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अहमदाबाद-कोलकाता के सामान्य कोच के शौचालय में एक युवक का शव फंदे पर लटका, एक घंटे खड़ी रही ट्रेन

सागर अदमदाबाद से कोलकाता जाने वाली ट्रेन के शौचालय में एक युवक का शव फंदे पर लटकता मिला है। शौचालय में शव लटके होने की सूचना के बाद सागर रेलवे स्टेशन पर एफएसएल और पुलिस की टीम मौके पर पहुंची। शव काे फंदे से नीचे उतारा गया। इस दौरान करीब एक घंटे तक ट्रेन सागर स्टेशन पर रुकी रही। मृतक की पहचान नहीं हो सकी है। पुलिस ने मर्ग कायम कर विवेचना शुरू कर दी है। जानकारी के अनुसार सागर रेलवे स्टेशन प्रबंधन को सूचना मिली कि बीना की ओर से आ रही गाड़ी संख्या 19413 अहमदाबाद-कोलकाता के सामान्य कोच के शौचालय में एक युवक का शव फंदे पर लटका है। सूचना मिलने ही सागर रेलवे स्टेशन पर एफएसएल, जीआरपी, आरपीएफ के अधिकारी मौके पर पहुंच गए। दोपहर 2.10 बजे सागर स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर एक पर ट्रेन आकर रुकी। ट्रेन के सबसे आगे वाले डिब्बे के जनरल कोच के शौचालय में ऊपर की ओर लगे हेंगर में शर्ट के फंदे पर युवक का लटका हुआ मिला। एफएसएल ने मौके से साक्ष्य एकत्रित किए। वहीं जीआरपी ने ट्रेन के डिब्बे में मौजूद अन्य यात्रियों से पूछताछ की। युवक की तलाशी ली गई, लेकिन उसकी शिनाख्ती नहीं हो पाई। शौचालय में युवक की शर्ट के फंदे पर ही शव लटका हुआ था। उसके घुटने मुड़े हुए थे। जांच के बाद पुलिस ने शव को ट्रेन से नीचे उतारा। मृतक की उम्र करीब 30 से 35 साल के करीब होगी। बताया जा रहा है कि दोपहर करीब सवा बाहर बजे बीना स्टेशन से ट्रेन छूटने के बाद जनरल डिब्बे में यात्रा कर रहा एक यात्री जब शौचालय में गया तो उसने शव को फंदे पर लटकता देखा। इसके बाद उसने रेलवे स्टाफ को इसकी सूचना दी। ट्रेन से स्टेशन पर पहुंचते ही डिब्बे से सभी यात्री नीचे उतर आए। इसके एक घंटे बाद करीब सवा तीन बजे ट्रेन स्टेशन से आगे की ओर रवाना हुई।  

त्रिपुरा सुंदरी एक्सप्रेस में हथियारों का जखीरा पकड़ा, RPF ने 8 देसी पिस्तौल और 16 मैगजीन बरामद किये

भोपाल रेलवे सुरक्षा बल (RPF) ने त्रिपुरा सुंदरी एक्सप्रेस (ट्रेन संख्या 14620) में एक बड़ी कार्रवाई करते हुए हथियारों की तस्करी की कोशिश को नाकाम कर दिया। बदरपुर से अगरतला के बीच सफर के दौरान, RPF की ट्रेन एस्कॉर्ट टीम ने जनरल कोच की तलाशी के दौरान दो संदिग्ध पिठ्ठू बैग जब्त किए, जिनमें से 8 हस्तनिर्मित देसी पिस्तौल और 16 मैगजीन बरामद किया। RPF अधिकारियों के अनुसार, अगरतला पोस्ट के सुरक्षा कर्मी वर्तमान सुरक्षा स्थिति को देखते हुए गहन निगरानी अभियान चला रहे थे। इसी दौरान जनरल कोच की ऊपरी सीट पर छोड़े गए दो बैगों की जांच की गई। बैगों में भूरे रंग के सेलो टेप में लिपटे हथियार पाए गए। बरामद हथियारों को RPF पोस्ट अगरतला में जमा कर आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए सौंप दिया गया है। मामले की जांच GRPS/अगरतला ने शुरू कर दी है, और अधिकारियों के अनुसार, इस पर जल्द ही विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की जाएगी।

म.प्र. शासन का बड़ा फैसला: शासकीय सेवकों का मंहगाई भत्ता बढ़ाकर 55 प्रतिशत किया गया, आदेश जारी

भोपाल राज्य शासन ने शासकीय सेवकों को बड़ी राहत देते हुए मंहगाई भत्ते की दर में वृद्धि का आदेश जारी किया है। दो चरणों में बढ़ेगा DA आदेशानुसार, सातवें वेतनमान के तहत आने वाले कर्मचारियों को वर्तमान 50% महंगाई भत्ते के स्थान पर दो चरणों में बढ़ा हुआ भत्ता मिलेगा। एक जुलाई 2024 से मंहगाई भत्ता 3% बढ़कर 53% किया गया है, जिसका भुगतान अगस्त 2024 के वेतन में होगा।इसी तरह 1 जनवरी 2025 से इसमें और 2% की वृद्धि कर इसे कुल 55% कर दिया जाएगा, जिसका भुगतान फरवरी 2025 के वेतन के साथ किया जाएगा। मई 2025 से मिलेगा लाभ, एरियर 5 किश्तों में राज्य शासन ने स्पष्ट किया है कि इस वृद्धि का वास्तविक लाभ 1 मई 2025 से दिया जाएगा और 1 जुलाई 2024 से 30 अप्रैल 2025 तक की एरियर राशि का भुगतान जून से अक्टूबर 2025 के बीच 5 किश्तों में किया जाएगा। सेवानिवृत्त व दिवंगत कर्मियों को एकमुश्त भुगतान 1 जुलाई 2024 से 31 मई 2025 के बीच सेवानिवृत्त हो चुके शासकीय कर्मचारियों को एरियर की पूरी राशि का एकमुश्त भुगतान किया जायेगा। इसी तरह एक जुलाई 2024 से 31 मई 2025 की अवधि में मृत कर्मचारियों के परिजनों को एरियर की पूरी राशि एकमुश्त प्रदान की जाएगी। अन्य निर्देश 50 पैसे या उससे अधिक की राशि को अगले पूर्णांक रुपए में पूर्णांकित किया जाएगा। मंहगाई भत्ते का कोई भी भाग वेतन के रूप में नहीं माना जाएगा। इस भुगतान का व्यय संबंधित विभाग के चालू वित्तीय वर्ष के स्वीकृत बजट प्रावधान से अधिक नहीं होना चाहिए।  

