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राशिफल गुरुवार14 नवंबर 2024

मेष राशि के जातकों आज के दिन आप कॉन्फिडेंस से भरपूर रहेंगे। पैसों से जुड़े सौदे आज बेहद सावधानी के साथ करें। छोटी मोटी सेहत से जुड़ी समस्या हो सकती है। इसलिए बाहर के खाने से परहेज करना आपके लिए बेहतर रहेगा। वृषभ राशि के जातकों आज का दिन क्रिएटिव रहने वाला है। करियर के मामले में कुछ लोगों को अपनी मेहनत का फल मिल सकता है। लव लाइफ में पार्टनर के साथ बहस करने से बचें। कोई नई डील मिल सकती है। मिथुन राशि के जातकों आज अपनी स्किल्स का अच्छे से इस्तेमाल करें। कुछ जातकों को काम के सिलसिले में काफी भाग दौड़ करनी पड़ सकती है। लाइफ में बैलेंस मेंटेन करके आगे बढ़ें। पॉजिटिव सोच रखें। कर्क राशि के जातकों आज का आपका दिन उतार-चढ़ाव से भरपूर रहेगा। अपने खर्चों पर पकड़ बनाकर रखें। आपको सलाह दी जाती है की जीवन के किसी भी क्षेत्र में हो रहे परिवर्तनों को पॉजिटिव सोच के साथ अपनाएं। सिंह राशि के जातकों आज का आपका दिन बदलावों भरा साबित हो सकता है। आज अपने पार्टनर के साथ कुछ क्वालिटी टाइम स्पेंड करें। पैसों के मामले में आपको सेविंग्स पर ध्यान देना चाहिए। कन्या राशि के जातकों आज का आपका दिन पॉजिटिव एनर्जी से भरपूर रहने वाला है। अपनी सेहत पर खास ध्यान देने की जरूरत है। अपनी डाइट में हरी सब्जियां शामिल करें। परिवार के साथ कुछ वक्त बिताएं। तुला राशि के जातकों मेंटल हेल्थ का ख्याल रखना बहुत जरूरी है। बहुत ज्यादा तनाव लेने से शारीरिक व मानसिक सेहत पर भी प्रभाव पड़ता है। पुराने निवेश से कुछ लोगों को अच्छा रिटर्न मिल सकता है। वृश्चिक राशि के जातकों आज का दिन शुभ साबित हो सकता है। अपनी मेंटल हेल्थ पर ध्यान दें। करियर के मामले में आज आपको अपने दोस्तों का भरपूर सपोर्ट मिलेगा। आज आप कॉन्फिडेंट फील करेंगे। धनु राशि के जातकों आज का दिन काफी प्रोडक्टिव रहने वाला है। काम पर आपका पूरा फोकस रहेगा। अपनी बॉडी को हाइड्रेटेड रखें। डेडलाइन पर सभी जरूरी टास्क पूरे करने में सक्षम रहेंगे। मकर राशि के जातकों आज का आपका का दिन नॉर्मल रहने वाला है। सेहत को दुरुस्त रखने के लिए समय-समय पर ब्रेक लेते रहें। नया फिटनेस रूटीन शुरू करने या अपने लक्ष्यों पर फोकस करने का एक शानदार समय है। कुंभ राशि के जातकों आज के दिन बिजी शेड्यूल के चलते आप थोड़ा प्रेशर महसूस कर सकते हैं। सावधानी के साथ योजना बनाकर, आप आज के दिन का पूरा लाभ उठा सकते हैं। बाहर के खाने से परहेज करें। मीन राशि के जातकों अपनी कड़ी मेहनत या स्किल्स दिखाने का मौका मिल सकता है। रोमांटिक शाम बिताने का प्लान बनाएं या अपने साथी के साथ अपने दिल की बातें शेयर करें। पैसों के सभी मामलों पर ध्यान दें।

सिद्ध पीठों में प्रमुख है हरिद्वार का मनसा देवी मंदिर

प्रसिद्ध मनसा देवी माता का मंदिर देवभूमि हरिद्वार में हरकी पैड़ी के पास गंगा के किनारे स्थित है। नवरात्रि के दिनों में यहां माता के दर्शनों के लिए लंबी लंबी लाइनें तो लगती ही हैं साथ ही सामान्य दिनों में भी यहां श्रद्धालुओं की काफी अच्छी संख्या रहती है। जिसको देखते हुए मंदिर प्रशासन ने माता के दर्शनों और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए व्यापक व्यवस्था की है। मंदिर चूंकि पहाड़ी पर स्थित है इसलिए यहां तक पहुंचने के लिए ट्राली का उपयोग किया जाता है। यदि कोई महंगी ट्राली से सफर नहीं करना चाहे तो उसके लिए पहाड़ी पर ही सड़क मार्ग भी बनाया गया है जहां पैदल यात्रा के साथ ही स्थानीय ऑटो रिक्शा के जरिये पहुंचा जा सकता है। यहां चलने वाली ट्राली श्रद्धालुओं को खूब आकर्षित करती है और इसके चलते यह धार्मिक पर्यटन स्थल का रूप ले चुका है। यहां चलने वाली ट्राली को मनसा देवी उड़नखटोला के नाम से भी जाना जाता है। रोपवे से श्रद्धालुओं को मंदिर लाने ले जाने का काम सुबह आठ बजे से सायं पांच बजे तक चलता है। दिन में यह 12 से 2 बजे तक भोजन के लिए यह सेवा बंद कर दी जाती है। यहां स्थित माता मनसा देवी को सिद्ध पीठों में प्रमुख माना जाता है। यह हरिद्वार स्थित तीन सिद्धपीठों में से एक है। अन्य दो सिद्धपीठ हैं चंडी देवी मंदिर और माया देवी मंदिर। मान्यता है कि जो श्रद्धालु यहां सच्चे मन से मां की पूजा अर्चना कर मुराद मांगते हैं माता उनकी इच्छा जरूर पूरी करती हैं। धार्मिक ग्रंथों और पुराणों के मुताबिक मनसा देवी का जन्म संत कश्यप के मस्तिष्क से हुआ। वह राजा वासुकी की पत्नी हैं। कहा जाता है कि मनसा देवी ने भगवान शंकर की कठोर तपस्या किया और साथ ही वेदों का अध्ययन भी किया जिसके फलस्वरूप उन्हें कृष्ण मंत्र प्राप्त हुआ जिसे कल्पतरू कहा जाता है। देवी ने बाद में पुष्कर में कई युगों तक तप किया जिससे प्रसन्न होकर भगवान कृष्ण ने उन्हें वरदान दिया कि देवी तुम्हारी तीनों लोकों में पूजा होगी। पुराणों में उल्लेख मिलता है कि आशुतोष भगवान की पुत्री मनसा को ऋषि कश्यप ने अपने संरक्षण में पाला और सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा ने उनका नामकरण किया। ब्रह्मा ने नामकरण के बाद बताया कि कोई भी विष इस देवी के सामने तुच्छ है इसलिए इस देवी का नाम विषहरि होगा। इसी कारण समस्त नागों और भगवान शिव ने उन्हें स्वीकार किया। मनसा देवी को भगवान शिव की मानसपुत्री के रूप में भी जाना जाता है। मनसा देवी की पूजा ज्येष्ठ मास की दशहरा तिथि यानी गंगा दशहरा के दिन बंगाल में कई जगह की जाती है। मनसा देवी की पूजा के बाद ही नागों की पूजा करने का प्रचलन है। मान्यता है कि जो व्यक्ति देवी के बारह नामों का उच्चारण करता है, उसके वंशजों को भी सर्प भय नहीं रहता। देवी के यह बारह नाम इस प्रकार हैं− जरत्कारू, जगदगौरा या जगतगौरी, मनसा, सियोगिनी, वैष्णवी, नागभगिनी, शैवी, नागेश्वरी, जगतकारुप्रिया, आस्तिकमाता और विषहरी। मनसा देवी के मंदिर आने वाले श्रद्धालु अपनी मनोकामना पूरी करने के लिए यहां लगे वृक्षों में एक धागा बांधते हैं। जब उनकी मनोकामना पूर्ण हो जाती है तो वह पुनः मंदिर आते हैं और वह धागा खोलकर मनसा देवी की पूजा करते हैं। श्रद्धालुओं की ओर से मनसा देवी की पूजा के दौरान माता को फल, नारियल, फूल और श्रृंगार सामग्री अर्पित की जाती है।  

