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एयरस्ट्राइक का बदला लेने के लिए तैयार अफगानिस्तान, 15000 तालिबान लड़ाके कर रहे कूच, पाकिस्तान की आएगी शामत!

 पेशावर  भारत के पड़ोस में खूनी जंग छिड़ती नजर आ रही है। पाकिस्तान और तालिबान की दोस्ती अब दुश्मनी में बदलने लगी है और दोनों देश एक-दूसरे के आमने-सामने आ गए। पाकिस्तान की एयरस्ट्राइक के बाद अब अफगानिस्तान ने भी बदला लेने की ठान ली है। 15 हजार तालिबानी लड़ाकों पाकिस्तान की ओर तेजी से बढ़ रहे है। पाकिस्तान ने मंगलवार (24 दिसंबर) को देर रात अफगानिस्तान में एयर स्ट्राइक कर पाकिस्तानी तालिबान के संदिग्ध ठिकानों को निशाना बनाया था। एयरस्ट्राइक में कम से कम 46 लोग मारे गए हैं। पाकिस्तान की ओर बढ़े तालिबानी लड़ाके पाकिस्तान की एयरस्ट्राइक के बाद ही दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ गया है। जानकारी के अनुसार तालिबान के 15000 लड़ाके काबुल, कंधार और हेरात से पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत से लगती मीर अली सीमा की ओर बढ़ रहे हैं। तालिबान के यह लड़ाके पाकिस्तान से एयरस्ट्राइक का बदला लेने के लिए तैयार हैं। तालिबान प्रवक्ता का कहना है कि पाकिस्तान को उसकी कार्रवाई का मुंहतोड़ जवाब मिलेगा। ‘कायरतापूर्ण हमले का जवाब जरूर देंगे…’ वहीं, अफगानिस्तान के रक्षा मंत्रालय ने पाकिस्तानी एयरस्ट्राइक की कड़ी निंदा की है और इसे अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन बताया। उसका आरोप है कि एयरस्ट्राइक में महिलाओं और बच्चों समेत आम लोगों को भी निशाना बनाया गया। रक्षा मंत्रालय ने इस पर कहा, ‘अपनी मातृभूमि की रक्षा करना हमारा अधिकार है। हम इस कायरतापूर्ण हमले का जवाब जरूर देंगे।’ क्यों बढ़ा तनाव? टीटीपी एक अलग आतंकवादी संगठन है, लेकिन इसे अफगान तालिबान का करीबी सहयोगी माना जाता है, जो अगस्त 2021 में अफगानिस्तान की सत्ता पर काबिज हुआ था। पाकिस्तान में पिछले दो दशक में बड़ी संख्या में आतंकवादी हमले हुए हैं, लेकिन हाल के महीनों में इनमें वृद्धि हुई है। TTP ने हाल ही में उत्तर-पश्चिम में एक जांच चौकी पर हमला किया था, जिसमें कम से कम 16 पाकिस्तानी सैनिक मारे गए थे। पाकिस्तानी अधिकारियों ने तालिबान पर साझा सीमा पर आतंकवादी गतिविधियों पर लगाम लगाने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाने का आरोप लगाया है। हालांकि, तालिबान सरकार ने पाकिस्तान के आरोप खारिज करते हुए कहा है कि वह किसी भी संगठन को किसी भी देश के खिलाफ हमले करने की इजाजत नहीं देती है। क्या है तालिबान की रणनीति? अफगान तालिबान लंबे समय से यह दिखाता आया है कि वह किसी भी बड़े सैन्य शक्ति के सामने झुकने वाला नहीं है. अमेरिका और रूस जैसी महाशक्तियों को उसने वर्षों तक चुनौती दी और आखिरकार उन्हें अफगानिस्तान से लौटने पर मजबूर कर दिया. पाकिस्तान के पास न तो वैसी सैन्य ताकत है और न ही आर्थिक क्षमता, जिससे वह तालिबान का सामना कर सके. मीर अली बॉर्डर पर बढ़ती गतिविधियों के चलते पाकिस्तान ने भी अपनी सेना को अलर्ट पर रखा है. सीमाई इलाकों में सैनिकों की तैनाती तेज कर दी गई है. स्थानीय लोगों में डर का माहौल है और स्थिति किसी बड़े संघर्ष का संकेत दे रही है. तनाव बढ़ने के साथ ही यह देखना होगा कि पाकिस्तान और तालिबान के बीच यह टकराव किस ओर बढ़ता है. तालिबान का उभार अफगानिस्तान से रूसी सैनिकों की वापसी के बाद 1990 के दशक की शुरुआत में उत्तरी पाकिस्तान में हुआ था. पश्तो भाषा में तालिबान का मतलब होता है छात्र खासकर ऐसे छात्र जो कट्टर इस्लामी धार्मिक शिक्षा से प्रेरित हों. कहा जाता है कि कट्टर सुन्नी इस्लामी विद्वानों ने धार्मिक संस्थाओं के सहयोग से पाकिस्तान में इनकी बुनियाद खड़ी की थी. तालिबान पर देववंदी विचारधारा का पूरा प्रभाव है. तालिबान को खड़ा करने के पीछे सऊदी अरब से आ रही आर्थिक मदद को जिम्मेदार माना गया. शुरुआती तौर पर तालिबान ने ऐलान किया कि इस्लामी इलाकों से विदेशी शासन खत्म करना, वहां शरिया कानून और इस्लामी राज्य स्थापित करना उनका मकसद है. शुरू-शुरू में सामंतों के अत्याचार, अधिकारियों के करप्शन से आजीज जनता ने तालिबान में मसीहा देखा और कई इलाकों में कबाइली लोगों ने इनका स्वागत किया लेकिन बाद में कट्टरता ने तालिबान की ये लोकप्रियता भी खत्म कर दी लेकिन तब तक तालिबान इतना पावरफुल हो चुका था कि उससे निजात पाने की लोगों की उम्मीद खत्म हो गई. अफगान और तालिबान की सैन्य ताकत कितनी? तालिबान की ताकत कितनी है कि वह अफगानिस्तान की सेना पर भारी पड़ रहा? अफगानिस्तान के फर्स्ट वाइस प्रेसिडेंट कहते हैं- ‘तालिबान का जल्द खात्मा होगा. उनके पास 80 हजार के करीब लड़ाके हैं और अफगानिस्तान की सेना के पास 5 से 6 लाख के बीच सैनिक. इसके अलावा अफगानिस्तान के पास वायु सेना है जो तालिबान पर भारी पड़ेगी.’ हालांकि, इस दावे के बावजूद कई ऐसे फैक्ट हैं जो जमीनी स्तर पर तालिबान को मजबूत साबित कर रहे हैं. तालिबान का मैनपावर सोर्स कबाइली इलाकों में बसे कबीले और उनके लड़ाके हैं. इसके अलावा कट्टर धार्मिक संस्थाएं, मदरसे भी उनके विचार को सपोर्ट कर रहे हैं. लेकिन इन सबसे ज्यादा पाकिस्तानी सेना और आईएसआई की सीक्रेट मदद तालिबान के लिए मददगार साबित हो रही है. अमेरिकी खुफिया आकलन भी जमीनी हालात को साफ करते हैं जिसमें कहा गया है कि अमेरिकी सैनिकों की वापसी के 6 महीने के भीतर अफगानिस्तान सरकार का प्रभुत्व खत्म हो जाएगा और तालिबान का शासन आ सकता है.  

आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के डिप्टी चीफ अब्दुल रहमान मक्की की पाकिस्तान के लाहौर में मौत

