्लादेश की सेना ने राजधानी ढाका में बड़ी संख्या में बख्तरबंद वाहनों और बड़ी संख्या में सैनिकों को बुलाया है। रिपोर्ट के अनुसार, सेना की हर ब्रिगेड से 100 सैनिकों को ढाका में इकठ्ठा होने को कहा गया है। ये घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है, जब बांग्लादेश की सेना और हसीना विरोधी आंदोलन की अगुवाई करने वाले संगठन स्टूडेंट अगेंस्ट्र डिस्क्रिमिनेशन के बीच संबंधों में दरार की खबरें आई है। नॉर्थ ईस्ट न्यूज की रिपोर्ट में खुलासा किया गया है कि सावर स्थित सबसे महत्वपूर्ण 9वीं डिवीजन के सैनिकों ने क्रमिक तरीके से ढाका में प्रवेश करना शुरू कर दिया है। रिपोर्ट में बांग्लादेश के सुरक्षा प्रतिष्ठान के उच्च पदस्थ सूत्रों के हवाले से कहा है कि सेना देश को देश पर अपनी पकड़ मजबूत करने में कुछ और दिन लगेंगे। बांग्लादेश की सेना के पास डिवीजन आकार की 10 क्षेत्रीय कमान है, जिनमें ब्रिगेड की कोई निश्चित संख्या नहीं है। 9वीं इंन्फैंट्री डिवीजन सावर में स्थित है, जबकि एक अन्य महत्वपूर्ण 19वीं इन्फैंट्री डिवीजन घाटैल में तैनात है। सेना प्रमुख को लेकर छात्र नेताओं का खुलासा बांग्लादेश सेना की सक्रियता छात्र नेता और बांग्लादेश की अंतरिम सरकार में स्थानीय सरकार, ग्रामीण विकास और सहकारिता मंत्रालय के सलाहकार आसिफ महमूद शाजिब भुइयां के खुलासे के बाद हुई है। भुइयां ने एक वीडियो में दावा किया था कि सेना प्रमुख जनरल वकार उज-जमान ने नोबेल शांति पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस को अंतरिम सरकार का मुख्य सलाहकार नियुक्त करने पर अनिच्छा से सहमति जताई थी। पहले से रिकॉर्ड किए गए इस वीडियो को शुक्रवार को जारी किया गया था। इससे पहले एक अन्य प्रभावशाली छात्र नेता हसनत अब्दुल्ला ने 11 मार्च को जनरल जमान के साथ एक गुप्त बैठक के बाद सेना प्रतिष्ठान के खिलाफ आंदोलन शुरू करने की धमकी थी। कहा गया था कि जनरल जमान ने सुझाव दिया था कि बांग्लादेश में चुनाव होने पर शेख हसीना की अवामी लीग राजनीति में वापस आ सकती है और चुनाव भी लड़ सकती है। सेना के खिलाफ आंदोलन की धमकी हालांकि, अब्दुल्ला और भुइयां ने यह नहीं बताया कि उन्होंने जनरल जमान के साथ बातचीत को सार्वजनिक करने के लिए दो सप्ताह से अधिक समय का इंतजार क्यों किया, लेकिन अब्दुल्ला ने अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना की वापसी का रास्ता खोलने के लिए सेना के अधिकारियों के खिलाफ आंदोलन शुरू करने की धमकी दी। भुइयां के खुलासे और अब्दुल्ला की फेसबुक पोस्ट के तुरंत बाद बांग्लादेश की तीनों सेनाओं के प्रमुखों ने एक वर्चुअल बैठक की, जिसका उद्येश्य निकट भविष्य में छात्रों के एक और विद्रोह की आशंका में कदम उठाना था। यह अभी स्पष्ट नहीं है कि सेना मजबूत कदम उठाएगी या नहीं। इस बीच 26 मार्च से मोहम्मद यूनुस तीन दिनों की चीन यात्रा पर जाने वाले हैं। सेना प्रमुख को बदनाम करने की कोशिश छात्र प्रतिनिधियों और जनरल वकार के बीच 11 मार्च की बैठक के विवरण को सार्वजनिक किए जाने ने बांग्लादेश में अधिकांश लोगों को हैरान कर दिया है। इसे सेना प्रमुख की छवि को खराब करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। दरअसल, यूनुस को यह महसूस होने लगा है कि पिछले साल 8 अगस्त को मुख्य सलाहकार के रूप में कार्यभार संभालने के बाद उनकी स्थिति काफी कमजोर हो गई है। यही वजह है कि उन्होंने नई दिल्ली के सामने शांति का प्रस्ताव रखा है और बिम्सटेक सम्मेलन में पीएम नरेंद्र मोदी से मुलाकात की मांग की है। हालांकि, यह मुलाकात संभव नहीं है क्योंकि यूनुस सरकार में शामिल अधिकारियों ने लगातार भारत के खिलाफ उकसाऊ बयानबाजी की है। इसके अलावा भारतीय प्रतिष्ठान जल्द ही एक लोकतांत्रिक-चुनावी प्रक्रिया देखना चाहता है, जिससे एक वैध राजनीतिक दल सत्ता में आए, जिसके साथ वह आगे बढ़ सके। इस बीच जनरल जमान के नेतृत्व में सेना बांग्लादेश में अहम आधार बनी हुई है।

बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के मानवाधिकारों का हो रहा उल्लंघन : अरुण कुमार

