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वक्‍फ संशोधन बिल पर BJP को मिला पुराने दोस्‍त TDP का साथ, चंद्रबाबू की पार्टी बोली- सपोर्ट में करेंगे वोट

नईदिल्ली एनडीए में दूसरी सबसे बड़ी पार्टनर टीडीपी ने संसद में वक्फ संशोधन विधेयक का समर्थन करने का ऐलान किया है। चंद्राबाबू नायडू की पार्टी टीडीपी के लोकसभा में 16 सांसद हैं। पहले यह संभावना जताई जा रही थी तेलगूदेशम पार्टी वक्फ बिल पर न्यूट्रल पोजिशन बनाकर दूरी बनाए रख सकती है। वह न तो इसका समर्थन करेगी और न ही विरोध करेगी। पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रेम कुमार जैन ने बताया कि टीडीपी ने हमेशा मुसलमानों के हितों का ख्याल किया है और सीएम नायडू पहले ही कह चुके हैं कि हम मुसलमानों की हर हित की रक्षा करेंगे। अब टीडीपी के ऐलान के बाद बिल पास होने की उम्मीद बढ़ गई है। BJP ने राज्यसभा MPs को 3 अप्रैल को सदन में मौजूद रहने का व्हिप जारी किया। कौन-कौन दे रहा समर्थन टीडीपी का कहना है कि वक्फ बोर्ड की 9 लाख एकड़ जमीन पर अवैध कब्जा कर रखा है। अगर इस संशोधन बिल के जरिये अगर उनकी जमीन से अवैध कब्जा वापस लेकर मुसलमानों के हित में इसका उपयोग किया जाता है, पार्टी इसका समर्थन भी करेगी। अभी एनडीए में शामिल जेडीयू और आरएलडी ने अपन रुख साफ नहीं किया है। संभावना जताई जा रही है कि जेडीयू इस बिल पर न्यूट्रल रहेगी। मंगलवार को जेडीयू के सांसद बिल पर चर्चा के लिए अमित शाह से मिले। बिहार की दूसरी पार्टी हिंदुस्तान आवामी मोर्चा ने बिल के समर्थन के संकेत दिए हैं। लोकसभा में बीजेपी के 240 सांसद हैं और टीडीपी के समर्थन के ऐलान से मोदी सरकार की राह आसान हो गई है। कल 12 बजे पेश होगा बिल वक्फ संशोधन विधेयक बुधवार 12 बजे लोकसभा में पेश किया जाएगा। लोकसभा अध्यक्ष ने इस बिल पर चर्चा के लिए 8 घंटे का समय तय किया है। केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने बताया कि अगर सदन को लगता है कि चर्चा के लिए समय बढ़ाया जाना चाहिए, इसकी अवधि बढ़ सकती है। अगर पक्ष कोई बहाना बनाकर चर्चा में भाग नहीं लेना चाहते हैं, तो मैं इसे रोक नहीं सकता। हम चर्चा चाहते हैं। हर राजनीतिक दल को अपनी राय रखने का अधिकार है और देश सुनना चाहता है कि संशोधन विधेयक पर किस राजनीतिक दल का क्या रुख है? संसद में रखी गई बातें हजारों सालों तक दर्ज रहेगी। रिकॉर्ड में यह दर्ज होगा कि किसने संशोधन विधेयक का विरोध और किसने समर्थन किया। कल लोकसभा में विधेयक होगा पेश वक्फ संशोधन विधेयक कल बुधवार को लोकसभा में विचार और पारित कराने के लिए लाया जाएगा. विपक्षी दल इस विधेयक का जमकर विरोध कर रहे हैं. सूत्रों ने बताया कि विधेयक पर सदन में 8 घंटे की प्रस्तावित चर्चा के बाद अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजीजू जवाब देंगे और वह इस विधेयक को पारित कराने के लिए सदन की मंजूरी लेंगे. इस मामले में सूत्रों ने बताया कि लोकसभा स्पीकर ओम बिरला की अध्यक्षता में कार्य मंत्रणा समिति (बीएसी) की बैठक में इस मामले पर चर्चा हुई. पिछले साल विधेयक पेश करते समय केंद्र सरकार ने इसे दोनों सदनों की एक संयुक्त संसदीय समिति (JPC) को भेजने का प्रस्ताव किया था. फिर जेपीसी की ओर से रिपोर्ट पेश किए जाने के बाद, उसकी सिफारिश के आधार पर केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मूल विधेयक में कुछ बदलावों को अपनी मंजूरी दे दी. लोकसभा में विधेयक पास किए जाने के बाद राज्यसभा को इसकी सूचना दी जाएगी. संसद का जारी बजट सत्र 4 अप्रैल को खत्म हो रहा है.

संघ के बिना BJP की कामयाबी नामुमकिन नहीं, बीजेपी-RSS ने बना लिया 2029 का भी प्लान!

