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भोपाल रेलवे स्टेशन पर हुई आपात स्थिति में रेलकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से बची एक जान

भोपाल दिनांक 17 मई 2025 को रात्रि 19:05 बजे, भोपाल रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म क्रमांक 01 पर जब ट्रेन संख्या 22686 चंडीगढ़–यशवंतपुर संपर्क क्रांति एक्सप्रेस का आगमन हो रहा था, उसी दौरान ऑन बोर्ड हाउसकीपिंग स्टाफ (OBHS) के एक कर्मी, श्री सुगंधी लाल (आयु 35 वर्ष), ट्रेन की सफाई हेतु चलती हुई ट्रेन के एसी कोच में चढ़ने का प्रयास कर रहे थे। दुर्भाग्यवश, असंतुलन के कारण उनका पाँव फिसल गया और वे कोच और प्लेटफॉर्म के मध्य गिर पड़े। उनके सिर, कमर और पैर में गंभीर चोटें आईं और वे अचेत हो गए। घटना को तत्काल ड्यूटी पर तैनात मुख्य टिकट निरीक्षक (CTI) राघवदास ने देखा और तुरंत ही उप स्टेशन प्रबंधक(वाणिज्य) आनंद कृष्ण मिश्रा को सूचित किया। मिश्रा ने तत्परता दिखाते हुए तुरंत प्लेटफॉर्म पर स्थित आपातकालीन चिकित्सा कक्ष से डॉ. नूर हसन को बुलाया और रेलवे अस्पताल को एम्बुलेंस भेजने के निर्देश दिए। मिश्रा स्वयं घटनास्थल पर तुरंत पहुंचे और सफाईकर्मियों की सहायता से घायल कर्मचारी को सुरक्षित रूप से बाहर निकालने का समन्वय किया। इस बीच उप स्टेशन प्रबंधक(परिचालन) और नियंत्रण कक्ष को सूचित किया गया, जिससे ट्रेन को रोके रखा गया। डॉ. नूर हसन द्वारा प्राथमिक उपचार प्रदान किया गया और दस मिनट के भीतर पहुंची एम्बुलेंस में घायल को स्ट्रेचर द्वारा रेलवे अस्पताल भिजवाया गया। वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक श्री सौरभ कटारिया ने बताया कि भोपाल मंडल के रेलकर्मियों ने मानव जीवन की रक्षा हेतु अत्यंत सजगता, संवेदनशीलता और कार्यकुशलता का परिचय देते हुए एक सफाईकर्मी के जीवन की रक्षा सुनिश्चित की। सभी संबंधित कर्मचारियों की त्वरित प्रतिक्रिया की सराहना की गई।

सीएम ने भोज-नर्मदा द्वार का भूमिपूजन किया, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत को रूप देने की दिशा में एक और पहल

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राजधानी भोपाल के समीप स्थित समरधा में “भोज-नर्मदा द्वार” का भूमिपूजन कर प्रदेश की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत को साकार रूप देने की दिशा में एक और पहल की। इस अवसर पर उन्होंने भोपाल नगर निगम द्वारा नीमच में स्थापित 10 मेगावॉट की सौर ऊर्जा परियोजना का वर्चुअल लोकार्पण भी किया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राजधानी भोपाल के ग्यारह मील स्थित समरधामें भोज-नर्मदा द्वार का भूमिपूजन किया और भोपाल नगर निगम द्वारा नीमच में स्थापित 10 मेगावॉट के सोलर परियोजना का भी वर्चुअल लोकार्पण किया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि नई शिक्षा नीति-2000 लागू होने के बाद हमारे गौरवशाली इतिहास से जुड़ी कई घटनाएं और प्रसंगों को पाठ्यक्रम में शामिल किया गया है। आने वाले समय में राजा भोज, मां नर्मदा सहित अवंतिका और अन्य महत्वपूर्ण जानकारी पाठ्यपुस्तकों में जोड़ी जाएंगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनका उद्देश्य आने वाली पीढिय़ों को अपने इतिहास से रू-ब-रू कराना है। इसीलिए नई शिक्षा नीति के बाद जो पुस्तकों में बदलाव हुआ है उसमें देश और प्रदेश से जुड़े प्रसंगों को शामिल किया जा रहा है। पत्थर शिल्प के जरिए हमारा इतिहास आनेवाली पीढ़ी तक पहुंचे, इसलिए इस तरह के द्वारों का निर्माण कराया जा रहा है। राजधानी भोपाल में 9 द्वारों का निर्माण किया जाएगा। इतिहास गौरवान्वित होना चाहिए सीएम डॉ. यादव ने कहा कि राजा भोज की नगरी में उनसे जुड़ा इतिहास और मां नर्मदा के प्रवाह और उद्गम सहित अन्य इतिहास से जुड़ी घटनाओं और कथाओं को पत्थर शिल्प के जरिए उकेरा जाएगा, ताकि आनेवाली पीढिय़ों को इसकी जानकारी हो सके। पत्थरों के द्वार से भी इतिहास गौरान्वित होना चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने ओंकारेश्वर और महाकालेश्वर के बीच का द्वार उज्जैन में बनाया है जो इन ज्योर्तिलिंग से जुड़े शहरों के इतिहास को पत्थर शिल्प के माध्यम से बताता है, इसलिए इसका नाम मृत्युंजय नाम दिया।  मुख्यमंत्री ने राजा भोज के पराक्रम और उनके पिता सिंधुराज और बड़े भाई मुंज से जुड़ी कथा सुनाई और मुंज द्वारा राजा भोज को मारने की साजिश और उसके बाद होनेवाले पश्चाताप से जुड़ा प्रसंग सुनाया।   उज्जैन, अयोध्या बनारस मोक्ष देनेवाली नगरी मुख्यमंत्री ने कहा कि मृत्यु के बाद मोक्ष देनेवाली नगरी अयोध्या, बनारस और उज्जयनी है। उज्जैन का 5 हजार साल पुराना इतिहास है। पत्थरों पर उज्जैन का इतिहास बताया। मैं प्रयास कर रहा हूं पूरे भोपाल का इतिहास पत्थरों के माध्यम से इतिहास आना चाहिए। एक-एक द्वार मां नर्मदा का उद्गम, राजा भोज का गौरवशाली पृष्ट क्या है। पत्थर शिल्प क्या है। उन्होंने कहा कि भारत की सेना ने पाकिस्तान को जो पटकनी दी है, वह काबिले तारीफ है। पहली बार बहन सोफिया और व्योमिका ने संसार के सामने रखा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का इसके लिए धन्यवाद। हमारे दुश्मनों की क्या कमर तोड़ी है।   नीमच में स्थापित उर्जा संयत्र का लोकार्पण समारोह के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भोपाग नगर निगम द्वारा नीमच में स्थापित सौर ऊर्जा संयत्र का लोकार्पण किया। इस संयत्र के जरिए 10 मेगावॉट बिजली का उत्पादन किया जा रहा है। नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने इस मौके पर कहा कि आनेवाले समय में नगर निगम भोपाल 200 मेगावॉट तक बिजली का उत्पादन करेगा। इस दौरान मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, विश्वास सारंग, कृष्णा गौर, सांसद आलोक शर्मा, विधायक रामेश्वर शर्मा, भगवानदास सबनानी, महापौर मालती राय, निगम अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी, जिला अध्यक्ष रविन्द्र यति मौजूर रहे।

सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के साथ ही विजय शाह का राजनीतिक भविष्य तय होगा कि वह मंत्री रहेंगे या नहीं

भोपाल मंत्री विजय शाह द्वारा कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर अमर्यादित टिप्पणी के मामले में भाजपा संगठन कोई जल्दबाजी करने की जगह फूंक-फूंककर कदम रख रहा है। पार्टी की निगाहें सुप्रीम कोर्ट के निर्णय पर टिकी हैं। सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के साथ ही विजय शाह का राजनीतिक भविष्य तय होगा कि वह मंत्री रहेंगे या नहीं। दरअसल, भाजपा भी कोर्ट के निर्णय का इंतजार कर रही है। उल्लेखनीय है कि भाजपा, विजय शाह को उनके बयान को लेकर नसीहत दे चुकी है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने भी पूरे मामले में प्रदेश संगठन से रिपोर्ट मांगी थी। एफआईआर दर्ज होने के बाद शाह चुपचाप हैं। सार्वजनिक कार्यक्रमों में भी नहीं जा रहे हैं। मामले में कांग्रेस हमलावर हो गई है। जनजातीय कार्य मंत्री विजय शाह की मुश्किलें बढ़ती चली जा रही हैं। सुप्रीम कोर्ट में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की ओर से अधिवक्ता जया ठाकुर ने कैविएट दायर कर बिना उनका पक्ष सुने निर्णय नहीं देने का अनुरोध किया है। बता दें कि मंत्री विजय शाह के विरुद्ध हाई कोर्ट के आदेश पर जिन धाराओं में प्रकरण दर्ज हुआ है, उनमें उम्रकैद तक का प्रविधान है। सुप्रीम कोर्ट ने मंत्री शाह की ओर से हाई कोर्ट के आदेश पर दर्ज एफआइआर रद करने की मांग वाली याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई को सुनवाई नहीं करते हुए सोमवार को यह मामला सुने जाने की व्यवस्था दी थी।   सुप्रीम कोर्ट में अर्जी फाइल की वहीं मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन की अध्यक्षता वाली युगलपीठ के अभाव में सुनवाई टल गई थी। दूसरी ओर, डेमोक्रेटिक लायर्स फोरम, जबलपुर के सचिव अधिवक्ता रवींद्र गुप्ता व अध्यक्ष ओपी यादव की ओर से सुप्रीम कोर्ट में हस्तक्षेप अर्जी फाइल कर दी गई है। दोनों की ओर से पहले पक्ष सुने जाने पर बल दिया गया है। इसके साथ ही इस बात पर बल दिया गया है कि इतने गंभीर प्रकरण में मंत्री शाह को सुप्रीम कोर्ट किसी तरह की राहत प्रदान न करे। अधिवक्ता रवींद्र गुप्ता व ओपी यादव की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल, विवेक कृष्ण तन्खा, केटीएस तुलसी व इंदिरा साहनी के साथ समीर सोढ़ी, वरुण तन्खा, इंद्रदेव मंत्री विजय शाह की विशेष अनुमति याचिका का सोमवार को विरोध करेंगे।

भोपाल के एक होटल में उपभोक्ता से पानी की बोतल पर एक रुपये जीएसटी वसूला गया, जिस पर उपभोक्ता ने जताया विरोध

भोपाल मध्य प्रदेश राजधानी भोपाल के एक होटल में उपभोक्ता से पानी की बोतल पर एक रुपये जीएसटी वसूला गया। जिस पर उपभोक्ता ने विरोध भी जताया, लेकिन होटल संचालक नहीं माने। इससे परेशान होकर ग्राहक ने जिला उपभोक्ता आयोग में याचिका लगाई। आयोग ने उपभोक्ता के पक्ष में निर्णय सुनाया। आयोग के अध्यक्ष योगेश दत्त शुक्ल व सदस्य प्रतिभा पांडेय ने निर्णय सुनाया कि एमआरपी में जीएसटी शामिल होता है, ऐसे में अलग से जीएसटी वसूलना गलत है। मामले में आयोग ने निर्णय सुनाया कि होटल प्रबंधन दो महीने के अंदर वसूली गई जीएसटी की राशि एक रुपये ग्राहक को वापस करे। दोस्त के साथ गए थे होटल साथ ही आठ हजार रुपये मानसिक क्षतिपूर्ति के रूप में देना होगा। दरअसल, राजधानी के ऐश्वर्य निगम मिसरोद रोड स्थित मोती महल डीलक्स होटल में अपने दोस्त के साथ खाना खाने गए थे, जहां खाने का बिल 796 रुपये दिया गया। इसमें पानी की एक बॉटल 29 रुपये की दी गई, जबकि बॉटल पर एमआरपी 20 रुपये छपी थी। इसके साथ ही होटल प्रबंधन ने पानी की बॉटल पर एक रुपये की जीएसटी भी वसूली। होटल प्रबंधन के तर्क को किया खारिज उपभोक्ता ने शिकायत की थी कि जब पानी की बॉटल बाजार भाव से अधिक दाम पर होटल प्रबंधन से की तो विवाद बढ़ गया। होटल प्रबंधन ने तर्क रखा कि उपभोक्ता को जो मेन्यू कार्ड दिया गया था, उसमें कीमत और जीएसटी दोनों का जिक्र था। साथ ही होटल में बैठने, एयर कंडीशनर और म्यूजिक समेत अन्य सुविधाएं भी दी जाती हैं। ऐसे में पानी पर जीएसटी लगाना कानूनी अधिकार है, हालांकि आयोग ने इस तर्क को खारिज कर दिया।

मुरैना में सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे को लेकर दो पक्षों में फायरिंग, गोली लगने से एक की मौत

