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पहले एयर इंडिया की फ्लाइट को धमकी, इसके बाद मुंबई-हावड़ा मेल को मिली बम से उड़ाने की धमकी

नई दिल्ली एयर इंडिया की फ्लाइट के बाद अब मुंबई-हावड़ा मेल को बम से उड़ाने की धमकी मिली है। यह संदेश आज सुबह करीब चार बजे ऑफ-कंट्रोल को मिला। इसके बाद ट्रेन अधिकारियों ने तुरंत ट्रेन नंबर 12809 को जलगांव स्टेशन पर रोककर इसकी जांच की। करीब दो घंटे तक ट्रेन की बारीकी से जांच की गई, लेकिन उसमें कोई संदिग्ध वस्तु नहीं मिली। इसके बाद ट्रेन को उसके गंतव्य की ओर रवाना कर दिया गया। धमकी का संदेश सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिए दिया गया था।  फजलुद्दीन नाम के एक अकाउंट के माध्यम से ट्रेन को उड़ाने की धमकी दी गई। पोस्ट में लिखा था कि “क्या रे हिंदुस्तानी रेलवे, आज सुबह खून के आंसू रोओगे तुम लोग। आज फ्लाइट में भी बम रखा गया है और 12809 ट्रेन में भी। नासिक आने से पहले बड़ा धमाका होगा।” आज सुबह मुंबई से न्यूयॉर्क जा रही एयर इंडिया की एक फ्लाइट को भी बम से उड़ाने की धमकी मिली। इसके चलते विमान को तुरंत दिल्ली की तरफ डायवर्ट कर दिया गया। इसे दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर सुरक्षित लैंड कराया गया। इन घटनाओं के बाद सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट पर हैं और मामले की जांच जारी है। सभी यात्रियों को सुरक्षित रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। इस्लामपुर-हटिया एक्सप्रेस ट्रेन को पलटाने की साजिश, पायलट ने बचाई जान इस्लामपुर-हटिया एक्सप्रेस ट्रेन को पलटाने की एक गंभीर साजिश का खुलासा हुआ है। मंगलवार की देर रात मखदुमपुर और बेला स्टेशन के बीच नेयामतपुर हाल्ट के पास पटरी पर एक बड़ा पत्थर रखा गया था। ट्रेन के पायलट ने समय रहते पत्थर पर नजर डालकर इमरजेंसी ब्रेक लगाई, जिससे ट्रेन दुर्घटनाग्रस्त होने से बच गई। जीआरपी (राजकीय रेल पुलिस) के थाना प्रभारी दीपनारायण यादव ने बताया कि यह काम किसी असामाजिक तत्व का था, जिसने जानबूझकर पटरी पर पत्थर रखा था। पायलट की सजगता के कारण बड़ा हादसा टल गया। एयर इंडिया की फ्लाइट को भी मिली धमकी इसके अलावा रात करीब 2 बजे एयर इंडिया का एक विमान मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज अंतर्राष्ट्रीय हवाईअड्डे से न्यूयॉर्क जा रहा था, जिसको बम से उड़ाने की धमकी मिली। धमकी के तुरंत बाद फ्लाइट को दिल्ली की ओर डायवर्ट किया गया। इन घटनाओं ने यात्रियों के बीच चिंता बढ़ा दी है और सुरक्षा एजेंसियां इन साजिशों के पीछे के लोगों की पहचान के लिए जांच कर रही हैं। सभी यात्रियों की सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।  

अर्थशास्त्र पुरस्कार को पहले बैंक ऑफ स्वीडन पुरस्कार के रूप में जाना जाता था, हुई नोबेल पुरस्कार की घोषणा

नई दिल्‍ली डैरोन ऐसमोग्लू, साइमन जॉनसन और जेम्स रॉबिन्सन को अर्थशास्त्र के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार मिला है। उन्हें यह पुरस्कार इस बात पर रिसर्च के लिए मिला है कि संस्थान कैसे बनते हैं और लोगों की खुशहाली को कैसे प्रभावित करते हैं। उनकी रिसर्च बताती है कि मजबूत और निष्पक्ष संस्थान जैसे-अच्छी सरकारें और कानून व्यवस्था लोगों की जिंदगी पर सकारात्मक असर डालते हैं। नोबेल पुरस्कार समिति ने सोशल मीडिया प्‍लेटफॉर्म एक्‍स पर एक पोस्ट में बताया कि संस्थाओं के गठन और परिवर्तन की परिस्थितियों को समझाने के लिए पुरस्कार विजेताओं का मॉडल तीन फैक्‍टरों पर आधारित है। पहला है संसाधनों के बंटवारे और समाज में निर्णय लेने की शक्ति (अभिजात वर्ग या जनता) को लेकर संघर्ष। और क्‍या कहती है र‍िसर्च? सम‍ित‍ि ने आगे बताया, ‘दूसरा यह है कि जनता को कभी-कभी सत्ता का इस्तेमाल करने का अवसर मिलता है। वे संगठित होकर और शासक वर्ग को धमकी देकर ऐसा कर सकते हैं। इसलिए समाज में सत्ता केवल निर्णय लेने की शक्ति से कहीं अधिक है। तीसरा है प्रतिबद्धता की समस्या, जिसका मतलब है कि अभिजात वर्ग के पास जनता को निर्णय लेने की शक्ति सौंपने के अलावा कोई विकल्प नहीं है।’ क्‍या है नोबेल पुरस्‍कार का इतिहास? ऐसमोग्लू और जॉनसन मैसाचुसेट्स इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में काम करते हैं और रॉबिन्सन शिकॉगो विश्वविद्यालय में अपना शोध करते हैं। अर्थशास्त्र पुरस्कार को पहले बैंक ऑफ स्वीडन पुरस्कार के रूप में जाना जाता था। आर्थिक विज्ञान का यह पुरस्कार अल्फ्रेड नोबेल की स्मृति दिया जाता है। बैंक ऑफ स्वीडन ने 1968 में नोबेल की स्मृति में इसकी शुरुआत की थी। नोबेल 19वीं सदी के व्यवसायी और रसायनज्ञ थे, जिन्होंने डायनामाइट का आविष्कार किया था और पांच नोबेल पुरस्कारों की स्थापना की थी। हालांकि, कुछ लोग इस बात पर जोर देते हैं कि अर्थशास्त्र का पुरस्कार तकनीकी रूप से नोबेल पुरस्कार नहीं है। लेकिन, इसे हमेशा 10 दिसंबर को अन्य पुरस्कारों के साथ प्रदान किया जाता है। इस दिन नोबेल की पुण्यतिथि है। पिछले सप्ताह चिकित्सा, भौतिकी, रसायन विज्ञान, साहित्य और शांति के लिए नोबेल पुरस्कारों की घोषणा की गई थी।

