LATEST NEWS

इंदौर में समय पर सीपीआर मिलने से बची जान, भाषण दे रही डॉक्टर को आया कॉर्डियक अरेस्ट

इंदौर. ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में आयोजित यूरोलॉजी कांफ्रेंस के दौरान एक गंभीर घटना घटित होने से बच गई। मैंगलोर से आई 40 वर्षीय डॉ. श्रीन भूटिया को भाषण देते समय अचानक कार्डियक अरेस्ट आया। वे मंच पर बोलते-बोलते बेहोश होकर गिर पड़ीं। उस समय हाल में लगभग 200 विशेषज्ञ डॉक्टर उपस्थित थे। स्थिति को समझते हुए वहां मौजूद डॉक्टरों ने बिना समय गंवाए तुरंत सीपीआर (कार्डियो पल्मोनरी रिससिटेशन) देना शुरू किया। कुछ ही मिनटों में डॉक्टर की सांस और नब्ज में सुधार दिखने लगा। प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें पास के निजी अस्पताल में भर्ती करवाया गया। डॉक्टरों ने बताया कि समय पर सीपीआर मिलने के कारण उनकी जान बच सकी। डॉक्टर को राजश्री अपोलो अस्पताल रेफर किया गया, जहां वे फिलहाल आईसीयू में भर्ती हैं। कार्डियक अरेस्ट से बचाव के उपाय     नियमित स्वास्थ्य जांच कराएं।     ब्लड प्रेशर, शुगर और कोलेस्ट्राल नियंत्रित रखें।     धूमपान और शराब से दूरी बनाएं।     रोजाना व्यायाम और योग करें।     तनाव कम करें व पर्याप्त नींद लें।     आमजन तक भी सीपीआर देने की प्रक्रिया के लिए शिविर लगाए जाना चाहिए।

अब घर बैठे आसान होगा रजिस्ट्री का काम, संपदा-2.0 पोर्टल और ऐप से पाएं सर्टिफाइड कॉपी

भोपाल   मध्यप्रदेश में पुरानी रजिस्ट्री की सर्टिफाइड कॉपी लेने के लिए सब रजिस्ट्रार कार्यालय जाने की जरूरत नहीं है। इसे ऑनलाइन निकलवाया जा सकता है। पंजीयन विभाग ने संपदा-2.0 पोर्टल और मोबाइल ऐप पर यह सुविधा शुरू की है। जिन रजिस्ट्री का डिजिटाइजेशन नहीं हुआ, उनकी सर्टिफाइड कॉपी के लिए भी इस माध्यम से आवेदन किया जा सकेगा। पंजीयन विभाग उसे डिजिटाइज कर ऑनलाइन उपलब्ध कराएगा। इसके लिए 300 रुपए फीस तय की गई है। मंदसौर पहला जिला जहां के 100 फीसदी डिजिटाइज्ड आइजी (पंजीयन) अमित तोमर के अनुसार वर्ष 2000 तक के दस्तावेज डिजिटाइज किए जा चुके हैं। मंदसौरएमपी का पहला जिला है जहां के 100 फीसदी रजिस्ट्री दस्तावेज डिजिटाइज हो चुके हैं। यहां 1908 तक की रजिस्ट्री डिजिटाइज हो चुकी हैं। केंद्र सरकार ने इस प्रयास के लिए मध्यप्रदेश सरकार को 24 करोड़ रुपए का विशेष अनुदान भी दिया है। क्या करना होगा: स्टेप-बाय-स्टेप समझिए -1- एमपीआइजीआर के संपदा पोर्टल पर जाएं। मांगी गई जानकारियां देकर लॉगिन आइडी बनाएं। -2- दस्तावेज प्रमाणित प्रति पर क्लिक कर ओपन करें।  3- पुरानी रजिस्ट्री का डॉक्यूमेंट नंबर डालकर सर्च करें। -4- डॉक्यूमेंट नंबर नहीं है तो किन वर्षों के बीच रजिस्ट्री कराई, वह अवधि और नाम से रजिस्ट्री सर्च करें। मिलने पर एड टू कार्ट करें। -5- अब तय शुल्क जमा करें। -6- संबंधित सब रजिस्ट्रार के डिजिटल हस्ताक्षर युक्त सर्टिफाइड कॉपी ई-मेल और व्हाट्सऐप पर भेजी जाएगी। जो रजिस्ट्री डिजिटाइज नहीं हैं, उनकी कॉपी के लिए यहीं से आवेदन किया जा सकता है।

रेड जोन अलर्ट: 18 जिलों में 11.23 लाख लोगों को नहीं मिलेगा सरकारी राशन, जानें लिस्ट

सतना   प्रदेश में गरीबी रेखा में पात्रता के बावजूद लाखों परिवार आज भी सरकारी खाद्यान्न से वंचित हैं। वजह कोई नई नहीं, बल्कि ई-केवाइसी की धीमी रफ्तार है। ई-केवाइसी पूरी न होने के कारण पात्र सदस्यों के नाम से खाद्यान्न पात्रता पर्ची जारी नहीं हो सकी। प्रदेश के 55 जिलों में 5.79 लाख नए सदस्यों को खाद्यान पात्रता में शामिल तो किए गए, लेकिन इनमें से सिर्फ 26 हजार के ही ई-केवाइसी पूरी हो सकी। वहीं पुराने कार्डधारियों में 5.44 लाख परिवारों के सदस्यों के नाम बढ़ाए गए। इनमें से भी केवल 24 हजार की ई-केवाइसी हो सकी है। प्रदेश में कुल 11.23 लाख सदस्य बढ़ें, जिनमें 50 हजार सदस्यों की ही ई-केवाइसी हो सकी है। इन जिलों का प्रदर्शन खराब प्रदेशभर के 18 जिले रेड जोन में रखे हैं। इनमें अनूपपुर, आलीराजपुर, डिंडोरी, पांढुर्णा, उमरिया, निवाड़ी, मऊगंज, मंडला, बड़वानी, आगर मालवा, हरदा, नीमच, नरसिंहपुर, झाबुआ, नर्मदापुरम, सिंगरौली, रतलाम और सीधी शामिल हैं। यहां 200 या इससे कम ही ई-केवाइसी हो सकी। ई-केवाइसी में शिवपुरी जिला प्रदेश में अव्वल ई-केवाइसी के मामले में शिवपुरी जिला प्रदेश में सबसे आगे है। यहां 35,679 नए पात्र सदस्यों में से 3,407 की ई-केवाइसी हो चुकी है। वहीं पुराने कार्डों में जुड़े 23 हजार सदस्यों में से 2,923 की ई-केवाइसी पूरी कर ली गई है। हालांकि इसके बाद अन्य जिलों की स्थिति अपेक्षाकृत कमजोर ही बनी हुई है। वेरिफिकेशन प्रक्रिया की सुस्त रफ्तार के चलते प्रदेश के लाखों गरीब राशन से वंचित हैं सतना-मैहर में स्थिति चिंताजनक सतना में हालात और भी गंभीर हैं। यहां 13 हजार नए पात्र सदस्यों को राशन(Government Ration) का लाभ मिलना है, लेकिन अब तक 390 सदस्यों की ई-केवाइसी हो पाई है। वहीं पुराने कार्डधारियों में 11.50 हजार सदस्यों में से मात्र 417 के सत्यापन हुए। मैहर में 7,945 नए सदस्य खाद्यान्न के पात्र हैं, पर केवल 342 की ई-केवाइसी हो सकी है। पुराने परिवारों में 5,867 सदस्यों की वृद्धि की, लेकिन इनमें से सिर्फ 271 सदस्यों का ही सत्यापन हो पाया।

