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अजय माकन ने गृह मंत्रालय पर चर्चा के दौरान कहा कि दिल्ली पुलिस सीधे केंद्रीय गृह मंत्रालय के अंदर आती है

नई दिल्ली राज्यसभा में गृह मंत्रालय के कामकाज पर शुक्रवार को चर्चा की जा रही है। इस दौरान कांग्रेस सांसद अजय माकन ने कहा कि पूरे देश में दिल्ली में महिलाओं, बच्चों और वृद्धों के साथ सबसे अधिक आपराधिक घटनाएं हो रही हैं। इसके अलावा उन्होंने पंजाब का जिक्र करते हुए बताया कि वहां ड्रग्स और विदेशी हथियारों का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिसके तार सीमा पार से जुड़े हैं। अजय माकन ने गृह मंत्रालय के कार्यकाल पर चर्चा के दौरान कहा कि दिल्ली पुलिस सीधे केंद्रीय गृह मंत्रालय के अंदर आती है। पूरे देश में प्रत्येक एक लाख पर 66 महिलाओं के खिलाफ अपराध होते हैं, लेकिन दिल्ली के अंदर प्रत्येक लाख महिलाओं में 144 महिलाओं के खिलाफ अपराध होते हैं। पूरे देश में सबसे अधिक महिलाओं के प्रति अपराध दिल्ली में होते हैं। ऐसे ही पूरे हिंदुस्तान में प्रत्येक 1 लाख बच्चों पर 36 बच्चों के साथ अपराध होते हैं। दिल्ली में प्रति लाख में 134 बच्चों के साथ अपराध होते हैं। इसी तरह वृद्धों के खिलाफ होने वाले अपराधों में भी दिल्ली पूरे देश में नंबर वन है। उन्होंने कहा कि पहले ड्रग्स और नारकोटिक्स आते हैं, फिर गैंगवार और टेररिज्म आता है। केरल और पंजाब के अंदर नशे के मामले बहुत अधिक हो गए हैं। पाकिस्तान से पंजाब में ड्रोन के जरिए ड्रग्स के पैकेट आ रहे हैं। पंजाब के पुलिस स्टेशनों में ग्रेनेड से हमले हो रहे हैं। वर्ष 2022 से लेकर अब तक 15 प्रमुख घटनाएं हुई हैं, जिनमें आरपीजी रॉकेट ग्रेनेड जैसे हथियारों का भी इस्तेमाल हुआ है। बब्बर खालसा इंटरनेशनल, खालिस्तान जिंदाबाद फोर्स जैसे समूहों से जुड़े लोग हत्या में शामिल हैं। उन्होंने कहा कि पंजाब में विदेशी ग्रेनेड समेत विदेशी हथियारों का इस्तेमाल हो रहा है। जिन विदेशी ग्रेनेड का इस्तेमाल संसद और मुंबई हमले में हुआ था, वैसे ही ग्रेनेड का इस्तेमाल पंजाब में हो रहा है। इसका मतलब यह हुआ कि एक गहरी साजिश है। यह साजिश सीमा पार से हो रही है। यदि यह सब सीमा पार से हो रहा है तो इसे रोकने का काम बीएसएफ का है, गृह मंत्रालय का है। मुंबई में महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों के करीब 31,000 मामले लंबित हैं, कोलकाता में 15,000, बेंगलुरु में 18,000, हैदराबाद में 10,000 और दिल्ली में 77,000 मामले अदालतों में लंबित हैं। माकन के मुताबिक 2016 तक दिल्ली में महिलाओं के खिलाफ होने वाले 29,000 मामले अदालतों में लंबित थे। लेकिन, अब यह बढ़कर 77,000 हो गए हैं। बच्चों के साथ होने वाले अपराधों को देखें तो मुंबई में 10,000 मामले अदालतों में लंबित हैं, बेंगलुरु में 3,000, हैदराबाद में 1,600, कोलकाता में 3,000 और दिल्ली में 19,000 ऐसे मामले अदालतों में लंबित हैं। इन लंबित मामलों के लिए केंद्र और दिल्ली सरकार को मिलकर काम करने की आवश्यकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि इन दिनों सरकारी रिकॉर्ड में आंदोलन को अपराध की श्रेणी में रखा जा रहा है। आंदोलन करने वाले हमारे किसान क्या अपराधियों की श्रेणी में रखे जाएंगे? विरोध-प्रदर्शन करने का लोकतंत्र के अंदर जो अधिकार दिया गया था, एक तरह से उसे समाप्त कर दिया गया है। हमारे देश की युवा आबादी नशे का शिकार हो रही है। वर्ष 2010 और 2014 के बीच में ड्रग्स की घटनाएं 33,000 थी। 2022 की एनसीआरबी की रिपोर्ट कहती है कि यह घटनाएं बढ़कर 1 लाख 15 हो गई हैं। केवल 10 वर्षों के अंदर नशे (ड्रग्स) की घटनाओं में 247 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। जहां पूरे देश में ड्रग्स के मामले 247 परसेंट बढ़े हैं, वहीं दिल्ली के अंदर ड्रग्स की घटनाएं 546 प्रतिशत बढ़ी हैं। सिंथेटिक ड्रग्स का नशा बहुत ही खतरनाक है, जिसकी आदत लगने के बाद इसका छूटना बेहद मुश्किल हो जाता है।

सभी बिना दस्तावेज वाले अफगान नागरिकों को 31 मार्च तक पाकिस्तान छोड़ना होगा

इस्लामाबाद इस्लामाबाद ने पाकिस्तान में रह रहे अफगान नागरिक कार्ड (एसीसी) धारकों के लिए निर्वासन की समय सीमा बढ़ाने से इनकार कर दिया और कहा कि सभी बिना दस्तावेज वाले विदेशियों को 31 मार्च तक देश छोड़ना होगा। पाकिस्तान ने प्रत्यावर्तन की समग्र प्रक्रिया को लेकर संयुक्त राष्ट्र, कई मानवाधिकार समूहों और प्रासंगिक एजेंसियों की ओर से उठाई गई चिंताओं, आपत्तियों को भी दरकिनार कर दिया। पाकिस्तान विदेश कार्यालय के प्रवक्ता शफकत अली खान ने पुष्टि करते हुए कहा कि अवैध विदेशियों और एसीसी धारकों के लिए स्वेच्छा से पाकिस्तान छोड़ने की समय सीमा में कोई बदलाव नहीं किया गया। पाकिस्तान सरकार ने एसीसी धारकों और अवैध विदेशियों के लिए स्वेच्छा से देश छोड़ने की समय सीमा 31 मार्च तय की थी। यह पाकिस्तान से अवैध विदेशी नागरिकों की वापसी प्रक्रिया का दूसरा चरण है, इनमें अधिकांश अफगान नागरिक शामिल हैं। इस निर्णय की आलोचना करते हुए संयुक्त राष्ट्र ने पाकिस्तान से कहा है कि वह हजारों बिना दस्तावेज वाले अफगान नागरिकों को वापस भेजने से परहेज करे। हालांकि, इस्लामाबाद ने इन चिंताओं को खारिज कर दिया और याद दिलाया कि उसने लाखों अफगान शरणार्थियों के प्रति स्वेच्छा से अंतरराष्ट्रीय दायित्व पूरा किया है। खान ने कहा, “हम यूएनएचसीआर से बंधे नहीं हैं। सबसे पहले, पाकिस्तान रिफ्यूजी कन्वेंशन का सदस्य नहीं है। इसलिए हमने पिछले 50 वर्षों से अफगान शरणार्थियों के लिए जो कुछ भी किया है, वह स्वेच्छा से किया है। जहां तक अंतरराष्ट्रीय दायित्वों का सवाल है तो, हमने अफगानों को इस तरह का आतिथ्य प्रदान करके अपने हिस्से से अधिक काम किया है। हम उनका स्वागत करना जारी रखते हैं लेकिन उनके पासपोर्ट पर पाकिस्तानी वीजा होना चाहिए, और फिर उनका स्वागत किया जाएगा।” अधिकारियों ने यह स्पष्ट कर दिया कि वे पूरे देश में एसीसी धारकों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई शुरू करेंगे, जिसके तहत पाक-अफगान तोरखम सीमा से उनके बड़े पैमाने पर निर्वासन की शुरुआत की जाएगी। पाकिस्तान अफगान शरणार्थियों को उनके देश भेजने का प्रक्रिया ऐसे समय में शुरू कर रहा है जब दोनों देशों के संबंध काफी तनावपूर्ण चल रहे हैं। पाकिस्तान अफगान तालिबान पर तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) और अन्य आतंकवादी समूहों को पाकिस्तान में अशांति फैलाने के लिए समर्थन देने का आरोप लगता रहा है। पाकिस्तान यह शक जता चुका है कि आतंकवादी और उग्रवादी शरणार्थियों के बीच छिपकर देश में आतंकवादी हमले करते हैं। पाकिस्तान द्वारा 1.7 मिलियन से अधिक अफगान नागरिकों को देश से वापस भेजने के एकतरफा निर्णय को अफगान तालिबान शासन ने पूरा समर्थन नहीं दिया। काबुल ने इस्लामाबाद से पाकिस्तान से अफगान शरणार्थियों को धीरे-धीरे वापस भेजने की अपील की। अफगानिस्तान के विदेश मंत्री आमिर खान मुत्ताकी ने कहा, “शरणार्थियों का सम्मान किया जाना चाहिए और उनकी वापसी क्रमिक और सम्मानजनक होनी चाहिए। हमारे देश में सुरक्षा संबंधी कोई समस्या नहीं है, लेकिन कुछ अन्य समस्याएं हैं, जिनके कारण सभी शरणार्थियों के एक साथ आने के लिए तैयारी करना मुश्किल हो जाता है। उम्मीद है कि यह काम धीरे-धीरे लागू होगा।”

