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पार्टी ने दावा किया है कि जुलाई से अब तक उसके 400 लोगों का कत्ल बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के दौर में हुआ

ढाका बांग्लादेश में पूर्व पीएम शेख हसीना को इस साल 5 अगस्त को देश छोड़कर ही भागना पड़ा था। वहां छात्र आंदोलन की आड़ में कट्टरपंथियों ने उनका तख्तापलट कर दिया था और इस दौरान भीषण हिंसा हुई थी। यही नहीं अब भी रुक-रुक कर ही सही, लेकिन राजनीतिक कार्य़कर्ताओं पर हमलों की खबरें आती रहती हैं। इस बीच शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग का दावा है कि उसके 400 कार्यकर्ता मारे गए हैं। पार्टी ने दावा किया है कि इस साल जुलाई से अब तक उसके 400 लोगों का कत्ल कट्टरपंथियों के नेतृत्व वाली बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के दौर में हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार इन लोगों को जमात-ए-इस्लामी और अन्य कट्टरपंथी संगठनों के लोगों ने मारा है। अवामी लीग के सदस्यों का कहना है कि उनके ज्यादातर लोगों की हत्याएं जमात-ए-इस्लामी के लोगों ने ही कराई थीं। अवामी लीग का कहना है कि जमात-ए-इस्लामी के स्टूडेंट विंग छात्र शिबिर ने इन हत्याओं को अंजाम दिया है, जो ऐसी घटनाओं के लिए कुख्यात रहा है। शेख हसीना की पार्टी ने हाल ही में एक लिस्ट भी जारी की है, जिसमें 394 लोगों के नाम बताए गए हैं। अवामी लीग का कहना है कि इन लोगों की जुलाई से अब तक कत्ल किया गया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि यह तो शुरुआती आंकड़ा ही है। कुछ दिनों में एक और लिस्ट जारी करेंगे, जिसमें संख्या बढ़ भी सकती है। बता दें कि शेख हसीना फिलहाल भारत में ही हैं। यही से उन्होंने अवामी लीग के एक कार्यक्रम को ऑनलाइन ही संबोधित किया था, जिसका आयोजन अमेरिका में हुआ था। शेख हसीना ने इस दौरान बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के मुखिया मोहम्मद यूनुस पर हिंदुओं और ईसाइयों के कत्ल का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा था कि मोहम्मद यूनुस ही इन हत्याओं के मास्टरमाइंड हैं। बता दें कि बांग्लादेश में अब तक हालात सामान्य नहीं हैं। हिंदुओं के खिलाफ हिंसा को लेकर मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार घिरी हुई है। इस्कॉन के संत चिन्मय कृष्ण दास फिलहाल देशद्रोह के आरोप में जेल में हैं। इसे लेकर भारत समेत दुनिया भर के हिंदुओं में गुस्सा है। भारत की संसद में भी बांग्लादेश में हिंदुओं के हालात पर चिंता जताई जा चुकी है। यही नहीं भारतीय विदेश सचिव भी बीते दिनों बांग्लादेश में थे और इस दौरान भी उन्होंने हिंदुओं के खिलाफ हिंसा का मसला उठाया था। अवामी लीग के स्टूडेंट विंग छात्र शिबिर को शेख हसीना सरकार में आतंकी संगठन घोषित किया गया था। उसके कई सदस्यों को जेल भी भेजा गया था। सूत्रों का कहना है कि अवामी लीग के खिलाफ हिंसा का दौर आगे भी जारी रहेगा। अगले साल के अंत में या फिर 2026 की शुरुआत में आम चुनाव की बात कही जा रही है। ऐसे में अवामी लीग को राजनीतिक रूप से कमजोर करने के लिए भी हिंसा का सहारा लिया जा सकता है।

कोंधवा में 9 साल के एक बच्चे को 3 साल की बच्ची के साथ यौन हिंसा के आरोप में हिरासत में लिया, जांच जारी

पुणे पुणे में एक बेहद हैरान करने वाला मामला सामने आया है। खबर है कि यहां एक महज 9 साल के बच्चे ने मासूम बच्ची का कथित तौर पर यौन शोषण किया। फिलहाल, इस मामले की पुलिस जांच कर रही है। साथ ही POCSO एक्ट के तहत यौन हिंसा का मामला दर्ज कर लिया गया है। पीड़ित बच्ची की मां ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। रिपोर्ट्स के अनुसार, कोंधवा में 9 साल के एक बच्चे को 3 साल की बच्ची के साथ यौन हिंसा के आरोप में हिरासत में लिया गया है। खबर है कि बच्चे को जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड के सामने पेश किया गया था, जहां उसे जमानत दे दी गई और माता-पिता को सौंप दिया गया। कहा जा रहा है कि बच्चे ने सोशल मीडिया के प्रभाव में आकर ऐसा कदम उठाया था। पुलिस ने बताया है कि बच्चों के परिवार पड़ोस में रहने के चलते एक-दूसरे को जानते हैं। आरोपी बच्चा कक्षा 3 का छात्र है और बच्ची उसे दादा कहकर बुलाती थी। घटना बच्ची के घर पर हुई है। इसका खुलासा तब हुआ, जब पीड़िता ने अपनी मां को घटना की जानकारी दी। इसके बाद मां ने पुलिस को खबर की थी। टीचर ने छात्र को गलत तरीके से छुआ पुणे शहर के अंग्रेजी माध्यम के एक निजी स्कूल के पुरुष नृत्य शिक्षक को 11 वर्षीय छात्र से छेड़छाड़ करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया। पीटीआई भाषा से बातचीत में एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया, ‘सोमवार को आरोपी शिक्षक ने 11 वर्षीय छात्र को गलत तरीके से छुआ। इसके बाद छात्र ने स्कूल काउंसलर से संपर्क किया, जिन्होंने स्कूल प्रिंसिपल को इसकी जानकारी दी। इसके बाद छात्र के माता-पिता और पुलिस को इसकी सूचना दी गई।’

रूस-यूक्रेन के बीच चल रही जंग अब एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर, रूस यूक्रेन के खिलाफ बड़ा कदम उठा ……

