LATEST NEWS

देश-विरोधी गतिविधियों, और अलगाववादी गतिविधियों को बढ़ावा देने का आरोप, गृह मंत्रालय ने 5 साल के लिए किया बैन

नई दिल्ली केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर के 2 मुस्लिम संगठनों के खिलाफ बड़ा ऐक्शन लिया है। प्रभावशाली धार्मिक नेता मिरवाइज उमर फारूक के नेतृत्व वाले अवामी एक्शन कमेटी (AAC) और शिया नेता मसरूर अब्बास अंसारी के नेतृत्व वाले जम्मू-कश्मीर इत्तेहादुल मुस्लिमीन (JKIM) पर 5 साल के लिए प्रतिबंध लगा दिया है। इन संगठनों पर देश-विरोधी गतिविधियों, आतंकवाद का समर्थन करने और अलगाववादी गतिविधियों को बढ़ावा देने का आरोप है। फारूक अलगाववादी संगठन ऑल पार्टीज हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष हैं। वह कश्मीर में सबसे बड़ी और प्रभावशाली श्रीनगर की जामिया मस्जिद के मुख्य धार्मिक नेता भी हैं, जहां वे धार्मिक उपदेश देते हैं। अंसारी भी ऑल पार्टीज हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के सीनियर मेंबर और कश्मीर के शिया नेता हैं। केंद्रीय गृह मंत्रालय के नोटिफिकेशन में कहा गया, ‘AAC अवैध गतिविधियों में लिप्त है। यह देश की अखंडता, संप्रभुता और सुरक्षा के लिए हानिकारक है। JKIM भी अवैध गतिविधियों में शामिल है, जो देश की अखंडता, संप्रभुता और सुरक्षा के लिए खतरनाक है। इसके सदस्य जम्मू-कश्मीर में अलगाववाद को बढ़ावा देने के लिए आतंकवादी गतिविधियों और भारत-विरोधी प्रचार में शामिल रहे हैं।’ मौजूदा तथ्यों को ध्यान में रखते हुए मंत्रालय ने अवैध गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम, 1967 के तहत दोनों संगठनों पर पाबंदी लगा दी है, जो 5 साल तक जारी रहेगी। दोनों संगठनों के खिलाफ क्यों लिया गया ऐक्शन गृह मंत्रालय ने कहा कि AAC के नेताओं और सदस्यों पर अवैध गतिविधियों को अंजाम देने के लिए धन जुटाने में शामिल रहने का आरोप है। इसमें जम्मू-कश्मीर में अलगाववादी, विभाजनकारी और आतंकवादी गतिविधियों का समर्थन करना शामिल है। मंत्रालय ने कहा कि AAC और इसके सदस्य अपनी गतिविधियों से देश के संवैधानिक अधिकार और संवैधानिक ढांचे के प्रति अनादर दिखाते हैं। यह संगठन जम्मू-कश्मीर को भारत से अलग करने के लिए देश-विरोधी और विध्वंसक गतिविधियों में शामिल है। यह लोगों के बीच असंतोष फैलाकर अलगाववाद को बढ़ावा दे रहा है। JKIM को लेकर गृह मंत्रालय ने कहा, ‘इसके नेता और सदस्य अवैध गतिविधियों को अंजाम देने के लिए धन जुटाने में शामिल रहे हैं। इसमें जम्मू-कश्मीर में अलगाववादी, विभाजनकारी और आतंकवादी गतिविधियों का समर्थन करना शामिल है।’

अलगाववादी आतंकवादियों ने यात्रियों को बनाया बंधक, ट्रेन में 500 से अधिक यात्री हैं सवार, 6 को उतारा मौत के घाट

क्वेटा पाकिस्तान से एक बड़ी खबर सामने आई है। आतंकवादियों ने मंगलवार को दक्षिण-पश्चिमी पाकिस्तान में एक यात्री ट्रेन पर गोलीबारी की। इस गोलीबारी में ट्रेन का चालक गंभीर रूप से घायल हो गया है। जानकारी के अनुसार आंतकियों ने इस ट्रेन को हाईजैक कर लिया है। रेलवे अधिकारियों ने बताया कि ट्रेन पाकिस्तान के दक्षिण-पश्चिमी बलूचिस्तान प्रांत के क्वेटा से खैबर पख्तूनख्वा के पेशावर जा रही थी, तभी उस पर गोलीबारी की गई। बीएलए ने ली हमले की जिम्मेदारी इस घटना पर अधिकारियों ने एक बयान में बताया कि उग्रवादी अलगाववादी समूह बलूच लिबरेशन आर्मी (बीएलए) ने हमले की जिम्मेदारी ली है। अधिकारियों ने बताया कि इस संगठन ने सुरक्षा बलों सहित ट्रेन में सवार सैकड़ों लोगों को बंधक बना लिया है। हमले के बाद एक्शन में अधिकारी अधिकारियों ने बताया कि घटनास्थल पर सुरक्षा बलों को भेजा गया है और जांच की जा रही है। जानकारी दें कि पाकिस्तान का बलूचिस्तान क्षेत्र एक संसाधन संपन्न इलाका है। हालांकि, इस क्षेत्र में हमेशा संघर्ष की घटनाओं को देखा गया है। ट्रेन में 450 से अधिक यात्री सवार पाकिस्तानी अखबार डॉन ने अधिकारियों के हवाले से बताया कि क्वेटा से पेशावर जा रही जाफर एक्सप्रेस ट्रेन पर गोलीबारी की गई है। रेलवे नियंत्रक मुहम्मद काशिफ ने बताया कि इस ट्रेन में करीब 450 से अधिक यात्री सवार हैं। उन्होंने कहा कि ट्रेन को सुरंग संख्या 8 में हथियारबंद लोगों ने रोक लिया। यात्रियों और कर्मचारियों से संपर्क करने के प्रयास किए जा रहे हैं। अस्पतालों को दिए गए ये निर्देश इस घटना पर सरकार का बयान सामने आया है, जिसमें कहा गया कि सिबी अस्पताल में आपातकाल लागू कर दिया गया है। इसके साथ ही एंबुलेंस और सुरक्षा बल घटनास्थल पर पहुंच रहे हैं। बताया जा रहा है कि जहां पर ये घटना हुई है वह पहाड़ी इलाका है, जिस कारण अधिकारियों को वहां पर पहुंचने में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। हमले में छह की मौत जानकारी के अनुसार पाकिस्तान स्थित आतंकवादी समूह बलूच लिबरेशन आर्मी (बीएलए) ने हमले की जिम्मेदारी लेते हुए कहा कि उसने 100 से अधिक यात्रियों को बंधक बना लिया है। इस संबंध में एक बयान जारी करते हुए बीएलए ने कहा कि बलूच लिबरेशन आर्मी ने मशकफ, धादर, बोलन में एक रणनीतिक अभियान चलाया है, जिसमें जाफर एक्सप्रेस को पटरी से उतारकर उस पर नियंत्रण कर लिया गया है। प्रतिरोध के दौरान, छह सैन्यकर्मी मारे गए, जबकि 100 से अधिक यात्रियों को बीएलए ने हिरासत में ले लिया है। घटनास्थल पर पहुंच रहे अधिकारी अधिकारियों ने एक बयान में कहा कि रेलवे विभाग ने बचाव के लिए घटनास्थल पर और ट्रेनें भेजी हैं। घटना के पैमाने और आतंकवादी तत्वों की संभावना का पता लगाया जा रहा है। इस घटना के बाद सरकार एक्शन मोड में है। बलूचिस्तान सरकार ने आपातकालीन उपाय करने और सभी संस्थानों को सक्रिय रहने का आदेश दिया है। ट्रेन हाईजैक की घटना के बीच अधिकारी सतर्क हैं और उन्होंने इस घटना के बाद लोगों से अपील की है कि किसी प्रकार की अफवाह पर ध्यान ना दें। बलूचिस्तान में सुरक्षा बलों पर हुए कई हमले आतंकियों और सुरक्षा बलों के बीच हमेशा बलूचिस्तान में मुठभेड़ देखने को मिलती रही है। बलूचिस्तान में अलगाववादी समूहों द्वारा स्वतंत्रता की मांग को लेकर लंबे समय से विद्रोह चल रहा है। हाल के कुछ सालों की घटनाओं पर नजर डालें तो बलूचिस्तान में सुरक्षा बलों और नागरिकों पर बार-बार हमले हुए हैं।