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राज्यसभा में कहा- 31 मार्च 2026 तक देश से नक्सलवाद हो जाएगा समाप्त

नई दिल्ली केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का कहना है कि 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद समाप्त हो जाएगा। उन्होंने राज्यसभा में कहा, “मैं देश को बताना चाहता हूं कि 31 मार्च 2026 तक इस देश से नक्सलवाद समाप्त हो जाएगा। नक्सलवादियों ने समानांतर सरकारें बनाई, समानांतर सरकारें चलाईं। नक्सलवाद को समाप्त करने के पीछे नरेंद्र मोदी सरकार का 10 साल का विजन है।” गृह मंत्री शुक्रवार को राज्यसभा में गृह मंत्रालय के कामकाज पर हुई चर्चा का जवाब दे रहे थे। इस दौरान उन्होंने कहा कि हमने नवीनतम टेक्नोलॉजी के साथ नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई की है। इनके हर प्रकार के कम्युनिकेशन और आवाजाही का रेखांकन किया। ड्रोन और सैटेलाइट सर्विलांस किया। डाटा एनालिसिस करके अपने सुरक्षा बलों को लैस किया, जिसके आधार पर सुरक्षा बलों को कामयाबी मिली। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के शासन के मुकाबले अभी नक्सलवाद से जुड़ी हिंसक घटनाएं और सुरक्षाबलों के मारे जाने की संख्या में काफी कमी आई है। कांग्रेस शासनकाल में 126 जिले नक्सलवाद से प्रभावित थे। अब ऐसे केवल 12 जिले बचे हैं। अगले वर्ष 31 मार्च तक ये जिले भी नक्सलवाद से मुक्त हो जाएंगे। पहले नक्सल प्रभावित जिलों में एक भी नाइट लैंडिंग हेलीपैड नहीं थे। सुरक्षा बलों को मजबूती प्रदान करने के लिए ऐसे 68 नाइट लैंडिंग हेलीपैड बनाए गए हैं। नक्सलियों के कई करोड़ रुपए जब्त किए गए हैं। हमने इन इलाकों में विकास के लिए बजट को 300 प्रतिशत तक बढ़ाने का काम किया है। हाईवे बनाए और ग्रामीण सड़कें बनाई हैं। मोबाइल टावर लगाए हैं। पूरा नक्सल एरिया अब मोबाइल कनेक्टिविटी से लैस है। उन्होंने जम्मू-कश्मीर में आए परिवर्तन के बारे में भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के शासन में 33 सालों से वहां रात को सिनेमा हॉल नहीं खुलते थे, हमारे शासन में वहां खुले हैं। 34 साल से ताजिया के जुलूस की इजाजत नहीं थी, हमारे शासन में दी गई। जी-20 की बैठक में दुनिया भर के डिप्लोमेट्स वहां शांति से गए। कश्मीर की संस्कृति, खूबसूरती, भोजन और संगीत का अनुभव करके अपने देश लौटे हैं। इस देश में लाल चौक पर तिरंगा फहराने के लिए हम सब गए थे। प्रधानमंत्री और हमारे तत्कालीन अध्यक्ष मुरली मनोहर जोशी के नेतृत्व में कन्याकुमारी से कश्मीर यात्रा निकाली थी। हमें लाल चौक जाने की परमिशन नहीं मिल रही थी। जब जिद की तो सेना की सुरक्षा में वहां जाकर आनन-फानन में ध्वज वंदन करके वापस आना पड़ा। आज उसी लाल चौक पर ‘हर घर तिरंगा कार्यक्रम’ में एक भी घर ऐसा नहीं था, जहां तिरंगा न हो। उन्होंने आगे कहा कि श्रीनगर में फॉर्मूला-4 रेसिंग कार का आयोजन हुआ। उसी लाल चौक पर कृष्ण जन्माष्टमी मनाई गई। मां शारदा देवी के मंदिर में दशकों के बाद दीपावली और सरस्वती पूजन हुआ। खीर भवानी का अष्टमी महोत्सव 22 साल बाद मनाया गया। इसके अलावा केंद्रीय गृह मंत्री ने बताया कि गांवों से सुविधाओं के लिए पलायन हो रहा है। जिस देश के बॉर्डर के गांव खाली हो जाते हैं, उस देश के बॉर्डर कभी सुरक्षित नहीं रह सकते, इसलिए एक नई अप्रोच के साथ पहले जिसे देश का अंतिम गांव कहा जाता था, अब उसे देश का पहला गांव कहा जाता है। मैं दावे से कहता हूं कि सुविधाओं की दृष्टि से भी यह गांव अगले 10 वर्ष में देश के प्रथम गांव होंगे। इसके लिए वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम लाया गया है। इसके अंतर्गत 90 प्रतिशत केंद्र का अनुदान है और 10 प्रतिशत राज्य का हिस्सा है। इस अनुपात में इन गांवों के लिए पैसा दिया जाता है। शुरुआत में 4,800 करोड़ रुपए के आवंटन से हमने 652 गांव को इसमें शामिल किया है। इसमें अरुणाचल प्रदेश के 455, उत्तराखंड के 51, हिमाचल के 75, सिक्किम के 46 और लद्दाख के कई गांव शामिल हैं।

कर्नाटक विधानसभा में एक अहम बिल पास हुआ, मुस्लिम आरक्षण को लेकर जमकर हंगामा, BJP के चार विधायको को निकाला

कर्नाटक कर्नाटक विधानसभा में मुस्लिम आरक्षण को लेकर जमकर हंगामा हुआ। विधानसभा से BJP के 4 विधायको को बाहर निकाल दिया गया है। कर्नाटक विधानसभा में शुक्रवार को एक अहम बिल पास हुआ, जिसे मुस्लिम समुदाय के लिए आरक्षण देने की बात की जा रही है। इस बिल को लेकर सत्ताधारी दल और विपक्ष के बीच तीखी बहस हुई और सदन में बवाल मच गया। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधायकों ने बिल के खिलाफ विरोध किया और गुस्से में आकर विधानसभा में खड़े होकर बिल की कॉपी फाड़ दी और स्पीकर पर फेंकी।

लंदन का हीथ्रो एयरपोर्ट पर बड़े अग्निकांड के बाद बिजली गुल, दुनिया का सबसे व्यस्त एयरपोर्ट रहेगा बंद

