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ED ने BRS नेता केटीआर को जारी किया नोटिस, 7 जनवरी को पूछताछ के लिए बुलाया

नई दिल्ली केंद्रीय जांच एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने तेलंगाना राष्ट्र समिति (BRS) के कार्यकारी अध्यक्ष और पूर्व मंत्री केटी रामा राव (KTR) को नोटिस जारी कर पूछताछ के लिए बुलाया है। उनके अलावा वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अरविंद कुमार और हैदराबाद मेट्रोपॉलिटन डेवलपमेंट अथॉरिटी (HMDA) के पूर्व मुख्य अभियंता BLN रेड्डी को भी 2023 में हैदराबाद में आयोजित फॉर्मूला-ई रेस के आयोजन में कथित वित्तीय गड़बड़ियों के मामले में समन जारी किया है। केटी रामा राव को 7 जनवरी को पेश होने के लिए समन भेजा गया है। वहीं, अरविंद कुमार और BLN रेड्डी को क्रमशः 2 और 3 जनवरी को पूछताछ के लिए पेश होने के लिए कहा गया है। यह समन केंद्रीय एजेंसी द्वारा केटीआर और अन्य दो लोगों के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग मामले में एफआईआर दर्ज करने के बाद जारी किए गए हैं। BRS नेता और पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष केटी रामा राव पूर्व मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव के बेटे हैं। उन्हें एसीबी की शिकायत में आरोपी नंबर 1 बनाया गया है। वहीं, वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अरविंद कुमार और सेवानिवृत्त अधिकारी BLN रेड्डी को क्रमशः आरोपी नंबर 2 और 3 बनाया गया है। यह जांच केटीआर पर 55 करोड़ रुपये से अधिक के भुगतान के आरोपों से जुड़ी है, जिसमें से कुछ विदेशी मुद्रा में किए गए थे। आरोप है कि फरवरी 2023 में हैदराबाद में फॉर्मूला-ई रेस का आयोजन करने के लिए यह राशि ली गई थी। केटीआर ने इन आरोपों से इनकार करते हुए कहा, “इसमें भ्रष्टाचार कहां है? हमने 55 करोड़ रुपये का भुगतान किया। उन्होंने इस भुगतान की स्वीकृति दी।” उन्होंने इसे “सीधा और स्पष्ट” खाता बताते हुए कहा, “हैदराबाद मेट्रोपॉलिटन डेवलपमेंट अथॉरिटी का भारतीय विदेशी बैंक में खाता है और पैसे उसी खाते से ट्रांसफर किए गए हैं।”

ब्रिटेन छोड़कर भारत लौट रहे भारतीय डॉक्टर ने बताया कि मत जाना UK, ओवरवर्क और अंडरपेड बताया

लंदन हाल के समय में बड़ी संख्या में भारतीय डॉक्टर ब्रिटेन छोड़कर अपने वतन भारत वापस लौट रहे हैं। इन डॉक्टरों ने ब्रिटेन में अपने अनुभव को “ओवरवर्क (अत्यधिक काम का बोझ) और अंडरपेड (कम वेतन)” बताया है। काम के अत्यधिक दबाव और अपेक्षाकृत कम वेतन ने डॉक्टरों को यह कठोर फैसला लेने पर मजबूर कर दिया है।  पहले भारतीय डॉक्टर ब्रिटेन को बेहतर वेतन और अवसरों के लिए एक आदर्श जगह मानते थे। लेकिन अब इस ट्रेंड में बदलाव देखा जा रहा है। भारत में चिकित्सा क्षेत्र में बढ़ते निवेश और निजी स्वास्थ्य सेवाओं के उभरने के कारण डॉक्टर अपने देश में बेहतर भविष्य देख रहे हैं।   हाल ही में एक भारतीय डॉक्टर ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि कैसे उन्होंने यूके की स्वास्थ्य सेवा प्रणाली (NHS) में काम करने के दौरान कठिनाइयों का सामना किया और क्यों उन्होंने वहां से लौटने का फैसला किया।  इस डॉक्टर ने ‘रेडिट’ पर अपनी कहानी साझा करते हुए कहा, “मैंने PLAB परीक्षा पास की और यूके में एक बेहतर जीवन और करियर बनाने की उम्मीद के साथ गया था। लेकिन वहां कुछ समय बिताने और स्वास्थ्य सेवा व आर्थिक स्थिति का अनुभव करने के बाद, मुझे सच्चाई का सामना करना पड़ा।”  डॉक्टर ने NHS में काम करने की चुनौतियों पर बात करते हुए कहा कि काम के घंटे बहुत ज्यादा होते हैं और वेतन जीवन-यापन के लिए पर्याप्त नहीं होता। उन्होंने लिखा, “NHS में जूनियर डॉक्टर थकाने वाले घंटों तक काम करते हैं, लेकिन उनकी सैलरी मुश्किल से खर्चों को पूरा कर पाती है। जरूरी संसाधनों की कमी और भारी काम के दबाव के कारण डॉक्टर अक्सर तनावग्रस्त रहते हैं।” डॉक्टर ने बताया कि यूके में उनकी मासिक सैलरी 2,300 पाउंड थी। हालांकि, ये सैलरी कागज पर अच्छी लगती थी, लेकिन ऊंची महंगाई के कारण इसमें से किराया, बिजली और खाने-पीने का खर्च निकालने के बाद कुछ खास बचत नहीं हो पाती थी।  इन परिस्थितियों के कारण डॉक्टर ने भारत लौटने का फैसला किया। उन्होंने बताया कि भारत में रहने की लागत कम है, जैसे कि घर का किराया और निजी स्वास्थ्य सेवाएं सस्ती हैं। इसके अलावा, यहां उन्हें प्रोफेशनल ग्रोथ और व्यक्तिगत संतुष्टि के ज्यादा अवसर मिल रहे हैं। डॉक्टर ने लिखा, “भारत लौटना सिर्फ पैसे की बात नहीं थी, बल्कि जीवन की गुणवत्ता की बात थी। भारत के स्वास्थ्य क्षेत्र में भी चुनौतियां हैं, लेकिन मुझे यहां ज्यादा संतुलन और अवसर मिलते हैं।”  उन्होंने आगे कहा, “यूके में आर्थिक ठहराव, स्वास्थ्य प्रणाली पर अत्यधिक दबाव और बढ़ती महंगाई के बीच, भारत में काम करना ज्यादा संतोषजनक है। मेरे जैसे कई भारतीय डॉक्टरों के लिए यूके में बेहतर जीवन का सपना इन कठिन हकीकतों से टकरा जाता है।” डॉक्टर ने कहा कि भारत लौटने के बाद उन्होंने काम और जीवन के बीच एक बेहतर संतुलन पाया है। उन्होंने लिखा, “भारत लौटकर मैं प्रोफेशनल और पर्सनल दोनों स्तरों पर ग्रोथ कर रहा हूं। अगर आप अपने विकल्पों पर विचार कर रहे हैं, तो सिर्फ अवसरों को नहीं, उनकी सीमाओं को भी ध्यान में रखें। मेरे लिए सही जगह भारत ही निकली।”  इस डॉक्टर का अनुभव उन भारतीयों के लिए एक सीख हो सकता है जो विदेश जाने की योजना बना रहे हैं। यह बताता है कि विदेश में बेहतर जीवन का सपना हमेशा हकीकत से मेल नहीं खाता और कभी-कभी अपने देश में ही बेहतर अवसर मिल सकते हैं।

