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वरिष्ठ नेता चौधरी वीरेंद्र सिंह ने दागे सवाल, हरियाणा कांग्रेस में इस्तीफे की मांग से गरमाया माहौल

चंडीगढ़। पूर्व केंद्रीय मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता चौधरी वीरेंद्र सिंह ने हरियाणा कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष के इस्तीफे की मांग की है। चौधरी वीरेंद्र सिंह के बयान से हरियाणा में राजनितिक माहौल गरमा गया है। चौधरी वीरेंद्र सिंह ने कांग्रेस की हालिया हार पर तीखी टिप्पणी की और कहा कि इस हार के पीछे कई कारण हैं। उन्होंने सीधे तौर पर कहा, “हरियाणा में कांग्रेस का संगठन मजबूत नहीं है और यही कांग्रेस की हार का सबसे बड़ा कारण बना।” उन्होंने कांग्रेस में बड़े बदलाव की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि पार्टी को हरियाणा की जनता के और करीब लाने के लिए बड़े आंदोलन की जरूरत है। चौधरी वीरेंद्र सिंह ने किसी का नाम लिए बिना कहा, “हरियाणा में सब कुछ एक नेता के नाम पर केंद्रित था। यह गलत संदेश गया कि कांग्रेस की सरकार नहीं, बल्कि एक व्यक्ति की सरकार बन रही है। हार के बाद प्रदेश अध्यक्ष की नैतिक जिम्मेदारी बनती है कि वह अपने पद से इस्तीफा दे। राजनीति में ऐसा हमेशा होता रहा है, लेकिन मुझे आश्चर्य है कि हरियाणा में अब तक ऐसा क्यों नहीं हुआ। भाजपा पर भी लगाए गंभीर आरोप वीरेंद्र सिंह ने भाजपा पर भी हमला बोला और कहा कि पार्टी ने बागी कांग्रेस नेताओं पर खूब पैसा खर्च किया और चुनाव में सत्ता, मशीनरी और वित्तीय संसाधनों का इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा कि ईवीएम के अलावा हरियाणा में कई बाहरी ताकतों ने भी काम किया। जब धर्म कार्ड काम नहीं आया तो जातिगत ध्रुवीकरण का सहारा लिया गया।” “मेरा लक्ष्य हरियाणा को कांग्रेस की जनता की पार्टी बनाना है। पूर्व केंद्रीय मंत्री ने आगे कहा कि मैं हरियाणा में बड़ा आंदोलन चलाऊंगा और कांग्रेस को फिर से हरियाणा की जनता की पार्टी बनाऊंगा। मेरा लक्ष्य है कि पार्टी हर वर्ग और हर समुदाय तक पहुंचे। चुनावी रणनीति पर सवाल वीरेंद्र सिंह ने कांग्रेस की रणनीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि पार्टी में संगठन की कमी और नेतृत्व की गलतियां हार का मुख्य कारण बनीं। उन्होंने कहा कि यह समय आत्ममंथन का है और अगर पार्टी में बदलाव नहीं हुआ तो जनता से जुड़ने का सपना अधूरा रह जाएगा। चौधरी वीरेंद्र सिंह के इस बयान से हरियाणा कांग्रेस में हलचल मच गई है। अब देखना यह है कि पार्टी नेतृत्व इस पर क्या कार्रवाई करता है और क्या प्रदेश अध्यक्ष अपने पद से इस्तीफा देंगे।

फिजी सरकार ने शुरू कराई जांच, फाइव स्टार रिसॉर्ट में कॉकटेल पीने से सात पर्यटकों की हालत बिगड़ी

सुवा। फिजी के एक फाइव स्टॉर रिसॉर्ट में कॉकटेल पीने से चार ऑस्ट्रेलियाई समेत सात पर्यटकों की तबीयत बिगड़ गई। सभी को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। घटना का कारण शराब में जहर होना माना जा रहा है। फिजी सरकार ने मामले की जांच शुरू करा दी है। फिजी सरकार ने कहा कि विटी लेवु द्वीप के दक्षिणी तट पर वारविक फिजी रिसॉर्ट में कॉकटेल पीने के बाद पर्यटक बीमार पड़ गए। यह एक अलग तरह की घटना है। क्योंकि रिसॉर्ट के बार में केवल सात मेहमान ही इससे प्रभावित हुए। रिसॉर्ट प्रबंधन ने कहा कि उन्होंने मेहमानों को दिए जाने वाले पेय की गुणवत्ता न तो कोई बदलाव किया और न ही कोई सामग्री बदली गई। फिजी सरकार का कहना है कि यह बेहद चिंताजनक है। सुरक्षित पर्यटक स्थल माने जाने वाले फिजी में यह घटना अचंभित करने वाली है। सरकार ने कहा कि हमने मामले में तुरंत कार्रवाई की है। यह पता लगाया जा रहा है कि रिसॉर्ट में मेहमान बीमार कैसे पड़े। रिसॉर्ट के फ्रंट ऑफिस मैनेजर ने भी घटना की जांच की बात कही है। उन्होंने कहा कि हम अस्पताल में भर्ती मेहमानों की देखभाल पर काम कर रहे हैं। वहीं ऑस्ट्रेलिया सरकार के काउंसलर प्रभावित लोगों और उनके परिवार की मदद में जुट हैं। इसके अलावा फिजी पुलिस जहर की घटना को लेकर जांच कर रही है। ऑस्ट्रेलिया के कोषाध्यक्ष जिम चाल्मर्स ने कहा कि हम प्रभावित लोगों के दोस्तों और परिवार के बारे में सोच रहे हैं। क्योंकि यह उनके लिए दुखद है। ऑस्ट्रेलिया सरकार ने फिजी यात्रा को लेकर पर्यटकों को एडवाइजरी जारी की है। इसमें शराब में जहर मिलाने के खतरों को उजागर किया गया है। चाल्मर्स ने कहा कि अगर आस्ट्रेलिया के लोग फिजी की यात्रा कर रहे हैं तो शराब में जहर मिलाने और शराब के जहर के जोखिमों के प्रति सतर्क रहें।

लोकसभा में दिया नोटिस, कांग्रेस ने विधेयक वन नेशन वन इलेक्शन विधेयक पेश करने का किया विरोध

