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बिना प्रीमियम, 1.5 लाख का कैशलेस इलाज, जानिए क्या है नई स्कीम

नई दिल्ली हर साल सड़क हादसों में घायल ना जाने कितने लोग महज इसलिए अपनी जान गंवा देते हैं, क्योंकि उन्हें समय पर सही इलाज नहीं मिल पाता। ऐसे हादसों में अक्सर अस्पतालों का महंगा खर्च भी लोगों से उनके अपनों को छीन लेता है। साल 2022 के आंकड़ों को ही अगर देखें तो सड़क हादसों में लगभग 1.68 लाख लोगों की जान गई थी। केंद्र सरकार अब इस तरह के मामलों के लिए एक ऐसी स्कीम लेकर आई है, जिसमें सड़क हादसे के पीड़ित को 1.5 लाख रुपए का कैशलेस इलाज दिया जाएगा। ये स्कीम अभी पायलट प्रोग्राम के तौर पर केवल चंडीगढ़ में लागू की गई है और इसके परिणाम को देखते हुए बाद में इसे देशभर में लागू किया जाएगा। क्या है ये पूरी स्कीम ? केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय ने गुरुवार को कैशलेस इलाज के इस पायलट प्रोग्राम को लॉन्च किया। इसके तहत किसी भी तरह के सड़क हादसे में घायल को तुरंत इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया जाएगा और उसे 1.5 लाख रुपए का कैशलेस इलाज मिलेगा। पीड़ित को इसके तहत 7 दिनों तक कैशलेस इलाज दिया जाएगा। मंत्रालय के मुताबिक, इस प्रोग्राम का मकसद एक ऐसा सिस्टम तैयार करना है, जिसमें समय रहते पीड़ित को इलाज मिले। खासकर शुरुआती एक घंटे के भीतर, जो उसकी जिंदगी बचाने के लिए सबसे ज्यादा अहम समय है। सड़क पर होने वाली मौतों को रोकना है मकसद सूत्रों के मुताबिक, सड़क परिवहन मंत्रालय ने इस बात को माना है कि सड़क हादसों के करीब 97 फीसदी मामलों में औसत मेडिकल खर्च लगभग 60 हजार रुपए तक आता है। बहुत कम मामले ऐसे होते हैं, जहां घायल को लंबे इलाज या आईसीयू केयर की जरूरत पड़ती है। साथ ही सड़क हादसों को लेकर हुई कई रिसर्च में ये भी पता चला है कि एक्सीडेंट के शुरुआती एक घंटे के भीतर अगर पीड़ित को तुरंत इलाज मिल जाए, तो सड़क पर होने वाली करीब आधी मौतों को रोका जा सकता है। इस पायलट प्रोग्राम को पुलिस, अस्पतालों और स्टेट हेल्थ एजेंसी के साथ मिलकर नेशनल हेल्थ अथॉरिटी लागू करेगी। किस तरह के हादसों में मिलेगा कैशलेस इलाज इस पायलट प्रोग्राम के तहत सभी तरह की सड़कों पर गाड़ियों की वजह से होने वाले रोड एक्सीडेंट को कवर किया जाएगा। अगर केस ट्रॉमा या पॉली ट्रॉमा का है, तो आयुष्मान भारत पैकेज भी इस योजना में शामिल होगा। वहीं, योजना से सरकार के खजाने पर किसी तरह का बोझ नहीं पड़ेगा, क्योंकि घायल के इलाज का पूरा खर्च इंश्योरेंस कंपनियों से आएगा। दरअसल इंश्योरेंस कंपनियां वाहन मालिक से जो प्रीमियम लेती हैं, ये खर्च उसी प्रीमियम का छोटा सा हिस्सा होगा। सड़क हादसे में घायल पीड़ित को तुरंत इलाज देने से मौतों की संख्या में कमी आएगी और मुआवजे का खर्च घटने से आखिरकार इसका फायदा इंश्योरेंस कंपनी को ही मिलेगा। पीड़ित का इलाज करने के बाद अस्पताल को इलाज की रकम मोटर व्हीकल एक्सीडेंट फंड के जरिए वापस दी जाएगी।

दिवाली के ठीक बाद देशवासियों को महंगाई का झटका, कमर्शियल गैस सिलेंडर के दाम बढ़े

नई दिल्ली दिवाली के ठीक बाद देशवासियों को महंगाई का झटका लगा है। तेल कंपनियों ने आज (शुक्रवार, 1 नवंबर) को कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में वृद्धि की घोषणा की है। नई कीमतों के अनुसार, 19 किलोग्राम वाले व्यावसायिक सिलेंडर में 62 रुपये की बढ़ोतरी हुई है, जिससे अब दिल्ली में इसका मूल्य 1802 रुपये हो गया है। वहीं, घरेलू गैस सिलेंडर की कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ है, जो आम जनता के लिए राहत की बात है। कमर्शियल सिलेंडर के दाम बढ़ने से शादी-ब्याह पर असर त्योहारी और शादी के मौसम में कमर्शियल गैस सिलेंडर के दाम बढ़ने से होटल, रेस्टोरेंट और विवाह समारोहों पर खर्च का असर पड़ना तय है। व्यावसायिक सिलेंडर का उपयोग बड़े पैमाने पर खाना बनाने के लिए होता है, इसलिए इन बढ़ी हुई कीमतों का सीधा असर खाने-पीने की कीमतों पर भी पड़ेगा। इसके साथ ही, 5 किलोग्राम वाले छोटे सिलेंडर में भी 15 रुपये की वृद्धि की गई है, जिससे छोटे व्यवसायों पर भी इसका असर देखने को मिलेगा।