यूपी-दिल्ली समेत कई राज्यों में बारिश, गिर सकते हैं ओले, पूरे देश में पश्चिमी विक्षोभ का असर देखा जा रहा

नई दिल्ली राजधानी दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और कई जिलों में बारिश का सिलसिला जारी है। मौसम विभाग ने यूपी, पंजाब और दिल्ली समेत कई राज्यों में बारिश का अलर्ट जारी किया है। यूपी के कई जिलों में तेज हवाएं चलने और ओलावृष्टि की भी चेतावनी जारी की गई है। पूरे देश में पश्चिमी विक्षोभ का असर देखा जा रहा है। इसकी वजह से बारिश और बर्फबारी की गतिविधियां बढ़ गई हैं। मौसम विभाग का कहना है कि अभी 5 दिन कड़ाके की ठंड जारी रहेगी। मध्य प्रदेश के कई जिलों में भी रात से ही बारिश हो रही है। वहीं बड़े हिस्से में बादल छाए रहे। शनिवार सुबह रतलाम समेत कुछ दिलों में ओलावृष्टि भी हुई. अगले 24 घंटे के लिए भी राज्य में बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। यूपी में तेज हवाओं, बारिश का अलर्ट उत्तर प्रदेश में भी मौसम नम हो गया है। कई जगहों पर हल्की बारिश के बाद ठंड में इजाफा हुआ है। शनिवार को यूपी के ज्यादातर जिलों में रुक-रुककर बारिश होती रहेगी। कई जगहों पर तेज हवाएं चल सकती हैं। बात करें पंजाब की तो यहां भी रुक-रुककर बारिश हो रही है। हरियाणा के भिवानी, हिसार, फतेहाबाद और कैथल में ओलावृष्टि भी हुई है। स्काइमेट वेदर के मुताबिक जम्मू-कश्मीर के आसपास पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय है। ऐसे में हिमाचल प्रदेशष उत्तराखंड और ज्ममू-कश्मीर में भारी बर्फबारी संभव है। इसके अलावा लद्दाख में हल्की बर्फबारी हो सकती है। वहीं पश्चिमी उत्तर प्रदेश, दिल्ली और हरियाणा में बारिश का अनुमान है। पूर्वी राजस्थान, पंजाब, मध्य महाराष्ट्र, तमिलनाडु, अंडमान निकोबार और मध्य प्रदेश में भी मध्यम बारिश हो सकती है। तेलंगाना, केरल और कर्नाटक के कुछ जिलों में भी हल्की बारिश हो सकती है।

पंचतत्व में विलीन हुए पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह, राष्ट्रपति – प्रधानमंत्री की उपस्थिति में दी गई मुखाग्नि

नई दिल्ली पूरे राजकीय सम्मान के साथ शनिवार को पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह का अंतिम संस्कार कर दिया गया। राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, केंद्रीय गृह मंत्री और रक्षा मंत्री सहित तमाम गणमान्य लोगों की उपस्थिति में निगम बोध घाट पर मुखग्नि दी गई। इससे पहले निवास से उनका पार्थिव शरीर कांग्रेस मुख्यालय लाया गया। यहां कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने अंतिम दर्शन किए। इसके बाद निगम बोधी घाट के लिए अंतिम यात्रा रवाना हुई। कांग्रेस मुख्यालय में सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका वाड्रा सहित पार्टी के सभी बड़े नेता मौजूद रहे। बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता भी यहां डॉ. सिंह के अंतिम दर्शन किए और श्रद्धा-सुमन अर्पित किए। गांधी परिवार भी अंतिम यात्रा में शामिल हुआ। निगम बोध घाट पर पहले राष्ट्रपति के साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व अन्य लोगों ने श्रद्धांजलि दी, जिसके बाद राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। यहां कई गणमान्य नागरिक पहुंचे। इस दौरान रिंग रोड (महात्मा गांधी मार्ग), निशाद राज मार्ग, बुलेवार्ड रोड, एसपीएम मार्ग, लोथियन रोड और नेताजी सुभाष मार्ग सहित सड़कों पर सुबह 7 बजे से दोपहर 3 बजे तक प्रतिबंध है। मनमोहन सिंह के स्मारक पर राजनीति इस बीच, पूर्व प्रधानमंत्री के स्मारक पर राजनीति भी शुरू हो गई है। भाजपा का आरोप है कि कांग्रेस इस मुद्दे पर भी राजनीति कर रही है, जबकि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने अपनी तरफ से डॉ. सिंह के लिए स्मारक बनाने का फैसला किया और इसकी जानकारी कांग्रेस नेतृत्व के साथ ही डॉ. सिंह के परिजन को भी दी। इस मुद्दे पर अखिलेश यादव ने भी केंद्र सरकार को निशाने पर लिया। कांग्रेस नेता अशोक गहलोत और नवजोत सिंह सिद्धू ने सरकार को घेरा। सिद्धू ने कहा कि यदि अटल बिहारी वाजपेयी के साथ ऐसा होता तो भाजपा को कैसा लगता। गहलोत ने कहा कि स्मारक बनाने के बारे में सरकार को खुद ही सोचना था। पूर्व पीएम मनमोहन सिंह साल 2004 से 2014 तक प्रधानमंत्री रहे थे। साल 1991 में मनमोहन सिंह की राजनीति में एंट्री हुई जब 21 जून को पी.वी. नरसिम्हा राव की सरकार में उन्हें वित्त मंत्री बनाया गया। उस समय देश एक गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहा था। पी.वी. नरसिंह राव के साथ मिलकर उन्होंने विदेशी निवेश का रास्ता साफ किया था। वित्त मंत्री रहते उन्होंने देश में आर्थिक उदारीकरण की नीतियों को लागू किया, जिससे विदेशी निवेश को बढ़ावा मिला और भारत को विश्व बाजार से जोड़ा जा सका। वह 1991 में पहली बार असम से राज्यसभा के सांसद चुने गए। उन्होंने देश की अर्थव्यवस्था को सुधारने के लिए कई सुधार किए, जिससे भारत की अर्थव्यवस्था बेहतर हुई। वह 1998 से 2004 तक विपक्ष के नेता भी रहे। हालांकि, साल 2004 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी को मिली जीत के बाद उन्होंने 14वें प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली। उन्होंने यूपीए-1 और 2 में प्रधानमंत्री का पद संभाला। मनमोहन सिंह ने पहली बार 22 मई 2004 और दूसरी बार 22 मई, 2009 को प्रधानमंत्री के पद की शपथ ली थी।  

