LATEST NEWS

देशद्रोह के आरोप गिरफ्तार पुजारी चिन्मय कृष्ण दास की जमानत याचिका अदालत ने की खारिज

ढाका बांग्लादेश की एक अदालत ने बुधवार को पुजारी चिन्मय कृष्ण दास की जमानत याचिका खारिज कर दी। बांग्लादेश सम्मिलित सनातन जागरण जोत के प्रवक्ता दास को देशद्रोह के आरोप गिरफ्तार किया गया था। स्थानीय मीडिया ने बताया कि चटगांव मेट्रोपोलिटन सेशन जज मोहम्मद सैफुल इस्लाम ने बुधवार को यह आदेश पारित किया। उन्होंने कहा कि याचिका इसलिए खारिज कर दी गई क्योंकि दास के पास अपनी ओर से किसी वकील का लेटर ऑफ अटॉर्नी नहीं था। इसमें यह भी उल्लेख किया गया है कि उनके वकील सुभाशीष शर्मा सुरक्षा कारणों से 3 दिसंबर को सुनवाई में शामिल नहीं हो सके। देश के प्रमुख बंगाली दैनिक प्रथम आलो की रिपोर्ट के अनुसार, “चटगांव मेट्रोपॉलिटन सेशन जज कोर्ट के लोक अभियोजक पीपी मोफिजुल हक भुइयां ने बताया कि राज्य पक्ष ने अदालत को सूचित किया कि वकील रवींद्र घोष, ने दास की ओर से केस लड़ने के लिए कोई पावर ऑफ अटॉर्नी नहीं दी थी।” घोष ने चिन्मय की अग्रिम जमानत की सुनवाई के लिए आवेदन दिया था। रिपोर्ट के मुताबिक चिन्मय के वकील सुभाशीष शर्मा भी मौजूद नहीं थे। सुभाशीष ने केस लड़ने के लिए रवींद्र घोष को लिखित में कुछ भी नहीं दिया। बाद में, अदालत ने वकील रवींद्र घोष द्वारा किए गए आवेदन को खारिज कर दिया। यह पता चला कि मामले में दो अन्य आरोपियों की जमानत पर सुनवाई भी बुधवार को होनी थी, लेकिन वकील की अनुपस्थिति के कारण सुनवाई नहीं हो सकी। भारत ने उम्मीद जताई है कि सुनवाई ‘निष्पक्ष और पारदर्शी’ होगी, क्योंकि गिरफ्तार किए गए हिंदुओं के पास कानूनी अधिकार हैं, जिनका सम्मान किया जाना चाहिए। नई दिल्ली ने ढाका में अंतरिम सरकार के अधिकारियों से हिंदुओं और सभी अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की बार-बार अपील की है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने पिछले महीने कहा था, “अंतरिम सरकार को सभी अल्पसंख्यकों की सुरक्षा की अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए। हम चरमपंथी बयानबाजी, हिंसा और उकसावे की बढ़ती घटनाओं से चिंतित हैं। इन घटनाक्रमों को केवल मीडिया की अतिशयोक्ति के रूप में खारिज नहीं किया जा सकता। हम एक बार फिर बांग्लादेश से अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के लिए सभी कदम उठाने का आह्वान करते हैं।” सोमवार को ढाका की अपनी यात्रा के दौरान विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मुहम्मद यूनुस और विदेश मामलों के सलाहकार तौहीद हुसैन के साथ अपनी बैठकों के दौरान अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और कल्याण से जुड़ी चिंताओं से ढाका को अवगत कराया था।

अंबेडकर स्मारक में तोड़फोड़ के बाद परभणी में हिंसा, किया बंद का ऐलान, पुलिस ने लाठीचार्ज किया, आरोपी गिरफ्तार

परभणी महाराष्ट्र के परभणी में अंबेडकर स्मारक में तोड़फोड़ की घटना के बाद हिंसा भड़क उठी। यह हिंसा उस समय शुरू हुई जब अंबेडकर स्मारक में संविधान की प्रतिकृति को तोड़ने की कोशिश करने के आरोप में एक व्यक्ति, सोपन दत्ताराव पवार (45), को गिरफ्तार किया गया। इस घटना के विरोध में बुधवार को परभणी में बंद का आह्वान किया गया, जिसके परिणामस्वरूप कई दुकानों और गाड़ियों में तोड़फोड़ और आगजनी की गई। हिंसा को रोकने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े और कुछ इलाकों में लाठीचार्ज भी किया। प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए परभणी जिले में धारा 144 लागू कर दी है। परभणी के अलावा, हिंगोली में भी हिंसक घटनाएं देखने को मिलीं। इस मामले में आरोपी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है, और फिलहाल इलाके में स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है।

तमिल कवि और स्वतंत्रता सेनानी सुब्रह्मण्य भारती की 143वीं जयंती पर उनकी रचनाओं का संग्रह जारी किया

