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ऑपरेशन सिंदूर पर विवादास्पद टिप्पणी करने के बाद गुजरात कांग्रेस महासचिव राजेश सोनी हुए गिरफ्तार

अहमदाबाद ऑपरेशन सिंदूर पर विवादास्पद टिप्पणी करने के बाद गुजरात कांग्रेस महासचिव राजेश सोनी बुरी तरीके से फंसे हैं। उनके खिलाफ मामला दर्ज होने के बाद पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया है। दरअसल, गुजरात कांग्रेस महासचिव राजेश सोनी पर ‘ऑपरेशन सिंदूर’ से संबंधित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कथित रूप से ‘भ्रामक’ और ‘मनोबल तोड़ने वाली’ सामग्री अपलोड करने का आरोप लगा। उनके खिलाफ बीएनएस की एक सख्त धारा के तहत मामला भी दर्ज किया गया। कांग्रेस नेता ने सोशल मीडिया पर किया विवादास्पद पोस्ट इस मामले को लेकर पुलिस अधीक्षक (सीआईडी-साइबर अपराध) भरतसिंह टांक ने जानकारी देते हुए बताया कि कांग्रेस नेता के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज होने के बाद राज्य सीआईडी ​​की साइबर अपराध शाखा ने पिछले महीने भारतीय सशस्त्र बलों द्वारा पाकिस्तान और पीओके में आतंकवादी ठिकानों को नष्ट करने के लिए शुरू किए गए अभियान पर विवादास्पद पोस्ट करने के लिए सोनी को गिरफ्तार कर लिया। फेसबुक पर किया था पोस्ट बता दें कि पुलिस अधिकारी ने इस पूरे मामले के संबंध में बताया कि राजेश सोनी ने फेसबुक पर भ्रामक पोस्ट के जरिए रक्षाकर्मियों का मनोबल तोड़ने और भारत की संप्रभुता को खतरे में डालने का आरोप लगाया गया है। मामले में एसपी ने बताया कि कांग्रेस नेता पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 152 (भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता को खतरे में डालने वाले कृत्य) और 353(1) (ए) (सार्वजनिक शरारत करने वाले बयान) के तहत मामला दर्ज किया गया है।

बिहार विधानसभा चुनाव में सवर्ण राजनीति के लौटेंगे दिन! आयोग कर सकता है समुदाय के लिए ये तीन सिफारिशें

पटना बिहार में नीतीश कुमार सरकार ने सवर्ण आयोग को मजबूत कर दिया है। विधानसभा चुनाव से ठीक पहले नीतीश कुमार ने आयोग को नए अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और मेंबर दिए हैं। यही नहीं आयोग ने बुधवार को ही एक मीटिंग भी की है, जिसमें सवर्ण समाज में आने वाली जातियों के हालात पर चिंता व्यक्त की गई। नीतीश कुमार सरकार को लगता है कि अति-पिछड़ा, दलित और पिछड़ा की गोलबंदी के बीच कहीं सवर्ण समुदाय न छिटक जाए। ऐसे में उसे साधने के लिए यह उपक्रम किया गया है। भाजपा के समर्थक कहे जाने वाले सवर्ण समुदाय की राजपूत और भूमिहार जैसी जातियां अकसर छिटकती रही हैं। हालांकि ब्राह्मण और कायस्थ भाजपा के पक्ष में एकजुट नजर आए हैं। ऐसी स्थिति में सवर्णों की पूरी गोलबंदी एनडीए के फेवर में हो, इसके लिए प्रयास शुरू हो गए हैं। इसी की कड़ी सवर्ण आयोग है। अब यह आयोग आने वाले दिनों में कुछ सिफारिशें भी कर सकता है। इन सिफारिशों में एक यह भी होगा कि गरीब सवर्ण परिवारों के बच्चों को सरकारी नौकरियों में आयु सीमा में छूट दी जाए। इसके अलावा यूपीएससी, पीसीएस और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए फ्री कोचिंग की सिफारिश हो सकती है। गरीब सवर्णों के बच्चों को हॉस्टल की सुविधान देने की सिफारिश भी आयोग की तरफ से की जा सकती है। सवर्ण आयोग का कहना है कि 2011 में भले ही इसका गठन हुआ था, लेकिन अब यह ज्यादा कारगर होगा। सूत्रों के मुताबिक आयोग के सदस्यों का कहना है कि अब हमारे पास जातीय जनगणना का डेटा है। हम यह जानते हैं कि कितने सवर्ण परिवार गरीब हैं और उसके कारण क्या हैं। उन्हें क्या लाभ देकर आगे बढ़ाया जा सकता है। दरअसल ब्राह्मण, राजपूत, भूमिहार और कायस्थ मिलकर बिहार में करीब 15 फीसदी हैं। भले ही यह बड़ा आंकड़ा नहीं है, लेकिन यदि एकमुश्त वोट किसी दल को मिलता है तो नतीजे पलटने का दम रखते हैं। खासतौर पर मिथिलांचल में ब्राह्मणों की अच्छी तादाद है। इसके अलावा कई जिलों में भूमिहार मजबूत हैं। सवर्ण आयोग ने बनाईं तीन समिति, किन मामलों में करेंगी सिफारिश फिलहाल सवर्ण आयोग ने अलग-अलग मसलों के लिए तीन उप-समितियों का गठन कर दिया है। इन समितियों की सिफारिश के आधार पर ही आगे फैसला होगा। माना जा रहा है कि चुनाव से पहले सवर्ण आयोग की कुछ सिफारिशें सरकार को दी जा सकती है। यही नहीं चुनाव में उतरने से पहले कुछ सिफारिशों को लागू करने का ऐलान भी नीतीश कुमार की सरकार कर सकती है।  

सर्वेक्षण: ठाकरे भाइयों के बीच गठबंधन से पार्टी की सीट संख्या पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा

मुंबई उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (UBT) और राज ठाकरे की अगुवाई वाली महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के बीच गठबंधन होने पर भाजपा की चुनावी संभावनाओं पर कोई असर नहीं पड़ने वाला। महाराष्ट्र में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) के एक पदाधिकारी ने आगामी मुंबई नगर निगम चुनावों के मद्देनजर कराए गए एक आंतरिक सर्वेक्षण का हवाला देते हुए यह बात कही है। भाजपा ने बृहन्मुंबई नगर निगम के साथ-साथ पुणे और ठाणे सहित अन्य प्रमुख नगर निकायों के चुनावों की तैयारी शुरू कर दी है, जो इस साल के अंत में होने की संभावना है। उद्धव ठाकरे के चचेरे भाई राज ठाकरे ने इस तरह के संकेत देने वाले बयान से दोनों के बीच संभावित सुलह की अटकलों को हवा दे दी है कि वे ‘छोटे-मोटे मुद्दों’ को नजरअंदाज कर सकते हैं और लगभग दो दशक के कटुतापूर्ण मतभेद के बाद हाथ मिला सकते हैं। मनसे ने 2024 के लोकसभा चुनावों में महाराष्ट्र में भाजपा को समर्थन की पेशकश की थी लेकिन छह महीने बाद दोनों दलों ने राज्य विधानसभा चुनाव अलग-अलग लड़ा। भाजपा के पदाधिकारी ने बुधवार को कहा, ‘ठाकरे भाइयों से संबंधित राजनीतिक घटनाक्रम के मद्देनजर भाजपा ने मुंबई के चुनावी परिदृश्य पर उद्धव-राज गठबंधन के संभावित प्रभाव का आकलन करने के लिए एक विस्तृत सर्वेक्षण कराया है।’ उन्होंने कहा कि आंतरिक आकलन के निष्कर्षों के अनुसार, उनके संभावित गठबंधन से शहर में भाजपा की संभावनाओं को नुकसान पहुंचने के आसार नहीं हैं। पदाधिकारी ने कहा कि सर्वेक्षण से संकेत मिलता है कि भाजपा तीन प्रमुख कारकों की वजह से मुंबई में मजबूत स्थिति में है: अपने पारंपरिक मतदाता आधार का भरोसा, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का नेतृत्व और पिछले राज्य विधानसभा चुनावों में पार्टी का बेहतरीन प्रदर्शन। उन्होंने कहा, ‘यहां तक ​​कि पारंपरिक मराठी मतदाता आधार वाले क्षेत्रों में भी भाजपा का समर्थन स्थिर बना हुआ है। सर्वेक्षण से पता चलता है कि ठाकरे भाइयों के बीच गठबंधन से पार्टी की सीट संख्या पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।’ पदाधिकारी ने कहा कि आकलन से यह भी संकेत मिलता है कि 2022 में शिवसेना में विभाजन के बाद मुंबई में उद्धव ठाकरे का प्रभाव कम हो गया है और पार्टी के लगभग आधे पार्षद एकनाथ शिंदे गुट में शामिल हो गए हैं। उन्होंने कहा कि इस बीच, राज ठाकरे का प्रभाव सीमित माना जाता है। पदाधिकारी ने कहा कि अगर भाजपा बीएमसी चुनावों में (कुल 227 में से) 150 सीट पर चुनाव लड़ती है तो उसे फायदा होगा। उन्होंने कहा कि पार्टी की तैयारियां उसी के अनुसार की जा रही हैं।

सांसद महुआ मोइत्रा ने कर लिया विवाह , बीजेडी के पिनाकी मिश्रा बने जीवनसाथी

कलकत्ता तृणमूल कांग्रेस (TMC) की तेजतर्रार लोकसभा सांसद महुआ मोइत्रा ने 3 मई को गुपचुप तरीके से शादी कर ली। महुआ मोइत्रा के जीवनसाथी बने हैं बीजू जनता दल (BJD) के वरिष्ठ नेता और पुरी से लोकसभा सांसद पिनाकी मिश्रा। फिलहाल इस खबर को लेकर पार्टी और खुद सांसद ने पूरी तरह चुप्पी साध रखी है। जर्मनी में शादी, तस्वीर आई सामने द टेलीग्राफ की रिपोर्ट के मुताबिक, यह शादी जर्मनी में हुई। प्राप्त एक तस्वीर में महुआ मोइत्रा जर्मनी में मुस्कुराती हुई दिखाई दे रही हैं, पारंपरिक परिधान और सोने के गहनों से सजी हुई हैं। इसी तस्वीर ने इस गुपचुप शादी की पुष्टि कर दी है। हालांकि, अब तक आधिकारिक तौर पर न तो महुआ और न ही उनकी पार्टी की ओर से कोई बयान आया है। जानें कब हुई शादी महुआ मोइत्रा की सीक्रेट शादी करीब एक महीने पहले 3 मई को हुई, मगर सांसद ने इस पर चुप्पी साधे रखा। जर्मनी से आई तस्वीर वायरल होने के बाद उनकी दूसरी शादी के रहस्य से पर्दा उठा। कृष्णा नगर की सांसद महुआ 50 साल की हैं जबकि उनके दूसरे पति पिनाकी मिश्रा 65 साल के हैं। निजी जिंदगी को लेकर चर्चा में बता दें कि तृणमूल कांग्रेस (TMC) की तेजतर्रार नेता और सांसद महुआ मोइत्रा अपनी निजी जिंदगी को लेकर चर्चा हमेशा चर्चा में रहती है।। राजनीति में अपने तीखे बयानों और मजबूत विपक्षी रुख के लिए पहचानी जाने वाली महुआ, खई बार अपने पुराने रिश्तों और निजी फैसलों को लेकर सुर्खियों में थी। महुआ मोइत्रा ने डेनमार्क के निवेशक लार्स ब्रोरसन से विवाह किया था, लेकिन यह शादी ज्यादा लंबे समय तक नहीं चली और तलाक में समाप्त हो गई। इसके बाद वह लगभग तीन वर्षों तक वकील जय अनंत देहाद्रई के साथ रिश्ते में रहीं। हालांकि बाद में यह रिश्ता भी कटुता में बदल गया और महुआ ने देहाद्रई को धोखा देने वाला प्रेमी तक कह डाला। ‘मर्दों के मामले में मेरी पसंद बेहद खराब रही’ नवंबर 2023 में, संसद से संभावित निष्कासन से पहले दिए गए एक इंटरव्यू में महुआ मोइत्रा ने द गार्जियन से खुलकर बात की थी। इस दौरान उन्होंने न सिर्फ राजनीतिक मुद्दों पर बल्कि अपनी निजी जिंदगी को लेकर भी ईमानदारी से बातें साझा कीं। उन्होंने कहा था कि मर्दों के मामले में मेरी पसंद बेहद खराब रही है। महुआ का अतीत भी रहा चर्चा में महुआ मोइत्रा की निजी जिंदगी पहले भी सुर्खियों में रही है। उन्होंने डेनमार्क के फाइनेंसर लार्स ब्रोरसन से शादी की थी, जिनसे बाद में उनका तलाक हो गया। इसके बाद वे तीन वर्षों तक वकील जय अनंत देहाद्रई के साथ रिश्ते में रहीं, जिसे उन्होंने बाद में “धोखा खाया प्रेमी” कहा था। महुआ का पहला लोकसभा कार्यकाल एक बड़े विवाद की भेंट चढ़ गया था। उन पर आरोप लगे कि उन्होंने कारोबारी गौतम अडाणी के खिलाफ सवाल एक प्रतिद्वंद्वी उद्योगपति के कहने पर उठाए। नवंबर 2023 में जब संसद उन्हें निष्कासित करने की दिशा में बढ़ रही थी, तब द गार्जियन के साथ इंटरव्यू में उन्होंने कहा था, “मर्दों के मामले में मेरी पसंद बहुत खराब है।”