लंदन लंदन का हीथ्रो एयरपोर्ट जो दुनिया के सबसे व्यस्त हवाई अड्डों में से एक है आज यानि कि दिनभर के लिए पूरी तरह से बंद कर दिया गया है। यह निर्णय एक “महत्वपूर्ण बिजली संकट” के कारण लिया गया जो एयरपोर्ट के पास एक बड़े अग्निकांड के कारण उत्पन्न हुआ। आग के कारण हुआ बिजली संकट हीथ्रो एयरपोर्ट के प्रबंधन ने सोशल मीडिया पर एक बयान जारी करते हुए बताया कि एयरपोर्ट को बिजली आपूर्ति करने वाले विद्युत उपकेंद्र (सबस्टेशन) में आग लग गई है जिससे एयरपोर्ट गंभीर बिजली संकट का सामना कर रहा है। इस वजह से सुरक्षा के दृष्टिकोण से 21 मार्च को रात 11:59 बजे तक एयरपोर्ट को बंद रखने का निर्णय लिया गया है। दमकलकर्मी घटनास्थल पर मौजूद लंदन फायर ब्रिगेड ने बताया कि ट्रांसफार्मर में आग लगने के बाद दमकल विभाग की 10 गाड़ियाँ और करीब 70 दमकलकर्मी मौके पर तैनात किए गए हैं। फायर ब्रिगेड के सहायक आयुक्त पैट गोलबोर्न ने बताया कि दमकलकर्मियों ने आसपास की इमारतों से 29 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला है। सुरक्षा के लिहाज से 200 मीटर के दायरे को घेर लिया गया है और करीब 150 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेजा गया है। यात्रियों के लिए सलाह हीथ्रो एयरपोर्ट ने यात्रियों से अपील की है कि वे एयरपोर्ट न आएं और अपनी उड़ानों के बारे में जानकारी के लिए अपनी एयरलाइंस से संपर्क करें। एयरपोर्ट प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है और जल्द से जल्द सेवाओं को बहाल करने की कोशिश कर रहा है। सुरक्षा के दृष्टिकोण से लिया गया कदम हालांकि हीथ्रो एयरपोर्ट का यह अस्थायी बंद होना हजारों यात्रियों के लिए असुविधाजनक हो सकता है लेकिन एयरपोर्ट प्रशासन ने इसे सुरक्षा के लिहाज से जरूरी कदम बताया है। एयरपोर्ट प्रशासन का कहना है कि यह कदम यात्रियों और कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।  

जस्टिस वर्मा के निवास से कथित रूप से करोड़ों रुपये की नकदी बरामद हुई थी, इलाहाबाद हाई कोर्ट भेजने पर भड़के वकील

नई दिल्ली/प्रयागराज जस्टिस यशवंत वर्मा को दिल्ली हाई कोर्ट से इलाहाबाद हाई कोर्ट वापस भेजे जाने के प्रस्ताव पर वकीलों ने तीखी नाराजगी जताई है। इलाहाबाद हाई कोर्ट बार एसोसिएशन ने मुख्य न्यायाधीश और सभी न्यायाधीशों को एक सख्त पत्र लिखकर इस कदम का विरोध किया है। बार एसोसिएशन का यह कड़ा रुख तब सामने आया है जब हाल ही में जस्टिस वर्मा के निवास से कथित रूप से करोड़ों रुपये की नकदी बरामद होने की खबरें आई थीं। वकीलों का कहना है कि इस तरह के विवादों में घिरे न्यायाधीश की पुनर्नियुक्ति से हाई कोर्ट की गरिमा पर सवाल उठ सकते हैं। कचरे का डिब्बा नहीं: इलाहाबाद हाई कोर्ट बार एसोसिएशन बार एसोसिएशन ने अपने विरोध को और तीखा करते हुए साफ शब्दों में कहा है कि इलाहाबाद हाई कोर्ट को कचरे का डिब्बा नहीं बनाया जा सकता, जहां किसी भी विवादित न्यायाधीश को ट्रांसफर कर दिया जाए। वकीलों ने सवाल उठाया कि अगर जस्टिस यशवंत वर्मा पर कथित तौर पर इतनी बड़ी मात्रा में नकदी मिलने का आरोप है, तो उनके खिलाफ जांच होनी चाहिए, न कि उन्हें किसी अन्य हाई कोर्ट में भेजकर मामले को दबाने की कोशिश की जानी चाहिए। प्रदर्शन से पीछे नहीं हटेंगे वकील यह मामला उच्च न्यायपालिका के भीतर भी चर्चा का विषय बना हुआ है। हालांकि, आधिकारिक तौर पर अभी तक न्यायपालिका या सरकार की ओर से इस मामले पर कोई स्पष्ट बयान नहीं दिया गया है। वकीलों ने यह भी चेतावनी दी है कि अगर उनकी आपत्तियों को अनदेखा किया गया तो वे विरोध-प्रदर्शन करने से पीछे नहीं हटेंगे।

अब हाई कोर्ट ने दे दिया बड़ा झटका- RSS मुख्यालय को निशाना बनाना चाहता था रईस अहमद

मुंबई बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर पीठ ने जम्मू-कश्मीर के उस निवासी को जमानत देने से शुक्रवार को इनकार कर दिया जिस पर जैश-ए-मोहम्मद का आतंकवादी होने और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के संस्थापक डॉ के बी हेडगेवार के यहां स्थित स्मारक की टोह लेने का आरोप है। रईस अहमद शेख असदुल्ला शेख को 15 सितंबर, 2021 को नागपुर के रेशिमबाग इलाके में स्थित आरएसएस के संस्थापक के स्मारक डॉ. हेडगेवार स्मृति मंदिर की टोह लेने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। उसने इस महीने की शुरुआत में बॉम्बे हाई कोर्ट में जमानत याचिका दायर कर दावा किया था कि उसके खिलाफ कोई सबूत नहीं है। जस्टिस सूर्यवंशी और न्यायमूर्ति प्रवीण पाटिल की खंडपीठ ने जमानत याचिका खारिज कर दी। आदेश की विस्तृत प्रति अभी उपलब्ध नहीं कराई गई है। शेख फिलहाल नागपुर सेंट्रल जेल में बंद है। अभियोजन पक्ष के अनुसार, शेख ने शहर के महल इलाके में स्थित आरएसएस मुख्यालय की टोह लेने की भी कथित तौर पर साजिश रची थी, लेकिन वह ऐसा नहीं कर पाया। आरोप है कि शेख ने टोह लेने के बाद पाकिस्तान में अपने आकाओं को सूचनाएं दी थीं। वकील निहालसिंह राठौड़ के माध्यम से दायर जमानत याचिका में शेख ने दावा किया था कि यह साबित करने के लिए कोई सबूत नहीं है कि उसने किसी भी गैरकानूनी गतिविधि को अंजाम देने के लिए उपरोक्त स्थानों की टोह ली थी। उसके वकील ने अदालत में दलील दी कि शेख का कृत्य ‘गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम’ (यूएपीए) के दायरे में नहीं आता। सरकारी वकील देवेंद्र चौहान ने अदालत से कहा कि यह साबित करने के लिए पर्याप्त सामग्री है कि आरोपी शेख प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद से जुड़ा है। उन्होंने कहा कि शेख की गतिविधियां भविष्य में आतंकवादी हमले करने के लिए थीं और इसलिए इसे यूएपीए के दायरे में माना जाएगा। चौहान ने कहा, ‘किसी भी आतंकवादी कृत्य को अंजाम देने से पहले की गई तैयारी (टोह) को भी आतंकवादी कृत्य ही माना जाता है।’ उन्होंने कहा, ‘उसका नागपुर आना स्वाभाविक नहीं था। आरोपी का कोई रिश्तेदार भी यहां नहीं है या उसका व्यावसायिक उद्देश्य नहीं था और न ही कोई अन्य कारक था जो यह साबित करता हो कि उसका आना स्वाभाविक था।’ पुलिस की जांच के अनुसार, शेख आरएसएस मुख्यालय को जोड़ने वाली छह गलियों की भी टोह लेना चाहता था लेकिन सुरक्षा के लिए बड़ी संख्या में तैनात पुलिसकर्मियों को देखने के बाद वह गलियों में घुसने की हिम्मत नहीं कर सका। जम्मू-कश्मीर पुलिस और खुफिया एजेंसियों से ठोस सबूत मिलने के बाद शेख के खिलाफ यूएपीए की संबंधित धाराओं के तहत कोतवाली थाने में मामला दर्ज किया गया।

