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पति को शादी के बाद मिलने वाली सेक्स की छूट को खत्म किया जाता है तो एक नए अपराध का जन्म हो जाएगा- SC

नई दिल्ली मैरिटल रेप को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि पतियों को पत्नी के साथ जबरन शारीरिक संबंध बनाने की छूट देने वाले प्रावधानों की संवैधानिक वैधता को लेकर विचार किया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर सुनवाई के दौरान सवाल किया कि क्या अगर पति को शादी के बाद मिलने वाली सेक्स की छूट को खत्म किया जाता है तो एक नए अपराध का जन्म हो जाएगा? सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस जेबी पारदीवाला और मनोज मिशअरा की बेंच ने आईपीसी (अब बीएनएस) की धारा 375 के अपवाद वाले क्लॉज पर सुनवाई की। इसके तहत अगर पत्नी नाबालिग नहीं है तो उसके साथ पति के शारीरिक संबंध बनाने को मैरिटल रेप की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता है। सीजेआई चंद्रचूड़ ने पूछा, आपका कहना है कि मैरिटल रेप से जुड़े अपवाद को खत्म करने पर नए अपराध का जन्म नहीं होगा। अपवाद के चलते अगर कोई महिला 18 साल से ज्यादा उम्र की है तो शादी के बाद पति को उसके साथ शारीरिक संबंध बनाने की छूट मिलती है। मान लीजिए अगर इस अपवाद को खत्म कर दिया जाता है तो क्या नया अपराध पैदा हो जाएगा? क्या कोर्ट को स्वतंत्र रूप से इस अपवाद की संवैधानिक वैधता जांचने का अधिकार है? कुछ याचिकाकर्ताओं की तरफ से पेश हुए सीनियर वकील करुणा नुंडी ने कहा कि इस तरह के सवाल निजी विचार बनाम भारत सरकार हो सकते हैं। इसपर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह ध्यान रखने की जरूरत है कि संवैधानिक आदेशों में स्त्रीविरोध और पुरुषवाद का कोई स्थान नहीं है। सीजेआई ने कहा, अगर पति को मिलने वाली छूट को खत्म कर दिया जाता है तो यह अपराध सामान्य प्रावधानों के अंतरगत ही आएगा या फिर कोर्ट को अलग अपराध का निर्माण करना होगा। सीजेआई ने कहा, उनका कहना है कि वैवाहिक संबंध में आने के बाद पति को खुद ही शारीरिक संबंध बनाने की छूट मिल जाती है। लेकिन इन तथ्यों को भी मानते हैं कि सहमति जरूरी है। बेंच ने इस बात की भी आशंका जताई की इस अपवाद को खत्म करने पर वैवाहिक संस्था में भी अस्थिरता आने की गुंजाइश है। इसपर नुंडी ने कहा, शादी सांस्थानिक नहीं बल्कि निजी होती है। इसको इस तरह से हिलाया नहीं जा सकता। वहीं सीनियर वकील कोलिन गोंसालवीस ने कहा कि कई अन्य देशों में इस तरह के अपवाद संवैधानिक नहीं हैं। केंद्र सरकार का कहना है कि इन प्रावधानों का दुरुपयोग भी किया जा सकता है क्योंकि यह साबित करना ही मुश्किल हो जाएगा कि शारीरिक संबंध सहमति से बनाया गया था या फिर असहमति से। सुप्रीम कोर्ट ने 2022 के दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले का भी जिक्र किया जिसमें याचिकाकर्ताओं को सुप्रीम कोर्ट जाने की अनुमति दी गई थी।

इजरायली बड़ा धमाका हमास प्रमुख सिनवार की मौत पर बोले बाइडेन- यह दुनिया के लिए अच्छा

बेरुत इजराइल डिफेंस फोर्सेज ने अपने सैन्य अभियान के तहत गाजा में गुरुवार को अपने सबसे बड़े दुश्मन हमास प्रमुख याह्या सिनवार को मार गिराया। सिनवार ने पिछले साल इजराइल पर हमास के आतंकी हमले की अगुवाई की थी और वह इजराइल के हिट लिस्ट में था। सिनवार की मौत के बाद इजरायल ने अपना बदला पूरा कर लेने की बात कही लेकिन बंधकों की रिहाई तक उसकी लड़ाई जारी रहेगी। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने याह्या सिनवार की मौत पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह पूरी दुनिया के लिए एक अच्छा दिन है। उन्होंने कहा कि डीएनए परीक्षण से पुष्टि हुई है कि सिनवार मारा गया है। यह इजरायल और अमेरिका के साथ पूरी दुनिया के लिए एक अच्छा दिन है। यह इजरायली बंधकों की रिहाई के लिए एक अच्छा अवसर है। इससे एक साल से जारी गाजा युद्ध समाप्त हो जाएगा। अमेरिकी उपराष्ट्रपति और डेमोक्रेटिक उम्मीदवार कमला हैरिस ने भी कहा है कि हजारों निर्दोष लोगों की हत्या के लिए जिम्मेदार हमास नेता याह्या की मौत की वजह से अमेरिका, इजरायल और पूरी दुनिया बेहतर स्थिति में है। यह गजा में हो रहे युद्ध को खत्म करने का एक मौका है। इजराइल ने गुरुवार रात हमास प्रमुख याह्या सिनवार को मार गिराने का दावा किया था। इजरायल और अमेरिका की तरफ से दावा किया जाता रहा है कि पिछले साल 7 अक्टूबर को दक्षिणी इजरायल में हुए आतंकी हमले का नेतृत्व याह्या सिनवार ने ही किया था जिसमें 12 सौ लोग मारे गए थे और लगभग ढाई सौ लोगों को बंधक बनाया गया था। उल्लेखनीय है कि जुलाई में हमास नेता इस्माइल हनिया के तेहरान में इजरायली कार्रवाई में मारे जाने के बाद सिनवार को हमास प्रमुख बनाया गया था। सिनवार का जन्म 1962 में खान यूनिस के गाजा शहर के एक शरणार्थी शिविर में हुआ था। हमास का गठन 1987 में हुआ था और याह्या सिनवार उसके संस्थापक सदस्यों में से एक था। अपनी क्रूरता के लिए कुख्यात सिनवार ने संदेह होने पर अपने 12 सहयोगियों की हत्या कर दी थी, जिसके बाद उसे खान यूनिस का कसाई कहा जाने लगा। क्या सिनवार या हमास का कोई विकल्प भी खड़ा हो चुका है, जो खाली जगह भरेगा? इन सवालों के जवाब के लिए एक बार सिनवार की हिस्ट्री जानते चलें. अस्सी के दशक में हमास को खड़ा करने में जो शुरुआती लोग थे, उनमें से एक सिनवार भी था. उसे इजरायली सेना ने कई बार पकड़ा भी. साल 2011 में कैदियों की अदलाबदली के दौरान छूटकर वो वापस हमास की कमान संभालने लगा.  इसके बाद से वो गाजा में हमास को लगातार ताकतवर बनाता गया. बाहरी दुनिया से संवाद और फंडिंग जुटाने का काम भी इसके हिस्से था. इस नेता के बारे में कुख्यात था कि ये हर उस शख्स का गला काट देता था, जो इसे इजरायल के पक्ष में लगे, फिर चाहे वो फिलिस्तीनी जनता क्यों न हो. पिछले साल 7 अक्टूबर को इजरायल पर बड़ा नागरिक हमला हुआ. खुफिया एजेंसियों ने माना कि अटैक का मास्टरमाइंड सिनवार ही है. हमले के साथ-साथ हमास ने ढाई सौ से ज्यादा लोगों को बंधक भी बना लिया. इसके बाद से आईडीएफ सिनवार को पकड़ने या मारने की फिराक में थी. यहां तक कि उसकी सूचना देने वालों को 4 लाख डॉलर इनाम तक का वादा कर दिया. आखिरकर गुरुवार को सिनवार मारा गया, डीएनए टेस्ट के बाद जिसकी पुष्टि भी इजरायल ने कर दी. गाजा में क्यों है चुप्पी इतनी बड़ी घटना के बाद भी हमास की पैरवी करने वाले किसी मुस्लिम देश की बड़ी प्रतिक्रिया नहीं आई, जो पहले हर इजरायली वार पर हो-हल्ला किया करते थे. यहां तक कि गाजा में भी सन्नाटा है. कोई कुछ भी कहने से बच रहा है. इसके पीछे इजरायल का डर नहीं, बल्कि एक बड़ा कारण ये भी है कि गाजा पट्टी में सिनवार की लोकप्रियता लगातार गिर रही थी. आधी से ज्यादा आबादी सिनवार से परेशान पेलेस्टाइन सेंटर फॉर पॉलिसी एंड सर्वे रिसर्च ने पिछले महीने एक सर्वे के नतीजे जारी किए. इसकी मानें तो गाजा की 65 फीसदी जनता सिनवार की लीडरशिप से नाखुश थी. वे मान रहे थे कि इसी लीडरशिप के चलते गाजा पट्टी तबाह हुई. वहां चालीस हजार से ज्यादा लोग मारे गए. वहीं कथित लीडर सालभर से हमास के सघन टनल नेटवर्क में छिपा हुआ था. सिनवार का चैप्टर क्लोज हो चुका, लेकिन क्या हमास नाम की किताब भी साथ ही बंद हो जाएगी? गुरुवार को सिनवार की मौत कन्फर्म करते हुए इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू ने इसे ‘गाजा के लिए हमास के बाद शुरुआत’ कहा. साथ ही साथ ये भी साफ कर दिया कि उनकी सेना बंधकों को छुड़ाने तक वहीं जमी रहेगी. इसके बाद क्या- ये सवाल बार-बार उठ रहा है. हमास के बाद कौन से विकल्प बाकी फिलिस्तीनी चरमपंथी गुट हमास का गाजा में केवल हेडक्वार्टर नहीं था, बल्कि यही संगठन इस पट्टी पर शासन चला रहा था. हालांकि ये कोई चुनी हुई सरकार नहीं थी. वो साल 2007 से इस क्षेत्र पर एकतरफा शासन कर रहा था. बता दें कि साल 2006 में फिलिस्तीन (गाजा पट्टी और वेस्ट बैंक) में इलेक्शन हुए थे. इसमें हमास विपक्षियों पर भारी रहा. इसके बाद उसने फिलिस्तीनी अथॉरिटी से सत्ता छीन ली और अपना अलग राजकाज चलाने लगा. अब लगभग सारे लीडरों को खो चुका हमास अनाथ हो चुका है. ऐसे में गाजा में उसके रूल की फिलहाल तो कोई संभावना नहीं. खाली फ्रेम में कई तस्वीरें आ सकती हैं इनमें एक दावेदार है, फिलिस्तीनी अथॉरिटी. फिलहाल वेस्ट बैंक में काम कर रही अथॉरिटी को लेकर अगर अंतरराष्ट्रीय समुदाय एकमत हो जाए तो राष्ट्रपति महमूद अब्बास की सरकार गाजा को भी कंट्रोल कर सकती है. एक संभावना ये भी है कि तुरंत कोई रास्ता न निकलता देख इजरायली सेना कुछ समय के लिए वहीं रुक जाए, और अप्रत्यक्ष सैन्य कंट्रोल रखे. ये इसलिए भी हो सकता है क्योंकि इजरायल बार-बार हमास के कमर तोड़ देने की बात कह रहा है. अगर फिलहाल वो गाजा पट्टी से एकदम से हट जाए तो हो सकता है कि बचे-खुचे विद्रोही वापस अपना काम शुरू कर दें. किसी भी युद्धग्रस्त या ताजा-ताजा युद्ध से निकले … Read more

