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‘विस्थापित सीरियाई जनता पर स्वदेश वापसी के लिए कोई दबाव नहीं- UN

दमिश्क संयुक्त राष्ट्र मानवीय मामलों के समन्वय कार्यालय (ओसीएचए) ने कहा है कि सीरिया में 27 नवंबर को युद्ध के जोर पकड़नेे के बाद से 11 लाख से अधिक लोग विस्थापित हुए हैं, जिनमें से अधिकांश महिलाएं और बच्चे हैं। आईडीपी टास्क फोर्स ने कहा, “सीरिया में 27 नवंबर को युद्ध के तेज हाेने के बाद से 11 लाख से अधिक लोग विस्थापित हुए हैं, जिनमें अधिकांश महिलाएं और बच्चे हैं।” संगठन की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि लगभग 6,40,000 लोग अलेप्पो प्रांत से भाग गए, जबकि 3,34,000 लोग इदलिब से और 1,36,000 लोग हमा से भाग गए। उल्लेखनीय है कि सीरियाई सशस्त्र विपक्ष ने रविवार को राजधानी दमिश्क पर कब्जा कर लिया। रूसी अधिकारियों ने कहा कि राष्ट्रपति बशर असद ने सीरियाई संघर्ष के प्रतिभागियों के साथ बातचीत के बाद पद छोड़ दिया और सीरिया छोड़कर रूस चले गए, जहाँ उन्हें शरण दी गई। इसके बाद मोहम्मद अल-बशीर (जो हयात तहरीर अल-शाम और अन्य विपक्षी समूहों द्वारा गठित इदलिब-आधारित प्रशासन चलाते थे) को मंगलवार को अंतरिम प्रधानमंत्री नामित किया गया। 13 साल का गृह युद्ध और 60 लाख शरणार्थी, इन देशों में रह रहे हैं सीरिया के लोग 8 दिसंबर को सीरिया में 13 साल लंबे गृह युद्ध के बाद सीरियाई राष्ट्रपति बशर-अल-असद रूस भाग गए. इसी के साथ असद परिवार का 54 साल पुराना राज खत्म हो गया. इसमें 24 साल तो खुद बशर अल-असद के हैं. उनके सत्ता से हटने के बाद, राजधानी दमिश्क समेत दुनिया भर में सीरियाई लोगों ने जश्न मनाया. यह जश्न खास तौर पर उन लाखों सीरियाई लोगों के लिए मायने रखता है, जो गृह युद्ध की त्रासदी से बचने के लिए अपना घर छोड़कर दूसरे देशों में शरण लेने को मजबूर हुए. हालांकि, इस बदलाव के साथ ही यूरोपीय देशों में सीरियाई शरणार्थियों को वापस भेजने की मांग भी जोर पकड़ रही है. जर्मनी, फ्रांस, ऑस्ट्रिया, डेनमार्क, स्वीडन, नॉर्वे, बेल्जियम और ब्रिटेन जैसे देशों ने उनके असाइलम आवेदनों पर रोक लगा दी है. आखिर किन देशों में सबसे ज्यादा सीरियाई शरणार्थी रहते हैं? इतने सीरियाई को दूसरे देशों में लेनी पड़ी शरण 2011 में, अल-असद के खिलाफ जब विद्रोह की शुरुआत हुई तो सीरिया की आबादी लगभग 2 करोड़ थी. इसके बाद के वर्षों में लगभग पाँच लाख लोग मारे गए, दस लाख से अधिक घायल हुए और लगभग 1.3 करोड़ लोग अपना घर छोड़कर भाग गए. संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार, 2024 तक, कम से कम 74 लाख सीरियाई आंतरिक रूप से विस्थापित हैं, जिनमें से लगभग 49 लाख पड़ोसी देशों में शरण ले रहे हैं. इसके अलवा 13 लाख लोग अधिकतर यूरोप में बस गए हैं. सबसे अधिक पंजीकृत सीरियाई शरणार्थियों वाले पड़ोसी देशों में तुर्किये, लेबनान, जॉर्डन और इराक शामिल हैं. इन शरणार्थियों की एक बड़ी संख्या यूरोपीय देशों में भी है. न्यूज मैगजीन ‘पॉलिटिको’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2015 से अब तक लगभग 45 लाख सीरियाई लोग यूरोप आए. यूरोपीय संघ (ईयू) ने 2015 से 2023 के बीच लगभग 13 लाख सीरियाई शरणार्थियों को सुरक्षा का दर्जा दे चुका है. तुर्किए में रहते हैं सबसे ज्यादा रिफ्यूजी सीरिया के लगभग आधे पंजीकृत शरणार्थी, या 31 लाख तुर्किये में रहते हैं, जो दुनिया में सबसे बड़ी शरणार्थी आबादी की मेजबानी करता है. तुर्की सीरिया का पड़ोसी देश भी है इसलिए सीरियाई लोगों ने यही शरण सबसे पहले ली. तुर्की सरकार सीरियाई लोगों को टेम्पोररी प्रोटेक्टेड स्टेट्स देता है जिससे उन्हें कानूनी रूप से रहने की इजाजत मिलती है. मगर इससे किसी को भी देश की नागरिकता नहीं मिलती. उसके बाद दूसरे नंबर पर आता है लेबनान. जो कि लगभग 7 लाख 74 हजार पंजीकृत शरणार्थियों को शरण देता है. अगर इसमें अपंजीकृत व्यक्तियों को शामिल कर लिया जाए तो कुल संख्या करीब 15 लाख हो जाती है. लेबनान में हर पांच में से एक व्यक्ति सीरियाई शरणार्थी है. दोनों देशों के बीच आवाजाही आसान थी क्योंकि सीमा पार करने के लिए एक आईडी कार्ड ही काफी था. इसलिए शरणार्थियों ने बड़ी संख्या में और तेज़ी से लेबनान में शरण लेना शुरू कर दिया. तीसरा देश है जर्मनी. यूनाइटेड नेशन्स के मुताबिक जर्मनी में 7 लाख 16 हजार सीरियाई शरणार्थी रहते हैं. एंजेला मर्केल की सरकार ने सीरिया के गृहयुद्ध से भाग रहे शरणार्थियों के लिए जर्मनी की सीमाओं को बंद नहीं करने का निर्णय लिया था. उस समय माहौल यह था कि जर्मनी प्रबंधन कर लेगा हालांकि अब चीजें काफी बदल गई हैं. उसके बाद ईराक है जहां 2 लाख 86 हजार लोग रहते हैं. फिर इजिप्ट है 1 लाख 56 हजार शरणार्थियों के साथ. उसके बाद ऑस्ट्रिया, स्वीडेन, नीदरलैंड्स और ग्रीस है. यूरोप में शरणार्थियों को वापस भेजने पर क्यों जोर? असद को सत्ता से बेदखल किए जाने से पहले भी कुछ देश सीरियाई शरणार्थियों को असाइलम ना देने और उन्हें वापस भेजने की बात उठा रहे थे. अलजजीरा के मुताबिक इसमें सबसे बड़ी बाधा, यूरोपीयन यूनियन एजेंसी फॉर असाइलम (EUAA) की तरफ से की तय की गई सुरक्षित देश की परिभाषा दरअसल EUAA का सेक्शन 4.3.2 कहता है कि शरण के लिए आवेदन करने वाले को या शरणार्थी को उसके देश वापस भेजने के लिए जरूरी है कि उस देश में कानूनों का पालन लोकतांत्रिक तरीके से होता हो, राजनीतिक घटनाक्रम उत्पीड़न, यातना, या सजा का कारण ना बनते हों. इन मानकों पर सीरिया खरा नहीं उतरता था. अब असद के बाहर होने के बाद एक बार फिर सीरियाई शरणार्थियों का मुद्दा फिर गर्म हो गया है. हालांकि यूएनएचसीआर के मुताबिक, सीरिया में वापसी में बढ़ोतरी हुई है. 2024 के पहले आठ महीनों में, लगभग 34,000 सीरियाई शरणार्थियों के घर लौटने की पुष्टि की गई थी. संख्या इससे अधिक भी हो सकती है.  