 मॉस्को रूस-यूक्रेन के बीच लंबे समय से चल रही जंग अब एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर आ गई है. रूसी सेना के न्यूक्लियर डिपार्टमेंट के चीफ इगोर किरिलोव की मंगलवार को मॉस्को में हुई हत्या के बाद तनाव बढ़ गया है. रूस ने साफ किया है कि वह इसका बदला लेगा. हाई लेवल मीटिंग का दौर जारी है. माना जा रहा है कि रूस यूक्रेन के खिलाफ कोई बड़ा कदम उठा सकता है. कब और कैसे हुआ हमला… इगोर किरिलोव की मंगलवार को मॉस्को में उनके अपार्टमेंट के बाहर स्कूटर ब्लास्ट में मौत हो गई थी. इस धमाके में उनके सहायोगी की भी जान चली गई थी. रूस की जांच समिति ने बताया कि जब इगोर किरिलोव सुबह-सुबह अपने घर की बिल्डिंग से बाहर निकल रहे थे, तभी वहां खड़े एक स्कूटर में जोरदार विस्फोट हो गया. इगोर किरिलोव इसके चपेट में आ गए और उनकी मौत हो गई. किस इलाके में हुआ हमला यह घटना मॉस्को के Ryazansky Prospekt इलाके में हुई, जो क्रेमलिन से करीब सात किलोमीटर दूर है. धमाका इतना जबरदस्त था कि बिल्डिंग की कई खिड़कियां टूट गईं और मुख्य दरवाजा पूरी तरह से तहस-नहस हो गया. यूक्रेन ने ली जिम्मेदारी यूक्रेन की SBU Security Service ने इस हमले की जिम्मेदारी ली है. SBU के सूत्रों के अनुसार, किरिलोव की हत्या एक ‘स्पेशल ऑपरेशन’ का हिस्सा थी. SBU के एक अधिकारी ने कहा, ‘इगोर किरिलोव एक युद्ध अपराधी थे और पूरी तरह वैध टारगेट थे क्योंकि उन्होंने यूक्रेन के खिलाफ प्रतिबंधित केमिकल हथियारों का इस्तेमाल करने का आदेश दिया था.’ यूक्रेन ने हमले पर क्या कहा यूक्रेन के अधिकारियों ने कहा, ‘इगोर किरिलोव एक युद्ध अपराधी थे और पूरी तरह वैध टारगेट थे क्योंकि उन्होंने यूक्रेन के खिलाफ प्रतिबंधित केमिकल हथियारों का इस्तेमाल करने का आदेश दिया था.’ कितना खतरनाक था विस्फोटक रूसी जांचकर्ताओं के मुताबिक इस धमाके में इस्तेमाल किए गए विस्फोटक की क्षमता करीब 200 ग्राम TNT के बराबर थी. सूत्रों का कहना है कि स्कूटर में विस्फोटक सामग्री को रात के करीब 4 बजे बिल्डिंग के बाहर खड़ा किया गया था. Baza Telegram Channel की रिपोर्ट के अनुसार, यह संभावना है कि बिल्डिंग के आसपास के लोगों की निगरानी के लिए सामने की गली में एक अपार्टमेंट किराए पर लिया गया था. इसके अलावा बिल्डिंग के सीसीटीवी कैमरे को हैक करके भी हमलावरों ने निगरानी की हो सकती है. कौन थे इगोर किरिलोव 54 वर्षीय लेफ्टिनेंट जनरल इगोर किरिलोव 2017 से रूसी सेना के रेडियोलॉजिकल, केमिकल और बायोलॉजिकल डिफेंस फोर्स का नेतृत्व कर रहे थे. हाल ही में ब्रिटेन ने उन पर और उनकी यूनिट पर यूक्रेन में कथित केमिकल हथियारों के इस्तेमाल को लेकर बैन लगाया था. उन्हें ‘रूसी प्रोपेगैंडा का बड़ा चेहरा’ भी कहा गया. किरिलोव ने कई बार यूक्रेन पर रासायनिक हथियारों के इस्तेमाल का आरोप लगाया था.  

‘चिकित्सा पेशे में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी, भारत बन रहा है एक विकसित समाज’

अमरावती राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि चिकित्सा पेशे में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी और उनका महत्वपूर्ण योगदान दर्शाता है कि भारत वास्तव में एक विकसित समाज बन रहा है. मुर्मू ने यहां मंगलागिरी में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के प्रथम दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि समग्र स्वास्थ्य को निरंतर बढ़ावा देना तथा सभी के लिए स्वास्थ्य सुनिश्चित करना इस संस्थान के प्रत्येक चिकित्सा पेशेवर का मार्गदर्शक सिद्धांत होना चाहिए. राष्ट्रपति ने कहा, ‘‘चिकित्सा पेशे में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी और उनका महत्वपूर्ण योगदान यह दर्शाता है कि हम वास्तव में एक विकसित समाज बन रहे हैं. इससे यह तथ्य भी उजागर होता है कि अवसर मिलने पर हमारी बेटियां हर क्षेत्र में उत्कृष्टता हासिल करती हैं.’’ उन्होंने कहा कि सरकार ने आयुष्मान भारत स्वास्थ्य बीमा योजना सहित कई योजनाएं शुरू की हैं और उपचार में कठिनाइयों का सामना करने वालों के लिए इलाज सुलभ बनाया है. मुर्मू ने इस बात पर जोर दिया कि सरकार के साथ-साथ जागरूक समाज की भी यह जिम्मेदारी है कि वह सुनिश्चित करे कि कोई भी व्यक्ति वित्तीय या अन्य कारणों से चिकित्सा सेवाओं से वंचित न रहे. राष्ट्रपति ने कहा कि भारतीय चिकित्सक अपनी प्रतिभा और कड़ी मेहनत के दम पर विकसित देशों में अग्रणी स्थान पर हैं. उन्होंने कहा कि दूसरे देशों से लोग स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ उठाने के लिए भारत आते हैं. उन्होंने कहा कि भारत विश्व मानचित्र पर किफायती चिकित्सा पर्यटन के एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में विकसित हो रहा है. उन्होंने कहा कि देश के चिकित्सक इस संबंध में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. उन्होंने युवा चिकित्सकों से ग्रामीण, आदिवासी और दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को चिकित्सा देखभाल और सेवाएं प्रदान करने को प्राथमिकता देने का आह्वान किया. उन्होंने कहा कि समग्र स्वास्थ्य देखभाल के संदर्भ में योगासन और प्राणायाम को आधुनिक दृष्टिकोण से भी स्वीकार किया गया है. इस अवसर पर आंध्र प्रदेश के राज्यपाल एस. अब्दुल नजीर, मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू, केंद्रीय आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) प्रतापराव जाधव, आंध्र प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री सत्य कुमार यादव और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे. एम्स-मंगलागिरि की आधारशिला 2015 में रखी गई थी और एमबीबीएस छात्रों के पहले बैच को 30 अगस्त, 2018 को शामिल किया गया था, जो आज उत्तीर्ण हुए.

