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विज्ञापनों पर असम सरकार ने खर्च किए 370 करोड़ रुपए , मंत्री ने विधानसभा में दी जानकारी

असम असम में भाजपा की सरकार ने पिछले 4 सालों में विज्ञापनों पर भारी खर्च किया है। राज्य के सूचना और जनसंपर्क मंत्री, पीयूष हजारिका ने बुधवार को विधानसभा में जानकारी दी कि मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की सरकार ने पिछले 4 वित्तीय वर्षों में विज्ञापनों पर 370 करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च किए हैं। हजारिका ने बताया कि 2016 से 2021 तक असम के मुख्यमंत्री रहे सर्बानंद सोनोवाल के नेतृत्व में राज्य सरकार ने 2016-17 से लेकर पांच वित्तीय वर्षों में विज्ञापनों पर कुल 125.6 करोड़ रुपए खर्च किए थे। सरकार के कार्यकाल के दौरान, विज्ञापनों पर खर्च में लगातार वृद्धि हुई है। 2020-21 में सोनोवाल सरकार ने विज्ञापनों पर 30.24 करोड़ रुपए खर्च किए थे, जबकि 2021-22 में जब हिमंत बिस्वा सरमा ने मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी संभाली, तो यह खर्च बढ़कर 72.83 करोड़ रुपए हो गया। इसके बाद, सरमा सरकार के तहत हर साल विज्ञापनों पर खर्च बढ़ता ही गया। 2022-23 में यह खर्च 78.85 करोड़ रुपए तक पहुंच गया और 2023-24 में यह बढ़कर 160.92 करोड़ रुपए हो गया। इसी तरह, वित्त वर्ष 2024-25 में अब तक विज्ञापनों के लिए 59.72 करोड़ रुपए खर्च किए जा चुके हैं। इसके अलावा, मंत्री हजारिका ने यह भी बताया कि 2015-16 में, जब असम में तरुण गोगोई की सरकार थी, तो विज्ञापनों पर 18.58 करोड़ रुपए खर्च किए गए थे। इसके बाद जब बीजेपी की सरकार आई और सर्बानंद सोनोवाल ने मुख्यमंत्री का पद संभाला, तो अगले साल ही विज्ञापनों पर खर्च बढ़कर 26.88 करोड़ रुपए हो गया।  

Modi Government ने Jammu Kashmir के दो संगठनों पर बैन लगाया

श्रीनगर केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर के दो संगठनों ‘जम्मू-कश्मीर इत्तिहादुल मुस्लिमीन’ और ‘आवामी एक्शन कमेटी’ को गैरकानूनी संगठन घोषित कर दिया है. गृह मंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) पर यह जानकारी साझा की. उन्होंने कहा कि ये संगठन लोगों को भड़काने और कानून-व्यवस्था बिगाड़ने के लिए जिम्मेदार पाए गए हैं, जिससे देश की एकता और अखंडता को खतरा हो सकता था. UAPA के तहत प्रतिबंध क्यों? गृह मंत्रालय के अनुसार, इन संगठनों की गतिविधियों से यह साफ हुआ कि वे जम्मू-कश्मीर में अशांति फैलाने की साजिश रच रहे थे. उनके बयानों और कार्यों से लोगों को हिंसा के लिए उकसाया जा रहा था, जिससे कानून-व्यवस्था पर खतरा मंडरा रहा था. वहीं, अमित शाह ने स्पष्ट किया कि मोदी सरकार किसी भी राष्ट्रविरोधी गतिविधि को बर्दाश्त नहीं करेगी. देश की शांति, व्यवस्था और संप्रभुता के खिलाफ काम करने वालों को करारा जवाब दिया जाएगा. सरकार के अनुसार उमर फारूक के नेतृत्व वाली अवामी एक्शन कमेटी जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश में अलगाववाद को प्रोत्साहन देते हुए आतंकवादी गतिविधियों को बढ़ावा देने और भारत विरोधी प्रचार-प्रसार में शामिल रही है। अधिसूचना में कहा गया है कि उक्त समूह भारत की अखंडता, संप्रभुता और सुरक्षा को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों में लिप्त रहा है। सरकार ने ए.ए.सी. पर गैरकानूनी गतिविधियों के लिए धन जुटाने, अलगाववादियों को समर्थन प्रदान करने तथा संविधान के प्रति अनादर दिखाने का आरोप लगाया है।

ट्रंप जल्द ही यूक्रेन को पूरी तरह से रूस में मिलाने के लिए आतुर हैं, सीजफायर के साथ सैन्य मदद का भी ऐलान

यूक्रेन कुछ दिन पहले अमेरिका बुलाकर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यूक्रेन के प्रेजिडेंट वोलोदोमिर जेलेंस्की को जिस तरह बेइज्जत किया, उससे यूरोप और पूरी दुनिया आशंकित हो गई थी कि ट्रंप जल्द ही यूक्रेन को पूरी तरह से रूस में मिलाने के लिए आतुर हैं। तीखी बहस का आलम यह था कि जेलेंस्की को बिना खाना खिलाए वाइट हाउस से बाहर भेज दिया गया। हालांकि, हफ्तेभर बाद ही ट्रंप का दिल यूक्रेन पर पिघल गया है। सऊदी अरब में अमेरिका और जेलेंस्की के बीच हुई वार्ता यूक्रेन के नजर से सफल रही। यूक्रेन युद्ध में 30 दिन का सीजफायर और अमेरिका द्वारा रोकी गई सभी सहायता को फिर से चालू करने पर सहमति बन गई है। अब आगे की बात रूस पर टिकी है। अमेरिका और यूक्रेन के बीच बनी सहमति रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के नजरिए से झटका मिलने जैसा है। बैठक से एक दिन पहले पुतिन ने आशंका भी जता दी थी कि ट्रंप पर भरोसा नहीं किया जा सकता। क्रेमलिन ने रूसियों को संबोधित करते हुए कहा कि ट्रंप के फैसलों से अभी यह उम्मीद करना गलत है कि रूस कामयाबी की राह पर है। पुतिन का डर सही साबित हुआ है। सऊदी अरब वार्ता में क्या हुआ सऊदी अरब में अधिकारियों की बैठक के बाद दोनों देशों ने एक संयुक्त बयान जारी किया, जिसमें कहा गया कि यूक्रेन अमेरिकी प्रस्ताव को स्वीकार करने के लिए तैयार है, जिसके तहत “तत्काल, अस्थायी 30-दिनों के संघर्षविराम को लागू किया जाएगा, जिसे दोनों पक्षों की आपसी सहमति से बढ़ाया जा सकता है।” ट्रंप ने कहा- पुतिन को भी मनाएंगे ज़ेलेंस्की ने टेलीग्राम पर कहा कि संघर्षविराम प्रस्ताव “30 दिनों के लिए पूरी तरह से युद्धविराम स्थापित करेगा, जिसमें न केवल मिसाइल, ड्रोन और बमबारी शामिल होगी, बल्कि काला सागर और पूरे मोर्चे पर भी संघर्ष रोका जाएगा।” ट्रंप ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि रूस संघर्षविराम योजना को स्वीकार करेगा। साथ ही, उन्होंने संकेत दिया कि अमेरिका रूस के साथ बुधवार को बैठक करेगा। अमेरिका का सभी सहायता देने का वादा वार्ता में हुई प्रगति के बाद, अमेरिका ने घोषणा की कि वह “खुफिया साझाकरण पर लगाई गई रोक को तुरंत हटाएगा और यूक्रेन को सुरक्षा सहायता फिर से प्रदान करेगा।” अमेरिका ने पिछले सप्ताह यह सहायता निलंबित कर दी थी, जिससे यूक्रेन की रूसी सैन्य गतिविधियों पर नजर रखने, मिसाइल हमलों से बचाव और हमले करने की क्षमता प्रभावित हुई थी। ट्रंप और जेलेंस्की में कैसे बनी सहमति अमेरिका और यूक्रेन के संयुक्त बयान से संकेत मिलता है कि यह समझौता फिर से पटरी पर आ गया है और दोनों देश “यूक्रेन की महत्वपूर्ण खनिज संपदाओं के विकास के लिए जल्द से जल्द एक व्यापक समझौता करने पर सहमत हुए हैं, ताकि यूक्रेन की अर्थव्यवस्था को बढ़ावा दिया जा सके और उसके दीर्घकालिक समृद्धि और सुरक्षा की गारंटी दी जा सके।”

