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प्रदेश में मेट्रो रेल परियोजना के कार्य गुणवत्तापूर्ण ढंग से समय-सीमा का ध्यान रखते हुए पूरे किए जाएं :मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश में मेट्रो रेल परियोजना के कार्य गुणवत्तापूर्ण ढंग से समय-सीमा का ध्यान रखते हुए पूरे किए जाएं। भोपाल और इंदौर मेट्रो रेल परियोजना के कार्य प्राथमिकता से पूरे किए जाना सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि लोक निर्माण और अन्य संबंधित विभागों से समन्वय बनाकर कार्य करें, जिससे कार्य के दौरान कोई कठिनाई नहीं आए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शुक्रवार को मुख्यमंत्री निवास स्थित समत्व भवन में मध्यप्रदेश मेट्रो रेल परियोजना की समीक्षा कर रहे थे। भोपाल मेट्रो रेल परियोजना भोपाल मेट्रो रेल परियोजना को नवंबर 2018 में मंजूरी दी गई। भोपाल मेट्रो की दोनों लाइन की कुल वास्तविक लंबाई लगभग 30 किलोमीटर है और इसके 30 स्टेशनों में ये 2 भूमिगत स्टेशन शामिल हैं। जिसकी लागत 10 हजार 033 करोड़ रूपए अनुमानित है। शुरुआत में यहां 3 कार वाली कुल 27 ट्रेन संचालित होंगी। भविष्य में मेट्रो की कार संख्या बढ़ाकर 6 की जा सकती है। ऑरेंज लाइन-करोंद चौराहा से एम्स साकेत नगर तक और ब्लू लाइन- भदभदा चौराहा से रत्नागिरी तिराहा तक होगी। मेट्रो डिपो सुभाष नगर में स्थापित होगा। भोपाल मेट्रो के पहले फेज (पुल बोगदा से एम्स तक) का कार्य अगस्त 2025 तक पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है, जिसकी लंबाई 7 किलोमीटर और स्टेशनों की संख्या 8 है। वहीं, दूसरे फेज में करोंद चौराहा से पुल बोगदा तक 9 किलोमीटर में 6 स्टेशन बनाए जाएंगे इनमें से 2 स्टेशन जमीन के नीचे बनाए जाएंगे। भोपाल मेट्रो के तीसरे फेज में भदभदा चौराहा से रत्नागिरी तिराहा तक 14.16 किलोमीटर में मेट्रो ट्रैक बनाया जाएगा, जिसमें कुल 14 एलिवेटेड स्टेशन निर्मित किए जाएंगे। भोपाल मेट्रो के दूसरे और तीसरे फेज का निर्माण कार्य जून 2028 तक पूर्ण करने का लक्ष्य है। यहां पुल बोगदा ऑरेंज और ब्लू लाइन का इंटरचेंज स्टेशन होगा। पूर्व में सुभाष नगर से रानी कमलापति स्टेशन के बीच मेट्रो की टेस्टिंग अक्टूबर 2023 में की जा चुकी है। इंदौर मेट्रो रेल परियोजना राज्य सरकार ने इंदौर मेट्रो ट्रेन परियोजना को नवंबर 2018 में स्वीकृति प्रदान की थी। इस परियोजना की कुल लंबाई 31 किलोमीटर से अधिक है, 7 भूमिगत सहित जिसमें कुल 28 स्टेशन बनाए गए हैं। यहां पहले फेज में 3 कार वाली ट्रेन की शुरुआत हो चुकी है। आगामी वर्षों में मेट्रो ट्रेन बढ़ाकर 25 और मेट्रो कार संख्या आवश्यकतानुसार 6 तक बढ़ाई जा सकती है। इंदौर मेट्रो परियोजना की कुल लागत 12 हजार 088 करोड़ रूपए अनुमानित है। यलो लाइन के प्रमुख स्टेशन- गांधी नगर, आईएसबीटी, विजय नगर चौराहा, पत्रकार कॉलोनी, रेलवे स्टेशन, राजवाड़ा, बड़ा गणपति, एयरपोर्ट हैं। मेट्रो डिपो गांधी नगर में स्थापित होगा। इंदौर मेट्रो के पहले फेज (रीच 1) में गांधीनगर से सुपर कॉरिडोर 3 के बीच 6.3 किलोमीटर में मेट्रो का संचालन शुरू हो चुका है, जिसका उद्घाटन 31 मई 2025 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा किया गया। इस फेज में मेट्रो स्टेशनों की संख्या 5 है। पहले फेज के रीच 2 में सुपर कॉरिडोर से मालवीय नगर चौराहा के बीच लगभग 11 किलोमीटर लंबाई में 11 स्टेशन बनकर तैयार होंगे। इस कार्य की डेडलाइन अक्टूबर 2025 रखी गई है। इसी प्रकार इंदौर मेट्रो के दूसरे फेज में मालवीय नगर चौराहा से पलासिया चौराहा तक 5.34 किलोमीटर ट्रैक बनाया जाएगा इसमें 5 एडिवेटेड स्टेशन होंगे। इस फेज में कार्य पूर्ण होने का लक्ष्य दिसंबर 2027 रखा गया है। तीसरे फेज में पलासिया चौराहा से गांधीनगर तक 8.70 किलोमीटर भूमिगत ट्रैक निर्माण किया जाएगा। यहां अंडरग्राउंड स्टेशनों की संख्या 7 होगी। इस फेज का निर्माण कार्य दिसंबर 2028 में पूर्ण करने का लक्ष्य है। व्यापक गतिशीलता योजना और वैकल्पिक विश्लेषण रिपोर्ट की वर्तमान स्थिति मेट्रो परियोजनाओं की समीक्षा बैठक में मध्यप्रदेश के भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, उज्जैन एवं जबलपुर शहरों के लिए व्यापक गतिशीलता योजना और वैकल्पिक विश्लेषण रिपोर्ट प्रस्तुत की गई, जिसमें बताया गया कि परियोजनाएं अनुमोदन के विभिन्न चरणों में हैं। भोपाल-सीएमपी और एएआर प्रस्तुत एमआरटीएस कॉरिडोर प्रस्तावित हितधारकों को प्रस्तुत किया जाना है। इंदौर- सीएमपी और एएआर एमआरटीएस मेट्रो कॉरिडोर भी प्रस्तावित किए गए हैं। ग्वालियर- सीएमपी और एएआर और हितधारकों द्वारा अनुमोदित एमआरटीएस लाइट मेट्रो कॉरिडोर भी प्रस्तावित किए गए हैं। उज्जैन और जबलपुर- सीएमपी और एएआर हितधारकों को प्रस्तुत किया जाना है। राज्य शासन के अनुमोदन के बाद प्रस्तावित मेट्रो कॉरिडर के डीपीआर तैयार किए जाने के प्रक्रिया की जाएगी। बैठक में नगरीय विकास एवं आवास राज्य मंत्री श्रीमती प्रतिमा बागरी, मुख्य सचिव अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव मुख्यमंत्री कार्यालय डॉ. राजेश राजौरा, अपर मुख्य सचिव नगरीय विकास एवं आवास संजय कुमार शुक्ला, अपर मुख्य सचिव वित्त मनीष रस्तोगी तथा अन्य संबंधित विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।  

उमरिया के पाली जनपद में दो पंचायत सचिव निलंबित, लापरवाही और मनमानी के चलते हुई कार्रवाई