कार्तिक पूर्णिमा पर बन रहे शुभ योग, स्नान और दीपदान का है विशेष महत्व

 कार्तिक मास की पूर्णिमा तिथि का अत्यधिक महत्व है। प्रत्येक महीने की पूर्णिमा का अपना विशेष स्थान होता है, किंतु कार्तिक पूर्णिमा का महत्व अद्वितीय है। इस दिन देव दीपावली उत्सव मनता है। इस दिन स्नान और दान करने से जीवन में समृद्धि और खुशहाली का संचार होता है। साथ ही, यह दिन सुख और शांति का भी प्रतीक है। कब है कार्तिक पूर्णिमा     पं. अजय जोशी के अनुसार, पूर्णिमा तिथि 15 नवंबर सुबह 6.20 बजे प्रारंभ होगी और समापन मध्यरात्रि 2.59 बजे होगा।     पूर्णिमा पर पवित्र नदी में स्नान और दीपदान का अत्यधिक महत्व होता है। संध्या के समय दीपदान करना चाहिए।     इस दिन उचित समय पर नदी में स्नान करने से व्यक्ति पापों से मुक्त हो जाता है। जरूरतमंदों को दान देने की परंपरा भी है। कार्तिक पूर्णिमा पर बनने वाले शुभ योग पं. जोशी ने बताया कि इस वर्ष पूर्णिमा पर चंद्रमा और मंगल का राशि परिवर्तन एक विशेष योग का निर्माण करेगा, जिसमें दोनों ग्रह एक-दूसरे की राशि में स्थित रहेंगे। इस दिन रात के समय गजकेसरी राजयोग का निर्माण होगा। इसके अतिरिक्त, बुधादित्य राजयोग भी इस दिन बनेगा। विशेष रूप से 30 वर्षों के बाद कार्तिक पूर्णिमा पर विशेष राजयोग का निर्माण हो रहा है, क्योंकि अगले 30 वर्षों तक शनि कुंभ राशि में गोचर नहीं करेंगे। इस प्रकार, कार्तिक पूर्णिमा पर किए गए उपाय और दान पुण्य के कार्यों का फल 100 गुना अधिक प्राप्त होगा।  

राशिफल बुधवार 13 नवंबर 2024

मेष राशि के जातकों आपको किसी भी काम का ज्यादा प्रेशर लेने की जरूरत नहीं है। जिस व्यक्ति से आप प्यार करते हैं उसे यह बताने के लिए बहुत साहस की आवश्यकता होती है कि आपके रास्ते अलग-अलग हो सकते हैं। वृषभ राशि के जातकों व्यावसायिक संबंधों को मजबूत करने के लिए यह एक अच्छा दिन है। अपने नियमित व्यायाम से ब्रेक लेने से आपको अच्छा महसूस होगा। हो सकता है किसी मुद्दे पर परिवार आपके साथ न हो। मिथुन राशि के जातकों आज जीवन में संतुलन बनाना जरूरी है। पारिवारिक विवाद को सुलझाने का आपका प्रयास सफल हो सकता है। किसी को उधार दिया हुआ पैसा वापस मिलने की उम्मीद कर सकते हैं। कर्क राशि के जातकों पूरा हुआ कोई प्रोजेक्ट आपको प्रतिष्ठा के पद पर पहुंचा सकता है। हरी सब्जियां डाइट में शामिल करने से बॉडी को एनर्जेटिक बना सकते हैं। कुछ स्टूडेंट्स के लिए पढ़ाई के मामले में सुधार होने की संभावना है। सिंह राशि के जातकों आज आपको अपने पार्टनर के साथ रोमांटिक शाम बिताने का मौका मिल सकता है। सेहत पर पूरा ध्यान दें। साथ के साथ वाद-विवाद में उलझने से बचें। पॉजिटिव सोच बनाए रखने से लाभ होगा। कन्या राशि के जातकों आज एक खूबसूरत दिन बिता सकते हैं। जब आपके मन में कोई नेगेटिव विचार आए, तो भविष्य पर ध्यान केंद्रित करें। रोमांटिक रिश्ते के फलने-फूलने की संभावना है। परिवार के साथ अच्छा समय बिताएं। तुला राशि के जातकों कभी-कभी आपको लोगों को उनकी इच्छाओं के अनुसार चलने देना चाहिए। स्वास्थ्य को लेकर चिंता हो सकती है, लेकिन कोई गंभीर बात नहीं होगी। ड्राइव करते समय सावधान रहें। वृश्चिक राशि के जातकों अपने सपनों को पूरा करने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं। ध्यान रखें कि आपको अपनी यात्रा अकेले ही पूरी करनी होगी। जब आप ज्यादा प्रेशर महसूस करें तो मदद मांगने में संकोच न करें। धनु राशि के जातकों आज के दिन आपके पास कोई अच्छी डील आने वाली है। जीवन में चाहे कुछ भी हो, चीजें आपके लिए पॉजिटिव रहेंगी। कुछ लोग आज काम के सिलसिले में यात्रा कर सकते हैं। मौज-मस्ती करें। मकर राशि के जातकों कार्यस्थल पर आपका सामना किसी ऐसे व्यक्ति से हो सकता है, जिससे पहले मतभेद हो चुका हो। अपने जीवनसाथी को खुश करने की कोशिश में खुद पर तनाव नहीं डालना चाहिए। कुंभ राशि के जातकों पॉजिटिव सोच को अपनाएं और इसे किसी भी चुनौती से निपटने में आपका मार्गदर्शन करने दें। बॉडी को फिट रखने पर फोकस करें। आज के दिन का आनंद लें। आपके पास कई बेहतरीन अवसर आने वाले हैं। मीन राशि के जातकों किसी मुद्दे पर चिंता आपको परेशान कर सकती है, लेकिन लंबे समय तक नहीं। आपको सारी जिम्मेदारियां अकेले लेने की जरूरत नहीं है। संपत्ति का कोई मसला सही ढंग से सुलझने की संभावना है।

