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एमपी बजट 2026: वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा करेंगे पेश, CM बोले—राज्य में होगा अनोखा बदलाव

भोपाल   मध्य प्रदेश विधानसभा में आज बुधवार, 18 फरवरी को बजट 2026 (Madhya Pradesh Budget 2026) पेश किया जाएगा. राज्य के वित्त मंत्री वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा आज सुबह 11 बजे विधानसभा के पटल पर बजट पेश करेंगे. अगले साल 2027 के पंचायत और निकाय चुनावों को देखते हुए इस बार का बजट कई मायनों में अहम माना जा रहा है. सरकार आज बजट में महिलाओं, युवाओं और किसानों के लिए कुछ बड़े ऐलान कर सकती हैं. इसके अलावा कुछ नई विकास योजनाओं की भी घोषणा की जा सकती हैं.  विधानसभा में बजट पेश होने से पहले मुख्यमंत्री मोहन यादव के नेतृत्व में कैबिनेट की बैठक होगी, जिसमें इस बजट का मंजूरी दी जाएगी. इस बार का बजट एमपी सरकार का सबसे बड़ा बजट हो सकता है. ये बजट मोहन सरकार के कार्यकाल का तीसरा बजट होगा.  किसानों से महिलाओं तक… मोहन सरकार कर सकती है बड़ी घोषणाएं माना जा रहा है कि सरकार इसमें महिलाओं को लेकर बड़ा ऐलान कर सकती हैं. इसके अलावा किसानों को लेकर भी अहम वादे कर सकती हैं. बजट में किसानों के लिए अलग से कुछ प्रावधान किए जा सकते हैं.  इस बजट में ‘सीएम केयर’ योजना से सुपर स्पेशियलिटी सुविधाओं का विस्तार, स्टेट कार्डियक सेंटर, अंग प्रत्यारोपण संस्थान, मेडिकल कॉलेजों में कैंसर और हार्ट सुपर, 1.40 करोड़ बच्चों को मिलेगा टेट्रा पैक दूध, युवाओं के लिए 50 हजार नई भर्तियों की तैयारी में हैं. कर्ज को लेकर क्या बोले वित्त मंत्री देवड़ा वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने आगे कहा कि महंगाई को लेकर केंद्र और राज्य सरकार दोनों गंभीर हैं. बजट से सभी लोगों को राहत मिलेगी. देवड़ा ने बताया कि एमपी में कर्ज नहीं निवेश है. पूंजीगत कार्यों के लिए कर्ज लिया जाता है. ऐसा कोई प्रदेश नहीं है, जिसने कर्ज लेकर काम नहीं किया हो. हम समय पर ब्याज देते हैं और कर्ज चुकाते हैं. कर्ज लिमिट में है. कांग्रेस सरकार ने कर्ज लेकर वेतन भत्ते में खर्च किया, जबकि बीजेपी की सरकार ने पूंजीगत व्यय में खर्च किया. वित्त मंत्री देवड़ा ने आगे कहा कि पहले जीरो बजटिंग के हिसाब से बजट था. अब रोलिंग बजट के हिसाब से हमने प्रयोग किया है. बजट के जरिए 3 साल आगे तक का रोडमैप तैयार किया है, जिसका वित्तीय प्रबंधन में लाभ मिलेगा. कैबिनेट में आज नई आबकारी नीति (MP New Excise Policy) आ सकती है. आगामी बजट पूरी तरह जनता को समर्पित: देवड़ा वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने कहा कि मध्यप्रदेश का आगामी बजट पूरी तरह जनता को समर्पित होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह बजट “जनता का और जनता के लिए” होगा। उन्होंने बताया कि सरकार ने बजट में चार प्रमुख वर्गों महिला, युवा, किसान और गरीब पर विशेष फोकस किया है। इन वर्गों के सशक्तिकरण और विकास के लिए ठोस प्रावधान किए जाएंगे। वित्त मंत्री ने कहा कि पिछले वर्ष को सरकार ने ‘उद्योग वर्ष’ के रूप में मनाया था, जिसका सकारात्मक परिणाम सामने आया और निवेश को बढ़ावा मिला। वहीं इस वर्ष को ‘किसान कल्याण वर्ष’ के रूप में समर्पित किया गया है। उन्होंने कहा कि सरकार की पूरी कोशिश है कि किसान आत्मनिर्भर बनें और उनकी आय में वृद्धि हो। बजट में इस दिशा में विशेष ध्यान रखा गया है। साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि बजट निर्माण प्रक्रिया में आम जनता से मिले सुझावों को भी शामिल किया गया है, ताकि यह बजट अधिक सहभागी और जनहितकारी बन सके। सीएम बोले- अनूठा नवाचार करने जा रहे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा- मध्य प्रदेश देश का ऐसा पहला राज्य होगा, जो अनूठा नवाचार करने जा रहा है। हमारे इस बजट में अगले 3 साल का खाका होगा, जिसमें इस वर्ष के विस्तृत बजट के साथ अगले 2 साल की विकास योजनाओं की आउटलाइन भी शामिल रहेगी। नेता प्रतिपक्ष बोले- बजट जमीनी हकीकत से दूर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा- बजट में प्रदेश को नई सौगात नहीं मिलने वाली। बेहतर बजट वो होता है, जो आम जनता को लाभ पहुंचाए। यह जमीनी हकीकत से दूर का बजट है। बीजेपी की सपने दिखाने की आदत है। बजट एससी-एसटी, किसान, ओबीसी किसी के पक्ष में नहीं है। जो पुरानी योजनाएं चल रही हैं, उन्हीं को नए आंकड़ों के साथ लाएंगे। किसान की आय दोगुनी नहीं कर सकते। किसान को काम नहीं देना चाहते और किसानों का वर्ष मना रहे हैं।  

