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सीएम डॉ. यादव ने एसीएस लेवल के अधिकारियों को सौंपी संभागीय बैठक की जिम्मेदारी.

CM Dr. Yadav assigned the responsibility of the regional meeting to the officers of the ACS level. पीएम मोदी की गारंटी और भाजपा के संकल्प को पूरा करने के लिए रहेगा लक्ष्य, रिव्यू के साथ करेंगे मानिटरिंग भोपाल। मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव ने संभागीय बैठक के लिए एसीएस लेवल के अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी है। सीएम ने अधिकारियों को संभाग बैठक के लिए प्रभारी नियुक्त किया है। प्रदेश के दस संभाग के लिए दस अधिकारियों की तैनाती की गई है। ये सभी अधिकारी संभागीय बैठक की न सिर्फ तैयारी करेंगे बल्कि बैठक के बाद बैठक में दिए गए सीएम के निदेर्शों की मॉनिटरिंग भी करेंगे। एसीएस स्तर के अधिकारियों को जिम्मेदारी देने के पीछे की वजह है कि मध्य प्रदेश में पीएम नरेंद्र मोदी की गारंटी को प्राथमिकता देनी है। यानी कि अधिकारियों की जिम्मेदारी है कि गारंटियों को पूरा किया जाए। इसके साथ ही भाजपा के संकल्प को भी पूरा करने की चुनौती होगी। लोक स्वास्थ्य, वन विभाग, गृह, नर्मदा घाटी विकास प्रधिकरण, जनजातिय कार्य विभाग, वित्त विभाग, किसान कल्याण, पिछड़ा वर्ग, उच्च शिक्षा से जुड़े विभाग के अधिकारियों को नोडल अधिकारी बनाया गया है। दरअसल, सीएम डॉक्टर मोहन यादव ने प्रदेश की कमान संभालते ही संभागों की बैठक लेना शुरू किया है। उन्होंने इसकी शुरूआत अपने गृह संभाग उज्जैन से की थी। इसके बाद जिले वार समीक्षा के लिए अधिकारियों की पोस्टिंग की गई है। अधिकारियों को भी फील्ड की जानकारी भी सीएम को देना होगा। खास बात है कि राजेश राजौरा को उज्जैन का प्रभार दिया गया है। सीएम बनने के बाद राजौरा ही पहले अधिकारी थे। जिन्होंने लाउड स्पीकर पर नियंत्रण का आदेश जारी कराया। उज्जैन में रहते हुए एसीएस राजौरा सीएम मोहन यादव के काफी भरोसेमंद अफसरों में शुभार रहे हैं। इन्हें बनाया प्रभारी एसीएस मोहम्मद सुलेमान को भोपाल संभाग, एसीएस विनोद कुमार को जबलपुर संभाग, एसीएस जेएन कंसोटिया को रीवा संभाग, एसीएस राजेश राजौरा को उज्जैन संभाग, एसीएस एसएन मिश्रा को सागर संभाग, एसीएस मलय श्रीवास्तव को इंदौर संभाग, एसीएस अजीत केसरी को नर्मदापुरम संभाग, एसीएस अशोक वर्णवाल को शहडोल संभाग, एसीएस मनु श्रीवास्तव को चंबल संभाग और एसीएस केसी गुप्ता को ग्वालियर संभाग की जिम्मेदारी दी गई।

चुनावी आचार संहिता : विधानसभा के बाद लोकसभा चुनाव में भी हटेंगे अफसर.

Election Code of Conduct: Officers will also be transferred in the Lok Sabha elections after the Assembly elections. आयोग के फरमान: राज्य सरकार को 30 जून तक एक ही जिले में पदस्थ अफसरों का करना होगा तबादला- जनवरी के पहले ही सप्ताह से अफसरों के प्रमोशन और ट्रांसफर की शुरू हो जाएगी प्रक्रिया भोपाल। भारत निर्वाचन आयोग ने लोकसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर जिला निर्वाचन अधिकारियों को प्रशिक्षण दिए जाने के बीच अफसरों की पदस्थापना को लेकर भी गाइडलाइन जारी की है। आयोग ने कहा है कि मुख्य सचिव 30 जून 2024 को एक ही जिले में तीन साल की पदस्थापना पूरी करने वाले अफसरों को हटाते हुए रिपोर्ट देंगे। हालांकि इसकी प्रक्रिया सरकार जनवरी 2024 के पहले ही सप्ताह से शुरू कर दे दी। इसके पीछे का कारण है कि जनवरी में कई अफसरों के प्रमोशन का समय भी है। ऐसी स्थिति में ट्रांसफर से साथ पोस्टिंग भी होगी। कई अफसरों को फील्ड से हटाकर मंत्रालय में अटैच किया जाएगा। आयोग ने कहा है कि चुनाव से सीधा संबंध रखने वाला कोई भी अधिकारी उस जिले में पदस्थ नहीं रहेगा जो उसका गृह जिला होगा। अगर संबंधित अफसर ने पिछले चार साल के अंतराल में पदस्थापना वाले जिले में तीन साल पूरे कर लिए हैं या फिर 30 जून 2024 को उसके तीन साल पूरे होने वाले हैं। इसके साथ ही आयोग ने यह भी साफ कर दिया है कि लोकसभा चुनाव की प्रक्रिया 16 जून के पहले पूरी कर ली जाएगी। इसलिए आयोग ने निर्णय लिया है कि केंद्र शासित प्रदेश और राज्यों में गृह जिलों में पदस्थ अधिकारियों को हटाने की कार्यवाही की समय पर की जाए। अक्टूबर में विधानसभा चुनाव से पहले भी सरकार ने कई जिलों के अफसरों को हटा दिया था। हालांकि स्पष्ट है कि विधानसभा में ड्यूटी करने वाले अधिकांश अफसर चुनाव ड्यूटी में शामिल रहेंगे।

आधुनिक देशों ने ईवीएम को त्याग दिया, लेकिन भारतीय चुनाव आयोग का इससे बड़ा मोह : जीतू पटवारी.

