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कीव में प्रधानमंत्री पीएम मोदी का हुआ भव्य स्वागत ,भारत माता की जय के नारे

Prime Minister PM Modi received grand welcome in Kiev, slogans of Bharat Mata ki Jai

Prime Minister PM Modi received grand welcome in Kiev, slogans of Bharat Mata ki Jai पीएम मोदी का यह यूक्रेन दौरा बेहद अहम माना जा रहा है। इस दौरे में पीएम मोदी यूक्रेन के राष्ट्रपति व्लोदिमीर जेलेंस्की से मुलाकात करेंगे।

नेपाल में बड़ा सड़क हादसा, 40 भारतीय यात्री बस नदी में गिरी कई लोगों के मारे जाने की आशंका

Major road accident in Nepal, 40 Indian passenger bus falls into river, many feared dead

Major road accident in Nepal, 40 Indian passenger bus falls into river, many feared dead Nepal Bus Accident : नेपाल में बड़े हादसे की खबर सामने आई है. 40 भारतीय लोगों को लेकर जा रही बस एक नदी में गिर गई. बचाव कार्य जारी है. कई लोगों के मारे जाने की आशंका है. नेपाल पुलिस के अधिकारियों ने कहा कि 40 लोगों को लेकर जा रही एक भारतीय यात्री बस तनहुन जिले में मार्सयांगडी नदी में गिर गई है. जिला पुलिस कार्यालय तनहुन के डीएसपी दीपकुमार राया ने इसकी पुष्टि की है. उन्होंने बताया कि यूपी एफटी 7623 नंबर प्लेट वाली बस नदी में गिर गई. अधिकारी के अनुसार, बस पोखरा से काठमांडू जा रही थी. कई लोग लापता, कुछ को किया रेस्क्यूअधिकारियों ने बताया कि भारी बारिश के कारण नदी भी उफान पर है. बस में 40 लोग सवार थे, जिनमें से कुछ को रेस्क्यू किया गया. लेकिन कई लोग अब भी लापता हैं. नेपाल पुलिस ने बताया है कि यह हादसा तानाहुन जिले में हुआ है. बस उत्तर प्रदेश की है. लेकिन यह जानकारी अभी तक नहीं मिल सकी है कि बस में सवार लोग उत्तर प्रदेश में किस जिले से नेपाल गए थे. वहीं, उत्तर प्रदेश के रिलीफ कमिश्नर ने कहा कि नेपाल में हुई घटना के संबंध में पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि बस में सवार लोग कहां के थे. इसके लिए संपर्क साधा जा रहा है.

सेवा भारती ने देशवासियों से की असम के बाढ़ पीड़ितों के सहायतार्थ आगे आएं और बड़े मन से आर्थिक सहायता दें

नई दिल्ली देश का पूर्वोत्तर राज्य असम इन दिनों बाढ़ की भीषण विभीषिका से जूझ रहा है। ब्रह्मपुत्र नद सहित राज्य की सभी नदियां उफान पर हैं और जन-जीवन दूभर हो गया है। लोगों के घर-बार डूब गए हैं और बड़ी संख्या में लोग राहत शिविरों में रहने को मजबूर हैं।ऐसे में हमेशा की तरह सेवा भारती (पूर्वांचल) के कार्यकर्ता पहले ही दिन से बचाव और राहत कार्यों में जुटे हुए हैं। सामान्य तौर पर असम में बाढ़ हर वर्ष आती है और उसके लिए सेवा भारती के लोग पहले से तैयार रहते हैं। पर इस वर्ष की बाढ़ ने भीषण रूप से लिया है और आपदा बड़ी हो गई है। ऐसे में सेवा भारती (पूर्वांचल) ने देश भर से सहयोग का आह्वान किया है. सेवा भारती ने देशवासियों से अपील करते हुए कहा है कि असम के बाढ़ पीड़ितों के सहायतार्थ आगे आएं और बड़े मन से आर्थिक सहायता दें।सेवा भारती ने इसके लिए अपना बैंक डिटेल भी साझा किया है। सहायता राशि इस खाते में दी जा सकती है-नाम- सेवा भारती पूर्वांचलबैंक- स्टेट बैंक ऑफ इंडियाशाखा- लाचित नगर, गुवाहाटीखाता संख्या- 35545221261आईएफएससी कोड- एसबीआईए0014255सेवा भारती पूर्वांचल ने इस संबंध में एक व्हाट्सअप नंबर भी जारी किया है, जिस पर दान देने के बाद जानकारी और अपना पैनकार्ड नंबर भेजा जा सकता है।ताकि आपके दान की पावती भेजी जा सके। यह नंबर है-8011422133।इसके साथ ही सेवा भारती का कहना है कि वह नए कपड़े, नए कंबल, बच्चों की खाद्य सामग्री, दवाइयां, मच्छरदानी के साथ ही फिनाइल और बिलिचिंग पाऊडर जैसी सामग्री भी सीधे स्वीकार कर सकते हैं।            

पिछले दस साल में देश की इकॉनमी काफी तेजी से बढ़ी,साथ ही देश में रईसों की संख्या तेजी से बढ़ी है

नई दिल्ली  पिछले दस साल में देश की इकॉनमी काफी तेजी से बढ़ी है और इसके साथ ही देश में रईसों की संख्या तेजी से बढ़ी है। Henley Private Wealth Migration Report के मुताबिक 2013 से 2023 के बीच भारत में मिलिनेयर्स की संख्या में 85 फीसदी तेजी आई है। मिलिनेयर का मतलब ऐसे लोगों से है जिनकी नेटवर्थ 10 लाख डॉलर यानी 8,35,76,500 रुपये या उससे अधिक है। आंकड़ों के मुताबिक 2013 से 2023 के बीच तीन देशों में मिलिनेयर्स की संख्या भारत से ज्यादा तेजी से बढ़ी। इनमें वियतनाम, चीन और मॉरीशस शामिल हैं। हालांकि वियतनाम और मॉरीशस की आबादी भारत से बहुत कम है। वियतनाम की आबादी 9.82 करोड़ और मॉरीशस की महज 12.6 लाख है। 2013 से 2023 के बीच वियतनाम में मिलिनेयर्स की संख्या में 98 फीसदी इजाफा हुआ। चाइना प्लस वन पॉलिसी के तहत कई कंपनियां चीन से बाहर शिफ्ट हुई हैं और वियतनाम को इसका अच्छा फायदा मिला है। इन दस साल में चीन में मिलिनेयर्स की आबादी में 92 फीसदी तेजी आई जबकि हिंद महासागर के द्वीपीय देश मॉरीशस में मिलिनेयर्स की संख्या में 87 फीसदी की उछाल आई। इस लिस्ट में भारत 85% के साथ चौथे नंबर पर है। यूएई 77 फीसदी के साथ पांचवें, माल्टा (74%) छठे, मोनाको (68%) सातवें, सिंगापुर (64%) आठवें, अमेरिका (62%) नौवें और न्यूजीलैंड (48%) दसवें नंबर पर है। अमेरिका का दबदबा पिछले दस साल में ताइवान में मिलिनेयर्स की आबादी में 42% तेजी आई है जबकि स्विट्जरलैंड में उनकी आबादी 38% बढ़ी है। ऑस्ट्रेलिया में मिलिनेयर्स की संख्या 35%, सऊदी अरब में 35%, पुर्तगाल में 32%, कनाडा में 29%, साउथ कोरिया में 28%, इटली में 16%, जर्मनी में 15%, फ्रांस में 14%, ग्रीस में 14% और स्पेन में छह फीसदी बढ़ी है। अगर दुनिया के टॉप अमीरों की लिस्ट पर नजर डालें तो इसमें अमेरिका का दबदबा है। टॉप 10 में अमेरिका के नौ रईस शामिल हैं। केवल फ्रांस के बर्नार्ड अरनॉल्ट इस लिस्ट में तीसरे नंबर पर हैं। एलन मस्क पहले और जेफ बेजोस दूसरे नंबर पर मौजूद हैं।