रिलायंस के ब्रांड कैंपा कोला की धमक कोका-कोला को कीमत घटाने पर मजबूर होना पड़ा

नई दिल्ली भारत और एशिया के सबसे बड़े रईस मुकेश अंबानी ने कोला मार्केट में उतरते ही तहलका मचा दिया है। रिलायंस के कैंपा ब्रांड ने अपने प्रॉडक्ट्स की कीमत कोका-कोला और पेप्सी की तुलना में काफी कम रखी है। इससे इन कंपनियों को कड़ी चुनौती की सामना करना पड़ा है। कई मार्केट्स में उनका हिस्सेदारी प्रभावित होने लगी है। कोका-कोला अब अपनी 400 मिली की बोतल की कीमत 25 रुपये से घटाकर 20 रुपये करने की योजना बना रही है। डिस्ट्रीब्यूटर्स से जुड़े सूत्रों ने यह जानकारी दी है। संशोधित कीमतें अगले एक हफ्ते में तमिलनाडु, कर्नाटक और केरल के बाजारों में लागू होने की संभावना है। इस बारे में कोका-कोला ने सवालों का जवाब नहीं दिया। सूत्रों ने कहा कि कोका-कोला 400 मिली की बोतल अभी 25 रुपये में बेच रही है। तत्काल उन्हीं बोतलों की पैकेजिंग बदलकर 20 रुपये नहीं की जा सकती है। कंपनी आने वाले दिनों में एक नई पैकेजिंग लॉन्च करेगी। इसमें बोतल पर 250 मिली और 150 मिली फ्री लिखा होगा। इसकी कीमत 20 रुपये होगी। रिलायंस इंडस्ट्रीज के ब्रांड कैंपा कोला ने अपने पैक्स की कीमत कोका-कोला की तुलना में 5-20 रुपये कम है। इससे कोका-कोला जैसी वैश्विक कंपनियों को अपनी कीमतों में बदलाव करने के लिए मजबूर होना पड़ा है। कैसे निपटेगा पुराना स्टॉक? कैंपा कोला अपनी 500 मिली की बोतले 20 रुपये में बेचती है जबकि कोका-कोला की 400 मिली बोतल की कीमत 25 रुपये है। इसी तरह कैंपा की 600 मिली की बोतल की कीमत 30 रुपये है, जबकि कोका-कोला उसे 40 रुपये में बेचती है। कैंपा की 2 लीटर की बोतल और कोका-कोला के 2.25 लीटर की बोतल की कीमत में 20 रुपये का अंतर है। कोका-कोला जनरल ट्रेड चैनल से 250 मिली, 400 मिली, 600 मिली, 1 लीटर और 2.25 लीटर पैक आकार की कोल्ड ड्रिंक बोतलें बेचती है। कंपनी मॉडर्न ट्रेड चैनल के जरिए ज्यादातर 750 मिली और 1.25 लीटर की बोतलें बेचती है जबकि जनरल ट्रेड चैनल से 600 मिली और 1 लीटर की बोतलें अधिक बिकती हैं। हालांकि कोका-कोला के डिस्ट्रीब्यूटर्स को इस बात की चिंता है क्योंकि उनके पास 250 मिली की बोतलों का काफी स्टॉक है। इनकी कीमत 20 रुपये है। कम कीमत वाली 400 मिली की बोतलों के बाजार में आने से पहले उन्हें इस स्टॉक को खत्म करना होगा। अभी यह साफ नहीं है कि 250 मिली की बोतलों के लिए कोका-कोला की कीमत और मार्केटिंग स्ट्रैटजी क्या होगी? डिस्ट्रीब्यूटर्स ने कहा कि 250 मिली के स्टॉक को खत्म करना होगा।

रतन टाटा की संपत्ति का बंटवारा उनकी बहनों शिरीन और डिएना के अलावा हाउस स्टाफ और अन्य लोगों के बीच होगा

नई दिल्ली इंडस्ट्रियलिस्ट रतन टाटा की वसीयत की जानकारी सामने आई है। इसमें उन्होंने जर्मन शेफर्ड कुत्ते टीटो के लिए अनलिमिटेड केयर का प्रावधान किया गया है। रतन टाटा अपने पीछे 10 हजार करोड़ से ज्यादा की संपत्ति छोड़ गए हैं। इस संपत्ति का बंटवारा उनकी बहनों शिरीन और डिएना के अलावा हाउस स्टाफ और अन्य लोगों के बीच होगा। हालांकि रतन टाटा के धन का जितना हिस्सा उनके कुत्ते को मिलने वाला है, उसके बाद वह कम से कम भारत में सबसे अमीर कुत्ता बन जाएगा। रतन टाटा की वसीयत में उनके खास दोस्त शांतनू का भी जिक्र है। टीटो को पांच-छह साल पहले एडॉप्ट किया गया था। रतन टाटा की वसीयत के मुताबिक टीटो की देखभाल की जिम्मेदारी उनके लंबे समय तक कुक रहे राज शॉ करेंगे। टाइम्स ऑफ इंडिया वसीयत में तीन दशक तक रतन टाटा के नौकर रहे सुबैया के लिए भी प्रावधान किए गए हैं। गौरतलब है कि टाटा जब भी बाहर जाते थे वह रंजन और सुबैया के लिए डिजाइनर कपड़े खरीदकर लाते थे। रतन टाटा के खास दोस्त और एग्जीक्यूटिव असिस्टेंट शांतनू नायडू का भी जिक्र किया गया है। टाटा ने नायडू के उद्योग गुडफेलो में अपनी हिस्सेदारी छोड़ दी और उनके लोकन एजुकेशन को माफ कर दिया। प्रसिद्ध उद्योगपति की संपत्ति में अलीबाग में 2,000 वर्ग फुट का सी-फेस बंगला, मुंबई में जुहू तारा रोड पर दो मंजिला घर, 350 करोड़ रुपए से अधिक की फिक्स डिपॉजिट और टाटा संस में 0.83 प्रतिशत हिस्सेदारी और टाटा ग्रुप में 165 बिलियन डॉलर की संपत्ति शामिल है। परंपरा के अनुसार, टाटा संस में उनकी हिस्सेदारी रतन टाटा एंडोमेंट फाउंडेशन (आरटीईएफ) को स्थानांतरित कर दी जाएगी, जो एक धर्मार्थ ट्रस्ट है। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, उनकी वसीयत को बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा प्रोब किए जाने की उम्मीद है, एक प्रक्रिया जिसमें कई महीने लगेंगे। एक परोपकारी, पशु प्रेमी और उत्सुक व्यापारिक दिमाग के रूप में जाने जाने वाले, रतन टाटा का 9 अक्टूबर, 2024 को 86 वर्ष की आयु में निधन हो गया।

भारतीय शेयर बाजार में लगातार गिरावट, निवेशकों के 10 लाख करोड़ रुपये बाजार में स्‍वाहा

नई दिल्‍ली आज सुबह से ही शेयर बाजार में गिरावट देखी गई. शुरुआती कारोबार में शेयर बाजार कम नुकसान पर रहा है, लेकिन धीरे-धीरे यह गिरावट तेज हो गई और देखते ही देखते निवेशकों के 10 लाख करोड़ रुपये बाजार में साफ हो गए. सबसे ज्‍यादा बैंक निफ्टी, स्मॉल कैप, मिड कैप इंडेक्‍स में गिरावट देखी गई. Nifty Bank 1100 अंक से ज्‍यादा टूट चुका था, जबकि Sensex में 900 अंकों की गिरावट आई. इसके अलावा, निफ्टी में 300 अंकों के आसपास गिरावट रही, जो 24100 के नीचे कारोबार कर रहा था. निवेशकों के 10 लाख करोड़ स्‍वाहा! पिछले कुछ दिनों से तिमाही नतीजे और विदेशी निवेशकों द्वारा लगातार निकासी के कारण भारतीय शेयर बाजार दबाव में कारोबार कर रहा है. सेंसेक्‍स और निफ्टी में हर दिन गिरावट देखी जा रही है. आज तो मिडकैप और स्‍मॉलकैप वाले पोर्टफोलियो ऐसे टूटे जैसे शेयर बाजार में सुनामी सी आ गई. BSE लिस्‍टेड कंपनियों का मार्केट कैप 9.8 लाख करोड़ रुपये घटकर 435.1 लाख करोड़ रुपये पर आ गया. यानी कि एक दिन के दौरान ही निवेशकों की वैल्‍यूवेशन में करीब 10 लाख करोड़ रुपये की कमी आई. करीब 19% टूटा ये शेयर सुबह सेंसेक्‍स मामूली तेजी के साथ 80,187.34 अंक पर खुला था, ज‍बकि इसके दिन का हाई लेवल 80,253.19 था. हालांकि बाजार बंद होने तक सेंसेक्‍स -663 अंक टूटकर 79,402.29 पर बंद हुआ. वहीं निफ्टी 218.60 अंक गिरकर 24,180.80 पर क्‍लोज हुआ, जो आज सुबह 24,418.05 पर खुला था. बीएसई के टॉप 30 शेयरों में से 20 शेयर गिरावट पर रहे, जबकि 10 शेयरों में तेजी रही. Indusind Bank के शेयर 18.79 फीसदी तक गिरकर 1038 रुपये पर थे.