मुरैना मध्य प्रदेश के मुरैना जिले के तोर गांव में सरकारी जमीन को लेकर दो पक्षों के बीच दो दिन से फायरिंग होने की घटना सामने आई है। फायरिंग में एक युवक की मौत हो गई। निरार थाना पुलिस के पास पहली बार दोनों पक्षों के बीच हुई फायरिंग की शिकायत पहुंची थी, लेकिन इसे नजरअंदाज कर दिया गया। शुक्रवार-शनिवार की रात एक पक्ष ने जमीन पर बनी झोंपड़ी में आग लगाई और फिर ताबड़तोड़ फायर किए। मामला थाने तक आया, लेकिन पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। इसके बाद रात में दोनों पक्ष फिर आमने-सामने आ गए। गोली लगने से जिसकी मौत हुई है वह देवगढ़ क्षेत्र का रहने वाला है और तोर गांव में अपने रिश्तेदार के घर आया था। इस खबर को लगातार अपडेट किया जा रहा है। हम अपने सभी पाठकों को पल-पल की खबरों से अपडेट करते हैं। हम लेटेस्ट और ब्रेकिंग न्यूज को तुरंत ही आप तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। प्रारंभिक रूप से प्राप्त जानकारी के माध्यम से हम इस समाचार को निरंतर अपडेट कर रहे हैं। ताजा ब्रेकिंग न्यूज़ और अपडेट्स के लिए जुड़े रहिए नईदुनिया के साथ।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य को ज्ञानपीठ दिया पुरस्कार, सीएम डॉ मोहन ने दी बधाई

भोपाल नई दिल्ली विज्ञान भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य को संस्कृत भाषा व साहित्य के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए 58वां ज्ञानपीठ पुरस्कार प्रदान किया हैं। इसे लेकर मध्य प्रदेश के सीएम डॉ मोहन यादव ने उन्हें बधाई दी है। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने जगद्गुरु तुलसीपीठाधीश्वर रामानंदाचार्य स्वामी श्री रामभद्राचार्य को ज्ञानपीठ पुरस्कार-2023 से सम्मानित होने पर बधाई दी। उन्होंने कहा कि संस्कृत के प्रकांड विद्वान स्वामी श्री रामभद्राचार्य द्वारा दृष्टिबाधित होने के बावजूद अंतर्मन के आलोक से वेद, उपनिषद और रामकथा की जो गूढ़ व्याख्या की गई है, वह भारत ही नहीं, वैश्विक साहित्य जगत के लिए अनुपम आध्यात्मिक धरोहर है। सीएम ने आगे कहा कि कहा कि भारतीय संत परंपरा के गौरव, श्रद्धेय संत पद्मविभूषित स्वामी श्री रामभद्राचार्य की संस्कृत साधना और तपस्वी जीवन की इस उपलब्धि से भावी पीढ़ियों को प्रेरणा मिलती रहेगी।

मंत्री सारंग ने डिजाइनिंग और लेआउट पर जताई नाराजगी, सुधार के दिए निर्देश

भोपाल खेल और युवा कल्याण मंत्री श्री विश्वास कैलाश सारंग ने शनिवार को टी.टी. नगर स्टेडियम, भोपाल में खेल और युवा कल्याण की बैठक में नाथू बरखेड़ा में निर्माणाधीन अंतर्राष्ट्रीय स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स के कार्य के प्रगति की समीक्षा की। मंत्री श्री सारंग ने फेज-II में हो रहे स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स के निर्माण कार्य की डिजाइनिंग और ले-आउट में और आवश्यक सुधार के निर्देश दिए। उन्होंने चिन्हित मल्टीलेवल पार्किंग के स्थान पर एडमिनिस्ट्रेटिव ब्लॉक बनाने एवं ओपन पार्किंग की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही उन्होंने हर हफ्ते निर्माण कार्य प्रगति की प्रोग्रेस रिपोर्ट प्रस्तुत करने के भी निर्देश दिए। बैठक में खेल संचालक श्री राकेश कुमार गुप्ता, संयुक्त संचालक श्री बी.एस. यादव, कांट्रेक्टर, कंसल्टेंट, आर्किटेक्ट, इंजीनियर्स, प्रोजेक्ट मैनेजर सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे। डिजाइनिंग और ले-आउट में सुधार के बाद करें निर्माण कार्य मंत्री श्री सारंग ने कहा कि स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स के फेज-I एवं फेज-II में चल रहे निर्माण कार्य की डिजाइन और ले-आउट में किसी भी प्रकार की लापरवाही या गुणवत्ता में कमी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने शीघ्र ही सभी आवश्यक सुधार के बाद तय समय-सीमा में निर्माण कार्य को पूर्ण करने के निर्देश दिए। स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में मूलभूत सुविधाओं को करें सुनिश्चित मंत्री श्री सारंग ने जल आपूर्ति एवं भंडारण की क्षमता, सीवेज, फायर सेफ्टी, सर्वर रुम, कैफेटेरिया, मीटिंग हॉल एवं साइनेज की व्यवस्था का प्रॉपर प्लॉन तैयार कर उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। मंत्री श्री सारंग ने कहा कि सभी बुनियादी सुविधाएं विश्वस्तरीय मानकों के अनुरूप सुनिश्चित की जा सकें इसके लिए विस्तृत प्लान भी तैयार किया जा रहा है। फेज-II में हो रहा स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स का निर्माण कार्य फेज-I में एथलेटिक्स स्टेडियम, हॉकी स्टेडियम, एथलेटिक्स प्रैक्टिस फील्ड एवं हॉकी प्रैक्टिस फील्ड का निर्माण कार्य किया जा रहा है। फेज-II में मल्टी स्पोर्ट्स इंडोर स्टेडियम, एक्वाटिक्स सेंटर, फुटबाल हाई परफार्मेंस सेंटर, स्टॉफ एवं स्टुडेंट्स रेजिडेंशियल कॉम्प्लेक्स एवं थ्री-डे प्रैक्टिस एंड इक्वेस्ट्रियन ट्रैक का निर्माण कार्य प्रगति पर है।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा – प्रस्तावित मेट्रोपॉलिटन क्षेत्रों में परस्पर कनेक्टिविटी बढ़ाना आवश्यक