पुलिस विभाग में हलचल, लंबे समय से तैनात अफसरों के तबादले की संभावना बढ़ी

इंदौर मध्य प्रदेश में विधानसभा का बजट सैशन चल रहा है और सदन में बीजेपी-कांग्रेस के बीच जबरदस्त घमासान देखा जा रहा है । वहीं दूसरी ओर अब एक हलचल पुलिस महकमे में मचने वाली है। जानकारी के मुताबिक जल्द ही प्रशासनिक फेरबदल किए जाने के संकेत है। दरअसल लंबे समय से एक ही जगह सेवाएं दे रहे  पुलिस अफसरों के तबादले को लेकर आहट तेज हो गई है। बहुत जल्द ये तबादला सूची जारी होने की संभावना जताई जा रही है। इस सूची में इंदौर पुलिस कमिश्नरेट के साथ ही पास के  जिलों के कई अधिकारियों को बदलाव सहन करना पडेगा । क्यों होने जा रहा  है प्रशासनिक फेरबदल? इस प्रशासनिक फेरबदल के पीछे कई वजहें सामने आ रही हैं । जानकारी के मुताबिक, कानून-व्यवस्था, अपराध में सुधार लाने के साथ ही  पुलिस को जवाबदेह बनाने के मकसद से  पुलिस महकमे में बदलाव का मसौदा तैयार कर लिया गया है। बदलाव बडे स्तर पर होगा जिसमें एसपी से लेकर डीआइजी स्तर तक के अधिकारी होगें। इसके साथ ही निरीक्षक स्तर के अधिकारियों को यहां से वहां किए जाने की खबर है। कब तक है ये फेरबदल संभव? जानकारी है कि अभी बजट सत्र चल रहा है लेकिन फरवरी के लास्ट हफ्ते तक  प्रशासनिक सर्जरी की पूरी संभावना है। इस प्रशासनिक सर्जरी के तहत आइपीएस और डीआइजी स्तर के करीब 2 दर्जन अधिकारी प्रभावित होंगे। वहीं दूसरे ओर  लंबे समय से एक ही जिले और थाने में चिपके बैठे अधिकारियों पर भी नजर है।  गृह विभाग ने इस संबंध में समीक्षा कर ली है। गृह विभाग द्वारा वरिष्ठ अधिकारियों के सुझाव और दिशा-निर्देशों पर चर्चा के बाद सूची फाइनल हो जाएगी। वहीं इंदौर डीआरपी लाइन में निरीक्षक स्तर के करीब 1 दर्जन पुलिस अधिकारी थाना मिलने के इंतजार में हैं। वहीं जानकारी के मुताबिक पुलिस विभाग की छवि धूमिल करने, असंतोषजनक कार्यशैली, विभागीय जांच जैसे कई  बिंदुओं का आकलन किया गया है।  

नौकरी की आस पर लगा ब्रेक, 900 अतिथि शिक्षकों को आरक्षण का लाभ नहीं

भोपाल  मध्यप्रदेश के सरकारी आइटीआई संस्थानों में लंबे समय से कार्यरत लगभग 900 अतिथि शिक्षक भर्ती प्रक्रिया को लेकर परेशान हैं। विभाग ने 1120 प्रशिक्षण अधिकारी (टीओ) पदों पर भर्ती निकली है, इस सीधी नियमित भर्ती में उन्हें न आरक्षण मिला, न अनुभव का लाभ और न ही आयु सीमा में छूट दी गई है। इन शिक्षकों में कई ऐसे हैं जो 10 से 15 वर्षों से न्यूनतम मानदेय पर सेवाएं दे रहे हैं। उनका कहना है कि जब विभाग में नियमित स्टाफ की कमी थी, तब उन्होंने संस्थानों को संभाला। अब जब स्थायी नियुक्ति का अवसर आया, तो उन्हें सामान्य अभ्यर्थियों की तरह प्रतिस्पर्धा में खड़ा कर दिया गया है। अलग नीति अपना रही सरकार कई शिक्षक आयु सीमा पार करने की स्थिति में हैं, जिससे उनकी नौकरी की उम्मीद लगभग खत्म हो गई है। अतिथि शिक्षकों का आरोप है कि सरकार अन्य विभागों में अलग नीति अपना रही है। स्कूल शिक्षा विभाग में अतिथि शिक्षकों को 50 प्रतिशत आरक्षण दिया जा रहा है, जबकि उच्च शिक्षा में 25 प्रतिशत आरक्षण और अनुभव के अंक का प्रावधान है। लेकिन आईटीआई अतिथि शिक्षकों को ऐसा कोई लाभ नहीं मिला। तत्कालीन मंत्री यशोधरा राजे ङ्क्षसधिया के समय प्रस्तावित ‘संविदा नीति’ आज तक लागू नहीं हो सकी। वर्तमान मंत्री गौतम टेटवाल से भी संगठन कई बार मिल चुका है। उच्च शिक्षा विभाग में भी यही हाल इधर उच्च शिक्षा विभाग के कॉलेज में कार्यरत अतिथि विद्वानों की स्थिति भी कुछ ऐसी ही है। जिन कॉलेजों में सहायक प्राध्यापकों की नियुक्ति हो रही है उनसे अतिथि विद्वानों को बाहर कर दिया गया है। जबकि उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने किसी भी अतिथि विद्वान को बाहर न करने की घोषणा की थी हरियाणा मॉडल पर नियम तैयार कर इनको नियमित करने की बात भी कही गई थी। स्थिति यह है कि अब तक 100 से अधिक अतिथि विद्वान सेवा से बाहर हो चुके हैं लेकिन अन्य कॉलेजों में नियुक्ति नहीं दी गई।

बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में नई पहल, 4100 कुओं पर मुंडेर बनाए जाएंगे, जानवरों की सुरक्षा को दिया जोर