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को तमिल कवि और स्वतंत्रता सेनानी सुब्रह्मण्य भारती की 143वीं जयंती पर उनकी संपूर्ण रचनाओं का संग्रह जारी किया। इस संग्रह का शीर्षक ‘कालवरिसैयिल् भरतियार् पडैप्पुगळ्’ है और यह कालानुक्रमिक क्रम में 21 खंडों में महाकवि भरतियार की संपूर्ण संग्रहित रचनाएं हैं। इसे सीनी विश्वनाथन ने संकलित किया है। दिल्ली में एक कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने कवि सुब्रह्मण्य भारती को मां भारती की सेवा के लिए समर्पित एक गहन विचारक के रूप में याद करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी और देश के भविष्य के लिए उनके दूरदर्शी विचारों की सराहना की। साथ ही युवा और महिला सशक्तिकरण, विज्ञान एवं नवाचार में विश्वास और संचार के माध्यम से राष्ट्र के एकीकरण पर जोर दिया। पीएम मोदी ने कहा, “…मैं इस महान कवि को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं और उनकी विरासत को अपनी हार्दिक श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं। आज का दिन भारत की सांस्कृतिक विरासत, साहित्यिक विरासत और उसके स्वतंत्रता संग्राम की यादों के साथ-साथ तमिलनाडु के गौरव का भी महत्वपूर्ण अवसर है। महाकवि सुब्रह्मण्य भारती की रचनाओं का प्रकाशन उनके प्रति एक उल्लेखनीय श्रद्धांजलि है।” उन्होंने कहा कि महाकवि सुब्रह्मण्य भारती के कार्यों का, उनकी रचनाओं का प्रकाशन एक बहुत बड़ा सेवायज्ञ और बहुत बड़ी साधना है। और आज उसकी पूर्णाहुति हो रही है। हमारे देश में शब्दों को केवल अभिव्यक्ति ही नहीं माना गया है। हम उस संस्कृति का हिस्सा हैं, जो “शब्द ब्रह्म” की बात करती है, शब्द के असीम सामर्थ्य की बात करती है। हमारे ऋषि-मुनियों की वाणी सिर्फ उनके विचार नहीं बल्कि उनके चिंतन, अनुभव और साधना का निचोड़ हैं। सुब्रह्मण्य भारती जैसा व्यक्तित्व सदियों में कभी एक बार मिलता है। उनका चिंतन, मेधा और बहु-आयामी व्यक्तित्व हर किसी को हैरान करता है। पीएम मोदी ने कहा, “वह एक ऐसे व्यक्ति थे जो समझते थे कि भविष्य में क्या छिपा है। उस समय भी जब समाज कई समस्याओं का सामना कर रहा था, उन्होंने युवाओं और महिलाओं के सशक्तिकरण की वकालत की। उन्हें विज्ञान और नवाचार में भी विश्वास था। उन्होंने कहा था कि ऐसा कोई उपकरण होना चाहिए जिससे हम कांची में बैठकर काशी में क्या हो रहा है, यह देख सकें और हम आज इसे जी रहे हैं।” उन्होंने कहा कि सुब्रह्मण्य भारती ऐसे महान मनीषी थे, जो देश की आवश्यकताओं को देखते हुए काम करते थे। उनका विजन बहुत व्यापक था। उन्होंने हर उस दिशा में काम किया, जिसकी जरूरत उस कालखंड में देश को थी। भरतियार केवल तमिलनाडु और तमिल भाषा की ही धरोहर नहीं हैं, वो एक ऐसे विचारक थे जिनकी हर सांस मां भारती की सेवा के लिए समर्पित थी।

प्रधानमंत्री मोदी और प्रणब दा के संबंध नए नहीं बल्कि बहुत पुराने थे: शर्मिष्ठा मुखर्जी

नई दिल्ली शर्मिष्ठा मुखर्जी ने अपने पिता और पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की जयंती पर कुछ किस्से साझा किए। ये भी बताया कि प्रधानमंत्री मोदी और प्रणब दा के संबंध नए नहीं बल्कि बहुत पुराने थे। शर्मिष्ठा मुखर्जी ने बताया कि मेरे पिता और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच संबंध राजनीतिक सीमाओं से परे था। ऐसा आमतौर पर देखने को नहीं मिलता है। वे बताती हैं, “यह बात बिल्कुल सार्वजनिक था कि मोदी जी, प्रधानमंत्री के रूप में, और प्रणब मुखर्जी, राष्ट्रपति के रूप में, किस तरह से एक टीम की तरह काम करते थे। दोनों ने एकदम लोकतांत्रिक ढंग से काम किया। यह हैरान करने वाली बात थी, क्योंकि दोनों की राजनीतिक और वैचारिक पृष्ठभूमि बिल्कुल अलग थी। मुझे बाबा की डायरी पढ़ने के बाद और मोदी जी से कुछ दिलचस्प बातें जानने के बाद ये सारी बातें समझ में आईं।” वे आगे बताती हैं, “एक बार जब मोदी जी प्रधानमंत्री बनने के बाद बाबा से मिलने गए, तो उन्होंने बाबा के पैर छुए और कहा, “दादा, आप मुझे मेरे छोटे भाई की तरह मार्गदर्शन दीजिए।” बाबा ने उन्हें पूरी मदद का आश्वासन दिया। मोदी जी ने मुझे बताया कि उनका संबंध बाबा से बहुत पुराना है, और ये सिर्फ गुजरात के मुख्यमंत्री बनने के बाद का नहीं था। वह पहले भी, जब आरएसएस के साधारण कार्यकर्ता थे, बाबा से मिलने आते थे। दिल्ली में नॉर्थ एवेन्यू और साउथ एवेन्यू में उनकी मुलाकातें होती थीं।” वे बताती हैं, “मोदी जी ने मुझे बताया कि जब वे गुजरात के मुख्यमंत्री थे, तो एक बार बाबा ने डायरी में लिखा था कि मोदी जी कांग्रेस सरकार के आलोचक हैं, लेकिन जब भी वह निजी तौर पर बाबा से मिलते, तो हमेशा उनके पैर छूते थे। बाबा ने यह भी लिखा था कि मोदी जी की इज्जत उन्हें बहुत अजीब तरह से महसूस होती थी, हालांकि वह खुद नहीं जानते थे। इसका कारण क्या था।” वे आगे बताती हैं, “एक और दिलचस्प बात यह है कि जब मोदी जी प्रधानमंत्री बने, तो उन्होंने बाबा से मिलने के बाद कहा कि उन्हें अपनी विदेश नीति को समझने में मदद मिली थी। बाबा ने कहा था कि मोदी जी को विदेशी मामलों में गहरी समझ है, और वह जल्दी ही विदेश नीति के जटिल पहलुओं को समझने में सक्षम हो गए थे।” वे बताती हैं, “मोदी जी की कार्यशैली के बारे में बाबा ने लिखा था कि वह बहुत ही पेशेवर और फोकस्ड हैं। बाबा ने यह भी कहा था कि मोदी जी ने राज्य राजनीति से निकलकर राष्ट्रीय राजनीति में अपनी पहचान बनाई, और यही कारण था कि उन्हें विदेश नीति और अन्य मामलों में त्वरित समझ मिली।” वे बताती है, “एक और दिलचस्प घटना यह थी कि जब बाबा थोड़े समय के लिए राष्ट्रपति पद से रिटायर हुए, और मोदी जी ने उन्हें फोन किया।” वे बताती हैं, “जब बाबा को भारत रत्न मिला, तो मुझे एक पत्रकार से पता चला। मोदी जी ने इसे एक गुप्त सूचना की तरह रखा था। मुझे बाद में पता चला कि प्रधानमंत्री ने बाबा को पहले फोन किया था। लेकिन, यह तब तक सार्वजनिक नहीं किया गया, जब तक इसकी आधिकारिक घोषणा नहीं हुई।” शर्मिष्ठा ने आगे कहा, “इससे मुझे यह समझ में आया कि मोदी सरकार ने वास्तव में एक अच्छे और सच्चे तरीके से काम किया है, और प्रधानमंत्री मोदी ने बाबा के प्रति अपना सम्मान और स्नेह हमेशा दिखाया।”  