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी राजनीतिक सफलता का श्रेय आरएसएस को हमेशा ही देते रहे हैं। हालांकि 11 साल प्रधानमंत्री रहने के बाद वह रविवार को पहली बार आरएसएस के मुख्यालय पहुंचे। पीएम मोदी इससे पहले 2013 में लोकसभा चुनाव की बैठक को लेकर नागपुर आए थे। पीएम मोदी ने आरएसएस के संस्थापक डॉ. केबी हेडगेवार के स्मारक पर जाकर श्रद्धांजलि दी। उन्होंने आरएसएस की तारीफ खरते हुए कहा कि यह एक संगठन नहीं बल्कि राजनीति की आत्मा है। उन्होंने कहा कि संघ एक अमर संस्कृति के वट वृक्ष की तरह है जो कि आधुनिकता से भी ओतप्रोत है। आरएसएस कार्यकर्ता के तौर पर ही शुरू हुआ राजनीतिक सफर पीएम मोदी ने कहा कि राष्ट्रीय चेताना का जो बीज 100 साल पहले बोया गया था वह एक वट वृक्ष का रूप ले चुका है। उन्होंने कहा कि आरएसएस के कार्यकर्ता पूरे देश में तन-मन से लोगों की सेवा कर रहे हैं। बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सफर 1972 में आरएसएस प्रचारक के तौर पर ही शुरू हुआ था। उनकी सक्रियता के चलते ही उन्हें 2001 में गुजरात का मुख्यमंत्री बना दिया गया था। आरएसएस के एक सीनियर पदाधिकारी ने कहा, इसमें कोई संदेह नहीं है कि बीजेपी का वैचारिक मेंटॉर आरएसएस है। इसके बावजूद बीजेपी ने आरएसएस से दूरी ही दिखाने की कोशिश की। सरकार और संघ का काम पूरी तरह अलग होता है। कई नेता इस बात को स्वीकार करते हैं कि उनका भविष्य आरएसएस की वजह से ही तय हो पाया है। फिर भी मैं यह स्पष्ट कर देना चाहता हूं कि आरएसएस कभी सरकार के कामकाज में कोई दखल नहीं देता है और ना ही इसका कोई राजनीतिक अजेंडा है। आरएसएस से अनबन की भी थी चर्चा 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान यह भी चर्चा थी की आरएसएस और बीजेपी की बन नहीं रही है। बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने यहां तक कहा था कि बीजेपी अब आत्मनिर्भर है। वहीं जब बीजेपी को हिंदी बेल्ट में सीटों का नुकसान हुआ तो आरएसएस प्रमुख ने भी कई बार इशारों-इशारों में खुले मंच पर नसीहत दे डाली। हालांकि लोकसभा में झटके के बाद बीजेपी ने फिर आरएसएस को अहमियत देनी शुरू की और इसका प्रभाव हरियाणा और महाराष्ट्र के विधानसभा चुनाव में दिखाई दिया। हालांकि आरएसएस नेता एचवी शेषाद्री ने कहा कि यह कोई डिबेट ही नहीं थी। जो लोग बीजेपी और आरएसएस दोनों को नहीं जानते हैं वही अनबन की अफवाह उड़ा रहे थे। इसके अलावा दो अहम कार्यक्रम भी आने वाले दिनों में होने वाले हैं। एक है बेंगलुरु में होने वाली बीजेपी कार्यकारिणी की बैठक और दूसरी आरएसएस का शताब्दी वर्ष समारोह। ऐसे में दोनों ही संगठन अपने संबंधों को नई ऊंचाई देने में ललगे हैं। अगले महीने बेंगलुरु में होने वाली कार्यकारिणी की बैठक में बीजेपी नए राष्ट्रीय अध्यक्ष का भी ऐलान कर सकती है। ऐसे में पीएम मोदी का आरएसएस मुख्यालय जाना अहम मानाजा रहा है। दो प्रधानमंत्रियों के दौरे के बीच कितना कुछ बदल चुका है? पच्चीस साल के लंबे अंतराल के बाद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के आंगन में भारत के दूसरे प्रधानमंत्री की आमद हुई है. अटल बिहारी वाजपेयी ने बतौर प्रधानमंत्री संघ के दफ्तर का दौरा 27 अगस्त 2000 को किया था. ये संघ की स्थापना का 75वां साल था. अब 25 वर्ष बाद RSS की यात्रा के शताब्दी वर्ष में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नागपुर संघ मुख्यालय की यात्रा की है. 11 साल पहले प्रधानमंत्री बनने के बाद नागपुर में आरएसएस मुख्यालय की अपनी पहली यात्रा में नरेंद्र मोदी ने संघ को भारत की अमर संस्कृति का ‘वट वृक्ष’ बताया. आरएसएस के एक पदाधिकारी ने बताया कि अटल बिहारी वाजपेयी ने प्रधानमंत्री के रूप में अपने तीसरे कार्यकाल के दौरान साल 2000 में यहां का दौरा किया था. संयोग है कि पीएम मोदी जब आरएसएस के दफ्तर पहुंचे हैं तो ये उनका तीसरा कार्यकाल है. संघ भारतीय संस्कृति का अक्षय वटवृक्ष- मोदी प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि हमारी संस्कृति को नष्ट करने के प्रयास किए गए भारतीय संस्कृति की चेतना कभी समाप्त नहीं हुई. स्वतंत्रता संग्राम से पूर्व डॉ.हेडगेवार और गुरुजी गोलवलकर ने भी इस राष्ट्रीय चेतना को बढ़ावा दिया. उन्होंने 100 वर्ष पहले जिस वटवृक्ष का बीजारोपण किया था, वह आज विशाल रूप में फैल चुका है. नरेंद्र मोदी ने कहा कि संघ का यह वटवृक्ष आदर्श और सिद्धांतों की वजह से टिक पाया है. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ भारत की राष्ट्रीय संस्कृति का कभी न समाप्त होने वाला अक्षय वटवृक्ष है. अब एक चौथाई सदी पहले उस मुलाकात की बात करते हैं जो तब हुई जब बतौर प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी संघ कार्यालय नागपुर पहुंचे थे. RSS और भारतीय जनता पार्टी के रिश्ते को वैचारिक और संगठनात्मक रूप से गहरा माना जाता है, जो समय के साथ विकसित हुआ है 10 मार्च, 2000 को के एस सुदर्शन संघ के प्रमुख बने तो देश में पीएम की कुर्सी पर वो व्यक्ति था जो कभी स्वयंसेवक रहा था. लेकिन अटल बिहारी वाजपेयी  के जमाने में स्वदेशी जागरण मंच, विहिप, भारतीय मजदूर संघ, किसान संघ जैसे संघ के अनुषांगिक संगठनों से कई मौकों पर टकराव होता रहा. हालांकि संघ के प्रति वाजपेयी की निष्ठा पर कोई सवाल ही नहीं था. 1995 में ऑर्गनाइजर में लिखे एक लेख में संघ को अपनी आत्मा बताया था. उन्होंने लिखा था, “आरएसएस के साथ लंबे जुड़ाव का सीधा कारण है कि मैं संघ को पसंद करता हूं. मैं उसकी विचारधारा पसंद करता हूं और सबसे बड़ी बात, लोगों के प्रति और एक दूसरे के प्रति आरएसएस का दृष्टिकोण मुझे भाता है और यह बस आरएसएस में मिलता है.” अटल के प्रधानमंत्री बनने के बाद एक दौर ऐसा भी आया, जब उनके संघ से रिश्ते कुछ असहज हो चले थे. उस वक्त संघ और सहयोगी संगठनों के नेता व्यक्तिगत हमले करने से भी नहीं चूकते थे. जबकि संघ में व्यक्तिगत नहीं बल्कि नीतिगत आलोचना की परंपरा रही. संघ विचारक दिलीप देवधर के अनुसार केएस सुदर्शन अपने विचारों को लेकर बहुत दृढ़ रहते थे. यह अटल बिहारी वाजपेयी जानते थे. यही वजह रहा कि भले ही रज्जू भईया ने उन्हें 1998 में उत्तराधिकारी घोषित कर दिया था, मगर उन्हें सर संघचालक का … Read more