नई दिल्ली बंगलूरू में चल रही संघ की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक में बांग्लादेश का मुद्दा उठा और वहां अल्पसंख्यकों खासकर हिंदुओं के खिलाफ हो रही हिंसा पर चिंता जाहिर की गई। सह-सरकार्यवाह अरुण कुमार ने एक बयान में कहा कि बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के मानवाधिकारों का उल्लंघन हो रहा है। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ हो रही हिंसा की वजह राजनीतिक ही नहीं बल्कि धार्मिक भी है। ‘बांग्लादेश हिंसा की वजह धार्मिक भी’ अरुण कुमार ने बयान में कहा कि हम बांग्लादेश के हिंदू वर्ग के साथ एकजुटता दिखाते हैं। हमने बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के प्रति एकजुटता दिखाते हुए मानवाधिकारों के उल्लंघन पर चिंता जताई है। हमें ये नहीं मानना चाहिए कि इस हिंसा की वजह सत्ता में बदलाव के चलते राजनीतिक ही है बल्कि इसका धार्मिक कारण भी है। अल्पसंख्यकों और हिंदुओं को लगातार निशाना बनाया जा रहा है। ‘भारत और पड़ोसी देशों के बीच अविश्वास पैदा करने की कोशिश’ अरुण कुमार ने कहा कि ‘धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा कोई नई नहीं है। साल 1951 में बांग्लादेश में हिंदू जनसंख्या 22 प्रतिशत थी, जो अब घटकर 7.95 प्रतिशत रह गई है। यह बड़ी गिरावट है। इस बार जो हिंसा हो रही है, उससे ऐसा लग रहा है कि इसे सरकार और सरकारी संस्थानों का भी समर्थन है। वहां भारत विरोध बढ़ रहा है। अपने प्रस्ताव में हमने अंतरराष्ट्रीय ताकतों को लेकर भी चिंता जाहिर की है। भारत और इसके पड़ोसी देश सिर्फ देशों का समूह नहीं हैं बल्कि इनका साझा इतिहास है। हमारे बीच बहुत कुछ समान है। कई वैश्विक शक्तियां भारत और इसके पड़ोसी देशों के बीच अविश्वास पैदा करने की कोशिश कर रही हैं। उल्लेखनीय है कि बांग्लादेश में बीते साल शेख हसीना सरकार के सत्ता से बाहर होने के बाद से ही वहां अल्पसंख्यकों खासकर हिंदुओं के खिलाफ बड़े पैमाने पर हिंसा हुई। हिंसा की इन घटनाओं पर कई देशों ने चिंता जाहिर की। भारत ने भी इस पर कड़ी आपत्ति जताई। हालांकि इसके बावजूद बांग्लादेश में अल्पसंख्यक समुदाय लगातार कट्टरपंथियों के निशाने पर बना हुआ है। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की तीन दिवसीय अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक बंगलूरू में शुक्रवार से चल रही है। यह संघ की निर्णय लेने वाली सर्वोच्च संस्था है। इस बैठक के दौरान बांग्लादेश हिंसा के साथ ही मणिपुर, भाषा विवाद और संघ के शताब्दी समारोह को लेकर प्रस्ताव पारित किए जाएंगे।   ‘भाजपा अध्यक्ष चुनने की प्रक्रिया जारी’ भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव को लेकर पूछे गए सवाल पर अरुण कुमार ने कहा कि ‘संघ के तहत 32 से ज्यादा संगठन काम करते हैं। हर संगठन अपने आप में स्वतंत्र है और उसकी फैसले लेने की स्वतंत्र प्रक्रिया है। हर संगठन के अपने सदस्य, चुनाव और उनकी पूरी प्रक्रिया अलग है। भाजपा और संघ के बीच कोई मतभेद नहीं है। हम देश औऱ समाज के लिए मिलकर काम करते हैं। संगठन की प्रक्रिया चल रही है और जिले और राज्य स्तर पर समीतियां गठित कर दी गई हैं। भविष्य में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव होगा।’

सीएम ने कहा, “हिंसा में शामिल लोगों को जब तक हम सबक नहीं सिखा देते, तब तक हम लोग शांत नहीं बैठेंगे