औंधे मुंह गिरा शेयर बाजार, चौथे दिन गिरावट, निवेशकों को हुआ नुकसान

मुंबई  हफ्ते के आखिरी कारोबारी सत्र में एक बार फिर भारतीय शेयर बाजार में तेज गिरावट देखने को मिली रही है. सुबह तेजी के साथ खुलने के बाद बाजार में अचानक मुनाफावसूली लौटने के चलते तेज गिरावट आ गई. सेंसेक्स दिन के हाई से 600 प्वाइँट और निफ्टी 200 अंकों से ज्यादा नीचे जा लुढ़का. आज के सत्र में एक बार फिर बिकवाली का बड़ा खामियाजा मिडकैप और स्मॉलकैप स्टॉक्स पर देखने को मिला है. निफअटी का मिडकैप इंडेक्स दिन के हाई से 1300 और स्मॉल कैप 400 अंक नीचे जा फिसला है. बाजार खुलने के एक घंटे के भीतर ही निवेशकों को 5 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान झेलना पड़ा है. निवेशकों को भारी नुकसान शेयर बाजार में आई तेज गिरावट के चलते निवेशकों को भारी नुकसान हुआ है. बीएसई पर लिस्टेड स्टॉक्स का मार्केट कैप घटकर 438 लाख करोड़ रुपये पर गिरकर आ गया है जो पिछले सत्र में 444 लाख करोड़ रुपये रहा था. यानि आज के सत्र में निवेशकों को 6 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है.

देश की मजबूत डिजिटल अर्थव्यवस्था की रक्षा के लिए तत्काल कदम उठाने की जरूरत

नई दिल्ली  तेजी से बढ़ते भारतीय ऑनलाइन गेमिंग क्षेत्र को धन शोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) के गंभीर खतरे का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में इसकी निरंतर सफलता सुनिश्चित करने और देश की मजबूत डिजिटल अर्थव्यवस्था की रक्षा के लिए तत्काल कदम उठाने की जरूरत है। डिजिटल इंडिया फाउंडेशन की एक रिपोर्ट में अवैध परिचालकों से निपटने के लिए एक कार्यबल बनाने, वैध संचालकों की श्वेत सूची बनाने, भ्रामक विज्ञापनों से निपटने तथा वित्तीय अखंडता व अंतरराष्ट्रीय सहयोग के सिद्धांतों को शामिल करने की वकालत की गई है। इसमें कहा गया है कि अन्य महत्वपूर्ण उपायों में जन जागरूकता तथा शिक्षा प्रदान करना शामिल है, ताकि उपयोगकर्ता सतर्क निर्णय ले सकें व भ्रामक व्यवहार में संलग्न मंच से बच सकें। रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय रियल मनी गेमिंग (आरएमजी) क्षेत्र वित्त वर्ष 2019-20 से वित्त वर्ष 2022-23 तक 28 प्रतिशत की सालाना वृद्धि के साथ वैश्विक बाजार में अग्रणी बन गया है। अगले पांच वर्षों में इस क्षेत्र का राजस्व 7.5 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। डिजिटल इंडिया फाउंडेशन के सह-संस्थापक अरविंद गुप्ता ने कहा, ‘‘अवैध परिचालकों पर अंकुश लगाने के नियामकीय प्रयासों के बावजूद कई मंच ‘मिरर साइट्स’, अवैध ब्रांडिंग और असंगत वादों के जरिये प्रतिबंधों को दरकिनार कर देते हैं। यह स्थिति कड़ी निगरानी तथा प्रवर्तन की तत्काल आवश्यकता को रेखांकित करती है।’’ रिपोर्ट में कहा गया कि इसके अलावा प्रवर्तन तंत्र की कमी के कारण कुख्यात अपराधियों के खिलाफ छिटपुट कार्रवाई हो रही है। एंटी-मनी लॉन्ड्रिंग (एएमएल) कानूनों और बैंक सीक्रेसी एक्ट (बीएसए) की आवश्यकताओं में बदलाव के साथ, जो अपराधी पारंपरिक लॉन्ड्रिंग विधियों का उपयोग करके वित्तीय प्रणाली के माध्यम से अपने धन को लूटना चाहते हैं, उन्हें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। इससे अपराधी धन को लूटने के अन्य तरीकों की तलाश करते हैं। सैंक्शन स्कैनर के अनुसार, “वीडियो गेम उद्योग इन तरीकों में से एक है। वीडियो गेम उद्योग इन-गेम ट्रेडों के कारण मनी लॉन्ड्रिंग के जोखिम उठाता है।” 2 वीडियो गेम एक आभासी मुद्रा का उपयोग करते हैं जिसे इन-गेम मुद्रा के रूप में जाना जाता है, जिसे चुनौतियों को जीतकर और वीडियो गेम के भीतर बाधाओं को पार करके अर्जित किया जाता है। खेल में मुद्राएँ वीडियो गेम में एक आभासी मुद्रा का उपयोग किया जाता है, जिसे इन-गेम करेंसी के रूप में जाना जाता है, जो वीडियो गेम के भीतर चुनौतियों को जीतकर और बाधाओं को पार करके अर्जित की जाती है। इन-गेम मुद्राएं आभासी दुनिया में मुद्रा का एक रूप हैं और इन्हें कई तरीकों से प्राप्त किया जाता है। मैसिवली मल्टीप्लेयर ऑनलाइन रोल-प्लेइंग गेम (MMORPG) में सभी इन-गेम मुद्राएं और यहां तक ​​कि उनकी अपनी इन-गेम अर्थव्यवस्थाएं भी होती हैं। प्रसिद्ध MMORPG में वर्ल्ड ऑफ वॉरक्राफ्ट, रनस्केप और फाइनल फैंटेसी XIV शामिल हैं। खेल में दो प्रकार की मुद्राएं होती हैं: परिवर्तनीय खेल मुद्रा और गैर-परिवर्तनीय खेल मुद्रा। परिवर्तनीय इन-गेम मुद्रा कोई खिलाड़ी वास्तविक फिएट मुद्रा – या सरकारी आदेश या फिएट द्वारा वैध मुद्रा – को परिवर्तनीय इन-गेम मुद्रा के लिए बदल सकता है। परिवर्तनीय गेम मुद्रा में उतार-चढ़ाव वाली विनिमय दर और एक विशेष विनिमय प्लेटफ़ॉर्म होता है। इस मुद्रा का उपयोग अन्य खिलाड़ियों के साथ आभासी संपत्तियों को बेचने, खरीदने या विनिमय करने के लिए किया जाता है। गैर-परिवर्तनीय इन-गेम मुद्रा गैर-परिवर्तनीय इन-गेम मुद्रा के साथ, खिलाड़ी गेम की मुद्रा के लिए वास्तविक फिएट मनी का आदान-प्रदान कर सकते हैं। इस मुद्रा का अन्य खिलाड़ियों के साथ आदान-प्रदान नहीं किया जा सकता है। इसका उपयोग वीडियो गेम में एक्सेसरीज़ खरीदने के लिए किया जा सकता है, जैसे कि कौशल, हथियार और किसी विशेष चरित्र के कौशल सेट को बेहतर बनाने या इसे अनुकूलित करने के लिए अन्य आइटम। आज, दुनिया भर में कई लोकप्रिय गेम इस प्रकार की मुद्रा का उपयोग करते हैं और गैर-परिवर्तनीय इन-गेम मुद्राओं को बेचकर इसका मुद्रीकरण करते हैं। ऑनलाइन वीडियो गेम में मनी लॉन्ड्रिंग कैसे होती है? ऑनलाइन वीडियो गेम उद्योग में इन-गेम परिवर्तनीय और गैर-परिवर्तनीय मुद्राओं के उपयोग और खिलाड़ियों को प्रदान की गई गुमनामी ने एक ऐसा वातावरण बनाया है जो आपराधिक गतिविधियों के लिए अतिसंवेदनशील है। ये आपराधिक गतिविधियाँ और मनी लॉन्ड्रिंग योजनाएँ अक्सर अपराधियों द्वारा अन्य उपयोगकर्ताओं से और वीडियो गेम के बाहर बाहरी स्रोतों से क्रेडिट कार्ड की जानकारी चुराने से शुरू होती हैं। चुराए गए क्रेडिट कार्ड का उपयोग माइक्रोट्रांजेक्शन करके या लूट बॉक्स खरीदकर इन-गेम मुद्राओं और अन्य वस्तुओं को खरीदने के लिए किया जाता है।    