BJP 7 अप्रैल से 12 अप्रैल तक ‘गांव चलो, बस्ती चलो’ अभियान संचालित करेगी

भोपाल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) 7 अप्रैल से 12 अप्रैल तक ‘गांव चलो, बस्ती चलो’ अभियान संचालित करेगी। इस दौरान कार्यकर्ता विभिन्न सामाजिक और सेवा कार्यों में भाग लेंगे। 2 अप्रैल को भोपाल में प्रदेश स्तरीय बैठक होगी, जिसमें अभियान, भाजपा स्थापना दिवस 6 अप्रैल और डॉ. भीमराव आंबेडकर जयंती 14 अप्रैल से जुड़े कार्यक्रमों की रूपरेखा बनेगी। 6 अप्रैल को कार्यकर्ता अपने घर और कार्यालयों में पार्टी का झंडा लगाएंगे। 14 अप्रैल को डॉ. भीमराव आंबेडकर की जयंती पर सामाजिक और संगठनात्मक कार्यक्रम होंगे। यह अभियान भाजपा को समाज के विभिन्न वर्गों तक पहुंचाने और जमीनी स्तर पर सक्रियता बढ़ाने में सहायक होगा। पार्टी स्थापना दिवस से लेकर 14 अप्रैल तक लगातार पार्टी के तमाम कार्यक्रम चलेंगे। इस बीच गांव चलो-बस्ती चलो अभियान में भाजपा के सभी कार्यकर्ताओं को 5 तरह की गतिविधियां संचालित करने का लक्ष्य दिया जाएगा। इनमें गांव या बस्ती के प्रमुख मंदिर और स्कूल में जाकर स्वच्छता अभियान चलाएंगे। अगल-अलग सरकारी योजना के 10 हितग्राहियों के घर जाकर संपर्क करेंगे। आंगनबाड़ी केंद्र, स्कूल, पशु चिकित्सालय, स्वास्थ्य केंद्र या पंचायत का दौरा करेंगे। जल संरचनाओं की सामूहिक सफाई करेंगे। भाजपा कार्यकर्ताओं के साथ पार्टी के झंडे के साथ यात्राएं निकालेंगे। बूथ समितियों की बैठक, अलग-अलग समुदायों के नेताओं और मीसाबंदी नेताओं के घर जाना, शाम को ग्रामीणों की चौपाल लगाना जैसे काम किए जांएंगे। 2 अप्रैल को होगी बैठक भाजपा ने 2 अप्रैल को राजधानी में संगठन के कामकाज को लेकर प्रदेश स्तरीय बैठक बुलाई है। इस बैठक में सभी प्रदेश पदाधिकारियों के साथ ही सभी जिलाध्यक्षों और पूर्व जिलाध्यक्षों को भी भोपाल बुलाया गया है। इस बैठक में पार्टी की स्थापना दिवस और आंबेडकर जयंती पर पार्टी के कार्यक्रमों की रूपरेखा तय की जाएगी। इसके साथ ही गांव चलें-बस्ती चलें अभियान को लेकर भी चर्चा होगी। ।

वक्फ से किसी गरीब मुसलमान को कोई लाभ नहीं मिला, केवल बेजा कब्जा करने वाले अमीर मुस्लिम नेताओं का फायदा हुआ :मंत्री सारंग

भोपाल वक्फ बोर्ड बिल के विरोध में मुसलमानों ने काली पट्टी बांधकर नमाज पढ़ी। इसको लेकर मंत्री विश्वास सारंग ने प्रतिक्रिया दी। मंत्री ने कहा कि जब पाकिस्तान में आतंकवादी हमले करता हैं, बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदुओं पर अत्याचार होता है और मुंबई में आतंकवादी हमले होते हैं, तब किसी ने काली पट्टी नहीं बांधी। कश्मीर में पंडितों पर हुए अत्याचार के समय भी पट्टी नहीं बांधी गई। सारंग ने कहा कि बिना वक्फ बोर्ड बिल को पढ़े इसका विरोध करना गलत है। उन्होंने यह भी कहा कि वक्फ से किसी गरीब मुसलमान को कोई लाभ नहीं मिला, बल्कि यह केवल बेजा कब्जा करने वाले अमीर मुस्लिम नेताओं का फायदा हुआ है। इसके अलावा, भोपाल में ईदगाह के बाहर फलस्तीन के समर्थन में बैनर लेकर पहुंचने पर मंत्री ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि फिरकापरस्त विचारधारा को उन्माद फैलाने की कोशिश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। प्रियंका गांधी द्वारा संसद में फिलीस्तीन के बैग को लेकर दिए गए बयान पर तंज करते हुए उन्होंने कहा कि कांग्रेस और विपक्ष के नेता तुष्टिकरण की राजनीति के लिए गिरने की हद तक जा रहे हैं। सारंग ने यह भी कहा कि बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्याचार होते हैं, लेकिन प्रियंका गांधी को उन हिंदुओं के समर्थन में कोई पहल करने का समय नहीं मिलता। उन्होंने चेतावनी दी कि ईद के मौके पर इस तरह के बैनर लगाकर अराजकता फैलाने की कोशिशों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सारंग ने देशवासियों से कहा कि जो लोग हिंदुस्तान में रहते हुए फिरकापरस्ती की मानसिकता रखते हैं, उन्हें यह समझना चाहिए कि अगर वे हिंदुस्तान की धरती पर हैं, तो उन्हें हिंदुस्तान की सोच को समझना होगा।  

जिन्होंने सांसद के घर पर हमला किया, वह भी गलत: पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह

भोपाल मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने सपा सांसद रामजीलाल सुमन के बयान को लेकर अपनी बात रखी है. उन्होंने कहा कि राणा सांगा जैसा कोई योद्धा हुआ ही नहीं. शरीर पर सौ घाव होते हुए भी आखिरी दम तक वह लड़ते रहे. उन्हें गद्दार कहना उचित नहीं. साथ ही जिन्होंने सांसद के घर पर हमला किया, वह भी गलत है. वक्फ संशोधन बिल को लेकर पूछे सवाल पर पूर्व सीएम ने कहा कि देश में अल्पसंख्यक हित का जो प्रावधान है, उसके हिसाब से अल्पसंख्यक हितों के संरक्षण की आवश्यकता है, उसमें बदलाव की जरूरत नहीं. उन्होंने कहा कि आज देश में गरीबी, महंगाई व बेरोजगारी सहित कई मुद्दे हैं, इन पर सरकार बोलती नहीं, इनके पास हिन्दू – मुसलमान के अलावा कोई रास्ता नहीं. डबल इंजन की सरकार पूरे तरीके से हिन्दू -मुसलमान कर रही है.   बागेश्वर धाम के पंडित धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री के सनातन धर्म के ब्रांड एम्बेसडर बनने के सवाल पर दिग्विजय सिंह ने कहा कि समाज में कटुता फैलाने वाला कभी सनातन धर्म का ब्रांड एम्बेसडर नहीं हो सकता. बता दें कि दिग्विजय सिंह ने ये बातं दिल्ली जाते समय रेलवे स्टेशन पर मीडिया से चर्चा करते हुए कहीं.  