नई दिल्ली। कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने लोकसभा में वन नेशन वन इलेक्शन विधेयक पेश किए जाने का विरोध करने के लिए एक नोटिस दिया है। उन्होंने नोटिस में लिखा, “मैं संविधान (एक सौ उनतीसवां संशोधन) विधेयक, 2024 को प्रक्रिया नियम के नियम 72 के तहत पेश किए जाने का विरोध करने के अपने इरादे का नोटिस देता हूं।” उन्होंने कहा कि प्रस्तावित विधेयक पर उनकी आपत्तियां संवैधानिकता और संवैधानिकता के बारे में गंभीर चिंताओं पर आधारित हैं। अपनी आपत्तियों को सूचीबद्ध करते हुए उन्होंने नोटिस में लिखा कि विधेयक “संवैधानिक सिद्धांतों का उल्लंघन करता है। संविधान का अनुच्छेद 1 स्थापित करता है कि इंडिया, यानी भारत, राज्यों का एक संघ होगा, जो इसके संघीय चरित्र की पुष्टि करता है। संविधान (एक सौ उनतीसवां संशोधन) विधेयक 2024, जो लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के लिए एक साथ चुनाव कराने का प्रस्ताव करता है, राज्यों में एकरूपता लागू करके इस संघीय ढांचे को सीधे चुनौती देता है।” उन्होंने कहा कि इस तरह के कदम से राज्य की स्वायत्तता खत्म होने, स्थानीय लोकतांत्रिक भागीदारी कम होने और सत्ता के केंद्रीकरण का जोखिम है, जिससे बहुलवाद और विविधता को नुकसान पहुंचेगा, जो भारत के लोकतांत्रिक लोकाचार की आधारशिला है। अलग-अलग राज्यों के अनूठे राजनीतिक, सांस्कृतिक और सामाजिक संदर्भों की अनदेखी न केवल उनकी विशिष्टता की उपेक्षा करती है बल्कि संविधान में निहित संघवाद और लोकतंत्र के सिद्धांतों को भी बुनियादी तौर पर कमजोर करती है।” कांग्रेस नेता ने कहा कि विधेयक संविधान के मूल ढांचे को प्रभावित करेगा। एक साथ चुनाव कराने के लिए संविधान में अनुच्छेद 82ए को शामिल करने का प्रस्ताव राज्य विधानसभाओं को समय से पहले भंग करने की आवश्यकता पैदा करता है, जिससे संविधान के अनुच्छेद 83 और 172 के तहत गारंटीकृत विधायी निकायों के निश्चित कार्यकाल में प्रभावी रूप से बदलाव होता है, जिसे प्रस्तावित विधेयक के माध्यम से और संशोधित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह कदम केशवानंद भारती बनाम केरल राज्य में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा स्थापित मूल ढांचे के सिद्धांत का उल्लंघन करता है, जो संसद को संविधान में इस तरह से संशोधन करने से रोकता है जिससे इसके मूल सिद्धांतों को नुकसान पहुंचे। कांग्रेस सांसद के नोटिस में कहा गया है, “विधेयक शासन के संघीय चरित्र को कमजोर करके और एकरूपता लागू करने और शक्तियों के पृथक्करण और गणतंत्रात्मक और लोकतांत्रिक ढांचे सहित बुनियादी ढांचे के मुख्य तत्वों का उल्लंघन करता है। जैसा कि माननीय मुख्य न्यायाधीश सीकरी ने फैसले में जोर दिया है कि संविधान की सर्वोच्चता, इसके संघीय और धर्मनिरपेक्ष चरित्र और शक्तियों के पृथक्करण जैसे मूलभूत सिद्धांत संसद के संशोधन प्राधिकरण पर अंतर्निहित सीमाएं लगाते हैं। यह प्रस्ताव एक महत्वपूर्ण अतिक्रमण का प्रतिनिधित्व करता है, जो संविधान के मूलभूत चरित्र को खतरे में डालता है।” तिवारी ने यह भी कहा कि यह विधेयक राज्य सरकारों को कमजोर करता है। यह विधेयक राज्य विधानसभा चुनावों को आम चुनावों के साथ कराने का प्रयास करता है, जो संविधान में निहित संघीय ढांचे के लिए एक सीधी चुनौती है। चुनाव प्रक्रियाओं को केंद्रीकृत करके, विधेयक निर्वाचित राज्य सरकारों के अधिकार को कमजोर करता है, वहीं जमीनी स्तर पर लोकतंत्र को कमजोर करता है और स्थानीय शासन की स्वायत्तता का अतिक्रमण करता है। इसके अलावा, ऐसे मामलों में जहां राज्य सरकारें भंग होती हैं, अनुच्छेद 356 के तहत राष्ट्रपति शासन की विस्तारित अवधि की संभावना केंद्रीय नियंत्रण को मजबूत करने का जोखिम उठाती है, जिससे संघवाद के मूलभूत सिद्धांत नष्ट हो जाते हैं। तिवारी के नोटिस में लिखा, “संवैधानिक और प्रक्रियात्मक चिंताओं के मद्देनजर मैं संविधान (एक सौ उनतीसवां संशोधन) विधेयक 2024 को इसके वर्तमान स्वरूप में पेश करने का कड़ा विरोध करता हूं। मैं केंद्र सरकार से आग्रह करता हूं कि जब तक इन मुद्दों को पर्याप्त रूप से संबोधित नहीं किया जाता है, तब तक इसे पेश करने पर पुनर्विचार करें।” सरकार ने लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराने के लिए संविधान संशोधन विधेयक मंगलवार को लोकसभा में पेश करने के लिए सूचीबद्ध किया है।

युद्ध की तस्वीर बदल सकता है ये हथियार, रूस के स्टारलिंक किलर ने उड़ाई यूक्रेन और एलन मस्क की नींद

मॉस्को। रूस की सेना ने कथित तौर पर एक ऐसा हथियार विकसित कर लिया है, जिससे यूक्रेन और अमेरिकी अरबपति एलन मस्क की रातों की नींद उड़ सकती है। दरअसल रूसी सेना ने कथित तौर पर एक ऐसी उन्नत प्रणाली विकसित की है, जो दुश्मन यूएवी (ड्रोन्स) को स्टारलिंक सिस्टम से मिलने वाले सिग्नल को पकड़ सकती है। रूस के इस नए सिस्टम को स्टारलिंक किलर कहा जा रहा है। वहीं इसका आधिकारिक नाम कलिंका मॉनिटरिंग सिस्टम है। मीडिया रिपोर्ट्स को अगर सही माने तो इससे यूक्रेन का परेशान होना बनता है क्योंकि यूक्रेनी सेना ने रूस को ड्रोन्स हमलों से खासा परेशान किया है। अब अगर रूसी सेना ने ये नया सिस्टम विकसित कर लिया है तो फिर यूक्रेन ड्रोन्स से भी रूस को कोई खास नुकसान नहीं पहुंचा पाएगा और इससे युद्ध की तस्वीर भी बदल सकती है। एलन मस्क के लिए ये चिंता की बात इसलिए है क्योंकि स्टारलिंक सिस्टम एलन मस्क का ही है और इसका काट मिलना कहीं न कहीं मस्क के लिए भी झटका है। 15 किलोमीटर दूर से ही दुश्मन ड्रोन्स का पता लग सकेगा रूस-यूक्रेन युद्ध में अमेरिका ने यूक्रेन की मदद के लिए एलन मस्क की कंपनी स्टारलिंक का संचार टर्मिनल दिया है। इस टर्मिनल का इस्तेमाल करके ही यूक्रेन द्वारा रूस पर हवाई और नौसैनिक ड्रोन्स से हमले किए जा रहे हैं। रूसी मीडिया के अनुसार, कलिंका मॉनिटरिंग सिस्टम को रूस के सेंटर फॉर अनमैन्ड सिस्टम्स एंड टेक्नोलॉजीज (CBST) द्वारा विकसित किया गया है। CBST के अध्यक्ष का दावा है कि अभी कलिंका मॉनिटरिंग सिस्टम्स का परीक्षण चल रहा है। यह सिस्टम 15 किलोमीटर दूर से ही दुश्मन ड्रोन्स का पता लगा सकता है। ये प्रणाली कथित तौर पर ड्रोन्स को मिल रहे स्टारलिंक सिग्नल का तेजी से पता लगा सकती है, जिसके बाद दुश्मन ड्रोन्स को निशाना बनाना आसान है। स्टारलिंक क्या है? स्पेसएक्स का स्टारलिंक एक उपग्रह-आधारित इंटरनेट सेवा है जो दुनिया भर में हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड इंटरनेट सेवाएं प्रदान करती है। यह फाइबर ऑप्टिक केबल की तरह प्रकाश के माध्यम से डेटा मुहैया करती है। स्टारलिंक के उपग्रह पृथ्वी की निचली कक्षा में मौजूद हैं, वहीं से जमीन पर मौजूद उपयोगकर्ताओं को इंटरनेट मिलता है। रूस द्वारा यूक्रेन के बुनियादी ढांचे को तबाह कर दिया गया है, जिसके चलते यूक्रेनी सेना इंटरनेट के लिए स्टारलिंक पर निर्भर है। 