15 वर्षों में प्राइवेट कर्मचारियों की सैलरी में वृद्धि का अनुपात प्रॉफिट की तुलना में बहुत कम

नई दिल्ली हाल ही में यूएस बिलेनियर अंबिशन्स की एक रिपोर्ट आई है। इस रिपोर्ट के मुताबिक देश में अरबपतियों की संख्या में तेजी से वृद्धि हुई है। वहीं कैंटर की एक रिपोर्ट के मुताबिक मिडिल क्लास देश का मध्यम वर्ग सिकुड़ता जा रहा है। उसकी चीजों की खरीदने की क्षमता कम हुई है। इसका सबसे बड़ा कारण मिडिल क्लास की सैलरी में वृद्धि दर धीमा होना है। अब ऐसा ही कुछ सरकार ने भी कह दिया है। सरकार ने कुछ ऐसे आंकड़े दिए हैं जो बताते हैं कि 15 वर्षों में चीजें कितनी बदल गई हैं। इन 15 वर्षों में प्राइवेट कंपनियों का मुनाफा जहां अब तक के उच्चतम स्तर पर है तो वहीं कर्मचारियों की सैलरी उस अनुपात में नहीं बढ़ी है। इस बारे में मुख्य आर्थिक सलाहकार वी अनंथा नागेश्वरन ने प्राइवेट सेक्टर की कंपनियों को चेतावनी भी दी है।   गिरती जीडीपी ने चिंता की पैदा प्राइवेट कंपनियों के बढ़ते प्रॉफिट और कर्मचारियों के सैलरी में धीमी वृद्धि को लेकर इंडियन एक्सप्रेस ने एक रिपोर्ट प्रकाशित की है। इस रिपोर्ट के मुताबिक इस साल जुलाई-सितंबर में जीडीपी में 5.4 फीसदी की तेज गिरावट ने नीति निर्माताओं के बीच चिंता पैदा कर दी है। यह तब है कि पिछले चार वर्षों में प्राइवेट कंपनियों का मुनाफा चार गुना बढ़ गया है। वहीं सैलरी में उस अनुपात में वृद्धि नहीं हुई है। इस सेक्टर में तैयार हुई रिपोर्ट उद्योग चैंबर फिक्की और क्वेस कॉर्प लिमिटेड ने सरकार के लिए रिपोर्ट तैयार की है। इस रिपोर्ट में छह सेक्टर में कर्मचारियों की 4 साल की सैलरी के बारे में बताया गया है। ये 6 सेक्टर में SFSI (बैंकिंग, फाइनेंशियल सर्विसेज और इंश्योरेंस सेक्टर), EMPI (इंजीनियरिंग, मैन्युफैक्चरिंग, प्रोसेस और इंफ्रास्ट्रक्चर), FMCD/FMCG (फास्ट मूविंग कंज्यूमर ड्यूरेबल्स/फास्ट मूविंग कंज्यूमर गुड्स), IT (इंफॉर्मेशन टेक्नॉलजी), लॉजिस्टिक्स और रिटेल शामिल हैं। कितनी बढ़ी सैलरी? आंकड़ों के मुताबिक इन 6 सेक्टर में कर्मचारियों की 4 साल में सालाना औसतन सैलरी अधिकतम 5.4% बढ़ी है। इतनी बढ़ोतरी FMCD/FMCG सेक्टर में हुई है। जानें, कितनी बढ़ी 4 साल में औसत सैलरी: SFSI: साल 2019 में औसत सैलरी 15,184 रुपये थी। साल 2023 में यह 17,475 रुपये हो गई। इन 4 वर्षों में इसमें 2.8% की तेजी आई। EMPI: इस सेक्टर में साल 2019 में औसत सैलरी 19,659 रुपये थी। साल 2023 में यह 20,509 रुपये हो गई। इन 4 वर्षों में इसमें 0.8% की तेजी आई। FMCD/FMCG: साल 2019 में इस सेक्टर में औसत सैलरी 14,608 रुपये थी। साल 2023 में यह 5.8% बढ़कर 19,023 रुपये हो गई। IT: इस सेक्टर में 4 साल में सैलरी में 4 फीसदी की तेजी आई है। साल 2019 में इस सेक्टर में औसत सैलरी 40,333 रुपये थी। साल 2023 में यह 49,076 रुपये हो गई। Logistics: इस सेक्टर में भी 4 साल में सैलरी में बहुत ज्यादा तेजी नहीं आई है। साल 2019 में औसत सैलरी 15,844 रुपये थी। साल 2023 में यह 4.2% बढ़कर 19,534 रुपये हो गई। कितनी बढ़ी कंपनियों की कमाई? नागेश्वरन ने कहा कि पिछले 15 वर्षों में निजी कंपनियों की कमाई में भारी वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि मार्च 2024 में कॉर्पोरेट कंपनियों का प्रॉफिट पिछले 15 साल में अपने उच्चतम स्तर पर था। नागेश्वरन के मुताबिक पिछले 4 वर्षों में प्राइवेट कंपनियों का प्रॉफिट चार गुना बढ़ा है। उन्होंने कहा कि सबसे ज्यादा चिंता अनौपचारिक क्षेत्र में है जहां कर्मचारियों के सैलरी में मामूली वृद्धि हुई है।  

देश भर में 404 शक्ति सदन काम कर रहे हैं, जहां 29,315 महिलाओं को पुनर्वास और सहायता मिली:मंत्री सावित्री ठाकुर