‘AI Summit’ में हुआंग ने भारत में अपने परिवेश तंत्र के विस्तार के लिए एनवीडिया की प्रतिबद्धता पर जोर दिया

भारत में 2024 में कंप्यूटिंग क्षमताओं में 20 गुना वृद्धि होगी : एनवीडिया के सीईओ भारत 2024 में कंप्यूटिंग क्षमता में 20 गुना वृद्धि और वह जल्द ही प्रभावशाली एआई समाधानों का निर्यात करेगा-  हुआंग  ‘AI Summit’ में हुआंग ने भारत में अपने परिवेश तंत्र के विस्तार के लिए एनवीडिया की प्रतिबद्धता पर जोर दिया मुंबई  एनवीडिया के संस्थापक एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) जेन्सेन हुआंग ने  कहा कि विश्व के कंप्यूटर उद्योग के लिए ‘‘प्रिय’’ भारत में 2024 में कंप्यूटिंग क्षमता में 20 गुना वृद्धि होगी और वह जल्द ही प्रभावशाली एआई समाधानों का निर्यात करेगा। ‘एनवीडिया एआई शिखर सम्मेलन’ 2024 में हुआंग ने भारत में अपने परिवेश तंत्र के विस्तार के लिए एनवीडिया की प्रतिबद्धता पर जोर दिया। उन्होंने कहा, ‘‘भारत विश्व के कंप्यूटर उद्योग के लिए बहुत प्रिय है, आईटी उद्योग के लिए केन्द्रीय स्थान है तथा विश्व की लगभग प्रत्येक कंपनी की आईटी के केन्द्र व मूल में है।’’ सीईओ हुआंग ने कहा, ‘‘भारत में एनवीडिया का परिवेश तंत्र बेहद समृद्ध है। भारत में 2024 तक कंप्यूटिंग क्षमताओं में 20 गुना वृद्धि देखी जाएगी।’’ हुआंग ने कहा कि परंपरागत रूप से सॉफ्टवेयर निर्यात का केंद्र रहा भारत, भविष्य में एआई निर्यात में अग्रणी बनने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा, ‘‘भारत ने सॉफ्टवेयर का निर्यात किया है; भविष्य में भारत एआई का निर्यात करेगा।’’ हुआंग ने इस बात जोर दिया कि देश अब सॉफ्टवेयर उत्पादन के लिए एक ‘बैक ऑफिस’ से एआई विकास तथा वितरण में एक ‘पावरहाउस’ बनने की दिशा में बढ़ रहा है। उन्होंने कहा, ‘‘भारत ने सॉफ्टवेयर उत्पादन के लिए एक ‘बैक ऑफिस’ बनने पर ध्यान केंद्रित किया, इसकी अगली पीढ़ी एआई का उत्पादन तथा वितरण करने वाली होगी। यह नाटकीय रूप से अधिक प्रभावशाली होगा।’’ सीईओ ने कहा, ‘‘दीर्घावधि में, मैं उम्मीद करता हूं कि हम सभी के पास अपने स्वयं के एआई ‘को-पायलट’ होंगे।’’ नौकरी विस्थापन को लेकर उत्पन्न चिंताओं पर हुआंग ने जोर देकर कहा कि हालांकि एआई नौकरियों को पूरी तरह से खत्म नहीं करेगा, लेकिन यह काम करने के तरीके में बुनियादी बदलाव लाएगा। उन्होंने कहा, ‘‘एआई किसी भी प्रकार से नौकरी नहीं छीनेगा, लेकिन जो व्यक्ति किसी काम को बेहतर ढंग से करने के लिए एआई का इस्तेमाल करेगा, वह नौकरी छीन लेगा।’’    

रॉयल एनफील्ड अपनी पहली इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिल को लॉन्च के लिए कर रही तैयार