हर घर नल से जल: जल जीवन मिशन से गांवों में आई मुस्कान, स्वास्थ्य, सम्मान और स्थायित्व की नई धारा

भोपाल गांवों की सुबह अब बदल गई है। बाल्टी लेकर दूर-दूर तक पानी लाने का संघर्ष बीते दिनों की बात हो चुकी है। अब घर के आंगन में नल से गिरता पानी केवल सुविधा नहीं, बल्कि गरिमा, सुरक्षा और विश्वास का प्रतीक बन गया है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में शुरू हुआ जल जीवन मिशन आज ग्रामीण भारत की तस्वीर को जमीनी स्तर पर बदल रहा है और मध्यप्रदेश इसमें एक मिसाल बनकर उभरा है। बालाघाट जिले ने 96 प्रतिशत से अधिक ग्रामीण घरों में नल से जल पहुंचाकर यह सिद्ध कर दिया है कि सुनियोजित प्रयासों से हर घर तक शुद्ध पेयजल सुनिश्चित किया जा सकता है। इस मिशन के चलते वहां के गांवों में अब बीमारियों का बोझ घटा है, महिलाएं और बच्चियां राहत महसूस कर रही हैं और लोगों को स्वच्छ जीवन की आदतें सहजता से अपनाने का अवसर मिला है। इसी दिशा में हरदा जिले ने भी 96 प्रतिशत से अधिक ग्रामीण परिवारों को इस योजना से जोड़ते हुए गांवों में स्वास्थ्य, स्वच्छता और आत्मनिर्भरता की एक नई लकीर खींच दी है। इंदौर जिले ने तो लगभग सम्पूर्ण लक्ष्य प्राप्त करते हुए 99.94 प्रतिशत ग्रामीण परिवारों को नल जल सुविधा से जोड़ दिया है। इंदौर जैसे जिले, जहां शहरी चमक के साथ ग्रामीण विस्तार भी मौजूद है, वहां यह कार्यक्षमता दिखाना साबित करता है कि यह योजना हर क्षेत्र में समान रूप से कारगर हो रही है। दूसरी ओर नर्मदापुरम जिले ने भी 84प्रतिशत ग्रामीण घरों में नल जल कनेक्शन देकर साफ किया है कि वह भी इस परिवर्तन का सक्रिय भागीदार है और यहां की ग्राम पंचायतों ने जनसहभागिता से जल पहुंच को आसान और प्रभावशाली बनाया है। इस बदलाव ने न केवल स्वास्थ्य के स्तर को ऊंचा उठाया है, बल्कि सामाजिक ढांचे में भी सकारात्मक हस्तक्षेप किया है। शुद्ध, सुलभ, घर-घर पहुंचता पेयजल अब डायरिया, टायफाइड, हेपेटाइटिस जैसी बीमारियों को जड़ों से समाप्त कर रहा है। शौचालयों का उपयोग बढ़ा है, स्वच्छता की आदतें मज़बूत हुई हैं और बच्चों की स्कूल में उपस्थिति बेहतर हुई है। महिलाएं अब घर से बाहर निकलकर कृषि, शिक्षा और छोटे व्यवसायों में सक्रिय हो रही हैं, क्योंकि उनका कीमती समय पानी के लिए नहीं बल्कि प्रगति के लिए व्यतीत हो रहा है। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री श्रीमती संपतिया उइके ने इस मिशन की सफलता को धरातल तक पहुंचाने में सशक्त भूमिका निभाई है। उनकी सतत निगरानी, जिलों में की गई यात्राएं और जनप्रतिनिधियों से संवाद ने यह सुनिश्चित किया है कि यह योजना कागज़ पर नहीं, बल्कि धरातल पर उतर रही है। उनके मार्गदर्शन में मिशन को न केवल रफ्तार मिली है, बल्कि यह एक जन आंदोलन का स्वरूप भी ले चुका है। हर घर नल से जल अब केवल एक योजना नहीं, बल्कि ग्रामीण भारत की जीवन का एक ऐसा अभिन्न भाग बन गया है जो स्वास्थ्य, स्वच्छता, आत्मनिर्भरता और समानता के पक्ष को मजबूत कर रहा है।