बीते 10 साल के दौरान रेल नेटवर्क में सराहनीय वृद्धि हुई है, वहीं, विपक्ष ने कहा-रेल हादसे रुकने का नाम नहीं ले रहे

नई दिल्ली राज्यसभा में बुधवार को रेल मंत्रालय के कामकाज पर चर्चा हुई। सत्ता पक्ष के सांसदों ने कहा कि बीते 10 साल के दौरान रेल नेटवर्क में सराहनीय वृद्धि हुई है। वहीं, विपक्ष के सांसदों ने सुरक्षा और रेल यात्रियों को मिलने वाली सुविधाओं का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि रेल हादसे रुकने का नाम नहीं ले रहे हैं। मध्य प्रदेश से भाजपा सांसद माया नारोलिया ने कहा कि साल 2023 तक भारतीय रेलवे के ब्रॉड गेज नेटवर्क का 85 फीसदी से अधिक विद्युतीकरण हो चुका था, जबकि साल 2014 में यह केवल 45 प्रतिशत था। इसके साथ ही भारतीय रेल दुनिया के सबसे बड़े हरित रेल नेटवर्क में शामिल हो गया है। उन्होंने कहा कि 30 हजार किलोमीटर से अधिक नई पटरियां बिछाई गई हैं और 15 हजार किलोमीटर से अधिक मार्गों का दोहरीकरण कर लिया गया है। इससे रेलवे की दक्षता में वृद्धि हुई है। माया नारोलिया ने कहा कि 2024 तक 51 वंदे भारत ट्रेनों की शुरुआत हो चुकी है। ये ट्रेनें विश्व स्तरीय सुविधाओं से लैस हैं और 160-180 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से चलने में सक्षम हैं। राजद के राज्यसभा सांसद संजय यादव ने कहा कि अभी होली का त्योहार है और हर ट्रेन में क्षमता से ज्यादा लोग हैं। उन्होंने रेल में लोगों को सुविधाएं देने की आवश्यकता की बात कही। उन्होंने कहा कि टिकट की कीमतें काफी बढ़ गई हैं। उन्होंने कहा कि प्रीमियम ट्रेनें चलाना अच्छी बात है, लेकिन जो पुरानी पैसेंजर और एक्सप्रेस ट्रेनें हैं, उन्हें बंद नहीं करना चाहिए, उनमें कोच की संख्या कम नहीं की जानी चाहिए। पहले प्रधानमंत्री का जिक्र करते हुए तेलंगाना से कांग्रेस सांसद अनिल कुमार यादव ने कहा पं. जवाहर लाल नेहरू ने भारतीय रेल का राष्ट्रीयकरण किया था। उन्होंने कई रेलवे जोन स्थापित किए। वहीं, इंदिरा गांधी के कार्यकाल में पहली राजधानी ट्रेन चलाई गई। इंदिरा गांधी ने ही कोलकाता में पहली मेट्रो रेल का उद्घाटन किया था। यादव ने कहा कि लोग आज यात्री ट्रेन में यात्रा करने से डर रहे हैं। यात्रियों के इस डर का एक बड़ा कारण लगातार होते रेल हादसे हैं। पिछले छह महीने में ही कई रेल हादसे हुए हैं। उन्होंने बीते दो साल में हुए कई रेल हादसों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि फरवरी 2024 में जम्मू के कटरा से होशियारपुर रूट पर बिना ड्राइवर एक मालगाड़ी चली गई। 60 किलोमीटर चलने के बाद इस ट्रेन को रोका जा सका। कांग्रेस सांसद ने कहा कि 16 फरवरी 2025 को जिस तरह से नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के अंदर भगदड़ मची, उसमें 18 लोगों की मौत हुई। इसका जिम्मेदार कौन है? वे लोग कुंभ जाना चाहते थे, वहां जाकर कुंभ में स्नान करना चाहते थे। महिला सुरक्षा को लेकर उन्होंने कहा कि कोयंबटूर से तिरुपति के बीच चलने वाली एक ट्रेन में गर्भवती महिला का यौन शोषण किया गया। इतना ही नहीं, महिला को ट्रेन से बाहर फेंक दिया गया। उन्होंने कहा कि वंदे भारत ट्रेनों की गति 180 से 200 किलोमीटर तक जा सकती है, लेकिन वंदे भारत ट्रेन केवल 80 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से चल रही है। इसका कारण यह है कि हमारे पास वंदे भारत चलाने के लिए फास्ट ट्रैक और उनके रखरखाव की सुविधा नहीं है।

दो भाषा के समर्थन में तमिलनाडु MP के विवादित बोल- साउथ से 40 साल पीछे हैं उत्तर के राज्य

नई दिल्ली तमिलनाडु और संसद में जारी त्रि-भाषा विवाद के बीच तमिलनाडु के एक सांसद ने कहा है कि देश के उत्तरी राज्य दक्षिणी राज्यों से 40 साल पीछे हैं। उन्होंने इसके पीछे दो-भाषा फॉर्मूले को असली वजह बताया है। मरुमलार्ची द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (MDMK) के सांसद और पार्टी प्रमुख वाइको के बेटे दुरई वाइको ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के साथ हुई एक मुलाकात का जिक्र करते हुए कहा कि दो भाषा फॉर्मूले के कारण ही तमिलनाडु के लोग लगभग सभी क्षेत्रों में हावी हैं। वाइको तमिलनाडु के शिक्षा मंत्री अंबिल महेश पोय्यामोझी के साथ केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से मुलाकात कर पीएम स्कूल्स फॉर राइजिंग इंडिया (पीएम श्री) योजना के तहत फंड जारी करने का आग्रह करने पहुंचे थे। इस पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने कहा कि तमिलनाडु को राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर हस्ताक्षर करना होगा, जिसमें तीन-भाषा नीति का प्रावधान किया गया है। इस मुलाकात के दौरान वाइको ने केंद्रीय मंत्री संग भाषा विवाद पर तर्क-कुतर्क किए। शिक्षा मंत्री संग वाद-विवाद, तर्क-कुतर्क इस मुलाकात के बारे में वाइको ने कहा, “तमिलनाडु के शिक्षा मंत्री ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री से कहा कि तमिलनाडु ने पीएम श्री योजना में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है, इसलिए हमें फंड मिलना चाहिए। आप इसे एनईपी से क्यों जोड़ रहे हैं। इस पर उन्होंने (प्रधान) ने कहा कि तमिलनाडु 40 साल पीछे है और अब आपको जाग जाना चाहिए, आप छात्रों को हिंदी क्यों नहीं सीखने दे रहे हैं?” वाइको ने बताया कि जब उन्हें बोलने का मौका मिला तो उन्होंने मंत्रीजी से कहा, “तमिलनाडु 40 साल पीछे नहीं है। उत्तरी राज्यों की तुलना में हम 40 साल आगे हैं और इसकी वजह दो भाषा फॉर्मूला है।” इतना ही नहीं एमडीएमके नेता ने कहा कि भाजपा को छोड़कर तमिलनाडु के राजनीतिक दल इस बात पर जोर दे रहे हैं कि वे तीन-भाषा नीति को स्वीकार नहीं करेंगे। न हम हिन्दी के विरोधी, न थोपने वाले लोकसभा में तिरुचिरापल्ली का प्रतिनिधित्व करने वाले वाइको ने कहा, “चूंकि एनईपी तीन-भाषा फॉर्मूले पर जोर देती है, इसलिए हमने कुछ बदलावों का सुझाव दिया है। अगर वे बदलाव मंजूर करते हैं तो हमें इस पर हस्ताक्षर करने में कोई आपत्ति नहीं है।” उन्होंने यह भी कहा कि तमिलनाडु की पार्टियां हिंदी के खिलाफ नहीं हैं। उन्होंने कहा, “चेन्नई में हिंदी प्रचारक सभा 60-70 वर्षों से काम कर रही है लेकिन हम राज्य के लोगों पर हिंदी थोपना नहीं चाहते हैं।” दुनिया पर हावी होने में दो-भाषा का योगदान उन्होंने अंग्रेजी का समर्थन करते हुए कहा कि यह लोगों से संवाद करने का एक माध्यम है और भारत को इसमें महारत हासिल करने की जरूरत है क्योंकि यह दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर अग्रसर है। उन्होंने कहा, “दक्षिण (भारत) के लोगों के लिए अंग्रेजी प्रगति का एक साधन रही है। तमिल लोग दुनिया भर में, सभी क्षेत्रों में, चाहे वह आईटी हो या चिकित्सा विज्ञान। वे अंग्रेजी दक्षता के कारण ही हावी हैं। वहां तक हमारे पहुंचने में दो-भाषा नीति का बड़ा योगदान रहा है।”