दिवाली से पहले मिल सकता है 1 करोड़ केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए DA में 3% की बढ़त का तोहफा

नई दिल्ली देश में करीब 1 करोड़ केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए एक महत्वपूर्ण खुशखबरी सामने आई है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, केंद्र सरकार दिवाली से पहले इन कर्मचारियों के महंगाई भत्ते (DA) में 3% की बढ़ोतरी करने की योजना बना रही है। यह बढ़ोतरी कर्मचारियों के लिए लंबे समय से अपेक्षित थी, और इसकी घोषणा 25 अक्टूबर तक की जा सकती है। DA की वर्तमान स्थिति फिलहाल, केंद्रीय कर्मचारियों का महंगाई भत्ता 50% है। यदि यह 3% की बढ़ोतरी लागू होती है, तो DA बढ़कर 53% हो जाएगा। इस बढ़ोतरी से न केवल कर्मचारियों को लाभ होगा, बल्कि उन्हें जुलाई, अगस्त और सितंबर महीनों का एरियर भी प्राप्त होगा। इससे उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार होगा और त्योहारों के समय उन्हें वित्तीय राहत मिलेगी। कैबिनेट की मंजूरी इस प्रस्ताव को लेकर बताया जा रहा है कि केंद्र सरकार ने कर्मचारियों की सैलरी बढ़ाने का पूरा प्लान तैयार कर लिया है। कैबिनेट की बैठक में इस पर चर्चा की जाएगी, जिसके बाद इसे आधिकारिक रूप से मंजूरी दी जाएगी। कैबिनेट द्वारा मंजूरी मिलने के बाद, जल्द ही कर्मचारियों के खातों में नया DA और एरियर का पैसा ट्रांसफर किया जा सकता है। हिमाचल प्रदेश और यूपी सरकार की पहल दिवाली के इस समय, अन्य राज्यों में भी कर्मचारियों के लिए महंगाई भत्ते में बढ़ोतरी की खबरें आई हैं। हाल ही में, हिमाचल प्रदेश सरकार ने अपने राज्य के सरकारी कर्मचारियों के लिए 4% महंगाई भत्ते की बढ़ोतरी की घोषणा की है। इससे राज्य के 1.80 लाख सरकारी कर्मचारियों और 1.70 लाख पेंशनभोगियों को लाभ मिलेगा। यह कदम दशहरा से पहले उठाया गया, जिससे कर्मचारियों को त्योहार के मौसम में अतिरिक्त वित्तीय सहायता मिली। इसी तरह, उत्तर प्रदेश सरकार ने मार्च 2024 में अपने राज्य के सरकारी कर्मचारियों के महंगाई भत्ते में 4% की बढ़ोतरी की थी। ये सभी पहलें दर्शाती हैं कि राज्य सरकारें भी अपने कर्मचारियों के कल्याण के प्रति गंभीर हैं और उन्हें आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रही हैं। महंगाई भत्ते की गणना की प्रक्रिया महंगाई भत्ते की गणना अखिल भारतीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (AICPI) के आधार पर की जाती है। AICPI, देश में खुदरा मूल्य आंदोलनों को ट्रैक करता है, और इस सूचकांक का नियमित रूप से संशोधन किया जाता है। महंगाई भत्ता साल में दो बार, आमतौर पर जनवरी और जुलाई में, संशोधित किया जाता है। जब भी महंगाई में वृद्धि होती है, तो इससे कर्मचारियों के DA में भी बढ़ोतरी की जाती है।   कर्मचारियों की मांग कर्मचारी संगठन लंबे समय से महंगाई भत्ते में वृद्धि की मांग कर रहे थे। इस संदर्भ में, सरकार की इस पहल को बहुत सकारात्मक रूप में देखा जा रहा है। अगर यह प्रस्ताव कैबिनेट से मंजूरी पा जाता है, तो इसे सरकारी कर्मचारियों के लिए एक महत्वपूर्ण वित्तीय मदद माना जाएगा। त्योहारों का महत्व त्योहारों का समय हमेशा से लोगों के लिए खुशी और उत्सव का समय होता है। दिवाली, जो भारत में सबसे बड़े त्योहारों में से एक है, इस समय महंगाई भत्ते में बढ़ोतरी होने से कर्मचारियों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण होगी। यह बढ़ोतरी उन्हें अपने परिवार के साथ बेहतर तरीके से त्योहार मनाने में मदद करेगी। कुल मिलाकर, महंगाई भत्ते की प्रस्तावित बढ़ोतरी न केवल सरकारी कर्मचारियों के लिए, बल्कि उनके परिवारों के लिए भी खुशियों का कारण बनेगी। दिवाली से पहले इस खुशी की उम्मीद करना न केवल उचित है, बल्कि इससे कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति भी मजबूत होगी। इस फैसले से ना केवल कर्मचारियों को वित्तीय राहत मिलेगी, बल्कि यह उन्हें अपने काम में और भी प्रेरित करेगा। सरकार की इस पहल से सरकारी कर्मचारियों में सकारात्मकता और उत्साह बढ़ेगा, जो समाज के लिए एक अच्छी खबर है।

भारत ने कनाडा को निज्जर कांड में लगाई कड़ी फटकार, कनाडा का रवैया इस मामले में घोर आपत्तिजनक: विदेश मंत्री

