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मामूली बहस में युवक ने की फायरिंग, अपने ही साथी को जा लगी गोली

पटियाला जिले फायरिंग होने की घटना सामने आई, जिसमें गोली युवक के अपने ही साथी को जा लगी। बड़ा ही हैरानीजनक मामला है, जहां पटियाला में गत आधी रात को एक मोटरसाइकिल सवार से बहस के बाद कार सवार युवकों ने पिस्तौल निकाल ली और फायरिंग कर दी। यही नहीं, गोली मोटरसाइकिल सवार को नहीं बल्कि गाड़ी में बैठे व्यक्ति के साथी को लगी, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। घायल व्यक्ति को तुरन्त पटियाला के राजिंदरा अस्पताल में भर्ती कराया गया। मिली जानकारी के अनुसार, यह हादसा उस वक्त हुआ जब इनोवा सवार युवक सरहिंद से पटियाला की ओर आ रहे थे। रास्ते में कार सवार की एक मोटरसाइकिल सवार से बहस हो गई। इसके बाद कार सवार व्यक्ति ने मोटरसाइकिल सवार व्यक्ति पर पिस्तौल तान दी और फायरिंग कर दी, लेकिन उसकी एक गोली उसके साथी को हो जा लगी और वह गंभीर रूप से घायल हो गया। मामले की जानकारी मिलने के बाद पुलिस की टीम मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी। जांच दौरान सामने आया है कि जिस पिस्तौल से गोली चलाई गयी, वह अवैध है।

सिद्दारमैया ने अपनी पत्नी के मुडा की जमीन लौटाने के फैसले पर हैरानी जताते हुए कहा- उन पर इस विवाद का बहुत बुरा प्रभाव पड़ा

बेंगलुरु कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने अपनी पत्नी पार्वती के मैसूरु में जब्त की गई संपत्ति के मुआवजे के रूप में दिए गए भूखंडों को वापस करने के फैसले पर आश्चर्य व्यक्त किया है और कहा है कि उन पर (पार्वती पर) इस विवाद का बहुत बुरा मनोवैज्ञानिक प्रभाव पड़ा है। श्री सिद्दारमैया ने खुलासा किया कि हालांकि उनका इरादा मैसूर शहरी विकास प्राधिकरण (एमयूडीए) में प्लॉट आवंटन में घोटाले के आरोपों से लड़ने का था, लेकिन उनके चार दशक लंबे राजनीतिक करियर में पार्वती की कोई भूमिका नहीं होने के मद्देनजर जमीन छोड़ने का फैसला अप्रत्याशित रूप से आया। मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि उनकी पत्नी विपक्षी दलों द्वारा रचित राजनीतिक साजिश का शिकार बन गई हैं। उन्होंने कहा, “राज्य के लोग यह भी जानते हैं कि विपक्षी दलों ने झूठी शिकायत की और मेरे खिलाफ राजनीतिक नफरत पैदा करने के लिए मेरे परिवार को विवाद में घसीटा।” उन्होंने कहा कि परिणामस्वरूप उनकी पत्नी को मानसिक यातना सहनी पड़ी है। एमयूडीए जमीन घोटाले के आरोप का विरोध करने के अपने दृढ़ संकल्प के बावजूद श्री सिद्दारमैया ने अपनी पत्नी के फैसले को स्वीकार किया और उसका सम्मान किया, साथ ही विवाद के कारण उन पर पड़े भावनात्मक बोझ पर अफसोस जताया। भूमि की प्रस्तावित वापसी ने राजनीतिक तूफान को और बढ़ा दिया है तथा विपक्षी दलों ने कर्नाटक में आगामी चुनावों से पहले मुख्यमंत्री पर अपने हमले तेज कर दिए हैं।  

आज से शुरू होगा आगामी विधानसभा चुनाव के लिए 1,680 से ज्यादा इच्छुक उम्मीदवारों का साक्षात्कार

मुंबई महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी (एमपीसीसी) के उपाध्यक्ष नाना गावंडे ने कहा कि आगामी विधानसभा चुनाव के लिए 1,680 से ज्यादा इच्छुक उम्मीदवारों का साक्षात्कार पार्टी की सभी जिला इकाइयों में मंगलवार से शुरू होगा। गावड़े ने एक प्रेस बयान में कहा कि पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को टिकट चाहने वालों के साक्षात्कार की जिम्मेदारी सौंपी गई है और वे अपने निर्दिष्ट जिलों का दौरा करेंगे, साक्षात्कार लेंगे और एमपीसीसी को रिपोर्ट सौंपेंगे। उन्होंने कहा कि एमपीसीसी ने विधानसभा चुनाव के लिए इच्छुक उम्मीदवारों से आवेदन आमंत्रित किए थे और उसे 1,688 आवेदन प्राप्त हुए। महाराष्ट्र कांग्रेस प्रभारी रमेश चेन्निथला के मार्गदर्शन में और प्रदेश अध्यक्ष नाना पटोले की सहमति से वरिष्ठ नेताओं को साक्षात्कार लेने की जिम्मेदारी सौंपी गई है जिनमें पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण, नसीम खान, सांसद चंद्रकांत हंडोरे, सांसद प्रणीति शिंदे,मुजफ्फर हुसैन, विधायक कुणाल पाटिल, बंटी पाटिल, अमित देशमुख, डॉ. नितिन राउत, यशोमति ठाकुर और विश्वजीत कदम आदि शामिल हैं। गावंडे ने कहा कि ये नेता इच्छुक उम्मीदवारों का साक्षात्कार लेने के लिए 01 से 08 अक्टूबर तक अपने निर्दिष्ट जिलों का दौरा करेंगे और 10 अक्टूबर तक एमपीसीसी को गोपनीय रिपोर्ट सौंपेंगे।  

हवाई अड्डा में होने वाले एयर शो के कारण यात्रियों को 01 से 08 अक्टूबर तक उड़ान कार्यक्रम में बदलाव की घोषणा की