योगेश टिलेकर के मामा सतीश वाघ की अपहरण के बाद हत्या मामले में पुलिस ने अब कुल चार लोगों को हिरासत में लिया

पुणे भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) विधायक योगेश टिलेकर के मामा सतीश वाघ की अपहरण के बाद हत्या मामले में पुणे पुलिस ने दो और लोगों को हिरासत में लिया है। इस मामले में पुलिस ने अब कुल चार लोगों को हिरासत में लिया है। एक अन्य की पुलिस तलाश कर रही है। पुलिस लगातार चारों लोगों से पूछताछ कर रही है। हालांकि, अभी तक हत्या और अपहरण की गुत्थी नहीं सुलझ पाई है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, बीते सोमवार को योगेश टिलेकर हडपसर इलाके में मॉर्निंग वॉक के लिए निकलते थे। इस दौरान चार से पांच लोगों ने उन्हें अगवा कर लिया था। देर शाम उनका शव पुणे के यवत गांव में मिला था। क्राइम ब्रांच और पुणे पुलिस की आठ टीमें मामले की जांच में जुटी हैं। पुलिस हत्या के पीछे की वजह की जांच कर रही है। पुलिस इलाके में सभी सीसीटीवी फुटेज को खंगाल रही है। पुलिस टिलेकर के रिश्तेदार और दोस्तों से भी लगातार पूछताछ कर रही है। पुलिस ने संभावना जताई थी कि योगेश वाघ के शरीर पर कई वार और सिर पर लकड़ी से वार कर उसकी हत्या की गई है। पुणे पुलिस ने शुरुआती जानकारी दी कि 9 दिसंबर की सुबह सतीश वाघ का अपहरण कर लिया गया और कुछ देर बाद ही उनकी हत्या कर दी गई। पुलिस का अनुमान है कि अपहरण के कुछ ही घंटों के भीतर सतीश वाघ की हत्या कर दी गई। डॉग स्कड और फॉरेंसिक टीम को घटनास्थल पर कई सबूत मिले हैं। इसमें खून से सनी एक लकड़ी की छड़ी भी शामिल है। इन सबूतों के आधार पर पुलिस ने अब तक चार लोगों को हिरासत में लिया है। पुणे पुलिस की 16 टीमें आरोपियों की तलाश में हैं। जानकारी सामने आई है कि पुणे पुलिस ने आरोपियों तक पहुंचने के लिए ह्यूमन इंटेलिजेंस और टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया है।  

जम्मू-कश्मीर पुलिस ने बताया- संगठनों में स्थानीय युवाओं की भर्ती में कमी आई है, जो एक सकारात्मक संकेत है

जम्मू-कश्मीर घाटी में आतंकी गतिविधियों को नियंत्रित करने के लिए सुरक्षाबलों ने अपनी रणनीतियों को और भी सख्त किया है। जम्मू-कश्मीर पुलिस के अनुसार, आतंकी संगठनों में स्थानीय युवाओं की भर्ती में कमी आई है, जो एक सकारात्मक संकेत है। यह कम भर्ती दर दर्शाता है कि सुरक्षाबलों की ओर से किए जा रहे ऑपरेशन्स, खुफिया जानकारी की बेहतर सांझेदारी और स्थानीय समुदाय के साथ बेहतर संवाद के कारण आतंकी संगठनों के लिए स्थानीय समर्थन में कमी आई है। साथ ही, सुरक्षाबलों ने घाटी में आतंकवादियों के नेटवर्क को निष्क्रिय करने के लिए ऑपरेशनल सक्रियता बढ़ा दी है, जिससे आतंकियों की गतिविधियों पर अंकुश लगा है। यह स्थानीय युवाओं के लिए भी एक संदेश है कि आतंकवाद में शामिल होने के बजाय, वे विकास और शांति की दिशा में काम कर सकते हैं। इस प्रकार, सुरक्षाबलों का दबाव, बेहतर खुफिया जानकारी और स्थानीय समुदाय का सहयोग आतंकवादियों की भर्ती में कमी के कारण महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।  हाल के समय में सरकार ने आतंकवाद और ड्रग तस्करी के खिलाफ सख्त कदम उठाए हैं। एक महीने के भीतर आतंकवादियों के समर्थकों और ड्रग डीलरों की कुल 7 करोड़ रुपए की संपत्ति जब्त की गई है। इस प्रकार की कार्रवाइयों से आतंकवादियों को वित्तीय मदद और पनाह मिलना मुश्किल हो गया है। इसका उद्देश्य कश्मीरी युवाओं को आतंकवाद के रास्ते से दूर रखना और आतंकवादियों के नेटवर्क को खत्म करना है। इस तरह की सख्त कार्रवाई से यह संदेश भी दिया जा रहा है कि आतंकवाद के खिलाफ सरकार पूरी तरह से प्रतिबद्ध है, और कश्मीर में शांति और विकास की दिशा में कदम बढ़ाए जा रहे हैं।  

इज़राइल सीरिया के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करना नहीं है, लेकिन देश की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम उठाए जाएंगे

इजराइल इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सीरिया की नई सरकार को चेतावनी दी है कि अगर ईरान को सीरिया में फिर से पैर जमाने दिया गया या ईरानी हथियार हिज़बुल्ला तक पहुंचाए गए, तो इज़राइल कड़ा कदम उठाएगा। उन्होंने कहा कि इज़राइल का मकसद सीरिया के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करना नहीं है, लेकिन देश की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम उठाए जाएंगे। नेतन्याहू ने कहा,  “अगर सीरिया की नई सरकार ईरान को फिर से स्थापित होने देती है या ईरानी हथियार हिज़बुल्ला तक पहुंचने देती है, तो हम सख्त कार्रवाई करेंगे और इसका भारी खामियाजा भुगतना पड़ेगा। जो पिछली सरकार के साथ हुआ, वही इस नई सरकार के साथ भी हो सकता है।” नेतन्याहू ने बताया कि उन्होंने इज़राइली वायुसेना को सीरिया की पुरानी सरकार द्वारा छोड़ी गई सैन्य क्षमताओं पर हमला करने की अनुमति दी थी। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि ये हथियार जिहादियों के हाथ न लगें। उन्होंने इस कार्रवाई की तुलना ब्रिटिश वायुसेना के उस कदम से की, जिसमें द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान फ्रांस के वीशी शासन के जहाजों पर हमला किया गया था, ताकि वे नाज़ियों के हाथ न लगें। नेतन्याहू ने यह भी कहा कि इज़राइल सीरिया की नई सरकार के साथ संबंध बनाने का इच्छुक है, लेकिन यह तभी संभव है जब सीरिया ईरान और हिज़बुल्ला को समर्थन देने से बचे। उन्होंने कहा, *”अगर सीरिया की नई सरकार हमारी सुरक्षा के खिलाफ कदम उठाएगी, तो हम कड़ा जवाब देंगे।”