पीएम मोदी ने दी राष्ट्रीय दिवस की बधाई- भारत मॉरीशस में नई संसद के निर्माण में सहयोग करेगा

मॉरीशस प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को अपनी दो दिवसीय सरकारी यात्रा के दौरान मॉरीशस में एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया। उन्होंने घोषणा की कि भारत, मॉरीशस में एक नए संसद भवन के निर्माण में सहयोग करेगा। पीएम मोदी ने कहा, आज, मॉरीशस के प्रधानमंत्री नवीन चंद्र रामगुलाम और मैंने भारत-मॉरीशस साझेदारी को ‘बढ़ी हुई रणनीतिक साझेदारी’ का दर्जा देने का फैसला किया। यह भारत की ओर से मॉरीशस को एक उपहार होगा।” उन्होंने इसे दोनों देशों के लोकतांत्रिक मूल्यों और मजबूत संबंधों का प्रतीक बताया। भारत-मॉरीशस के मजबूत रिश्ते प्रधानमंत्री मोदी ने भारत और मॉरीशस के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि दोनों देश न केवल हिंद महासागर के जरिए जुड़े हैं, बल्कि परंपराओं और संस्कृति के भी साझेदार हैं। भारत और मॉरीशस ने विभिन्न क्षेत्रों में एक-दूसरे का समर्थन किया है, जिसमें स्वास्थ्य, अंतरिक्ष और रक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र शामिल हैं। मॉरीशस के राष्ट्रीय दिवस पर बधाई प्रधानमंत्री मोदी ने 140 करोड़ भारतीयों की ओर से मॉरीशस के लोगों को उनके राष्ट्रीय दिवस पर बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह उनके लिए गर्व की बात है कि उन्हें एक बार फिर मॉरीशस के राष्ट्रीय दिवस के अवसर पर वहां आने का मौका मिला। भारत और मॉरीशस के रिश्ते वर्षों से प्रगाढ़ रहे हैं, और इस यात्रा के दौरान लिए गए नए फैसले दोनों देशों के बीच सहयोग को और मजबूत करेंगे।

रूस-यूक्रेन के बीच पिछले तीन साल से जारी जंग में 30 दिनों के लिए तत्काल युद्धविराम पर सहमति जताई

मॉस्को सउदी अरब के जेद्दा में यूक्रेन और अमेरिकी उच्चाधिकारियों के प्रतिनिधिमंडल ने रूस-यूक्रेन के बीच पिछले तीन साल से जारी जंग में 30 दिनों के लिए तत्काल युद्धविराम पर सहमति जताई है। यूक्रेन ने इस मीटिंग में अमेरिकी प्रस्ताव पर हामी भर दी। हालांकि, इस अहम समझौते में रूस शामिल नहीं था लेकिन इस समझौते ने यूक्रेन को राहत दी है क्योंकि अमेरिका ने अब उसे सैन्य और खुफिया जानकारी मुहैया कराना शुरू कर दिया है, जिसे उसने पिछले महीने 28 फरवरी को वाइट हाउस में हुई गरमागरी के बाद रोक दिया था। हुए समझौते में तत्काल 30-दिवसीय युद्ध विराम का प्रस्ताव है, जिसे आपसी सहमति से बढ़ाया जा सकता है। यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने कीव द्वारा इस समझौते को स्वीकार किए जाने की पुष्टि करते हुए कहा, “हम यह कदम उठाने के लिए तैयार हैं, लेकिन यह भी कहा कि इसके प्रभावी होने के लिए रूस को भी सहमत होना पड़ेगा। उधर, रूस ने अभी तक इस समझौते पर सहमति या असहमति की कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है लेकिन यह जरूर कहा है कि मॉस्को यूक्रेन की 30-दिवसीय युद्ध विराम योजना पर अमेरिका से सुनने का इंतजार कर रहा है। रॉयटर्स के मुताबिक, क्रेमलिन ने कहा है कि बिना समझौते का विवरण जाने बिना युद्ध विराम योजना पर टिप्पणी नहीं की जा सकती है। रिपोर्ट में वरिष्ठ रूसी अधिकारियों के हवाले से यह भी कहा गया है कि वर्तमान स्वरूप में युद्ध विराम पर रूस का सहमत होना मुश्किल दिख रहा है। हमारी शर्तों पर चाहिए समझौता, अमेरिकी शर्तों पर नहीं रॉयटर्स ने एक वरिष्ठ रूसी सांसद के हवाले से कहा, “अगर कोई समझौता जरूरी हुआ भी तो, वह हमारी शर्तों पर होना चाहिए, अमेरिकी शर्तों पर नहीं।” बता दें कि क्रेमलिन ने पहले भी मांग की है कि यूक्रेन उन चार क्षेत्रों से हट जाए, जिन पर रूस अपना दावा करता है। इस बीच, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी इसी भावना को दोहराते हुए कहा है कि गेंद अब रूस के पाले में है। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने बुधवार को संवाददाताओं से कहा कि रूस वाशिंगटन से ब्रीफिंग का इंतजार कर रहा है। हालांकि, उन्होंने राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और डोनाल्ड ट्रम्प के बीच फोन कॉल की संभावना से इनकार नहीं किया, जिसके बारे में उन्होंने कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो इसे बहुत जल्दी आयोजित किया जा सकता है। स्थिति की संवेदनशीलता के कारण नाम न बताने की शर्त पर बात करने वाले सूत्र ने रॉयटर्स को बताया, “पुतिन के लिए इसके मौजूदा स्वरूप पर सहमत होना मुश्किल लगता है। पुतिन की स्थिति मजबूत है क्योंकि रूस आगे बढ़ रहा है।” यूक्रेन का पांचवें हिस्से पर रूस का कब्जा बता दें कि रूस यूक्रेन के लगभग पांचवें हिस्से, लगभग 113,000 वर्ग किलोमीटर (43,630 मील) पर नियंत्रण रखता है और महीनों से आगे बढ़ रहा है। युद्ध के ओपन सोर्स मानचित्रों और रूसी अनुमानों के अनुसार, यूक्रेन ने अगस्त में पश्चिमी रूस के एक हिस्से पर सौदेबाजी के लिए कब्जा कर लिया था, लेकिन वहाँ अब उसकी पकड़ कमजोर होती जा रही है। फरवरी 2022 से छिड़े यूक्रेन-रूस युद्ध में अब तक सैकड़ों लोग मारे जा चुके हैं, जबकि हजारों घायल और लाखों लोग विस्थापित हुए हैं। 1962 के क्यूबा मिसाइल संकट के बाद से मास्को और पश्चिम के बीच यह सबसे बड़ा टकराव रहा है।