नईदिल्ली भारत में संचालित 802 वन स्टॉप सेंटर से 10 लाख से अधिक महिलाओं को सहायता मिली है। देश भर में 404 शक्ति सदन काम कर रहे हैं, जहां 29,315 महिलाओं को पुनर्वास और सहायता मिली है। राज्यसभा में महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर ने एक प्रश्न के उत्तर में यह जानकारी दी। वन स्टॉप सेंटर क्या है ? वन स्टॉप सेंटर (ओएससी) महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के मिशन शक्ति के अंतर्गत चलाए जा रही संबल पहल का घटक है। यह घरेलू और सार्वजनिक जगहों पर महिलाओं को हिंसा और संकट से निपटने के लिए एक ही छत के नीचे एकीकृत सहयोग और सहायता प्रदान करता है। यह जरूरतमंद महिलाओं को चिकित्सा सहायता, कानूनी सहायता और सलाह, अस्थायी आश्रय, पुलिस सहायता और मनो-सामाजिक परामर्श जैसी सेवाएं प्रदान करता है। देश भर में 802 ओएससी चालू हैं वर्तमान में स्वीकृत 878 वन स्टॉप सेंटर (ओएससी) में से, देश भर में 802 ओएससी चालू हैं और इनमें 31 अक्टूबर, 2024 तक 10.12 लाख से अधिक महिलाओं को सहायता प्रदान की गई है। इसके अलावा, शक्ति सदन मिशन शक्ति के तहत सामर्थ्य पहल का एक घटक है। यह तस्करी करके लाई गई महिलाओं सहित संकटग्रस्त महिलाओं के लिए एकीकृत राहत और पुनर्वास गृह है। इसका उद्देश्य संकट की स्थिति में महिलाओं के लिए सुरक्षित और सक्षम वातावरण बनाना है, ताकि वे कठिन परिस्थितियों से बाहर आ सकें। आज की तारीख में, देश भर में 404 शक्ति सदन काम कर रहे हैं और वर्तमान में 29,315 महिलाओं को सहायता दी गई और पुनर्वास दिया गया है। किन जगहों पर अतिरिक्त ओएससी स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है ? दरअसल ओएससी योजना आश्‍वयकता के आधार पर काम करती है इसलिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रत्येक जिले में कम से कम एक ओएससी स्थापित करने और उन जिलों में अतिरिक्त ओएससी स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है, जिनमें महिलाओं के खिलाफ अपराध की दर अधिक है या जिनका भौगोलिक क्षेत्र बड़ा है और जो आकांक्षी जिलों में गिने जाते हैं। सरकार ओएससी में नियुक्ति एवं भर्ती के लिए 100 प्रतिशत वित्तीय सहायता प्रदान करती है गौरतलब हो, केंद्र सरकार राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों को प्रति ओएससी 13 जनशक्ति संसाधनों की नियुक्ति एवं भर्ती के लिए 100 प्रतिशत वित्तीय सहायता प्रदान करती है। ओएससी योजना का समग्र कार्यान्वयन राज्य सरकारों व केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासन के पास है।  

दुर्गाडी किला मंदिर या मस्जिद आया फैसला सब कुछ हुआ साफ, 48 साल पुराने विवाद पर कोर्ट का निर्णय

मुंबई  48 साल बाद कल्याण के ऐतिहासिक दुर्गाडी किले को लेकर बड़ा फैसला आया है। कल्याण सिविल कोर्ट ने दुर्गाडी के अंदर ईदगाह (प्रार्थना स्थल) के स्वामित्व का दावा करने वाले एक मुस्लिम ट्रस्ट के दायर मुकदमे को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार के पक्ष में फैसला सुनाया है। सिविल जज सीनियर डिवीजन एएस लांजेवार ने कहा कि यह निर्धारित किया गया है कि ट्रस्ट का दावा अमान्य है क्योंकि वह कथित बेदखली के बाद तीन साल की अवधि के भीतर मुकदमा दायर करने में विफल रहा, जो कि सीमा अधिनियम के तहत आवश्यक है। दुर्गाडी किले में स्थित दुर्गाडी मंदिर और ईदगाह के स्वामित्व को लेकर कानूनी लड़ाई 1976 से चल रही है। मजलिश-ए-मुशावरीन मजीद ट्रस्ट ने मुकदमा दायर किया था। दुर्गाडी नमाज स्थल पर मुस्लिम समुदाय की दायर याचिका को मंगलवार को एक सिविल कोर्ट ने खारिज कर दिया और इसे ठाणे कलेक्टर (महाराष्ट्र सरकार) की भूमि घोषित कर दिया। बॉम्बे हाई कोर्ट जाएगा मुस्लिम ट्रस्ट ट्रस्ट अधिकारियों ने कहा कि वे इस आदेश के खिलाफ बॉम्बे हाई कोर्ट में अपील करेंगे। महाराष्ट्र में यह विवाद सबसे पहले दिवंगत बालासाहेब ठाकरे ने उठाया था। बाद में शिवसेना के पदाधिकारी आनंद दिघे ने यह मुद्दा उठाया। आनंद दिखे से उनके शिष्य एकनाथ शिंदे ने इस मुद्दे को लेकर मुखर थे। महाराष्ट्र सरकार को दिया स्वामित्व मुस्लिम ट्रस्ट के दावों को खारिज किए जाने के बाद, केस लड़ रहे हिंदू संगठनों के नेताओं के साथ-साथ शिवसेना, भारतीय जनता पार्टी और शिवसेना यूबीटी के नेताओं ने अदालत के फैसले पर खुशी जताई। चूंकि दुर्गाडी किला ऐतिहासिक और प्राचीन है, इसलिए महाराष्ट्र सरकार ने 1971 में इसे विरासत संपत्ति घोषित किया था। इसके साथ ही, दुर्गाडी किले का कब्जा और स्वामित्व राज्य सरकार के पास रहेगा। पट्टे पर लिया था परिसर, बन गए मालिक ट्रस्ट चाहता था कि सरकार दुर्गाडी ईदगाह और मंदिर को अपनी संपत्ति घोषित करे, क्योंकि 1968 तक स्थानीय मुस्लिम समुदाय इसका सक्रिय रूप से नमाज के लिए उपयोग करते थे। मुकदमे के अनुसार, उस समय सरकार ने कल्याण नगर परिषद को परिसर पट्टे पर दिया था। श्री दुर्गाडी देवी उत्सव समिति कल्याण और कल्याण शहर के कुछ हिंदू नागरिकों ने सिविल कोर्ट में एक आवेदन दायर किया था। इस बीच, 2018 में मुस्लिम ट्रस्ट ने कल्याण सिविल कोर्ट में इस दावे को वक्फ बोर्ड, औरंगाबाद (संभाजीनगर) को हस्तांतरित करने के लिए एक आवेदन दायर किया। इस वाद में उन्होंने दावा किया गया कि उनके दावों पर निर्णय लेने का अधिकार वक्फ बोर्ड के अंतर्गत आता है। ‘मंदिर को मुसलमानों ने बनाया मस्जिद’ मजिस्ट्रेट कोर्ट ने उक्त आवेदन पर एक आदेश पारित किया और मामले को वक्फ बोर्ड को हस्तांतरित करने के उनके दावे को खारिज कर दिया। हिंदू मंच के अध्यक्ष दिनेश देशमुख का दावा है कि उपलब्ध अभिलेखों से पता चलता है कि दुर्गाडी किले पर एक दुर्गा मंदिर है। मुसलमान इसे ईदगाह कहते हैं, वह वास्तव में किले की दीवार है। बालासाहेब ठाकरे को दिया श्रेय भाजपा विधायक रवींद्र चव्हाण ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि उन्हें उम्मीद है कि आने वाले दिनों में राज्य सरकार इस मामले पर अदालत के आदेश को लागू करेगी। शिवसेना और सेना यूबीटी के स्थानीय पदाधिकारियों ने भी इस फैसले का स्वागत किया। उन्होंने दावा किया कि कानूनी लड़ाई के अनुकूल परिणाम का श्रेय दिवंगत बालासाहेब ठाकरे को जाता है। क्‍या है पूरा मामला इस जगह पर 1968 तक मंदिर और मस्जिद दोनों का इस्तेमाल दोनों समुदाय करते थे, लेकिन इसके बाद विवाद हो गया. इसके बाद साल 1967 में यहां पूजा करने पर भी रोक लगा दी गई. महाराष्ट्र सरकार ने 1968 में दुर्गाडी किले को लेकर आदेश जारी क‍िया. राज्य सरकार के आदेश के मुताबिक, मुस्लिम पक्ष को केवल दो दिन रमजान ईद और बकरीद पर नमाज अदा करने का आदेश दिया. फिर 1976 में मजलिस नामक एक मुस्लिम संगठन ने दावा दायर किया कि सदर किला एक मंदिर नहीं बल्कि एक मस्जिद है. दावा कई वर्षों से लंबित था. बाद में मजलिस ने जमीन को वक्फ संपत्ति घोषित कर दिया. मजलिस के दावे के खिलाफ अदालत करीब 48 साल से सुनवाई कर रही थी. इसके बाद कोर्ट ने राज्य सरकार के पक्ष में फैसला सुनाया.