 नागपुर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस शनिवार को नागपुर हिंसा को लेकर वरिष्ठ पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ बैठक की. इसके बाद उन्होंने कहा कि नागपुर हिंसा को लेकर झूठा प्रचार किया गया कि  कुरान की आयत जलाई गई, जिसकी वजह से बड़े पैमाने पर हिंसा फैल गई. सीएम ने आगे कहा, “हिंसा में शामिल लोगों को जब तक हम सबक नहीं सिखा देते, तब तक हम लोग शांत नहीं बैठेंगे. खासकर पुलिसकर्मियों पर जिन लोगों ने हमला किया है, उन्हें हम नहीं छोड़ेंगे.”उन्होंने कहा, “दंगाइयों से हिंसा में हुई नुकसान की भरपाई की जाएगी. उनकी प्रोप्रटी भी जब्त की जाएगी.” सीएम फडणवीस ने बुलडोजर एक्शन को लेकर कहा कि जहां चलाने की आवश्यकता होगी, वहां बुलडोजर चलाया जाएगा. किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा. किसको कितना मुआवजा मिलेगा? नागपुर में जिला प्रशासन ने इसके साथ ही मुआवजा वितरण की प्रक्रिया शुरू कर दी है और जिन लोगों के वाहनों का पूरी तरह से नुकसान हुआ है, उन्हें ₹50,000 का मुआवजा मिलेगा। इसके अलावा जिन गाड़ियों को कम नुकसान हुआ है, उनके लिए ₹10,000 का मुआवजा निर्धारित किया गया है। जो लोग बीमा का लाभ उठा चुके हैं, उन्हें मुआवजा नहीं दिया जाएगा। दंगे के दौरान जिनकी संपत्तियों को नुकसान हुआ, उनके पंचनामा की प्रक्रिया अब शुरू की जा चुकी है। प्रशासनिक कर्मचारी और अधिकारी घर-घर जाकर नुकसान का आकलन कर रहे हैं और सभी का लेखा-जोखा तैयार कर रहे हैं। किस अफवाह ने नागपुर को आग में झोंका? बता दें कि नागपुर में हिंसा इस अफवाह के बाद फैली कि औरंगजेब की कब्र हटाने के लिए एक दक्षिणपंथी संगठन द्वारा किए गए प्रदर्शन के दौरान पवित्र आयत लिखी चादर जलाई गई थी। हिंसा के इस मामले में अब तक कुल 105 लोग पकड़े गए हैं। पुलिस के मुताबिक, नागपुर हिंसा के सिलसिले में 10 किशोर भी हिरासत में लिए गए हैं। बता दें कि हिंसा के दौरान DCP स्तर के 3 अधिकारियों सहित 33 पुलिसकर्मी घायल हो गए थे। पुलिस ने मुख्य आरोपी एवं ‘माइनॉरिटी डेमोक्रेटिक पार्टी’ की शहर इकाई प्रमुख फहीम खान और 5 अन्य के खिलाफ राजद्रोह और सोशल मीडिया पर गलत सूचना फैलाने के आरोप में मामला दर्ज किया है।

बांग्लादेश में हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यकों के खिलाफ मानवाधिकारों का उल्लंघन हो रहा : RSS

बेंगलुरु राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा ने बांग्लादेश में हिंदुओं के उत्पीड़न के खिलाफ एक प्रस्ताव पारित किया है और बांग्लादेश में हिंदू समुदाय के साथ एकजुटता से खड़े होने का आह्वान किया है. आरएसएस ने इस मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र से हस्तक्षेप करने की मांग की है. प्रतिनिधि सभा की ओर से पारित प्रस्ताव में कहा गया है कि बांग्लादेश में हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यकों के खिलाफ मानवाधिकारों का उल्लंघन हो रहा है जिस पर प्रतिनिधि सभा अपनी चिंता व्यक्त करती है. बांग्लादेश में हिंदुओं की आबादी 1951 में 22 प्रतिशत से घटकर 7 प्रतिशत रह गई है. मानवाधिकार हनन का गंभीर मामला प्रस्ताव में लिखा है, ‘अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा, बांग्लादेश में हिंदू और अन्य अल्पसंख्यक समुदायों पर इस्लामी कट्टरपंथी तत्वों द्वारा लगातार हो रही सुनियोजित हिंसा, अन्याय और उत्पीड़न पर गहरी चिंता व्यक्त करती है. यह स्पष्ट रूप से मानवाधिकार हनन का गंभीर मामला है.’ बांग्लादेश में ज्यादातर पीड़ित हिंदू इसमें लिखा है, ‘बांग्लादेश में वर्तमान सत्ता पलट के समय मठ-मंदिरों, दुर्गा पूजा पंडालों और शिक्षण संस्थानों पर हमले, मूर्तियों का अनादर, हत्याएं, संपत्ति की लूट, महिलाओं के अपहरण और अत्याचार, रेप, जबरन धर्मांतरण जैसी अनेक घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं. इन घटनाओं को केवल राजनीतिक बताकर इनके मजहबी पक्ष को नकारना सत्य से मुंह मोड़ने जैसा होगा क्योंकि अधिकतर पीड़ित हिंदू और अन्य अल्पसंख्यक समुदाओं से ही हैं.’ UN से दखल देने की अपील प्रस्ताव में कहा गया है, ‘कुछ अंतरराष्ट्रीय शक्तियां जानबूझकर भारत के पड़ोसी क्षेत्रों में अविश्वास और टकराव का वातावरण बनाते हुए एक देश को दूसरे के खिलाफ खड़ा कर अस्थिरता फैलाने का प्रयास कर रही हैं. प्रतिनिधि सभा का मत है कि संयुक्त राष्ट्र जैसे अंतरराष्ट्रीय संगठनों और वैश्विक समुदाय को बांग्लादेश में हिंदू और अन्य अल्पसंख्यक समुदायों के साथ हो रहे अमानवीय व्यवहार का गंभीरता से संज्ञान लेना चाहिए और बांग्लादेश सरकार पर इन हिंसक गतिविधियों को रोकने का दबाव बनाना चाहिए.’  