तेजस एक्सप्रेस की बढ़ी राहत, इंदौर-मुंबई रूट पर अतिरिक्त फेरे 28 फरवरी तक चलेंगे

इंदौर  इंदौर-मुबंई रुट के यात्रियों के बढ़ती संख्या को देखते हुए रेलवे ने इंदौर मुंबई ट्रेन के फेरे एक माह के लिए और बढ़ा दिए है। अब यह ट्रेन 28 फरवरी तक चलेगी। माना जा रहा है कि इस ट्रेन को आने वाले समय के लिए स्थाई किया जा सकता है, क्योंकि इंदौर से मुंबई के बीच चलने वाली अवंतिका एक्सप्रेस में यात्रियों को आसानी से टिकट नहीं मिलते हैं। इस कारण तेजस ट्रेन को भी अच्छा प्रतिसाद मिल रहा है, हालांकि इसका किराया महंगा है। आने और जाने का समय भी ठीक नहीं है। इसके बावजूद यात्री इसमें सफर कर रहे हैं। अभी यात्रियों का दबाव इस रूट पर इतना ज्यादा है कि बसों में भी कई बार आसानी से सीट नहीं मिलती है। मुम्बई सेंट्रल से इंदौर के मध्य चलने वाली ट्रेन (संख्या 09085/09086) मुम्बई सेंट्रल इंदौर तेजस सुपरफास्ट स्पेशल ट्रेन के फेरे फिर विस्तारित किए गए हैं। पश्चिम रेलवे रतलाम मण्डल के जनसंपर्क अधिकारी मुकेश कुमार ने बताया कि गाड़ी संख्या 09085 मुम्बई सेंट्रल इंदौर तेजस स्पेशल, जिसका अंतिम फेरा 30 जनवरी 2026 तक था। उसे 27 फरवरी 2026 तक मुम्बई सेंट्रल से प्रति सोमवार, बुधवार एवं शुक्रवार को चलाया जाएगा। इसी प्रकार गाड़ी संख्या 09086 इंदौर मुम्बई सेंट्रल तेजस स्पेशल, जिसका अंतिम फेरा 31 जनवरी 2026 निर्धारित है। उसे 28 फरवरी तक इंदौर से प्रति मंगलवार, गुरुवार एवं शनिवार को चलाया जाएगा। यह ट्रेन पहले से निर्धारित मार्ग, कोच कंपोजिशन, दिन एवं ठहराव के साथ ही चलेगी। इनमें कोई बदलाव नहीं किया गया है। इसकी बुकिंग भी रेलवे ने शुरू कर दी है। इस ट्रेन का किराया तीन श्रेणी में है। पहली श्रेणी एसी 3 टीयर की है। जिसका किराया 1 हजार 805 रुपये है। इसमें 1 हजार 634 रुपये बेस फेयर, 40 रुपये रिजर्वेशन चार्ज, 45 रुपये सुपर फास्ट चार्ज और 86 रुपये जीएसटी शामिल है। दूसरी श्रेणी में एसी टू टीयर का किराया 2 हजार 430 रुपये है। इसमें 2 हजार 219 रुपये बेस फेयर और 50 रुपये रिजर्वेशन चार्ज, 45 रुपये सुपर फास्ट चार्ज है। इसके अलावा 116 रुपये जीएसटी शामिल है। तीसरी श्रेणी एसी फर्स्ट क्लास है। जिसका किराया 3 हजार 800 रुपये है। इसमें 3 हजार 484 रुपये बेस फेयर, 60 रुपये रिजर्वेशन चार्ज, 75 रुपये सुपर फास्ट चार्ज और 181 रुपये जीएसटी शामिल है।  

पेंशन विवाद पर हाईकोर्ट की कड़ी कार्रवाई, CMPF आयुक्त को चेतावनी, हाजिरी न देने पर गिरफ्तारी तय

जबलपुर  हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति मनिंदर सिंह भट्टी की एकलपीठ ने कोल माइंस प्राविडेंट फंड (सीएमपीएफ) के क्षेत्रीय आयुक्त, जबलपुर को 11 फरवरी को हाजिर होने के निर्देश दिए हैं। यदि वे हाजिर नहीं हुए तो उनके विरुद्ध गिरफ्तारी वारंट जारी करने की चेतावनी दी गई है। मामला एक सेवानिवृत्त कर्मचारी के परिवार से जुड़ा है, जो 14 साल से लंबित पेंशन मामले का दंश भोग रहा है। प्रकरण मूलतरू लिपिकीय त्रुटि से दोहरे प्राविडेंट फंड खाते से जुड़ा है। शहडोल जिला अंतर्गत धनपुरी निवासी 57 वर्षीय विमला बाई के पति स्व. संपत द्वारा मूल रूप से याचिका दायर की गई थी, जिनका निधन याचिका की सुनवाई दौरान हो गया था। विमला बाई अब उनकी कानूनी उत्तराधिकारी के रूप में मामला लड़ रही हैं। याचिका के अनुसार मृतक संपत ने वर्ष 1972 को साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) में शहडोल जिले के धनपुरी खदान में स्वीपर के पद पर नियुक्ति पाई थी और वर्ष 2012 को 40 वर्ष से अधिक सेवा के बाद सेवानिवृत्त हुए थे। किन्तु याचिकाकर्ता को वर्ष 1972 से 1981 के दौरान का प्रोविडेंट फंड, ग्रेच्युटी और अन्य लाभ नहीं दिए गए। मामले का मूल कारण साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) की एक लिपिकीय त्रुटि बताई गई है। कर्मचारी संपत के लिए गलती से दो सीएमपीएफ खाते (1972 और 1981) खोल दिए गए। 1981 वाले खाते को मुख्य मान लिए जाने के कारण 1974 से 1981 तक के उनके सीएमपीएफ अंशदान योगदान की गणना नहीं की गई। इस मामले में 23 फरवरी, 2022 को भी हाई कोर्ट में एक महत्वपूर्ण सुनवाई हुई थी। उस समय सीएमपीएफ ने कोर्ट को बताया था कि उनका जवाब तो 2013 में ही दाखिल हो गया था, जबकि अन्य पक्षों (एसईसीएल आदि) के 2019 में जवाब दाखिल करने के बाद ही उन्हें पता चला कि याचिकाकर्ता के दो पीएफ खाते हैं। मार्च 1974 से मार्च 1981 की अवधि के दौरान कटने वाला सीएमपीएफ अंशदान, जो मूल खाता संख्या से संबद्ध था, अद्यतन नहीं हो सका। इस कारण इसी त्रुटि के कारण 1972 से 1982 की अवधि के लाभ का भुगतान नहीं हो पाया था। याचिकाकर्ता के अनुसार इस त्रुटि के कारण न केवल भविष्य निधि का पूर्ण भुगतान बाधित हुआ, बल्कि पेंशन की गणना भी अधूरी रह गई, जिससे याचिकाकर्ता को भारी आर्थिक क्षति हुई। तब कोर्ट ने सीएमपीएफ को चार सप्ताह का समय देते हुए आदेश दिया था कि वह याचिकाकर्ता को बकाया लाभ का भुगतान करे और यह दर्शाता हलफनामा दाखिल करे। हाई कोर्ट ने ताजा सुनवाई में पाया कि 2022 का आदेश आज तक पूरी तरह लागू नहीं हुआ है।  