अमृतसर में पुलिस स्टेशन के पास धमाके पर बोले पुलिस कमिश्नर, ‘गिरफ्तार युवकों के साथियों ने किया विस्फोट’

अमृतसर। पंजाब के अमृतसर में मंगलवार तड़के करीब 3 बजे इस्लामाबाद पुलिस स्टेशन के पास तेज धमाके की आवाज से इलाके में सनसनी फैल गई। धमाके की आवाज सुनकर लोगों की नींद खुल गई। धमाके के समय पुलिस थाने में भी कई पुलिस कर्मी मौजूद थे। हालांकि किसी के हताहत होने की खबर नहीं है। धमाके की खबर मिलते ही पूरे पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। आनन-फानन में जांच टीम मौके पर पहुंची। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में जांच के बाद ही कुछ स्पष्ट हो पाएगा। पुलिस का आलाधिकारी भी मौके पर पहुंच कर जायजा ले रहे हैं। अमृतसर पुलिस कमिश्नर गुरप्रीत सिंह भुल्लर ने पत्रकारों से बात करते हुए बताया कि थाने के बाहर आवाज आई। हम अभी जांच कर कर रहे है। हमने कुछ दिन पहले ही एक मामले में कुछ युवक गिरफ्तार किए थे कि और कुछ युवकों की गिरफ्तारी होनी बाकी है, क्योंकि इस मामले में काफी युवक गिरफ्तार हुए थे तो वह अपनी मौजूदगी एहसास करवाने के लिए कुछ कर रहे है। जो युवक फरार हैं, उनको जल्द गिरफ्तार कर लिया जाएगा । एक अन्य वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि धमाके की खबर मिलते ही हम लोग मौके पर पहुंचे हैं। मामले की जांच शुरू कर दी गई है। हम जल्दी ही निष्कर्ष पर पहुंच जाएंगे। स्थानीय निवासी पवन कुमार ने बताया कि रात में करीब 3.15 बजे बड़े ही तेज धमाके की आवाज आई। धमाका इतनी तेज था कि इसे सुनकर सारे लोग घबरा गए। धमाका जबरदस्त था। लेकिन शुरुआत में यह नहीं पता चल सका कि यह बम जैसी आवाज कहां से आई। उसके बाद लोग अपने-अपने घर चले गए। लेकिन, लोगों में जबरदस्त दहशत फैल गई। इसके बाद किसी व्यक्ति ने कहा कि इस्लामाबाद थाने में हमला हो रहा है। तो हम लोगों ने कहा कि यह हमला जैसा तो नहीं लग रहा है क्योंकि आवाज कुछ समय के लिए आई, फिर बंद हो गई। फिर हम लोगों को लगा कि कहीं बम तो नहीं फटा है। हम लोगों को अभी तक नहीं पता है कि यह हमला क्यों हुआ है।

शवयात्रा को लेकर स्टालिन सरकार-भाजपा में तनातनी, तमिलनाडु-कोयंबटूर बम धमाकों के मास्टरमाइंड बाशा की मौत

कोयंबटूर। कोयंबटूर में 1998 में हुए सिलसिलेवार बम धमाकों के मास्टर माइंड एसए बाशा की सोमवार शाम को मौत हो गई। पुलिस ने बताया कि एसए बाशा को उम्र संबंधी बीमारियों के इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था। यहां उसकी मौत हो गई। पुलिस के मुताबिक बाशा के परिजन उसकी शवयात्रा निकालने की तैयारी कर रहे हैं। इसके लिए पुलिस बल तैनात किया जा रहा है। इसे लेकर स्टालिन सरकार और भाजपा में तनातनी हो गई है। भाजपा ने एक अपराधी और आतंकी की शवयात्रा निकालने की अनुमति देने का विरोध किया है। एसए बाशा प्रतिबंधित संगठन अल-उम्मा का संस्थापक-अध्यक्ष था। उसने 14 फरवरी 1998 को कोयंबटूर में हुए सिलसिलेवार बम विस्फोटों की योजना बनाई थी। इसमें 58 लोगों की जान चली गई थी। जबकि 231 लोग घायल हुए थे। मई 1999 में अपराध शाखा सीआईडी की विशेष जांच टीम ने बाशा के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया। उस पर भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी की हत्या की साजिश रचने का आरोप लगाया गया। बाशा और उसके संगठन के 16 अन्य लोगों को 1998 के बम धमाकों के आरोप में आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। हाल ही में मद्रास उच्च न्यायालय ने उसे पैरोल दी थी। पुलिस ने बताया कि वह पैरोल पर था और पिछले कुछ समय से उसकी तबीयत ठीक नहीं थी। तबीयत बिगड़ने पर उसे एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया और 35 साल जेल में रहने के बाद सोमवार शाम को उसकी मौत हो गई। बाशा के परिजन दक्षिण उक्कदम से फ्लावर मार्केट स्थित हैदर अली टीपू सुल्तान सुन्नत जमात मस्जिद तक उसकी शवयात्रा निकालने की योजना बना रहे हैं। इसलिए पुलिस बल तैनात किया गया है। भाजपा ने किया विरोध भाजपा तमिलनाडु के उपाध्यक्ष नारायणन तिरुपति ने कहा कि पुलिस को शवयात्रा निकालने की अनुमति नहीं देनी चाहिए। अगर किसी अपराधी, आतंकी, हत्यारे को शहीद घोषित किया गया तो इससे समाज में एक गलत मिसाल कायम होगी। उन्होंने एक्स पर लिखा कि किसी भी निर्मम हत्यारे के अंतिम संस्कार की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। यह शांतिपूर्ण तरीके से किया जाना चाहिए। यह बड़े सम्मान के साथ नहीं किया जाना चाहिए। क्योंकि वे इसके हकदार नहीं हैं। उन्होंने दावा किया कि कट्टरपंथी विचार, हिंसा और सांप्रदायिक समस्याएं 1998 के कोयंबटूर बम विस्फोटों से शुरू हुईं और बाशा इसके लिए सबसे ज्यादा जिम्मेदार था। आज भी विभिन्न राजनीतिक दलों और आंदोलनों में ऐसे सैकड़ों लोग हैं जो प्रतिबंधित अल-उम्मा के सदस्य रहे हैं। भाजपा नेता ने कहा कि उसकी शवयात्रा 1998 की भूली-बिसरी यादें ताजा कर सकती है। इससे भविष्य में सांप्रदायिक मुद्दे बढ़ सकते हैं। मुख्यमंत्री एमके स्टालिन यह तय करें कि उसका जुलूस न निकले और मारे गए आतंकी बाशा का अंतिम संस्कार सिर्फ उनके परिवार के सदस्यों के साथ ही किया जाए।