 लाहौर आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के डिप्टी चीफ अब्दुल रहमान मक्की की पाकिस्तान के लाहौर में मौत हो गई है. जानकारी के मुताबिक, उसकी मौत हार्ट अटैक की वजह से हुई है. मुंबई के 26/11 हमले का गुनहगार अब्दुल रहमान मक्की आतंकी हाफिज सईद का रिश्तेदार है. मक्की को अमेरिका ने ग्लोबल आतंकवादी घोषित किया हुआ है. भारत में वो वॉन्टेड था. अब्दुल रहमान मक्की लश्कर-ए-तैयबा के टेरर फंडिग का काम देखता था. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने मक्की को 1267 ISIL (दा’एश) और अल कायदा प्रतिबंध समिति के तहत ग्लोबल टेररिस्ट घोषित किया था. इसके साथ ही उनकी संपत्ति फ्रीज कर दी गईं थी. यात्रा प्रतिबंध लगा दिया था और हथियारों पर भी बैन लगा दिया था. अब्दुल रहमान मक्की को 16 जनवरी को ISIL और अलकायदा से जुड़े होने लश्कर-ए-तैयबा द्वारा या उसके समर्थन से टेरर फाइनेंसिंग, साजिश रचने, साजिश में हिस्सा लेने, भर्ती करने जैसे कामों में शामिल होने पर लिस्टेड किया गया. मक्की लश्कर की राजनीतिक विंग जमाद उद दावा का भी चीफ था. वह लश्कर के फॉरेन रिलेशन डिपार्टमेंट का भी हेड रहा है. मक्की को घोषित किया था अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी साल 2023 में संयुक्त राष्ट्र ने मक्की को अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी घोषित किया था। इसके पहले साल 2020 में आतंकी फंडिंग मामले में पाकिस्तान की एंटी टेररिज्म कोर्ट ने मक्की को 6 महीने के लिए जेल में भेजा था। आतंकी फंडिंग मामले में सजा सुनाए जाने के बाद से ही जमात-उद-दावा का उप प्रमुख खुद को लो प्रोफाइल रखे हुए था और सार्वजनिक रूप से बहुत कम नजर आता था। पाकिस्तान मुत्तहिदा मुस्लिम लीग (पीएमएमएल) ने एक बयान में कहा कि मक्की पाकिस्तान की विचारधारा का समर्थक था। मक्की ने मुंबई आतंकी हमलों के लिए आतंकियों को धन और संसाधन मुहैया कराए थे, जिसमें 166 लोग मारे गए थे। इस दौरान 9 आतंकी मारे गए थे, जबकि एक आतंकी अजमल कसाब का जिंदा पकड़ा गया था। लश्कर ने भारत में कराए ये बड़े हमले UN की वेबसाइट के मुताबिक, मक्की लश्कर और जमात-उद-दावा में नेतृत्व पद पर रहा है. ऐसे में भारत में हुए बड़े हमलों के पीछे हाफिज सईद के साथ साथ मक्की का भी हाथ माना जाता रहा है. लश्कर ने भारत में इन बड़े हमलों को अंजाम दिया है… 1- लाल किले पर हमला: 22 दिसंबर 2000 में लश्कर-ए-तैयबा के 6 आतंकियों ने लाल किले में घुसकर सुरक्षाबलों पर फायरिंग की थी. इस अटैक में सेना के दो जवान समेत तीन लोगों की मौत हो गई थी.  इस आतंकी हमले में राइफलमैन उमा शंकर तो मौके पर ही शहीद हो गए थे. जबकि, नायक अशोक कुमार ने अस्पताल में दम तोड़ दिया था. अब्दुल्ला ठाकुर नाम के शख्स की भी इस हमले में मौत हो गई थी. 2- रामपुर हमला: लश्कर के 5 आतंकियों ने 1 जनवरी 2008 में सीआरपीएफ के काफिले पर हमला किया था. इसमें 7 सीआरपीएफ जवानों और एक रिक्शा चालक की जान चली गई थी.   3- लश्कर ने 26/11 को मुंबई में हमला कराया था. मुंबई में अरब सागर के रास्ते 10 आतंकी दाखिल हुए थे, इन लोगों ने कई जगहों पर अंधाधुंध फायरिंग की थी. इस हमले में 175 लोगों की मौत हो गई थी. 4- श्रीनगर अटैक: 12-13 फरवरी 2018 में श्रीनगर के करण नगर में सीआरपीएफ कैंप में लश्कर का आत्मघाती हमलावर घुस गया था. इस दौरान एक जवान शहीद हो गया था. जबकि एक पुलिसकर्मी जख्मी हुआ था. 5- बारामूला: 30 मई 2018 को बारामूला में लश्कर के आतंकियों ने तीन नागरिकों को मौत के घाट उतार दिया था. 6- श्रीनगर हमला: लश्कर आतकियों ने 14 जून 2018 को राइजिंग कश्मीर के एडिटर सुजात बुखारी और दो सिक्योरिटी गार्ड की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. लश्कर ने इस हमले की जिम्मेदारी ली थी. 7- बांदीपोरा हमला: जम्मू कश्मीर के बांदीपोरा में लश्कर के आतंकियों ने घुसपैठ की कोशिश की थी, इस दौरान भारतीय सेना के जवानों ने उनकी कोशिश को नाकाम कर दिया था. इस हमले में चार जवान शहीद हो गए थे.   मक्की को पाकिस्तान की सरकार ने 15 मई 2019 को गिरफ्तार किया था. वह लाहौर में हाउस अरेस्ट था. 2020 में टेरर फंडिंग केस में मक्की को पाकिस्तानी कोर्ट ने सजा सुनाई थी.  

अटॉर्नी जनरल ने पीएम नेतन्याहू की पत्नी के खिलाफ जांच के दिए आदेश, गवाह को धमकाने का आरोप

तेलअवीव  इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की पत्नी सारा नेतन्याहू के खिलाफ जांच के आदेश दिए गए हैं. इजरायल की अटॉर्नी जनरल गली बहारव-मियारा ने इजरायली पुलिस को जांच के आदेश दिए हैं. दरअसल, सारा नेतन्याहू के खिलाफ एक रिपोर्ट में विरोधियों और एक गवाह को परेशान करने और धमकाने का आरोप लगाया गया है. इजरायल की अटॉर्नी जनरल ने कहा, “उवडा शो के सबंस में गवाहों को परेशान करने और न्याय प्रक्रिया में बाधा डालने के संदेह की जांच की जानी चाहिए.” बता दें कि यह शो पिछले सप्ताह इजरायल के चैनल 12 टीवी पर प्रसारित हुआ था.  इजरायल की अटॉर्नी जनरल ने पुलिस को दिए जांच के आदेश इजरायल की अटॉर्नी जनरल ने पुलिस को पीएम बेंजामिन नेतन्याहू की पत्नी सारा नेतन्याहू के खिलाफ जांच शुरू करने का आदेश दिया है. नेतन्याहू की पत्नी पर राजनीतिक विरोधियों और इजरायल नेता के भ्रष्टाचार के मामले में एक गवाह को परेशान करने का आरोप है. अटॉर्नी जनरल के मुताबिक, सारा नेतन्याहू के खिलाफ यह जांच ‘उवडा’ नामक खोजी कार्यक्रम के रिपोर्ट पर केंद्रित होगी. क्या-क्या हुआ था टीवी चैनल के कार्यक्रम में? इजरायल के चैनल 12 टीवी कार्यक्रम के दौरान व्हाट्सएप मैसेजों से खुलासा किया गया था. इसमें इजरायली पीएम की पत्नी सारा नेतन्याहू अपने एक पूर्व सहयोगी को राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन आयोजित करने और मामले के एक प्रमुख गवाह हदास क्लेन को डराने के निर्देश देती नजर आई है. हालांकि, घोषणा में कहीं भी सारा का नाम नहीं लिया गया है और न्याय मंत्रालय ने इस मामले में आगे कोई भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है. चैनल की रिपोर्ट में सारा पर लगे गंभीर आरोप इजरायल के चैनल 12 ने गुरुवार (26 दिसंबर) को एक रिपोर्ट जारी की. जिसमें दावा किया गया कि सारा नेतन्याहू ने अपने पति के खिलाफ चल रहे आपराधिक मामले में एक गवाह को धमकी दी है. वहीं, परोक्ष रूप से अटॉर्नी जनरल और डिप्टी अटॉर्नी को भी परेशान किया है. प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने पत्नी का किया बचाव वहीं, इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अपनी पत्नी सारा नेतन्याहू का बचाव करते हुए एक वीडियो भाषण जारी किया था. इसमें उन्होंने चैनल 12 की रिपोर्ट को ‘पक्षपाती’ और झूठा प्रचार बताया. उन्होंने आगे कहा कि, “मैं चाहता हूं कि चैनल 12 या दूसरे भड़काऊ चैनल वामपंथी खेमे की भी जांच करें. लेकिन ऐसा होने की उम्मीद मत करो. ऐसा कभी नहीं होगा.” वहीं, इजरायल के न्याय मंत्री यारिव लेविन ने अटॉर्नी जनरल के इस आदेश की आलोचना की है.