RC अपडेट: लोन खत्म होने के बाद बैंक का नाम हटाना अब सरल, देखें पूरा प्रोसेस

भोपाल अब तक वाहन का लोन पूरा चुकाने के बाद वाहन मालिक को संबंधित बैंक से फॉर्म-35  के तहत एनओसी (No Objection Certificate) लेनी होती थी. इसके बाद परिवहन विभाग की वेबसाइट पर आवेदन कर 75 रुपए शुल्क जमा करना पड़ता था और आरसी को कार्यालय में जमा करमा होता था. बैंक से जारी NOC  की जांच में काफी समय लगता था. वहीं आवेदनों की संख्या अधिक होने के कारण हर मामले की सही तरीके से जांच भी नहीं हो पाती थी. इससे फर्जी NOC के आधार पर हायपोथीकेशन हटाए जाने की संभावना बनी रहती थी, जिससे बैंक और वाहन मालिक दोनों को नुकसान हो सकता था. मध्य प्रदेश परिवहन विभाग ने वाहन लोन (हाइपोथेक्शन) पूरा कर चुके लाखों वाहन मालिकों को बड़ी राहत दी है।अब लोन चुकाने के बाद गाड़ी के रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (RC) से बैंक का नाम हटवाने के लिए न तो बैंक के चक्कर लगाने होंगे और न ही आरटीओ कार्यालय जाना पड़ेगा। विभाग ने यह पूरी प्रक्रिया फेसलेस, डिजिटल और पूरी तरह निःशुल्क कर दी है। पहले क्या था झंझट? अब तक वाहन लोन समाप्त होने के बाद बैंक से फॉर्म-35 और एनओसी लेना जरूरी होता था। इसके बाद परिवहन विभाग की वेबसाइट पर ₹75 की फीस जमा कर आरटीओ में फाइल लगानी पड़ती थी। बैंक की एनओसी के सत्यापन में कई बार हफ्तों या महीनों लग जाते थे, साथ ही फर्जी एनओसी का खतरा भी बना रहता था। नई स्मार्ट व्यवस्था कैसे करेगी काम? परिवहन विभाग की नई व्यवस्था में प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल कर दिया गया है। शून्य शुल्क – अब इस सेवा के लिए कोई सरकारी फीस नहीं लगेगी। ऑटो वेरिफिकेशन – parivahan.gov.in पर आवेदन करते ही पोर्टल सीधे बैंक के सेंट्रल सर्वर से लोन की जानकारी का मिलान करेगा। किसी भी फिजिकल दस्तावेज की जरूरत नहीं होगी। 7 दिन की समय-सीमा आवेदन के बाद आरटीओ अधिकारी को अधिकतम 7 दिन में निर्णय लेना होगा। यदि इस अवधि में कोई आपत्ति नहीं आती और वाहन पर कोई न्यायालयीन मामला नहीं है, तो सिस्टम आवेदन को ऑटो अप्रूव कर देगा। डिजिटल आरसी प्रक्रिया पूरी होते ही वाहन मालिक घर बैठे अपडेटेड डिजिटल आरसी डाउनलोड कर सकेंगे। कुछ मामलों में लग सकता है समय परिवहन विभाग के अनुसार, केवल 1–2 प्रतिशत मामलों में देरी हो सकती है। यह समस्या उन बैंकों के ग्राहकों को आ सकती है, जिनका सर्वर अभी परिवहन पोर्टल से लिंक नहीं है। ऐसे मामलों में प्रक्रिया फिलहाल पुराने मैनुअल तरीके से ही पूरी की जाएगी। प्रमुख बदलाव एक नजर में पहले जहां यह प्रक्रिया समय लेने वाली और झंझट भरी थी, वहीं अब यह पूरी तरह ऑनलाइन, तेज और पारदर्शी हो गई है। सरकार का मानना है कि इस नई व्यवस्था से न सिर्फ लोगों का समय बचेगा, बल्कि भ्रष्टाचार और फर्जीवाड़े की संभावना भी कम होगी।  

Budget :फ्लाईओवर से जाम होगा कम! जबलपुर पश्चिम में 300 करोड़ में बनेगा, त्रिपुरी चौक से मेडिकल तक सुविधा