आज से चमक इन राशियों की किस्मत

सृष्टि के रचयिता श्री हरि विष्णु की कृपा से जीवन में सुख और आनंद आता है। भगवान विष्णु की पूजा के लिए गुरुवार को एकादशी और चातुर्मास को महत्वपूर्ण माना जाता है। चातुर्मास वह अवधि है जब भगवान चार महीने तक योग निद्रा में रहते हैं। आज यानी देवउठनी एकादशी पर शश राजयोग और सर्वार्थ सिद्धि योग का सुंदर संयोग बना। यह एक अत्यंत दुर्लभ योग है जिसमें देवउठनी एकादशी पर शनि अपनी मूलत्रिकोण राशि कुंभ में गोचर करते हुए शश राजयोग बना रहे हैं। 4 दिन बाद शनि भी इसी राशि में मार्गी हो जाएंगे। इस शुभ संयोग से भगवान विष्णु चातुर्मास की योग निद्रा से जागते हैं। जो लोग नियमित रूप से भगवान विष्णु की पूजा करते हैं, उन पर हमेशा नारायण की कृपा बनी रहती है। हालांकि, कुछ राशियां ऐसी  भी हैं जिन पर भगवान विष्णु की कृपा हमेशा बनी रहती है । आइए जानते हैं कौन सी है श्री हरि विष्णु की प्रिय राशियां। वृषभ राशि इस राशि का स्वामी शुक्र ग्रह शुक्र है। इसलिए इस राशि के जातकों पर हमेशा भगवान विष्णु की कृपा बनी रहती है और वे जीवन में हर तरह की खुशियां हासिल कर सकते हैं। लेकिन इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि आप महिलाओं का सम्मान करें और साफ-सफाई बनाए रखें। कर्क राशि कर्क राशि भगवान विष्णु की सबसे लोकप्रिय राशि है क्योंकि यह चंद्रमा की राशि है। भगवान विष्णु की राशि भी कर्क है।  इसलिए कर्क राशि सभी 12 राशियों में सबसे अच्छी राशि मानी जाती है और इस पर श्रीहरि का आशीर्वाद भी है। भगवान विष्णु की कृपा से इन्हें समाज में सम्मान और शिक्षा में सफलता मिलती है। सिंह राशि सिंह राशि के स्वामी ग्रह सूर्य हैं। वैदिक ज्योतिष में भगवान विष्णु को  अधिष्ठाता देवता सूर्य नारायण का बताया गया है। सूर्य सर्वोच्च सत्ता के रूप में विष्णु हैं और उपनिषदों में उन्हें सूर्य का निवासी आदित्य पुरुष कहा गया है। सूर्य से संबंधित होने के कारण सिंह राशि भी भगवान विष्णु के पसंदीदा नक्षत्रों में से एक है। श्रीहरि की कृपा से सिंह राशि के लोग अपने कार्यों में सफलता प्राप्त करते हैं और अपने प्रयासों से नई ऊंचाइयां हासिल करते हैं। तुला राशि तुला राशि का स्वामी ग्रह शुक्र है। शुक्र न केवल प्रेम का ग्रह है, बल्कि आध्यात्मिक ग्रह भी है। इसके अलावा इस ग्रह को भगवान विष्णु की पत्नी मां लक्ष्मी का घर भी माना जाता है। माता लक्ष्मी से संबंध होने के कारण तुला राशि को भगवान विष्णु की सबसे लोकप्रिय राशि माना जाता है। इस राशि के लोग अच्छे चरित्र वाले होते हैं और जीवन में सुख और सम्मान प्राप्त करते हैं।

राशिफल मंगलवार 12 नवंबर 2024

मेष राशि- मेष राशि के जातकों के लिए कल दिन खर्चा भरा रहने वाला है। आपका कोई काम यदि लंबे समय से रुका हुआ था, तो वह भी पूरा होगा। यदि आपने किसी से कुछ कर्ज लिया था, तो उसे भी आप काफी हद तक दूर रहेंगे। आप अपने मनमाने व्यवहार के कारण किसी वाद विवाद  में पड़ सकते हैं। आपको शीघ्रगामी  वाहनों के प्रयोग से सावधान रहना होगा। वृषभ राशि- वृषभ राशि के जातकों के लिए कल दिन लाभदायक रहने वाला है। आपका सहयोगी कामों मे एक दूसरे का पूरा साथ देंगे। यदि आपका पैसों को लेकर कोई काम अटका हुआ था, तब वह भी पूरा हो सकता है। आप पारिवारिक योजनाओं पर भी पूरा ध्यान देंगे। आपने यदि किसी से कोई वादा किया था, तो उसे भी आप पूरा कर सकते हैं। मिथुन राशि- मिथुन राशि के जातकों के लिए कल दिन सेहत के लिहाज  से कमजोर रहने वाला है। यदि परिवार में किसी सदस्य के विवाह में कोई बाधा आ रही थी, तो वह भी दूर होगी। व्यवसाय में भी आपने यदि लापरवाही के कारण कोई निर्णय जल्दबाजी में लिया, तो वह आपकी समस्याओं को खड़ा कर सकता है। कर्क राशि- कर्क राशि के जातकों को कल किसी वाद विवाद में पढ़ने से बचना होगा। किसी कानूनी मामले में आपको सफलता मिलेगी। जीवनसाथी के साथ आपके रिश्ते और बेहतर रहेंगे। आपको अपने धन लाभ में वृद्धि होने से खुशी का ठिकाना नहीं रहेगा। आप किसी काम को लेकर जीते हुए अहंकार ना दिखाएं। सिंह राशि- सिंह राशि के जातकों के लिए दिन की शुरुआत अच्छी रहेगी। आपको एक के बाद एक शुभ सूचना सुनने को मिलती रहेगी। धार्मिक कार्यों में काफी रुचि रहेगी। परिजनों के साथ आप कुछ समय मौज मस्ती करने में व्यतीत करेंगे। साझेदारी में कोई काम यदि आप लंबे समय से कर रहे थे, तो वह भी पूरा हो सकता है। कन्या राशि- कन्या राशि के जातकों के लिए कल दिन लंबे समय से रुके हुए कामों को पूरा करने के लिए रहेगा। भाई व बहनों से चल रही अनबन बातचीत के जरिए दूर होगी। आप किसी जरूरी काम को लेकर सलाह मशवरा कर सकते हैं। आपको अकस्मात धन लाभ मिलने से आपकी  खुशी का ठिकाना नहीं रहेगा। तुला राशि- तुला राशि के जातकों के लिए कल दिन किसी नई प्रॉपर्टी की खरीदारी के लिए अच्छा रहेगा। मानसिक चिताओं को लेकर आप परेशान रहेंगे। घर परिवार में सदस्यों के साथ आप कुछ समय मौज मस्ती करने में व्यतीत करेंगे। आपको किसी पुराने मित्र से लंबे समय बाद मिलकर खुशी होगी। वृश्चिक राशि- वृश्चिक राशि के जातकों के लिए कल दिन परोपकार के कार्यों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने के लिए रहेगा। आपको यदि काम को लेकर कोई समस्या चल रही थी, तो वह भी दूर हो गई होगी। परिवार के सदस्यों के साथ मिल बैठकर कोई महत्वपूर्ण निर्णय लेना बेहतर रहेगा। धनु राशि- धनु राशि के जातकों के लिए मध्यम  रूप से फलदायक रहने वाला है। आपके कुछ नए शत्रु उत्पन्न हो सकते हैं। आपको धन संचय करने के बारे में सोच विचार अवश्य करना होगा। आप दोस्तों के साथ कुछ समय मौज मस्ती करने में व्यतीत करेंगे। कार्य क्षेत्र में आपको ही बड़ा बदलाव कर सकते हैं, जो आपके लिए अच्छा रहेगा। मकर राशि- मकर राशि के जातकों के लिए कल दिन मिश्रित रूप से फलदायक रहने वाला है। मौसम का विपरीत प्रभाव आपके स्वास्थ्य पर पड़ेगा। दोस्तों के साथ आप कुछ समय मौज मस्ती करने में व्यतीत करेंगे। परिवार में किसी सदस्य की सेहत को लेकर थोड़ा परेशान रहेंगे। कामों में व्यस्त रहने के कारण आपको किसी लंबी दूरी की यात्रा पर जाना पड़ सकता है। कुंभ राशि- कुंभ राशि के जातकों को कल अपने कामों को समय रहते निपटाने की जरूरत है और यदि उन्होंने किसी काम को दूसरे के भरोसे छोड़ा, तो उसमें उन्हें समस्या हो सकती है। दानपुण्य के कार्य में भी आपकी काफी रुचि रहेगी। आपका मन इधर-उधर के कामों में लगेगा। आप बेफिजूल के खर्चे में पढ़ सकते हैं। मीन राशि- मीन राशि के जातकों के चारों ओर का वातावरण खुशनुमा रहेगा, उनकी कल कामों से एक नई पहचान बनेगी और उन्हें अपने मन में नकारात्मक विचारों को रखने से बचना होगा। कोई काम यदि लंबे समय से रुका हुआ था, तो वह भी पूरा हो सकता है। किसी नये  मकान, दुकान आदि की खरीदारी करना आपके लिए अच्छा रहेगा।