नई दिल्ली रॉयल एनफील्ड अपनी पहली इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिल को लॉन्च करने की तैयार कर चुकी है। कंपनी इसे इसी साल EICMA में पेश करने वाली है। इसे लेकर कंपनी एक टीजर भी जारी कर चुकी है जिसमें 4 नवंबर की तारीख को सेव करने की बात कही थी। इस इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिल का टेस्ट म्यूल विदेशी सड़कों पर पहले ही देखा जा चुका है। ये फोटो रॉयल एनफील्ड की पहली प्रोडक्शन इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिल के प्रोटोटाइप को दिखाती हैं। इसकी फोटो को MCN ने शेयर किया है। इस इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिल टेस्ट म्यूल में एक गोल LED हेडलाइट और एक पतला और लो-स्लंग बिल्ड दिखा है। ये बाइक एडजस्टेबल लीवर से भी लैस है। इसमें टर्न इंडिकेटर इंस्ट्रूमेंट कंसोल के करीब लगे हैं। इसके हार्डवेयर में गर्डर फोर्क्स, रोड-बायस्ड टायर के साथ एलॉय व्हील्स और एक खुला हुआ रियर फेंडर शामिल है। फ़ुटपेग न्यूट्रल तरीके से सेट किए गए दिखते हैं। रियर व्यू मिरर मौजूदा क्लासिक 350 पर दिखने वाले मिरर के समान दिखते हैं। रॉयल एनफील्ड की इस इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिल के बैटरी पैक और मोटर की डिटेल का खुलासा नहीं हुआ है। कंपनी अपनी पहली इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिल के फ्रंट फोर्क्स, मेन फ्रेम, स्विंगआर्म समेत कई जगहों पर एल्युमीनियम का इस्तेमाल किया है। भारतीय बाजार में इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिल की कीमतें 1.50 लाख के आसपास है। कंपनी के लिए दूसरा बड़ा बेनिफिट ये भी है कि वो ओला की पहली इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिल से पहले इसे लॉन्च करने वाली है। रॉयल एनफील्ड की इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिल के एक्सपेक्टेड फीचर्स रॉयल एनफील्ड की इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिल का जो डिजाइन पहले भी लीक हो चुका है। इसके मुताबिक उसमें क्लासिकल स्टाइल वाले बॉबर का फॉर्म फैक्टर देखने के लिए मिलेंगे। इस इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिल में एक पिलियन को ले जाने की सुविधाहोगी। इसका चेसिस डिजाइन पूरी तरह से अनोखा होगा। इसमें रेक-आउट फ्रंट एंड, स्कूप्ड-आउट सोलो सैडल और खुला, झुका हुआ रियर फेंडर हो सकता है। फ्यूल टैंक एरिया पर लूपिंग फ्रेम प्रोडक्शन मोटरसाइकिलों से काफी अलग हो सकती है। यह देखने में काफी हद तक हार्ले-डेविडसन की क्रूजर मोटरसाइकिल जैसी नजर आ रही है। माना जा रहा है कि इस इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिल में एक फ्रेम के तौर पर बैटरी पैक का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसमें बैटरी कवर और मोटर दोनों को आसपास फिट किया जा सकता है। यह वैसा ही होगा जैसा कि हार्ले-डेविडसन की इलेक्ट्रिक बाइक्स बनाने वाली कंपनी लाइववायर ने अपने S2 मॉडल के साथ किया है। बाइक में बेल्ट ड्राइव बाइक के दाईं तरफ हो सकती है और इसमें दोनों तरफ डिस्क ब्रेक होंगे। बाइक की जो इमेज सामने आई है उससे ऐसा लगता है जैसे कि इसमें एक मोनोशॉक है जो स्विंगआर्म के ऊपरी एलिमेंट से जुड़ा है। इस इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिल का मुख्य आकर्षण फ्रंट सस्पेंशन सेटअप है, जहां गर्डर फोर्क्स देख सकते हैं। ये इलेक्ट्रिक 01 कॉन्सेप्ट में देखा गया था। गर्डर फोर्क्स में दो गर्डर आर्म्स होते हैं, जो दोनों तरफ से व्हील को पकड़ते हैं। एक टॉप डॉगबोन फ्रंट फोर्क असेंबली को बाइक के मेनफ्रेम से जोड़ता है। रॉयल एनफील्ड इलेक्ट्रिक बाइक डिजाइन पेटेंट प्रोडक्शन-स्पेक होने की संभावना नहीं है। इसके बजाय, यह रॉयल एनफील्ड के लिए अपकमिंग ऑटो शो में पेश करने के लिए एक अवधारणा हो सकती है। कॉन्सेप्ट व्हीकल के डिजाइन को पेटेंट कराना एक काफी आम बात है। प्रोडक्शन-स्पेक मॉडल में इस पेटेंट और USD फ्रंट फोर्क्स में देखे गए टायर से ज्यादा मोटे टायर हो सकते हैं।

पुष्य नक्षत्र पर आज सिर्फ 1 रुपए खरीदें सोना, रिटर्न होगा कई गुना !