राहुल गांधी को इतनी भी अंग्रेजी नहीं आती कि वे दोनों शब्दों का अंतर समझ सकें- उमा भारती

भोपाल पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा की वरिष्ठ नेता उमा भारती ने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के एक बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी को ‘सरेंडर’ और ‘सीजफायर’ के बीच का फर्क तक नहीं मालूम। सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए उमा भारती ने लिखा कि आज तक भारतीय सेना ने कभी पाकिस्तान के सामने समर्पण नहीं किया है और राहुल गांधी को इतनी भी अंग्रेजी नहीं आती कि वे दोनों शब्दों का अंतर समझ सकें। राहुल गांधी ने अपने भोपाल में एक कार्यक्रम में भाषण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ‘नरेंदर सरेंडर’ कहकर संबोधित किया था, जिस पर भाजपा हमलावर हो गई है। उन्होंने भोपाल में पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए दावा किया कि अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक इशारे पर प्रधानमंत्री मोदी झुक गए। उन्होंने कहा था कि भाजपा-आरएसएस पर थोड़ा दबाव डालो तो ये डरकर भाग जाते हैं। ट्रंप ने एक इशारा किया और नरेंद्र मोदी ने झुककर बात मान ली। 

भारत को G-7 के शिखर सम्मेलन में न्यौता नहीं मिलने पर कांग्रेस सांसद ने ‘कमजोर विदेश नीति’ करार दिया

नई दिल्ली कनाडा में होने वाले जी-7 के शिखर सम्मेलन में भारत को आमंत्रित नहीं किए जाने पर कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने केंद्र सरकार को घेरा और इसे सरकार की कमजोर विदेश नीति करार दिया है। समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत के दौरान कांग्रेस सांसद ने कहा कि पीएम मोदी की कमजोर विदेश नीति और गैर जिम्मेदाराना व्यवहार के कारण हम दुनिया में अलग-थलग पड़ गए हैं। भारत-पाकिस्तान के साथ हाल के दिनों में जिस प्रकार से युद्ध की स्थिति पैदा हुई, कोई भी देश भारत के साथ खड़ा नहीं हुआ। नेपाल, भूटान, श्रीलंका जैसे देश ने भारत का पक्ष नहीं लिया। दूसरी ओर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सीजफायर के लिए मध्यस्थता की बात कहकर हमें अपमानित किया। कांग्रेस सांसद ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के उस बयान का समर्थन किया है, जिसमें उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सामने ‘आत्मसमर्पण’ कर दिया था। कांग्रेस सांसद ने कहा कि सच का तीर राहुल गांधी ने छोड़ा है जो भाजपा के पाप की हंडिया में सीधे जाकर लगा है। भाजपा हतोत्साहित और मानसिक रूप से व्यथित हो गई है। इसलिए वे असंसदीय भाषा में हमला कर रहे हैं। मैं पूछता हूं कि अगर भाजपा में हिम्मत है तो पीएम नरेंद्र मोदी से कहें कि वह इसके बारे में अपनी बात रखें और कहें कि ट्रंप झूठ बोल रहे हैं। विपक्षी दल के नेता के तौर पर राहुल गांधी ने वही कहा है जो देश के प्रति उनकी जिम्मेदारी थी। पूरी दुनिया जानती है कि डोनाल्ड ट्रंप ने 12 बार कहा है कि उन्होंने व्यापार के नाम पर युद्ध विराम कराया है। इसलिए राहुल गांधी ने अपना कर्तव्य निभाया। कांग्रेस सांसद ने कहा कि हमें एक मजबूत प्रधानमंत्री की उम्मीद थी। लेकिन, अफसोस के साथ कहना पड़ रहा है कि वो पीएम मोदी नहीं हैं। सीडीएस जनरल अनिल चौहान के ‘पाकिस्तान को 8 घंटे में घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया गया’ वाले बयान पर कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने कहा कि हम सीडीएस के नेतृत्व में भारत के विजयी सशस्त्र बलों की वीरता और बहादुरी को सलाम करते हैं और उनकी सराहना करते हैं। उन्होंने जो कहा वह बिल्कुल सही है। हम अपने सीडीएस और अपने सशस्त्र बलों के साथ मजबूती से खड़े हैं।

सरेंडर आप और आपकी पार्टी ने किया होगा, भारत कभी सरेंडर नहीं करता, जेपी नड्डा का राहुल गांधी पर पलटवार