ट्विटर की नीली चिड़िया का लोगो भी हुआ नीलामी

सैन फ्रांसिस्को ट्विटर की नीली चिड़िया का लोगो कभी सोशल मीडिया की दुनिया में पहचान का प्रतीक था, लेकिन जब से एलन मस्क ने ट्विटर का अधिग्रहण किया, उन्होंने इस प्लेटफॉर्म में कई बड़े बदलाव किए हैं। सबसे बड़ा बदलाव तो यह था कि उन्होंने ट्विटर का नाम बदलकर ‘X’ कर दिया। अब अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को स्थित ट्विटर के हेडक्वार्टर पर लगा नीली चिड़िया का आइकॉनिक लोगो भी नीलामी में बेचा गया है। कितने में हुई नीली चिड़िया की नीलामी? नीलामी करने वाली कंपनी के PR के मुताबिक, इस नीली चिड़िया को 34,375 डॉलर (लगभग 30 लाख रुपए ) में नीलाम किया गया है। यह चिड़िया करीब 254 किलो वजनी है और इसका आकार 12 फीट लंबा और 9 फीट चौड़ा है। हालांकि, इस चिड़िया के नए मालिक की पहचान अभी तक सार्वजनिक नहीं की गई है। एपल से जुड़ी चीजों की भी हुई नीलामी नीली चिड़िया के अलावा एपल-1 कंप्यूटर को करीब 3.22 करोड़ रुपये (3.75 लाख डॉलर) में नीलाम किया गया है। इसके अलावा स्टिव जॉब्स द्वारा साइन किया गया एपल का एक चेक भी करीब 96.3 लाख रुपये (1,12,054 डॉलर) में नीलाम किया गया है।  

Trump ने कर दिया अमेरिकी शिक्षा विभाग को बंद करने वाले आदेश पर हस्ताक्षर, क्या है मामला

वाशिंगटन  अमेरिका में एजुकेशन डिपार्टमेंट यानी शिक्षा विभाग पर ताला लग गया है. डोनाल्ड ट्रंप ने उस आदेश पर अपनी कलम भी चला दी है. जी हां, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शिक्षा विभाग को ‘खत्म’ करने के उद्देश्य से एक आदेश पर हस्ताक्षर किए. यह अमेरिकी दक्षिणपंथियों का दशकों पुराना लक्ष्य रहा है. वो चाहते हैं कि अलग-अलग राज्य संघीय सरकार से मुक्त होकर खुद स्कूलों का संचालन करें. व्हाइट हाउस के ईस्ट रूम में डेस्क पर बैठे स्कूली बच्चों से घिरे डोनाल्ड ट्रंप एक खास समारोह में हस्ताक्षर करने के बाद आदेश दिखाते हुए मुस्कुरा रहे थे. समाचार एजेंसी एएफपी के मुताबिक, डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि यह आदेश संघीय शिक्षा विभाग को हमेशा के लिए खत्म करने की शुरुआत करेगा. हम इसे बंद करने जा रहे हैं और जितनी जल्दी हो सके इसे बंद कर देंगे. यह हमारे लिए कुछ नहीं कर रहा है. हम शिक्षा को वापस राज्यों को सौंपने जा रहे हैं, जहां यह होना चाहिए.’ हालांकि, यह भी सच है कि 1979 में बनाए गए अमेरिकी शिक्षा विभाग को कांग्रेस की मंजूरी के बिना बंद नहीं किया जा सकता है. लेकिन ट्रंप के आदेश में इसे फंड और स्टाफ से वंचित करने की शक्ति होने की संभावना है. यह कदम डोनाल्ज ट्रंप के एक चुनावी वादे को पूरा करता है. यह सरकार के क्रूर बदलाव के अब तक के सबसे कठोर कदमों में से एक है जिसे ट्रंप टेक टाइकून एलन मस्क की मदद से अंजाम दे रहे हैं. आदेश में शिक्षा सचिव लिंडा मैकमोहन को ‘शिक्षा विभाग को बंद करने और शिक्षा प्राधिकरण को राज्यों को वापस करने की सुविधा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाने’ का निर्देश दिया गया है. शिक्षा विभाग को आखरि ट्रंप ने क्यों किया ‘बंद’? ट्रंप ने राष्ट्रपति की कुर्सी पर वापसी के लिए अपने चुनावी कैंपेन में एक वादा किया था- वादा था कि शिक्षा का विकेंद्रीकरण करने का. यानी केंद्र सरकार के हाथ में शिक्षा की बागड़ोर नहीं होगी. उन्होंने कहा था कि वह विभाग की शक्तियों को राज्य सरकारों को सौंप देंगे, जैसा कि कई रिपब्लिकन दशकों से चाहते थे. बता दें कि परंपरागत रूप से, अमेरिका में शिक्षा में फेडरल सरकार (केंद्रीय सरकार) की सीमित भूमिका रही है. प्राइमरी और सेकेंडरी स्कूलों के लिए केवल 13 प्रतिशत फंड केंद्र के खजाने से आता है. बाकी राज्यों और स्थानीय समुदायों द्वारा वित्त पोषित किया जाता है. लेकिन कम आय वाले स्कूलों और विशेष जरूरतों वाले छात्रों के लिए केंद्र से आने वाला फंड अमूल्य है, उनके चलने का जरीया है. अब तक फेडरल सरकार छात्रों के लिए प्रमुख नागरिक अधिकार सुरक्षा लागू करने में आवश्यक रही है.