रिपोर्ट में खुलासा- भारत की जनसंख्या 144 करोड़ पार, 14 साल तक के उम्र की आबादी 35 करोड़

नई दिल्ली  भारत की जनसंख्या साल 2024 में 1,441.7 हो गई है और अगर जनसंख्या वृद्धि की रफ्तार इसी तरह की रही, तो अगले 77 सालों में भारत की आबादी दोगुनी हो जाएगी. यह सूचना सामने आई है यूनाइडेट नेशन की रिपोर्ट से. यूनाइटेड नेशन पॉपुलेशन फंड की नवीनतम रिपोर्ट में कई चौंकाने वाले तो कई सावधान करने वाले आंकड़े मौजूद हैं. यूनाइटेड नेशन पॉपुलेशन फंड संयुक्त राष्ट्र की यौन और प्रजनन स्वास्थ्य एजेंसी है, जो लोगों को जनसंख्या वृद्धि और उससे उत्पन्न चुनौतियों के बारे में शिक्षित करती है. आखिर किस तरह भारत की आबादी अगले 77 साल में दोगुनी हो जाएगी इस जानने के लिए कुछ आंकड़ों को भी जानना बहुत जरूरी है. भारत की कुल आबादी का 68.7% 15-64 साल की आयुवर्ग का पॉपुलेशन फंड की रिपोर्ट के अनुसार भारत की कुल आबादी का 68.7% 15-64 साल की आयुवर्ग का है. 0-14 साल की आबादी का प्रतिशत 24.2 प्रतिशत है, जबकि 7.1 प्रतिशत आबादी 65 साल से अधिक आयुवर्ग के लोगों की है. इसमें 10-19 साल की आबादी 17 प्रतिशत है, जबकि 10-24 साल की आबादी 26 प्रतिशत है. कुल आबादी में एक महिला की औसत आयु 74 वर्ष और पुरुष की 71 साल है, वहीं एक महिला पर कुल प्रजनन दर 2 है, यानी औसतन एक महिला दो बच्चों को जन्म देती है. भारत की आबादी अगले 77 सालों में दोगुनी हो जाएगी यूनाइटेड नेशन पॉपुलेशन फंड की रिपोर्ट को अगर सच मानें तो आंकड़े यह कहते हैं कि भारत की आबादी अगले 77 सालों में दोगुनी हो जाएगी. हालांकि भारत में प्रजनन दर में गिरावट आई है, लेकिन जो आबादी है वो धीरे-धीरे बड़ी हो रही है और लड़कियां प्रजनन की उम्र में प्रवेश करती जाती हैं, इसलिए प्रजनन दर कम होने के बावजूद भी जनसंख्या वृद्धि जारी रहती है. भारत की जनसंख्या में वृद्धि की एक और बड़ी वजह मृत्यु दर में कमी आना है. संस्थागत प्रसव यानी डाॅक्टर्स की देखरेख में प्रसव की संख्या में वृद्धि होने की वजह से भी जनसंख्या में वृद्धि दर्ज हो रही है. संस्थागत प्रसव के आंकड़ों पर नजर डालें तो भारत में साल 2004 से 2020 के बीच 89 प्रतिशत प्रसव कुशल और ट्रेंड लोगों की देखरेख में हुए हैं. इसका परिणाम यह हुआ है कि प्रति एक लाख बच्चों पर 103 बच्चों की मौत प्रसव के दौरान हो रही है. यह आंकड़ा पहले के आंकड़ों से बेहतर है. बात अगर परिवार नियोजन की करें, तो देश में 15-49 साल की 78 प्रतिशत महिलाएं परिवार नियोजन के आधुनिक तरीके अपनाती हैं. वहीं अगर किसी भी तरीके की बात करें तो 51 प्रतिशत महिलाएं परिवार नियोजन के तरीकों को अपना रही हैं. वहीं विवाहित और विवाह योग्य महिलाओं में यह आंकड़ा 68 प्रतिशत का है. परिवार नियोजन के आधुनिक तरीकों से संतुष्टि की अगर बात करें तो यह 78 प्रतिशत है. 103 वर्ष पहले 1 करोड़ 39 लाख लोग थे जानकारी के अनुसार, 103 वर्ष पहले मध्यप्रदेश की जनसंख्या 1 करोड़ 39 लाख थी। अब हर साल 15 लाख से ज्यादा लोग राज्य में बढ़ रहे हैं। यही आंकड़ा धीरे-धीरे बढ़ते हुए 8 करोड़ 45 लाख से अधिक हो गया है। अब एमपी की मौजूदा जनसंख्या की तुलना थाईलैंड, फ्रांस, इटली और साउथ अफ्रीका जैसे देशों की कुल आबादी से की जाए तो भी मध्यप्रदेश ही आगे है। इन चार देशों को पीछे छोड़ा आपको बता दें कि थाईलैंड की आबादी 7 करोड़ 17 हजार, फ्रांस की जनसंख्या 6 करोड़ 8 हजार, इटली की आबादी 5 करोड़ 89 हजार और साउथ अफ्रीका की पॉपुलेशन 5 करोड़ 99 हजार के आसपास है। मतलब अपना मध्यप्रदेश इन देशों से आगे निकल चुका है। आबादी बढ़ने की रफ्तार यही रही तो इस बात की पूरी संभावना है कि मध्यप्रदेश की जनसंख्या अगले डेढ़ दशक में 10 करोड़ से भी ज्यादा हो जाएगी। क्या कहते हैं प्रदेश और देश के आंकड़े     प्रदेश में 60 वर्ष से ज्यादा उम्र के लोगों की संख्या भी बढ़ रही है। 2011 की जनगणना के मुताबिक तब प्रदेश में उम्रदराज लोगों की आबादी कुल जनसंख्या में 7.5 फीसदी थी, जो 2021 में बढ़कर 8.5 प्रतिशत हो गई।     वर्ष 2011 में राज्य में 52 फीसदी यानी 3.76 करोड़ पुरुष और 48 प्रतिशत यानी 3.50 करोड़ महिलाएं थीं। 10 वर्ष बाद यानी 2021 में पुरुषों का प्रतिशत 51.6, जबकि महिलाओं का 48.4 हो गया।     मध्यप्रदेश में टू चाइल्ड पॉलिसी मतलब ‘हम दो, हमारे दो’ का नियम वर्ष 2001 से 2005 तक माना गया। इसमें तीसरा बच्चा होने पर व्यक्ति सरकारी नौकरी के लिए पात्र नहीं होता था। बाद में विवाद हुआ तो सरकार ने इसे हटा दिया।     देश की बात करें तो भारत ने इसी साल आबादी के मामले में चीन को पीछे छोड़ा है। UNFPA की रिपोर्ट के अनुसार, भारत की जनसंख्या 77 वर्षों में दोगुनी हो गई है। यानी अब 144 करोड़ 17 लाख से ज्यादा भारतीय हैं।     UNFPA की रिपोर्ट के मुताबिक भारत की कुल आबादी का 24 प्रतिशत हिस्सा 0 से 14 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों का है। 15 से 64 वर्ष आयुवर्ग की आबादी सबसे ज्यादा 64 फीसदी है। जनसंख्या वृद्धि और चुनौतियां ये आंकड़े इस बात के प्रमाण हैं कि देश में जनसंख्या वृद्धि कई तरह की चुनौतियों को पेश कर सकते हैं. जनसंख्या के लिहाज से भारत दुनिया का सबसे बड़ा देश है, चीन को भारत ने अप्रैल 2023 में ही पीछे छोड़ दिया था. वहीं क्षेत्रफल की बात करें तो भारत सातवें नंबर पर है. विश्व की कुल आबादी का 17.76 प्रतिशत भारत में रहता है, जबकि विश्व के कुल क्षेत्रफल का मात्र 2. 4 प्रतिशत भारत के हिस्से में है. इस वजह से कई तरह की चुनौतियों हमारे सामने खड़ी हैं, जिसमें रोजगार की समस्या, संसाधनों की समस्या, गरीबी की समस्या और पर्यावरण से जुड़ी समस्याएं स्पष्ट तौर पर सामने नजर आ रही हैं. सेक्सुअल हेल्थ में भारत 30 साल में सबसे बेहतर UNFPA की इस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि भारत में सेक्सुअल और रिप्रोडक्टिव हेल्थ 30 सालों के सबसे बेहतर स्तर पर है। यही कारण है कि डिलीवरी के दौरान होने वाली मौतों की संख्या में भी गिरावट आई … Read more