Modern countries have abandoned EVMs, but the Indian Election Commission is more attached to it: Jitu Patwari. भाजपा सरकार ने पिछले विधानसभा सत्र में मुझे भी गलत तरीके से किया था निलंबित प्रदेश अध्यक्ष के तौर पर पटवारी के नेतृत्व में पहला धरना भोपाल। संसद से निलंबित किए गए सांसदों की लड़ाई अब सड़क पर पहुंच गई है। कांग्रेस ने सांसदों के निलंबन पर शुक्रवार को प्रदेश व्यापी धरना प्रदर्शन किया। राजधानी भोपाल के रोशनपुरा चौराहे पर भी धरना प्रदर्शन किया गया। कांग्रेस के नव-नियुक्त प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने इसे संबोधित किया। उनके अध्यक्ष बनने के बाद ये पहला प्रदर्शन है। इस मौके पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण यादव, पूर्व मंत्री सज्जन वर्मा, पूर्व मंत्री पीसी शर्मा और उप नेता हेमंत कटारे सहित कई नेता मौजूद रहे। पटवारी ने मोदी सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि भारत के लोकतंत्र की दुनिया में मिसाल दी जाती है। इसका अनुशरण कई देशों में किया जाता है। सत्ता और विपक्ष देश की उन्नति के लिए दो पटरियां हैं। आज भारत की चुनाव प्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। आधुनिक देशों ने ईवीएम को त्याग दिया है। आज देश में जिस तरह के चुनाव परिणाम आते हैं, उस पर लोगों को भरोसा नहीं होता है। आज लोकतंत्र खतरे में है। पटवारी ने कहा कि मोदी के आने के बाद जनप्रतिनिधियों का दल-बदल बढ़ गया है। पिछले सत्र में विधानसभा में मुझे गलत तरीके से निलंबित किया था। ये लोकतंत्र की हत्या है। भाजपा में अंदर भी लोकतंत्र नहीं बची है। वहां भी मोदी की तानाशाही चल रही है। भाजपा का पिछला घोषणा पत्र ही पूरा नहीं हुआ। 18 हजार से अधिक घोषणा अधूरा है, हम लोकतंत्र के लिए लड़ते रहेंगे।

रोजगार सृजन के लिए DICCI करेगा मध्यप्रदेश के 313 ब्लॉक को-ऑर्डिनेटर्स का प्रशिक्षण.

DICCI will provide training to 313 block coordinators in Madhya Pradesh for the creation of employment. DICCI के भोपाल ऑफिस में होगा यह बिजनेस लीडरशिप डेवलपमेंट प्रोग्राम, DICCI मध्यप्रदेश के ब्लॉक कॉर्डिनेटर साझा करेंगे अपनी सफलता की कहानियां   उदित नारायण भोपाल। दलित इंडियन चैम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (डिक्की) मध्यप्रदेश चैप्टर की ओर से बिजनेस लीडरशिप डेवलपमेंट प्रोग्राम एवं प्रशिक्षण की शुरुआत की जा रही है। इसमें मध्यप्रदेश के सभी विकासखंडों में मौजूद डिक्की के 313 ब्लॉक को-ऑर्डिनेटर्स शामिल होंगे। प्रशिक्षण के लिए 45-45 को-ऑर्डिनेटर्स के 7 बैच बनाए गए हैं। डिक्की मध्यप्रदेश चैप्टर के प्रेसिडेंट डॉ.अनिल सिरवैयां ने बताया कि प्रदेश में उद्यमिता विकास और स्व-रोजगार की गतिविधियों को विकासखंड स्तर पर क्रियान्वित कर रोजगार के अवसर सृजित करने के लिए ब्लॉक लेबल बिजनेस लीडरशिप डेवलपमेंट प्रोग्राम एवं प्रशिक्षण शुरू किया जा रहा है। 23 दिसम्बर को पहले बैच, 24 दिसम्बर को दूसरे बैच और 25 दिसम्बर को तीसरे बैच का प्रशिक्षण होगा। इस दौरान एससी-एसटी उद्यमियों और युवाओं को अपने ब्लॉक में ही व्यापार-व्यवसाय और उद्यमिता के अवसर, सफल बिजनेस फ्रेचाइजी मॉडल, लघु और मध्यम उद्योगों के क्लस्टर निर्माण, एमएसएमई इकाईयों की स्थापना, महत्वपूर्ण योजनाओं के लाभ लेने की प्रक्रिया, आसान और सब्सिडाइस बैंक ऋण से अधिक से अधिक युवाओं को लाभान्वित करने के टिप्स दिए जाएंगे।  लक्ष्य : प्रत्येक विकासखंड में प्रत्येक माह में 10 से अधिक उद्यमी तैयार करना डॉ. सिरवैयां ने बताया कि डिक्की का लक्ष्य प्रत्येक विकासखंड में प्रत्येक माह में 10 से अधिक उद्यमी तैयार करना है। साथ ही प्रत्येक विकासखंड में एक एमएसएमई कलस्टर का निर्माण करना है। उन्होंने बताया कि औद्योगिकीकरण से वंचित और पिछड़े जिलों सहित प्रत्येक जिले में विनिर्माण, सर्विस सेक्टर के स्टार्टअप और नए उद्यम तथा ट्रेडिंग कारोबार के लिए डिक्की ने विशेष प्लान तैयार किया है। अगले दो साल में इसे शत-प्रतिशत क्रियान्वित करने का लक्ष्य रखा गया है। इसी उद्देश्य से डिक्की द्वारा प्रत्येक विकासखंड में प्रशिक्षित एससी-एसटी व्यापारियों, उद्यमियों और युवाओं की टीम तैयार की जा रही है जो स्थानीय स्तर पर गांव-गांव में आर्थिक गतिविधियों का क्रियान्वयन करेंगे। कार्यशाला में विशेषज्ञ देंगे प्रशिक्षण वर्तमान समय में व्यापार और रोजगार को बढ़ाने के लिए ब्लॉक को-ऑर्डिनेटर्स को एक्सपर्ट्स द्वारा डिजिटल तकनीक और सोशल मीडिया का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। इससे वे व्यापार विस्तार के लिए ऑनलाइन माध्यमों का भरपूर उपयोग कर पाएंगे। इसके साथ ही उन्हें अपनी सफलता की कहानियों से दूसरों को स्वरोजगार के लिए प्रेरित करने संबंधी टिप्स भी दिए जाएंगे। कार्यशाला में डिक्की के अनुभवी उद्यमी,बैंकों के अधिकारी और इंडस्ट्री और उद्यमिता के क्षेत्र के विशेषज्ञ प्रशिक्षार्थियों को प्रशिक्षण देंगें।