ईरान के नए हिजाब कानून से हिली दुनिया, सजा सुनकर उड़े महिलाओं के होश!

तेहरान ईरान सरकार हिजाब को लेकर सख्त होती जा रही है. ईरान के नए शुद्धता और हिजाब कानून की पत्रकारों और एक्टिविस्टों की ओर से अलोचना की जा रही है. जिसके अंदर उल्लंघन करने वालों को मृत्युदंड और कोड़े मारने जैसी कठोर सजाएं दी जा सकती हैं. नए हिजाब कानून को सितंबर 2023 में संसद में पारित किया गया था और एक साल बाद गार्जियन काउंसिल द्वारा इसे अंतिम रूप दिया गया है. इस कानून में हिजाब को अनिवार्य बनाने के लिए कठोर दंड का प्रावधान है, जिसमें भारी जुर्माना, लंबी जेल की सजा और रोजगार और शिक्षा पर प्रतिबंध शामिल हैं. शुक्रवार को मानवाधिकार एडवोकेट शदी सद्र ने नए कानून के चरम प्रावधानों के बारे में बताया, इनमें से एक प्रावधान न्यायपालिका को विदेशी संस्थाओं के साथ मिलकर नग्नता, पर्दा डालने या अनुचित पोशाक पहनने के आरोपी व्यक्तियों को मौत की सजा देने का अधिकार देता है. इसके अलावा ऐसे कृत्यों को ‘धरती पर भ्रष्टाचार” के तौर पर देखता है. हिजाब न पहनने पर हो सकती है मौत की सजा रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स से जुड़ी फ़ार्स न्यूज़ की रिपोर्ट के मुताबिक नए हिजाब और शुद्धता कानून के एक खंड में लिखा है, “कोई भी व्यक्ति जो विदेशी सरकारों, नेटवर्क, मीडिया आउटलेट, समूहों या राज्य के प्रति शत्रुतापूर्ण संगठनों, या उनसे जुड़े व्यक्तियों के साथ मिलकर, या संगठित तरीके से नग्नता, अनैतिकता, पर्दा हटाने या अनुचित पोशाक को बढ़ावा देने या विज्ञापन देने में संलग्न है, उसे चौथी डिग्री कारावास और तीसरी डिग्री जुर्माने की सजा दी जाएगी, जब तक कि उनका अपराध इस्लामी दंड संहिता के अनुच्छेद 286 के अंतर्गत न आता हो.” इस्लामी दंड संहिता का आर्टिकल 286 ‘पृथ्वी पर भ्रष्टाचार फैलाने’ को परिभाषित करता है, जिसके लिए मृत्यु दंड दिया जा सकता है. यदि अधिकारी हिजाब उल्लंघन को इस अनुच्छेद के अंतर्गत मानते हैं, तो इसके लिए मृत्यु दंड दिया जा सकता है. कोड़े मारने की सजा दूसरा प्रावधान में हिजाब नियमों का पालन न करने पर कोड़े मारना एक दंड शामिल है जो नए कानून में भी बना रहेगा, जिसमें महिलाओं, ट्रांस व्यक्तियों और गैर-बाइनरी लोगों को लक्षित किया जाता है. पत्रकारों और एक्टिविस्टों का विरोध इस कठोर कानून के खिलाफ 140 से ज्यादा पत्रकारों ने आवाज़ उठाई है, इसे नागरिक अधिकारों का उल्लंघन और प्रेस की स्वतंत्रता पर हमला बताया है. दूसरी और महिला अधिकारों पर बात करने वाले संगठन पहले से ईरान पर और कड़े प्रतिबंध लगाने की मांग कर रहे हैं. पत्रकार और महिला अधिकार कार्यकर्ता मसीह अलीनेजाद ने इस कानून को महिलाओं को कुचलने, उनकी आवाज़ दबाने और समानता की लड़ाई को खत्म करने का सोचा-समझा हथियार” बताया है. उन्होंने कहा, “यह कोई कानून नहीं है; यह आतंक का एक हथियार है.” रिपोर्ट के मुताबिक विदेशी मीडिया या संगठनों में हिजाब विरोधी विचारों को बढ़ावा देने के आरोपी लोगों को 10 साल तक की जेल की सजा मिलेगी। साथ ही 12,500 पाउंड तक का जुर्माना भी भरना पड़ सकता है। इसके अलावा कानून का उल्लंघन करने वाली महिलाओं की गिरफ्तारी को रोकने या हस्तक्षेप करने की कोशिश करने वाले लोगों को भी नहीं बख्शा जाएगा। ईरान की सरकार ऐसे लोगों को सीधे जेल में डाल सकती है। ईरान के मुताबिक नए कानूनों का उद्देश्य हिजाब की संस्कृति की पवित्रता को बनाए रखना है। ईरान ने कहा है कि ढंग से कपड़े ना पहनने, नग्नता को बढ़ावा देने या चेहरे को ढकने का विरोध करने पर कठोर से कठोर सजा दी जाएगी। गौरतलब है कि 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद से ईरान ने महिलाओं को सार्वजनिक जगहों पर बाल ढकने का कानून लागू किया है। 2022 में इन कानूनों के विरोध में देश भर में प्रदर्शन हुए थे। ईरान में 16 सितंबर, 2022 को 22 वर्षीय कुर्द महिला महसा अमिनी की पुलिस हिरासत में मौत हो गई थी। महसा को तेहरान में तैनात मोरल पुलिस ने देश के ड्रेस कोड का उल्लंघन करने के आरोप में गिरफ्तार किया था। उसकी मौत के बाद पूरे देश में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए थे। इन प्रदर्शनों में कई सुरक्षाकर्मियों सहित सैकड़ों लोगों की मौत हो गई थी। तब ईरानी सरकार ने इन प्रदर्शनों को रोकने के लिए हजारों प्रदर्शकारियों को गिरफ्तार किया था। अब इसके दो साल बाद पहले से भी ज्यादा सख्त कानून लागू किए गए हैं।  

आज सरकार ने नवंबर में महंगाई दर के आंकड़े जारी किए, महीने में दर गिरकर 5.48 फीसदी रह गई है