कश्मीर में बर्फीले तूफान के कारण पर्यटक फंसे, सेना ने 68 लोगों को बचाया

 जम्मू भारतीय सेना ने गुलमर्ग जाते वक्त रास्ते में फंसे कई पर्यटकों को बचाया है। भारतीय सेना की चिनार कोर ने इस मिशन को अंजाम दिया है। चिनार वॉरियर्स को सिविल प्रशासन से पर्यटकों के फंसे होने की जानकारी मिली थी। इसके मुताबिक पर्यटक गुलमर्ग और तानमार्ग जा रहे थे। इसी दौरान भारी बर्फबारी के चलते पर्यटक यहां पर फंस गए थे। चिनार कोर के मुताबिक इस दौरान कुल 68 लोगों को बचाया गया। इनमें 30 महिलाएं, 30 पुरुष और 8 बच्चे शामिल हैं। इसके बाद सभी 137 पर्यटकों को गर्म खाना, शेल्टर और दवाएं भी मुहैया कराई गईं। चिनार वॉरियर ने इसको लेकर ट्वीट में जानकारी दी है। इसमें बताया है कि चिनार कोर को सिविल एडमिनिस्ट्रेशन से कॉल मिली थी। इसके बाद इस बचाव कार्य को अंजाम दिया गया। इसके मुताबिक चिनार वॉरियर्स ने कुलगाम के मुनाद गांव से एक गर्भवती महिला को निकालने के लिए एक आपातकालीन संकट कॉल का जवाब दिया। भारी बर्फबारी के बीच बचाव दल समय पर घटनास्थल पर पहुंच गया। तत्काल जीवनरक्षक चिकित्सा सहायता प्रदान की गई और रोगी को यारीपोरा के सरकारी अस्पताल में ले जाया गया। गौरतलब है कि चिनार कोर का नाम यहां के चिनार वृक्ष के नाम पर रखा गया है। सेना का यह दल जम्मू कश्मीर के पूर्वी और उत्तरी इलाकों में सुरक्षा इंतजाम देखती है। बता दें कि जम्मू कश्मीर में मौसम खराब है। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के मुताबिक जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग स्थित काजीगुंड कस्बे में बर्फबारी में करीब 2000 वाहन फंस गए हैं। सीएम ने बताया कि उन्होंने अनंतनाग के डिप्टी कमिश्नर से बात की है। उन्होंने लिखा कि डिप्टी कमिश्नर ने बताया कि भारी वाहनों को आगे बढ़ने की अनुमति दी जा रही है और बाकी फंसे हुए वाहनों को निकालने के प्रयास जारी हैं। सीएम ने आगे लिखा कि बर्फीले मौसम के कारण यातायात का बैक अप लेना पड़ा है। फंसे हुए वाहन, दोनों दिशाओं में, धीरे-धीरे आगे बढ़ रहे हैं और जहां आवश्यक हो, सहायता की जा रही है।

पार्क स्ट्रीट इलाके से एक बांग्लादेशी नागरिक को फर्जी दस्तावेजों के साथ गिरफ्तार किया गया

 कोलकाता कोलकाता के पार्क स्ट्रीट इलाके से एक बांग्लादेशी नागरिक (Bangladeshi national) को फर्जी दस्तावेजों के साथ गिरफ्तार किया गया है. पुलिस ने बताया कि वह अवैध रूप से भारत में रह रहा था. यहां फर्जी पहचान पत्र बनवाकर रहने की कोशिश कर रहा था. फिलहाल पुलिस फर्जी दस्तावेजों को बनाने वालों की भी तलाश में जुटी है. एजेंसी के अनुसार, गिरफ्तार शख्स बांग्लादेश के नारैल जिले का रहने वाला है. गुरुवार को इस मामले में सूचना के आधार पर उसे कोलिन्स लेन से पकड़ा गया. जांच में पता चला कि वह साल 2023 से कोलकाता के खिद्दरपुर इलाके में एक किराए के मकान में रह रहा था. पुलिस के मुताबिक, आरोपी ने एक फर्जी आधार कार्ड बनवाया था, जिसमें उत्तर 24 परगना का पता दिया गया था. इसके अलावा आरोपी ने अपने नाम पर एक पैन कार्ड भी बनवाया था. पुलिस ने बताया कि हाल ही में पार्क स्ट्रीट के पास के मार्क्विस स्ट्रीट इलाके से एक अन्य बांग्लादेशी नागरिक को भी फर्जी दस्तावेजों के साथ गिरफ्तार किया गया था. अब जांच एजेंसियां फर्जी दस्तावेज बनाने वाले गिरोह की तलाश कर रही हैं. वहीं गिरफ्तार व्यक्तियों से पूछताछ जारी है. इससे पहले असम पुलिस ने एक प्रतिबंधित इस्लामिक संगठन के आठ मिलिटेंट्स को गिरफ्तार किया था, जिनमें से दो पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले से पकड़े गए थे. यह मामला भारत में विदेशी नागरिकों की अवैध घुसपैठ और उनकी गतिविधियों को लेकर चिंताओं को बढ़ा रहा है. पुलिस का कहना है कि इस गिरफ्तारी के बाद अवैध रूप से रह रहे अन्य विदेशी नागरिकों की पहचान करने और फर्जी दस्तावेजों के नेटवर्क को खत्म करने में मदद मिलेगी.  

