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‘संकल्प से सिद्धि तक’ अभियान: केंद्र की मोदी सरकार की 11 वर्षों की उपलब्धियों को आम जनता तक पहुंचाएंगे

भोपाल  भारतीय जनता पार्टी आज से देशभर में ‘संकल्प से सिद्धि तक’ नामक एक व्यापक जनसंपर्क अभियान की शुरुआत करने जा रही है। इस अभियान का उद्देश्य केंद्र की मोदी सरकार के 11 वर्षों की उपलब्धियों को जनता तक पहुंचाना और कांग्रेस शासन की विफलताओं को उजागर करना है।   भारतीय जनता पार्टी आज से ‘संकल्प से सिद्धि तक’ नामक विशेष जनसंपर्क अभियान शुरू करने जा रही है। इस अभियान के माध्यम से पार्टी के नेता और कार्यकर्ता देशभर में जाकर केंद्र की मोदी सरकार की 11 वर्षों की उपलब्धियों को आम जनता तक पहुंचाएंगे। साथ ही, कांग्रेस शासन के दौरान हुई विफलताओं की भी जानकारी घर-घर दी जाएगी। इस अभियान के दौरान भाजपा मोर्चा और प्रकोष्ठों को विशेष जिम्मेदारी दी गई है ताकि सरकार की योजनाएं और नीतियां समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंच सकें। पार्टी स्तर पर रणनीति तय की गई है कि 10 और 11 जून को जिला स्तर पर प्रेस वार्ताएं आयोजित की जाएंगी, जिनमें मीडिया के माध्यम से लोगों तक सरकार की उपलब्धियों का संदेश जाएगा। इसके साथ ही प्रत्येक मंडल में ‘भारत संकल्प सभा’ का आयोजन किया जाएगा। 15 से 20 जून के बीच अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की तैयारी के तहत मंडल स्तर पर योग शिविरों का भी आयोजन किया जाएगा, जिससे लोगों में स्वास्थ्य और योग के प्रति जागरूकता बढ़े। भाजपा इस अभियान को वैचारिक दृष्टिकोण से भी मजबूती देना चाहती है। 23 जून को डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बलिदान दिवस और 6 जुलाई को उनकी जयंती का आयोजन कर पार्टी अपने वैचारिक स्तंभों को जन-जन तक ले जाएगी। वहीं, 25 जून को आपातकाल के दौरान लोकतंत्र की रक्षा के लिए लड़े सेनानियों का सम्मान भी किया जाएगा। इस अभियान को व्यापक और प्रभावी बनाने के लिए पार्टी ने मंत्रियों, सांसदों और विधायकों की जिम्मेदारी संभाग और जिला स्तर पर तय की है। भाजपा का लक्ष्य है कि जनता तक सरकार के कार्यों की सीधी जानकारी पहुंचे और 2024 लोकसभा चुनाव के बाद अब पार्टी 2029 की तैयारी के लिए फिर से जनविश्वास मजबूत करे। 

कूनो राष्ट्रीय उद्यान में फारेस्ट रिट्रीट फेस्टिवल, भारत में 26 चीते जन्मे, वर्तमान में हैं 19 शावक, अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर की जाएगी ब्रांडिंग

भोपाल मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले में स्थित चीतों का घर पालपुर कूनो राष्ट्रीय उद्यान में कूनो फारेस्ट रिट्रीट फेस्टिवल का आयोजन किया जाएगा। यह आयोजन वन विभाग एवं पर्यटन विभाग मिलकर करवाया जाएगा। 17 सितंबर 2025 को चीता परियोजना को तीन साल पूरे हो जाएंगे, इसी उपलक्ष्य में आयोजन की तैयारी की जा रही है।  बता दें कि यह आयोजन सितंबर में होगा। इसको लेकर मुख्यमंत्री के समक्ष के एक प्रस्तुतीकरण दिया जा चुका है। इसे निवेश की दृष्टि से भी देखा जा रहा है, क्योंकि इस फारेस्ट फेस्टिवल में पर्यटन क्षेत्र में निवेश करने वाले देश विदेश के निवेशकों को भी आमंत्रित किया जाएगा। इसकी अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ब्रांडिंग भी की जाएगी।   पर्यटकों के लिए बन रहा जंगल लॉज इसके साथ ही, कूनो नेशनल पार्क में तीन करोड़ रुपये की लागत से ईको पर्यटन केंद्र बनाया जा रहा है। कूनो के ससइपुरा में बैंगलुरु की तर्ज पर जंगल लॉज बनाया जा रहा है। इसमें 8 कक्ष बनाए जा रहे है, हर कक्ष में आरामदायक सुविधा उपलब्ध होगी। पर्यटन की दृष्टि से इसे इस तरह से बनाया जा रहा है कि यहां ठहरने वाले पर्यटक को प्रकृति की करीब से अनुभूति हो सकें। चीतों के नए घर गांधी सागर में भी पर्यटकों के लिए ईको पर्यटन गंतव्य स्थल बनाया जाएगा। यह स्थल भी कूनो में बनाए जा रहे जंगल कॉटेज की तरह ही होगा। चीतों के लिए एक बेहतर ब्रीडिंग सेंटर बता दें कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने जन्म दिवस पर 17 सितंबर 2022 को नामीबिया से लाए गए 8 चीतों को कूनो में छोड़ा था। इसके बाद 18 फरवरी 2023 को दक्षिण अफ्रीका से 12 चीते भारत लाए गए। भारत में अब तक 26 चीता शावकों का जन्म हो चुका है। 7 शावकों की मौत से अब 19 चीता शावक कूनो में है। वहीं 8 चीतों की मौत होने से 12 चीते है। लगातार चीतों की बढ़ती संख्या से तय हो गया है कि कूनो नेशनल पार्क चीतों का एक बेहतर ब्रीडिंग सेंटर का रूप ले चुका है। वर्तमान में छह चीता और 11 शावक खुले जंगल में घूम रहे हैं। बाकी को बाड़ों में रखा गया है। अब कूनो को पर्यटन की दृष्टि से विकसित किया जा रहा है।

साची से अब 15 दिन के लिए धातु कलश को धार्मिक विधि-विधान से किया जाएगा विदा, जायेगा चंगेज खान के देश मंगोलिया