उमरिया उमरिया स्थित विश्व प्रसिद्ध बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए एक बड़ा कदम उठाया गया है। जिला प्रशासन और टाइगर रिजर्व प्रबंधन ने रिजर्व क्षेत्र के नौ परिक्षेत्रों में लगभग 4,100 खुले कुओं पर मुंडेर (सुरक्षा दीवार) बनाने का काम की शुरुआत हो गई है।  वन क्षेत्र और उससे सटे ग्रामीण इलाकों में स्थित इन खुले कुओं में अक्सर जंगली जानवर और कभी-कभी ग्रामीण भी गिर जाते हैं। धमोखर परिक्षेत्र सहित कई इलाकों से ऐसी घटनाएं सामने आती रही हैं। हाल ही में जनवरी माह में धमोखर के रायपुर क्षेत्र में एक बाघ के कुएं में गिरने से मौत हो गई थी, जिसके बाद इस अभियान को और तेज किया गया। टाइगर रिजर्व के कोर और बफर दोनों क्षेत्रों में चिन्हित कुओं पर मुंडेर निर्माण का काम शुरू हो चुका है। अधिकारियों और कर्मचारियों की टीमें गांव-गांव जाकर बिना मुंडेर वाले कुओं का सर्वे कर रही हैं और प्राथमिकता के आधार पर निर्माण कार्य करा रही हैं। वन्यजीव फोटोग्राफर चेतन घारपुरे ने इस पहल को सराहनीय बताया। उन्होंने कहा कि बिना मुंडेर वाले कुओं में वन्य प्राणियों के साथ-साथ ग्रामीणों के गिरने का भी खतरा बना रहता है। कुओं पर मजबूत मुंडेर बनने से वन्यजीव और मानव दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी। जिला प्रशासन और टाइगर रिजर्व प्रबंधन का लक्ष्य है कि चिन्हित सभी कुओं पर चरणबद्ध तरीके से मुंडेर निर्माण पूरा कर पूरे क्षेत्र को वन्यजीवों और स्थानीय निवासियों के लिए सुरक्षित बनाया जाए।

पीएचडी एडमिशन और प्रोसेस में पारदर्शिता, सभी यूनिवर्सिटी को अनिवार्य रूप से कैलेंडर जारी करने का निर्देश

भोपाल   अब हर विश्वविद्यालय को यूजी-पीजी की तरह पीएचडी कैलेंडर भी अपनी वेबसाइट पर सार्वजनिक करना होगा। इसका उद्देश्य है प्रवेश प्रक्रिया में पारदर्शिता लाना और छात्रों को समय पर सही जानकारी उपलब्ध कराना। अब तक स्थिति यह थी कि कई विश्वविद्यालय पीएचडी की तारीखें, सीटों की संख्या और पात्रता शर्तें सार्वजनिक नहीं करते थे। कई बार सीटें होते हुए भी यह बताया जाता था कि उम्मीदवार नहीं मिले। उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने यूजीपीजी की पीएचडी की जानकारी भी वेबसाइट पर अपलोड करने के निर्देश दिए हैं। सूत्रों के अनुसार, कुछ विश्वविद्यालयों में पसंदीदा अभ्यर्थियों के लिए रास्ता आसान करने के आरोप भी लगते रहे हैं। जब प्रवेश प्रक्रिया की स्पष्ट समय-सीमा नहीं होती, तो इंटरव्यू, वेटेज और पात्रता के नियम भी मनमाने ढंग से लागू किए जाते थे। यही कारण है कि कई सरकारी विश्वविद्यालयों में पीएचडी सीटें खाली रह जाती हैं। कई विषयों में आधी से ज्यादा सीटें खाली बीयू में करीब 40 विषयों में पीएचडी की कुल 2,379 सीटें हैं। जुलाई में शुरू हुई प्रवेश प्रक्रिया के दौरान केवल नेट स्कोर को पात्र मानने की वजह से कई विषय में आधी से अधिक सीटें खाली रह गईं हैं। इसके लिए बीयू ने नवंबर में एक बार फिर अभ्यर्थियों को मौका दिया, लेकिन एंट्रेंस टेस्ट नहीं लिया। इस बार भी नेट क्वालिफाई को ही मौका दिया गया। स्थिति यह है कि किस विषय में कितनी सीटें खाली हैं स्थिति क्या है। यह जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। पीएचडी में नहीं चलेगा AI से कॉपी-पेस्ट! पीएचडी करने वाले स्टूडेंट्स को जानकारी के लिए बता दें कि बीते दिनों पहले यूनियन ग्रांट कमीशन (UGC) ने कई रिसर्च थीसिस को वापस किया है जिनमें AI से लिखा गया कंटेंट पाया गया। बिहार की एक यूनिवर्सिटी से दर्जनों छात्रों की पीएचडी थीसिस यूजीसी को भेजी थी, जिनमें ये गड़बड़ियां पाईं गई। यूनिवर्सिटी से भेजी गई रिसर्च थीसिस में यूजीसी के चेक करने पर 40 प्रतिशत से ज्यादा कंटेंट चोरी का पाया गया। यूजीसी ने इसको वापस कर दिया है। बताया गया है कि सबसे ज्यादा इंग्लिश भाषा में सबमिट हुई थीसिस में एआई कंटेंट पाया गया है। हिंदी में जमा की गईं थीसिस में ज्यादा गड़बड़ी नहीं पाई गईं हैं।

गोरखपुर में धूमधाम से संपन्न हुई भव्य “शिव बारात”, हजारों श्रद्धालुओं ने लिया आशीर्वाद