इजराइल के हवाई हमले से दहला लेबनान, 16 मारे गए, हिजबुल्लाह ने भी दागे रॉकेट

इजरायल मानवीय मिशनों को गाजा तक पहुंचने की अनुमति दे:डब्ल्यूएचओ लेबनान में इजरायली हवाई हमलों में दो हजार से ज्यादा लोगों की मौत :स्वास्थ्य मंत्रालय इजराइल के हवाई हमले से दहला लेबनान, 16 मारे गए, हिजबुल्लाह ने भी दागे रॉकेट जिनेवा/ बेरूत विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने इजरायल से आग्रह किया है कि वह उत्तरी गाजा तक मानवीय मिशनों को महत्वपूर्ण खाद्य और चिकित्सा आपूर्ति पहुंचाने की अनुमति दें, जो वहां जारी हिंसा के कारण पहुंच नहीं पा रही हैं। डब्ल्यूएचओ और उसके सहयोगियों ने  पोलियो टीकाकरण अभियान का दूसरा दौर शुरू किया, जिसका लक्ष्य पाँच लाख से ज़्यादा बच्चों को पोलियो से बचाना है।डब्ल्यूएचओ के प्रमुख टेड्रोस एडनॉम घेब्रेयसस ने  ‘एक्स’ पर लिखा, “दो दिनों के टीकाकरण के बाद मध्य गाजा में पोलियो वैक्सीन की दूसरी खुराक पाने वाले बच्चों की कुल संख्या 156,943 हो गयी है।” उन्होंने कहा कि फिलहाल, जारी हिंसा से करीब 90 प्रतिशत बच्चों को टीका लगाने के अभियान के लक्ष्य को खतरा है। प्रमुख ने बताया कि पोलियो के टीकों के अलावा, बच्चों को उनकी प्रतिरक्षा को मजबूत करने के लिए विटामिन ए की खुराक दी जा रही है। उन्होंने बताया कि अक्टूबर में उत्तरी गाजा में संयुक्त राष्ट्र के 54 निर्धारित मिशनों में से केवल एक ही सफलतापूर्वक पूरा हुआ है, अन्य संघर्ष के कारण रद्द कर दिए गए हैं या बाधित हैं। लेबनान में इजरायली हवाई हमलों में दो हजार से ज्यादा लोगों की मौत : स्वास्थ्य मंत्रालय  लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि इजरायली हवाई हमलों के कारण उनके देश में 2,367 लोग मारे गए हैं वहीं 11,088 घायल हो गए हैं। ये आंकड़ा 8 अक्टूबर 2023 से अब तक का है।  मंत्रालय ने बताया कि 15 अक्टूबर को लेबनान के अलग-अलग इलाकों में हुए इजरायली हवाई हमलों में मृतकों की संख्या 17 और घायलों की संख्या 182 हो गई। समाचार एजेंसी शिन्हुआ की मानें तो, दक्षिण में तीन लोग मारे गए और 92 लोग घायल हो गए। नबातियेह प्रांत में नौ लोग मारे गए और 49 घायल हो गए। वहीं, बेका घाटी में पांच लोग मारे गए और 26 लोग घायल हो गए। इसके अलावा, बालबेक हरमेल प्रांत में 15 लोग घायल हो गए। 23 सितम्बर से इजरायली सेना हिजबुल्लाह के साथ बढ़ते तनाव के बीच लेबनान पर ताबड़तोड़ हवाई हमला कर रही है। 8 अक्टूबर 2023 के बाद से इजरायली सेना की ओर से लेबनानी-इजरायली सीमा पर गोलीबारी की जा रही है। जबकि, गाजा पट्टी में हमास और इजरायल के बीच युद्ध जारी है। यह हवाई अभियान पिछले वर्ष हमास के इजरायली हमले के बाद बढ़े हैं। गाजा पट्टी पर इजरायली हमले में 42,400 से अधिक लोग मारे हए। मृतकों में ज्यादातर महिलाएं और बच्चे शामिल हैं। दुनिया के बड़े देशों और संगठनों ने मध्य पूर्व के बिगड़ते हालात को लेकर कई चेतावनी जारी की। तमाम कोशिशों के बीच भी शांति वार्ता पर बात नहीं बन पाई। इस बीच इजरायल की ओर से गाजा और लेबनान पर हवाई हमले जारी रहे। हालात ने गंभीर मोड़ तब और ले लिया जब इजरायल ने 1 अक्टूबर को दक्षिण लेबनान में प्रवेश कर जमीनी कार्रवाई शुरू की। इजराइल के हवाई हमले से दहला लेबनान, 16 मारे गए, हिजबुल्लाह ने भी दागे रॉकेट गाजा में हमास के आतंकवादियों का सामना कर रहे इजराइल को अब ईरान समर्थिक आतंकवादी समूह हिजबुल्लाह से जूझना पड़ रहा है। इजराइली सुरक्षाबल लेबनान में छुपे हिजब्बुलाह आतंकियों को चुन-चुनकर ढेर कर रहा है। इजराइली सुरक्षाबलों (आईडीएफ) के ताजा हमले में 16 लोग मारे गए हैं। आईडीएफ ने दावा किया है कि दक्षिण लेबनान में उसके हमले में दर्जनों आतंकवादियों को मौत की नींद सुला दिया गया। लेबनान के समाचार पत्र द नेशनल न्यूज की खबर में स्वास्थ्य मंत्रालय के हवाले से कहा गया है कि  दक्षिण लेबनान के शहर नबातिह में एक नगरपालिका भवन पर हुए इजराइली हवाई हमलों की शृंखला में कम से कम 16 लोग मारे गए और 52 घायल हो गए। मृतकों में नबातिह का मेयर अहमद काहिल भी शामिल है। इस हमले पर लेबनान के कार्यवाहक प्रधानमंत्री नजीब मिकाती ने कहा कि अहमद काहिल स्थानीय संकट समिति की बैठक में थे। उन्हें जानबूझकर निशाना बनाया गया। उन्होंने कहा अगर दुनिया इजराइल को आक्रमण करने से नहीं रोक सकती तो संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के सामने युद्धविराम की गुहार लगाने का कोई मतलब नहीं। इजराइल ने  सुबह नबातीह और आसपास के इलाकों पर करीब 12 स्थानों पर हमले किए। संयुक्त राष्ट्र के विशेष समन्वयक जीनिन हेनिस-प्लास्चार्ट ने कहा कि इजराइल ने पूरे लेबनान में नागरिकों और नागरिक बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया है। उन्होंने कहा कि यह अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का उल्लंघन है। उल्लेखनीय है कि कार्यवाहक प्रधानमंत्री नजीब मिकाती ने मंगलवार को कहा था कि अमेरिकी अधिकारियों ने उन्हें आश्वासन दिया है कि इजराइल अब बेरूत पर हमले कम करेगा। द टाइम्स ऑफ इजराइल ने आईडीएफ के हवाले से कहा है कि कुछ समय पहले उत्तरी इइराइल में लेबनान से दो रॉकेट दागे गए। इनमे से वायुसेना ने एक रॉकेट को मार गिराया। दूसरा रॉकेट खुले क्षेत्र में गिरा। इस हमले में किसी के घायल होने की सूचना नहीं है। उधर, इराक में इस्लामिक प्रतिरोध ने दावा किया है कि उसने इलियट पर ड्रोन हमला किया है। इस बीच अमेरिकी सेना ने कहा है कि हूथी हथियार भंडारण केंद्र पर हमले में बी-2 बमवर्षक विमानों का इस्तेमाल किया गया। आईडीएफ के एक्स हैंडल पर कहा गया है कि दक्षिणी लेबनान में  उसके सैनिकों ने जमीन और आसमान से हमले कर दर्जनों हिजबुल्लाह आतंकियों का सफाया किया। नागरिक क्षेत्र में छुपाकर रखे गए हथियारों के जखीरा (कोर्नेट मिसाइलों, एटी-3 सैगर मिसाइलों, गोले और 100 मोर्टार) को भी नष्ट कर दिया गया। एक जगह एंटी टैंक मिसाइल दागने के बाद आतंकवादी भाग गए। बेरूत टाइम्स के अनुसार, हिजबुल्लाह के उप महासचिव नईम कासेम ने फिर दोहराया है कि मौजूदा लड़ाई का समाधान युद्धविराम है। हमास के समर्थन में शुरू किया हमला अब युद्ध में बदल गया है। हिजबुल्लाह ने इजराइल पर आक्रमण के लिए नई रणनीति और नया समीकरण तय किया है। अगर इजराइली अधिकारी युद्धविराम नहीं चाहते, तो हिजबुल्लाह आखिरी दम तक लड़ेगा। कासेम ने लेबनान के विस्थापितों से वादा किया कि उनकी … Read more

दुनिया में जल संकट के कारण आधे से अधिक खाद्य उत्पादन पर खतरा मंडरा रहा है: शोध

नई दिल्ली दुनिया में जल संकट के कारण आधे से अधिक खाद्य उत्पादन पर खतरा मंडरा रहा है और 2050 तक वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद में इसके कारण औसतन आठ प्रतिशत का नुकसान हो सकता है जबकि निम्न आय वाले देशों को 15 प्रतिशत तक की हानि का सामना करना पड़ सकता है। एक नई रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई। नेताओं और विशेषज्ञों के एक अंतरराष्ट्रीय समूह ‘ग्लोबल कमीशन ऑन द इकोनॉमिक्स ऑफ वॉटर’ की रिपोर्ट में बताया गया कि कमजोर आर्थिक प्रणाली, अंधाधुंध भूमि का इस्तेमाल, जल संसाधनों का निरंतर कुप्रबंधन तथा बिगड़ती जलवायु के कारण वैश्विक जल चक्र पर काफी असर पड़ा है। रिपोर्ट में कहा गया है, ‘‘जल संकट के कारण 2050 तक दुनिया के आधे से अधिक खाद्य उत्पादन पर असर पड़ सकता है और इसके कारण वैश्विक स्तर पर देशों के सकल घरेलू उत्पाद में आठ प्रतिशत तक तथा निम्न आय वाले देशों में 15 प्रतिशत तक हो नुकसान हो सकता है। साथ ही इसके बड़े आर्थिक परिणाम भी हो सकते हैं।’’ रिपोर्ट में बताया गया कि लगभग तीन अरब लोग और दुनिया का आधे से अधिक खाद्य उत्पादन ऐसे क्षेत्रों में स्थित हैं जहां पानी की उपलब्धता कम है या अस्थिर है। कई शहरों को भूजल की कमी का भी सामना करना पड़ रहा है। पोट्सडैम जलवायु प्रभाव अनुसंधान संस्थान (पीआईके) के निदेशक और ‘ग्लोबल कमीशन ऑन द इकोनॉमिक्स ऑफ वॉटर’ के चार सह-अध्यक्षों में से एक जॉन रॉकस्ट्रोम ने बताया, ‘‘आज दुनिया की आधी आबादी पानी की कमी का सामना कर रही है। जैसे-जैसे महत्वपूर्ण संसाधन दुर्लभ होते जा रहे हैं वैसे-वैसे खाद्य सुरक्षा और मानव विकास खतरे में पड़ रहा है और हम ऐसा होने भी दे रहे हैं।’’ रॉकस्ट्रोम ने कहा, ‘मानव इतिहास में ऐसा पहली बार हो रहा है कि हम वैश्विक जल चक्र को प्रभावित कर रहे हैं।’’ रिपोर्ट में बताया गया कि जल प्रबंधन के लिए अभी तक जो भी तरीके अपनाए गए हैं वे विभिन्न अर्थव्यवस्थाओं में जल के विविध मूल्यों तथा महत्वपूर्ण पारिस्थितिकी प्रणालियों के संरक्षण में इसकी भूमिका की अनदेखी करने के कारण विफल रहे हैं।    