भोपाल विश्व धरोहर सांची स्थित चेतियागिरि विहार से गौतम बुद्ध के परम शिष्यों सारिपुत्र और महामोग्गलायन के पवित्र अस्थि कलश (धातु कलश) को अब 15 दिन के लिए मंगोलिया भेजा जाएगा। यह कदम भारत सरकार के सांस्कृतिक मिशन का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य बौद्ध धर्म से जुड़े देशों के साथ संबंधों को मजबूत करना है। यह 73 वर्षों में दूसरी बार होगा जब ये कलश सांची से बाहर ले जाए जाएंगे।   मंगोलिया में होता है तिब्बती बौद्ध परंपरा का पालन ध्यान देने वाली बात यह है कि मंगोलिया, जो कभी चंगेज खान के साम्राज्य का केंद्र रहा था, आज तिब्बती बौद्ध परंपरा का पालन करता है। ऐसे में इन पवित्र अवशेषों का वहां पहुंचना बौद्ध श्रद्धालुओं के लिए एक ऐतिहासिक क्षण होगा। मिशन की तैयारियां विदेश मंत्रालय और संस्कृति मंत्रालय के समन्वय में चल रही हैं। संस्कृति मंत्रालय ने मध्य प्रदेश सरकार से इस योजना को लागू करने में सहयोग मांगा है। रायसेन जिला प्रशासन को इस कार्य का जिम्मा सौंपा गया है। प्रशासन ने सांची स्थित महाबोधि सोसायटी से विधिवत अनुमति ली है। कलश को धार्मिक विधि-विधान से किया जाएगा विदा महाबोधि सोसायटी ऑफ सांची के भिक्षु इंचार्ज स्वामी विमल तिस्स थेरो ने बताया कि उन्होंने धातु कलश को मंगोलिया भेजने की सहमति दे दी है। जिला प्रशासन के अनुसार, जैसे ही संस्कृति विभाग अंतिम यात्रा की व्यवस्था कर लेगा, कलश को पूरे धार्मिक विधि-विधान से विदा किया जाएगा। यात्रा के दौरान सांची से कुछ भिक्षु भी साथ जाएंगे, ताकि प्रतिदिन पूजन और परंपरा अनुसार सम्मान बना रहे। क्या है इन धातु कलश का इतिहास और महत्व? इन पवित्र अवशेषों की खोज 1851 में जनरल कनिंघम ने सांची स्तूप नंबर 3 की खुदाई के दौरान की थी। आजादी से पहले ये अवशेष ब्रिटेन में रहे, लेकिन 30 नवंबर 1952 को तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की उपस्थिति में इन्हें चेतियागिरि विहार में स्थापित किया गया। पिछले वर्ष 28 दिन के लिए भेजा था थाइलैंड पिछले साल थाइलैंड सरकार के आग्रह पर 28 दिन के लिए पवित्र अस्थि कलश को वहां भेजा गया था। थाइलैंड के बौद्ध प्रतिनिधिमंडल ने इन्हें दिल्ली में प्राप्त किया था। थाइलैंड में चार स्थानों पर भव्य कार्यक्रम हुए, जहां लाखों की संख्या में बौद्ध अनुयायियों ने इनके दर्शन किए थे। क्यों महत्वपूर्ण हैं ये धातु कलश? बौद्ध परंपरा में सारिपुत्र और महामोग्गलायन को भगवान बुद्ध के दाएं और बाएं स्थान पर बैठने का गौरव प्राप्त है। इन्हें धम्म और अभिधम्म का सर्वोच्च ज्ञाता माना जाता है। बुद्ध के जीवनकाल में ही उनका परिनिर्वाण हो गया था। इसलिए उनके पवित्र अवशेषों का धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से अत्यधिक महत्व है।

ग्वालियर में MPL का 12 जून से होगा आगाज, सुरक्षा के कड़े इंतजाम, 50 रुपये में देख सकेंगे मैच

भोपाल क्रिकेट लवर्स के लिए एक अच्छी खबर है। मध्य प्रदेश लीग (एमपीएल) के दूसरे सीजन के टिकट इस बार मात्र 50 रुपये में उपलब्ध होंगे। दर्शकों की बढ़ती दिलचस्पी और भीड़ को नियंत्रित रखने के उद्देश्य से ग्वालियर डिविजनल क्रिकेट एसोसिएशन ने यह फैसला लिया है। इस बार सभी टिकट पूरी तरह डिजिटल होंगे और जोमैटो ऐप के जरिए खरीदे जा सकेंगे। ग्वालियर डिविजनल क्रिकेट एसोसिएशन के सचिव संजय आहूजा ने जानकारी दी कि टिकट ईस्ट और वेस्ट गैलरी के लिए उपलब्ध होंगे और दर्शकों को मैदान में प्रवेश केवल अपने मोबाइल पर मिले क्यूआर कोड को स्कैन करके मिलेगा। हर मैच का टिकट अलग होगा और प्रतिदिन के लिए नया टिकट लेना अनिवार्य होगा।  सुरक्षा के कड़े इंतजाम गौरतलब है कि पिछले साल के फाइनल मुकाबले में गेट नंबर 3 और 4 पर अव्यवस्था और आगजनी जैसी घटनाएं सामने आई थीं। इसे ध्यान में रखते हुए इस बार ऑर्गेनाइजेशन ने सुरक्षा और प्रवेश व्यवस्था को लेकर खास योजना बनाई है। मैदान में किसी भी अव्यवस्था से बचने के लिए एक सीमित संख्या में ही टिकट जारी किए जाएंगे।    12 जून से लीग का आगाज श्रीमंत माधवराव सिंधिया क्रिकेट स्टेडियम, ग्वालियर में एमपीएल सीजन-2 की शुरुआत 12 जून को ग्वालियर चीताज और चंबल घड़ियाल के बीच होने वाले मुकाबले से होगी। कुल 13 दिनों तक चलने वाली इस लीग में इस बार महिला क्रिकेट लीग की भी शुरुआत की जा रही है, जिसमें चंबल घड़ियाल, बुंदेलखंड बुल्स और भोपाल वाल्बस की टीमें भाग लेंगी। इस पूरे आयोजन में नईदुनिया मीडिया पार्टनर की भूमिका निभा रहा है।   तैयारियों में जुटे खिलाड़ी एमपीएल सीजन-2 में प्रदेश की छिपी हुई प्रतिभाओं को मंच देने का अवसर मिलेगा। गत चैंपियन जबलपुर रॉयल लायंस और ग्वालियर चीताज की टीमें पहले ही ग्वालियर पहुंच चुकी हैं और कैप्टन रूपसिंह स्टेडियम में जमकर अभ्यास कर रही हैं। शनिवार को जबलपुर की टीम ने सुबह से दोपहर तक मैच सिमुलेशन ड्रिल्स में भाग लिया, जबकि दोपहर के बाद ग्वालियर की टीम ने नेट प्रैक्टिस और कैचिंग सेशन किया। गर्मी और तेज धूप के बावजूद खिलाड़ियों का उत्साह देखने लायक है। अभ्यास सत्रों में स्थानीय और युवा खिलाड़ी अपनी पूरी ताकत झोंक रहे हैं, जबकि फ्रेंचाइजी के स्टार खिलाड़ी जल्द ही टीम से जुड़ेंगे। एमपीएल-2 का आयोजन 12 जून से 24 जून 2025 तक किया जाएगा। इस दौरान क्रिकेट प्रेमियों को रोमांचक मुकाबले और उभरते सितारे देखने का अवसर मिलेगा।

ऐसे क्षेत्रों में रोज़गार के अवसर सृजित होते हैं और बेरोज़गारी तथा गरीबी वहाँ ढूँढ़ने से भी नहीं मिलती: राजेन्द्र शुक्ल