पीएम मोदी को मॉरीशस सरकार ने अपना सबसे बड़ा नागरिक सम्मान दिया, सम्मान को पाने वाले पहले भारतीय बने

मॉरीशस प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मॉरीशस सरकार ने अपना सबसे बड़ा नागरिक सम्मान ‘द ग्रैंड कमांडर ऑफ द ऑर्डर ऑफ द स्टार एंड की ऑफ द इंडियन ओशन’ से नवाजा है। पीएम मोदी इस प्रतिष्ठित सम्मान को पाने वाले पहले भारतीय बने हैं। गौरतलब है कि यह पीएम मोदी को किसी देश द्वारा दिया गया 21वां अंतरराष्ट्रीय सम्मान है। सम्मान पर क्या बोले पीएम मोदी इस सम्मान को स्वीकार करते हुए पीएम मोदी ने कहा, “मैं इसे विनम्रता से स्वीकार करता हूं। यह सम्मान भारत और मॉरिशस के गहरे रिश्तों का सम्मान है। यह उन भारतीयों का भी सम्मान है, जिन्होंने पीढ़ी-दर-पीढ़ी इस धरती की सेवा की और इसे ऊंचाइयों तक पहुंचाया। मैं मॉरिशस की जनता और सरकार का तहेदिल से आभार व्यक्त करता हूं।” पीएम मोदी ने याद किया कि 10 साल पहले इसी तारीख को वे मॉरिशस आए थे। उन्होंने कहा, “तब भारत में होली बीते हफ्ता भर हुआ था, और मैं अपने साथ भगवा की उमंग लेकर आया था। इस बार होली के रंग अपने साथ लेकर जाऊंगा।” उन्होंने अपने अंदाज में होली का जिक्र करते हुए कहा, “राम के हाथे ढोलक सोहे, लक्ष्मण हाथ मंजीरा, भरत के हाथ कनक पिचकारी, शत्रुघ्न हाथ अबीरा… जोगीरा!” पीएम मोदी ने भारत और मॉरिशस के ऐतिहासिक संबंधों को मिठास से जोड़ा और बताया कि एक जमाने में भारत में मिठाई बनाने के लिए चीनी मॉरिशस से आती थी। इसी वजह से गुजरात में चीनी को मॉरस भी कहा जाता है। उन्होंने कहा, “समय के साथ भारत और मॉरिशस के रिश्तों में यह मिठास और बढ़ती जा रही है।” मॉरिशस में भारत की खुशबू हर तरफ: पीएम मोदी पीएम मोदी ने कहा कि जब भी वे मॉरिशस आते हैं, उन्हें अपनों के बीच होने का एहसास होता है। उन्होंने कहा, “यहां की हवा, मिट्टी और पानी में अपनापन महसूस होता है। गीत-गवाई में, ढोलक की थाप में और गातो पिमा (मॉरिशस की पारंपरिक डिश) में भारत की खुशबू है।” पीएम मोदी ने मॉरिशस के प्रधानमंत्री नवीनराम गुलाम और उनकी कैबिनेट का आभार जताते हुए मॉरिशस की जनता को राष्ट्रीय दिवस की बधाई दी। उन्होंने कहा, “हम सब एक परिवार हैं, और यह रिश्ता हमेशा मजबूत रहेगा।”

बांग्लादेश में यूनुस सरकार के खिलाफ महिलाएं सड़कों पर हैं, बच्चों के साथ यौन उत्पीड़न की घटनाएं बढ़ रहीं

ढाका बांग्लादेश में महिलाओं के खिलाफ लगातार हिंसा बढ़ रही है। बांग्लादेश के कई जिलों में बच्चियों के साथ बलात्कार के रोज नए मामले सामने आ रहे हैं। महिलाओं के खिलाफ बढ़ रहे अपराध के विरोध में बांग्लादेश में जबरदस्त विरोध प्रदर्शन देखने को मिल रहा है। दरअसल, बांग्लादेश में यूनुस सरकार के खिलाफ महिलाएं सड़कों पर हैं। बांग्लादेश में लैंगिक हिंसा के खिलाफ चल रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच, छह और बच्चों के साथ बलात्कार की घटनाएं सामने आई हैं। इस बात की जानकारी स्थानीय मीडिया ने दी है। छह जिलों में बलात्कार के आरोप में सोमवार को कम से कम सात लोगों को गिरफ्तार किया गया। बच्चों के साथ यौन उत्पीड़न की घटनाएं बढ़ रहीं प्राप्त जानकारी के अनुसार जिन बच्चों का यौन उत्पीड़न किया गया, वे सभी छह से चौदह वर्ष की आयु के हैं। समाचार एजेंसी पीटीआई ने प्रमुख बांग्लादेशी समाचार पत्र द डेली स्टार की रिपोर्ट के हवाले से बताया कि यौन उत्पीड़न की शिकार एक किशोरी ने स्थानीय मध्यस्थता बैठक के दौरान झूठा आरोप लगाए जाने और बदनाम किए जाने के बाद आत्महत्या कर ली।   बांग्लादेश में बिगड़ रही कानून व्यवस्था पड़ोसी मुल्क में महिलाओं के खिलाफ बढ़ रही घटनाओं के विरोध में लोग सड़कों पर उतर आए हैं। महिलाओं के खिलाफ हिंसा की बढ़ती घटनाओं के खिलाफ देश के कई जिलों में विरोध प्रदर्शन देखने को मिल रहा है। देश भर में चल रहे प्रदर्शन के बीच फिर से बच्चियों के साथ हुए अपराध की घटनाओं ने बांग्लादेश में कानून और व्यवस्था की बिगड़ती स्थिति को उजागर किया है। सड़कों पर क्यों उतरीं हजारों महिलाएं बांग्लादेश में इस लगातार महिलाओं के खिलाफ हिंसा की घटनाओं में बढ़ोत्तरी हुई है। इसकी वजह से देश के विभिन्न हिस्सों में यूनुस सरकार के विरोध में महिलाएं सड़कों पर प्रदर्शन कर रही हैं। बांग्लादेश में महिलाएं बलात्कार के लिए न्याय, अपराधियों के लिए सख्त सजा और गृह मामलों के सलाहकार जहांगीर आलम चौधरी के इस्तीफे की मांग को लेकर सड़कों पर उतरीं। हाल के दिनों में मगुरा में आठ वर्षीय एक बच्ची के साथ दरिंदी की गई, जो वर्तमान में अस्पाताल में भर्ती है और जिंदगी और मौत से जूझ रही है। इस घटना के बाद लोगों में गुस्सा बढ़ा और देश भर के तमाम विश्वविद्यालयों के छात्रों और शिक्षकों ने इस घटना के विरोध में सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। प्रदर्शन कर रहे लोगों ने अपराधियों के लिए कठोर सजा की मांग की। नहीं थम रहे अपराध बता दें कि बांग्लादेश में अगस्त 2024 में मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के सत्ता में आने के बाद से पूरे बांग्लादेश में महिलाओं के खिलाफ हिंसा के कई मामले सामने आए हैं। महिलाओं के खिलाफ लगातार बढ़ रहे अपराध के खिलाफ अंतरिम सरकार के प्रति जनता में आक्रोश फैल गया है। छात्रों ने जहांगीर आलम चौधरी के इस्तीफे की मांग की और अंतरिम सरकार को देश भर में कानून और व्यवस्था की स्थिति को खराब करने के लिए जवाबदेह ठहराया।

भारत 2028 तक दुनिया का सबसे बड़ा वेब3 डेवलपर हब बन जाएगा !, लेटेस्ट रिपोर्ट में मिली जानकारी