हिमाचल : बिलासपुर में 22 कश्मीरी युवकों ने दर्ज कराई शिकायत, जानें पूरा मामला

बिलासपुर  हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले के घुमारवीं में 22 कश्मीरी शॉल विक्रेताओं ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। इन विक्रेताओं का आरोप है कि उन्हें अपना माल बेचने से रोका जा रहा है और राज्य छोड़ने के लिए दबाव डाला जा रहा है। मामला व्यापारिक प्रतिद्वंदिता का बताया जा रहा है। स्थानीय दुकानदारों और कश्मीरी फेरीवालों के बीच ये विवाद है। पुलिस मामले की जांच कर रही है। जानकारी के अनुसार, कश्मीर से आए ये फेरीवाले पहले घुमारवीं के एसडीएम के पास गए थे। एसडीएम ने उनकी शिकायत स्थानीय पुलिस को भेज दी। अधिकारियों का कहना है कि घुमारवीं व्यापार मंडल से जुड़े स्थानीय दुकानदार और कश्मीरी फेरीवालों के बीच व्यापारिक प्रतिद्वंदिता है। इसी वजह से ये विवाद हुआ है। हालांकि फेरीवालों ने अपनी शिकायत में किसी का नाम नहीं लिया है, लेकिन पुलिस को शक है कि स्थानीय दुकानदार ही इसके पीछे हैं। फेरीवालों ने बताया कि उन्होंने इस महीने की शुरुआत में घुमारवीं पुलिस स्टेशन में अपने कागजात जमा किए थे। उसके बाद ही उन्होंने ऊनी कपड़े बेचना शुरू किया था। एसपी ने कही ये बात बिलासपुर के एसपी संदीप धवल ने बताया कि हमें घुमारवीं पुलिस स्टेशन में शिकायत मिली है। पिछले साल भी कश्मीरी फेरीवालों और स्थानीय दुकानदारों के बीच ऐसा ही विवाद हुआ था। दुकानदारों का कहना था कि फेरीवालों की वजह से उन्हें नुकसान हो रहा है। अभी तक किसी मारपीट की सूचना नहीं है। हमने बिलासपुर के डीसी ऑफिस से मामले में मध्यस्थता करने और इसे सुलझाने का अनुरोध किया है। अगले एक-दो दिन में दोनों पक्षों के बीच बैठक होने की उम्मीद है। कश्मीर से आए फेरी वालों ने लगाया ये आरोप कश्मीर से आए एक फेरी वाले ने बताया कि वो अपने साथियों के साथ लगभग 30 साल से यहां आ रहे हैं। पिछले दो सालों से हमें स्थानीय लोगों, खासकर दुकानदारों के विरोध का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि कोई शारीरिक हमला नहीं हुआ है, लेकिन हमें डराया धमकाया जा रहा है। गरीबी हमें यहां रोज़ी-रोटी कमाने के लिए लाई है। हम नवंबर-दिसंबर में आते हैं और मार्च तक रहते हैं। हम लुधियाना से थोक में सामान खरीदते हैं और यहां घर-घर और गांव-गांव जाकर बेचते हैं। आरोपों से इनकार घुमारवीं व्यापार मंडल के एक सदस्य ने नाम न छापने की शर्त पर उत्पीड़न के आरोपों से इनकार किया। उन्होंने कहा कि किसी ने भी फेरीवालों पर हमला नहीं किया है। वे लुधियाना से सामान खरीदते हैं और उसे यहां कश्मीरी’ उत्पाद के रूप में बेचते हैं। हमें उनकी किसी भी पुलिस शिकायत की जानकारी नहीं है। इस बीच, जम्मू-कश्मीर स्टूडेंट्स एसोसिएशन ने कथित उत्पीड़न पर चिंता जताई है। एसोसिएशन के राष्ट्रीय प्रवक्ता आदिल भट ने हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू से मामले में हस्तक्षेप करने का आग्रह किया है।

फ्लोरिडा में पिज्जा डिलीवरी गर्ल को एक प्रेग्नेंट महिला की हत्या की कोशिश

फ्लोरिडा अमेरिका के फ्लोरिडा से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। यहां के एक पिज्जा डिलीवरी गर्ल को एक प्रेग्नेंट महिला की हत्या की कोशिश करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। कथित तौर पर महिला ने उसे 2 डॉलर की टिप देने से इनकार कर दिया था जिससे वह भड़क गई थी। आरोपी की पहचान 22 वर्षीय ब्रायना अल्वेलो के रूप में हुई है। उसने महिला पर चाकू से एक दर्जन से भी ज्यादा वार किए। हालांकि महिला इस घटना में बच निकली। यह वाकया फ्लोरिडा के एक मोटेल में हुआ। महिला अपने प्रेमी और 5 वर्षीय बेटी के साथ जन्मदिन मना रही थी और उसने पिज्जा ऑर्डर किया। महिला ने डिलीवरी वर्कर को $33 के पिज्जा ऑर्डर के बाद एक छोटी सी टिप दी। ओसियोला काउंटी शेरिफ के मुताबिक अल्वेलो को यह बात अच्छी नहीं लगी। रविवार को रात 10 बजे वह एक नकाबपोश साथी के साथ चाकू से लैस होकर मोटेल में लौटी। दोनों ने महिला पर हमला कर दिया। न्यू यॉर्क पोस्ट के मुताबिक अल्वेलो ने कथित तौर पर घटनास्थल से भागने से पहले पीड़िता को 14 बार चाकू घोंपा। हमले के दौरान पीड़िता ने अपनी बेटी को बचाने की कोशिश की लेकिन हमलावरों ने उसकी पीठ पर भी वार किया। उसने मदद के लिए किसी को पुकारने की कोशिश की लेकिन अल्वेलो ने उसका फोन तोड़ दिया। हमले के बाद पीड़िता को स्थानीय अस्पताल ले जाया गया जहां उसकी हालत स्थिर है। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज के आधार पर जल्द ही आरोपी को ढूंढ निकाला और गिरफ्तार कर लिया गया है। उस पर हत्या के प्रयास, घर में घुसपैठ, मारपीट और अपहरण के आरोप में केस दर्ज किए गए हैं। हालांकि उसका साथी अभी भी फरार है। अल्वेलो को जमानत देने से मना कर दिया गया है और फिलहाल उसे ओसियोला काउंटी जेल में रखा गया है। इस मामले पर पिज्जा चेन के मालिक ने दुख जताते हुए माफी मांगी है। कंपनी ने लोगों को आश्वासन दिया है कि वे जांच जारी रहने तक अधिकारियों के साथ पूरा सहयोग कर रहे हैं। कंपनी ने एक बयान में कहा, “ग्राहकों और टीम के सदस्यों की सुरक्षा और भलाई हमेशा हमारी प्राथमिकता रही है।”

इजरायल ने यमन पर की एयरस्ट्राइक, बाल-बाल बचे WHO चीफ “ट्रेडोस एडनॉम”