मध्यप्रदेश में ‘AI भारत @MP’ कार्यशाला का शुभारंभ

भोपाल लोकमाता देवी अहिल्या बाई होलकर के 300वें जयंती वर्ष आयोजनों की श्रृंखला में मध्यप्रदेश राज्य इलेक्ट्रॉनिक्स विकास निगम (एमपीएसईडीसी) ने राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस प्रभाग (NeGD), इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, भारत सरकार के सहयोग से “AI भारत @ MP – कार्यशाला: नवाचार, आधार और राज्य परामर्श के साथ सुशासन में तीव्रता” विषय पर 2 दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया है। कार्यशाला का शुभारंभ गुरुवार प्रातः कुशाभाऊ ठाकरे इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर (मिंटो हॉल) में किया गया। कार्यशाला में केंद्र एवं राज्य सरकार के वरिष्ठ नीति-निर्माता, तकनीकी विशेषज्ञ, शिक्षाविद एवं विभिन्न विभागों के 300 से अधिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया। कार्यशाला में AI अनुप्रयोगों पर आधारित एक्सपीरियंस जोन भी स्थापित किया गया। प्रारंभिक सत्र को संबोधित करते हुए अपर मुख्य सचिव श्री संजय दुबे ने कहा कि मध्यप्रदेश उन कुछ राज्यों में से एक है जहां AI पर तीव्र गति से कार्य किया जा रहा है। राज्य ने AI तकनीक का उपयोग प्रशासन में करना प्रारंभ किया है। उन्होंने कहा कि आईटी और रिन्युएबल एनर्जी सबसे अधिक गति से बढ़ने वाले सेक्टर है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य है, जहाँ संपदा 2.0 पोर्टल से घर बैठे ही ई-रजिस्ट्री की जा रही है। उन्होंने कहा कि यह कार्यशाला राज्य के AI आधारित आगामी कार्य योजनाओं के लिये भविष्य के लिय महत्वपूर्ण कड़ी है। एमपीएसईडीसी के प्रबंध निदेशक श्री आशीष वशिष्ठ ने अतिथियों का स्वागत करते हुए दो दिवसीय कार्यशाला के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि यह केवल कार्यशाला नहीं है बल्कि मध्यप्रदेश को AI नवाचार में अग्रणी बनाने के दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि हम ऐसे भविष्य में प्रवेश करने जा रहे है जहां प्रशासन का आधार AI-ड्रिवन सेवाओं के वितरण, स्मार्ट समावेशन है। इंडिया AI के जनरल मैनेजर श्री कार्तिक सूरी ने बताया कि इंडिया AI ने डेटा और AI लैब के माध्यम से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग बढ़ाने के लिये प्रयास किये जा रहे है। उन्होंने कहा कि इंडिया AI पूरे देश में नावाचार और र्स्टाटअप को बढ़ावा दे रहा है। डीआरडीओ के वैज्ञानिक श्री सौरभ मंडल ने कहा कि AI दूरस्थ और ग्रामीण क्षेत्रों में स्मार्ट गवर्नेंस को सक्षम बना रहा है। डीआरडीओ ने सशस्त्र बलों के साथ चुनौतीपूर्ण परिस्थतियों में नागरिकों को सेवाएँ प्रदान करने के मॉडल भी बनाये हैं। अमेजॉन वेब सर्विसेज के राज्य प्रतिनिधि श्री अजय कौल ने कहा कि AI केवल एक तकनीक नहीं है बल्कि परिवर्तनकारी शक्ति है। आईआईएम के प्रो. श्री प्रशांत सालवान ने AI की शुरूआत, वर्तमान अनुप्रयोगों और भविष्य पर प्रकाश डाला। प्रारंभिक सत्र का समापन एमपीएसईडीसी के प्रोजेक्ट डायरेक्टर श्री गुरु प्रसाद ने आभार व्यक्त करते हुए किया। कार्यशाला के पहले सत्र में ‘शासन में AI की कल्पना: अकादमिक क्षेत्र की भूमिका’ विषय पर फोकस रहा। कार्यशाला में प्रथम दिन “सुशासन के लिये AI सत्र में सर्वम AI के श्री साहिल खेतान ने जनरल AI असिस्टेंट, सीएम गवर्नेंस डैशबोर्ड जैसे नवाचारों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि स्किल इंडिया असिस्टेंट जैसे कार्यक्रम नागरिकों को तकनीकी रूप से सशक्त बना रहे है। IIM इंदौर के डीन प्रो. प्रशांत साल्वन ने प्रशासनिक अधिकारियों को उभरती तकनीकों और डाटा संग्रहण एवं अनुप्रयोगों से संबंधित एथिक्स के विषय में जानकारी दी। ‘डिजिटल गवर्नेंस में आधार की भूमिका’ विषय पर UIDAI के उप महानिदेशक श्री आमोद कुमार ने डाटा प्रमाणीकरण, ई-केवाईसी और डिजिटल समावेशन में आधार की आगामी भूमिका पर प्रकाश डाला। डीबीटी मिशन के अतिरिक्त सचिव सौरभ तिवारी, वरिष्ठ जिला रजिस्ट्रार स्वप्नेश शर्मा और कर्मचारी चयन बोर्ड के निदेशक श्री साकेत मालवीय ने डिजिटल समावेशन, प्रमाणीकरण, ई-केवाईसी और आधार-आधारित दक्षताओं को साझा किया। दोपहर के सत्र में कृषि, बुनियादी ढांचे, स्वास्थ्य और नागरिक सेवाओं में एआई के अनुप्रयोगों पर विशेषज्ञों ने विचार रखे। आईआईटी इंदौर की प्रो. अरुणा तिवारी ने कृषि उत्पादकता के लिए मॉडल साझा किए। माइक्रोसॉफ्ट इंडिया के विशाल मेहता ने कंप्यूटर विजन आधारित धोखाधड़ी विश्लेषण पर जानकारी दी। गूगल क्लाउड के अनिरुद्ध श्रीवास्तव ने जनरल एआई द्वारा सारांशीकरण और अनुवाद जैसे उपयोग दर्शाए। आईआईएसईआर भोपाल के प्रो. तन्मय बसु ने एनवायरनमेंटल सस्टेनेबिलिटी और लोक स्वास्थ्य पर एआई की भूमिका को रेखांकित किया। डीएसटी की सुश्री पूनम यादव ने वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए राष्ट्रीय एआई कार्यक्रमों को प्रस्तुत किया। स्टार्ट-अप्स और उद्योग प्रतिनिधियों जैसे आरपीए एग्री इंफ्रा के श्री रसेश त्रिवेदी, आईबीएम के प्रभात मनोचा, द्रोण मैप्स के श्री उत्कर्ष सिंह और ऐपस्क्वाड्ज़ सॉफ्टवेयर की सुश्री हर्षिता दुग्गल ने सार्वजनिक प्रशासन, कृषि और जीआईएस योजना में एआई के उपयोग पर अपने दृष्टिकोण साझा किए। कार्यशाला का समापन एमपीएसईडीसी के वरिष्ठ महाप्रबंधक श्री अभिषेक अनंत के धन्यवाद भाषण के साथ हुआ। उन्होंने इसे एक नई शुरुआत बताते हुए कहा कि मध्यप्रदेश सभी विभागों में एआई को मुख्यधारा में लाकर एक डिजिटल, भविष्य-तैयार राज्य के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध है। कार्यशाला का दूसरा दिन 9 मई कार्यशाला के दूसरे दिन राज्य स्तरीय परामर्श, थीमैटिक वर्किंग ग्रुप्स एवं ‘डिजिटल इंडिया राज्य परामर्श कार्यशाला’ के अंतर्गत रोडमैप चर्चाओं पर केन्द्रित रहेगा। कार्यशाला के दूसरे दिन “डिजिटल इंडिया स्टेट कंसल्टेशन वर्कशॉप” आयोजित की जायेगी, जिसमें केंद्र और राज्यों के बीच डिजिटल गवर्नेंस को बढ़ावा देने के लिए संवाद और सहयोग पर बल दिया जाएगा। 

निर्माण कार्यों में लायें गति, समानांतर रूप से खरीदें आवश्यक उपकरण एवं फर्नीचर: उप मुख्यमंत्री शुक्ल