नागपुर हिंसा : ICU में भर्ती घायल युवक ने तोड़ा दम

नागपुर  महाराष्ट्र के नागपुर में 17 तारीख को हुई हिंसा में घायल युवक की मौत हाे गई है. हिंसा में इरफान अंसारी गंभीर रूप से घायल हो गए थे, जिनका अस्पताल में इलाज चल रहा था. इमरान ICU में भर्ती था इलाज के दौरान उसकी जान चली गई. इस हिंसा में अन्य घायल लोगों का इलाज अस्पताल में जारी है. नागपुर में हुई इस हिंसा के बाद अब भी कई इलाकों में तनाव का माहौल है. घटना के 6 दिन बाद पुलिस ने शांति बहाल करने 9 इलाकों में कर्फ्यू लगाया हुआ है. नागपुर में औरंगजेब की मजार के पास विश्‍व हिन्‍दू परिषद की तरफ से धरना प्रदर्शन किया गया था. इसी बीच अफवाह फैल गई कि दरगाह की चादर को जलाया गया है. ऐसे में बड़ी संख्‍या में मुस्लिम पक्ष की तरफ से युवक सड़क पर निकल आए. जिसके बाद 17 मार्च की शाम को भीड़ सड़कों पर उतर आई और दंगे भड़क गए थे. नागपुर हिंसा में घायल इरफान अंसारी की मौत हो गई है. इस घटना में यह पहली मौत है. हिंसा से जुड़े मामले में 100 से ज्‍यादा लोगों को पुलिस अरेस्‍ट कर चुकी है. 17 मार्च की रात हुई हिंसा के बाद, शहर में शांति बहाल करने के लिए पुलिस ने करीब 11 इलाकों में कर्फ्यू लगाया गया था, इनमें 2 इलाकों से कर्फ्यू हटा दिया गया है. वहीं अब भी 9 इलाकों में अभी भी कर्फ्यू लगा हुआ है. इनमें गणेशपेठ, कोतवाली, तहसील, लकड़गंज, पचपावली, शांतिनगर, सक्करदरा, इमामवाड़ा और यशोधरानगर पुलिस थाना क्षेत्र शामिल है. नागपुर का सीएम ने किया दौरा हिंसा के बाद सीएम के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस नागपुर पहुंच गए हैं. मुख्यमंत्री फडणवीस नागपुर में हुए दंगे को लेकर भी वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से मिलें. इस दौरान सीएम ने कहा कि पुलिस ने घटना के 4 -5 घंटे में इस दंगे पर काबू पा लिया था. पूरी हिंसा के दौरान कई पुलिसकर्मी भी घायल हुए हैं.

सुप्रीम कोर्ट ने गोधरा के बाद हुए दंगों के केस में 6 को किया बरी, वह अवैध भीड़ का हिस्सा थे

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात के गोधरा कांड के बाद हुए दंगों के मामले के छह आरोपियों को  बरी कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा कि किसी मामले में सिर्फ मौके पर मौजूद होना या वहां से गिरफ्तारी होना यह साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं है कि वे गैरकानूनी भीड़ के हिस्सा थे। जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस मनोज मिश्रा की बेंच ने गुजरात हाईकोर्ट के 2016 के उस फैसले को खारिज कर दिया, जिसमें गोधरा कांड के बाद 2002 में हुए दंगों के मामले में छह लोगों को बरी करने के फैसले को पलट दिया गया था। बेंच ने कहा कि सिर्फ मौके पर मौजूद होना या वहां से गिरफ्तारी होना यह साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं है कि वे (छह लोग) एक हजार से ज्यादा लोगों की गैरकानूनी भीड़ का हिस्सा थे। धीरूभाई भाईलालभाई चौहान और पांच अन्य को उस घटना में एक साल की जेल की सजा सुनाई गई थी, जिसमें कथित तौर पर भीड़ ने वडोद गांव में एक कब्रिस्तान और एक मस्जिद को घेर लिया था। सभी अपीलकर्ता आरोपियों को मौके से गिरफ्तार कर लिया गया था। निचली अदालत ने सभी 19 आरोपियों को बरी कर दिया था, लेकिन हाईकोर्ट ने उनमें से 6 को दोषी ठहराया। एक आरोपी की मामला लंबित रहने के दौरान मौत हो गई थी। अपीलकर्ताओं सहित 7 लोगों को एफआईआर में नामजद किया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने एक निचली अदालत के 2003 के फैसले को बहाल करते हुए उन्हें बरी कर दिया। कोर्ट ने कहा कि किसी भी तरह की दोषी भूमिका के अभाव में मौके पर उनकी गिरफ्तारी 28 फरवरी 2002 को वडोद में हुई घटना में उनकी संलिप्तता के बारे में निर्णायक नहीं है। खासकर तब जब उनके पास से न तो विध्वंस का कोई हथियार बरामद हुआ और ना ही कोई भड़काऊ सामग्री। बेंच ने कहा कि पुलिस ने गोलीबारी की, जिससे लोग इधर-उधर भागने लगे। इस तरह की झड़प में एक निर्दोष व्यक्ति को भी अपराधी समझ लिया जाता है। इसलिए, अपीलकर्ताओं की मौके से गिरफ्तारी उनकी दोषी होने की गारंटी नहीं है। बेंच ने कहा कि सामूहिक झड़पों में अदालतों पर यह सुनिश्चित करने का भारी दायित्व होता है कि किसी भी निर्दोष व्यक्ति को दोषी न ठहराया जाए और उसकी स्वतंत्रता छीनी न जाए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में अदालतों को सावधान रहना चाहिए और उन गवाहों की गवाही पर भरोसा करने से बचना चाहिए, जो आरोपी या उसकी भूमिका का विशेष संदर्भ दिए बिना सामान्य बयान देते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ऐसा इसलिए है, क्योंकि अक्सर (खासकर जब अपराध का स्थान सार्वजनिक स्थान होता है) लोग जिज्ञासावश अपने घर से बाहर निकलकर यह देखने लगते हैं कि आसपास क्या हो रहा है। ऐसे लोग केवल एक दर्शक से अधिक कुछ नहीं होते। हालांकि, गवाह को वे गैरकानूनी भीड़ का हिस्सा लग सकते हैं। बेंच ने कहा, “इस प्रकार, सावधानी के नियम के रूप में और कानून के नियम के रूप में नहीं, जहां रिकॉर्ड पर मौजूद साक्ष्य इस तथ्य को स्थापित करते हैं कि बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे, केवल उन व्यक्तियों को दोषी ठहराना सुरक्षित हो सकता है, जिनके खिलाफ प्रत्यक्ष कृत्य का आरोप लगाया गया है। कई बार ऐसे मामलों में सावधानी के नियम के रूप में और कानून के नियम के रूप में नहीं, अदालतों ने बहुलता परीक्षण को अपनाया है। अर्थात, दोषसिद्धि तभी कायम रह सकती है जब इसका समर्थन कुछ निश्चित संख्या में गवाहों द्वारा किया जाए जो घटना का सुसंगत विवरण देते हैं।” बेंच ने कहा कि ऐसी स्थिति में अदालत के लिए यह निर्धारित करना महत्वपूर्ण है कि क्या अभियुक्त जिस पर मुकदमा चलाया जा रहा है वह गैरकानूनी भीड़ का हिस्सा था या सिर्फ एक दर्शक था। ऐसा निर्धारण मामले के सिद्ध तथ्यों के आधार पर अनुमानात्मक है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस मामले में अपीलकर्ता उसी गांव के निवासी थे, जहां दंगे भड़के थे, इसलिए घटनास्थल पर उनकी उपस्थिति स्वाभाविक है। कोर्ट ने कहा कि इतना ही नहीं अभियोजन पक्ष का यह मामला नहीं है कि वे हथियार या विध्वंस के उपकरण लेकर आए थे। बेंच ने कहा, “हाईकोर्ट द्वारा लिया गया विपरीत दृष्टिकोण पूरी तरह से अनुचित है।”