बेंगलुरु भारत वेब3 स्पेस में तेजी से ग्लोबल लीडर के रूप में उभर रहा है। इसके 2028 तक दुनिया का सबसे बड़ा वेब3 डेवलपर हब बनने की उम्मीद है। मंगलवार को आई एक लेटेस्ट रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई। हैशड इमर्जेंट की लेटेस्ट ‘इंडिया वेब3 लैंडस्केप’ रिपोर्ट से पता चला है कि देश ने 2024 में सालाना आधार पर डेवलपर भागीदारी में सबसे अधिक वृद्धि दर्ज की, जिससे गिटहब में 4.7 मिलियन से अधिक डेवलपर जुड़े। यह वैश्विक स्तर पर सभी नए वेब3 डेवलपर्स का 17 प्रतिशत है, जिससे भारत दुनिया में दूसरा सबसे बड़ा क्रिप्टो डेवलपर बेस बन गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि 45.3 प्रतिशत भारतीय वेब3 डेवलपर्स कोडिंग में योगदान देते हैं, 29.7 प्रतिशत बग्स को ठीक करने पर ध्यान केंद्रित करते हैं और 22.4 प्रतिशत डॉक्यूमेंटेशन पर काम करते हैं। विकास के लोकप्रिय क्षेत्रों में गेमिंग, नॉन-फंजिबल टोकन (एनएफटी), विकेंद्रीकृत वित्त और रियल-वर्ल्ड एसेट शामिल हैं। भारत के वेब3 डेवलपर्स का एक बड़ा हिस्सा नए लोग हैं, जिनमें से 50 प्रतिशत से अधिक ने पिछले दो वर्षों में इस क्षेत्र में प्रवेश किया है। उनमें से अधिकांश 27 वर्ष से कम आयु के हैं। हैकाथॉन एक ऐसा आयोजन है, जहां कंप्यूटर प्रोग्रामर मिलकर कुछ नया बनाने के लिए काम करते हैं। यह डेवलपर्स के लिए प्राथमिक प्रवेश द्वार बना हुआ है। हालांकि, वेब3 फर्म भुवनेश्वर, चेन्नई और केरल के विश्वविद्यालयों के साथ भी सक्रिय रूप से सहयोग कर रही हैं ताकि छात्रों को ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी से जल्द परिचित करवाया जा सके। हैशेड इमर्जेंट के सीईओ और मैनेजिंग पार्टनर टाक ली ने कहा, “देश की तकनीक को लेकर तेजी से आगे बढ़ने की योग्यता, उद्यमशीलता की भावना और डिजिटल अपनाने का अनूठा मिश्रण प्रगति को गति दे रहा है।” उन्होंने कहा कि अब हम नए सिरे से खुदरा भागीदारी, निवेशकों के रुझान में बदलाव और उद्यमों और सरकार द्वारा वेब3 सॉल्यूशन के डीपर इंटीग्रेशन को देख रहे हैं। उन्होंने आगे कहा, “पिछले साल, हमने वेब3 अपनाने में भारत के ग्लोबल लीडरशिप को नोटिस किया और आज यह भारतीय इनोवेटर्स की लीडरशिप में ठोस प्रगति में बदल रहा है।” भारत वेब3 स्टार्टअप संस्थापकों के मामले में भी वैश्विक स्तर पर तीसरे स्थान पर है। इस क्षेत्र में 1,200 से अधिक स्टार्टअप संचालित हैं। देश के वेब3 इकोसिस्टम में निवेशकों का विश्वास बढ़ा है, जिससे 2023 की तुलना में फंडिंग में 109 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि 2024 में भारतीय स्टार्टअप ने 564 मिलियन डॉलर जुटाए, जिससे इस क्षेत्र में कुल निवेश 3 बिलियन डॉलर से अधिक हो गया। रिपोर्ट में एआई, आरडब्ल्यूए और स्टेकिंग सॉल्यूशन को निवेश आकर्षित करने वाले प्रमुख क्षेत्रों के रूप में उजागर किया गया है। कई ग्लोबल वेंचर कैपिटल और घरेलू फर्म भारतीय वेब3 परियोजनाओं पर बड़ा दांव लगा रही हैं। इसके अतिरिक्त, लेयर 1 और लेयर 2 ब्लॉकचेन नेटवर्क से इकोसिस्टम फंड ने पर्याप्त निवेश किया है, जिससे ग्लोबल वेब3 लैंडस्केप में भारत की स्थिति और मजबूत हुई है।

पश्चिम बंगाल में राज्य की कानून-व्यवस्था रोहिंग्या और बांग्लादेशियों के हाथ में है : संजय जायसवाल

नई दिल्ली भाजपा सांसद संजय जायसवाल ने पश्चिम बंगाल की जादवपुर यूनिवर्सिटी में हुई हिंसा के परिप्रेक्ष्य में मंगलवार को कहा कि राज्य की कानून-व्यवस्था रोहिंग्या और बांग्लादेशियों के हाथ में है। संसद भवन परिसर में आईएएनएस से बात करते हुए उन्होंने वक्फ मुद्दे पर भी अपनी राय रखी। वहीं, केरल के सांसदों ने आशा कार्यकर्ताओं के मुद्दे पर प्रदर्शन किया। संजय जायसवाल ने जादवपुर विश्वविद्यालय में हुई हिंसा पर कहा, “बंगाल में कानून-व्यवस्था का पूरी तरह से अभाव है। वहां रोहिंग्या और बांग्लादेशी लोग कानून-व्यवस्था चला रहे हैं, जिसकी वजह से ऐसी घटनाएं हो रही हैं।” उन्होंने कहा कि देश को एकजुट होकर ऐसे लोगों को कानूनी सजा देनी चाहिए। भाजपा सांसद ने वक्फ संपत्ति के बारे में कहा कि सभी को शांतिपूर्ण धरने का अधिकार है, लेकिन उलेमाओं से यह सवाल किया कि जबरदस्ती छीनी हुई या झपटी हुई संपत्ति कैसे वक्फ की संपत्ति हो सकती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वक्फ की संपत्ति अल्लाह की इबादत है, तो क्या अल्लाह नाजायज संपत्ति को स्वीकार करेंगे? उन्होंने कहा कि पुरानी वक्फ संपत्तियों को छह महीने के भीतर रजिस्टर कराने का आदेश दिया गया है, लेकिन यदि किसी ने सरकारी या किसी अन्य की भूमि पर कब्जा किया है, तो उसे स्वीकार करना होगा। उन्होंने यह भी बताया कि मस्जिदों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ रहा है, परंतु गलत तरीके से कब्जा की गई भूमि पर कार्रवाई होगी। केरल के सांसदों ने कार्यवाही शुरू होने से पहले संसद भवन परिसर में आशा वर्कर्स के मुद्दे पर नारेबाजी की। कांग्रेस सांसद के.सी. वेणुगोपाल ने कहा कि वह लगातार केरल की आशा वर्कर्स का मुद्दा उठा रहे हैं। उन्होंने बताया कि पिछले 30 दिन से आशा वर्कर्स परेशान हैं। उन्हें भत्ते, क्षतिपूर्ति, और सेवानिवृत्ति लाभ नहीं मिले हैं। वेणुगोपाल ने कहा कि आशा वर्कर्स स्वास्थ्य क्षेत्र की रीढ़ हैं और कोविड के दौरान उनके योगदान की पूरी दुनिया ने सराहना की थी।

मॉरीशस में भोजपुरी भाषा की महत्वपूर्ण मौजूदगी पर भी खुशी जाहिर की, पीएम मोदी ने बताया-गौरव की बात