समूचे विश्व में पूजा होती है गणेश की

किसी भी शुभ कार्य से पूर्व गणपति का पूजन भारतीय परम्परा की विशिष्टता है। गणपति को विघ्नेश, एकदन्त, गणपति, गजानन, गणनायक, गणाधिपति, गणाध्यक्ष तथा लम्बोदर इत्यादि अनेकानेक नामों से पूजा जाता है। गणेश जी का स्वरूप गणपति का आदर्श माना जाता है। यही वजह है कि लोक-चेतना में उनका यह स्वरूप इतना समाया हुआ है कि प्रत्येक मांगलिक कार्य तथा विधि-विधान उन्हीं के पावन स्मरण, आह्वान तथा पूजा-अर्चना से शुरू होता है। ऋद्धि-सिद्धि के देव ऋद्धि-सिद्धि के देव गणेशजी न केवल भारत में, अपितु तिब्बत, चीन, बर्मा, जापान, जावा तथा बाली इत्यादि तमाम देशों में भी विभिन्न रूपों में पूजे जाते हैं। यही नहीं, इन देशों में गणेशजी की प्रतिमाएं भी चप्पे-चप्पे पर देखने को मिल जायेंगी। सफलता समृद्धि की सहचरी है, इसलिए बिना किसी व्यवधान के कार्य संपन्न कराने हेतु स्वयमेव सफलता प्राप्ति की दृष्टि से ही गणेश लाभ व लक्ष्य के स्वामी होकर सर्व पूजनीय हो गये। भारतीय पुराणों में, गणेश जी की अनेकों कथाएं समाहित हैं बल्कि गणेश-पुराण तक भी देखने को मिलता है। गणेशजी की महिमा सीमाओं की संकीर्णता से परे है, इसलिए पश्चिमी देशों की प्राचीन संस्कृतियों में भी गणेश की अवधारणा विद्यमान है। पश्चिम में रोमन देवता जेनस को गणपति के ही समकक्ष माना गया है, ऐसा माना जाता है कि जब भी इतालवी व रोमन इष्ट जेनस का नाम लेते थे। 18वीं शताब्दी के संस्कृत के प्रकांड विद्वान विलियम जोन्स ने जेनस व गणपति की पारम्परिक तुलना करते हुए माना है कि गणेश में जो विशेषताएं पाई गयी हैं वे सभी जेनस में भी हैं। यहां तक कि रोमन व संस्कृत शब्दों के उच्चारण में भी इतनी समानता है कि इन दोनों देवों में अंतर नहीं किया जा सकता। भारत से बाहर विदेशों में बसने वाले भारतीयों ने भारतीय संस्कृति की जड़ों को काफी गहराई तक फैलाने का प्रयास किया और इन पर भारतीय देवताओं की पूजा उपासना का स्पष्ट प्रभाव था, जो आज भी है। विदेशों में प्रकाशित पुस्तक गणेश ए मोनोग्राफ आफ द एलीफेन्ट फेल्ड गाड में जो तथ्य उजागर किये गये हैं, उससे इस बात का स्पष्ट प्रमाण मिलता है कि विश्व के कई देशों में गणेश प्रतिमाएं बहुत पहले से पहुंच चुकी हैं और विदेशियों में भी गणेश के प्रति श्रद्धा और अटूट विश्वास रहा है। विदेशों में पाई जाने वाली गणेशजी की प्रतिमाओं में इनके विभिन्न स्वरूप अलग-अलग देखे गये हैं। जावा में गणेश की मूर्तियों में वे पालथी मार कर बैठे दिखाए गये हैं, उनके दोनों पैर जमीन पर टिके हुए हैं व उनके तलुए आपस में मिले हुए हैं। हमारे देश में, गणेशजी की मूर्तियों में उनकी सूंड प्रायः बीच में दाहिनी या बाई ओर मुड़ी हुई है किन्तु विदेशों में वह पूर्णतया सीधी, सिरे पर मुड़ी हुई है। जापान और चीन में जापान में गणेश को कांतिगेन नाम से पुकारा जाता है। यहां पर बनी गणेशजी की मूर्तियों में दो या चार हाथ दिखाये गये हैं। सन् 804 में जब जापान का कोबो दाइशि धर्म की खोज करने हेतु चीन गया तो उसे वहां व्रजबोधि और अमोधवज नामक भारतीय आचार्य विद्वानों द्वारा मूल ग्रंथों का चीनी अनुवाद करने का मौका मिला तो चीन की मंत्र विद्या प्रणाली में गणेशजी की महिमा को भी वर्णित किया गया। सन् 720 में चीन की राजधानी लो-यांग पहुंचा अमोध्वज, जो भारतीय मूल का ब्राह्मण था जिसे चीन के कुआंग-फूं मंदिर में पुजारी के रूप में नियुक्त किया गया था। बाद में अमोह वज्र से एक चीनी धर्म परायण व्यक्ति हुई-कुओ ने पहले दीक्षा ली, फिर उसने कोषो-दाइशि को दीक्षा दी जिसने वहां के विभिन्न मठों से संस्कृत की पांडुलिपियां एकत्र की व सन् 806 में जब वह जापान लौटा तो वज्र धातु के महत्वपूर्ण सूत्रों के साथ ही गणेशजी के चित्र भी साथ ले गया जिसे सुख-समृद्धि परब्रहम की जानमयी शक्ति के रूप में माना गया। जापान के कोयसान सन्तसुजी विहार में गणेश की चार चित्रावलियां रखी गयी हैं जिनमें युग्म गणेश, षड़भुज गणेश, चतुर्भुज गणेश तथा सुवर्ण गणेश प्रमुख हैं। तिब्बत में गणेश पूजन तिब्बत के हरेक मठ में भी गणेश पूजन की परम्परा काफी पुरानी है। यहां गणपति अधीक्षक के रूप में पूजे जाते हैं। नौवीं शताब्दी के पूर्वार्ध्द में ही तिब्बत के अनेक स्थानों में गणेश पूजा का प्रचलन शुरू हो गया था। चीन के तुन-हु-आंग में एक पहाड़ी गुफा की दीवार पर गणेश की प्रतिमा उकेरी गयी है तो साथ ही सूर्य, चंद्र व कामदेव की मूर्तियां भी अंकित हैं। ये मूर्तियां सन् 644 में स्थापित की गयी थीं। गणेश की मूर्ति के नीचे चीनी भाषा में लिखा हुआ है कि ये हाथियों के अमानुष राजा है। चीन में भी गणपति कांतिगेन कहलाते हैं। कम्बोडिया की प्राचीन राजधानी अंगकोखाट में जो मूर्तियों का खजाना मिला है, उसमें भी गणेश के विभिन्न रंग-रूप पाये गये हैं। वैसे यहां कांसे की मूर्तियों का प्रचलन है। स्याम देश जहां पर बसे भारतीयों ने वैदिक धर्म को कई सौ वर्ष पूर्व ही प्रचारित कर दिया था, के कारणवश यहां पनपी धार्मिक आस्था के फलस्वरूप यहां निर्मित की गयी गणेश की मूर्तियां अयूथियन शैली में दिखाई देती है। स्याम देश में वैदिक धर्म राजधर्म के रूप में प्रसिद्ध था जिसके कारण यहां आज भी धार्मिक अनुष्ठान वैदिक रीति से ही सम्पन्न होते हैं। अमेरिका में तो लंबोदर गणेश की प्रतिमाएं बनायी जाती हैं। वैसे अमेरिका की खोज करने वाले कोलम्बस से पूर्व ही वहां सूर्य, चंद्र तथा गणेश की मूर्तियां पहुंच गयीं थी। विश्व के कई देश ऐसे भी हैं जहां खुदाई के दौरान भारतीय देवताओं की मूर्तियां मिली हैं लेकिन विशेषता यह रही कि इनमें गणेशजी हर जगह विद्यामान थे। ये मूर्तियां हजारों वर्ष पूर्व की होने का अनुमान लगाया गया है। कुल मिलाकर विघ्नहरण विनायक, जहां समूचे विश्व में पूजा जा रहे हैं, वहीं भारत में भी विभिन्न प्रांतों में 10वीं शताब्दी की प्राचीन मूर्तियों में भी गणेशजी के अनेकानेक रूप मिले हैं जिन्हें प्रदेशों की स्थानीय बोली में विभिन्न नामों से पुकारा जाता है।  