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश में नगरीय क्षेत्रों का तेजी से विस्तार हो रहा है। जनसामान्य को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने और औद्योगिक एवं व्यापारिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से नगरीय क्षेत्रों के व्यवस्थित नियोजन को समय रहते सही दिशा देना जरूरी है। इंदौर-उज्जैन-देवास-धार और भोपाल-सीहोर-रायसेन-विदिशा-ब्यावरा (राजगढ़) को मिलाकर प्रदेश में दो मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र विकसित किये जाएंगे। उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों के नगरीय निकायों और विकास प्राधिकरणों के प्रबंधन को सशक्त करते हुए संस्थाओं की वित्तीय स्थिति में सुधार के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं। प्रस्तावित क्षेत्रों में वर्तमान में पर्याप्त औद्योगिक गतिविधियां संचालित हो रही हैं। मेट्रोपॉलिटन के रूप में विकास से यहां निवेश और औद्योगिक विकास की प्रक्रिया तेज होगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रदेश में प्रस्तावित मेट्रोपॉलिटन एरिया गठन से संबंधित बैठक को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री निवास स्थित समत्व भवन में आयोजित बैठक में राजस्व मंत्री श्री करण सिंह वर्मा, मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव डॉ. राजेश राजौरा, अपर मुख्य सचिव नागरीय विकास एवं आवास श्री संजय शुक्ला सहित अधिकारी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रस्तावित मेट्रोपॉलिटन क्षेत्रों में परस्पर कनेक्टिविटी बढ़ाना आवश्यक है। इसके लिए बसाहटों, यातायात, सार्वनिक परिवहन, अधोसंरचना, जल आपूर्ति, सीवरेज, विद्युत आपूर्ति, और प्रकाश व्यवस्था आदि की समन्वित रूप से कार्ययोजना बना कर गतिविधियों का क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए। इन वृहद क्षेत्रों की प्राकृतिक सुंदरता, कृषि योग्य भूमि के संरक्षण, वन प्रबंधन, जल ग्रहण और पर्यटन की संभावनाओं को प्रोत्साहित करने के लिए संवेदनशीलता के साथ नीतियां निर्धारित की जाएं। उन्होंने कहा कि क्षेत्र की पंचायतों को आवश्यकतानुसार नगर परिषद के रूप में विकसित किया जाए। बैठक में दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र सहित महाराष्ट्र, हरियाणा, तेलंगाना, उत्तरप्रदेश, कर्नाटक, पश्चिम बंगाल और तामिलनाडु में मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र विकास एवं प्रबंधन के लिए विद्यमान व्यवस्था पर भी चर्चा हुई।  

जल गंगा संवर्धन अभियान देश में जन-आंदोलन के रूप में ख्याति प्राप्त कर रहा: तुलसीराम सिलावट

भोपाल जल संसाधन मंत्री श्री तुलसीराम सिलावट ने कहा है कि जल गंगा संवर्धन अभियान देश में जन-आंदोलन के रूप में ख्याति प्राप्त कर रहा है। समाज की भागीदारी से सरकार की जल संरक्षण और संवर्धन के कार्यों के फलस्वरुप मध्यप्रदेश जल शक्ति के रूप में उभर कर देश के नक्शे में स्थापित होगा। मंत्री श्री सिलावट ने शनिवार को विदिशा ज़िलें में जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत ग्राम जम्बार के तालाब में आयोजित श्रमदान कार्यक्रम में सहभागिता की। इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती गीता कैलाश रघुवंशी, विधायक श्री मुकेश टंडन, श्री हरि सिंह सप्रे, श्री हरि सिंह रघुवंशी, जनपद अध्यक्ष श्री वीर सिंह के साथ अन्य जन-प्रतिनिधियों ने भी श्रमदान में सहभागिता की। मंत्री श्री सिलावट ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के संकल्प को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने संपूर्ण मध्यप्रदेश में लागू कर जल संवर्धन के ऐसे कार्य को मूर्तरूप दिया जा रहा है, जिससे आने वाली पीढ़ी को हम प्रचुर मात्रा में जल संचय भण्डार विरासत में दे सकेंगे। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार इंदौर में प्रदेश के अनेक क्षेत्रों में लीड कर राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति हासिल की है, ठीक वैसी ख्याति विदिशा जिला जल गंगा संवर्धन अभियान के कार्यों में अर्जित करे। इस अभियान को अपना समझकर हम अपने स्तर पर सहयोग व योगदान कर मिसाल कायम करें। मंत्री श्री सिलावट ने कहा कि जल का कोई विकल्प नहीं है, जल है तो कल है, भविष्य है और प्रगति संभव है। उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश में सिंचित रकबा बढ़ाने के लिए सिंचाई कार्य सर्वोच्च प्राथमिकता से मुख्यमंत्री डॉ. यादव के मार्गदर्शन में पूरे कराए जा रहे हैं। उन्होंने विगत वर्षों की तुलना में सिंचित रकबे में हुई आशातीत वृद्धि को रेखांकित करते हुए कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी का नदियों को जोड़ने का संकल्प प्रदेश में केन्द्र और राज्य सरकार मिलकर पूरा कर रहे हैं। उन्होंने केन-बेतवा लिंक परियोजना से होने वाले प्रमुख फायदों के बारे में बताते हुए कहा कि इससे बिजली उत्पादन के साथ 12 माह पेयजल की उपलब्धता रहेगी। मंत्री श्री सिलावट ने कहा कि पहले गांवों के तालाब व अन्य जल संचय लबालब भरे रहते थे। इस स्थिति को पुन: लाने में हम कोई कोर कसर ना छोड़े। उन्होंने कहा कि हरेक जल स्रोत की संरचना अतिक्रमण से विमुक्त हो यदि कहीं कोई इस प्रकार की खबर मिलती है तो अभियान के रूप में क्रियान्वित कराने की समझाइश अधिकारियों की दी है। मंत्री श्री सिलावट ने कहा कि जल का सदुपयोग हो इसके लिए विशेष ध्यान देना होगा। उन्होंने बताया कि खुली नहरों की जगह माइक्रो परियोजना से पाईप लाईन का विस्तारीकरण किया जा रहा है। उन्होंने प्राचीन तालाब, कुएं, बावड़ियों के अलावा अन्य जल स्रोतों के जीणोद्धार पर बल देते हुए कहा कि इन विरासतों को बनाए रखना जरूरी है। विदिशा विधायक श्री मुकेश टंडन ने कहा कि बेतवा नदी में नाले ना मिलें इसके लिए पृथक से तैयार की गई कार्य योजना अनुसार कार्य किया जा रहा है। उन्होंने जल संचय को बढ़ावा देने के कार्यो को अतिमहत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि विदिशा जिला इस क्षेत्र में विशेष पहल कर रहा है। उन्होंने प्राचीन जल स्त्रोत धरोहरो के जीर्णोद्धार हेतु किए जा रहे कार्यो को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि हम अपने खेतो में अधिक से अधिक जल संचय की संरचनाओं क निर्माण कराएं। इस कार्य में शासन द्वारा विभिन्न योजनाओं से मदद की जा रही है। ऐसी संरचनाओं का निर्माण होने से हम सिंचित रकबे को बढ़ा सकते हैं, वहीं भू-जल स्तर को गिरने से बचा सकते है। मंत्री श्री सिलावट ने जम्बार लघु तालाब में श्रमदान कर जल संचय कार्यो के लिए सभी को अभिप्रेरित किया। जम्बार तालाब सम्राट अशोक सागर परियोजना संभाग क्रमांक-2 विदिशा के अंतर्गत निर्मित जम्बार तालाब का निर्माण वर्ष 1965-66 में हुआ था। तालाब का कैचमेन्ट एरिया 3.74 वर्ग किमी. तथा जीवित जल भराव क्षमता 1.26 मिलियिन घन मीटर है। तालाब से विदिशा तहसील के 3 ग्रामों कमशः जम्बार, बागरी एवं पिपरिया घाट की कुल 235 हेक्टेयर कृषि क्षेत्र सिंचाई होती है। वर्तमान में तालाब से उक्त तीनों ग्रामों की कुल 318 हेक्टेयर कृषि भूमि में सिंचाई हो रही है। कार्यक्रम में जनप्रतिनियों के साथ साथ गणमान्य नागरिक, स्वयंसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधि, जिला पंचायत सीईओ श्री ओपी सनोडिया, जल संसाधन विभाग, राजस्व विभाग, पंचायत ग्रामीण विकास के अधिकारी और ग्रामीण जन मौजूद रहे। मंत्री ने बेतवा नदी की आरती की और स्वच्छ बनाए रखने का आह्वान किया मंत्री श्री सिलावट ने विदिशा जिले में बेतवा नदी के बड़वाले घाट पर आरती की और साफ-सफाई कर स्वच्छता का संदेश संप्रेषित किया है। सफाई अभियान में विदिशा विधायक श्री मुकेश टंडन, कुरवाई विधायक श्री हरि सिंह सप्रे, बासौदा विधायक श्री हरि सिंह रघुवंशी को-ऑपरेटिव बैंक के पूर्व अध्यक्ष श्री श्याम सुंदर शर्मा समेत अन्य जनप्रतिनिधि, विभिन्न विभागीय अधिकारी/कर्मचारियों ने भी स्वच्छता संबंधी कार्यो में सहभागिता निभाई।  