उमरिया  पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की योजनाओं में घोर लापरवाही बरतने, मनमानी करने और शासकीय कार्यों से अनुपस्थित रहने के आरोपों के चलते जनपद पंचायत पाली अंतर्गत दो पंचायत सचिवों को निलंबित कर दिया गया है। जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी अभय सिंह ने यह कार्रवाई मध्यप्रदेश पंचायत सेवा (अनुशासन तथा अपील) नियम 1999 के नियम 4 के तहत तत्काल प्रभाव से की है। पहला निलंबन – विजय सिंह, सचिव, ग्राम पंचायत गोयरा मुख्य कार्यपालन अधिकारी की ओर से जारी आदेश के अनुसार ग्राम पंचायत गोयरा के पंचायत सचिव विजय सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है। निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय जनपद पंचायत पाली कार्यालय निर्धारित किया गया है। इस अवधि में वे नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ते के पात्र रहेंगे। निलंबन का कारण ग्राम पंचायत गोयरा में चल रही प्रधानमंत्री आवास योजना, समग्र सीडिंग तथा जल गंगा संवर्धन जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में अत्यंत धीमी प्रगति पाया जाना रहा। समीक्षा बैठक के दौरान स्पष्ट हुआ कि संबंधित सचिव योजनाओं के क्रियान्वयन में न केवल लापरवाह हैं, बल्कि अक्सर पंचायत में अनुपस्थित भी रहते हैं। जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों द्वारा बार-बार उनके विरुद्ध शिकायतें की गई थीं, जिनमें शासकीय कार्यों से दूरी, स्वेच्छाचारिता और जनहित की उपेक्षा जैसे आरोप शामिल थे। दूसरा निलंबन – छोटेलाल सिंह, सचिव, ग्राम पंचायत मालाचुआ इसी तरह ग्राम पंचायत मालाचुआ के पंचायत सचिव छोटेलाल सिंह को भी तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। उनके निलंबन का आदेश भी उन्हीं नियमों के अंतर्गत पारित किया गया है। मुख्यालय के रूप में उन्हें भी जनपद पंचायत पाली कार्यालय में उपस्थित रहने का निर्देश दिया गया है और उन्हें जीवन निर्वाह भत्ता मिलेगा। छोटेलाल सिंह पर भी गंभीर लापरवाही के आरोप लगे हैं। समीक्षा बैठक में यह सामने आया कि जल गंगा संवर्धन, प्रधानमंत्री आवास, समग्र सीडिंग और सीएम हेल्पलाइन जैसे प्राथमिक महत्व की योजनाओं में नगण्य प्रगति हुई है। जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों से प्राप्त शिकायतों के अनुसार वे प्रायः पंचायत कार्य से दूर रहते हैं और मनमाने तरीके से काम करते हैं। उनका आचरण मध्यप्रदेश पंचायत सेवा (आचरण) नियम 1998 के नियम 3 के स्पष्ट उल्लंघन की श्रेणी में पाया गया। प्रशासन की ओर से सख्त संदेश जिला पंचायत उमरिया के सीईओ द्वारा की गई इस त्वरित कार्रवाई से यह संदेश स्पष्ट है कि शासकीय योजनाओं और जनहित कार्यों में लापरवाही अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। ग्रामीण क्षेत्रों में योजनाओं के समुचित क्रियान्वयन हेतु जवाबदेही तय करना प्रशासन की प्राथमिकता है। पंचायत सचिवों को यह स्पष्ट संकेत है कि यदि वे निर्धारित कर्तव्यों से विमुख होते हैं तो प्रशासनिक कार्रवाई अवश्य की जाएगी। प्रशासन की इस सख्त कार्रवाई से अन्य पंचायत सचिवों और ग्रामीण विकास से जुड़े कर्मचारियों को भी चेतावनी मिलती है कि शासन की योजनाओं में लापरवाही करने वालों को अब पद पर बने रहना संभव नहीं होगा।  

उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि रक्तदान केवल रक्त नहीं, बल्कि आशा, विश्वास और जीवन का प्रतीक होता

भोपाल  उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा है कि रक्तदान महादान है। रक्तदान से कई ज़िंदगियों को बचाया जा सकता है। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने विश्व रक्तदाता दिवस के अवसर पर प्रदेशवासियों से अपील की है कि वे अधिकाधिक संख्या में स्वैच्छिक रक्तदान कर इस मानवीय अभियान को सशक्त बनाएं। रक्तदान किसी व्यक्ति को जीवनदान देने जैसा है। उन्होंने आह्वान किया कि रक्तदान को जीवनशैली का हिस्सा बनाएं और नियमित रूप से रक्तदान करके मानवता के इस यज्ञ में भागीदार बनें। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि रक्तदान केवल रक्त नहीं, बल्कि आशा, विश्वास और जीवन का प्रतीक होता है। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने अलीराजपुर ब्लड बैंक में कार्यरत टेक्नीशियन श्री परमल सिंह राठौड़ के रक्तदान को जन-आंदोलन बनाने में सक्रिय भूमिका की सराहना की है। उन्होंने कहा कि श्री राठौड़ जैसे समर्पित स्वास्थ्यकर्मी हमारे समाज के सच्चे नायक हैं। जिन्होंने रक्तदान को जन आंदोलन बनाया। उन्होंने कार्य-निष्ठा, पारदर्शिता और सेवाभाव का जो आदर्श प्रस्तुत किया है, वह सम्पूर्ण स्वास्थ्य तंत्र के लिए प्रेरणास्रोत है। 5 वर्षों में 18 हज़ार से अधिक यूनिट रक्त की पूर्ति से अलीराजपुर रक्तदान में बना आत्मनिर्भर उल्लेखनीय है कि टेक्नीशियन श्री राठौड़ ने अलीराजपुर ब्लड बैंक में समर्पण और अनुकरणीय सेवा से जिले में रक्तदान को जनआंदोलन बनाया। आर्मी की नौकरी छोड़कर स्वास्थ्य विभाग में आए श्री राठौड़ ने बीते 5 वर्षों में 18 हज़ार से अधिक यूनिट रक्त की पूर्ति कर, पूरे जिले को रक्तदान के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाया। उन्होंने ब्लड बैंक के लाइसेंस को रिन्यू कराया साथ ही 10 वर्षों से अधिक का रिकॉर्ड डिजिटल रूप में व्यवस्थित किया। चाहे आधी रात हो या दूरस्थ क्षेत्र, उनका पहला कर्तव्य मरीजों को जीवनरक्षक रक्त उपलब्ध कराना रहा। उनके प्रयासों से एक ही छत के नीचे 700 से अधिक रक्तदाताओं का सफल पंजीकरण और 2 हजार यूनिट से अधिक रक्त संग्रह किया गया। इस उपलब्धि से अलीराजपुर ज़िला पूरे प्रदेश में जनहित का उत्कृष्ट उदाहरण बना। वर्ष 2024-25 में प्रदेश में 7 लाख 61 हज़ार यूनिट रक्त किया गया संग्रहित मध्यप्रदेश में वर्तमान में 67 शासकीय सहित कुल 174 ब्लड सेंटर संचालित हैं। वर्ष 2024-25 में प्रदेश भर में 5 हजार 283 रक्तदान शिविर आयोजित किए गए, जिनमें 7 लाख 61 हज़ार यूनिट रक्त संग्रहित किया गया। इसमें 7 लाख 41 हजार 460 पुरुषों और 20 हजार 323 महिलाओं ने स्वैच्छिक रक्तदान कर समाज को नई ऊर्जा दी। यह संग्रहण गत वर्षों की तुलना में लगभग 2 लाख यूनिट अधिक है, जो प्रदेश की जनजागरूकता और सेवा भावना का प्रमाण है। प्रदेश में गर्भवती महिलाओं, सिकल सेल एनीमिया, थैलीसिमिया, हिमोफिलिया, कैंसर तथा अन्य गंभीर बीमारियों से ग्रसित मरीजों को रिप्लेसमेंट फ्री और नि:शुल्क रक्त उपलब्ध कराया जा रहा है। दूरस्थ क्षेत्रों में भी रक्त की सहज उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए 118 ब्लड स्टोरेज यूनिट्स को चिन्हित कर ब्लॉक स्तर पर क्रियाशील किया गया है। साथ ही, संक्रमण के खतरे को कम करने के लिए एनएटी तकनीक द्वारा वर्ष 2024-25 में 84 हजार 074 यूनिट रक्त की जांच कर सुरक्षित रक्त उपलब्ध कराया गया। प्रदेश के ब्लड सेंटरों में 25 ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट्स का संचालन भी प्रारंभ किया गया है।  

मध्यप्रदेश मत्स्य पालन के क्षेत्र में देश में अग्रणी भूमिका निभायेगा : राज्य मंत्री पंवार