पूरे घटनाक्रम में बेबस नजर आ रही पाकिस्तान सरकार ने अब अपनी नाकामी का ठीकरा भारत पर फोड़ना शुरू किया

इस्लामाबाद पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में हुई ट्रेन हाईजैक की घटना को 24 घंटे से ज्यादा हो गए हैं और आतंकियों के सामने पाकिस्तानी हुकूमत बेबस नजर आ रही है। बलूच आतंकियों के खिलाफ पाकिस्तानी सेना जमीनी ऑपरेशन में अपने कई जवान खो चुकी है। आतंकियों की यात्रियों को धमकी देने के बाद शहबाज सरकार एयरस्ट्राइक की सोच रही है। पूरे घटनाक्रम में बेबस नजर आ रही पाकिस्तान सरकार ने अब अपनी नाकामी का ठीकरा भारत पर फोड़ना शुरू कर दिया है। शहबाज के राजनीतिक सलाहकार का आरोप है कि इसमें भारत का हाथ है। पाकिस्तानी टीवी चैनल डॉन से बातचीत में शहबाज के राजनीतिक सलाहकार राणा सनाउल्लाह ने कहा, “हां, भारत कर रहा है, इसमें कोई शक नहीं है। उन्हें अफगानिस्तान जैसा एक सुरक्षित ठिकाना मिला हुआ है। तालिबान के सत्ता में आने से पहले उन्हें ये घातक हमले करने के अवसर नहीं मिलते थे, लेकिन अब उनके अभियानों में बढ़ोतरी हुई है क्योंकि अफगानिस्तान में उन्हें घात लगाकर हमला करने की सुविधा मिल रही है। हमने सरकारी स्तर पर अफगानिस्तान से कहा है कि इस गतिविधि को रोके, नहीं तो हम वहां जाकर उन ठिकानों को निशाना बनाएंगे।” राणा सनाउल्लाह के साथ बातचीत का वीडियो डॉन टीवी के एंकर ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर शेयर किया है। बता दें कि पाकिस्तान के अशांत बलूचिस्तान प्रांत में एक सुरंग में बलूच आतंकवादियों द्वारा एक यात्री ट्रेन पर हमला किए जाने के बाद सुरक्षा बलों ने कम से कम 27 आतंकवादियों को मार गिराया और 155 यात्रियों को बचा लिया गया। सुरक्षा अधिकारियों ने यह जानकारी दी। पाकिस्तानी सेना का अभियान अभी भी जारी है। सुरक्षा सूत्रों ने बताया कि बचाव अभियान के दौरान 37 यात्री घायल हो गए और उन्हें चिकित्सकीय उपचार मुहैया कराया गया है। बोलान क्वेटा और सिबी के बीच 100 किलोमीटर से अधिक लंबा पहाड़ी इलाका है। इस इलाके में 17 सुरंग हैं, जिनसे होकर रेलवे पटरी गुजरती है। दुर्गम इलाका होने की वजह से यहां ट्रेन की गति अक्सर धीमी रहती है।

पीएम श्री योजना के अन्तर्गत हिमाचल प्रदेश में 56 प्राथमिक, 5 सैकेंडरी स्कूल और 119 सीनियर सैकेंडरी स्कूलों का चयन किया

धर्मशाला पीएम श्री योजना के अन्तर्गत हिमाचल प्रदेश में 180 स्कूलों का चयन किया गया है। केन्द्रीय शिक्षा राज्य मंत्री जयंत चौधरी ने संसद में लोकसभा सदस्य डॉक्टर राजीव भारद्वाज को बताया कि पीएम श्री योजना के अन्तर्गत हिमाचल प्रदेश में 56 प्राथमिक, 5 सैकेंडरी स्कूल और 119 सीनियर सैकेंडरी स्कूलों का चयन किया गया है। उन्होंने बताया कि योजना के अन्तर्गत केन्द्र सरकार, राज्य सरकारों और केन्द्र शासित राज्यों द्वारा संचालित 14,500 स्कूलों की ढांचागत सुविधाओं को सुदृढ़ करने का प्रावधान किया गया है। उन्होंने बताया कि इन स्कूलों को नैशनल एजुकेशन पाॅलिसी-2020 के अन्तर्गत मॉडल स्कूल स्थापित करने का प्रावधान किया गया है जोकि बच्चों को खुशनुमा माहौल में उच्च क्वालिटी शिक्षा प्रदान करेंगे। जयंत चौधरी ने बताया कि पीएम श्री योजना के अन्तर्गत कुल 27,360 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे जिसमें से केन्द्र सरकार 18,128 करोड़ और राज्य सरकारें 9,232 करोड़ रुपए की हिस्सेदारी की अदायगी करेंगी। योजना के अन्तर्गत स्मार्ट क्लास रूम, डिजिटल लाइब्रेरी और आईसीटी सुविधाओं का प्रावधान किया गया है तथा बच्चों को पाठ्यक्रम चयन करती बार बेहतर विकल्प प्रदान किए गए हैं। उन्होंने बताया कि योजना के अन्तर्गत शिक्षा को मातृभाषा में प्रदान करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है ताकि छात्रों और शिक्षकों में बीच भाषा के अवरोधों को खत्म किया जा सके।  

पहली बार खादान के अंदर 5जी तकनीक का प्रयोग किया जा रहा है ताकि दुर्घटनाओं को नियंत्रित किया जा सके: किशन रेड्डी

नई दिल्ली कोयला खदानों में दुर्घटनाएं कम करने के लिए मंत्री किशन रेड्डी ने बुधवार को लोकसभा में कहा कि कोयला खादानों मे दुर्घटनाओं को रोकने के लिए लगातार काम किये जा रहे है जिसके अच्छे परिणाम आ रहे हैं। मंत्री रेड्डी ने प्रश्नकाल के दौरान एक पूरक प्रश्न के जवाब में कहा कि खादानों में दुर्घटनाओं को कम करने के लिए अलग-अलग समिति बनाने के साथ-साथ नई तकनीक का प्रयोग किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पहली बार खादान के अंदर 5जी तकनीक का प्रयोग किया जा रहा है ताकि दुर्घटनाओं को नियंत्रित किया जा सके। उन्होंने कहा कि सरकार के प्रयासों से कोयला खादानों में लगातार दुर्घटना कम हो रहे हैं और आने वाले दिनों में और कम हो उसके प्रयास किये जा रहे हैं। उन्होने कहा कि खादानों में काम करने वालों की सुरक्षा सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने एक अन्य सवाल के जवाब में कहा कि कोयला खादानों में अवैध खनन रोकने का काम राज्य सरकार का होता है। झारखंड में 50 वर्षों से अवैध खनन होता रहा है। उन्होंने कहा कि वह स्वयं झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत शोरेन से मिलकर अवैध खनन रोकने पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि इसे रोकने के लिए राज्यों को आगे आना चाहिए। मंत्री रेड्डी ने एक अन्य सवाल के जवाब में कहा कि झारखंड के झरिया में अंग्रेजों के जमाने से ही खादान के अंदर आग लगी हुई है। इसे रोकने के लिए राज्य सरकार का सहयोग जरुरी है। सरकार आग प्रभावित इलाकों से लोगों को विस्थापित कर अलग जगह पर बसाने और उन्हें रोजगार उपलब्ध कराने का प्रयास कर रही है।  