भोपाल उप मुख्यमंत्री एवं सागर ज़िले के प्रभारी श्री राजेन्द्र शुक्ल ने स्वास्थ्य अधोसंरचना निर्माण कार्यों में गति लाने और समानांतर रूप से आवश्यक उपकरण और फर्नीचर खरीदने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्य पूर्ण होने के साथ स्वास्थ्य सेवाओं का प्रदाय शीघ्र प्रारंभ हो सके इसके लिए आवश्यक उपकरण और फर्नीचर की उपलब्धता भी साथ ही सुनिश्चित की जाए। इसके लिए सतत मॉनिटरिंग के निर्देश दिए। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं के बेहतर संचालन के लिए मैनपॉवर की उपलब्धता बढ़ाने पर सरकार द्वारा विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने कलेक्ट्रेट सभाकक्ष सागर में स्वास्थ्य विभाग के अधोसंरचना विकास संबंधी कार्यों की वृहद समीक्षा की। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने सभी परियोजनाओं के बारे में जनप्रतिनिधियों से पूर्व में ही चर्चा की जाए तथा उनके साथ समन्वय स्थापित कर कार्य किए जाएं। उन्होंने उपस्थित विधायक गण से भी कहा कि वे उनके क्षेत्र विशेष के कार्यों का निरीक्षण कर उनकी प्रगति आदि से समय-समय पर अवगत कराएं। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि जिले में स्वास्थ्य सुविधाओं को सुदृढ़ बनाने के लिए निर्माण कार्यों, अधोसंरचना विकास कार्यों में गति अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि राज्य  सरकार द्वारा उपलब्ध कराए गए बजट का उपयोग प्राथमिकता के आधार पर सुनिश्चित किया जाए तथा निर्माण कार्यों को समयसीमा में पूर्ण किया जाए। उन्होंने  निर्देश दिए कि निर्माण एजेंसियों द्वारा किए गए कार्यों के भुगतान में किसी प्रकार की देरी न हो, ताकि कार्यों की गति बनी रहे और गुणवत्ता भी सुनिश्चित हो सके। उन्होंने लैंड एलॉटमेंट की प्रक्रिया यथासंभव शीघ्रता से करने के भी निर्देश दिए। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि स्वास्थ्य जैसी बुनियादी और जनहितकारी व्यवस्थाओं पर संबंधित अधिकारी प्राथमिकता पर ध्यान दें। उन्होंने बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज, जिला चिकित्सालय, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्‍द्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र, उप स्वास्थ्य केन्द्र/आरोग्य मंदिर से संबंधित विभिन्न पूर्ण हो चुके तथा निर्माणाधीन कार्यों की विस्तृत समीक्षा की। सागर जिले में उक्त सभी कार्यों की अनुमानित लागत लगभग 447 करोड़ रुपए है जो विभिन्न निर्माण एजेंसियों जैसे पीडब्ल्यूडी, पीआईएयू, हाउसिंग बोर्ड आदि से संबंधित हैं। उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने जिला चिकित्सालय के अंतर्गत 100 बिस्तरीय नवीन भवन के शीघ्र लोकार्पण करने के निर्देश दिए। इसके साथ ही जिला चिकित्सालय में इंटीग्रेटेड पब्लिक हेल्थ लैब में एफ्लूएंट ट्रीटमेंट प्लांट लगाने के भी निर्देश दिए। इसी प्रकार बीना अस्पताल के रिनोवेशन /नवीनीकरण तथा वहां डॉक्टर की उपलब्धता सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए। बंडा पीएचसी में बाउंड्री वॉल को प्रस्ताव शामिल करने के निर्देश दिए। इसी प्रकार 15वें वित्त के तहत कार्यों को शीघ्रता से आगे बढ़ाने के निर्देश दिए। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि वह संवेदनशील रहकर कार्य करें और मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को न्यूनतम लाने की दिशा में हर संभव प्रयास करें। उन्होंने कहा कि टेलीमेडिसिन एक प्रभावी योजना है जिसका सीएचसी, पीएचसी और आरोग्य केन्‍द्रों के माध्यम से प्रभावी क्रियान्वयन की आवश्यकता है। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं को आधुनिक , सशक्त और जनहितकारी बनाने के लिए अधोसंरचना, मानव संसाधन, उपकरण, प्रबंधन और तकनीकी सभी स्तरों पर समन्वित प्रयास आवश्यक हैं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे कार्यों की सतत निगरानी करें और सभी परियोजनाओं को गुणवत्ता एवं समयबद्धता के साथ पूरा करें। विधायक श्री शैलेंद्र जैन, श्री वीरेंद्र लोधी, श्रीमती निर्मला सप्रे, महापौर श्रीमती संगीता तिवारी, जिला पंचायत अध्यक्ष श्री हीरा सिंह राजपूत, कलेक्टर श्री संदीप जी.आर., पुलिस अधीक्षक श्री विकास शाहवाल सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि, विभागीय अधिकारी मौजूद थे।

उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा- टेली मेडिसिन का सफल क्रियान्वयन और पीएचसी की भीड़ बीएमसी के परफॉर्मेंस ऑडिट की तरह करेगा कार्य