मत्स्य उत्पादन एवं उत्पादकता बढ़ाने के लिये किये जाये समन्वित प्रयास विश्व में मत्स्य उत्पादन के क्षेत्र में भारत दूसरे स्थान पर मध्यप्रदेश मत्स्य पालन के क्षेत्र में देश में अग्रणी भूमिका निभायेगा : राज्य मंत्री पंवार ब्रिलियंट कन्वेशन सेंटर में इनलैंड फिशरीज़ एण्ड एक्वाकल्चर मीट आयोजित मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश, बिहार सहित विभिन्न राज्यों के मंत्री हुए शामिल भोपाल  केन्द्रीय मछुआ पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह ने कहा है कि दुनिया में मछली उत्पादन में भारत का स्थान दूसरा है। मछली उत्पादन मुनाफे का व्यवसाय है जिसमें मछली उत्पादक अपनी आमदनी को कई गुना बढ़ा सकता है। इसके लिए मत्स्य उत्पादकों को शिक्षण और प्रशिक्षण के साथ तकनीकी जानकारी भी देना होगी। साथ ही उन्हें अच्छा बीज भी उपलब्ध कराना होगा। यदि हमें विटामिन और प्रोटीन उत्पादन के क्षेत्र में आगे बढ़ना है, तो हमें मछली उत्पादन को अधिक बढ़ावा देने की जरूरत है। देश में मछली उत्पादन और उत्पादकता को बढ़ावा देने के लिए केन्द्र सरकार की कई ऐसी योजनाएं है, जिसका लाभ उठाकर मछली उत्पादक अपने व्यवसाय को एक नई ऊँचाई दे सकता है। बीते 10 वर्षों में भारत में मछली का उत्पादन 61 लाख टन से बढ़कर 147 लाख टन हुआ है। इसी अवधि में भारत ने मत्स्य उत्पाद का निर्यात 30 हजार करोड़ रुपये से बढ़कर 60 हजार करोड़ रुपये का हो गया है। केन्द्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह आज इंदौर के ब्रिलियंट कन्वेशन सेंटर में इनलैंड फिशरीज़ एण्ड एक्वाकल्चर मीट के उदघाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम के प्रारंभ में अहमदाबाद में हुई विमान त्रासदी में मृत यात्रियों एवं अन्य को मौन रखकर श्रद्धांजलि अर्पित की गई। केन्द्रीय मंत्री रंजन ने कहा कि असंगठित क्षेत्रों में जो मछली उत्पादक है, उन्हें संगठित क्षेत्रों में लाना है। मत्स्य सहकारी समितियों को और मजबूत करना होगा। सभी मत्स्य उत्पादकों को किसान क्रेडिट कार्ड योजना का लाभ लेना चाहिए। केन्द्र सरकार की प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना सहित विभिन्न राज्य सरकार की योजनाएं जैसे मुख्यमंत्री मीनाक्षी योजना, गंभीर बीमारी सहायता योजना, अनुगृह सहायता योजना, शिक्षा प्रोत्साहन योजनाओं का लाभ मत्स्य उत्पादक उठायें। इन योजनाओं के माध्यम से मत्स्य उत्पादक अपने व्यवसाय को कई गुना आगे बढ़ा सकते हैं। मंत्री राजीव रंजन ने कहा कि हर राज्य मत्स्य किसानों को एक विस्तृत कार्य योजना बनाकर एनएफडीबी द्वारा प्रदाय नि:शुल्क प्रशिक्षण की सुविधा उपलब्ध करायें ताकि मत्स्य उत्पादन और उत्पादकता में बढ़ोतरी हो। उन्होंने आगे कहा कि मत्स्य सहकारी समिति को मजबूत करना हमारा लक्ष्य है। इस हेतु नेशनल फिश डिजिटल पोर्टल में किसानों का पंजीयन करायें। मत्स्य किसानों में जागरूकता फैलाये तथा राज्य सरकार मछली उत्पादन-उत्पादकता बढ़ाने पर विशेष जोर दें तथा अच्छी गुणवत्ता के बीज उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें। केन्द्रीय पशुपालन एवं मछली पालन विभाग के मंत्री जार्ज कुरियन ने कहा कि देश में तीन करोड़ लोग मछली उत्पादन से जुड़े है। विश्व के कुल मत्स्य उत्पादन में भारत का 8 प्रतिशत योगदान है, जो कम नहीं है। मछली उत्पादन और उत्पादकता को बढ़ावा देने के लिए केन्द्र सरकार सतत प्रयासरत है। मंत्री कुरियन ने आगे कहा कि मछली उत्पादकों को बेहतर से बेहतर सुविधाएं मिलना चाहिए। केन्द्र सरकार प्रतिवर्ष मत्स्य उत्पादन को बढ़ावा दे रही है। मछुआरों के बच्चों को शिक्षा के लिए भी सुविधाओं में और बढ़ोतरी होनी चाहिए। केन्द्रीय पशुपालन एवं मछली पालन विभाग के राज्यमंत्री एस.पी. सिंह बघेल ने कहा कि यदि हमें कृषि के क्षेत्र में किसानों की आय दुगुनी करना है तो हमें मत्स्य पालन, मुर्गी पालन, पशुपालन को बढ़ावा देना होगा। मछली उत्पादन के लिए हमें हर जिले में अमृत सरोवर की संख्या को बढ़ानी होगी। केन्द्रीय मंत्री बघेल ने इस बात पर चिंता व्यक्त की कि देश में छोटी-छोटी नदियां विलुप्त की कगार पर है, इस ओर अधिक ध्यान देने की जरूरत है। मत्स्य पालन एवं मछुआ कल्याण राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार नारायण सिंह पंवार ने कहा कि राज्य सरकार मत्स्य उत्पादन एवं उत्पादकता बढ़ाने के लिये निरंतर प्रयासरत है। इसके लिये अनेक कारगर प्रयास किये जा रहे हैं। भोपाल में हलाली क्लस्टर की स्थापना की जा रही है। इससे मत्स्य पालन को नई दिशा मिलेगी। उन्होंने मछुआरों के कल्याण और मत्स्य उत्पादन बढ़ाने के लिये संचालित योजनाओं और कार्यक्रमों की जानकारी दी। मीट का उद्देश्य उन इनलैंड राज्यों में मत्स्य उत्पादन बढ़ाना है, जिनकी सीमाएं समुद्र से नहीं जुड़ती हैं। इस मीट में सिर्फ उन राज्यों के प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं जो समुद्र से मत्स्य उत्पादन गतिविधियाँ नहीं करते हैं। कार्यक्रम में उत्तरप्रदेश के मत्स्य पालन विभाग मंत्री संजय कुमार निषाद, बिहार की मछुआ पालन और पशुपालन मंत्री सुरेणु देवी, हरियाणा के पशुपालन, डेरी और मत्स्य पालन मंत्री श्याम सिंह राणा, केन्द्र सरकार के पशुपालन एवं मत्स्य पालन विभाग के सचिव डॉ. अभिलक्ष लिखी और संयुक्त सचिव सागर मेहरा सहित छतीसगढ़, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, झारखंड आदि राज्यों के प्रतिनिधि उपस्थित थे। इस मौके पर अतिथियों ने प्रदर्शनी का अवलोकन किया और मत्स्य उत्पादकों से संवाद भी किया। प्रदर्शनी में मछली उत्पादन से जुड़े विभिन्न चित्रों एवं ऑडियो-वीडियो के माध्यम से प्रदर्शित किया गया।  

मुख्यमंत्री ने किसानों के हित में लिया निर्णय, मूंग एवं उड़द का 19 जून से प्रारंभ होगा पंजीयन का कार्य