भारत और अमेरिका के बीच सुरक्षा सहयोग के मोर्चे पर सकारात्मक प्रगति देखने को मिली

नई दिल्ली भारत और अमेरिका के बीच टैरिफ को लेकर चिंता बनी हुई है, लेकिन सुरक्षा सहयोग के मोर्चे पर सकारात्मक प्रगति देखने को मिल रही है। अमेरिकी विमान इंजन निर्माता GE (जनरल इलेक्ट्रिक) इस महीने के अंत तक 99 GE-404 इंजनों में से पहला इंजन हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) को सौंपने की तैयारी में है। यह डिलीवरी दो साल की देरी के बाद हो रही है, जिससे भारतीय वायुसेना (IAF) को काफी राहत मिलेगी। यह कदम तेजस एमके 1ए कार्यक्रम को गति देगा, जिसके तहत भारतीय वायु सेना को 83 विमानों की सप्लाई की जानी है। इस विमान ने मार्च 2024 में अपनी पहली उड़ान भरी थी, लेकिन तब इसमें नए इंजन के बजाय रिजर्व इंजन का उपयोग किया गया था। GE-404 इंजन भारत में निर्मित तेजस मार्क 1-A लड़ाकू विमानों को पावर प्रदान करता है। HAL द्वारा इन विमानों की डिलीवरी में हो रही देरी को लेकर वायुसेना पहले ही चिंता जता चुकी है। मामले की जानकारी रखने वाले अधिकारियों के अनुसार, पहला इंजन वर्तमान में टेस्ट-बेड पर है और इस महीने के अंत तक HAL को मिल सकता है। इसके बाद 2025 में 12 इंजन और उसके बाद हर साल 20 इंजन की डिलीवरी की योजना है। बता दें कि 2021 में 716 मिलियन डॉलर के कॉन्ट्रैक्ट के तहत, जीई को 99 एफ-404 इंजनों की आपूर्ति करनी थी, जिसकी शुरुआत मूल रूप से मार्च 2023 से होने वाली थी। हालांकि, सप्लाई चैन में समस्याओं और महामारी के दौरान पुराने सप्लायर के बंद होने के कारण इसमें देरी हुई। अब, अधिकारियों के अनुसार, पहला इंजन परीक्षण के दौर से गुजर रहा है और इसे मार्च के अंत तक एचएएल को सौंप दिया जाएगा। भारत में GE-414 इंजन निर्माण पर काम GE और HAL मिलकर भारत में GE-414 इंजन के निर्माण पर भी कार्य कर रहे हैं। यह इंजन एडवांस मल्टी-रोल कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) को शक्ति देगा, जिसे रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) विकसित कर रहा है। इस प्रोजेक्ट के तहत इंडिया-US के बीच iCET समझौते के तहत तकनीक ट्रांसफर की योजना बनाई गई है। AMCA के लिए निजी क्षेत्र को शामिल करने की योजना HAL द्वारा 83 LCA MK-1 A लड़ाकू विमानों की सप्लाई में देरी से भारतीय वायुसेना नाराज है। इसी वजह से रक्षा मंत्रालय ने रक्षा सचिव आर. के. सिंह की अध्यक्षता में एक समिति गठित की है, जो भारत के पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान के निर्माण के लिए व्यावसायिक मॉडल पर काम करेगी। यह समिति तकनीकी पहलुओं पर ध्यान नहीं देगी, बल्कि इसमें निजी क्षेत्र की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए एक रोडमैप तैयार करेगी। उद्देश्य यह है कि भारत भविष्य में केवल HAL पर निर्भर न रहे और अन्य निर्माता भी लड़ाकू विमान निर्माण में योगदान दें। भारत को अमेरिकी F-35 या फ्रांसीसी राफेल का विकल्प अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत को F-35 फिफ्थ-जनरेशन फाइटर जेट की आपूर्ति का प्रस्ताव दिया है, लेकिन भारत इस दौरान फ्रांसीसी विकल्प पर भी विचार कर रहा है। फ्रांस के साथ बातचीत के तहत ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान के तहत भारत में राफेल लड़ाकू विमान और उसके M-88 इंजन के निर्माण का प्रस्ताव भी शामिल है। सुरक्षा क्षेत्र में हो रही इन नई पहल से भारत के रक्षा क्षमताओं को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