भोपाल  उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा है कि किसी क्षेत्र में यदि औद्योगिक क्रांति, हरित क्रांति और पर्यटन क्रांति आ जाये तो उस क्षेत्र का विकास तीव्र गति से होता है। ऐसे क्षेत्रों में रोज़गार के अवसर सृजित होते हैं और बेरोज़गारी तथा गरीबी वहाँ ढूँढ़ने से भी नहीं मिलती। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन तथा मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में अधोसंरचना विकास, पारंपरिक संस्कृति का संरक्षण एवं प्रोत्साहन और पर्यटन क्षेत्र में निजी सहभागिता को बढ़ावा देकर सुनियोजित एवं एकीकृत प्रयास किए जा रहे हैं। इन प्रयासों से आज मध्यप्रदेश पर्यटन क्षेत्र में असीम क्षमता और निवेश का आकर्षक क्षेत्र बन गया है। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने ट्रेवल एवं टूरिज्म के क्षेत्र में पिछले दो दशकों से सक्रिय ट्रेवल इंडिया टूरिज्म प्राइवेट लिमिटेड के भोपाल स्थित नवीन कार्यालय का शुभारंभ किया। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि अधोसंरचना विकास और अन्य आवश्यक प्रोत्साहनों के साथ ब्रांडिंग के लिए भी सरकार निरंतर कार्य कर रही है। मध्यप्रदेश की समृद्ध पर्यटन धरोहर को वैश्विक पहचान दिलाने के लिये सतत जागरूकता गतिविधियाँ की जा रही हैं। प्रदेश में पर्यटन के सांस्कृतिक, एडवेंचर, लेजर, धार्मिक, आध्यात्मिक, हेल्थ एंड वेलनेस, सेंटर, फ़िल्म आदि क्षेत्रों में आकर्षक वातावरण का निर्माण किया जा रहा है। पर्यटक मध्यप्रदेश की प्राकृतिक सुंदरता, धरोहर स्थल, संस्कृति और सुविधाओं के प्रति जागरूक होंगे तब पर्यटन क्षेत्र में विकास को तेजी मिलेगी। पर्यटन क्षेत्र की उपलब्ध संभावनाओं पर सशक्त प्रयास से देश ही नहीं, विदेशों से भी अधिकाधिक सैलानियों को आकर्षित करने में हम सफल होंगे। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने नवीन संस्थान के शुभारंभ पर ट्रेवल इंडिया टूरिज्म प्रा. लि. के प्रतिनिधियों को शुभकामनाएँ दीं। प्रमुख सचिव पर्यटन एवं संस्कृति श्री शिवशेखर शुक्ला ने कहा कि प्रदेश में औद्योगिक विकास के साथ-साथ पर्यटन क्षेत्र में भी शासन विभिन्न मॉडल्स पर कार्य कर रही है। अधोसंरचना विकास के लिए सब्सिडी एवं निवेश प्रोत्साहन की नीतियाँ लागू की गई हैं। ट्रेवल इंडिया टूरिज्म प्रा. लि. के प्रबंध निदेशक श्री महेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि कंपनी की 20वीं वर्षगांठ में पल्लवी नगर में नवीन कार्यालय की स्थापना की गई है। कार्यक्रम में पर्यटन, ट्रेवल एवं आतिथ्य क्षेत्र से जुड़े विशिष्टजन, गणमान्य नागरिक एवं मीडिया प्रतिनिधि उपस्थित रहे। 

प्रदेश के 41 सीएमएचओ और सिविल सर्जन के पदों पर बदलाव किए, भोपाल और इंदौर में नए CMHO मिले

भोपाल  भोपाल सहित प्रदेश के 41 सीएमएचओ और सिविल सर्जन के पदों पर बदलाव किए हैं। डॉ. प्रभाकर तिवारी, जो 5 वर्षों से भोपाल के सीएमएचओ थे, को राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन में भेजा गया है। उनकी जगह डॉ. मनीष शर्मा को भोपाल का नया सीएमएचओ नियुक्त किया गया है। मध्य प्रदेश सरकार ने भोपाल सहित प्रदेश के 41 सीएमएचओ और सिविल सर्जन के पदों पर बदलाव किए हैं। डॉ. प्रभाकर तिवारी, जो 5 वर्षों से भोपाल के सीएमएचओ थे, को राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन में भेजा गया है। उनकी जगह डॉ. मनीष शर्मा को भोपाल का नया सीएमएचओ नियुक्त किया गया है, जो ग्वालियर में उप संचालक के रूप में पदस्थ थे। डॉ. मनोज हुरमाडे को भोपाल से बैतूल भेजा गया है, और डॉ. दिनेश खत्री को रायसेन से राजगढ़ भेजा गया है। अन्य जिलों में भी कई सीएमओ और सिविल सर्जन के तबादले हुए हैं, जिनमें इंदौर, सिवनी, धार, छतरपुर, शाजापुर, नरसिंहपुर और राजगढ़ शामिल हैं। भोपाल और इंदौर में नए CMHO मिले मध्य प्रदेश सरकार ने स्वास्थ्य विभाग में बड़ा प्रशासनिक बदलाव किया है। पांच साल से जमे भोपाल CMHO डॉ. प्रभाकर तिवारी को हटाकर उन्हें राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन में भेजा गया है। उनकी जगह डॉ. मनीष शर्मा को भोपाल का नया CMHO नियुक्त किया गया है। डॉ. शर्मा वर्तमान में ग्वालियर में उप संचालक के रूप में कार्यरत थे और क्षयरोग विशेषज्ञ हैं। इसी तरह इंदौर सहित अन्य जिलों में भी नए मुख्य चिकित्सा अधिकारियों की नियुक्ति की गई है। इन अधिकारियों के हुए तबादले डॉ. राजेश कुमार अठ्या – CMHO दमोह डॉ. राज सिंह ठाकुर – CMHO कटनी डॉ. भरत कुमार खटीक – जिला स्वास्थ्य अधिकारी, कटनी डॉ. राजेश प्रसाद तिवारी – प्रभारी, CMHO पन्ना डॉ. मनोज कुमार हुरमाडे – प्रभारी, CMHO बैतूल डॉ. दिनेश खत्री – शल्यक्रिया विशेषज्ञ, जिला चिकित्सालय राजगढ़ डॉ. हरिनारायण मांड्रे – प्रभारी, CMHO रायसेन डॉ. बी. के. वर्मा – प्रभारी, CMHO दतिया डॉ. दर्पण टोके – प्रभारी, सिविल सर्जन, बुरहानपुर डॉ. प्रदीप मोजेश – मुख्य खंड चिकित्सा अधिकारी, बुरहानपुर डॉ. वी. एस. चंदेल – प्रभारी, CMHO उमरिया डॉ. शोभाराम रोशन – संयुक्त संचालक, कार्यालय क्षेत्रीय संचालक, सागर डॉ. धरित्री जे. मोहंती – CMHO मंडला डॉ. पवन जैन – प्रभारी संचालक, राज्य स्वास्थ्य प्रबंधन संस्थान, ग्वालियर डॉ. एम. के. जोशी – संयुक्त संचालक, कार्यालय क्षेत्रीय संचालक, उज्जैन डॉ. जितेन्द्र राजपूत – जिला स्वास्थ्य अधिकारी, उज्जैन डॉ. राजेश सिसोदिया – जिला चिकित्सालय, हरदा डॉ. किरण वाडिवा – वरिष्ठ संयुक्त संचालक, संचालनालय स्वास्थ्य सेवाएं, भोपाल डॉ. भूरे सिंह सैत्या – वरिष्ठ संयुक्त संचालक, कार्यालय क्षेत्रीय संचालक, ग्वालियर डॉ. पवन शर्मा – शिशु रोग विशेषज्ञ, जिला चिकित्सालय ग्वालियर डॉ. नीरज कुमार – शल्यक्रिया विशेषज्ञ, जिला चिकित्सालय भिंड डॉ. अलका त्रिवेदी – प्रभारी, CMHO अशोकनगर डॉ. के. सी. सरोत – वरिष्ठ संयुक्त संचालक, संचालनालय स्वास्थ्य सेवाएं भोपाल डॉ. माधव हसानी – प्रभारी, CMHO इंदौर डॉ. राष्ट्रेन्द्र कुमार खाड्योत – प्रभारी, CMHO नीमच डॉ. रामहित कुमार – जिला स्वास्थ्य अधिकारी, विदिशा डॉ. मनीष शर्मा – CMHO भोपाल डॉ. प्रभाकर तिवारी – वरिष्ठ संयुक्त संचालक, संचालनालय स्वास्थ्य सेवाएं भोपाल डॉ. दिनेश देहलवार – प्रभारी, CMHO मालवा डॉ. राजेश गुप्ता – जिला महामारी नियंत्रण अधिकारी, बड़वानी डॉ. मनोज कौरव – DHO, ग्वालियर डॉ. नरसिंह गेहलोत – CMHO नर्मदापुरम डॉ. सनेराम परस्ते – प्रभारी, सिविल सर्जन, अनूपपुर डॉ. अनिल झामनानी – प्रभारी, CMHO निवाड़ी डॉ. रामकुमार गुप्ता – CMHO ग्वालियर डॉ. प्रदीप कुमार जैन – शिशु रोग विशेषज्ञ, जिला चिकित्सालय ग्वालियर डॉ. यशपाल सिंह – प्रभारी, सिविल सर्जन सह मुख्य अस्पताल अधीक्षक, रायसेन डॉ. मुकेश जैन – शल्यक्रिया विशेषज्ञ, जिला चिकित्सालय दमोह डॉ. एस. के. त्रिपाठी – प्रभारी, CMHO पन्ना डॉ. राजेश परिहार – जिला परिवार कल्याण अधिकारी, बैतूल डॉ. सुशीला यादव – चिकित्सा अधिकारी, जिला चिकित्सालय सागर  