कपिल सिब्बल ने कहा कि शेखर यादव के खिलाफ महाभियोग की प्रक्रिया शुरू होनी चाहिए, संकट में नौकरी

नई दिल्ली मुस्लिमों को लेकर विवादित टिप्पणी करने और बहुसंख्यकों के हिसाब से कानून चलने की बात कहने वाले इलाहाबाद हाई कोर्ट के जस्टिस शेखर कुमार यादव घिरते जा रहे हैं। अब विपक्षी दलों ने उनके खिलाफ महाभियोग की मांग की है। राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने कहा कि शेखर यादव के खिलाफ महाभियोग की प्रक्रिया शुरू होनी चाहिए। यही नहीं कई सांसदों ने तो इसके लिए मुहिम भी शुरू दी है। इन लोगों ने जस्टिस शेखर यादव के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने संबंधी नोटिस देने की मुहिम शुरू कर दी है और इसके लिए सांसदों के हस्ताक्षर लिए जा रहे हैं। कांग्रेस सांसद विवेक तन्खा ने बुधवार को बताया कि अब तक राज्यसभा के 30 से अधिक सदस्यों के हस्ताक्षर ले लिए गए हैं और संसद के वर्तमान शीतकालीन सत्र में ही इसके लिए नोटिस दिया जाएगा। उन्होंने कहा, ‘यह गंभीर मामला है। हम संसद के इसी सत्र में महाभियोग के लिए नोटिस देंगे।’ न्यायमूर्ति यादव ने रविवार को इलाहाबाद उच्च न्यायालय में विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के एक सम्मेलन को संबोधित करते हुए विवादास्पद टिप्पणी की थी। नियम के अनुसार किसी जस्टिस के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने के लिए 100 लोकसभा सदस्यों या 50 राज्यसभा सदस्यों की ओर से मंजूरी मिलनी चाहिए। राज्यसभा सदस्य और वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने मंगलवार को कहा था कि महाभियोग प्रस्ताव का नोटिस दिया जाएगा। उन्होंने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा था, ‘कोई भी न्यायाधीश इस तरह का बयान देता है तो वह अपने पद की शपथ का उल्लंघन करता है। अगर वह पद की शपथ का उल्लंघन कर रहा है, तो उसे उस कुर्सी पर बैठने का कोई अधिकार नहीं है।’ बता दें कि जस्टिस शेखर यादव ने मुस्लिमों के लिए कठमुल्ला शब्द का प्रयोग किया था। उन्होंने एक और टिप्पणी करते हुए कहा था कि इस देश में एक वर्ग को 4 शादियां करने का अधिकार नहीं मिल सकता। उन्होंने कहा था कि भारत में बहुसंख्यकों के अनुसार ही कानून चलेगा। उनका कहना था कि इसमें कुछ भी गलत नहीं है। आप देखते हैं कि परिवार और समाज में भी बहुमत की राय को ही माना जाता है। इस लिहाज से देश में भी कानून बहुसंख्यकों के हिसाब से ही चलना चाहिए। गौरतलब है कि जस्टिस शेखर यादव की इस टिप्पणी को लेकर उन्हें घेरा जा रहा है। यही नहीं सुप्रीम कोर्ट ने भी अखबारों में छपी रिपोर्ट्स का संज्ञान लिया है और इलाहाबाद उच्च न्यायालय से जस्टिस शेखर यादव से जुड़ी डिटेल मांगी है। शीर्ष अदालत ने कहा कि मामले हमारे संज्ञान में है और जांच की जा रही है।

हिंदुओं की रक्षा के लिए बातचीत से समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा है तो केंद्र को दूसरें तरीके पर विचार करना चाहिए: आरएसएस

नई दिल्ली बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ हो रहे अत्याचार के बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने चिंता जताते हुए केंद्र सरकार से सख्त कदम उठाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि अगर बातचीत से समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा है तो केंद्र को दूसरें पर विचार करना चाहिए। नागपुर में ‘सकल हिंदू समाज’ द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में आंबेकर ने कहा, “केंद्र को इस मामले पर और अधिक गंभीरता से काम करना चाहिए और ठोस कदम उठाने चाहिए। मुझे उम्मीद है कि यह मुद्दा संवाद के जरिए हल हो सकता है, लेकिन अगर बातचीत विफल हो जाए तो हमें इसके लिए दूसरा समाधान ढूंढना होगा।” आंबेकर ने कहा कि बांगलादेश में हिंदू समुदाय पर जिस तरह से अत्याचार हो रहे हैं वह इस समय मुगल शासन की याद दिलाते हैं। उन्होंने कहा, “हमारे मंदिर जलाए जा रहे हैं। लूटे जा रहे हैं। महिलाओं के साथ अत्याचार हो रहे हैं। यह सब देखकर हर हिंदू को गुस्सा आना चाहिए। केवल इन घटनाओं की निंदा करना और परेशान होना पर्याप्त नहीं है। हमें सिर्फ गुस्से और दुख से बाहर आकर आगे बढ़ने की आवश्यकता है।” आरएसएस नेता ने यह भी कहा कि बांगलादेश में हो रही हिंसा का उद्देश्य हिंदू समुदाय को उखाड़ फेंकना है। उन्होंने कहा, “न केवल बांगलादेश, पाकिस्तान और बांगलादेश में भी हिंदुओं पर हमले हो रहे हैं। हम हिंदुओं के खिलाफ अत्याचार सहन नहीं करेंगे। अगर हमने इस पर कुछ नहीं किया तो हमारी आने वाली पीढ़ियां हमारी चुप्पी पर सवाल उठाएंगी।” उन्होंने बांगलादेश के अंतरिम नेता मुहम्मद युनुस पर भी निशाना साधते हुए कहा, “जिस देश का नेतृत्व नोबेल शांति पुरस्कार विजेता कर रहे हैं वहां शांति नहीं हो सकती है। वह अत्याचारों को रोकने के लिए कुछ नहीं कर रहे हैं।” आंबेकर ने यह भी कहा कि कुछ वैश्विक शक्तियों को पहचानने की जरूरत है, जो बांगलादेश में हिंसा फैला रहे हैं। उन्होंने कहा, “हमें उन शक्तियों को पहचानने और उजागर करने की जरूरत है और उन्हें यह बताने की आवश्यकता है कि वे हमारे देश और अन्य देशों में हिंदुओं के खिलाफ ऐसी घटनाओं को बंद करें।” इससे पहले अक्तूबर महीने में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने भी बांगलादेशी हिंदुओं पर हो अत्याचार का मुद्दा उठाया था।