देवउठनी एकादशी के दिन भूलकर भी न खाएं ये चीजें

सनातन धर्म के लोगों के लिए देवउठनी एकादशी के व्रत का खास महत्व है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, देवउठनी एकादशी के दिन चातुर्मास समाप्त होने के साथ चार माह से सोए हुए विष्णु जी योग निद्रा से जागते हैं। इसलिए इस दिन विष्णु जी की पूजा की जाती है। साथ ही देवी तुलसी की पूजा करना शुभ माना जाता है। हालांकि देवउठनी एकादशी के दिन पूजा-पाठ करने के साथ-साथ कुछ विशेष नियमों का पालन करना जरूरी होता है। नहीं तो पूजा का पूर्ण फल नहीं मिलता है। चलिए जानते हैं देवउठनी एकादशी की सही तिथि और व्रत से जुड़े नियमों के बारे में। 2024 में देवउठनी एकादशी कब है? वैदिक पंचांग के अनुसार, हर साल कार्तिक माह की शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि के दिन देवउठनी एकादशी का व्रत रखा जाता है। इस साल एकादशी तिथि का आरंभ 11 नवंबर को शाम 06 बजकर 46 मिनट से हो रहा है, जिसका समापन अगले दिन 12 नवंबर को दोपहर बाद 04 बजकर 04 मिनट पर होगा। उदयातिथि के आधार पर इस बार 12 नवंबर 2024 को देवउठनी एकादशी का व्रत रखा जाएगा। गलती से भी न खाएं ये चीजें देवउठनी एकादशी के दिन न तो चावल खाना चाहिए और न ही चावल को स्पर्श करना चाहिए। भगवान विष्णु का विशेष आशीर्वाद यदि आपको प्राप्त करना है, तो देवउठनी एकादशी के दिन मसूर की दान का सेवन न करें। इसके अलावा मसूर की दाल को स्पर्श करने से भी बचें। देवउठनी एकादशी के दिन घर में प्याज, लहसुन और तामसिक भोजन नहीं बनाना चाहिए। इसके अलावा शराब और मांस-मदिरा का सेवन भी नहीं करना चाहिए। देवउठनी एकादशी व्रत से जुड़े नियम जो लोग देवउठनी एकादशी का व्रत रखते हैं, वो उपवास के दौरान फल का सेवन कर सकते हैं। लेकिन उन्हें अनाज नहीं खाना चाहिए। इससे व्रत टूट सकता है। व्रत के दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करें। साथ ही उन्हें उनके प्रिय चीजों का भोग लगाएं। माता तुलसी की पूजा करें। साथ ही पेड़ के पास घी का दीपक जलाएं। व्रत के दिन तुलसी के पत्तों को नहीं तोड़ना चाहिए। किसी से गलत न बोलें और न ही लड़ाई-झगड़ा करें।  

राशिफल सोमवार 11 नवंबर 2024

मेष राशि- मेष राशि के जातकों बेहतर करियर ग्रोथ के लिए ऑफिस में उम्मीदों पर खरा उतरना सुनिश्चित करें। आज अपने धन को सावधानी से संभालें। आज प्रेम संबंधों में कई सकारात्मक चीजें देखने को मिलेंगी। वृषभ राशि- वृषभ राशि वालों बेहतर कल के लिए आज धन का प्रबंधन समझदारी से करें। उत्पादकता पर ध्यान देना महत्वपूर्ण है। पार्टनर के साथ अधिक समय बिताएं, साथ ही आपको अतीत में उलझने से भी बचना चाहिए। मिथुन राशि- मिथुन राशि के जातकों जिन लोगों का हाल ही में ब्रेकअप हुआ है, उन्हें दिन के दूसरे भाग में कोई दिलचस्प व्यक्ति मिल सकता है। डाइट में हरी सब्जियां शामिल करें। मेंटल हेल्थ पर ध्यान देना जरूरी है। कर्क राशि- कर्क राशि वालों आज का दिन पॉजिटिव एनर्जी से भरपूर रहने वाला है। काम के मामले में आपको सावधानी बरतने की जरूरत है। खर्चों पर नियंत्रण रखें। सेहत पर कोई बुरा प्रभाव नहीं पड़ेगा। हाइड्रेटेड रहें। सिंह राशि- सिंह राशि के लोगों आज के दिन फैमिली के साथ कुछ वक्त बिताना चाहिए। कुछ प्रबंधकों और टीम लीडरों का जीवन अस्त-व्यस्त रहेगा। छोटी-मोटी वित्तीय दिक्कतें आ सकती हैं, लेकिन दिनचर्या प्रभावित नहीं होगी। कन्या राशि- कन्या राशि के लोगों आज आपको बहस करने से बचना चाहिए। ऑफिस की पॉलिटिक्स में न उलझेंं। अपने काम पर फोकस बनाए रखें। हेल्दी डाइट को फॉलो करें और रोज एक्सरसाइज करें। पार्टनर को खुश रखें। तुला राशि- तुला राशि वालों को आज अपनी परफॉर्मेंस पर ध्यान देना चाहिए। व्यापार करते समय सावधान रहें क्योंकि इसमें जोखिम हो सकता है। अपने पार्टनर को सरप्राइज देने से रिश्ता मजबूत बन सकता है। सेहत को प्राथमिकता दें। वृश्चिक राशि- वृश्चिक राशि वालों का आज का दिन काफी रोमांटिक साबित हो सकता है। कुछ लोगों को पार्टनर द्वारा गिफ्ट या डेट पर जाने का सरप्राइज मिल सकता है। काम से सिलसिले में मन परेशान हो सकता है। सेहत पर ध्यान दें। धनु राशि- धनु राशि के जातकों को एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर से आज दूर रहना चाहिए। कुछ लोग इंटरव्यू क्लियर करके ऑफर लेटर भी पा सकते हैं। सीढ़ियों का उपयोग करते समय सावधान रहें। मां की सेहत पर आपको ध्यान देना चाहिए। मकर राशि- मकर राशि के लोगों आज अपनी क्रिएटिविटी निखारने पर फोकस बनाए रखें। कुछ छात्रों को शिक्षा की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए भी धन की आवश्यकता होगी। बाहर का खाना ज्यादा खाने से बचें। कुम्भ राशि- कुंभ राशि के लोग आज पॉजिटिव सोच वाले व्यक्तियों के साथ कुछ टाइम स्पेंड करें। आपकी फाइनेंशियल कंडीशन पहले से बेहतर रहेगी। इन्वेस्टमेंट से दूरी बनाएं। बच्चों के साथ कुछ वक्त बिताना आपके लिए बेहतर रहेगा। मीन राशि- मीन राशि के लोगों को अपने क्रश को प्रपोज करने का मौका आज नहीं छोड़ना चाहिए। टीम के सदस्यों को संभालते समय सावधान रहें। पाचन संबंधी दिक्कतें हो सकती हैं। इसलिए खान पान पर ध्यान देना जरूरी है।