अमेरिका के ग्रोसरी स्टोर में लगी राउंड्स वेंडिंग मशीन, पैसे डालो और बुलेट्स निकालो…

 टेक्सास अमेरिका में गन वायलेंस की वारदातें दुनिया में किसी अन्य देश की तुलना में सबसे अधिक होती हैं. लेकिन इस तथ्य के बावजूद कई अमेरिकी शहरों में दूध और अंडों की तरह बंदूक की गोलियों को आसानी से खरीदा जा सकेगा. इसके लिए बकायदा कई ग्रोसरी स्टोर्स में वेंडिंग मशीनें लगाई गई हैं. इन मशीनों से आप कभी भी किसी भी समय आसानी से बंदूक की गोलियां खरीद सकेंगे. अमेरिका के अलाबामा से लेकर ओकलाहोमा और टेक्सास के ग्रोसरी स्टोर में बुलेट्स खरीदने के लिए दूध की वेंडिंग मशीनों के बगल में इन बंदूक की गोलियों वाली वेंडिंग मशीनों को देखा जा सकता है. फिलहाल ये वेंडिंग मशीनें ओकलाहोमा, टेक्सास और अलाबामा इन तीन शहरों के किराने स्टोर्स पर ही देखने को मिलेंगी. इन्हीं एटीएम की तरह ही आसानी से इस्तेमाल किया जा सकता है. अमेरिकन राउंड्स (American Rounds) नाम की कंपनी इन वेंडिंग मशीनों को ग्रोसरी स्टोर में लगा रही है. कंपनी का कहना है कि इन मशीनों में एक आइडेंटिफिकेशन स्कैनर और फेशियल रिकग्निशन सॉफ्टवेयर लगा है, जो खरीदार की उम्र वेरिफाई करता है. इसके बाद ही आप आसानी से इन मशीनों से बुलेट्स खरीद सकेंगे. वेंडिंग मशीनों से आराम से निकाल सकेंगे बुलेट्स कंपनी का कहना है कि एज वेरिफिकेशन टेक्नोलॉजी (Age Verification Technology) का मतलब है कि इस तरीके से गोलियां खरीदना ऑनलाइन खरीदारी से अधिक सुरक्षित हैं क्योंकि इसके लिए आपको अपनी उम्र का प्रमाणपत्र रिटेल स्टोर को देना पड़ता है. कंपनी का कहना है कि 21 साल से अधिक उम्र वाले कस्टमर्स इन वेंडिंग मशीनों से आसानी से गोलियां खरीद सकते हैं. हमारे ऑटोमैटिक बुलेट डिस्पेंसर 24/7 उपलब्ध हैं. आपको स्टोर पर घंटों और लंबी लाइनों में नहीं इंतजार नहीं करना पड़ेगा. किसी भी समय पर आप गोलियां खरीद सकते हैं. इन वेंडिंग मशीनों में इनबिल्ट AI टेक्नोलॉजी, कार्ड स्कैनिंग क्षमता और चेहरे की पहचान करने वाले सॉफ्टवेयर लगे हैं. अमेरिकन राउंड्स के सीईओ ग्रांट मैगर्स ने बताया कि फिलहाल चार राज्यों में ऐसी आठ मशीनें इंस्टॉल की गई हैं या फिलहाल इंस्टॉलेशन की प्रक्रिया में हैं. हमारे पास लगभग नौ राज्यों से AARM (ऑटोमेटेड एमो रिटेल मशीन) के लिए 200 से ज्यादा स्टोर रिक्वेस्ट आए हैं और ये संख्या हर दिन बढ़ रही है. लेकिन विरोध क्यों… अमेरिका की कई ग्रोसरी स्टोर पर लगाई जा रही इन वेंडिंग मशीन का विरोध भी हो रहा है. इसकी वजह है कि अमेरिका में लगातार मास शूटिंग की घटनाएं बढ़ी हैं. 2024 में ही अब तक मास शूटिंग की इस तरह की 15 घटनाएं हो चुकी हैं. ऐसे में लोगों का कहना है कि इस तरह से खुलेआम किराने के स्टोर पर गोलियां मिलने से शूटिंग की घटनाएं और बढ़ेंगी.  

देशभर में कुल 37.9 प्रतिशत महिलाएं फैमिली प्लानिंग का आपरेशन कराती हैं, पुरुष मात्र 0.3 प्रतिशत