उत्‍तराखंड में बनने जा रहा 51 फीट गहरा यह डाइविंग पूल देश का सबसे गहरा पूल होगा, 53 करोड़ की लागत से होगा तैयार

देहरादून उत्तराखंड में बढ़ रही नदी में डूबने की घटनाओं को देखते हुए राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ) मुख्यालय जौलीग्रांट में 53 करोड़ की लागत से डीप डाइविंग पूल बनाया जाएगा। यहां एसडीआरएफ के जवानों को उच्च स्तरीय प्रशिक्षण दिया जाएगा। कमांडेंट एसडीआरएफ अर्पण यदुवंशी ने दावा किया कि 51 फीट गहरा का यह डाइविंग पूल देश का सबसे गहरा पूल होगा, जहां पर उत्तराखंड के अलावा बाहर से भी सुरक्षा एजेंसियों के जवान प्रशिक्षण लेने के लिए आएंगे। समय-समय पर आती रहती हैं प्राकृतिक आपदाएं उत्तराखंड पर्वतीय राज्य होने के चलते यहां समय-समय पर प्राकृतिक आपदाएं आती रहती हैं। इसके अलावा चमोली, उत्तरकाशी, टिहरी से कई नदियां बहती हैं और बड़ी संख्या में वाहन दुर्घटनाएं होती हैं। वर्ष 2024 में पिछले छह माह में विभिन्न जगह डूबने के 372 मामले सामने आए, जिसमें से एसडीआरएफ ने 308 व्यक्तियों को सुरक्षित बचाया, जबकि 64 को बचाया नहीं जा सका। एसडीआरएफ जवानों को नदियों में सर्चिंग के लिए प्रशिक्षित करने के उद्देश्य से डीप डाइविंग पूल बनाया जा रहा है। उत्तराखंड सरकार की ओर से डीप डाइविंग पूल बनाने का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा गया था। विश्व बैंक से पूल बनाने के लिए 53 करोड़ रुपये की धनराशि जारी हुई है। डाइविंग पूल बनाने के लिए शासन की ओर से प्रस्ताव को मंजूरी मिल चुकी है। जल्द ही पूल के निर्माण का कार्य भी शुरू किया जाएगा। मौजूदा समय में इतना गहरा डाइविंग पूल कहीं नहीं हैं। ऐसे में जवानों को प्रशिक्षण के लिए गोवा और मुंबई भेजा जाता है। इंडियन रेस्क्यू एकेडमी पुणे के ट्रेनर देंगे प्रशिक्षण आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण कार्यक्रमों के संचालन को लेकर एसडीआरएफ व इंडियन रेस्क्यू एकेडमी पुणे के बीच समझौता हुआ है। बड़ी आपदा में किस तरह से तत्काल रेस्क्यू अभियान चलाया जाए व उनकी अच्छी तरह से देखभाल की जा सके, इसके लिए भी जवानों को तैयार किया जा रहा है। इसी कड़ी में एसडीआरएफ के जवानों को एकेडमी के प्रशिक्षक डीप डाइविंग पूल का प्रशिक्षण देंगे। प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद एसडीआरएफ के जवान अन्य एजेंसियों के जवानों को प्रशिक्षण देंगे। प्रशिक्षण केंद्र में यह कार्य भी होंगे भवन ढहने पर खोज व रेस्क्यू बाहरी प्रदर्शन स्वान रेस्क्यू साइट विकास कार्य वाह्य सेवाएं अपशिष्ट प्रबंधन प्रणाली सतही जल खोज एवं बचाव पूल ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बचाव प्रशिक्षण रोपवे रेस्क्यू प्रशिक्षण अन्य उपकरण  

2024 में वैश्विक औसत तापमान पूर्व-औद्योगिक स्तर से 1.5 डिग्री सेल्सियस अधिक होगा

नई दिल्ली दुनिया में 2024 में जलवायु परिवर्तन की वजह से भीषण गर्मी के दिनों में औसतन 41 दिन की वृद्धि हुई है।  एक नई रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है। यूरोपीय जलवायु एजेंसी कॉपरनिकस के अनुसार, रिकॉर्ड के हिसाब से 2024 सबसे गर्म वर्ष बनने वाला है और यह पहला वर्ष है जिसमें वैश्विक औसत तापमान पूर्व-औद्योगिक स्तर से 1.5 डिग्री सेल्सियस अधिक होगा। जलवायु वैज्ञानिकों के दो समूहों – वर्ल्ड वेदर एट्रिब्यूशन (डब्ल्यूडब्ल्यूए) और क्लाइमेट सेंट्रल – की वार्षिक समीक्षा रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनिया में 2024 में भीषण गर्मी के दिनों में औसतन 41 दिन की वृद्धि हुई। छोटे द्वीपीय विकासशील देश सबसे अधिक प्रभावित हुए, जहां के लोगों को 130 से अधिक अतिरिक्त गर्म दिन का अनुभव करना पड़ा। वैज्ञानिकों ने 2024 में 219 मौसम संबंधी घटनाओं की पहचान की और उनमें से 29 का अध्ययन किया। उन्होंने पाया कि जलवायु परिवर्तन के कारण कम से कम 3,700 लोगों की मौत हुई और मौसम संबंधी 26 घटनाओं की वजह से लाखों लोग विस्थापित हुए। अध्ययन के अनुसार सूडान, नाइजीरिया, नाइजर, कैमरून और चाड में बाढ़ सबसे घातक घटना थी, जिसमें कम से कम 2,000 लोग मारे गए। अध्ययन में पता चला कि यदि ग्लोबल वार्मिंग दो डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाती है तो इन क्षेत्रों में हर साल इसी तरह की भारी वर्षा संबंधी घटनाएं हो सकती हैं। ग्लोबल वार्मिंग 2040 या 2050 के दशक की शुरुआत में दो डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकती है। डब्ल्यूडब्ल्यूए के प्रमुख और इंपीरियल कॉलेज, लंदन में जलवायु विज्ञान के वरिष्ठ व्याख्याता फ्राइडेरिक ओटो ने कहा, ‘जीवाश्म ईंधन के गर्म होने के प्रभाव 2024 की तुलना में कभी भी इतने स्पष्ट या अधिक विनाशकारी नहीं रहे हैं। हम एक नए खतरनाक युग में रह रहे हैं।” उन्होंने कहा, “हम जानते हैं कि चीजों को बदतर होने से रोकने के लिए हमें क्या करने की जरूरत है – जीवाश्म ईंधन जलाना बंद करें। 2025 के लिए शीर्ष संकल्प जीवाश्म ईंधन से दूर जाना होगा, जो दुनिया को एक सुरक्षित व अधिक स्थिर स्थान बनाएगा।”    

सर्द हवाओं और तापमान में भारी गिरावट, कुछ हिस्सों में ओले पड़ने और तेज हवाओं के साथ बारिश