बच्चों में बौद्धिक क्षमताओं-भावनात्मक विकास और सामाजिक कौशल को विकसित करता स्कूल शिक्षा विभाग

भोपाल  स्कूली शिक्षा बच्चे के विकास में एक महत्वपूर्ण चरण है, जो उनके भविष्य को आकार देने वाली आधारभूत ज्ञान और कौशल प्रदान करती है। आमतौर पर गणित, विज्ञान, भाषा, कला और सामाजिक अध्ययन जैसे विभिन्न विषयों में औपचारिक निर्देश शामिल होते हैं। सिखाने के इस चरण का उद्देश्य बौद्धिक क्षमताओं, भावनात्मक विकास और सामाजिक कौशल को विकसित करना है। प्रदेश में इन्हीं उद्देश्यों को लेकर लगातार प्रयास किये जा रहे हैं। स्कूली शिक्षा अनुशासन, टीमवर्क और समस्या समाधान जैसे मूल्यों को भी बढ़ावा देती है, जिससे बच्चों को अकादमिक और वास्तविक दुनिया की चुनौतियों से निपटने में मदद मिलती है। प्रदेश में राष्ट्रीय शिक्षा नीति वर्ष 2020 का क्रियान्वयन भी प्रभावी तरीके से किया जा रहा है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के क्रियान्वयन में मध्यप्रदेश अग्रणी राज्यों की श्रेणी में आता है। प्रदेश में राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और स्कूल शिक्षा मंत्री श्री उदय प्रताप सिंह के कुशल मार्गदर्शन में नवाचारों के साथ कई प्रभावी कदम उठाये गये हैं। इसका प्रभाव यह हुआ है कि प्रदेश के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण एवं सर्वांगीण शिक्षा प्रदान की जा रही है। शैक्षणिक सत्र 2024-25 में स्कूल शिक्षा विभाग ने महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं। प्रदेश में स्कूल शिक्षा विभाग के 2023-24 में कुल बजट का 92.12 प्रतिशत उपयोग किया गया था, जबकि वर्ष 2024-25 में प्रावधान किये गये बजट का 95.12 प्रतिशत व्यय किया गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 3.48 प्रतिशत अधिक है। बजट में प्रावधान की गई राशि का उपयोग बच्चों की शिक्षा की बेहतरी के लिये किया गया। प्रदेश में माध्यमिक शिक्षा मंडल बोर्ड की कक्षा 10वीं बोर्ड परीक्षाओं में 76 प्रतिशत बच्चे उत्तीर्ण हुए, जो पिछले वर्ष के 58 प्रतिशत से 18 प्रतिशत अधिक है। यह वृद्धि बच्चों में बढ़ी शैक्षणिक योग्यता को दर्शाती है। इसी तरह 12वीं बोर्ड परीक्षा का परिणाम पिछले वर्ष में 64 प्रतिशत की तुलना में इस वर्ष 74 प्रतिशत आया है, जो 10 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाता है। प्रदेश के 53 प्रतिशत बच्चों ने कक्षा 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की है। प्रदेश में बोर्ड परीक्षाएं शून्य प्रतिशत पेपर लीक के साथ संपन्न हुई। प्रदेश में राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन के लिये स्कूल शिक्षा मंत्री श्री उदय प्रताप सिंह की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय टास्क फोर्स का गठन किया गया है। नई शिक्षा नीति में विभिन्न समितियों का गठन भी किया गया है। इन समितियों की अनुशंसा के अनुसार मध्यप्रदेश में स्कूल शिक्षा के गुणात्मक सुधार के लिये लगातार प्रयास किये जा रहे हैं। भारतीय मूल्यों, संस्कृति आधारित शिक्षा के लिये स्कूल शिक्षा विभाग ने कई उल्लेखनीय कदम उठाये हैं। प्रदेश की शालाओं में गुरूओं को सम्मान प्रदान करने के लिये गुरू पूर्णिमा उत्सव का आयोजन, जन्माष्टमी पर्व, गीता महोत्सव और मकर संक्रांति पर्व विद्यालयों में आयोजित किये गये। कक्षा 11 और 12 में कला और संस्कृति पर आधारित प्रोजेक्ट जोड़े जा चुके हैं। स्थानीय भाषाओं गोंडी, सहरिया, बारेली, निमाड़ी, बुंदेली, बघेली में तैयार की गई त्रिभाषा पुस्तकें 21 जिलों में 89 जनजातीय विकासखंडों में उपलब्ध कराई गई हैं। प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को उनकी शैक्षणिक गुणवत्ता सुधार के लिये अनेक योजनाओं का फायदा दिलाया जा रहा है। नि:शुल्क पाठ्यक्रम योजना में शासकीय विद्यालयों में अध्ययनरत करीब 82 लाख बच्चों को पाठ्य पुस्तकें उपलब्ध कराई गई हैं। सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले कक्षा 1 से 8 तक के करीब 60 लाख बच्चों को डीबीटी के माध्यम से राशि प्रदान की गई। कक्षा 1 से 12वीं में अध्ययनरत एससी, एसटी, ओबीसी और बीपीएल के 66 लाख बच्चों को विगत वर्ष छात्रवृत्ति के रूप में 332 करोड़ रूपये की राशि उनके बैंक खातों में ट्रांसफर की गई है। नि:शुल्क साइकिल वितरण योजना में कक्षा 6 और 9 के करीब 4 लाख 75 हजार बच्चों को घर से स्कूल तक आने जाने के लिये साइकिल वितरित की गई हैं। प्रदेश में कक्षा 12वीं की बोर्ड परीक्षा में 75 प्रतिशत से अधिक अंक अर्जित करने वाले 89 हजार 801 प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को करीब 224 करोड़ 25 लाख रूपये की राशि प्रोत्साहन स्वरूप टेबलेट क्रय करने के लिये उनके बैंक खातों में अंतरित की गई है। सरकारी स्कूलों में बच्चों को पूर्व प्राथमिक शिक्षा से जोड़ने के लिये 4 हजार 473 सरकारी स्कूलों में पूर्व प्राथमिक कक्षाएं शुरू की गई हैं। इन कक्षाओं में 3 वर्ष 6 वर्ष तक के आयुवर्ग के 96 हजार बच्चों को पिछले वर्ष दाखिला कराया गया था। इन कक्षाओं के बच्चों को पढ़ाने के लिये 117 मास्टर ट्रेनर्स और 4473 शासकीय शिक्षकों को प्रशिक्षण दिलाया गया। प्रदेश के सरकारी स्कूलों में कक्षा 1 एवं 2 के छात्रों को बुनियादी साक्षरता और संख्या ज्ञान प्रभावी तरीके से देने के लिये मिशन अंकुर संचालित किया जा रहा है। इस मिशन के अंतर्गत बच्चों को अभ्‍यास के लिये नि:शुल्क वर्कबुक का वितरण किया गया। अंकुर मिशन में अभिभावकों की भागीदारी सुनिश्चित करने और बच्चों के शारीरिक, मानसिक और भाषा विकास की क्षमताओं का आकलन करने के लिये सभी स्कूलों में फाउंडेशनल लिटरेसी एंड न्यूमेरेसी (एफएलएन) मेलों का आयोजन किया गया। शिक्षकों को अपनी कक्षा अनुभवों, ज्ञान, कौशल एवं नवाचारों को अपने शिक्षक समुदाय से साझा करने के लिये कक्षा एक से 8 तक पढ़ाने वाले शिक्षकों के लिये जन शिक्षा केन्द्र स्तर पर शैक्षिक संवादों का आयोजन किया गया।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव 56 करोड़ के 67 कार्यों का लोकार्पण और 23 करोड़ 88 लाख रुपये के 68 कार्यों का भूमि-पूजन करेंगे