PM मोदी ने कहा, ‘भारत और मॉरीशस का संबंध सिर्फ हिंद महासागर ही नहीं, बल्कि हमारी साझी सांस्कृतिक परंपराओं और मूल्यों से भी जुड़ा

पोर्ट लुइस प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मॉरीशस के प्रधानमंत्री नवीनचंद्र रामगुलाम ने बुधवार को प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता की। इसके बाद दोनों की मौजूदगी में भारत और मॉरीशस के बीच अहम समझौते भी किए गए। दोनों देशों ने आज 8 सहमति पत्रों पर हस्ताक्षर किए। इस दौरान दोनों नोताओं ने संयुक्त बयान भी जारी किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, ‘140 करोड़ भारतीयों की ओर से मैं मॉरीशस के सभी नागरिकों को राष्ट्रीय दिवस की शुभकामनाएं देता हूं। यह मेरे लिए सौभाग्य की बात है कि मुझे मॉरीशस के राष्ट्रीय दिवस पर फिर से आने का अवसर मिला है। मैं इसके लिए प्रधानमंत्री नवीनचंद्र रामगुलाम और मॉरीशस सरकार का आभार व्यक्त करता हूं।’ उन्होंने कहा, ‘भारत और मॉरीशस का संबंध सिर्फ हिंद महासागर ही नहीं, बल्कि हमारी साझी सांस्कृतिक परंपराओं और मूल्यों से भी जुड़ा है। हम आर्थिक और सामाजिक प्रकृति की राह पर एक दूसरे के साथी हैं। प्राकृतिक आपदा हो या कोविड विपदा, हमने हमेशा एक दूसरे का साथ दिया है।’ प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ‘मॉरीशस में गति के लिए मेट्रो एक्सप्रेस, न्याय के लिए सुप्रीम कोर्ट भवन, सुखद प्रवास के लिए सोशल हाउसिंग, अच्छे स्वास्थ्य के लिए ईएनटी अस्पताल, व्यापार और पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए UPI और RUPAY कार्ड, सस्ती और बेहतर गुणवत्ता वाली दवाओं के लिए जन औषधि केंद्र, ऐसी अनेक जन केंद्रित पहल हैं, जिन्हें हमने समयबद्ध तरीके से पूरा किया है।’ पीएम मोदी को मॉरीशस के सर्वोच्च सम्मान से नवाजा गया प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस सम्मान को प्राप्त करने वाले पहले भारतीय हैं और यह 21वां अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार है, जो उन्हें किसी अन्य देश द्वारा प्रदान किया गया है। इस अवसर पर मॉरीशस के प्रधानमंत्री रामगुलाम ने कहा कि मोदी पांचवे विदेशी नागरिक हैं, जिन्हें यह प्रतिष्ठित सम्मान दिया गया है। ये भारत और मॉरीशस के ऐतिहासिक रिश्तों का सम्मान  मॉरीशस के पोर्ट लुईस में भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि जब मैं मॉरीशस आता हूं, तो ऐसा लगता है कि अपनों के बीच ही तो आया हूं। यहां की हवा में, यहां की मिट्टी में, यहां के पानी में अपनेपन का एहसास है। यहां की मिट्टी में हमारे पूर्वजों का खून और पसीना मिला हुआ है। मॉरीशस के लोगों ने, यहां की सरकार ने, मुझे अपना सर्वोच्च नागरिक सम्मान देने का फैसला लिया है। मैं आपके निर्णय को विनम्रता से स्वीकार करता हूं। ये भारत और मॉरीशस के ऐतिहासिक रिश्तों का सम्मान है। पीएम मोदी ने अपने संबोधन में कही ये बातें… पीएम मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि मुझे याद है, साल 1998 में अंतरराष्ट्रीय रामायण सम्मेलन के लिए मुझे यहां आने का अवसर मिला था। तब मैं किसी सरकारी पद पर भी नहीं था। एक सामान्य कार्यकर्ता के रूप में यहां आया था। संयोग देखिए, नवीन रामगुलाम उस समय भी प्रधानमंत्री थे। जब मैं प्रधानमंत्री बना तो नवीन रामगुलाम मेरे शपथ ग्रहण समारोह में हिस्सा लेने दिल्ली आए थे। प्रभु राम और रामायण के प्रति जो आस्था, भावना मैंने जो सालों पहले महसूस की थी, वह आज भी अनुभव करता हूं। भारत और मॉरीशस के बीच आस्था का संबंध हमारी मित्रता का बहुत बड़ा आधार हमारे पूर्वज भारत के विभिन्न क्षेत्रों से यहां लाए गए थे। जब हम भाषा, बोली और खानपान की आदतों में विविधता पर विचार करते हैं, तो यह स्थान वास्तव में एक छोटा हिंदुस्तान, एक लघु भारत का प्रतिनिधित्व करता है। जब अयोध्या में प्राण प्रतिष्ठा का आयोजन हुआ, हमारा 500 साल का इंतजार खत्म हुआ, तो भारत में जो उत्साह और उत्सव था, यहां मॉरीशस में भी उतना ही बड़ा महोत्सव हमने देखा। उस दौरान मॉरीशस ने आधे दिन की छुट्टी भी घोषित की थी। भारत और मॉरीशस के बीच आस्था का ये संबंध हमारी मित्रता का बहुत बड़ा आधार है। मां गंगा की कृपा से मॉरीशस समृद्धि की नई ऊंचाइयों को छुए पीएम मोदी ने आगे कहा कि मैं जानता हूं कि मॉरीशस के अनेक परिवार अभी-अभी महाकुंभ में भी होकर आए हैं। दुनिया को आश्चर्य हो रहा है कि मानव इतिहास का, विश्व का, ये सबसे बड़ा समागम था और उसमें मॉरीशस के लोग भी गए थे। लेकिन मुझे ये भी पता है कि मॉरीशस के मेरे अनेक परिवारजन चाहते हुए भी एकता के इस महाकुंभ में नहीं जा पाए। मुझे आपकी भावनाओं का ध्यान है, इसलिए मैं आपके लिए पवित्र संगम का और महाकुंभ के उसी समय का पवित्र जल साथ लेकर आया हूं। इस पवित्र जल को कल गंगा तालाब को अर्पित किया जाएगा। मेरी प्रार्थना है कि मां गंगा की कृपा से मॉरीशस समृद्धि की नई ऊंचाइयों को छुए। मॉरीशस में, प्रवासी भारतीयों की सातवीं पीढ़ी को ओसीआई कार्ड की पात्रता प्रदान करने का लिया निर्णय  पीएम मोदी ने कहा कि मॉरीशस में, प्रवासी भारतीयों की सातवीं पीढ़ी को ओसीआई (ओवरसीज सिटीजन ऑफ इंडिया) कार्ड की पात्रता प्रदान करने का निर्णय लिया गया है। मुझे मॉरीशस के राष्ट्रपति और उनकी पत्नी को ओसीआई कार्ड प्रदान करने का सौभाग्य मिला। साथ ही मुझे मॉरीशस के प्रधानमंत्री और उनकी पत्नी को भी यह सम्मान प्रदान करते हुए खुशी हो रही है। मॉरीशस सिर्फ एक साझेदार देश नहीं है। हमारे लिए मॉरीशस एक परिवार है। यह भारत और ग्लोबल साउथ के बीच एक सेतु है। यह रिश्ता इतिहास, विरासत और मानवीय भावना में गहरा और मजबूत है। बिहार के साथ मॉरीशस का भावुक संबंध  पीएम मोदी ने बिहार का जिक्र करते हुए कहा कि बिहार के साथ आपका भावुक संबंध भी मैं समझता हूं। दुनिया के अनेक हिस्से जब पढ़ाई-लिखाई से कोसों दूर थे, तब नालंदा जैसा ग्लोबल इंस्टीट्यूट भारत में था, बिहार में था। हमारी सरकार ने फिर से नालंदा यूनिवर्सिटी को और नालंदा स्पिरिट को रिवाइव किया है। बिहार का मखाना, ये आज भारत में बहुत चर्चा में है। आप देखेंगे कि वो दिन दूर नहीं, बिहार का ये मखाना, दुनिया भर में स्नैक्स मैन्यू का हिस्सा होगा। संकट के समय में भारत हमेशा मॉरीशस के साथ खड़ा रहा संकट के समय में भारत हमेशा मॉरीशस के साथ खड़ा रहा है। कोविड-19 के दौरान, भारत एक लाख वैक्सीन और ज़रूरी दवाइयां पहुंचाने वाला पहला देश था। जब मॉरीशस संकट का सामना करता है, तो भारत … Read more