जबलपुर  यातायात को सुचारु बनाने के उद्देश्य से पश्चिम विधानसभा क्षेत्र में एक और फ्लाईओवर निर्माण की योजना बनाई जा रही है। गढ़ा त्रिपुरी चौक से मेडिकल के बीच बनने वाले इस फ्लाईओवर का प्रस्ताव लोक निर्माण विभाग द्वारा तैयार किया जा रहा है। इसे आगामी बजट में शामिल किया जा सकता है। दो किलोमीटर लंबा होगा फ्लाईओवर प्रस्तावित फ्लाईओवर की लंबाई लगभग दो किलोमीटर होगी। इसके निर्माण से बायपास, मेडिकल कॉलेज, तिलवारा और धनवंतरी नगर की ओर जाने वाले वाहनों को बड़ी राहत मिलेगी। वर्तमान में इस मार्ग पर वाहनों की अत्यधिक संख्या के कारण दिनभर जाम की स्थिति बनी रहती है। आवासीय और चिकित्सा क्षेत्रों को जोड़ता है मार्ग त्रिपुरी चौक से मेडिकल तक का हिस्सा आवासीय, शैक्षणिक क्षेत्रों और प्रमुख चिकित्सा संस्थानों को जोड़ता है। यहां निजी वाहन, सार्वजनिक परिवहन और एम्बुलेंस जैसी आपात सेवाओं की आवाजाही अधिक रहती है। सीमित सड़क चौड़ाई और अवैध कब्जों के कारण यातायात प्रभावित होता है। कई लेग बनाने पर भी विचार इस फ्लाईओवर को बहुउपयोगी बनाने के लिए इसके कई लेग तैयार करने पर विचार किया जा रहा है। इससे आसपास के विभिन्न क्षेत्रों को सीधे जोड़ा जा सकेगा और मुख्य मार्ग के साथ वैकल्पिक मार्गों पर भी ट्रैफिक का बेहतर वितरण संभव होगा। 300 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत प्रस्तावित फ्लाईओवर की अनुमानित लागत करीब 300 करोड़ रुपये बताई जा रही है। तकनीकी सर्वेक्षण और डिजाइन प्रक्रिया पूरी होने के बाद प्रस्ताव शासन को भेजा जाएगा। गौरतलब है कि इसी विधानसभा क्षेत्र में प्रदेश का सबसे लंबा फ्लाईओवर पहले से मौजूद है। साथ ही सगड़ा में रेलवे लाइन के ऊपर फ्लाईओवर निर्माणाधीन है और बंदरिया तिराहे पर भी फ्लाईओवर प्रस्तावित है।  

हाईकोर्ट में जजों की भारी कमी, पेंडिंग मामलों की संख्या 4,80,592; समाधान में 40 साल लग सकते हैं

 जबलपुर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की मुख्यपीठ जबलपुर और खंडपीठ इंदौर व ग्वालियर में यदि न्यायाधीशों की मौजूदा संख्या 42 से बढ़कर 75 या 85 नहीं होती है, तो साढ़े चार लाख 80 हजार से अधिक लंबित प्रकरणों का बैकलाग खत्म करने में पांच या दस साल नहीं, बल्कि चार दशक से अधिक समय लग सकता है। एरियर कमेटी की रिपोर्ट महत्वपूर्ण इस संबंध में एरियर कमेटी की रिपोर्ट महत्वपूर्ण मानी जा रही है, जिसमें स्पष्ट किया गया है कि न्यायाधीशों की नियुक्ति में देरी लंबित मामलों के बढ़ने का प्रमुख कारण है। ऐसे में हाई कोर्ट में लंबित मामलों की स्थिति और उनके समाधान पर गंभीरता से ध्यान देना आवश्यक हो गया है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 39-ए के तहत राज्य का यह दायित्व है कि प्रत्येक नागरिक को न्याय तक समान और प्रभावी पहुंच सुनिश्चित की जाए। लेकिन यदि न्याय मिलने में दशकों का समय लगे, तो यह संवैधानिक प्रावधान केवल औपचारिकता बनकर रह जाता है। वर्तमान स्थिति इसी ओर संकेत करती है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में 11 जजों की कमी, बढ़ते मामलों से बढ़ेगी मुश्किल मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की बात करें तो यहां 53 स्वीकृत पदों के मुकाबले फिलहाल केवल 42 न्यायाधीश कार्यरत हैं। यानी 11 पद रिक्त, जो कुल स्वीकृत संख्या का करीब 20.75 प्रतिशत है। यह आंकड़ा इसलिए और चिंताजनक हो जाता है, क्योंकि मध्य प्रदेश पहले से ही लंबित मामलों के मामले में देश के बड़े राज्यों में शामिल है। हाईकोर्ट में जजों की यह कमी न केवल मामलों की सुनवाई को धीमा करती है, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया में आम लोगों के भरोसे को भी कमजोर करती है। वकीलों और सामाजिक संगठनों का लंबे समय से कहना रहा है कि जजों की कमी के कारण नियमित सुनवाई संभव नहीं हो पाती और तारीख पर तारीख न्याय व्यवस्था की पहचान बनती जा रही है। केंद्र सरकार ने संसद को यह भी बताया कि जिला और अधीनस्थ न्यायपालिका में नियुक्ति और पदों का निर्धारण संबंधित राज्य सरकार और हाईकोर्ट के अधिकार क्षेत्र में आता है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, मध्य प्रदेश में जिला और अधीनस्थ न्यायालयों में कुल 1639 न्यायिक अधिकारी कार्यरत हैं। इनमें से 803 जज अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग से आते हैं, जो कुल कार्यरत संख्या का 48.99 प्रतिशत है। वहीं, करीब 51 प्रतिशत न्यायिक अधिकारी अन्य वर्गों से हैं। हालांकि, सरकार ने संसद में जिला-वार रिक्त पदों का कोई अलग-अलग ब्योरा पेश नहीं किया। इससे यह साफ हो जाता है कि मध्य प्रदेश जैसे बड़े राज्य में निचली अदालतों पर बढ़ते बोझ के बावजूद, जजों की वास्तविक कमी का जिला स्तर पर कोई सार्वजनिक और पारदर्शी आकलन सामने नहीं आया है। जानकारों का मानना है कि अगर जिला-वार आंकड़े सामने आएं, तो स्थिति और भी गंभीर नजर आ सकती है। देशभर की स्थिति: कई हाईकोर्ट में हालात बेहद गंभीर अगर देशभर की तस्वीर पर नजर डालें, तो हालात केवल मध्य प्रदेश तक सीमित नहीं हैं। बॉम्बे हाईकोर्ट में 94 स्वीकृत पदों में से 14 पद खाली हैं, यानी करीब 14.9 प्रतिशत। दिल्ली हाईकोर्ट में 60 में से 16 पद (26.6 प्रतिशत) और मद्रास हाईकोर्ट में 75 में से 22 पद (29.3 प्रतिशत) रिक्त हैं। सुप्रीम कोर्ट में भी 34 स्वीकृत पदों में से एक पद खाली है, जो भले ही प्रतिशत में कम लगे, लेकिन शीर्ष अदालत में हर एक जज की भूमिका बेहद अहम होती है। इलाहाबाद, कलकत्ता और जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट में सबसे ज्यादा संकट आंकड़ों के मुताबिक, इलाहाबाद हाईकोर्ट में जजों की कमी सबसे ज्यादा है। यहां 160 स्वीकृत पदों के मुकाबले 50 पद खाली हैं, यानी 31.25 प्रतिशत। कलकत्ता हाईकोर्ट की स्थिति और भी गंभीर है, जहां 72 में से 29 पद रिक्त हैं, जो 40.3 प्रतिशत बैठता है। वहीं जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख और झारखंड हाईकोर्ट में हालात बेहद चिंताजनक बताए गए हैं, जहां 44 प्रतिशत से अधिक पद खाली हैं। यह आंकड़े बताते हैं कि देश के कई हिस्सों में न्यायपालिका संसाधनों की भारी कमी से जूझ रही है। मध्य प्रदेश की निचली अदालतों में वर्गवार प्रतिनिधित्व मध्य प्रदेश में जिला और अधीनस्थ न्यायालयों में कार्यरत न्यायिक अधिकारियों का वर्गवार विवरण भी संसद में पेश किया गया। इसके अनुसार:     अनुसूचित जाति (SC): 263 जज – लगभग 16.05%     अनुसूचित जनजाति (ST): 232 जज – लगभग 14.15%     अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC): 308 जज – लगभग 18.79%     अन्य वर्ग: 836 जज – लगभग 51.01% कुल मिलाकर 1639 कार्यरत न्यायिक अधिकारियों में से लगभग आधे SC, ST और OBC वर्ग से हैं। हालांकि, सवाल यह भी उठ रहा है कि जब पद ही पर्याप्त नहीं हैं, तो प्रतिनिधित्व के ये आंकड़े न्यायिक बोझ को कितना कम कर पा रहे हैं। भोपाल के एडवोकेट सुनील आदिवासी ने द मूकनायक से बातचीत में न्यायपालिका की मौजूदा स्थिति पर गंभीर चिंता जताते हुए कहा कि अदालतों में जजों की कमी तो पहले से ही एक बड़ी समस्या है, लेकिन इससे भी ज्यादा चिंताजनक बात यह है कि दलित और आदिवासी वर्ग से आने वाले जज केवल नाम मात्र के बराबर रह गए हैं। उनका कहना है कि सामाजिक न्याय की जिस अवधारणा की बात संविधान करता है, वह तब तक अधूरी रहेगी, जब तक न्याय देने वाली व्यवस्था में ही वंचित तबकों की पर्याप्त भागीदारी सुनिश्चित नहीं की जाती। एडवोकेट सुनील आदिवासी ने आगे कहा कि जब न्यायपालिका में दलित-आदिवासी समुदाय का प्रतिनिधित्व बेहद सीमित होता है, तो इसका असर फैसलों की संवेदनशीलता और समाज के अंतिम व्यक्ति तक न्याय की पहुंच पर भी पड़ता है। उन्होंने कहा कि यह स्थिति केवल एक प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि संवैधानिक मूल्यों के लिए भी एक गंभीर चेतावनी है। यदि समय रहते जजों की नियुक्ति में सामाजिक विविधता और प्रतिनिधित्व पर ध्यान नहीं दिया गया, तो न्यायपालिका से आम जनता का भरोसा कमजोर होना तय है। न्याय में देरी और न्याय से वंचित? विशेषज्ञों का मानना है कि जजों की कमी सीधे-सीधे न्याय में देरी से जुड़ी हुई है। जब एक-एक जज पर हजारों मामलों का बोझ हो, तो त्वरित और प्रभावी न्याय की कल्पना करना मुश्किल हो जाता है। सुप्रीम कोर्ट से लेकर जिला अदालतों तक रिक्त पदों को भरने में हो रही देरी पर … Read more