प्रदेश में 3 साइक्लोनिक सर्कुलेशन और ट्रफ की हलचल देखने को मिल रही, अगले तीन दिन बारिश के साथ तेज आंधी की चेतावनी

भोपाल मध्यप्रदेश में इन दिनों आंधी-बारिश का दौर चल रहा है। राजधानी भोपाल में मौसम साफ रहा। वहीं, सिंगरौली, विदिशा, बैतूल, छतरपुर और ग्वालियर में आंधी के साथ बारिश भी हुई। मौसम विभाग के द्वारा 20 मई तक ऐसे ही मौसम रहने की संभावना जताई गई है।  मौसम विशेषज्ञ ने बताया कि वर्तमान में प्रदेश में 3 साइक्लोनिक सर्कुलेशन और ट्रफ की हलचल देखने को मिल रही है। इसके कारण से बारिश और आंधी का दौर चल रहा है। आने वाले कुछ दिनों में बारिश के साथ गर्मी का असर भी देखने को मिलेगा। आज यहां बारिश का अनुमान मौसम विभाग की रिपोर्ट की मानें तो नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, बुरहानपुर, खंडवा, खरगौन, बड़वानी, अलीराजपुर, झाबुआ, धार, इंदौर जिलों में तेज आंधी-बारिश की संभावना है। वहीं, छिंदवाड़ा, सिवनी, मंडला, बालाघाट, पांढुर्णा जिलों में हवाएं के साथ हल्की बारिश का अनुमान है। 18 मई को गुना, अशोकनगर, विदिशा, रायसेन, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, सीहोर, राजगढ़, शाजापुर, देवास, इंदौर, भोपाल, उज्जैन, शिवपुरी, खंडवा, बुरहानपुर, खरगोन,अलीराजपुर, बड़वानी, सागर, आगर-मालवा, नीमच, मंदसौर, रतलाम, झाबुआ, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, सिवनी, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी, अनूपपुर, कटनी, उमरिया, शहडोल और सिंगरौली में तेज आंधी के साथ बारिश का अलर्ट है। 19 मई इंदौर, भोपाल, उज्जैन, जबलपुर, रायसेन, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, सिवनी, बालाघाट, मंडला, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, विदिशा, डिंडौरी, सीहोर, राजगढ़, शाजापुर, देवास, खंडवा, बड़वानी, सागर, दमोह, पन्ना, सतना, रीवा, मऊगंज, सीधी, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा,बुरहानपुर, खरगोन, आगर-मालवा, नीमच, मंदसौर, रतलाम, झाबुआ, अलीराजपुर और सिंगरौली में तेज आंधी और आंधी का अनुमान है। ऐसे ही 20 मई को निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, इंदौर, भोपाल, उज्जैन, जबलपुर, दतिया, गुना, अशोकनगर, विदिशा, रायसेन, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, सीहोर, राजगढ़, शाजापुर, देवास, खंडवा, दमोह, पन्ना, सतना, उमरिया, मैहर, बुरहानपुर, खरगोन, रतलाम, झाबुआ, अलीराजपुर, बड़वानी, सागर, शहडोल, अनूपपुर, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, सिवनी, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी, रीवा, मऊगंज, सीधी, नरसिंहपुर, और सिंगरौली में तेज आंधी और बारिश का अलर्ट है। यहां पर 30 से 50 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से आंधी चल सकती है।

देश के चार हजार नगर निगमों में डेढ़ माह पहले स्वच्छता सर्वेक्षण हो चुका, वर्ष 2024 स्वच्छता सर्वेक्षण घोषित ही नहीं हुआ

 इंदौर इंदौर नगर निगम को भरोसा है कि आठवीं बार सफाई में फिर वह फिर नंबर वन बनेगा, लेकिन अब तक परिणाम नहीं आए है। इंदौर सहित देश के चार हजार नगर निगमों में डेढ़ माह पहले ही स्वच्छता सर्वेक्षण हो चुका है। वर्ष 2024 स्वच्छता सर्वेक्षण घोषित ही नहीं हुआआ,क्योकि सर्वेक्षण ही छह माह लेट हुआ था। इसका असर परिणामों की घोषणा पर भी नजर आ रहा है। पिछले साल जनवरी में परिणाम घोषित हो चुके थे, लेकिन इस साल तो स्वच्छता सर्वेक्षण के लिए ही टीम मार्च माह में आई। इंदौर नगर निगम सर्वेक्षण से पहले चार माह तक तैयारी करता रहा था। मार्च में सर्वेक्षण आठ दिन तक चला, लेकिन सर्वेक्षण के डेढ़ माह बीतने के बावजूद अभी तक परिणाम नहीं आए है। इस बार इंदौर के अलावा सूरत और नवी मुंबई भी नंबर वन रैंकिंग की दौड़ में है। पिछले साल इंदौर के साथ सूरत शहर को संयुक्त पुरस्कार मिला था। इस बार इंदौर को प्रीमियर लीग में शामिल किया गया है। इसमें सूरत और नवी मुंबई भी है। तीनों शहरों में स्वच्छता के आंकलन का पैमाना अलग रहा। पिछले साल तीनो शहर टाॅप थ्री में थे,हालांकि इस बार सर्वेक्षण के समय भी इंदौर की स्वच्छता कमजोर रही।सर्वेक्षण के समय शहर की गंदी बेकलेन के कारण इंदौर को नंबर कम मिल सकते है। इस बार शहर के नाले प्रदूषण से मुक्त नहीं हो पाया। कुछ नाले भले अस्थाई रुप से साफ कर दिये गए, लेकिन सालभर नालों में गाद, गंदगी और कचरा नजर आता है। इस मामले में इंदौर को नंबर कम मिल सकते है।इंदौर रैंकिंग में सबसे ज्यादा नंबर डोर टू डोर कचरा कलेक्शन में पाएगा। यह व्यवस्था इंदौर में दूसरे सभी शहरों से अच्छी है। लोग खुद अलग-अलग कचरा फेंकते है।इंदौर की स्वच्छता में सबसे बड़ी ताकत लोगों की जनभागीदारी है। लोग कचरा घरों और संस्थानों में संभालकर रखते है। उन्हें खुले में नहीं फेंकते। सुबह आने वाले कचरा वाहनों में ही उसे डाला जाता है।