पाकिस्तान में बलूच विद्रोहियों के कब्जे में पूरी ट्रेन, 200 लोग अभी भी बने हुए हैं बंधक, बंधकों को छुड़ाने में पाकिस्तानी सेना के छूट रहे पसीने

क्वेटा पाकिस्तान के बलूच अलगाववादी विद्रोहियों ने बलूचिस्तान प्रांत में मंगलवार को एक ट्रेन पर हमला करके उस पर कब्जा कर लिया है। ट्रेन में 200 से ज्यादा बंधक मौजूद हैं, जिन्हें छुड़ाने के लिए पाकिस्तानी सेना और सुरक्षा बल जूझ रहे हैं। ये ट्रेन बलूचिस्तान की राजधानी क्वेटा से खैबर पख्तूनख्वा के पेशावर के लिए जा रही थी। बलूच विद्रोहियों ने क्वेटा से 160 किमी की दूरी पर सिबी शहर के पास पहाड़ी इलाके में ट्रेन पर हमला किया, जब यह क्षेत्र में पड़ने वाली कई सुरंगों से गुजर रही थी। बलूचिस्तान की आजादी की मांग करने वाले बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) ने इस हमले की जिम्मेदारी ली है और बंधकों के कब्जे में होने का दावा किया है। अब तक क्या हुआ? पाकिस्तानी अधिकारियों ने बताया कि मंगलवार दोपहर को जब जाफर एक्सप्रेस क्वेटा से 160 दूर सुरंगों की शृंखला से गुजर रही थी, उस दौरान उस पर हमला किया गया। 9 डिब्बों वाली ट्रेन में 400 से ज्यादा यात्री सवार थे। पाकिस्तानी सुरक्षा सूत्रों ने कहा कि बंधकों को सुरक्षित छुड़ाने के लिए सैन्य अभियान जारी है। अधिकारियों ने अब तक 104 बंधकों को छुड़ाने का दावा किया है। क्वेटा में पाकिस्तान रेलवे के एक अधिकारी के हवाले से अल जजीरा ने बताया है कि महिलाओं बच्चों और बुजुर्गों समेत लगभग 70 यात्री हमले की जगह से लगभग 6 किमी दूर पानिर रेलवे स्टेशन पर पहुंचे। क्वेटा से पेशावर जा रही जाफर एक्सप्रेस ट्रेन में नौ बोगियां जिनमें तकरीबन 500 लोग सवार हैं, जिनमें सेना और सीक्रेट एजेंट की भी अच्छी-खासी तादाद है. पेशावर जा रही ट्रेन जैसे ही टनल में घुसी, उसी वक्त घात लगाकर बैठे बलूच विद्रोहियों ने उस पर हमला कर दिया. ताजा खबर के मुताबिक अभी तक 104 बंधकों को छुड़ा लिया गया है. रेस्क्यू कराए गए बंधकों में 50 से ज्यादा पुरुष, 30 से ज्यादा महिलाएं और बच्चे भी हैं. पाकिस्तानी सेना के लिए कितना मुश्किल है रेस्क्यू ऑपरेशन? सुरक्षा सूत्रों का कहना है कि पाकिस्तानी सेना के ऑपरेशन की वजह से आतंकी दो समूहों में बंटे हुए हैं. बीएलए के विद्रोहियों ने जाफर एक्सप्रेस ट्रेन को मशकाफ टनल (Mashkaf Tunnel) में हाईजैक किया. यह टनल क्वेटा से 157 किलोमीटर की दूरी पर है. यह टनल जिस इलाके में है, वह बेहद दुर्गम पहाड़ी इलाका है, जिसका सबसे नजदीकी स्टेशन पहरो कुनरी है. बलूचिस्तान सरकार के प्रवक्ता शाहिद रिंद ने बताया कि पेहरा कुनरी और गदालर के बीच जाफर एक्सप्रेस ट्रेन पर फायरिंग कर बीएलए के आतंकियों ने उस पर कब्जा किया था. ठ्रेन को टनल नंबर 8 में रोका गया. बोलन के जिला पुलिस अधिकारी राणा मुहम्मद दिलावर का कहना है कि यह पूरा इलाका पहाड़ी है, जो सुरंगों से पटा पड़ा है. उन्होंने बताया कि हाईजैक हुई ट्रेन इस समय बोलन दर्रे में खड़ी है. यह पूरा इलाका पहाड़ियों और सुरंगों से घिरा हुआ है, जिस वजह से मोबाइल नेटवर्क भी नहीं है. इस वजह से रेस्क्यू ऑपरेशन में दिक्कतें भी हैं. इस बीच पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा कि इन सब चुनौतियों के बावजूद सेना का मनोबल बना हुआ है. बता दें कि बलूचिस्तान पाकिस्तान का सबसे अशांत प्रांत है. यहां 1948 से ही बलूचों और पाकिस्तानी सेना के बीच टकराव होता रहा है. बलूचिस्तान के लोग पाकिस्तान से अलग होने की मांग समय से कर रहे हैं. बीते कुछ समय में चीन का इस इलाके में दखल बढ़ा है. चीन इस इलाके में कई परियोजनाओं पर काम कर रहा है, जिस वजह से उन पर लगातार हमले भी हो रहे हैं. BLA की मांग है कि बलूचिस्तान को पाकिस्तान से अलग किया जाए. BLA की सबसे प्रमुख मांग है कि बलूचिस्तान में पाकिस्तानी सरकार या सुरक्षा एजेंसी का कोई भी नुमांइदा वहां नहीं होना चाहिए. इसके अलावा चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) भी बलूचिस्तान से होकर गुजरता है. BLA इसका विरोध करती है. पाकिस्तानी सुरक्षा सूत्रों ने 16 बलूच चरमपंथियों के मारे जाने का दावा किया है। हालांकि, बलूच लिबरेशन आर्मी ने पाकिस्तानी सुरक्षाबलों के दावों का खंडन किया है और इसे पाकिस्तानी आर्मी का प्रोपेगैंडा बताया है। बीएलए ने बंधकों को छुड़ाने की खबरों को भी खारिज किया और दावा किया कि महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को इंसानियत के नाते छोड़ा गया है। समूह ने कहा कि पाकिस्तानी आर्मी की कोशिश को नाकाम कर दिया गया है और उनका स्थिति पर पूरा नियंत्रण है। हर घंटे 5 बंधकों को मारने की धमकी समूह ने दावा किया कि उन्होंने कम से कम छह सैन्य कर्मियों को मार दिया और रेलवे ट्रैक को उड़ा दिया, जिससे ट्रेन को रुकना पड़ा। बीएलए ने धमकी दी है कि अगर पाकिस्तानी सेना ने कोई अभियान शुरू किया तो बंधकों को मारना शुरू कर देंगे। इसके साथ ही बीएलए ने बलूच राजनीतिक कैदियों की रिहाई की मांग की है और 48 घंटे तक इसके पूरा न होने पर हर घंटे 5 बंधकों को मारने की धमकी दी है। कैसे बीएलए की बढ़ी ताकत? विश्लेषकों का मानना है कि बीएलए की बढ़ती ताकत और उसका मुकाबला करने में राज्य की विफलता पुरानी रणनीतियों पर उसकी निर्भरता को दर्शाती है। वाशिंगटन डीसी में स्थित बलूचिस्तान विशेषज्ञ मलिक सिराज अकबर ने कहा कि बीएलए छोटे पैमाने पर हमले करने से लेकर बड़े पैमाने पर ऑपरेशन करने तक विकसित हो गया है। समूह अब यात्री ट्रेन पर हमला कर रहा है, जो दिखाता है कि सरकार के पास उन्हें रोकने की क्षमता नहीं है। इसके साथ ही समूह अब मीडिया में बने रहने के तरीकों को सीख गया है, जो उसे नए लड़ाकों की भर्ती के लिए आकर्षित करने में मदद कर रहा है। ट्रेन पर हमले के बाद समूह ने लगातार सोशल मीडिया पर बयान जारी किया है, जिसमें लगातार घटनाक्रम पर अपडेट दिया है। यही नहीं, इसने पाकिस्तानी सुरक्षाबलों के दावों को भी गलत ठहराने के लिए सोशल मीडिया का इस्तेमाल किया है। जिस इलाके में ट्रेन को रोका गया है, वह दुर्गम पहाड़ी दर्रा है, जहां मोबाइल नेटवर्क और संसाधन पहुंचना मुश्किल है। ऐसे में पाकिस्तानी आर्मी के लिए एक कड़ा अभियान चलाने में मुश्किल आ रही है। BLA ने बलूच कैदियों की रिहाई के लिए पाक सरकार को दिया 48 घंटे का … Read more