पोर्ट लुईस पीएम मोदी ने कहा कि वह मॉरीशस में अविस्मरणीय स्वागत से बहुत अभिभूत है। उन्होंने मॉरीशस में भोजपुरी भाषा की महत्वपूर्ण मौजूदगी पर भी खुशी जाहिर की। पीएम मोदी ने पोर्ट लुईस पहुंचने के बाद एक्स पर हिंदी और भोजपूरी भाषा में पोस्ट किया। उन्होंने लिखा, “मॉरीशस में अविस्मरणीय स्वागत से बहुत अभिभूत हूं। यहां की संस्कृति में भारतीयता किस तरह रची-बसी है, उसकी पूरी झलक ‘गीत-गवई’ में देखने को मिली। हमारी भोजपुरी भाषा मॉरीशस में जिस तरह से फल-फूल रही है, वह हर किसी को गौरवान्वित करने वाली है।” वहीं भोजपुरी भाषा में उन्होंने एक्स पर पोस्ट किया, “मॉरीशस में यादगार स्वागत भइल। सबसे खास रहल गहिरा सांस्कृतिक जुड़ाव, जवन गीत – गवई के प्रदर्शन में देखे के मिलल। ई सराहनीय बा कि महान भोजपुरी भाषा मॉरीशस के संस्कृति में आजुओ फलत-फूलत बा और मॉरीशस के संस्कृति में अबहियो जीवंत बा।” इससे पहले सर शिवसागर रामगुलाम अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट मॉरीशस के प्रधानमंत्री नवीनचंद्र रामगुलाम ने पीएम मोदी का माला पहनाकर स्वागत किया। भारतीय समुदाय की तरफ से पीएम मोदी का गर्मजोशी से स्वागत किया गया। समुदाय की महिलाओं ने ‘गीत गवई’ नामक पारंपरिक बिहारी सांस्कृतिक प्रस्तुति के माध्यम से उनका सम्मान किया। पीएम मोदी ने एक्स पर लिखा, “मॉरीशस में भारतीय समुदाय द्वारा किए गए गर्मजोशी भरे स्वागत से मैं बहुत प्रभावित हूं। भारतीय विरासत, संस्कृति और मूल्यों से उनका गहरा जुड़ाव वाकई प्रेरणादायक है। इतिहास और दिल का यह बंधन पीढ़ियों से चला आ रहा है।” प्रधानमंत्री मोदी बुधवार को देश के राष्ट्रीय दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। भारतीय नौसेना के एक जहाज के साथ भारतीय रक्षा बलों की एक टुकड़ी भी समारोह में भाग लेगी। यह प्रधानमंत्री मोदी की 2015 के बाद पहली मॉरीशस यात्रा है। प्रधानमंत्री मोदी की वर्तमान यात्रा से विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।  

पाकिस्‍तान :बलूचिस्तान में बलूच विद्रोहियों ने ट्रेन को हाईजैक किया, 500 यात्री बंधक, 6 पाकिस्‍तानी सैनिकों को मौत के घाट उतारा

इस्लामाबाद  पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में मंगलवार को एक यात्री ट्रेन को हाईजैक कर लिया गया है। इस ट्रेन में करीब 500 यात्री सवार हैं। बलूचिस्तान के अलगाववादी गुट बीएलए ने एक बयान जारी कर ट्रेन पर कब्जा करने का दावा किया है। गुट का कहना है कि ट्रेन को हाईजैक करने की कोशिश पाकिस्तान के छह सैन्यकर्मी भी मारे गए हैं। इस संघर्ष के बाद उन्होंने ट्रेन को काबू करते हुए 100 से ज्यादा यात्रियों को बंधक बनाने का दावा किया है। हालांकि बंधकों की सही संख्या की जानकारी नहीं मिल सकी है। पाकिस्तान की शहबाज शरीफ सरकार की ओर से अभी तक कोई बयान इस संबंध में नहीं आया है। सेना ने भी इस संबंध में अभी कुछ नहीं कहा है। हाईजैक हुई ट्रेन पाकिस्तान के दक्षिण-पश्चिमी बलूचिस्तान प्रांत के क्वेटा से खैबर पख्तूनख्वा के पेशावर जा रही थी, तभी उस पर हमला हुआ। पाक अखबार डॉन के मुताबिक रेलवे नियंत्रक मुहम्मद काशिफ ने बताया कि नौ डिब्बों वाली इस ट्रेन में करीब 500 यात्री सवार थे। ऐसे में ये स्पष्ट नहीं है कि कितने लोग बंधक बनाए गए हैं। महिला, बच्चों और बलूच लोगों को छोड़ देने का दावा किया जा रहा है। टनल पर रोकी गई है ट्रेन मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, हथियारबंद लोगों ने जाफर एक्सप्रेस नाम की इस ट्रेन को बलूचिस्चान में टनल 8 पर रोक रखा है। लंबे समय से बलूचिस्तान में पाकिस्तान सरकार के खिलाफ लड़ रहे गुट बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) ने ट्रेन को हाईजैक करने के बाद जारी बयान में कहा गया है कि बंधकों में पाकिस्तानी सेना के जवान और सुरक्षा एजेंसियों के सदस्य शामिल हैं। बीएलए ने कहा है कि उनकी बात ना माने जाने पर इनको नुकसान पहुंचाया जा सकता है। बीएलए ने कहा है कि उन्होंने ट्रेन में महिलाओं, बच्चों और बलूच यात्रियों को रिहा कर दिया है। उन्होंने यह भी सुनिश्चित किया है कि सभी बंधक पाकिस्तानी सेना के ही लोग हैं। उन्होंने कहा कि विदेशियों को बंध बनाने का उनका इरादा नहीं है। बलूचिस्तान में अलगाववादी बीएलए और पाकिस्तानी सरकार के बीच लंबे समय से संघर्ष चल रहा है। ट्रेन हाईजैक की ये घटना इस संघर्ष के तेज होने का इशारा करती है। बीएलए लंबे समय से इस क्षेत्र में स्वायत्तता की मांग कर रहा है। बीएलए लड़ाके पहले भी पाकिस्तानी सुरक्षा बलों और सरकारी प्रतिष्ठानों पर हमले करते रहे हैं। हालांकि ट्रेन को हाईजैक करने का ये अपनी तरह का पहला मामला है। बलूचिस्तान प्रांत में बताया जा रहा है कि बोलान इलाके में ट्रेन सुरंग के अंदर पहुंची, जब यह हमला हुआ. मसलन, ट्रेन सुरंग नंबर 8 में ट्रेन जैसे ही पहुंची और ट्रैक पर धमाका हो गया. ट्रेन रुक गई और हमलावरों ने ट्रेन के इंजन पर फायरिंग की और इसमें ड्राइवर जख्मी हो गया. क्वेटा से पेशावर तक चलती है जाफर एक्सप्रेस जाफर एक्सप्रेस क्वेटा से पेशावर के बीच हर रोज चलती है. यह एक यात्री ट्रेन है. ये ट्रेन रोहरी-चमन रेलवे लाइन और कराची-पेशावर रेलवे लाइन के एक हिस्से के साथ यात्रा करते हुए, 1,632 किलोमीटर (1,014 मील) की दूरी तय करती है. ये दूरी कवर करने में ट्रेन को 34 घंटे 10 मिनट लगते हैं. पाकिस्तानी सेना के 100 से ज्यादा जवान भी बंधक बलूच लिब्रेशन आर्मी ने एक बयान में कहा है कि उनके पास 100 से भी ज्यादा पाकिस्तानी सेना के जवान बंधक हैं. इस बीच बीएलए ने पाकिस्तानी आर्मी के छह जवानों को मौत के घाट उतार दिया है. इसके साथ ही चेतावनी दी है कि अगर किसी तरह की कार्रवाई की जाती है तो सभी को मार दिया जाएगा. बलूचिस्तान में लंबे समय से पाकिस्तान का विरोध होता है.