कनाडा खालिस्तानी हरदीप सिंह निज्जर की बीते साल हुई हत्या के मामले में भारत सरकार ने कनाडा की जस्टिस ट्रूडो सरकार पर तीखा हमला बोला है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने सोमवार को कहा कि कनाडा का रवैया इस मामले में घोर आपत्तिजनक है और दोनों देशों के रिश्तों के लिए ठीक नहीं है। कनाडा की ओर से कहा गया था कि निज्जर की हत्या के मामले में भारतीय उच्चायुक्त और अन्य राजनयिकों पर भी संदेह है और वे पर्सन ऑफ इंट्रेस्ट प्रतीत होते हैं। अब इसे लेकर भारत ने कहा है कि यह कुछ और नहीं बल्कि जस्टिन ट्रूडो सरकार की वोट बैंक की राजनीति है। वह अपने राजनीतिक हित साधने के अलावा कुछ नहीं करना चाहती। विदेश मंत्रालय ने कहा कि कनाडा के पीएम जस्टिन ट्रूडो ने सितंबर 2023 में इस संबंध में आरोप लगाए थे। इसके बाद भारत की ओर से कनाडा सरकार से कहा गया था कि वह इस संबंध में कुछ सबूत थे। कई बार रिक्वेस्ट करने के बाद भी कनाडा सरकार ने कोई सबूत नहीं दिया था। विदेश मंत्रालय ने सोमवार को एक बयान जारी कर कहा कि उन्हें रविवार को कनाडा से एक राजनयिक संदेश प्राप्त हुआ जिसमें यह कहा गया कि भारतीय उच्चायुक्त और अन्य राजनयिक कनाडा में एक जांच से संबंधित मामले में पर्सन ऑफ इंटरेस्ट हैं। ‘पर्सन ऑफ इंटरेस्ट’ शब्द का उपयोग अमेरिका और कनाडा में कानून प्रवर्तन द्वारा किसी ऐसे व्यक्ति के लिए किया जाता है जो संभवतः किसी जांच से जुड़ा हो, जिसे गिरफ्तार नहीं किया गया हो या किसी अपराध के लिए औपचारिक रूप से आरोपित नहीं किया गया हो। इसका उपयोग आमतौर पर किसी ऐसे व्यक्ति को संदर्भित करने के लिए किया जाता है जिसमें कानून प्रवर्तन कर्मियों की रुचि होती है क्योंकि उनके पास ऐसी जानकारी हो सकती है जो जांच में सहायता कर सकती है। हालांकि मंत्रालय ने जांच के बारे में कोई विशेष जानकारी नहीं दी, लेकिन मामले से परिचित लोगों ने नाम न बताने की शर्त पर बताया कि यह मामला निज्जर की हत्या से जुड़ा है। जून 2023 में सर्रे में एक गुरुद्वारे के बाहर अज्ञात लोगों ने निज्जर की गोली मार कर हत्या कर दी थी। बयान में कहा गया है, “भारत सरकार इन बेतुके आरोपों को खारिज करती है और इन्हें ट्रूडो सरकार के राजनीतिक एजेंडे का हिस्सा मानती है जो वोट बैंक की राजनीति पर केंद्रित है।” सितंबर 2023 में कनाडा के प्रधान मंत्री जस्टिन ट्रूडो द्वारा संसद में आरोप लगाए जाने के बाद से द्विपक्षीय संबंधों में गिरावट आई है। ट्रुडो ने आरोप लगाया था कि निज्जर की मौत में भारतीय सरकारी एजेंटोन के हाथ हैं। भारत ने आरोप को निराधार बताकर खारिज कर दिया था। ताजा बयान में कहा गया है कि पिछले सितंबर में ट्रूडो द्वारा आरोप लगाए जाने के बाद से कनाडाई सरकार ने हमारी ओर से कई अनुरोधों के बावजूद भारत सरकार के साथ किसी भी तरह का सबूत साझा नहीं किया है। बयान में आगे कहा गया है: “यह नए कदम उन बातचीत के बाद उठाया गया है जिसमें फिर से बिना किसी तथ्य के दावे किए गए हैं। इससे इस बात में कोई संदेह नहीं रह जाता कि जांच के बहाने राजनीतिक लाभ के लिए भारत को बदनाम करने की जानबूझकर रणनीति बनाई जा रही है। कड़े शब्दों में लिखे गए विदेश मंत्रालय के बयान में कहा गया कि ट्रूडो की भारत के प्रति दुश्मनी लंबे समय से साफ साफ नजर आती है”। ट्रूडो कैबिनेट में ही हैं कई भारत विरोधी लोग बयान में कहा गया, “उनके मंत्रिमंडल में ऐसे लोग शामिल हैं जो भारत के संबंध में चरमपंथी और अलगाववादी एजेंडे से खुले तौर पर जुड़े हुए हैं। दिसंबर 2020 में भारतीय आंतरिक राजनीति में उनके खुले हस्तक्षेप से पता चलता है कि वे इस संबंध में किस हद तक जाने को तैयार हैं। बयान में कहा गया है कि उच्चायुक्त संजय वर्मा भारत के सबसे वरिष्ठ सेवारत राजनयिक हैं, जिनका करियर 36 साल का है। इस दौरान वे जापान और सूडान में राजदूत रहे हैं और इटली, तुर्की, वियतनाम और चीन में भी सेवा दे चुके हैं। इसमें कहा गया है, ‘कनाडा सरकार द्वारा उन पर लगाए गए आरोप हास्यास्पद हैं।’ बयान में कहा गया है कि भारतीय पक्ष भारतीय राजनयिकों के खिलाफ आरोप लगाने के कनाडाई सरकार के इन प्रयासों के जवाब में कदम उठाएगा।’ भारत बोला- ट्रूडो सरकार दे रही कट्टरपंथियों को शरण बयान में भारतीय पक्ष के इस आरोप को दोहराया गया कि ट्रूडो सरकार ने जानबूझकर हिंसक चरमपंथियों और आतंकवादियों को कनाडा में भारतीय राजनयिकों और सामुदायिक नेताओं को परेशान करने, धमकाने और डराने के लिए जगह दी है। इसमें भारतीय राजनयिकों और नेताओं को जान से मारने की धमकियां भी शामिल हैं। बयान में कहा गया है, “इन सभी गतिविधियों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर उचित ठहराया गया है। कुछ व्यक्ति जो अवैध रूप से कनाडा में प्रवेश कर चुके हैं, उन्हें नागरिकता देने के लिए तेज़ी से काम किया गया है। कनाडा में रहने वाले आतंकवादियों और संगठित अपराध नेताओं के संबंध में भारत सरकार के कई प्रत्यर्पण अनुरोधों की अनदेखी की गई है।”  

पंजाब कांग्रेस ने चुनाव आयोग से मिल पंचायत चुनाव स्थगित करने की मांग की

पंजाब पंजाब कांग्रेस का एक प्रतिनिधिमंडल आज राज्य चुनाव आयोग से मिलने पहुंचे। उन्होंने पंजाब में पंचायत चुनाव स्थगित करने की मांग की है। बताया जा रहा है कि कांग्रेस नेताओं के एक कांग्रेस नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने आज राज्य चुनाव आयोग से मुलाकात की और मांग की कि पंजाब में पंचायत चुनाव 3 सप्ताह के लिए स्थगित कर दिए जाएं। कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि चुनाव में बड़े पैमाने पर धांधली हुई है, जिससे लोगों को धक्का लगा है। नेताओं ने जाली बैलेट पेपर छापने का आरोप लगाया है। पत्रकारों से बात करते हुए विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा ने कहा कि हम चुनाव रद्द करने की मांग नहीं कर रहे हैं। हमने मांग की है कि पूरी चुनाव प्रक्रिया को 3 सप्ताह के लिए स्थगित कर दिया जाए क्योंकि हाईकोर्ट ने कई जगहों पर चुनाव प्रक्रिया पर रोक लगा दी है। वहीं इस मुद्दे पर AAP सांसद  मालविंदर सिंह कंग ने कहा कि Congress अपनी हार से डरी हुई है, इसलिएि चुनाव स्थगित करवाना चाहती है।