चेन्नई चेन्नई हवाई अड्डे ने भारतीय वायु सेना दिवस के अवसर पर होने वाले एयर शो के कारण मंगलवार से 08 अक्टूबर तक उड़ान कार्यक्रम में बदलाव की घोषणा की है। यहां एक विज्ञप्ति में, एएआई, चेन्नई हवाई अड्डे के निदेशक, सी वी दीपक ने कहा कि चेन्नई अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा यात्रियों को 01 से 08 अक्टूबर तक हुए बदलाव के बारे में सूचित करता है क्योंकि भारतीय वायु सेना का वायु सेना दिवस एयर शो तांबरम और मरीना बीच पर होता है। प्रतिष्ठित कार्यक्रम में हवाई प्रदर्शन किया जाएगा और हवाई क्षेत्र बंद होने के कारण उड़ान कार्यक्रम में संक्षिप्त बदलाव की आवश्यकता हो सकती है। यात्रियों के व्यवधान का न्यूनतम करने के लिए, हवाईअड्डे ने विभिन्न अंतरालों पर 15 मिनट से लेकर दो घंटे तक बंद करने की घोषणा की है। पहला बंद आज 13:45 बजे से 15:15 बजे तक रहेगा, इसके बाद 02, 03, 05, 06, 07 और 08 अक्टूबर को अतिरिक्त अंतराल रहेगा। श्री दीपक ने कहा, “हम यात्रियों को उड़ान कार्यक्रम की जांच करके और नवीनतम जानकारी के लिए अपनी एयरलाइंस के साथ संवाद करके अपडेट रहने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।” चेन्नई अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा इस असाधारण कार्यक्रम के दौरान एक सहज यात्रा अनुभव सुनिश्चित करने के लिए भारतीय वायु सेना के साथ निकट समन्वय में काम कर रहा है। उन्होंने कहा, “हम आपके सहयोग की सराहना करते हैं और आपकी यात्रा योजनाओं का समर्थन करते हुए आपके साथ इस अवसर का जश्न मनाने के लिए उत्सुक हैं।”  

हमास leader के बेटे ने कहा ‘इजरायल का एक्शन पूरी तरह जायज’

बेरुत इजरायली सेना हमास के बाद अब लेबनान में हिजबुल्लाह आतंकियों पर मौत बन कर बरस रही है. लेबनान पर इजरायल की तरफ से लगातार हिजबुल्लाह आतंकियों को निशाना बनाकर बमबारी की जा रही है. इस बमबारी में अब तक टॉप कमांडर नसरल्लाह के अलावा हिजबुल्लाह के कई बड़े नेता मारे जा चुके हैं. इन हमलों में अबतक सैकड़ों नागरिकों की भी मौत हो चुकी है, जिसकी वजह से कई सारे देश इजरायल की आलोचना कर रहे हैं. लेकिन इन सब से उलट  मोसाब हसन यूसुफ ने इजयरायल के द्वारा किए जा रहे हमलों को सही बताया है. मोसाब हसन आतंकी संगठन हमास का को-फाउंडर रहा शेख हसन यूसुफ का बेटा है. ‘इजरायल का एक्शन पूरी तरह जायज’ मोसाब ने एक टीवी डिबेट में हिस्सा लेते हुए कहा कि, फिलिस्तीन में इजरायल सबसे वैध जातीय समूह है, जिसके पास उस भूमि से अपने संबंधों के मजबूत सबूत हैं. मुसलमान पिछले 1,400 सालों से उस जमीन से यहूदी लोगों का सफाया करने की कोशिश कर रहे हैं. मोसाब ने आगे कहा कि इजरायल को अपना बचाव करने का पूरा अधिकार है. हिजबुल्लाह और हमास के खिलाफ इजरायल का एक्शन पूरी तरह से जायज है. हसन नसरल्लाह मौत पर मोसाब ने कहा कि ये उसकी सजा है. वहीं मोसाब ने आगे कहा कि मैं फिलिस्तीन संघर्ष का गवाह रहा हूं. मोसाब ने बताया कि कैसे फिलिस्तीन में राजनीतिक और वित्तीय लाभ के लिए बच्चों की बलि दी जाती है. दुनिया भर में इजरायल की आलोचना पर मोसाब ने पूछा कि इजरायल में खून बह रहा था, तब किसी ने हिजबुल्लाह के एक्शन का विरोध क्यों नहीं किया?. अपने ही पिता के खिलाफ की जासूसी आपको जानकर हैरानी होगी कि इजरायल का इतनी मजबूती के साथ पक्ष रखने वाला मोसाब एक समय पर फिलिस्तीनी मिलिटेंट था. लेकिन 1997 में वो इजरायल चला गया और इजरायली खुफिया एजेंसी शिन बेट के लिए जासूसी करने लगा. हमास आतंकियों के द्वारा इजरायल के अंदर घूस कर हमला किया और कई सारे लोगों को बंधक बना लिया गया. उस वक्त मोसाब ने इजरायल से सभी हमास नेताओं के खात्मे की अपील की थी. मोसाब ने कहा था कि अगर सभी बंधक रिहा नहीं किए जाते हैं तो इजरायल को सभी हमास नेताओं को खत्म कर देना चाहिए. इन नेताओं में मोसाब के पिता का नाम भी शामिल था. फिलहाल लेबनान में इजरायल की सेना ने जमीनी हमला शुरू कर दिया है. इजरायल की सेना की तरफ से दी गई जानकारी के मुताबिक सोमवार-मंगलवार की रात में आईडीएफ लेबनान के अंदर घुस गई है. आईडीएफ हिजबुल्लाह के ठिकानों के खिलाफ सीमित, स्थानीय और लक्षित जमीनी हमले कर रही है. उन्होंने कहा, ‘मैं मौजूदा घटनाक्रम पर अधिक टिप्पणी नहीं करना चाहता हूं. मैंने संघर्ष को दिया है. मैं फिलिस्तीन संघर्ष का गवाह रहा हूं. मैंने अपना आधा जीवन तथाकथित फिलिस्तीनी समाज में जिया है और आधा जीवन यहूदी समुदाय के साथ बिताया है. फिलिस्तीन की संस्कृति मौत की संस्कृति है, जो राजनीतिक और वित्तीय लाभ के लिए बच्चों की बलि देती है. जब इजरायल के साउथ में खून बह रहा था, तब किसी ने हिजबुल्लाह के एक्शन का विरोध क्यों नहीं किया? जब खेल के मैदान में 12 बच्चे मरे थे, तब हसन नसरल्लाह को किसी ने क्यों नहीं रोका? नसरल्लाह पूरी तरह से गलत था और उसे उसके किए की सजा मिली. दरअसल, मोसाब हसन यूसुफ एक पूर्व फिलिस्तीनी मिलिटेंट थे. 1997 में उन्होंने इसराइल जाने का फैसला किया. इसके बाद 2007 में अमेरिका जाने तक वे इजरायली खुफिया एजेंसी शिन बेट के लिए जासूसी करते रहे. उनके पिता शेख हसन यूसुफ हमास के संस्थापकों में से एक थे. पिछले साल उन्होंने इजरायल से सभी हमास नेताओं के खात्मे की अपील की थी. उन्होंने कहा था कि अगर सभी बंधक रिहा नहीं किए जाते हैं तो इजरायल को सभी हमास नेताओं को खत्म कर देना चाहिए. इसमें उनके पिता भी शामिल हैं. यानी मोसाब ने इजरायल से अपने पिता के खात्मे की भी अपील की थी.