नए पदों की मिली मंजूरी, 4 अफसर डीजीपी, 2 एडीजी,13 आईजी और 18 डीआईजी रैंक में होंगे पदोन्नत.

Approval granted for new positions, including 4 DIGs, 2 ADGs, 13 IGs, and 18 DIGs. 7 आईपीएस अधिकारियों को मिलेगा सिलेक्शन ग्रेड, जानिए सभी रैंक के आईपीएस अधिकारियों के नाम भोपाल। मध्यप्रदेश में आईपीएस अफसरों की पदोन्नति की राह अब आसान हो गई है। पदोन्नति के लिए पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) के चार, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (एडीजी) के दो, महानिरीक्षक (आईजी) के तेरह, पुलिस उपमहानिरीक्षक (डीआईजी) के 18, और सलेक्शन ग्रेड में पदोन्नति के लिए सात पदों की मंजूरी मिल गई है।पदोन्नति की बांट जोह रहे आईपीएस अफसरों के लिए अच्छी खबर है। नये साल से इन अफसरों को पदोन्नतियां मिलने लगेंगी।सूत्रों के मुताबिक डीजीपी के जो चार पद मंजूर हुए है उनपर वर्ष 2024 में जैसे-जैसे पद रिक्त होते जाएंगे उस हिसाब से अफसरों को पदोन्नत किया जाएगा। जो अफसर डीजीपी के पद पर पदोन्नत होंगे उनमें एक मार्च को विजय कटारिया,एक मई को अनुराधा शंकर सिंह,एक जून को वरुण कपूर, 1 जुलाई को उपेन्द्र जैन डीजी बन जाएंगे। एक जनवरी से जिन अफसरों को पदोन्नति मिलना है उसमें जो अफसर एडीजी बनेंगे उनमें 1999 बैच के राकेश गुप्ता, दीपिका सूरी शामिल है। जो तेरह अफसर आईजी बनेंगे। इनमें 2006 बैच के चंद्रशेखर सोलंकी, रुचि वर्धन, एस चित्रा, अनिल कुशवाहा, आर आरएस परिहार, राजेश हिंगणकर, अंशुमान सिंह, मनीष कपूरिया, अरविंद सक्सेना, विनीत खन्ना, हिमानी खन्ना, मिथिलेश शुक्ला, अनुराग शर्मा शामिल है।जो 18 अफसर डीआईजी बनेंगे उनमे 2009 बैच के साकेत प्रकाश पांडे, अमित सांघी, टीके विद्यार्थी, सत्येन्द्र शुक्ला, वीरेन्द्र कुमार सिंह, प्रशांत खरे, अतुल सिंह, मनीष कुमार अग्रवाल और 2010 बैच के आबिद खान, आशुतोष प्रसाद सिह, मोहम्मद युसूफ कुरेैशी, निमिष अग्रवाल, सिद्धार्थ बहुगुणा,पंकज श्रीवास्तव, राजेश कुमार सिंह, विनीत कपूर, धर्मेन्द्र सिंह भदौरिया, हेमंत चौहान शामिल है।इसके अलावा 2011 बैच के सात अफसरों को सलेक्शन ग्रेड मिलेगा। इनमें रियाज इकबाल, आदित्य प्रताप सिंह, राहुल लोढ़ा, सिमाला प्रसाद, डॉ असित यादव, सुशील रंजन सिंह, संजय कुमार सिंह शामिल है।