प्रत्येक मोबाइल उपयोगकर्ता एक कंटेंट निर्माता और प्रसारक है : केंद्रीय मंत्री मुरुगन

नई दिल्ली  सूचना एवं प्रसारण राज्य मंत्री एल. मुरुगन ने यहां कहा कि प्रत्येक मोबाइल उपयोगकर्ता एक कंटेंट निर्माता और प्रसारक है और उनके द्वारा साझा की गई जानकारी की सत्यता सुनिश्चित करना उनकी नैतिक जिम्मेदारी है। इंडिया मोबाइल कांग्रेस के अवसर पर ‘प्रसारण क्षेत्र में उभरते रुझान और प्रौद्योगिकी’ विषय पर आयोजित संगोष्ठी को संबोधित करते हुए मुरुगन ने कहा कि विषय-वस्तु उभरती प्रसारण क्रांति में “नायक” का स्थान रखती है और अच्छी गुणवत्तापूर्ण विषय-वस्तु उपलब्ध कराने वाला कोई भी व्यक्ति सफल होगा। उन्होंने कहा कि सरकार ने हाल ही में एनिमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग, कॉमिक्स और एक्सटेंडेड रियलिटी (एवीजीसी-एक्सआर) क्षेत्र को बढ़ावा देने और फिल्म निर्माताओं को देश भर में मौजूद प्रतिभाओं और स्थानों का उपयोग करते हुए ‘भारत में शूटिंग’ करने के लिए प्रोत्साहित करने के वास्ते मुंबई में भारतीय रचनात्मक प्रौद्योगिकी संस्थान की स्थापना को मंजूरी दी है। मुरुगन ने कहा कि जब कोई व्यक्ति समाचार या सूचना प्रकाशित करता है तो उसका यह दायित्व है कि वह उसे प्रमाणित करे, सत्यापित करे और सुनिश्चित करे कि वह सही है। मंत्री ने कहा, “हमारी सामाजिक और नैतिक जिम्मेदारी है। हर मोबाइल उपयोगकर्ता और प्रसारक को प्रसारण से पहले ध्यान से सोचना चाहिए कि कहीं इस खबर से किसी के निजी जीवन पर असर तो नहीं पड़ेगा, कहीं यह खबर देश के खिलाफ तो नहीं है।” मुरुगन ने सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक क्षेत्रों में कमजोर आबादी के समावेश को सुनिश्चित करने के लिए प्रसारण सेवाओं तक उनकी पहुंच में सुधार की आवश्यकता पर बल दिया। सूचना एवं प्रसारण सचिव संजय जाजू ने 5जी की परिवर्तनकारी क्षमता पर प्रकाश डाला, विशेष रूप से जब इसे संवर्धित वास्तविकता और आभासी वास्तविकता जैसी इमर्सिव प्रौद्योगिकियों के साथ जोड़ा जाए।  

रेलवे ने बदला ट‍िकट बुक‍िंग का न‍ियम सीटों की मारामारी से मिलेगी राहत ! 1 नवंबर से होगा लागू

नई दिल्ली फेस्‍ट‍िव सीजन में ट्रेन ट‍िकट की मारामारी के बीच रेलवे की तरफ से ट‍िकट बुक‍िंग के न‍ियम में बदलाव क‍िया गया है. सूत्रों से म‍िली जानकारी के अनुसार अब यात्री ट्रेन के प्रस्‍थान की तारीख से केवल 60 द‍िन पहले ही IRCTC से टिकट बुक करा सकेंगे. मौजूदा समय में एडवांस ट‍िकट बुक‍िंग की अवध‍ि 120 द‍िन की है. नए न‍ियम के तहत इसे बदलकर 60 द‍िन यानी पहले से एकदम आधा कर द‍िया गया है. यात्र‍ियों की तरफ से लंबे समय से एडवांस ट‍िकट बुक‍िंग के न‍ियम को बदलने की मांग की जा रही थी. ज‍िस पर अब रेलवे की तरफ से फैसला क‍िया गया है. पहले से बुक क‍िये गए टिकट पर क‍िसी प्रकार का असर नहीं सूत्रों का दावा है क‍ि ट‍िकट बुक‍िंग से जुड़ा नया न‍ियम 1 नवंबर 2024 से लागू क‍िया जाएगा. पहले से बुक किए गए टिकट पर क‍िसी तरह का असर नहीं होगा. आपको बता दें 1 नवंबर को द‍िवाली और 6 नवंबर को छठ पूजा के चलते रेलवे के सभी रूट पर ट‍िकट बुक‍िंग को लेकर मारामारी मची हुई है. रेलवे यात्र‍ियों की तरफ से ट‍िकट बुक‍िंग के न‍ियमों में बदलाव को लेकर लंबे समय से मांग हो रही थी. यात्र‍ियों की तरफ से आरोप लगाए जाते थे क‍ि बुक‍िंग शुरू होने के साथ ही एजेंट पहले ही सीट बुक कर देते हैं. इससे असल यात्र‍ियों को ट‍िकट म‍िलने में परेशानी होती है. अब तक की व्यवस्था के मुताबिक यात्री चार महीने पहले ही अपनी सीट रिजर्व करवा सकते हैं। तत्काल टिकट की बुकिंग यात्रा की तिथि से एक दिन पहले की जा सकती है। रोज सुबह 10 बजे के बाद 3 एसी लेकर ऊपर की श्रेणी के लिए बुकिंग शुरू हो जाती है जबकि स्लीपर तत्काल बुकिंग सुबह 11 बजे से चालू हो जाती है। हालांकि, अगर टिकट 1 नवंबर से पहले ही बुक हो चुके हैं, तो एडवांस ट्रेन टिकट बुकिंग के नए नियमों का उन बुकिंग पर कोई असर नहीं पड़ेगा। इस घटनाक्रम के बाद आईआरसीटीसी के शेयर दोपहर 14:20 बजे 2.2% की गिरावट के साथ 867.60 रुपये पर कारोबार कर रहे थे। IRCTC से हर दिन 12.38 लाख टिकट बुक होते हैं। खाने की क्‍वाल‍िटी की निगरानी के लिए एआई लैस कैमरे लगाए इस बीच भारतीय रेलवे अपने सिस्टम और प्रोसेस में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को शामिल करने की तरफ तेजी से आगे बढ़ रहा है. रेलवे ने पहले ही लिनन और खाने की क्‍वाल‍िटी की निगरानी के लिए एआई लैस कैमरे लगाए हैं. रेलवे मंत्री अश्‍व‍िनी वैष्णव ने कहा क‍ि हमने ट्रेनों की ऑक्‍यूपेंस की जांच के ल‍िए एआई मॉडल की पुष्‍ट‍ि की. इससे यह पता लगाया गया क‍ि ट्रेन में कितनी सीटें खाली हैं.