बोइनपल्ली को शराब घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में सुप्रीम कोर्ट ने दी जमानत

नई दिल्ली दिल्ली के कथित शराब घोटाले में सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को हैदराबाद के कारोबारी अभिषेक बोइनपल्ली को जमानत दे दी। बोइनपल्ली को शराब घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में जस्टिस एमएम सुंदरेश और अरविंद कुमार की बेंच ने जमानत दी है। ईडी की ओर से पेश हुए एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने जमानत का विरोध नहीं किया। बेंच ने कहा, ‘हम जमानत देने के पक्ष में हैं।’ सर्वोच्च अदालत ने 13 अगस्त को बोइनपल्ली को मिली अंतरिम जमानत को बढ़ा दिया था। 20 मार्च को कोर्ट ने यह कहते हुए उन्हें पांच सप्ताह की जमानत दी थी कि वह 18 महीनों से जेल में बंद हैं। इसके बाद लगातार उनकी जमानत अवधि बढ़ती रही। अंतरिम जमानत देते हुए सर्वोच्च अदालत ने बोइनपल्ली को अपना पासपोर्ट जमा कराने को कहा था। उन्हें हैदराबाद के अलावा एनसीआर से बाहर कहीं और नहीं जाने को कहा गया था।कारोबारी ने दिल्ली हाई कोर्ट के तीन जुलाई 2023 के आदेश को चुनौती दी है जिसमें 2022 में उनकी गिरफ्तारी की वैधता पर सवाल उठाने वाली याचिका खारिज कर दी गई थी। उन्होंने पीएमएलए की धारा 19 का पालन न करने के आधार पर गिरफ्तारी को चुनौती दी थी। उनका कहना है कि प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। दिल्ली सरकार ने 2021-22 के लिए बनी शराब नीति 17 नवंबर, 2021 को लागू की थी लेकिन भ्रष्टाचार के आरोपों के बीच सितंबर, 2022 के अंत में इसे रद्द कर दिया था। केंद्रीय जांच एजेंसियों सीबीआई और ईडी का आरोप है कि इस नीति के तहत शराब कारोबारियों को गलत तरीके से फायदा पहुंचाया गया और बदले में उनसे रिश्वत ली गई। इस मामले में दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, पूर्व डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया, राज्यसभा सांसद संजय सिंह जैसे बड़े नेता भी आरोपी हैं। तीनों सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने के बाद जेल से बाहर निकले हैं।

राष्ट्रीय विकास बैंक ने शिमला में देश का सबसे लंबा रोपवे बनाने की दी इजाजत

शिमला हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला के विकास में एक बड़ी सफलता हासिल हुई है। राष्ट्रीय विकास बैंक (NDB) ने 1734 करोड़ की लागत से बनने वाले शिमला ट्रांसपोर्ट रोपवे प्रोजैक्ट के निर्माण के लिए अग्रिम टैंडर लगाने की इजाजत दी है। इस ऐतिहासिक परियोजना से शिमला में यातायात का नया अध्याय शुरू होगा। उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने इस महत्वपूर्ण जानकारी को अपने सोशल मीडिया अकाऊंट पर सांझा किया है। दुनिया का दूसरा और भारत का सबसे लंबा रोपवे उपमुख्यमंत्री ने बताया यह रोपवे विश्व का दूसरा सबसे लंबा और भारत का पहला सबसे लंबा रोपवे बनने जा रहा है। इसकी लंबाई 13.79 किलोमीटर होगी। इस प्रोजैक्ट के पूरा होने के बाद शिमला में यातायात का एक नया विकल्प उपलब्ध होगा, जिससे न केवल पर्यटकों बल्कि स्थानीय लोगों को भी भारी लाभ मिलेगा। पर्यटन और यातायात में होगा सुधार शिमला जो पहले से ही देश के सबसे प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों में से एक है, इस परियोजना से और भी अधिक आकर्षक हो जाएगा। रोपवे के निर्माण से शहर में यातायात जाम की समस्या कम होगी और पर्यटकों को सुविधाजनक यात्रा अनुभव मिलेगा। यह प्रोजैक्ट न केवल शिमला बल्कि पूरे हिमाचल प्रदेश के पर्यटन उद्योग के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा। स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलेगा बढ़ावा इस प्रोजैक्ट के माध्यम से स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा मिलेगा। पर्यटन के बढ़ने से स्थानीय व्यापारियों, होटलों, और अन्य संबंधित सेवाओं को लाभ होगा। साथ ही, निर्माण कार्यों के दौरान भी स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर मिलेंगे।

अंतरिक्ष में जोड़े जाएंगे स्पेसक्राफ्ट के हिस्से, ISRO बड़े प्रयोग की तैयारी, रचेगा इतिहास