सैटेलाइट स्पेस कम्युनिकेशन बनाएगा भारत : केंद्रीय मंत्री सिंधिया

नई दिल्ली सैटेलाइट नेटवर्क की अभी बहुत चर्चा हो रही है। एलन मस्क की स्टारलिंक समेत कई बड़ी कंपनियां अभी इसी रेस में हैं। इस बीच भारत सरकार की तरफ से बड़ा बयान दिया गया है। ज्योतिरादित्य सिंधिया ने साफ किया कि सरकार आत्मनिर्भर स्पेस कम्युनिकेशन सेक्टर विकसित करना चाहती है। इसमें सैटेलाइट मैनुफैक्चर और लॉन्च सर्विस को भी शामिल किया जाएगा। केंद्रीय मंत्री का बयान कम्युनिकेशन मिनिस्टर ज्योतिरादित्य सिंधिया ने स्पेस कम्युनिकेशन के मुख्य खिलाड़ियों से मुलाकात की थी। इसमें Eutelsat Oneweb, Jio-SES, Hughes Communications भी शामिल थे। इसमें चर्चा हुई कि लोकल स्पेस सेक्टर को विकसित करने के लिए क्या कदम उठाए जा सकते हैं। ज्योतिरादित्य सिंधिया ने मुलाकात के बार अपने आइडिया भी X पर शेयर किए थे। सैटेलाइट कम्युनिकेशन पर बड़ा फैसला उन्होंने लिखा, ‘सैटेलाइट कम्युनिकेशन इकोसिस्टम के मुख्य प्लेयर्स के साथ मीटिंग की। इसमें कई स्टेकहोल्डर्स ने हिस्सा लिया था। भारत को सैटेलाइट कम्युनिकेशन का मुख्य खिलाड़ी बनाने के लिए हमने मुख्य पहलुओं पर चर्चा की । हमने भारत के लिए नए अवसरों पर भी बातचीत की। आत्मनिर्भर भारत को इससे काफी बल मिलेगा।’ विवरण की जानकारी रखने वाले लोगों ने कहा कि बैठक के दौरान इस बात पर चर्चा हुई कि कैसे IN-SPACe- एक स्वायत्त केंद्रीय नियामक निकाय, देश की अंतरिक्ष महत्वाकांक्षाओं को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। इंटरनेट सर्विस पर भी हुई चर्चा सैटेलाइट कम्युनिकेशन मीटिंग के अलावा, सिंधिया ने इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर्स के भी कुछ अहम लोगों से मुलाकात की। उन्होंने जानकारी दी, टेलीकॉम सेक्टर को दुरुस्त करने के लिए हमने कई अहम पहलुओं पर चर्चा की। हमारा फोकस था कि कोस्ट को कैसे कम किया जा सकता है ? साथ ही बेहतर इंटरनेट सर्विस को प्रोवाइड किया जा सकता है। क्योंकि अभी ये बहुत ज्यादा मायने रखती है। DoT के अधिकारी और स्टेकहोल्डर्स को भी इसमें शामिल किया गया था।

अमेरिका में भारतीयों को लगेगा बड़ा झटका, डोनाल्ड ट्रंप आते ही बदलना चाहते हैं 150 साल पुराना कानून

वॉशिंगटन अमेरिका के राष्ट्रपति चुने गए डोनाल्ड ट्रंप सत्ता संभालते ही जन्मजात नागरिकता वाले 150 साल पुराने कानून को बदलना चाहते हैं। वह 20 जनवरी को वाइट हाउस पहुंचेंगे और आते ही इस कानून को खत्म करने की तैयारी है। उनका कहना है कि यह कानून गलत है और इससे अमेरिका की समस्याएं बढ़ रही हैं। इससे अवैध रूप से अमेरिका में एंट्री करने वाले लोगों के बच्चों को भी नागरिक बनने का अवसर मिल रहा है और वे यहां के संसाधनों का लाभ उठा रहे हैं। अमेरिका के नागरिक कानून के मुताबिक किसी भी देश के रहने वाले लोग यदि वहां जाते हैं और उधर बच्चे का जन्म होता है तो वह बच्चा अमेरिकी नागरिकता का हकदार हो जाता है। इसी पर डोनाल्ड ट्रंप और उनके सलाहकारों को आपत्ति है। एक इंटरव्यू में डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, ‘हम इस कानून को बदलने जा रहे हैं। हमें लोगों के बीच जाना होगा, लेकिन कानून तो बदलेंगे।’ डोनाल्ड ट्रंप के एक सलाहकार ने कहा कि हर देश में इस तरह का कानून नहीं है। अमेरिका में ही ऐसा है और लोग इसका बेजा इस्तेमाल करते हुए फायदा उठा रहे हैं। इसलिए हमें सिस्टम में ही बदलाव करना होगा। अमेरिका संविधान के 14वें संशोधन के तहत जन्म के साथ नागरिकता के अधिकार का कानून बनाया गया था। यह कानून कहता है, ‘अमेरिका में पैदा हुए सभी लोग नागरिकता के हकदार हैं। वह यहां की न्यायिक व्यवस्था के तहत भी आते हैं। भले ही अमेरिका के किसी भी राज्य में पैदा हुए हों।’ ट्रंप समेत इस कानून के आलोचकों का कहना है कि इससे अमेरिका में बर्थ टूरिज्म बढ़ा है। रिसर्च फॉर नंबर्स संस्थान के डायरेक्टर एरिक रुआर्क कहते हैं कि बड़े पैमाने पर ऐसा होता है कि गर्भवती महिलाएं अमेरिका में आ जाती हैं और यहां बच्चे को जन्म दिया जाता है। ऐसा इसलिए लोग करते हैं ताकि उनके बच्चे को अमेरिका की नागरिकता मिल जाए। अब ऐसा कानून बनाना होगा कि कोई अमेरिका में आकर बच्चे को जन्म दे तो इतने भर से ही नागरिकता न मिल जाए। डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि हम परिवारों को तोड़ना नहीं चाहते। इसलिए एक ही तरीका है कि पूरा परिवार साथ रहे और अमेरिका से चला ही जाए। इसका अर्थ हुआ कि जिन लोगों को जन्म के आधार पर अमेरिका की नागरिकता मिली है, उन्हें भी बाहर किया जाएगा। यदि ऐसा कानून आया तो फिर भारतीयों पर भी बड़ा असर होगा। प्यू रिसर्च की रिपोर्ट के अनुसार 48 लाख भारतीय मूल के लोग अमेरिका में बसे हैं। इनमें से 16 लाख को जन्म के आधार पर ही नागरिकता मिली है। यदि इस कानून के वापस किया गया तो फिर जन्म के प्रमाण पत्र को लोग नागरिकता के प्रमाण के तौर पर इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा।