चुनाव होने तक PM मोदी का अभी सिर्फ बिहार प्रेम ही दिखेगा: प्रशांत किशोर

पटना जन सुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर (Prashant Kishor) ‘जन सुराज उद्घोष यात्रा’ के तहत एक दिवसीय दौरे पर कटिहार पहुंचे, जहां केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बिहार दौरे पर तंज कसते हुए कहा कि बिहार में चुनाव है, इसलिए नवंबर तक अमित शाह और मोदी का सिर्फ बिहार प्रेम ही दिखेगा. अब चुनाव तक हर केंद्रीय योजना का शिलान्यास बिहार से होगा, किसान सम्मान निधि का पैसा भी बिहार से भेजा जाएगा. अब चुनाव तक बिहार का गौरवशाली इतिहास ही दिखेगा. प्रशांत किशोर ने कसा अमित शाह पर तंज प्रशांत किशोर ने ये भी कहा कि पीएम मोदी और अमित शाह का प्रेम सिर्फ चुनाव तक ही दिखेगा. मोदी और शाह सिर्फ वहीं कैंप करते हैं, जहां चुनाव होते हैं. अभी बिहार में चुनाव है, इसलिए बिहार उसके बाद मोदी शाह का बंगाल और तमिलनाडु के प्रति प्रेम दिखेगा. उन्होंने कहा कि अमित शाह को बताना चाहिए कि केंद्र सरकार ने बिहार के विकास के लिए क्या किया है. अमित शाह को बताना चाहिए कि पिछले 11 वर्षों में एनडीए सरकार ने बिहार में कितनी फैक्ट्रियां लगाई हैं. पीके ने सड़क पर नमाज पढ़ने को लेकर सीएम योगी पर हमला किया और बोले कि यूपी और बिहार में फर्क है. सीएम योगी की पूरी राजनीति ही हिन्दू-मुस्लिम ध्रुवीकरण पर चलती है, प्रशांत किशोर ने बिहार के पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश में चल रही ध्रुवीकरण की राजनीति के लिए यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को जिम्मेदार ठहराया और कहा कि योगी की पूरी राजनीति हिंदू-मुस्लिम ध्रुवीकरण पर चलती है. प्रशांत किशोर ने कहा कि यूपी और बिहार में फर्क है. बिहार में हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदाय के लोग लंबे समय से मिलजुल कर रहते आ रहे हैं, इसलिए बिहार में हिंदू-मुस्लिम ध्रुवीकरण की राजनीति के लिए कोई जगह नहीं है. यहां कुछ लोग धर्म के नाम पर मुसलमानों को डरा सकते हैं, लेकिन यहां के इतिहास में कभी हिंदू-मुस्लिम ध्रुवीकरण नहीं हुआ और हमारी कामना है कि भविष्य में इसकी कोई संभावना न रहे और बिहार यूपी न बने। कुणाल कामरा के पक्ष मेंं क्या बोले पीके? कुणाल कामरा के पक्ष में बोलते हुए प्रशांत किशोर ने कहा कि कुणाल मेरे मित्र हैं, वे देश को प्यार करने वाले व्यक्ति हैं, उनके शब्दों का चयन गलत हो सकता है लेकिन उनकी मंशा गलत नहीं थी. प्रशांत किशोर ने कुणाल कामरा की स्टैंड अप कॉमेडी पर चल रहे विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि कुणाल मेरे मित्र हैं. उनके बारे में मेरी जो जानकारी है, उसके आधार पर मैं कह सकता हूं कि वह देश से प्यार करने वाले व्यक्ति हैं. उनकी कोई राजनीतिक दुश्मनी नहीं है. वह पुडुचेरी में रहते हैं और वहां जैविक खेती के साथ-साथ स्टैंड अप कॉमेडी भी करते हैं.

उटपटांग बोलने के बजाये राहुल गांधी RSS कार्यालय जाकर देखें, बाबूलाल मरांडी की नसीहत

पटना झारखंड प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष और राज्य विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने कहा कि कांग्रेस के लोगों को अगर यह समझना है कि संघ क्या है और देशभक्ति क्या होती है, तो उन्हें आरएसएस कार्यालय जाना चाहिए. राहुल गांधी जहां-तहां जाकर ‘अल्ल-बल्ल’ बोलते रहते हैं. अच्छा हो कि वह संघ कार्यालय जाकर इस संगठन को समझें. मरांडी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नागपुर स्थित संघ मुख्यालय जाने पर कांग्रेस के नेताओं की आलोचना पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए ये बातें कहीं. उन्होंने मीडिया से बातचीत करते हुए सवाल उठाया कि प्रधानमंत्री राष्ट्र भक्तों के संगठन के मुख्यालय में गए हैं तो कांग्रेसियों के पेट में दर्द क्यों हो रहा है? पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस पार्टी तो कसाब जैसे आतंकवादी को बचाने के लिए रात-दिन एक कर देती है. प्रधानमंत्री  वहां गए, जहां देशभक्ति पढ़ाई जाती है. संघ लोगों को देश के लिए ना-मरना सिखाता है. ‘देशवासियों को प्रेरित करने वाला होता है उद्बोधन मरांडी ने रांची के मोरहाबादी में बीजेपी के कई नेताओं-कार्यकर्ताओं के साथ प्रधानमंत्री मोदी के “मन की बात” के 120वें एपिसोड का सीधा प्रसारण सुना. उन्होंने कहा कि प्रत्येक माह के अंतिम रविवार (30 मार्च) को प्रधानमंत्री का यह उद्बोधन देशवासियों को प्रेरित करने वाला होता है. इसमें वह किसी राजनीति की बात नहीं करते. भारत प्राचीन और गौरवशाली सांस्कृतिक विरासत वाला देश है. इसके प्रेरक उद्धरण प्रधानमंत्री हर एपिसोड में देते हैं. लोग इस प्रसारण से भारत की परंपरा, संस्कृति, विरासत, योग, आयुर्वेद के बारे में उपयोगी जानकारी प्राप्त करते हैं. कार्यकर्ताओं के साथ मन की बात का सुना प्रसारण मरांडी ने कहा कि आज प्रधानमंत्री मोदी ने विदेशों में बसे भारतीय मूल के लोगों के अपनी विरासत और संस्कृति से जुड़े रहने के प्रेरक उदाहरण दिए. उन्होंने गौरवशाली अतीत से प्रेरित होते हुए विकसित भारत, एक भारत, श्रेष्ठ भारत बनाने में हर नागरिक की भूमिका सुनिश्चित करने का आह्वान किया. बीजेपी के क्षेत्रीय संगठन महामंत्री नागेंद्र त्रिपाठी, प्रदेश संगठन महामंत्री कर्मवीर सिंह, प्रदेश महामंत्री एवं सांसद आदित्य साहू, डॉ. प्रदीप वर्मा, मनोज सिंह सहित प्रदेश बीजेपी के अन्य पदाधिकारियों ने रांची में अलग-अलग बूथों पर कार्यकर्ताओं के साथ मन की बात का प्रसारण सुना.

ओवैसी के ‘देश को आरएसएस की विचारधारा से खतरा है’ वाले बयान पर भाजपा ने किया पलटवार