किसानों को उनकी फसल का वाजिब दाम दिलाने राज्य सरकार प्रतिबद्ध : मुख्यमंत्री डॉ. यादव ग्रीष्मकालीन मूंग एवं उड़द को न्यूनतम समर्थन मूल्य पर उपार्जन का प्रस्ताव केन्द्र सरकार को भेजा 19 जून से प्रारंभ होगा पंजीयन का कार्य मुख्यमंत्री ने किसानों के हित में लिया निर्णय भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में राज्य सरकार किसानों की बेहतरी के लिये सभी क्षेत्रों में कार्य कर रही है। सरकार ने किसानों के हित में निर्णय लेते हुए ग्रीष्मकालीन मूंग एवं उड़द को न्यूनतम समर्थन मूल्य पर उपार्जन किये जाने संबंधी निर्णय लेकर प्रस्ताव केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय को भेजा है। किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर मूंग एवं उड़द के उपार्जन के लिये किसानों का पंजीयन 19 जून से प्रारंभ होगा। इस संबंध में संबंधित विभाग एवं एजेंसियों को निर्देश जारी कर दिये गये हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार किसानों के आर्थिक सशक्तिकरण के लिये कृषि आधारित उद्योग लगाने में भी मदद कर रही है। किसानों को उनकी फसल का वाजिब दाम दिलाने के लिये प्रतिबद्धता से कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किसान संघों से हुई चर्चा में आश्वस्त किया कि हम सब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में राज्य की बेहतरी के लिये डबल इंजन की सरकार के साथ कदम से कदम मिलाकर चलेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि सरकार किसानों को अगली फसल के लिये भी आवश्यक सहायता प्रदान करेगी। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों को उन्नत बीज और उन्नत कृषि यंत्र उपलब्ध कराने के लिये प्रदेश में निरंतर कृषि मेलों का आयोजन कर रही है। न्यूनतम समर्थन मूल्य कृ‍षि लागत एवं मूल्य आयोग भारत सरकार द्वारा ग्रीष्मकालीन मूंग का न्यूनतम समर्थन मूल्य 8682 रूपये प्रति क्विंटल और उड़द का न्यूनतम समर्थन मूल्य 7400 रूपये प्रति क्विंटल निर्धारित है। राज्य किसान कल्याण एवं कृषि विभाग द्वारा केन्द्र को भेजे गये प्रस्ताव में किसानों का पंजीयन, उपार्जित फसल की गुणवत्ता, परिवहन, भुगतान के साथ प्रचार-प्रसार की कार्य-योजना भी प्रेषित की गई है। 36 जिलों में मूंग और 13 जिलों में उड़द प्रदेश के 36 जिलों में मई माह के तृतीय सप्ताह से जून माह के प्रथम सप्ताह तक मूंग फसल कटाई और प्रदेश के 13 जिलों में मई माह के तृतीय सप्ताह से जून माह के प्रथम सप्ताह तक उड़द फसल की कटाई की जाती है। प्रदेश में मूंग का संभावित क्षेत्राच्छादन 14.35 लाख हेक्टेयर, संभावित उत्पादन 20.23 लाख मीट्रिक टन है। इसी प्रकार उड़द का संभावित क्षेत्राच्छादन 0.95 लाख हेक्टेयर, संभावित उत्पादन 1.24 लाख मीट्रिक टन है। एमएसपी पर पंजीयन प्रक्रिया न्यूनतम समर्थन मूल्य पर उपार्जित की जाने वाली मूंग एवं उड़द के लिये संबंधित किसानों को पंजीयन के लिये किसान की फसल का नाम, आधार नंबर, बैंक खाता नंबर, आईएफसी कोड सहित भूअधिकार ऋण पुस्तिका की स्व-प्रमाणित छायाप्रति संलग्न करना होगी। बैंक खाता राष्ट्रीयकृत बैंक एवं जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक की शाखा का होना अनिवार्य है। सिकमी/बटाई काश्तकार को पंजीयन के लिये आवेदन के साथ सिकमी के अनुबंध की स्व-प्रमाणित प्रति संलग्न करना होगी। किसानों से ग्रीष्मकालीन मूंग-उड़द की उपार्जित मात्रा के भुगतान के लिये कम्प्यूटराईज प्रिंटेड रसीर उपार्जन करने वाली संस्था द्वारा प्रदाय की जायेगी जिसमें किसान का नाम, बैंक खाता क्रमांक तथा भुगतान योग्य राशि का विवरण होगा। इस रसीद पर उपार्जन केन्द्र प्रभारी के हस्ताक्षर भी किये जायेंगे। समर्थन मूल्य पर उपार्जित मूंग-उड़द की एक समान विनिर्दिष्टियां भारत सरकार, उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय द्वारा रबी विपणन वर्ष 2025-26 के लिये केन्द्र सरकार द्वारा निर्धारित एक समान विनिर्दिष्टियां के अनुरूप किया जायेगा। इसके अनुसार ग्रीष्मकालीन मूंग-उड़द के उपार्जन करने की जिम्मेदारी संबंधित उपार्जन करने वाली सहकारी संस्थाओं की होगी। निर्धारित मापदण्ड अनुसार उपार्जन सुनिश्चित करने के लिये सहकारी संस्थाओं/मध्यप्रदेश राज्य सहकारी विपण संघ मर्यादित भोपाल/म.प्र. वेयर हाउसिंग एवं लॉजिस्टिक कार्पोरेशन, खाद्य, कृषि, सहकारिता एवं राजस्व विभाग के मैदानी अमले को ग्रीष्मकालीन मूंग-उड़द की गुणवत्त हेतु जिला स्तर पर प्रशिक्षित किया जायेगा। साथ ही किसानों के हित में समर्थन मूल्य पर ग्रीष्मकालीन मूंग-उड़द उपार्जन की कीमत एवं समान विनिर्दिष्टियां का व्यापार प्रचार-प्रसार किया जाएगा, जिससे किसानों का ग्रीष्मकालीन मूंग-उड़द विचौलियों द्वारा कम दाम पर खरीदा न जा सके। उपार्जित फसल का परिवहन उपार्जन केन्द्र से गोदाम तक मूंग-उड़द परिवहन करने के लिये परिवहनकर्ताओं की नियुक्ति एवं अनुबंध की कार्रवाई की जायेगी। उपार्जन केन्द्र पर प्रतिदिन उपार्जन मात्रा की समीक्षा भी होगी। ई-उपार्जन साफ्टवेयर के माध्यम से ग्रीष्मकालीन मूंग-उड़द के परिवहन के लिये जारी रसीद पर परिवहनकर्ता की प्राप्ति कर उसे मूंग-उड़द सौंपा जायेगा। किसी कारणों से एजेंसियों द्वारा नियुक्त परिवहनकर्ता परिवहन करने में विफल होता है तो वैकल्पिक व्यवस्था जिला स्तरीय समितियों द्वारा की जायेगी। परिवहनकर्ता द्वारा विलम्ब से परिवहन करने पर उसके विरूद्ध नियमानुसार उपार्जन एजेंसियों द्वारा पेनाल्टी लगाई जायेगी। उपार्जन केन्द्रों पर किसानों के‍लिये सुविधाएं उपार्जन केन्द्रों पर किसानों की सुविधा के लिये व्यवस्था उपार्जन समिति होगी, जो केन्द्र पर किसानों के बैठने के लिये छायादार स्थान, साफ पीने के पानी, शौचालय एवं फर्स्ट बॉक्स सुविधा उपलब्ध करायेगी। उपार्जन किये जाने वाले खाद्यान की गुणवत्ता परीक्षण के लिये आवश्यक उपकरण की व्यवस्था भी होगी। इसके लिये विस्तृत परीक्षण भी दिया जायेगा। उपार्जन केन्द्र पर एक बैनर लगाया जायेगा, जिसमें केन्द्र का नाम, एफएक्यू गुणवत्ता का मापदण्ड और भुगतान का उल्लेख होगा। जिन उपार्जन केन्द्रों पर अत्यधिक खरीदी की संभावना होगी, उन केन्द्रों पर अतिरिक्त कर्मचारियों की व्यवस्था की जायेगी। साथ ही निर्धारित केन्द्रों पर लैपटॉप, प्रिन्टर, बैटरी आदि को चालू अवस्था में रखा जायेगा।  

सर्प-दंश से जन-सामान्य के बचाव के लिए राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा एडवाइजरी जारी

सर्पदंश रोकथाम अभियान सर्प-दंश से जन-सामान्य के बचाव के लिए राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा एडवाइजरी जारी भोपाल मध्यप्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने सर्पदंश के मामलों को गंभीरता से लेते हुए इसे स्थानीय आपदा घोषित किया है। पिछले वर्ष सर्प-दंश से 2,500 से अधिक मौत हुई थी जिससे व्यापक जनहानि हुई थी। बारिश के मौसम में बढ़ने वाली इन घटनाओं की रोकथाम के लिए एक बहुआयामी रणनीति तैयार की है, जिसमें जनजागरूकता, आपातकालीन सेवाओं का सुदृढ़ीकरण और निवारण संबंधी उपाय शामिल किए गए हैं। जनजागरूकता और प्रशिक्षण पर विशेष जोर इस अभियान के तहत ग्राम पंचायत और शहरी वार्ड स्तर पर स्वयंसेवी संस्थाओं के माध्यम से विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। सोशल मीडिया, रेडियो, होर्डिंग्स और प्रिंट मीडिया के जरिए सर्पदंश से बचाव और प्राथमिक उपचार की जानकारी प्रसारित की जाएगी। स्कूलों और कॉलेजों में विशेष सत्र आयोजित कर विद्यार्थियों को इस खतरे और उससे बचाव के उपायों के बारे में शिक्षित किया जाएगा। आपातकालीन सेवाओं को मजबूत बनाने की पहल प्रत्येक जिले में प्रशिक्षित ‘सर्प मित्र’ और ‘स्नेक-कैचर्स’ की तैनाती की जाएगी, जिनके हेल्पलाइन नंबर जनता को उपलब्ध कराए जाएंगे। सभी सरकारी अस्पतालों में एंटी-वेनम (विषनाशक दवा) का पर्याप्त भंडारण सुनिश्चित किया जाएगा। पीड़ितों को निकटतम चिकित्सा केन्द्र तक पहुँचाने की व्यवस्था को और सुचारू बनाया जाएगा, ताकि आपात स्थिति में त्वरित सहायता मिल सके। निवारक उपायों पर सामुदायिक भागीदारी जनजागरूकता गतिविधि में ग्रामीणों को खेतों और जंगलों में काम करते समय मोटे जूते और दस्ताने पहनने की सलाह दी जाएगी। घरों के आसपास सफाई रखने, झाड़ियों को काटने और कूड़े के उचित निपटान पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। पशुपालकों को पशुशालाओं के आसपास बाड़ लगाने और पर्याप्त रोशनी का प्रबंध करने की सलाह दी गई है। पर्यटन स्थलों पर सर्प अधिकता क्षेत्रों को चिह्नित करने और चेतावनी बोर्ड लगाने का भी प्रावधान किया गया है। बजट आवंटन और जनता से अपील राज्य सरकार ने इस अभियान के लिए प्रत्येक जिले को 23.17 लाख रुपये आवंटित किए हैं। बजट का उपयोग प्रशिक्षण, मॉक ड्रिल और जनजागरूकता कार्यक्रमों में किया जाएगा। जनता से अपील की गई है कि सर्पदंश की स्थिति में झाड़-फूंक या देसी उपचार की बजाय तुरंत निकटतम अस्पताल पहुँचें, क्योंकि पहला एक घंटा ‘गोल्डन आवर’ यानि जीवनरक्षक होता है। साथ ही, सांपों को मारने या परेशान करने के बजाय उन्हें दूर भगाने के उपाय करने पर जोर दिया गया है। इस व्यापक अभियान से उम्मीद की जा रही है कि राज्य में सर्पदंश से होने वाली मौतों में उल्लेखनीय कमी आएगी।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव का भारतीय किसान संघ के अध्यक्ष कमल सिंह आंजना ने माना आभार