अब रूस जाने के लिए नहीं पड़ेगी वीजा की जरूरत, पुतिन जल्द करेंगे घोषणा

नई दिल्ली भारतीय पर्यटकों के लिए एक अच्छी खबर है. भारत के लोग जल्द ही बिना वीजा के रूस घूम सकते हैं. भारत और रूस के बीच 2025 में इसे लेकर एक सिस्टम विकसित होने की संभावना है. अब कुछ ही समय बाद भारतीयों को रूस जाने के लिए टूरिस्ट वीजा की आवश्यकता नहीं होगी. इससे पहले रूस ने भारतीयों के लिए अगस्त 2023 से ई-वीजा की शुरुआत की थी जिसकी प्रक्रिया पूरे होने में लगभग 4 दिन लगते हैं. हालांकि, अब नई वीजा-फ्री व्यवस्था से भारतीयों के लिए रूस की यात्रा और भी सरल हो जाएगी. रिपोर्ट के अनुसार, पिछले साल रूस ने जितने ई-वीजा जारी किए, उसमें भारत टॉप पांच देशों में शामिल था. रूस ने भारतीयों को 9,500 ई-वीजा दिए. बिना वीजा के रूस जा सकेंगे भारतीय रूस और भारत के बीच द्विपक्षीय समझौते के तहत ग्रुप टूरिस्ट एक्सचेंज के लिए वीजा नियमों को आसान बनाने की प्रक्रिया जून 2023 में शुरू हुई थी. रूस के आर्थिक विकास मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी, निकिता कोंद्रात्येव ने कहा, “भारत इस समझौते को अंतिम रूप देने के अंतिम चरण में है.” माना जा रहा है कि यह समझौता साल के अंत तक पूरा हो जाएगा, जिसके बाद भारतीय नागरिक बिना वीजा के रूस की यात्रा कर सकेंगे. रूस में भारतीय यात्रियों की बढ़ती संख्या हाल के वर्षों में रूस जाने वाले भारतीय यात्रियों की संख्या में लगातार वृद्धि देखी गई है. 2023 में, रूस ने भारतीय यात्रियों को 9,500 ई-वीजा जारी किए, जो कुल ई-वीजा का 6% था. 2024 की पहली छमाही में, 28,500 भारतीय यात्रियों ने मॉस्को का दौरा किया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 1.5 गुना अधिक है. 2023 में, 60,000 से अधिक भारतीयों ने रूस की यात्रा की, जो 2022 की तुलना में 26% अधिक है. मॉस्को सिटी टूरिज्म कमेटी के चेयरमैन, एवगेनी कोज़लोव ने बताया, “2023 की पहली तिमाही में, भारत गैर-CIS देशों के व्यापार पर्यटकों में तीसरे स्थान पर था.” मॉस्को के अधिकारियों का मानना है कि भारत रूस के लिए एक प्राथमिक बाजार है, क्योंकि दोनों देशों के बीच मजबूत और ऐतिहासिक संबंध हैं. रूस और भारत के बीच गहरी ऐतिहासिक और कूटनीतिक मित्रता रही है. नई वीजा-फ्री नीति से न केवल पर्यटन बल्कि व्यापारिक संबंधों को भी बल मिलेगा. 58 देशों में भारतीयों की वीजा फ्री एंट्री वर्तमान में भारतीय पासपोर्टधारियों को 58 देशों में वीजा फ्री एंट्री का अधिकार हासिल है. हेनले पासपोर्ट इंडेक्स 2024 में भारत का पासपोर्ट 83वें स्थान पर है जिसकी मदद से भारतीय थाईलैंड, इंडोनेशिया, मालदीव, श्रीलंका , मोरिशियस और कतर जैसे ट्रैवल डेस्टिनेशन्स पर बिना वीजा के यात्रा कर सकते हैं.

2024 का साल खास तौर पर लोकसभा चुनाव, विपक्षी एकजुटता, राज्यों में राजनीतिक बदलाव भरा रहा