भोपाल उप मुख्यमंत्री एवं सागर जिले के प्रभारी श्री राजेन्द्र शुक्ल ने बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज सागर में टेली मेडिसिन सेंटर का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि अब विशेषज्ञ डॉक्टरों से सीधे मरीज की बात हो सकेगी एवं उचित उपचार प्राप्त हो सकेगा। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की भीड़ एवं बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज में स्थापित टेली मेडिसिन सेंटर में आने वाले कॉल्स की संख्या बीएमसी के परफॉर्मेंस ऑडिट की तरह कार्य करेगी। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि टेली मेडिसिन योजना प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी एवं केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री श्री जे.पी. नड्डा की प्राथमिकता वाली योजना है। योजना से गांव-गांव के पीड़ित व्यक्ति को विषय विशेषज्ञ डॉ. की निशुल्क सलाह मिल सकेगी एवं उनका समय पर इलाज हो सकेगा। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने निर्देश दिए कि सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों सहित विशेष रूप से आरोग्य मंदिरों में टेली मेडिसिन सुविधा शुरू की जाए। डॉक्टरों की सूची चस्पा की जावे एवं उनके फोन नंबर भी संबंधित सीएचओ, बीएमओ को उपलब्ध कराएं जिससे आवश्यकता पड़ने पर तत्काल टेली मेडिसिन/ वीडियो कॉन्फ्रेंस/वर्चुअल माध्यम से उनका उपचार दिया जा सके। उप मुख्यमंत्री ने टेली मेडिसिन सुविधा से की मरीज एवं डॉ. से बातचीत उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने टेली मेडिसिन सेंटर का लोकार्पण किया और मौके पर ही प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बरकोटी से डॉ. राहुल एवं वहां उपस्थित मरीज से वीडियो कांफ्रेंसिंग से बात की, उनके उपचार की जानकारी ली और टेली मेडिसिन सुविधा के बारे में जाना। इस दौरान टेली मेडिसिन के नोडल डॉ. भूपेंद्र रोहित ने पीड़ित व्यक्ति के ब्लड प्रेशर, शुगर एवं होने वाली पीड़ा की जानकारी ली, अन्य सवाल पूछे और संबंधित को खून की जांच कराने को कहा साथ ही आवश्यक दवाएं बताईं। बीएमसी के डॉ. रमेश पांडे ने बताया कि टेली मेडिसिन के लिए डॉ. रुचि जयसवाल, डॉ. अंकित जैन, डॉ. दिनेश जैन, डॉ. पीयूष जैन को नियुक्त किया गया है। आवश्यकता पड़ने पर और भी विशेषज्ञ डॉ. टेली मेडिसिन सुविधा के लिए उपलब्ध रहेंगे। विधायक श्री शैलेंद्र जैन ने बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज सागर में हृदय रोग की आधुनिक मशीनरी एवं विशेषज्ञ डॉ. की आवश्यकता की बात कही। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि इस विषय पर शासन द्वारा पीपीपी मोड पर सेवाएं प्रदान करने की कार्रवाई चल रही है, शीघ्र ही इस पर निर्णय होगा और सागर वासियों को हृदय रोग का इलाज भी मिल सकेगा। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज में अन्य सुविधाओं के संबंध में विस्तार से चर्चा की। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. ममता तिमोरी, डॉ. मनीष जैन, डॉ. सौरभ जैन सहित मेडिकल कॉलेज के सभी विभागों के चिकित्सक और स्थानीय जनप्रतिनिधि मौजूद थे।  

मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने विश्व रेडक्रॉस दिवस पर मानवता के सेवकों को किया नमन

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुरुवार को विश्व रेडक्रॉस दिवस 2025 के अवसर पर किसी भी संकट की घड़ी में मानवता की सेवा में तत्पर स्वयंसेवकों को सादर नमन किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सोशल मीडिया ‘एक्स’ पर कहा कि विश्व बंधुत्व और मानव कल्याण की भावना से कार्य करने वाले ये स्वयंसेवक समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। उन्होंने कहा कि रेडक्रॉस के स्वयंसेवक विपरीत परिस्थितियों में भी मानव जीवन की रक्षा और सहायता के लिए प्रतिबद्ध रहते हैं। संकट में फंसे नागरिकों को राहत पहुंचाना , जीवन रक्षक सहायता देना और सामाजिक समरसता बनाए रखना इनका परम कर्तव्य है। ऐसे सेवाभावी लोग मानवता के सच्चे प्रहरी हैं। मुख्यमंत्री ने प्रदेश के सभी नागरिकों से अपील की है कि वे समाज सेवा के कार्यों में आगे आएं और जरूरतमंदों की सहायता करें। विश्व रेडक्रॉस दिवस हर साल 8 मई को मनाया जाता है, जो रेडक्रॉस के संस्थापक श्री हेनरी ड्यूनेंट की जयंती का प्रतीक है। यह दिन मानव सेवा, करुणा और दया के मूल्यों को सम्मानित करने का अवसर प्रदान करता है।

देश भर के बड़े शहरों में गिरोह फैलाए, एनजीओ में डोनेशन दिलवाने का झांसा देकर करोड़ों की ठगी

भोपाल एनजीओ में डोनेशन दिलवाने का झांसा देकर ठगी करने वाले एक गिरोह का भोपाल पुलिस ने भांडाफोड़ करते हुए तीन आरोपितों को महाराष्ट्र से गिरफ्तार किया है। गिरोह के सरगना संदीप पांडे ने देशभर के प्रमुख शहरों में एजेंट बैठा रखे थे, जो एनजीओ संचालकों को करोड़ों का डोनेशन दिलवाने का लालच देते और उनसे सिक्योरिटी अमाउंट के तौर पर लाखों रुपये हड़प लेते। ये रुपये एक कंपनी के बैंक खाते में जाते थे, जो वास्तव में फर्जी थी। इसी तरह ठगों ने भोपाल के एक एनजीओ संचालक से धोखाधड़ी की थी। कंपनी के ब्लैकमनी को व्हाइट करने के बहाने से देता था लालच     एसआई सुनील रघुवंशी ने बताया कि मूलत: उत्तरप्रदेश के रानीगंज का रहने वाला संदीप पांडे मुंबई में प्राइवेट नौकरी करता है।     उसने पुणे, बेंगलुरु, इंदौर और नागपुर समेत कई बड़े शहरों में ऐसे एजेंट तैयार किए थे, जो कि एनजीओ संचालकों को डोनेशन दिलवाने का लालच दे और उन क्लाइंटों से संपर्क करवाए।     संदीप एनजीओ संचालकों को बताता कि उसकी कंपनी में ब्लैकमनी है, वह करोड़ों की मोटी राशि उनके एनजीओ में ट्रांसफर करेगा।     फिर एनजीओ वापस उस कंपनी को आधी राशि व्हाइट मनी के तौर पर लौटा देगा। इस तरह लालच देकर वह पिछले दिनों भोपाल में ग्रंथ एजुकेशन सोसायटी के संचालक से 18 लाख की ठगी कर चुका है। कई एजेंटों के संपर्क मिले एसआइ सूर्यवंशी ने बताया कि आरोपित के पास मिले फर्जी कंपनी के बैंक खाते में इस प्रकार के कई डीडी मिले हैं, जिससे करोड़ों की ठगी का अनुमान है। आरोपित के संपर्क कई एजेंटों से है, जो दूसरे शहरों में बैठकर उसके लिए काम करते हैं। आरोपित के पुराने रिकार्ड को खंगाला जा रहा है।