चुनावी प्रक्रिया को मजबूती देने के लिए यह कदम उठाया गया है ताकि लोकतंत्र को और अधिक सशक्त बनाया जा सके: चुनाव आयोग

नई दिल्ली भारतीय निर्वाचन आयोग ने देश के सभी राजनीतिक दलों को एक महत्वपूर्ण पत्र लिखा है। आयोग ने पत्र में सभी दलों से चुनावी प्रक्रिया को और सशक्त और पारदर्शी बनाने के लिए उनके सुझाव मांगे हैं। आयोग का कहना है कि चुनावी प्रक्रिया को मजबूती देने के लिए यह कदम उठाया गया है ताकि लोकतंत्र को और अधिक सशक्त बनाया जा सके। इसके तहत चुनावी सुधारों पर विचार-विमर्श के लिए भारतीय निर्वाचन आयोग ने विभिन्न राजनीतिक दलों के अध्यक्षों और वरिष्ठ नेताओं को बातचीत के लिए आमंत्रित किया है। आयोग ने यह भी कहा कि यह संवाद कानूनी ढांचे के भीतर चुनावी प्रक्रियाओं को और मजबूत बनाने के उद्देश्य से होगा। आयोग का उद्देश्य है कि चुनाव में अधिक पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित की जा सके ताकि सभी नागरिकों को एक साफ और उचित चुनाव प्रक्रिया का अनुभव हो सके। वहीं यह कदम भारतीय लोकतंत्र को और भी मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है जिससे राजनीतिक दलों और आम जनता के बीच विश्वास बढ़ सके।

बृजभूषण के करीबी का कायम हुआ ‘दबदबा’- भारतीय कुश्ती महासंघ से आखिर हटा बैन

नई दिल्ली खेल मंत्रालय ने भारतीय कुश्ती महासंघ (डब्ल्यूएफआई) पर लगाया गया निलंबन हटा दिया है, जिससे खेल में कई महीनों से बनी अनिश्चितता समाप्त हो गई है और विभिन्न प्रतियोगिताओं के आयोजन का रास्ता भी साफ हो गया है, जिनमें अम्मान में होने वाली एशियाई चैंपियनशिप के लिए चयन ट्रायल भी शामिल है। मंत्रालय ने संचालन संबंधी गतिविधियों में खामियों के कारण 24 दिसंबर, 2023 को डब्ल्यूएफआई को निलंबित कर दिया था। नई संस्था का गठन इससे तीन दिन पहले 21 दिसंबर को हुआ था। डब्ल्यूएफआई के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह के करीबी संजय सिंह का फिर से ‘दबदबा’ कायम हो गया। ‘डब्ल्यूएफआई ने सुधारात्मक कदम उठाए’ संजय सिंह के नेतृत्व वाली नई संस्था ने बृजभूषण शरण सिंह के गढ़ नंदिनी नगर, गोंडा में अंडर -15 और अंडर -20 राष्ट्रीय चैंपियनशिप आयोजित करने की घोषणा की थी, जिससे सरकार नाराज थी क्योंकि पूर्व भाजपा सांसद यौन उत्पीड़न के आरोपों का सामना कर रहे थे। मंत्रालय ने अपने आदेश में कहा कि डब्ल्यूएफआई ने सुधारात्मक कदम उठाए हैं और इसलिए खेल और खिलाड़ियों के व्यापक हित को ध्यान में रखते हुए मंत्रालय ने निलंबन हटाने का फैसला किया है। WFI को कुछ निर्देशों का करने है पालन संजय सिंह ने पीटीआई से कहा, ‘‘मैं इस फैसले के लिए मंत्रालय का आभार व्यक्त करता हूं। अब हम सुचारू रूप से काम कर सकेंगे। खेल के लिए यह बेहद जरूरी था। खिलाड़ी प्रतियोगिताओं में भाग नहीं ले पाने के कारण परेशान थे।’’ मंत्रालय ने हालांकि डब्ल्यूएफआई से कुछ निर्देशों का पालन करने को कहा है जैसे कि डब्ल्यूएफआई को यह सुनिश्चित करना होगा कि निर्वाचित पदाधिकारियों के बीच शक्ति का संतुलन बना रहे तथा वह स्वयं को निलंबित या बर्खास्त किए गए अधिकारियों से अलग रखे। 4 सप्ताह के अंदर हलफनामा देना होगा नए महासचिव प्रेम चंद लोचब विरोधी खेमे से चुने गए थे और मंत्रालय के निर्देश को उसी संदर्भ में समझा जा सकता है। मंत्रालय ने अपने आदेश ने कहा, ‘‘डब्ल्यूएफआई की कार्यकारी परिषद को इस संबंध में चार सप्ताह के अंदर हलफनामा देना होगा। किसी भी तरह का कोई भी उल्लंघन उचित कानूनी कार्रवाई को आमंत्रित करेगा, जिसमें खेल संहिता के तहत कार्रवाई भी शामिल है।’’ इसमें यह भी कहा गया है कि डब्ल्यूएफआई को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि सभी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए चयन खेल संहिता के मौजूदा प्रावधानों और यूडब्ल्यूडब्ल्यू (कुश्ती की अंतरराष्ट्रीय संचालन संस्था) द्वारा समय-समय पर जारी नियमों के साथ इस संबंध में जारी अन्य नवीनतम निर्देशों के अनुसार स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से किया जाना चाहिए। ‘WFI जल्द करेगा ये जरूरी काम’ डब्ल्यूएफआई अध्यक्ष ने कहा कि ऐसा कुछ भी नहीं है जिसका पालन नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा, ‘‘हम जल्द ही कार्यकारिणी की बैठक बुलाएंगे और चयन ट्रायल्स के लिए एक परिपत्र भी जारी करेंगे। हमें इन निर्देशों का पालन करने में कोई समस्या नहीं है।’’ एशियाई चैंपियनशिप का आयोजन 25 मार्च से जॉर्डन के अम्मान में किया जाएगा। मंत्रालय के निलंबन और प्रमुख पहलवान विनेश फोगाट, बजरंग पूनिया और सत्यव्रत कादियान द्वारा दायर अदालती मामलों के कारण भारतीय पहलवान जाग्रेब और अल्बानिया में रैंकिंग सीरीज़ टूर्नामेंट में भाग नहीं ले पाए थे। केवल WFI को मान्यता देता है UWW बृजभूषण के खिलाफ विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व करने वाले पहलवानों ने तर्क दिया था कि निलंबित होने के कारण डब्ल्यूएफआई के पास राष्ट्रीय टीमों को चुनने का अधिकार नहीं है। अदालत ने भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) को डब्ल्यूएफआई का कामकाज संभालने के लिए तदर्थ पैनल को बहाल करने का निर्देश दिया था, लेकिन देश की सर्वोच्च खेल संस्था ने यह कहते हुए इनकार कर दिया था कि यूडब्ल्यूडब्ल्यू केवल डब्ल्यूएफआई को मान्यता देता है और तदर्थ पैनल से प्रविष्टियां स्वीकार नहीं करेगा। ‘युवा खिलाड़ी खामियाजा भुगत रहे थे’ यूडब्ल्यूडब्ल्यू ने आईओए को धमकी दी थी कि अगर उसके प्रशासन में हस्तक्षेप किया गया तो डब्ल्यूएफआई को फिर से निलंबित कर दिया जाएगा। हरियाणा के एक प्रमुख अभ्यास केंद्र से जुड़े एक कोच ने कहा, ‘‘यह हम सभी के लिए राहत की बात है कि निलंबन हटा दिया गया है। प्रतियोगिताओं का आयोजन नहीं हो रहा था और युवा खिलाड़ी बिना किसी गलती के खामियाजा भुगत रहे थे। वे टूर्नामेंट नहीं खेल रहे थे, कोई राष्ट्रीय शिविर नहीं था। निलंबन बहुत पहले ही हटा लिया जाना चाहिए था।’’

सर्वे में देखने को मिला, इजरायली नागरिकों का कहना है कि पीएम नेतन्याहू को पद से इस्तीफा दे देना चाहिए