लगाए थे गंभीर आरोप, ट्रंप सरकार में हरमीत ढिल्लन को अहम पद मिलने से क्या बढ़ेंगी भारत की मुश्किलें?

वॉशिंगटन। डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में अपनी सरकार में हरमीत ढिल्लन को नागरिक अधिकारों के मामले में असिस्टेंट अटॉर्नी जनरल नियुक्त किया था। ढिल्लन की ये नियुक्ति भारत की मुश्किलें बढ़ा सकती हैं। दरअसल हरमीत ढिल्लन ने बीते दिनों भारत सरकार पर गंभीर आरोप लगाए थे। हरमीत ढिल्लन ने गुरपतवंत सिंह पन्नू की हत्या की कथित साजिश रचने के मामले में भारत पर अमेरिका में सिखों की हत्या के लिए मौत के दस्ते भेजने का आरोप लगाया था। अमेरिका में पन्नू मामले में अदालती सुनवाई चल रही है, ऐसे में अमेरिकी न्याय विभाग में हरमीत ढिल्लन की नियुक्ति भारत की परेशानी बढ़ा सकती है। हरमीत ढिल्लन (54 वर्षीय) ने बीते दिनों भारत सरकार पर गंभीर आरोप लगाए थे। ढिल्लन ने कहा था कि भारत अमेरिका में मौत के दस्ते भेज रहा है, जो उत्तरी अमेरिका में सिखों को निशाना बना रहे हैं। ढिल्लन की यह टिप्पणी खालिस्तानी आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नू की हत्या की कथित साजिश के खुलासे के बाद आई थी। हरमीत ढिल्लन ने सोशल मीडिया पर साझा एक पोस्ट में लिखा था कि ‘जैसा कि मैने कहा, भारत उत्तर अमेरिका के ऐसे सिखों को निशाना बनाने के लिए मौत के दस्ते भेज रहा है, पंजाब, कनाडा और अब अमेरिका में मानवाधिकारों की स्थिति पर मुखर रहे हैं। क्या हमारी सरकार इस बारे में कुछ करेगी? लोगों का जीवन खतरे में है।’ हरमीत ढिल्लन ने इस साल जुलाई में हुए रिपब्लिकन नेशनल कन्वेंशन के दौरान अरदास का पाठ किया था, जिसके बाद सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ कई नस्लवादी टिप्पणियां की गईं थी। हरमीत ढिल्लन ने रिपब्लिकन पार्टी की नेशनल कमेटी के अध्यक्ष का चुनाव भी लड़ा था, लेकिन उन्हें उसमें हार का सामना करना पड़ा था।  ट्रंप ने की थी तारीफ हरमीत ढिल्लन के नाम का एलान करते हुए ट्रंप ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि ‘हरमीत ढिल्लन को अमेरिकी न्याय विभाग में नागरिक अधिकार मामलों का असिस्टेंट अटॉर्नी जनरल नियुक्त करते हुए बहुत खुशी हो रही है। अपने करियर के दौरान हरमीत लगातार नागरिक अधिकारों की स्वतंत्रतता की सुरक्षा के लिए खड़ी रही हैं। उन्होंने बोलने की आजादी पर बड़ी तकनीकी कंपनियों की सेंसरशिप के खिलाफ भी लड़ाई लड़ी। हरमीत सिख समुदाय की सम्मानित सदस्य हैं। अपनी नई भूमिका में हरमीत हमारे संवैधानिक अधिकारों की सुरक्षा करेंगी।’

महाबोधि मंदिर में की पूजा-अर्चना, श्रीलंका के राष्ट्रपति दिसानायके बोधगया पहुंचे

गया। श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके ने मंगलवार को बोधगया में विश्व प्रसिद्ध महाबोधि मंदिर में भगवान बुद्ध की पूजा-अर्चना की। इस दौरान बोधगया मंदिर प्रबंधन समिति (बीटीएमसी) के सदस्यों ने उनका स्वागत किया। राष्ट्रपति के बोधगया पहुंचने पर महाबोधि मंदिर प्रबंधन समिति द्वारा खादा भेंट कर स्वागत किया गया। उसके बाद राष्ट्रपति महाबोधि मंदिर के गर्भगृह गए जहां उन्होंने भगवान बुद्ध की पूजा अर्चना की। इसके बाद वह पवित्र बोधिवृक्ष के पास गए। मान्यता है कि इसी महाबोधि वृक्ष के नीचे महात्मा बुद्ध को ज्ञान प्राप्त हुआ था। श्रीलंकाई राष्ट्रपति मंदिर परिसर स्थित भगवान बुद्ध से जुड़े सात स्थलों का भी दर्शन करेंगे। राष्ट्रपति के आगमन को लेकर आम श्रद्धालुओं के महाबोधि मंदिर प्रवेश पर रोक लगा दी गई है। राष्ट्रपति के जाने के बाद आम श्रद्धालु मंदिर में प्रवेश कर सकेंगे। इससे पहले श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके गया अंतराष्ट्रीय हवाई अड्डा पहुंचे, जहां इनका जोरदार स्वागत किया गया। राष्ट्रपति का बिहार सरकार के मंत्री डॉ. प्रेम कुमार, मंत्री संतोष कुमार सुमन, ज़िला पदाधिकारी त्यागराजन एसएम, वरीय पुलिस अधीक्षक आशीष भारती ने उनका ज्ञान की भूमि में स्वागत किया। राष्ट्रपति गया हवाई अड्डे से सीधे महाबोधि मंदिर पहुंचे और भगवान बुद्ध का दर्शन कर विशेष पूजा अर्चना की। बोधगया बौद्ध धर्मावलंबियों के लिए महत्वपूर्ण तीर्थस्थल है। प्रतिवर्ष यहां लाखों की संख्या में बौद्ध धर्मावलंबी पहुंचते हैं। उनके साथ श्रीलंका के विदेश मंत्री विजीथा हेराथ और उप वित्त मंत्री अनिल जयंता और अन्य अधिकारियों का एक दल भी आया है। श्रीलंका के राष्ट्रपति दिसानायके के आगमन को लेकर गया जिला पुलिस अलर्ट पर है और सुरक्षा का कड़ा इंतजाम किया गया है। एयरपोर्ट से लेकर बोधगया सड़क मार्ग को आम लोगों के लिए बंद कर दिया गया है। उल्लेखनीय है कि सोमवार को श्रीलंका के राष्ट्रपति दिसानायके ने दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की थी। इस क्रम में दोनों देशों के बीच कई समझौते पर सहमति बनी है।