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मुख्यमंत्री निवास स्थित समत्व भवन में भारतीय किसान संघ के अध्यक्ष कमल सिंह आंजना ने सौजन्य भेंट की। उन्होंने राज्य सरकार के न्यूनतम समर्थन मूल्य पर ग्रीष्मकालीन मूंग और उड़द की खरीदी करने के निर्णय का स्वागत किया और मुख्यमंत्री डॉ. यादव का आभार माना। इस अवसर पर भारतीय किसान संघ के महेश चौधरी तथा अन्य पदाधिकारी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का भारतीय किसान संघ के अध्यक्ष कमल सिंह आंजना ने आभार व्यक्त करते हुए कहा कि 19 जून से मूंग खरीदी के लिए पंजीयन शुरू होंगे।उन्होंने मुख्यमंत्री जी की किसानों के प्रति संवेदनशीलता की तारीफ की और आभार व्यक्त किया।  

सिंहस्थ में भीड़, यातायात और पार्किंग प्रबंधन के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का भी उपयोग किया जाएगा

 भोपाल  उज्जैन में वर्ष 2028 में होने जा रहे सिंहस्थ में भीड़, यातायात और पार्किंग प्रबंधन के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआइ) का भी उपयोग किया जाएगा। सुरक्षा व्यवस्था और अन्य प्रबंध के लिए ड्रोन से निगरानी की जाएगी। इसी वर्ष प्रयागराज महाकुंभ में इन तकनीकों के सफल प्रयोग के बाद इन्हें यहां भी अपनाया जाएगा। सिंहस्थ महाकुंभ की तैयारियों को लेकर पुलिस मुख्यालय में डीजीपी कैलाश मकवाणा ने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की। इसमें प्रयागराज कुंभ की व्यवस्थाओं में बड़ी भूमिका निभाने वाले उत्तर प्रदेश पुलिस के आइपीएस अधिकारी प्रेम कुमार गौतम ने वहां किए गए प्रबंध के बारे में प्रस्तुतीकरण दिया। रीयल-टाइम ट्रैफिक मानीटरिंग की जाएगी गौतम ने बताया कि स्मार्ट ट्रैफिक प्रबंधन और भीड़ नियंत्रण के लिए एआइ आधारित ट्रैफिक कंट्रोल सेंटर की स्थापना, इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (आइटीएस) द्वारा रीयल-टाइम ट्रैफिक मानीटरिंग की गई। ड्रोन से प्रमुख मार्गों और भीड़-भाड़ वाले क्षेत्रों में सटीक पर्यवेक्षण किया गया। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए रूट डायवर्सन मोबाइल एप बनाकर लाइव ट्रैफिक अपडेट उपलब्ध कराए गए। आंतकवाद से निपटने की भी तैयारी साथ ही उन्होंने बताया कि आतंकवाद विरोधी गतिविधियों से निपटने के लिए डाग स्क्वाड, बम डिस्पोजल यूनिट को तैनात किया। डार्कवेब से साइबर खतरों और फेस रिकग्नीशन ट्रैकिंग सिस्टम से संदिग्ध व्यक्तियों की गतिविधियों पर सतत निगरानी रखी गई। वीवीआइपी मूवमेंट और श्रद्धालु सुविधाओं के बारे में भी उन्होंने बताया। प्रयागराज की तुलना में जगह कम उज्जैन सिंहस्थ में भी प्रदेश पुलिस इन व्यवस्थाओं को अपनाने की तैयारी कर रही है। सिंहस्थ के लिए अभी लगभग तीन वर्ष होने के कारण पुलिस के पास तैयारी के लिए पर्याप्त अवसर भी है। इसमें लगभग तीन करोड़ श्रद्धालुओं के आने की संभावना है, पर बड़ी चुनौती यह है कि प्रयागराज की तुलना में उज्जैन में जगह बहुत कम है, गलियां संकरी हैं।

जल गंगा संवर्धन अभियान :जलदूत पंजीयन का लक्ष्य 1,62,400 और बने 2,30,749

जल संरक्षण के क्षेत्र में प्रदेश को बड़ी सफलता, खंडवा बना देश-प्रदेश का टॉप जिला, राज्यों में मध्यप्रदेश देश में चौथे नंबर पर जल गंगा संवर्धन अभियान में बनी लक्ष्य से काफी अधिक जल संरचनाएं जल गंगा संवर्धन अभियान :जलदूत पंजीयन का लक्ष्य 1,62,400 और बने 2,30,749 भोपाल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में जल गंगा संवर्धन अभियान मध्यप्रदेश में जल संरक्षण के संकल्प के लिये जन-सहभागिता जुटाने में एक ऐतिहासिक पहल सिद्ध हुआ है। यह अभियान 30 मार्च से 30 जून, 2025 तक संचालित किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य नदियों, जल स्रोतों और वेटलैंड्स का संरक्षण तथा पुनर्जीवन सुनिश्चित करना है। मध्यप्रदेश राज्य रोजगार गारंटी परिषद द्वारा जारी नवीनतम राज्य स्तरीय प्रदर्शन डैशबोर्ड के आकलन के अनुसार खंडवा मध्यप्रदेश में पहले स्थान पर है। इससे पूर्व केन्द्रीय एजेंसी ने जल संरक्षण कार्यों के लिए खंडवा को देश का शीर्ष जिला घोषित किया है। इस सूची में मध्यप्रदेश को चौथे स्थान मिला है। खेत-तालाब निर्माण का लक्ष्य 77,940 तय किया गया था, लेकिन प्रदेश में 79,815 खेत-तालाबों का निर्माण हो रहा है, जो शत प्रतिशत से भी अधिक है। अभियान की अवधि में प्रतिदिन औसतन 1,078 खेत-तालाबों के निर्माण का प्रारंभ किया जा रहा है। डगवेल रिचार्ज संरचनाओं के लिये 1,03,900 के लक्ष्य में से 1,00,321 संरचनाओं का निर्माण जारी है, जो लक्ष्य का 96.56% है। प्रदेश में प्रतिदिन औसतन 1,355 डगवेल निर्माण शुरू किया जा रहा है। अमृत सरोवर लक्ष्य 992 के मुकाबले 1,254 निर्मित किये जा रहे हैं। मायभारत पोर्टल पर जलदूत पंजीयन का लक्ष्य 1,62,400 तय किया गया था, जबकि 2,30,749 स्वयंसेवकों का पंजीकरण किया जा चुका है जो लक्ष्य काफी अधिक है। राज्य सरकार ने पाँच प्रमुख क्षेत्रों — पुराने एनआरएम कार्य, खेत-तालाब, डगवेल, अमृत सरोवर और मायभारत पंजीयन — पर आधारित 100 अंकों की रैंकिंग प्रणाली लागू की है। इस आधार पर खंडवा जिला 71.09 अंकों के साथ शीर्ष पर रहा। खेत-तालाब निर्माण, डगवेल रिचार्ज और अमृत सरोवर की शुरुआत में खंडवा का प्रदर्शन सर्वोत्तम रहा। रायसेन (60.85 अंक), बालाघाट (59.52 अंक) और बुरहानपुर (55.85 अंक) क्रमशः दूसरे, तीसरे व चौथे स्थान पर रहे। प्रदेश के अधिकांश जिलों ने अमृत सरोवर और मायभारत श्रेणियों में पूर्ण अंक प्राप्त किए, हैं।  

MP में बड़े फेरबदल की तैयारी,एएसपी और डीएसपी तक पुलिस महकमे में होगा तबादला

भोपाल   मध्यप्रदेश के पुलिस महकमे में बड़ी सर्जरी की तैयारी है। बदलाव आरक्षक से लेकर एसपी स्तर तक किया जाएगा। पीएचक्यू के उच्च अधिकारियों के बीच काम जारी है। सूत्रों के मुताबिक 115 एएसपी और डीएसपी रैंक के अधिकारियों की सूची तैयार हो चुकी है, जिसे अंतिम सहमति बनाने के बाद जारी कर दिया जाएगा। इस सूची में करीब 100 डिप्टी एसपी शामिल बताए जा रहे हैं। बनाए गए दो क्राइटेरिया तीन साल से ज्यादा समय से जिलों में टिके एसपी बदले जाएंगे। इनमें प्रमुख रूप से सतना एसपी आशुतोष गुप्ता, नर्मदापुरम एसपी गुरकरण सिंह शामिल हैं। दोनों तीन साल से जमे हैं। दो साल से ज्यादा से जमे एसपी के कार्यकाल का आकलन किया जाएगा। एसपी को बदलने प्रमुख रूप से दो क्राइटेरिया बनाए गए हैं। पहला है ढाई या इससे ज्यादा अवधि से जमे एसपी के काम का रिव्यू। दूसरा है सरकार की ओर से करवाया जा रहा फीडबैक सर्वे। इसी के आधार पर सर्जरी की जाएगी। PM मोदी के दौरे से पहले हुई थी प्रशासनिक सर्जरी जानकारी के लिए बता दें कि बीती 31 मई को प्रधानमंत्री मोदी के आगमन से पहले भी बड़ी प्रशानिक सर्जरी की गई थी। गृह विभाग ने डीएसपी रैंक के 53 पुलिस अधिकारियों की तबादला सूची जारी की थी। इसमें भोपाल, इंदौर कमिश्नरेट के पुलिस अधिकारी भी शामिल थे। पीएचक्यू में पदस्थ डीएसपी सतीश कुमार को मंडला और मैहर में पदस्थ एसडीओपी राजीव कुमार पाठक को पीएचक्यू में नई पदस्थापना दी गई थी। एसडीओपी अभिनव मिश्रा को शहडोल से भोपाल सहित अन्य के तबादले किए गए थे।