आपत्ति जताते हुए चुनाव आयोग ने जम्मू-कश्मीर पुलिस में सेना अधिकारी की डेप्यूटेशन पर लगाई रोक

श्रीनगर भारतीय निर्वाचन आयोग ने मंगलवार को जम्मू एवं कश्मीर सरकार से यह बताने को कहा है कि जब आदर्श आचार संहिता लागू है, तो आयोग की पूर्व अनुमति के बिना एक सैन्य अधिकारी की सिविल पुलिस में डेप्यूटेशन (प्रतिनियुक्ति) का आदेश क्यों जारी किया गया। जम्मू-कश्मीर सरकार ने कर्नल विक्रांत पराशर को जम्मू-कश्मीर पुलिस में एसएसपी (प्रशिक्षण) और स्पेशल (ऑपरेशन) के पद पर नियुक्त करने का आदेश जारी किया था। इस कदम पर आपत्ति जताते हुए चुनाव आयोग ने जम्मू-कश्मीर सरकार को लिखा, “जम्मू-कश्मीर में आदर्श आचार संहिता लागू है और इस तरह चुनाव से जुड़े अधिकारियों के तबादले पर प्रतिबंध है। आदर्श आचार संहिता के संचालन की अवधि के दौरान सेना के अधिकारी को सिविल साइड में एसएसपी के पद पर नियुक्त करने के औचित्य, प्रक्रिया और तात्कालिकता पर विचार किए बिना आयोग निर्देश देता है कि आदेश को तत्काल प्रभाव से स्थगित रखा जाए। यदि आदेश जारी किया गया है, तो आदेश जारी होने से पहले की स्थिति तत्काल प्रभाव से बहाल की जाएगी।” चुनाव आयोग ने कहा कि मुख्य सचिव एक अक्टूबर को सुबह 11 बजे तक अनुपालन रिपोर्ट भेजेंगे, जिसमें स्पष्टीकरण होगा कि आयोग की पूर्व अनुमति के बिना ऐसा आदेश क्यों जारी किया गया। पैराशूट रेजिमेंट के विक्रांत प्रशर को रक्षा मंत्रालय ने जम्मू-कश्मीर सरकार में दो साल की डेप्यूटेशन के लिए पहले ही मंजूरी दे दी है। शौर्य चक्र से सम्मानित प्रशर जम्मू-कश्मीर के उधमपुर जिले से हैं और उन्होंने आतंकवाद विरोधी अभियानों में अपनी अलग पहचान बनाई है। इससे पहले वह घाटी के गुलमर्ग इलाके में हाई एल्टीट्यूड वारफेयर स्कूल में तैनात थे।  

हरियाणा में मतदान के दौरान पंचकूला में 4 और 5 अक्टूबर, दो दिन स्कूलों में छुट्टी रहेगी

चंडीगढ़ हरियाणा में 5 अक्टूबर को विधानसभा चुनाव की वोटिंग होगी। इसको देखते हुए पंचकूला के डीसी ने दो दिन स्कूल बंद रखने के आदेश जारी किए हैं। डीसी के ऑर्डर में कहा गया है कि 4 और 5 अक्टूबर, दो दिन स्कूलों में छुट्टी रहेगी। यह आदेश जिले के सभी गवर्नमेंट और प्राइवेट स्कूलों में लागू होंगे। बता दें कि हरियाणा में 90 विधानसभाओं पर एक ही दिन में 5 अक्टूबर को वोटिंग होगी। इसके बाद 8 अक्टूबर को सभी सीटों की काउंटिंग की जाएगी।

इजरायल ने जने कैसे किया लेबनान पर हमला? आर्मी चीफ ने बताई तैयारी वाली वो बात

तेल अवीव लेबनान के अंदर घुसकर हिजबुल्लाह के टॉप कमांडर सैयद हसन नसरल्लाह को इजरायल की ओर से मार गिराने की पूरी दुनिया में चर्चा हो रही है। सबसे ज्यादा हैरानी लोगों को इस तथ्य से हो रही है कि ईरान के ही एक जासूस ने इजरायल के लिए काम किया और नसरल्लाह का पता उसे बता दिया। फ्रांसीसी अखबार ले पैरिसियन की रिपोर्ट के अनुसार करीब डेढ़ घंटे पहले ईरानी दूत ने इजरायल को नसरल्लाह का पता बताया और फिर इजरायल ने उस इमारत को ही नेस्तनाबूद कर दिया, जहां वह अपने कमांडरों के साथ मीटिंग कर रहा था। कहा जा रहा है कि वह बंकर में छिपा था, लेकिन इमारत गिरने की दहशत से ही वह मारा गया। आखिर इजरायल ने कैसे इतनी मजबूत तैयारी की थी कि तेहरान में हमास कमांडर इस्माइल हानियेह को मार गिराया और फिर लेबनान में हिजबुल्लाह के लीडर को मार डाला। यह अहम सवाल है। दरअसल 2006 में जब इजरायल की हिजबुल्लाह से जंग हुई थी तो यह 34 दिनों तक चली थी। इस युद्ध में हिजबुल्लाह के आगे इजरायल की स्थिति बहुत मजबूत नहीं थी। लेकिन यहीं से इजरायल ने सबक सीखा और 2006 के बाद से ही अगली जंग की प्लानिंग शुरू कर दी। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार इजरायल ने तब से ही जंग की तैयारी शुरू कर दी थी और खासतौर पर खुफिया मिशन पर उसका जोर था। लेबनान में हिजबुल्लाह के खिलाफ इजरायल का सैन्य अभियान जारी है। इजरायल ने हिजबुल्लाह नेता हसन नसरल्लाह को भी मार दिया। इसका खुलासा खुद इजरायली सेना ने किया। इस बीच भारतीय सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने बताया कि इजरायल ने लेबनान में कैसे तैयारी के साथ हमला किया। उन्होंने कहा कि जो शेल कंपनी बनाई गई, वो ही इजरायल का मास्टरस्ट्रोक है। ‘इजरायल का मास्टर स्ट्रोक’ आर्मी चीफ जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने हिजबुल्लाह नेता हसन नसरल्लाह के खिलाफ इजरायली सैन्य अभियान पर कहा, ‘जो शेल कंपनी बनाई गई है, वह इजरायल का मास्टरस्ट्रोक है। इसके लिए उसे सालों-साल की तैयारी की जरूरत है। इसका मतलब है कि वे इसके लिए तैयार थे और यही बात मायने रखती है। युद्ध उस तरह से शुरू नहीं होता जिस तरह से आप लड़ना शुरू करते हैं, यह उस दिन से शुरू होता है जिस दिन आप योजना बनाना शुरू करते हैं।’ ‘हमास को खत्म करने पर अड़ गया इजरायल’ आर्मी चीफ ने एक अखबार से बात करते हुए कहा कि इजरायल ने हमास को अपना पहला टारगेट बनाया और उसे जड़ से खत्म करने पर अड़ गया। जनरल द्विवेदी ने विदेश मंत्री एस जयशंकर की एक किताब का हवाला देते हुए इजरायल की रणनीति की तुलना महाभारत के एक प्रसंग से की, जहां अर्जुन, अगर चक्रव्यूह में प्रवेश करते, तो जीवित बच सकते थे और अभिमन्यु भी बच जाता। इसी तरह, इजरायल ने हमास को पहले निपटाने का फैसला किया है। खासतौर पर इजरायल ने यूनिट 8200 को तैनात किया। यह इजरायली सेना की ही एक यूनिट है, जो मोसाद के साथ मिलकर काम करती है। इसके तहत उसने साइबर वारफेयर पर काम किया। इसी एजेंसी की देन थी कि उसने हिजबुल्लाह पर पेजर और वॉकी-टॉकी ब्लास्ट के जरिए हमले कराए। इसी के तहत ईरान की इंटेलिजेंस यूनिट में घुसपैठ की गई और उसके 20 लोगों से सारी सूचना हासिल की गई। ईरान के परमाणु ठिकानों से लेकर हिजबुल्लाह, हमास के लीडर्स तक के बारे में पूरी जानकारी इजरायल को मिल गई। इजरायल के इस इंटेलिजेंस वारफेयर का पहला नतीजा 2008 में आया था। तब मोसाद ने सीआईए के साथ मिलकर हिजबुल्लाह के टॉप लीडर इमाद मुगनियाह को ढेर कर दिया था। इसके बाद 2020 में ईरानी कुद्स फोर्स के नेता कासिम सुलेमानी को अमेरिका ने मार गिराया था। सुलेमानी की लोकेशन की पूरी जानकारी इजरायली एजेंसी ने ही अमेरिका को दी थी, जिसे इराक में मारा गया था। इसी दौरान इजरायल नसरल्लाह को मार गिराने वाला था, लेकिन तब ऐसा नहीं किया। इसकी वजह थी कि इजरायल तब युद्ध नहीं चाहता था। अब इजरायल की वह 18 साल पुरानी तैयारी काम आ रही है। उसने 7 दिनों में हिजबुल्लाह के सात कमांडरों को मार गिराया है। इसके अलावा हमास के लीडर्स को भी उसने ढेर किया है।