तिरुपति मंदिर में केवल हिंदुओं को ही काम पर रखा जाना चाहिए, दूसरों को हटाओ: मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू

तिरुपति आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने कहा है कि तिरुमाला-तिरुपति देवस्थानम (TTD) यानी मशहूर तिरुपति मंदिर में केवल हिंदुओं को ही काम पर रखा जाना चाहिए। शुक्रवार को मंदिर में पूजा-अर्चना के बाद नायडू ने कहा कि अगर दूसरे समुदाय के लोग मौजूदा समय में वहां काम कर रहे हैं, तो उनकी भावनाओं का अनादर किए बिना उन्हें दूसरी जगहों पर शिफ्ट किया जाएगा। नायडू ने कहा, “तिरुमाला मंदिर में केवल हिंदुओं को ही काम पर रखा जाना चाहिए। अगर दूसरे धर्म के लोग वर्तमान में काम कर रहे हैं, तो उनकी भावनाओं को ठेस पहुंचाए बिना उन्हें दूसरी जगहों पर बसाया जाएगा।” मुख्यमंत्री नायडू ने इसके साथ ही अपनी उस भव्य योजना भी लोगों से साझा की, जिसके तहत देशभर के सभी राज्यों की राजधानियों में वेंकटेश्वर स्वामी का मंदिर बनाने की योजना है। उन्होंने कहा कि दुनिया भर में भगवान वेंकटेश्वर की संपत्तियों की सुरक्षा के लिए पवित्र धागा बांधा गया है। उन्होंने कहा कि कई भक्त विदेशों में भी ऐसे मंदिर स्थापित किए जाने की इच्छा रखते हैं। मुमताज होटल की डील रद्द मंदिर के चारों तरफ यानी तिरुमाला की पहाड़ियों पर किसी भी तरह की कॉमर्शियल एक्टिविटीज की चर्चा करते हुए नायडू ने कहा कि पिछली सरकार ने मंदिर के निकट ही 35.32 एकड़ भूमि पर मुमताज होटल की स्थापना की मंजूरी दी थी जिसे उनकी सरकार ने रद्द कर दिया है। नायडू ने कहा कि तिरुमाला की सात पहाड़ियों के निकट किसी तरह की व्यवसायिक गतिविधि नहीं होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि इस क्षेत्र में किसी भी प्राइवेट पार्टी को व्यवसाय चलाने की इजाजत नहीं दी जाएगी। उन्होंने कहा कि खान-पान सेवा के लिए जिन्हें भी व्यवसाय की मंजूरी मिली हुई है, वे केवल शाकाहारी व्यंजन ही परोसेंगे। परिवार संग पहुंचे थे CM चंद्रबाबू नायडू ने अपने बेटे नारा लोकेश और परिवार के सदस्यों के साथ शुक्रवार को तिरुमला में भगवान वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर में पूजा-अर्चना करने पहुंचे थे। इससे पहले पारंपरिक परिधान पहने मुख्यमंत्री भगवान वेंकटेश्वर के दर्शन के लिए वैकुंठम कतार परिसर से मंदिर में प्रवेश किया। तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (टीटीडी) के अध्यक्ष बी आर नायडू ने मंदिर के प्रवेश द्वार पर मुख्यमंत्री का स्वागत किया। पोते के जन्मदिन पर एक दिन का प्रसाद वितरण खर्च उठाया यह दौरा मुख्यमंत्री के पोते देवांश के जन्मदिन समारोह पर हुआ था। इस अवसर पर चंद्रबाबू और उनका परिवार वेंगमम्बा अन्नदान वितरण केंद्र में अन्न प्रसादम के वितरण में भी हिस्सा लिया। मुख्यमंत्री ने उदारता दिखाते हुए अपने पोते के जन्मदिन पर एक दिन के प्रसाद वितरण का खर्च टीटीडी अन्नदान ट्रस्ट को दान कर दिया। मुख्यमंत्री के दौरे को देखते हुए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। भगवान वेंकटेश्वर के प्रति अपनी आस्था जताते हुए नायडू ने कहा कि भगवान की कृपा के कारण ही वे कई लक्षित हमलों से बच पाए हैं। उन्होंने कहा, “मुझे 24 क्लेमोर माइंस से निशाना बनाया गया था। ऐसे हमले से बचना असंभव था, लेकिन मैं पूरी तरह से भगवान वेंकटेश्वर की दिव्य कृपा के कारण बच गया। मैं इतने बड़े विस्फोट से बच गया, यह तथ्य भगवान की अपार शक्ति को साबित करता है।”

हजारों लोग हाथों में बैनर और झंडे लिए नेतन्याहू सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे, सड़कों पर उमड़ा जनसैलाब

इजरायल इजरायल की सड़कों पर जबरदस्त उबाल देखने को मिल रहा है। हजारों लोग हाथों में बैनर और झंडे लिए नेतन्याहू सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। इनका साफ कहना है कि प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की सरकार लोकतंत्र पर हमला कर रही है और गाजा में युद्ध को राजनीतिक फायदे के लिए खींच रही है। बुधवार को जेरूसलम में नेतन्याहू के आधिकारिक आवास के बाहर और तेल अवीव की मुख्य सड़कों पर प्रदर्शनकारियों की भारी भीड़ उमड़ी। हाथों में इजरायली झंडे और गाजा में बंधकों की रिहाई के लिए तख्तियां लिए लोग सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर रहे थे। इस प्रदर्शन के चलते इजरायल की कई अहम सड़कों को बंद करना पड़ा। पुलिस ने कम से कम 12 प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार कर लिया। नेतन्याहू पर क्यों भड़के लोग? इस प्रदर्शन की शुरुआत इजरायल की सुरक्षा एजेंसी शिन बेत के प्रमुख रोनन बार को हटाने की नेतन्याहू की कोशिशों के खिलाफ हुई थी, लेकिन इसके बाद गाजा में जारी बमबारी और युद्धविराम को तोड़ने की वजह से प्रदर्शन और तेज हो गया। गाजा पर हाल ही में हुए इजरायली हमलों में करीब 600 लोगों की मौत हुई है, जिससे देश के भीतर नेतन्याहू के खिलाफ गुस्सा और बढ़ गया। विदेशी ताकतों द्वारा युद्धविराम बनाए रखने की अपील को अनसुना करते हुए इजरायल ने गाजा में हवाई और जमीनी हमले तेज कर दिए हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सरकार युद्ध को राजनीतिक हथियार बना रही है और गाजा में अब भी बंधक बने 59 लोगों की रिहाई को लेकर गंभीर नहीं है। माना जा रहा है कि इन बंधकों में 24 अब भी जिंदा हैं। नेतन्याहू का असली मकसद सत्ता बचाना? ‘ब्रदर्स इन आर्म्स’ आंदोलन के प्रमुख इतान हर्जेल ने कहा, “सरकार अपनी नाकामी से लोगों का ध्यान हटाने के लिए जानबूझकर युद्ध को बढ़ा रही है। नेतन्याहू और उनकी सरकार पूरी तरह फेल हो चुकी है और अब वे सत्ता में बने रहने के लिए देश को संकट में धकेल रहे हैं।” प्रदर्शनकारियों ने नेतन्याहू सरकार पर लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर करने का आरोप लगाया। सड़कों पर गूंज रहे नारों में कहा जा रहा था, “इजरायल तुर्की नहीं, इजरायल ईरान नहीं।” प्रदर्शनकारी यह संकेत दे रहे थे कि नेतन्याहू देश को अधिनायकवादी शासन की ओर धकेल रहे हैं। सुरक्षा एजेंसी शिन बेत इस वक्त नेतन्याहू के करीबी सहयोगियों की जांच कर रही है। इस मामले को ‘कतरगेट’ कहा जा रहा है। इजरायली मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, नेतन्याहू खुद भ्रष्टाचार के कई मामलों में फंसे हुए हैं और उन पर लगे आरोप साबित होने पर उन्हें जेल भी हो सकती है।