महाधर्मप्रांत ने 1,353 लोगों को 880 मिलियन डॉलर का भुगतान करने पर सहमत

लॉस एंजिल्स संयुक्त राज्य अमेरिका में सैकड़ों लोगों का बचपन में यौन शोषण करने वाले कैथोलिक पादरी की शर्मनाक हरकत देश की सबसे बड़ी लॉस एंजिल्स की महाधर्मप्रांत को भारी पड़ी है। लंबी कानूनी लड़ाई के बाद आखिरकार महाधर्मप्रांत ने ऐसे 1,353 लोगों को 880 मिलियन डॉलर का भुगतान करने पर सहमत हो गई है। द न्यूयॉर्क टाइम्स की खबर के अनुसार, यह किसी महाधर्मप्रांत का सबसे अधिक भुगतान है। लॉस एंजिल्स में यौन शोषण के मामलों की संचयी कुल राशि 1.5 बिलियन डॉलर से अधिक है। 880 मिलियन डॉलर का भुगतान करने करने के समझौते की घोषणा  वादी पक्ष और महाधर्मप्रांत के वकीलों ने संयुक्त बयान में की। आर्कबिशप जोस एच. गोमेज ने बयान में कहा कि वह हर एक घटना के लिए लोगों से माफी चाहते हैं। आशा है यह समझौता सताए गए इन पुरुषों और महिलाओं की पीड़ा को कुछ कम करेगा। बिशपअकाउंटेबिलिटी.ओआरजी के अध्यक्ष टेरेंस मैककिर्नन ने कहा कि सबसे पहले 2007 में 508 लोगों के मुकदमों में 660 मिलियन डॉलर का भुगतान करने पर सहमति हुई थी। तब से एक निगरानी समूह पादरियों के दुर्व्यवहार की रिपोर्टों पर नजर रखता है।    

चुनाव आयोग राजनीतिक दलों की जाने वाली मुफ्त योजनाओं के वादे को रोकने के लिए तत्काल कदम उठाए, SC में एक और याचिका दाखिल

नई दिल्ली  चाहे बस यात्रा हो या फिर राशन की व्यवस्था। हर राज्य में होने वाले चुनाव के समय राजनीतिक दलों द्वारा ऐसी योजनाओं को फ्री में देने का ऐलान किया जाता है। जब राजनीतिक दल की चुनाव में जीत होती है तो मुफ्त की सरकारी योजनाओं को राज्य में लागू भी किया जाता है। देश के कई राज्य ऐसे हैं, जहां इस समय जनता के लिए फ्री योजनाएं चल रही हैं। हालांकि, अब ऐसी चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया है कि देश के कई राज्यों में चल रही सभी मुफ्त की सरकारी योजनाएं बंद हो जाएंगी। आइये जानते हैं क्या सही में ऐसा कुछ होने जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट में चुनाव के दौरान फ्रीबीज (चुनावी रेवड़ियों) के वादे को लेकर एक याचिका दायर की गई है। इस याचिका में मांग की गई है कि चुनावों के दौरान किसी भी तरह के फ्री वादे को रिश्वत करार दिया जाए। साथ ही चुनाव आयोग को इलेक्शन के दौरान राजनीतिक दलों के द्वारा की जाने वाली मुफ्त योजनाओं के वादे को रोकने के लिए तत्काल कदम उठाए जाएं। इस मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया है। इसके साथ ही पीठ ने इस याचिका को अन्य लंबित मामलों के साथ जोड़ दिया है। पीठ ने याचिकाकर्ता को छूट देते हुए कहा कि वो सभी याचिकाओं पर जल्द सुनवाई के लिए अनुरोध कर सकता है। देश में बीते कुछ समय में चुनाव के समय फ्री योजनाओं को देने की मांग ने जोर पकड़ा है। लोकसभा से लेकर विधानसभा चुनावों तक इसकी गूंज सुनाई दी है। दिल्ली विधानसभा चुनाव के दौरान आम आदमी पार्टी ने कुछ यूनिट फ्री बिजली और मुफ्त पानी देने का वादा किया। इसके अलावा कांग्रेस ने भी कई राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव के दौरान इसी तरह के वादे किए। वहीं, भाजपा शासित राज्यों में भी मुफ्त सरकारी योजनाएं चल रही हैं। फ्रीबीज (चुनावी रेवड़ियों) के वादे को लेकर सुप्रीम कोर्ट में पहले से ही कई याचिकाएं लंबित हैं। पूर्व चीफ जस्टिस एनवी रमना, पूर्व सीजेआई जस्टिस यूयू ललित की पीठ पहले ही फ्रीबीज मामले में सुनवाई कर चुकी है। हाल ही में डीवाई चंद्रचूड़ की पीठ ने इस मामले में सुनवाई की है।    

सुशासन और हिंदुत्व से रामराज्य की ओर, मोहन भागवत से मिले प्रवीण तोगड़िया ….