नई दिल्ली  नसबंदी कराने वालों की संख्या स्त्री और पुरुष दोनों में ही कम है, जबकि इस ऑपरेशन का कोई भी निगेटिव असर संबंधित व्यक्ति के शरीर पर नहीं पड़ता है. नसबंदी कराने के मामले में कनाडा के पुरुष सबसे आगे हैं, यहां 21.7 प्रतिशत पुरुष नसबंदी कराते हैं, जबकि महिलाओं की बात करें तो डोमिनिकन रिपब्लिक सबसे आगे है, यहां की 47 प्रतिशत महिलाएं नसबंदी कराती हैं. जनसंख्या देश के लिए बड़ी समस्या बन सकती है, इस बात को देश के दूरदर्शी नेताओं ने पहले ही समझ लिया था, यही वजह थी कि भारत विश्व में पहला ऐसा देश बना जिसने 1952 में ही परिवार नियोजन की शुरुआत की. आजादी के वक्त भारत की जनसंख्या मात्र 36 करोड़ थी जो आज के समय में 144 करोड़ को पार कर गई है. आजादी के बाद आरए गोपालस्वामी ने अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपी थी जिसमें यह कहा गया था कि जो स्थिति है उसमें प्रत्येक वर्ष देश की आबादी में 5 लाख नए लोग जुड़ जाएंगे. इसी रिपोर्ट के आधार पर देश में परिवार नियोजन की शुरुआत हुई. परिवार को सीमित करने के लिए कई तरीकों का ईजाद हुआ, जिनमें कुछ पुराने तरीके हैं और कुछ आधुनिक. इन तरीकों में से आपको किसे अपनना है यह आपकी मर्जी पर निर्भर है. सामान्यतौर पर परिवार नियोजन के लिए गोलियां, कंडोम या इसी तरह के अन्य अवरोधक उपकरण और नसबंदी या बंध्याकरण की शामिल है. कई लोग प्राकृतिक परिवार नियोजन का भी सहारा लेते हैं. नसबंदी के फायदे क्या हैं? Sterilization या नसबंदी एक सर्जरी है और जिसके जरिए एक स्त्री या पुरुष को प्रजनन करने से रोका जाता है. इसे परिवार नियोजन का सबसे सफल और कारगर उपाय माना जाता है. बावजूद इसके नसबंदी कराने वालों की संख्या स्त्री और पुरुष दोनों में ही कम है, जबकि इस ऑपरेशन का कोई भी निगेटिव असर संबंधित व्यक्ति के शरीर पर नहीं पड़ता है. नसबंदी कराने के मामले में कनाडा के पुरुष सबसे आगे हैं, यहां 21.7 प्रतिशत पुरुष नसबंदी कराते हैं, जबकि महिलाओं की बात करें तो डोमिनिकन रिपब्लिक सबसे आगे है, यहां की 47 प्रतिशत महिलाएं नसबंदी कराती हैं. क्या कहते हैं नसबंदी के आंकड़े NFHS-5 के आंकड़े बताते हैं कि पुरुष नसबंदी काफी कम कराते हैं, जबकि महिलाएं यह सर्जरी ज्यादा कराती हैं. देशभर में कुल 37.9 प्रतिशत महिलाएं फैमिली प्लानिंग का आॅपरेशन कराती हैं, जबकि पुरुषों में संख्या 0.3 प्रतिशत का है. वहीं बात अगर NFHS-4 की करें तो उसमें भी आंकड़ा 0.3 प्रतिशत का ही था, यानी कि पुरुषों की रुचि नसंबंदी में जरा भी नहीं बढ़ी है. क्या कहते हैं झारखंड के आंकड़े झारखंड के आंकड़ों को अगर देखें तो शहरी इलाकों में 37.3 प्रतिशत महिलाएं सर्जरी कराती हैं, जबकि ग्रामीण इलाकों में यह आंकड़ा 37.4 का है. एनएफएचएस 4 में यह आंकड़ा 31.1 था. उस लिहाज से इसे उत्साहित करने वाला आंकड़ा माना जा सकता है. वहीं पुरुषों की अगर बात करें तो आंकड़े में मामूली परिवर्तन दिखता है. शहरी इलाकों में 0.4 प्रतिशत पुरुष नसबंदी कराते हैं, जबकि ग्रामीण इलाकों में यह 0.2 प्रतिशत है और कुल 0.3 प्रतिशत है. एनएफएचएस 4 में भी यह आंकड़ा 0.2 प्रतिशत ही था. यह आंकड़े यह बताते हैं कि नसबंदी को लेकर पुरुषों में कोई उत्साह नहीं है और वे परिवार नियोजन के इस तरीके को पसंद नहीं करते हैं. बिहार के पुरुषों को पसंद नहीं नसबंदी बिहार के शहरी पुरुषों की अगर बात करें तो मात्र 0.2 प्रतिशत ही नसबंदी कराते हैं, जबकि ग्रामीण पुरुषों में यह संख्या संख्या 0.1 प्रतिशत है. वहीं कुल आंकड़ा 0.1 प्रतिशत का ही है. जबकि अगर एनएफएचएस 4 की बात करें तो यह संख्या 0.0 प्रतिशत की दिखती है. झारखंड के मुकाबले में बिहार की महिलाएं भी नसबंदी और परिवार नियोजन के तरीकों पर कम भरोसा करती दिखती हैं. आंकड़े कहते हैं कि बिहार की मात्र 34.8 प्रतिशत महिलाएं बंध्याकरण कराती हैं, एनएफएचएस4 में आंकड़ा 20.7 का था. परिवार नियोजन के किसी भी तरीकों को अपनाने के मामले में भी बिहार पीछे है, यहां मात्र 55.8 प्रतिशत लोग ही इसका सहारा लेते हैं. एनएफएचएस 4 में आंकड़ा 24.1 प्रतिशत का था. क्या कहते हैं डाॅक्टर स्त्री रोग विशेषज्ञ डाॅ पुष्पा पांडेय कहती हैं कि हमारे देश में पुरुष नसबंदी में रुचि नहीं लेते हैं उनके अंदर एक डर है कि यह उनकी मर्दानगी को प्रभावित कर सकता है. जबकि सच्चाई इससे बिलकुल अलग है. नसबंदी का इन बातों से कोई लेना-देना नहीं है. पुरुषों की सर्जरी बहुत आसान भी होती है, बावजूद इसके इतने साल बाद भी उन्हें इसके लिए प्रोत्साहित नहीं किया जा सका है. महिलाओं में यह ऑपरेशन ज्यादा कठिन है, क्योंकि ज्यादातर महिलाएं डिलीवरी के समय तो यह सर्जरी कराती नहीं है, ऐसे में दोबारा उनका पेट खोलकर सर्जरी करना पड़ता है. यह कठिन प्रक्रिया है और इसमें समय भी ज्यादा लगता है. जबकि पुरुषों की सर्जरी बहुत ही आसान होती है, उन्हें रिकवरी में 24 घंटे लगते हैं और महिलाओं को 15 से 20 दिन. पुरुष नसबंदी की क्या है सच्चाई परिवार नियोजन कार्यक्रम से जुड़ी से गुंजन खलखो बताती है कि अगर केवल झारखंड की बात करें तो हमारी जो अपेक्षित उपलब्धि है उसके तहत पूरे झारखंड में प्रतिवर्ष हम 95 लाख स्त्री और पुरुष की नसबंदी करते हैं. इसमें पुरुषों की संख्या महज 1800 से दो हजार के बीच होती है. पुरुष सर्जरी क्यों नहीं कराते हैं उनमें जागरूकता का कितना अभाव है, यह बात तो है, लेकिन जरूरी यह है कि हम उन्हें प्रोत्साहित करें. अगर उनके मन में कोई भय या शंका है तो उसका निराकरण करें, आंकड़ों के आधार पर निगेटिव बात करना उचित नहीं है. इसका कारण यह है कि परिवार नियोजन के जो कार्यक्रम देश और राज्य में चलाए जा रहे हैं उनका प्रभाव बहुत ही पाॅजिटिव है. आज देश के शहरी इलाकों में टोटल फर्टिलिटी रेट दो से भी नीचे आ गया है हां ग्रामीण इलाकों में ही टोटल फर्टिलिटी रेट दो से ज्यादा है. कुल आंकड़ों मे यह दो से कम है. पुरुष बंध्याकरण इसलिए भी नहीं कराते हैं क्योंकि आज के समय में परिवार नियोजन के कई तरीके मौजूद हैं, जो ज्यादा आधुनिक और सहज हैं. … Read more

केंद्रीय सुरक्षा बलों में पूर्व अग्निवीरों के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण की मंजूरी