महिला कर्मचारी के बालों को देख सख्श ने गाया ‘ये रेश्मी जुल्फें’ गाना, हुआ विवाद, अब कोर्ट ने सुना दिया बड़ा फैसला

मुंबई ऑफिस के एक ट्रेनिंग सेशन में महिला कर्मचारी के लंबे बालों को देखकर ‘ये रेश्मी जुल्फें’ गाने को गाना एक पुरुष कर्मचारी पर भारी पड़ गया। उसके खिलाफ ऐक्शन लिया गया, जिसके बाद अब बॉम्बे हाई कोर्ट ने राहत देते हुए बड़ा फैसला सुनाया है। हाई कोर्ट ने कहा कि महिला कर्मचारी से यह कहना कि तुम अपने बालों को संभालने के लिए जेसीबी का इस्तेमाल कर रही होगी और उसके बालों से संबंधित गाना गाना ‘ये रेश्मी जुल्फें’ वर्कप्लेस पर उसका (महिला कर्मचारी) यौन उत्पीड़न नहीं है। दरअसल, यह पूरा मामला एक प्राइवेट बैंक के एक पुरुष और महिला कर्मचारी से जुड़ा हुआ है। इसमें कर्मचारी विंदो कचावे ने एक मीटिंग में अपनी सहकर्मी पर टिप्पणी की थी, जिसके बाद पॉश कानून के तहत उस पर कार्रवाई हुई। कचावे ने बॉम्बे हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। फैसला सुनाते हुए जस्टिस संदीप मार्ने की सिंगल बेंच ने कहा कि यह मानना मुश्किल है कि याचिकाकर्ता विंदो कचावे का यह आचरण यौन उत्पीड़न के तहत आता है। अदालती मामलों को कवर करने वाली वेबसाइट ‘लाइव लॉ’ के अनुसार, जज ने अपने ऑर्डर में कहा है कि जहां तक ​​पहली घटना का सवाल है, यह याचिकाकर्ता द्वारा शिकायतकर्ता के बालों की लंबाई के संबंध में टिप्पणी करने और उसके बालों से संबंधित एक गीत गाने से संबंधित है। याचिकाकर्ता द्वारा शिकायतकर्ता के प्रति कथित तौर पर की गई टिप्पणी को देखते हुए यह विश्वास करना मुश्किल है कि यह टिप्पणी शिकायतकर्ता को किसी भी तरह का यौन उत्पीड़न करने के इरादे से की गई थी। टिप्पणी किए जाने के समय उसने खुद कभी भी टिप्पणी को यौन उत्पीड़न नहीं माना।” याचिकाकर्ता की ओर से वकील सना रईस खान ने कोर्ट में उसका पक्ष रखा। यह पूरा मामला 11 जून 2022 का है, जब दफ्तर के एक ट्रेनिंग सेशन के दौरान पुरुष कर्मचारी ने यह नोटिस किया कि महिला अपने बालों को बार-बार एडजस्ट कर रही है और लंबे बालों की वजह से असहज दिख रही थी। इस पर उसने हल्के अंदाज में महिला से कहा कि अपने बालों को मैनेज करने के लिए तुम जेसीबी का इस्तेमाल करती होगी। इसके बाद उसे कंफर्टेबल करने के लिए वह ये रेश्मी जुल्फें गाना गाने लगा। सुनवाई के दौरान वकील ने बताया कि याचिकाकर्ता का ऑब्जेक्टिव इस कमेंट के पीछे सिर्फ इतना ही था कि अगर महिला अपने बालों से असहज है तो वह उसे बांध ले, क्योंकि इससे न सिर्फ याचिकाकर्ता, बल्कि वहां मौजूद अन्य लोगों का भी ध्यान भटका रही थी। यहां तक कि याचिकाकर्ता ने ट्रेनिंग सेशन से पहले ही सबको कह दिया था कि वह माहौल को हल्का रखने के लिए बीच-बीच में चुटकुले भी सुनाता रहेगा। जज ने अपने फैसले में कहा है कि यदि आरोपों को सही भी मान लिया जाए तो भी यह मानना मुश्किल है कि याचिकाकर्ता ने यह कमेंट करके सेक्सुअल हैरेसमेंट किया है।

कनाडा में खालिस्तानियों के खिलाफ बोलने की मिली सजा, सांसद चंद्र आर्य की उम्मीदवारी की रद्द, अब नहीं लड़ पाएंगे चुनाव

ओटावा कनाडा की सत्ताधारी लिबरल पार्टी ने आगामी संसदीय चुनावों से पहले एक बड़ा फैसला लेते हुए अपने सांसद चंद्र आर्य की उम्मीदवारी रद्द कर दी है। भारतीय मूल के हिंदू सांसद चंद्र आर्य नेपियन निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव जीतकर संसद पहुंचे थे। वे खालिस्तान समर्थक तत्वों के खिलाफ अपनी मुखर आवाज के लिए जाने जाते हैं। इस कदम ने कनाडा की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। चंद्र आर्य ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए बताया कि पार्टी ने उनका टिकट काट दिया है। लिबरल पार्टी द्वारा जारी पत्र के अनुसार, चुनाव प्रचार अभियान के अध्यक्ष ने चंद्र आर्य की पात्रता की विस्तृत समीक्षा की। इस समीक्षा के बाद उनका टिकट काटने की सिफारिश की गई जिसे पार्टी ने स्वीकार कर लिया है। आर्य ने इस निर्णय को “बेहद निराशाजनक” करार दिया, लेकिन कहा कि इससे नेपियन के लोगों की सेवा करने का उनका सम्मान और गर्व कम नहीं होगा। उन्होंने लिखा, “मुझे लिबरल पार्टी द्वारा सूचित किया गया है कि नेपियन में आगामी आम चुनाव के लिए उम्मीदवार के रूप में मेरा नामांकन रद्द कर दिया गया है। हालांकि यह खबर बेहद निराशाजनक है, लेकिन इससे नेपियन के लोगों – और सभी कनाडाई लोगों – की 2015 से संसद सदस्य के रूप में सेवा करने का गौरव और विशेषाधिकार कम नहीं होता। पिछले कई वर्षों से, मैंने इस भूमिका में अपना दिल और आत्मा झोंक दी है। मुझे एक सांसद के रूप में किए गए अपने काम पर बहुत गर्व है। नेपियन के निवासियों को मैंने जो अटूट सेवा प्रदान की है, कनाडाई लोगों के लिए महत्वपूर्ण मुद्दों पर मैंने जो सैद्धांतिक रुख अपनाया है और मुश्किल घड़ी में भी जिन कारणों के लिए मैंने खड़ा हुआ है – उस सब पर मुझे गर्व है। अपने समुदाय और देश की सेवा करना मेरे जीवन की सबसे बड़ी जिम्मेदारी रही है, और मैं इसके हर पल के लिए आभारी हूं।” लिबरल पार्टी ने आर्य की उम्मीदवारी रद्द करने के पीछे कोई स्पष्ट कारण नहीं बताया है, जिससे कई सवाल उठ रहे हैं। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि उनकी खालिस्तान विरोधी रुख और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात ने पार्टी के भीतर असहजता पैदा की होगी। पिछले साल अगस्त में आर्य ने नई दिल्ली में पीएम मोदी से मुलाकात की थी, जिसे कनाडा सरकार ने “निजी पहल” करार दिया था। खालिस्तानी तत्वों के खिलाफ मुखर रहे हैं आर्य चंद्र आर्य कनाडा और अन्य स्थानों पर सक्रिय खालिस्तानी तत्वों के खिलाफ खुलकर बोलते रहे हैं। कनाडा को खालिस्तानियों का मुख्य गढ़ माना जाता है लेकिन फिर भी चंद्र आर्या सार्वजनिक रूप से इसके खिलाफ बोलते रहे। जिसके कारण वह पहले भी खालिस्तानी समूहों के निशाने पर रहे हैं। अक्टूबर 2023 में अमेरिका स्थित खालिस्तानी आतंकवादी गुरपतवंत सिंह पन्नू ने कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो से भारतीय राजनयिकों के खिलाफ कार्रवाई करने के बाद चंद्र आर्य को अगला निशाना बनाने की अपील की थी। पन्नू ने आर्य पर लगाए गंभीर आरोप गुरपतवंत सिंह पन्नू ने X पर पोस्ट कर कनाडाई सरकार से चंद्र आर्य के खिलाफ जांच करने की मांग की थी। उसने आरोप लगाया कि आर्य खालिस्तान आंदोलन के खिलाफ ‘जहर उगल’ रहे हैं और भारत सरकार के एजेंट के रूप में काम कर रहे हैं। पन्नू ने आर्य पर आरोप लगाते हुए कहा, “इंडो-कैनेडियन सांसद चंद्र आर्य द्वारा शांतिपूर्ण खालिस्तान समर्थक गतिविधियों के खिलाफ नफरत फैलाना भारतीय सरकार के एजेंट की भूमिका निभाने का स्पष्ट उदाहरण है। जुलाई 2023 में जब खालिस्तानी कार्यकर्ताओं ने भारतीय राजनयिकों की भूमिका की जांच की मांग की, तब आर्य ने खालिस्तान जनमत संग्रह को ‘हमारे आंगन में सांप’ करार दिया था। आर्य ने खालिस्तान समर्थकों द्वारा हिंदू मंदिरों पर हमलों की निंदा की थी और कनाडा में हिंदू समुदाय की सुरक्षा के लिए आवाज उठाई थी। लिबरल पार्टी द्वारा आर्य की उम्मीदवारी रद्द किए जाने के इस फैसले के राजनीतिक प्रभावों पर विभिन्न प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। कई विश्लेषकों का मानना है कि यह निर्णय कनाडा में खालिस्तानी समूहों और उनकी बढ़ती राजनीतिक पकड़ को दर्शाता है। वहीं, कुछ लोगों का मानना है कि यह फैसला पार्टी की आंतरिक राजनीति का परिणाम हो सकता है।