The grand “Shiv Baraat” concluded with great pomp in Gorakhpur, thousands of devotees took blessings. विशेष संवाददाता : जितेन्द्र श्रीवास्तव / कैमरामैन अर्पिता श्रीवास्तव जबलपुर। गोरखपुर स्थित श्री शिव शक्ति महाकाल खाटू श्याम मंदिर में चार दिवसीय भव्य “शिव बारात” कार्यक्रम श्रद्धा और उत्साह के साथ संपन्न हो गया। 13 से 16 फरवरी 2026 तक चले इस धार्मिक आयोजन में हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लेकर भगवान शिव और माता पार्वती का आशीर्वाद प्राप्त किया। कार्यक्रम की शुरुआत संगीत एवं ढोल-डीजे के साथ हुई, जिसने पूरे क्षेत्र को भक्तिमय बना दिया। 14 फरवरी को आयोजित हल्दी समारोह में श्रद्धालुओं ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ भाग लिया। 15 फरवरी को शाम 6 बजे निकली शिव बारात मुख्य आकर्षण रही। भगवान शिव की आकर्षक झांकी, भव्य साज-सज्जा और भक्तों के जयकारों से पूरा गोरखपुर क्षेत्र गूंज उठा। 16 फरवरी को दोपहर 12 बजे चुनरी चढ़ाने की रस्म संपन्न हुई, जिसमें बड़ी संख्या में महिलाओं ने श्रद्धा पूर्वक भाग लिया। इसके बाद दोपहर 3 बजे से विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें हजारों भक्तों ने प्रसाद ग्रहण किया। आयोजन समिति ने बताया कि कार्यक्रम शांतिपूर्ण और सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। स्थानीय नागरिकों और स्वयंसेवकों का विशेष सहयोग रहा। पूरे आयोजन के दौरान क्षेत्र में भक्ति और उल्लास का माहौल बना रहा। आयोजकों ने सभी श्रद्धालुओं, सहयोगियों और प्रशासन का आभार व्यक्त करते हुए भविष्य में भी ऐसे ही धार्मिक आयोजनों के सफल आयोजन का संकल्प दोहराया।

जलवायु मुद्दों पर मुंबई में मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अहम भूमिका

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश शासन द्वारा 17 से 19 फरवरी 2026 तक आयोजित मुंबई क्लाइमेट वीक 2026 में राज्य की सतत, स्केलेबल एवं निवेश-अनुकूल नवकरणीय ऊर्जा तथा ऊर्जा भंडारण संबंधी नवाचारों का प्रेजेंटेशन किया जायेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव 18 फरवरी 2026 को सायं 6:30 बजे से 8:10 बजे तक मुंबई के बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स (बीकेसी) स्थित होटल सोफिटेल में विशेष आयोजन में प्रदेश की नवकरणीय ऊर्जा एवं ऊर्जा भंडारण रोडमैप पर केंद्रित प्रेजेंटेशंस का नेतृत्व करेंगे। ‘मुंबई क्लाइमेट वीक 2026’ का आयोजन भारत में जलवायु संबंधी कार्यवाहियों को गति देने के लिये एक केंद्रीकृत राष्ट्रीय मंच के रूप किया जा रहा है। इस मंच पर राज्यों की जलवायु संबंधी नवाचारों के प्रस्तुतिकरण के साथ स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन और जलवायु संबंधी बेसिक इको सिस्टम पर हितधारकों के साथ प्रत्यक्ष संवाद किया जायेगा। देश-विदेश के नीति-निर्माता, अंतर्राष्ट्रीय विशेषज्ञ, निवेशक एवं क्लाइमेट क्षेत्र से जुड़े प्रैक्टिशनर भाग लेंगे। यह आयोजन राज्य को हरित ऊर्जा निवेश के लिए एक आकर्षक गंतव्य के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण सिद्ध होगा। मुंबई क्लाइमेट वीक 2026 में म.प्र. सरकार के प्रेजेंटेशन से यह प्रदर्शित किया जायेगा कि प्रदेश ग्रीन एनर्जी की सुलभता, विश्वसनीयता और निवेश प्रतिस्पर्धा के साथ सतत विकास की दिशा में अग्रसर है।  

रसोई तक पहुंचा जहर: एमपी में मिलावटी मसालों का भंडाफोड़, ऐसे हो रहा है खिलवाड़

ग्वालियर आज के दौर में  खाद्य पदार्थों में जो मिलावटी जहर मिलाकर बेचा जा रहा है वो किसी से छिपा नहीं है।  मिटावटी चीजें खाने से ही लोगों का स्वास्थ्य खराब हो रहा है और कई तरह की बीमारियां भी लग रही हैं। मिलावट का ये धंधे थमने का नाम नहीं ले रहा है। मध्य प्रदेश के ग्वालियर में जो खाद्य विभाग ने कार्रवाई की है वो रौंगटे खड़े करने वाली है। साबुत हल्दी, साबुत लाल मिर्च, साबुत धनिया में भूसी (चौकर) और लकड़ी का बुरादा मिलाकर लोगो की सेहत के साथ मजाक किया जा रहा है। हॉस्पिटल रोड पर स्थित एक मसाला पिसाई चक्की पर टीम ने कार्रवाई की है मध्य प्रदेश के ग्वालियर जिले मे खाद्य विभाग ने मिलावट के संदेह पर बड़ी कार्रवाई की है। मसाला पिसाई केंद्र पर जांच के दौरान लकड़ी का बुरादा मिलने से हड़कंप मच गया। खाद्य विभाग की टीम ने गरम मसाले और अन्य मसालों के नमूने जांच के लिए भेजे हैं और मौके से करीब 30 हजार 700 रुपये कीमत का मसाला जब्त किया गया है। लोगो के स्वास्थ्य से किया जा रहा खिलवाड़ आम जनता को शुद्ध खाद्य सामग्री उपलब्ध कराने के उद्देश्य से कलेक्टर रुचिका चौहान के निर्देश पर यह कार्रवाई की गई। जांच में धनिया, हल्दी, लाल मिर्च और गरम मसाले के साथ चौकर और लकड़ी का बुरादा भी पाया गया, जिसे मिलावट के लिए इस्तेमाल किए जाने का संदेह है। निरीक्षण के दौरान जो सामने आया, उसने टीम भी चौंक गई।  परिसर में ही साबुत हल्दी, साबुत लाल मिर्च, साबुत धनिया और तैयार धनिया पाउडर के साथ गरम मसाला पाउडर और भूसी (चौकर) और लकड़ी का बुरादा भी पाया गया है। जांच में सामने आया कि, भूसी और लकड़ी के बुरादे का इस्तेमा धनिया पाउडर में मिलावट के लिए किया जा रहा था। भूसी और लकड़ी का बुरादा मिलाकर यहां धनिया बेचा जा रहा था। चक्की को किया गया सील खाद्य विभाग का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद यदि मिलावट की पुष्टि होती है तो संबंधित पिसाई केंद्र का पंजीयन निरस्त किया जाएगा और नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल, जांच में अनियमितताएं सामने आने के बाद टीम ने तत्काल ही मसाला कारोबार बंद करा दिया है। साथ ही, पिसाई केंद्र को सील कर दिया।  