मुंबई दिवाली से पहले पुष्य नक्षत्र में सोना खरीदना शुभ माना जाता है। आज 24 अक्टूबर को पुष्य नक्षत्र (Pushya Nakshatra 2024) है। इस दौरान सोने में निवेश सबसे अच्छा हो सकता है। वैसे तो फिजिकल गोल्ड में भी निवेश कर सकते हैं। मतलब गोल्ड ज्वेलरी या बिस्किट-सिक्के खरीद सकते हैं लेकिन अब इसे सोने में निवेश का सही तरीका नहीं माना जाता है। क्योंकि इस पर GST और मेकिंग चार्ज देना पड़ता है। ऐसे में आज हम आपको गोल्ड में इन्वेस्ट (Gold Investment) करने का वो तरीका बताएंगे, जिनमें सिर्फ 1 रुपए से भी सोना खरीद सकते हैं और अच्छा रिटर्न भी पा सकते हैं। सोने में निवेश का डिजिटल तरीका 1. गोल्ड बॉन्ड सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड सरकारी बॉन्ड होता है, जो सरकार समय-समय पर लेकर आती है। इसका मूल्य सोने के वजन में होता है। मतलब 1 बॉन्ड एक ग्राम सोने की कीमत का होता है। SGB पर सालाना 2.50% का निश्चित ब्याज निवेशकों को मिलता है। इसे खरीदना बेहद आसान है। अपने डीमैट अकाउंट से NSE पर उपलब्ध गोल्ड बॉन्ड की यूनिट खरदी सकते हैं। 2. गोल्ड ETF सोने को आप शेयर की तरह भी खरीद सकते हैं। इसे गोल्ड ETF कहते हैं। यह एक एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड हैं, जिन्हें शेयर मार्केट में खरीद और बेच सकते हैं। गोल्ड ईटीएफ का बेंचमार्क स्पॉट गोल्ड रेट हैं, तो इसे एक्चुअल कीमत पर खरीद सकते हैं। गोल्ड ETF लेने के लिए डीमैट अकाउंट होना जरूरी है। 3. पेमेंट ऐप से सिर्फ 1 रुपए में सोना खरीदें स्मार्टफोन से डिजिटल गोल्ड में निवेश कर सकते हैं। सिर्फ 1 रुपए में अमेजन-पे, गूगल पे, पेटीएम, फोनपे और मोबिक्विक जैसे पेमेंट ऐप पर 1 रुपए में सोना उपलब्ध है। इसे आप अपनी सुविधा के अनुसार खरीद सकते हैं। सोने में निवेश से कितना रिटर्न अगर सोने में लॉन्ग टर्म के लिए निवेश करते हैं तो अच्छा खासा रिटर्न मिल सकता है। पिछले 5 साल में ही सोने ने निवेशकों को 55% का रिटर्न दिया है। अक्टूबर 2020 में जो सोना 50,605 रुपए प्रति 10 ग्राम मिल रहा था, वो आज 80 हजार के पार पहुंच गया है। सोना खरीदते समय दिखाएं समझदारी 1. हमेशा ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड (BIS) का हॉलमार्क वाला सर्टिफाइड गोल्ड ही खरीदें। सोने पर 6 अंकों का एक हॉलमार्क कोड होता है, जिसे HUID (हॉलमार्क यूनीक आइडेंटिफिकेशन नंबर) कहते हैं। इससे पता चलता है कि सोना कितने कैरेट का है। 2. सोने को खरीदते समय इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन की वेबसाइट जैसे सोर्स से कीमत क्रॉस चेक करें। सोने का रेट 24 कैरेट, 22 कैरेट और 18 कैरेट के हिसाब से देख सकते हैं। 24 कैरेट सोना सबसे शुद्ध माना जाता है लेकिन इससे गहने नहीं बनाए जाते हैं। आमतौर पर गहने 22 कैरेट या इससे कम कैरेट के सोने से बनाए जाते हैं। 3. सोना खरीदते समय कैश पेमेंट करने से बचें। इसकी बजाय UPI और डिजिटल बैंकिंग से पेमेंट करें। डेबिट या क्रेडिट कार्ड भी पेमेंट के लिए अच्छा है। 4. अगर सोना ऑनलाइन मंगवा रहे हैं तो उसकी पैकेजिंग चेक करना न भूलें। 5. सोने को निवेश की तरह देखते हैं तो उसकी रीसेल वैल्यू के बारे में पूरी जानकारी लें।

‘सोने ‘ की कीमत ऑल टाइम हाई रिकॉर्ड पर, पहली बार 80 हजार के पार पहूँचा Gold

इंदौर  शहर में सोने की कीमतें नई ऊंचाइयों को छू रही हैं। सोमवार को यह पहली बार 80,000 रुपये प्रति 10 ग्राम के पार पहुंच गईं। शहर में सोने के दाम ₹250 प्रति 10 ग्राम और चांदी के दाम ₹700 प्रति किलोग्राम बढ़ गए। इस तेजी के पीछे अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती, वैश्विक तनाव और त्योहारी मांग में वृद्धि जैसे कई कारण शामिल हैं। जल्द ही एक लाख पार हो जाएगी चांदी इंदौर में  24 कैरेट सोना ₹80,200 प्रति 10 ग्राम और चांदी ₹97,200 प्रति किलोग्राम पर बंद हुआ। चांदी के सिक्के ₹950 में बिके। चांदी की कीमत भी बढ़कर ₹99,400 प्रति किलोग्राम हो गई है और जल्द ही ₹1,00,000 के स्तर को पार कर सकती है। सोने की कीमतों में उछाल की वजह सोने की कीमतों में यह उछाल कई कारणों से आया है, जिसमें सबसे प्रमुख है अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा COVID-19 महामारी के बाद पहली बार ब्याज दरों में 50 आधार अंकों की कटौती। इसने निवेशकों को सोने जैसे सुरक्षित ठिकानों की ओर आकर्षित किया है। इसके अलावा, रूस-यूक्रेन युद्ध और मध्य पूर्व में इज़राइल, हमास और हिज़्बुल्लाह के बीच संघर्ष ने वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव को बढ़ा दिया है, जिससे सोने की मांग और बढ़ गई है। अमेरिकी डॉलर के मजबूत होने से भी बढ़ी मांग अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये के कमजोर होने से भी सोने की कीमतों को समर्थन मिला है। सोना और डॉलर के बीच उलटा संबंध होता है, यानी जब डॉलर कमजोर होता है, तो सोना मजबूत होता है। हाल ही में, भारत सरकार ने सोने पर सीमा शुल्क 15% से घटाकर 6% कर दिया था, जिससे घरेलू बाजार में सोने की मांग और बढ़ गई। पहली बार नहीं मना रिकॉर्ड इंदौर में यह पहली बार नहीं है जब सोने की कीमतों ने नया रिकॉर्ड बनाया है। अप्रैल में, सोना पहली बार 75,000 रुपये प्रति 10 ग्राम के पार गया था। हालाँकि, इसके बाद कीमतों में कुछ गिरावट आई, लेकिन यह गिरावट अस्थायी साबित हुई। इंदौर में पहली बार अप्रैल में 75 हजार पार हुआ था सोना इंदौर में सोना केडबरी रवा 17 अप्रैल को पहली बार 75 हजार के पार जाकर नकद में 75650 रुपए और सोना आरटीजीएस में 75800 रुपए प्रति दस ग्राम के भाव से बिका था। 5 दिन बाद सोने के भाव में गिरावट शुरू हुई थी और 22 अप्रैल को सोना 500 रुपए टूट कर 74 हजार 900 रुपए हो गया था। इसके बाद से ही सोने के भाव में तेजी-मंदी का दौर जारी है। 24 जुलाई को केंद्रीय बजट के बाद सोना 70 हजार 300 रुपए पर आ गया था। 3 महीने में 9 हजार 970 रुपए महंगा हुआ सोना इंदौर मे सोना पिछले 3 माह में ही 9 हजार 970 रुपए महंगा हो चुका है। केंद्र सरकार द्वारा कस्टम ड्यूटी घटाने के बाद 25 जुलाई को सोना 70 हजार 300 रुपए प्रति ग्राम के भाव पर बिका था। वहीं आज यानी 21 अक्टूबर को सोने का भाव 80 हजार 270 रुपए प्रति 10 ग्राम है। इस लिहाज से सोना पिछले 3 महीने में 9 हजार 970 रुपए महंगा हो गया है।