नई दिल्ली एआईएमआईएम नेता असदुद्दीन ओवैसी के ‘देश को आरएसएस की विचारधारा से खतरा है’ वाले बयान पर भाजपा ने पलटवार किया है। भाजपा नेता ने कहा कि मैं इतना ही कहूंगा कि वह धर्म के नाम पर देश को गुमराह करना बंद करें। भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ ने मीडिया से बातचीत में कहा, “कुछ मुस्लिम और कांग्रेस नेताओं ने वक्फ संपत्तियों पर अवैध कब्जा किया है। आज ये कब्जाधारी और लुटेरा गिरोह घबराहट में हैं। उनमें चिंता, निराशा और हताशा भरी हुई है, इसलिए कुंठित मानसिकता के साथ भ्रम की स्थिति पैदा की जा रही है। ओवैसी को धर्म के नाम पर देश को गुमराह करना बंद करना चाहिए। मोदी सरकार ने संसद के पटल पर स्पष्ट रूप से कहा है कि वक्फ संशोधन विधेयक का उद्देश्य वक्फ संपत्तियों को माफिया नियंत्रण से मुक्त करना, गरीब मुस्लिम परिवारों को सशक्त बनाना है। साथ ही वक्फ में पारदर्शिता लाना है और मनमाने ढंग से दुरुपयोग न हो, उसे रोकना है। राहुल गांधी और ओवैसी जैसे नेता देश में नफरत की राजनीति कर रहे हैं।” उन्होंने कहा कि मैं सोचता हूं कि उन्हें (राहुल गांधी और ओवैसी) मुस्लिम महिलाओं का दर्द क्यों नहीं दिखता है? क्या वे मुस्लिम महिलाओं को दिए गए अधिकारों से उन्हें वंचित करना चाहते हैं? या फिर वे गरीब मुस्लिम परिवारों का भला होते देखना नहीं चाहते हैं। भूमाफिया के हाथों में खेल रहा यह लुटेरा गैंग वक्फ पर कब्जा करना चाहता है। तरुण चुघ ने नेहरू-गांधी परिवार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, “नेहरू-गांधी परिवार 7 दशकों से, चार पीढ़ियों से, देश में अपने परिवारवाद, भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद और लूट को स्थापित करने के लिए काम कर रहा है। वे चार पीढ़ियों से लगातार राष्ट्रवादी ताकतों को अपमानित करने, उनके खिलाफ षड्यंत्र करने और उन्हें खत्म करने का प्रयास कर रहे हैं। राहुल गांधी के नाना-नानी और दादी ने जो षड्यंत्र किया, उसके बावजूद वे राष्ट्रवादी शक्तियों को रोक नहीं पाए। उनके ये मंसूबे कामयाब नहीं होंगे।” इससे पहले लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के ‘कांग्रेस के सामने भाजपा-आरएसएस मजाक’ वाले बयान पर भाजपा नेता मुख्तार अब्बास नकवी ने पलटवार किया। उन्होंने कहा कि वह परिवार के घोंसले और पप्पू की सोच से बाहर नहीं निकल पाएंगे। भाजपा नेता मुख्तार अब्बास नकवी ने आईएएनएस से बातचीत में कहा, “राहुल गांधी की एक ही समस्या है, वह आज भी डेमोक्रेसी को डायनेस्टी का डिज्नीलैंड समझते हैं। जब तक यह डेमोक्रेसी का डिज्नीलैंड समझते रहेंगे, तब तक यह परिवार के घोंसले और पप्पू की सोच से बाहर नहीं निकल पाएंगे।”

विधायक रामेश्वर शर्मा ने कहा कि किसी भी मुसलमान का मस्जिद, दरगाह कब्रिस्तान नहीं छीना जाएगा

भोपाल  मध्य प्रदेश में ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की अपील पर सियासत शुरू हो गई है। इस पर भारतीय जनता पार्टी का बयान सामने आया है। बीजेपी विधायक रामेश्वर शर्मा ने पूछा कि पता नहीं काली पट्टी बांधकर दुआएं कबूल होगी की नहीं ? वहीं उन्होंने कहा कि ईद के मौके पर खुश रहना चाहिए, मिठी ईद है मीठा खाओ मीठा बोलो… भोपाल की हुजूर सीट से बीजेपी विधायक रामेश्वर शर्मा ने काली पट्टी बांधकर जुमे की नमाज पढ़ने वाली अपील पर प्रतिक्रिया दी हैं। उन्होंने कहा कि वक्फ की जमीन पर मुस्लिम समाज के कुछ लोगों का कब्जा है। इससे मुस्लिम समाज के गरीब वर्ग को कोई फायदा नहीं होता। वक्फ की जमीन से सरकार उन गरीबों का भला करेगी। भारत में मुसलमान पर किसी तरह का कोई खतरा नहीं है। मुस्लिम लोग नमाज, मस्जिद, रोजा हमेशा हिंदुस्तान में रखेंगे। भारत हिंदुओं की जमीन है, लेकिन यहां पर मुसलमानों को मस्जिद बनाने की इजाजत दी। रामेश्वर शर्मा ने आगे कहा कि पता नहीं काली पट्टी बांधकर दुआएं कबूल होगी की नहीं ? ईद के मौके पर खुश रहना चाहिए, मिठी ईद है मीठा खाओ मीठा बोलो…दो चार परिवार तथाकथित बड़े मुस्लिम लीडर है, जो मुसलमान के नाम पर नेतागिरी कर पेट भरते हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी मुसलमान का मस्जिद, दरगाह कब्रिस्तान नहीं छीना जाएगा। जब मुसलमान भारत आए थे तब शुद्ध भारत हिंदू राष्ट्र था, तब मुसलमान को रहने की जगह, मस्जिद बनाने की जगह दी। खतरा उन्हें होगा जो हिंदुस्तान के खिलाफ साजिश रचेंगे। गौरतलब है कि ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने रमजान महीने के आखिरी जुमे पर मुस्लिम समाज से काली पट्टी बांधकर नमाज पढ़ने की अपील की है। बोर्ड ने वक्फ संशोधन विधेयक 2024 के खिलाफ शांतिपूर्ण और मौन प्रदर्शन करने को कहा है। इस पर अब जुबानी जंग तेज हो गई है।

NDA के सरताज होगा Bihar, मांझी-चिराग और उपेंद्र की रणनीति तैयार

पटना बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की तैयारियों को लेकर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के चार प्रमुख सहयोगी दलों की एक महत्वपूर्ण बैठक नई दिल्ली में आयोजित हुई। इस बैठक में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व और चुनावी रणनीतियों पर व्यापक चर्चा की गई। बैठक में हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर) के प्रमुख जीतन राम मांझी, लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख चिराग पासवान, राष्ट्रीय लोक मोर्चा (आरएलएम) के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा सहित अन्य वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। बैठक का आयोजन बीजेपी नेता संजय जासवाल के आवास पर किया गया, जिसमें जेडीयू नेता संजय झा भी शामिल हुए। 225 सीटों पर जीत का दावा बैठक के बाद केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने कहा कि बिहार में NDA की बड़ी जीत तय है। उन्होंने दावा किया कि गठबंधन को 225 से अधिक सीटें मिलेंगी। उन्होंने कहा, बिहार चुनाव की तैयारियों पर आगे पटना में विस्तृत चर्चा की जाएगी। NDA की मौजूदा स्थिति को देखते हुए हमें जनता का भरपूर समर्थन मिलेगा। सीट शेयरिंग और रणनीति पर चर्चा केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने कहा कि बैठक का कोई खास उद्देश्य नहीं था, लेकिन यह चुनावी वर्ष होने के कारण रणनीतियां तय करने का समय है। उन्होंने कहा, हम चुनाव में किस सोच के साथ जाएंगे, सरकार की उपलब्धियां जनता के बीच कैसे रखी जाएंगी, और सीट शेयरिंग समेत अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की गई। NDA इस बार ऐतिहासिक जीत दर्ज करेगा और 225 से अधिक सीटों पर जीत सुनिश्चित होगी। एनडीए के सामने कोई गठबंधन नहीं टिकेगा आरएलएम प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा ने बैठक को NDA की मजबूती का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा, यह एक आपसी विचार-विमर्श का कार्यक्रम था। चुनावी वर्ष में जब राजनीतिक दलों के नेता मिलते हैं, तो चुनाव को लेकर चर्चा होना स्वाभाविक है। हम सभी चुनाव की तैयारियों में पूरी तरह जुटे हुए हैं। बिहार में NDA की स्थिति बेहद मजबूत है और हमारे सामने कोई अन्य गठबंधन टिकने वाला नहीं है। सभी चीजें तय हैं और इसी आधार पर हम चुनाव जीतेंगे। आगे की रणनीति पर मंथन जारी बैठक में शामिल नेताओं ने यह भी संकेत दिया कि बिहार चुनाव को लेकर आगे पटना में विस्तृत बैठक होगी, जहां सीटों के बंटवारे और चुनाव प्रचार की रणनीति को अंतिम रूप दिया जाएगा। बिहार में NDA सरकार की उपलब्धियों को जनता के बीच प्रभावी ढंग से पहुंचाने पर भी जोर दिया जाएगा। बिहार में सत्तारूढ़ NDA के नेताओं का यह आत्मविश्वास बताता है कि वे आगामी चुनाव को लेकर पूरी तरह तैयार हैं। अब देखना यह होगा कि विपक्षी दल महागठबंधन इस चुनौती का किस तरह सामना करते हैं।