नए साल में पाटिल होंगे वन विभाग के नए मुखिया

Patil will be the new head of forest department in the new year डीपीसी कमेटी ने लगाई उनके नाम पर मुहर उदित नारायणभोपाल ! वन विकास निगम के प्रबंध संचालक अभय कुमार पाटिल जंगल महकमे के नए मुखिया होंगे। उनका कार्यकाल एक महीने का ही होगा। फरवरी में वन विभाग के नए मुखिया असीम श्रीवास्तव हो बनेंगे।मुख्य सचिव वीणा राणा की अध्यक्षता में शुक्रवार को डीपीसी की बैठक हुई। बैठक में उत्तर प्रदेश के वन बल प्रमुख सुधीर शर्मा विशेष रूप से उपस्थित थे। इसी बैठक में पहली बार वन बल प्रमुख के लिए डीपीसी कमेटी ने 1986 बैच के अभय कुमार पाटिल और 1988 बैच के असीम श्रीवास्तव के नाम पर अपनी मुहर लगाई। ऐसा इसलिए किया, क्योंकि अगले वन बल प्रमुख पाटिल का कार्यकाल एक महीने का ही है। यानि फरवरी में हॉफ पद के लिए दोबारा डीपीसी न करनी पड़े। फरवरी में बनने वाले वन बल प्रमुख असीम श्रीवास्तव का कार्यकल जुलाई 2025 तक रहेगा। कमेटी ने बैठक में 1990 बैच के बिभाष ठाकुर और विवेक जैन को एपीपीसीएफ से पीसीसीएफ पद पर प्रमोट करने पर मुहर लगाई है। उल्लेखनीय है कि मौजूदा वन बल प्रमुख आरके गुप्ता और लघु वनोपज संघ के एमडी पुष्कर सिंह दिसम्बर में सेवानिवृत होने जा रहें है। नए साल में होंगे बदलाववन विभाग में कई नए बदलाव होने जा रहें है। ये सभी बदलाव नई सरकार के गठन के बाद होने की संभावना है। लघु वन वनोपज संघ एमडी पुष्कर सिंह के रिटायरमेंट के बाद प्रधान मुख्य वन संरक्षक डॉ अतुल कुमार श्रीवास्तव नए एमडी होंगे। वर्तमान में डॉक्टर श्रीवास्तव वर्किंग प्लान शाखा के प्रमुख हैं। गौरतलब यह है कि अभी तक विभाग में हुई पदस्थापना के दौरान डॉक्टर श्रीवास्तव की वरिष्ठता की अनदेखी की गई। इसी कारण यह संभावना जताई जा रही है कि नई सरकार में उनकी पदस्थापना वरिष्ठता के आधार पर होगी। निगम के मौजूदा एमडी पाटिल के वन बल प्रमुख बनने पर पीसीसीएफ प्रशासन -एक के आरके यादव को निगम में एमडी के पद पर पदस्थ किए जाने की संभावना है। कैडर में पीसीसीएफ का पद प्रशासन-एक का नहीं है। कैडर में यह पद अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक स्तर के अधिकारी के लिए निर्धारित है। डॉ श्रीवास्तव के संघ में चले जाने पर वर्किंग प्लान शाखा का प्रभार पीसीसीएफ जेएफएम पीके सिंह को दिया जा सकता है। फरवरी में अम्बाडे होंगे पीसीसीएफ वन्य प्राणीपाटिल के जनवरी में रिटायर होने पर पीसीसीएफ वन्य प्राणी असीम श्रीवास्तव वन बल प्रमुख बनेंगे और उनकी जगह पर 88 बैच के आईएफएस विजय एन अम्बाडे पीसीसीएफ वन्य प्राणी होंगे. विभाग में अम्बाडे की छवि वन्य प्राणी विशेष के रूप में बनी हुई है।

कैलाश विजयवर्गीय की भूमिका पर आज लग सकती है मुहर.

Today, the seal could be placed on Kailash Vijayvargiya’s role. मंत्रिमंडल में शामिल होंगे या फिर संगठन की कमान संभालेंगे भोपाल । आज या कल में प्रदेश के मंत्रियों का फैसला हो जाएगा। इस बीच यह भी खबरें आइंर् कि प्रदेश के कद्दावर नेताओं को मंत्रिमंडल में शामिल किया जा सकता है। इनमें इंदौर से विधायक और भाजपा महासचिव कैलाश विजयवर्गीय भी शामिल हैं। हमेशा से पार्टी कहती आई है कि विजयवर्गीय को बड़ी जवाबदारी मिलेगी और विजयवर्गीय भी इसकी ओर इशारा करते आए हैं। अब उन्हें संगठन में कोई बड़ी जवाबदारी सौंपी जा सकती है या फिर मंत्रिमंडल में लिया जा सकता है, इस पर संभवत: आज फैसला हो सकता है। कैलाश विजयवर्गीय जैसे कद्दावर नेता का नाम पहले मुख्यमंत्री के लिए चला था और इसी फेहरिस्त में प्रहलाद पटेल, नरेन्द्रसिंह तोमर जैसे नाम भी शामिल थे। तोमर को तो विधानसभा अध्यक्ष बना दिया गया है, वहीं अब प्रहलाद पटेल और कैलाश विजयवर्गीय को बड़ी जवाबदारी देने की बात कही जा रही है। ये जवाबदारी क्या हो सकती है, इस बारे में आज और कल होने वाली संगठन की बैठक में फैसला हो सकता है। फिलहाल तो भोपाल से यही खबर उड़ रही है कि विजयवर्गीय और पटेल को मंत्रिमंडल में कोई बड़ा विभाग दिया जा सकता है। यह फैसला भी आज-कल में हो जाएगा, क्योंकि मुख्यमंत्री मोहन यादव मंत्रिमंडल पर चर्चा के लिए दिल्ली पहुंच गए हैं। दिल्ली से होने वाले फैसले के बाद विजयवर्गीय जैसे नेता की भूमिका पर चल रही गाहे-बगाहे भी समाप्त हो जाएगी। सूत्रों का कहना है कि उन्हें संगठन में कोई बड़ी जवाबदारी दी जा सकती है। संभवत: उन्हें प्रदेश संगठन में लिया जा सकता है। हालांकि यह भी बड़े नेताओं के कयास है, लेकिन यह तो तय है कि अब विजयवर्गीय कद बढ़ना तय है।