भोपाल के अचारपुरा औद्योगिक क्षेत्र में मेडिटेक टेक्सटाइल सेक्टर की पहली यूनिट का निर्माण कार्य में तेज़ी: मुख्यमंत्री

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि भोपाल के अचारपुरा औद्योगिक क्षेत्र में मेडिटेक टेक्सटाइल सेक्टर की पहली अत्याधुनिक यूनिट का निर्माण कार्य तेज़ी से चल रहा है। उन्होंने इसे मध्यप्रदेश के औद्योगिक विकास का नया अध्याय बताते हुए कहा कि टेक्नोलॉजी आधारित उत्पादन इकाइयों का आना, इस बात का प्रमाण है कि प्रदेश अब पारंपरिक के साथ विशेषीकृत और उच्च गुणवत्ता वाले उद्योगों के लिए भी पसंदीदा स्थल बन चुका है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इस यूनिट से न केवल भोपाल बल्कि पूरे प्रदेश को उद्योग के क्षेत्र में नई पहचान मिलेगी। मेडिटेक टेक्सटाइल सेक्टर का यह निवेश, मध्यप्रदेश को मेडिकल टेक्सटाइल, हाईजीन और हेल्थ सपोर्टिंग टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में नई ऊंचाई देगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्पष्ट कहा कि राज्य सरकार निवेश लाने की नीति पर नहीं, निवेश को जमीन पर उतारने की कार्य संस्कृति पर काम कर रही है। इस यूनिट का निर्माण जर्मनी की विश्व प्रसिद्ध टीडब्ल्यूई ग्रुप और भारत के अनुभवी ओबीटी ग्रुप के संयुक्त सहयोग से किया जा रहा है। टीडब्ल्यूई ओबीटी प्रा. लि. नामक यह कंपनी अचारपुरा में लगभग 160 करोड़ रु. की लागत से उच्च तकनीक आधारित उत्पादन संयंत्र स्थापित कर रही है। यूनिट में महिलाओं और बच्चों के हाईजीन उत्पादों में प्रयुक्त टेक्सटाइल कंपोनेंट्स जैसे ADL, टॉप शीट और बैक शीट का निर्माण किया जाएगा। इन उत्पादों की भारत में अब तक आयात पर निर्भरता रही है। यह यूनिट चालू होने पर देश को आत्मनिर्भर बनाएगी और मेडिटेक टेक्सटाइल उत्पादों में ‘मेक इन इंडिया’ को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में स्थापित करेगी। उत्पादन के पहले चरण में ही 200 से अधिक लोगों को रोजगार मिलने जा रहा है, वहीं यूनिट के स्केल बढ़ने पर यह संख्या कई गुना तक पहुंचने की संभावना है। प्रदेश सरकार द्वारा विकसित अचारपुरा इंडस्ट्रियल एरिया में यह यूनिट एक उदाहरण बनेगी कि कैसे सुव्यवस्थित बुनियादी ढांचा और उद्योगों के अनुकूल माहौल किसी भी वैश्विक निवेशक के लिए भरोसे का केंद्र बन सकता है। कंपनी ने उपलब्ध ज़मीन, बिजली, परिवहन और अन्य सुविधाओं को निर्माण के लिए उपयुक्त बताया है। तकनीकी मानकों पर यह यूनिट भारत में अपने क्षेत्र की पहली अत्याधुनिक फैक्ट्री होगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश सरकार ने स्पष्ट विजन के साथ नई औद्योगिक रणनीति अपनाई है जिसमें ‘निवेश और निर्माण’ को साथ लेकर चलना प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि निवेशक अब मध्यप्रदेश में तेज़ फैसलों, सहज प्रक्रियाओं और भरोसेमंद माहौल के चलते बड़े निर्णय ले रहे हैं। मेडिटेक टेक्सटाइल जैसे अत्याधुनिक क्षेत्र में इस तरह का निवेश इसी विश्वास का परिणाम है। यूनिट के निर्माण में ग्रीन बिल्डिंग और पर्यावरणीय संतुलन का भी विशेष ध्यान रखा गया है। यहां बिना बॉयलर के संचालन होगा और उत्पादन प्रक्रिया से जल अथवा वायु प्रदूषण नहीं होगा। हाईजीन और हेल्थ सेक्टर से जुड़ी यह यूनिट स्वच्छ भारत और आत्मनिर्भर भारत की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाने जा रही है। टीडब्ल्यूई ओबीटी प्रा. लि. की ओर से बताया गया कि यह यूनिट पूरे देश में उनकी पहली और प्रमुख इकाई होगी। यह मेडिटेक टेक्सटाइल के क्षेत्र में देश में तकनीकी उत्पादन की शुरुआत मानी जाएगी। जर्मनी से उच्च स्तरीय तकनीकी सहयोग के साथ यह यूनिट भारतीय टेक्सटाइल सेक्टर के लिए एक नई दिशा तय करेगी। राज्य सरकार इस यूनिट को टेक्सटाइल ओडीओपी, पीएम मित्र पार्क और क्लस्टर पॉलिसी से जोड़कर क्षेत्रीय विकास की संभावनाओं को और सशक्त बनाने की दिशा में काम कर रही है। टेक्सटाइल सेक्टर में मध्यप्रदेश को पहले से ही राष्ट्रीय पहचान प्राप्त है और अब मेडिटेक, टेक्निकल और हाईजीन टेक्सटाइल में यह यूनिट उस पहचान को वैश्विक स्तर पर विस्तार देने वाली है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आने वाले वर्षों में मध्यप्रदेश मेडिटेक टेक्सटाइल जैसे उच्च श्रेणी के उत्पादों के लिए एक हब के रूप में स्थापित होगा, जहां नवाचार, तकनीक और रोजगार तीनों साथ-साथ आगे बढ़ेंगे। यह निवेश केवल एक यूनिट नहीं बल्कि राज्य के औद्योगिक भविष्य का मजबूत संकेत है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव करेंगे जनजातीय शिल्प ग्राम महोत्सव का शुभारंभ, रवीन्द्र भवन में होगा तीन दिवसीय महोत्सव