तुलसी विवाह के साथ ही हिंदू धर्म में सभी मांगलिक कार्यों का होगा शुभारंभ

कार्तिक मास में भगवान विष्णु और तुलसी माता के विवाह का बहुत महत्व है। तुलसी विवाह के साथ ही हिंदू धर्म में सभी मांगलिक कार्यों का शुभारंभ हो जाता है। इस वर्ष तुलसी विवाह कब और कैसे मनाया जाएगा, इसका विवरण नीचे दिया गया है। तुलसी विवाह का महत्व सनातन धर्म में भगवान विष्णु के शालिग्राम अवतार और माता तुलसी के विवाह को विशेष धार्मिक मान्यता प्राप्त है। तुलसी विवाह के माध्यम से विवाह और मांगलिक कार्यों के लिए शुभ समय की शुरुआत होती है। भक्त अपने घरों और मंदिरों में भगवान श्रीहरि विष्णु और माता तुलसी का विवाह पूरे विधि-विधान से संपन्न करते हैं। यह दिन भक्तों के जीवन में सुख-समृद्धि और शांति लाने का प्रतीक माना जाता है। तुलसी विवाह की तिथि – द्वादशी तिथि की शुरुआत: 12 नवंबर, मंगलवार, सायं 4:02 बजे – द्वादशी तिथि की समाप्ति: 13 नवंबर, बुधवार, दोपहर 1:01 बजे उदया तिथि के अनुसार, तुलसी विवाह 13 नवंबर को मनाया जाएगा। तुलसी विवाह की पूजा विधि तुलसी विवाह के लिए एक साफ चौकी पर नया कपड़ा बिछाकर उस पर तुलसी और शालिग्राम की मूर्ति स्थापित करें। इसके बाद, चौकी के चारों ओर गन्ने से मंडप सजाएं और कलश की स्थापना करें। पहले कलश और गौरी-गणेश की विधिवत पूजा करें। फिर तुलसी माता और भगवान शालिग्राम को धूप, दीप, वस्त्र, माला, और फूल अर्पित करें। माता तुलसी को सोलह श्रृंगार और लाल चुनरी अर्पित करें। पूजा के दौरान तुलसी मंगलाष्टक का पाठ श्रद्धापूर्वक करें और फिर तुलसी माता और शालिग्राम के फेरे करवाएं। फेरे पूर्ण होने के बाद भगवान विष्णु और तुलसी माता की आरती करें और प्रसाद का वितरण करें। तुलसी विवाह का फल तुलसी विवाह के दिन विधि-विधान से पूजा करने पर घर में सुख-समृद्धि, शांति और सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है। इस दिन का पालन करने से भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का आशीर्वाद प्राप्त होता है, जिससे जीवन में सभी प्रकार के कष्टों का निवारण होता है। तुलसी विवाह पर किए जाने वाले महत्वपूर्ण उपाय 1. वैवाहिक जीवन में शांति के लिए: भगवान शालिग्राम और तुलसी माता की विधिवत पूजा करने से दांपत्य जीवन में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है। 2. अखंड सौभाग्य के लिए: इस दिन तुलसी माता को सोलह श्रृंगार अर्पित करने से जीवन में अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद प्राप्त होता है। 3. दरिद्रता दूर करने के लिए: शाम के समय पीपल वृक्ष के नीचे दीप जलाने से घर की दरिद्रता दूर होती है और सुख-समृद्धि का वास होता है। 4. महालक्ष्मी का आशीर्वाद पाने के लिए: तुलसी के पौधे की सात बार परिक्रमा करें और गोधूलि बेला में घी का दीपक जलाएं।