यह मोदी सरकार है जो जनता के द्वार-… रामेश्वर शर्मा

This is Modi government which is at the door of the public-… Rameshwar Sharma विधायक रामेश्वर शर्मा ने उड़ाया ड्रोन, खेत में किया दबाई का छिड़काव विकसित भारत संकल्प यात्रा पहुँच रही है गाँव-शहर भोपाल। शुक्रवार को हुजूर विधानसभा के नरेला एवं खारपा में विकसित भारत संकल्प यात्रा पहुँची नरेला में विधायक रामेश्वर शर्मा विकसित भारत संकल्प यात्रा में सम्मिलित हुए। यहाँ विधायक रामेश्वर शर्मा किसानों के साथ ड्रोन से खेतों में दवाई का छिड़काव करते हुए दिखे । विधायक रामेश्वर शर्मा का ड्रोन से दवाई छिड़काव का वीडियो सोशल मीडिया में तेज़ी से वायरल हो रहा है। नरेला पहुँचे विधायक रामेश्वर शर्मा ने उपस्थित नागरिक बंधुओं को संबोधित करते हुए कहा कि विकसित भारत संकल्प यात्रा हुज़ूर विधानसभा के गाँव गाँव पहुँच रही है, इस यात्रा में बड़ी संख्या में नागरिक शामिल होकर भारत सरकार एवं प्रदेश सरकार की योजनाओं का लाभ ले रहें है। विधायक रामेश्वर शर्मा ने कहा कि पहले जनता सरकार के पास जाती थी परंतु यह प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली भारत सरकार है जो जनता के द्वार द्वार जा रही है। विधायक रामेश्वर शर्मा ने कहा कि मोदी सरकार ने उज्ज्वला योजना, हर घर नल से जल, आयुष्मान भारत योजना, किसान सम्मान निधि, घर घर शौचालय का निर्माण कराकर देश के गाँव, ग़रीब, किसान, युवाओं का जीवन बदलने का काम कर रही है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने पूरी दुनिया में भारत का स्वाभिमान बढ़ाया है । अयोध्या में श्रीराम मंदिर का निर्माण हो, कश्मीर से धारा 370 को समाप्त करने का काम हो सब कुछ मोदी जी ने करके दिखाया । श्री शर्मा ने कहा कि विकसित भारत संकल्प यात्रा का अधिक से अधिक प्रचार करें इस यात्रा से जुड़े और नागरिकों को जोड़ें। यात्रा के दौरान लगने वाले लोक कल्याण शिविर में आवेदन देकर शासन की योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ लें। साथ ही भारत सरकार की विभिन्न योजनाओं से जुड़ कर आप अपना और अपने परिवार का जीवन कैसे बदल सकतें यह भी जाने। विधायक रामेश्वर शर्मा आत्मनिर्भर और विकसित भारत की शपथ दिलायी विकसित भारत संकल्प यात्रा में उपस्थित नागरिक बंधुओं को विधायक रामेश्वर शर्मा ने 2047 तक आत्मनिर्भर भारत एवं विकसित भारत के सपने को साकार करने की शपथ दिलाई। 25 जनवरी तक चलेगी यात्रा 15 नवंबर से बिरसा मुंडा की जयंती पर झारखंड के उलिहातु गांव से विकसित भारत संकल्प यात्रा की शुरुआत प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने किया था ।25 जनवरी तक विकसित भारत संकल्प यात्रा देशभर के सभी जिलों से गुजरेगी।

30 एकड़ सरकारी जमीन पर बनाई अवैध कालोनी, प्रशासन ने चलाया बुलडोजर.

An illegal colony was constructed on 30 acres of government land; the administration used a bulldozer to demolish it. आदमपुर के ग्राम छावनी पठार में चार करोड़ रुपये कीमत की जमीन कराई अतिक्रमण मुक्त। राजीव गांधी प्रौद्योगिक मिशन के नाम पर आवंटित है जमीन। भोपाल । जिला प्रशासन ने आदमपुर छावनी में गुरुवार को अवैध कालोनी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए लगभग 30 एकड़ सरकारी जमीन को अतिक्रमण से मुक्त कराया है। इस जमीन की वर्तमान में अनुमानित कीमत चार करोड़ रुपये बताई जा रही है। जमीन राजीव गांधी प्रौद्योगिक मिशन के नाम से आवंटित की गई है। कार्रवाई के दौरान लोग विरोध में उतर आए थे, लेकिन पुलिस बल की मौजूदगी के चलते कार्रवाई लगातार चलती रही। बताया जा रहा है कि यहां बने चालीस से अधिक निर्माणाधीन मकानों को तोड़ा गया है। इसके साथ ही जिन मकानों में लोग निवास कर रहे हैं ,उनको ये जगह छोड़ने के लिए कुछ समय की मोहलत दी गई है। कालोनाइजरों का पता लगा रहे अधिकारीसरकारी जमीन पर अवैध रूप से कब्जा कर मकान बनाए जा रहे हैं। कार्रवाई के विरोध में यहां मकान में रहने वाली महिलाएं अपने छोटे बच्चों के साथ सामने आ गईं थीं। राजस्व अधिकारियों द्वारा पता लगाया जा रहा है कि आखिर सरकारी जमीन पर किन लोगों के द्वारा अवैध रूप से कालोनी विकसित की जा रही है। यहां पक्के निर्माण के साथ ही बाउंड्रीवाल तक बना ली थी। इनका कहना हैछावनी पठार आदमपुर में सरकारी जमीन पर अवैध रूप से कब्जा कर मकान बनाए गए हैं, जिन्हें बुलडोजर चलाकर तोड़ा गया है। कुछ लोगों को समय दिया गया है जल्द ही आगे भी कार्रवाई की जाएगी।

साइबर ठग एनीडेस्क एप डाउनलोड कराकर बैंक खाता कर रहे खाली.