नई दिल्ली  कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के ‘ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सरेंडर’ वाले बयान पर केंद्रीय मंत्री और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने पलटवार किया है। उन्होंने राहुल गांधी पर तंज कसते हुए कहा कि सरेंडर आप और आपकी पार्टी ने किया होगा। भारत कभी सरेंडर नहीं करता। सरेंडर आपकी पार्टी कांग्रेस की डिक्शनरी में है, आपके डीएनए में है। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने सोशल मीडिया पर एक के बाद एक कई पोस्ट कर राहुल गांधी को जवाब दिया। जेपी नड्डा ने बुधवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा,”राहुल गांधी द्वारा भारतीय सेना के अप्रतिम शौर्य एवं पराक्रम को ‘सरेंडर’ कहकर संबोधित करना, न केवल दुर्भाग्यपूर्ण है बल्कि भारतीय सेना और राष्ट्र के साथ-साथ 140 करोड़ भारतवासियों का भी घोर अपमान है। अगर कोई पाकिस्तानी भी ऐसा कहता तो हम उस पर हंसते भी, लेकिन, जिस तरह से ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय सेना ने पाकिस्तान में तबाही मचाई, उसके बाद पाकिस्तान की जनता से लेकर उसकी सेना और उसके प्रधानमंत्री ने भी ऐसा कहने की हिम्मत नहीं की, लेकिन राहुल गांधी ऐसा बोल रहे हैं! यह देशद्रोह से कम नहीं है।” एक अन्य पोस्ट में उन्होंने लिखा, ”भारतीय सेना ने पाकिस्तान में 300 किमी घुसकर उसके 11 एयरबेस को तबाह किया, 9 आतंकी अड्डों को ध्वस्त किया, 150 से ज्यादा आतंकी मारे। पाकिस्तान तो रोते-रोते दुनिया को बता रहा है कि भारतीय सेना ने पाकिस्तान में 18 जगह हमला करके सब कुछ तबाह कर दिया और राहुल गांधी देश के सरेंडर की बात कर रहे हैं। राहुल गांधी को पता होना चाहिए कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की सफलता की घोषणा सरकार ने या भाजपा के किसी प्रवक्ता ने नहीं की थी, बल्कि भारतीय सेना के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा की गई थी। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ भारतीय सेना की बहादुरी, शौर्य एवं पराक्रम का उद्घोष है। वास्तव में जिनकी नीतियां सरेंडर की रही हो, उसे इसके आगे कुछ सूझ भी नहीं सकता – क्यों, ऐसा ही है न राहुल गांधी जी?” भाजपा अध्यक्ष नड्डा ने आगे कांग्रेस पर निशाना साधते हुए लिखा, ”राहुल गांधी, सरेंडर आप करते होंगे, आपकी पार्टी ने किया होगा, आपके नेताओं ने सरेंडर किया होगा क्योंकि आपका इतिहास ही ऐसा रहा है, लेकिन भारत कभी सरेंडर नहीं करता। सरेंडर आपकी पार्टी कांग्रेस की डिक्शनरी में है, आपके डीएनए में है। राहुल गांधी, आपको अपनी पार्टी की सरकारों का कार्यकाल याद करना चाहिए, किस तरह आपने इतिहास में ‘सरेंडर’ किया। आपने आतंकवाद के सामने सरेंडर किया, शर्म-अल-शेख में सरेंडर किया, 1971 की लड़ाई जीतने के बाद शिमला में टेबल पर सरेंडर किया, सिंधु जल समझौते में सरेंडर किया, हाजी पीर का दर्रा सरेंडर किया, छम्ब सेक्टर का 160 किमी का इलाका सरेंडर किया, 1962 की लड़ाई में सरेंडर किया, 1948 में सरेंडर किया और यहां तक कि देश की आजादी के समय मुस्लिम लीग के भी सामने सरेंडर किया।”

राहुल गांधी ने हरियाणा में संगठन विस्तार को लेकर कांग्रेस कार्यालय में मीटिंग ली, कहा-गुटाबाजी हो खत्म

हरियाणा  हरियाणा के नेताओं साथ राहुल गांधी की बैठक खत्म हो गई है। कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी हरियाणा कांग्रेस के दफ्तर पहुंचे थे। नेता प्रतिपक्ष ने ‘संगठन सृजन कार्यक्रम’ के तहत हरियाणा में संगठन विस्तार को लेकर चंडीगढ़ स्थित प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में मीटिंग ली। इसमें पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्‌डा, सिरसा से सांसद कुमारी सैलजा, राज्यसभा सांसद रणदीप सिंह सुरजेवाला समेत पार्टी के 17 सीनियर नेता मौजूद थे। करीब डेढ़ घंटे चली मीटिंग के बाद राज्य में पार्टी का संगठन खड़ा करने के लिए हाईकमान की ओर से नियुक्त 22 जिला ऑब्जर्वरों के साथ मीटिंग कर उनका फीडबैक लिया। बता दें कि राहुल गांधी लीडरशिप से मिलकर गुटबाजी खत्म करने और संगठन को मजबूत करने का रोडमैप देंगे। इसके अलावा वह हरियाणा में नियुक्त किए गए सभी जिलों के पर्यवेक्षकों से साथ मीटिंग कर फीडबैक लेंगे। हरियाणा में संगठन बनाने के लिए कांग्रेस ने 22 पर्यवेक्षक नियुक्त किए हैं। चंडीगढ़ एयरपोर्ट पहुंचने पर स्वागत   बताया जा रहा है कि पहली बार कोई गांधी परिवार का सदस्य चंडीगढ़ में कांग्रेस भवन में आ रहा है। 115 नेताओं के साथ दो दौर में मुलाकात का कार्यक्रम है। राहुल गांधी पहले कांग्रेस के 17 वरिष्ठ नेताओं से बातचीत करेंगे। उसके बाद 21 केंद्रीय और 77 पर्यवेक्षकों के साथ बैठक करेंगे। 3 अध्यक्ष, 11 प्रभारी 11 साल में संगठन नहीं बना पाए। मंच पर सात कुर्सियां लगेंगी। जिनमें राहुल गांधी, बीके हरिप्रसाद, उदयभान, भपेंद्र सिंह हुड्डा, कुमारी सैलजा, सुरजेवाला शामिल रहेंगे। राहुल गांधी प्रदेश कांग्रेस की सीनियर लीडरशिप से मिलकर गुटबाजी खत्म करने और संगठन को मजबूत करने का रोडमैप देंगे। गौरतलब है कि कांग्रेस 11 साल से राज्य में अपना संगठन नहीं बना पाई है। इसकी बड़ी वजह कांग्रेस के सीनियर नेताओं के बीच गुटबाजी रही। इस वजह से हरियाणा में कांग्रेस पार्टी को 2024 के विधानसभा चुनाव में भी हार का सामना करना पड़ा। अब राहुल गांधी इस दौरे से सीनियर नेताओं को गुटबाजी खत्म करवाकर संगठन बनाने पर फोकस करेंगे।