नागपुर प्रवीण तोगड़िया और मोहन भागवत की मुलाकात ही अपनेआप में महत्वपूर्ण है – लंबे अर्से बाद ये मीटिंग ऐसे माहौल में जब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और बीजेपी नेतृत्व के बीच सबकुछ ठीक न होने की जोरदार चर्चा हो. करीब तीन दशक तक विश्व हिंदू परिषद से जुड़े रहने के बाद 2018 में प्रवीण तोगड़िया ने इस्तीफा देकर संघ से भी नाता तोड़ लिया था. नई बीजेपी के दौर में अपनी पूछ घटने से प्रवीण तोगड़िया बेहद नाराज थे, और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी नेता अमित शाह के विरोधी माने जाने लगे थे. जब कोई रास्ता नहीं सूझा तो संघ से भी नाता तोड़ कर प्रवीण तोगड़िया ने अलग राह पकड़ ली – और अंतर्राष्ट्रीय हिंदू परिषद के नाम से नया संगठन बना लिया. बीच बीच में प्रवीण तोगड़िया को लेकर कई तरह की चर्चाएं और विवाद भी हुए, लेकिन उनको सबसे ज्यादा तकलीफ तब हुई जब जनवरी, 2024 में राम मंदिर उद्घाटन के लिए उनको नहीं बुलाया गया. ध्यान रहे विश्व हिंदू परिषद ने ही अयोध्या में राम मंदिर बनाने का आंदोलन शुरू किया था. कैसे हुई तोगड़िया और भागवत की मुलाकात अंग्रेजी अखबार द हिंदू में प्रवीण तोगड़िया और संघ प्रमुख मोहन भागवत की मुलाकात को लेकर एक रिपोर्ट प्रकाशित हुई है. सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि ये मुलाकात अचानक हुई है. दशहरे के दिन दोनो नेताओं ने नागपुर के समारोह में एक दूसरे का अभिवादन किया, और अगले दिन मिलने का फैसला किया गया. विजयादशमी के दिन संघ प्रमुख ने हिंदू समाज से एकजुट होने का आह्वान किया था – और उसके 24 घंटे बाद ही प्रवीण तोगड़िया और मोहन भागवत की मुलाकात भी हो गई. पहल चाहे जिस तरफ से हुई हो, ये मुलाकात ऐसे वक्त हुई है जब संघ की तरफ से बीजेपी पर लगाम कसने की भी चर्चा चल रही है. मुलाकात के बाद प्रवीण तोगड़िया का कहना है, राम मंदिर निर्माण दशकों से बीजेपी के चुनावी वादे का हिस्सा रहा है, लेकिन पार्टी इसका चुनावी फायदा नहीं उठा सकी, और 2014 में केंद्र की सत्ता में आने के बाद से सबसे कम सीटों पर सिमट गई है. प्रवीण तोगड़िया असल में लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में बीजेपी की हार की तरफ इशारा कर रहे हैं. यूपी की हार और हरियाणा में जीत को भी संघ के असहयोग और सहयोग से जोड़ कर देखा जा रहा है. वैसे तात्कालिक चुनौती महाराष्ट्र और झारखंड विधानसभा के चुनाव भी हैं. हिंदू समाज सेवा, या मोदी-शाह विरोध रिपोर्ट के मुताबिक, प्रवीण तोगड़िया ने मोहन भागवत से मुलाकात में इस मुद्दे को जोर देकर उठाया है कि हिंदू राजनीतिक रूप से किसी पर भरोसा नहीं कर रहा है. जाहिर है, प्रवीण तोगड़िया बीजेपी नेतृत्व की तरफ ही इशारा कर रहे हैं.  बातचीत में तोगड़िया कहते हैं, ‘राम मंदिर आंदोलन के माध्यम से पूरे देश में सभी हिंदू जातियों को एक करने का मकसद हासिल कर लिया है. लेकिन, आंदोलन की पूर्णाहूति के बाद से ऐसा महसूस होने लगा है जैसे सारा किया धरा बेकार होने वाला है, और इसे हर हाल में रोकना होगा… मैं स्वयं और संघ प्रमुख दोनो एक जैसा महसूस कर रहे हैं.’ ये पूछे जाने पर कि संघ और उनका संगठन AHP हिंदुओं को एकजुट करने के लिए क्या करेंगे, तोगड़िया बताते हैं, दोनो मिलकर हिंदुओं के लिए काम कर रहे सभी छोटे बड़े संगठनों से साथ आने की अपील करेंगे. सवालिया अंदाज में प्रवीण तोगड़िया कह रहे हैं, जो समाज स्वास्थ्य, शिक्षा और महिलाओं की सुरक्षा जैसे बुनियादी सुविधाओं से जूझ रहा हो, वो भला धर्म की लड़ाई कैसे लड़ेगा, इसलिए पहले जरूरी चीजों पर फोकस करना होगा. वो आगे बताते हैं, मेरे साथ देश में 10 हजार एक्सपर्ट डॉक्टर जुड़े हैं, जो हिंदुओं को स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराएंगे. शिक्षकों के भी कुछ संगठन हैं जो हिंदुओं के बच्चों को मुफ्त पढ़ाएंगे. समान विचार वाले कुछ संगठन जो लोगों को स्ट्रेंथ ट्रेनिंग देते हैं, वे हिंदू महिलाओं को आत्मरक्षा की मुफ्त ट्रेनिंग देंगे, जिससे वो हमलावरों से खुद को बचा सकें. मणिपुर और कश्मीर की चिंता स्वाभाविक या राजनीतिक एक बार बिहार में प्रवीण तोगड़िया ने हिंदुओं के खतरे में होने की बात कही थी. उनका कहना है कि संघ प्रमुख से बातचीत में भी चर्चा के बिंदु वे ही रहे, मैंने भागवत से कहा जब शिया और सुन्नी इस्लाम की रक्षा के लिए साथ आ सकते हैं, हम छोटे और बड़े संगठन जो एक जैसे काम कर रहे हैं, हिंदुत्व को बचाने के लिए साथ क्यों नहीं आ सकते. देश से बाहर भी, भले ही वो पाकिस्तान हो, बांग्लादेश हो, अमेरिका हो, या फिर ब्रिटेन या कनाडा हिंदुओं की सुरक्षा संघ के लिए चिंता का विषय रही है, और दोनो नेताओं में इस बात पर सहमति बनी है कि विदेशों में रह रहे हिंदुओं के अधिकारों की सुरक्षा के लिए कुछ करना जरूरी हो गया है. यहां तक कि, रिपोर्ट बताती है, भारत में भी हिंदुओं की सुरक्षा संतोषजनक नहीं है. उदाहरण के लिए मणिपुर में, कश्मीर में भी. जम्मू-कश्मीर में अभी अभी जनता की चुनी हुई सरकार बनी है, और केंद्र शासित प्रदेश के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने देश के संविधान की शपथ ली है. प्रवीण तोगड़िया का सवाल है, धारा 370 को हटाये जाने के 5 साल बाद भी कश्मीरी पंडितों को फिर से वहां नहीं बसाया जा सका है. संघ प्रमुूख से मुलाकात से पहले भी प्रवीण तोगड़िया कहते रहे हैं, आज भी सुरक्षा के तमाम दांवों के बीच भी कश्मीर में कश्मीरी पंडितों की घर वापसी नहीं हो रही है… मणिपुर में बड़ी संख्या में हिंदू अब भी शरणार्थी शिविरों में रहने को मजबूर हैं… देश की बेटी नूपुर शर्मा अब भी अपने घर से बाहर नहीं निकल रही है. मणिपुर का मुद्दा केंद्र की बीजेपी की कमजोर कड़ी के रूप में महसूस किया गया है. मणिपुर में फिलहाल बीजेपी की ही सरकार है. मणिपुर पर प्रधानमंत्री मोदी की चुप्पी को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी हमलावर रहे हैं, और राम मंदिर उद्घाटन से ठीक पहले राहुल गांधी ने मणिपुर से ही अपनी न्याय यात्रा की शुरुआत की थी. लोकसभा चुनाव में बीजेपी की फजीहत के बाद संघ प्रमुख मोहन भागवत ने … Read more