नई दिल्ली महंगाई (Inflation) के मोर्चे पर भारत के लिए अच्छी खबर आई है. गुरुवार को सरकार ने नवंबर में महंगाई दर के आंकड़े जारी किए, जो देश की जनता के लिए राहत भरे हैं. दरअसल, अक्टूबर महीने में खुदरा महंगाई (Retail Inflation) तेजी से बढ़ते हुए 6 फीसदी के पार निकल गई थी, लेकिन नवंबर महीने में ये गिरकर 5.48 फीसदी रह गई है. सरकार ने बताया कि खाद्य पदार्थों, खासकर सब्जियों की कीमतों में आई नरमी के चलते महंगाई घटी है. बुधवार को ही RBI के गवर्नर का पद संभालने वाले संजय मल्होत्रा के लिए ये पहली गुड न्यूज है. गौरतलब है कि आरबीआई ने महंगाई दर को 4-6 फीसदी के दायरे में रखने का लक्ष्य तय किया है और नवंबर में ये फिर 6 फीसदी से नीचे आ गई है. अक्टूबर में 14 महीने के हाई पर थी महंगाई भारत की खुदरा महंगाई दर (Retail Inflation) इससे पिछले अक्टूबर में बढ़कर 6.21% पर पहुंच गई थी. जो कि सितंबर में 5.49% थी. ऐसा माना जा रहा था कि त्‍यौहारी सीजन में हाई फूड प्राइस के कारण महंगाई दर में इजाफा हुआ है. अगस्त 2023 के बाद यह पहली बार था जब महंगाई भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की 6% की सहनीय सीमा को पार कर गई. सितंबर में मुद्रास्फीति जुलाई के बाद पहली बार RBI के मध्यम अवधि के लक्ष्य 4% को पार कर गई, जो 5.49% तक पहुंच गई थी. यानी कि महंगाई में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है, जो आम लोगों की जेब पर असर डाल रहा है. सब्जियों-दाल के दाम घटे राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) द्वारा जारी CPI Data को देखें, तो  नवंबर में खाद्य वस्तुओं की महंगाई दर घटकर 9.04 फीसदी पर आ गई, जो कि अक्टूबर महीने में 10.87 फीसदी पर पहुंच गई थी. वहीं बीते साल नवंबर 2023 में ये 8.70 फीसदी थी. एनएसओ के मुताबिक, नवंबर 2024 के दौरान सब्जियों, दालों और फूड प्रोडक्ट्स, चीनी और मिठाई, फलों, अंडों, दूध  मसालों की कीमतों में बड़ी गिरावट देखने को मिली है. नवंबर महीने में अनाज की महंगाई दर 6.88 फीसदी दर्ज की गी, जो कि अक्टूबर में 6.94 फीसदी थी. दालों की अगर बात करें, तो इन पर महंगाई दर 7.43 फीसदी से घटकर 5.41 फीसदी पर आ गई. जुलाई-अगस्त में नरमी, फिर आया था उछाल बता दें कि सीपीआई आधारिक रिटेल महंगाई दर जुलाई-अगस्त महीने में औसतन 3.6 फीसदी के स्तर पर था, लेकिन फिर सितंबर महीने में ये उछलकर 5.5 फीसदी पर पहुंची और अक्टूबर महीने में ये आरबीआई का तय दायका तोड़ते हुए 6.21 फीसदी पर पहुंच गई थी.  

मोदी सरकार के वन नेशन-वन इलेक्शन बिल को कैबिनेट से मिली मंजूरी

 नई दिल्ली एक देश, एक चुनाव के विधेयक को गुरुवार को मोदी सरकार ने कैबिनेट बैठक में मंजूरी दे दी है. सूत्रों का कहना है कि अब सरकार इस बिल को सदन के पटल पर रख सकती है. ये विधेयक अगले सप्ताह इसी शीतकालीन सत्र में लाए जाने की संभावना है. सबसे पहले जेपीसी की कमेटी का गठन किया जाएगा और सभी दलों के सुझाव लिए जाएंगे. अंत में यह विधेयक संसद में बिल लाया जाएगा और इसे पास करवाया जाएगा. इससे पहले रामनाथ कोविंद की कमेटी ने सरकार को एक देश, एक चुनाव से जुड़ी अपनी रिपोर्ट सौंपी थी. राजनीतिक दलों से चर्चा करेगी जेपीसी सूत्रों का कहना है कि लंबी चर्चा और आम सहमति बनाने के लिए सरकार इस विधेयक को संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के पास भेजने की योजना बना रही है. जेपीसी सभी राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ विस्तृत चर्चा करेगी और इस प्रस्ताव पर सामूहिक सहमति की जरूरत पर जोर देगी. देश में अभी अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग समय पर चुनाव होते हैं. यह विधेयक कानून बनने के बाद देश में एक साथ चुनाव कराए जाने की तैयारी है. हालांकि, इस सरकार के इस कदम का कांग्रेस और AAP जैसी कई इंडिया ब्लॉक की पार्टियों ने विरोध किया है. विपक्ष ने आरोप लगाया है कि इससे केंद्र में सत्तारूढ़ पार्टी को फायदा होगा. नीतीश कुमार की जेडी(यू) और चिराग पासवान जैसे प्रमुख NDA सहयोगियों ने एक साथ चुनाव कराए जाने का समर्थन किया है. क्या है सरकार की तैयारी? सूत्रों ने बताया कि सभी राज्य विधानसभाओं के अध्यक्षों को बुद्धिजीवियों, विशेषज्ञों और सिविल सोसायटी के सदस्यों के साथ अपने विचार साझा करने के लिए कहा जाएगा. इसके अतिरिक्त, आम जनता से भी सुझाव मांगे जाएंगे, जो निर्णय लेने की प्रक्रिया में समावेशिता और पारदर्शिता को बढ़ाएंगे. विधेयक के प्रमुख पहलुओं में इसके लाभ और देशभर में एक साथ चुनाव कराने के लिए जरूरी कार्यप्रणाली पर विचार-विमर्श किया जाएगा. संभावित चुनौतियों का समाधान किया जाएगा और विविध दृष्टिकोणों को एकत्रित किया जाएगा. ‘एक देश, एक चुनाव’ को बार-बार होने वाले चुनावों से जुड़ी लागत और व्यवधानों को कम करने के लिए एक महत्वपूर्ण सुधार के रूप में देखा जा रहा है. हालांकि सरकार चाहती है कि इस विधेयक को लेकर व्यापक समर्थन हासिल किया जाए. हालांकि, इस प्रस्ताव पर राजनीतिक बहस भी बढ़ सकती है. विपक्षी दल इसकी व्यवहार्यता के बारे में सवाल उठा सकते हैं.  