धार्मिक आस्था और आधुनिक अधोसंरचना का अद्भुत संगम — भैरव मंदिर, गूढ़ (रीवा) का भव्य लोकार्पण

A wonderful confluence of religious faith and modern infrastructure – Grand inauguration of Bhairav Temple, Gudh (Rewa) जितेन्द्र श्रीवास्तव विशेष संवाददाता  जबलपुर। धार्मिक श्रद्धा, सांस्कृतिक विरासत और आधुनिक वास्तुकला के सुंदर समन्वय का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत करते हुए आज गूढ़ स्थित भैरव मंदिर परिसर का भव्य लोकार्पण माननीय मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मुख्य आतिथ्य में सम्पन्न हुआ। यह अवसर न केवल क्षेत्र के लिए गौरव का क्षण रहा, बल्कि हजारों श्रद्धालुओं के लिए आस्था के नए केंद्र की स्थापना का ऐतिहासिक दिन भी बना। मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि यह मंदिर परिसर केवल पूजा-अर्चना का स्थल नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का भी प्रमुख केंद्र बनेगा। उन्होंने इसे प्रदेश की धार्मिक पर्यटन संभावनाओं को सशक्त बनाने वाला महत्वपूर्ण कदम बताया। परंपरा और आधुनिकता का संतुलित स्वरूप मंदिर परिसर की संपूर्ण वास्तु संकल्पना प्रसिद्ध आर्किटेक्ट आशीष श्रीवास्तव द्वारा तैयार की गई है। उनके डिज़ाइन में पारंपरिक मंदिर वास्तुकला की गरिमा और आधुनिक सुविधाओं का उत्कृष्ट संतुलन देखने को मिलता है। भव्य शिल्पकला, विस्तृत प्रांगण, सुव्यवस्थित मार्ग, श्रद्धालुओं के लिए सुविधाजनक व्यवस्था और सौंदर्यपूर्ण प्रकाश व्यवस्था इस परिसर को विशिष्ट पहचान प्रदान करती है। आर्किटेक्ट श्रीवास्तव ने कहा कि इस परियोजना का उद्देश्य केवल एक मंदिर निर्माण नहीं, बल्कि एक ऐसा आध्यात्मिक एवं सामाजिक केंद्र विकसित करना था जहाँ लोग शांति, संस्कृति और सामुदायिक जुड़ाव का अनुभव कर सकें। आस्था से सामाजिक समरसता तक भैरव मंदिर परिसर आने वाले समय में धार्मिक अनुष्ठानों, सांस्कृतिक आयोजनों, आध्यात्मिक प्रवचनों तथा सामुदायिक कार्यक्रमों का प्रमुख स्थल बनने की दिशा में अग्रसर है। स्थानीय नागरिकों और श्रद्धालुओं ने इस पहल का स्वागत करते हुए इसे क्षेत्र के विकास और सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने वाला कदम बताया। आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्थल यह नव-निर्मित परिसर केवल वर्तमान पीढ़ी के लिए आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए संस्कृति, परंपरा और सामाजिक समरसता का प्रेरक प्रतीक सिद्ध होगा। भव्यता, आध्यात्मिकता और आधुनिक दृष्टिकोण का यह संगम रीवा जिले को धार्मिक मानचित्र पर एक नई पहचान देने जा रहा है।