पुल के शिलान्यास पर भड़के विधायक, कार्यक्रम में एक आदमी को पीटा

गुवाहाटी असम के ऑल इंडिया यूनाइटेड फ्रंट (एआईयूडीएफ) के विधायक शम्सुल हुदा सोशल मीडिया में सुर्खियां बटोर रहे हैं। उनका एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें वह एक आदमी को पहले थप्पड़ मारते, फिर केले के पेड़ से पीटते नजर आ रहे हैं। रिपोर्टस के मुताबिक विधायक शम्सुल हुदा इस बात पर भड़क गए थे कि उनके कार्यक्रम के लिए लाल रिबन और केले के बड़े पेड़ नहीं लगाए गए। हालांकि जब विवाद बढ़ा तो विधायक ने माफी मांग ली। छोटे पेड़ देखकर और चढ़ा पारा जानकारी के अनुसार बिलासपारा के विधायक शम्सुल हुदा के मारपीट का वीडियो धुबरी के दैखोवा बाजार में हुई। वह एक आरसीसी पुल के शिलान्यास समारोह में पहुंचे थे। असम के रीति रिवाज के मुताबिक समारोह स्थल पर केले के पौधे लगाए गए थे। जब उद्घाटन करने की बारी आई तो उन्हें लाल रिबन भी नजर नहीं आया। फिर क्या था, विधायक गुस्से से लाल-पीले हो गए और ठेकेदार के कर्मचारी साहिदुर रहमान को ताबड़तोड़ थप्पड़ जड़ दिया। इसके बाद उनकी नजर केले के छोटे पौधों पर पड़ी तो उनका पारा हाई हो गया। वह उन पौधों से ही साहिदुर रहमान को पीटने लगे। विधायक की मारपीट से कर्मचारी दुखी साहिदुर रहमान ठेकेदार अविनाश अग्रवाल के लिए मोहरी का काम करता है। नेताजी की इस हरकत पर सभी भौंचक्के रह गए। साहिदुर रहमान ने बताया कि एआईयूडीएफ विधायक शम्सुल हुदा ने बिना किसी कारण के उन पर हमला कर दिया। उसे एक जनप्रतिनिधि से ऐसे व्यवहार की उम्मीद नहीं थी। यह अपमानजनक और दर्दनाक था। इस घटना से धुबरी के लोग नाराज हैं और विधायक की हरकत की निंदा कर रहे हैं। लोगों का सवाल है कि क्या एक चुने हुए नेता को ऐसा व्यवहार करना चाहिए? वायरल वीडियो और जनता का गुस्सा यह घटना किसी सस्ते फिल्मी ड्रामे से कम नहीं थी। और जैसे ही इसका वीडियो सोशल मीडिया पर पहुंचा, लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। कोई इसे कुर्सी का अहंकार बता रहा है, तो कोई विधायक की मानसिक स्थिति पर सवाल उठा रहा है। एक यूजर ने लिखा, “जनता के सेवक ऐसे व्यवहार करेंगे, तो भरोसा किस पर करें?” पीड़ित सहिदुर रहमान की आवाज में दर्द साफ झलक रहा था। उसने कहा, “मैं तो अपना काम कर रहा था। विधायक साहब को इतना गुस्सा क्यों आया, समझ नहीं आता।” यह सवाल सिर्फ सहिदुर का नहीं, बल्कि पूरे बिलासिपारा के लोगों का है। माफी का ढोंग या सच? घटना के बाद पीड़ित रहमान ने उसी रात गौरीपुर थाने में एफआईआर दर्ज करवाई, जिसे बाद में बिलासिपारा पुलिस स्टेशन ट्रांसफर किया गया। इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं 115(2), 8296, 352 और 351(2) के तहत केस दर्ज किया गया है। पुलिस ने जांच शुरू कर दी है और आरोपों की गंभीरता को देखते हुए कानूनी कार्रवाई करने का आश्वासन दिया है। जब मामला तूल पकड़ने लगा और FIR दर्ज हो गई, तो विधायक साहब का रुख बदल गया। उन्होंने माफी मांगते हुए कहा, “मैं मानता हूं कि मुझसे गलती हुई। परिस्थितियों ने मुझे ऐसा करने को मजबूर किया। मैं असम की जनता से माफी मांगता हूं।” लेकिन यह माफी कितनी सच्ची है, इस पर सवाल उठ रहे हैं। क्या यह जनता का गुस्सा शांत करने की कोशिश थी, या सचमुच पछतावा? लोगों का कहना है कि अगर माफी मांगनी ही थी, तो पहले अपनी गलती क्यों नहीं मानी? और फिर, एक जनप्रतिनिधि को ऐसी “परिस्थितियां” क्यों बेकाबू कर रही हैं? कुर्सी और जिम्मेदारी यह पहली बार नहीं है जब कोई जनप्रतिनिधि अपने व्यवहार की वजह से चर्चा में आया हो। लेकिन समसुल हुदा की यह हरकत कई सवाल खड़े करती है। क्या पावर की कुर्सी इतनी भारी हो जाती है कि छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा फूट पड़ता है? या फिर यहि व्यक्तिगत अहंकार है, जो जनता की सेवा के वादों पर भारी पड़ रहा है? पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। AIUDF पहले से ही विवादों में घिरी है, और यह घटना पार्टी के लिए एक और झटका साबित हो सकती है। जनता की नजर अब इस बात पर है कि क्या विधायक साहब को अपनी हरकत की कीमत चुकानी पड़ेगी, या यह मामला भी समय के साथ ठंडा पड़ जाएगा।

‘370 हटाने के बाद आतंकी घटनाओं में कमी आई’,10 साल में कश्मीर में 12 हजार करोड़ का निवेश: अमित शाह का दावा