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शुक्रवार 9 मई, 2025 को रवीन्द्र भवन के हंस ध्वनि सभागार में दोपहर 1:30 बजे जनजातीय शिल्प ग्राम महोत्सव का शुभारंभ करेंगे। जनजातीय कार्य मंत्री डॉ. कुँवर विजय शाह कार्यक्रम की अध्यक्षता करेंगे। जनजातीलय कार्य विभाग और राष्ट्रीय डिजाइन संस्थान भोपाल के सहयोग से होने वाले इस महोत्सव में जीआई टैग प्राप्त गोंड पेंटिंग के 4 कलाकारों को मुख्यमंत्री द्वारा ऑथोराइज्ड यूजर कार्ड वितरित किये जायेंगे। साथ ही “आदि रंग’’ परियोजना के शुभारंभ प्रतीक स्वरूप एनआईसी द्वारा विकसित प्रशिक्षण किट हितग्राहियों को वितरित की जायेगी। शुभारंभ कार्यक्रम में श्री बादल भोई जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी संग्रहालय की कॉफी टेबल बुक का विमोचन भी होगा। महोत्सव में आदि शिल्प, जनजातीय व्यंजन के साथ जनजातीय नृत्य एवं संगीत की प्रस्तुति भी होगी।  

ग्रीष्मकालीन मूंग में खरपतवार नाशकों के उपयोग को करें हतोत्साहित

भोपाल हरित क्रांति से हमारे देश ने खाद्यान्न उत्पादन में आत्म-निर्भरता हासिल कर ली है। आज मध्यप्रदेश देश की खाद्य सुरक्षा को सशक्त करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है, अनाज के साथ-साथ दलहन के शीर्ष तीन उत्पादक राज्यों में मध्यप्रदेश एक है। यहाँ के किसान न केवल अनाज, तिलहन और दलहन का उन्नत उत्पादन करते हैं। माइको इरिगेशन, सुनिश्चित आवश्यक बिजली प्रदाय और सुलभ ऋण तक बेहतर पहुंच के कारण उच्च मूल्य वाली उद्यानिकी फसलों की खेती से किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। हम समय के साथ नवीन समस्याओं का भी उदय देख रहे हैं, जिनका समाधान किया जाना भी आवश्यक है। जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वाविद्यालय, जबलपुर एवं राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय के ग्वालियर वाईस चांसलर रहे प्रो. (डॉ.) विजय सिंह तोमर का कहना है कि किसान वर्तमान में ग्रीष्मकालीन मूंग की खेती बड़े स्तर पर कर रहे हैं। जो 10 साल पहले तक, बड़े पैमाने पर खरीफ में की जाती थी और यह पर्यावरण के लिए अनुकूल थी। इसकी खेती वर्षा आधारित परिस्थितियों में की जाती थी। मूंग के पौधों की जड़ों में नाइट्रोजन फिक्सिंग बैक्टीरिया की मौजूदगी होने से यह फसल मिट्टी की उर्वरता को भी बढ़ाती है। आज मूंग की खेती का क्षेत्रफल तीन गुना से भी अधिक बढ़ गया है, लेकिन यह फसल गर्मियों में उगाई जाने लगी है, इसलिए इससे भू-जल स्तर का अत्यधिक दोहन लगातार हो रहा है। किसान मूंग की बोनी जल्द करने के लिए फसलों के अवशेषों को जलाने पर जोर देते हैं, जिसके दुष्परिणाम सामने आते हैं। इसके अलावा गर्मी के मौसम में मूंग की अतिरिक्त सिंचाई से बिजली की खपत में भी वृद्धि होती है। राज्य सरकार ने नरवाई जलाने पर प्रतिबंध लगाया है। किसार्नी को नरवाई के सही उपयोग के लिये प्रशिक्षित किया जायेगा। किसानों द्वारा ग्रीष्मकालीन मूंग को जल्दी सुखाने के लिए खरपतवार नाशक पैराक्वेट एवं ग्लाइफोसेट का उपयोग किया जा रहा है, इससे फसल जल्दी पक जाती है। इसका दुष्प्रभाव वातावरण के साथ ही उत्पादित मूंग का सेवन करने वाले आमजन पर भी होता है। इससे विभिन्न प्रकार की बीमारियों के बढ़ने की संभावना होती है। लगातार खरपतवार नाशकों का उपयोग मिट्टी में उपयोगी सूक्ष्म जीवों को नष्ट कर देता है, जिससे मिट्टी की प्राकृतिक उर्वरता घटती है. साथ ही ग्रीष्मकालीन मूंग में कम से कम 3-4 बार सिंचाई करना पड़ती है। इससे भूमि का जल स्तर निरंतर नीचे जा रहा है। किसानों को खेती के लिए अधिक टिकाऊ और पर्यावरण अनुकूल पद्धतियों को अपनाने की आवश्यकता के बारे में जागरूक किया जा रहा है। किसानों को प्रोत्साहित किया जा रहा है कि ग्रीष्मकालीन मूंग जो प्राकृतिक रूप से पकता है, उसमें कीटनाशक एवं खरपतवार नाशक का उपयोग न के बराबर किया जाये। डॉ. तोमर ने कहा कि आज यदि डॉ. स्वामीनाथन जीवित होते तो वे इस बात से सहमत होते कि हरित क्रांति ने देश को बहुत कुछ दिया। आज खेती में रासायनिक उर्वरकों, कीटनाशकों और अन्य पौध संरक्षण रसायनों के उपयोग की होड़ लगी हुई है। इससे मृदा जीव को नुकसान और जल निकाय स्त्रोत ने प्रदूषण की संभावना बढ़ गई है। इसी प्रकार पौध संरक्षण रसायनों के अनियंत्रित उपयोग के परिणामस्वरूप हमारे द्वारा ग्रहण किये जाने वाले भोजन में रासायनिक अवशेषों की मात्रा बहुत अधिक हो जाती है। इसके परिणामस्वरूप बीमारियों और नवीन स्वास्थ्य विकारों के मामलों में वृद्धि हुई है।  

केंद्र सरकार ने दुर्घटना में घायलों के उपचार के लिए डेढ़ लाख रुपये तक के निश्शुल्क उपचार की सुविधा दी