पश्चिम बंगाल में प्रदर्शन कर रहे कनिष्ठ चिकित्सकों ने एक बार फिर पूरी तरह बंद किया काम

कोलकाता पश्चिम बंगाल में प्रदर्शन कर रहे कनिष्ठ चिकित्सकों ने सभी चिकित्सा प्रतिष्ठानों में उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने समेत विभिन्न मांगों को लेकर राज्य सरकार पर दबाव बनाने के लिए मंगलवार को फिर से अनिश्चितकाल के लिए काम पूरी तरह बंद कर दिया। कनिष्ठ चिकित्सक 42 दिन के विरोध प्रदर्शन के बाद 21 सितंबर को सरकारी अस्पतालों में आंशिक रूप से अपनी ड्यूटी पर लौटे थे। चिकित्सकों ने नौ अगस्त को आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में ड्यूटी पर मौजूद एक महिला चिकित्सक से बलात्कार और उसकी हत्या की घटना के विरोध में काम बंद कर दिया था। प्रदर्शनकारी चिकित्सकों में शामिल अनिकेत महतो ने कहा, ‘‘हमें सुरक्षा की हमारी मांगों को पूरा करने को लेकर राज्य सरकार का कोई सकारात्मक दृष्टिकोण नहीं दिख रहा। आज (विरोध प्रदर्शन का) 52वां दिन है और हम पर अब भी हमले हो रहे हैं और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ बैठकों के दौरान किए गए अन्य वादों को पूरा करने का कोई प्रयास नहीं किया जा रहा। मौजूदा स्थिति में हमारे पास आज से काम पूरी तरह बंद करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘जब तक राज्य सरकार इन मांगों पर स्पष्ट कार्रवाई नहीं करती, तब तक कार्य पूरी तरह बंद रहेगा।’’  

वाइस एडमिरल आरती सरीन ने सशस्त्र बल चिकित्सा सेवा महानिदेशक का पद संभाला

नईदिल्ली  वाइस एडमिरल आरती सरीन सशस्त्र बल चिकित्सा सेवा (डीजीएएफएमएस) के महानिदेशक का पद संभालने वाली पहली महिला अधिकारी बन गईं हैं। रक्षा मंत्रालय ने मंगलवार को एक वक्तव्य जारी कर कहा कि 46वें महानिदेशक के पद का कार्यभार संभालने से पहले वह महानिदेशक मेडिकल सेवा (नौसेना), महानिदेशक मेडिकल सेवा (वायु) और सशस्त्र बल मेडिकल कॉलेज (एएफएमसी), पुणे के निदेशक और कमांडेंट की प्रतिष्ठित नियुक्तियों पर काम कर चुकी हैं। वह एएफएमसी, पुणे की पूर्व छात्रा हैं और उन्हें दिसंबर 1985 में सशस्त्र बल चिकित्सा सेवाओं में नियुक्त किया गया था। वह एएफएमसी, पुणे से रेडियोडायग्नोसिस में एमडी हैं और टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल, मुंबई से रेडिएशन ऑन्कोलॉजी में डिप्लोमेट नेशनल बोर्ड हैं। अपने 38 साल के करियर में, फ्लैग ऑफिसर ने प्रोफेसर और प्रमुख रेडिएशन ऑन्कोलॉजी, आर्मी हॉस्पिटल (आर एंड आर) और कमांड हॉस्पिटल (दक्षिणी कमांड)/एएफएमसी पुणे, कमांडिंग ऑफिसर, आईएनएचएस अश्विनी, कमांड मेडिकल ऑफिसर सहित प्रतिष्ठित शैक्षणिक और प्रशासनिक नियुक्तियां हासिल की हैं। फ्लैग ऑफिसर को भारतीय सशस्त्र बलों की तीनों शाखाओं में सेवा करने का दुर्लभ गौरव प्राप्त है, उन्होंने भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट से कैप्टन तक, भारतीय नौसेना में सर्जन लेफ्टिनेंट से सर्जन वाइस एडमिरल तक और भारतीय वायु सेना में एयर मार्शल के रूप में कार्य किया है। वाइस एडमिरल सरीन को हाल ही में चिकित्सा पेशेवरों के लिए सुरक्षित कामकाजी परिस्थितियों और प्रोटोकॉल तैयार करने के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित राष्ट्रीय टास्क फोर्स के सदस्य के रूप में नियुक्त किया गया था। वह युवा महिलाओं को सशस्त्र बलों में शामिल होने के लिए प्रेरित करने में सबसे आगे रही हैं और सरकार की नारी शक्ति पहल की प्रतीक हैं।  