नई दिल्ली इस साल सर्दियों का मौसम अपने शबाब पर है। एक तरफ बर्फीले थपेड़े और घना कोहरा आम जिंदगी को ठहरने पर मजबूर कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ बारिश की बूंदों ने कई हिस्सों में मौसम को तरोताजा बना दिया है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने 28 दिसंबर 2024 से 8 जनवरी 2025 तक के लिए विस्तारित मौसम का हाल पेश किया है, जिसमें सर्दी, बारिश और कोहरे से जुड़ी अहम जानकारियां शामिल हैं। उत्तर भारत में कड़ाके की ठंड का कहर उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में सर्दी का प्रकोप जारी है। हिमाचल प्रदेश, पंजाब और जम्मू-कश्मीर में शीतलहर की गंभीर चेतावनी दी गई है। राजस्थान के चुरु में इस सीजन का सबसे कम तापमान दर्ज किया गया। घने कोहरे ने दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में आम जनजीवन को प्रभावित किया है। 28 -31 दिसंबर के बीच कोहरा और ज्यादा घना होने की संभावना है। पश्चिमी विक्षोभ की दस्तक पश्चिमी हिमालय और आसपास के इलाकों में पश्चिमी विक्षोभ के चलते 27-28 दिसंबर को बारिश और बर्फबारी की संभावना है। इससे पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में ओले पड़ने और तेज हवाओं के साथ बारिश हो सकती है। इस दौरान तापमान में गिरावट भी दर्ज की जाएगी। सर्द हवाओं और तापमान में बदलाव की संभावना उत्तर और पश्चिम भारत में न्यूनतम तापमान अगले दो दिनों में 2 डिग्री तक गिर सकता है। मध्य भारत और पूर्वी भारत के कुछ हिस्सों में तापमान सामान्य से थोड़ा ऊपर रहने की उम्मीद है। पश्चिमी विक्षोभ के कारण हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में शीतलहर और बर्फबारी का सिलसिला जारी रहेगा। दक्षिण भारत में बारिश का जोर तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और ओडिशा में पिछले हफ्ते भारी बारिश ने मौसम को बदल दिया। यह निम्न दबाव क्षेत्र के कारण इन इलाकों में गरज के साथ बारिश हुई। अगले कुछ दिनों में तमिलनाडु, पुदुचेरी और आंध्र प्रदेश में हल्की से मध्यम बारिश जारी रहने की संभावना है। दक्षिण भारत में इस बार मानसून के बाद की बारिश सामान्य से 15% ज्यादा रही है।

भाजपा समेत कई पार्टियों के नेताओं का टीएमसी में शामिल होना मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के लिए बड़ी चुनौती

असम गुवाहाटी में शुक्रवार को हुए एक खास कार्यक्रम में असम की सियासत ने नया मोड़ लिया, जब लगभग 500 नेताओं और कार्यकर्ताओं ने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) का दामन थाम लिया। इस मौके पर टीएमसी सांसद सुष्मिता देव और असम टीएमसी अध्यक्ष रमन बोरठाकुर की मौजूदगी रही। कांग्रेस, असम गण परिषद (एजीपी), असम जातीय परिषद (एजेपी) और भाजपा समेत कई पार्टियों के नेताओं का टीएमसी में शामिल होना मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है। सुष्मिता देव ने कहा कि इन नेताओं को उनकी पार्टियों में नजरअंदाज किया जा रहा था, जिसकी वजह से उन्होंने टीएमसी का रुख किया। उन्होंने जोर देकर कहा, “टीएमसी एक जमीनी कार्यकर्ताओं की पार्टी है और हम असम में एक मजबूत टीम बनाने की कोशिश कर रहे हैं। भाजपा के खिलाफ कांग्रेस से सीधी लड़ाई में भाजपा जीतती है, लेकिन जब लड़ाई टीएमसी, डीएमके या समाजवादी पार्टी जैसी पार्टियों से होती है, तो भाजपा हारती है। इसलिए असम के लोगों को राष्ट्रीय पार्टियों की बजाय क्षेत्रीय पार्टियों को प्राथमिकता देनी चाहिए।” भारी संख्या में नेताओं का टीएमसी में शामिल होना असम में भाजपा के लिए चिंता का सबब हो सकता है। टीएमसी जो अब तक बंगाल की राजनीति में प्रभावशाली रही है, अब असम में अपनी जड़ें मजबूत करने के लिए पूरी ताकत झोंक रही है। करीब 17-18 समुदायों के नेताओं का टीएमसी में शामिल होना इस बात का संकेत है कि पार्टी राज्य में एक मजबूत विकल्प बनने की तैयारी कर रही है। भाजपा के लिए यह नई चुनौती हिमंता सरमा के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकती है, क्योंकि टीएमसी का फोकस अब असम में भाजपा के खिलाफ प्रभावी गठजोड़ बनाने पर है। अब देखना हो गा कि ममता बनर्जी की पार्टी का यह कदम असम की राजनीति में बड़ा बदलाव लाएगा या नहीं।

जासूस एजेंसी का दावा: रूस के लिए सैनिक भेज किम जोंग ने कर दी गलती! यूक्रेन युद्ध में कई मरे, बंदी भी बने

रूस रूस-यूक्रेन युद्ध में रूस की तरफ से लड़ रहे उत्तर कोरियाई सैनिकों के लिए यह युद्ध भारी पड़ रहा है। दक्षिण कोरिया की जासूस एजेंसी ने दावा किया है कि इस युद्ध में उत्तर कोरियाई सैनिकों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। तानाशाह के सैकड़ो सैनिक मारे जा चुके हैं, जबकि कई घायल सैनिकों को यूक्रेनी सेना ने बंदी बना लिया है। योनहाप की रिपोर्ट के मुताबिक उत्तर कोरियाई सैनिकों ने युद्ध में अपना प्रभाव छोड़ा है लेकिन उसके बाद यूक्रेनी सैनिक उन पर भारी पड़ने लगे। हाल ही में यूक्रेनी सुरक्षाबलों के एक विशेष अभियान में सैनिकों ने घायल उत्तर कोरियाई सैनिक को बंदी बना लिया। तानाशाह के सैनिक का बंदी बनना यह अपने तरह का पहला मामला है। इससे पहले आज यूक्रेन की एक समाचार एजेंसी ने बताया कि कई उत्तर कोरियाई सैनिकों को मौत के घाट उतार दिया गया है, जबकि घायल सैनिक को बंदी बना लिया गया है। हालांकि यूक्रेनी सेना की तरफ से यह जानकारी नहीं दी गई कि यह घटना कब हुई। उत्तर कोरियाई सैनिकों की रूस- यूक्रेन संघर्ष में सीधे शामिल होने की खबर तब आई थी जब दावा किया गया था कि तानाशाह किम के सैनिकों ने एक गांव पर कब्जा करने के लिए दो घंटों में 300 से ज्यादा यूक्रेनी सैनिकों को मार दिया। उन्होंने किसी भी सैनिक को बंदी नहीं बनाया। लेकिन अब सामने आई रिपोर्ट्स के मुताबिक उत्तर कोरियाई सैनिकों को भी इस लड़ाई में भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। यूक्रेनी सैनिकों और उत्तर कोरियाई सैनिकों के बीच में हुई सीधी लड़ाई में उत्तर कोरियाई सैनिकों को पीछे हटना पड़ा इस दौरान उनके घायल हुए सैनिकों को यूक्रेन ने बंदी बना लिया। हालांकि इस घटना पर अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के उत्तर कोरिया की यात्रा करने के बाद तानाशाह किम जोंग उन ने अपने सैनिक यूक्रेन युद्ध में भेजने का फैसला किया था। रिपोर्ट्स के मुताबिक यूक्रेन में करीब 11 हजार उत्तर कोरियाई सैनिक रूसी सेना की मदद कर रहे हैं। कुछ दिनों पहले इन सैनिकों को लेकर जेलेंस्की ने दावा किया था कि उत्तर कोरिया को हजारों सैनिकों का नुकसान हो चुका है।