पीएम मोदी ने कुवैत का निमंत्रण को विनम्रतापूर्वक किया स्वीकार, जल्द ही जा सकते ही इस ‘ऐतिहासिक’ यात्रा पर

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहयोग और साझेदारी को बढ़ाते हुए जल्द ही कुवैत की यात्रा कर सकते हैं। यह किसी भारतीय प्रधानमंत्री की इस प्रमुख पश्चिम एशियाई देश की पहली यात्रा होगी। इस समय खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) की अध्यक्षता भी कुवैत के पास ही है। पिछले हफ्ते कुवैत के विदेश मंत्री अब्दुल्ला अली अल-याह्या ने अपनी भारत यात्रा के दौरान पीएम मोदी से मुलाकात की थी। उन्होंने कुवैत नेतृत्व की ओर से प्रधानमंत्री को ‘शीघ्रतम अवसर मिलने पर’ देश की यात्रा करने का निमंत्रण दिया था। पीएम मोदी ने निमंत्रण को विनम्रतापूर्वक स्वीकार कर लिया था। कुवैत एकमात्र जीसीसी सदस्य देश है जहां पीएम मोदी ने 2014 में पदभार संभालने के बाद से अब तक दौरा नहीं किया है। कोविड महामारी के कारण 2022 में प्रस्तावित यात्रा स्थगित कर दी गई थी। जीसीसी में कुवैत के अलावा संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन, सऊदी अरब, ओमान और कतर भी शामिल हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने सितंबर में, न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के 79वें सत्र के दौरान कुवैत के क्राउन प्रिंस शेख सबा खालिद अल-हमद अल-मुबारक अल-सबाह से मुलाकात की थी। यह दोनों नेताओं के बीच पहली बैठक थी। पिछले सप्ताह, भारत की यात्रा पर आए कुवैत के विदेश मंत्री के साथ चर्चा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने विश्वास व्यक्त किया था कि कुवैत की जीसीसी की वर्तमान अध्यक्षता के अंतर्गत भारत और खाड़ी सहयोग परिषद के बीच घनिष्ठ सहयोग और मजबूत होगा। पश्चिम एशिया की स्थिति पर विचारों का आदान-प्रदान करते हुए पीएम मोदी ने क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और स्थिरता की शीघ्र वापसी के लिए समर्थन व्यक्त किया था। उन्होंने कुवैत में रहने वाले दस लाख भारतीयों की देखभाल के लिए कुवैत के नेतृत्व को धन्यवाद दिया।

IPS निधि ठाकुर साबरमती जेल में लॉरेंस बिश्नोई पर रखेंगी नजर

अहमदाबाद 2010 बैच की आईपीएस अधिकारी श्वेता श्रीमाली को गुजरात सरकार ने केंद्र की प्रतिनियुक्ति के लिए रिलीव कर दिया है। अभी तक अहमदाबाद की साबरमती जेल की अधीक्षक रही श्वेता श्रीमाली इंटेलीजेंस ब्यूरो में डिप्टी डायरेक्टर बनाया गया है। श्रीमाली अभी तक गुजरात की सबसे ज्यादा संवेदनशील जेल की कमान संभाल रही थीं। अहमदाबाद की साबरमती जेल में ही गैंगस्टर लॉरेंस बिश्वनोई को रखा गया है। गुजरात सरकार ने श्वेता श्रीमाली जगह पर 2020 बैच की आईपीएस अधिकारी डॉ. निधि ठाकुर को जेल अधीक्षक बनाया है। ठाकुर अभी तक वडोदरा मध्यस्थ जेल की अधीक्षक थीं। गुजरात सरकार ने 9 दिसंबर को एक आदेश में 25 आईपीएस के तबादले किए थे। फिर से महिला ऑफिसर को दी कमान राजस्थान की रहने वाले श्वेता श्रीमाली को सरकार ने मई, 2024 में साबरमती जेल की कमान सौंपी थी। वह बताैर डीआईजी साबरमती जेल को देखरेख कर रही थीं। श्वेता श्रीमाली गुजरात के डांग जिले की एसपी रहने के दौरान सुर्खियों में आई थी। तब इन्हें लेडी सिंघम कहा गया था। गुजरात की साबरमती जेल में लॉरेंस बिश्नोई से पहले यूपी के डॉन अतीक अहमद को रखा गया था। श्वेता श्रीमाली के पति सुनील जोशी भी आईपीएस हैं। वे अभी गुजरात एटीएस में डीआईजी हैं। गुजरात सरकार ने अब एक बार फिर से इस जेल की कमान महिला ऑफिसर को सौंपी है। बिहार की हैं डॉ. निधि ठाकुर मूलरूप से बिहार की रहने वाली आईपीएस निधि ठाकुर अब साबरमती जेल को संभालेंगी। पेशे से डॉक्टर रहीं निधि ठाकुर 2020 में सिविल सेवा के लिए चयनित हुई थीं। इससे पहले वह पटना के पीएमसीएच में तैनात थीं। निधि ठाकुर ने डीएमएमसीएच से एमबीबीएस किया और गोल्ड मेडिलिस्ट रहीं और पीएमसीएच से एमडी कर रही हैं। निधि के पिता अजय कुमार ठाकुर बिहार प्रशासनिक सेवा के रिटायर्ड ऑफिसर हैं। निधि का पैतृक गांव शिरनिया है। यह खगड़िया जिले में आता है। निधि ठाकुर ने एमबीबीएस के साथ जनरल मेडीसिन में एमडी की डिग्री हासिल की है। युवा आईपीएस निधि ठाकुर को उनके वडोदरा में अच्छे काम को देखते हुए सरकार ने साबरमती जेल की कमान सौंपी है।