कोच्चि के एक गांव की जमीन पर Waqf Board ने किया दावा, सैकड़ो परिवार बेघर होने की कगार पर

कोच्चि केरल की व्यावसायिक राजधानी कोच्चि की हलचल से दूर मुनंबम उपनगर में मछुआरों का एक खूबसूरत गांव है- चेराई. समुद्र तट के करीब स्थित चेराई अपने बीच रिसॉर्ट्स के साथ आज पर्यटकों के लिए एक प्रमुख आकर्षण है. लेकिन इस गांव के लोग पलायन के डर में जी रहे हैं. गांव के लगभग 610 परिवारों ने आरोप लगाया है कि उनकी जमीन और संपत्तियों पर वक्फ बोर्ड ने दावा किया है. कानूनी विवाद में फंसने के कारण गांव वाले 2022 से ही न तो अपनी जमीन पर लोन ले सकते हैं, और न ही इसे बेच सकते हैं. सिरो-मालाबार चर्च और केरल कैथोलिक बिशप काउंसिल जैसे प्रमुख ईसाई संगठनों ने वक्फ (संशोधन) विधेयक के संबंध में गठित संयुक्त संसदीय समिति (JPC) को एक पत्र भेजकर वक्फ अधिनियम 1995 में संशोधन के लिए अपने सुझाव दिए हैं.  इस खूबसूरत गांव में पहुंची और पीड़ित परिवारों से मुलाकात की. समुद्र तट के सामने एक छोटे से घर में बूढ़ी मां गौरी और उनकी विकलांग बेटी सिंटा से मुलाकात हुई. सिंटा ने बताया कि कुछ साल पहले उन्हें स्ट्रोक हुआ था, जिससे उनका जीवन कठिन हो गया. उन्होंने कहा, ‘मैं अब भी यहां लॉटरी टिकट बेचकर जीवन यापन करती हूं. हम यह घर नहीं छोड़ सकते. यह हमारा है. 2022 तक सब कुछ सामान्य था, अचानक हमें बताया गया कि जिस जमीन पर हम वर्षों से रह रहे, अब वह हमारी नहीं रही.’ ग्रामीणों ने की वक्फ बोर्ड अधिनियम में संशोधन की मांग सिंटा की पड़ोसी सीना के पास भी बताने के लिए ऐसी ही कहानियां थीं. सीना ने कहा कि उनका घर ही उनकी जिंदगी की एकमात्र कमाई है. उन्होंने कहा, ‘मेरे पति एक मछुआरे हैं. सालों की मेहनत के बाद उन्होंने यह घर बनाया है. हमने इस मकान के अलावा कुछ और नहीं बनाया है, जिसे अपना कह सकें. यदि यह घर हमारे हाथ से चला गया तो कुछ नहीं बचेगा. सरकार को वक्फ बोर्ड अधिनियम में संशोधन करना चाहिए और हमारी समस्याओं का समाधान ढूंढना चाहिए.’ इस गांव के हर घर की यही कहानी है. थोड़ी दूर पर, प्रदीप और उनकी पत्नी श्रीदेवी मिले. उनके हाथों में अपनी जमीन और घर से जुड़े दस्तावेज थे. उन्होंने आजतक की टीम को अपने दस्तावेज दिखाए और कहा कि यह साबित करने के लिए काफी है कि जमीन हमारी है. प्रदीप ने कहा, ‘मैंने यह जमीन 1991 में फारूक कॉलेज से उनके द्वारा मांगी गई राशि चुकाकर खरीदी थी. मेरे पास सभी सबूत हैं. मेरी तबीयत ठीक नहीं रहती, इसलिए मैंने अब काम करना बंद कर दिया है. मेरा बेटा परिवार की देखभाल करता है. मैं यह सुनिश्चित करूंगा कि भविष्य में उसे इस घर में रहने में कोई दिक्कत न हो. मैं हमारे अधिकारों के लिए किसी भी हद तक जाऊँगा. मैंने मेहनत से यह घर बनाया है.’ प्रदीप इसके आगे अपनी बात पूरी नहीं कर पाए और रोने लगे. गांव वाले न जमीन बेच सकते हैं न ही गिरवी रख सकते हैं इलाके के लोगों को उम्मीद है कि चर्चों द्वारा वक्फ (संशोधन) विधेयक के संबंध में गठित संयुक्त संसदीय समिति (JPC) को लिखे गए पत्र से उन्हें इस संकट से उबरने में मदद मिलेगी. ग्रामीणों ने कहा कि वे एक सदी से भी अधिक समय से चेराई गांव में रह रहे हैं. उनके अनुसार, यह जमीन 1902 में सिद्दीकी सैत ने खरीदी थी और बाद में 1950 में फारूक कॉलेज को दान कर दी थी. मछुआरों और कॉलेज के बीच लंबे समय से चला आ रहा विवाद 1975 में सुलझ गया, जब उच्च न्यायालय ने कॉलेज के पक्ष में फैसला सुनाया. 1989 से स्थानीय लोगों ने कॉलेज से जमीन खरीदनी शुरू कर दी. हालांकि, 2022 में विलेज ऑफिस ने अचानक दावा किया कि गांव वक्फ बोर्ड की जमीन पर बसा है. इसके बाद ग्रामीणों को उनके राजस्व अधिकारों से वंचित कर दिया गया और उन्हें अपनी संपत्ति बेचने या गिरवी रखने से रोक दिया गया.  

