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मेहनत का कमाल: धार के प्रक्षाल जैन ने UPSC में पाई 8वीं रैंक

बाग धार जिले के छोटे कस्बे बाग के लिए गर्व की बात है कि यहां के होनहार युवा पक्षाल सेक्रेटरी ने संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक 8 हासिल कर क्षेत्र का नाम पूरे देश में रोशन किया है। उनकी इस उपलब्धि से परिवार सहित पूरे नगर में खुशी और गर्व का माहौल है। लोगों ने मिठाई बांटकर और आतिशबाजी कर खुशियां मनाईं। माता-पिता का आशीर्वाद पक्षाल सेक्रेटरी का कहना है कि माता-पिता का आशीर्वाद और अपने लक्ष्य के प्रति समर्पण ही उनकी सबसे बड़ी प्रेरणा रही। उनके पिता निलेश जैन कपड़ा व्यवसायी हैं, जबकि माता दीप्ति जैन गृहिणी हैं। परिवार के अनुसार प्रक्षाल बचपन से ही पढ़ाई में मेधावी रहे हैं और उन्होंने कड़ी मेहनत व लगन से यह मुकाम हासिल किया। पक्षाल की प्रारंभिक पढ़ाई बाग के महेश मेमोरियल स्कूल में हुई। आगे की पढ़ाई के लिए वे इंदौर चले गए और बाद में उन्होंने आईआईटी कानपुर से फाइनेंस में पढ़ाई की। आईआईटी से पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने कॉर्पोरेट क्षेत्र में जाने के बजाय देश सेवा का रास्ता चुना और सिविल सेवा की तैयारी शुरू कर दी। दिल्ली में रहकर तैयारी पक्षाल वर्ष 2022-23 के आसपास दिल्ली चले गए और वहीं रहकर यूपीएससी की तैयारी की। उनकी छोटी बहन क्रिया जैन ने बताया कि तैयारी के दौरान उन्होंने बेहद कठिन परिस्थितियों का सामना किया। कई बार ऐसा समय भी आया जब वे रोजाना केवल 3 से 4 घंटे ही सोते थे और दिनभर लाइब्रेरी में पढ़ाई करते थे। प्रयास जारी रहा पहले प्रयास में उन्हें भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) मिलने की संभावना थी, लेकिन उनका लक्ष्य आईएएस बनना था, इसलिए उन्होंने तैयारी जारी रखी। दूसरे प्रयास में वे प्रीलिम्स में ही रह गए, लेकिन तीसरे प्रयास में उन्होंने शानदार सफलता हासिल करते हुए ऑल इंडिया रैंक 8 प्राप्त की। तैयारी के दौरान कई चुनौतियां भी सामने आईं। एक बार इंटरव्यू से एक दिन पहले उनका पैर मुड़ गया था, फिर भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। पक्षाल जैन की इस सफलता से बाग सहित पूरे क्षेत्र के युवाओं को प्रेरणा मिली है कि छोटे कस्बों से भी बड़े सपने पूरे किए जा सकते हैं।

रंजिश में चली गोलियां: सतना में पिता की मौत, बेटा गंभीर घायल

सतना सतना जिले के नागौद थाना क्षेत्र के बारा पत्थर गांव में गुरुवार शाम उस समय सनसनी फैल गई, जब पैरोल पर जेल से बाहर आया उम्रकैद का सजायाफ्ता अपराधी पुरानी रंजिश के चलते पिता-पुत्र पर ताबड़तोड़ फायरिंग कर फरार हो गया। घटना में पिता की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि बेटा गंभीर रूप से घायल हो गया। क्या है मामला प्राप्त जानकारी के अनुसार बारा पत्थर गांव निवासी करीब 50 वर्षीय बबलू यादव अपने बेटे राणा यादव के साथ गांव में मौजूद थे। इसी दौरान गांव पहुंचे आरोपी चंदन यादव ने अचानक दोनों पर फायरिंग शुरू कर दी। गोली लगने से बबलू यादव की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि राणा यादव गंभीर रूप से घायल हो गया। घायल युवक को पहले नागौद अस्पताल ले जाया गया, जहां से हालत गंभीर होने पर उसे जिला अस्पताल सतना रेफर कर दिया गया। अस्पताल में उसका उपचार जारी है और उसकी स्थिति नाजुक बताई जा रही है। घटना की सूचना मिलते ही नागौद थाना प्रभारी अशोक पांडे पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और जांच शुरू की। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पंचनामा कार्रवाई के बाद पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। गिरफ्तारी के लिए टीमें गठित पुलिस के अनुसार आरोपी और मृतक के परिवार के बीच लंबे समय से पुरानी रंजिश चली आ रही थी। इसी दुश्मनी के चलते आरोपी ने पिता-पुत्र को निशाना बनाकर गोलियां चलाईं। थाना प्रभारी अशोक पांडे ने बताया कि फरार आरोपी की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की टीमें गठित कर दी गई हैं और उसके संभावित ठिकानों पर दबिश दी जा रही है।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव 10 मार्च को भोपाल में करेंगे ‘सरस्वती अभियान’ का शुभारंभ

‘सरस्वती अभियान’ से शिक्षा की मुख्यधारा में पुन: आएगी शाला त्यागी बालिकाएँ बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ के अंतर्गत महिला बाल विकास विभाग की नई पहल मुख्यमंत्री डॉ. यादव 10 मार्च को भोपाल में करेंगे ‘सरस्वती अभियान’ का शुभारंभ भोपाल  प्रदेश में शाला त्यागी बालिकाओं को पुनः शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग ने बेटी बचाओ–बेटी पढ़ाओ योजनांतर्गत ‘सरस्वती अभियान’ की शुरुआत की है। इस नवाचार के माध्यम से वे बालिकाएँ जो किसी सामाजिक, पारिवारिक या आर्थिक कारण से विद्यालय छोड़ चुकी हैं, उन्हें फिर से शिक्षा से जोड़कर आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने का प्रयास किया जाएगा। राज्य स्तर पर इस अभियान को नई दिशा देने के लिए 10 मार्च को भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शामिल होंगे। कार्यक्रम में शाला त्यागी बालिकाओं को पुनः शिक्षा से जोड़ने के लिए विभाग की कार्य योजना और नवाचारों की जानकारी भी दी जाएगी। अभियान में राज्य ओपन स्कूल प्रणाली के माध्यम से बालिकाओं को कक्षा 8वीं, 10वीं और 12वीं की परीक्षाओं में शामिल होने का अवसर दिया जाएगा। उन्हें अध्ययन सामग्री, मार्गदर्शन, संपर्क कक्षाएँ और मेंटोरिंग की सुविधा भी प्रदान की जाएगी, ताकि वे अपनी पढ़ाई पूरी कर सकें और आगे की शिक्षा या रोजगार के अवसर प्राप्त कर सकें। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण के अनुसार प्रदेश में बड़ी संख्या में बालिकाएँ कक्षा 8वीं, 10वीं या 12वीं से पहले ही विद्यालय छोड़ देती हैं। शिक्षा छूटने के बाद उन्हें पढ़ाई जारी रखने का अवसर नहीं मिल पाता, जिससे उनकी शिक्षा अधूरी रह जाती है और उनके भविष्य के अवसर सीमित हो जाते हैं। ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों में यह समस्या अधिक गंभीर रूप में सामने आती है। चुनौती को ध्यान में रखते हुए महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा शुरू किए जा रहे सरस्वती अभियान के अंतर्गत शाला त्यागी बालिकाओं की पहचान के लिए सर्वेक्षण किया जाएगा, उन्हें राज्य ओपन स्कूल में नामांकित किया जाएगा। परीक्षा की तैयारी के लिए अध्ययन सामग्री और शैक्षणिक मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाएगा। इसके साथ ही मेंटोरिंग और काउंसलिंग के माध्यम से बालिकाओं को परीक्षा में सफल होने के लिए निरंतर सहयोग दिया जाएगा। अभियान के तहत परीक्षा उत्तीर्ण करने वाली बालिकाओं को प्रमाण-पत्र प्रदान कर आगे की शिक्षा के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। इस पहल का उद्देश्य न केवल बालिकाओं को शिक्षा से जोड़ना है, बल्कि उनमें आत्मविश्वास और आत्मसम्मान का विकास करना भी है। अभियान बालिका शिक्षा की दर बढ़ाने, ड्रॉप-आउट दर कम करने और महिला सशक्तिकरण को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। साथ ही बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीतियों को रोकने में भी यह अभियान प्रभावी साबित हो सकता है। सरस्वती अभियान के माध्यम से शिक्षा से वंचित बालिकाओं को नया अवसर मिलेगा और वे न केवल अपने जीवन को बेहतर बना सकेंगी, बल्कि परिवार और समाज के विकास में भी सक्रिय भूमिका निभा सकेंगी।  