तेल अवीव विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के डायरेक्टर-जनरल टेड्रोस एडनॉम,  यमन के सना इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर इजरायल की एयरस्ट्राइक में बाल-बाल बच गए. इस हमले में करीब दो लोगों की मौत की खबर सामने आई है. डॉ. टेड्रोस अपने संयुक्त राष्ट्र (US) और WHO सहयोगियों के साथ एक फ्लाइट में सवार होने वाले थे और इसी वक्त हमला हो गया. इस दौरान फ्लाइट क्रू मेंबर्स चालक का एक सदस्य घायल हो गया. WHO चीफ टेड्रोस एडनॉम ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, “UN स्टाफ बंदियों की रिहाई के लिए बातचीत करने, यमन में स्वास्थ्य और मानवीय स्थिति का आकलन करने का हमारा मिशन आज खत्म हो गया. हम बंदियों की तत्काल रिहाई के लिए कोशिश जारी रखेंगे. करीब दो घंटे पहले जब हम सना से अपनी फ्लाइट लेने वाले थे, तो एयरपोर्ट पर हवाई बमबारी हुई. हमारे प्लेन के क्रूब मेंबर्स के सदस्यों में से एक घायल हो गया.” उन्होंने आगे कहा, “एयरपोर्ट पर करीब दो लोगों के मारे जाने की खबर मिली है. हमें रवाना होने से पहले एयरपोर्ट को हुए नुकसान की मरम्मत होने तक इंतजार करना होगा. मैं, मेरे UN और WHO के सहकर्मी सुरक्षित है. उन परिवारों के प्रति हमारी संवेदनाएं, जिनके प्रियजनों ने हमले में अपनी जान गंवाई.” ‘वर्कर्स को निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए…’ संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने हमले की निंदा करते हुए अंतर्राष्ट्रीय कानून का सम्मान करने का आह्वान किया. इसके अलावा उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि नागरिकों और मानवतावादी वर्कर्स को कभी भी निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए. ‘हमले खतरनाक…’ संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने यमन और इजरायल के बीच हाल ही में बढ़े तनाव पर दुख जताया. इसके साथ ही उन्होंने और यमन में सना एयरपोर्ट, लाल सागर बंदरगाहों और बिजलीघरों पर हवाई हमलों को ‘खतरनाक’ बताया. UN चीफ प्रमुख के मुताबिक, हवाई हमलों में कथित तौर पर कई लोग हताहत हुए हैं, जिनमें करीब तीन लोग मारे गए और दर्जनों अन्य घायल हुए. उन्होंने सभी पक्षों से सैन्य कार्रवाई बंद करने और संयम बरतने की बात कही है. इजराइल डिफेंस फोर्स (IDF) के मुताबिक, इजराइली वायु सेना ने पश्चिमी तट और यमन में हूती विद्रोहियों के सैन्य ठिकानों पर हमले किए. ये हमले हूती सैन्य ढांचे पर किए गए, जिसका इस्तेमाल उसकी सैन्य गतिविधियों के लिए किया जाता है. टार्गेट की गई जगहों में सना इंटरनेशनल एयरपोर्ट, हिज़्याज़, रास कनातिब पॉवर स्टेशन्स के अलावा पश्चिमी तट पर अल-हुदैदाह, सालिफ और रास कनातिब बंदरगाह शामिल थे. यमन में हूतियों के खिलाफ इजरायल ने उतार दी पूरी फौज, 100 से ज्यादा फाइटर जेट ने बोला हमला इजरायल की सेना ने अब लाल सागर में अपने सबसे बड़े दुश्मन हूती के खिलाफ हमला शुरू कर दिया है। इजरायली सेना ने गुरुवार को कहा कि उसने यमन में हूती विद्रोहियों से जुड़े कई ठिकानों पर हमला किया, जिसमें सना अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा और पश्चिमी तट पर तीन बंदरगाह शामिल हैं। इजरायली अधिकारियों ने पुष्टि की है कि वायुसेना ने यमन में अब तक का सबसे बड़ा हमला किया है। यमन की मीडिया के मुताबिक एयरपोर्ट का कंट्रोल टावर इस कारण निष्क्रिय हो गया और हूती प्रशासन की ओर से इस्तेमाल किए जाने वाले नागरिक विमान भी क्षतिग्रस्त हो गए। हमले में दो लोगों के मारे जाने की खबर है। यह एयर स्ट्राइक युद्ध स्तर का हमला था, जिसमें इजरायल ने बड़ी संख्या में विमानों का इस्तेमाल किया। अधिकारियों ने बताया कि इस अभियान में 100 से ज्यादा विमानों ने भाग लिया। यह ऑपरेशन अमेरिका के साथ समन्वय में किया गया था। वाईटी न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक एक इजरायली सूत्र ने कहा, ‘हमने कहा था कि हूती भारी कीमत चुकाएंगे और वे हमारी ताकत देखेंगे।’ उन्होंने यह भी कहा कि यह हमला आखिरी नहीं होगा। नेतन्याहू ने दी हूतियों को धमकी कतर के अल-अरबी नेटवर्क ने दावा किया कि हमलों के कारण देश भर में आंशिक बिजली कटौती हुई। हमलों के दौरान, प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने वायुसेना कमान केंद्र से कहा, ‘हम ईरान के आतंक के हाथ को काटने के लिए दृढ़ हैं।’ इससे पहले बुधवार को एक भाषण में उन्होंने कहा था कि हूती भी वही सबक सीखेंगे, जो हमास, हिजबुल्ला, असद सरकार और अन्य लोगों ने सीखा है। रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज ने कहा, ‘जो इजरायल को नुकसान पहुंचाएगा, उसका पीछा किया जाएगा। कोई भी हूती नेता इजरायल की पहुंच से नहीं बच पाएगा।’ इजरायल ने अपनी सुरक्षा बढ़ाई हिजबुल्लाह से जुड़े लेबनानी आउटलेट अल मयादीन ने आरोप लगाया कि इजरायली हमलों के दौरान अमेरिकी नौसेना के युद्धपोत भी शामिल थे। इजरायल ने इस हमले के बाद संभावित हूती प्रतिक्रिया को देखते हुए अपने एयर डिफेंस का स्तर बढ़ा दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक हमले के दौरान WHO के महानिदेशक और सना में संयुक्त राष्ट्र के समन्वयक यमन में हवाई अड्डे पर मौजूद थे।  

पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह नहीं रहे, 92 साल की उम्र में AIIMS में निधन

नई दिल्ली भारत के पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह का गुरुवार, 26 दिसंबर 2024 को निधन हो गया। 92 वर्षीय डॉ. मनमोहन सिंह को स्वास्थ्य बिगड़ने के बाद गुरुवार शाम एम्स, नई दिल्ली में भर्ती कराया गया था, जहां इलाज के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली। एम्स नई दिल्ली ने मनमोहन के निधन की पुष्टि करते हुए न्यूज बुलेटिन जारी किया है। एम्स ने कहा, “अत्यंत दुःख के साथ हम भारत के पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के निधन की सूचना देते हैं। उन्होंने 92 वर्ष की उम्र में अंतिम सांस ली। वे उम्र से संबंधित बीमारियों के कारण उपचाराधीन थे और 26 दिसंबर 2024 को घर पर अचानक बेहोश हो गए थे। घर पर ही उन्हें तुरंत पुनर्जीवित करने के उपाय शुरू किए गए। उन्हें रात 8:06 बजे एम्स, नई दिल्ली के मेडिकल इमरजेंसी में लाया गया। तमाम कोशिशों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका और रात 9:51 बजे उन्हें मृत घोषित कर दिया गया।” पीएम मोदी ने भी पूर्व पीएम मनमोहन सिंह को श्रद्धांजलि दी है। पीएम मोदी ने लिखा, “भारत अपने सबसे प्रतिष्ठित नेताओं में से एक डॉ. मनमोहन सिंह जी के निधन पर शोक मना रहा है। साधारण पृष्ठभूमि से उठकर वे एक प्रतिष्ठित अर्थशास्त्री बने। उन्होंने वित्त मंत्री सहित विभिन्न सरकारी पदों पर कार्य किया और वर्षों तक हमारी आर्थिक नीति पर अपनी गहरी छाप छोड़ी। संसद में उनके हस्तक्षेप भी बहुत ही व्यावहारिक थे। हमारे प्रधानमंत्री के रूप में उन्होंने लोगों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए व्यापक प्रयास किए।” इससे पहले कांग्रेस पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं ने इस खबर की पुष्टि की। पूर्व केंद्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद, हरियाणा के पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने मनमोहन सिंह के निधन पर श्रद्धांजलि दी। डॉ. मनमोहन सिंह अपनी सरलता, ईमानदारी और उत्कृष्ट आर्थिक नीतियों के लिए जाने जाते थे। उनका निधन भारतीय राजनीति और अर्थव्यवस्था के लिए एक अपूरणीय क्षति है। उनका अंतिम संस्कार पूरे राजकीय सम्मान के साथ किया जाएगा।  मनमोहन सिंह के निधन पर हरियाणा के सीएम नायब सैनी ने जताया दुख पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के निधन पर हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा, “देश ने एक राजनेता ही नहीं, बल्कि एक अर्थशास्त्री भी खो दिया है। पंजाब के एक गांव में जन्म लेने से लेकर अर्थशास्त्री और प्रधानमंत्री बनने तक का उनका सफर राष्ट्र सेवा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उन्हें उनकी सादगी और उनके आर्थिक फैसलों के लिए हमेशा याद किया जाएगा। मैं ईश्वर से प्रार्थना करता हूं कि उनकी आत्मा को शांति मिले।” प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिवंगत पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह को अंतिम श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की। आर्थिक सुधार के प्रणेता और ‘अनिच्छुक राजा’ ब्रिटिश मीडिया BBC ने डॉ. मनमोहन सिंह के निधन की जानकारी देते हुए अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि, ‘भारत के पूर्व प्रधानमंत्री और आर्थिक सुधार के प्रणेता मनमोहन सिंह का 92 वर्ष की आयु में निधन हो गया है. सिंह भारत के सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले प्रधानमंत्रियों में से एक थे और उन्हें प्रमुख उदारवादी आर्थिक सुधारों का निर्माता माना जाता है.’ न्यूज़ एजेंसी Reuters ने लिखा है, ‘प्रधानमंत्री के तौर पर अपने पहले कार्यकाल में वह ‘अनिच्छुक राजा’ के तौर पर वर्णित किए गए. मृदुभाषी मनमोहन सिंह, जिनका गुरुवार को 92 वर्ष की आयु में निधन हो गया, यकीनन भारत के सबसे सफल नेताओं में से एक थे. वह भारत का नेतृत्व करने वाले पहले सिख प्रधानमंत्री थे. उन्हें भारत को अभूतपूर्व आर्थिक विकास की ओर ले जाने और करोड़ों लोगों को भयंकर गरीबी से बाहर निकालने का श्रेय दिया जाता है. क़तरी ब्रॉडकास्टर अल जज़ीरा ने पूर्व प्रधानमंत्री के निधन पर लिखा है कि, वह 90 के दशक में भारत के आर्थिक उदारीकरण के वास्तुकार थे. पूर्व भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने वित्त मंत्री के तौर पर अपने पहले कार्यकाल में भारत की अर्थव्यवस्था को उदार बनाया. अलजज़ीरा ने लिखा कि, ‘सौम्य स्वभाव वाले टेक्नोक्रेट सिंह भारत के सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले प्रधानमंत्रियों में से एक थे. डॉ. मनमोहन सिंह: एक महानायक की जीवन यात्रा डॉ. मनमोहन सिंह का जन्म 26 सितंबर 1932 को अविभाजित भारत के पंजाब प्रांत (अब पाकिस्तान में) के गाह गांव में हुआ था। विभाजन के बाद उनका परिवार भारत आ गया। बचपन से ही वे मेधावी छात्र रहे। उन्होंने पंजाब विश्वविद्यालय से अपनी स्नातक की पढ़ाई पूरी की और आगे की पढ़ाई के लिए कैम्ब्रिज और ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय गए। डॉ. सिंह ने 1950 के दशक में अपने करियर की शुरुआत आर्थिक मामलों में शोधकर्ता के रूप में की। उनके उल्लेखनीय योगदान के कारण उन्हें 1971 में भारत सरकार में आर्थिक सलाहकार के पद पर नियुक्त किया गया। बाद में वे योजना आयोग के उपाध्यक्ष और भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर के पद पर भी रहे। उदारीकरण के जनक 1991 में, भारत जब गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहा था, उस समय डॉ. मनमोहन सिंह को वित्त मंत्री नियुक्त किया गया। उन्होंने ऐतिहासिक आर्थिक सुधारों की शुरुआत की, जिसने भारत को आर्थिक उदारीकरण की राह पर आगे बढ़ाया। उनके नेतृत्व में अर्थव्यवस्था के कई क्षेत्रों में विदेशी निवेश के दरवाजे खुले और आर्थिक विकास को गति मिली। प्रधानमंत्री के रूप में डॉ. मनमोहन सिंह 2004 से 2014 तक दो कार्यकालों के लिए भारत के प्रधानमंत्री रहे। वे पहले ऐसे प्रधानमंत्री थे, जो लोकसभा चुनाव नहीं जीते थे और राज्यसभा सदस्य रहते हुए इस पद पर आसीन हुए। उनके कार्यकाल में आर्थिक विकास और सामाजिक योजनाओं पर विशेष जोर दिया गया। निजी जीवन डॉ. मनमोहन सिंह एक सादगीपूर्ण जीवन जीने वाले नेता थे। उनकी पत्नी गुरशरण कौर और तीन बेटियां हैं। वे साहित्य, संगीत और अध्यात्म में गहरी रुचि रखते थे। डॉ. मनमोहन सिंह के निधन की खबर सुनते ही पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई।