हाल ही में ई पलानीस्वामी और अमित शाह की मुलाकात हुई थी, स्टालिन को मात देने के लिए BJP और AIADMK मिलाएंगे हाथ?

नई दिल्ली तमिलनाडु में सियासी पार हाई है। पिछले कुछ दिनों से परिसीमन और ट्राइल लैंग्वेज पॉलिसी को लेकर डीएमके और भाजपा आमने सामने है। अगले साल राज्य में विधानसभा चुनाव है। एक तरफ जहां, भाजपा और डीएमके नेताओं के बीच तीखी नोकझोंक चल रही है। वहीं, दूसरी ओर AIADMK आगामी विधानसभा चुनाव की प्लानिंग में जुट गई है। भाजपा और डीएमके के बीच चल रही सियासी संघर्ष पर AIADMK की पैनी नजर है। क्या हो सकती है भाजपा-AIADMK में गठबंधन? अटकलें लगाई जा रही है कि AIADMK और भाजपा के बीच गठबंधन हो सकती है। हालांकि, एआईएडीएमके नेता ई पलानीस्वामी ने अभी इस मामले पर चुप्पी साध रखी है। हाल ही में ई पलानीस्वामी और अमित शाह की मुलाकात हुई थी। मीडिया से बात करते हुए AIADMK नेता ने कहा कि गठबंधन पर कोई भी फैसला चुनावों के करीब आने पर लिया जाएगा। “यह राजनीति है, राजनीतिक स्थिति के अनुसार बदलाव होते रहेंगे। उन्होंने आगे कहा,”हम अभी कैसे बता सकते हैं? 2019 के चुनाव के समय हमने कब गठबंधन किया था? फरवरी में हमने घोषणा की थी। इसी तरह, हम समान विचारधारा वाले दलों से बात करेंगे और चुनाव नजदीक आने पर गठबंधन पर फैसला लेंगे।” ट्राई लैंग्वेज पॉलिसी पर क्या बोली AIADMK? एआईएडीएमके नेता ई पलानीस्वामी ने कहा, तमिलनाडु के छात्रों के लिए दो-भाषा फॉर्मूले पर AIADMK का रुख भी स्पष्ट है। उन्होंने कहा, “दो-भाषा (फॉर्मूला) सीएन अन्नादुरई, एमजीआर और अम्मा (जे जयललिता) के समय से AIADMK से चलती आई है। इसे तमिलनाडु में जारी रहना चाहिए।” एआईएडीएमके और भाजपा के बीच चुनावी साझेदारी का लंबा इतिहास रहा है, जिसमें कई बार टूट-फूट और सुलह हुई है। 1998 के आम चुनाव में जे जयललिता की अगुवाई वाली पार्टी ने भाजपा के साथ गठबंधन किया था और राज्य में 39 में से 30 सीटें जीती थीं। AIADMK और भाजपा के गठबंधन का इतिहास हालांकि, अगले साल एआईएडीएमके ने अटल बिहारी वाजपेयी सरकार से अपना समर्थन वापस ले लिया, ऐसा तब हुआ जब श्री वाजपेयी ने तमिलनाडु में डीएमके सरकार को बर्खास्त करने से इनकार कर दिया था।  इसके बाद 2004 के लोकसभा चुनावों में भाजपा और AIADMK के बीच गठबंधन हुआ था, लेकिन एआईएडीएमके ने सिर्फ एक सीट जीती, जबकि राज्य में भाजपा को एक भी सीट नहीं मिली थी। नेशनल एजुकेशन पॉलिसी के तहत अब देश के हर राज्य में सभी छात्रों को तीन भाषाएं सीखनी होंगी। इनमें से एक हिंदी हो सकती है। हालांकि, यह तय करने का अधिकार शिक्षण संस्थाओं के पास होगा कि वे कौन सी तीन भाषाएं पढ़ाएंग। पॉलिसी में सिफारिश की गई है कि छात्र-छात्राओं को तीन भाषाएं सीखनी होंगी। स्टालिन सरकार इस पॉलिसी की खिलाफत कर रही है। उनका कहना है कि भाजपा जबरदस्ती राज्य पर हिंदी नहीं थोप सकती है। स्टालिन ने कहा कि जिन-जिन राज्यों में हिंदी को थोपा गया, वहां की क्षेत्रीय भाषा खत्म हो गई।

रॉबर्ट वाड्रा ने कहा स्पीकर की तरफ से राहुल गांधी का पक्ष सुने बिना सदन को स्थगित करना सही नहीं है