उत्तराखंड में होटल और ढाबा कर्मचारियों के पुलिस वैरिफिकेशन को अनिवार्य किया, नहीं तो लगेगा 1 लाख का जुर्माना

देहरादून उत्तराखंड सरकार ने  खाने में थूकने से जुड़ी घटनाओं को रोकने के लिए दिशानिर्देश जारी किए हैं. उन्होंने ऐसा करने वालों पर 1 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाने की घोषणा की है. इसके साथ ही होटल और ढाबा कर्मचारियों के पुलिस वैरिफिकेशन को अनिवार्य किया गया है और उनकी रसोई में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाने का आदेश है. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा ऐसी घटनाओं पर चिंता जताए जाने के कुछ दिनों बाद राज्य पुलिस और स्वास्थ्य विभाग ने अलग-अलग दिशानिर्देश जारी किए और कहा कि अपराधियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी. हाल ही में मसूरी में दो लोगों को पर्यटकों को जूस परोसने से पहले गिलासों में कथित तौर पर थूकने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था. इसके अलावा देहरादून से एक वीडियो भी वायरल हुआ था जिसमें एक रसोइये को रोटी के लिए आटा बनाते समय कथित तौर पर थूकते हुए देखा जा सकता है. ‘किसी भी तरह की अशुद्धता बर्दाश्त नहीं’   स्वास्थ्य मंत्री धन सिंह रावत ने कहा कि आने वाले त्योहारी सीजन के दौरान खाने की सुरक्षा और शुद्धता उनकी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है. रावत ने कहा, त्योहारों के दौरान किसी भी तरह की अशुद्धता या असामाजिक गतिविधियां बर्दाश्त नहीं की जाएंगी.पुलिस महानिदेशक अभिनव कुमार ने अपराधियों को मुख्यमंत्री की चेतावनी को ध्यान में रखते हुए जिला पुलिस प्रमुखों को दिशानिर्देश जारी किए. ‘व्यापार प्रबंधकों की रसोई में हों CCTV’ दिशानिर्देशों में कहा गया है कि होटल और ढाबों जैसे व्यापारिक प्रतिष्ठानों में काम करने वाले लोगों का 100 प्रतिशत वैरिफिकेशन किया जाना चाहिए, साथ ही व्यापार प्रबंधकों को अपनी रसोई में सीसीटीवी कैमरे लगाने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए. खूफिया यूनिट की मदद से कार्ट्स की निगरानी जिला पुलिस को जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, खोखे और पुशकार्ट जैसी खुली जगहों पर ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए वे स्थानीय खूफिया यूनिट की मदद ले सकते हैं.दिशानिर्देशों में कहा गया है कि गश्त के दौरान इस पर भी विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए. होटलों और ढाबों की होगी रैंडम चेकिंग प्रावधानों के मुताबिक पुलिस होटलों और ढाबों पर रैंडम चेकिंग के लिए स्वास्थ्य और खाद्य विभाग की मदद भी ले सकती है. डीजीपी ने कहा कि अपराधियों पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 274 (बिक्री के लिए खाद्य और पेय पदार्थों में मिलावट) और उत्तराखंड पुलिस अधिनियम की धारा 81 (सार्वजनिक उपद्रव पैदा करने, जानबूझकर अफवाह फैलाने या गलत अलार्म पैदा करने के लिए बिना वारंट के गिरफ्तारी) के तहत मामला दर्ज किया जाना चाहिए.   यदि अधिनियम का धर्म, जातियता, भाषा आदि पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है, तो प्रासंगिक धारा 196 (1) (बी) (धर्म, जाति, भाषा, जन्म स्थान के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच शत्रुता को बढ़ावा देना) या बीएनएस की धारा 299 (जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण कृत्य जिनका उद्देश्य भारत में नागरिकों के किसी भी वर्ग के धार्मिक विश्वासों या धर्म का अपमान करना है) के तहत भी कार्रवाई की जानी चाहिए. 1 लाख रुपये तक के जुर्माने सहित सख्त कार्रवाई दिशानिर्देशों में कहा गया है कि स्वास्थ्य और खाद्य विभाग, नगर निगम/जिला पंचायत, नगर परिषदों और स्थानीय लोगों के समन्वय से एक जन जागरूकता अभियान भी चलाया जाना चाहिए.स्वास्थ्य सचिव और खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग के आयुक्त आर राजेश कुमार ने एक विस्तृत मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) भी जारी की, जिसमें अपराधियों के खिलाफ 25,000 रुपये से 1 लाख रुपये तक के जुर्माने सहित सख्त कार्रवाई का आदेश दिया गया है. कुमार ने कहा कि देहरादून और मसूरी में होटलों और ढाबों जैसे व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में खाद्य पदार्थों में थूकने की घटनाओं के वीडियो का संज्ञान लेते हुए और मुख्यमंत्री के निर्देशों के अनुपालन में दिशानिर्देश जारी किए गए हैं.इधर मंगलवार को, पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश में भाजपा सरकार ने कहा कि वह थूकने या किसी अन्य मानव अपशिष्ट को मिलाकर भोजन को प्रदूषित करने को संज्ञेय और गैर-जमानती अपराध बनाने के लिए दो अध्यादेश लाएगी.    