देवी लोक की उड़ान, पार्किंग में दलदल का पड़ाव: नलखेड़ा में विकास बनाम कीचड़

Flight to the Divine, Parking Lot to the Swamp: Development vs. Mud in Nalkheda संवाददाता चंदा कुशवाहनलखेड़ा । इन दिनों “देवी लोक” निर्माण की चर्चाएं आसमान छू रही हैं। योजनाओं की फाइलें इतनी ऊंची उड़ान भर रही हैं कि लगता है जल्द ही शहर अंतरिक्ष पर्यटन की सूची में शामिल हो जाएगा। लेकिन ज़मीन पर उतरते ही हकीकत ऐसी फिसलन भरी है कि हर बारिश के बाद पार्किंग स्थल कुश्ती का अखाड़ा बन जाता है, जहां गाड़ियां नहीं, संतुलन गिरता है।स्थानीय लोगों का कहना है कि बारिश होते ही पार्किंग क्षेत्र का रंग “मिट्टी ब्राउन” हो जाता है और जूते-चप्पल “कीचड़ संस्करण 2.0” में अपग्रेड हो जाते हैं। श्रद्धालु और आम नागरिक दोनों ही मजबूरन इस दलदली रास्ते से गुजरते हैं, मानो देवी लोक से पहले “कीचड़ लोक” की परीक्षा देनी अनिवार्य हो।नगर के एक दुकानदार ने व्यंग्य करते हुए कहा,“देवी लोक बने या न बने, पार्किंग में कीचड़ का स्थायी स्मारक पहले तैयार हो गया है।”वहीं एक राहगीर का कहना है कि विकास की बातें सुनकर उम्मीद जगती है, लेकिन हर बारिश के बाद वही पुराना दृश्य देखकर लगता है कि योजनाएं शायद बादलों के साथ उड़ जाती हैंऔर ज़मीन तक पहुंचते-पहुंचते गल जाती हैं।नगरवासियों की मांग है कि देवी लोक जैसी बड़ी परियोजना से पहले बुनियादी सुविधाओं पर ध्यान दिया जाए। कम से कम इतना तो हो कि बारिश में पार्किंग तालाब न बने और शहरवासियों को कीचड़ में “आस्था के साथ स्लिप टेस्ट” न देना पड़े।अब देखना यह है कि प्रशासन पहले देवी लोक की तस्वीर बनाएगा या पार्किंग से कीचड़ की तस्वीर हटाएगा। फिलहाल नलखेड़ा में विकास की चर्चा और कीचड़ की मौजूदगी साथ-साथ चल रही है, बिल्कुल वैसे ही जैसे पोस्टर में चमक और ज़मीन पर फिसलन।

बाबूलाल वरकडे भगत (कान्हावाडी) को पद्मश्री पुरस्कार देने की मांग को लेकर अजाक्स संगठन आमला ने राष्ट्रपति के नाम एसडीएम को सौपा ज्ञापन।

Ajax organization Amla submitted a memorandum to the SDM in the name of the President demanding Padmashree award for Babulal Varkade Bhagat (Kanhawadi). हरिप्रसाद गोहे आमला। आज दिनांक 30/01/2026 को अजाक्स जिला कार्यकारिणी बैतूल के आव्हान पर  बाबूलाल वरकडे भगत (कान्हावाडी) को पद्मश्री पुरस्कार देने की मांग को लेकर अजाक्स संगठन आमला ने राष्ट्रपति के नाम एसडीएम आमला को ज्ञापन सौपा, सौपे गए ज्ञापन में निवेदन किया गया है कि बैतूल जिले के विकासखंड घोड़ाडोंगरी ग्राम पंचायत कान्हावाड़ी में जन्मे वैद्य बाबूलाल वरकडे जी का जन्म ग्राम कान्हावाड़ी में दिनांक 01/10/1938 को हुआ है आप वैद्य के रूप में विगत कई वर्षों से क्षेत्र में निरंतर जन सेवा और संपूर्ण भारत के लोगों को कैंसर की बीमारी या अन्य बीमारी से पीड़ित मरीजों का इलाज लगातार कर रहे हैं आयुर्वेद( जड़ी बूटियां) के द्वारा  बीमारियां दूर कर रहे हैं साथ ही सभी मरीजों को निशुल्क सेवा दे रहे हैं। अतः राष्ट्रपति से अजाक्स संघ निवेदन करता है कि भविष्य में बाबूलाल वरकडे भगत को पद्मश्री पुरस्कार दिया जावे ज्ञापन सौंपने वालों में मुख्य रूप से अजाक्स तहसील अध्यक्ष आमला राजाराम नागले, अजाक्स ब्लॉक अध्यक्ष आमला श्रीमती रेखा धुर्वे, अजाक्स जिला उपाध्यक्ष बैतूल रामानंद बेले, अजाक्स जिला संयुक्तसचिव बैतूल देवानंद धुर्वे अजाक्स तहसील उपाध्यक्ष शिवप्रसाद गुजरे, श्रीमती रिंदों उइके,अजाक्स ब्लॉक उपाध्यक्ष दिनेश सोनारे,श्रीमती सरिता चौकीकर,अजाक्स तहसील महासचिव हरिदास पाटिल, रमेश ब्राह्मने, जगदीश निरापुरे, बालाराम मर्सकोले अजाक्स तहसील सचिव हरिदास बड़ोदे, श्रीमती रेखा नागले अजाक्स ब्लॉक कोषाध्यक्ष दवतसिंग धुर्वे, अजाक्स कार्यकारिणी सदस्य दिलीप कुमार दवंडे, श्रीमती मोनिका मर्सकोले सहित भारी संख्या में अजाक्स संगठन के सदस्यगण उपस्थित रहे ।