21.6 करोड़ की लागत से 12 महीने में मंदाकिनी घाटों का आध्यात्मिक और सांस्कृतिक कायाकल्प होगा

सतना  स्वदेश दर्शन योजना (Swadesh Darshan Yojana) के अंतर्गत चित्रकूट के मंदाकिनी घाटों को आध्यात्मिक अनुभव केंद्र के रूप में विकसित करने वाली परियोजना को मंजूरी मिल गई है। मध्यप्रदेश टूरिज्म बोर्ड ने 13 मई को इस कार्य का टेंडर मुंबई की सवानी हेरिटेज कंस्ट्रक्शन कंपनी को स्वीकृत किया। अब कंपनी प्रक्रियागत औपचारिकताएं पूरी कर वर्क ऑर्डर प्राप्त करेगी। परियोजना के पूर्ण होते ही घाटों का आध्यात्मिक और सांस्कृतिक कायाकल्प होगा। कार्य 12 महीने में पूर्ण किया जाएगा। साथ ही, टेंडर शर्तों के अनुसार कंपनी आगामी वर्षों तक घाटों के रखरखाव की जिम्मेदारी भी निभाएगी। इस तरह सुंदर होंगे घाट टेंडर के अनुसार आगमन क्षेत्र में 19.42 लाख रुपए की लागत से 3 प्रवेश द्वार, पार्किंग, ट्रैफिक मैनेजमेंट, होल्डिंग एरिया और पुलिस कियोस्क बनाए जाएंगे। 6.93 लाख रुपए में ऑन-साइट टिकटिंग व्यवस्था और खोया-पाया केंद्र तथा बोटिंग टिकट काउंटर का निर्माण होगा। व्याख्यान सुविधा के लिए 11.68 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे, जिसमें वीडियो एलईडी दीवार, टाइमलाइन वाल, मूर्तिकला पथ, कंट्रोल रूम और प्रक्षेपण मानचित्र शामिल हैं। 7.18 करोड़ रुपए से घाटों का उन्नयन, पद यात्रियों के लिए रोड और घाट विस्तार, वृक्ष आच्छादित बैठने की जगहें और वाहन आवागमन रोकने के लिए बोलार्ड बनाए जाएंगे। 0.18 लाख रुपए में आठ स्थानों पर साइनेज सिस्टम स्थापित किया जाएगा। 1.65 करोड़ रुपए में तीन टॉयलेट ब्लॉक, चेंजिंग रूम, क्लाक रूम और शावर रूम जैसी सार्वजनिक सुविधाएं तैयार होंगी। तीन प्रोजेक्ट चित्रकूट से छिने स्वदेश दर्शन 2.0 योजना के तहत चित्रकूट में चार प्रोजेक्ट थे। आईपी ग्लोबल कंपनी को डीपीआर तैयार करने कंसल्टेंट एजेंसी बनाया गया था। लेकिन यह कंपनी एक साल से अधिक समय तक डीपीआर तैयार नहीं कर पाई। इसके कारण भारत सरकार ने घाट उन्नयन प्रोजेक्ट के अलावा तीन अन्य प्रोजेक्ट को अन्य स्थलों पर स्थानांतरित कर दिया है। चित्रकूट विकास प्राधिकरण सीईओ स्वप्निल वानखेड़े ने बताया कि विगत 13 मई को टेंडर स्वीकृत हो गया है। जल्दी ही अन्य प्रक्रिया प्रारंभ कर वर्क आर्डर जारी कर दिया जाएगा। एक साल में यह प्रोजेक्ट ठेका कंपनी को पूरा करना होगा।

राजा चंद्र प्रद्योत ने उज्जैन में महाकाल मंदिर पहुंच मार्गों पर भव्य द्वार को पुनर्जीवित किया जा रहा

उज्जैन  भगवान महाकाल के दर्शन करने आने वाले भक्त अब भव्य द्वारों से होकर मंदिर पहुंचेंगे। प्रबंध समिति ने महाकाल मंदिर की ओर जाने वाले सभी मार्गों पर विशाल द्वार बनवाने का निर्णय लिया है। मंदिर के आसपास भव्य द्वार बनाने की परंपरा 2600 साल पुरानी है। अलग-अलग कालखंड में राजा-महाराजा मंदिर के पहुंच मार्गों पर द्वार बनवाते रहे हैं। आज भी चौबीस खंभा व महाकाल द्वार इसके प्रमाण हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मंशा के अनुसार मंदिर समिति इतिहास का पुनर्लेखन भी करा रही है। अशोक मौर्य ने कराया था द्वारों का जीर्णोद्धार धर्मधानी उज्जैन में दुर्ग व द्वार की परंपरा छठी शताब्दी ईसा पूर्व से चली आ रही है। पुराविद डॉ. रमण सोलंकी ने बताया कि राजा चंद्र प्रद्योत ने महाकाल मंदिर पहुंच मार्गों पर भव्य द्वार बनवाए थे। जब अशोक मौर्य उज्जैन आए तो उन्होंने द्वारों का जीर्णोद्धार कराया। इसके बाद सम्राट विक्रमादित्य ने इनका संरक्षण किया। राजा भोज के शासन में भी यह परंपरा जीवित रही और उन्होंने चौबीस खंभा द्वार बनवाया। पुराने समय में इसी द्वार से भक्त महाकाल दर्शन के लिए मंदिर में प्रवेश किया करते थे। आज भी यह द्वार नगरीय सभ्यता के गौरवशाली इतिहास की गाथा सुना रहा है। भव्य और मनोरम महाकाल द्वार महाकाल मंदिर के उत्तर में महाकाल द्वार स्थित है। रामघाट पर शिप्रा स्नान के बाद श्रद्धालु इसी द्वार से मंदिर में प्रवेश करते थे। इस द्वार का निर्माण मध्यकाल में हुआ है। द्वार के दोनों ओर भगवान गणेश की मूर्ति विराजित है। सुरक्षा के लिए देवी-देवताओं की प्रतिष्ठा राजा महाराजा नगर की सुरक्षा के लिए द्वारा का निर्माण कराते थे। यह द्वार आक्रांताओं के आक्रमण से नगर को सुरक्षित रखते थे। व्याधियों से रक्षा के लिए भी इन द्वारों का विशेष महत्व था। नगर प्रवेश द्वारों पर देवी-देवताओं की स्थापना की जाती थी। चौबीस खंभा, महाकाल द्वार, सती गेट सहित नगर में मौजूद द्वारों पर देवी-देवता विराजित हैं। अनादिकाल से समय-समय पर इनका पूजन किया जाता है। आज भी नगर की सुख-समृद्धि के लिए चौबीस खंबा स्थित माता महामाया व महालया की शारदीय नवरात्र की महाअष्टमी पर नगर पूजा की जाती है। प्रबंध समिति की बैठक में निर्णय कलेक्टर रोशन कुमार सिंह की अध्यक्षता में आठ मई को आयोजित मंदिर प्रबंध समिति की बैठक में महाकाल मंदिर पहुंच मार्गों पर द्वार बनाने का निर्णय लिया गया है। समिति उज्जैन विकास प्राधिकरण के माध्यम से इन द्वारों का निर्माण कराएगी। योजना में यह खास     बड़ा गणेश, हरसिद्धि, शक्ति पथ पर होगा विशाल द्वारों का निर्माण।     नीलकंठ, नंदी, धनुष तथा शहनाई द्वार पर धातु के कलात्मक द्वार बनेंगे।  