होली की रात बना खूनी खेल, दोस्तों ने मिलकर युवक को उतारा मौत के घाट

भोपाल निशातपुरा क्षेत्र स्थित बेस्ट प्राइज तिराहे पर होली के दिन रोड रेज में युवक की हत्या करने वाले चारों आरोपितों को गिरफ्तार कर पुलिस ने जेल भेज दिया है। पूछताछ में आरोपितों ने बताया कि वे बुधवार शाम को होली पार्टी से लौट रहे थे और सभी शराब के नशे में थे। इसी दौरान जब कट लगने पर बाइक सवार ने विवाद शुरू किया तो नशे में उसे चाकू घोंप दिया। निशातपुरा पुलिस आरोपितों के पुराने रिकार्ड की जांच कर रही है। हालांकि अब तक किसी पुराना आपराधिक रिकार्ड नहीं मिला है। पुलिस के अनुसार बुधवार शाम करीब सात बजे चारों आरोपित एक फार्म हाउस से पार्टी कर अपने घर विश्वकर्मा नगर लौट रहे थे। बेस्ट प्राइज तिराहे के पास उनकी कार और बाइक सवार युवक अरविंद मीणा के बीच कट मारने को लेकर विवाद हो गया। दोनों पक्षों के बीच पहले कहासुनी और गाली-गलौज हुई। पूछताछ में आरोपितों ने बताया कि विवाद के दौरान अरविंद ने जेब से चाकू निकालकर उन्हें धमकाना शुरू कर दिया। इससे कार सवार युवक भड़क गए। तीन आरोपित 24 वर्षीय नरेंद्र सिंह उर्फ निक्की, 20 वर्षीय ऋषि दांगी निवासी विश्वकर्मा नगर, करोंद और मालीखेड़ी निवासी 26 वर्षीय आशीष राजपूत ने अरविंद मीणा को पीछे से पकड़ा। वहीं विश्वकर्मा नगर में रहने वाले चौथे दोस्त विकास जोशी उर्फ विक्की ने अरविंद से चाकू छीनकर उसके सीने में घोंप दिया। हत्या के बाद चारों आरोपित घर जाने की बजाए अलग-अलग क्षेत्रों में छुप गए। निशातपुरा पुलिस ने दबिश देकर पहले कार मालिक नरेंद्र से संपर्क कर उसे पकड़ा और फिर उसकी निशानदेही पर अन्य आरोपितों की गिरफ्तारी हुई। एसआइ श्रीकांत द्विवेदी ने बताया कि सभी आरोपितों को जेल भेज दिया गया है।  

जल संचय जन भागीदारी अभियान की समीक्षा बैठक 07 मार्च को

शहडोल  जिले में जल संरक्षण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से जल संचय जन भागीदारी अभियान के संबंध में चर्चा एवं समीक्षा बैठक कलेक्टर डॉ केदार सिंह की अध्यक्षता में 7 मार्च 2026 को प्रातः 11 बजे कलेक्टर कार्यालय के विराट सभागार में आयोजित की जाएगी।  बैठक में जिले में चल रहे जल संरक्षण कार्यों, जल संचय के लिए किए जा रहे प्रयासों तथा जन भागीदारी से अभियान को प्रभावी बनाने के संबंध में विस्तृत चर्चा की जाएगी।   बैठक में वन विभाग के समस्त एसडीओ, सभी जनपद पंचायतों के सीईओ, जनपदों के सहायक यंत्रियों एवं उपयंत्रियों, नगर निकायों के सीएमओ, जिला शिक्षा अधिकारी, सहायक आयुक्त जनजातीय कार्य विभाग, डीपीसी, महिला एवं बाल विकास विभाग, पीएचई, स्वास्थ्य विभाग तथा जल संसाधन विभाग के अधिकारियों को उपस्थित रहने के लिए कहा गया है।

मार्च के पहले दिन ही गर्मी बढ़ी, पारा 35 डिग्री तक पहुंचा, तेज धूप से तपिश में इज़ाफा

इंदौर  शहर में बीते दो दिनों से गर्मी के तेवर तेज हो गए हैं। दिन के समय तेज धूप के कारण लोगों को गर्मी का अहसास होने लगा है, हालांकि रात का तापमान सामान्य से थोड़ा कम होने के कारण कुछ राहत मिल रही है। आमतौर पर इंदौर में मार्च के अंतिम सप्ताह तक तापमान 35 डिग्री सेल्सियस के आसपास पहुंचता है, लेकिन इस बार महीने की शुरुआत में ही पारा उस स्तर के करीब पहुंचने लगा है।  पिछले दो दिनों से तापमान में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। दिन के समय तेज धूप लोगों को परेशान करने लगी है। मौसम विभाग के अनुसार आने वाले दिनों में तापमान में और वृद्धि होने की संभावना है। अगले एक सप्ताह तक तेज धूप बनी रह सकती है, जबकि हवा की गति सामान्य रहने का अनुमान है। गुरुवार को दिन का तापमान 35.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से तीन डिग्री अधिक रहा। वहीं रात का तापमान 14.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से एक डिग्री कम था। मौसम विभाग का कहना है कि आने वाले दिनों में रात के तापमान में भी धीरे-धीरे बढ़ोतरी होने लगेगी। धुलेंडी के जश्न के दौरान भी इस बार शहरवासियों को गर्मी का अहसास हुआ। वहीं रविवार को आने वाली रंगपंचमी पर भी तेज गर्मी महसूस होने की संभावना है। हालांकि रात के समय तापमान थोड़ा कम होने से लोगों को कुछ राहत मिल रही है। मौसम विभाग के अनुसार सामान्य तौर पर मार्च के अंतिम सप्ताह तक तापमान तेजी से बढ़कर 36 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचता है, लेकिन इस बार पहले ही सप्ताह में पारा 35 डिग्री के करीब पहुंच चुका है। प्रदेश में फिलहाल कोई मौसम प्रणाली सक्रिय नहीं है और आसमान साफ रहने के कारण तेज धूप पड़ रही है। इसी वजह से मार्च के शुरुआती दिनों में ही गर्मी के तेवर तीखे नजर आने लगे हैं।