नई दिल्ली पूर्व अग्निवीरों के लिए खुशखबरी है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने पिछले साल केंद्रीय सुरक्षा बलों में पूर्व अग्निवीरों के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण की घोषणा की थी। अब इस घोषणा को लागू किया जा रहा है, जिससे केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF), सीमा सुरक्षा बल (BSF) और रेलवे सुरक्षा बल (RPF) में पूर्व अग्निवीरों को यह आरक्षण मिलेगा। आरपीएफ के महानिदेशक मनोज यादव ने मीडिया से बात करते हुए बताया, “भविष्य में रेलवे सुरक्षा बल में कांस्टेबल पद के लिए होने वाली सभी भर्तियों में पूर्व पुलिसकर्मियों के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण होगा। आरपीएफ पूर्व अग्निवीरों का स्वागत करते हुए बहुत उत्साहित है। इससे बल को नई ताकत और ऊर्जा मिलेगी तथा मनोबल बढ़ेगा।” सीआईएसएफ ने भी की तैयारी सीआईएसएफ की महानिदेशक नीना सिंह ने बताया कि इस संबंध में सभी तैयारियां कर ली गई हैं। उन्होंने कहा, “कांस्टेबलों के 10 प्रतिशत पद पूर्व अग्निवीरों के लिए आरक्षित रहेंगे। इसके अलावा, उन्हें शारीरिक दक्षता परीक्षा में भी छूट दी जाएगी।” उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व अग्निवीरों को भर्ती प्रक्रिया में बड़ी राहत मिलेगी और उनकी योग्यता को सम्मान मिलेगा। बीएसएफ की योजना बीएसएफ के महानिदेशक नितिन अग्रवाल ने कहा, “हम तैयारी कर रहे हैं, जवानों; इससे बेहतर कुछ नहीं हो सकता। सभी बलों को इसका लाभ मिलेगा। पूर्व अग्निवीरों को भर्ती में 10 प्रतिशत आरक्षण मिलेगा।” अग्निपथ योजना की शुरुआत 14 जून, 2022 को शुरू की गई अग्निपथ योजना में 17.5 से 21 वर्ष आयु वर्ग के युवाओं को चार वर्षों के लिए भर्ती करने का प्रावधान है, जिसमें उनमें से 25 प्रतिशत को भारतीय सशस्त्र बलों में 15 और वर्षों के लिए बनाए रखने का प्रावधान है। केंद्रीय सुरक्षा बलों में पूर्व अग्निवीरों के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण का फैसला केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा उठाया गया एक बड़ा कदम है। यह कदम पूर्व अग्निवीरों को नई जिम्मेदारियों के साथ समाज में फिर से स्थापित होने का अवसर देगा। मंत्रालय का मानना है कि पूर्व अग्निवीरों के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण की घोषणा से उन्हें रोजगार के नए अवसर देगी और उनकी सेवाओं को सम्मान मिलेगा। यह कदम सुरक्षा बलों की क्षमता को बढ़ाएगा और देश की सुरक्षा को मजबूत करेगा।  

अचानक बिगड़ी रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की तबीयत, दिल्ली एम्स में भर्ती

नई दिल्ली रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की तबीयत अचानक बिगड़ गई। जिसके बाद उन्हें दिल्ली एम्स में भर्ती कराया गया है। जानकारी के अनुसार, वह पीठ दर्द की शिकायत के बाद अस्पताल में भर्ती हुए हैं। फिलहाल उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है। मिली जानकारी के अनुसार, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह एम्स अस्पताल के न्यूरो सर्जरी विभाग में भर्ती है। आज सुबह तीन बजे बैक पेन की शिकायत के बाद उन्हें एम्स में भर्ती कराया गया है। उनकी हालत स्थिर है।

हरदीप सिंह पुरी बोले -ईएंडपी 2030 तक 100 अरब अमेरिकी डॉलर के निवेश के अवसर प्रदान करता है

नई दिल्ली, पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने बृहस्पतिवार को आयात पर भारत की निर्भरता कम करने और किफायती तथा टिकाऊ तरीके से ईंधन उपलब्ध कराने के लिए तेल एवं गैस की खोज तेज करने का आह्वान किया। ‘ऊर्जा वार्ता सम्मेलन’ में उन्होंने कहा कि अन्वेषण तथा उत्पादन (ईएंडपी) क्षेत्र ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक अभिन्न अंग है, जो सतत आर्थिक विकास के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा, ‘‘ईएंडपी 2030 तक 100 अरब अमेरिकी डॉलर के निवेश के अवसर प्रदान करता है।’’ पुरी ने कहा कि भारत की अन्वेषण तथा उत्पादन क्षमता का अब भी पूरी तरह दोहन नहीं हुआ है। उन्होंने कहा, ‘‘मुझे यह अजीब लगता है कि भारत प्रचुर भूवैज्ञानिक संसाधनों के बावजूद तेल आयात पर इतना अधिक निर्भर है।’’ उन्होंने कहा कि भारतीय तलछटी बेसिन में करीब 65.18 करोड़ टन कच्चा तेल और 1138.6 अरब क्यूबिक मीटर प्राकृतिक गैस मौजूद है। पुरी ने कहा, ‘‘हमारे तलछटी बेसिन क्षेत्र के केवल 10 प्रतिशत पर ही अन्वेषण का काम किया जा रहा है, जो वर्तमान बोली समाप्त होने के बाद 2024 के अंत तक बढ़कर 16 प्रतिशत हो जाएगा।’’ उन्होंने कहा,‘‘ हमारे अन्वेषण प्रयासों का ध्यान अभी तक न खोजे गए संसाधनों की खोज पर केंद्रित होना चाहिए।’’ भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का 85 प्रतिशत से अधिक आयात से पूरा करता है। रिफाइनरियों में कच्चे तेल को पेट्रोल और डीजल जैसे ईंधन में बदला जाता है। उन्होंने कहा, ‘‘सरकार ईएंडपी में निवेश को बढ़ावा देने के लिए अपनी भूमिका निभा रही है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय (एमओपीएनजी) ने व्यापक सुधार लागू किए हैं, जिससे हितधारकों को हमारे देश की प्रगति में योगदान करने के लिए सशक्त बनाया जा रहा है।’’ पुरी ने कहा, ‘‘हमारा इरादा 2030 तक भारत के अन्वेषण क्षेत्र को 10 लाख वर्ग किलोमीटर तक बढ़ाने का है।’’  

भारत सरकार के सभी संलग्न, अधीनस्थ कार्यालयाें और स्वायत निकायाें में ई-आफिस लागू किया जाएगा

नई दिल्ली  केंद्रीय सचिवालय की 37 लाख में से 95 प्रतिशत फाइलाें काे ई-फाइलों के रूप और 95 प्रतिशत रसीदाें काे ई-रसीदाें के रूप में संभाल लिया गया है। यह कार्य वर्ष 2019 -2024 के दाैरान संपन्न हुए। कार्मिक, लाेक शिकायत और पेंशन मंत्रालय द्वारा गुरुवार को जारी बयान के मुताबिक केंद्र सरकार ने यह निर्णय लिया है कि प्रशासनिक सुधार और लाेक शिकायत विभाग (डीएआरपीजी) के 100 दिवसीय एजेंडे के हिस्से के रूप में भारत सरकार के सभी संलग्न, अधीनस्थ कार्यालयाें और स्वायत निकायाें में ई-आफिस लागू किया जाएगा। मंत्रालय द्वारा जारी बयान के मुताबिक सफल कार्यान्वयन के लिए 133 संलग्न, अधीनस्थ कार्यालयाें और स्वायत्त निकायाें में ई आफिस अपनाने के लिए प्रशासनिक सुधार और लाेक शिकायत विभाग ने 24 जून काे दिशा-निर्देश जारी कर दिया है। मंत्रालय के मुताबिक (डीएआरपीजी) के सचिव वी. श्रीनिवास की अध्यक्षता में अंतर मंत्रालयी बैठक में आन बाेर्डिंग राेडमैप और तकनीकी ताैर तरीकाें पर चर्चा की गई। इसमें सभी मंत्रालयाें व विभागाें के अधिकारियाें व वरिष्ठ अधिकारियाें ने भाग लिया। राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनईसी) की उप महानिदेशक रचना श्रीवास्तव ने ई आफिस के कार्यान्यवन के लिए प्रक्रियात्मक तकनीकी प्रस्तुत की। इसमें निर्णय लिया गया कि सभी मंत्रालय व विभाग अपने संबद्ध, अधीनस्थ कार्यालयों और स्वायत्त निकायों के साथ समन्वय करेंगे। नोडल अधिकारियों की नियुक्ति करेंगे। डेटा केंद्र स्थापित करेंगे और ई-ऑफिस की समयबद्ध ऑन-बोर्डिंग के लिए उपयोगकर्ताओं व लाइसेंस की संख्या पर एनआईसी को मांग प्रस्तुत करेंगे।  