With the Help of Anydesk application, cyber fraudsters are emptying bank accounts. साइबर ठग सबसे पहले मोबाइल पर एक लिंक भेजते हैं और संबंधित व्यक्ति से एनीडेस्क एप डाउनलोड कराकर उनके फोन का पूरा एक्सेस ले लेते हैं। पेंशन खाता अपडेट करने व बिजली कनेक्शन कटने से रोकने के नाम पर लिंक भेज कर रहे ठगीमोबाइल पर आने वाले किसी भी तरह के लिंक को न खोलें, वरना हो सकते हैं ठगी के शिकारवर्तमान में साइबर क्राइम पुलिस के पास छह मामले पहुंचे हैं। भोपाल। राजधानी में एक बार फिर साइबर ठगों ने पुराने बहानों से लोगों को फंसाना शुरू कर दिया है। ये शातिर बदमाश पेंशन खाता अपडेट करने, बिजली का बिल जमा न करने पर कनेक्शन काटने का डर दिखाकर लोगों को ठग रहे हैं। साइबर ठग सबसे पहले मोबाइल पर एक लिंक भेजते हैं और संबंधित व्यक्ति से एनीडेस्क एप डाउनलोड कराकर उनके फोन का पूरा एक्सेस ले लेते हैं और उनके ट्रांजेक्शन करने पर पूरी जानकारी मिलने पर खाते से रकम निकल लेते हैं। बाद में संदेह होने पर पीड़ित को जानकारी मिलती है और मामला थाने तक पहुंचता है।साइबर क्राइम पुलिस के पास पहुंचे मामले वर्तमान में साइबर क्राइम पुलिस के पास ऐसे छह मामले पहुंचे हैं। पुलिस इनकी जांच कर रही है। साइबर क्राइम के अधिकारियों का कहना है कि साइबर ठग अब पुराने तरीकों से झांसा देकर फर्जी एप डाउनलोड कराकर वारदात कर रहे हैं, ऐसे में लोगों को जागरूक रहने की जरूरत है। कैसे काम करता है एनीडेस्क एपएनीडेस्क एप एक डिवाइस शेयरिंग एप्लीकेशन है, जिसकी मदद से आप अपने एक मोबाइल फ़ोन का पूरा एक्सेस दूसरे मोबाइल फोन को दे सकते हैं। मतलब अगर आप अपने एक मोबाइल से दूसरे मोबाइल को एक्सेस करना चाहते हैं तो इस एप की मदद से कर सकते हैं। इस एप्लीकेशन की मदद से दूसरे मोबाइल का डाटा देखने के साथ-साथ उस मोबाइल फोन को अपने फोन से एक्सेस कर सकते हैं। शातिर ठग इस एप को डाउनलोड कराकर लोगों के खाते में सेंधमारी कर रहे हैं।

560 सरकारी स्कूलों में नहीं है बालिकाओं के लिए अलग शौचालय, सुप्रीम कोर्ट ने लगाई फटकार.

The Supreme Court has rebuked the absence of separate toilets for girls in 560 government schools. – प्रदेश के 25 फीसदी सरकारी स्कूलों का मामला पहुंचा था सुप्रीम कोर्ट – सरकारी आंकड़ों के अनुसार प्रदेश के 2022 स्कूलों में नहीं अलग शौचालय भोपाल। प्रदेश के सरकारी स्कूलों में व्यवस्थाओं के सुधार के लिए सरकार द्वारा लगातार प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन इसके विभागीय अधिकारियों की अनदेखी के चलते इन प्रयासों पर अमल नहीं हो पा रहा है। स्थिति यह है कि प्रदेश के 560 प्रायमरी और मिडिल स्कूलों में छात्राओं के लिए अलग शौचालय तक नहीं है। यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचने के बाद कोर्ट ने प्रदेश सरकार को फटकार लगाई है। जिस पर राज्य शिक्षा केन्द्र के संचालक धनराजू एस ने विभाग के उपसचिव को पत्र लिखकर कहा है कि सुप्रीम कोर्ट में लगी याचिका में सुनवाई के बाद दिए गए निर्देशों के अनुसार कार्यवाही सुनिश्चित करें। हालांकि सरकारी आंकड़ों के अनुसार प्रदेश के 2022 सरकारी स्कूलों में बालिकाओं के लिए अलग से शौचालय नहीं है, यह याचिका 25 फीसदी स्कूलों को लेकर लगाई गई थी। यह है पूरा मामलादरअसल, प्रदेश के 52 जिलों में 24,741 विद्यालयों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में डॉ. जया ठाकुर द्वारा याचिका लगाई थी। इस याचिका में बताया गया कि 560 स्कूलों में लड़कियों के लिए अलग शौचालय की व्यवस्था नहीं है। इस पर कोर्ट ने स्कूल शिक्षा विभाग को फटकार लगाई है । जानकारों की माने तो प्रदेश के स्कूलों में लड़कियों के शौचालय का प्रतिशत 95 है। जबकि उनमें से आधे से अधिक शौचालय उपयोग लायक नहीं हैं। शहरी क्षेत्रों में एक बारगी शौचालय मिल भी जाएंगे, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों में यह स्थिति बहुत ही चिंताजनक है। इससे बच्चों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है।

गांधी परिवार के करीबी दो पूर्व सीएम का भविष्य लिखना बांकी.