प्रगतिशील किसानों को हितलाभ करेंगे वितरित, उन्नत कृषि तकनीक पर लगेगी प्रदर्शनी

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव कृषक कल्याण वर्ष के पहले राज्य स्तरीय विशाल एवं भव्य किसान सम्मेलन 18 फरवरी बुधवार को ग्वालियर जिले के ग्राम कुलैथ में शुभारंभ करेंगे। वे 87.86 करोड़ रुपए लागत के 41 विकास कार्यों का भूमि-पूजन एवं लोकार्पण भी करेंगे। किसान सम्मेलन में विधानसभा अध्यक्ष  नरेन्द्र सिंह तोमर एवं सांसद भी भारत सिंह कुशवाह सहित अन्य अतिथिगण शामिल होंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव उन्नत खेती कर रहे प्रगतिशील किसानों को हितलाभ वितरित करेंगे। कुलैथ में उन्नत कृषि तकनीक पर प्रदर्शनी भी लगेगी। प्रदर्शनी में उद्यानिकी, प्राकृतिक खेती व पशु नस्ल सुधार को प्रमुखता से शामिल किया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव किसान सम्मेलन में लगाई गई कृषि प्रदर्शनी का अवलोकन करेंगे। इस अवसर पर स्थानीय किसानों की पारंपरिक बैलगाड़ी-दौड़ होगी। साथ ही भगवान कृष्ण आधारित लोकगीतों की प्रस्तुति भी होगी।

धीरेंद्र शास्त्री बोले- ‘कर्ज का हिसाब बराबर करते हैं’, कुबेरेश्वर धाम में दिया बड़ा बयान

सीहोर धर्म और आस्था की नगरी सीहोर उस समय ऐतिहासिक पल की साक्षी बनी जब कुबेरेश्वर धाम में चल रही शिव महापुराण कथा के बीच पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का आगमन हुआ। उनके मंच पर पहुंचते ही पूरा परिसर ‘जय श्री राम’ और ‘हर-हर महादेव’ के जयघोष से गूंज उठा। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ ने बागेश्वर सरकार के स्वागत में उत्साह का अभूतपूर्व प्रदर्शन किया। कथा स्थल पर उपस्थित संतों और भक्तों को संबोधित करते हुए पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने अपने चिरपरिचित चुटीले अंदाज में कहा कि उन्होंने “महाराज जी का कर्ज उतार दिया है।’ उनका इशारा कुबेरेश्वर धाम के पंडित प्रदीप मिश्रा की ओर था। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा महाराज जी बागेश्वर धाम आए थे, अब हम यहां आ गए हैं। हम किसी का कर्ज उधार नहीं रखते, आज हिसाब बराबर हो गया, उनके इस वक्तव्य पर पंडाल तालियों और जयघोष से गूंज उठा, उन्होंने आगे कहा कि पंडित प्रदीप मिश्रा उनसे वरिष्ठ हैं और वे उनका सम्मान करते हैं। महाराज जी जैसा करते हैं, वैसा ही हम भी करते हैं, कहते हुए उन्होंने आपसी स्नेह और संत परंपरा की मर्यादा को रेखांकित किया। मंच से उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि वह डबरा से आए हैं तो अब हम डबरा जा रहे हैं, जिससे श्रोताओं के बीच सहज हंसी और आनंद का वातावरण बन गया। यह पहला अवसर था जब बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर सीहोर की पावन धरा पर पहुंचे। कुबेरेश्वर धाम समिति के प्रवक्ता मनोज दीक्षित के अनुसार पंडित शास्त्री ने व्यासपीठ पर पहुंचकर विधिवत नमन किया और संत परंपरा का सम्मान किया। दो प्रखर सनातनी संतों के इस मिलन को देखने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंचे थे, जिससे पूरा क्षेत्र आध्यात्मिक ऊर्जा से भर उठा। कथा स्थल पर सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे। प्रशासन और धाम समिति द्वारा भीड़ प्रबंधन, पार्किंग और श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए विशेष व्यवस्था की गई थी। आयोजन के दौरान अनुशासन और व्यवस्थाओं की सराहना भी की गई। सीहोर में इन दोनों संतों का यह मिलन श्रद्धालुओं के लिए किसी उत्सव से कम नहीं रहा। मंच से दिए गए संदेशों में आपसी सम्मान, धर्म के प्रति समर्पण और समाज सेवा की भावना स्पष्ट रूप से दिखाई दी। कार्यक्रम के समापन पर श्रद्धालुओं ने इसे ऐतिहासिक और अविस्मरणीय क्षण बताया।

विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर कोचिंग संस्थानों के लिए नए नियमों पर मंथन