टेक्सास में प्लेन की क्रैश लेंडिंग रनवे की जगह सड़क पर उतर गया, हुए दो टुकड़े

टेक्सास  अमेरिका के टेक्सास में दो इंजन वाला एक छोटा विमान रनवे की जगह सड़क पर उतर गया। सड़क पर लैंड करते ही विमान के दो टुकड़े हो गए। हादसे में  4 लोग घायल हो गए हैं। घटना बुधवार की है। विमान ने सड़क पर चल रहे तीन कारों को टक्कर भी मारी। हादसे के बाद सड़क पर विमान का मलबा बिखड़ गया। चार लोग हुए घायल, तीन की हालत खतरे से बाहर हादसे का शिकार हुआ छोटा विमान दो प्रोपेलर इंजन से लैस था। यह बुधवार दोपहर करीब 3 बजे दक्षिण टेक्सास के विक्टोरिया शहर में स्टेट हाईवे लूप 463 पर क्रैश हुआ। चार लोग घायल हुए हैं। उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इनमें से तीन की जान खतरे से बाहर है। एक व्यक्ति गंभीर रूप से घायल है। विक्टोरिया पुलिस विभाग की उप पुलिस प्रमुख एलाइन मोया ने कहा, “हमें खुशी है कि स्थिति इससे ज्यादा खराब नहीं हुई। यह ऐसी चीज नहीं है जो हम हर दिन देखते हैं। हमें खुशी है कि लोग ठीक हैं। उनका इलाज चल रहा है।” सोशल मीडिया पर वायरल हुआ विमान हादसे का वीडियो विमान हादसे को सड़क पर मौजूद पर्यवेक्षकों ने कैमरे ने कैद कर लिया है। इसमें विमान को सड़क पर उतरते और फिर दो टुकड़े होने के बाद की स्थिति को देखा जा सकता है। वीडियो सोशल मीडिया पर खूब शेयर किया जा रहा है। इसमें दिख रहा है कि विमान बेहद कम ऊंचाई पर उड़ते हुए सड़क पर उतरता है। अगले ही पल वह दो टुकड़े हो जाता है और सड़क पर मलबा बिखर जाता है। हादसे का शिकार हुआ विमान दो इंजन वाला Piper PA-31 था। विक्टोरिया पुलिस विभाग और संघीय विमानन प्रशासन (एफएए) ने दुर्घटना की जांच शुरू कर दी है। फ्लाइटअवेयर की रिपोर्ट के अनुसार विमान ने सुबह 9:52 बजे विक्टोरिया क्षेत्रीय हवाई अड्डे से उड़ान भरी थी। यह दुर्घटना से पहले करीब पांच घंटे तक हवा में रहा।

जम्मू-कश्मीर समेत चार राज्यों में NIA की रेड, 19 जगहों पर चल रही रेड

श्रीनगर राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) ने पाकिस्तान के आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद की युवाओं को कट्टरपंथी बनाने और देश में आतंक फैलाने की साजिश की जांच के तहत बृहस्पतिवार को कई राज्यों में छापे मारे। केंद्र शासित प्रदेश जम्मू कश्मीर के अलावा उत्तर प्रदेश सहित चार राज्यों में 19 स्थानों पर छापे मारे जा रहे हैं।

वैश्विक अस्थिरता के बीच भारत की आर्थिक वृद्धि दर वित्त वर्ष 2025-26 में 7 प्रतिशत रहने का अनुमान

नई दिल्ली वैश्विक अस्थिरता के बीच भारत की आर्थिक वृद्धि दर वित्त वर्ष 2025-26 में 7 प्रतिशत रहने का अनुमान है। यह जानकारी जारी हुई एक्सिस बैंक की रिसर्च रिपोर्ट में दी गई। रिपोर्ट में बताया गया कि चक्र में बदलाव से भारत की विकास दर एक बार फिर से बढ़ जाएगी। रिपोर्ट के अनुसार, हमारे नजरिए से भारतीय अर्थव्यवस्था में वित्त वर्ष 2024-25 की पहली छमाही में ग्रोथ में आई कमी चक्रीय है। इसकी वजह मौद्रिक नीति में सख्ती और व्यापक स्थिरता पर ध्यान होने से क्रेडिट ग्रोथ को नुकसान होना है। हालांकि, राजकोषीय खर्च बढ़ने और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा सीआरआर में कटौती से वृद्धि दर को सहारा मिलेगा। रिपोर्ट में बताया गया कि भारत में राजनीतिक स्थिरता से भी वृद्धि दर को सहारा मिलेगा और वित्त वर्ष 26 में भारत की वृद्धि दर 7 प्रतिशत रह सकती है। रिपोर्ट के मुताबिक, वैश्विक स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। मौजूद समय में वैश्विक अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर स्थिर रहने का अनुमान है। हालांकि, 20 जनवरी के बाद डोनाल्ड ट्रंप द्वारा राष्ट्रपति पद का कार्यभार संभालने के बाद नीतिगत बदलाव होने की संभावना है। साथ ही बताया कि वैश्विक व्यापार और वित्तीय बाजारों में अनिश्चितता बने रहने की संभावना है। रिपोर्ट के अनुसार, कैलेंडर वर्ष 25 में वैश्विक वृद्धि दर वर्तमान में कैलेंडर वर्ष 24 के समान ही 3.2 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जो पूर्व-कोविड स्तरों से 30-40 आधार अंक कम है। इससे पहले एक अन्य रिपोर्ट में एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स ने कहा था कि वित्त वर्ष 25 में भारतीय अर्थव्यवस्था 6.8 प्रतिशत की दर से बढ़ सकती है। वहीं, वित्त वर्ष 26 में यह दर 6.9 प्रतिशत रहने का अनुमान है। वैश्विक क्रेडिट रेटिंग्स एजेंसी की रिपोर्ट में कहा गया कि वित्त वर्ष 27 में जीडीपी वृद्धि दर बढ़कर 7 प्रतिशत रहने का अनुमान है। इसके अलावा कहा कि चालू वित्त वर्ष के साथ ही आने वाले वर्षों में भी भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती हुई अर्थव्यवस्था बना रहेगा।

वैक्यूम ट्यूब और प्रेशराइज्ड व्हीकल तकनीक से न्यूयॉर्क-लंदन का सफर मात्र 54 मिनट में होगा पूरा, 19 ट्रिलियन डॉलर का सपना होगा पूरा?

वॉशिंगटन अमेरिका और यूके के बीच हवाई यात्रा करने में 8 घंटे का समय लगता है। लेकिन कल्पना कीजिए यह यात्रा आप एक ही घंटे में पूरी कर सकें। एक प्रस्तावित ट्रांसअटलांटिक टनल न्यूयॉर्क और लंदन को जोड़ेगी और यह भविष्य की एक शानदार योजना हो सकती है। 4828 किमी लंबी ट्रांस-अटलांटिक ट्रेन सुरंग बनाने का कॉन्सेप्ट सामने आया है। संभव है कि किसी दिन टेक्नोलॉजी इतनी आगे पहुंच जाए कि यह कॉन्सेप्ट सच हो जाए। यह प्रस्ताव नया नहीं है, लेकिन इसके निर्माण की लंबाई और आवश्यक धनराशि के कारण इसे एक बार असंभव माना गया था। वैक्यूम ट्यूब टेक्नोलॉजी से लेकर प्रेशर व्हीकल का विकास हुआ है। ऐसे में एक बड़ी कीमत के साथ यह कॉन्सेप्ट सच साबित हो सकता है। हवाई यात्रा से दोनों शहरो के बीच 8 घंटे के सफर की तुलना में सिर्फ 54 मिनट का सफर पूरा करना बेहद आकर्षक लग सकता है। लेकिन इसकी लागत ही सुरंग बनने के रास्ते का रोड़ा है। बनाने में कितना आएगा खर्च इस सुरंग की अनुमानित लागत 19.8 ट्रिलियन डॉलर है। फ्रांस और इंग्लैंड को जोड़ने वाली चैनल टनल 37.8 किमी लंबी है, जो छह साल में बनकर तैयार हुई। लेकिन न्यूयॉर्क और लंदन को जोड़ने वाली इस सुरंग को बनाने में बहुत अधिक समय और धन लगेगा। यह पर्यावरण के अनुकूल भी हो सकता है और हवाई यात्रा से होने वाले भारी वायु प्रदूषण में कटौती कर सकता है। वहीं जिस तरह की ट्रेनों का कॉन्सेप्ट दिया गया है उसके रास्ते में हवा प्रतिरोध नहीं होगा, जिस कारण इसकी गति 4828 किमी प्रति घंटे तक हो सकती है। वैक्यूम के कारण तेज चलेगी ट्रेन? यह टेक्नोलॉजी सुपरलूप ट्रेनों की तरह है, जिसका स्विस इंजीनियरों ने परीक्षण किया और दावा किया कि यह यात्रा का भविष्य बदल सकता है। वर्षों से कई और लोगों ने हाइपरलूप ट्रेन विकसित करने की कोशिश की है, जिसमें नाकामयाबी मिली है। सबसे बड़ी बाधा वैक्यूम सिस्टम, कैप्सूल प्रोपल्शन सिस्टम, स्केलेबिलिटी, सुरक्षा और आर्थिक व्यवहार्यता को बनाए रखना शामिल है।