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनके सहयोगियों के तेवर ने पाकिस्तान की सरकार को मुश्किलों में डाल दिया

वाशिंगटन अमेरिका में सत्ता परिवर्तन के साये में पाकिस्तान की शहबाज शरीफ सरकार बेचैन होती नजर आ रही है। आने वाले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनके सहयोगियों के तेवर ने पाकिस्तान की सरकार को मुश्किलों में डाल दिया है। ट्रंप के करीबी सहयोगी रिचर्ड ग्रेनेल और ब्रिटिश सांसद जॉर्ज गैलवे जैसे कई अंतरराष्ट्रीय शख्सियतों ने इमरान खान की रिहाई की मांग तेज कर दी है। इसके साथ ही, बाइडेन प्रशासन द्वारा मिसाइल डील रद्द करने और चार प्रमुख पाकिस्तानी कंपनियों पर प्रतिबंध लगाने ने रही-सही कसर पूरी कर दी है। इमरान खान की रिहाई पर बढ़ता अंतरराष्ट्रीय दबाव इमरान खान की गिरफ्तारी को लेकर पाकिस्तान में चल रहे राजनीतिक उथल-पुथल में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी हलचल बढ़ गई है। ट्रंप के सहयोगी रिचर्ड ग्रेनेल और पूर्व यूके विपक्षी नेता जेरेमी कॉर्बिन समेत कई प्रभावशाली नेताओं ने इमरान की रिहाई की मांग की है। इन मांगो के मद्देनजर पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मुमताज जहरा बलोच ने इन बयानों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पाकिस्तान अमेरिका के साथ परस्पर सम्मान और हस्तक्षेप से परे रिश्ते बनाए रखना चाहता है। उन्होंने कहा, “हम आपसी सम्मान, आपसी हित और एक-दूसरे के घरेलू मामलों में हस्तक्षेप न करने के आधार पर अमेरिका के साथ सकारात्मक, रचनात्मक संबंध रखना चाहेंगे… हम अमेरिका में अधिकारियों और सार्वजनिक हस्तियों के साथ बातचीत जारी रखेंगे और उनके साथ आपसी हित और आपसी चिंता के मुद्दों पर चर्चा करेंगे।” हालांकि, बढ़ते वैश्विक दबाव और इमरान की पार्टी पीटीआई के लगातार विरोध प्रदर्शनों के चलते सरकार को इस मुद्दे पर विचार करना पड़ रहा है। यह दबाव शरीफ सरकार के लिए बड़ा सिरदर्द साबित हो रहा है। मिसाइल डील पर बाइडेन प्रशासन का कड़ा रुख बाइडेन प्रशासन ने पाकिस्तान के मिसाइल कार्यक्रम पर रोक लगाते हुए चार प्रमुख पाकिस्तानी कंपनियों पर प्रतिबंध लगा दिए हैं। इन प्रतिबंधों का कारण पाकिस्तान का कथित तौर पर 12,000 किमी तक मार करने वाली बैलिस्टिक मिसाइल विकसित करना बताया गया है, जो अमेरिका और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा मानी जा रही है। पाकिस्तानी विशेषज्ञों का दावा है कि यह मिसाइल अमेरिका को निशाना बनाने में सक्षम नहीं है, लेकिन भारत के हर शहर को निशाना बना सकती है। दूसरी ओर, अमेरिका का यह कदम चीन और पाकिस्तान के बढ़ते रक्षा संबंधों पर सख्त संदेश भी माना जा रहा है। चीन-पाकिस्तान रक्षा साझेदारी विवाद की जड़ 1998 के एक पुराने मामले में जब अमेरिकी टॉमहॉक क्रूज मिसाइलें पाकिस्तान के कब्जे में आई थीं और उन्हें चीन को सौंपा गया था, तब से चीन और पाकिस्तान की साझेदारी सवालों के घेरे में है। चीन ने इसी तकनीक पर डीएच-10 मिसाइल विकसित की, जिसे बाद में पाकिस्तान को ‘बाबर’ मिसाइल के रूप में दिया गया। डोनाल्ड ट्रंप के सत्ता संभालने से पहले ही बढ़ते दबाव और बाइडेन प्रशासन के सख्त फैसलों ने पाकिस्तान की शरीफ सरकार को घेर लिया है। आने वाले दिनों में यह देखना होगा कि शरीफ सरकार इस अंतरराष्ट्रीय और घरेलू संकट से कैसे निपटती है।

26/11 हमले का गुनहगार हाफिज अब्दुल रहमान मक्की की लाहौर में दिल का दौरा पड़ने से मौत

इस्लामाबाद मुंबई हमलों के मास्टरमाइंड हाफिज सईद के करीबी रिश्तेदार और प्रतिबंधित जमात-उद-दावा के उप प्रमुख हाफिज अब्दुल रहमान मक्की की शुक्रवार को लाहौर में दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई। खबर के मुताबिक मक्की की मौत हार्ट अटैक के चलते हुई। मक्की को आतंकवाद विरोधी अदालत ने 2020 में आतंकवाद की फंडिगं के मामले में छह महीने की कैद की सजा सुनाई थी। इस मामले में सजा सुनाए जाने के बाद से ही वह सुर्खियों से दूर रहा था। 2023 में, मक्की को संयुक्त राष्ट्र ने वैश्विक आतंकवादी घोषित किया था, जिसके तहत उसकी संपत्ति जब्त कर ली गई। उस पर यात्रा प्रतिबंध लगा दिया गया और हथियार प्रतिबंध लगा दिए गए। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक हाफिज सईद के साथ मक्की भी 2008 के मुंबई हमले की साजिश में शामिल था। बता दें 26 नवंबर 2008 को लश्कर-ए-तैयबा के 10 सदस्यों ने मुंबई में विभिन्न लोकेशन पर हमला बोल दिया। आतंकवियों ने छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस, ओबेरॉय ट्राइडेंट, ताज महल पैलेस और टॉवर होटल, लियोपोल्ड कैफे, कामा अस्पताल, नरीमन हाउस,मेट्रो सिनेमा, और टाइम्स ऑफ इंडिया बिल्डिंग और सेंट जेवियर्स कॉलेज के पीछे की गली, मुंबई के बंदरगाह क्षेत्र मझगांव में और विले पार्ले में एक टैक्सी पर हमला किया। आतंकियों ने 166 लोगों की हत्या कर दी। आतंकवादी आमिर अजमल कसाब जीवित पकड़ लिया गया, जबकि उसके बाकी साथी मारे गए।