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव कल नरसिंहपुर जिले के गाडरवारा में एक भव्य आयोजन में 80 करोड़ 46 लाख रुपये की लागत के 135 निर्माण कार्यों का लोकार्पण और भूमि-पूजन करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव 56 करोड़ 58 लाख रुपये के 67 कार्यों का लोकार्पण और 23 करोड़ 88 लाख रुपये के 68 कार्यों का भूमि-पूजन करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव जल जीवन मिशन के अंतर्गत 396 लाख रुपये की लागत से देवरी से बनवारी पिपरिया तक 8.27 किमी सड़क, साईंखेड़ा में सीवरेज मलजल योजना तथा पुस्तकालय एवं प्रतीक्षालय जैसे शहरी विकास से जुड़े कार्यों का लोकार्पण और 23 करोड़ 88 लाख रुपये के निर्माण कार्यों का भूमि-पूजन करेंगे। जिले में सामुदायिक भवन, अमृत सरोवर 2.0, आंगनबाड़ी भवनों और अन्य बुनियादी संरचनात्मक सुविधाओं का निर्माण प्रस्तावित है। समाजसेवियों, उत्कृष्ट कार्य करने वाले नागरिकों, शिक्षकों और विद्याथियों का सम्मान मुख्यमंत्री डॉ. यादव नरसिंहपुर जिले में उत्कृष्ट कार्य करने वाले नागरिकों, जनप्रतिनिधियों, महिला स्व-सहायता समूहों, शिक्षकों और विकास कार्यों में उल्लेखनीय योगदान देने वाले विभागीय कर्मचारियों और मेधावी विद्यार्थियों का सम्मान करेंगे।  

जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत प्रदेश में 5 जून तक 2139 बावड़ियों और 4254 तालाबों की सफाई की गई