नई दिल्ली गृह मंत्री अमित शाह राज्यसभा में गृह मंत्रालय के कामकाज पर हुई चर्चा का जवाब दे रहे हैं. गृह मंत्री शाह ने उरी और पुलवामा हमले का जिक्र करते हुए कहा कि 10 दिन में बदला लिया और हमने भारत को इजरायल-अमेरिका वाली लिस्ट में ला दिया. ताजा अपडेट के लिए पेज को रिफ्रेश करते रहें। जहां मरते हैं, वहीं दफना दिए जाते हैं आतंकी- अमित शाह गृह मंत्री अमित शाह ने तीन समस्याएं दशकों से नासूर की तरह बन गई थीं. एक वामपंथी उग्रवाद, दूसरा पूर्वोत्तर का उग्रवाद और तीसरा आतंकवाद. पहले जम्मू कश्मीर में आतंकी आते थे और कोई त्योहार नहीं होता था जब हमले नहीं होते थे. मोदीजी के आने के बाद भी हमले हुए. उरी और पुलवामा में हमला हुआ. 10 दिन में पाकिस्तान में घर में घुसकर एयर स्ट्राइक कर जवाब दिया गया. दुनिया में इजरायल और अमेरिका की सूची में महान भारत का नाम जुड़ गया. अमित शाह ने कश्मीर में जी-20 बैठक के सफल आयोजन का जिक्र करते हुए कहा कि कन्याकुमारी से कश्मीर तक मुरली मनोहर जोशी के नेतृत्व में यात्रा निकली थी. हमें लाल चौक जाने की परमिशन नहीं मिल रही थी. हमने जिद की तो सेना की सुरक्षा में जाना पड़ा और आनन-फानन में तिरंगा फहराकर आना पड़ा. उसी लाल चौक पर कोई घर ऐसा नहीं था जिस पर हर घर तिरंगा अभियान में तिरंगा न हो. हमने कई ऐसे कदम उठाए जिसकी वजह से आतंकियों से भारतीय बच्चों के जुड़ने की संख्या करीब-करीब शून्य हो गई है. आतंकी जब मारे जाते थे, बड़ा जुलूस निकलता था. आज भी आतंकी मारे जाते हैं और जहां मारे जाते हैं, वहीं दफना दिए जाते हैं. घर का कोई आतंकी बन जाता था और परिवार के लोग आराम से सरकारी नौकरी करते थे. हमने उनको निकालने का काम किया. आतंकियों के परिवार के लोग बार काउंसिल में बैठे थे और प्रदर्शन होने लगता था. आज वो श्रीनगर या दिल्ली की जेल में हैं. उन्होंने पथराव से लेकर ऑर्गेनाइज हड़ताल की घटनाओं के आंकड़े भी गिनाए. 10 साल में परिवर्तन कर राष्ट्रीय सुरक्षा मजबूत करने का काम किया- अमित शाह गृह मंत्री अमित शाह राज्यसभा में गृह मंत्रालय के कामकाज पर चर्चा का जवाब दे रहे हैं. गृह मंत्री ने कहा कि चर्चा के दौरान कुछ उपयोगी सुझाव भी आए हैं, कुछ हमारी कमियों की ओर ध्यान दिलाया गया, कुछ राजनीतिक टिप्पणियां भी की गईं, कुछ राजनीतिक आक्षेप भी लगाए गए. सभी का संसदीय भाषा में जवाब देने का प्रयास करूंगा. उन्होंने कहा कि देश की सरहदों को सुरक्षित करने के लिए अपना बलिदान दिया है, केंद्रीय बलों और स्टेट पुलिस के उन हजारों जवानों को भी नमन करता हूं. गृह मंत्रालय एक प्रकार से बहुत विषम परिस्थिति में काम करता है. कानून-व्यवस्था का जिम्मा राज्यों के पास है और सरहदी सुरक्षा गृह मंत्रालय के जिम्मे है. इसमें बदलाव की जरूरत भी नहीं है. 76 साल बाद ऐसी परिस्थिति खड़ी हो गई है कि कई अपराध राज्यों की सीमा तक सीमित नहीं होते. कई अपराध ऐसे होते हैं जो देश की सीमा के बाहर से भी हमारे यहां होते हैं. 10 साल में नरेंद्र मोदी जी ने एक साथ परिवर्तन कर राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने का काम किया है. ‘नई लाशें बिछाने के लिए गड़े मुर्दे उखाड़ दिए’, संजय राउत ने नागपुर दंगे पर सरकार को घेरा शिवसेना (यूबीटी) के सांसद संजय राउत ने राज्यसभा में कहा कि आज क्या दिन आ गया है कि उच्च सदन में औरंगजेब पर चर्चा हो रही है. इसके लिए गृह मंत्रालय जिम्मेदार है. देश को एक-अखंड रखना गृह मंत्रालय का काम है. देश को कुछ समय से पुलिस स्टेट बना दिया गया है. एक मणिपुर कल तक जल रहा था, अब महाराष्ट्र को भी जला दिया. नई लाशें बिछाने के लिए आपने गड़े मुर्दे उखाड़ दिए और वह भी औरंगजेब के नाम पर. नागपुर में तीन सौ साल में कभी दंगा नहीं हुआ था. दंगा हो गया वह भी मुख्यमंत्री के विधानसभा क्षेत्र में. आपको औरंगजेब की कब्र तोड़नी है तो जाओ तोड़ो ना हाथ में फावड़ा-वावड़ा लेकर. मुख्यमंत्री आपका है, गृह मंत्री आपका है. जाओ ना. लेकिन अपने बच्चों को भेजो, हमारे बच्चों को मत भेजो. आपके बच्चे विदेशों में पढ़ रहे हैं. मुसलमान में बाबर का डीएनए तो तुम राणा सांगा की औलाद- रामजी सुमन बहुजन समाज पार्टी के राज्यसभा सांसद रामजी सुमन ने कहा कि बीजेपी के लोगों का एक तकिया कलाम हो गया है कि मुसलमान में बाबर का डीएनए है. भारत का मुसलमान बाबर को तो अपना आदर्श मानता है नहीं, वह तो मोहम्मद साहब को अपना आदर्श मानता है. बाबर को लाया कौन था. इब्राहिम लोदी को हराने के लिए राणा सांगा ने बाबर को लाया. मुसलमान में बाबर का डीएनए है तो तुम राणा सांगा की औलाद हो. राणा सांगा की गद्दारी की चर्चा तो होती नहीं. इस पर आसन से हरिवंश ने राम जी सुमन को रोकते हुए कहा कि आपका समय खत्म हो गया. अब आप बैठिए. डिप्टी चेयरमैन हरिवंश ने ये भी कहा कि जो भी संसदीय मर्यादा के अनुकूल नहीं होगा, वह रिकॉर्ड से हटा दिया जाएगा. पंजाब के किसानों को हरियाणा सरकार रोक देती है, ये मामूली बात नहीं- धर्मेंद्र यादव लोकसभा में जलशक्ति मंत्रालय की अनुदान मांगों पर चर्चा के बाद अब कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के कामकाज पर चर्चा चल रही है. चर्चा की शुरुआत आजमगढ़ से समाजवादी पार्टी के सांसद धर्मेंद्र यादव ने की है. धर्मेंद्र यादव ने स्वामीनाथन कमेटी की सिफारिश के अनुरूप एमएसपी की गारंटी देने की मांग की और कहा कि हम किसी पर टिप्पणी नहीं करते लेकिन बीजेपी के ही लोग कहते हैं कि मोदी की गारंटी. उन्होंने गन्ना किसानों के मूल्य भुगतान के मुद्दे पर भी सरकार को घेरा और कहा कि छुट्टा जानवर भी बड़ी समस्या है. पूरा उत्पादन जब तक बिक नहीं जाता, किसान का पूरा परिवार जाड़ा-गर्मी-बरसात खेत में पड़ा रहता है. प्रधानमंत्री जी की भी सरकार में बैठे लोग नहीं सुनते. इस समस्या का स्थायी समाधान निकालिए. कृषि क्षेत्र से 60 फीसदी लोगों को रोजगार मिलता है. 30 फीसदी बजट ही ले आते. देश के किसान, परिवार में … Read more