शेयर बाजार हुआ धड़ाम, 930 अंक गिरा Sensex, डूबे 8.51 लाख करोड़

नई दिल्‍ली , शेयर बाजार में आज भारी गिरावट देखने को मिली है. BSE Sensex 930 अंक टूटकर  80,220 पर बंद हुआ , जबकि निफ्टी 50 इंडेक्‍स में 310 अंक या 1.25% की गिरावट आई है और यह 24,472 लेवल पर बंद हुआ. वहीं निफ्टी बैंक भी 700 अंकों से ज्‍यादा टूट गया. बीएसई सेंसेक्‍स के टॉप 30 शेयरों में से ICICI बैंक के शेयर ग्रीन जोन में थे. बाकी के सभी 29 शेयर रेट अलर्ट पर कारोबार कर रहे थे. इन शेयरों में से सबसे ज्‍यादा गिरावट महिंद्रा एंड महिंद्रा के शेयरों (M&M Share) में 3.29 प्रतिशत की आई है. JSW Steel, बजाज फाइनेंस, एल एंड टी, मारुति सुजुकी, इंडसइंड बैंक, टाटा मोटर्स, SBI जैसे शेयरों में करीब 3 फीसदी तक की गिरावट आई है. NSE के 2,825 शेयरों में से 299 शेयर उछाल पर थे, जबकि 2,466 शेयर भारी गिरावट पर रहे. 60 शेयर अनचेंज रहे. 48 शेयरों ने 52 सप्‍ताह का नया हाई लगाया है, जबकि 150 शेयर 52 सप्‍ताह के निचले स्‍तर पर थे. 49 शेयर अपर सर्किट और 309 शेयर लोअर सर्किट पर रहे. इन सेक्‍टर्स में बड़ी गिरावट आज निफ्टी बैंक से लेकर हेल्‍थ सेक्‍टर्स तक के स्‍टॉक में भंयकर गिरावट देखी जा रही है. पीएसयू बैंक में 4.47    फीसदी की कमी आई है. स्‍मॉलकैप और मिडकैप में ये गिरावट और गंभीर है. बीएसई स्‍मॉलकैप 2,186.12 अंक टूटा है जबकि BSE Midcap में 1,214.83 अंक की गिरावट आई है. बिखर गए ये 10 स्‍टॉक वर्धमान होल्डिंग्‍स के शेयर आज 14.22% टूटकर 4,549.90 रुपये प्रति शेयर पर बंद हुए. GRSE के शेयर 12.34% टूटकर 1581.65 रुपये पर थे. अंबर इंटरप्राइजेज इंडिया के शेयर 11.31% टूटकर 5,627.05 रुपये पर बंद हुए. जना स्मॉल फाइनेंस बैंक के शेयर भी 11 फीसदी गिरकर 457.50 पर बंद हुए. मझगांव डॉक शिपयार्ड के शेयर आज 10 फीसदी टूटकर 4206 रुपये बंद हुए. सुप्रीम इंडस्‍ट्रीज के शेयर 10.48 फीसदी गिरकर 4,485 रुपये पर बंद हुए. मैंगलोर रिफाइनरी के शेयर 7 प्रतिशत टूटकर 147 रुपये पर बंद हुए थे. एसजेवीएन के शेयर भी 7 फीसदी गिर गए. एनएलसी इंडिया के शेयर 6.77 फीसदी गिर गए. वहीं पीएनबी के शेयर भी 7 फीसदी टूटकर 95 रुपये पर बंद हुए थे. निवेशकों के 8.51 लाख करोड़ डूबे शेयर बाजार में आई भारी गिरावट के कारण निवेशकों के वेल्‍थ को भारी नुकसान हुआ है. ज्‍यादातर निवेशकों के पोर्टफोलियो रेड जोन में हैं. वही बीएसई का मार्केट कैपिटलाइजेशन 4,53,65,023.74 करोड़ रुपये से 8.51 लाख करोड़ रुपये घटकर 4,45,13,502 करोड़ रुपये रह गया है.

गौतम अडानी ने 8,100 करोड़ के इक्विटी मूल्य पर ओरिएंट सीमेंट को खरीदा

मुंबई  भारत और एशिया के दूसरे सबसे बड़े रईस गौतम अडानी ने एक और सीमेंट कंपनी को खरीद लिया है। अडानी ग्रुप की कंपनी अंबुजा सीमेंट ने मंगलवार को घोषणा की कि वह 8,100 करोड़ रुपये के इक्विटी मूल्य पर ओरिएंट सीमेंट लिमिटेड (OCL) का अधिग्रहण करेगी। ओरिएंट सीमेंट सीके बिड़ला ग्रुप की कंपनी है। यह सौदा 395.4 रुपये प्रति शेयर के भाव पर हुआ है। अंबुजा ने साथ ही कंपनी में अतिरिक्त 26% हिस्सेदारी हासिल करने के लिए ओपन ऑफर पेश किया है। इस अधिग्रहण से अडानी सीमेंट को देश के मुख्य बाजारों में अपनी उपस्थिति बढ़ाने और सीमेंट मार्केट में अपनी हिस्सेदारी में 2% की वृद्धि करने में मदद मिलेगी। अडानी ग्रुप देश की दूसरी बड़ी सीमेंट कंपनी है। आदित्य बिड़ला ग्रुप की कंपनी अल्ट्राटेक पहले नंबर पर है। अंबुजा सीमेंट ने स्टॉक एक्सचेंज फाइलिंग में कहा कि 3-4 महीनों के भीतर ओपन ऑफर SAST से नियमों के प्रावधानों के अनुसार पूरा हो जाएगा। ओपन ऑफर 395.40 रुपये प्रति इक्विटी शेयर पर किया जा रहा है। इस घोषणा के बाद शुरुआती कारोबार में दोनों सीमेंट कंपनियों के शेयर में तेजी दिख रही है। अंबुजा के शेयर 1.49% बढ़कर 580 रुपये पर पहुंच गए जबकि ओरिएंट सीमेंट के शेयर 9:20 बजे तक 1.65% बढ़कर 358.25 रुपये पर कारोबार कर रहे थे। कितनी बढ़ेगी क्षमता डील के मुताबिक ओरिएंट सीमेंट लिमिटेड के मौजूदा प्रमोटरों और कुछ सार्वजनिक शेयरधारकों से अंबुजा 46.8% शेयर हासिल करेगी। अधिग्रहण को पूरी तरह से आंतरिक स्रोतों से फंड किया जाएगा। अंबुजा सीमेंट्स के डायरेक्टर करण अडानी ने कहा कि यह अधिग्रहण अंबुजा सीमेंट्स की विकास यात्रा में एक और महत्वपूर्ण कदम है। अंबुजा के अधिग्रहण के दो वर्षों के भीतर सीमेंट क्षमता में 30 MTPA की वृद्धि हुई है। OCL के अधिग्रहण से अंबुजा वित्त वर्ष 2025 में 100 MTPA सीमेंट क्षमता तक पहुंचने के लिए तैयार है। अडानी ने कहा कि ओसीएल के पास स्ट्रैटजिक लोकेशन, हाई क्वालिटी वाले चूना पत्थर के भंडार और सभी तरह के जरूरी अप्रूवल हैं। निकट भविष्य में इसी सीमेंट उत्पादन क्षमता 16.6 एमटीपीए तक बढ़ सकती है। अडानी ग्रुप ने अंबुजा सीमेंट्स और एसीसी लिमिटेड को $10.5 अरब में स्विट्जरलैंड के होलसिम ग्रुप से खरीदा था। इस साल अगस्त में अंबुजा सीमेंट्स ने गुजरात में सांघी इंडस्ट्रीज को 5,000 करोड़ रुपये में खरीदा। इसकी उत्पादन क्षमता 6.1 MTPA है।