टोक्यो में बर्थ रेट यानी में सुधार लाने के लिए एक नई पहल शुरू,अब लोगों को सप्ताह में सिर्फ चार दिन ही काम करना होगा

टोक्यो जापान की राजधानी टोक्यो में बर्थ रेट यानी प्रजनन दर में सुधार लाने के लिए एक नई पहल शुरू की गई है. अगले साल से ऑफिस में यहां 4-वर्किंग डेज के नियम लागू किए जाएंगे. मसलन, अब लोगों को सप्ताह में सिर्फ चार दिन ही काम करना है. टोक्यो गवर्नर युरिको कोइके ने ऐलान किया कि अगले साल अप्रैल महीने से कर्मचारियों के पास ऑप्शन होगा कि वे सप्ताह में तीन दिन ऑफ ले सकेंगे. मसलन, पिछले कुछ सालों में देखा गया है कि लोग अपने बच्चों के पालन-पोषण के चलते बीच में ही अपना करियर छोड़ने को मजबूर हो जाते हैं. लोगों के बच्चे पैदा न करने के पीछे यह भी एक बड़ा कारण माना जाता है. बीते कुछ सालों की नीतियों की वजह से देश का प्रजनन दर बेहद खराब हुआ है. इसमें सुधार लाने की लिए स्थानीय प्रशासन कई नए तरीके अपनाते रहा है. ताकि किसी को अपना करियर न छोड़ना पड़े गवर्नर कोइके ने कहा, “इस दौरान हम काम के तरीके, फ्लेग्सिबिलिटी लाएंगे और यह सुनिश्चित करेंगे कि किसी को बच्चे को जन्म देने या फिर बच्चे की केयर करने की वजह से अपना करियर न छोड़ना पड़े. यह पहल जापानी जोड़ों के बीच बच्चों के जन्म को प्रोत्साहित करने के लिए है. टोक्यो प्रशासन के मुताबिक, यह योजना उन माता-पिता के लिए भी सहायक होगी जिनके बच्चे प्राथमिक विद्यालय में हैं, उन्हें कम काम करने का विकल्प मिलेगा जिससे उनकी तनख्वाह में भी संतुलित कटौती होगी. जापान का जन्म दर पिछले साल, जापान में मात्र 727,277 जन्म दर्ज किए गए. बताया जाता है कि यह कमी देश की ओवरटाइम वर्क कल्चर का नतीजा है, जो महिलाओं को करियर और परिवार के बीच चुनने के लिए मजबूर करती है. वर्ल्ड बैंक के डेटा के मुताबिक, जापान में लिंग रोजगार विषमता अन्य सम्पन्न राष्ट्रों से अधिक है, जहां महिलाओं की भागीदारी 55% और पुरुषों की 72% है. चार दिन के वर्कवीक की रूपरेखा को 2022 में 4 डे-वीक ग्लोबल द्वारा वैश्विक स्तर पर आजमाया गया था. इसमें शामिल कर्मचारियों के 90% से अधिक ने इस शेड्यूल को बनाये रखने की इच्छा जाहिर की. अन्य एशियाई राष्ट्र, जैसे सिंगापुर ने भी लचीले काम के घंटे देने पर जोर दिया है.  

असम: आंगनवाड़ी कार्यकर्ता की बेटी का कमाल, अब बनी PCS अधिकारी, बचपन में पिता ने नहीं अपनाया

नई दिल्ली असम लोक सेवा आयोग (APSC) द्वारा पिछले हफ्ते ही राज्य सिविल सेवा परीक्षा के नतीजों की घोषणा की गई थी। इस परीक्षा में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता की बेटी दीक्षा ने आठवां स्थान हासिल किया है। दीक्षा ने अपने जीवन में कई कठिन परिस्थियों को देखा है। बताया जाता है कि वित्तीय बाधाओं के कारण दीक्षा की मां उनको उच्च शिक्षा के लिए राज्य से बाहर नहीं भेज पाई थीं। इसके बावजूद भी उन्होंने शानदर सफलता हासिल की है। कठिनाईयों से भरा रहा है कि दीक्षा का जीवन दरअसल, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता बेबी सरकार ने जब एक बटी को जन्म दिया, उसके बाद उनके ससुराल वालों ने उन्हें स्वीकार करने से इनकार कर दिया। बेबी सरकार के पति लड़का चहते थे, जो आगे चलकर परिवार का उत्तारधिकारी बने। बताया जाता है कि बेबी सरकार के ससुराल वालों को जब पता चला कि बेटी दीक्षा का जन्म पास के अस्पताल में हुआ है, तो उन्होंने नवजात शिशु को देखने से मना कर दिया। इसके बाद हालात इतने बिगड़ गए कि बेबी सरकार अपनी एक महीने की बेटी के साथ अपने पति और उसके परिवार को छोड़कर बांग्लादेश सीमा के पास श्रीभूमि (पूर्व में करीमगंज) में डाकबंगला रोड पर एक मामूली दो कमरों के किराये के मकान में रहने लगीं। मां की दृढ़ता ने पेश की मिसाल आंगनवाड़ी कार्यकर्ता ​​बेबी सरकार उनकी बेटी दीक्षा की मेहनत ने एक शानदार उपलब्धि हासिल की है। बेबी सरकार ने कहा कि मुझे अपनी बेटी की अविश्वसनीय उपलब्धियों पर बहुत गर्व है। उसने अपनी कड़ी मेहनत और समर्पण से हमारे श्रीभूमि जिले को बहुत खुशी और गौरव दिलाया है। ​​दीक्षा की मां ने अपनी बेटी को उच्च शिक्षा के लिए राज्य से बाहर नहीं भेज पाई, जबकि उसने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय और भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान, जो देश के दो शीर्ष रैंक वाले संस्थान हैं, में प्रवेश लिया था। गुवाहाटी में ही की स्नातक की पढ़ाई टाइम्स ऑफ इंडिया को दिए एक इंटरव्यू में दीक्षा ने कहा,”शुरू में मैंने करीमगंज कॉलेज में एडमिशन लिया था, लेकिन देवघर (झारखंड) से मेरे गुरुदेव ने मुझे अच्छे प्रदर्शन के लिए गुवाहाटी में स्नातक की पढ़ाई करने की सलाह दी।” सत्संग आश्रम की एक समर्पित अनुयायी, वह कॉटन यूनिवर्सिटी में एडमिशन लेने के लिए 2019 में गुवाहाटी चली गई। जब वहां सीटें खाली मिलीं, तो उसने शहर के प्राग्ज्योतिष कॉलेज में दाखिला ले लिया। उन्होंने बताया कि मैंने अपना पूरा बचपन श्रीभूमि में अपनी मां के साथ बिताया। उनकी देखभाल करना हमेशा मेरी सर्वोच्च प्राथमिकता रही है और मैं अपने गृह राज्य की सेवा करके खुश हूं। बता दें कि दीक्षा ने असम को आंशिक रूप से अपनी मां के अकेलेपन के कारण चुना। दीक्षा की सफलता पर एपीएससी के अध्यक्ष भारत भूषण देव चौधरी ने कहा कि वह साधारण रूप से प्रतिभाशाली हैं। सुलह का प्रयास कर रहे ससुराल वाले गौरतलब है कि जब दीक्षा की सफलता की खबर फैली, उसके बाद उसके पिता के परिवार ने सुलह का प्रयास किया। जानकारी के अनुसार दीक्षा के मामा ने उसकी मां से संपर्क किया और पिछली घटनाओं पर खेद व्यक्त किया। हालांकि, दीक्षा की मां ने उनके प्रस्तावों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। दीक्षा ने कहा कि मेरे पिता के सबसे बड़े भाई ने मेरी माँ को फ़ोन किया और कहा कि वह (दीक्षा) हमारे परिवार की सबसे छोटी संतान है और उसने हमारे जिले को बहुत सम्मान दिलाया है। कृपया हमसे संबंध न तोड़ें। हम सब एक परिवार हैं। हालांकि, मेरी मां ने उनकी किसी भी विनती को स्वीकार नहीं किया। दीक्षा ने मां की बड़ी बहन के लिए की ये बात जानकारी दें कि दीक्षा ने अपनी मां की बड़ी बहन के प्रति गहरा आभार व्यक्त किया है। दीक्षा की मां की बड़ी बहन ने उनकी कोचिंग और शैक्षणिक गतिविधियों के लिए 3 लाख रुपये का ऋण प्राप्त किया। ऐसा इसलिए क्योंकि दीक्षा की मां अपनी मामूली आय के कारण किसी भी ऋण के लिए पात्र नहीं थी।