नई दिल्ली 2024 का साल भारतीय राजनीति में महत्वपूर्ण बदलावों और घटनाओं से भरा रहा। यह साल खास तौर पर लोकसभा चुनाव, विपक्षी एकजुटता, राज्यों में राजनीतिक बदलाव और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार के लिए चुनौतियों का साल रहा। आइए, 2024 के राजनीतिक घटनाक्रम पर एक नजर डालते हैं। 1. लोकसभा चुनाव 2024: मोदी की तीसरी बार वापसी 2024 में भारत में हुए लोकसभा चुनाव ने भारतीय राजनीति में एक बार फिर से बीजेपी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सत्ता में लौटाया। बीजेपी ने अपने चुनावी प्रचार में विकास, सुरक्षा और कड़े प्रशासनिक उपायों को प्रमुख मुद्दा बनाया। नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता और उनके नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने तीसरी बार शानदार जीत दर्ज की, लेकिन इस बार मुकाबला पहले से कहीं कठिन था। विपक्षी गठबंधन ने बीजेपी के खिलाफ एकजुट होकर चुनाव लड़ा। इस गठबंधन में कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, शिवसेना, समाजवादी पार्टी, और अन्य क्षेत्रीय दल शामिल थे। हालांकि, बीजेपी ने बहुमत से सत्ता में वापसी की, लेकिन कुछ राज्यों में विपक्ष ने अच्छा प्रदर्शन किया। खासकर दक्षिण भारत, पश्चिम बंगाल, और उत्तर-पूर्वी राज्यों में बीजेपी को कड़ी टक्कर मिली। इसने दिखा दिया कि भारतीय राजनीति में अब क्षेत्रीय दलों की ताकत लगातार बढ़ रही है और भविष्य में ये दल राष्ट्रीय राजनीति में अहम भूमिका निभा सकते हैं। 2. विपक्ष का एकजुट होना 2024 का साल विपक्ष के लिए अहम था, क्योंकि विभिन्न विपक्षी दलों ने मिलकर बीजेपी के खिलाफ मोर्चा खोला। ‘INDIA’ गठबंधन के तहत कांग्रेस और अन्य क्षेत्रीय दलों ने बीजेपी के खिलाफ एकजुट होकर चुनाव लड़ा। हालांकि, यह गठबंधन अपनी पूरी ताकत के साथ चुनाव में सफलता हासिल नहीं कर सका, लेकिन यह विपक्ष के लिए एक नया रास्ता दिखाने का काम किया। इस गठबंधन का मुख्य उद्देश्य बीजेपी को रोकना था, लेकिन कई राज्यों में विपक्ष के बीच आंतरिक मतभेद और नेतृत्व को लेकर समस्याएं सामने आईं। इसके बावजूद, विपक्ष का एकजुट होना यह दर्शाता है कि भविष्य में बीजेपी को चुनौती देने के लिए विपक्षी दलों को एक साथ आना होगा। 3. राज्य चुनावों में बदलाव 2024 में कई राज्यों में विधानसभा चुनाव हुए, जिनमें बीजेपी और विपक्ष दोनों के लिए बड़े बदलाव देखने को मिले। राजस्थान, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, और तेलंगाना में कांग्रेस ने शानदार प्रदर्शन किया और बीजेपी को कड़ी टक्कर दी। राजस्थान और छत्तीसगढ़ में कांग्रेस ने सत्ता बरकरार रखी, जबकि मध्यप्रदेश और तेलंगाना में बीजेपी को अपनी ताकत साबित करनी पड़ी। इन चुनावों में क्षेत्रीय दलों की भूमिका भी अहम रही, जैसे कि तेलंगाना में केसीआर (कांग्रेस नेता) और बंगाल में ममता बनर्जी ने अपनी पकड़ मजबूत बनाई। इन चुनावों ने यह साबित किया कि भारतीय राजनीति में राज्य स्तर पर क्षेत्रीय दलों का प्रभाव बढ़ता जा रहा है और राष्ट्रीय राजनीति में उनका रोल भी महत्वपूर्ण हो सकता है। साथ ही, यह दिखाता है कि बीजेपी को राज्यों में अपनी पकड़ बनाए रखने के लिए लगातार कड़ी मेहनत करनी होगी। 4. कृषि और किसान आंदोलनों का असर 2024 में कृषि और किसान आंदोलनों का भी बड़ा राजनीतिक प्रभाव रहा। किसान विरोधी कानूनों को लेकर 2020 में शुरू हुआ आंदोलन अब भी पूरी तरह से समाप्त नहीं हो पाया था। हालांकि, 2024 में सरकार ने किसानों के लिए कुछ राहत के कदम उठाए, लेकिन किसानों के मुद्दे और उनके अधिकारों को लेकर विवाद जारी रहा। किसानों का आंदोलन और उनके समर्थन में विपक्षी दलों ने इसे अपने राजनीतिक एजेंडे का हिस्सा बनाया। इसने न सिर्फ सरकार को चुनौती दी, बल्कि यह भी साबित किया कि किसानों और ग्रामीण इलाकों के मुद्दे राजनीति में अहम बन चुके हैं। 5. राष्ट्रीय सुरक्षा: विदेश नीति की दिशा 2024 में भारतीय राजनीति में राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति भी प्रमुख मुद्दा बने। मोदी सरकार ने अपने कार्यकाल में कई अहम कदम उठाए, जैसे कि पाकिस्तान और चीन के साथ सीमा विवाद पर कड़े रुख अपनाना। चीन के साथ सीमा पर तनाव और पाकिस्तान से संबंध जैसे मुद्दों ने राजनीतिक माहौल को प्रभावित किया। प्रधानमंत्री मोदी ने कूटनीतिक तरीके से कई बार इन दोनों देशों से अपने रिश्तों को सुधारने की कोशिश की, लेकिन सीमा पर स्थिति तनावपूर्ण रही। अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में भारत ने अपनी स्थिति मजबूत की और अमेरिका, रूस और यूरोपीय संघ जैसे देशों के साथ रिश्तों को और प्रगाढ़ किया। 2024 में G20 की अध्यक्षता के दौरान भारत ने वैश्विक मंच पर अपनी कूटनीतिक ताकत का प्रदर्शन किया। 6. समाजवादी और क्षेत्रीय दलों की बढ़ती ताकत 2024 में एक और बड़ा बदलाव देखने को मिला, वह था क्षेत्रीय दलों और समाजवादी दलों की बढ़ती ताकत। उदाहरण के लिए, पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस, तेलंगाना में के. चंद्रशेखर राव की टीआरएस, और उत्तर-पूर्वी राज्यों में विभिन्न क्षेत्रीय दलों ने भारतीय राजनीति में अपनी महत्वपूर्ण जगह बनाई। इन दलों ने न सिर्फ राज्य स्तर पर, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में भी अपनी उपस्थिति दर्ज की और अब उनका राष्ट्रीय निर्णयों पर असर होता है। इन दलों ने यह साबित किया कि राष्ट्रीय चुनावों में उनकी भूमिका और ताकत दिन-ब-दिन बढ़ रही है। 7. सवर्ण और पिछड़ा वर्ग के बीच टकराव 2024 में भारत में समाजिक न्याय और आरक्षण को लेकर भी राजनीति गरमाई। कई राज्य सरकारों ने सवर्ण और पिछड़े वर्गों के बीच आरक्षण की नीति को लेकर विवादों को जन्म दिया। बीजेपी सरकार ने सवर्णों के लिए आरक्षण बढ़ाने की योजना बनाई, वहीं विपक्ष ने इसे गरीबों के हक में न होने की आलोचना की। इन सामाजिक मुद्दों ने राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी राजनीतिक बहसें छेड़ीं, जिससे राजनीतिक दलों के बीच खींचतान बनी रही। 2024 भारतीय राजनीति के लिए एक महत्वपूर्ण साल था, जिसमें भारतीय जनता पार्टी ने अपनी सत्ता बरकरार रखी, लेकिन विपक्षी दलों ने भी अपनी चुनौती पेश की। राज्य चुनावों, किसान आंदोलनों, राष्ट्रीय सुरक्षा और सामाजिक मुद्दों ने राजनीति को नया मोड़ दिया। यह साल यह दिखाता है कि भारतीय राजनीति अब केवल दो प्रमुख दलों तक सीमित नहीं रही, बल्कि क्षेत्रीय और समाजवादी दल भी राष्ट्रीय राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। 2024 ने यह साबित किया कि भारतीय राजनीति में भविष्य में और अधिक बदलाव और संघर्ष देखने को मिल सकता है।  