भारत ऐसा देश बन गया है, जहां आप स्थानीय स्तर पर उत्पादन, उपयोग और निर्यात कर सकते हैं: सुनील भारती मित्तल

नई दिल्ली  देश की दूसरी सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनी भारती एयरटेल के प्रमुख सुनील भारती मित्तल ने कहा कि भारत एक ऐसा देश बन गया है, जहां आप स्थानीय स्तर पर उत्पादन, उपयोग और निर्यात कर सकते हैं। उन्होंने आगे कहा कि भारत से बहुत सारी कंपनियां वैश्विक स्तर पर उभर रही हैं। मौजूदा समय में देश की 95 प्रतिशत जनता को अच्छी क्वालिटी सिग्नल मिल रहे हैं। इसके कारण देश को डिजिटल की तरफ ले जाने में मदद मिली है। मित्तल के मुताबिक, मोबाइल नेटवर्क की क्वालिटी के मामले में हम अमेरिका, यूके और यूरोप से काफी आगे हैं। ‘एनडीटीवी वर्ल्ड समिट-2024’ में बोलते हुए मित्तल ने कहा कि हमारे पड़ोसियों के विपरीत भारत के पैसे का वैश्विक मंच पर स्वागत किया जाता है। मित्तल ने आगे कहा कि चीन के निवेशों को ब्लॉक किया जा रहा है। पश्चिमी देश भी निजी निवेश को पसंद कर रहे हैं। हम देख रहे हैं कि भारत से जीएमआर एयरपोर्ट्स और अदाणी वैश्विक स्तर पर जा रहे हैं। टेलीकॉम कारोबारी ने कहा कि हमें अपने देश में सिंगापुर और जापान जैसे इन्फ्रास्ट्रक्चर को विकसित करना होगा। सभी निवेशकों के लिए नीति का पूर्वानुमान आवश्यक है। पिछले दशक में हमने अधिक स्थिरता देखी है, नियम सरल हुए हैं। उन्होंने आगे कहा कि सभी उद्योगपतियों को पता है कि देश में खपत बढ़ने जा रही है। मित्तल ने आगे कहा कि सरकार की ओर से इन्फ्रास्ट्रक्चर में निवेश को प्रोत्साहित किया जा रहा है। एयरटेल की ओर से 30,000-35,000 करोड़ रुपये डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर पर खर्च किए जा रहे हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) पर उन्होंने कहा कि यह अर्थव्यवस्था, राजनीति और भू-राजनीति के लिए काफी प्रमुख होने वाला है। एआई का दुरुपयोग भी होगा, हमें और अधिक सतर्क रहना होगा।  

रियल एस्टेट सेक्टर में तीसरी तिमाही में सालाना आधार पर 41 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज

नई दिल्ली रियल एस्टेट सेक्टर में संस्थागत निवेश में 2024 की तीसरी तिमाही में सालाना आधार पर 41 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई, जो 0.96 अरब डॉलर तक पहुंच गया। एक रिपोर्ट के अनुसार, पिछली तिमाही में रियल एस्टेट सेक्टर में संस्थागत निवेश 3.1 अरब डॉलर था, जो कि 2024 की सितंबर तिमाही में घटा है। वेस्टियन रिसर्च ने एक रिपोर्ट में कहा कि तिमाही आधार पर 69 प्रतिशत की इस गिरावट के बावजूद दृष्टिकोण सकारात्मक बना हुआ है, क्योंकि निवेश लगभग एक अरब डॉलर के आंकड़े को छू रहा है। रिपोर्ट में आगे कहा गया है, “पिछले वर्ष की तुलना में निवेश में वृद्धि मौजूदा भू-राजनीतिक चुनौतियों के बीच भारत की मजबूत आर्थिक वृद्धि का प्रमाण है। परिणामस्वरूप, विदेशी निवेशकों की हिस्सेदारी 2023 की तीसरी तिमाही में 27 प्रतिशत से बढ़कर 2024 की तीसरी तिमाही में 46 प्रतिशत हो गई।” रिपोर्ट में कहा गया है, “इसके विपरीत, घरेलू निवेशकों की हिस्सेदारी एक साल पहले इसी तिमाही के 71 प्रतिशत से घटकर 2024 की तीसरी तिमाही में 43 प्रतिशत रह गई। हालांकि, मूल्य के लिहाज से यह कमी केवल 15 प्रतिशत थी।” वेस्टियन के सीईओ श्रीनिवास राव ने कहा, “मजबूत जीडीपी वृद्धि के दम पर निवेशकों ने भारत के विकास पर भरोसा दिखाया है। नतीजतन, रियल एस्टेट सेक्टर में विदेशी निवेशकों की भागीदारी बढ़ी, जिसके कारण संस्थागत निवेश 2024 की तीसरी तिमाही में एक अरब डॉलर के आंकड़े को छू गया।” उन्होंने कहा, “इसके अतिरिक्त, घरेलू निवेशक भी सक्रिय रूप से भाग ले रहे हैं, जिन्हें देश भर में तेजी से हो रहे बुनियादी ढांचे के विकास से समर्थन मिल रहा है।” 2024 की तीसरी तिमाही में घरेलू निवेशकों के लिए आवासीय संपत्तियां पहली पसंद रहीं, जबकि वाणिज्यिक सौदों में विदेशी निवेशकों की हिस्सेदारी 64 प्रतिशत रही। ऑफिस से काम करने की अनिवार्यता और जीसीसी (वैश्विक क्षमता केंद्र) की बढ़ती प्रमुखता ने विदेशी निवेशकों को आकर्षित किया, जिससे वाणिज्यिक निवेश की हिस्सेदारी 2023 की तीसरी तिमाही के 24 प्रतिशत से बढ़कर 2024 की तीसरी तिमाही में 71 प्रतिशत हो गई। दूसरी ओर, आवासीय क्षेत्र की हिस्सेदारी 2024 की तीसरी तिमाही में घटकर 19 प्रतिशत रह गई, जो एक साल पहले इसी अवधि में 44 प्रतिशत थी। हालांकि, आने वाली तिमाहियों में आवासीय परिसंपत्तियों में निवेश बढ़ने की उम्मीद है क्योंकि को-लिविंग, सीनियर हाउसिंग और सर्विस अपार्टमेंट जैसे विशिष्ट परिसंपत्ति वर्ग में लोगों की दिलचस्पी बढ़ रही है।  

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