जम्मू से 4,800 से अधिक तीर्थयात्रियों का जत्था अमरनाथ गुफा मंदिर के लिए रवाना

जम्मू  अमरनाथ यात्रा के 12वें दिन 19 हजार से ज्यादा श्रद्धालुओं ने बाबा बर्फानी के दर्शन किए। गुरुवार को 4,885 तीर्थयात्रियों का एक और जत्था कश्मीर के लिए रवाना हुआ। बारिश के बावजूद और ‘बम बम भोले’ के नारे लगाते हुए 19,631 श्रद्धालुओं ने बुधवार को कश्मीर हिमालय में समुद्र तल से 3,888 मीटर ऊपर स्थित पवित्र गुफा मंदिर के अंदर बाबा बर्फानी दर्शन किए। श्रद्धालुओं के समूह में दक्षिण कश्मीर नुनवान (पहलगाम) आधार शिविर और उत्तर कश्मीर बालटाल आधार शिविर के तीर्थयात्री शामिल थे। स्थानीय लोग यात्रियों की मदद कर रहे हैं। वे कुछ बुजुर्ग यात्रियों को अपनी पीठ पर उठाकर खतरनाक पहाड़ी रास्ते से ले जा रहे हैं। यह रास्ता बारिश के दौरान ज्यादा फिसलन भरा हो जाता है। अधिकारियों ने 48 किमी लंबे पहलगाम और 14 किमी लंबे बालटाल-गुफा तीर्थ स्थल दोनों पर सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया है। दोनों मार्गों पर और पारगमन शिविरों ताथ गुफा मंदिर में 124 से अधिक लंगर (सामुदायिक रसोई) बनाये गए हैं। इस साल की यात्रा के दौरान 7 हजार से ज्यादा सेवादार यात्रियों की सेवा कर रहे हैं। दोनों मार्गों पर यात्रियों के लिए हेलीकॉप्टर सेवाएं भी उपलब्ध हैं। यात्रा शुरू होने के बाद से 12 दिनों में 2.50 लाख से ज्यादा श्रद्धालु अमरनाथ की यात्रा कर चुके हैं। गुरुवार को कश्मीर के लिए रवाना हुए 4,885 तीर्थयात्रियों में से 1,894 तीर्थयात्री 86 वाहनों में सवार होकर सुबह 3:05 बजे रवाना हुए, जबकि 2,991 तीर्थयात्रियों को लेकर दूसरा सुरक्षा काफिला 105 वाहनों में सवार होकर सुबह 3.52 बजे रवाना हुआ। पहला काफिला बालटाल बेस कैंप जा रहा है, जबकि दूसरा काफिला नुनवान (पहलगाम) बेस कैंप जा रहा है। तीर्थयात्री घाटी तक पहुंचने के लिए लगभग 300 किलोमीटर लंबे जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग का उपयोग करते हैं। सुरक्षा के व्यापक प्रबंधों के कारण बिना किसी बाधा के मार्ग उपलब्ध कराए जाने के कारण, दोनों तीर्थयात्री काफिले प्रत्येक दिन दोपहर तक घाटी पहुंच जाते हैं। यात्रियों की सुरक्षा के लिए हर दिन शाम 5 बजे के बाद पारगमन शिविरों से दोनों आधार शिविरों की ओर तीर्थयात्रियों के आवागमन की इजाजत नहीं है। 29 जून को शुरू होने के बाद से अमरनाथ यात्रा सुरक्षित और शांतिपूर्ण तरीके से आगे बढ़ रही है। 52 दिनों तक चलने वाली यह यात्रा 29 अगस्त को श्रावण पूर्णिमा और रक्षाबंधन के त्योहार के साथ समाप्त होगी। जम्मू से 4,800 से अधिक तीर्थयात्रियों का जत्था अमरनाथ गुफा मंदिर के लिए रवाना  वार्षिक अमरनाथ यात्रा के लिए बृहस्पतिवार को तड़के जम्मू शहर से कड़ी सुरक्षा के बीच 4,800 से अधिक तीर्थयात्रियों का जत्था कश्मीर के लिए रवाना हुआ। अधिकारियों ने बताया कि केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) की सुरक्षा में तड़के तीन बजकर छह मिनट पर दो आधार शिविर बालटाल और पहलगाम से 4,885 तीर्थयात्रियों का 14वां जत्था रवाना हुआ। आतंकवादी हमले और उसके बाद जारी अभियान के बाद भगवती नगर आधार शिविर में और उसके आसपास तथा यात्रा मार्ग पर सुरक्षा और कड़ी कर दी गयी है। अधिकारियों ने बताया कि श्रद्धालुओं के जत्थे में 2,366 पुरुष, 1,086 महिलाएं, 32 बच्चे और 163 ‘साधू’ व ‘साध्वी’ शामिल हैं जो बसों तथा हल्के वाहनों के काफिले में भगवती नगर आधार शिविर से रवाना हुए। उन्होंने बताया कि 2,991 तीर्थयात्रियों ने यात्रा के लिए 48 किलोमीटर लंबा पारंपरिक पहलगाम मार्ग चुना है जबकि 1,894 तीर्थयात्री अपेक्षाकृत छोटे (14 किलोमीटर के) लेकिन कठिन बालटाल मार्ग से गुफा मंदिर जाएंगे। जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने 28 जून को अमरनाथ तीर्थयात्रियों के पहले जत्थे को हरी झंडी दिखाई थी। तब से अब तक कुल 77,210 तीर्थयात्री जम्मू आधार शिविर से घाटी के लिए रवाना हो चुके हैं। कश्मीर के दो आधार शिविर से 52 दिवसीय यात्रा औपचारिक रूप से 29 जून को शुरू हुई थी और इसका समापन 19 अगस्त को होगा। पिछले साल 4.5 लाख से अधिक तीर्थयात्रियों ने बाबा बर्फानी के दर्शन किए थे। अधिकारियों ने बताया कि खतरे का आकलन करने के बाद जम्मू में आधार शिविर, ‘लॉज’, लखनपुर में आगमन केंद्र तथा राजमार्ग पर सुरक्षा बढ़ा दी गयी है। उन्होंने बताया कि यात्रा स्थलों के आसपास वाहनों की तलाशी और लोगों की जांच तेज कर दी गई है।    

जम्मू-कश्मीर और पंजाब के डीजीपी की कठुआ में बैठक

जम्मू/कठुआ भारतीय सेना का अपने पांच साथियों के बलिदान का बदला लेने के लिए जिला कठुआ के बिलावर के बदनोता में तलाशी अभियान तेजी से जारी है। गुरुवार को जिला पुलिस लाइन कठुआ में जम्मू कश्मीर डीजीपी आरआर स्वैन, पंजाब के डीजीपी सहित सेना और खुफिया एजेंसियों के आला अधिकारी बैठक करने के लिए पहुंचे हैं। सूत्रों का कहना है कि एजेंसियां आपस में समन्वय मजबूत करने के लिए यह बैठक कर रही हैं। आतंकी हमलों को रोकने और अमरनाथ यात्रा की सुरक्षा पर आज कठुआ में मंथन होगा। इस बैठक के बाद एक रिपोर्ट गृह और रक्षा मंत्रालय को भेजी जाएगी। उधर, पुलिस ने ट्रैक्टर चालक समेत 23 संदिग्ध लोगों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया है। सर्जिकल ऑपरेशन के लिए सेना के पैरा कमांडो जंगल में उतारे हैं। चॉपर और ड्रोन की मदद भी ली जा रही है।   इससे पहले बुधवार को पश्चिमी कमान के लेफ्टिनेंट जनरल मनोज कुमार खटयार भी मछेड़ी पहुंचे और घटना स्थल व अभियान का जायजा लिया। सुरक्षा बलों ने आतंकियों के सफाये के लिए बुधवार को तीसरे दिन भी बड़े स्तर पर तलाशी अभियान चलाया। खराब मौसम और भौगोलिक चुनौतियों के बावजूद सुरक्षाबल जुटे रहे। वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार कठुआ के साथ ही उधमपुर और डोडा जिले की सीमा से लगते जंगलों को भी खंगाला जा रहा है। सेना के वरिष्ठ अधिकारी लगातार निगरानी बनाए हुए हैं। सूत्रों के अनुसार बुधवार को उस ट्रैक्टर-ट्रॉली चालक से भी पूछताछ की गई, जो हमले के वक्त सैन्य काफिले के ठीक आगे चल रहा था। बता दें कि बदनोता में आतंकियों की ओर से ग्रेनेड से किए गए हमले के बाद अंधाधुंध गोलियां बरसाई गई थीं जिसमें सेना के पांच जवान शहीद हो गए थे। इसके साथ ही डोडा में भी मुठभेड़ के बाद घने जंगलों को दूसरे दिन भी खंगाला गया।