बीजेपी को फरवरी के अंत तक नया राष्ट्रीय अध्यक्ष मिल सकता है, राज्यों की इकाई में भी होगा बड़ा बदलाव

नई दिल्ली बीजेपी को फरवरी के अंत तक नया राष्ट्रीय अध्यक्ष मिल सकता है। पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारी के मुताबिक जनवरी के मध्य तक आधे राज्यों में चुनाव की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी। उन्होंने कहा कि राज्यों में भी 60 फीसदी इकाई अध्यक्षों के कार्यकाल पूरे होने वाले हैं। अगले महीने के मध्य तक नए अध्यक्ष बनाए जा सकते हैं। बता दें कि जेपी नड्डा 2020 से ही बीजेपी अध्यक्ष हैं। इसके अलावा वह केंद्र में स्वास्थ्य मंत्री भी हैं। एक सीनियर नेता ने कहा, फरवरी के अंत तक बीजेपी के नए अध्यक्ष पद ग्रहण कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि नए अध्यक्ष सरकार से भी हो सकते हैं और संगठन से भी हो सकते हैं। इसपर कोई अंतिम फैसला नहीं किया गया है। आम तौर पर बीजेपी अध्यक्ष का कार्यकाल तीन साल का ही होता है। हालांकि 2024 के आम चुनाव को देखते हुए जेपी नड्डा का कार्यकाल बढ़ा दिया गया था। आम चुनाव के बाद बीजेपी की वापसी भी हो गई। बीजेपी में अध्यक्ष पद को लेकर मंथन लंबे समय से चल रहा है। अगस्त में भी इसको लेकर मंथन किया गया था लेकिन उस समय महाराष्ट्र, झारखंड और जम्मू-कश्मीर, हरियाणा के चुनाव करीब थे। ऐसे में यथास्थिति बनाए रखने का ही फैसला किया गया। 2014 में केंद्र में पूर्ण बहुमत से मोदी सरकार बनने के बाद अमित शाह को तीन साल के लिए पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया था। पार्टी के संविधान मुताबिक उसी को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया जा सकता है जो कि कम से कम 15 साल से पार्टी का सदस्य हो। इससे पहले 2010 से 2013 तक संगठन की कमान नितिन गडकरी के पास थी। राजनाथ सिंह 2005 से 2009 तक और फिर 2013 से 14 तक बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे। 2014 से 2020 तक अमित शाह ने बीजेपी की कमान संभाली।

अमित शाह ने कांग्रेस पर कसा तंज- संविधान पढ़ने का चश्मा अगर विदेशी होगा तो उस संविधान में भारतीयता कभी नहीं दिखेगी

नई दिल्ली भारतीय संविधान के 75 वर्षों के गौरवशाली इतिहास पर राज्यसभा में चर्चा में भाग लेते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस पर जोरदार हमला बोला और कहा कि संविधान पढ़ने का चश्मा अगर विदेशी होगा तो उस संविधान में भारतीयता कभी नहीं दिखेगी। उन्होंने कहा कि संविधान ने लोकतंत्र की जड़ें मजबूत कीं हैं। रक्त की एक बूंद गिरे बिना सत्ता का हस्तांतरण हुआ। शाह ने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा कि कांग्रेस ने बहुत ही बेशर्मी से संविधान में कई संशोधन किए हैं। उन्होंने देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू द्वारा किए गए पहले संविधान संशोधन की चर्चा करते हुए कहा कि कांग्रेस पार्टी ने तब मौलिक अधिकार से छेड़छाड़ करते हुए अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता छीन ली। उन्होंने आरो लगाया कि कांग्रेस ने जब-जब संविधान संशोधन किया, तब-तब आमजन के मौलिक अधिकारों को छीना गया। शाह ने कहा कि अनेक तानाशाहों के गुमान एवं अभिमान को दूर करने का काम देश की जनता ने लोकतांत्रिक तरीके से किया है। केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि 77 सालों के दौरान 16 साल तक भाजपा ने इस देश पर शासन किया। इस दौरान हमने 22 बार किया संविधान संशोधन किया लेकिन 55 सालों में कांग्रेस ने 77 बार संविधान बदला है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने कभी वोट बैंक की राजनीति कर तो कभी अपने गुमान में तो कभी मौलिक अधिकारों की हनन करने के लिए संविधान बदला है। शाह ने संविधान की खूबसूरती की तारीफ करते हुए कहा कि संविधान में गीता रामायण के चित्र मौजूद हैं। संविधान में शिवाजी और लक्ष्मीबाई के चित्र अंकित हैं। बावजूद इसके संदेश लेना नहीं आता तो संविधान बदलने से क्या होगा। उन्होंने राहु गांधी पर तंज कसते हुए कहा कि 56 साल की उम्र में एक शख्स खुद का युवा कहते हैं, संविधान बदल देंगे का हल्ला करते फिरते हैं लेकिन उन्हें ये नहीं पता कि संविधान के अनुच्छेद 388 में ही यह प्रावधान है। लेकिन आपने संविधान में बदलाव अपने फायदे के लिए किया लेकिन हम जनमानस को फायदा पहुंचाने के लिए संविधान में बदलाव कर रहे हैं।

जब एकनाथ शिंदे की नाराजगी की खबरें सियासत में गर्म, देवेंद्र फडणवीस से क्यों सालों बाद मिले उद्धव ठाकरे, चर्चाएं तेज