अमेरिका ने बनाया दबाव, युद्धविराम पर यूक्रेन ने जताई सहमति, ट्रंप बोले- पुतिन भी हो जाएंगे तैयार

वाशिंगटन करीब तीन वर्षों से जारी रूस-यूक्रेन युद्ध के खत्म होने के आसार बढ़ गए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को यूक्रेन द्वारा रूस के साथ युद्धविराम पर सहमति जताने का स्वागत किया और आशा व्यक्त की कि पुतिन भी इस पर सकारात्मक प्रतिक्रिया देंगे। रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान दोनों पक्षों पर हो रही भारी संख्या में सैनिकों और नागरिकों की मौत पर दुख व्यक्त करते हुए ट्रंप ने कहा कि यह युद्ध अब खत्म होना चाहिए और युद्धविराम बहुत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा, “यूक्रेन ने युद्धविराम पर सहमति दे दी है। थोड़ी देर पहले इसे मंजूरी मिली थी। अब हमें रूस से संपर्क करना है। उम्मीद है कि राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतीन भी इस पर सहमत होंगे। शहरों में धमाके हो रहे हैं और लोग मारे जा रहे हैं। हम चाहते हैं कि यह युद्ध खत्म हो। यह एक पूर्ण युद्धविराम होगा। यूक्रेन ने इस पर सहमति दे दी है और उम्मीद है कि रूस भी सहमत होगा। युद्धविराम बहुत महत्वपूर्ण है। यदि हम रूस को इस पर सहमत करवा सकें तो यह बहुत अच्छा होगा। यदि हम ऐसा नहीं कर पाते हैं तो हम इसके लिए प्रयास करते रहेंगे।” आपको बता दें कि यूक्रेन ने अमेरिकी प्रस्ताव को स्वीकार किया है, जिसमें 30 दिनों के युद्धविराम की बात की गई थी। जेलेंस्की ने रूस के साथ तुरंत बातचीत करने की भी सहमति दी थी। मंगलवार को यूक्रेनी अधिकारियों के साथ बैठक में ट्रंप के सलाहकारों ने और अधिक दबाव डाला और यूक्रेन ने युद्धविराम पर सहमति जताई। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा, “आज हमने एक प्रस्ताव रखा जिसे यूक्रेन ने स्वीकार किया है। यह युद्धविराम और तत्काल वार्ता की शुरुआत करेगा।” रुबियो ने सोशल मीडिया पर कहा कि यूक्रेन का युद्धविराम के लिए तैयार होना स्थायी शांति के करीब एक कदम था। जेलेंस्की को व्हाइट हाउस में फिर आमंत्रित किया गया: ट्रंप ट्रंप ने  कहा कि सऊदी अरब के जेद्दा में अमेरिका-यूक्रेन बैठक के बाद यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की को व्हाइट हाउस में फिर से आमंत्रित किया गया है। जब ट्रंप से पत्रकारों ने पूछा कि क्या ज़ेलेंस्की को व्हाइट हाउस में वापस आमंत्रित किया जाएगा, तो उन्होंने कहा जरूर, बिल्कुल।

इनकम टैक्स डिपार्टमेंट उन लोगों की जांच कर रहा है जो खेती के नाम पर गलत तरीके से इनकम टैक्स बचा रहे हैं