कर्नाटक में MLA-MLC की सैलरी बढ़ाने के लिए बिल पास

बेंगलुरु कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के हंगामे के बीच अल्पसंख्यकों के लिए सरकारी ठेकों में 4 फीसदी का आरक्षण देने वाला बिल पास हो गया है. इसके साथ ही मंत्रियों और विधायकों के वेतन से जुड़ा बिल भी पारित हो गया है. सदन के अंदर भारी हंगामा होने के बाद विधानसभा की कार्यवाही को 01:30 बजे तक स्थगित कर दिया गया है. कर्नाटक के सरकारी टेंडर में मुस्लिमों को 4 प्रतिशत आरक्षण देने का रास्ता साफ हो गया है. टेंडर की अधिकतम सीमा 2 करोड़ की गई है.कर्नाटक की कांग्रेस सरकार ने मुस्लिम कॉन्ट्रैक्टर्स को सरकारी टेंडर में 4 फीसदी आरक्षण देने का फैसला किया है. इसी के लिए आज विधानसभा में बिल पेश किया गया और पास हुआ. सिद्धारमैया सरकार ने कर्नाटक पब्लिक प्रोक्योरमेंट एक्ट, 1999 में संशोधन को मंजूरी दी. मंत्रियों और विधायकों की कितनी बढ़ेगी सैलरी? कर्नाटक विधानसभा में मंत्रियों और विधायकों की सैलरी से जुड़ा बिल भी पास हो चुका है. इसके बाद विधायकों की बल्ले-बल्ले हो सकती है. दरअसल, इस बिल में 100% बढ़ोतरी का प्रस्ताव दिया गया है. आजतक के पास कर्नाटक विधानमंडल वेतन, पेंशन और भत्तों (संशोधन) विधेयक, 2025 का मसौदा हाथ लगा है, जिसमें विधायकों और अन्य महत्वपूर्ण अधिकारियों के वेतन और भत्तों में वृद्धि की योजना है. बिल पास होने जाने के बाद अब विधायकों और विधान परिषद के सदस्यों (MLA और MLC) का वेतन दोगुना हो जाएगा, जबकि मुख्यमंत्री का वेतन 75,000 रुपये से बढ़ाकर 1.5 लाख रुपये प्रति माह कर दिया जाएगा. यह कदम विधायकों द्वारा वित्तीय कठिनाइयों और 2022 में निर्धारित वेतन बढ़ोतरी के स्थगित होने को लेकर किए गए दबाव के बाद उठाया गया है. मंत्रियों को होगा कितना फायदा मंत्री और मुख्यमंत्री के वेतन और भत्तों में भी वृद्धि प्रस्तावित है. मुख्यमंत्री का वेतन 75 हजार रुपये से बढ़ाकर 1.5 लाख रुपये करने का प्रस्ताव है, जबकि एक मंत्री का वेतन 60 हजार रुपये से बढ़ाकर 1.25 लाख रुपये और उनके भत्तों को 4.5 लाख रुपये से बढ़ाकर 5 लाख रुपये किया जाएगा. कर्नाटक के विधायकों, मंत्रियों और विधानसभा नेताओं के लिए वित्तीय लाभ में भारी वृद्धि होगी, जो उनके वेतन और भत्तों में महत्वपूर्ण संशोधन को दर्शाता है. मंत्रियों का वेतन भी दोगुना होगा विधायकों के वेतन के अलावा कर्नाटक मंत्री वेतन और भत्ता अधिनियम, 1956 में भी संशोधन का प्रस्ताव है। इसके जरिए मंत्री का वेतन 60 हजार रुपए से बढ़ाकर 1.25 लाख रुपए किया जाएगा। वहीं, सप्लीमेंट्री अलाउंस 4.5 लाख रुपए से बढ़ाकर 5 लाख रुपए करने का प्रस्ताव है। अभी मंत्रियों को HRA के रूप में मिलने वाले 1.2 लाख रुपए बढ़कर 2 लाख रुपए हो सकते हैं। 6 साल में 10 पेशों में सिर्फ सांसदों-विधायकों का वेतन बढ़ा नीति आयोग के जुलाई, 2024 में पब्लिश वर्किंग पेपर से पता चलता है कि देश में साल 2018 से 2023 के बीच के 6 साल में सिर्फ सांसदों-विधायकों के वेतन और भत्ते ही बढ़े हैं। इसमें कहा गया है कि सांसदों-विधायकों को पीरियॉडिक लेबर फोर्स सर्वे के 10 विभिन्न पेशों की पहली श्रेणी में रखा गया है, जिनमें लैजिस्लेटिव प्रोफेशनल्स के अलावा सीनियर ऑफिसर्स और मैनेजर्स शामिल हैं। इसमें EPFO और अन्य आंकड़ों के बेस पर 6 साल में वेतन और भत्ते में हुई वृद्धि को आंका गया है। जनप्रतिनिधियों के अलावा प्लांट-मशीन वर्कर्स की श्रेणी में वेतन-भत्ते भी बढ़े हैं।  

चढ़ते पारे ने बढ़ायी मुसीबत, 2024 सबसे गर्म वर्ष, टूटा 175 साल का रिकॉर्ड

नई दिल्ली  संयुक्त राष्ट्र (UN)के विश्व मौसम विज्ञान संगठन (World Meteorological Organization) ने  अपनी एनुअल क्लाइमेट स्टेटस रिपोर्ट (Annual State of the Climate Report) जारी की। इसमें शुरुआती आंकड़ों की पुष्टि करते हुए संकेत दिया गया कि 2024 अब तक का सबसे गर्म साल रहा। 2024 ने 2023 में बनाए गए पिछले रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ दिया। WMO के अनुसार, 2024 में पहली बार वैश्विक तापमान 1850-1900 में निर्धारित आधार रेखा से 1.5 डिग्री सेल्सियस ज्यादा रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, इसने पिछले 175 साल के रिकॉर्ड को तोड़ दिया है। 10 सालों में हीटवेव से हालात खराब जबकि इससे पहले की रिपोर्ट में 2014 से 2023 का समय सबसे गर्म दशक के रूप में रिकॉर्ड किया गया था। इन 10 सालों में हीटवेव ने महासागरों को प्रभावित किया। साथ ही ग्लेशियरों (Glaciers) को रिकॉर्ड बर्फ का नुकसान हुआ। लाखों लोगों को छोड़ना पड़ा घर     2024 में चक्रवात, बाढ़, सूखा और अन्य आपदाओं ने 2008 के बाद से सबसे अधिक लोगों को विस्थापित किया,     ऐसे में 36 मिलियन लोगों को अपने घरों से बाहर निकलने के लिए मजबूर होना पड़ा था।     सिचुआन भूकंप के बाद चीन में लगभग आधे 15 मिलियन विस्थापित हुए थे।     बाढ़ ने भारत में भी लाखों लोगों को प्रभावित किया।     सऊदी अरब सहित दर्जनों अभूतपूर्व हीटवेव दर्ज किए गए जहां हज यात्रा के दौरान तापमान 50 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया । मौसम वैज्ञानिक ने दी चेतावनी ऑस्ट्रेलियन नेशनल यूनिवर्सिटी के फेनर स्कूल ऑफ एनवायरनमेंट एंड सोसाइटी की प्रोफेसर सारा पर्किन्स-किर्कपैट्रिक ने कहा कि दुनिया एक ऐसे प्वांइट पर पहुंच गई है जहां शुद्ध शून्य उत्सर्जन अब पर्याप्त नहीं है। उन्होंने कहा, ‘हमें अपने अलार्म पर स्नूज बटन दबाना बंद करना होगा, जो कि अब नियमित रूप से होने वाले रिकॉर्ड तोड़ने वाले वैश्विक तापमान हैं। उन्होंने कहा, जलवायु परिवर्तन हो रहा है, यह हमारी वजह से है, और बिना किसी गंभीर कार्रवाई के, यह और भी बदतर होता जाएगा? यह जितना लंबा चलेगा, चीजों को बेहतर बनाना उतना ही मुश्किल होगा।’

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