लोकसभा चुनाव में महिला मतदाताओं का मतदान % 65.78 रहा जबकि पुरुष मतदाताओं का मतदान प्रतिशत 65.55 था : निर्वाचन आयोग

नई दिल्ली  निर्वाचन आयोग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष की शुरुआत में हुए लोकसभा चुनाव में 64.64 करोड़ मतदाताओं ने मताधिकार का इस्तेमाल किया और इन मतदाताओं में महिलाओं की संख्या पुरुषों से अधिक रही। निर्वाचन आयोग ने कहा कि महिला मतदाताओं का मतदान प्रतिशत 65.78 रहा जबकि पुरुष मतदाताओं का मतदान प्रतिशत 65.55 था। आयोग ने कहा कि इस बार चुनाव लड़ने वाली महिला उम्मीदवारों की संख्या 800 रही जबकि 2019 के चुनावों में यह संख्या 726 थी। निर्वाचन आयोग ने कहा, ‘‘स्वतः संज्ञान लेकर की गई इस पहल का मकसद जनता का विश्वास बढ़ाना है, जो भारत की चुनावी प्रणाली का आधार है।’’ ये आंकड़े इन आरोपों की पृष्ठभूमि में जारी किए गए हैं कि लोकसभा चुनाव के दौरान मतदान के आंकड़ों में हेराफेरी की गई थी। ये आंकड़े चार विधानसभा चुनावों – अरुणाचल प्रदेश, आंध्र प्रदेश, ओडिशा और सिक्किम से भी संबंधित हैं। निर्वाचन आयोग ने बताया कि 2019 में 540 की तुलना में कुल 10.52 लाख मतदान केंद्रों में से 40 मतदान केंद्रों या 0.0038 प्रतिशत केंद्रों पर पुनर्मतदान किया गया। रिपोर्ट के मुताबिक इस चुनाव में महिला मतदाताओं ने अपनी उपस्थिति और भागीदारी से लोकतंत्र को नई ऊंचाई दी, जो महिलाओं के मताधिकार के नए मानक का संकेत है। महिला मतदाताओं का मतदान औसत 65.78 प्रतिशत रहा जबकि पुरुष मतदाताओं का यह औसत 65.55 प्रतिशत था। महिला उम्मीदवारों की संख्या 800 थी जबकि 2019 में यह संख्या 726 थी। 2019 की तुलना में थर्ड-जेंडर मतदाताओं में 46.4 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। 2024 में जहां 90,28,696 पंजीकृत दिव्यांग मतदाता रहे वहीं 2019 में यह संख्या 61,67,482 थी। वर्ष 2019 में 540 मतदान केंद्रों की तुलना में वर्ष 2024 में केवल 40 मतदान केंद्रों पर पुनर्मतदान हुआ। दरअसल, भारत निर्वाचन आयोग ने लोकसभा चुनाव 2024 पर 42 सांख्यिकीय रिपोर्ट और एक साथ कराए गए चार राज्य विधानसभा चुनावों पर 14-14 रिपोर्टें जारी की हैं। आयोग का कहना है कि ये लगभग 100 सांख्यिकीय रिपोर्ट गहन विश्लेषण और नीतिगत अंतर्दृष्टि के लिए दुनिया भर के शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं और चुनाव पर्यवेक्षकों के लिए एक महत्वपूर्ण खजाने की तरह होंगी। आयोग के अनुसार इस रिपोर्ट में उपलब्ध डेटा सेट संसदीय निर्वाचन क्षेत्रों, विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों और राज्यवार मतदाताओं, मतदान केंद्रों की संख्या, राज्य तथा संसदीय निर्वाचन क्षेत्रवार मतदाता मतदान, पार्टी के आधार पर वोट शेयर, लिंग आधारित मतदान व्यवहार, महिला मतदाताओं की राज्यवार भागीदारी, क्षेत्रीय विविधताएं, निर्वाचन क्षेत्र डेटा सारांश रिपोर्ट, राष्ट्रीय पार्टियों, राज्य स्तरीय पार्टियों, पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल (आरयूपीपी) का प्रदर्शन, जीतने वाले उम्मीदवारों का विश्लेषण, निर्वाचन क्षेत्रवार विस्तृत परिणाम और बहुत कुछ का विवरण प्रदान करते हैं। यह विस्तृत डेटा सेट हितधारकों को भारत निर्वाचन आयोग की वेबसाइट पर पहले से उपलब्ध पिछले चुनावों के डेटा सेट से तुलना के साथ बारीक स्तर के विश्लेषण के लिए डेटा को काटने-छांटने का अधिकार देता है। आयोग का कहना है कि ये रिपोर्ट चुनावी और राजनीतिक परिदृश्य में दीर्घकालिक दृष्टिकोण और बदलावों को ट्रैक करने के लिए समय-शृंखला विश्लेषण की सुविधा प्रदान करेगी।    

UGC ने स्टूडेंट्स के लिए साइबर हाइजीन को लेकर गाइडलाइंस जारी की , पब्लिक USB चार्जर घोटाले से सावधान रहें