भोपाल  उच्च शिक्षा विभाग द्वारा मंगलवार को सरोजिनी नायडू शासकीय कन्या स्नातकोत्तर स्‍वशासी महाविद्यालय भोपाल में कोचिंग संस्थानों के नियमों को लेकर महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता अपर मुख्य सचिव, उच्च शिक्षा  अनुपम राजन ने की। बैठक में माननीय सर्वोच्‍च न्‍यायालय के निर्देश एवं राष्‍ट्रीय कार्यबल के अनुक्रम में उच्‍च शिक्षण संस्‍थानों में विद्यार्थियों की आत्‍महत्‍या की रोकथाम एवं मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य संरक्षण के लिए माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के पैरा-37 के तहत कोचिंग सेंटरों के लिए नि‍यम अधि‍सूचित किए जाने के संबंध में विस्तृत चर्चा की गई। इस दौरान अपर मुख्य सचिव, उच्च शिक्षा  राजन ने विद्यार्थियों, बैठक में सहभागिता करने वाले विभिन्न-विभागों के प्रतिनिधियों, कोचिंग सेंटर संचालकों एवं समिति सदस्यों से महत्वपूर्ण सुझाव प्राप्त किए। कार्यक्रम के दौरान भोपाल जिले के बीएसएस कॉलेज के विद्यार्थियों द्वारा विद्यार्थियों पर बढ़ते मानसिक दबाव पर नुक्कड़ नाटक की प्रस्तुति भी दी गई। अपर मुख्य सचिव  राजन ने कहा कि विद्यार्थियों में बढ़ती मानसिक दबाव की स्थिति को गंभीरता से समझते हुए घटनाओं की प्रभावी रोकथाम आवश्यक है। उन्होंने कहा कि कोचिंग संस्थानों को भी अपनी सामाजिक जिम्मेदारी समझनी चाहिए और विद्यार्थियों को सकारात्मक एवं सहयोगात्मक वातावरण उपलब्ध कराना चाहिए। उन्होंने कहा कि कई बार विद्यार्थी जीवन की चुनौतियों और मानसिक समस्याओं का सामना नहीं कर पाते, जिसके कारण गंभीर परिस्थितियां उत्पन्न हो जाती हैं। इसलिए सभी संबंधित संस्थाओं के सहयोग से विद्यार्थियों के हित में एक प्रभावी नि‍यम तैयार किया जाना है, जिससे मानसिक दबाव से उत्‍पन्‍न होने वाली गंभीर परिस्‍थ‍ितियों को रोकने में मदद मिल सके। उन्होंने कहा कि सभी उच्‍च शि‍क्षण संस्‍थानों में विद्यार्थियों के मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य को लेकर जारी किए गए हेल्‍पलाइन नंबर अनिवार्य रूप से प्रदर्शि‍त किए जाएं। साथ ही व्‍यापक स्‍तर पर इसका प्रचार प्रसार भी किया जाए। बैठक के दौरान राज्य में संचालित सभी कोचिंग संस्‍थानों का पंजीकरण, बेहतर संचालन, निर्धारित मानकों का पालन, कोचिंग संस्थानों में सुरक्षित वातावरण, पारदर्शी शुल्क व्यवस्था, विद्यार्थियों एवं अभिभावकों के लिए एक समयबद्ध और पारदर्शी शिकायत निवारण तंत्र स्थापित करने पर चर्चा की गई। साथ ही सुझाव प्राप्‍त किए गए। यह बैठक प्रदेश में कोचिंग संस्थानों के संचालन को सुव्यवस्थित, जवाबदेह और छात्र हितैषी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। उच्च शिक्षा आयुक्त  प्रबल सिपाहा ने कहा कि विद्यार्थियों को यह जानकारी अवश्य होनी चाहिए कि उनके लिए ऐसे माध्यम उपलब्ध हैं, जहां वे अपनी समस्याओं के समाधान के लिए सहायता और मार्गदर्शन प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि समय पर उचित सहयोग और परामर्श मिलने से विद्यार्थियों को मानसिक दबाव से उबरने में सहायता मिलती है और सकारात्मक वातावरण का निर्माण होता है। बैठक में एम्स के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. तन्यम जोशी ने प्रजेंटेशन के माध्यम से मानसिक स्वास्थ्य के संबंध में विस्तृत जानकारी प्रदान की। बैठक में गृह, जिला न्‍यायालय भोपाल, विधि एवं विधायी कार्य, राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य पुनर्वास संस्थान, तकनीकी शिक्षा, स्कूल शिक्षा, महिला एवं बाल विकास, स्वास्थ्य, नगरीय प्रशासन, सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन कल्याण और एडि‍शनल डीसीपी पुलि‍स और एनएलआईयू के प्रतिनिधि उपस्‍थ‍ित रहे। 