केंद्रीय मंत्री ने बताया मिशन मून का पूरा प्लान- ‘2035 तक भारत के पास होगा अपना स्पेस स्टेशन’

नई दिल्ली अंतरिक्ष के क्षेत्र में भारत लगातार नए अध्याय लिख रहा है। भारत को कई अंतरिक्ष के मिशन में सफलता हाथ लगी है। आने वाले वर्षों में कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं निर्धारित की गई हैं। इसको लेकर अपना देश आगे बढ़ रहा है। इस बीच केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी और अंतरिक्ष राज्य मंत्री, जितेंद्र सिंह ने बड़ा एलान किया है। केंद्रीय मंत्री ने दिल्ली में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान कहा कि भारत 2035 तक अपना अंतरिक्ष स्टेशन स्थापित कर लेगा। वहीं, 2040 तक चंद्रमा पर एक भारतीय अंतरिक्ष यात्री को उतारने के महत्वाकांक्षी लक्ष्य पर काम चल रहा है। उन्होंने कहा कि ये विकास वैश्विक विज्ञान और प्रौद्योगिकी में भारत के बढ़ते नेतृत्व को रेखांकित करते हैं। भारत के पास होगा अपना स्पेस स्टेशन केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी और अंतरिक्ष राज्य मंत्री, जितेंद्र सिंह ने कहा,” हम 2035 तक अपना खुद का अंतरिक्ष स्टेशन बनाने जा रहे हैं। इसे भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन के नाम से जाना जाएगा। इसके अलावा, 2040 तक हम एक भारतीय को चंद्रमा पर उतार सकते हैं।” केंद्रीय मंत्री ने इस बात पर भी जोर दिया कि भारत अपने पहले मानव अंतरिक्ष यान मिशन, गगनयान के लिए भी कमर कस रहा है, जो एक भारतीय अंतरिक्ष यात्री को अंतरिक्ष में भेजेगा। पहले अंतरिक्ष यात्री के 2024 के अंत या 2026 की शुरुआत में अंतरिक्ष की यात्रा करने की उम्मीद है। भारत का यह मिशन यह मिशन भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो देश को मानव अंतरिक्ष उड़ान क्षमता वाले देशों की श्रेणी में शामिल कर देगा। समुद्र से जुड़े मिशन पर भी काम कर रहा भारत गौरतलब है कि अंतरिक्ष अन्वेषण प्रयासों के साथ-साथ भारत महासागर की गहराई का अन्वेषण करने पर भी ध्यान केंद्रित कर रहा है। सरकार के Deep Sea मिशन का उद्देश्य 6,000 मीटर की गहराई पर समुद्र तल का अन्वेषण करने के लिए एक मानव को भेजना है, ये एक ऐसा काम है जो भारत ने पहले कभी नहीं किया है। इसकी जानकारी भी केंद्रीय मंत्री ने दी है। यह मिशन भारत के समुद्री संसाधनों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करेगा, जिससे वैज्ञानिक अनुसंधान और अन्वेषण में इसकी क्षमताएँ और मजबूत होंगी।

इस देश में आयातित सभी वस्तुओं पर भारी यूनिवर्सल टैरिफ लगाने के लिए दृढ़ संकल्पित हैं: जो बाइडेन

वाशिंगटन यूएस प्रेसिडेंट जो बाइडेन ने नव-निर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ नजरिए को ‘एक बड़ी गलती’ बताया। वाशिंगटन स्थित थिंक टैंक ब्रूकिंग्स इंस्टीट्यूशन में दिए भाषण में उन्होंने इस बारे में टिप्पणी की। बाइडेन ने कहा, “ऐसा लगता है कि वह (ट्रंप) इस देश में आयातित सभी वस्तुओं पर भारी यूनिवर्सल टैरिफ लगाने के लिए दृढ़ संकल्पित हैं, इस गलत धारणा के साथ कि अमेरिकी कंज्यूमर के बजाय विदेशी देश टैरिफ का खर्च उठाएगा।” राष्ट्रपति बाइडेन ने कहा, “आपको क्या लगता है कि इसका भुगतान कौन करेगा? मेरा मानना ​​है कि यह नजरिया एक बड़ी गलती है। हमने पिछले चार वर्षों में यह साबित कर दिया है कि यह दृष्टिकोण एक गलती है।” रिपोर्ट के अनुसार, अपने भाषण में अमेरिकी राष्ट्रपति ने ट्रंप से विरासत में मिली अर्थव्यवस्था और कोविड-19 महामारी के बाद उनके प्रशासन के काम पर विचार किया। हाल ही में ट्रंप ने घोषणा की कि वह जनवरी में अपने पदभार ग्रहण करने के पहले दिन ही ऐसे आदेशों पर हस्ताक्षर करेंगे, जिसके तहत मेक्सिको और कनाडा से आने वाले सभी सामानों पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाया जाएगा। यह तब तक लागू रहेगा जब तक कि वे अपने देशों से अमेरिका में अवैध अप्रवासियों और ड्रग्स, खास तौर से फेंटानाइल के प्रवाह को न रोकें। उन्होंने यह भी ऐलान किया कि यदि चीन ने अमेरिका में फेंटेनाइल ड्रग आने से रोकने के लिए निर्णायक कार्रवाई नहीं की तो वह चीन से आने वाले सामानों पर मौजूदा दरों के अतिरिक्त 10 प्रतिशत टैरिफ लगाएंगे।

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