‘तीन प्रकार के घोड़े’ बयान पर घिरे राहुल गांधी, एमपी बीजेपी ने दिया करारा जवाब- ‘गधों की महफिल में घोड़े…’

भोपाल 3 जून को मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल पहुंचे राहुल गांधी ने पीएम मोदी और भाजपा सरकार पर जमकर हमला बोला। स्थिति ये कि उनके बयान देशभर में चर्चा के विषय बन गए, इस बीच सीएम मोहन यादव ने राहुल गांधी की बयानबाजी को अपरिक्वता की निशानी कहा तो, एमपी बीजेपी अध्यक्ष वीडी शर्मा ने भी किया करारा प्रहार। बता दें कि राहुल गांधी 3 जून को एमपी कांग्रेस का नया अभियान सृजन संगठन लॉन्च करने भोपाल आए थे। यहां उन्होंने तीन बैठकें लीं और देशभर से यहां पहुंचे पर्यवेक्षकों को उनकी जिम्मेदारी दी। बता दें कि अब यही पर्यवेक्षक एमपी कांग्रेस के जिला अध्यक्षों का चयन करेंगे। कांग्रेस के इस अभियान को शुरू करने वाला मध्यप्रदेश दूसरा राज्य है, इससे पहले कांग्रेस का ये फॉर्मूला गुजरात में लागू किया गया। जानें क्या बोले सीएम मोहन यादव सीएम डॉ. मोहन यादव ने लोकसभा से नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के पीएम मोदी को लेकर दिए बयान की निंदा की है। सीएम ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष का पद गरिमामय पद है, उनके प्रधानमंत्री को लेकर दिए इस तरह के बयान की उम्मीद नहीं थी। यही नहीं सीएम मोहन यादव ने राहुल पर तंज भी किया, उन्होंने कहा कि इस तरह की बयानबाजी से पता चलता है कि वे अभी परिपक्व नहीं हैं…वे कब मैच्योर होंगे, इसीलिए वे पप्पू कहलाते हैं। …आखिर वह परिपक्व कब होंगे? यहां पढ़ें राहुल गांधी का पूरा बयान राहुल गांधी ने पीएम मोदी पर सीधा हमला बोला, उन्होंने कहा कि, ‘ट्रंप का एक फोन आया और नरेंद्र जी तुरंत surrender हो गए – इतिहास गवाह है, यही BJP-RSS का character है, ये हमेशा झुकते हैं। भारत ने 1971 में अमेरिका की धमकी के बावजूद पाकिस्तान को तोड़ा था। कांग्रेस के बब्बर शेर और शेरनियां Superpowers से लड़ते हैं, कभी झुकते नहीं।’ सीएम ने कहा- इस तहर वे अपनी ही इज्जत खराब करते हैं सीएम ने आगे कहा कि, नेता प्रतिपक्ष मर्यादा छोड़ कर जिस भाव से बोलते हैं वह न केवल उनकी इज्जत खराब करते हैं, बल्कि देश के संस्कार के विरुद्ध भी बात करते हैं। उन्हें माफी मांगना चाहिए सीएम मोहन यादव ने कहा कि, राहुल गांधी पहले बुद्धि का सृजन कर लें… प्रधानमंत्री जी के बारे में बोले गए राहुल गांधी के वक्तव्य के लिए उनको तुरंत माफी मांगना चाहिए। तीन टाइप के घोड़े’ बयान पर घिरे राहुल गांधी तीन टाइप के घोड़े होते हैं, राहुल गांधी का ये बयान एमपी में गूंजा तो इसकी गूंज पूरे देशभर में सुनाई दी। हर कोई जानने को उत्सुक नजर आया कि आखिर मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में राहुल ने घोड़ों की चर्चा क्योंकि… आखिर राहुल ने ऐसा क्या बोला कि एमपी समेत देशभर में सियासत गरमा गई… छत्तीसगढ़ बीजेपी के कांग्रेस पर हमले के बाद अब मध्य प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष वीडी शर्मा ने राहुल गांधी पर करारा तंज किया है। उन्होंने राहुल गांधी के घोड़ों वाले बयान पर कटाक्ष करते हुए कहा कि, आखिर गधों की महफिल में घोड़ों की चर्चा कहां से आ गई। यही नहीं वीडी शर्मा ने राहुल पर निशाना साधते हुए सवाल भी पूछा कि मैं जानना चाहता हूं राहुल ने किसके लिए ये बात कही। आप भी जाने आखिर राहुल ने क्यों दिया तीन टाइप के घोड़ों का उदाहरण और क्यों हो रही चर्चा…. वीडी शर्मा का कांग्रेस पर जमकर हमला इस पर मध्य प्रदेशक भाजपा अध्यक्ष और पार्टी सांसद वीडी शर्मा ने कहा कि, मैं राहुल गांधी से पूछना चाहता हूं कि संगठन सृजन की बैठक में उन्होंने जिस प्रकार के वक्तव्य दिए हैं, गधों की महफिल में घोड़ों की चर्चा कहां से आ गई। राहुल गांधी को बताना चाहिए और मैं उनसे पूछना चाहता हूं कि उन्होंने किसके लिए ये बात कही है। वीडी शर्मा ने कहा कि, एक तरफ तो उनके नेता दिग्विजय सिंह कहते थे कि मैं वोट मांगने जाता हूं तो जनता वोट देती नहीं है उल्टा वोट काट देती है। तो दूसरी तरफ उनके वर्तमान अध्यक्ष जीतू पटवारी जी कहते हैं कि संगठन जाए तेल लेने, वहीं कमलनाथ कुछ और कहते हैं। वीडी शर्मा ने आगे कहा कि, राहुल गांधीजी बताएं कि ये वक्तव्य जो आपने दिया है, वो किसके लिए दिया है। जरा वे यह भी बताएं कि कांग्रेस में कौन रेस का घोड़ा है, और कौन बारात का घोड़ा है, यह बात मध्य प्रदेश की जनता जानना चाहती है।