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देशन में 30 मार्च को उज्जैन से शुरू हुए जल गंगा संवर्धन अभियान को दो माह से अधिक हो गए है। अभियान का समापन 30 जून को होगा। जन सहभागिता से आगे बढ़ रहे इस अभियान से जल संरक्षण के क्षेत्र में खंडवा जिले को देश में पहला स्थान मिला है, जबकि केन्द्रीय जल संसाधन विभाग की एजेंसी के आकलन में प्रदेश को राज्यों की श्रेणी में चौथा स्थान मिला है। अभियान के अंतर्गत रिकार्ड खेत तालाब और अमृत सरोवर बनाये गए हैं। प्रदेश में 5 जून तक 2139 बावड़ियों और 4254 तालाबों की सफाई की गई है। अभियान में 3468 नदी घाटों की सफाई की गई है, 15 913 जल संगोष्ठी, 1677 नुक्कड़ नाटक और 12878 दीवार लेखन के कार्य किये गए हैं। इस अवधि में अभियान में 36 लाख नागरिकों ने सहभागिता की है, इस तरह अभियान जनांदोलन बन गया है। आने वाली वर्षा ऋतु में अभियान के अंतर्गत बने खेत तालाबों, पुनरुद्धरित बावड़ियों और तालाबों में करोड़ों लीटर वर्षा जल सहेजा जा सकेगा। इससे भूजल स्तर में भी सुधार आयेगा और किसानों को फसल के लिए वर्ष भर पानी उपलब्ध रहेगा। जन सहभागिता से हुई कुओं, बावड़ियों की सफाई और सौंदर्यीकरण देवास में जल गंगा संवर्धन अभियान के माध्यम से जल संरचनाओं के निर्माण एवं गहरीकरण का कार्य किया जा रहा है। नदी, नालों, कुएं, बावड़ियों और कुंड की साफ-सफाई की जा रही है तथा उनमें से गदंगी और गाद बाहर निकाली जा रही है। इसके साथ ही खेत तालाबों का भी निर्माण किया जा रहा है। अभियान के तहत कुएं, बावड़ियों की साफ-सफाई कर उनका सौंदर्यीकरण भी किया जा रहा है। मप्र जन अभियान परिषद ने जिले के बागली विकासखंड के कमलापुर गांव की 450 वर्ष प्राचीन हाथी बावड़ी साफ-सफाई और सौंदर्यीकरण किया गया। इस प्राचीन बावड़ी में हाथी पानी पीते थे। सहभागिता करने वाले नागरिकों ने जल संरक्षण की शपथ भी ली। दीवारों पर पेंटिंग बना कर जल संरक्षण का संदेश ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ के अंतर्गत बुरहानपुर जिले की नगर परिषद शाहपुर में अमरावती नदी किनारे स्थित अधो-संरचनाओं के आस-पास जल ही ‘जीवन की आस, इसे बचाने करो प्रयास’, ‘बोलेगी चिड़िया डाली-डाली, फैलाओ तो तुम हरियाली’, ‘दूषित नहीं करना जल, बर्बाद हो जायेगा कल’, ‘सांसें हो रही हैं कम, आओ पेड़ लगाएं हम’, ‘सबका हो एक ही नारा, वर्षा जल बचाओ सारा’, और ‘साफ सुथरा पानी, अच्छे स्वास्थ्य की निशानी, जैसे जल संरक्षण के संदेश लिखे गए। कलात्मकता का परिचय देते हुए पर्यावरण संरक्षण और जल बचाने का संदेश देती आकर्षक पेंटिंग्स भी बनाई गईं। जिले में ये प्रेरणादायक स्लोगन और आकर्षक पेंटिंग्स नागरिकों का ध्यान अपनी ओर खींच रही हैं। 300 वर्ष पुरानी बावड़ी की साफ-सफाई औऱ सौंदर्यीकरण जल संरक्षण के उद्देश्य से सीहोर जिले में चलाए जा रहे जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत जन अभियान परिषद के सदस्यों ने गांव लीलाखड़ी और आममाय में स्थित लगभग 300 वर्ष पुरानी बावड़ी पर श्रमदान कर साफ सफाई की गई और ‘बावड़ी उत्सव’ मनाया गया। प्राचीन जल स्त्रोंतों के संरक्षण का संदेश देने के उद्देश्य से बावड़ी पर 51 फिट लम्बी चुनरी ओढ़ाई गई और दीप प्रज्ज्वलन कर आकर्षक रंगोली से बावड़ी की साज सज्जा की गई। जन अभियान परिषद के सदस्यों औऱ ग्रामवासियों ने आरती की और पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्य से पौधारोपण भी किया। 

मिशन कर्मयोगी में नगरीय प्रशासन एवं विकास के 43 हजार से अधिक अधिकारी-कर्मचारी पंजीकृत

भोपाल  प्रदेश में राष्ट्रीय मिशन कर्मयोगी की अवधारणा और कार्य-प्रणाली को ध्यान में रखकर राज्य सरकार ने क्षमता निर्माण नीति तैयार की है। इस नीति में प्रत्येक विभाग के बजट में मिशन कर्मयोगी के लिये बजट का एक प्रतिशत आरक्षित किया गया है। इस व्यवस्था से कर्मचारियों और अधिकारियों के प्रशिक्षण और क्षमता विकास के लिये आवश्यक संसाधन सुनिश्चित हो रहे हैं। यह व्यवस्था संचालनालय नगरीय प्रशासन एवं विकास में भी लागू की गयी है। मिशन कर्मयोगी डिजिटल पोर्टल पर अब तक 43 हजार से अधिक अधिकारियों और कर्मचारियों को पंजीकृत किया जा चुका है। ये कुल कर्मचारियों का लगभग 70 प्रतिशत है। संचालनालय के 8816 प्रतिभागी पाठ्यक्रमों में पंजीकृत हैं, जिनमें से 6843 अधिकारी-कर्मचारियों द्वारा पाठ्यक्रमों में प्रशिक्षण प्राप्त किया जा चुका है। विभाग द्वारा विशेषज्ञों के माध्यम से 4 ई-लर्निंग मॉड्यूल निर्मित किये गये हैं। इनमें आश्रय-स्थल प्रबंधन, स्व-सहायता समूह गठन एवं प्रबंधन, राजस्व प्रबंधन, प्रधानमंत्री आवास योजना 2.0 शामिल हैं। प्रदेश की क्षमता निर्माण नीति मिशन कर्मयोगी के आदर्शों पर आधारित एक ठोस एवं दायित्वपूर्ण रणनीति है। इससे राज्य सरकार के अधिकारियों और कर्मचारियों की कौशल और नेतृत्व क्षमता लगातार बढ़ेगी। राज्य सरकार की यह पहल केन्द्र सरकार की नीति से मेल खाती है। प्रशिक्षित प्रशासन तंत्र से सक्षम उत्तरदायी सुशासन व्यवस्था को साकार किया जा रहा है।  

सीएम मोहन यादव के छोटे बेटे की सगाई डॉ. इशिता से पारिवारिक एवं पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ हुई संपन्न

भोपाल भोपाल स्थित मुख्यमंत्री निवास में सोमवार को मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के छोटे सुपुत्र डॉ. अभिमन्यु यादव (मास्टर्स इन सर्जरी) की सगाई खरगौन के सेल्दा निवासी श्री दिनेश यादव (पटेल) की सुपुत्री डॉ. इशिता (एमबीबीएस) से पारिवारिक एवं पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ संपन्न हुई। सगाई समारोह में दोनों परिवारों के करीबी रिश्तेदार, राज्य सरकार के मंत्रीगण, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी एवं भाजपा के प्रमुख पदाधिकारी उपस्थित रहे। पूजन के बाद दोनों ने अंगूठी पहनाकर जीवन के नए अध्याय की शुरुआत की। डॉक्टर अभिमन्यु एक प्रतिभाशाली चिकित्सक एवं सक्रिय समाजसेवी हैं, वहीं डॉ. इशिता भी चिकित्सा क्षेत्र में सेवाएं दे रही हैं। इससे पहले डॉ. यादव के बड़े बेटे वैभव की शादी भी सादे और पारिवारिक माहौल में संपन्न हुई थी। अब उनके छोटे बेटे डॉक्टर अभिमन्यु की सगाई डॉ. इशिता के साथ भोपाल में सादे समारोह में हुई। डॉ. अभिमन्यू एमबीबीएस की डिग्री के बाद पीजी की पढ़ाई कर रहे हैं।  बेटे अभिमन्यु और बहू इशिता के साथ सीएम मोहन यादव – फोटो : सोशल मीडिया भाजपा प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा, दिल्ली के विधायक सतीश उपाध्याय, मध्य प्रदेश भाजपा प्रभारी डॉ. महेंद्र सिंह और भाजपा के प्रदेश मीडिया प्रभारी आशीष अग्रवाल समेत कई बड़े नेता शामिल हुए और नवयुगल को सुखद भविष्य की शुभकामनाएं दी। सरकारी जिम्मेदारियों के बीच मुख्यमंत्री का यह पारिवारिक आयोजन एक भावनात्मक क्षण रहा। इसमें निजी संबंधों की गर्माहट साफ झलकी। परिवार की यह सादगी और परंपराओं के प्रति आस्था राजनीतिक हलकों में भी चर्चा का विषय बनी हुई है। ज्ञातव्य है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और सीमा यादव के दो सुपुत्र एवं एक सुपुत्री हैं। ज्येष्ठ सुपुत्र एवं सुपुत्री का विवाह पहले ही संपन्न हो चुका है। डॉ. अभिमन्यु यादव (मास्टर्स इन सर्जरी) एक प्रतिभाशाली चिकित्सक एवं समाजसेवी हैं। वहीं डॉ इशिता (एमबीबीएस) भी चिकित्सा क्षेत्र से जुड़ी हुई हैं। दोनों ने पारंपरिक पूजन के पश्चात एक दूसरे को अंगूठी पहनाकर जीवन के नए अध्याय की शुरुआत की।  