नई दिल्ली ISRO चीफ डॉ. एस. सोमनाथ ने खुलासा किया है कि दिसंबर में इसरो SPADEX (Space Docking Experiment) मिशन कर सकता है. क्योंकि चंद्रयान-4 (Chandrayaan-4) के लिए अंतरिक्ष में डॉकिंग बहुत जरूरी तकनीक है. डॉकिंग मतलब जो अलग-अलग हिस्सों को एकदूसरे की तरफ लाकर उसे जोड़ना. इस समय SPADEX के सैटेलाइट्स का इंटीग्रेशन हो रहा है. एक महीने में ये बनकर तैयार हो जाएंगे. इसके बाद इनकी टेस्टिंग वगैरह होगी. सिमुलेशन होंगे. उम्मीद है कि इसरो इसे 15 दिसंबर 2024 या उससे पहले लॉन्च करे. यह मिशन अंतरिक्ष में डॉकिंग प्रोसेस पूरा करने की पहली सीढ़ी होगी. SPADEX मिशन क्यों है जरूरी? अंतरिक्ष में दो अलग-अलग चीजों को जोड़ने की ये तकनीक ही भारत को अपना स्पेस स्टेशन बनाने में मदद करेगी. साथ ही चंद्रयान-4 प्रोजेक्ट में भी हेल्प करेगी. स्पेडेक्स यानी एक ही सैटेलाइट के दो हिस्से होंगे. इन्हें एक ही रॉकेट में रखकर लॉन्च किया जाएगा. अंतरिक्ष में ये दोनों अलग-अलग जगहों पर छोड़े जाएंगे. धरती की निचली कक्षा में प्रयोग इसके बाद इन दोनों हिस्सों को धरती से निचली कक्षा में जोड़ा जाएगा. ताकि ये फिर से एक यूनिट बन जाएं. इस पूरे प्रोसेस कई तरह के काम होंगे- जैसे दोनों अलग-अलग हिस्से एकदूसरे को खुद से अंतरिक्ष में खोजेंगे. उनके पास आएंगे. ताकि एक ही ऑर्बिट में आ सकें. इसके बाद दोनों एकदूसरे से जुड़ जाएंगे. इसरो के आगे के मिशन क्या होंगे? इसके बाद इसरो गगनयान के दो टेस्ट करेगा. पहला टेस्ट व्हीकल डिमॉन्स्ट्रेशन-2 (TVD2) और पहला मानवरहित मिशन (G1). इस दौरान इंटीग्रेटेड एयर ड्रॉप टेस्ट और पैड अबॉर्ट टेस्ट भी किए जाएंगे. G1 मिशन में ह्यूमेनॉयड व्योममित्र (Vyomitra) महिला रोबोट भी जाएगी. ताकि उसके ऊपर पड़ने वाले असर की स्टडी की जा सके. G1 में एक सीट पर व्योममित्र और दूसरे पर एनवायरमेंटल कंट्रोल एंड लाइफ सपोर्ट सिस्टम (ECLSS) होगा. इन दोनों के डेटा का एनालिसिस किया जाएगा. ताकि यह पता चल सके कि अंतरिक्ष में इंसानों पर क्या असर होगा. और इलेक्ट्रॉनिक्स, हार्डवेयर, सॉफ्टवेयर आदि पर क्या फर्क पड़ेगा.  

रूस के काजान में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से पहले सदस्यता लेने की मची होड़, 34 देशों की सदस्यता पर नई रार

नई दिल्ली रूस के काजान में इसी महीने 22 से 24 अक्तूबर के बीच ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन आयोजित होने जा रहा है। उससे पहले ब्रिक्स की सदस्यता लेने की होड़ सी मच गई है। पाकिस्तान, तुर्की, म्यांमार, सीरिया, फिलिस्तीन समेत कुल 34 देशों ने ब्रिक्स की सदस्यता के लिए आवेदन दिया है। बड़ी बात यह है कि हिंसा प्रभावित सीरिया, म्यांमार और फिलिस्तीन ने भी आवेदन दिया है। मीडिया रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि आगामी शिखर सम्मेलन में 10 नए सदस्यों और 10 पार्टनर को इस संगठन में शामिल किया जा सकता है। बता दें कि भारत,ब्राजील, रूस, चीन और दक्षिण अफ्रीका इसके संस्थापक सदस्य देश हैं। जनवरी 2024 में इस समूह का विस्तार हुआ था। अब इसमें मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) भी शामिल हैं। न्‍यू इंडियन एक्‍सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक काजान में होने वाली बैठक में आम सहमति बनने के बाद ही नए सदस्‍यों का ऐलान किया जाएगा। कहा जा रहा है कि भारत ब्रिक्स में नए सदस्यों को शामिल करने का फिलहाल पक्षधर नहीं है, जबकि चीन क्षेत्रीय दबदबा मजबूत करने और अपने एजेंडे को साधने के लिए ब्रिक्स का विस्तार करना चाहता है। चीन इस एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए रूस को अपने साथ ला सकता है। किन-किन देशों ने किया है आवेदन रिपोर्ट्स के मुताबिक, जिन 34 देशों ने ब्रिक्स की सदस्यता के लिए आवेदन दिया है, उनमें अल्‍जीरिया, अजरबैजान, बहरीन, बांग्‍लादेश, बेलारूस, बोलिव‍िया, क्‍यूबा, चाड, इंडोनेशिया, कजाखस्‍तान, कुवैत, पाकिस्‍तान, कुवैत, मलेशिया, लाओस, म्‍यांमार, मोरक्‍को, नाइजीरिया, सेनेगल, दक्षिण सूडान, श्रीलंका, फिलिस्‍तीन, सीरिया, थाइलैंड, तुर्की, यूगांडा, वेनेजुएला, वियतनाम और जिंबाब्‍वे शामिल हैं। इस लिस्ट में कई ऐसे देश हैं जो चीन के करीबी हैं और उन पर चीन का बहुत ज्यादा प्रभाव है। ये देश चीन के साथ मिलकर अमेरिकी नेतृत्व वाले गठजोड़ और देशों का विरोध करते हैं। अपने फायदे के लिए विस्तार चाहता है चीन विश्लेषकों का मानना है कि चीन ब्रिक्स का इस्तेमाल अपने फायदे के लिए करना चाहता है। इसी कड़ी में श्रीलंका और बांगलादेश का भी नाम जुड़ा है, जो भारत के पड़ोसी देश हैं लेकिन चीन की तरफ झुकाव रखते हैं। चीन चाहता है कि जी-7 के खिलाफ ब्रिक्स को खड़ा किया जाय। वह रूस को आगे कर अपनी चाल चल रहा है। इस वक्त रूस यूक्रेन के खिलाफ युद्ध में फंसा हुआ है और पश्चिमी देशों के साथ लोहा ले रहा है, जबकि चीन उसकी मदद कर रहा है। भारत नहीं चाहता ब्रिक्स का विस्तार भारत और ब्राजील को छोड़कर ब्रिक्स के सभी सदस्य देश चीन के बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआई) का हिस्सा हैं। भले ही ब्राजील आधिकारिक तौर पर बीआरआई का हिस्सा नहीं है, लेकिन चीन उसे लुभाने की कोशिश कर रहा है, क्योंकि वह ब्राजील से निर्यात होने वाली चीजों का लगभग एक-तिहाई हिस्सा खरीदता है। ऐसे में भारत का तर्क है कि अभी हाल ही में ब्रिक्स का विस्तार हुआ है, इसलिए अभी रुककर इसके विस्तार पर विचार किया जाना चाहिए। काजान में होने वाले शिखर सम्मेलन में ईरान और तुर्की के भी राष्ट्रपति शामिल होने वाले हैं। भारत की तरफ से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जाने वाले हैं। तीन महीने के अंदर उनकी यह दूसरी रूस यात्रा होगी। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के भी इसमें शामिल होने की संभावना है। दरअसल, ब्रिक्स एक अंतर-सरकारी संगठन है, जिसकी स्थापना 2006 में की गई थी। रूस ने 01 जनवरी, 2024 को ब्रिक्स की अध्यक्षता संभाली। इस वर्ष की शुरुआत रूस, ब्राजील, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के अलावा अब इसमें मिस्र, इथियोपिया, ईरान, संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब शामिल हो चुके हैं। रूस की ब्रिक्स अध्यक्षता निष्पक्ष वैश्विक विकास और सुरक्षा के लिए बहुपक्षवाद को मजबूत करने पर केंद्रित है। अपनी अध्यक्षता के हिस्से के रूप में रूस 200 से अधिक राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक कार्यक्रम आयोजित कर रहा है।