नागपुर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और शिवसेना (यूबीटी) के मुखिया उद्धव ठाकरे के बीच मुलाकात हुई है। इस मुलाकात ने सियासी गलियारों में चर्चाओं को हवा दे दी है। ये ऐतिहासिक मुलाकात नागपुर में चल रहे राज्य विधानमंडल के शीतकालीन सत्र के दौरान हुई। इस मुलाकात में उद्धव ठाकरे के साथ उनके बेटे और पार्टी विधायक आदित्य ठाकरे, अनिल परब और वरुण देसाई भी शामिल थे। मुलाकात ऐसे वक्त में हुई है जब डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे की नाराजगी की खबरें सियासत में गर्म हैं। उद्धव ठाकरे ने इस मौके पर फडणवीस को मुख्यमंत्री बनने पर बधाई दी। दिलचस्प बात यह है कि ये पहली बार हुआ जब नई सरकार बनने के बाद दोनों नेता आमने-सामने बातचीत करते नजर आए। गौरतलब है कि ठाकरे समेत विपक्ष के अन्य नेताओं को महायुति गठबंधन के भव्य शपथ ग्रहण समारोह में आमंत्रित किया गया था, लेकिन उन्होंने इस समारोह में शामिल नहीं होने का फैसला किया। बैठक के बाद शिवसेना (यूबीटी) नेता आदित्य ठाकरे ने कहा कि सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों को देश और राज्य के हित में मिलकर काम करने के लिए राजनीतिक परिपक्वता दिखानी चाहिए। उन्होंने कहा, “आज हमारे पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे ने सीएम देवेंद्र फडणवीस और विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर से मुलाकात की। महाराष्ट्र सरकार के लिए काम करते हुए, दोनों (सत्ता पक्ष और विपक्ष) को देश और राज्य के हित में मिलकर काम करने के लिए राजनीतिक परिपक्वता दिखानी चाहिए।” इस मुलाकात ने महाराष्ट्र की सियासत में नई संभावनाओं को जन्म दे दिया है। एकनाथ शिंदे की नाराजगी के बाद इस मुलाकात से यह सवाल उठ रहे हैं कि क्या इसे भविष्य में बन सकने वाले नए सियासी समीकरणों का संकेत माना जाएगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पूर्वोत्तर भारत में महत्वपूर्ण परिवर्तन हुआ, भारत के विकास में महत्वपूर्ण योगदान: सिंधिया

मुंबई केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने मंगलवार को मुंबई में कहा कि पूर्वोत्तर क्षेत्र का भारत के विकास में महत्वपूर्ण योगदान है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पूर्वोत्तर भारत में महत्वपूर्ण परिवर्तन हुआ है, जिससे यहां निवेश की संभावनाएं बढ़ीं है। पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय (एमडीओएनईआर) ने मुंबई में मंगलवार को पूर्वोत्तर व्यापार और निवेश रोड शो की मेजबानी की। शीर्ष भारतीय शहरों में रोड शो की एक साल की श्रृंखला के बाद मुंबई में रोड शो ने भारत के आर्थिक केंद्र से जबरदस्त ध्यान आकर्षित किया। इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि पूर्वोत्तर क्षेत्र के मुख्यमंत्रियों के प्रधानमंत्री के नेतृत्व को स्वीकार किया, जिनके दृष्टिकोण और प्रतिबद्धता ने पिछले एक दशक में महत्वपूर्ण बदलाव किये हैं। पूर्वोत्तर क्षेत्र के मुख्यमंत्रियों ने इस क्षेत्र की अपार संभावनाओं पर जोर दिया, जो अब 11 फीसदी जीडीपी विकास दर के साथ भारत के विकास में योगदान देने के लिए तैयार है। केंद्रीय मंत्री ने मुंबई और पूर्वोत्तर भारत के जीवंत व्यावसायिक पारिस्थितिकी तंत्रों के बीच पुल बनाने के महत्व पर जोर दिया, जिससे विकास और नवाचार के लिए एक निर्बाध मार्ग सुनिश्चित हो सके। मंत्री ने पर्यटन, नवीकरणीय ऊर्जा, खेल और आईटी सहित विभिन्न क्षेत्रों में क्षेत्र की प्रगति को रेखांकित किया और क्षेत्र के विकास के लिए एक केंद्रित गुणवत्ता-संचालित दृष्टिकोण की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने निवेशकों को आश्वासन दिया कि इस क्षेत्र के युवा, उच्च साक्षरता दर और प्रचुर प्राकृतिक संसाधन इसे निवेश के लिए एक आदर्श स्थान बनाते हैं, विशेष रूप से टिकाऊ कृषि, विनिर्माण और प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में। अपने समापन भाषण में उन्होंने निवेशकों को पूर्वोत्तर क्षेत्र में आने और इस क्षेत्र के भविष्य को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए आमंत्रित किया। इस कार्यक्रम में त्रिपुरा के मुख्यमंत्री प्रोफेसर (डॉ.) माणिक साहा और मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड के. संगमा के साथ-साथ एमडीओएनईआर के सचिव चंचल कुमार, एमडीओएनईआर की संयुक्त सचिव सुश्री मोनालिसा दाश, पूर्वोत्तर राज्यों के सरकारी अधिकारी, डोनर मंत्रालय के वरिष्ठ प्रतिनिधि शामिल थे।  

नए दौर की चुनौतियों से निपटने के लिए पुलिस में एक नई साइबर अपराध शाखाब नाने की योजना बनाई : मुख्यमंत्री

कटक ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने कहा है कि नए दौर की चुनौतियों से निपटने के लिए उनकी सरकार ने पुलिस में एक नई साइबर अपराध शाखा स्थापित करने की योजना बनाई है। सोमवार को यहां 69वीं ‘पुलिस ड्यूटी मीट’ के समापन सत्र को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि साइबर धोखाधड़ी, ‘डिजिटल अरेस्ट’ और निवेश से संबंधित धोखाधड़ी के मामले रोजाना बढ़ रहे हैं। माझी ने कहा, ‘‘इसके मद्देनजर, हमारी सरकार पुलिस विभाग के साइबर प्रकोष्ठ को मजबूत और आधुनिक बनाने के लिए कटिबद्ध है। इसके लिए सभी जिलों में साइबर थाने स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है। साइबर अपराधों की उच्च स्तरीय जांच और निगरानी के लिए राज्य में एक साइबर अपराध शाखा भी बनाई जाएगी, जिसका प्रभारी एक वरिष्ठ अधिकारी होगा।’’ उन्होंने महिलाओं के साथ होने वाले अपराधों में कम दोषसिद्धि पर भी चिंता व्यक्त की। माझी ने कहा, ‘‘दोषसिद्धि की कम दर का मुख्य कारण पेशेवर जांच की कमी और अतीत में राजनीतिक इच्छाशक्ति की भारी कमी है।’’ उन्होंने कहा कि राज्य की दोषसिद्ध दर को कम से कम राष्ट्रीय औसत तक ले जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इसके लिए राज्य सरकार अधिक महिला न्यायालय स्थापित कर रही है और चार जिलों में महिला न्यायालय स्थापित करने के लिए नीतिगत निर्णय लिया गया है।  