काशी में साईं प्रतिमा पर विवाद, ब्राह्मण सभा के विरोध के बाद अब तक 18 मूर्तियां हटाई गई

वाराणसी  काशी के मंदिरों से साईं बाबा की प्रतिमा हटाए जाने का मामला अब बढ़ता जा रहा है। साईं बाबा की प्रतिमा हटाने का सपा एमएलसी ने इसका विरोध करते हुए काशी का माहौल खराब करने का आरोप लगाया है। बीते एक हफ्ते में सनातन रक्षक दल के प्रदेश अध्यक्ष अजय शर्मा की अगुवाई में बीते एक हफ्ते में करीब 12 मंदिरों से साईं बाबा की प्रतिमा हटाई गई है। दो दिन पहले लोहटिया स्थित बड़ा गणेश मंदिर से साईं बाबा की प्रतिमा हटाने का वीडियो सामने आने के बाद से विवाद बढ़ गया। वहीं, दूसरी ओर सनातन रक्षक दल के अजय शर्मा का कहना है कि हिन्दू मंदिरों में देवताओं के साथ किसी फकीर की मूर्ति पूजन कर के भगवान का दर्जा दिए जाने का कोई औचित्य नहीं है। साईं नही चांद मियां हैं: सनातन रक्षक दल सनातन रक्षक दल के प्रदेश अध्यक्ष अजय शर्मा बीते एक हफ्ते से काशी खण्ड के मंदिरों से साईं प्रतिमा हटाने की मुहिम में लगे हैं। एनबीटी ऑनलाइन से बातचीत में अजय शर्मा ने बताया कि सनातन संस्कृति और परम्परा में सनातन धर्मी वैदिक पूजा अर्चना हिन्दू भूल बैठे हैं। काशी के पौराणिक धर्मस्थलों में 33 कोटि देवी देवता विद्यमान हैं। ऐसे काशी खण्ड के मंदिरों में विधर्मी चांद मियां उर्फ साईं की प्रतिमा को स्थापित करना दुर्भाग्यपूर्ण और महापाप है। हम लोग मंदिर के महंत और पुजारियों को समझा-बुझा कर प्रतिमाओं को हटा रहे हैं। अभी काशी खण्ड के अंदर आने वाले देव स्थानों से चांद मियां उर्फ साईं की प्रतिमा हटाई जा रही है। धीरे-धीरे काशी खण्ड के बाहर भी ये जनजागृति का अभियान चलाया जाएगा। राजनीतिक स्टंट : आशुतोष सिन्हा मंदिरों से साईं प्रतिमा हटाए जाने का वीडियो वायरल हुआ। आम बनारसी इस मुद्दे पर बंटे हुए दिख रहे हैं। इसी बीच सपा एमएलसी आशुतोष सिन्हा ने इसे बीजेपी का स्टंट बताते हुए कहा कि महाराष्ट्र में जिस तरह से आम जनता बीजेपी के खिलाफ हैं, उसे देखते हुए काशी में ये प्रयोग इशारे पर किया जा रहा है। काशी ने सभी धर्म और मत को हमेशा सम्मान दिया है। साईं का सबसे बड़ा केंद्र महाराष्ट्र में है और काशी से साईं के बारे में गलत प्रचार करके बीजेपी चुनाव को मुद्दों से भटकाने की कोशिश कर रही है। काशी में ही गलियों की हालत खराब है। महंगाई चरम पर है, गंगा साफ नहीं हुईं, उस पर ये लोग कोई आंदोलन नहीं करते, लेकिन जैसे ही कही चुनाव का समय आता है तो धर्म आधारित मुद्दों को हवा देकर चुनाव प्रभावित करने की कोशिश इन संगठनों की तरफ से शुरू हो जाती है। काशी में ब्राह्मण सभा ने छेड़ा अभियान, साई बाबा के मूर्ति को बताया प्रेत आत्मा काशी में ब्राह्मण महासभा के लोगो के द्वारा साई बाबा की मूर्ति को मंदिरों से हटाया जा रहा है। मंदिर से मूर्ति हटाए जाने को लेकर ब्राह्मण सभा का खुद को प्रदेश अध्यक्ष बताने वाले अजय शर्मा ने कहा कि सनातन धर्म में प्रेत आत्माओं की पूजा मंदिरों में मान्य नही है। लोहटिया क्षेत्र में बड़ा गणेश मंदिर में जो साई की मूर्ति थी वह एक प्रेत मूर्ति थी,जिसे हटाकर गंगा में विसर्जित कर दिया गया है। साई की मूर्ति के स्थान पर लक्ष्मी जी की मूर्ति जल्द बैठाई जाएगी। वही साई भक्तों के आहत होने पर अजय शर्मा ने कहा कि जिन्हे साई में भक्ति है,वह अपने घरों में साई की पूजा करे इससे उन्हें कोई नही रोकेगा। मंदिर में साई की मूर्ति स्थापित कर पूजा करने का विरोध पहले भी हुआ और हमेशा होता रहेगा। वही दूसरी बड़ा गणेश मंदिर के महंत ने भी साई बाबा के मूर्ति को हटाने का समर्थन किया।। मंदिरों से साई मूर्ति हटाने पर समाजवादी पार्टी ने जताई आपत्ति, काशी का माहौल खराब करने की जा रही कोशिश काशी के मंदिरों से साई बाबा की मूर्ति हटाए जाने को लेकर समाजवादी पार्टी ने इसे काशी के माहौल को खराबा करने कि कोशिश बताया है। समाजवादी पार्टी एमएलसी आशुतोष सिन्हा ने कहा कि बनारस सभी धर्मो के आस्था का केंद्र है और अब मूर्ति को हटाने की बाते सामने आ रही है। इससे पहले साई बाबा की पूजा मंदिर में होती रही है। तो इसे अभी हटाने का क्या मतलब है। जो लोग ऐसा काम कर रहे है वह काशी का माहौल खराब करने की कोशिश कर रहे है।

मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, हमारे पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं

नई दिल्ली देश के पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद आज अपना 79वां जन्मदिन मना रहे हैं। उनके जन्मदिन के अवसर पर बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है। इसी कड़ी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कई नेताओं ने उन्हें जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं। प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “हमारे पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं। समाज के प्रति उनकी सेवा और राष्ट्रीय प्रगति में योगदान के लिए उन्हें व्यापक रूप से सम्मान दिया जाता है। विभिन्न विषयों पर उनकी अंतर्दृष्टि भी बहुत समृद्ध है। मैं उनके दीर्घायु और स्वस्थ जीवन की कामना करता हूं।” यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक्स पर लिखा, “पूर्व राष्ट्रपति माननीय श्री राम नाथ कोविंद जी को जन्मदिन की हार्दिक बधाई! प्रभु श्री राम से आपके लिए दीर्घायु और उत्तम स्वास्थ्य की कामना है।” भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े ने एक्स पर लिखा, “पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद जी को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं। आपने सार्वजनिक जीवन में सुचिता के उच्च आदर्श स्थापित किए। साथ ही हमेशा गरीबों और वंचितों के सशक्तिकरण को प्राथमिकता दी। प्रभु श्रीराम से आपके उत्तम स्वास्थ्य एवं दीर्घायु की प्रार्थना करता हूं।” भाजपा सांसद रवि किशन ने एक्स पर लिखा, “सहज-सरल स्वभाव के धनी, सादगी की प्रतिमूर्ति, देश के सर्वांगीण विकास में उत्कृष्ट योगदान देने वाले, भारत के पूर्व राष्ट्रपति आदरणीय रामनाथ कोविंद को जन्मदिन की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं। प्रभु श्री राम जी से प्रार्थना है कि आप सदैव स्वस्थ एवं प्रसन्न रहें और हम सबका” राज्यसभा सांसद राकेश सिन्हा ने लिखा, “पूर्व राष्ट्रपति, आदरणीय रामनाथ कोविंद को जन्मदिन की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं। आपकी देश और देशवासियों के प्रति कल्याण भावना और प्रखर विचार सदैव हम सबके लिए प्रेरणा स्रोत रहेगें। ईश्वर आपको दीर्घायु बनाए और सदैव प्रसन्नचित रखे यह कामना करता हूं।”  