सड़क दुर्घटना में घायलों के लिए अब प्रदेश कैशलेस स्कीम 2025 की शुरुआत, अब अस्पताल पहुंचाने वाले व्यक्ति को मिलेगा इनाम

इंदौर सड़क दुर्घटना में घायलों को अब अस्पतालों में तुरंत उपचार मिल सकेगा। उपचार का डेढ़ लाख रुपये तक का खर्च सरकार उठाएगी। यह सुविधा भारत सरकार द्वारा शुरू की गई कैशलेस ट्रीटमेंट स्कीम-2025 के तहत मिलेगी। प्रदेश में इस योजना को लागू किया जा रहा है। बता दें कि योजना का लाभ इंदौर के सभी अस्पतालों में मिलेगा और घायलों का कैशलेस उपचार हो सकेगा। इससे सड़क हादसे में घायल को जल्द शुरुआती उपचार मिल सकेगा और उसकी जान बचाई जा सकेगी। इंदौर के सभी अस्पतालों को इसके लिए पंजीयन करना होगा, ताकि उनको उपचार के बाद भुगतान मिल सके। इंदौर जिले में कैशलेस ट्रीटमेंट स्कीम-2025 के क्रियान्वयन को लेकर कलेक्टर आशीष सिंह ने सभी अस्पताल संचालकों की बैठक ली। कलेक्टर ने निर्देशित किया कि सभी अस्पताल तीन दिन में अपना पंजीयन करवा लें, जिससे आगामी सात दिन में योजना को पूरी तरह से लागू किया जा सके। बताया गया कि भारत सरकार ने पांच मई को कैशलेस स्कीम 2025 की शुरुआत की है, जो सड़क हादसों में घायल लोगों के लिए उपयोगी होगी। इसमें किसी भी अस्पताल में घायल व्यक्ति को डेढ़ लाख रुपये तक का उपचार आसानी से मिल सकेगा। इसके लिए किसी तरह के कागज, एडवांस और इंश्योरेंस की आवश्यकता नहीं होगी। 2 हजार से अधिक हादसे हर माह इंदौर जिले में प्रत्येक माह लगभग दो हजार से अधिक सड़क हादसे होते हैं। हादसे के बाद वक्त पर उपचार नहीं मिलने की वजह से कई लोग जान गंवा देते हैं। वहीं अस्पताल भी एडवांस की मांग करते, तो कभी इंश्योरेंस पॉलिसी दिखाने पर अड़ जाते हैं। अब ऐसा नहीं होगा और घायल को समय पर उपचार मिल सकेगा। उपचार के दौरान सात दिन में अधिकतम डेढ़ लाख रुपये तक का खर्च सरकार उठाएगी। घायल को अस्पताल पहुंचाने पर मिलेगी राशि प्रदेश सरकार ने राहवीर योजना भी लागू की है। इसमें सड़क दुर्घटना में घायल को उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाने वाले व्यक्ति को 25 हजार रुपये दिए जाएंगे। इस योजना को प्रदेश सरकार ने घायलों की मदद करने वालों को प्रेरित करने के लिए शुरू किया है, ताकि घायलों को भी तुरंत उपचार मिल सके। इससे हादसों के बाद घायलों की मदद करने के लिए लोग आगे आ सकेंगे। 

पर्याप्त नमी नहीं मिलने के कारण मध्य प्रदेश में अधिकतम तापमान बढ़ने लगा, ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में चल सकती है लू

भोपाल  दक्षिण-पश्चिम मानसून अभी भी मुंबई में ठहरा हुआ है। वैसे तो अलग-अलग स्थानों पर पांच मौसम प्रणालियां मौजूद हैं, लेकिन पर्याप्त नमी नहीं मिलने के कारण मध्य प्रदेश में अधिकतम तापमान बढ़ने लगा है। इसी क्रम में प्रदेश में सबसे अधिक 42.2 डिग्री सेल्सियस तापमान गुना एवं खजुराहो में दर्ज किया गया। सुबह साढ़े आठ बजे से शाम साढ़े पांच बजे तक नर्मदापुरम में पांच एवं इंदौर में 0.5 मिलीमीटर बारिश हुई। मौसम विज्ञानियों के अनुसार चार दिन में अधिकतम तापमान में तीन से चार डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी हो सकती है।   यहां चल सकती है लू ग्वालियर, चंबल एवं सागर संभाग के जिलों में कहीं-कहीं लू भी चल सकती है। मौसम विज्ञानी वीएस यादव ने बताया कि वर्तमान में मानसून की उत्तरी सीमा मुंबई, अहिल्यानगर, आदिलाबाद, भवानीपटना, पुरी, बालुरघाट से होकर ही गुजर रही है। एक पश्चिमी विक्षोभ पाकिस्तान के आसपास द्रोणिका के रूप में बना हुआ है। पूर्वी मध्य प्रदेश के ऊपर बना चक्रवात उत्तर-पश्चिमी राजस्थान और उसके आसपास हवा के ऊपरी भाग में चक्रवात बना हुआ है। उत्तर-पश्चिमी उत्तर प्रदेश और उसके आसपास भी हवा के ऊपरी भाग में चक्रवात मौजूद है। इसी तरह उत्तर-पूर्वी मध्य प्रदेश पर भी हवा के ऊपरी भाग में चक्रवात है।   इसके अतिरिक्त पूर्व विदर्भ से उत्तरी कर्नाटक तक एक द्रोणिका बनी हुई है, लेकिन हवाओं के साथ पर्याप्त नमी नहीं आ रही है। इस वजह से तापमान बढ़ने लगा है। इस तरह की स्थिति चार दिन तक बनी रह सकती है। इस दौरान ग्वालियर, चंबल एवं सागर संभाग के जिलों में कहीं-कहीं लू भी चल सकती है।

ब्रेन ट्यूमर बीमारी का इलाज एमवाय अस्पताल और निजी अस्पतालों में आधुनिक तकनीकों से किया जा रहा, अब नहीं है लाइलाज