बैतूल के चिचोली बस स्टैंड पर अतिक्रमण हटाने के लिए बुलडोजर चलेगा, 20 को अंतिम नोटिस, 7 दिन का वक्त

बैतूल बैतूल जिले के चिचोली में नगर परिषद प्रशासन ने बस स्टैंड क्षेत्र की शासकीय भूमि से अतिक्रमण हटाने के लिए सख्त कदम उठाए हैं। नवनिर्मित बस स्टैंड के आसपास सरकारी जमीन पर कब्जा जमाए 20 अतिक्रमणकारियों को अंतिम नोटिस जारी किया गया है। मुख्य नगर पालिका अधिकारी सैयद आरिफ हुसैन ने बताया कि नोटिस जारी होने के बाद अतिक्रमणकारियों को सात दिन का समय दिया गया है। उन्हें इस अवधि में स्वयं अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए गए हैं। यदि तय समय सीमा में कब्जा नहीं हटाया गया, तो नगर परिषद द्वारा बलपूर्वक कार्रवाई करते हुए अतिक्रमण हटाया जाएगा। इस कार्रवाई में आने वाला पूरा खर्च भी संबंधित अतिक्रमणकारियों से ही वसूला जाएगा। नगर परिषद के अनुसार, इससे पहले मार्च, जून और अक्टूबर 2025 में भी अतिक्रमण हटाने के लिए पत्र जारी कर चेतावनी दी गई थी। हालांकि, अतिक्रमणकारियों ने इन निर्देशों को गंभीरता से नहीं लिया। इसके बाद अब मध्यप्रदेश नगर पालिका अधिनियम 1961 की धारा 223 के तहत यह अंतिम नोटिस जारी किया गया है। प्रशासन ने इस कार्रवाई को लेकर पूरी तैयारी कर ली है। कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए कलेक्टर बैतूल, अनुविभागीय अधिकारी राजस्व बैतूल, तहसीलदार चिचोली और थाना प्रभारी चिचोली को भी लिखित रूप से सूचित कर आवश्यक सहयोग मांगा गया है।

MP में प्राइवेट स्कूलों के लिए मान्यता की अंतिम तिथि, 10 मार्च तक 20 हजार लेट फीस के साथ आवेदन कर सकेंगे

 ग्वालियर  लोक शिक्षण विभाग यानि डीपीआई हाईस्कूल व हायरसेकेण्डरी स्कूलों की नवीन मान्यता व नवीनीकरण की प्रक्रिया शुरू कर चुका है। बिना विलंब शुल्क के ऑनलाइन आवेदन के करने की तिथि निकल चुकी है। लेकिन विभाग ने 20 हजार विलंब शुल्क के साथ मान्यता के लिए आवेदन करने की अंतिम तारीक्ष 10 मार्च रखी है। आवेदन के बाद 25 मार्च तक संयुक्त संचालक शिक्षा के नेतृत्व में गठित टीम आवेदन वाले स्कूलों की छानबीन करेगा। इसके बाद जिन स्कूलों के आवेदन को समिति निरस्त करेगी, उसके लिए 25 अप्रैल तक अपील की जा सकती है। इन अपीलों का निराकरण डीपीआई 25 मई को करेगा। इसके बाद स्कूलों की मान्यता जारी कर दी जाएगी। ऑनलाइन आवेदन और पोर्टल की जानकारी डीपीआई ने मान्यता की पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए ऑनलाइन पोर्टल https://manyta.dpimp.in/ शुरू किया है। सीबीएसई, आईसीएसई और अन्य बोर्डों से संबद्ध स्कूलों को भी इसी पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन करना अनिवार्य है। सामान्य शुल्क के साथ आवेदन की समय-सीमा 15 फरवरी को समाप्त हो चुकी है, लेकिन स्कूलों को डीपीआई ने विलंब शुल्क के साथ 10 मार्च तक का आवेदन करने का समय दिया है। आवेदन करने के बाद इस तरह चलेगी प्रक्रिया     ग्वालियर चंबल क्षेत्र से स्कूलों की जांच संभागीय संयुक्त संचालक द्वारा गठित दल ऑनलाइन आवेदनों की छानबीन की जाएगी। नवीन मान्यता, नवीनीकरण और अपग्रेडेशन के प्रकरणों पर निर्णय लेने की अंतिम तिथि 25 मार्च 2026 तय की गई है।     यदि किसी स्कूल का आवेदन संयुक्त संचालक स्तर पर निरस्त कर दिया जाता है, तो संबंधित संस्था 25 अप्रैल तक आयुक्त, लोक शिक्षण के समक्ष ऑनलाइन अपील प्रस्तुत कर सकती है।     प्राप्त अपीलों का अंतिम निराकरण 25 मई तक कर दिया जाएगा। इसके बाद ही स्कूलों की मान्यता की अंतिम सूची और प्रमाण पत्र जारी किए जाएंगे। स्कूलों को यह रखना होगा ध्यान डीपीआई के संचालक केके द्विवेदी द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि स्कूल प्रबंधन समय-सीमा का विशेष ध्यान रखें। ग्वालियर संभाग के संयुक्त संचालक ने भी जिले के सभी अशासकीय स्कूलों को निर्देशित किया है कि वे तकनीकी त्रुटियों से बचने के लिए अंतिम तारीख का इंतजार न करें और पोर्टल पर सभी प्रविष्टियों को सावधानीपूर्वक अपलोड करें।  

जज की पत्नी की मौत ट्रेन के वॉशरूम में, पति ने लोकेशन ट्रेस कर रोकी ट्रेन, स्टेशन पर किया इंतजार