प्रदेश में 5 करोड़ हितग्राहियों को प्रति माह 2 लाख 90 हजार मीट्रिक टन नि:शुल्क खाद्यान्न वितरण किया जा रहा- मंत्री राजपूत

भोपाल खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने बताया है कि खाद्य सुरक्षा अधिनियम के अंतर्गत प्रदेश में 5 करोड़ से अधिक पात्र हितग्राहियों को प्रति माह लगभग 2 लाख 90 हजार मीट्रिक टन नि:शुल्क खाद्यान्न वितरण किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि सभी 27 हजार 944 उचित मूल्य दुकानों में पीओएस मशीन स्थापित की जा चुकी हैं। मंत्री राजपूत ने अधिकारियों को निर्देशित किया है कि पात्र हितग्राहियों को खाद्यान्न प्राप्त करने में किसी भी प्रकार की असुविधा नहीं होनी चाहिए। उचित मूल्य दुकानों में परिवार के किसी भी सदस्य द्वारा बायोमेट्रिक सत्यापन/ओटीपी के माध्यम से राशन प्राप्त किया जा सकता है। अशक्त एवं दिव्यांगजनों के लिये नॉमिनेशन की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है। इसके तहत यह लोग जिस व्यक्ति को नामांकित कर देते हैं, उन्हें खाद्यान्न प्रदान किया जाता है। राशन वितरण की सूचना हितग्राही को एसएमएस के माध्यम से भी देने का प्रावधान है। प्रदेश में लगभग 653 उचित मूल्य दुकानें शेडो एरिया में हैं, यहां पर समग्र परिवार आईडी के माध्यम से खाद्यान्न का वितरण किया जाता है।  

Ladli Behna Yojana: लाड़ली बहनों के लिए बड़ा अपडेट, इस दिन आएगी 25वीं किस्त; CM मोहन यादव करेंगे ट्रांसफर

भोपाल  मध्य प्रदेश की 1.27 करोड़ महिलाओं को लाडली बहना योजना की 25वीं किस्त के लिए इंतजार करना होगा। मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव ने एक दिन पहले ही सोशल मीडिया के जरिए कहा था कि 13 जून लाडली बहना योजना की अगली किस्त के रूप में 1250 रुपये खाते में ट्रांसफर किए जाएंगे। लेकिन गुजरात के अहमदाबाद में हुए दर्दनाक विमान हादसे के बाद मुख्यमंत्री ने सभी कार्यक्रमों को रद्द कर दिया है। अब लाडली बहना योजना की 25वीं किस्त कब आएगी, इसकी जानकारी हम आपको दे रहे हैं। राज्य सरकार के अधिकारियों के मुताबिक अब 16 जून को लाडली बहना योजना का पैसा ट्रांसफर करने का कार्यक्रम आयोजित होगा। सीएम जबलपुर के बेलखेड़ा से 16 जून यानी सोमवार को लाभार्थी महिलाओं के खाते में 1250 रुपये की अगली किस्त को ट्रांसफर करेंगे। ऐसे में राज्य की करोड़ों महिलाओं को थोड़े समय और इंतजार करना होगा। 13 को  ट्रांसफर होना था पैसा वित्त वर्ष 2025-26 में लाडली बहना योजना की किस्त की तारीख में बदलाव किया जा चुका है। पहले किस्त 10 तारीख से पहले आ जाती थी, लेकिन अब 10 से 15 तारीख के बीच में पैसा आता है। पिछले महीने मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव की ओर से 15 मई को 1.27 करोड़ पात्र महिलाओं के खाते में 1250 रुपये की किस्त ट्रांसफर की थी। कल ही उन्होंने खुद जानकारी दी थी कि इस बार 13 जून को पैसा ट्रांसफर दिया जाएगा। इससे महिलाएं खुश थीं कि दो दिन पहले ही उनके खाते में पैसा आ जाएगा।  बहन के चेहरे पर मुस्कान, अब 16 जून का इंतजार प्रदेश की 1.27 करोड़ से ज्यादा महिलाएं इस योजना से हर महीने ₹1250 की सहायता पा रही हैं। यह सिर्फ पैसों का ट्रांसफर नहीं, बल्कि सरकार की ओर से महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने का संकल्प है। 24 किस्तें पहले ही आ चुकी हैं और अब 25वीं किस्त का इंतजार खत्म होने वाला है। बेलखेड़ा गांव बनेगा महिला सशक्तिकरण की मिसाल बरगी विधानसभा क्षेत्र का बेलखेड़ा गांव अब एक ऐतिहासिक दिन का गवाह बनने जा रहा है। इस राज्य स्तरीय आयोजन में डॉ. मोहन यादव की मौजूदगी इसे सामाजिक और राजनीतिक दोनों ही दृष्टियों से खास बना रही है। सम्मेलन में सिर्फ पैसे नहीं बांटे जाएंगे, बल्कि महिलाओं के सपनों को नई उड़ान देने का संदेश भी दिया जाएगा। मगर गुजरात के अहमदाबाद में हुए भीषण विमान हादसे ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया है। दुख की इस घड़ी में सीएम ने भी अपने आज के सभी कार्यक्रमों को रद्द कर दिया है। उन्होंने ट्वीट कर कहा कि अहमदाबाद विमान हादसे में हुई यात्रियों की मौत से पूरा देश शोक में डूबा हुआ है। इस वजह से जबलपुर और इंदौर में आयोजित सभी कार्यक्रम रद्द किए जा रहे हैं। उन्होंने हादसे में मारे गए लोगों के परिजनों के प्रति गहरी संवेदनाएं व्यक्त की। बदल चुकी है तारीख राज्य सरकार ने बजट के प्रबंधंन के लिए इस वित्त वर्ष से लाडली बहना योजना की तारीख में बदलाव किया है। दरअसल केंद्र सरकार से मिलने वाले फंड की तारीख की वजह से इसमें बदलाव किया गया है। लाड़ली बहना योजना में मिलते है हर माह 1250     लाड़ली बहना योजना पिछली शिवराज सिंह चौहान सरकार द्वारा मई 2023 में शुरू की गई थी।     लाड़ली बहना योजना का मुख्य उद्देश्य मध्य प्रदेश की महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना और उनके जीवन को बेहतर बनाना है।     इस योजना के तहत 21 से 60 वर्ष की विवाहित महिलाओं को 1000 रुपए देने का फैसला किया गया था और फिर इसकी पहली किस्त 10 जून को जारी की गई थी।     इसके बाद रक्षाबंधन 2023 पर राशि को बढ़ाकर 1250 रुपए कर दिया गया था।     अब इस योजना के तहत 1250 रुपए महीना के हिसाब से महिलाओं को सालाना 15,000 रुपये मिलते हैं।     लाड़ली बहनों को जून 2023 से मई 2025 तक मासिक आर्थिक सहायता राशि की कुल 24 किश्तों का अंतरण किया गया है।प्रदेश की लाड़ली बहनों को अब तक 28 हजार करोड़ से अधिक का लाभ मिल चुका है।     इसके अतिरिक्त माह अगस्त 2023 एवं 2024 में (कुल 2 बार) लाभार्थी महिलाओं को 250 रुपये की राशि की विशेष आर्थिक सहायता का भी अंतरण किया गया। जानिए लाड़ली बहना योजना के लिए आयु/पात्रता/नियम     इस योजना में 1 जनवरी 1963 के बाद लेकिन 1 जनवरी 2000 तक जन्मी मध्यप्रदेश की स्थानीय निवासी समस्त विवाहित महिलाएं (विधवा, तलाकशुदा एवं परित्यक्ता समेत) वर्ष 2023 में आवेदन के लिए पात्र मानी जाती है।     यदि कोई महिला 60 वर्ष से कम उम्र की है और किसी अन्य सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना के तहत पहले से ही प्रति माह 1250 रुपये से कम प्राप्त कर रही है, तो उस महिला को भी 1250 रुपये तक की राशि दी जाएगी।     विवाहित महिलाओं में विधवा, और तलाकशुदा महिलाएं भी शामिल हैं। जिस साल आवेदन किया जाए, उस साल 1 जनवरी को आवेदक की उम्र 21 वर्ष पूरी हो चुकी होनी चाहिए और अधिकतम उम्र 60 वर्ष से कम होनी चाहिए। लाड़ली बहना योजना के ये अपात्र     महिलाएं, खुद या उनके परिवार में कोई टैक्सपेयर नहीं होना चाहिए ।परिवार की सालाना आय 2.5 लाख रुपये होना चाहिए।     जिनके या उनके परिवार के कोई सदस्य इनकम टैक्स देते हैं।     जिनके परिवार का कोई भी सदस्य सरकारी नौकरी में है (स्थायी, संविदा या पेंशन पाने वाला)।     अगर संयुक्त परिवार है तो 5 एकड़ से ज्यादा जमीन न हो, परिवार में कोई भी व्यक्ति सरकारी नौकरी न करता हो।घर पर ट्रैक्टर, चारपहिया वाहन न हो।     जो खुद किसी और सरकारी योजना से हर महीने 1250 रुपये या उससे ज्यादा की राशि पा रही हैं     जिनके परिवार में कोई वर्तमान या पूर्व सांसद या विधायक हो।     जिनके परिवार का कोई सदस्य सरकारी बोर्ड, निगम, मण्डल आदि का अध्यक्ष, संचालक या सदस्य हो।     जिनके परिवार में कोई स्थानीय निकाय का चुना हुआ जनप्रतिनिधि हो (पंच और उपसरपंच को छोड़कर)।     जिनके परिवार के पास कुल 5 एकड़ से ज्यादा खेती की जमीन … Read more