शर्मनाक: गोवा में युवती के साथ अभद्र व्यवहार करने के मामले में पुलिस ने दो युवकों किया गिरफ्तार

गोवा गोवा घूमने गए उत्तर प्रदेश के दो युवकों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। दोनों पर एक स्थानीय युवती के साथ अभद्र व्यवहार करने के आरोप लगे हैं। फिलहाल, मामले की जांच की जा रही है। पुलिस का कहना है कि इस मामले में आगे और भी गिरफ्तारियां हो सकती हैं। इधर, घटना पर राजनीति भी तेज हो गई है। विपक्ष ने सरकार पर कानून और व्यवस्था बिगड़ने के आरोप लगाए हैं। पुलिस ने जानकारी दी है कि कलन्गूट गांव से दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है। आरोप हैं कि दोनों ने एक स्थानीय युवती से पूछा कि उसका दाम क्या है और क्या वह ‘उपलब्ध’ है। युवकों की पहचान 30 वर्षीय प्रेम पांडेय और कृष्णा सिंह के तौर पर हुई है। प्रेम उत्तर प्रदेश के लाल गंज जिले और सिंह आगरा का रहने वाला है। इनके खिलाफ BNS की संबंधित धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है। नॉर्थ गोवा एसपी अक्षत कौशल ने बताया, ‘हमें शिकायत मिली थी और शिकायत के आधार पर हमने FIR दर्ज कर ली है। घटना शनिवार रात की है और इस मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है। जांच जारी है। और गिरफ्तारियों की भी संभावनाएं हैं।’ खास बात है कि इस घटना का वीडियो भी वायरल हो रहा है। इसमें नजर आ रहा है कि दो युवक एक युवती के पास पहुंचते हैं और होटल साथ चलने के लिए कहते हैं। विपक्ष ने उठाए सवाल विपक्ष के नेता यूरी अलेमाओ ने कहा, ‘जब स्थानीय महिलाएं ही सुरक्षित नहीं है, तो भाजपा सरकार गोवा आने वाले पर्यटकों को क्या सुरक्षा देगी? दो साल पहले कलन्गूट और बागा के करीब 500 लोगों ने वेश्यावृत्ति और दादागिरी के खिलाफ प्रदर्शन किया था। स्थानीय महिलाओं ने तब शाम के समय बाहर निकलने में डर की बात कही थी। अब यह हकीकत हो गई है।’ उन्होंने कहा, ‘हमारे खुद के ही गोवा में हमारी बेटियां और बहने सुरक्षित नहीं हैं। गोवा अपनी सुंदरता, विरासत और समृद्ध संस्कृति के लिए जाना जाता है। भाजपा गोवा को वेश्यावृत्ति, दादागिरी और अपराध के गढ़ के रूप में बदल रही है।

चुनाव से पहले शिंदे सरकार का मास्टरस्ट्रोक, अब मुंबई एंट्री पर टोल टैक्स खत्म

मुंबई महाराष्ट्र की एकनाथ शिंदे सरकार ने विधानसभा चुनाव से ठीक पहले एक और बड़ा फैसला लिया है। राज्य में इस सप्ताह कभी भी चुनाव कराने का ऐलान हो सकता है। ऐसे में सीएम एकनाथ शिंदे और उनके सहयोगी उससे पहले जनता को लुभाने वाले फैसले लेने में जुटे हैं। इस बीच सोमवार को राज्य कैबिनेट ने मुंबई में एंट्री पर लगने वाले सारे टोल टैक्स खत्म कर दिए हैं। मुंबई में एंट्री के लिए कुल 5 रास्ते हैं, जिन पर टोल टैक्स लगता है। इन पर आज रात 12 बजे से कोई टोल नहीं लगेगा। यह फैसला छोटे वाहनों यानी बाइक, कार आदि के लिए है। कमर्शल वाहनों पर पहले की तरह टैक्स लगता रहेगा। सरकार के इस फैसले से लाखों लोगों को फायदा होने की उम्मीद है। ऐसे में इसे चुनाव से ठीक पहले मास्टरस्ट्रोक की तरह देखा जा रहा है। इस निर्णय से मुंबई और आसपास के इलाकों में सरकार के पक्ष में माहौल बन सकता है। खुद सीएम एकनाथ शिंदे ठाणे से विधायक हैं। वह सीएम रहने से पहले कई बार मुंबई में एंट्री पर लगने वाले टोल के खिलाफ प्रदर्शन कर चुके हैं। महाराष्ट्र सड़क परिवहन निगम की ओर से बनाए गए 55 फ्लाईओवर्स के लिए 45 रुपये का टोल टैक्स चार्ज किया जाता है। इनका निर्माण 1995 से 1999 के दौरान हुआ था। इस टोल टैक्स की वसूली कुल 5 स्थानों पर की जाती है। अब यहां टोल टैक्स आम यूजर्स पर नहीं लगेगा। मुलुंड चेक नाका, मुलुंड ईस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे, एरोली नाका, दहीसार और मनखुर्द नाका पर टोल लगता रहा है। सड़क परिवहन निगम चाहता था कि यह टोल जारी रहे ताकि ठाणे क्रीक ब्रिज के निर्माण में आई लागत को वसूला जा सके, लेकिन सरकार ने टोल को तत्काल प्रभाव से खत्म करने का फैसला लिया है। बता दें कि राज ठाकरे के नेतृत्व वाली महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना की ओर से भी इसे लेकर आंदोलन किए जा चुके हैं। मनसे का कहना है कि टोल खत्म होना चाहिए। मनसे का कहना रहा है कि इनसे इतनी वसूली हो चुकी है, जितनी लागत सड़कों और फ्लाईओवर के निर्माण पर आई थी। सरकार के इस फैसले की भाजपा के पूर्व सांसद किरीट सोमैया ने तारीफ की है। उनका कहना है कि मैं इस फैसल का स्वागत करता हूं। बता दें कि सीएम शिंदे खुद ठाणे से आते हैं और उनका कहना रहा है कि यह उन हजारों लोगों के साथ अन्याय है, जो हर दिन कामकाज के लिए मुंबई आते हैं। ऐसे में मुंबई एंट्री करना ही उनके लिए महंगा पड़ता है।