जरूसलम इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के खिलाफ उनके ही देश में असंतोष चरम पर पहुंच गया है। इसकी बानगी एक सर्वे में देखने को मिली, जिसमें करीब तीन चौथाई इजरायली नागरिकों का कहना है कि पीएम नेतन्याहू को 7 अक्टूबर, 2023 की घटनाओं की जिम्मेदारी लेते हुए अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए। इजरायल डेमोक्रेसी इंस्टीट्यूट द्वारा रविवार को जारी किए गए मासिक सर्वे के नतीजों के अनुसार लगभग 75 फीसदी इजरायलियों का मानना है कि नेतन्याहू को अब अपना पद छोड़ देना चाहिए। टाइम्स ऑफ इजरायल की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि फरवरी महीने के लिए, किए गए एइजरायली वॉयस इंडेक्स (जो जनता की राय का एक मासिक सर्वेक्षण है) के सर्वे में 48 फीसदी लोगों का कहना है कि नेतन्याहू को तुरंत अपना पद छोड़ देना चाहिए, जबकि 24.5 फीसदी लोगों का मानना ​​है कि गाजा में युद्ध की समाप्ति के बाद उन्हें पीएम पद छोड़ देना चाहिए। इसके अलावा 14.5 फीसदी लोगों का कहना है कि उन्हें इस्तीफा दिए बिना और पद पर बरकरार रहते हुए गाजा से निपटने की जिम्मेदारी पूरी करनी चाहिए। हालांकि, 10 फीसदी लोग ऐसे भी हैं, जिनका कहना है कि नेतन्याहू को अब न तो जिम्मेदारी निभाने की जरूरत है और न ही इस्तीफा देने की जरूरत है। ‘प्राइम मिनिस्टर नहीं क्राइम मिनिस्टर’ कुल मिलाकर देखें तो इस सर्वे में पाया गया है कि कुल 72.5% लोगों का मानना ​​है कि नेतन्याहू को जिम्मेदारी लेनी चाहिए और अभी या युद्ध के बाद इस्तीफा दे देना चाहिए, जबकि 87% लोगों का मानना ​​है कि उन्हें 7 अक्टूबर की जिम्मेदारी लेनी चाहिए, भले ही वे बाद में इस्तीफा दें या नहीं। बता दें कि इजरायल में लंबे समय से लोग ‘प्राइम मिनिस्टर नहीं क्राइम मिनिस्टर’ नाम का पोस्टर हाथों में थाम नेतन्याहू के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। यहूदियों में भी भारी रोष जहां तक बात रही यहूदियों की तो 45% यहूदी उत्तरदाताओं का मानना ​​है कि नेतन्याहू को तुरंत इस्तीफा दे देना चाहिए, जबकि 59% अरबों का मानना है कि नेतन्याहू को तुरंत इस्तीफा दे देना चाहिए। यह यहूदियों की तुलना में काफी ज्यादा है। ये सर्वे 25 से 28 फरवरी के बीच कराए गए थे। 73 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने इस बात पर अपनी सहमति जताई कि इजरायल को हमास के साथ युद्ध विराम/बंधक वापसी समझौते के दूसरे चरण में आगे बढ़ना चाहिए। इस समझौते में दुश्मनी की पूर्ण समाप्ति, गाजा से वापसी और सभी बंधकों की रिहाई के बदले में फिलिस्तीनी कैदियों की रिहाई शामिल है। गाजा पर समझौते से जुड़े सवाल के उत्तरदाताओं में नेतन्याहू की अपनी लिकुड पार्टी के 61.5% मतदाता शामिल थे। हालांकि समझौते को जारी रखने के लिए समर्थकों की संख्या अन्य गठबंधन दलों के मतदाताओं के बीच विरोधियों से ज्यादा है।

ट्रंप ने भारत को लेकर दावा किया था कि नई दिल्ली से उन्हें भरोसा मिला है कि अमेरिकी उत्पादों के आयात पर टैक्स में कमी की

नई दिल्ली अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बढ़-चढ़कर दावे करने के लिए जाने जाते हैं। पिछले दिनों वाइट हाउस में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान यूक्रेन को यूरोप की फंडिंग को लेकर उन्होंने एक दावा किया था, जिसे उसी दौरान फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने खारिज कर दिया था। तब डोनाल्ड ट्रंप चुप रह गए थे। अब ऐसा ही मौका भारत के साथ भी आया है। उन्होंने भारत को लेकर दावा किया था कि नई दिल्ली से उन्हें भरोसा मिला है कि अमेरिकी उत्पादों के आयात पर टैक्स में कमी कर दी जाएगी। अब उनके इस दावे को भारत ने खारिज कर दिया है। वाणिज्य सचिव सुनील बरथवाल ने संसदीय पैनल को बताया है कि ऐसी कोई भी प्रतिबद्धता अमेरिका के आगे जाहिर नहीं की गई है। उन्होंने कहा कि टैरिफ में कटौती जैसा कोई वादा भारत ने अमेरिका से नहीं किया है। विदेश मामलों की संसदीय समिति के समक्ष वाणिज्य सचिव ने बताया कि भारत और अमेरिका के बीच अब भी वार्ता जारी है। फिलहाल किसी भी तरह का ट्रेड अग्रीमेंट फाइनल नहीं हुआ है। संसदीय समिति के कई सदस्यों ने अमेरिकी राष्ट्रपति के दावे को लेकर चिंता जाहिर की थी। इस पर बरथवाल ने जवाब देते हुए कहा, ‘अमेरिकी राष्ट्रपति के दावों और मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर ही कुछ नहीं कहा जा सकता। फिलहाल दोनों देशों के बीच ट्रेड अग्रीमेंट को लेकर वार्ता जारी है। भारत ने अब तक अमेरिका के साथ ट्रेड टैरिफ में कटौती की कोई प्रतिबद्धता जाहिर नहीं की है।’ वाणिज्य सचिव ने यह भी कहा कि अमेरिका के साथ समझौतों में भारतीय हितों का संरक्षण किया जाएगा। उन्होंने कहा कि भारत फ्री ट्रेड का पक्षधर है और उदारता की नीति अपनाता है। हमारी कोशिश है कि दोनों देशों के बीच कारोबार में इजाफा हो। भारतीय अधिकारी ने कहा कि हम फ्री ट्रेड की बात करते हैं, लेकिन यह भी ध्यान रखने की जरूरत है कि ट्रेड वार से किसी के भी हितों का संरक्षण नहीं हो सकेगा। इससे मंदी की आहट जरूर आ सकती है। बरथवाल ने ससंदीय समिति को बताया, ‘भारत मनमाने तरीके से टैरिफ में कोई कटौती नहीं करेगा। खासतौर पर ऐसे उद्योगों में जो घरेलू अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण हैं। भारत टैरिफ में कटौती के लिए द्विपक्षीय वार्ता को तरजीह देता है और यह भी ध्यान रखता है कि राष्ट्रीय हितों से समझौता न किया जाए।’ कनाडा और मेक्सिको से तुलना पर भी भारत ने दिया जवाब कनाडा और मेक्सिको के साथ भारत की तुलना को भी उन्होंने खारिज किया। बरथवाल ने कहा कि कनाडा और मेक्सिको के साथ तो अमेरिका का अवैध प्रवासी, घुसपैठ और सुरक्षा के मामले पर भी मतभेद है। लेकिन भारत का मामला अलग है। हम अमेरिका के साथ वही समझौता करेंगे, जो दोनों के लिए हितकारी हो। बता दें कि डोनाल्ड ट्रंप लगातार दूसरे देशों से आने वाले सामान पर टैरिफ में इजाफे के ऐलान कर रहे हैं। इससे दुनिया भर के बाजारों को नुकसान पहुंच रहा है। डाउ जोंस, वॉल स्ट्रीट से लेकर बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज तक में लगातार बिकवाली का माहौल बना हुआ है। खबर है कि भारत ने अमेरिका के साथ समझौते के लिए सितंबर 2025 तक का वक्त मांगा है।