 रतलाम रेल यात्रा आम तौर पर लोगों के लिए एक सामान्य और सुरक्षित अनुभव मानी जाती है, लेकिन कभी-कभी सफर के बीच घटने वाली घटनाएं हर किसी को झकझोर कर रख देती हैं. मध्य प्रदेश के रतलाम जिले से सामने आई एक ऐसी ही घटना ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं. यहां चलती ट्रेन के वॉशरूम में एक जज की पत्नी की मौत हो गई. इस पूरे घटनाक्रम में सबसे दर्दनाक पहलू यह रहा कि स्टेशन पर खड़े पति को काफी देर तक यह पता ही नहीं चल पाया कि उनकी पत्नी ट्रेन के अंदर ही जिंदगी की जंग हार चुकी हैं।  यह घटना कांचीगुड़ा–भगत की कोठी एक्सप्रेस में सामने आई, जहां सफर के दौरान अचानक महिला की तबीयत बिगड़ गई और संभवतः साइलेंट हार्ट अटैक आने से उनकी मौत हो गई. घटना के बाद रेलवे पुलिस और स्थानीय प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है. जानकारी के मुताबिक राजस्थान के निंबाहेड़ा में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश राजकुमार चौहान अपनी पत्नी उषा चौहान के साथ जोधपुर से निंबाहेड़ा लौट रहे थे. दोनों ट्रेन में सवार तो साथ हुए थे, लेकिन रिजर्वेशन अलग-अलग कोच में था, इसलिए वे अलग डिब्बों में यात्रा कर रहे थे. सफर सामान्य तरीके से चल रहा था. रास्ते में दोनों के बीच फोन पर बातचीत भी होती रही. बताया जाता है कि निंबाहेड़ा स्टेशन पहुंचने से कुछ समय पहले उषा चौहान ने अपने पति को फोन किया और बताया कि वह वॉशरूम जा रही हैं. उस समय किसी को यह अंदाजा नहीं था कि यह बातचीत आखिरी साबित होगी।  स्टेशन पर इंतजार करते रहे पति कुछ ही देर बाद ट्रेन निंबाहेड़ा स्टेशन पहुंची. जैसे ही ट्रेन प्लेटफॉर्म पर रुकी, जज राजकुमार चौहान अपने डिब्बे से उतरकर पत्नी का इंतजार करने लगे. उन्हें उम्मीद थी कि पत्नी भी अपने कोच से उतरकर प्लेटफॉर्म पर आ जाएंगी. लेकिन मिनट दर मिनट गुजरते गए और उषा चौहान नजर नहीं आईं. पहले तो उन्होंने सोचा कि शायद वह दूसरे दरवाजे से उतर गई होंगी या फिर सामान लेने में देर हो रही होगी. लेकिन जब काफी देर तक उनका कोई पता नहीं चला तो चिंता बढ़ने लगी।  तलाश शुरू, लेकिन नहीं मिला कोई सुराग राजकुमार चौहान ने प्लेटफॉर्म पर इधर-उधर तलाश शुरू की. उन्होंने आसपास मौजूद यात्रियों और रेलवे कर्मचारियों से भी पूछताछ की, लेकिन किसी को भी उनके बारे में कोई जानकारी नहीं थी. इसी बीच ट्रेन भी आगे के लिए रवाना हो चुकी थी. पत्नी के अचानक लापता होने से घबराए जज ने तुरंत रेलवे पुलिस को सूचना दी. सूचना मिलते ही रेलवे पुलिस सक्रिय हो गई. सबसे पहले ट्रेन की जानकारी जुटाई गई और आगे के स्टेशन को अलर्ट किया गया. पुलिस ने ट्रेन को मंदसौर स्टेशन पर रुकवाने का फैसला किया ताकि वहां जांच की जा सके. मंदसौर स्टेशन पर रेलवे पुलिस और कर्मचारियों ने कई डिब्बों की जांच की, लेकिन वहां भी उषा चौहान का कोई पता नहीं चला।  मोबाइल लोकेशन बनी सुराग इसी दौरान पुलिस ने महिला के मोबाइल फोन की लोकेशन ट्रेस करवाई. लोकेशन सामने आने के बाद स्थिति कुछ हद तक साफ होने लगी. मोबाइल की लोकेशन से संकेत मिला कि फोन अभी भी उसी ट्रेन में मौजूद है. इससे यह अंदेशा बढ़ गया कि महिला शायद ट्रेन से उतरी ही नहीं हैं और किसी डिब्बे में ही मौजूद हो सकती हैं. मोबाइल लोकेशन के आधार पर पुलिस ने ट्रेन को आगे जावरा स्टेशन पर रुकवाया. यहां पुलिस टीम ने उस आरक्षित कोच की जांच शुरू की, जिसमें उषा चौहान यात्रा कर रही थीं. जब कोच के भीतर तलाश की गई तो एक वॉशरूम का दरवाजा अंदर से बंद मिला. काफी देर तक दरवाजा खटखटाने के बावजूद कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली. इससे शक और गहरा गया।  दरवाजा तोड़कर देखा गया अंदर का दृश्य स्थिति को गंभीर देखते हुए पुलिस और रेलवे कर्मचारियों ने वॉशरूम का दरवाजा तोड़ने का फैसला किया. दरवाजा तोड़ा गया तो अंदर का दृश्य देखकर सभी हैरान रह गए. वॉशरूम के अंदर उषा चौहान अचेत अवस्था में पड़ी थीं. उन्हें तुरंत बाहर निकाला गया और बिना समय गंवाए अस्पताल ले जाया गया. अस्पताल पहुंचने के बाद डॉक्टरों ने महिला की जांच की, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी. डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया. प्रारंभिक जांच में डॉक्टरों ने आशंका जताई कि महिला की मौत साइलेंट हार्ट अटैक की वजह से हुई है. साइलेंट अटैक में कई बार व्यक्ति को गंभीर दर्द या लक्षण महसूस नहीं होते और अचानक स्थिति बिगड़ जाती है।  परिवार में पसरा मातम घटना की जानकारी मिलते ही परिवार में शोक की लहर दौड़ गई. एक सामान्य ट्रेन यात्रा इस तरह दुखद अंत में बदल जाएगी, यह किसी ने सोचा भी नहीं था. परिजनों को सूचना दी गई और बाद में सभी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया. परिवार शव को अपने साथ लेकर रवाना हो गया। 

अधिकारी-कर्मचारी कार्यालयीन समय का पालन करें सुनिश्चित : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