बैंकॉक के स्कूली बस में लगी आग, छात्रों समेत 25 लोगों के जलकर मारे जाने की खबर

बैंकॉक  थाईलैंड के एक स्कूली बस में आग लग जाने से छात्रों समेत कम से कम 25 लोगों के मारे जाने की आशंका है। दमकल और बचाव दल मौके पर हैं। अधिकारियों और बचावकर्मियों ने ही यह जानकारी दी है। हादसे के दौरान झुलसने से कई लोग घायल भी हुए हैं, जिन्हें नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। मरने वालों की संख्या बढ़ने की आशंका जाहिर की जा रही है। हादसा किस वजह से हुआ, इस बारे में अभी कोई सटीक जानकारी सामने नहीं आई है। स्थानीय लोग भी बचाव और राहत दलों के साथ आग बुझाने और पीड़ितों की मदद करने में जुटे थे। बैंकॉक पोस्ट के अनुसार यह बस उथाई थानी में एक स्कूल से छात्रों को ले जा रही थी। इसी दौरान इसमें आग लग गई। बचावकर्मियों ने कहा कि आग की लपटों में कई युवा यात्रियों की मौत हो गई या वे घायल हो गए। जोर सोर 100 ट्रैफिक रेडियो नेटवर्क ने दोपहर 12.30 बजे ज़ीर रंगसिट शॉपिंग मॉल के पास इनबाउंड फाहोन योथिन रोड पर बस में आग लगने की सूचना दी। फायर एंड रेस्क्यू थाईलैंड और थाई पीबीएस ने कहा कि बस 38 छात्रों और छह शिक्षकों को शैक्षिक यात्रा के लिए उथाई थानी के लैन सक जिले के वाट खाओ प्रया संगखारम से ले गई थी। उनका गंतव्य ज्ञात नहीं था। ट्रैफिक पुलिस रेडियो ने कहा कि कई यात्रियों की मौत हो गई या वे घायल हो गए। ट्रांसपोर्ट मिनिस्टर बोले- CNG से चल रही थी बस थाइलैंड की प्रधानमंत्री पाइतोंग्तार्न शिनावात्रा ने हादसे में जाने गंवाने वाले बच्चों के परिजनों के प्रति शोक व्यक्त किया है। उन्होंने ट्रांसपोर्ट मिनिस्टर को घटनास्थल पर जाकर हालात का जायजा लेने का आदेश दिया है। वहीं देश के गृह मंत्री अनुतिन चर्नविराकुल ने कहा कि बचावकर्मियों के पहुंचने के बाद भी बस इतनी ज्यादा गर्म थी कि उसके अंदर जाना बेहद मुश्किल था। इस वजह से हादसे के काफी देर बाद तक शव बस में ही थे। मरने वालों की अब तक पहचान नहीं हो पाई है। थाइलैंड के ट्रांसपोर्ट मंत्री ने कहा कि बस कॉम्प्रेस्ड नेचुरल गैस (CNG) से चल रही थी। यह बेहद दुखद घटना है। मैंने मंत्रालय से इस तरह के पैसेंजर व्हीकल्स के लिए CNG जैसे फ्यूल का इस्तेमाल बैन कर कोई और विकल्प तलाशने को कहा है। उन्होंने कहा कि जीवित बचे लोगों की संख्या के आधार पर 25 लोगों के मारे जाने की आशंका है। उन्होंने यह भी कहा कि बस अभी भी इतनी गर्म थी कि वे सुरक्षित रूप से अंदर नहीं जा सके। सोशल मीडिया पर आए इस घटना के वीडियो में नजर आ रहा है कि बस जल रही है है और इससे काले धुएं का गुबार निकल रहा है। छात्रों की उम्र और इस घटना के संबंध में अन्य विवरण की जानकारी नहीं है। घटनास्थल पर मौजूद एक बचावकर्मी ने सूरिया को बताया कि संभवतः बस का एक टायर फटने और फिर सड़क अवरोधक से उसके टकरा जाने के कारण आग लगी। बचाव समूह ‘होंगसाकुल खलोंग लुआंग 21’ ने सोशल मीडिया मंच ‘फेसबुक’ पर बताया कि बस से कम से कम दस शव बरामद किए गए हैं।

सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि हत्या, रेप और आतंक के केस के आधार पर भी दोषी की किसी संपत्ति को तोड़ा जा नहीं सकती