संसद सत्र की मांग पर बोले संजय राउत- हमें बस पहलगाम पर बात करनी है, ऐक्शन पर नहीं

मुंबई शिवसेना के उद्धव ठाकरे गुट के लीडर संजय राउत का कहना है कि सरकार को संसद का विशेष सत्र बुलाना चाहिए। उन्होंने पहलगाम में जो आतंकवादी हमला हुआ है, वह कैसे हुआ और उसमें क्या चूक रही। देश की जनता इसके बारे में जानना चाहती है। इसके अलावा सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चर्चा होना भी जरूरी है। संजय राउत ने कहा, ‘हम सिर्फ पहलगाम आतंकी हमले पर चर्चा करना चाहते हैं। हमें इस पर बात नहीं करनी कि सरकार ने क्या ऐक्शन लिया। यदि देश के 16 राजनीतिक दलों की मांग है कि विशेष सत्र बुलाया जाए तो फिर चर्चा होनी चाहिए।’ उन्होंने कहा कि हम जल्दी ही इस मांग को लेकर पीएम नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति को भी पत्र लिखेंगे। लोकतंत्र में सरकार को जनता को विश्वास में लेकर काम करना चाहिए। पब्लिक को बताना चाहिए कि वह क्या कर रही है और क्या हुआ है। लेकिन दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में हर चीज को छिपाया जा रहा है। संजय राउत अपने बयानों के लिए अकसर चर्चा में रहते हैं। उन्होंने मंगलवार को भाजपा नेता गिरीश महाजन पर भी हमला बोला था। उनका कहना था कि यदि भाजपा सत्ता से बाहर हुई तो गिरीश महाजन दल छोड़ने वाले पहले व्यक्ति होंगे। इस पर गिरीश महाजन ने भी जवाब दिया है। उन्होंने कहा कि उद्धव ठाकरे को दुश्मनों की जरूरत नहीं है, जब तक उनके पास संजय राउत जैसे नेता हैं। उन्होंने कहा कि संजय राउत ऐसे शख्स हैं, जो हर दिन मीडिया को क़ॉल करते हैं। पत्रकार पहुंचते हैं तो कुछ न कुछ ऐसा बोलते हैं, जो हेडलाइन बन जाए। उनके रवैये के चलते उद्धव सेना खत्म होने की कगार पर है। उनके रहते हुए उद्धव ठाकरे को किसी भी राजनीतिक दुश्मन की जरूरत नहीं है। राउत पार्टी को खत्म करने वाले शख्स हैं और वह अपने काम में लगे हुए हैं। बता दें कि भाजपा की आलोचना में संजय राउत सबसे ज्यादा मुखर रहे हैं।  

पूर्व सांसद आनंद परांपजे ने कहा- ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर संजय राउत का राजनीति करना दुर्भाग्यपूर्ण

मुंबई शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत के ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को विफल बताने और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से इस्तीफा मांगने पर एनडीए नेता हमलावर हैं। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के नेता एवं पूर्व सांसद आनंद परांपजे ने मंगलवार को उन पर राजनीति करने का आरोप लगाया और इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताया। पूर्व सांसद आनंद परांपजे ने कहा, “शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत के बुद्धि पर मुझे तरस आता है कि पूरी दुनिया में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की सराहना हो रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के नेतृत्व में हमने दुनिया को दिखा दिया कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत आतंकवादियों के नौ ठिकानों को हमने ध्वस्त किया। इसके अलावा पाकिस्तान और आतंकवाद के खिलाफ भारत सरकार ने जो बड़े कदम उठाए हैं, पूरी दुनिया को इसे बताने के लिए कूटनीति भी की जा रही है। भारत सरकार ने सारे विपक्ष को साथ लेते हुए सांसदों के डेलिगेशन विदेशों में भेजे हैं।” पार्टी लाइन से अलग हटकर बयान देने का अंदेशा जताते हुए उन्होंने कहा, “इस अवसर पर संजय राउत का यह बयान बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है। इस समय पूरे देश को, चाहे उसमें सत्ता पक्ष हो या विपक्ष, एक साथ खड़ा होना चाहिए। लेकिन इस वक्त एक जिम्मेदार नेता का ऐसा बयान देना शोभा नहीं देता। राउत की पार्टी के कुछ सांसद भी ऑल पार्टी डेलिगेशन के सदस्य हैं, जिसमें प्रियंका चतुर्वेदी भी हैं। ऐसे में संजय राउत जो बयान दे रहे हैं क्या उसको शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे का समर्थन है या नहीं, यह सवाल भी उठ रहा है।” परांपजे ने कहा, “पाकिस्तान और आतंकवाद के खिलाफ हम जो लड़ाई लड़ रहे हैं। उसमें हमारे सैनिकों का मनोबल किसी राजनीतिक बयानबाजी के कारण नीचे नहीं आए, यह भी एक राजनीति पार्टी की जिम्मेदारी बनती है। संजय राउत की तरफ से ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर राजनीति करना बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है।” उल्लेखनीय है कि मुंबई में पत्रकारों के साथ बातचीत के दौरान संजय राउत ने कहा था, ” ‘ऑपरेशन सिंदूर’ सबसे पहले तो एक असफल ऑपरेशन है, लेकिन राष्ट्रहित में विपक्ष इसका और अधिक राजनीतिकरण नहीं करना चाहता है। असली सवाल यह है कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की जरूरत क्यों पड़ी।” इसके साथ ही उन्होंने अमित शाह से इस्तीफे की मांग की।

भाजपा ने कर्नाटक में अपनी अनुशासन नीति को सख्ती से लागू करते हुए दो विधायकों को पार्टी से किया निष्कासित