फलस्तीन लिखा बैग लेकर संसद पहुंचने पर दिया बयान, पाकिस्तान के पूर्व मंत्री ने की प्रियंका की तारीफ

इस्लामाबाद। कांग्रेस महासचिव और वायनाड सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा के फलस्तीन लिखा बैग लेकर संसद पहुंचने के कदम की पाकिस्तान के पूर्व मंत्री ने तारीफ की है। पाकिस्तान के पूर्व मंत्री फवाद हसन चौधरी ने एक्स पर प्रियंका गांधी के बैग के साथ तस्वीर साझा की है। उन्होंने लिखा कि जवाहर लाल नेहरू जैसे महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी की पोती से क्या उम्मीद की जा सकती है? प्रियंका बौने लोगों के बीच तनकर खड़ी हुईं हैं। यह बेहद शर्मनाक है कि किसी पाकिस्तानी सांसद ने आज तक ऐसा साहस नहीं दिखाया।कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा सोमवार को संसद में एक बैग लेकर पहुंचीं थी, जिस पर ‘फलस्तीन’ लिखा हुआ था, जो संघर्ष प्रभावित क्षेत्र के लोगों के समर्थन में एक इशारा था। प्रियंका गांधी वाड्रा के हैंडबैग पर ‘फलस्तीन’ शब्द और फलस्तीनी प्रतीक दिखाई दिए, जिसमें एक तरबूज की भी तस्वीर दिखी – जिसे फलस्तीनी एकजुटता के प्रतीक के रूप में देखा जाता है। इस्राइल की कार्रवाई के खिलाफ आवाज उठा चुकी हैं प्रियंका प्रियंका गांधी वाड्रा गाजा पर इस्राइल की कार्रवाई के खिलाफ आवाज उठा रही हैं और उन्होंने फलस्तीनियों के साथ एकजुटता व्यक्त की है। इससे पहले जून महीने में, प्रियंका गांधी ने इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की आलोचना की थी, क्योंकि उन्होंने कहा था कि इस्राइल सरकार गाजा में ‘नरसंहारकारी कार्रवाई’ कर रही है, और उन्होंने उन पर और उनकी सरकार पर ‘बर्बरता’ का आरोप लगाया था। भाजपा ने उठाए थे सवाल भाजपा सांसद और प्रवक्ता संबित पात्रा ने ‘फलस्तीन समर्थक इशारे’ को लेकर प्रियंका गांधी वाड्रा पर निशाना साधते हुए कहा था कि जहां तक गांधी परिवार के सदस्यों का सवाल है, यह कोई नई बात नहीं है। नेहरू से लेकर प्रियंका वाड्रा तक, गांधी परिवार के सदस्य तुष्टिकरण का बैग लेकर घूमते हैं। उन्होंने कभी भी अपने कंधों पर देशभक्ति का बैग नहीं लटकाया। यह बैग उनकी हार का कारण है। What else could we expect from a granddaughter of a towering freedom fighter like Jawaharlal Nehru? Priyanka Gandhi has stood tall amidst pigmies, such shame that to date, no Pakistani member of Parliament has demonstrated such courage.#ThankYou pic.twitter.com/vV3jfOXLQq     — Ch Fawad Hussain (@fawadchaudhry) December 16, 2024

राजस्थान की मरुधरा को देंगे 46, 300 करोड़ रुपये की सौगात, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहुंचे जयपुर

जयपुर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज राजस्थान की राजधानी जयपुर पहुंचे। मरुधरा को विकास की नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए वे 46, 300 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन करेंगे। पीएम मोदी करीब 3 घंटे तक जयपुर में रहेंगे। इस दौरान वह वाटिका रोड पर आयोजित एक वर्ष-परिणाम उत्कर्ष कार्यक्रम में शामिल होंगे और वहां से बिजली, पानी, सड़क, रेलवे से जुड़ी 46300 करोड़ रुपये से अधिक की 24 परियोजनाओं का उद्घाटन एवं शिलान्यास करेंगे। इसके अलावा पीएम मोदी पार्वती-कालीसिंध-चंबल पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना का उद्घाटन भी करेंगे। 11 नदियों को इस परियोजना के तहत जोड़ा जाएगा, इससे प्रदेश के 21 जिलों में पानी की समस्या खत्म हो जाएगी। पीकेसी-ईआरसीपी में चंबल और इसकी सहायक नदियां पार्वती, कालीसिंध, कुनो, बनास, बाणगंगा, रूपरेल, गंभीरी और मेज शामिल हैं। नवनेरा बैराज से पानी गलवा बांध तक लाया जाएगा। यहां दो हिस्सों में ईसरदा बांध और बीसलपुर बांध तक पानी पहुंचेगा। नवनेरा से चंबल नदी पर जल सेतु बनाकर पानी मेज नदी तक आएगा। इससे राजस्थान की 2.80 लाख हेक्टेयर भूमि को सिंचाई करने के लिए पानी मिलेगा। पहले प्रदेश की सिर्फ 80 हजार हेक्टेयर भूमि सिंचित होती थी। लेकिन, अब 2 लाख नया क्षेत्र जोड़ा जाएगा और इसका लाभ 25 लाख किसान परिवारों को होगा। इससे प्रदेश की 40 फीसदी आबादी तक साफ पानी पहुंचेगा। पीकेसी-ईआरसीपी से राजस्थान के झालावाड़, बारां, कोटा, बूंदी, सवाई माधोपुर, गंगापुर सिटी, करौली, धौलपुर, भरतपुर, डीग, दौसा, अलवर, खैरथल-तिजारा, जयपुर, जयपुर ग्रामीण, कोटपूतली-बहरोड़, अजमेर, ब्यावर, केकड़ी, टोंक, दूदू जिले की जनता को पीने के पानी की समस्या से छुटकारा मिलेगा। यहां से पंपिंग कर पहले बने गलवा बांध तक जाएगा, गलवा से 31 किलोमीटर दूर ईसरदा तक पानी पहुंचेगा। अपने इस दौरे के दौरान प्रधानमंत्री मोदी दो बैराज का भी शिलान्यास करेंगे। बता दें कि कूल नदी पर रामगढ़ बैराज और पार्वती नदी पर महलपुर बैराज का निर्माण होगा। प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट कर लिखा, ‘विकसित भारत के संकल्प की सिद्धि के लिए विकसित राजस्थान भी जरूरी है। इसी कड़ी में आज दोपहर 12 बजे जयपुर में राज्य सरकार के ‘एक वर्ष-परिणाम उत्कर्ष’ कार्यक्रम का हिस्सा बनूंगा, इसमें रेल-सड़क सहित कई परियोजनाओं के लोकार्पण और शिलान्यास का भी सौभाग्य मिलेगा।’