पाक में गृहयुद्ध जैसे हालात के बीच एससीओ समिट का आयोजन हो रहा है, शिखर सम्मेलन में कई देशों के प्रतिनिधि शामिल होंगे

इस्लामाबाद पाकिस्तान में गृहयुद्ध जैसे हालात के बीच एससीओ समिट का आयोजन हो रहा है। शंघाई हयोग संगठन के इस शिखर सम्मेलन में कई देशों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर भी इस सम्मेलन में हिस्सा लेने वाले हैं। वहीं पाकिस्तान में इसका आयोजन किया जाना बड़ी चुनौती है। पाकिस्तान सुरक्षा को लेकर लंबे समय से सवालों के घेरे में है। यहां तक कि विदेशी प्रतिनिधइयों को भी छोड़ा नहीं जा रहा है। ऐसे में इस बैठक को शांतिपूर्ण ढंग से करवाना इस्लामाबाद के लिए बड़ी चनौती बना हुआ है। पाकिस्तान लंबे समय से आतंकवाद को पनाह देता रहा है जो कि अब उसके लिए ही नासूर बन गया है। पाक में आए दिन पुलिस और सेना पर आतंकी हमले होते हैं। हाल में पाकिस्तान में हिंसा तेजी से बढ़ है। बलूचिस्तान में बड़ी संख्या में लोगों को दिनदहाड़े मौत के घाट उतार दिया गया। वहीं पाकिस्तान के सबसे बड़े शहर कराची में चीनी नागरिकों को मार ड्ला गया। एक हमले में 20 बच्चों को मारा गया तो वहीं कोयले की खदान में धमाका करके सात कामगारों को मौत के घाट उतार दिया गया। पाकिस्तान का एक हिस्सा आजादी की मांग कर रहा है और इन दिनों यह मांग तेज हो गई है। जानकारों का कहना है कि बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी को पाकिस्तानी तालिबान से मदद मिल रही है। हालांकि हमला वे मिलकर नहीं करते हैं। एससीओ की बैठक को देखते हुए पूरे इस्लामाबाद को छावनी में तब्दील कर दिया गया है। कोई भी वाहन बिना चेकिंग के आ-जा नहीं सकता है। पाकिस्तान के एक अधिकारी ने कहा कि सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं ताकि कोई अनहोनी ना हो। वहीं पाकिस्तान में इन दिनों शट डाउन से भी हालात खराब हैं। अधिकारियों का कहना है कि बीते सप्ताह देश की अर्थव्यवस्था को करीब 684 मिलियन डॉलर का नुकसान उठाना पड़ा। इमरान खान के समर्थकों ने पाकिस्तानी सरकार की नाक में दम कर रखा है। ऐसे में कई जगहों पर इंटरनेट बंद कर दिए गए थे। वहीं इमरान के समर्थकों के शटडाउन का असर भी बेहद बुरा हुआ है। पहले से ही कंगाल इस तरह के नुकसान को सहने के काबील नहीं है। शिखर सम्मेलन के दौरान सरकार ने पाकिस्तान में तीन दिनों का अवकाश गोषित कर दिया है। इसके अलावा वेडिंग हॉल, रेस्तरां, होटलों, कैफे और इस्लामाबाद की मार्केट भी बंद कर दी गई हैं। इससे पहले मार्च 2022 में पाकिस्तान ने एससीओ की बैठक की मेजबानी की थी। भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर पाकिस्तान जा तो रहे हैं लेकिन भारत ने पहले ही साफ कर दिया है कि यह बहुपक्षीय कार्यक्रम है। वहां पाकिस्तान और भारत के संबंधों को लेकर कोई चर्चा नहीं होने जा रही है। विदेश मंत्री ने कहा कि वह एससीओ के अच्छे सदस्य हैं और इसलिए उन्हें पाकिस्तान जाना पड़ रहा है। पाकिस्तानी मीडिया के मुताबिक रूस का 76 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल और एससीओ के सात प्रतिनिधि पाकिस्तान पहुंच ेहैं। इसके अलावा चीन, किर्गिस्तान के प्रतिनिधिमंडल भी पाकिस्तान पहुंच चुके हैं। एससीओ की बैठक 15 और 16 अक्टूबर को इस्लामाबाद में होगी।

सुभाष हत्याकाण्ड गुत्थी पंजाब पुलिस ने सुलझायी

चण्डीगढ़ पंजाब पुलिस के गैंगस्टर विरोधी टास्क फोर्स (एजीटीएफ) ने एसएएस नगर (मोहाली) पुलिस के साथ संयुक्त अभियान परेशन में राजस्थान में सुभाष उर्फ सोहू की दिनदहाड़े हुयी हत्या की गुत्थी सुलझाने का दावा किया है। पंजाब के पुलिस महानिदेशक गौरव यादव ने सोमवार को बताया कि पवित्र यूएसए और मनजिंदर फ्रांस द्वारा समर्थित गैंगस्टर मॉड्यूल के संदिग्धों से पूछताछ के बाद इस मामले को सुलझाया गया है। गौरतलब है कि सुभाष सोहू को आठ अक्तूबर 2024 को जोधपुर के संगरिया में सिर में पांच गोली मारी गई थी। इस संबंध में थाना बासनी में प्राथमिकी दर्ज है। श्री यादव ने बताया कि आरोपी सभी चार व्यक्ति वर्तमान में पुलिस थाना डेरा बस्सी में पुलिस रिमांड में हैं और जांच तेजी से आगे बढ़ रही है। उन्होंने बताया कि हत्या का मुख्य सरगना भानु सिसौदिया ने फरवरी 2024 में अपने सहयोगी अनिल लेगा की हत्या का बदला लेने के लिए हत्या की योजना बनाने की बात कबूल की है। मो. आसिफ और अनिल कुमार गोदारा ने अपराध को अंजाम देने में संचालकों के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