बेंगलुरु भारतीय जनता पार्टी ने कर्नाटक में अपनी अनुशासन नीति को सख्ती से लागू करते हुए दो विधायकों को छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया है। ये दोनों विधायक पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल पाए गए थे। निष्कासित किए गए विधायकों में यशवंतपुर से एसटी सोमशेखर और येल्लापुर से ए शिवराम हेब्बार शामिल हैं। पार्टी की तरफ से इस कार्रवाई की पुष्टि कर्नाटक बीजेपी अध्यक्ष बी वाई विजयेंद्र ने की। उन्होंने बताया कि यह निर्णय बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व द्वारा गहन विचार-विमर्श के बाद लिया गया है। विजयेंद्र ने कहा कि यह निर्णय पार्टी की गरिमा बनाए रखने और अनुशासन सुनिश्चित करने के लिए जरूरी था। कारण बताओ नोटिस के बाद आई कार्रवाई पार्टी के केंद्रीय अनुशासन समिति के सदस्य सचिव ओम पाठक ने ए शिवराम हेब्बार को एक औपचारिक पत्र भेजा, जिसमें कहा गया है कि बार-बार पार्टी के अनुशासन का उल्लंघन करने के चलते उन्हें यह सजा दी गई है। पत्र में लिखा है कि समिति ने 25 मार्च 2025 को भेजे गए कारण बताओ नोटिस के जवाब पर विचार किया और पाया कि विधायक द्वारा पार्टी की मर्यादाओं का कई बार उल्लंघन किया गया। इसके आधार पर उन्हें पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से तत्काल प्रभाव से 6 साल के लिए निष्कासित किया गया है। साथ ही वे पार्टी के किसी भी पद पर बने नहीं रहेंगे। बीजेपी में अनुशासन सर्वोपरि बीजेपी हमेशा से अनुशासन को सबसे ऊपर मानती रही है। चाहे वह वरिष्ठ नेता हों या जनप्रतिनिधि, पार्टी विरोधी गतिविधियों को बर्दाश्त नहीं किया जाता। यही वजह है कि पार्टी ने अपने दो मौजूदा विधायकों पर भी सख्त कार्रवाई करने में देर नहीं की। विशेषज्ञों के अनुसार यह कदम पार्टी के अंदर संदेश देने के लिए भी है कि अनुशासनहीनता या गुटबाजी जैसी गतिविधियों को किसी भी स्तर पर सहन नहीं किया जाएगा।

2025 के चुनाव में केवटी सीट पर बीजेपी और आरजेडी उम्मीदवारों में होगी कड़ी टक्कर

केवटी केवटी विधानसभा सीट मधुबनी लोकसभा के तहत आता है। 1977 में केवटी सीट पर हुए विधानसभा चुनाव में जनता पार्टी के कैंडिडेट दुर्गादास राठौड़ ने जीत हासिल की थी। 1980 के चुनाव में केवटी सीट से कांग्रेसी कैंडिडेट  एस नबी ने जनता का समर्थन हासिल कर लिया था। वहीं 1985 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी के कैंडिडेट कलीम अहमद ने विरोधियों को शिकस्त दे दिया था।1990 और 1995 के चुनाव में जनता दल के कैंडिडेट गुलाम सरवर ने जीत हासिल कर लिया था। वहीं 2000 के विधानसभा चुनाव में केवटी से एक बार फिर गुलाम सरवर ने आरजेडी की टिकट पर जीत का सिलसिला बरकरार रखा था। 2005 और 2010 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी की टिकट पर अशोक कुमार यादव ने लगातार दो बार जीत का सिलसिला कायम रखा था। 2015 के विधानसभा चुनाव में आरजेडी की टिकट पर फराज फातमी ने विरोधियों को शिकस्त दे दिया था, लेकिन 2020 में बीजेपी उम्मीदवार मुरारी मोहन झा ने आरजेडी को मात दे दिया था।   वहीं 2020 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी कैंडिडेट मुरारी मोहन झा ने जीत का परचम लहराया था। मुरारी मोहन झा 76 हजार तीन सौ 72 वोट लाकर पहले स्थान पर रहे थे तो आरजेडी कैंडिडेट अब्दुल बारी सिद्दीकी 71 हजार दो सौ 46 वोट लाकर दूसरे स्थान पर रहे थे। इस तरह से मुरारी मोहन झा ने अब्दुल बारी सिद्दीकी को 5 हजार एक सौ 26 वोट के कम मार्जिन से हराया था। वहीं तीन हजार तीन सौ चार वोट के साथ निर्दलीय कैंडिडेट योगेश रंजन तीसरे स्थान पर रहे थे। वहीं 2015 के विधानसभा चुनाव में केवटी सीट से आरजेडी कैंडिडेट फराज फातमी ने जीत हासिल की थी। फराज फातमी 68 हजार छह सौ एक वोट लाकर पहला स्थान हासिल किया था तो बीजेपी कैंडिडेट अशोक कुमार यादव को 60 हजार सात सौ 71 वोट ही मिल पाया था। इस तरह से फराज फातमी ने अशोक कुमार यादव को 7 हजार आठ सौ 30 वोट के अंतर से हरा दिया था। वहीं 3 हजार पांच सौ 13 वोट के साथ नोटा तीसरे स्थान पर रहा था।   वहीं 2010 के विधानसभा चुनाव में केवटी सीट से बीजेपी कैंडिडेट अशोक कुमार यादव ने जीत हासिल की थी। अशोक कुमार यादव 45 हजार सात सौ 91 वोट लाकर पहले स्थान पर रहे थे तो आरजेडी कैंडिडेट फराज फातमी ने 45 हजार सात सौ 62 वोट हासिल किया था। इस तरह से अशोक कुमार यादव ने फराज फातमी को 29 वोटों के बेहद कम अंतर से हरा दिया था। वहीं कांग्रेसी कैंडिडेट मोहम्मद मोहसिन ने 5 हजार छह सौ 79 वोट लेकर तीसरा स्थान हासिल किया था। वहीं 2005 के विधानसभा चुनाव में केवटी सीट से बीजेपी की टिकट पर अशोक कुमार यादव ने जीत हासिल की थी। अशोक कुमार यादव 41 हजार आठ सौ 17 वोट लाकर पहले स्थान पर रहे थे तो आरजेडी कैंडिडेट महबूब अहमद खां को 35 हजार एक सौ 65 वोट मिला था। इस तरह से अशोक कुमार यादव ने महबूब अहमद खां को 6 हजार छह सौ 52 वोट के अंतर से हरा दिया था। वहीं एलजेपी कैंडिडेट महेश प्रसाद गुप्ता ने 9 हजार चार सौ 46 वोट लेकर तीसरा स्थान हासिल किया था। केवटी सीट पर मुस्लिम, ब्राह्मण और यादव वोटर निर्णायक संख्या में हैं। इसके अलावा रविदास और पासवान वोटरों की संख्या भी यहां ठीक ठाक है। पिछली बार भी यहां बीजेपी कैंडिडेट ने 5 हजार से थोड़े ज्यादा अंतर से आरजेडी उम्मीदवार को हराया था। इसलिए 2025 के चुनाव में केवटी सीट पर बीजेपी और आरजेडी उम्मीदवारों में कड़ी टक्कर देखने को मिल सकती है।