ईरान में कट्टरपंथ हारा, सुधारवादियों की जीत,ब्रिटेन चुनाव में उदारवादियों को मिली जीत

नई दिल्ली 1789 की सुबह फ्रांस की राजधानी पेरिस में अराजकता का माहौल पैदा हो गया। लोग महल के सामने ही बड़ी संख्या में जमा होने लग गए थे। सम्राट ने सेना को शहर में घुसने का आदेश दे दिया था। अफवाह थी कि वह सेना को नागरिकों पर गोलियां चलाने का आदेश देने वाला है। करीब 7000 आदमी और औरतें महल के टाउनहॉल में जमा हुए। सभी ने मिलकर राजशाही के प्रतीक बैस्तील के किले की एक दीवार को गिरा दिया। दरअसल, साल 1774 में फ्रांस में बूर्बो राजवंश का लुई 16वां राजगद्दी पर बैठा। उस वक्त उसकी उम्र महज 20 साल थी। उसकी शादी ऑस्ट्रिया की राजकुमारी मैरी अंत्वानेत से हुआ था। उस वक्त फ्रांस के महल का खर्च उठाने के लिए आम आदमी से भारी टैक्स वसूले जाते थे। पूरा महल ऐशो-आराम में डूबा रहता और जनता भूखों मरने लगी थी। बैस्तील की दीवार गिराने के साथ ही फ्रांस की महान क्रांति की नींव पड़ी, जिसने दुनिया में लोकतंत्र, स्वतंत्रता और समानता की राह दिखाई। आज 235 साल बाद इसी फ्रांस में हुए आम चुनाव में वामपंथी दलों के गठबंधन न्यू पॉपुलर फ्रंट यानी एनएफपी को सबसे ज्यादा सीटों पर जीत मिली है। फ्रांस के चुनाव से एक महीने पहले तक इस गठबंधन का कोई वजूद नहीं था। चुनाव के ऐलान के बाद सबको चौंकाते हुए कई दलों ने साथ आकर न्यू पॉपुलर फ्रंट के एलायंस ने फ्रांस की संसद में सबसे ज्यादा सीटें जीत लीं। फ्रांस में क्या नफरत की राजनीति के चलते हार गया दक्षिणपंथ फ्रांस के चुनाव में शुरुआत में दक्षिणपंथी नेशनल रैली को बड़ी जीत मिलती नजर आ रही थी। मगर,वह दूसरे चरण में आते-आते हार गई। दरअसल, नेशनल रैली के कई सदस्य जर्मन तानाशाह हिटलर का समर्थन करते हैं। कुछ ने चुनाव प्रचार के दौरान मुस्लिमों और यहूदियों के खिलाफ नफरत भरे भाषण भी दिए। इसी को देखते हुए वामपंथी और मध्यम मार्गी पार्टियों ने दक्षिणपंथ को हराने के लिए खास स्ट्रैटेजी अपनाई। चुनाव रैलियों में वामपंथी नेताओं ने कहा कि नेशनल रैली लोगों में नफरत फैला रही है, जो फ्रांसीसी क्रांति और संविधान के समानता के सिद्धांत के खिलाफ है। दक्षिणपंथ को रोकने के लिए एकजुट हो गईं पार्टियां चुनाव प्रचार के दौरान मध्यम मार्गी गठबंधन के एक प्रमुख नेता और देश के प्रधानमंत्री गैब्रियल अटाल ने कहा, हमें नेशनल रैली को बहुमत तक पहुंचने से रोकने की जरूरत है, क्योंकि अगर ऐसा होता है तो मैं ये कह सकता हूं कि यह हमारे देश के लिए एक त्रासदी होगी। इसी तरह धुर-वामपंथी दल LFI के एक प्रमुख नेता फ्रांसोइस रुफिन ने कहा, आज हमारा नेशनल रैली को पूर्ण बहुमत से रोकना ही मकसद है। वहीं, सिविल सोसाइटी ने भी कहा कि नेशनल रैली प्रवासियों के खिलाफ नफरत फैलाती है। इसके नेता मुसलमानों और यहूदियों के खिलाफ हेट स्पीच देते हैं, नस्लीय भाषण देते हैं। आगे बढ़ने से पहले जरा नीचे दिए ग्राफिक पर नजर मार लेते हैं, जो बहुदलीय व्यवस्था के फायदों के बारे में बात करता है। भारत के लोकसभा चुनाव में हिंदू-मुस्लिम मुद्दा हारा हाल ही में भारत के लोकसभा चुनाव के प्रचार के दौरान भी हिंदू बनाम मुस्लिम का मुद्दा खूब उछला। मगर,भारतीय वोटरों ने इस मुद्दे को नकार दिया। इसने सत्ता पक्ष को जहां बहुमत से पहुंचने से दूर कर दिया। वहीं, विपक्ष को भी बहुमत हासिल नहीं करने दिया। इस चुनाव में विपक्ष की बेरोजगारी, महंगाई का मुद्दा भी छाया रहा। दिल्ली यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर और राजनीतिक विश्लेषक डॉ. राजीव रंजन गिरि कहते हैं कि भारत हो या दुनिया का कोई और देश, हमेशा नफरत की राजनीति नहीं चल सकती है। इस बार देखा जा सकता है कि राममंदिर का मुद्दा भी नहीं चला और न ही मुस्लिमों के खिलाफ हेट स्पीच। किसी भी प्रगतिशील देश में आम आदमी या आम वोटर्स ऐसे मुद्दों को नकार देते हैं। कांग्रेस की अगुवाई वाले इंडिया गठबंधन ने नरेंद्र मोदी की भाजपा के खिलाफ तमाम पार्टियों को एकजुट किया और उन्हें सत्ता में पूर्ण बहुमत लाने से रोक दिया। जबकि पूरे चुनाव में भाजपा 400 पार के नारे के साथ प्रचार कर रही थी। नेपाल की राजनीति में कम्युनिस्ट पार्टियों का दखल नेपाल की राजनीति में माओवादी नेता और प्रधानमंत्री पुष्प दहाल कमल प्रचंड की पार्टी माओवादी सेंटर ने पूर्व प्रधानमंत्री केपी ओली की पार्टी एकीकृत मार्क्सवादी लेनिनवादी (यूएमएल) के साथ हाथ मिला लिया है। इसके साथ ही नेपाल की राजनीति में एक बार फिर कम्युनिस्ट पार्टियां एक साथ आ गई हैं। इसके पहले बीते साल फरवरी में प्रचंड और ओली की पार्टी ने गठबंधन तोड़ लिया था। ईरान में कट्टरपंथ हारा, सुधारवादियों की जीत हाल ही में ईरान की बागडोर कट्टरपंथी और पश्चिम विरोधी राष्ट्रपति से एक सुधारवादी राष्ट्रपति के हाथ में आ गई है। पिछले 50 साल से कम वक्त में यह बदलाव हुआ है। मसूद पेजेश्कियान ईरान के राष्ट्रपति चुन लिए गए। मसूद 19 साल पहले के सुधारवादी राष्ट्रपति के शासन में स्वास्थ्य मंत्री थे। इसके बाद के राष्ट्रपति चुनावों की दौड़ में सुधारवादियों को लगातार पाबंदियों का सामना करना पड़ा था। ब्रिटेन चुनाव में भी उदारवादियों को मिली जीत ब्रिटेन के चुनाव में कंजर्वेटिव पार्टी को बड़ा झटका लगा है। भारतीय मूल के ऋषि सुनक चुनाव हार गए। हालांकि, चुनावों के दौरान वह ब्रिटेन में बसे भारतीय वोटरों को लुभाने की कोशिश करते दिखे। यहां तक कि वह खुद को हिंदू कहने लगे थे, इसके बाद भी भारतीयों ने उन्हें नकार दिया। दरअसल, सुनक की शानो-शौकत की लाइफ और अनाप-शनाप बयानों ने उन्हें ब्रिटिश चुनाव में हरा दिया। कट्टरपंथ या सुधारवाद के बीच झूल रही है दुनिया दक्षिण एशियाई यूनिवर्सिटी, नई दिल्ली में प्रोफेसर देवनाथ पाठक कहते हैं कि समाज अंततः समन्वय चाहता है। इस विचार की पुष्टि 18वीं सदी में फ्रांस की ही जमीन पर हुई थी। फ्रांसीसी क्रांति के बाद समाज में जबरदस्त उथल-पुथल हुआ था। उस युग के दार्शनिकों और राजनैतिक विचारकों को भी लगा कि समाज में व्यवस्था बनाने के लिए समन्यवपूर्ण संरचना जरूरी है। कितने आधुनिक समाज वैज्ञानिकों ने फ्रांसीसी क्रांति के बाद एक नए समाज विज्ञान का निर्माण किया, जिसका मकसद था समन्वयपूर्ण सामाज निर्माण। सिर्फ वैचारिक क्रांति नहीं बल्कि सामाजिक समरसता, सौहार्द और शांति की आवश्यकता … Read more