नई दिल्ली अगर आप भी सार्वजनिक वाई-फाई इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं तो सावधान हो जाएं, क्योंकि इससे आप साइबर फ्रॉड का शिकार हो सकते हैं और आपका बैंक अकाउंट खाली भी हो सकता है. विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने स्टूडेंट्स के लिए साइबर हाइजीन को लेकर गाइडलाइंस जारी की है. ‘Stay Cyber-Safe!’ के माध्यम से यूजीसी ने हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूट्स (HEIs) और स्टूडेंट्स लिए एक हैंडबुक भी जारी की है. हैंडबुक में साइबर फ्रॉड से बचने के लिए क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए की जानकारी दी गई है. पब्लिक USB चार्जर घोटाले से सावधान रहें सार्वजनिक स्थानों पर अपना फ़ोन चार्ज करने से बचें. साइबर अपराधी सार्वजनिक स्थानों जैसे कि हवाई अड्डों, कैफ़े, होटल और बस स्टैंड आदि पर लगे USB चार्जिंग पोर्ट का इस्तेमाल दुर्भावनापूर्ण गतिविधियों के लिए कर सकते हैं. ऐसे USB चार्जिंग स्टेशनों पर अपने इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस को चार्ज करने से आप जूस-जैकिंग साइबर हमले का शिकार हो सकते हैं. जूस जैकिंग की वजह से दुर्भावनापूर्ण ऐप इंस्टॉल हो सकता है, आपके डिवाइस का एन्क्रिप्शन और अपराधी इसे रिस्टोर करने के लिए फिरौती मांग सकते हैं या आपके डिवाइस से डेटा चुरा कर आपसे पैसे ऐंठ सकते हैं. कैसे बचें?     सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशनों या पोर्टेबल वॉल चार्जर पर प्लग करने से पहले दो बार सोचें.     अपने मोबाइल डिवाइस को चार्ज करने के लिए इलेक्ट्रिकल वॉल आउटलेट का इस्तेमाल करें.     अपने साथ अपना खुद का केबल या पावर बैंक ले जाने की कोशिश करें.     सॉफ़्टवेयर सुरक्षा सुविधा का उपयोग करके अपने मोबाइल डिवाइस को लॉक करें, यह सुनिश्चित करते हुए कि यह किसी कनेक्टेड डिवाइस के साथ पेयर न हो सके.     अपने फोन को तब चार्ज करने की कोशिश करें जब वह स्विच ऑफ हो. क्या न करें?     पब्लिक Wi-Fi: पब्लिक वाई-फाई का इस्तेमाल करते समय अपनी पर्सनल या प्रोफेशनल ईमेल आईडी, ऑनलाइन बैंक अकाउंट न खोलें.     पायरेटेड सॉफ़्टवेयर: पायरेटेड सॉफ़्टवेयर का उपयोग करने से बचें, क्योंकि इसमें अक्सर मैलवेयर होता है. वेलिड सोर्स से ही कॉन्टेक्ट करें.     संदिग्ध ईमेल: अनजान सेंडर्स या संदिग्ध ईमेल से अटैचमेंट न खोलें.     सिक्योरिटी सॉफ़्टवेयर: अपने सुरक्षा सॉफ़्टवेयर को डिसेबल न करें.     जोखिम भरी वेबसाइटें: ऐसी वेबसाइट से बचें जो मैलवेयर वितरित करने के लिए जानी जाती हैं जैसे कि अनवेलिड डाउनलोडिंग साइट. क्या करें?     ईमेल सावधानी: ईमेल अटैचमेंट या इमेज खोलते समय बहुत सावधान रहें, खासतौर पर अनजान सेंडर्स से.     रेगुलर बैकअप: साइबर अटैक की स्थिति में रिकवरी के लिए महत्वपूर्ण फ़ाइलों का रेगुलर बैकअप लेते रहें.     विश्वसनीय सॉफ़्टवेयर: एंटी-मैलवेयर/एंटीवायरस सॉफ़्टवेयर केवल ऑथराइज्ड प्रोवाइडर जैसे, प्ले स्टोर, ऐप स्टोर, आधिकारिक वेबसाइट से इंस्टॉल करें.     अपडेट और फ़ायरवॉल: अपने OS और सॉफ़्टवेयर को सुरक्षा पैच के साथ अपडेट रखें. अपने सिस्टम के फायरवॉल को अनेबल करें.     डाउनलोड सिक्योरिटी: केवल विश्वसनीय सोर्स से फाइलें डाउनलोड करें. अनजान सेंडर्स और संदिग्ध लिंक से अटैचमेंट से बचें. दरअसल, हाल के समय में उच्च शिक्षण संस्थान (HEIs) विभिन्न प्रकार के साइबर हमलों के प्रति संवेदनशील रहे हैं. COVID-19 महामारी के दौरान HEI समुदाय को ‘ऑनलाइन’ पर शिफ्ट होना पड़ा, जिसमें कुलपति, शिक्षक, छात्र और सहयोगी स्टाफ शामिल थे. साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूकता की कमी और साइबरस्पेस में भरोसे की कमी के कारण HEIs को ‘ऑनलाइन’ शिक्षा की ओर सुचारू रूप से शिफ्ट होने में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा. इसलिए, साइबर खतरों के बारे में जागरूकता बढ़ाना और स्वस्थ साइबर आदतों का पालन करना HEIs के साइबर सुरक्षा तंत्र (cyber security ecosystem) को मजबूत करने के लिए अनिवार्य है. राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020, जो शिक्षा में डिजिटलाइजेशन को बढ़ावा देती है, शिक्षण में तकनीक के उपयोग की आवश्यकता को पहचानती है और इसके संभावित जोखिमों और खतरों को भी स्वीकार करती है. यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि ऑनलाइन/डिजिटल शिक्षा के लाभों का पूरा लाभ उठाते हुए डिजिटल विभाजन की चिंताओं का समाधान किया जा सके. हमारे हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूट्स को भी अच्छे साइबर स्वच्छता आदतों को विकसित करने और साइबर सुरक्षा के नए सामान्य मानकों को अपनाने की आवश्यकता है. यह शिक्षार्थियों और संगठनों को एक सुरक्षा-केंद्रित दृष्टिकोण और व्यवहार के माध्यम से संभावित साइबर खतरों को कम करने में मदद करेगा.

होटल और रेस्टॉरेंट असोसिएशन ने शराब परोसने के नियम सख्त किए, शराब पीने वाले ग्राहकों के लिए ड्राइवर और ओला-उबर की व्यवस्था होगी

मुंबई नए साल के जश्न के दौरान लोगों को फुल नाइट पार्टी करने की छूट सरकार ने प्रदान कर दी है। 31 दिसंबर की रात फुल नाइट पार्टी के दौरान किसी भी प्रकार का खलल रोकने का प्लान होटल असोसिएशन ने तैयार कर लिया है। जश्न के दौरान लोगों के पैर लड़खड़ाने से पहले असोसिएशन ने ग्राहकों को अलर्ट करने का निर्णय लिया है। इसके लिए होटल असोसिएशन ने ग्राहकों को चार लार्ज पैक देने के बाद ग्राहकों को शराब नहीं पीने की अपील करने का फैसला लिया है, जिससे शराब के नशे में पार्टी के दौरान या पार्टी से घर लौटे वक्त ग्राहकों से कोई गलती न हो जाए। होटल एंड रेस्टॉरेंट असोसिएशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया ( एचआरएडब्ल्यूआई ) के सचिव प्रदीप शेट्टी के मुताबिक, 31 दिसंबर की पार्टी के संदर्भ में लिए गए फैसले की जानकारी सभी सदस्यों को दे दी गई है। ग्राहकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सभी निर्णय लिए गए हैं। चार पैक पीने के बाद ग्राहकों के टल्ली होने पर होटल मालिकों को ग्राहकों को सुरक्षित घर पहुंचाने की व्यवस्था करने को कहा गया है। चेक होगी आईडी नए साल का स्वागत करने के लिए मुंबई के कई होटलों में बड़े कार्यक्रमों का आयोजन किया गया है। इस साल कम उम्र के ग्राहकों को शराब परोसने और होटल से बाहर निकलने के बाद ग्राहक द्वारा एक्सिडेंट करने का मामला सामने आने के बाद असोसिएशन अधिक सतर्क हो गया है। शेट्टी के अनुसार, पार्टी के लिए बार टेंडर को विशेष तौर पर प्रशिक्षित किया गया है। अप्रिय घटना को रोकने के लिए ग्राहकों की आईडी कार्ड की जांच करने के लिए सदस्यों को कहा गया है। विशेषकर के युवाओं के आईडी कार्ड जरूर देने को कहा गया है। किराए पर ड्राइवर एचआरएडब्ल्यूआई के पूर्व अध्यक्ष कमलेश बरोट के अनुसार, पार्टी के दौरान ग्राहकों को शराब परोसने के साथ ही उन पर नजर भी रखी जाएगी। ग्राहकों को सुरक्षित घर पहुंचाने के लिए होटल की तरफ से गाड़ी मालिकों को किराये पर ड्राइव उपलब्ध करवाया जाएगा। वहीं, जिन ग्राहकों के पास गाड़ी नहीं है उन्हें ओला-उबर बुक कर घर भेजा जाएगा। साथ ही लोगों को जागरूक करने के लिए होटल परिसर में डोंट ड्रिंक एंड ड्राइव के पोस्टर लगाए गए हैं। सरकार ने 31 दिसंबर की रात होटल और रेस्टॉरेंट को सुबह 5 बजे तक खुले रखने की अनुमति दी है। हादसों के बाद लेना पड़ा ऐसा फैसला कुछ महीने पहले पुणे में एक होटल में तय उम्र की सीमा से कम आयु के युवा को शराब परोसने का मामला सामने आया था। शराब के नशे में तेज रफ्तार से कार चलाते हुए युवा ने दो लोगों को टक्कर मार दी थी। नामी परिवार से होने और परिवार द्वारा कार चालक को बचाने के प्रयास के कारण यह केस पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया था। 31 दिसंबर की रात बहुत से लोग शराब पीकर जश्न मनाते हैं। इस वजह से असोसिएशन शराब परोसते वक्त आयु की जांच करने के लिए आई कार्ड चेक करने और शराब पी चुके लोगों के लिए किराए का ड्राइवर मुहैया कराने की योजना बनाई है।  

डेढ़ लाख से अधिक ग्रामीण परिवारों को मिलेंगे जमीन के पट्टे, पीएम मोदी करेंगे शिरकत