स्कूल में गोलीबारी पर भड़के अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडन, ‘छात्रों को पढ़ना-लिखना सीखना चाहिए न कि हिंसा’

वॉशिंगटन। अमेरिका के विस्कोंसिन में एक स्कूल में हुई गोलीबारी की घटना पर राष्ट्रपति जो बाइडन ने चिंता जाहिर की। बाइडन ने कहा कि स्कूल में बच्चों को पढ़ना-लिखना सीखना चाहिए न कि बंदूक चलाना और हिंसा करना। बाइडन ने देश में बढ़ रही बंदूक संस्कृति को लेकर भी नाराजगी जाहिर की और कहा कि देश की संसद को इस बारे में गंभीरता से सोचने की जरूरत है। स्कूल में गोलीबारी की घटना पर हैरानी और दुख जताते हुए बाइडन ने कहा कि ऐसी घटनाएं बिल्कुल अस्वीकार्य हैं और हम अपने बच्चों की रक्षा नहीं कर पा रहे हैं।’ व्हाइट हाउस से जारी बयान में कहा गया कि ‘आज विस्कोंसिन के मेडिसन के परिवार अपनों को खोने के दुख में हैं। हम चाहते हैं कि संसद इस पर तुरंत कोई कदम उठाए।’ बयान में कहा गया कि ‘न्यूटन से लेकर उवाल्डे, पार्कलैंड और मेडिसन तक स्कूलों में गोलीबारी की कई ऐसी घटनाएं हुई हैं, जिन पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया गया। हम इसे सामान्य नहीं मान सकते। हर बच्चे का अधिकार है कि उसे स्कूल में पूरी सुरक्षा मिले। स्कूलों में पढ़ रहे छात्रों को पढ़ना-लिखना सीखना चाहिए न कि हिंसा और गोलीबारी करना।’ विस्कोंसिन के स्कूल में हुई गोलीबारी में पांच की मौत गौरतलब है कि सोमवार को मैडिसन के एबंडैंट लाइफ क्रिश्चियन स्कूल में अंधाधुंध गोलीबारी हुई। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक गोलीबारी में संदिग्ध हमलावर सहित पांच लोग मारे गए। मृतकों में बच्चे भी शामिल हैं। गोलीबारी में पांच लोग घायल भी हुए हैं। हमलावर एक किशोर को बताया जा रहा है, जो स्कूल में मृत पाया गया। अभी गोलीबारी के कारणों का खुलासा नहीं हुआ है। बाइडन ने कहा कि ‘मेरी सरकार ने बंदूक हिंसा के खिलाफ काफी काम किया। हमने गन सेफ्टी कानून पारित कराया और अन्य राष्ट्रपतियों की तुलना में बंदूक हिंसा को रोकने के लिए कड़े कदम उठाए। हालांकि अभी इसे रोकने के लिए काफी कुछ किया जाना बाकी है। खतरनाक हथियारों पर रोक लगनी चाहिए।’

आज पेश हो सकता है ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ बिल, लोकसभा की कार्यवाही शुरू

नई दिल्ली। संसद के शीतकालीन सत्र में मंगलवार को लोकसभा की कार्यवाही की शुरुआत हुई। देशभर की निगाहें आज संसद पर टिकी हुई हैं, क्योंकि केंद्र सरकार आज ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ बिल पेश कर सकती है। यह बिल देशभर में लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराने की व्यवस्था को लागू करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ बिल को लेकर देश में चल रही सियासत के बीच भाजपा ने अपने लोकसभा सांसदों के लिए व्हिप जारी किया है। बता दें कि 20 दिसंबर तक संसद का शीतकालीन सत्र है। इससे पहले यह चर्चा चली थी कि सोमवार को लोकसभा में ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ बिल पेश हो सकता है। हालांकि, सोमवार को ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ बिल पेश नहीं किया गया। उल्लेखनीय है कि 12 दिसंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में इस बिल को मंजूरी दे दी गई थी। कैबिनेट ने दो ड्रॉफ्ट कानूनों को मंजूरी दी थी, इसमें से एक संविधान संशोधन विधेयक लोकसभा एवं राज्य विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराने से संबंधित है, जबकि दूसरा विधेयक विधानसभाओं वाले तीन केंद्र शासित प्रदेशों के एक साथ चुनाव कराने के संबंध में हैं। सूत्रों के अनुसार, इस बिल पर आम लोगों की राय भी लेने की योजना है। विचार-विमर्श के दौरान बिल के प्रमुख पहलुओं, इसके फायदे और पूरे देश में एक साथ चुनाव कराने के लिए जरूरी कार्यप्रणाली और चुनावी प्रबंधन पर बातचीत की जाएगी। इस मुद्दे पर विपक्षी दलों से बातचीत की जिम्मेदारी के लिए केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, अर्जुन राम मेघवाल और किरेन रिजिजू को नियुक्त किया गया है।

US ने यूक्रेनी सेना में भर्ती हुए नए रंगरूटों को सैन्य प्रशिक्षण और हथियार देने का प्रस्ताव दिया

कीव अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन अपने कार्यकाल के अंतिम दौर में हैं। उनका कार्यकाल अब एक महीने से भी कम बचा है। इस बीच बाइडेन प्रशासन ने रूस के साथ चल रहे युद्ध में सैन्य शक्ति और सैनिकों की संख्या में इजाफा करने के लिए यूक्रेन को एक प्रस्ताव सुझाया है। अमेरिकी रक्षा विभाग पेंटागन के इस सुझाव से यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की टेंशन में हैं। दरअसल, अमेरिका ने यूक्रेन में सैनिकों की भर्ती के लिए आयु सीमा को 25 से घटाकर 18 साल करने का सुझाव दिया है और सेना में भर्ती हुए नए रंगरूटों को सैन्य प्रशिक्षण और हथियार देने का प्रस्ताव दिया है लेकिन जेलेंस्की को इस सुझाव को मानने में दिक्कत हो रही है। उनका मानना है कि इसके दूरगामी और हानिकारक प्रभाव देखने को मिलेंगे और देश की जनसांख्यिकी बुरी तरह से प्रभावित हो जाएगी। कई विशेषज्ञों का मानना है कि सैनिकों की भर्ती की उम्र सीमा घटाकर 18 साल करने से यूक्रेन में जन्म दर पर बुरा असर पड़ सकता है, जबकि देश पहले से ही कम जन्म दर की मार झेल रहा है। न्यूज वीक की एक रिपोर्ट के मुताबिक, फिलहाल 10 लाख से ज्यादा यूक्रेनी सैनिक रूस के खिलाफ युद्ध लड़ रहे हैं। बावजूद यूक्रेन करीब 43000 सैनिकों की भारी कमी झेल रहा है। यूक्रेन को रूस जैसे देश से मुकाबला करने के लिए अभी 1.60 लाख अतिरिक्त सैनिकों की जरूरत है। सैनिकों की कमी की समस्या से निजात पाने के लिए जेलेंस्की सरकार ने इस साल अप्रैल में सैनिकों की भर्ती में न्यूनतम उम्र सीमा 27 से घटाकर 25 साल की है। अगस्त में रक्षा मंत्रालय ने घोषणा की थी कि एक पायलट प्रोजेक्ट के तहत सैनिकों की भर्ती की न्यूनतम उम्र सीमा 25 से घटाकर 17 साल करने के प्रस्ताव को मंजूरी देने जा रही है। इसके तहत 17 से 25 साल की उम्र के युवाओं को बिना किसी मेडिकल टेस्ट के सैन्य भर्ती के लिए पंजीकृत कर दिया जाएगा लेकिन जेलेंस्की सरकार को अब इसमें बड़ा जोखिम दिख रहा है। जानकारों का कहना है कि इस उम्र में नौजवानों के सेना में भर्ती होने और युद्ध में लड़ने से देश में जन्म दर प्रभावित हो सकती है क्योंकि बड़ी संख्या में सैनिक हताहत हो सकते हैं। विशेषज्ञों ने इस बात को लेकर भी चेतावनी जारी की है कि अगर इस पॉलिसी को अपनाया गया तो 2050 तक देश की जनसंख्या 15 फीसदी गिरकर 31,990,132 पर पहुंच सकती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार पिछले साल यूक्रेन की आबादी, 37,732, 836 थी जो लगातार घट रही है। CIA के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार यूक्रेन की जनसंख्या पिछले साल से घटकर अब 35,661, 826 है, जिसमें 17,510,149 पुरुष और 18.151, 677 महिलाएं हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि युद्ध के कारण अगस्त तक यूक्रेन की मृत्यु दर जन्म दर की तुलना में तीन गुनी हो गई है।