सांची विकासखंड के रतनपुर गांव में प्रदेश की पहली डिजिटल आंगनबाड़ी, नई तकनीक से पढ़ाई कर रहे बच्चे

रायसेन  सांची विकासखंड के रतनपुर गांव में मध्य प्रदेश की पहली डिजिटल आंगनबाड़ी का उद्घाटन किया गया है. इस मौके पर भोपाल कमिश्नर संजीव सिंह, जिला कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा, जिला पंचायत सीईओ अंजू पवन भदौरिया, महिला एवं बाल विकास अधिकारी मौजूद रहे. इस आंगनबाड़ी केंद्र को डिजिटल रूप में डेपलप किया गया. इसमें स्मार्ट टीवी, तीन सैमसंग टैबलेट, अलेक्सा डिवाइस और आईआईटी दिल्ली द्वारा तैयार किया गया पाठ्यक्रम है. बच्चे प्राइवेट स्कूल छोड़ यहां एडमिशन ले रहे हैं. बच्चों के शैक्षणिक स्तर में हुआ सुधार आंगनवाड़ी कार्यकर्ता शकुन ने बताया, “जब से आंगनवाड़ी का डिजिटलीकरण हुआ है, यहां बच्चों की संख्या में वृद्धि हुई है. यहां बच्चे डिजिटल डिवाइस के माध्यम से भविष्य की तकनीक को जान रहे हैं. साथ ही इन बच्चों का शैक्षणिक स्तर भी सुधर रहा है. किसी समय इस आंगनबाड़ी में 5 से 10 बच्चे ही आया करते थे, लेकिन आंगनबाड़ी का डिजिटलीकरण होने से यहां की तस्वीर बदल गई है. अब निजी संस्थानों को छोड़कर बच्चे इस आंगनबाड़ी में पढ़ने आ रहे हैं. यह सब संभव हो पाया है भारत सरकार और मध्य प्रदेश सरकार द्वारा चलाए जा रहे ग्रामीण क्षेत्र के डिजिटलीकरण के कारण.” दीवारों पर उकेरी गई पाठ्य सामग्री रतनपुर ग्राम में बनाई गई डिजिटल आंगनवाड़ी में बच्चों के लिए टैबलेटों के साथ बड़ी एलईडी टीवी लगाई गई है. साथ ही इस आंगनबाड़ी की दीवारों पर सुंदर चित्रकारी भी उकेरी गई है. छत हो या दीवारें सबको बच्चों की रुचि को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है. दीवारों पर ABCD, 123 और हिंदी वर्णमाला के शब्दों को इस तरह से प्रदर्शित किया गया है कि बच्चे आसानी से आकर्षित होकर इन्हें सीख सकें. साथ ही आंगनबाड़ी में पदस्थ कार्यकर्ताओं को भी विशेष ट्रेनिंग दी गई है, जिससे कि वह बच्चों को डिजिटल डिवाइस के माध्यम से भविष्य की तकनीक से रूबरू करा सकें. डिजिटलीकरण के बाद बच्चों की बढ़ी संख्या आंगनबाड़ी में बच्चों को सैनिटाइजर से अपने हाथों की साफ सफाई के बारे में भी सिखाया जा रहा है. बच्चे डिजिटल डिवाइस में चित्रकारी करते हैं, पढ़ाई करते हैं और नए-नए शब्दों को सीखते हैं. इन बच्चों को यहां पर भोजन भी उपलब्ध कराया जाता है. पूरा प्रांगण इस तरह से तैयार किया गया है कि ज्यादा से ज्यादा बच्चे यहां पर आ सके और नई-नई चीजें सीख सकें. डिजिटल आंगनबाड़ी तैयार होने के बाद से यहां पर बच्चों की संख्या में काफी वृद्धि हुई है. परिजन काफी खुशी से अपने बच्चों को भेज रहे हैं. यहां बच्चों के खेलने का भी इंतजाम किया गया है. बच्चों को सिखाने का नया प्रयोग महिला बाल विकास अधिकारी दीपक संकत ने कहा, “भारत सरकार के यूआईडीएआई डिपार्टमेंट के माध्यम से देश के कुछ राज्यों में डिजिटल आंगनबाड़ी केंद्र शुरू किए गए हैं, जो एक नया प्रयोग है. इन आंगनबाड़ी केंद्रों में जो बच्चे हैं, उनकी डिजिटल उपकरणों के जरिए नई तरह से पढ़ाई करवाई जा रही है. इसमें बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य, शारीरिक स्वास्थ्य और शब्दों को पहचानने के लिए रंगों को पहचानने के लिए हिंदी और अंग्रेजी भाषा में पढ़ाई करवाई जाती है.” भारत सरकार ने स्वीकृति किया प्रस्ताव दीपक संकत ने कहा, “जिला कलेक्टर के निर्देश पर हमने भारत सरकार को एक प्रस्ताव भेजा था. भारत सरकार ने हमारे प्रस्ताव को मानते हुए पूरे मध्य प्रदेश में सिर्फ रायसेन जिले के सांची विकासखंड में 2 डिजिटल आंगनबाड़ियों की स्वीकृति दी है, जिनमें आधुनिक शिक्षा दी जा रही है. आंगनबाड़ी कार्यकर्ता बच्चों को डिजिटल माध्यमों से पढ़ाई करवा रही हैं. उन्हें टैबलेट दिए गए हैं, जिनके माध्यम से वस्तुओं की आकृति स्क्रीन पर थ्री डाइमेंशनल तरीके से बनाकर बच्चों को पढ़ाया जाता. बच्चे उसे आसानी से देखकर छूकर समझ सकते हैं. डिजिटलीकरण से आसानी से सीख रहे बच्चे ग्राम रतनपुर की आंगनबाड़ी केंद्र में आदिवासी बच्चे आते हैं. पहले इस आंगनबाड़ी में बच्चे रूटीन की पढ़ाई में विशेष रुचि नहीं लेते थे, जब से आधुनिक कारण किया गया है तब से बच्चों की संख्या के साथ उपस्थित बढ़ गई है. परिजन भी अपने बच्चों को यहां लेकर आते हैं. अब स्थिति ऐसी है कि बच्चों को अंक समझ में आते हैं. शब्दों के आकार और उनसे जुड़े हुए अर्थ भी समझ आते हैं.   दिल्ली आईआईटी की टीम ने किया निरीक्षण वहीं, दिल्ली से यहां थर्ड पार्टी ऑडिट भी हुआ था, जहां दिल्ली आईआईटी की पांच सदस्य टीम ने तीन से चार दिन यहां रुक कर आंगनबाड़ी की उपयोगिता का आकलन किया. उन्होंने बच्चों के माता-पिता से भी संपर्क किया और उनसे बात की. परिजन ने बताया कि उनके बच्चे रायसेन शहर के सेंट फ्रांसिस कान्वेंट स्कूल में जाया करते थे. उन्होंने अपने छोटे बच्चों का दाखिला इस आंगनबाड़ी में सिर्फ इसलिए करवा दिया क्योंकि यहां पर शिक्षा का स्तर निजी स्कूलों से अच्छा है.