माउंट किलिमंजारो (तंजानिया) से आमला पहुंचे पर्वतारोही प्रताप बिसंदरे।

Mountaineer Pratap Bisandre reached Amla from Mount Kilimanjaro (Tanzania). हरिप्रसाद गोहे  आमला । अफ्रीका महाद्वीप के माउंट किलिमंजारो (तंजानिया) पर सफलतापूर्वक आरोहण करने के पश्चात, आज अपने गृहक्षेत्र आमला वापस लौटे प्रताप बिसंदरे। इस अवसर पर रेलवे स्टेशन आमला पर उनके स्वागत हेतु जिला पिट्टू एसोसिएशन के अध्यक्ष नीरज सोनी, व्यापारी संघ अध्यक्ष संजय साहू, आमला विकास समिति उपाध्यक्ष शेख हफीज, समाजसेवक चन्द्रशेखर पंड़ोले सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।बताया गया पर्वतारोही प्रताप बिसंदरे ने माउंट किलिमंजारो (तंजानिया) जो अफ्रीका की सबसे ऊंची चोटी है और इसकी ऊंचाई 5,895 मीटर (19,340 फीट) है, इसे दुनिया का सबसे ऊंचा अकेला खड़ा पहाड़ कहा जाता है पर पर्वतारोहण कर 26 जनवरी 2026 को प्रातः 8:34 बजे (तंजानिया समयानुसार) सफलतापूर्वक आरोहण कर राष्ट्रध्वज तिरंगा लहराया था। पर्वतारोही प्रताप बिसंद्रे का जन्म, तहसील आमला के ग्राम बड़गांव में हुआ। इनके पिता रामचरण बिसंद्रे जी और परिवार, ग्राम बडगांव में ही निवास करता है। प्रताप जी ने पर्वतारोहण का बेसिक कोर्स 2021 में नेहरू पर्वतारोहण संस्थान उत्तरकाशी से ‘A’ ग्रेड में किया, इसके बाद वर्ष 2023 में पर्वतारोहण का एडवांस कोर्स भी नेहरू पर्वतारोहण संस्थान उत्तरकाशी से पूरा किया । कोर्स के दौरान भी उत्तराखंड में स्थित पर्वत माछाधार और हुर्रा टॉप जिनकी ऊंचाई 16000 फीट है उनको भी कोर्स ग्रुप के साथ सफलता पूर्वक आरोहण किया। इन्होंने 15 अगस्त 2023 को माउंट यूनाम ऊँचाई 20049 फीट (6111 मी०) की चोटी पर सफलतापूर्वक आरोहण किया। पुनः 15 अगस्त 2024 को माउंट यूनाम ऊँचाई 20049 फीट (6111 मी०) की चोटी पर दूसरी बार आरोहण किया। 27 अगस्त 2024 को कांग यात्से–2 की चोटी ऊँचाई 20505 फीट (6250मी०) पर आरोहण किया।  30 अगस्त 2024 को कांग यात्से–1 की चोटी ऊँचाई 21000 फीट (6400 मी०) पर आरोहण‌ करने में सफलता प्राप्त की है।

केंद्रीय जेल जबलपुर की झांकी “गुडिया” बनी जेल सुधार की संवेदनशील मिसाल

The tableau of Central Jail Jabalpur, “Gudiya”, became a sensitive example of prison reform. जितेन्द्र श्रीवास्तव विशेष संवाददाता/ कैमरामैन  अर्पिता श्रीवास्तव जबलपुर । केंद्रीय जेल जबलपुर द्वारा प्रस्तुत झांकी “गुडिया” ने जेल सुधार और मानवीय संवेदनाओं को प्रभावशाली ढंग से सामने रखा है। यह झांकी केंद्रीय जेल जबलपुर के बंदियों के अथक परिश्रम से तैयार की गई है, जो समाज को यह संदेश देती है कि सुधार की राह ही वास्तविक परिवर्तन की कुंजी है। मासूम “गुडिया” की कहानी से खुलता है सच झांकी में एक छोटी बच्ची “गुडिया” की कहानी के माध्यम से उन बच्चों की स्थिति को दर्शाया गया है, जो अपने माता या पिता के साथ जेल में रहने को मजबूर होते हैं। कुछ वर्ष पूर्व तक दंडात्मक जेल व्यवस्था के चलते 6 वर्ष तक के निर्दोष बच्चों को भी जेल के कठिन वातावरण में रहना पड़ता था। सुधारात्मक सोच से बदली बच्चों की दुनिया झांकी में यह भी दर्शाया गया है कि मध्यप्रदेश सरकार द्वारा जेलों में सुधारात्मक विचारधारा अपनाए जाने के बाद बच्चों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आए हैं। अब जेल परिसरों में बच्चों के लिए बेटी बचाओ–बेटी पढ़ाओ का मजबूत संदेश “गुडिया” झांकी बेटे और बेटी के बीच भेदभाव समाप्त करने का संदेश देती है और “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” योजना को प्रभावी रूप से प्रस्तुत करती है। यह समाज में समानता और जागरूकता को बढ़ावा देने वाली झांकी है। नारी सशक्तिकरण और बंदियों की भावनाएँ भी दिखीं झांकी में महिला कमांडो के माध्यम से नारी सशक्तिकरण को दर्शाया गया है। वहीं जेल में सजा काट रहे बंदियों द्वारा जनजातीय गौरव दिवस जैसे अवसरों पर अपनी रिहाई की आशा को नृत्य के माध्यम से व्यक्त करते हुए दिखाया गया है, जो दर्शकों को भावनात्मक रूप से जोड़ता है। समाज के लिए एक मजबूत संदेश कुल मिलाकर, केंद्रीय जेल जबलपुर की झांकी “गुडिया” यह साबित करती है कि जेल केवल दंड का स्थान नहीं, बल्कि सुधार, संवेदना और मानवता का केंद्र भी बन सकती है।