विपक्ष के बड़े नेता का बयान- ऑपरेशन सिंदूर को ‘फेल ऑपरेशन’ बताया, क्यों पड़ी इसे करने की जरूरत

नई दिल्ली ऑपरेशन सिंदूर को लेकर विपक्षी गठबंधन INDIA के सहयोगी शिवसेना (UBT) सांसद संजय राउत ने बड़ी टिप्पणी कर दी है। उन्होंने पाकिस्तान में आतंकवाद के खिलाफ सेना के ऑपरेशन सिंदूर को ‘फेल ऑपरेशन’ बताया है। साथ ही उन्होंने एक बार फिर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के इस्तीफे की मांग की है। 22 अप्रैल को जम्मू और कश्मीर के पहलगाम में आतंकवादियों ने 26 सैलानियों की गोली मारकर हत्या कर दी थी। मंगलवार को पत्रकारों से बातचीत में राउत ने कहा, ‘देखिए मैंने कहा है पहले भी कि ऑपरेशन सिंदूर फेलियर ऑपरेशन है, लेकिन देश के हित में हम विपक्ष के नेता ज्यादा उसपर बात नहीं करना चाहते। दूसरी बात यह है कि ऑपरेशन सिंदूर करने की जरूरत क्यों पड़ी। इसलिए कि पहलगाम में 26 लोगों की हत्या आतंकवादियों ने कर दी। इसके जिम्मेदार देश के गृहमंत्री अमित शाह हैं।’ उन्होंने शाह के इस्तीफे की मांग की है। राज्यसभा सांसद ने कहा, ‘और उसका प्रायश्चित करने के लिए अमित शाह जी को पद से इस्तीफा देना चाहिए। नहीं तो प्रधानमंत्री जी ने कर्तव्य पालन में चूक हुई, इसके लिए अमित शाह का इस्तीफा लेना चाहिए और मंत्रिमंडल से बर्खास्त कर देना चाहिए। और ये अमित शाह कल आकर हमें ज्ञान दे रहा था। आप जिम्मेदार हो। ऑपरेशन सिंदूर नहीं है ये सिंदूर उजाड़ दिया है महिलाओं का।’ उन्होंने सवाल उठाए, ‘कहां हैं आतंकवादी? गुजरात में छिपाया है या दाहोद में छिपाया है? कल मोदी जी गुजरात में थे न। जिस गांव में औरंगजेब का जन्म हुआ है, वहां से कल बड़ी गर्जना कर रहे थे ये लोग। जिम्मेदार आप हैं। आपकी वजह से सिंदूर उजड़ा। इसलिए आप प्रायश्चित लेकर इस्तीफा दीजिए, लेकिन आप कल कहां थे…।’ पहलगाम आतंकवादी हमले के जवाब में 7 मई को भारतीय सेना ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान में आतंकवादी ठिकानों पर हमले किए थे।  

मंत्री विजय शाह मामले में SIT ने पूरी की जांच, कर्नल सोफिया अंसारी पर की थी विवादित टिप्पणी

भोपाल  मध्य प्रदेश सरकार के मंत्री विजय शाह के विवादित बयान मामले में गठित SIT (विशेष जांच टीम) ने अपनी जांच पूरी कर ली है। अब यह रिपोर्ट 28 मई को सुप्रीम कोर्ट को सौंपी जाएगी। लेकिन सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि पूरी जांच के दौरान मंत्री विजय शाह से कोई बयान ही नहीं लिया गया। इस बात ने ना सिर्फ सवाल खड़े किए हैं बल्कि पूरे मामले में पारदर्शिता को लेकर बहस भी छेड़ दी है। सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा मामला यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए विजय शाह के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया। इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा और कोर्ट ने खुद इस जांच की निगरानी अपने हाथ में ली। पुलिस महानिदेशक द्वारा सागर जोन के आईजी प्रमोद वर्मा के नेतृत्व में तीन सदस्यीय SIT का गठन किया गया। वीडियो, चश्मदीद और सभास्थल की जांच जांच के दौरान टीम ने उस विवादित वीडियो की गहराई से पड़ताल की। जिसमें मंत्री विजय शाह को कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर बयान देते हुए देखा गया। साथ ही मंच पर मौजूद अन्य लोगों से पूछताछ की गई, और धार जिले के मानपुर स्थित सभास्थल का दौरा कर चश्मदीदों से भी बातचीत की गई। अब सभी की नजरें सुप्रीम कोर्ट पर जैसे ही रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में पेश की जाएगी, यह तय होगा कि आगे की कानूनी कार्रवाई किस दिशा में जाएगी। अब सवाल उठता है, क्या बिना मंत्रीजी के बयान के जांच को पूर्ण माना जा सकता है? घटनास्थल पर जाकर भी SIT ने की जांच एसआईटी ने मध्य प्रदेश के धार जिले के मानपुर में घटनास्थल पर जाकर भी जांच की है। साथ ही अन्य तथ्यों का परीक्षण किया है। उस वीडियो की भी जांच की गई है, जिसमें शाह कर्नल सोफिया कुरैशी के संबंध में बोल रहे हैं मंच पर मौजूद लोगों से भी पूछताछ की बात सामने आई है। जांच के दौरान विजय शाह से नहीं लिया गया कोई बयान हालांकि, सूत्रों का कहना है कि जांच दल ने मामले में विजय शाह से कोई बयान नहीं लिया है। बता दें, सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के निर्देश पर विजय शाह के विरुद्ध कायम की गई एफआइआर की जांच करने के लिए कहा था। हाई कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए एफआईआर कायम करने के लिए कहा था।

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