बांग्लादेश में नेताओं ने किए बड़े क्रिप्टो निवेश ने मनी लॉन्ड्रिंग की आशंका को जन्म दे दिया

 ढाका बांग्लादेश में कथित छात्र आंदोलन के पीछे विदेशी फंडिंग के बड़े लिंक सामने आए हैं. एक जांच में खुलासा हुआ है कि इस आंदोलन को भारी विदेशी धनराशि से समर्थन मिला था. इसके नेताओं द्वारा किए गए बड़े क्रिप्टो निवेश ने मनी लॉन्ड्रिंग की आशंका को जन्म दे दिया है. एडीएसएम (ADSM) लीडर और ‘जातीय नागरिक कमेटी’ के संस्थापक सरजिस आलम ने 7.65 मिलियन डॉलर (65 करोड़ रुपये) क्रिप्टोकरेंसी टेथर (Tether) में निवेश किए. बेहद साधारण पारिवारिक पृष्ठभूमि से आकर इतनी बड़ी संपत्ति बनाना अवैध विदेशी फंडिंग की ओर इशारा करता है. मनी लॉन्ड्रिंग की आशंका अंतरिम सरकार में आईटी एडवाइजर और एडीएसएम कोऑर्डिनेटर नाहिद इस्लाम ने 204.64 बिटकॉइन (BTC) का निवेश किया है, जिसकी कीमत 17.14 मिलियन डॉलर (147 करोड़ रुपये) है. इस भारी निवेश ने उनके पैसे के स्रोत पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. सीटीजी विश्वविद्यालय (CTG University) से जुड़े एडीएसएम लीडर खान तलत महमूद रफी ने 11.094 बिटकॉइन का निवेश किया जिसकी कीमत 1 मिलियन डॉलर (8.60 करोड़ रुपये) है. कोई ज्ञात संपन्न पारिवारिक पृष्ठभूमि नहीं होने के बावजूद इतना बड़ा निवेश मनी लॉन्ड्रिंग की संभावनाओं को दर्शाता है. मीडिया के लोग भी जाल में शामिल प्रधान सलाहकार के प्रेस सचिव और पत्रकार शफीकुल आलम के पास 93.06 बिटकॉइन (10 मिलियन डॉलर, 86 करोड़ रुपये) की संपत्ति है. इससे यह साफ होता है कि आंदोलन से जुड़े मीडिया के लोग भी इस विदेशी फंडिंग के जाल का हिस्सा थे. बांग्लादेश के जिस आंदोलन को कभी छात्र-नेतृत्व वाले बदलाव का प्रयास माना जा रहा था, उस पर अब विदेशी फंडिंग के आरोप लग रहे हैं. क्रिप्टो निवेशों ने इन बड़ी वित्तीय अनियमितताओं का पर्दाफाश किया है. पिछले साल शुरू हुआ था आंदोलन पिछले साल अगस्त में छात्रों ने आरक्षण के खिलाफ आंदोलन शुरू किया जो बढ़ते-बढ़ते प्रधानमंत्री शेख हसीना की सरकार गिराने पर रुका. देश की बागडोर कुछ समय के लिए अंतरिम सरकार के हाथ में आ गई. उम्मीद थी कि इस बीच चुनाव होंगे और नई लोकतांत्रिक सरकार आ जाएगी लेकिन अभी तक ऐसा नहीं हुआ. सरकार गिराने वाले छात्र राजनैतिक दल बना चुके हैं.  