Immigration and Foreigners Bill : अवैध अप्रवास रोकने के लिए सरकार ने नया विधेयक…

नई दिल्ली घुसपैठ और अवैध अप्रवास रोकने के लिए लाेकसभा में मंगलवार को अप्रवासन और विदेशी विधेयक 2025 पेश किया गया है। अमित शाह की तरफ से गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने विधेयक पेश किया। उन्होंने कहा कि किसी को देश में आने से रोकने के लिए यह बिल नहीं लाया गया है, बल्कि यह विधेयक इसलिए लाया गया है कि विदेशी भारत आएं। वे यहां के नियमों का पालन करके ही आएं। हालांकि कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी और टीएमसी सांसद सौगत राय ने बिल का विरोध किया है। Immigration and Foreigners Bill 2025 का क्या है उम्मीद इस विधेयक का मुख्य उद्देश्य भारत के इमिग्रेशन नियमों को आधुनिक बनाना और उन्हें मजूबत करना है। यह बिल भारत में दाखिल होने और यहां से बाहर जाने वाले व्यक्तियों के संबंध में पासपोर्ट या बाकी यात्रा दस्तावेजों की जरूरतों और विदेशियों से संबंधित मामलों को रेगुलेट करने की शक्तियां केंद्र सरकार को देगा। इनमें वीजा और रजिस्ट्रेशन की जरूरत और उससे संबंधित मामलों को शामिल किया गया है। इमिग्रेशन से जुड़ा यह विधेयक देश की सुरक्षा के लिहाज से काफी अहम है। इस विधेयक में कानूनी स्थिति साबित करने की जिम्मेदारी राज्य के बजाय व्यक्ति पर डाल दी गई है। यह विधेयक स्पष्ट रूप से भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा, संप्रभुता या अखंडता के लिए खतरा माने जाने वाले किसी भी विदेशी नागरिक के प्रवेश या निवास पर पाबंदी लगाता है। साथ ही अनिवार्य करता है कि सभी विदेशी आगमन पर रजिस्ट्रेशन करें और उनकी आवाजाही, नाम परिवर्तन और संरक्षित या प्रतिबंधित क्षेत्रों में उनकी एंट्री पूरी तरह बैन हो। इसके अलावा, शैक्षणिक प्रतिष्ठानों, अस्पतालों और नर्सिंग होम जैसी संस्थाओं को इमिग्रेशन ऑफिसर को विदेशी नागरिकों की मौजूदगी की जानकारी देनी पड़ेगी। इमिग्रेशन नियमों के उल्लंघन के लिए सख्त सजा का भी प्रावधान प्रस्तावित कानून में इमिग्रेशन नियमों के उल्लंघन के लिए सख्त सजा का भी प्रावधान किया गया है। वैध पासपोर्ट या वीज़ा के बिना भारत में अवैध रूप से एंट्री करने पर पांच साल तक की कैद और 5 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। जाली दस्तावेज़ों का इस्तेमाल करने वालों को दो से सात साल तक जेल और एक लाख रुपये से 10 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। निर्धारित समय से अधिक समय तक रहना, वीजा शर्तों का उल्लंघन करना या प्रतिबंधित क्षेत्रों में प्रवेश करने जैसे अपराधों के लिए तीन साल तक की कैद, 3 लाख रुपये तक का जुर्माना या दोनों हो सकते हैं। बिना उचित दस्तावेज के व्यक्तियों को लाने और ले जाने वाले ट्रांसपोर्ट को भी जवाबदेह ठहराया जाएगा। उन पर 5 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है और भुगतान न करने पर उनके वाहन जब्त किए जा सकते हैं। ऐसे मामलों में जहां किसी विदेशी को प्रवेश से वंचित किया जाता है। ट्रांसपोर्टर पर उनके तत्काल प्रस्थान को सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी होगी। विधेयक में आव्रजन अधिकारियों को ज्यादा शक्तियां भी दी गई हैं। जिसमें बिना वारंट के व्यक्तियों को गिरफ्तार करने का अधिकार तक शामिल है। केंद्र सरकार के पास विदेशी नागरिकों के आवाजाही को लेकर इस कानून के बाद ज्यादा अधिकार आएंगे। इसमें प्रस्थान को रोकने, प्रवेश को प्रतिबंधित करने और महत्वपूर्ण क्षेत्रों तक पहुंच को प्रतिबंधित करने की पावर शामिल है। विदेशी नागरिकों को अपने खर्च पर भारत से बाहर निकलना होगा। पहचान के उद्देश्य से बायोमेट्रिक डेटा देना होगा।     प्रस्तावित कानून विदेशी अधिनियम 1946     भारत में प्रवेश के लिए पासपोर्ट अधिनियम 1920     विदेशियों का पंजीकरण अधिनियम 1939     आव्रजन यानी वाहक दायित्व अधिनियम 2000 समेत कई औपनिवेशिक युग के कानूनों को बदलने की कोशिश है। ये कानून, मूल रूप से विश्व युद्ध के समय युद्धकालीन परिस्थितियों के लिए बनाए गए थे, अब पुराने हो चुके हैं। सरकार ने तर्क दिया कि आव्रजन नियमों को आधुनिक बनाने और गैर जरूरी प्रावधानों को खत्म करने के लिए एक एकीकृत कानून की जरूरत है। गृह राज्य मंत्री ने भी बिल पेश करते हुए इस बात पर जोर दिया कि यह बिल की पूरी तरह संवैधानिक है और सातवीं अनुसूचि में यह विषय आता है। भारत में प्रवेश और निष्कासन विषय के तहत यह बिल लाया गया है। उन्होंने कहा कि देश की सुरक्षा के लिहाज से यह बिल बहुत जरूरी है। राय ने कहा कि हम किसी को रोकने के लिए यह बिल नहीं ला रहे बल्कि जो लोग आएं वे भारत के कानून का पालन करें। इसके लिए यह बिल ला रहे हैं। उन्होंने कहा कि किसी विदेशी के अस्पताल या फिर शैक्षणिक परिसर में जाने से पहले उसकी जानकारी अब भी मुहैया कराई जाती थी। लेकिन अब तक प्रावधान आदेश के रूप में था। जिसे कानून के रूप में लाया जा रहा है। नित्यानंद राय की ओर से बिल पेश करने के दौरान कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने बिल का विरोध करते हुए कहा कि यह मूलभूत अधिकारों का हनन है। उन्होंने कहा कि यह विधेयक संविधान के मुताबिक नहीं है और इसमें विदेशी नागरिकों के अस्पताल में भर्ती होने तक का ब्यौरा मांगा गया है जो कि मेडिकल एथिक्स के खिलाफ है। तिवारी ने मांग करते हुए कहा कि इस बिल को वापस लिया जाए या फिर जेपीसी के पास भेजा जाए।  

यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने के लिए एक नया कूटनीतिक मंच सजने लगा, शांति वार्ता को लेकर होगी महत्वपूर्ण बैठक

यूक्रेन सऊदी अरब में यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने के लिए एक नया कूटनीतिक मंच सजने लगा है। कुछ देर में अमेरिकी अधिकारियों और यूक्रेनी प्रतिनिधिमंडल के बीच शांति वार्ता को महत्वपूर्ण बैठक होने जा रही है। इस बैठक का उद्देश्य यूक्रेन रूस में शांति वार्ता का मंच तैयार करना है। इस बीच, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने रूसी नागरिकों को चेताया है कि वे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया फैसलों को लेकर अंधविश्वास न पालें। मॉस्को के हायर स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में बोलते हुए, क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने लोगों को एलन मस्क द्वारा यूक्रेनी सेना के लिए अपने स्टारलिंक संचार प्रणाली को बंद करने की धमकी या ट्रंप के पिछले हफ्ते कीव को सैन्य सहायता निलंबित करने के फैसले को लेकर उत्साहित होने के खिलाफ सावधान किया। ट्रंप के फैसलों पर अंधविश्वास न पालें पेसकोव ने कहा, “ट्रंप के फैसले को गुलाबी चश्मा पहनने की जल्दी न करें। हमें हमेशा सर्वश्रेष्ठ की उम्मीद करनी चाहिए लेकिन सबसे खराब के लिए तैयार रहना चाहिए। हमें हमेशा अपने हितों की रक्षा के लिए तैयार रहना चाहिए।” पेसकोव ने यह चेतावनी ऐसे समय में दी जब अमेरिकी अधिकारी मंगलवार को सऊदी अरब में एक यूक्रेनी प्रतिनिधिमंडल से मिलने की तैयारी कर रहे थे, ताकि यह आकलन किया जा सके कि क्या यूक्रेन युद्ध समाप्त करने के लिए रूस को ठोस रियायतें देने के लिए तैयार है। रूस क्यों आशंकित पेसकोव ने कहा कि रूस यूक्रेन में युद्ध के मैदान पर अपने लक्ष्यों को प्राप्त कर रहा है, चाहे अमेरिका कोई भी निर्णय ले। उन्होंने कहा कि यूक्रेन में हथियारों की इतनी अधिक संख्या है कि अमेरिकी आपूर्ति निलंबित होने के बावजूद कीव कई महीनों तक लड़ाई जारी रखने में सक्षम होगा।

डोनाल्ड ट्रंप की मंदी वाली बात में कितना दम, भारत पर क्या होगा असर?, मचा है हाहाकार