नई दिल्ली देशभर में चल रहे बुलडोजर एक्शन के खिलाफ दाखिल जमीयत उलेमा ए हिंद की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हो रही है. इस मामले की सुनवाई जस्टिस बी आर गवई और जस्टिस के वी विश्वनाथन की बेंच कर रही है. पिछली सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने बुलडोजर कार्रवाई  पर रोक लगाते हुए कहा था कि सिर्फ सार्वजनिक स्थानों पर अतिक्रमण को हटाने की ही छूट होगी. इस मामले में यूपी, एमपी और राजस्थान की ओर से सॉलिसिटर जनरल (SG) तुषार मेहता पेश हुए. सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई में पूछा कि क्या दोषी करार देने पर भी किसी की संपत्ति तोड़ी जा सकती है? जिस पर एसजी तुषार ने कहा कि नहीं, यहां तक कि हत्या, रेप और आतंक के केस के आधार पर भी नहीं. मेरे कुछ सुझाव हैं, नोटिस को रजिस्टर्ड एडी से भेजा जाए. हम सबके लिए गाइडलाइन जारी करेंगे सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम एक धर्मनिरपेक्ष देश हैं, हम सब नागरिकों के लिए गाइडलाइन जारी करेंगे. अवैध निर्माण हिंदू, मुस्लिम कोई भी कर सकता है. हमारे निर्देश सभी के लिए होंगे, चाहे वे किसी भी धर्म या समुदाय के हों. बेशक, अतिक्रमण के लिए हमने कहा है कि अगर यह सार्वजनिक सड़क या फुटपाथ या जल निकाय या रेलवे लाइन क्षेत्र पर है, तो हमने स्पष्ट कर दिया है. अगर सड़क के बीच में कोई धार्मिक संरचना है, चाहे वह गुरुद्वारा हो या दरगाह या मंदिर, यह सार्वजनिक बाधा नहीं बन सकती. जस्टिस गवई ने कहा कि चाहे मंदिर हो, दरगाह हो,  उसे जाना ही होगा क्योंकि ⁠सार्वजनिक सुरक्षा सर्वोपरि है. जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने हाल ही में यूपी, मध्य प्रदेश और राजस्थान में हुई घटनाओं का हवाला देते हुए बुलडोजर कार्रवाई के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी. इस याचिका में जमीयत ने अल्पसंख्यक समुदाय को निशाना बनाए जाने का आरोप लगाया है। याचिका में सरकार को आरोपियों के घरों पर बुलडोजर चलाने से रोकने की मांग की गई है. जस्टिस विश्वनाथन ने कहा कि यदि  2 संरचनाओं में उल्लंघन हुआ है और केवल 1 के खिलाफ कार्रवाई की जाती है और आप पाते हैं कि पृष्ठभूमि में कोई अपराध है. यह समझौता करने योग्य या गैर समझौता करने योग्य अपराध हो सकता है. यदि आप शुरू में किसी व्यक्ति की जांच कर रहे हैं और आपको जल्द ही उसका आपराधिक इतिहास पता चलता है तो? दो गलतियां एक सही नहीं बनाती हैं. इस बारे में हमारी सहायता करें. न्यायिक निगरानी होनी चाहिए जस्टिस विश्वनाथन ने कहा कि इसके लिए कुछ समाधान तो खोजना ही होगा, कुछ न्यायिक निगरानी होनी चाहिए. एसजी तुषार मेहता ने कहा कि मैं यूपी, एमपी, राजस्थान की ओर से पेश हुआ हूं. हमने पहले भी कहा है. हमने यूपी मामले में पहले ही हलफनामा दाखिल कर दिया था कि सिर्फ इसलिए कि कोई व्यक्ति किसी मामले में आरोपी है, किसी संपत्ति को गिराने का आधार नहीं हो सकता. नगर निगम कानून, नगर नियोजन नियमों का उल्लंघन होना चाहिए. साथ ही कानून द्वारा स्थापित प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए. नोटिस जारी किए जाने चाहिए, पक्षों की बात सुनी जानी चाहिए. हम यह स्पष्ट करते हैं कि सिर्फ इसलिए कि कोई व्यक्ति किसी मामले में आरोपी है या यहां तक ​​कि बलात्कार, हत्या या आतंकवाद में भी दोषी है, उसे गिराने का आधार नहीं माना जा सकता. कानून किसी खास धर्म के लिए नहीं… इस मामले में जो भी नियम बनाए जाएं, उन्हें पूरे भारत में लागू किया जाना चाहिए. ⁠जब ​​याचिकाकर्ता कहते हैं कि चुनिंदा तरीके से निशाना बनाया जा रहा है. मुसलमानों को निशाना बनाया जा रहा है, तो इसमें कुछ संवेदनशीलताएं शामिल हैं. अदालत को आरोपों से बाहर आना चाहिए और तय करना चाहिए कि क्या सही है और क्या गलत. जस्टिस गवई ने कहा कि हम सभी के लिए कानून बनाएंगे, किसी खास धर्म के लिए नहीं. अवैध निर्माणों को सभी धर्मों से अलग किया जाना चाहिए. नोटिस की सही सर्विस होनी चाहिए, पंजीकृत ए.डी. के माध्यम से नोटिस हो. नोटिस चिपकाने की यह प्रक्रिया चले, डिजिटल रिकॉर्ड होना चाहिए. इससे अधिकारी भी सुरक्षित रहेंगे, हमारे पास भारत से पर्याप्त विशेषज्ञ है. एसजी ने कहा कि ऐसे अल्पसंख्यकों के खिलाफ बुलडोजर मामले बहुत कम होंगे, ये मामले दो फीसदी होंगे. लेकिन बिल्डरों से जुड़े इस तरह के मामले बहुत हैं. जस्टिस विश्वनाथन ने कहा कि जब तक नगर निगम के अधिकारी इन पर फैसला नहीं ले लेते, तब तक कोई अर्ध न्यायिक निगरानी भी नहीं है. ये मामला दो फीसदी का नहीं है. आंकड़े बताते हैं कि साढ़े चार लाख मामले तोड़फोड़ के हैं. हिंदू-मुस्लिम की बात क्यों आती है? सॉलिसिटर जनरल (SG) तुषार मेहता ने सुनवाई के दौरान कहा कि हिंदू-मुस्लिम की बात क्यो आती है. वे हमेशा अदालत में जा सकते हैं  इसमें भेदभाव कहां है. जस्टिस विश्वनाथ ने कहा कि इसके लिए कुछ समाधान खोजना होगा. जैसे न्यायिक निरीक्षण किया जाए. इसपर SG ने कहा कोर्ट मीडिया में प्रचारित कुछ घटनाओं को छोड़कर इसके लिए एक सामान्य कानून बनाए जाने पर विचार करें. तुषार मेहता ने कहा कि मैं यूपी, एमपी, राजस्थान  की ओर से पेश हुआ हूं. हमने पहले भी कहा है, हमने यूपी मामले में पहले ही हलफनामा दाखिल कर दिया था कि सिर्फ इसलिए कि कोई व्यक्ति किसी मामले में आरोपी है, किसी संपत्ति को गिराने का आधार नहीं हो सकता. ⁠नगर निगम कानून, नगर नियोजन नियमों का उल्लंघन होना चाहिए. ⁠साथ ही कानून द्वारा स्थापित प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए. ⁠नोटिस जारी किए जाने चाहिए. ⁠पक्षों की बात सुनी जानी चाहिए. ⁠हम यह स्पष्ट करते हैं कि सिर्फ इसलिए कि कोई व्यक्ति किसी मामले में आरोपी है या यहां तक ​​कि बलात्कार, हत्या या आतंकवाद में भी दोषी है, उसे गिराने का आधार नहीं माना जा सकता. तुषार मेहता ने आगे कहा कि⁠ जो भी नियम बनाए जाएं, उन्हें पूरे भारत में लागू किया जाना चाहिए. ⁠जब ​​याचिकाकर्ता कहते हैं कि चुनिंदा तरीके से निशाना बनाया जा रहा है. ⁠मुसलमानों को निशाना बनाया जा रहा है, तो इसमें कुछ संवेदनशीलताएं शामिल हैं. ⁠अदालत को आरोपों से बाहर आना चाहिए.⁠ तय करना चाहिए कि क्या सही है और क्या गलत.  ⁠जस्टिस गवई ने कहा कि हम एक धर्मनिरपेक्ष देश हैं. ⁠हम सभी के … Read more

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