साउथ कोरिया में गहराया राजनीतिक संकट, अब कार्यवाहक राष्ट्रपति हान के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव पारित

सोल साउथ कोरिया की नेशनल असेंबली ने शुक्रवार को कार्यवाहक राष्ट्रपति हान डक-सू के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव पारित कर दिया। उन्हें राष्ट्रपति यून सूक योल की जगह लिए अभी दो सप्ताह का समय भी पूरा नहीं हुआ था। यून के खिलाफ भी मार्शल लॉ लागू करने के लिए महाभियोग प्रस्ताव पारित हुआ था। हान पर महाभियोग लगाने का प्रस्ताव 192-0 मतों से सर्वसम्मति से पारित हुआ, यह पहली बार था जब संसद द्वारा किसी कार्यवाहक राष्ट्रपति पर महाभियोग लगाया गया। महाभियोग प्रस्ताव पारित होने के बाद हान को उनके कर्तव्यों से निलंबित कर दिया गया। अब उप प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री चोई सांग-मोक कार्यवाहक राष्ट्रपति और कार्यवाहक प्रधानमंत्री दोनों के रूप में कार्य करेंगे। हान ने एक बयान में कहा, “मैं नेशनल असेंबली के फैसले का सम्मान करता हूं और भ्रम और अनिश्चितता को बढ़ाने से बचने के लिए, मैं प्रासंगिक कानूनों के अनुसार अपने कर्तव्यों को निलंबित करूंगा, और संवैधानिक न्यायालय के तेज और बुद्धिमान निर्णय की प्रतीक्षा करूंगा।” योनहाप समाचार एजेंसी ने बताया, सत्तारूढ़ ‘पीपुल पावर पार्टी’ (पीपीपी) ने इस निर्णय का विरोध करते हुए कहा कि मतदान अमान्य था। पीपीपी का कहना था कि महाभियोग के लिए कोरम 151 मतों के साधारण बहुमत पर निर्धारित किया गया, जो कैबिनेट मंत्रियों पर लागू होता है, ना कि 200 मतों के दो-तिहाई बहुमत पर, जो राष्ट्रपति पर लागू होता है। मतदान से ठीक पहले नेशनल असेंबली के स्पीकर वू वोन-शिक ने कोरम की घोषणा की, जिसके बाद पीपीपी के सांसदों ने स्पीकर की सीट को घेर लिया और ‘अमान्य और अमान्य’ चिल्लाने लगे। हान के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव मुख्य विपक्षी ‘डेमोक्रेटिक पार्टी’ (डीपी) की ओर से पेश किया गया था क्योंकि उन्होंने संवैधानिक न्यायालय में अतिरिक्त जजे की नियुक्ति करने से इनकार कर दिया था। संवैधानिक न्यायालय यून के महाभियोग परीक्षण का फैसला करेगा। डीपी ने उनके महाभियोग के लिए पांच कारण सूचीबद्ध किए, जिनमें जजों की नियुक्ति करने से इनकार करना, यून के मार्शल लॉ लगाने में उनकी भागीदारी, यून और प्रथम महिला किम कीन ही को टारगेट करने वाले दो स्पेशल काउंसेल बिल को लागू करने से इनकार करना शामिल है। न्यायालय में वर्तमान में केवल छह जज हैं। कानून के अनुसार, महाभियोग प्रस्ताव को बरकरार रखने के लिए कम से कम छह वोटों की आवश्यकता होती है। इसका अर्थ है कि तीन अतिरिक्त न्यायाधीशों की नियुक्ति से यून के महाभियोग को बरकरार रखने की संभावना बढ़ सकती है। हान के खिलाफ प्रस्ताव पारित होने के कुछ समय बाद ही पीपीपी ने महाभियोग को निरस्त करने के लिए संवैधानिक न्यायालय में निषेधाज्ञा दायर की। बता दें राष्ट्रपति यून ने 03 दिसंबर की रात को दक्षिण कोरिया में आपातकालीन मार्शल लॉ की घोषणा की, लेकिन बुधवार को संसद द्वारा इसके खिलाफ मतदान किए जाने के बाद इसे निरस्त कर दिया गया। मार्शल लॉ कुछ घंटों के लिए ही लागू रहा। हालांकि चंद घटों के लिए लागू हुए मार्शल लॉ ने देश की राजनीति को हिला कर रख दिया।