कोरोना वैक्सीन के साइड इफेक्ट वाली याचिका हुई खारिज, कहा- यह सिर्फ सनसनी फैलाने के लिए है: सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने कोविड वैक्सीन के साइड इफेक्ट्स वाली याचिका को खारिज कर दिया है। याचिका में दावा किया गया था कि कोविड वैक्सीन के इस्तेमाल के बाद से इंसानों के ऊपर साइड इफेक्ट्स (रक्त का थक्का जमना, हार्ट अटैक) दिखाई दे रहे हैं, जिसे लेकर यूके की एक कोर्ट में भी मुकदमा दायर किया गया है। चीफ जस्टिस डीवाई चन्द्रचूड़, जस्टिस जे बी पादरीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की बेंच ने कहा कि जनहित याचिका को खारिज करते हुए कहा कि यह सिर्फ सनसनी फैलाने के लिए है। हमें उस स्थिति के बारे में भी सोचना चाहिए कि अगर वैक्सीन ना ली जाती तो क्या साइड इफेक्ट्स होते। जस्टिस पादरीवाला ने याचिकाकर्ता से सवाल किया कि क्या आपने वैक्सीन ली है? आपको कुछ हुआ है, जिस पर याचिकाकर्ता के वकील ने वैक्सीन लेने की बात को स्वीकार किया लेकिन किसी भी तरह के साइड इफेक्ट से इंकार किया। इस पर बेंच की तरफ से कहा गया कि यह याचिका केवल सनसनी फैलाने का प्रयास लग रही है, इसलिए हम इसे खारिज कर रहे हैं। प्रिया मिश्रा और अन्य याचिकाकर्ताओं द्वारा दायर की गई इस याचिका में सुप्रीम कोर्ट ने मांग की गई थी कि वह मेडिकल विशेषज्ञों की एक समिति से एस्ट्राजेनेका की कोविडशील्ड वैक्सीन और उसके साइड इफेक्ट और जानलेवा जोखिम की जांच करवाएं। इस याचिका में सुप्रीम कोर्ट के सामने यह मांग की रखी गई थी कि इस समिति में दिल्ली एम्स के निदेशक और रिटायर सुप्रीम कोर्ट के जज हों ताकि वैक्सीन के जोखिमों का अध्ययन किया जा सके। इसके अलावा याचिका में यह भी मांग की गई थी कि इस वैक्सीन से जिन लोगों को भी नुकसान हुआ है उनके लिए वैक्सीन डैमेज पेमेंट सिस्टम स्थापित किया जाए, जिसमें मुआवजे की व्यवस्था हो। दरअसल, कोविड वैक्सीन बनाने वाली ब्रिटिश कंपनी एस्ट्राजेनेका ने अप्रैल में कोर्ट में माना था कि वैक्सीन से इंसानों को ऊपर खतरनाक साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं। उन्होंने माना कि वैक्सीन से रक्त के थक्के और प्लेटलेट्स की कमी हो सकती है, हालांकि इसके चांसेज बहुत कम हैं। भारत के सीरम इंस्टीट्यूट ने भी जो कोविडशील्ड वैक्सीन बनाई थी वह एस्ट्राजेनेका के फॉर्मूला पर ही आधारित थी। इसी वैक्सीन की करीब 175 करोड़ से ज्यादा खुराकें तो भारत में दी जा चुकी हैं और करोड़ों की संख्या में यह विदेशों को भी भेजी जा चुकी हैं।

पंजाब के मुख्यमंत्री डोडा में धन्यवाद रैली को संबोधित किया, कहा- सुनहरे अक्षरों में लिखा जाएगा

डोडा पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव में पार्टी के उम्मीदवार मेहराज मलिक को मिली जीत के बाद डोडा में धन्यवाद रैली को संबोधित किया। पंजाब के सीएम भगवंत मान और अरविंद केजरीवाल ने मेहराज मलिक को मिली जीत पर जनता का आभार जताया। सीएम भगवंत मान ने जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि डोडा विधानसभा का नाम जम्मू-कश्मीर के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाएगा। अब यहां भी ईमानदारी की राजनीति शुरू हो गई है। यहां के लोगों ने जो चमत्कार किया है, वह असाधारण है। यहां विकास और बदलाव की राजनीति शुरू होने वाली है। उन्होंने कहा, ”केजरीवाल सिर्फ एक नाम नहीं हैं, वह एक विचार का प्रतिनिधित्व करते हैं। उन्होंने गरीबों के हित में काम करने के लिए आयकर आयुक्त की नौकरी छोड़ दी। दिल्ली। के रामलीला मैदान में उन्होंने भ्रष्टाचार के खिलाफ जो आंदोलन शुरू किया था, वह अब फल दे रहा है।” उन्होंने आगे कहा कि आम आदमी पार्टी ने लगातार तीन बार दिल्ली में भारी बहुमत से जीत हासिल की है। साल 2022 में हमने पंजाब में 117 में से 92 सीटों के साथ सरकार बनाई थी। हमारे पास गुजरात में पांच और गोवा में दो विधायक हैं। अब, हमने जम्मू-कश्मीर में भी अपना खाता खोला है। आम आदमी पार्टी देश में सबसे तेजी से बढ़ती पार्टी है, जो केवल 10 साल में एक राष्ट्रीय पार्टी बन गई है। आम आदमी पार्टी की लोकप्रियता से भाजपा चिंतित है। सीएम भगवंत मान ने कहा कि आम आदमी पार्टी की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि आम परिवार से ताल्लुक रखने वाले आम लोग विधायक, मंत्री और मुख्यमंत्री बनते हैं। हमारी कोई राजनीतिक पृष्ठभूमि नहीं है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस और भाजपा जैसे पारंपरिक दलों में आम लोगों के लिए कोई जगह नहीं है, वे केवल स्थापित नेताओं और उनके परिवारों को ही मौका देते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि उन्होंने दिल्ली और पंजाब में काम किया है। दोनों राज्यों में लोगों को मुफ्त बिजली मिल रही है, मोहल्ला क्लीनिक बन रहे हैं और सरकारी अस्पतालों की हालत सुधर रही है। सरकारी स्कूलों को विश्वस्तरीय बनाया जा रहा है। भाजपा की करीब 20 राज्यों में सरकारें हैं, लेकिन एक भी राज्य मुफ्त बिजली या अच्छे अस्पताल नहीं देता। उनका एकमात्र काम लोगों के बीच संघर्ष भड़काना है।

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