नई दिल्ली  केन्द्रीय पंचायती राज मंत्रालय की ओर से दस राज्यों और दो केन्द्र शासित प्रदेशों के 50 हजार गांवों में 58 लाख स्वामित्व संपत्ति कार्ड वितरणआज  शुक्रवार को होगा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी कार्ड का ई-तिरण करेंगे। वहीं राजस्थान, मध्यप्रदेश व छत्तीसगढ़ समेत 10 राज्यों के मुख्यमंत्रियों समेत कई केन्द्रीय मंत्री अलग-अलग शहरों में कार्ड वितरण समारोह में शामिल होंगे।  पंचायती राज मंत्रालय ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के सहयोग से गांवों की संपत्तियों का ड्रोन सर्वे व उनके स्वामित्व संपत्ति कार्ड बनाने का कार्यक्रम पिछले चार साल से चला रखा है। इसके तहत अब तक 31 राज्यों के 3 लाख 17 हजार से अधिक गांवों में करीब 2.19 करोड़ स्वामित्व संपत्ति कार्ड बन चुके हैं। इसके तहत शुक्रवार को देश भर में लगभग 20 हजार स्थानों पर अभिविन्यास कार्यक्रम आयोजित कर कार्ड वितरित किए जाएंगे। मोदी के साथ केंद्रीय पंचायती राज मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह, केंद्रीय पंचायतीराज राज्य मंत्री प्रो. एसपी सिंह बघेल और पंचायती राज मंत्रालय के सचिव विवेक भारद्वाज मौजूद रहेंगे। समारोह में प्रदेशो के मुख्यमंत्री, केंद्रीय मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी, पंचायत प्रतिनिधि और हितधारक भी वर्चुअल रूप से शामिल होंगे। 6 केन्द्रीय मंत्री कल राजस्थान में रहेंगे केन्द्र सरकार की ओर से 13 केन्द्रीय मंत्रियों को राज्यों में जाकर इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए भेजा जा रहा है। इनमें से 6 मंत्री राजस्थान के शहरों में रहेंगे। इनमें केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी.नड्डा जयपुर, कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान जोधपुर, वन व पर्यावरण मंत्री भूपेन्द्र यादव अलवर, महिला बाल विकास मंत्री अनपूर्णा देवी कोटा, कानून मंत्री अर्जुनराम मेघवाल बीकानेर, कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी अजमेर में रहकर इस कार्यक्रम में शामिल होंगे। जबकि संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ग्वालियर में इस कार्यक्रम में शामिल होंगे। मुख्यमंत्री भी शामिल होंगे राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा जयपुर, मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव सियोनी और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री धामतारी में होने वाले इस कार्यक्रम में शामिल होंगे। कहां कितने कार्ड तैयार प्रदेश     गांवों की संख्या     कार्ड संख्या (लाखों में) मध्यप्रदेश     43014                 32.53 राजस्थान          36312                7.18 छत्तीसगढ़     15791              1.84   राजस्थान के 1.50 लाख से अधिक ग्रामीण परिवारों को स्वामित्व योजना के तहत जमीन के पट्टे दिए जाएंगे। 27 दिसंबर को राज्य के सभी 33 जिला मुख्यालयों पर संपत्ति कार्ड का वितरण किया जाएगा। इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वर्चुअली शामिल होकर लाभार्थियों को संबोधित करेंगे। इस अवसर पर प्रत्येक जिले में जिला स्तरीय आयोजन किया जाएगा, जहां लाभार्थियों को बुलाकर उनके नाम संपत्ति कार्ड सौंपे जाएंगे। जानकारी के अनुसार, राजस्थान की 3526 ग्राम पंचायतों के अंतर्गत आने वाले 7522 गांवों के निवासियों को ये पट्टे वितरित किए जाएंगे। 27 दिसंबर को केंद्र सरकार की पहल पर देशभर की 29,127 ग्राम पंचायतों के 46,251 गांवों में कुल 58 लाख संपत्ति कार्ड वितरित किए जाएंगे। इनमें से राजस्थान के 1,50,778 लाभार्थियों को भी संपत्ति कार्ड मिलेंगे। राजस्थान में यह कार्यक्रम मुख्य रूप से 33 जिला मुख्यालयों पर आयोजित होगा। हालांकि, अशोक गहलोत सरकार के कार्यकाल में बने नए जिलों की समीक्षा प्रक्रिया अभी जारी है। स्वामित्व योजना की शुरुआत केंद्र सरकार ने 24 अप्रैल 2020 को की थी। इस योजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में जमीन का सीमांकन ड्रोन सर्वेक्षण तकनीक से करना है। इसके तहत ग्रामीण परिवारों को उनके अधिकारों का रिकॉर्ड (संपत्ति कार्ड) प्रदान किया जाता है। इन कार्ड्स का उपयोग ग्रामीण परिवार बैंक से ऋण लेने और अन्य वित्तीय जरूरतों को पूरा करने के लिए कर सकते हैं। इससे उनकी संपत्ति को वित्तीय संपत्ति के रूप में मान्यता मिलेगी। अब तक इस योजना के तहत देशभर में 1.37 करोड़ संपत्ति कार्ड जारी किए जा चुके हैं।

चीन का ऐलान तिब्‍बत की सबसे लंबी नदी यारलुंग त्‍सांगपो पर बांध बनाएगा, थ्री जॉर्ज बांध से 3 गुना ज्‍यादा बिजली पैदा होगी

बीजिंग  चीन की सरकार ने ऐलान किया है कि वह तिब्‍बत की सबसे लंबी नदी यारलुंग त्‍सांगपो पर महाशक्तिशाली बांध बनाने जा रही है। इस बांध से चीन के धरती की स्‍पीड को प्रभावित करने वाले थ्री जॉर्ज बांध से 3 गुना ज्‍यादा बिजली पैदा होगी। चीन की सरकारी न्‍यूज एजेंसी शिन्‍हुआ ने बुधवार को इसकी जानकारी दी है। चीनी मीडिया का कहना है कि यह बीजिंग के लिए इंजीनियरिंग की बहुत बड़ी चुनौती बनने जा रहा है। चीन की सरकार इस बांध को बनाने के लिए 137 अरब डॉलर खर्च करने जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह चीनी बांध धरती पर चल रहे सिंगल इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर के किसी भी प्राजेक्‍ट को बहुत पीछे कर देगा। चीन जिसे यारलुंग त्‍सांगपो नदी कहता है, उसे भारत में ब्रह्मपुत्र नदी कहा जाता है। कई विशेषज्ञों का कहना है कि चीन इस दैत्‍याकार बांध का हथियार की तरह से इस्‍तेमाल करके भारत के पूर्वोत्‍तर राज्‍यों में कभी भी बाढ़ ला सकता है। करीब 2900 क‍िमी लंबी ब्रह्मपुत्र नदी भारत में आने से पहले तिबब्‍त के पठार से होकर गुजरती है। यह नदी तिब्‍बत में धरती की सबसे गहरी खाई बनाती है। तिब्‍बती बौद्ध भिक्षु इसे बहुत पवित्र मानते हैं। चीन इस बांध को भारत की सीमा करीब अपने भयंकर बारिश वाले इलाके में बनाने जा रहा है। चीन का अनुमान है कि इस बांध से 300 अरब किलोवाट घंटे बिजली हर साल मिलेगी। वहीं अभी बिजली पैदा करने के मामले में दुनिया का सबसे बड़ा बांध कहे जाने वाला चीन थ्री जॉर्ज हर साल 88.2 अरब किलोवाट घंटे बिजली पैदा करता है। चीन के हुबई प्रांत में स्थित थ्री जॉर्ज बांध यांगजी नदी पर बनाया गया है। धरती की स्‍पीड को प्रभावित कर रहा चीन का बांध थ्री जॉर्ज बांध में 40 अरब क्‍यूबिक मीटर पानी है और यह धरती की घूमने की रफ्तार को भी प्रभावित कर रहा है। इसकी वजह से धरती की घूमने की गति में हर दिन 0.06 माइक्रोसेकंड बढ़ रहा है। इससे दुनियाभर के वैज्ञानिक काफी चिंत‍ित हैं। इस बांध को सबसे पहले साल 1919 में चीन के पहले राष्‍ट्रपति सुन यात सेन ने बनाने का प्रस्‍ताव दिया था। उन्‍होंने कहा था कि इससे जहां बाढ़ में कमी आएगी, वहीं दुनिया के सामने यह चीन के ताकत का प्रतीक बनेगा। चीन अब तिब्‍बत में ब्रह्मपुत्र नदी पर नया विशालकाय बांध बनाने जा रहा है। चीन का इरादा है कि इस बेहद जटिल इंजीनियरिंग प्राजेक्‍ट को पूरा करने के लिए चार से लेकर छह तक 30 किमी लंबी सुरंग बनानी होगी। चीन को यह सुरंग नामचा बरवा पहाड़ के अंदर बनानी होगी ताकि महाशक्तिशाली ब्रह्मपुत्र नदी के आधे पानी को डायवर्ट किया जा सके। यही नहीं जिस जगह पर यह बांध बनाया जाना है, वहां भूकंप आने का काफी खतरा रहता है। चीन का यह बांध जब पूरा हो जाएगा तो इससे 30 करोड़ लोगों को आसानी से हर साल बिजली दी जा सकेगी। चीन का दावा है कि इस बांध को बनाने के लिए पर्यावरण के मानकों का पूरा ध्‍यान रखा जाएगा। भारत और बांग्‍लादेश दोनों को चीन के बांध से खतरा चीन ने यह नहीं बताया है कि तिब्बत में इस बांध को बनाने का काम कब शुरू होगा और ठीक-ठीक किस जगह पर इसे बनाया जाएगा। चीन इस ऐलान से भारत के लिए बड़ा खतरा पैदा हा सकता है। यह न केवल सुरक्षा के लिहाज से बल्कि पर्यावरण और आजीव‍िका के लिए है। ब्रह्मपुत्र नदी के पानी पर भारत और बांग्‍लादेश में करोड़ों लोग जीवन बिताते हैं। बांग्‍लादेश में इसे सूरमा नदी कहा जाता है। चीन अगर पानी रोकता है तो इन दोनों देशों में सूखा आ सकता है और अगर अचानक से पानी छोड़ता है तो बाढ़ आ सकती है।