राशिफल रविवार 10 नवंबर 2024

मेष राशि– मेष राशि वालों का मन प्रसन्न रहेगा। आत्मविश्वास से लबरेज रहेंगे। फिर भी अपनी भावनाओं को वश में रखें। परिवार में मान-सम्मान की प्राप्ति होगी। शैक्षिक व बौद्धिक कार्यों के सुखद परिणाम मिलेंगे। वृषभ राशि- वृषभ राशि वाले आत्मविश्वास से भरपूर रहेंगे। परंतु मन में उतार-चढ़ाव रहेंगे। शैक्षिक कार्यों में सफलता मिलेगी। बौद्धिक कार्यों से आय के साधन बन सकते हैं। वाहन सुख में वृद्धि के योग बन रहे हैं। मिथुन राशि– मिथुन राशि वालों का मन परेशान रहेगा। आत्मविश्वास में कमी रहेगी। माता के स्वास्थ्य का ध्यान रखें। परिवार का साथ मिलेगा। भागदौड़ अधिक रहेगी। खर्चों में वृद्धि होगी। मान-सम्मान की प्राप्ति होगी। कर्क राशि- कर्क राशि वाले आत्मविश्वास से भरपूर रहेंगे। परंतु मन परेशान हो सकता है। परिवार के स्वास्थ्य का ध्यान रखें। नौकरी में कार्यक्षेत्र में कठिनाइयां आ सकती है। परिश्रम अधिक रहेगा। सिंह राशि- सिंह राशि वालों का मन परेशान रहेगा। आत्मविश्वास में कमी रहेगी। आत्मसंयत रहें। व्यर्थ के क्रोध से बचें। बातचीत में संतुलित रहें। नौकरी में परिवर्तन के योग बन रहे हैं। मित्रों का सहयोग मिलेगा। कन्या राशि– कन्या राशि वाले आज आत्मविश्वास से भरपूर रहेंगे। किसी मित्र के सहयोग से कारोबार के अवसर मिल सकते हैं। कुटुंब की किसी बुजुर्ग महिला से धन प्राप्ति हो सकती है। भागदौड़ अधिक रहेगी। तुला राशि– तुला राशि वाले आज आत्मसंयत रहें। व्यर्थ के क्रोध से बचें। पारिवारिक जीवन सुखमय रहेगा। संतान के स्वास्थ्य का ध्यान रखें। वाहन सुख में कमी आ सकती है। शासन सत्ता का सहयोग मिलेगा। वृश्चिक राशि- आज वृश्चिक राशि वालों का मन परेशान रहेगा। आत्मविश्वास में कमी रहेगी। स्वास्थ्य का ध्यान रखें। आय में कमी व खर्च अधिक की स्थिति हो सकती है। पिता के स्वास्थ्य का भी ध्यान रखें। परिश्रम अधिक रहेगा। धनु राशि- धनु राशि वालों का मन प्रसन्न रहेगा। आत्मविश्वास भी भरपूर रहेगा। पारिवारिक जीवन सुखमय रहेगा। शैक्षिक कार्यों में सफल रहेंगे। किसी मित्र के सहयोग से आय में वृद्धि के साधन बन सकते हैं। मकर राशि– मकर राशि वालों को आज जीवन में उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ सकता है। मन प्रसन्न रहेगा, परंतु संयत रहें। क्रोध व आवेश के अतिरेक से बचें। परिवार का साथ मिलेगा। शैक्षिक व शोधादि कार्यों में सफलता मिलेगी। कुम्भ राशि- कुंभ राशि वालों का मन प्रसन्न रहेगा। परंतु मन में नकारात्मक विचारों से बचें। परिवार का साथ मिलेगा। नौकरी में कार्यक्षेत्र में परिवर्तन हो सकते हैं। परिश्रम अधिक रहेगा। आय में वृद्धि होगी। मीन राशि- मीन राशि वालों की वाणी में मधुरता रहेगी। परंतु मन परेशान हो सकता है। मन में नकारात्मक विचारोें से बचें। नौकरी में अफसरों का सहयोग मिलेगा। परंतु कार्यक्षेत्र में बदलाव हो सकता है।

आंवला नवमी कल, जानें इसके फायदे

कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को 10 नवंबर, रविवार को पड़ रही है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन आंवले के पेड़ के नीचे पूजा करने से भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है। इसी वजह से इसे अमला नवमी या आंवला नवमी भी कहा जाता है, और इसे करने से समृद्धि, स्वास्थ्य, और सुख-शांति प्राप्त होती है। वैसे आपको पता है सर्दियों में आंवले का जूस पीना सेहत के लिए बेहद फायदेमंद होता है। आंवला विटामिन सी, एंटीऑक्सीडेंट्स, और पोषक तत्वों से भरपूर होता है, जो सर्दियों में शरीर को स्वस्थ रखने में सहायक होते हैं। यहां सर्दियों में आंवले का जूस पीने के कुछ महत्वपूर्ण फायदे दिए गए हैं- इम्यूनिटी को मजबूत बनाता है आंवला विटामिन सी का अच्छा स्रोत है, जो इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाता है। सर्दियों में बढ़ती ठंड के कारण सर्दी-जुकाम और फ्लू का खतरा बढ़ जाता है, जिसे आंवला जूस पीकर कम किया जा सकता है। स्किन को हेल्दी और ग्लोइंग बनाए रखता है सर्दियों में त्वचा रूखी हो जाती है, और आंवले में एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं जो त्वचा को नमी देने और उसे अंदर से चमकदार बनाए रखने में मदद करते हैं। पाचन को बेहतर बनाता है आंवले का जूस पीने से पाचन तंत्र दुरुस्त रहता है। इसमें मौजूद फाइबर पाचन को बढ़ावा देता है और कब्ज जैसी समस्याओं से राहत दिलाने में मदद करता है। वजन घटाने में सहायक आंवला मेटाबोलिज्म को तेज करता है और शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालता है, जिससे वजन घटाने में मदद मिलती है। ठंड में आंवले का जूस पीने से वजन नियंत्रित रहता है। बालों के लिए फायदेमंद आंवले का जूस बालों की जड़ों को पोषण देता है और बालों को मजबूत बनाने के साथ-साथ बालों का झड़ना भी कम करता है। सर्दियों में बालों की देखभाल के लिए आंवले का जूस फायदेमंद होता है। डायबिटीज में सहायक आंवले में क्रोमियम नामक तत्व होता है जो ब्लड शुगर के स्तर को नियंत्रित करने में सहायक होता है, जिससे डायबिटीज के मरीजों को फायदा मिलता है। हृदय स्वास्थ्य को बढ़ावा देता है आंवले में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स और फाइबर हृदय के लिए लाभकारी होते हैं। यह कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करता है और ब्लड प्रेशर को सामान्य बनाए रखता है। यूरिनरी सिस्टम को हेल्दी रखता है आंवले का जूस शरीर को डिटॉक्स करता है और यूरिनरी ट्रैक्ट को साफ रखने में सहायक होता है। सर्दियों में डिटॉक्सिफिकेशन की जरूरत होती है, जिसमें आंवला जूस लाभकारी होता है। सर्दियों में आंवले का जूस पीना न सिर्फ आपको अंदर से स्वस्थ रखता है बल्कि त्वचा और बालों के लिए भी फायदेमंद साबित होता है।

अक्षय नवमी : भगवान विष्णु की पूजा के साथ आंवले के पेड़ की जाती है पूजा

अक्षय नवमी का पर्व हिंदू धर्म में अत्यधिक महत्वपूर्ण है। यह त्यौहार कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को मनाया जाता है और इस साल 10 नवंबर 2024 को मनाया जाएगा। इस दिन को भगवान विष्णु की पूजा के लिए समर्पित माना गया है, और मान्यता है कि वे आंवले के पेड़ में निवास करते हैं। इसी कारण इस दिन आंवले के पेड़ के नीचे पूजा करना और उसकी छाया में भोजन बनाना शुभ माना जाता है। कई भक्त इस दिन ऐसा करके भगवान का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। अक्षय नवमी 2024 तिथि वैदिक पंचांग के अनुसार, अक्षय नवमी की तिथि 9 नवंबर 2024 की रात 10:44 बजे से शुरू होकर 10 नवंबर की रात 9:01 बजे तक रहेगी। इस दौरान भगवान विष्णु और आंवले के पेड़ की पूजा करना अत्यधिक शुभ माना जाता है। अक्षय नवमी पर पूजा का शुभ मुहूर्त इस वर्ष अक्षय नवमी की पूजा के लिए 5 घंटे 25 मिनट का शुभ मुहूर्त है, जो सुबह 6:40 बजे से दोपहर 12:05 बजे तक रहेगा। अभिजीत मुहूर्त, जो विशेष रूप से शुभ माना जाता है, सुबह 11:43 बजे से दोपहर 12:27 बजे तक होगा। इन पावन समयों में भगवान विष्णु और आंवले के वृक्ष की पूजा करना अत्यंत फलदायी माना गया है, जिससे सुख, समृद्धि और मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। अक्षय नवमी पर दान और पुण्य अक्षय नवमी का त्यौहार शाश्वत पुण्य का प्रतीक है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन किए गए पुण्य कर्म, जैसे दान, पूजा और सेवा, जन्म-जन्मांतर तक लाभकारी रहते हैं। आंवले के पेड़ का दान और भोजन कराने का महत्व इस दिन विशेष होता है। कहा जाता है कि इससे देवी अन्नपूर्णा का आशीर्वाद प्राप्त होता है, जो आर्थिक समृद्धि और परिवार में खुशहाली को बढ़ावा देता है। इस दिन जरूरतमंदों को भोजन कराना और अन्य धर्म-कर्म करना शुभ माना जाता है। यह त्यौहार हिंदू धर्म में भक्ति और उदारता के गुणों को सशक्त बनाता है। इस दिन पूजा और आंवले के पेड़ की सेवा करने से सुख, समृद्धि और मनोकामनाओं की पूर्ति होती है, जो पुण्य के रूप में स्थायी लाभ प्रदान करती है।