गेहूं उपार्जन प्रक्रिया में किसानों को ना हो कोई परेशानी : मुख्यमंत्री डॉ. यादव परफार्मेंस और परिणाम देने वाले कलेक्टर ही रहेंगे मैदान में अधिकारी-कर्मचारी कार्यालयीन समय का पालन करें सुनिश्चित जिला कलेक्टर, शैक्षणिक संस्थानों, छात्रावासों, विश्व विद्यालय परिसरों का आवश्यक रूप से करें आकस्मिक निरीक्षण खाड़ी देशों में रह रहे व्यक्तियों और उनके परिवारों से निरंतर रखें समन्वय और सम्पर्क भ्रामक जानकारियों का जिला स्तर पर हो तत्काल प्रभावी रूप से खंडन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जिला कलेक्टर्स को दिए निर्देश भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि गेहूं उपार्जन प्रक्रिया में किसानों को किसी भी प्रकार की समस्या का सामना न करना पड़े। जिला कलेक्टर पंजीकृत किसानों में से चिन्हित किसानों के सत्यापन, उपार्जन केन्द्रों पर बारदानों की उपलब्धता और किसानों को समय पर भुगतान के लिए शत-प्रतिशत व्यवस्था सुनिश्चित करें। गेहूं का उपार्जन इंदौर, उज्जैन, भोपाल और नर्मदापुरम संभाग में 16 मार्च से 5 मई तक होगा और शेष संभागों जबलपुर, ग्वालियर, रीवा, शहडोल, चम्बल व सागर में 23 मार्च से 12 मई तक किया जाएगा। किसान अपना पंजीयन 7 मार्च तक करा सकेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गुरूवार को मंत्रालय में आयोजित अभियान की राज्य स्तरीय बैठक के बाद जिला कलेक्टर्स से वर्चुअल संवाद में यह निर्देश दिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उपार्जन केन्द्रों का समय-सीमा में निर्धारण, उनकी स्थापना और इन केन्द्रों पर सभी आवश्यक सुविधाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि उपार्जन कार्य में लगे अमले के उपयुक्त प्रशिक्षण सहित जिला उपार्जन समिति द्वारा नियमित बैठक कर समस्याओं के त्वरित निदान की व्यवस्था की जाए। किसानों को अद्यतन जानकारियां सरलता से उपलब्ध कराना भी सुनिश्चित हो। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जिला कलेक्टर्स को खाड़ी देशों में वर्तमान में निर्मित अप्रत्याशित परिस्थितियों को देखते हुए इन देशों में रह रहे जिले के विद्यार्थियों, नागरिकों के परिवारों से सम्पर्क में रहने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश भवन नई दिल्ली और वल्लभ भवन मंत्रालय में प्रदेशवासियों की सहायता के लिए कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है। जिला स्तर पर ऐसे व्यक्तियों और परिवारों से कलेक्टर्स निरंतर समन्वय और सम्पर्क रखें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि संकल्प से समाधान अभियान का अंतिम चरण जारी है। अभियान के अंतर्गत 40 लाख आवेदनों का निराकरण हुआ है। अब 16 मार्च तक जिला स्तरीय शिविर लगना है। विकास और जनकल्याण की इस गतिविधि की जिला कलेक्टर सघन मॉनीटरिंग सुनिश्चित करें। अभियान में किसी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जो कलेक्टर्स जिले की सभी गतिविधियों में परफार्मेंस और परिणाम देंगे वे ही मैदान में रहेंगे, यह सिद्धांत सभी अधिकारी-कर्मचारियों पर भी लागू होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जिलों में वीसी सेटअप के संबंध में आलीराजपुर, छिंदवाड़ा, पांर्ढुणा, बालाघाट, भोपाल जिलों को तत्काल कार्यवाही पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि वीसी सेटअप से सभी विभागों के अधिकारी और जनप्रतिनिधियों को पंचायत स्तर तक संवाद स्थापित करने में मदद मिलेगी। इससे विकास और जनकल्याण के कार्यों की समीक्षा में सुविधा होगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विधानसभा स्तर के विजन डॉक्यूमेंट के संबंध में भी आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि शासन और व्यवस्था के संबंध में मिथ्या या भ्रम फैलाने वाली जानकारियों का जिला स्तर पर तत्काल प्रभावी रूप से खंडन किया जाए। सोशल मीडिया के युग में ऐसी गतिविधियों पर त्वरित रूप से वस्तुस्थिति रखना आवश्यक है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वर्तमान में शाला और महाविद्यालयीन स्तर पर परीक्षाओं का समय चल रहा है। जिला अधिकारी शैक्षणिक संस्थाओं, छात्रावासों, विश्वविद्यालय परिसरों का आकस्मिक निरीक्षण आवश्यक रूप से करें। यह सुनिश्चित किया जाए कि परीक्षाओं का संचालन और आगामी सत्रारंभ निर्विघ्न रहे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जिला अधिकारियों को जिला स्तर पर नवाचार करने के लिए प्रोत्साहित भी किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य के अधिकारियों और कर्मचारियों से कार्यालयीन समय का पालन करने की अपेक्षा है। इस संबंध में गत दिवस मंत्रालय में कार्यालयीन समय अनुसार उपस्थिति का आकस्मिक निरीक्षण कराया गया था। जिला स्तर पर जिला कलेक्टर्स द्वारा अपने स्तर पर इस प्रकार के निरीक्षण की व्यवस्था की जाए। कार्यालयीन स्टॉफ को दी गई सुविधाएं, उनका अधिकार है, इसके साथ उनसे नियमानुसार कार्य लेना भी सुनिश्चित हो। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आकस्मिक निरीक्षण की प्रक्रिया निरंतर जारी रहेगी। यदि कार्यालयीन समय के पालन में सुधार नहीं आया तो राज्य में 6 कार्य दिवसीय सप्ताह की व्यवस्था लागू कर दी जाएगी। शासकीय कार्यालयों में आम नागरिकों के लिए सुगम व्यवस्था स्थापित करना हमारा उद्देश्य है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में वर्ष 2026 किसान कल्याण वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। जिलों में होने वाले परम्परागत मेलों में कृषि-पशुपालन आदि क्षेत्र में नवाचार करने वालों या विशेष उपलब्धि अर्जित करने वालों की प्रदर्शनी लगाई जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जिला स्तर पर होम-स्टे को प्रोत्साहित करने के भी कलेक्टर्स को निर्देश दिए। बैठक में अपर मुख्य सचिव डॉ. राजेश राजौरा, श्री अशोक बर्णवाल, श्री संजय दुबे, श्री नीरज मंडलोई, श्रीमती दीपाली रस्तोगी, श्री शिवशेखर शुक्ला एवं अन्य अधिकारी उपस्थित थे। बैठक में समस्त जिला कलेक्टर्स वर्चुअली शामिल हुए।  