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने ओटीटी मंचों को नशीले पदार्थों का प्रचार करने के खिलाफ चेतावनी दी

नई दिल्ली सरकार ने ओटीटी मंचों को आगाह किया है कि यदि वे ऐसी सामग्री प्रसारित करते हुए पाए गए जो मुख्य पात्र और अन्य अभिनेताओं के माध्यम से नशीले पदार्थों के उपयोग को अनजाने में बढ़ावा देती है या उन्हें महिमामंडित करती है तो उनके खिलाफ नियामक संबंधी जांच की जाएगी। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने ओटीटी मंचों के लिए जारी किए गए परामर्श में कहा, ‘‘इस तरह के चित्रण के, खासकर युवा और संवेदनशील दर्शकों पर संभावित प्रभाव के मद्देनजर गंभीर परिणाम हो सकते हैं।’’ परामर्श में ओटीटी मंचों के लिए आचार संहिता का हवाला देते हुए उन्हें सामग्री की समीक्षा के दौरान उचित सावधानी बरतने और किसी भी कार्यक्रम में नशीले पदार्थों के उपयोग का चित्रण करते समय अस्वीकरण या उपयोगकर्ता चेतावनी जारी करने के लिए कहा गया है। इसमें कहा गया है, ‘‘ओटीटी मंचों से अनुरोध है कि वे व्यापक जनहित में स्वेच्छा से इन दिशा-निर्देशों का पालन करें। इनका पालन नहीं करने पर विशेषकर सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 और स्वापक औषधि और मन:प्रभावी पदार्थ अधिनियम (एनडीपीएस), 1985 के प्रावधानों के तहत नियामक संबंधी जांच हो सकती है।’’ ओटीटी मंचों की आचार संहिता में यह प्रावधान है कि किसी कानून के तहत या किसी सक्षम न्यायालय द्वारा प्रतिबंधित किसी भी सामग्री को प्रसारित, प्रकाशित या प्रदर्शित नहीं किया जाएगा। इस परामर्श को ओटीटी मंचों के स्व-नियामक निकायों के साथ भी साझा किया गया है।  

दरभंगा में एम्स की स्थापना के लिए आईआईटी-दिल्ली को दिया गया तकनीकी सर्वे का जिम्मा: जेपी नड्डा ने संसद

नई दिल्ली केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने मंगलवार को संसद में कहा कि दिल्ली स्थित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) बिहार के दरभंगा में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) की स्थापना के लिए स्थलाकृतिक सर्वेक्षण, भू-तकनीकी जांच और संरचनात्मक डिजाइन का सर्वे कर रहा है। राज्यसभा को एक लिखित सवाल के जवाब में उन्होंने बताया कि बिहार सरकार ने अप्रैल 2023 में दरभंगा के बहादुरपुर में एकमी शोभन बाईपास के पास 151.17 एकड़ भूमि की पेशकश की है। उन्होंने कहा कि इससे पहले, राज्य सरकार ने दरभंगा मेडिकल कॉलेज और अस्पताल परिसर में एम्स की स्थापना के लिए नवंबर 2021 में भूमि हस्तांतरण को मंजूरी दी थी। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि आईआईटी-दिल्ली के विशेषज्ञों की केंद्रीय टीम (तकनीकी) ने एम्स की स्थापना के लिए वैकल्पिक स्थल को व्यावहारिक पाया है, लेकिन स्थान विशेष की स्थितियों के कारण भू-तकनीकी और जल विज्ञान संबंधी जांच के आधार पर संरचनात्मक संशोधन किया जा सकता है। उन्होंने कहा, ‘‘अब बिहार सरकार ने दरभंगा में एम्स की स्थापना के लिए 187.44 एकड़ जमीन सौंप दी है। मैसर्स एचएससीसी (इंडिया) लिमिटेड को परियोजना के लिए निष्पादन एजेंसी के रूप में नियुक्त किया गया है। आईआईटी दिल्ली स्थलाकृतिक सर्वेक्षण, जल विज्ञान संबंधी जांच, भू-तकनीकी जांच और संरचनात्मक डिजाइन चित्रों के पुनरीक्षण के लिए लगा हुआ है।’’  

ट्रंप झटका दें, उससे पहले जेलेंस्की अलर्ट, ‘नरक’ मिसाइल? जिसे ताबड़तोड़ बनाने में जुटा यूक्रेन