भोपाल केंद्र सरकार ने दुर्घटना में घायलों के उपचार के लिए निजी या सरकारी अस्पताल में डेढ़ लाख रुपये तक के निश्शुल्क उपचार की सुविधा दी है। इसके लिए देश के सात राज्यों को चुना गया है, जिसमें मध्य प्रदेश भी है। कुछ राज्यों में प्रायोगिक (पायलट) के तौर पर सुविधा प्रारंभ की गई है। राज्य में इसकी जिम्मेदारी आयुष्मान योजना का संचालन करने वाले राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण को दी गई है। प्राधिकरण इसकी तैयारी कर रहा है। सबसे पहले हाईवे किनारे के उन अस्पतालों को चिह्नित किया जाएगा जहां आपरेशन थियेटर और घायलों के उपचार के लिए विशेषज्ञ डाक्टर व अन्य सुविधाएं हों। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने एयर एंबुलेंस सेवा की समीक्षा के दौरान यह भी निर्देश दिए हैं कि निजी और सरकारी सभी एंबुलेंसों की मैपिंग की जाए। इससे घायलों को उपचार के लिए उचित अस्पताल में पहुंचाया जा सके। केंद्र सरकार द्वारा पायलट प्रोजेक्ट में मिले अनुभव के बाद कोई बदलाव होता है तो उसे भी इसमें समाहित किया जाएगा। आयुष्मान भारत योजना के सीईओ योगेश भरसट ने बताया कि आयुष्मान के अंतर्गत पहले चिह्नित अस्पतालों के अतिरिक्त राजमार्गों के किनारे के आवश्यक सुविधाओं वाले सभी अस्पतालों को योजना में शामिल कर उन्हें आयुष्मान के दायरे में लाया जाएगा। जहां आयुष्मान और गैर आयुष्मान दोनों तरह के घायलों का उपचार हो सकेगा। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार अभी इस बात पर उलझन है कि सात दिन बाद भी उपचार जारी रहा तो भुगतान कौन करेगा।  

एम पी हलचल टी वी न्यूज चैनल के स्थापना के इक्कीस वर्ष पूर्ण होने पर प्रदेश भर में किए स्मृति चिन्ह भेंट

भोपाल एम पी हलचल टी वी न्यूज चैनल के स्थापना के इक्कीस वर्ष पूर्ण होने पर प्रदेश भर में वरिष्ठ जनों को स्मृति चिन्ह भेंट किए जा रहे हैं।इसी कड़ी में प्रदेश के परिवहन एवं स्कूली शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह,महिला बाल विकास मंत्री सुश्री निर्मला भूरिया , आदिवासी विकास मंत्री विजय शाह,एवं कुटीर उद्योग मंत्री दिलीप जायसवाल को स्मृति चिन्ह भेंट किए गए। साथ ही उन्हें एम पी हलचल टी वी न्यूज चैनल की आगामी गतिविधियों की जानकारी। अपने अपने विभागों की विकास उन्मुखी योजनाओं की चर्चा के लिए एम पी हलचल टी वी न्यूज के कार्यालय पधारने का आग्रह भी उन्होंने स्वीकार किया। इस अवसर पर एम पी हलचल टी वी न्यूज चैनल के प्रधान संपादक जितेंद्र सिंह,नदीम खान व कुलदीप यादव उपस्थित रहे।

अहमदाबाद–पटना–अहमदाबाद साप्ताहिक ग्रीष्मकालीन विशेष ट्रेन, संत हिरदाराम नगर एवं बीना स्टेशनों से होकर गुजरेगी

संत हिरदाराम नगर गर्मी के मौसम में यात्रियों की अतिरिक्त भीड़ को ध्यान में रखते हुए रेल प्रशासन द्वारा विशेष ट्रेनों का संचालन किया जा रहा है। इसी कड़ी में, गाड़ी संख्या 09485/09486 अहमदाबाद – पटना – अहमदाबाद साप्ताहिक ग्रीष्मकालीन विशेष ट्रेन (02-02 ट्रिप) चलाई जा रही है, जो भोपाल मंडल के संत हिरदाराम नगर एवं बीना स्टेशनों पर ठहरकर गंतव्य तक जाएगी। गाड़ी संख्या 09485 अहमदाबाद – पटना ग्रीष्मकालीन विशेष ट्रेन (02 ट्रिप) गाड़ी संख्या 09485 अहमदाबाद – पटना विशेष ट्रेन दिनांक 09 मई एवं 16 मई 2025 (प्रत्येक शुक्रवार) को अहमदाबाद स्टेशन से शाम 16:35 बजे प्रस्थान कर, अगले दिन मार्ग के अन्य स्टेशनों से होते हुए सुबह 03:30 बजे संत हिरदाराम नगर, सुबह 06:35 बजे बीना स्टेशन एवं अन्य स्टेशनों पर ठहराव के बाद  रात 23:45 बजे पटना स्टेशन पहुंचेगी। गाड़ी संख्या 09486 पटना – अहमदाबाद ग्रीष्मकालीन विशेष ट्रेन (02 ट्रिप) गाड़ी संख्या 09486 पटना – अहमदाबाद विशेष ट्रेन दिनांक 11 मई एवं 18 मई 2025 (प्रत्येक रविवार) को सुबह 04:00 बजे पटना स्टेशन से प्रस्थान कर, उसी दिन मार्ग के अन्य स्टेशनों से होते हुए रात 22:25 बजे बीना, अगले दिन रात 01:30 बजे संत हिरदाराम नगर एवं अन्य स्टेशनों पर ठहराव के बाद दोपहर 13:30 बजे अहमदाबाद स्टेशन पहुंचेगी। गाड़ी के हाल्ट: रास्ते में यह गाड़ी दोनों दिशाओं में अहमदाबाद, नडियाद, छायापुरी (वडोदरा), रतलाम, उज्जैन, संत हिरदाराम नगर, बीना, दमोह, कटनी, सतना, मानिकपुर, प्रयागराज छिवकी, पं. दीनदयाल उपाध्याय जं., बक्सर, आरा, पटना स्टेशनों पर रुकेगी। यात्रियों से अनुरोध है कि यात्रा प्रारंभ करने से पूर्व रेलवे की अधिकृत पूछताछ सेवा NTES/139 के माध्यम से गाड़ी की सटीक स्थिति की जानकारी प्राप्त करें। विस्तृत समय-सारणी एवं ठहराव विवरण हेतु कृपया www.enquiry.indianrail.gov.in पर जाएं या NTES ऐप डाउनलोड करें।

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