विवेचना की गुणवत्ता बढ़ाने पर जोर, एक दिवसीय कार्यशाला संपन्न

भोपाल  महिला सुरक्षा शाखा पुलिस मुख्यालय द्वारा आज नवीन पुलिस मुख्यालय स्थित सभागार में “महिला अपराधों की विवेचना में सुधार” विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का उद्देश्य महिला एवं बाल अपराधों की विवेचना को ओर अधिक प्रभावी, त्रुटिरहित एवं तकनीकी दृष्टि से सुदृढ़ बनाना था। इस कार्यशाला में प्रदेशभर से अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (महिला सुरक्षा), उप पुलिस अधीक्षक (महिला सुरक्षा), महिला थाना प्रभारी तथा उप निरीक्षक स्तर के विवेचक सहित कुल 62 पुलिस अधिकारी प्रतिभागी के रूप में सम्मिलित हुए। कार्यशाला का शुभारंभ विशेष पुलिस महानिदेशक (महिला सुरक्षा) श्री अनिल कुमार द्वारा किया गया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि एफआईआर दर्ज होने के बाद विवेचना के दौरान दोनों पक्षों को सुनते हुए समस्त साक्ष्यों का समुचित संकलन एवं विश्लेषण किया जाए तथा पर्याप्त साक्ष्य उपलब्ध होने पर ही अभियोग पत्र प्रस्तुत किया जाए। उन्होंने विवेचकों को निर्देशित किया कि वे अपने पुराने प्रकरणों के निर्णयों का गंभीरता से अध्ययन करें और उनमें हुई त्रुटियों से सीख लेकर भविष्य की विवेचनाओं में सुधार करें। उन्होंने महिला थानों में आने वाली पीड़िताओं एवं शिकायतकर्ताओं की संवेदनशीलता के साथ सुनवाई पर विशेष बल दिया। साथ ही दोषमुक्ति की दर कम करने, प्रभावी साक्ष्य संकलन सुनिश्चित करने तथा पुलिस, अभियोजन एवं अन्य सहयोगी इकाइयों के मध्य बेहतर समन्वय और तकनीकी दक्षता बढ़ाने की आवश्यकता पर प्रतिभागियों से विस्तृत चर्चा की। कार्यशाला में विभिन्न विषय विशेषज्ञों द्वारा व्याख्यान दिए गए। बालिकाओं के विरुद्ध अपराधों में आयु निर्धारण विषय पर श्रीमती किरणलता केरकेट्टा, उप पुलिस महानिरीक्षक (महिला सुरक्षा); पॉक्सो एक्ट पर सुश्री मनीषा पटेल, एडीपीओ (पुलिस आयुक्त कार्यालय भोपाल); डीएनए सैम्पल के प्रकार एवं सैम्पलिंग के दौरान सावधानियों पर डॉ. ए.के. सिंह, फोरेंसिक विशेषज्ञ; यौन उत्पीड़न के मामलों में साइबर की भूमिका पर श्री प्रणय नागवंशी, एसपी (सायबर); तथा विवेचना को सुदृढ़ बनाने की प्रक्रिया पर सुश्री प्रियंका उपाध्याय, सहायक जिला लोक अभियोजन अधिकारी, जिला अभियोजन संचालनालय भोपाल एवं सुश्री अर्चना तिवारी, उप निरीक्षक, नगरीय भोपाल द्वारा जानकारी दी गई। कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों को पॉक्सो एक्ट के महत्वपूर्ण प्रावधान, साक्षी संरक्षण योजना, पीड़िता की पहचान के प्रकटीकरण पर रोक तथा पीड़िता के अधिकारों के संबंध में विस्तार से अवगत कराया गया। साथ ही डीएनए प्रोफाइलिंग, डीएनए फिंगरप्रिंट, सैम्पलिंग की वैज्ञानिक प्रक्रिया, डिजिटल साक्ष्य एवं साइबर फोरेंसिक के उपयोग, यौन उत्पीड़न मामलों में शिकायत की प्रक्रिया तथा विवेचना को सुदृढ़ बनाने और त्रुटियों से बचने के उपायों पर भी विस्तृत मार्गदर्शन प्रदान किया गया।  

राज्यपाल के अपर सचिव भार्गव का विदाई समारोह सम्पन्न

भोपाल राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी ने राज्यपाल के स्थानांतरित अपर सचिव  उमाशंकर भार्गव को विदाई दी। इस अवसर पर राज्यपाल की ओर से प्रमुख सचिव ने  भार्गव को शॉल एवं स्मृति चिन्ह भेंट किया। विदाई समारोह लोकभवन में मंगलवार को आयोजित किया गया था। राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. कोठारी ने  भार्गव के कार्यकाल की सराहना की। उन्होंने महत्वपूर्ण प्रशासनिक जिम्मेदारी मिलने के लिए बधाई दी। उन्होंने  भार्गव के उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने आशा जताई कि लोकभवन के साथ  भार्गव का सम्पर्क और संवाद निरंतर बना रहेगा। राज्यपाल के स्थानांतरित अपर सचिव  भार्गव ने लोकभवन में बिताए गए समय को अपने प्रशासनिक जीवन का महत्वपूर्ण और अविस्मरणीय अध्याय बताया। लोकभवन परिवार के सहयोग, पारस्परिक विश्वास एवं टीम भावना के कारण ही वे अपने दायित्वों का सफलतापूर्वक निर्वहन कर सके। उन्होंने सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों के प्रति आभार माना। विदाई कार्यक्रम में लोकभवन के अधिकारियों-कर्मचारियों ने  भार्गव के कार्यकाल को अत्यंत प्रभावी, अनुकरणीय एवं प्रेरणादायी बताया। वक्ताओं ने कहा कि  भार्गव ने अपने दायित्वों का निर्वहन उच्च प्रशासनिक दक्षता, समन्वय क्षमता एवं संवेदनशील कार्यशैली के साथ किया। उन्होंने लोकभवन में विभिन्न महत्त्वपूर्ण आयोजनों एवं संवैधानिक दायित्वों के निर्वहन में उल्लेखनीय भूमिका निभाई। सभी ने  भार्गव के सौम्य व्यक्तित्व, सरल व्यवहार एवं निर्णय क्षमता की विशेष सराहना की। उन्होंने कहा कि  भार्गव ने सदैव कार्य के प्रति प्रतिबद्धता और पारदर्शिता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी, जो सभी के लिए प्रेरणा का स्रोत रहेगा। लोकभवन के अधिकारी-कर्मचारी ने पुष्प गुच्छ भेंट कर उनका सम्मान कर उन्हें गरिमामय एवं भावभीनी विदाई दी। विदाई समारोह का संचालन आई.टी. प्रमुख  जितेन्द्र पाराशर ने किया। आभार प्रदर्शन नियंत्रक हाउस होल्ड मती शिल्पी दिवाकर ने किया। इस अवसर पर लोकभवन के विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।  