नई दिल्ली  अगर आप खेती के नाम पर गलत तरीके से इनकम टैक्स बचा रहे हैं तो आपके ऊपर कार्रवाई हो सकती है। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट (IT विभाग) उन लोगों की जांच कर रहा है जो खेती के नाम पर गलत तरीके से इनकम टैक्स बचा रहे हैं। बता दें कि खेती की आमदनी पर इनकम टैक्स और जीएसटी दोनों ही नहीं लगता। दरअसल, कई दशकों से खेती की आमदनी और जमीन बेचने का इस्तेमाल ब्लैक मनी को सफेद करने और टैक्स बचाने के लिए होता रहा है। अब इनकम टैक्स डिपार्टमेंट पूरे देश में छानबीन कर रहा है। कई राज्यों में ऐसे मामले सामने आए हैं जहां लोगों और कंपनियों ने बिना जमीन के ही 50 लाख रुपये या उससे ज्यादा की खेती की आमदनी दिखाई है। विभाग की किन मामलों पर नजर? इनकम टैक्स डिपार्टमेंट कई ऐसे मामलों पर भी नजर रखे हुए है जहां 5 लाख रुपये प्रति एकड़ की फर्जी खेती की आमदनी दिखाई गई है। ये आंकड़े आम चलन और सरकारी आंकड़ों से बिलकुल मेल नहीं खाते। अगर विभाग इस मामले की गहराई से जांच करता है तो कई जगहों पर बवाल हो सकता है। क्योंकि कई बड़े नेता और रसूखदार लोग सीधे-सीधे या परोक्ष रूप से जमीन के मालिक हैं। ये जांच उनके लिए मुश्किलें खड़ी कर सकती है। जयपुर से शुरू हुई जांच इकॉनमिक टाइम्स के मुताबिक यह जांच जयपुर के कुछ मामलों से शुरू हुई है। इन मामलों में कुछ लोगों ने अपने इनकम टैक्स रिटर्न में 50 लाख रुपये से ज्यादा की खेती की आमदनी दिखाई थी। ‘हाई-रिस्क केस’ के तौर पर चिन्हित इन मामलों में विभाग टैक्स भरने वालों के दावों की जांच करेगा। ये मामले साल 2020-21 के हैं। आशीष करुंडिया एंड कंपनी के फाउंडर आशीष करुंडिया बताते हैं कि इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने जिन लोगों की पहचान की है उन्हें ये साबित करना होगा कि उन्होंने अपनी जमीन खेती के लिए इस्तेमाल की है। खासकर जब पहले भी सैटेलाइट इमेज से खेती की जांच की जाती रही है। ये आमदनी में शामिल नहीं जमीन की प्लॉटिंग और बिक्री, शहर की जमीन बेचना, कमर्शियल इस्तेमाल के लिए फार्महाउस किराए पर देना, मुर्गी पालन और ऐसी ही दूसरी गतिविधियों से होने वाली आमदनी खेती से मिलने वाली आमदनी में शामिल नहीं है। इस पर टैक्स देना होगा। अगर किसी ने अपनी गैर-खेती जमीन स्टांप ड्यूटी वैल्यू से कम दाम पर बेची है तो उन पर भी टैक्स लग सकता है। ये शामिल हो सकता है खेती की आमदनी में फसल बेचने से होने वाली कमाई या जमीन का किराया शामिल हो सकता है। ये जमीन नगर निगम की सीमा से बाहर होनी चाहिए और कानून में तय न्यूनतम आबादी वाले इलाके में होनी चाहिए। खेती की जमीन बेचने से होने वाला मुनाफा भी टैक्स से छूट सकता है। ये तब होगा जब जमीन इनकम टैक्स ऐक्ट, 1961 की धारा 2(14)(iii) में दी गई ‘कैपिटल असेट’ की परिभाषा में नहीं आती हो। इन मामलों में टैक्स ‘कैपिटल असेट’ के तौर पर पहचान के लिए, खेती की जमीन गांव की या शहरी, दोनों ही हो सकती है। जब गांव की जमीन बेची जाती है तो उस पर कैपिटल गेन टैक्स नहीं लगता। लेकिन शहरी खेती की जमीन बेचने पर कैपिटल गेन टैक्स लगता है। सिर्फ किसान ही नहीं, बल्कि दूसरे लोग भी खेती की जमीन खरीदते हैं। वो इसका इस्तेमाल दूसरे कामों के लिए करते हैं। इसके लिए जरूरी मंजूरियां और शुल्क चुकाना पड़ता है। खेती की आमदनी के मामले में खेती की उपज के सबूत दिखाए जा सकते हैं। लेकिन अगर किसी के पास इतनी आमदनी है जिसके लिए उपज या बिक्री का कोई सबूत नहीं है तो गलत तरीके से छूट का दावा करने पर जुर्माना लग सकता है।

ई-श्रम पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन 30.68 करोड़ के पार, फ्री बीमा समेत मिलते हैं ये फायदे, , 50 प्रतिशत से अधिक महिलाएं

नई दिल्ली ई-श्रम पोर्टल पर पंजीकृत श्रमिकों की संख्या बढ़कर 30.68 करोड़ से अधिक हो गई है। अच्छी बात यह है कि इनमें से 53.68 प्रतिशत (3 मार्च तक) महिलाएं हैं। बताना चाहेंगे केंद्रीय श्रम एवं रोजगार राज्य मंत्री, शोभा करंदलाजे ने लोकसभा को यह जानकारी दी। 21 अक्टूबर, 2024 को ई-श्रम-“वन-स्टॉप-सॉल्यूशन” किया गया था लॉन्च असंगठित श्रमिकों को विभिन्न सामाजिक सुरक्षा योजनाओं तक पहुंच प्रदान करने के लिए वन-स्टॉप-सॉल्यूशन के रूप में ई-श्रम को विकसित करने की बजट घोषणा के विजन को ध्यान में रखते हुए, श्रम और रोजगार मंत्रालय ने 21 अक्टूबर, 2024 को ई-श्रम-“वन-स्टॉप-सॉल्यूशन” लॉन्च किया। इस पोर्टल पर विभिन्न सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को एकीकृत करना शामिल “ई-श्रम-“वन-स्टॉप-सॉल्यूशन” में एक ही पोर्टल पर विभिन्न सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को एकीकृत करना शामिल है। यह ई-श्रम पोर्टल पर पंजीकृत असंगठित श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा योजनाओं तक पहुंचने और ई-श्रम पोर्टल के माध्यम से अब तक उनके द्वारा प्राप्त लाभों को देखने में सक्षम बनाता है। 13 योजनाओं को ई-श्रम के साथ पहले ही किया जा चुका एकीकृत अब तक, विभिन्न केंद्रीय मंत्रालयों/विभागों की 13 योजनाओं को पहले ही ई-श्रम के साथ एकीकृत किया जा चुका है, जिनमें प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर्स आत्मनिर्भर निधि (पीएम-स्वनिधि), प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना (पीएमएसबीवाई), प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना (पीएमजेजेबीवाई), राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना (एनएफबीएस), महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा), प्रधानमंत्री आवास योजना – ग्रामीण (पीएमएवाई-जी), आयुष्मान भारत योजना शामिल हैं। ई-श्रम पोर्टल को राष्ट्रीय करियर सेवा के साथ किया एकीकृत रोजगार और कौशल विकास के अवसर प्रदान करने के लिए ई-श्रम पोर्टल को राष्ट्रीय करियर सेवा (एनसीएस) और स्किल इंडिया डिजिटल पोर्टल के साथ भी एकीकृत किया गया है। वहीं, पेंशन योजना के तहत नामांकन की सुविधा के लिए, ई-श्रम को प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन (पीएमएसवाईएम) के साथ एकीकृत किया गया है। असंगठित श्रमिकों का बड़ा राष्ट्रीय डेटाबेस बनाने के लिए किया था ई-श्रम पोर्टल लॉन्च मंत्रालय ने आधार से जुड़े असंगठित श्रमिकों का एक बड़ा राष्ट्रीय डेटाबेस बनाने के लिए 26 अगस्त, 2021 को ई-श्रम पोर्टल लॉन्च किया था। ई-श्रम पोर्टल का उद्देश्य असंगठित श्रमिकों को सेल्फ-डिक्लेरेशन के आधार पर एक यूएएन प्रदान करके उनका पंजीकरण करके सहायता करना है। क्या है ई-श्रम पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया ई-श्रम पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करना बेहद आसान है. मजदूर अपना रजिस्ट्रेशन खुद ऑनलाइन कर सकते हैं या नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) के माध्यम से भी करवा सकते हैं. रजिस्ट्रेशन के लिए आवश्यक डॉक्यूमेंट में आधार कार्ड, बैंक अकाउंट डिटेल्स और मोबाइल नंबर की जरूरत होती है. 13 योजनाओं का मिलता है फायदा अब तक विभिन्न केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों की 13 योजनाओं को ई-श्रम के साथ इंटीग्रेट किया जा चुका है. इन योजनाओं में प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना (PMSBY), प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना (PMJJBY), आयुष्मान भारत, पीएम-स्वनिधि, पीएम आवास योजना आदि शामिल हैं. ई-श्रम पोर्टल पर रजिस्टर्ड मजदूरों को प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना (PMSBY) के तहत 2 लाख रुपये तक का इंश्योरेंस फायदा मिलता है. इसमें इंश्योरेंस के लिए मजदूरों को प्रीमियम देने की जरूरत नहीं है. किन लोगों को मिल सकता है फायदा? रेहड़ी-पटरी वाले खोमचा लगाने वाले सब्जी और दूध बेचने वाले लोग घर बनाने वाले लोग रिक्शा और ठेला चालक नाई धोबी दर्जी मोची आदि

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