जंग की त्रासदी से जूझते गाजा में शवों को अंतिम संस्कार भी नसीब नहीं हो रहा, लाशों को कुत्ते नोच रहे

गाजा इजरायल और हमास के बीच जंग छिड़े अब एक साल से भी ज्यादा का समय बीत चुका है। पिछले साल 7 अक्टूबर को हमास के इजरायल पर हमले के बाद से गाजा में संघर्ष जारी है। अब युद्धग्रस्त गाजा से दिल दहला देने वाली तस्वीरें सामने आई हैं। इन तस्वीरों में आवारा कुत्ते लावारिश शवों को खाते नजर आ रहे हैं। गाजा के आपातकालीन सेवाओं के प्रमुख फारेस अफाना ने बताया है कि उन्हें और उनके सहयोगियों को उत्तरी गाजा में मारे गए फिलिस्तीनियों के शव मिले हैं जिनमें से कई पर जानवरों द्वारा शवों को खाए जाने के निशान हैं। फारेस अफाना ने सीएनएन को बताया, “भूखे आवारा कुत्ते सड़क पर इन शवों को खा रहे हैं। इससे हमारे लिए शवों की पहचान करना भी मुश्किल हो रहा है।” उन्होंने उत्तरी गाजा और जबालिया क्षेत्र में हवाई और जमीनी हमलों का जिक्र करते हुए कहा कि इजरायली सेना का कहर जारी है। अब त्रासदी से जूझते गाजा में शवों को अंतिम संस्कार भी नसीब नहीं हो पा रहा है। वहीं इजरायल ने दावा किया है कि हमास के लड़ाके इन इलाकों में फिर से संगठित हो रहे हैं। ‘स्थिति बदतर होती जा रही है’ पिछले साल 7 अक्टूबर को हमास ने इजरायल पर हमला किया था। इन हमलों में 1,206 लोगों की मौत हो गई थी जिनमें से ज़्यादातर आम लोग थे। तब से इजरायल के हमले में गाजा में 42,409 लोग मारे गए हैं वहीं 99,153 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। बुधवार को गाजा स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया है कि पिछले 24 घंटों में इजरायली सैन्य हमलों में 65 फिलिस्तीनी मारे गए हैं। अफ़ाना ने बताया कि सोमवार को इजरायली सैनिकों ने फिलिस्तीन शरणार्थियों के लिए संयुक्त राष्ट्र की एजेंसी (UNRWA) द्वारा संचालित एक राहत शिविर केंद्र में खाने की तलाश कर रहे भूखे लोगों पर गोलीबारी की है। उन्होंने कहा, “स्थिति बदतर होती जा रही है। उत्तरी गाजा में जो हो रहा है वह वास्तव में नरसंहार है।” गाजा में अकाल का डर इस बीच UNRWA ने गाजा में अकाल के जोखिम की चेतावनी दी है। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में UNRWA के प्रमुख फिलिप लाज़ारिनी ने कहा है कि गाजा में अकाल और तीव्र कुपोषण की संभावना बनी हुई हैं।” उन्होंने कहा कि यह एक तरह की बंजर जमीन बन गई है और यह जगह रहने लायक भी नहीं है”।

मेट्रो में सफर करने वालो के लिए सुविधा, मेट्रो ने शुरू की वाट्सप टिकट सेवा, ‘Hi’ भेजकर खरीद सकते हैं टिकट

मुंबई महामुंबई मुंबई मेट्रो 2A और 7 पर अब आप वाट्सएप से टिकट बुक कर सकते हैं। यह सुविधा महा मुंबई मेट्रो ऑपरेशंस कॉर्पोरेशन लिमिटेड (MMMOCL) ने शुरू की है। यात्रियों को 86526 35500 पर ‘Hi’ लिखकर WhatsApp करना होगा या स्टेशनों पर लगे QR कोड को स्कैन करना होगा। यह सुविधा सभी स्टेशनों पर उपलब्ध है। इस पहल का उद्देश्य डिजिटल टिकटिंग को बढ़ावा देना, टिकट काउंटरों पर कतारों को कम करना और यात्रियों को बेहतर अनुभव प्रदान करना है। एक बार में छह QR टिकट तक जेनरेट किए जा सकते हैं। क्रेडिट और डेबिट कार्ड से भुगतान करने पर मामूली शुल्क लगेगा, लेकिन यूपीआई लेनदेन पर कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लगेगा। कतारें कम करने में मदद मिलेगी एमएमआरडीए आयुक्त संजय मुखर्जी ने कहा कि यात्रियों की संख्या में हर महीने औसतन 5% की वृद्धि हो रही है। हम समय की पाबंदी और निर्बाध सेवाओं के मामले में उम्मीदों को पूरा करने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं। वाट्सएफ टिकटिंग सुविधा से टिकट काउंटरों पर कतारें कम करने में मदद मिलेगी। जानें क्यों चुना ये विकल्प उन्होंने बताया कि वर्तमान में, हमारे 62% दैनिक यात्री पेपर क्यूआर टिकट का उपयोग करते हैं, 3% मोबाइल क्यूआर टिकट का उपयोग करते हैं और 35% NCMC (नेशनल कॉमन मोबिलिटी कार्ड) का उपयोग करते हैं। MMMOCL के एमडी रूबल अग्रवाल ने कहा कि हम अपने यात्रियों को मेट्रो टिकट बुक करने के लिए एक सुलभ, सहज और परिचित प्लेटफॉर्म प्रदान करना चाहते थे। भारत में वाट्सएप का व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है, इसलिए यह सबसे सही विकल्प था।