नई दिल्ली कांग्रेस महासचिव और सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा के पति रॉबर्ट वाड्रा ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के ‘मुझे सदन में नहीं बोलने दिया जाता है’ वाले बयान का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि स्पीकर की तरफ से राहुल गांधी का पक्ष सुने बिना सदन को स्थगित करना सही नहीं है। रॉबर्ट वाड्रा ने मिडिया से बातचीत में कहा, “राहुल गांधी जब सदन में बोलते हैं, तो वे विपक्ष और जनता से जुड़े असल मुद्दों को उठाते हैं। भाजपा इस पर बात नहीं करना चाहती है इसलिए उनको (राहुल गांधी) रोक दिया जाता है।” वहीं बुधवार को लोकसभा स्पीकर ओम बिरला की ओर से सांसद राहुल गांधी को पढ़ाए गए मर्यादा के पाठ पर भी वाड्रा बोले। उन्होंने कहा, “दोनों भाई-बहन ने अपने परिवार से यही सीखा है कि आदर और प्रेम से रहें। वे जब मिलते हैं, तो खुशी से मिलते हैं और यही हमें सिखाया गया है। हम भाजपा की तरह नहीं हैं, जो रिश्ते तोड़ती है और अपनी शादी जैसे रिश्तों को भी बनाए नहीं रखती।” उन्होंने आगे कहा, “मुझे लगता है राहुल गांधी को अपनी बात रखनी चाहिए और उनको संसद में बोलने से रोका नहीं जाना चाहिए।” संभल प्रशासन द्वारा सड़कों या छतों पर नमाज़ पढ़ने पर रोक लगाने पर रॉबर्ट वाड्रा ने कहा, “जब भी कोई शख्स मुश्किल में होता है, तो वह अपने भगवान को याद करता है, न कि किसी मंत्री के बारे में, क्योंकि उस समय कोई मंत्री नहीं आने वाला है। जो लोग मंदिर या मस्जिद जाते हैं, वे मुश्किल समय को याद कर प्रार्थना करते हैं, ताकि उनकी परेशानी टल जाए। अगर भाजपा धर्म की राजनीति करती है या फिर धर्म के आधार पर बांटती है, कहती है कि यहां नमाज नहीं पढ़ी जा सकती है और मीट की दुकानों को बंद किया जाए या फिर औरंगजेब के नाम पर मौजूद स्थानों के नाम बदले जाएं, तो इस तरीके की राजनीति हानिकारक है। इससे प्रगति नहीं आएगी और सभी लोग बंट जाएंगे। जिस तरह से सीएम योगी ने कहा, ‘बंटोगे तो कटोगे’, ऐसी सोच कोई मुख्यमंत्री रखेगा, तो हम लोग कभी भी आगे नहीं बढ़ पाएंगे।” उन्होंने आगे कहा, “यह हानिकारक है और नई पीढ़ी निश्चित रूप से इससे खुश नहीं होगी। इस तरह की हरकतों से हम देश में क्या हासिल करेंगे? असली मुद्दे, चाहे वे किसानों से जुड़े हों या महंगाई से, कभी चर्चा नहीं होती। देश में भेदभाव की राजनीति नहीं होनी चाहिए और लोगों को अपनी आस्था के अनुसार प्रार्थना करने की अनुमति होनी चाहिए। मुझे लगता है कि देश में भेदभाव की राजनीति नहीं होनी चाहिए।” रॉबर्ट वाड्रा ने कहा, “मैं पूरे देश में धार्मिक दौरा करता हूं और हर धर्म के लोगों से सीखता हूं कि उनकी प्रार्थनाएं क्या हैं या फिर उनकी सोच क्या कहती है। उस समय मेरा हमेशा फोकस यह नहीं रहता है कि हमें मीडिया के सामने दिखना चाहिए और यही सोच राहुल गांधी की भी है। हम नहीं चाहते कि कुंभ मेले में जाएं, तो वहां हमारे लिए वीआईपी इंतजाम किए जाएं, जिससे लोगों को असुविधा हो या उन पर किसी भी तरह की कोई रोक लगाई जाए। मेरी सोच में दिखावे की राजनीति नहीं होनी चाहिए और ऐसी जगह पर बेरोक-टोक आया-जाया जाना चाहिए।”

राहुल गांधी ने ओम बिरला की टिप्पणी पर सख्त ऐतराज जताया, सदन को अलोकतांत्रिक तरीके से चलाया जा रहा है

नई दिल्ली लोकसभा स्पीकर ओम बिरला पर नेता विपक्ष राहुल गांधी ने सदन में बोलने का मौका न देने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि सदन को अलोकतांत्रिक तरीके से चलाया जा रहा है। राहुल गांधी पर स्पीकर ओम बिरला ने टिप्पणी की थी और कहा कि किसी भी सदस्य का व्यवहार सदन की गरिमा के अनुसार होना चाहिए। स्पीकर ने कहा था कि मेरे संज्ञान में ऐसे कई मामले आए हैं, जिनमें सदस्यों का व्यवहार सदन की गरिमा के अनुरूप नहीं रहा। इस सदन में पिता और बेटी, मां और बेटी और पति एवं पत्नी भी मेंबर के तौर पर बैठते हैं। इसलिए नेता विपक्ष से अपेक्षा की जाती है कि वह अपना व्यवहार सदन के रूल 349 के अनुसार ही रखें। उनकी इस टिप्पणी पर राहुल गांधी ने सख्त ऐतराज जताया। उन्होंने कहा कि मैंने ऐसा कुछ नहीं किया है और सदन को अलोकतांत्रिक तरीके से चलाया जा रहा है। लोकसभा अध्यक्ष बिरला ने बुधवार को शून्यकाल के बाद नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से कहा कि वह सदन के नियमों और परंपराओं के अनुरूप आचरण करें तथा उनसे ऐसी अपेक्षा भी की जाती है। इसके बाद उन्होंने सदन की कार्यवाही दो बजे तक स्थगित कर दी। सदन की कार्यवाही स्थगित होने के बाद कांग्रेस के सांसदों ने बिरला से मुलाकात की और नेता प्रतिपक्ष को ‘बोलने का मौका नहीं देने’ को लेकर विरोध दर्ज कराया। राहुल गांधी ने संसद परिसर में ही मीडिया से बातचीत में कहा, ‘लोकसभा अध्यक्ष ने मेरे बारे में कुछ बोला। जब मैं खड़ा हुआ तो वह उठकर चले गए और सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी।’ उन्होंने दावा किया, ‘जब भी मैं सदन में बोलने के लिए खड़ा होता हूं तो बोलने नहीं दिया जाता, जबकि यह परंपरा रही है कि नेता प्रतिपक्ष खड़ा हो तो उसे बोलने दिया जाए। पता नहीं किस प्रकार से सदन से चल रहा है।’ राहुल गांधी ने कहा, ‘मैंने कुछ नहीं किया है। मैं शांति से बैठा था। पिछले सात-आठ दिन में मैंने कुछ नहीं बोला। लोकतंत्र में सरकार और विपक्ष दोनों की जगह होती है, लेकिन यहां लोकतंत्र की जगह नहीं है। पता नहीं कि लोकसभा अध्यक्ष की क्या सोच है।’ उन्होंने आरोप लगाया कि सदन को अलोकतांत्रिक तरीके से चलाया जा रहा है। सदन में कांग्रेस के उप नेता गौरव गोगोई ने आरोप लगाया कि नेता प्रतिपक्ष को बोलने का मौका नहीं दिया जाता है। उन्होंने दावा किया कि भाजपा के कोई सांसद या मंत्री सिर्फ खड़े हो जाते हैं तो उन्हें बोलने की खूली छूट मिल जाती है। गोगोई का कहना था, ‘जब सुषमा स्वराज जी नेता प्रतिपक्ष थीं तो लोकसभा में उन्हें क्या सम्मान मिलता था, हम सबने देखा है।’ उन्होंने कहा, ‘हम लोकसभा अध्यक्ष से मिले और अपनी आपत्ति दर्ज कराई और नेता प्रतिपक्ष की गरिमा की जो अवहेलना हो रही है, उसके बारे में बताया है।’ उनका कहना था कि लोकसभा अध्यक्ष से कोई संतोषजनक उत्तर नहीं मिला है। गोगोई ने कहा, ‘हम चाहते हैं कि सदन चले, लेकिन यह एक साजिश है ताकि सदन में माहौल खराब हो।’