हरदा के डायल-112 हीरोज: सूझबूझ और साहस से टली बड़ी दुर्घटना

भोपाल. डायल-112 केवल आपात सेवा नहीं, बल्कि संकट की घड़ी में त्वरित निर्णय, साहस और मानवीय संवेदनशीलता का सशक्त प्रतीक है। हरदा जिले में भूसे से भरे ट्रक में लगी आग पर डायल-112 जवानों की सूझबूझ और तत्काल कार्रवाई ने एक बड़ी दुर्घटना को टाल दिया। दिनांक 16 फरवरी 2026 को रात्रि 2:18 बजे हरदा जिले के थाना कोतवाली क्षेत्र अंतर्गत टिमरनी रोड स्थित गिरिराज वेयर हाउस के पास खड़े भूसे से भरे एक ट्रक में आग लगने की सूचना डायल-112 राज्य स्तरीय पुलिस कंट्रोल रूम भोपाल को प्राप्त हुई। सूचना की गंभीरता को देखते हुए थाना कोतवाली क्षेत्र में तैनात डायल-112 एफआरव्ही वाहन को तत्काल मौके के लिए रवाना किया गया। मौके पर पहुँचकर डायल-112 स्टाफ आरक्षक 400 संदीप कुजूर एवं पायलट मोहित ने देखा कि ट्रक में रखे भूसे के कारण आग तेजी से फैलने की आशंका है। स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए डायल-112 जवानों ने बिना समय गंवाए एफआरव्ही वाहन में उपलब्ध अग्निशमन यंत्र का उपयोग किया तथा स्थानीय नागरिकों के सहयोग से आग पर प्रभावी नियंत्रण पाया। इस साहसिक कार्रवाई के दौरान आग बुझाते समय आरक्षक संदीप कुजूर का पैर आग की लपटों से झुलस गया, किंतु उन्होंने कर्तव्य को सर्वोपरि रखते हुए जन-सुरक्षा सुनिश्चित की। डायल-112 जवानों की त्वरित और साहसिक कार्यवाही से बड़ा हादसा टल गया। डायल-112 हीरोज द्वारा विषम परिस्थितियों में प्रदर्शित यह साहस और समर्पण पुलिस की जन-सेवा भावना को सशक्त रूप से प्रतिबिंबित करता है।  

श्रमिकों के नौनिहालों का भविष्य संवारने के लिए सरकार प्रतिबद्ध : मंत्री पटेल

मध्यप्रदेश श्रम कल्याण मंडल की 64वीं बैठक हुई भोपाल मध्यप्रदेश श्रम कल्याण मंडल की 64वीं बैठक में श्रमिकों के बच्चों के शैक्षणिक उत्थान को केंद्र में रखते हुए मेधावी छात्रों को प्रोत्साहन देने और प्रारंभिक स्तर पर कॅरियर काउंसलिंग की व्यवस्था विकसित करने पर प्राथमिकता दी गई। श्रम मंत्री प्रहलाद पटेल ने कहा कि श्रमिक परिवारों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण मार्गदर्शन और अवसर उपलब्ध कराना मंडल की प्राथमिक जिम्मेदारी है। उन्होंने मंडल की योजनाओं के व्यापक प्रचार-प्रसार के साथ उद्योगों में कार्यरत श्रमिकों को इन अवसरों के प्रति जागरूक करने के निर्देश दिए। बैठक में मंडल का आगामी वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट माननीय सदस्यों द्वारा चर्चा उपरांत सर्वसम्मति से पारित किया गया। बैठक में श्रम सचिव रघुराज राजेन्द्रन, कल्याण आयुक्त संजय कुमार एवं श्रमिकों एवं नियोजकों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। मंत्री पटेल ने कहा कि श्रमिकों और कर्मचारियों का मनोबल बनाए रखना शासन की जिम्मेदारी है। वेतनमान से जुड़े मामलों में देरी कार्यकुशलता को प्रभावित करती है, इसलिए सभी लंबित प्रकरणों की सूची बनाकर त्वरित कार्रवाई की जाए। इसके साथ ही भविष्य निधि (ईपीएफ) से जुड़ी समस्याओं के समाधान और सामाजिक सुरक्षा अंशदान जमा न करने वाले प्रिंसिपल एम्प्लॉयर की जानकारी पोर्टल पर सार्वजनिक करने की प्रक्रिया प्रारंभ करने के निर्देश भी दिए गए। बैठक में दैनिक वेतनभोगियों के नियमितीकरण, श्रमिक कल्याण योजनाओं की प्रगति, खेल एवं कौशल विकास गतिविधियों तथा नवीन श्रम संहिताओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर भी विस्तार से चर्चा हुई। बैठक में श्रम सचिव रघुराज राजेन्द्रन ने बताया कि श्रम कल्याण बोर्ड में संपूर्ण कंप्यूटरीकरण एमपीएसईडीसी के माध्यम से किया जा रहा है। श्रम विभाग द्वारा नवीन श्रम संहिताओं पर संभागीय स्तर की कार्यशालाएं आयोजित की जा रही हैं, जिनमें से एक भोपाल में संपन्न हो चुकी है। इन संहिताओं के आधार पर राज्य में श्रम कानूनों में संशोधन किए जा रहे हैं। सिलाई केंद्रों का पुनः संचालन, 17 केंद्र सक्रिय बैठक में बताया गया कि चचाई और इंदौर में सिलाई केंद्रों को पुनः प्रारंभ किया जा रहा है। वर्तमान में 27 श्रम कल्याण केंद्रों में से 17 में सिलाई-कढ़ाई केंद्र संचालित हो रहे हैं। कौशल विकास विभाग द्वारा प्रशिक्षणार्थियों का परीक्षण कराया गया है। मंडल के अंतर्गत संचालित श्रम कल्याण केंद्रों के माध्यम से स्वास्थ्य परीक्षण, राष्ट्रीय पर्व, विश्वकर्मा जयंती जैसे आयोजन नियमित रूप से किए जा रहे हैं। श्रमिकों के लिए कंप्यूटर केंद्र भी संचालित हैं। खेलों को बढ़ावा, समयावधि बढ़ाने का प्रस्ताव बैठक में खेल प्रतियोगिताओं की अवधि बढ़ाने का प्रस्ताव रखा गया। बताया गया कि खेलों के माध्यम से श्रमिकों का सर्वांगीण विकास संभव है। साथ ही नियमित कर्मचारियों को समयमान वेतनमान के एरियर भुगतान को शीर्ष प्राथमिकता देने की बात कही गई। भविष्य निधि (ईपीएफ) से जुड़ी समस्याओं के निराकरण पर भी चर्चा हुई। अंत में सभी सदस्यों ने श्रमिक एवं कर्मचारी हितों को सर्वोपरि रखते हुए निर्णयों के प्रभावी क्रियान्वयन का संकल्प लिया।  

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