space technology: अंतरिक्ष में रॉकेट भेजने की होड़, पूरी दुनिया बड़े संकट की ओर

Space technology: The race to send rockets into space, the whole world is headed for a big crisis आजकल अंतरिक्ष में जाने वाली कंपनियों की संख्या बढ़ रही है. अंतरिक्ष कचरा सिर्फ अंतरिक्ष में ही नहीं, बल्कि धरती पर भी समस्याएं पैदा कर सकता है. आजकल हम जिंदगी के कई जरूरी कामों के लिए अंतरिक्ष टेक्नोलॉजी पर निर्भर हैं, जैसे मौसम की जानकारी हासिल करना, एक-दूसरे से बात करना और रास्ता ढूंढना आदि. लेकिन अंतरिक्ष में हो रहे कामों का हमारे पर्यावरण पर भी असर पड़ रहा है. अंतरिक्ष में भेजे जा रहे सैटेलाइट की संख्या बहुत तेजी से बढ़ रही है. इससे अंतरिक्ष में कचरा (Space Debris) भी बढ़ रहा है. यह कचरा पृथ्वी के चारों तरफ चक्कर लगाता रहता है और दूसरे सैटेलाइट और अंतरिक्ष यान के लिए खतरा बन सकता है. अंतरिक्ष में बहुत ज्यादा सैटेलाइट होने से मौसम की जानकारी इकट्ठा करने वाले सिस्टम में भी रुकावट आ सकती है. वहीं अंतरिक्ष के इस्तेमाल को लेकर अभी तक कोई स्पष्ट कानून नहीं हैं. इससे यह खतरा है कि अंतरिक्ष का इस्तेमाल गैर-जिम्मेदाराना तरीके से हो सकता है. पर्यावरण को कैसे हो रहा है नुकसान? जब भी कोई रॉकेट अंतरिक्ष में जाता है, तो वो अपने पीछे बहुत सारा धुआं छोड़ता है. इस धुएं में कार्बन डाइऑक्साइड, ब्लैक कार्बन और पानी की वाष्प होता है. ब्लैक कार्बन एक ऐसा पदार्थ है जो सूरज की रोशनी को बहुत ज्यादा सोखता है. यह कार्बन डाइऑक्साइड से भी 500 गुना ज्यादा खतरनाक होता है क्योंकि यह ग्लोबल वार्मिंग को और बढ़ा देता है.रॉकेट को अंतरिक्ष में भेजने के लिए जो ईंधन इस्तेमाल किया जाता है, उससे ओजोन परत को नुकसान पहुंचता है. खास तौर पर क्लोरीन वाले रसायनों से यह नुकसान ज्यादा होता है. ओजोन परत हमें सूरज से आने वाली हानिकारक पराबैंगनी किरणों से बचाती है. अगर ओजोन परत कमजोर होगी, तो हमें त्वचा के कैंसर और आंखों की बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है. रॉकेट के धुएं से वातावरण में गड़बड़ी भी होती है जिससे मौसम पर भी असर पड़ता है. जब सैटेलाइट का मिशन पूरा हो जाता है और वातावरण में जल जाते हैं, तो उनसे निकलने वाली राख भी वातावरण और मौसम को नुकसान पहुंचा सकती है. सैटेलाइट बनाने से भी होता है प्रदूषण! सैटेलाइट बनाने के लिए भी कई तरह की चीजों की जरूरत होती है, जैसे धातु और अन्य सामग्री. इन चीजों को निकालने और तैयार करने में भी बहुत ऊर्जा खर्च होती है. इससे प्रदूषण भी होता है. सैटेलाइट में ऐसे सिस्टम भी होते हैं जो उन्हें अंतरिक्ष में सही जगह पर रखने और उनकी दिशा बदलने में मदद करते हैं. इन सिस्टम में भी ईंधन का इस्तेमाल होता है जिससे प्रदूषण होता है.भविष्य में हो सकता है कि कंपनियां अंतरिक्ष से खनिज पदार्थ निकालने लगें. इससे अंतरिक्ष और धरती दोनों जगह प्रदूषण बढ़ेगा. अंतरिक्ष में कितना है कचरा? अंतरिक्ष कचरा या ‘स्पेस जंक’ उन चीजों को कहते हैं जो अंतरिक्ष में बेकार हो चुकी हैं, जैसे पुराने सैटेलाइट, रॉकेट के टुकड़े और टूटे हुए सैटेलाइट्स के हिस्से. यह कचरा पृथ्वी के चारों ओर चक्कर लगाता रहता है और काफी खतरनाक हो सकता है.अंतरिक्ष में इतना कचरा हो गया है कि उस पर नजर रखना मुश्किल हो रहा है. अब तक लगभग 36,860 चीजें अंतरिक्ष में घूम रही हैं जो किसी काम की नहीं हैं. यह सब कचरा मिलकर 13,000 टन से भी ज्यादा वजन का है. यूरोपियन स्पेस एजेंसी के मुताबिक, 1957 से लेकर अब तक लगभग 6740 रॉकेट लॉन्च किए जा चुके हैं जिनसे 19,590 सैटेलाइट अंतरिक्ष में भेजे गए हैं. इनमें से लगभग 13,230 अभी भी अंतरिक्ष में हैं और 10,200 अभी भी काम कर रहे हैं.जैसे-जैसे अंतरिक्ष में कचरा बढ़ता जा रहा है, वैसे-वैसे सैटेलाइट्स के बीच टकराव का खतरा भी बढ़ता जा रहा है. यह कचरा बहुत तेज गति से घूमता है (लगभग 29,000 किलोमीटर प्रति घंटा). इतनी तेज गति से आ रहा एक छोटा सा धातु का टुकड़ा भी किसी सैटेलाइट को बुरी तरह से नुकसान पहुंचा सकता है. अगर कोई सैटेलाइट क्षतिग्रस्त हो जाता है, तो हमारे फोन, इंटरनेट और टीवी जैसी सेवाएं बाधित हो सकती हैं. मौसम की जानकारी देने वाले सैटेलाइट्स भी इस कचरे से प्रभावित हो सकते हैं, जिससे हमें मौसम का सही हाल नहीं पता चल पाएगा. यह कचरा अंतरिक्ष यात्रियों और अंतरिक्ष यान के लिए भी खतरा पैदा करता है. मेगा-कॉन्स्टेलेशन: इंटरनेट के लिए वरदान, पर्यावरण के लिए अभिशाप? मेगा-कॉन्स्टेलेशन ऐसे सैटेलाइट्स का समूह होता है जो एक साथ काम करते हैं. इनका मकसद दुनिया के हर कोने में तेज इंटरनेट पहुंचाना होता है. अभी अंतरिक्ष में लगभग 10,000 सैटेलाइट्स हैं. लेकिन अगले कुछ सालों में यह संख्या 10 गुना बढ़कर 1 लाख हो सकती है. यह ज्यादातर मेगा-कॉन्स्टेलेशन की वजह से होगा.स्पेसएक्स कंपनी का स्टारलिंक अभी सबसे बड़ा मेगा-कॉन्स्टेलेशन है. इसमें अभी 6,500 सैटेलाइट्स हैं और 2030 तक इनकी संख्या 40,000 से ज्यादा हो जाएगी. अमेजन, ई-स्पेस और चीन जैसी कंपनियां भी अपने मेगा-कॉन्स्टेलेशन बना रही हैं. इनमें भी हजारों या दसियों हजार सैटेलाइट्स होंगे. इतने सारे सैटेलाइट्स से अंतरिक्ष में कचरा बहुत बढ़ जाएगा. वैज्ञानिकों को भी अंतरिक्ष से पृथ्वी का अध्ययन करने में मुश्किल हो सकती है. ये सैटेलाइट्स रात में आकाश में चमकते हैं जिससे तारों को देखना मुश्किल हो जाता है. पुराने vs नए सैटेलाइट पहले जो सैटेलाइट बनाए जाते थे, वो सरकार द्वारा वित्त पोषित होते थे और 20-30 साल तक चलते थे. लेकिन अब निजी कंपनियां मेगा-कॉन्स्टेलेशन बना रही हैं जिनमें हजारों सैटेलाइट्स होते हैं. ये कंपनियां हर 5 साल में अपने सैटेलाइट्स बदलना चाहती हैं ताकि नई टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर सकें.पुराने सैटेलाइट्स को वातावरण में जलाकर नष्ट किया जाता है. इससे अंतरिक्ष में कचरा तो नहीं बढ़ता, लेकिन इससे वातावरण में प्रदूषण जरूर फैलता है. इतने सारे सैटेलाइट्स को अंतरिक्ष में भेजने के लिए बहुत सारे रॉकेट लॉन्च करने पड़ते हैं. इन रॉकेट से भी प्रदूषण होता है. 2019 में लगभग 115 सैटेलाइट वातावरण में जल गए थे. लेकिन 2024 में यह संख्या बहुत ज्यादा बढ़ गई है. नवंबर 2024 तक 950 से ज्यादा सैटेलाइट वातावरण में जल चुके हैं. वैज्ञानिकों का अनुमान है कि 2033 तक हर साल 4000 टन … Read more