मनमोहन सिंह: आर्थिक सुधारों के जनक और एक दृढ़ राजनेता

नई दिल्ली  प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के निधन को राष्ट्र के लिए एक बड़ी क्षति बताया है। उन्होंने सिंह की प्रशंसा करते हुए शुक्रवार को कहा कि साधारण पृष्ठभूमि से आने के बावजूद वह देश के कुछ सबसे महत्वपूर्ण पदों पर पहुंचे। मोदी ने एक प्रतिष्ठित सांसद के रूप में उनकी सराहना करते हुए कहा कि सिंह का जीवन उनकी ईमानदारी और सादगी का प्रतिबिंब है। प्रधानमंत्री ने सुधारों के प्रति सिंह की प्रतिबद्धता पर जोर देते हुए कहा कि देश के विकास में उनके योगदान को हमेशा याद रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि सिंह का जीवन भविष्य की पीढ़ियों के लिए हमेशा एक सीख के रूप में काम करेगा कि कैसे कोई व्यक्ति अभावों और संघर्षों से ऊपर उठकर सफलता की ऊंचाइयों को प्राप्त कर सकता है। पूर्व वित्त मंत्री और दो बार प्रधानमंत्री रहे मनमोहन सिंह का बृहस्पतिवार को 92 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। मनमोहन सिंह को श्रद्धांजलि देने वालों का तांता लगा, शनिवार को होगी अंत्येष्टि  राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, कांग्रेस संसदीय दल की प्रमुख सोनिया गांधी, पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी सहित कई प्रमुख नेताओं तथा अन्य हस्तियों ने शुक्रवार को पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को उनके आवास पर श्रद्धांजलि अर्पित की। तिरंगे में लिपटे पूर्व प्रधानमंत्री के पार्थिव शरीर को उनके आवास पर फूलों से सजे ताबूत में रखा गया, जहां दलगत भावना से ऊपर उठकर नेताओं ने दिवंगत नेता को अंतिम श्रद्धांजलि दी। सिंह की पत्नी गुरशरण कौर और परिवार के अन्य सदस्य भी उपस्थित थे। सिंह का अंतिम संस्कार शनिवार को किया जाएगा। कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने बताया कि सिंह का पार्थिव शरीर शनिवार सुबह पार्टी मुख्यालय में लोगों के अंतिम दर्शन के लिए रखा जाएगा और फिर वहीं से सुबह साढ़े नौ बजे उनकी अंतिम यात्रा भी शुरू होगी। राष्ट्रपति मुर्मू, प्रधानमंत्री मोदी, उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़, गृह मंत्री अमित शाह और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) अध्यक्ष जेपी नड्डा ने भी पूर्व प्रधानमंत्री को उनके आवास पर श्रद्धांजलि अर्पित की। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और पार्टी की पूर्व प्रमुख सोनिया गांधी एवं राहुल गांधी समेत कांग्रेस के शीर्ष नेताओं ने भी सिंह को अंतिम श्रद्धांजलि दी। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) महासचिव प्रियंका गांधी और अन्य नेता भी मौजूद थे। प्रधानमंत्री मोदी ने मनमोहन सिंह को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके निधन को राष्ट्र के लिए एक बड़ी क्षति बताया और कहा कि उन्हें एक दयालु इंसान, विद्वान अर्थशास्त्री और आर्थिक सुधारों के जरिए देश को एक नए युग में ले जाने वाले नेता के रूप में याद किया जाएगा। मोदी ने एक वीडियो संदेश में सिंह के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए यह भी कहा कि उनका जीवन भविष्य की पीढ़ियों को सिखाता है कि कैसे विपरीत परिस्थितियों से ऊपर उठकर ऊंचाइयों को प्राप्त किया जाता है। मोदी ने कहा, ‘‘डॉ. सिंह का निधन राष्ट्र के लिए एक बड़ी क्षति है। जीवन के हर क्षेत्र में सफलता हासिल करना कोई साधारण उपलब्धि नहीं है। विभाजन के दौरान भारत आने के क्रम में बहुत कुछ खोने के बावजूद उन्होंने इन उपलब्धियों को हासिल किया।’’ उनका कहना था, ‘‘डॉ. सिंह का जीवन भविष्य की पीढ़ियों को सिखाता है कि कैसे विपरीत परिस्थितियों से ऊपर उठकर महान ऊंचाइयों को प्राप्त किया जाए।’’ भारत में आर्थिक सुधारों के जनक कहे जाने वाले पूर्व वित्त मंत्री और दो बार प्रधानमंत्री रहे मनमोहन सिंह का बृहस्पतिवार को निधन हो गया था। वह 92 साल के थे। मनमोहन सिंह को बृहस्पतिवार की शाम तबीयत बिगड़ने पर दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में भर्ती कराया गया था। उनका पार्थिव शरीर बृहस्पतिवार देर रात एम्स से उनके आवास पर ले जाया गया। प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता में शुक्रवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पूर्व प्रधानमंत्री सिंह के निधन पर शोक प्रस्ताव पारित किया और कहा कि उन्होंने राष्ट्रीय जीवन पर अपनी छाप छोड़ी है और उनके निधन से राष्ट्र ने एक प्रख्यात राजनेता, जानेमाने अर्थशास्त्री और एक प्रतिष्ठित को नेता खो दिया है। एक आधिकारिक बयान में कहा गया, ‘‘प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने पूर्व प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह की स्मृति में एक शोक प्रस्ताव पारित किया। मंत्रिमंडल ने दो मिनट का मौन रखकर डॉ० मनमोहन सिंह को श्रद्धांजलि दी।’’ कांग्रेस नेता सिंह 2004 से 2014 तक, 10 वर्ष देश के प्रधानमंत्री रहे और उससे पहले उन्होंने वित्त मंत्री के रूप में देश के आर्थिक ढांचे को मजबूत करने में मदद की। वह वैश्विक वित्तीय और आर्थिक क्षेत्रों में एक प्रसिद्ध नाम थे। उनकी सरकार ने सूचना का अधिकार (आरटीआई), शिक्षा का अधिकार (आरटीई) और मनरेगा जैसी युग परिवर्तनकारी योजनाओं की शुरूआत की। हमेशा नीली पगड़ी पहनने वाले सिंह को 1991 में नरसिम्हा राव सरकार में भारत का वित्त मंत्री नियुक्त किया गया था। आर्थिक सुधारों की एक व्यापक नीति शुरू करने में उनकी भूमिका को अब दुनिया भर में मान्यता प्राप्त है। मनमोहन सिंह: आर्थिक सुधारों के जनक और एक दृढ़ राजनेता  पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को भारत में आर्थिक सुधारों के जनक, उसे लाइसेंस राज से मुक्त कराने वाले और देश को उस स्थिति से उबारने वाले उद्धारक के रूप में याद किया जाएगा जब इसका स्वर्ण भंडार भी गिरवी रख दिया गया था। एक दृढ़ राजनेता के तौर पर पहचान बनाने वाले डा. मनमोहन सिंह मौजूदा भारत के शिल्पकार और विद्वता के धनी इंसान थे। विनम्र, विद्वान, मृदुभाषी और आमसहमति में यकीन रखने वाले मनमोहन सिंह का बृहस्पतिवार रात दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में निधन हो गया। वह 92 वर्ष के थे। कांग्रेस नेता के रूप में उन्होंने 2004-2014 तक 10 वर्षों के लिए देश का नेतृत्व किया और उससे पहले वित्त मंत्री के रूप में देश के आर्थिक ढांचे को तैयार करने में मदद की। वह वैश्विक स्तर पर वित्तीय और आर्थिक क्षेत्र की एक मशहूर शख्सियत थे। उनकी सरकार ने सूचना का अधिकार (आरटीआई), शिक्षा का अधिकार (आरटीई) और मनरेगा जैसी युग परिवर्तनकारी योजनाओं की शुरूआत की। मनमोहन सिंह ने अभावों के बीच अपने जीवन की शुरूआत की। कभी बिजली से वंचित अपने गांव में मिट्टी के तेल के दीये की मंद रोशनी में पढ़ाई करने वाले मनमोहन सिंह … Read more

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