कीव अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के शपथ समारोह से पहले यूक्रेन भी अलर्ट हो गया है और अपने सैन्य और हथियार जखीरों को मजबूत करने की योजना पर तत्परता से काम कर रहा है। यूक्रेनी समाचार आउटलेट प्राव्दा के मुताबिक कीव ने पेक्लो मिसाइल का उत्पादन तेज कर दिया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले तीन महीने के अंदर यूक्रेन ने 100 से ज्यादा पेक्लो मिसाइल का उत्पादन किया है। पेक्लो को यूक्रेनी भाषा में नरक कहा जाता है। यानी यूक्रेन रूस पर खतरनाक हमले के लिए ताबड़तोड़ नरक मिसाइल बना रहा है। दरअसल, यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की को इस बात की आशंका है कि ट्रंप प्रशासन रूस के खिलाफ युद्ध में उन्हें सैन्य सहायता रोक सकता है। इसलिए कीव ने पेक्लो मिसाइल का उत्पादन बढ़ाने पर जोर दिया है। इस बीच, जेलेंस्की ने घोषणा की है कि 2025 तक 1000 क्रूज मिसाइलों का उत्पादन करने का उनका लक्ष्य है। क्या है नरक मिसाइल नरक मिसाइल यानी पेक्लो मिसाइल का निर्माण शुरू में एक ड्रोन मिसाइल के रूप में किया गया था लेकिन अब इसे क्रूज मिसाइल में तब्दील कर दिया गया है। यह लंबी दूरी की मारक क्षमता वाली मिसाइल है। इसकी लंबाई लगभग दो मीटर है, जबकि इसका वजन लगभग 50 किलोग्राम है। इसमें जीपीएस तकनीक सहित उन्नत मार्गदर्शन प्रणाली का उपयोग किया गया है। यह 700 किलोमीटर दूर स्थित टारगेट को आसानी से भेद सकता है और प्रति घंटे 700 KM की उड़ान भर सकता है। इस मिसाइल में एक छोटा वारहेड होता है। यह किसी भी सामान्य ड्रोन की तुलना में अधिक तेज उड़ सकता है और टारगेट को साध सकता है। मारक क्षमता के कारण ही इसे नरक मिसाइल कहा जाता है। यह 70 फीसदी यूक्रेनी घटकों से बना हुआ है। यूक्रेन के सुरक्षा बलों को सीमा पर दुश्मन देश के अंदर घुसकर मार करने वाली मिसाइल की जरूरत के हिसाब से इसका निर्माण किया गया है। सैन्य विशेषज्ञ ने यह भी कहा कि अपनी उच्च गति के कारण पेक्लो 700 किलोमीटर तक की दूरी पर यूक्रेनी बलों के लिए कार्य कर सकता है, और कई तरह के लक्ष्यों को एकसाथ भेद सकता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इस मिसाइल का पहला स्केट अगस्त 2023 में तैयार किया गया था और तभी से ही यूक्रेन इसके उत्पादन में जुटा हुआ है।

देशभर में और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हो रहे व्यापक विरोध-प्रदर्शनों के बाद हिजाब और शुद्धता कानून को लागू करने पर रोक लगा दी

तेहरान इस्लामिक देश ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने विवादास्पद हिजाब और शुद्धता कानून को लागू करने पर रोक लगा दी है। ईरान के स्टैंड में यह अचानक परिवर्तन देशभर में और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हो रहे व्यापक विरोध-प्रदर्शनों के बाद आया है। ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने इस कानून को अब अस्पष्ट बताते हुए इसमें और सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया है और कहा है कि इसके प्रावधानों पर फिर से विचार करने की जरूरत है। इस कानून में उन महिलाओं और लड़कियों के लिए सख्त दंड का प्रावधान किया गया है, जो अपने बालों, चेहरे, शरीर के अगले हिस्सों या निचले पैरों को पूरी तरह से नहीं ढकती हैं। कानून का उल्लंघन करने वालों पर जुर्माना या उसे 15 साल तक लंबी जेल की सजा दी जा सकती है। मानवाधिकार संगठनों ने भी की निंदा बता दें कि एमनेस्टी इंटरनेशनल समेत कई मानवाधिकार संगठनों ने भी इस कानून की निंदा की है। संगठनों ने ईरानी सरकार और अधिकारियों पर दमनकारी और दमघोंटू व्यवस्था को थोपने की कोशिश करने का आरोप लगाया है। हालांकि, राष्ट्रपति चुनाव अभियान के दौरान पेजेशकियन ने भी हिजाब कानून पर असहमति जताई थी और महिलाओं की व्यक्तिगत स्वतंत्रता का सम्मान करने का वादा किया था। हालांकि, ईरान में पहले भी सख्त ड्रेस कोड के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन होते रहे हैं लेकिन इस नए कानून के प्रस्ताव का एक महिला गायिका ने जब विरोध किया और उसे गिरफ्तार किया गया तो देश से लेकर विदेश तक हंगामा मच गया। गायिका के ऑनलाइन कन्सर्ट से बढ़ा बवाल दरअसल, पिछले हफ्ते मशहूर गायिका 27 वर्षीय परस्तू अहमदी ने बिना हिजाब पहने यूट्यूब पर एक म्यूजिकल कन्सर्ट किया। इस दौरान उन्होंने बिना आस्तीन और कॉलर वाली लंबी काली पोशाक पहनी थी, लेकिन हिजाब नहीं पहना था। कार्यक्रम के दौरान अहमदी के साथ चार पुरुष संगीतकार भी थे। उनका यह वीडियो सोशल मीडिया पर तुरंत वायरल हो गया। इससे ईरानी सरकार चिढ़ गई। तुरंत अहमदी और उनके बैंड्स के साथियों को उत्तरी प्रांत मजंदरान की राजधानी सारी शहर में गिरफ्तार कर लिया गया। इस घटना के खिलाफ देशभर में आक्रोश उत्पन्न हो गया। देशव्यापी विरोध-प्रदर्शनों को देखते हुए आखिरकार ईरान सरकार ने एक दिन बाद ही अहमदी और उनके साथियों को रिहा कर दिया और अब इस कानून को लागू करने पर ही रोक लगा दी है। बता दें कि 2022 में महसा झिना अमिनी नामक एक युवा कुर्द महिला की मौत के बाद से हिजाब को लेकर ईरान में बहुत तनाव है। कथित तौर पर ड्रेस कोड का उल्लंघन करने के आरोप में हिरासत में लिए जाने के बाद अमिनी की पुलिस हिरासत मौत हो गई थी। इसके बाद से पिछले दो वर्षों में, कई युवा ईरानी महिलाओं ने सार्वजनिक रूप से अपने हिजाब को हटा दिया। इससे सरकार की चुनौतियां बढ़ गई थीं। पिछले सप्ताह, ही 300 से अधिक ईरानी अधिकार कार्यकर्ताओं, लेखकों और पत्रकारों ने नए हिजाब कानून की सार्वजनिक रूप से निंदा की थी और इसे ‘अवैध और लागू न करने योग्य’ करार दिया था। इस समूह ने राष्ट्रपति पेजेशकियन से अपने अभियान के दौरान किए गए वादों को लागू करने का अनुरोध किया था। पेजेशकियन के समर्थकों का मानना ​​है कि नया हिजाब कानून युवा महिलाओं को इसका उल्लंघन करने से हतोत्साहित करने में विफल रहेगा और स्थिति और भी विस्फोटक हो सकती है।

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