सुनामी की 20वीं बरसी पर एक शांति रैली और स्मारक सेवा का हुआ आयोजन, निकाली गई ‘शांति रैली’

चेन्नई चेन्नई के रोयापुरम कासिमेदु इलाके में साल 2004 की सुनामी की 20वीं बरसी पर एक शांति रैली और स्मारक सेवा का आयोजन किया गया। शांति रैली में कई लोग शामिल हुए। कार्यक्रम का आयोजन अन्नाद्रमुक के उत्तरी चेन्नई पूर्वोत्तर जिले द्वारा किया गया था। कार्यक्रम की शुरुआत एक मौन जुलूस से हुई, जिसके बाद एक स्मारक सेवा आयोजित की गई। इसमें मृतकों को श्रद्धांजलि देने के लिए फूल चढ़ाए गए और समुद्र में दूध भी डाला गया। इसके साथ ही, गरीबों और जरूरतमंदों को भोजन वितरित किया गया। इस कार्यक्रम में 500 से अधिक लोग शामिल हुए। हालांकि, कार्यक्रम के दौरान एक महिला पुलिसकर्मी, कलैवानी, अचानक बेहोश हो गईं। अन्नाद्रमुक के जिला सचिव आर.एस. राजेश और महिला विंग के सदस्यों ने उन्हें तुरंत अस्पताल भेजा। इससे थोड़ी देर के लिए कार्यक्रम में हंगामा भी हुआ। आज से 20 साल पहले 26 दिसंबर 2004 को सुनामी ने चेन्नई के समुद्र तटों पर तबाही मचाकर लोगों की हंसती खेलती जिंदगी तबाह कर दी थी। इस आपदा में लाखों लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी। इस भयावह हादसे के दो दशक बीत जाने के बाद भी लोग उस दर्द से नहीं उबर पाए हैं। लेकिन, इस बीच कुछ ऐसे लोग भी रहे, जिन्होंने इस हादसे से उबरकर नई जिंदगी का आगाज किया। बताया जाता है कि सुनामी ने छह जिलों में तबाही मचाई थी। इसमें कांचीपुरम, विल्लुपुरम, कुड्डालोर, नागपट्टिनम, कन्याकुमारी और थूथुकुड शामिल हैं। इसमें 50 नगर पंचायतों को बड़ा नुकसान पहुंचा था। आपदा के बाद लोगों को अपनी नई जिंदगी शुरू करने के लिए सरकार और प्रशासन ने अपनी तरफ से पूरी मदद की थी। कुल मिलाकर, इस सुनामी में लगभग 1,90,000 लोगों की मौत की पुष्टि हुई थी, जबकि 40-45 हजार लोग लापता हो गए थे। माना जाता है कि वे मर चुके हैं।

मौजूदा सरकार में महात्मा गांधी की विरासत को खतरा है, ये संगठन कभी आजादी के लिए नहीं लड़े, पुरजोर विरोध किया

नई दिल्ली कर्नाटक के बेलगावी में कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक हो रही है. पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल गांधी समेत पार्टी के तमाम नेता इसमें शामिल होने के लिए पहुंच चुके हैं. पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी इसमें शामिल नहीं हो सकी हैं. उन्होंने कांग्रेस वर्किंग कमेटी को लेटर लिखा है. इसमें कहा, मौजूदा सरकार में महात्मा गांधी की विरासत को खतरा है. ये संगठन कभी आजादी के लिए नहीं लड़े, बल्कि महात्मा गांधी का पुरजोर विरोध किया. इन संगठनों ने ऐसा जहरीला माहौल तैयार किया, जिसने महात्मा गांधी की हत्या का रास्ता साफ किया. ये लोग महात्मा गांधी के हत्यारों को गौरवान्वित करते हैं. सोनिया गांधी ने कहा, देश में अलग-अलग स्थानों पर पर गांधीवादी संस्थाओं पर हमले हो रहे हैं. इसलिए ये जरूरी है कि इस बैठक को नव सत्याग्रह बैठक कहा जाए. अब हमारा ये कर्तव्य है कि हम इन ताकतों का पूरी ताकत और दृढ़ संकल्प के साथ मुकाबला करने के अपने संकल्प को दोहराएं. हमारे संगठन को और अधिक मजबूत बनाने का मुद्दा भी आज उठेगा. सोनिया गांधी ने कहा, यह हमारे देश के इतिहास में एक परिवर्तनकारी मील का पत्थर था. आज हम महात्मा गांधी की विरासत को संरक्षित, सुरक्षित और बढ़ावा देने के लिए खुद को फिर से समर्पित करते हैं. वो हमारी प्रेरणा का मूल स्रोत रहे हैं और रहेंगे. उन्होंने ही उस पीढ़ी के हमारे सभी उल्लेखनीय नेताओं को गढ़ा और उनका मार्गदर्शन किया. उन्होंने कहा, उनकी विरासत नई दिल्ली में सत्ता में बैठे लोगों और उन्हें पोषित करने वाली विचारधाराओं और संस्थानों से खतरे में है. इन संगठनों ने कभी हमारी आजादी के लिए लड़ाई नहीं लड़ी. उन्होंने महात्मा गांधी का विरोध किया. उन्होंने एक जहरीला माहौल बनाया, जिसके कारण उनकी हत्या हुई. वो उनके हत्यारों का महिमामंडन करते हैं.

सचिन पायलट ने कहा- सीडब्ल्यूसी बैठक का महत्व आगामी महीनों और वर्षों के लिए कांग्रेस की दिशा और एजेंडा तय करने में होगा

बेलगावी कांग्रेस कार्यसमिति की आगामी बैठक (सीडब्ल्यूसी) से पहले, पार्टी के वरिष्ठ नेता सचिन पायलट ने गुरुवार को बेलगावी हवाई अड्डे पर संवाद करते हुए कहा कि इस बैठक का महत्व आगामी महीनों और वर्षों के लिए कांग्रेस की दिशा और एजेंडा तय करने में होगा। उन्होंने यह भी बताया कि कांग्रेस सरकार की योजनाओं का क्रियान्वयन अच्छा है, लेकिन इस बैठक में पार्टी के भविष्य की रणनीतियों पर विचार होगा। पायलट ने कहा, “यह शताब्दी विशेष है और हम इस बैठक में चर्चा करेंगे कि पार्टी कैसे आगे बढ़ेगी और अपने विरोधियों से कैसे निपटेगी।” कार्यसमिति की बैठक में कई ऐतिहासिक मुद्दों पर विचार-विमर्श होगा। पायलट ने कांग्रेस और भारतीय गठबंधन की मजबूती को भी रेखांकित किया, और कहा कि कांग्रेस नेतृत्व इस बारे में दिशा-निर्देश देगा कि अगले कदम क्या होंगे। इस बैठक में हिस्सा लेने आए कांग्रेस के अन्य नेताओं ने भी विचार साझा किए। सलमान खुर्शीद ने कहा, “यह ऐतिहासिक है, 100 साल पहले यहां इतिहास रचा गया था। हमें देश को सही दिशा में ले जाने और संविधान के लिए लड़ने की आवश्यकता है।” वहीं, सौम्या रेड्डी ने महिला कांग्रेस के योगदान पर जोर देते हुए कहा कि कांग्रेस ने हमेशा महिलाओं को प्राथमिकता दी है और ग्राम पंचायत स्तर पर आरक्षण देने जैसे कदम उठाए हैं। कांग्रेस पार्टी महात्मा गांधी की अध्यक्षता में 1924 के अधिवेशन की शताब्दी मना रही है और इस बैठक को ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण मान रही है।

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