बिहार विधानसभा चुनाव में MP के नेता ‘मेरा बूथ-सबसे मजबूत’ का करेंगे आकलन

भोपाल  कुछ महीने बाद होने वाले बिहार विधानसभा चुनाव की तैयारी के लिए मध्य प्रदेश के अनुभवी कार्यकर्ताओं को भी वहां भेजा जाएगा। पूर्व जिलाध्यक्ष, पूर्व पदाधिकारी, पूर्व संगठन मंत्री और महिला कार्यकर्ताओं सहित लगभग 250 नेताओं की टीम बिहार भेजी जाएगी। कुछ मंत्रियों और वरिष्ठ नेताओं को भी जिलों की कमान दी जाएगी। ये लोग वहां चुनाव से पहले बूथ प्रबंधन का काम देखेंगे। प्रदेश के संगठन क्षमता वाले कार्यकर्ताओं का पार्टी कई राज्यों में उपयोग करती रही है। बिहार दिवस से हुई शुरुआत     हाल ही में बिहार दिवस पर वहां के नेताओं ने मध्य प्रदेश आकर ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ का कार्यक्रम कर लोगों को जोड़ने का काम आरंभ कर दिया है ताकि ये लोग बिहार के अपने रिश्तेदारों को भाजपा के साथ जोड़ सकें।     अलग-अलग क्षेत्र में भी दोनों राज्यों में रोटी-बेटी के संबंध वाले लोगों की संख्या बहुत है। यही वजह है कि प्रदेश के नेताओं को बिहार में अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों में तैनात किया जाएगा।     मध्य प्रदेश से भेजे जाने वाले नेता-कार्यकर्ता बूथ से लेकर शक्ति केंद्र, मंडल और जिलों में तैनात किए जाएंगे। यहां संगठन को चुनावी तैयारियों के लिहाज से ये नेता-कार्यकर्ता प्रशिक्षित करेंगे।     ‘मेरा बूथ-सबसे मजबूत’ के लक्ष्य को बिहार भाजपा संगठन ने कितना प्राप्त किया है और उसमें यदि कुछ कमी रह गई है, तो इसका आकलन कर वहां के कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण भी देंगे।     परोक्ष रूप से केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह बिहार चुनाव पर अभी से नजर रख रहे हैं। बता दें, मध्य प्रदेश से कुछ समय पहले हुए दिल्ली और उससे पहले गुजरात व झारखंड के विधानसभा चुनाव में भी कार्यकर्ताओं को भेजा गया था।     मध्य प्रदेश के साथ इन राज्यों में भी रोटी-बेटी के संबंध वाले लोगों की संख्या बहुत है। गुजरात विधानसभा चुनाव की तैयारी के लिए 92 अनुभवी कार्यकर्ताओं को भेजा गया था। तब प्रदेश भाजपा उपाध्यक्ष जीतू जिराती और पूर्व संगठन मंत्री श्याम महाजन को जिम्मेदारी सौंपी गई थी। अनुभवी कार्यकर्ताओं को भेजती है पार्टी भाजपा विधानसभा चुनाव में विभिन्न राज्यों से उन कार्यकर्ताओं को पहले ही बुला लेती है, जिन्हें कई राज्यों में चुनाव के दौरान सांगठनिक कार्यों का लंबा अनुभव हो। इन जमीनी कार्यकर्ताओं को विधानसभा क्षेत्र की सामाजिक, आर्थिक और भौगोलिक स्थिति के अनुसार रणनीति बनाने में महारत होती है। परिवार के नाते…     किसी भी राज्य में चुनाव होते हैं तो परिवार के नाते मध्य प्रदेश से भी अनुभवी कार्यकर्ता चुनावी तैयारी के लिए भेजे जाते हैं। आने वाले चुनावों के लिए भी मध्य प्रदेश से कार्यकर्ता भेजे जाएंगे। – विष्णु दत्त शर्मा, अध्यक्ष, मध्य प्रदेश भाजपा  

राजस्थान :प्रदेश भाजपा के संगठन में इस बार महिला नेताओं को अहम जिम्मेदारी दी जाएगी

जयपुर  राजस्थान भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ अब अपनी नई टीम बनाने वाले हैं। नई टीम की तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी है। बताया जा रहा है कि प्रदेश स्तर पर नाम फाइनल कर लिए गए हैं। एक औपचारिक अनुमति के लिए केंद्रीय नेताओं के सामने नई टीम के पैनल को रखा जाएगा। केंद्रीय नेताओं से हरी झंडी मिलते ही नई कार्यकारिणी की घोषणा कर दी जाएगी। जुलाई 2024 में मदन राठौड़ को पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई थी। बाद में फरवरी 2025 में राठौड़ को निर्विरोध प्रदेशाध्यक्ष चुना गया। प्रदेश अध्यक्ष के पद पर कार्य करते हुए आठ महीने हो गए लेकिन अभी तक पूर्व प्रदेशाध्यक्ष सीपी जोशी की ओर से बनाई गई ही यथावत है। अब राठौड़ अपने स्तर पर संगठन में फेरबदल करने जा रहे हैं। महिला नेताओं को बड़ी जिम्मेदारी प्रदेश भाजपा के संगठन में इस बार महिला नेताओं को अहम जिम्मेदारी दी जाएगी। संगठन 33 फीसदी आरक्षण के लिहाज से अहम पदों पर महिलाओं को नियुक्ति देना तय है। प्रदेश उपाध्यक्ष और महामंत्री जैसे अहम पदों पर महिलाओं को जिम्मेदारी दी जाने वाली है। प्रदेश भाजपा की महिला नेत्रियों में इस बात को लेकर बड़ी खुशी भी है कि उन्हें संगठन में अहम पदों पर काम करने का मौका मिलेगा। पूरी कार्यकारिणी में करीब 90 पद हैं। 33 प्रतिशत आरक्षण के हिसाब से करीब 30 पदों पर महिलाओं को मौका मिलने वाला है। दीप्ति किरण माहेश्वरी, अनिता भदेल, डॉ. ज्योति मिर्धा और रंजीता कोली को मिलेगा बड़ा अवसर प्रदेश संगठन की मुख्य कार्यकारिणी में भी अब महिलाओं नेत्रियों को अवसर मिलने वाला है। मौजूदा विधायक दीप्ति किरण माहेश्वरी, अनिता भदेल, पूर्व सांसद रंजीता कोली सहित अन्य वरिष्ठ नेत्रियों के लिए अब बड़ा मौका है जब पार्टी में उनकी अहम भूमिका होने वाली है। पूर्व सांसद संतोष अहलावत और ज्योति मिर्धा को भी अहम जिम्मेदारी मिलने वाली है। प्रदेश कार्यकारिणी के साथ जिला कार्यकारिणियों का भी गठन होगा तो वहां भी स्थानीय महिला नेत्रियों को ज्यादा अवसर मिलने वाले हैं। महिला नेत्रियों को दी जाने वाली नियुक्तियों में जातिगत समीकरण भी साधे जाएंगे। ऐसे में हर वर्ग की महिला नेत्रियों को मौका मिलना तय है।

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