ज्वालामुखी से फिलीपींस में तबाही, राख के गुबार और गर्म लावे के साथ बढ़ा खतरा, 87 हजार लोगों का रेस्क्यू

मनीला मध्य फिलीपींस के कानलॉन ज्वालामुखी में भीषण विस्फोट हुआ। इस विस्फोट से आसमान में तीन किलोमीटर ऊपर तक राख का गुबार फैल गया। वहीं, फिलिपीन इंस्टीट्यूट ऑफ वॉल्कैनोलॉजी एंड सीस्मोलॉजी (PHIVOLCS) ने बताया कि ये ज्वालामुखी अभी और विस्फोट कर सकता है। इस विस्फोट के तुरंत बाद स्थानीय प्रशासन हरकत में आई और हुए आसपास के गांवों को खाली कराने का आदेश देते हुए राहत-बचाव कार्य शुरु करवाया। बता दें, नेग्रोस द्वीप पर स्थित कानलॉन ज्वालामुखी समुद्र तल से 2,400 मीटर (लगभग 8,000 फीट) की ऊंचाई पर है। यह फिलीपींस के 24 सक्रिय ज्वालामुखियों में से एक है। बताया जा रहा है कि यह ज्वालामुखी पहले भी कई बार फट चुका है। जिसके वजह से यहां बसे गांवों के लिए यह हमेशा खतरे का संकेत रहा है। विस्फोट के बाद निकला धुआं का गुबार इस विस्फोट के बाद फिलीपीन इंस्टीट्यूट ऑफ वॉल्केनोलॉजी एंड सीस्मोलॉजी (PHIVOLCS) ने एक बयान जारी किया। जिसके अनुसार, विस्फोट सोमवार को दोपहर 3:03 बजे (स्थानीय समयानुसार) हुआ। फिलिपींस के सिविल डिफेंस ऑफिस ने 87 हजार लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने का काम शुरू कर दिया है। वहीं, इस विस्फोट के दौरान ज्वालामुखी से निकलने वाला धुआं 3,000 मीटर (लगभग 10,000 फीट) की ऊंचाई तक पहुंच गया। विशेषज्ञों ने इस विस्फोट को ‘मैग्मैटिक इरप्शन’ करार दिया है। जो आगे और भी ज्यादा विस्फोटक हो सकता है। वहीं, थर्मल और एक्सरे कैमरा मॉनिटर्स की मानें तो गर्म लावा और पत्थर का घनत्व बहुत ज्यादा है। पहाड़ की चोटी से भारी मात्रा में गर्म राख और कीचड़ निकल कर आ रहा है। जो सैकड़ों फीट प्रति सेकेंड की गति से नीचे आ रहा है। पहले भी फटा कानलॉन ज्वालामुखी इससे पहले सितंबर में भी कानलॉन ज्वालामुखी ने हजारों टन जहरीली गैसों का उत्सर्जन किया था। जिसके कारण सैकड़ों लोगों को वहां से हटाया गया था। हालांकि तब कोई बड़ा विस्फोट नहीं हुआ था। लेकिन इस घटना ने प्रशासन को ज्वालामुखी के खतरे के प्रति सतर्क कर दिया था।  अभी शांत नहीं हुआ है ज्वालामुखी, फिर फट सकता है PHIVOLCS के अनुसार यह ज्वालामुखी अभी शांत नहीं हुआ है. भविष्य में किसी भी समय फट सकता है. यह ज्वालामुखी देश के दो दर्जन सक्रिय ज्वालामुखियों में से एक है. यह नेग्रोस ऑक्सीडेंटल और नेग्रोस ओरिएंटल प्रांत के बीच मौजूद है. इससे पहले यह इस साल 3 जून को फटा था. उससे पहले दिसंबर 2017 में. हर दिन महसूस हो रहे हैं 5 से 26 भूकंप के झटके पिछले विस्फोट के बाद इलाके में बहुत दिनों तक लोग वापस नहीं आए थे. ये रुक-रुक कर फट रहा था. तबसे लगातार इसमें से जहरीली गैसें और गर्म राख निकल रही थी. खासतौर से 19 अक्तूबर के बाद से. इस पहाड़ के आसपास के इलाकों में हर दिन 5 से 26 बार भूकंप के झटके महसूस हो रहे हैं. तीसरे लेवल का अलर्ट जारी, लोगों को हटा रहे फिलहाल इस ज्वालामुखी की वजह से आसपास के इलाकों में तीसरे लेवल का अलर्ट जारी किया गया है. यानी एक हफ्ते के अंदर इसमें फिर से बड़ा विस्फोट होने की पूरी आशंका है. अगला स्केल चौथे स्तर का अलर्ट होगा. यानी लगातार होने वाला विस्फोट और सबसे सीरियस टाइप होता है पांचवें स्तर का अलर्ट. यानी किसी भी घंटे या दिन में इसका विस्फोट हो सकता है.