BJP का बड़ा प्रशिक्षण वर्ग आज से पचमढ़ी में, केंद्रीय गृह मंत्री शाह आज दोपहर 3 बजे करेंगे, जबकि समापन 16 जून को रक्षा मंत्री सिंह करेंगे

पचमढ़ी  भारतीय जनता पार्टी (BJP) अपने कार्यकर्ताओं को समय समय पर पार्टी की रीती नीति और सरकार के कार्यक्रमों की जानकारी देने के लिए प्रशिक्षण वर्ग आयोजित करती रहती है इसी क्रम में भारतीय जनता पार्टी मध्य प्रदेश (BJP Madhya Pradesh) तीन दिवसीय प्रशिक्षण वर्ग आयोजित करने जा रही है ये वर्ग पचमढ़ी में आयोजित किया जायेगा। भारतीय जनता पार्टी मध्य प्रदेश के अध्यक्ष वीडी शर्मा ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि तीन दिविसीय प्रशिक्षण वर्ग पचमढ़ी में 14, 15 और 16 जून को आयोजित किया जायेगा, इसका उद्घाटन गृह मंत्री मित शाह करेंगे जबकि 16 जून को प्रशक्षण वर्ग का समापन रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव पूरे समय मौजूद रहेंगे वीडी शर्मा ने बताया कि प्रशिक्षण वर्ग में भाजपा केंद्रीय नेतृत्व के कई वरिष्ठ नेता और मध्य प्रदेश के सभी सांसद, राज्यसभा सदस्य और विधायक शामिल होंगे, उन्होंने कहा इस प्रशिक्षण वर्ग में मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव पूरे समय मौजूद रहेंगे यानि वे तीनों दिन हर सत्र में शामिल होंगे। प्रदर्शनी में दिखेगी जनसंघ से अब तक की यात्रा  उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण वर्ग स्थल पर एक प्रदर्शनी का आयोजन भी किया जायेगा जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार के सेवा, सुशासन, गरीब कल्याण के 11 वर्ष की प्रदर्शनी लगेगी, इसके  भाजपा की यात्रा जो जनसंघ से लेकर आज तक जारी है उसमें डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी, पंडित दीनदयाल उपाध्याय, अटल बिहारी वाजपेयी से लेकर आज तक कार्यों की जानकरी होगी। सभी सांसद विधायक लगायेंगे पौधे  वीडी शर्मा ने बताया कि सभी सांसद विधायक एक पेड़ माँ के नाम अभियान के तहत पौधा लगायेंगे साथ ही वर्ग में सैद्धांतिक, व्यावहारिक सहित कई विषयों पर चर्चा सत्र होंगे जिनपर आपस में चर्चा होगी पार्टी कैसे दुनिया के सबसे बड़ी राजनैतिक दल बनी इसपर प्रकाश डाला जायेगा। लक्ष्मण सिंह के निष्कासन पर कही ये बात  लक्ष्मण सिंह निष्कासन मामले पर पूछे गए सवाल पर वीडी शर्मा ने कहा कि ये कांग्रेस का उनका आंतरिक मामला है, इस पर मेरा बोलना उचित नहीं है क्योंकि मैं प्रदेश अध्यक्ष हूँ,  अनुशासन बहुत जरूरी है कई बार हमें भी अनुशासनात्मक कार्रवाई करनी पड़ती है। कांग्रेस के आरोपों पर पलटवार  कांग्रेस द्वारा विधायकों की छाती पर मूंग दलने की किसानों से अपील करने वाले बयान पर वीडी शर्मा ने कहा ये अनुचित है मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव किसान के बेटे हैं पूर्व मुख्यमंत्री और और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान भी किसान के बेटे हैं, भाजपा की सरकार किसानों को ताकत देने का काम करती है, कांग्रेस केवल भड़काती है। अहमदाबाद प्लेन क्रैश पर जताया दुःख  भाजपा प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा ने अहमदाबाद प्लेन क्रैश दुर्घटना पर दुःख जताते हुए कहा कि घटना असहनीय है पूरा देश स्तब्ध है, मैं भाजपा मध्य प्रदेश की तरफ से जान गंवाने वाले लोगों के प्रति श्रद्धांजलि अर्पित करता हूँ, पूरा देश उनके परिवार के साथ खड़ा है। विधायक सांसद लगाएंगे एक-एक पौधा वीडी शर्मा ने बताया- इस वर्ग में सभी सांसद विधायक एक पेड़ मां के नाम अभियान के तहत पौधारोपण करेंगे। वर्ग में सैद्धांतिक, व्यावहारिक, कई विषयों पर सत्र होंगे। भाजपा किस तरह से देश में काम कर रही है। संगठन तंत्र की मजबूती के साथ हम कहते हैं कि भाजपा संगठन तंत्र के आधार पर काम करने वाला विशिष्ट दल है। शिविर स्थल पर एक विशेष प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार के 11 वर्षों की सेवा और सुशासन की उपलब्धियां दिखाई जाएंगी। इसके साथ ही जनसंघ से लेकर श्यामा प्रसाद मुखर्जी, पंडित दीनदयाल उपाध्याय और अटल बिहारी वाजपेयी से लेकर वर्तमान तक पार्टी की यात्रा को भी दिखाया जाएगा। सत्र के दौरान मोबाइल के उपयोग की मनाही प्रशिक्षण शिविर में विधायकों, सांसदों को मोबाइल फोन इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं होगी। प्रशिक्षण स्थल पर सभी विधायक, सांसद 13 जून की रात तक पहुंच गए । ट्रेनिंग कैम्प में प्रतिभागियों के मोबाइल उनके नाम के स्टिकर लगाकर साइलेंट मोड पर एक जगह रख दिए जाएंगे। सत्रों के बाद ब्रेक के दौरान प्रशिक्षणार्थी विधायक, सांसद अपने मोबाइल पर बात कर सकेंगे। प्रशिक्षण वर्ग में मंत्रियों, विधायकों और सांसदों को अलग-अलग सत्रों में पब्लिक डीलिंग, मोबाइल मैनेजमेंट, टाइम मैनेजमेंट से लेकर पार्टी की रीति-नीति और सफरनामे की जानकारी दी जाएगी। विधायक-सांसदों को सुबह 6:00 बजे जागना होगा। प्रशिक्षण स्थल पर सुबह 7:00 से 8:00 के बीच योग और प्रार्थना कराई ।      