मुख्यमंत्री जल संचय-जन भागीदारी अभियान की समीक्षा में वर्चुअली हुए शामिल

केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री  पाटिल ने मध्यप्रदेश की जल संचय की पहल को सराहा सामुदायिक सहभागिता पर आधारित जल संरक्षण और प्रबंधन में मध्यप्रदेश कर रहा है श्रेष्ठ उदाहरण प्रस्तुत : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री जल संचय-जन भागीदारी अभियान की समीक्षा में वर्चुअली हुए शामिल केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री  सी.आर. पाटिल द्वारा की गई समीक्षा भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश नदियों का मायका है। देश की कई महत्वपूर्ण नदियों के उद्गम स्थल होने के साथ ही प्रदेश में 250 से अधिक नदियां हैं। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के आहवान पर जल संसाधनों के संरक्षण, संवर्धन के लिए देश में आरंभ हुआ जल संचय-जन भागीदारी अभियान सामुदायिक सहभागिता का उत्कृष्ट उदाहराण बन गया है। मध्यप्रदेश ने इस अभियान के प्रथम चरण में 2 लाख 79 हजार जल संग्रहण संरचनाओं का निर्माण कर महत्वपूर्ण योगदान दिया है। द्वितीय चरण में भी मध्यप्रदेश में 64 हजार 395 कार्य प्रगति पर हैं और 72 हजार 647 कार्य पूर्ण कर लिए गए हैं। इस प्रकार 1 लाख 37 हजार 42 संरचनाओं के साथ प्रदेश, देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव केन्द्रीय जल शक्ति मंत्रालय द्वारा गुरूवार को आयोजित संयुक्त वीडियो कॉन्फ्रेंस को मंत्रालय भोपाल से संबोधित कर रहे थे। जल संचय-जन भागीदारी की व्यापक समीक्षा के लिए आयोजित वीडियो कॉन्फ्रेंस में केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री  सी.आर. पाटिल, प्रदेश के पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री  प्रहलाद सिंह पटेल, सभी संभागायुक्त और जिला कलेक्टर्स शामिल हुए। केन्द्रीय मंत्री  पाटिल ने अभियान के अंतर्गत मध्यप्रदेश की उपलब्धियों की सराहना करते हुए कहा कि मध्यप्रदेश सामुदायिक सहभागिता पर आधारित जल संरक्षण और सतत् जल प्रबंधन में देश के सम्मुख श्रेष्ठ उदाहरण प्रस्तुत कर रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भूजल स्त्रोतों के दोहन के कारण गिरते हुए भूजल स्तर, प्राचीन जल संग्रहण संरचनाओं के क्षरण और नदियों के कम होते प्रवाह के प्रति हम पूर्णत: सजग है। इसलिए मध्यप्रदेश ने जल संचय-जन भागीदारी की राष्ट्रीय पहल को सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ आत्मसात करते हुए राज्य स्तर पर इसे व्यापक जनभागीदारी से जोड़ा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश से जिन नदियों का उद्गम है, उनके जल का स्त्रोत प्रदेश के वन हैं। यह नदियां अन्य राज्यों की कृषि और अन्य आर्थिक गतिविधियों में महत्वपूर्ण योगदान देती हैं। इस प्रकार प्रदेश की नदियों का राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में उल्लेखनीय योगदान है। इस दृष्टि से राज्य में विद्यमान वनों के रखरखाव के लिए राज्य सरकार को केन्द्र की ओर से अतिरिक्त आर्थिक सहयोग की अपेक्षा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में जल संरक्षण के लिए बुनियादी ढांचे के विकास के लिए खेत-तालाबों और नए सरोवरों का निर्माण किया गया है। भू-जल संवर्धन के लिए कुओं का पुनर्भरण किया गया है। शहरी क्षेत्रों और वन क्षेत्रों में भी वर्षा जल संचयन संरचनाओं का निर्माण किया गया है। औद्योगिक इकाइयों को रूफ वाटर हार्वेस्टिंग के लिए प्रेरित किया गया है। नदियां निर्मल और अविरल रहे, यह हमारी प्रतिबद्धता है और इसके लिए अभियान के अंतर्गत प्रमुख नदियों में गिरने वाले प्रदूषित नालों की पहचान कर उनके शोधन की याजना बनाई गई है। पाठशालाओं में जल के संबंध में विभिन्न गतिविधियों जैसे चित्रकला, निबंध प्रतियोगिता, जल शपथ तथा रैलियों का आयोजन किया गया है। पानी के दक्षतापूर्ण उपयोग को भी अभियान के अंतर्गत प्रोत्साहित किया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारा संकल्प है कि प्रत्येक जिला, प्रत्येक ग्राम और प्रत्येक शहर इस अभियान में सक्रिय भूमिका निभाए और जल संरक्षण को अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बनाए। केंद्र, राज्य सरकार और जनसहयोग से हम जल सुरक्षा के लक्ष्य को अवश्य प्राप्त करेंगे। मध्यप्रदेश बांधों की संख्या के मामले में देश में दूसरे स्थान पर : केन्द्रीय मंत्री  पाटिल केंद्रीय जल शक्ति मंत्री  सी.आर. पाटिल ने कहा कि मध्यप्रदेश बांधों की संख्या के मामले में देश में दूसरे स्थान पर है। मध्यप्रदेश गुजरात को पानी दे रहा है। केन-बेतवा लिंक परियोजना के माध्यम से उत्तर प्रदेश को भी पानी मिलेगा। इस परियोजना से 10 लाख 62 हजार हेक्टेयर भूमि सिंचित होगी और लाखों लोगों को पेयजल की सुविधा मिलेगी। राजस्थान के साथ भी पार्वती-कालीसिंध-चंबल परियोजना को लेकर मध्यप्रदेश सरकार ने सकारात्मक सोच दिखाई है। मध्यप्रदेश, देश के सर्वाधिक लोगों को पेयजल उपलब्ध कराने वाला राज्य है। केन्द्रीय मंत्री  पाटिल ने कहा कि मध्यप्रदेश ने जल संचय-जनभागीदारी अभियान में उत्कृष्ट कार्य किया है। हमारी कोशिश है कि गांव का पानी गांव और खेत का पानी खेत में सिंचाई के लिए उपयोग हो। प्रधानमंत्री  मोदी ने देशवासियों से पेयजल की बर्बादी रोकने का भी आह्वान किया है। केंद्रीय मंत्री  पाटिल ने कहा कि मध्यप्रदेश एक बड़े वन क्षेत्र वाला राज्य है। वर्षा जल को संचित करने के प्रयासों से राज्य में सिंचाई और पेयजल के लिए पानी की उपलब्धता में और वृद्धि की जा सकती है। बैठक के दौरान खंडवा (पूर्व निमाड़), राजगढ़ और इंदौर जिलों के जिला कलेक्टरों ने विस्तृत प्रस्तुतियाँ दीं, जिनमें जल संचय जनभागीदारी 2.0 के क्रियान्वयन की जिला स्तरीय प्रगति तथा आगामी कार्ययोजना प्रस्तुत की गई। प्रस्तुतियों में भूजल पुनर्भरण, नदी पुनर्जीवन तथा जल संरक्षण गतिविधियों में सामुदायिक सहभागिता को विशेष रूप से रेखांकित किया गया। उल्लेखनीय है कि अभियान के अंतर्गत मध्यप्रदेश ने राष्ट्रीय स्तर पर चौथा स्थान प्राप्त किया था। विशेष रूप से खंडवा (पूर्व निमाड़) जिला देशभर के जिलों में प्रथम स्थान पर रहा, जो जल संरक्षण के क्षेत्र में प्रभावी नेतृत्व और जनभागीदारी का उत्कृष्ट उदाहरण है। मंत्रालय भोपाल में बैठक में अपर मुख्य सचिव डॉ. राजेश राजौरा, मती दीपाली रस्तोगी,  संजय दुबे, प्रमुख सचिव  पी. नरहरि सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।  

हनुमान तालाब अखड़ार में 19 वर्षीय युवक का शव मिला,2 मार्च से लापता था युवक

हनुमान तालाब अखड़ार में 19 वर्षीय युवक का शव मिला,2 मार्च से लापता था युवक उमरिया  उमरिया जिले के बिलासपुर तहसील अंतर्गत 2 मार्च की शाम को लापता ग्राम झांपी निवासी एक 19 वर्षीय युवक का शव गांव से 10 किलोमीटर दूर ग्राम अखड़ार के हनुमान तालाब में 5 मार्च की शाम 4 से 5 बजे के आसपास मिला है। दरअसल ग्राम झापी निवासी 19 वर्षीय युवक के परिजनों ने बताया कि 2 मार्च की शाम 7:00 के आसपास जमुना कोल पिता पंजू कोल को दो लड़के ग्राम बड़खेरा से लेने आए थे। बाद में पता चला की जमुना कॉल को लेकर वह ग्राम अखड़ार के तालाब के पास गए जहां जमुना के साथ मारपीट भी हुई है। उसके बाद जमुना का कोई पता नहीं चला। उक्त मामले में एसडीओपी उमरिया ने बताया कि परिजनों की सूचना पर पुलिस चौकी बिलासपुर में  2 मार्च को ही गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कर ली थी। पुलिस युवक की तलाश कर रही थी और आज युवक का 100 ग्राम अखड़ार के हनुमान तालाब में मिला है।परिस्थिति जन्म साक्ष्यों को देखते हुए प्रथम दृष्टया यह मामला हत्या का प्रतीत हो रहा है। पोस्टमार्टम के लिए शव को मेडिकल कॉलेज शहडोल भेजा गया है। मर्ग कायमी कर मामले की जांच की जा रही है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार मामला तीन लोगों के बीच रिश्तों के विवाद से जुड़ा बताया जा रहा है जानकारी यह भी मिल रही है। कि मामले से जुड़े एक आरोपी तक पुलिस पहुंच चुकी है। खबर में बड़ी अपडेट यह है कि उमरिया पुलिस के द्वारा जल्द ही इस मामले का खुलासा किया जाएगा।  