इंदौर : राजवाड़ा में होगी 20 मई को कैबिनेट बैठक, अफसरों को जिम्मेदारी सौंपी गई

 इंदौर इंदौर का दिल कहे जाने वाले राजवाड़ा पैलेस में 20 मई को प्रदेश सरकार बैठक करने जा रही है। अलग-अलग विभाग इसकी तैयारियों में जुट गए है। राजवाड़ा के गणेश हाॅल में बैठक होगी। वहां की रंगाई-पुताई,फर्श की सफाई की जा रही है। कैबिनेट बैठक के बाद पैलेस के खुले हिस्से में भोजन की व्यवस्था रहेगी। इसके लिए डोम भी बनाया जाएगा। अब बैठक में तीन दिन शेष है। इस कारण राजवाड़ा पैलेस को पर्यटकों के लिए बंद कर दिया गया है। अब राजवाड़ा पैलेस पर्यटकों के लिए 20 मई के बाद ही खुलेगा। यहां हर दिन शाम को लाइट एंड साउंड शो भी आयोजित किया जाता है। वह भी फिलहाल बंद रहेगा।  कैबिनेट बैठक की तैयारियों के मद्देनजर अफसरों ने राजवाड़ा पैलेस और उद्यान का दौरा भी किया। संभावित बारिश के मद्देनजर भी व्यवस्थाएं जुटाने के लिए कहा गया है।  पहला मौका है जब शहर में कैबिनेट बैठक होने जा रही है। इससे पहले इंदौर जिले के उज्जैनी में नर्मदा-शिप्रा संगम स्थल पर बैठक आयोजित की गई थी। देवी अहिल्या की 300 वीं जयंती के मौके पर राजवाड़ा के पैलेस में बैठक करने का फैसला लिया गया है।   इंदौर में कैबिनेट बैठक दोपहर 12 बजे होगी। बैठक में प्रदेश के अलग-अलग एजेंडों पर चर्चा होगी और उन्हे मंजूरी दी जाएगी। इसके अलावा मुख्यमंत्री मोहन यादव लालबाग पैलेस के गार्डन और राजवाड़ा पैलेस के कामों का भी भूमिपूजन करेंगे। बैठक से पहले राजवाड़ा चौक पर लगी देवी अहिल्या की प्रतिमा पर माल्यार्पण करने भी मुख्यमंत्री मोहन यादव जाएंगे। नगर निगम 20 लाख रुपये खर्च कर उद्यान को भी संवार रहा है।   200 साल पुराना है राजवाड़ा राजवाड़ा 200 साल पुराना है। 1984 के दंगों में राजवाड़ा का एक हिस्सा जल गया था। 25 साल पहले राजवाड़ा की जीर्णद्धार किया गया था। इसके बाद चार साल पहले स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत 20 करोड़ रुपये से राजवाड़ा को नया स्वरुप दिया गया। राजवाड़ा होलकर राज परिवार का राज दरबार था। देवी अहिल्या ने तो अपनी राजधानी महेश्वर को बनाया था, लेकिन बाद में यशवंत राव होलकर, तुकोजीराव होलकर ने इंदौर में रहकर राज चलाया। कौन क्या देखेंगे…? ● मुख्य आयोजन स्थल राजबाड़ा : अपर कलेक्टर रिंकेश वैश्य, एसडीएम निधि वर्मा व तहसीलदार नारायण नांदेड़ा ● सीएम ग्रीन रूम : एसडीएम सीमा कनेश व तहसीलदार विकास रधुवंशी ● अहिल्या प्रतिमा स्थल : निगम अपर आयुक्त अभय राजनगांवकर ● अतिथि सत्कार व प्रतीक चिन्ह वितरण : आइडीए सीईओ आरपी अहिरवार व संपदा अधिकारी मनीष श्रीवास्तव ● राजबाड़ा प्रवेश द्वार : एसडीएम गोपाल वर्मा व तहसीलदार याचना दीक्षित ● अस्थाई सीएम कार्यालय : एसडीएम कल्याणी पांडे व आइटी अधिकारी शीतल पाठक ● सीएम घोषणा संबंधी – जिला योजना अधिकारी माधव बेंड़े ● पर्यटन स्थल भ्रमण व भोजन : नगर निगम अपर आयुक्त अभिलाष मिश्रा व खाद्य आपूर्ति अधिकारी एमएल मारू ● पार्किंग व बसों की व्यवस्था : एसडीएम विजय मंडलोई व आरटीओ प्रदीप शर्मा ● रेसीडेंसी कोठी : एसडीएम प्रियंका चौरसिया ● होटल : अपर कलेक्टर राजेंद्र रघुवंशी ● सेफ हाऊस : नायब तहसीलदार दयाराम निगम ● कंट्रोल रूम : नायब तहसीलदार धर्मेंद्र चौहान व अजय अहिरवार ● स्वास्थ्य व्यवस्था : सीएमएचओ बीएस सैत्या व सिविल सर्जन गिरधारी लाल सोढ़ी  

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