यूरोपीय एजेंसी का दावा इतिहास का सबसे गर्म साल बना 2024

लंदन यूनियन कॉपरनिकस क्लाइमेट चेंज सर्विस (C3S) ने खुलासा किया है कि साल 2024 इतिहास का सबसे गर्म साल रहा है. इस साल गर्मी ने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए. ऐसी ही गर्मी की आशंका अगले साल के लिए भी है. यह खुलासा क्लाइमेट चेंज को रोकने के लिए संयुक्त राष्ट्र द्वारा 300 बिलियन डॉलर्स की डील के दो हफ्ते बाद हुआ है. C3S ने कहा है कि जनवरी से नवंबर तक औसत वैश्विक तापमान (Average Global Temperature) प्री-इंडस्ट्रियल एरा यानी 1850 से 1900 की तुलना में डेढ़ डिग्री सेल्सियस ज्यादा रहा है. इससे पहले सबसे गर्म साल का रिकॉर्ड 2023 के नाम था. साल 2024 में पूरी दुनिया और ज्यादा गर्म हो गई. इटली और दक्षिणी अमेरिका में भयानक सूखा रहा. नेपाल, सूडान और यूरोप में बाढ़ आई. मेक्सिको, माली, सऊदी अरब में हीटवेव्स की वजह से हजारों लोग मारे गए. अमेरिका और फिलिपींस में खतरनाक साइक्लोन ने तबाही मचाई. वैज्ञानिकों की स्टडी ने यह बात स्पष्ट तौर पर कही है कि ये सब इंसानों द्वारा किए जा रहे जलवायु परिवर्तन का नतीजा है. इस साल नवंबर महीना भी रहा गर्म इस साल का नवंबर महीना पिछले साल के नवंबर महीने के बाद दूसरा सबसे गर्म महीना था. कॉपरनिकस क्लाइमेट रिसर्चर जुलियन निकोलस ने कहा कि हमारी दुनिया लगातार गर्मी के नए रिकॉर्ड तोड़ रही है. वैश्विक तापमान लगातार बढ़ रहा है. अगले कुछ महीनों में यह स्थिति और भी ज्यादा बिगड़ सकती है. खत्म करना होगा CO2 का उत्सर्जन लगातार जीवाश्मन ईंधन जलाने की वजह से जो कार्बन डाईऑक्साइड उत्सर्जन हो रहा है, उसकी वजह से ही तापमान बढ़ रहा है. इस उत्सर्जन को जीरो करना जरूरी है. नहीं तो पूरी दुनिया तंदूर की तरह जलने लगेगी. कई देशों ने यह भरोसा दिलाया है कि वो इसे कम करेंगे, इसके बावजूद इस साल CO2 उत्सर्जन रिकॉर्ड स्तर पर रहा. अगले साल पर रहेगी सबकी नजर इंपीरियल कॉलेज लंदन के वैज्ञानिक फ्रेडरिक ओट्टो ने कहा कि वैज्ञानिक इस समय ला नीना पर भी नजर रख रहे हैं. क्योंकि इससे अगले साल तापमान कम हो सकता है. इसकी वजह से समंदर की गर्मी कम होगी. वो ठंडे होंगे. इस साल अल-नीनो की वजह से गर्मी बढ़ी थी. अगले साल तापमान में थोड़ी गिरावट आने की संभावना है. लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि राहत मिलेगी. अगले साल भी हीटवेव, सूखा, जंगली आग और साइक्लोन जैसी घटनाएं देखने को मिलेंगी. कई देशों में हीटवेव से हजारों की मौत इससे पूर्व 2023 इतिहास का सबसे गर्म वर्ष दर्ज किया गया था। जबकि नवंबर 2023 के बाद नवंबर 2024 इतिहास का सर्वाधिक गर्म माह दर्ज किया गया। इस वर्ष मौसम के चरम पर पहुंचने की कई घटनाएं देखने को मिलीं। इनमें इटली और दक्षिण अमेरिकी में गंभीर सूखा, नेपाल, सूडान और यूरोप में जानलेवा बाढ़, मेक्सिको, माली और सऊदी अरब में हीटवेव से हजारों की मौत के साथ ही अमेरिका और फिलीपींस में विनाशकारी चक्रवात जैसे मौसम के गंभीर दुष्परिणाम शामिल हैं। विज्ञानियों ने इन सभी प्राकृतिक आपदाओं के पीछे मानव की भूमिका बताई है। भारत के मौसम विभाग के मुताबिक, 1901 के बाद से भारत के लिए यह दूसरा सबसे गर्म नवंबर रहा है। इश दौरान औसत अधिकतम तापमान 29.37 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जो कि सामान्य से 0.62 डिग्री सेल्सियस ज्यादा है।   2024 में जनवरी से नवंबर तक की बात करें तो औसत वैश्विक तापमान 1991-2020 के तापमान से करीब 0.72 डिग्री सेल्सियस ज्यादा रहा है। वहीं, जनवरी-नवंबर 2023 के मुकाबले इस साल इसी दौर में तापमान 0.14 डिग्री सेल्सियस ज्यादा रहा।   1.50 डिग्री सेल्सियस से अधिक होने की संभावना   यूरोपीय एजेंसी के वैज्ञानिकों ने कहा कि 2023 का तापमान पूर्व-औद्योगिक काल के स्तर से 1.48 डिग्री सेल्सियस अधिक था, इसलिए यह भी लगभग निश्चित है कि 2024 का वार्षिक तापमान 1.5 डिग्री सेल्सियस अधिक होगा।    

slot server thailand super gacor

spaceman slot gacor

slot gacor 777

slot gacor

Nexus Slot Engine

bonus new member

olympus

situs slot bet 200

slot gacor

slot qris

link alternatif ceriabet

slot kamboja

slot 10 ribu

https://mediatamanews.com/

slot88 resmi

slot777

https://sandcastlefunco.com/

slot bet 100

situs judi bola

slot depo 10k

slot88

slot 777

spaceman slot pragmatic

slot bonus

slot gacor deposit pulsa

rtp slot pragmatic tertinggi hari ini

slot mahjong gacor

slot deposit 5000 tanpa potongan

mahjong

spaceman slot

https://www.deschutesjunctionpizzagrill.com/

spbo terlengkap

cmd368

368bet

roulette

ibcbet

clickbet88

clickbet88

clickbet88

bonus new member 100

slot777

https://bit.ly/m/clickbet88

https://vir.jp/clickbet88_login

https://heylink.me/daftar_clickbet88

https://lynk.id/clickbet88_slot

clickbet88

clickbet88

https://www.burgermoods.com/online-ordering/

https://www.wastenotrecycledart.com/cubes/

https://dryogipatelpi.com/contact-us/

spaceman slot gacor

ceriabet link alternatif

ceriabet rtp

ceriabet

ceriabet link alternatif

ceriabet link alternatif

ceriabet login

ceriabet login

cmd368

sicbo online live

Ceriabet Login

Ceriabet

Ceriabet

Ceriabet

Ceriabet

casino online

clickbet88

login kudahoki88

Ceriabet

Ceriabet

Ceriabet

slot olympus

sbobet

slot thailand

sbobet