नई दिल्ली अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयानों और नीतियों ने वैश्विक अर्थव्यवस्था में हलचल मचा दी है। उनकी टैरिफ नीतियों और व्यापार युद्ध को तेज करने की रणनीति ने एक बार फिर सुर्खियां बटोरी हैं। हाल ही में ट्रंप ने मंदी की आशंकाओं पर अपनी प्रतिक्रिया दी, जिसने चर्चा को और गर्म कर दिया है। इतना ही नहीं, उनके एक बयान ने अमेरिकी शेयर मार्केट में 1 ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा डुबा दिए। ऐसे में सवाल यह है कि क्या उनकी बातों में वास्तविक दम है, और अगर मंदी आई, तो क्या भारत भी इसके चपेटे में आएगा? आइए, इस मुद्दे को गहराई से समझते हैं। ट्रंप का मंदी वाला दावा और हालिया टिप्पणी: हकीकत या हौवा? ट्रंप प्रशासन ने अपने दूसरे कार्यकाल की शुरुआत से ही आक्रामक आर्थिक नीतियां लागू की हैं। उनकी “रेसिप्रोकल टैरिफ” नीति ने वैश्विक व्यापार को झटका दिया है। इस नीति के तहत अमेरिका अन्य देशों से उतना ही टैरिफ वसूल करेगा जितना वे अमेरिका पर लगाते हैं। ट्रंप का दावा है कि इससे अमेरिकी उद्योगों को संरक्षण मिलेगा और घरेलू उत्पादन बढ़ेगा। लेकिन हाल ही में 9 मार्च, 2025 को फॉक्स न्यूज के “संडे मॉर्निंग फ्यूचर्स” पर मारिया बार्टिरोमो के साथ एक इंटरव्यू में, जब उनसे पूछा गया कि “क्या आप इस साल मंदी की उम्मीद कर रहे हैं?”, तो ट्रंप ने सीधा जवाब देने से परहेज किया। ट्रंप ने कहा, “मुझे ऐसी चीजों की भविष्यवाणी करना पसंद नहीं। यह एक ट्रांजिशन का दौर है, क्योंकि हम जो कर रहे हैं, वह बहुत बड़ा है। हम अमेरिका में पैसे वापस ला रहे हैं। इसमें थोड़ा वक्त लगता है।” यह जवाब न तो मंदी की आशंका को खारिज करता है और न ही पक्के तौर पर पुष्टि करता है, जिससे अनिश्चितता और बढ़ गई है। अमेरिका में उपभोक्ता विश्वास सूचकांक में गिरावट और ट्रेजरी यील्ड के निचले स्तर पर पहुंचने की खबरें मंदी की आशंका को बल दे रही हैं। ट्रंप ने भारत पर भी 100% तक टैरिफ की बात कही है, जिसका असर भारतीय निर्यात पर पड़ सकता है। विशेषज्ञों की राय बंटी हुई है। कुछ इसे अल्पकालिक अस्थिरता मानते हैं, तो कुछ इसे वैश्विक मंदी का शुरुआती संकेत। एक दिन में एक ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा का नुकसान: क्या हुआ? मंदी को लेकर ट्रंप की टिप्पणी के एक दिन बाद, सोमवार 10 मार्च को अमेरिकी शेयर बाजार में भारी गिरावट देखी गई, जिसमें एक ही दिन में 1.1 ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा का नुकसान हुआ। इसके पीछे कई कारण जिम्मेदार रहे। सबसे बड़ा ट्रिगर था ट्रंप की टैरिफ नीतियों को लेकर बढ़ती अनिश्चितता, खासकर मैक्सिको और चीन जैसे देशों पर उनके आक्रामक रुख ने निवेशकों में घबराहट पैदा की। इसके अलावा, अमेरिकी अर्थव्यवस्था में मंदी के संकेत दिखे, जैसे कमजोर रोजगार डेटा और टेक सेक्टर में सुस्ती। इसने बाजार को और दबाव में डाला। नैस्डैक में 4% की गिरावट इस बात का सबूत है कि निवेशक जोखिम से बचने के लिए बिकवाली कर रहे हैं। टेस्ला जैसे बड़े शेयरों में 15% तक की गिरावट ने इस कोहराम को और बढ़ाया। मंदी पर अस्पष्ट रवैया अपनाने वाली ट्रंप की हालिया टिप्पणी ने इसने बाजार को स्थिर करने के बजाय और अस्थिर कर दिया। इन फैक्टर्स ने मिलकर निवेशकों को एक दिन में भारी नुकसान करा दिया। भारत पर क्या होगा असर? भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक रिश्ते मजबूत हैं, लेकिन ट्रंप की नीतियों ने इसमें तनाव पैदा कर दिया है। भारत अमेरिका को करीब 85 बिलियन डॉलर का निर्यात करता है, जिसमें आईटी, फार्मा, टेक्सटाइल और ऑटोमोबाइल शामिल हैं। अगर अमेरिका भारत से आयात पर भारी टैरिफ लगाता है, तो इन सेक्टरों को नुकसान होगा। एसबीआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप के कार्यकाल में भारतीय रुपये का मूल्य डॉलर के मुकाबले 8-10% तक कमजोर हो सकता है। इससे आयात महंगा होगा, खासकर कच्चा तेल और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्रों में, जिससे महंगाई बढ़ेगी। हालांकि, ट्रंप की नीतियों से अप्रत्यक्ष फायदा भी हो सकता है। यूरोपीय संघ और अन्य देश, जो अमेरिका से तनाव के बीच नए साझेदारों की तलाश में हैं, भारत की ओर रुख कर सकते हैं। हाहाकार क्यों मचा है? ट्रंप की नीतियों और उनकी हालिया टिप्पणी ने भारत में चिंता की लहर पैदा कर दी है। सोशल मीडिया पर लोग इसे “डॉलर की तानाशाही” से लेकर “अमेरिकी नीतियों का आतंक” तक बता रहे हैं। शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव और रुपये की गिरती कीमत ने आम लोगों से लेकर उद्योगपतियों तक को परेशान कर दिया है। ट्रंप के “ट्रांजिशन पीरियड” वाले बयान को कुछ लोग आश्वासन के तौर पर देख रहे हैं, तो कुछ इसे अनिश्चितता का सबूत मानते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि भारत को अपनी अर्थव्यवस्था को विविधता देनी होगी। अमेरिका पर निर्भरता कम करने के लिए घरेलू उत्पादन बढ़ाना और अन्य देशों के साथ व्यापारिक संबंध मजबूत करना जरूरी है। लेकिन यह रातोंरात नहीं होगा। ट्रंप की नीतियां लागू होने में समय लगेगा, और भारत के पास तैयारी का मौका है- बशर्ते कदम तेजी से उठाए जाएं।  

slot server thailand super gacor

spaceman slot gacor

slot gacor 777

slot gacor

Nexus Slot Engine

bonus new member

olympus

situs slot bet 200

slot gacor

slot qris

link alternatif ceriabet

slot kamboja

slot 10 ribu

https://mediatamanews.com/

slot88 resmi

slot777

https://sandcastlefunco.com/

slot bet 100

situs judi bola

slot depo 10k

slot88

slot 777

spaceman slot pragmatic

slot bonus

slot gacor deposit pulsa

rtp slot pragmatic tertinggi hari ini

slot mahjong gacor

slot deposit 5000 tanpa potongan

mahjong

spaceman slot

https://www.deschutesjunctionpizzagrill.com/

spbo terlengkap

cmd368

368bet

roulette

ibcbet

clickbet88

clickbet88

clickbet88

bonus new member 100

slot777

https://bit.ly/m/clickbet88

https://vir.jp/clickbet88_login

https://heylink.me/daftar_clickbet88

https://lynk.id/clickbet88_slot

clickbet88

clickbet88

https://www.burgermoods.com/online-ordering/

https://www.wastenotrecycledart.com/cubes/

https://dryogipatelpi.com/contact-us/

spaceman slot gacor

ceriabet link alternatif

ceriabet rtp

ceriabet

ceriabet link alternatif

ceriabet link alternatif

ceriabet login

ceriabet login

cmd368

sicbo online live

Ceriabet Login

Ceriabet

Ceriabet

Ceriabet

Ceriabet

casino online

clickbet88

login kudahoki88

Ceriabet

Ceriabet

Ceriabet

slot olympus

sbobet

slot thailand

sbobet