रंगपंचमी पर इंदौर गेर का इंतजार, छतों से मिलेगा रंगों का अद्भुत दृश्य, टिकट से होगी एंट्री

इंदौर इंदौर की रंगपंचमी पर निकलने वाली गेर शहर का एक अनोखा और खास त्योहार है। इस दिन पुराने शहर के इलाकों में रंगों के शौकीन बड़ी संख्या में गेर में शामिल होते हैं और रास्ते में खड़े लोगों पर रंग बरसाते हुए आगे बढ़ते हैं। गेर के दौरान आसमान में दूर-दूर तक रंगों के बादल छा जाते हैं। इन खूबसूरत नजारों का आनंद लेने के लिए इस बार भी शहर के लोग गेर वाले मार्गों पर स्थित मकानों की छतें बुक कर सकेंगे और अपने परिवार के साथ इस आयोजन का मजा ले पाएंगे। प्रशासन ने पिछले साल भी यह व्यवस्था की थी, जो काफी सफल रही थी। शीतला माता बाजार से लेकर गौराकुंड और खजूरी मार्केट तक की छतों से लोग गेर की रौनक देख सकेंगे। हर साल इस आयोजन को देखने के लिए दूसरे शहरों से भी बड़ी संख्या में लोग इंदौर पहुंचते हैं। जिनके घर गेर के मार्ग पर पड़ते हैं, वहां अब छोटी-छोटी पार्टियों का भी आयोजन होने लगा है, जहां लोग अपने दोस्तों और रिश्तेदारों को बुलाकर रंगपंचमी का उत्सव मनाते हैं। इस साल गेर के मार्ग पर स्थित आठ छतों पर 200 से अधिक लोगों के बैठने की व्यवस्था की जाएगी। इनकी बुकिंग बुक माय शो के माध्यम से की जाएगी, जिसके लिए लोगों को टिकट खरीदना होगा। इस बार 8 मार्च को रविवार होने के कारण प्रशासन ने अलग से छुट्टी घोषित नहीं की है। रविवार होने की वजह से इस बार गेर में और अधिक भीड़ जुटने की संभावना जताई जा रही है। करीब चार किलोमीटर लंबे गेर मार्ग पर प्रशासन ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। बिजली के तार और केबल हटाए जा रहे हैं, साथ ही सड़कों की मरम्मत का काम भी किया जा रहा है। परंपरा के अनुसार इस बार भी चार गेर इस जुलूस का हिस्सा होंगी। लगभग 100 फीट तक रंग फेंकने वाली विशेष रंग मिसाइलें भी तैयार की जा रही हैं। इसके अलावा डीजे और भजन मंडलियां भी गेर में शामिल होंगी। नगर निगम की गेर भी इस जुलूस का हिस्सा रहेगी, हालांकि शहर में हाल ही में हुई कुछ घटनाओं के कारण मेयर पुष्यमित्र भार्गव इस बार गेर में शामिल नहीं होंगे।

रोड प्रोजेक्ट्स की मंजूरी में देरी, वन विभाग की फंसी हुई 48 सड़क परियोजनाएं 117 से 1838 दिन तक

भोपाल  सड़क निर्माण कार्यों में वन विभाग से आवश्यक स्वीकृति समय पर नहीं मिलने के कारण प्रदेश में 48 परियोजनाओं में बड़ी देरी हुई है। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की रिपोर्ट में इसे प्लानिंग समन्वय की कमी का परिणाम बताया गया है। कैग रिपोर्ट के मुताबिक, मई 2023 से जून 2024 के बीच 16 संभागों में समीक्षा के दौरान पाया गया कि वन विभाग से अनुमति, भूमि विवाद, अतिक्रमण और यूटिलिटी शिफ्टिंग में देरी के कारण 48 कार्यों को पूरा होने में 117 से लेकर 1,838 दिनों तक का अतिरिक्त समय लगा। यानी कई दिनों तक काम लटका रहा। इसमें अधिकारियों की लापरवाही सामने आई है, जिन्होंने बिना अनुमति के ही काम शुरू कर दिया। इससे समय ज्यादा लगने के साथ ही लागत भी बढ़ी।   वन विभाग की पूर्व मंजूरी जरूरी मध्यप्रदेश निर्माण विभाग नियमावली और वन (संरक्षण) अधिनियम, 1980 के तहत वन भूमि के डायवर्जन के लिए भारत सरकार से पूर्व स्वीकृति अनिवार्य है। इसके बावजूद कई कार्य आवश्यक मंजूरी सुनिश्चित किए बिना शुरू कर दिए गए। ऑडिट रिपोर्ट में साफ किया कि इस प्रकार की कार्यप्रणाली से न केवल समय और लागत में वृद्धि हुई, बल्कि परियोजनाओं की प्रभावशीलता भी प्रभावित हुई। रिपोर्ट के अनुसार भोपाल नगर निगम सम्मेलन (जून 2025) में शासन ने राजस्व और वन विभाग के बीच अधिकार क्षेत्र के स्पष्ट नहीं होने की बात स्वीकार की और जांच के बाद सुधारात्मक कदम उठाने का आश्वासन दिया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि बिना पूर्व स्वीकृति कार्य शुरू करना प्लानिंग की कमी को दर्शाता है। भविष्य में ऐसी स्थिति से बचने के लिए सख्त अनुपालन जरूरी है। 

ग्वालियर का मेगा प्रोजेक्ट: स्वर्ण रेखा नदी पर 13.85 KM लंबी एलिवेटेड रोड, 293 पिलर और 14 लूप के साथ खास उपलब्धि