Writing the future of two former Chief Ministers close to the Gandhi family remains pending. – अब क्या करेंगे कमलनाथ और दिग्विजय, दोनों ने राजनैतिक विरासत की कुर्सी पर बेटों को किया शिफ्ट जेवी विधायक और नकुल सांसद- जय-वीरू की जोड़ी को हाईकमान ने दिया रेस्ट, दिग्विजय फिर भी सक्रिय और कमलनाथ 5 जनवरी के बाद लौटेंगे भोपाल। मध्य प्रदेश में पीढ़ी परिवर्तन का दौर भाजपा से लेकर कांग्रेस तक में चल रहा है। पुराने दिग्गजों को किनारे कर सेंकड और थर्ड लीडरशिप को फ्रंट पर खड़ा कर दिया है। पिछले कुछ सालों में देखें तो भाजपा ने यह प्रयोग पहले ही किया है। तीन राज्यों में करारी हार के बाद अब कांग्रेस ने भी प्लानिंग की है। मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में हार के बाद पार्टी ने एक झटके में कमलनाथ और दिग्विजय सिंह जैसे दिग्गज नेताओं को साइडलाइन कर दिया है। हैरत की बात है कि दोनों ही नेता गांधी परिवार के करीबियों में शुमार रहे हैं। इंदिरा गांधी ने तो कमलनाथ को तीसरा बेटा माना था। वहीं दिग्विजय सिंह के संबंध भी उनके पिता के चलते कांग्रेस में शुरुआत से ही बेहतर रहे हैं। विधानसभा के चुनाव में दोनों से जय-वीरू की भूमिका निभाई। परिणाम के बाद हाईकमान ने घर ही बैठा दिया। अब राहुल गांधी की यूथ ब्रिगेड के हाथों में प्रदेश कांग्रेस की कमान सौंप दी है। इसके बाद सवाल यह है कि दिग्विजय सिंह और कमलनाथ का क्या होगा। यह लोकसभा के चुनाव में स्पष्ट हो जाएगा। इससे पहले दिग्विजय सिंह ने अपने बेटे जयवर्धन सिंह को राघौगढ़ से विधायक बनवाया। हालांकि जेवी कमलनाथ सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं। वहीं साल 2019 के लोकसभा चुनाव में कमलनाथ ने अपनी सीट से राजनैतिक विरासत की जमीन पर बेटे नकुलनाथ को सांसद की कुर्सी पर बैठा दिया। खास बात है कि कांग्रेस प्रदेश की सभी सीटों पर हार गई। सिर्फ छिंदवाड़ा से ही कांग्रेस को सफलता मिली। पार्टी सूत्रों का कहना है कि 10 से 15 साल में पार्टी ने क्षत्रपों की दूसरी पीढ़ी तैयार ही नहीं की। इसका विधानसभा चुनाव में सबसे ज्यादा नुकसान हुआ। बिना राय और सलाह कर दी जीतू की नियुक्तिपार्टी सूत्रों का कहना है कि पार्टी अब कमलनाथ को कोई पद देने के मूड में नहीं है। इसके संकेत इससे भी मिल रहे हैं कि बगैर उनकी राय लिए सीधे नियुक्तियां कर दी गईं। ऐसे में आगे उनको कोई जिम्मेदारी मिलने की संभावना नहीं दिख रही है। वहीं, पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह भी राज्यसभा में तो बने रहेंगे, पर उनको भी कोई महत्वपूर्ण जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी। हालांकि, वे नए युवाओं को मार्गदर्शन देते रहेंगे। वहीं कमलनाथ अभी विदेश के दौरे पर हैं। जानकारी है कि वो 5 जनवरी को भारत लौट सकते हैं।पिछली जीत से नहीं लिया सबक – 2018 में कांग्रेस में पूर्व सीएम कमलनाथ, दिग्विजय सिंह के साथ युवा के रूप में ज्योतिरादित्य सिंधिया थे। राजस्थान में अशोक गहलोत के साथ सचिन पायलट थे। इस वरिष्ठ और युवा नेता के समन्वय से कांग्रेस को बड़ी जीत मिली थी। इस बार मध्य प्रदेश में कमलनाथ और दिग्विजय सिंह की जय और वीरू की जोड़ी मुख्य रोल में थी। इन दोनों के ही बीच द्वंद्व जैसे कई बार स्थितियां देखी गई। युवा को पूरी तरह दरकिनार कर दिया गया। पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अरुण यादव, जीतू पटवारी जैसे नेताओं को साइड लाइन करके रखा गया। इस बार का चुनाव व्यक्ति विशेष केंद्रित हो गया था, जिसका कांग्रेस को बड़ा नुकसान उठाना पड़ा। मार्गदर्शक के रूप में अनुभव का लाभ ले सकते हैं – विशेषज्ञों का कहना है कि पूर्व सीएम कमलनाथ और दिग्विजय सिंह पुरानी पीढ़ी के नेता हैं। भाजपा से लड़ने के लिए कांग्रेस को पीढ़ी परिवर्तन की जरूरत थी। यह राहुल गांधी ने पहल की तो यह देर से उठाया सही कदम है। वरिष्ठों के अनुभव का लाभ पार्टी मार्गदर्शक के रूप में ले सकती है। वरिष्ठ पदों पर बैठाने से नई पीढ़ी का युवा पार्टी से जुड़ नहीं पाता। इसका ही प्रदेश में कांग्रेस को नुकसान हुआ है। कमलनाथ के पास विकल्प है कि वह बेटे को लोकसभा चुनाव लड़ाएं या खुद लड़ें। हालांकि, शीर्ष नेतृत्व के ऊपर निर्भर करेगा कि वे इस पर सहमत होते हैं या नहीं? वहीं पीसीसी एमपी अध्यक्ष जीतू पटवारी का कहना है िक कमलनाथ और दिग्विजय सिंह सहित सभी वरिष्ठ नेताओं के मार्गदर्शन से लोकसभा चुनाव में कांग्रेस 51 प्रतिशत वोट शेयर को प्राप्त करेगी।

13 हजार अतिथि विद्वानों के लिए वित्त ने जारी किया फंड, उच्च शिक्षा विभाग ने शुरु कराया वेरिफिकेशन.