जबलपुर देश का पहला खेल मास्टर प्लान बनाने वाला शहर बन गया

जबलपुर  जबलपुर शहर ने बच्चों के भविष्य को बेहतर बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। भारत का पहला “खेल मास्टर प्लान” जबलपुर में लॉन्च किया गया है, जो खासतौर पर 0 से 5 साल की उम्र के बच्चों और उनके देखभाल करने वालों के लिए बनाया गया है। इस योजना का मकसद शहर के पार्कों और सार्वजनिक स्थलों को बच्चों के अनुकूल बनाना और उन्हें खेलने, सीखने व सुरक्षित रहने का अवसर देना है। इस योजना को जबलपुर स्मार्ट सिटी लिमिटेड और नगर निगम ने मिलकर तैयार किया है। बच्चों में कम हो रही फिजिकल एक्टिविटी को लेकर शहर में नवाचार किया जा रहा है। जबलपुर देश का पहला खेल मास्टर प्लान बनाने वाला शहर बन गया है। यह मास्टर प्लान न केवल छोटे बच्चों को खेलने के लिए प्रेरित करेगा, बल्कि शहर में प्लेस्पेस अपॉर्चुनिटीज को विकसित भी करेंगे। अगले दस सालों के लिए यह प्लान तैयार किया गया है। दरअसल, नर्चरिंग नेबरहुड चैलेंज 2.0 में चयनित होने के बाद शहर को यह उपलब्धि हासिल हुई है। टॉप 10 में शामिल होने पर मिला दोबारा मौका जानकारी के अनुसार नर्चरिंग नेबरहुड चैलेंज 2.0 (एनएनसी 2.0) के अंतर्गत 0-5 वर्ष के बच्चों एवं उनके परिजनों के लिए शहर के उद्यानों एवं सार्वजनिक स्थलों में अनुकूल वातावरण एवं सुविधाएं प्रदान करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। एनएनसी 1.0 के अंतर्गत आयोजित चैलेंज में जबलपुर भी शामिल हुआ था। सभी गाइडलाइन का पालन करते हुए शहर ने देश के शीर्ष 10 शहरों में अपनी जगह बनाई थी। इन्हीं को 2.0 में शामिल किया गया है। खेल मास्टर प्लान को महापौर जगत बहादुर सिंह अन्नू, कलेक्टर दीपक सक्सेना, नगर निगम कमिश्नरप्रीति यादव, स्मार्ट सिटी सीईओ अनुराग सिंह के मार्गदर्शन में तैयार किया गया है। बनाया खेल सेल एनएनसी 2.0 में जबलपुर द्वारा वल्र्ड रिसोर्स इंस्टीट्यूट (डब्ल्यूआरआई) के सहयोग से नर्चरिंग नेबरहुड सेल, खेल सेल एवं खेल मास्टर प्लान तैयार किया गया है। इसमें उन सभी विभागों को सम्मिलित किया गया है जो शहर में विकास कार्यों तथा बच्चों और महिलाओं के कल्याण के लिए कार्य कर रहे हैं। इनमें नगर निगम जबलपुर, स्मार्ट सिटी जबलपुर, टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग, जबलपुर विकास प्राधिकरण, महिला एवं बाल विकास विभाग, स्वास्थ्य विभाग, यातायात पुलिस तथा विभिन्न गैर-सरकारी संगठन शामिल हैं। कलेक्टर दीपक सक्सेना की अध्यक्षता में तैयार की गई खेल सेल पूरे प्लान की निगरानी करने के साथ ही विकास कार्यों की समीक्षा भी करेगी।  ये करेगी सेल – छोटे-बड़े सभी खाली पड़े स्थानों को प्ले स्पेस अपॉचुनिटीज में विकसित करेंगे। – छोटे बच्चों के लिए शहर में कितनी खेलने की जगह होनी चाहिए इस पर काम करेगी। – शहर में वर्तमान में जितने भी खेल के स्थान है उन्हें चिह्नित कर लिया है। – कहां क्या कमी है, उस कमी के अनुसार मास्टर प्लान बनाया है। – अगले दस साल 2035 तक कहां कब कितना काम किया जाएगा ये भी रूपरेखा तैयार की जा चुकी है। खेल शब्द को किया विस्तारित खेल मास्टर प्लान में ‘खेल’ शब्द को केवल पारंपरिक खेल-कूद तक सीमित न रखते हुए, इसे एक विस्तृत रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है। जिसके तहत के- किड्स, एच- हेल्थ, ई- एम्पावरिंग कम्युनिटीज, एल- लेवल प्ले अपॉर्चुनिटीज विस्तार करने की योजना है। जबलपुर शहर ‘खेल मास्टर प्लान’ बनाने वाला देश का पहला शहर बन गया है। यह बड़े ही गौरव की बात है। 0 से 5 साल तक के बच्चों को ध्यान में रखकर इसे बनाया गया है। इस मास्टर प्लान के अंतर्गत अगले दस वर्षों में (2035) तक हर स्तर पर खेल के स्थानों को विकसित करने का लक्ष्य तय किया गया है। जिस पर काम शुरू हो चुका है। – संभव अयाची, एनएनसी 2.0 नोडल अधिकारी एवं उपायुक्त नगर निगम

भोपाल की सेंट्रल जेल में बन रही हैं 12 हाई सिक्योरिटी सेल, यहां बंद हैं 69 बडे़ आतंकी, क्षमता सिर्फ इतनी

भोपाल   भोपाल सेंट्रल जेल के हाई सिक्योरिटी सेल में खूंखार आतंकियों को संभालने की क्षमता अब पार हो चुकी है। सेंट्रल जेल में 58 खतरनाक आतंकियों के रखे जाने की व्यवस्था है, लेकिन फिलहाल यहां रहने वाले आतंकियों की संख्या 69 हो गई है। इस स्थिति को देखते हुए, जेल प्रशासन ने 12 नई हाई सिक्योरिटी सेल के निर्माण के लिए 1.20 करोड़ रुपये का बजट पारित किया है। इन संगठनों के आतंकी हैं कैद सेंट्रल जेल में कैद आतंकी विभिन्न संगठनों से जुड़े हुए हैं, जिनमें स्टूडेंट इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (SIMI) के 23, पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) के 21, हिज्ब उत तहरीर (HUT) के 17, JMB के 4 और इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड सीरिया (ISIS) के 4 आतंकवादी शामिल हैं। भोपाल जेल में 69 आतंकी बंद  भोपाल सेंट्रल जेल में इस वक्त 69 बड़े आतंकी बंद हैं, ये अलग-अलग संगठनों के आतंकी हैं, हालांकि भोपाल सेंट्रल जेल में कुल 58 आतंकवादियों को ही रखने की क्षमता है, लेकिन संख्या बढ़ने के बाद सेल बढ़ाने का प्रस्ताव भेजा गया था, जिसके बाद यहां 12 नई हाई सिक्योरिटी का निर्माण जेल विभाग की तरफ से करवाया गया है. वहीं यह सेल तैयार होने के बाद यहां सुरक्षा व्यवस्था भी बढ़ा दी जाएगी.  आम कैदियों से अलग व्यवस्था जेल में बंद आतंकियों को हर दिन साढ़े तीन घंटे के लिए बाहर निकाला जाता है, जिसमें वे अपने व्यक्तिगत काम जैसे कपड़े सुखाना, धूप लेना और टहलना कर सकते हैं। इनकी निगरानी के लिए प्रत्येक आतंकी पर 2 प्रहरियों की जिम्मेदारी होती है। आतंकियों को सुबह ढाई घंटे और शाम में एक घंटे के लिए बाहर निकाला जाता है, लेकिन उन्हें किसी से बातचीत की अनुमति नहीं होती। सभी आतंकियों को अलग-अलग रखा जाता है। जेल मैन्युअल के अनुसार, केवल चार आतंकियों को ही अपने परिजनों से मिलने की अनुमति है, जबकि बाकी 65 आतंकियों को मिलने और कैंटीन की सुविधाएं मिलती हैं। सभी आतंकियों को जेल की ड्रेस और टोपी पहनने की आवश्यकता होती है और उन्हें जेल के नियमों का पालन करना होता है। इन संगठनों के आतंकी बंद      स्टूडेंट इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (सिमी) के 23 आतंकी      पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) के 21 आतंकी      हिज्ब उत तहरीर (हट) के 17 आतंकी      जेएमबी के 4 आतंकी      इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड सीरिया (आईएसएस) के 4 आतंकी  ऐसा रहता है रूटीन  भोपाल सेंट्रल जेल में बंद आतंकियों को केवल साढ़े 3 घंटे के लिए ही सेल से बाहर निकाला जाता है, जिसमें वह अपने पर्सनल काम पूरे करते हैं, जिनमें धूप लेना, टहलना, कपड़े सुखाना, इस दौरान भी इन पर कड़ी निगरानी रखी जाती है. सभी पर नजर रखने के लिए 2-2 प्रहरियों को रखा जाता है. सुबह के वक्त ढाई घंटे के लिए यह बाहर निकलते हैं, जबकि शाम के वक्त 1 घंटे के लिए बाहर निकाले जाते हैं, इस दौरान उन्हें किसी से बातचीत करने की इजाजत नहीं होती है.  हर रोज 3.30 घंटे निकाला जाता है बाहर सेंट्रल जेल में बंद आतंकियों को हर रोज साढ़े तीन घंटे के लिए हाई सिक्योरिटी सेल से बाहर निकाला जाता है। जिससे वह अपने पर्सनल काम जैसे कपड़े सुखाना, धूप लेना, टहलना आदि कर सकें। इन आतंकियों को बाहर निकलने के बाद निगरानी में रखा जाता है। हर एक आतंकी पर नजरें रखने की जिम्मेदारी 2 प्रहरियों की होती है। आतंकियों को सुबह ढाई घंटा, जबकि शाम में एक घंटा बाहर निकाला जाता है। उन्हें किसी से बातचीत की इजाजत नहीं होती। सभी आतंकियों को बाहर निकालने पर भी अलग-अलग रखा जाता है। जेल मैन्युअल के हिसाब से मुलाकात की इजाजत आतंकी कामरान, अबु फैजल, शिबली और कमरुद्दीन को छोड़कर सभी 65 आतंकियों को जेल मैन्युअल के हिसाब से परिजनों से मिलने और कैंटीन सुविधा मिलती है। इनमें शामिल सजायाफ्ता आतंकी जेल ड्रेस में रहते हैं और जेल की टोपी लगाते हुए जेल नियमों का पालन करते हैं।      

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