रूस और भारत के गहराते रिश्तों के बीच भारतीयों के लिए एक अच्छी खबर, वीजा फ्री ट्रैवल की शुरुआत जल्द

मॉस्को रूस और भारत के गहराते रिश्तों के बीच भारतीयों के लिए एक अच्छी खबर सामने आई है. अब भारत के लोग जल्द ही बिना वीजा के रूस घूम सकते हैं. भारत और रूस के बीच 2025 में इसे लेकर एक सिस्टम विकसित होने की संभावना है. इससे पहले जून में ऐसी रिपोर्टें सामने आई थीं कि भारत और रूस ने वीजा फ्री ट्रैवल के लिए एक-दूसरे के वीजा प्रतिबंधों को कम करने के लिए द्विपक्षीय समझौते पर चर्चा की है. रूस ने भारतीयों के लिए अगस्त 2023 से ई-वीजा की शुरुआत की थी जिसकी प्रक्रिया पूरे होने में लगभग 4 दिन लगते हैं.  रिपोर्ट के अनुसार, पिछले साल रूस ने जितने ई-वीजा जारी किए, उसमें भारत शीर्ष पांच देशों में शामिल था. रूस ने भारतीयों को 9,500 ई-वीजा दिए. वर्तमान में भारत के नागरिकों को रूस में एंट्री करने, वहां रहने और बाहर निकलने के लिए रूसी दूतावास या फिर वाणिज्य दूतावास की तरफ से जारी वीजा लेना जरूरी होता है जो कि एक लंबी प्रक्रिया है. रिकॉर्ड संख्या में रूस जा रहे भारतीय ज्यादातर भारतीय बिजनेस या अपने काम के सिलसिले में रूस जाते हैं. 2023 में, रिकॉर्ड 60,000 से ज्यादा भारतीयों ने रूस का दौरा किया जो 2022 की तुलना में 26 प्रतिशत ज्यादा है. रूस अपने वीजा फ्री टूरिस्ट एक्सचेंज के तहत चीन और ईरान के यात्रियों को वीजा फ्री एंट्री दे रहा है. चीन और ईरान के साथ रूस का यह सहयोग सफल रहा है जिसे देखते हुए माना जा रहा है कि भारत के साथ भी ऐसा ही सिस्टम शुरू किया जाएगा. वर्तमान में भारतीय पासपोर्टधारियों को 62 देशों में वीजा फ्री एंट्री का अधिकार हासिल है. हेनले पासपोर्ट इंडेक्स 2024 में भारत का पासपोर्ट 82वें स्थान पर है जिसकी मदद से भारतीय इंडोनेशिया, मालदीव और थाईलैंड जैसे ट्रैवल डेस्टिनेशन्स पर बिना वीजा के यात्रा कर सकते हैं. हेनले पासपोर्ट इंडेक्स अंतरराष्ट्रीय वायु परिवहन प्राधिकरण (IATA) के डेटा के आधार पर जारी किया जाता है. इंडेक्स मानता है कि किसी देश का पासपोर्टधारी सभी बुनियादी एंट्री जरूरतों को पूरा करता है, अकेले यात्रा करने वाले वयस्क नागरिक है, और कम समय के प्रवास या घूमने या फिर बिजनेस के मकसद से एंट्री चाहता है. इस इंडेक्स में हालांकि, राजनयिक यात्रा, आपातकालीन या अस्थायी पासपोर्ट और ट्रांजिट स्टे शामिल नहीं है.  

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