रामदेव की पतंजलि दे रही है देश को धोखा, Patanjali धड़ल्ले से 14 दवाएं बेच रहे

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार की सुबह पतंजलि आयुर्वेद को यह सबूत देने का निर्देश दिया कि उसने अप्रैल में उत्तराखंड राज्य लाइसेंसिंग विभाग द्वारा प्रतिबंधित 14 उत्पादों की बिक्री और विज्ञापन बंद कर दिए हैं। सुप्रीम कोर्ट इससे यह पुष्टि करना चाहता है कि पतंजलि ने सभी स्टोर मालिकों, विज्ञापन आउटलेट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को प्रतिबंध का पालन करने के निर्देश जारी किए थे। मंगलवार और बुधवार को हिन्दुस्तान टाइम्स ने चार प्रमुख शहरों नई दिल्ली, लखनऊ, पटना और देहरादून में पतंजलि स्टोर का दौरा किया। इस दौरान हमारी टीम पतंजिल के विभिन्न स्टोर से बैन किए गए उत्पादों को खरीदने में सक्षम रही। इनमें से प्रत्येक खरीदारी रसीद भी प्राप्त हुई। कुछ दुकानों में बैन किए गए सभी 14 सामान उपलब्ध नहीं थे। स्टॉक की कमी का हवाला दिया गया। किसी ने यह नहीं कहा कि इसकी सप्लाई बंद कर दी गई है। कोर्ट ने मंगलवार को अपने आदेश में कहा, “पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड हलफनामे में बताए कि क्या 14 आयुर्वेदिक दवाओं को वापस ले लिया गया है।” पतंजलि के वकीलों ने न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ के निर्देश को स्वीकार कर लिया, जिसमें फर्म को हलफनामा प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया था। हलफनामा दो सप्ताह के भीतर दायर किया जाना था और मामले की सुनवाई 30 जुलाई को निर्धारित है। सुप्रीम कोर्ट में पतंजलि आयुर्वेद के एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड गौतम तालुकदार ने कहा, “उत्तराखंड सरकार द्वारा पारित निलंबन को रद्द करने का आदेश अभी तक पतंजलि को नहीं बताया गया है। पतंजलि को इसकी जानकारी राज्य द्वारा सुप्रीम कोर्ट में दायर हलफनामे के जरिए मिली। जब तक कोई आधिकारिक आदेश प्राप्त नहीं होता है, पतंजलि 15 अप्रैल को उत्तराखंड राज्य लाइसेंसिंग प्राधिकरण द्वारा 14 उत्पादों पर लगाए गए निलंबन का पालन करने के लिए बाध्य है।” जिन 14 पतंजलि उत्पादों के लाइसेंस रद्द किए गए हैं वे हैं श्वासरि गोल्ड,श्वासरि वटी, ब्रोंकोम, बीपी ग्रिट, मधुग्रीट, मधुनाशिनी वटी एक्स्ट्रा पावर, लिवामृत एडवांस, लिवोग्रिट, आईग्रिट गोल्ड। नई दिल्ली के न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी में पतंजलि स्टोर पर शाम 6.15 बजे हमारी टीम पहुंची। इस दौरान दुकानदार लाइसेंस रद्द होने की जानकारी से अनजान था। उसके पास बैन किए गए 14 उत्पादों में से सात स्टॉक में थे। उन्होंने कहा कि ये व्यापक रूप से इन दवाओं को बेचते हैं। हर दो सप्ताह में अलमारियां खाली हो जाती हैं। उन्होंने कहा, “हम एक साल से अधिक समय से दवाएं बेच रहे हैं। इनमें से सात अभी भी हमारे स्टोर में उपलब्ध हैं, लेकिन कुछ दिनों से स्टॉक कम है। दवाएँ अगले सप्ताह आएंगी।” ईस्ट ऑफ कैलाश में पतंजलि स्टोर पर दुकानदार ने कहा कि उसके पास 14 में से नौ दवाइयों का स्टॉक है, लेकिन उसे प्रतिबंध के बारे में पता नहीं था। उन्होंने कहा, “हमारे पास ईस्ट ऑफ कैलाश, जीके, जंगपुरा, पंचशील पार्क, ग्रीन पार्क और अन्य इलाकों से ग्राहक आते हैं। वे नियमित रूप से हमारी दवाइयां खरीदते हैं। ज्यादातर ग्राहक बुज़ुर्ग पुरुष या मध्यम आयु वर्ग के कपल होते हैं।” पटना के लोक नायक भवन में प्रगति पतंजलि के आशीष केशरी ने कहा कि उन्हें कंपनी की ओर से अपने आयुर्वेदिक उत्पादों की बिक्री बंद करने की कोई सूचना नहीं मिली है। केशरी ने कहा, “लोकसभा चुनाव के दौरान दवाओं की सप्लाई करीब 10 दिनों के लिए बाधित रही। अगर पतंजलि के किसी भी उत्पाद पर प्रतिबंध लगाया जाता, तो उसकी सप्लाई बंद कर दी जाती है। हम उन्हें नहीं बेच पाते।” एचटी की टीम ने 14 में से 13 उत्पाद 3,215 में खरीदे। यही हाल बाकी शहरों का भी है। लगभग सभी दुकानों पर धड़ल्ले से बैन की गई दवाइयां बेची जा रही हैं।  

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