देश को अमेरिका से अब तक मिलीं 588 प्राचीन वस्तुएं, 2024 में 297 की वापसी

नई दिल्ली अब तक देश से तस्करी कर बाहर भेजी गई 588 भारतीय प्राचीन वस्तुएं अमेरिका से वापस लाई गई, इनमें से 297 को 2024 में वापस लाया गया। इसकी जानकारी केंद्र सरकार ने संसद को दी।केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत प्राचीन वस्तुओं के अवैध व्यापार को रोकने के लिए अमेरिका-भारत सांस्कृतिक संपत्ति समझौते के तहत वापस लौटाए गई ‘लूटे या चुराए गए कलाकृतियों’ की संख्या से संबंधित एक प्रश्न का उत्तर दे रहे थे। भारतीय प्राचीन वस्तुओं की तस्करी को रोकने के लिए अमेरिका के साथ सांस्कृतिक संपदा समझौते (सीपीए) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। मंत्री ने बताया कि यह समझौता रोकथाम के लिए है, इसलिए इसमें कोई निश्चित समय सीमा या लक्ष्य संख्या नहीं है। केंद्रीय मंत्री से यह भी पूछा गया कि क्या सरकार चोरी हुई प्राचीन वस्तुओं को वापस लाने के लिए अंतरराष्ट्रीय संगठनों या अन्य देशों के साथ सहयोग करने की योजना बना रही है। उन्होंने कहा, “भारत जरूरत पड़ने पर यूनेस्को और इंटरपोल सहित विभिन्न अंतरराष्ट्रीय संगठनों के साथ सहयोग करता है।” केंद्रीय मंत्री से ये प्रश्न भी पूछा गया कि क्या सरकार ने कुंभ मेले जैसे आयोजनों के दौरान ‘प्राचीन परंपराओं का पुनरुत्थान’ देखा? उन्होंने जवाब दिया कि कुंभ मेला एक प्रमुख हिंदू धार्मिक उत्सव है और दुनिया के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में से एक है, जहां लाखों श्रद्धालु पवित्र नदियों में स्नान करने के लिए इकट्ठा होते हैं। इस दौरान, कई पुराने संप्रदाय, आध्यात्मिक संगठन और धार्मिक नेता एक साथ आते हैं और सदियों पुरानी रस्मों, परंपराओं और प्रथाओं का पालन करते हैं। उन्होंने कहा, “भारत में प्राचीन परंपराओं का पुनरुत्थान, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक धरोहर में बढ़ती रुचि और आधुनिक धार्मिक चुनौतियों के बीच गहरे अर्थ की तलाश जैसे कारणों से हो रहा है।” मंत्री ने कहा कि आज के समाज में यह पुनरुत्थान महत्वपूर्ण है क्योंकि यह पारंपरिक प्रथाओं को बचाने, समाज में सौहार्द बढ़ाने और भारत की सांस्कृतिक धरोहर को मजबूत करने में मदद करता है।  

पाक सेना ने आतंकियों के खिलाफ अभियान चलाया, केपी में 10 आतंकियों को किया ढेर, 24 साल के कैप्टन की मौत

खैबर पख्तूनख्वा पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के डेरा इस्माइल खान जिले से बड़ी खबर आ रही है। यहां पाकिस्तान के सुरक्षा बलों ने 10 आतंकवादियों को मार गिराया है। खुफिया जानकारी मिलने के बाद पाकिस्तान की सेना ने आतंकियों के खिलाफ अभियान चलाया। जियो न्यूज ने इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस (आईएसपीआर) के हवाले से यह जानकारी दी है। 24 साल के कैप्टन की गई जान आईएसपीआर ने ऑपरेशन की जानकारी साझा की। बताया कि आतंकियों की मौजूदगी की खुफिया जानकारी मिली थी। इसके बाद सुरक्षाबलों ने पूरे इलाके को घेर लिया और कुछ देर में ही मुठभेड़ शुरू हो गई। सुरक्षाबलों ने सभी आतंकियों को नरक में भेज दिया है। जियो न्यूज ने बताया कि मुठभेड़ के दौरान 24 वर्षीय कैप्टन हसनैन अख्तर की जान गई है। हसनैन सैनिकों के प्रभारी थे। निर्दोष लोगों की हत्या में थे शामिल आईएसपीआर ने जानकारी दी है कि मारे गए आतंकवादियों के पास से हथियार और गोला-बारूद मिला है। ये सभी कई आतंकी गतिविधियों में शामिल रहे हैं। इन आतंकियों ने कई निर्दोष लोगों की हत्या भी की है। आतंकवाद खत्म करने को दृढ़ आईएसपीआर ने कहा कि इलाके में मौजूद बाकी आतंकियों को भी खत्म करने के लिए सफाई अभियान चलाया जाएगा। देश के सुरक्षाबल आतंकवाद को खत्म करने को दृढ़ हैं। बता दें कि पिछले कुछ समय से पाकिस्तान के बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में आतंकी हमलों में काफी इजाफा हुआ है। एक महीने में 42 फीसद बढ़े आतंकी हमले जियो न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार थिंक टैंक पाकिस्तान इंस्टीट्यूट फॉर कॉन्फ्लिक्ट एंड सिक्योरिटी स्टडीज (PICSS) ने अपने आंकड़ों में बताया कि जनवरी 2025 में देश में आतंकवादी हमलों में तेज वृद्धि देखी गई। यह इजाफा पिछले महीने की तुलना में 42% अधिक है।   आंकड़ों से पता चला है कि देशभर में कम से कम 74 आतंकवादी हमले हुए हैं। इनमें 91 मौतें हुई हैं। मृतकों में 35 सुरक्षाकर्मी, 20 नागरिक और 36 आतंकवादी शामिल हैं। 117 लोग घायल हुए हैं। इसमें 53 सुरक्षा बल, 54 नागरिक और 10 आतंकवादी हैं। खैबर पख्तूनख्वा प्रातं में आतंकवादियों ने 27 हमलों को अंजाम दिया। इसमें 11 सुरक्षाकर्मियों और छह नागरिकों समेत 17 लोगों की जान गई। केपी के आदिवासी जिलों में 19 हमलों में 46 लोगों की मौत हुई। इसमें 13 सुरक्षाकर्मी, 8 नागरिक और 25 आतंकवादी शामिल हैं।

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