खेतों से मुफ्त बटोर रहे गन्ने की पत्तियां,भूमि को नहीं मिल पाएगी जैविक खाद ।

Sugarcane leaves are being collected for free from the fields, the land will not be able to get organic manure. हरिप्रसाद गोहेआमला/बैतूल ! एक तरफ सरकार खेतों में नरवाई जलाने पर पाबंदी लगाकर किसानों को फसल के अवशेष से जैविक खाद बनाने और भूमि की उर्वरा शक्ति बढ़ाने के लिए प्रोत्साहन दे रही है, वहीं दूसरी ओर बैतूल जिले में एक कंपनी के द्वारा किसानों के खेतों से गन्ने की सूखी पत्तियां बटोरने का काम किया जा रहा है। इससे खेतों में सूखी पत्तियां ही शेष नहीं रहती हैं जिससे न तो जैविक खाद बन पाएगी और न ही जमीन की उर्वरा शक्ति बढ़ेगी। हद तो यह है कि कृषि विभाग का अमला इसकी जानकारी होने के बाद भी आंखे बंद किए बैठा नजर आ रहा है। उन्नत किसानों की मानें तो किसान गन्ने की सूखी पत्तियों को मल्चर की मदद से बारीक कर मिट्टी में मिला देते थे जिससे वह सड़ने के बाद जैविक खाद में बदल जाती थी और किसानों को फसलों से बेहतर पैदावार मिल जाती थी। अब निजी कंपनी के द्वारा किसानों को मुफ्त में खेत साफ कर देने का लालच दिखाकर गन्ने की पत्तियों को बटोरकर बंडल बनाने का काम किया जा रहा है।कंपनी के द्वारा जिले के गन्ना उत्पादक क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर यह कार्य प्रारंभ किया गया है और जगह-जगह गन्ने की पत्तियों के बंडल जमा कर रखे गए हैं।बारूद का काम कर रहे इन बंडलों में आग लगने की घटनाएं भी होने लगी हैं। गत दिवस मुलताई तहसील के ग्राम साईंखेड़ा में राहुल साहू के खेत में तथा गोलू मांकोड़े के घर के समीप रखे सूखी पत्तियों के बंडल में आग लग गई। घटना को लेकर ग्रामीणों ने प्रशासन को आवेदन देकर शिकायत दर्ज कराई है और भविष्य में बड़ी अनहोनी की आशंका जताई है। बताया जा रहा है गन्ने का कचरा एक कंपनी द्वारा स्टाक किया गया था। हैरानी की बात यह रही कि घटना के बाद कंपनी का कोई भी कर्मचारी मौके पर नहीं पहुंचा। आग इतनी तेजी से फैल रही थी कि आसपास के घरों और खेतों को नुकसान पहुंचने का खतरा बन गया था। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि यदि कोई कंपनी गांव या निजी भूमि पर ज्वलनशील कचरा या डस्ट रखती है, तो उसकी सुरक्षा, निगरानी और नियमित निरीक्षण की पूरी जिम्मेदारी कंपनी की हो। शुगर मिल के प्रयास से सुधर रहीं जमीनें:जिले में गन्ना उत्पादक क्षेत्रों में शुगर मिलों के प्रबंधन की ओर से अनुदान पर गन्ने की सूखी पत्तियों को मल्चिंग करने वाले उपकरण दिलाए गए हैं। इनसे किसान और युवाओं को नया राेजगार भी मिल रहा है वहीं किसानों को खेतों में आग लगाने की बजाय मल्चिंग कराने पर शुगर मिलों के द्वारा किराए में 50 प्रतिशत की छूट भी दी जाती है। इसका ही नतीजा है कि पिछले करीब पांच वर्ष से जिले के गन्ना उत्पादक किसान कटाई के बाद गन्ने के खेतों में अवशेषों को अाग के हवाले न करते हुए मल्चिंग कर जैविक खाद के लिए बिखरा रहे हैं। इससे मिट्टी की उर्वरता, नमी संरक्षण और पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में भी मदद मिल रही है। जागरूक किसानों का कहना है कि निजी कंपनियों के द्वारा गन्ने की सूखी पत्ती का संग्रह किया जाना न केवल किसानों के हितों के विरुद्ध है, बल्कि शासन द्वारा प्रोत्साहित सतत कृषि और पर्यावरण संरक्षण प्रयासों को भी सीधी क्षति पहुंचा रहा है। इससे मिट्टी की उर्वरता, जैविक कार्बन स्तर और जल संरक्षण पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधित कंपनियों व एजेंसियों की गतिविधियों की तत्काल जांच कराई जाए, बिना वैधानिक अनुमति फसल अवशेष संग्रह पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगाया जाए और किसानों को क्षति पहुंचाने वाली गतिविधियों को रोकने के लिए आवश्यक प्रशासनिक आदेश जारी किए जाएं। गन्ने की पत्ती से एक हेक्टेयर में बनती है पांच टन जैविक खाद:जिले में जैविक खेती कर गन्ने की फसल लगाने वाले किसानों का मानना है कि एक हेक्टेयर खेत से 7.5-10 टन सूखे पत्ते उपलब्ध होते हैं। इन्हें मल्चिंग कर खेत की मिट्टी में मिलाने से 5 टन के करीब जैविक खाद प्राप्त होता है।इससे फसल में पोषक तत्वों की कमी नहीं होती है और पैदावार भी बढ़ती है।

आमला : स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के एटीएम में गंदगी का अंबार।

Amla: Piles of garbage in State Bank of India ATM. हरिप्रसाद गोहेआमला। नगर के जनपद चौक के करीब रतेड़ा रोड़ पर स्थित स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के एटीएम में साफ सफाई के आभाव में कचरा और गंदगी बढ़ती जा रही है। जो सरकार के स्वच्छता अभियान पर भी प्रश्नचिन्ह खड़ा कर रहा है।स्थानीय नागरिकों ने बताया की नगर के मुख्य व्यावसायिक क्षेत्र में स्थापित, इस एकमात्र एटीएम में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया तथा अन्य बैंक के उपभोक्ता एटीएम सुविधा का लाभ लेते हैं लेकिन स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के प्रबंधन की लापरवाही से यहां कई दिनों से साफ़ सफाई नहीं हो पाई है जो बैंक खाताधारकों में आक्रोश का कारण बनते जा रही है। इन्होंने क्या कहाबैंक ने नागरिकों की सुविधा के लिए एटीएम लगवाया है, नागरिकों को साफ़ सफाई का ध्यान रखना चाहिए। आपने जानकारी दी है तो हम भी अपने स्तर से समस्या समाधान की कोशिश करेंगे।समीर चंदेल,शाखा प्रबंधक,स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, आमला ।

slot server thailand super gacor

spaceman slot gacor

slot gacor 777

slot gacor

Nexus Slot Engine

bonus new member

olympus

situs slot bet 200

slot gacor

slot qris

link alternatif ceriabet

slot kamboja

slot 10 ribu

https://mediatamanews.com/

slot88 resmi

slot777

https://sandcastlefunco.com/

slot bet 100

situs judi bola

slot depo 10k

slot88

slot 777

spaceman slot pragmatic

slot bonus

slot gacor deposit pulsa

rtp slot pragmatic tertinggi hari ini

slot mahjong gacor

slot deposit 5000 tanpa potongan

mahjong

spaceman slot

https://www.deschutesjunctionpizzagrill.com/

spbo terlengkap

cmd368

368bet

roulette

ibcbet

clickbet88

clickbet88

clickbet88

bonus new member 100

slot777

https://bit.ly/m/clickbet88

https://vir.jp/clickbet88_login

https://heylink.me/daftar_clickbet88

https://lynk.id/clickbet88_slot

clickbet88

clickbet88

https://www.burgermoods.com/online-ordering/

https://www.wastenotrecycledart.com/cubes/

https://dryogipatelpi.com/contact-us/

spaceman slot gacor

ceriabet link alternatif

ceriabet rtp

ceriabet

ceriabet link alternatif

ceriabet link alternatif

ceriabet login

ceriabet login

cmd368

sicbo online live

Ceriabet Login

Ceriabet

Ceriabet

Ceriabet

Ceriabet

casino online

clickbet88

login kudahoki88

Ceriabet

Ceriabet

Ceriabet

slot olympus

sbobet

slot thailand

sbobet