श्रीहरि विष्णु देवउठनी एकादशी से इन चार राशियों का करेंगे कल्याण

इस वर्ष देवउठनी एकादशी का पावन पर्व 12 नवंबर, मंगलवार को मनाया जाएगा। मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु चार महीने की योग निद्रा से जागृत होते हैं और चातुर्मास का समापन होता है। इस बार यह पर्व हर्षण योग और सर्वार्थ सिद्धि योग जैसे शुभ संयोगों में मनाया जाएगा, जो कुछ राशियों के लिए विशेष फलदायक रहेगा। मेष राशि: देवउठनी एकादशी का यह पर्व मेष राशि के जातकों के लिए विशेष शुभ रहेगा। इस समय इन्हें धन लाभ के अवसर मिल सकते हैं। जिस भी क्षेत्र में आप मेहनत कर रहे हैं, वहां से जल्द ही अच्छे परिणाम मिलने की संभावना है। माता-पिता का सहयोग मिलेगा और पारिवारिक वातावरण भी खुशियों से भरा रहेगा। कर्क राशि: कर्क राशि के जातकों के लिए भी देवउठनी एकादशी का पर्व बेहद फायदेमंद साबित होगा। इस दौरान आपको आर्थिक, मानसिक और शारीरिक सुख की प्राप्ति होगी। नौकरी, करियर, और व्यवसाय में लाभ के संकेत हैं। नए व्यवसाय में कदम रखने या प्रॉपर्टी और वाहन खरीदने के लिए यह समय शुभ रहेगा। तुला राशि: देवउठनी एकादशी का पर्व तुला राशि के जातकों के लिए खुशियों की सौगात लेकर आएगा। इस दौरान लंबे समय से नौकरी की तलाश कर रहे लोगों को नए अवसर मिल सकते हैं। अचानक धन लाभ के योग बन रहे हैं, जिससे व्यवसाय में तेजी से मुनाफा होगा। कार्यक्षेत्र में नई उपलब्धियां हासिल होंगी और दांपत्य जीवन में खुशियों का माहौल रहेगा। पुराने निवेश इस समय लाभकारी साबित होंगे और अच्छा आर्थिक लाभ देंगे। स्वास्थ्य भी बेहतर रहेगा। वृश्चिक राशि: देवउठनी एकादशी का यह शुभ दिन वृश्चिक राशि के जातकों के लिए लाभकारी रहेगा। इस समय आपके हर कार्य में सफलता मिलने की संभावना है और मान-सम्मान में वृद्धि होगी। पारिवारिक जीवन खुशहाल रहेगा, और भाग्य भी आपका साथ देगा। यदि आप किसी पुरानी बीमारी से जूझ रहे हैं, तो इस समय उसमें भी राहत मिलने के संकेत हैं।

राशिफल शनिवार 9 नवंबर 2024

मेष राशि- मन प्रसन्न रहेगा। संतान सुख में वृद्धि होगी। घर-परिवार में धार्मिक कार्य हो सकते हैं। वस्त्र उपहार में मिल सकते हैं। भागदौड़ अधिक रहेगी। नौकरी में अफसरों का सहयोग मिलेगा। वृषभ राशि- मन परेशान रहेगा। आत्मसंयत रहें। व्यर्थ के क्रोध से बचें तथा बातचीत में संतुलित रहें। शैक्षिक कार्यों में सफल रहेंगे। संतान की ओर से सुखद समाचार मिल सकता है। मिथुन राशि- मन प्रसन्न रहेगा। कला या संगीत के प्रति रुझान बढ़ेगा। पारिवारिक जीवन सुखमय रहेगा। कारोबारी कार्यों में परिश्रम अधिक रहेगा। लाभ में वृद्धि होगी। कर्क राशि- मन अशांत रहेगा। आत्मसंयत रहें। व्यर्थ के क्रोध से बचें। सेहत का ध्यान रखें। नौकरी में अफसरों का सहयोग मिलेगा। तरक्की के मार्ग प्रशस्त होंगे। आय में वृद्धि होगी। भागदौड़ अधिक रहेगी। सिंह राशि- आत्मविश्वास भरपूर रहेगा। वाणी में मधुरता रहेगी। फिर भी आत्मसंयत रहें। परिवार में शांति बनाए रखें। शैक्षिक कार्यों के लिए किसी दूसरे स्थान पर जाना पड़ सकता है। कन्या राशि- आत्मसंयत रहें। अपनी भावनाओं को वश में रखें। घर-परिवार में धार्मिक कार्य हो सकते हैं। लेखनादि बौद्धिक कार्यों में व्यस्तता बढ़ सकती है। रहन-सहन अव्यवस्थित हो सकता है। तुला राशि- मन परेशान रहेगा। आत्मसंयत रहें। धैर्यशीलता बनाए रखने के प्रयास करें। माता की सेहत का ध्यान रखें। खर्चों में वृद्धि होगी। रहन-सहन कष्टमय हो सकता है। परिवार का साथ मिलेगा। वृश्चिक राशि- मन परेशान रहेगा। आत्मविश्वास में कमी रहेगी। बातचीत में संयत रहें। सेहत का ध्यान रखें। घर-परिवार में धार्मिक कार्य हो सकते हैं। शैक्षिक कार्यों में सफलता मिलेगी। धनु राशि- मन में शांति व प्रसन्नता रहेगी। आत्मविश्वास भी भरपूर रहेगा। कला या संगीत में रुचि बढ़ेगी। पारिवारिक जीवन सुखमय रहेगा। पिता का सान्निध्य मिलेगा। खर्च बढ़ेंगे। मकर राशि- आत्मविश्वास तो बहुत रहेगा, परंतु मन परेशान भी हो सकता है। आत्मसंयत रहें। क्रोध के अतिरेक से बचें। नौकरी में बदलाव की संभावना बन रही है। तरक्की के अवसर मिल सकते हैं। कुंभ राशि- आत्मविश्वास भरपूर रहेगा, परंतु मन में उतार-चढ़ाव रहेंगे। कारोबार में वृद्धि होगी। नौकरी में बदलाव के योग बन रहे हैं। भागदौड़ अधिक रहेगी। आय में वृद्धि होगी। मीन राशि- आत्मविश्वास से लबरेज रहेंगे, परंतु मन में नकारात्मक विचारों से बचें। धैर्यशीलता बनाए रखें। किसी मित्र के सहयोग से नौकरी के अवसर मिल सकते हैं। नौकरी में तरक्की मिल सकती है।

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