मुंबई से लंदन जा रही एअर इंडिया की फ्लाइट में यात्रियों को इमरजेंसी अलर्ट का मैसेज दिया गया

नई दिल्ली मुंबई से लंदन जाने वाली एअर इंडिया की फ्लाइट में यात्रियों को इमरजेंसी अलर्ट का मैसेज दिया गया। यह मैसेज लैंडिंग नहीं होने की वजह सर्कुलेट किया गया। हालांकि, लैंडिंग क्यों नहीं हो रही, इसका कोई कारण अभी तक पता नहीं चला है। एअर इंडिया की फ्लाइट AI129 7700 ब्रिटेन की राजधानी लंदन में चक्कर लगी रही है। फ्लाइट ट्रैकर फ्लाइटरडार24 ने बताया कि एयर इंडिया की फ्लाइट ने लंदन के ऊपर से उड़ान भरते समय एक इमरजेंसी सिग्नल भेजा है, हालांकि आपातकालीन सिग्नल क्यों भेजा गया, इसका अभी कारण पता नहीं चल पाया है. इस तरह के स्क्वाक कोड (इमरजेंसी अलर्ट) अक्सर आपातकालीन परिस्थितियों, जैसे आपातकालीन लैंडिंग आदि के दौरान सुने जाते हैं. स्क्वाक कोड का उपयोग एयर ट्रैफ़िक कंट्रोल (ATC) द्वारा उड़ान भरते समय विमानों की पहचान करने और उन्हें ट्रैक करने के लिए किया जाता है.   ATC विमान के लिए स्क्वाक कोड क्रिएट करता है, जब विमान अपनी सीमा में प्रवेश करता है, तो पायलट को विमान के ट्रांसपोंडर में एंट्री करने की अनुमति देने के लिए एक मैसेज भेजा जाता है. ट्रांसपोंडर फिर इसे ATC को वापस भेजता है. एअर इंडिया की फ्लाइट AIC129 में स्क्वाक कोड 7500 था, जो एक आपातकालीन ट्रांसपोंडर कोड है, जो दर्शाता है कि विमान खतरे में था और उसे ATC और अन्य सुरक्षा सेवाओं से तत्काल सहायता की आवश्यकता थी.  

सीआरपीएफ जवानो को ले जा रहे एक ट्रक पर बडगाम में चालक ने नियंत्रण खो दिया, 19 जवान घायल

श्रीनगर जम्मू-कश्मीर के बडगाम जिले में गुरुवार को एक सड़क दुर्घटना में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के 19 जवान घायल हो गए। अधिकारियों ने बताया कि 181 बटालियन एफ कंपनी के कर्मियों को ले जा रहे एक ट्रक पर बडगाम के खैगाम गांव में चालक ने नियंत्रण खो दिया। एक अधिकारी ने बताया, “चालक के नियंत्रण से बाहर होने के बाद सीआरपीएफ की 181-एफ कंपनी के कर्मियों को ले जा रहा ट्रक सड़क से फिसलकर एक खाई में गिर गया। दुर्घटना में सीआरपीएफ के 19 जवान घायल हो गए। दुर्घटना के तुरंत बाद, एक बचाव दल मौके पर पहुंचा और घायल जवानों को बाहर निकाला। उन्हें इलाज के लिए बडगाम जिले के चरार-ए-शरीफ शहर के अस्पताल में स्थानांतरित कर दिया गया।” अधिकारी ने बताया, “डॉक्टरों ने नौ घायलों को विशेष उपचार के लिए श्रीनगर के एसएमएचएस अस्पताल रेफर कर दिया है। चिकित्सकों ने बताया कि घायल जवानों में से दो को गंभीर चोटें आई हैं।” चुनौतीपूर्ण भूभाग पर तेज गति और लापरवाही से वाहन चलाने के कारण घाटी में सड़क दुर्घटनाएं होती हैं। वहीं, बुधवार को गंदेरबल जिले में श्रीनगर शहर से 42 किलोमीटर दूर श्रीनगर-लेह राष्ट्रीय राजमार्ग के मम्मार इलाके में एक निजी कार को तेल टैंकर ने टक्कर मार दी, जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई और दो अन्य घायल हो गए। अधिकारियों ने बताया कि निजी कार का चालक धीमी गति से चल रहे वाहनों की कतार से आगे निकलने की कोशिश कर रहा था और वाहनों को ओवरटेक करते समय विपरीत दिशा से आ रहे एक तेल टैंकर ने कार को सीधी टक्कर मार दी। पुलिस ने घटना में मामला दर्ज कर तेल टैंकर के चालक को हिरासत में ले लिया है। कार में सवार अन्य दो घायलों का स्थानीय अस्पताल में इलाज कराया गया, जिसके बाद उन्हें छुट्टी दे दी गई। मृतक कार की अगली सीट पर बैठा था, तभी कार सामने से आ रहे तेल टैंकर से जा टकराई।

जम्मू-कश्मीर के पूर्व डीजीपी एस.पी. वैद ने विपक्ष से सरकार के साथ मिलकर देश की एकता का संदेश देने की अपील की

नई दिल्ली कनाडा द्वारा भारतीय राजनयिकों को लेकर लगाए गए हालिया आरोपों के बाद देश में सियासत तेज हो गई है। इस बीच जम्मू-कश्मीर के पूर्व डीजीपी एस.पी. वैद ने विपक्ष से सरकार के साथ मिलकर देश की एकता का संदेश देने की अपील की है। एस.पी. वैद ने गुरुवार को एक बयान में कहा कि राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं को मिलकर सरकार के साथ एकता का संदेश देना चाहिए। उन्होंने कहा, “आप खुद देख लीजिए कि विपक्ष और कांग्रेस के अन्य नेताओं द्वारा किस तरह का संदेश दिया जा रहा है। इस समय हमें इकट्ठा होकर कनाडा को जवाब देना चाहिए।” उन्होंने कहा कि कनाडा चंद वोटों के लिए खालिस्तानी आतंकियों को अपने यहां पनाह देकर राजनीति कर रहा है और भारत को बदनाम करने की कोशिश कर रहा है। पूर्व डीजीपी ने कहा, “कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो के नेतृत्व में भारत के खिलाफ चलाए जा रहे शरारती, झूठे और बदनामी भरे अभियान के खिलाफ हमें एकजुट होना होगा। देश के विपक्षी नेताओं से मैं यही कहना चाहता हूं कि आप भारतीय बनो और अपने देश के साथ खड़े रहो।” भारत और कनाडा के बीच संबंधों में खटास तब आई जब प्रधानमंत्री ट्रूडो ने पिछले साल कनाडाई संसद में आरोप लगाया कि उनके पास खालिस्तानी आतंकवादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या में भारतीय एजेंटों का हाथ होने के सबूत हैं। भारत ने सभी आरोपों का खंडन करते हुए उन्हें “बेतुका” और ट्रूडो के राजनीतिक एजेंडे का हिस्सा बताया। कनाडा पर अपने देश में चरमपंथी और भारत विरोधी तत्वों को जगह देने का आरोप भी भारत ने लगाया था। कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने बुधवार को स्वीकार किया कि पिछले साल जब उन्होंने आरोप लगाया था उस समय कनाडा के पास “ठोस सबूत” नहीं थे। इस कबूलनामे के बाद विदेश मंत्रालय (एमईए) ने गुरुवार को कहा कि यह नई दिल्ली के रुख की ‘पुष्टि’ करता है और “बताता है कि ओटावा ने हमें हमारे अधिकारियों और राजनयिकों के खिलाफ ‘कोई सबूत नहीं दिया है”।

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