A fund has been released for 13,000 guest scholars, and the Department of Higher Education has initiated the verification process. – 571 सरकारी कालेजों के प्राचार्यों ने मांगी रिपोर्ट, छात्रों की संख्या के आधार पर विद्वानों की दर्ज होगी जानकारी भोपाल – सरकारी कॉलेज में अतिथि विद्वानों की सैलरी के लिए वित्त विभाग ने फंड जारी कर दिया है। वित्त विभाग के आदेश के बाद उच्च शिक्षा विभाग ने भी वेरिफिकेशन करने का फैसला किया है। प्रदेश के 571 सरकारी कॉलेज से अतिथि विद्वानों की रिपोर्ट मांगी गई है। उच्च शिक्षा विभाग में प्राचार्य को निर्देश दिए हैं कि छात्रों की संख्या के आधार पर ही अतिथि विद्वानों की संख्या तय होगी। करीब 13 हजार से अधिक अतिथि विद्वानों के लिए बजट जारी किया गया है। विभाग ने निर्देश दिए हैं कि आनलाइन प्रवेश की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। विद्यार्थियों की संख्या की मैपिंग के बाद ही खाली पदों की पुष्टि होगी। प्राचार्य को गुरुवार को उच्च शिक्षा विभाग को आनलाइन मैपिंग की रिपोर्ट सौंपनी है। अधिकारियों ने बताया कि नवंबर की रिपोर्ट में जानकारी सामने आई है कि मध्य प्रदेश में 13700 से अधिक पद अतिथि विद्वानों के तय किए गए हैं। प्राचार्य ने रिपोर्ट भेजी है कि 6500 से अधिक कॉलेज में नियुक्त किए गए हैं। 7111 पद खाली है। कॉलेज में पढ़ने वाले विद्वानों की संख्या 4513 है। करीब 2000 से अधिक अतिथि विद्वानों को भुगतान बिना पढ़ाए ही किया गया है। इसके बाद विभाग की चिंता है कि गड़बड़ी न हो। इसलिए प्राचार्य से जानकारी बुलाई गई है। बता दें कि शिवराज सरकार ने अतिथि विद्वानों का मानदेय बढ़ाते हुए 25 हजार से 50 हजार कर दिया था।

क्राउड फंडिंग होगी जीतू की पहली परीक्षा.

Crowd funding will be done for Jitu’s first exam. कांग्रेस के प्रतिनिधि, मोर्चा संगठनों के अध्यक्ष को पत्र लिखकर ज्यादा से ज्यादा क्राउड फंडिंग करने के कहा भोपाल – मध्यप्रदेश कांग्रेस के नवनियुक्त अध्यक्ष जीतू पटवारी की पहली परीक्षा क्राउड फंडिंग में होगी। दरअसल, संगठन को आर्थिक रूप से मजबूत करने के लिए कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व ने प्रति व्यक्ति 138 रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा है। मध्यप्रदेश के संगठन को भी ये जिम्मेदारी दी गई है। ऐसे में पटवारी ने प्रदेश के सभी जिला, ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्षों, कांग्रेस विधायकगण, प्रदेश कांग्रेस के पदाधिकारी, निर्वाचित जनप्रतिनिधि, अभा कांग्रेस एवं प्रदेश कांग्रेस के प्रतिनिधि, मोर्चा संगठनों के अध्यक्ष को पत्र लिखकर ज्यादा से ज्यादा क्राउड फंडिंग करने के कहा है। राजीव सिंह ने बताया कि यह अभियान कांग्रेस पार्टी की 138 साल की यात्रा की याद दिलाता है। इस अभियान के तहत हम सभी समर्थकों को 138 रुपये से लेकर 1380 रुपये या इससे अधिक की राशि दान करने के लिए कहेंगे। 28 दिसम्बर को कांग्रेस स्थापना दिवस तक यह कार्यक्रम आॅनलाइन होगा। उसके बाद जमीनी अभियान शुरू कर घर-घर जाकर प्रत्येक बूथ में कम से कम दस घरों से न्यूनतम निर्धारित राशि का योगदान लिया जाएगा। वहीं प्रदेश पदाधिकारियों, निर्वाचित जनप्रतिनिधियों, जिला कांग्रेस अध्यक्ष, अभा और प्रदेश कांग्रेस के प्रतिनिधियों को 1380 रुपये का योगदान अभियान के तहत अनिवार्य है। 18 दिसंबर को लांच हुआ अभियान- अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने आॅनलाइन क्राउड फंडिंग कार्यक्रम 18 दिसम्बर को लांच किया। इस संबंध में अभा कांग्रेस कमेटी के महासचिव केसी वेणुगोपाल ने एक पत्र प्रदेश अध्यक्षों को जारी किया है। इसमें उन्होंने क्राउड फंडिंग के कार्यक्रम को अधिक से अधिक प्रचारित-प्रसारित कराने और अभियान को सशक्त बनाने के लिए कहा है।

2 हजार करोड़ का सरकार ने लिया कर्ज, अब प्रदेश में पौने चार लाख करोड़ वित्तीय भार.

The government has taken a loan of 2 trillion rupees, resulting in a financial burden of around 4 lakh crore rupees on the state now. उदित नारायण भोपाल – मध्य प्रदेश की नई सरकार के सामने वित्तीय स्थिति से जूझना बड़ी चुनौती है। नई सरकार के गठन के बाद राज्य शासन 2 हजार करोड़ का लोन लेने जा रही है। यह नई सरकार का पहला ऋण होगा। वित्त विभाग ने इसके लिए रिजर्व बैंक आॅफ इंडिया को विलिंगनेस लेटर लिखा है। राज्य सरकार पिछले 7 माह में 25 हजार करोड़ का कर्ज ले चुकी है। राज्य सरकार पर मार्च 2023 की स्थिति में 3 लाख 50 हजार करोड़ का कर्ज है। मध्यप्रदेश की पूर्व भाजपा सरकार साढ़े तीन लाख करोड़ के कर्ज का भार छोड़कर गई है। स्थिति यह है कि राज्य सरकार को सरकारी कामकाज चलाने के लिए लगातार कर्ज लेना पड़ रहा है। राज्य शासन पिछले 7 माह के दौरान 25 हजार करोड़ से ज्यादा का कर्ज बाजार से उठा चुकी है। राज्य सरकार ने चुनाव के पहले सितंबर माह में ही 12 हजार करोड़ का कर्ज लिया था। यही नहीं आचार संहिता के दौरान भी अक्टूबर और नंवबर माह में कर्ज लिया गया। प्रदेश में नई सरकार के गठन के बाद एक बार फिर सरकार दो हजार करोड़ का कर्ज लेने जा रही है। राज्य सरकार पर मार्च 2023 की स्थिति में 3 लाख 50 हजार करोड़ का कर्ज था, जो बढ़कर अनुमानत: पौने चार लाख करोड़ से ज्यादा का हो जाएगा।

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