ग्वालियर  ग्वालियर में दिल्ली के रिंग रोड की तर्ज पर प्रदेश की पहली एलिवेटेड रोड बन रही है। यह 2027 तक बनकर तैयार हो जाएगी। साथ ही यह मध्यप्रदेश की पहली ऐसी एलिवेटेड रोड होगी, जो किसी नदी के ऊपर बनाई जा रही है। मुरैना रोड पर जलालपुर तिराहा के पास से यह एलिवेटेड रोड शुरू हुई है, जो गिरवाई में शिवपुरी लिंक रोड के पास तक जाएगी। 293 पिलर पर बनाई जा रही इस एलिवेटेड रोड की लंबाई स्वर्ण रेखा नदी के बराबर मतलब 13.85 किलोमीटर है। एलिवेटेड रोड पर 14 लूप बनाए जा रहे हैं। इससे शहर का ट्रैफिक एलिवेटेड रोड पर चढ़ और उतर सकेगा। यह केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया का ड्रीम प्रोजेक्ट है। फिलहाल इसका 60 फीसदी काम हो चुका है। उम्मीद है कि अगले साल तक यह सौगात ग्वालियर के लोगों को मिल जाएगी। कम से कम एक घंटे का समय बचेगा ग्वालियर में इस एलिवेटेड रोड का काम पूरा होने के बाद जब यह रोड पर ट्रैफिक शुरू हो जाएगा तो ग्वालियर की रफ्तार को नई उड़ान मिलेगी। मुरैना से शिवपुरी जाने वाले जलालपुर तिराहा से इस एलिवेटेड रोड पर आएंगे और गिरवाई से निकलकर सीधे शिवपुरी या झांसी के लिए निकल जाएंगे। उन्हें शहर के बीच से नहीं निकलना पड़ेगा। इससे शहर में एंट्री कर जाम में फंसने और लगने वाले समय की बचत होगी। इससे कम से कम एक घंटे का समय बचेगा। यह रोड अपने आप में खास इसलिए भी है कि यह मध्यप्रदेश की एक मात्र एलिवेटेड रोड है जो नदी के ऊपर है। इस तरह की रोड उत्तराखंड, हिमाचल में देखने को मिलती हैं। यह शहर के बीच में स्वर्ण रेखा नदी (स्वर्ण रेखा नाला) के ठीक ऊपर बन रही है। यह रोड बनने के बाद इसकी सुंदरता भी देखते ही बनेगी। एलिवेटेड रोड मुख्य मार्ग से कनेक्ट रहेगी स्वर्ण रेखा नदी पर तैयार होने वाले एलिवेटेड रोड को शहर के प्रमुख मार्गों से जोड़ा जा रहा है, जिससे वहां से एलिवेटेड रोड पर जाने और शहर की मौजूदा सड़क पर उतरने का रास्ता मिल सके। ये कनेक्टिविटी जीवाजीगंज, छप्परवाला पुर, फूलबाग पर लक्ष्मीबाई समाधि और हजीरा क्षेत्र से दी जाएगी। इन स्थानों पर ट्रैफिक लोड काफी रहता है। यहां से लोग दूसरे रास्तों के लिए डायवर्ट भी होते हैं। एलिवेटेड रोड हनुमान बांध से शुरू होकर तारागंज, जनकगंज, गेंड़ेवाली सड़क, शिंदे की छावनी, फूलबाग, तानसेन नगर, रानीपुरा, हजीरा, मछली मंडी रोड से होते हुए जलालपुर तिराहा तक पहुंचाएगी। ग्वालियर, लश्कर और फूलबाग का घटेगा ट्रैफिक एलिवेटेड रोड से शहर के यातायात के हिसाब से एक बड़ी क्रांति होगी। पूरे शहर में सड़कों की स्थिति खराब है। जबकि पिछले 6 साल में सवा लाख चार पहिया वाहन सड़कों पर नए बढ़ गए हैं। जिस कारण जगह-जगह पर जाम के हालात लग रहे हैं। एलिवेटेड रोड बनने से लोगों को आए दिन लगने वाले ट्रैफिक जाम से राहत मिलेगी। शहर के ग्वालियर, लश्कर और फूलबाग पर 50 फीसदी ट्रैफिक लोड कम हो जाएगा। 293 पिलर, 108 गाटर, 14 लूप ग्वालियर में दिल्ली की रिंग रोड की तर्ज पर बनाई जा रही एलिवेटेड रोड प्रोजेक्ट में समय और चुनौती के आधार पर बदलाव होते जा रहे हैं। 293 पिलर, 14 लूप और 108 गाटर से बन रही 13.85 किलोमीटर लंबी एलिवेटेड रोड सिर्फ एक सड़क नहीं, बल्कि शहर के पांच अलग-अलग सर्कल को जोड़ने वाला नया हाईवे है। जब यह प्रोजेक्ट शुरू हुआ था तो इसमें लगभग 13.85 किलोमीटर के रास्ते पर 19 लूप बनाए जा रहे थे। जिससे शहर का ट्रैफिक इन लूप के जरिए एलिवेटेड रोड पर चढ़-उतर सकेगा। बाद में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने इस पर आपत्ति ली थी। उनका कहना था कि जब इतने लूप बना दिए जाएंगे तो एलिवेटेड रोड का महत्व ही खत्म हो जाएगा। इसके बाद लूप घटाकर अब 14 कर किए हैं। इसी तरह से पिलर और लूप की संख्या बदलती रही है। 1 हजार करोड़ का प्रोजेक्ट, 9-9 मीटर चौड़ी 2 सड़क लगभग एक हजार करोड़ रुपए की लागत से बनाई जा रही एलिवेटेड रोड का काम दो फेस में किया जा रहा है। दूसरे फेस की सड़क- गिरवाई पुलिस चौकी के पास से तारागंज, जीवाजीगंज, नदीगेट होते हुए लक्ष्मीबाई समाधि स्थल तक दूसरे चरण में 7.420 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड रोड बनाया जा रहा है। रिवाइज प्लान में रोड की चौड़ाई 19.5 मीटर हो गई है। उसमें 9-9 मीटर की दो सड़कें (कैरिज-बे) होंगी। बाकी डेढ़ मीटर में डिवाइडर बनेंगे। इसमें 9 पॉइंट पर 13 लूप बनाए जाएंगे। जिसमें गिरवाई, फूलबाग, रामदास घाटी, शिंदे की छावनी पर 2-2 लूप और हनुमान बांध, तारागंज, जनकगंज, जीवाजीगंज व महलगेट पर एक-एक लूप तैयार हो रहे हैं। जबकि पहले चरण या फेस की एलिवेटेड रोड जलालपुर तिराहा से लक्ष्मीबाई समाधि स्थल तक 6.5 किलोमीटर की बनाई जा रही है। मंगलम बिल्डकॉन इंडिया कर रही है काम एलिवेटेड रोड का कार्य श्री मंगलम बिल्डकॉन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड गुजरात कर रही है। प्रोजेक्ट में 90 प्रतिशत पैसा केंद्र और 10 प्रतिशत पैसा राज्य सरकार दे रही है। कंपनी की ढिलाई के कारण यह प्रोजेक्ट लगातार लेट हो रहा है। निर्माण एजेंसी लोक निर्माण सेतु संभाग से हुए अनुबंध के अनुसार कंपनी को पहले चरण (6.5 किमी) जलालपुर चौराहे के पास से लक्ष्मीबाई समाधि स्थल के पास तक का काम फरवरी 2025 में पूरा करना था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। कंपनी ने शासन स्तर से दिसंबर तक का समय बढ़वा लिया। अभी तक कंपनी 60 प्रतिशत काम कर पाई है। अब कंपनी प्रबंधन ने एक बार फिर जून 2026 का समय मांगा है। जिसके पीछे मानसून को कारण बताया है। ऐसे बढ़ता जा रहा बार-बार समय 23 जून 2022 के अनुबंध अनुसार 30 माह यानी 17 फरवरी 2025 तक काम पूरा होना था। लेकिन, तब तक कंपनी 50 प्रतिशत भी काम नहीं कर सकी थी। इसके बाद दिसंबर 2025 तक का वक्त लिया। कंस्ट्रक्शन कंपनी ने 38 महीने से अधिक समय बीतने के बाद अब फिर आवेदन देकर निर्माण कार्य पूरा करने के लिए जून 2026 तक का समय लिया है। साल 2027 तक दोनों फेस का काम पूरा होने के बाद एक एलिवेटेड रोड ग्वालियर को मिलेगी।

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