इंदौर मेडिकल हब बन चुके इंदौर में अब गंभीर बीमारियों का इलाज आधुनिक तकनीकों के माध्यम से किया जा रहा है। ब्रेन ट्यूमर बीमारी का इलाज शासकीय एमवाय अस्पताल और निजी अस्पतालों में आधुनिक तकनीकों से किया जा रहा है, लेकिन आवश्यक है कि मरीज समय पर इसके लक्षण पहचानकर इलाज करवाएं।   बीमारी के प्रति जागरूक हो रहे हैं लोग विशेषज्ञों ने बताया कि ब्रेन ट्यूमर के मरीजों की संख्या हर वर्ष बढ़ रही है। इसका एक प्रमुख कारण यह है कि अब जांच की सुविधाएं छोटे शहरों और तहसीलों तक पहुंच चुकी हैं। पहले जहां मरीजों को जांच के लिए बड़े शहरों का रुख करना पड़ता था, वहीं अब सिटी स्कैन और एमआरआई जैसी आधुनिक जांच तकनीकें छोटे जिलों में भी उपलब्ध हैं। इस कारण बीमारी का पता जल्दी लग जाता है और समय पर इलाज शुरू हो पाता है। पहले जहां लोग इसका इलाज कराने से बचते थे, लेकिन अब योजनाओं का लाभ लेते हुए बड़ी संख्या में मरीज इसका उपचार शासकीय और निजी अस्पतालों में करवा रहे हैं। एमवाय अस्पताल में मिल रहा आधुनिक उपचार न्यूरोसर्जरी विभाग के एचओडी डॉ. राकेश गुप्ता ने बताया कि एमवाय अस्पताल में मरीजों को आधुनिक तकनीकों से इलाज मिल रहा है। हर वर्ष करीब 300 ब्रेन ट्यूमर के ऑपरेशन किए जाते हैं। जनवरी माह में अस्पताल में मरीज को बिना बेहोश किए ब्रेन ट्यूमर का ऑपरेशन किया गया था। यह ऑपरेशन अवेक क्रेनियोटामी पद्धति से किया गया था। अब मरीज स्वस्थ है। इसके अलावा स्पेशियलिटी अस्पताल में इंट्रा-ऑपरेटिव मॉनीटरिंग सिस्टम से मरीजों को उपचार की सुविधा मिल रही है। इससे ऑपरेशन की सफलता दर बढ़ गई है और मरीज जल्दी स्वस्थ हो जाते हैं। धार से आए मरीज ने बताया कि मुझे लगातार सिरदर्द और चक्कर आते थे। डॉक्टर ने एमआरआई करवाने के लिए कहा, जिसमें ब्रेन ट्यूमर की पुष्टि हुई। पहले डर लग रहा था, लेकिन डॉक्टरों ने समझाया कि अब इसका इलाज संभव है। मेरी सर्जरी हुई और अब मैं सामान्य जीवन जी रहा हूं। 95 प्रतिशत ऑपरेशन सफल इंदौर में आधुनिक तकनीकों से ब्रेन ट्यूमर के 95 प्रतिशत ऑपरेशन सफल हो रहे हैं। यही कारण है कि लोग भी अब इसके प्रति जागरूक होने लगे हैं। बात करें शहर के निजी अस्पतालों की तो यहां पर भी नई तकनीकों से इसका इलाज किया जा रहा है। न्यूरोसर्जन डॉ. रजनीश कछारा ने बताया कि पहले लोगों को लगता था कि ब्रेन ट्यूमर होने पर मरीजों के बचने की संभावना कम है, लेकिन अब आधुनिक तकनीकों के माध्यम से बेहतर इलाज मिलने लगा है। नेविगेशन से पता चल जाता है कि ट्यूमर कहां है। साथ ही आपरेशन के बाद भी मरीजों को आईसीयू जैसी सुविधाएं मिलने लगी हैं। ब्रेन ट्यूमर के संकेत और लक्षण विशेषज्ञों के अनुसार, ब्रेन ट्यूमर के लक्षण उसके प्रकार, विकास की दर, स्थान और ट्यूमर की गंभीरता पर निर्भर कर सकते हैं। ब्रेन ट्यूमर के कुछ सामान्य लक्षण सिरदर्द (विशेष रूप से सुबह उठते ही), उल्टी और जी मचलाना, बोलने, सुनने या देखने की क्षमता में परिवर्तन, संतुलन बिगड़ना, याददाश्त कमजोर होना, थकान होना, दिनभर नींद आना, व्यवहार में परिवर्तन, मिर्गी के दौरे आना आदि हैं। यदि ऐसे कोई लक्षण दिखाई देते हैं तो तुरंत विशेषज्ञ से संपर्क करना चाहिए। ब्रेन ट्यूमर होने की कोई उम्र नहीं होती है। यह किसी भी उम्र में हो सकता है।

इंदौर मेट्रो अब फ्री नहीं, आज से देना होगा किराया, पांच स्टेशन तक सफर करने पर आठ रुपये शुल्क देना होगा

इंदौर  सुपर प्रायोरिटी कारिडोर पर मेट्रो में सफर करने वाले यात्रियों को रविवार से किराया देना होगा। दो स्टेशन के बीच सफर करने पर पांच रुपये और पांच स्टेशन तक सफर करने पर आठ रुपये शुल्क देना होगा। देवी अहिल्याबाई होलकर स्टेशन (गांधी नगर) से मेट्रो में बैठने के बाद पांचवें वीरांगना झलकारी बाई स्टेशन (टीसीएस) पर उतरने पर यात्री को आठ रुपये किराया देना होगा। वीरांगना झलकारी बाई स्टेशन से पुन: मेट्रो में बैठ देवी अहिल्याबाई होलकर स्टेशन पर लौटने के लिए फिर से आठ रुपये का टिकट लेना होगा। गौरतलब है कि पिछले एक सप्ताह में डेढ़ लाख से ज्यादा इंदौरवासियों ने सफर किया है। शहरवासी अभी तक मेट्रो में निश्शुल्क सफर कर रहे थे। रविवारी से बिना टिकट यात्रा करने पर मेट्रो में जुर्माना भी लगेगा। गौरतलब है कि आठ से 15 जून तक मेट्रो के निर्धारित किराए में 75 फीसद छूट यात्रियों को मिलेगी। मेट्रो के शुभारंभ मौके पर जहां 25 हजार से ज्यादा लोगों ने सफर किया था। वहीं एक से सात जून तक टिकट लेकर एक लाख 43 हजार 301 लोगों ने सफर किया।   मेट्रो में सफर करने से पहले सुरक्षाकर्मी पांचों स्टेशन पर यात्रियों की जांच कर रहे हैं। यात्रियों के पास बीड़ी, सिगरेट, तंबाकू व गुटखे के पाउच मिलने पर जब्त कर एक बक्से में डाला जा रहा है। पिछले पांच दिन से हर दिन मेट्रो स्टेशन पर इस तरह के उत्पादों से बक्से भर गए हैं। पिछले आठ दिन में मेट्रो में शहरवासियों ने किया सफर 31 मई – 25 हजार से ज्यादा 1 जून- 26803 2 जून- 16071 3 जून- 19701 4 जून- 20534 5 जून- 21179 6 जून- 19215 7 जून- 19798

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