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चैनलिंक, बारवेड वायर और पोल्स की खरीदारी में करोड़ों की कमीशनबाजी का खेल

Crores of rupees of commission game in the purchase of Chainlink, Barbed Wire and Poles भोपाल। चालू वित्त वर्ष में जंगल महकमे में करीब 50 से 60 करोड़ रूपए की चैनलिंक, बारवेड वायर और टिम्बर पोल्स की खरीदी में बड़े पैमाने पर कमीशन बाजी का खेल खेला जा रहा है। सबसे अधिक खरीदी कैंपा फंड से की जा रही है। इसके अलावा विकास और सामाजिक वानिकी (अनुसंधान एवं विस्तार ) शाखा से भी खरीदी होती है। विभाग के उच्च स्तरीय सूत्रों की माने तो कुल रिलीज बजट के 18 से 20% धनराशि कमीशन कमीशन के रूप में टॉप -टू – बॉटम बंटती है। कई सालों से एक सिंडिकेट कम कर रहा है, जिसे आज तक कोई नहीं तोड़ सका है। इस सिंडिकेट की जड़े काफी मजबूत है।  मुख्यालय से सबसे अधिक फंड कैंपा शाखा से रिलीज किया जाता है। इसके बाद सामाजिक वानिकी और विकास शाखा से करोड़ों की धनराशि वन मंडलों को दिया जाता है। तीनों शाखों को मिलाकर हर वन मंडल को 5 से 7 करोड़ रूपए की राशि हर साल खरीदी के लिए रिलीज किया जा रहा है। चैनलिंक जाली, बारवेड वायर, टिम्बर पोल्स, रूट ट्रेनर्स, मिट्टी और गोबर एवं रासायनिक खाद वगैरह की खरीदी की जाती है. इस खरीदी में 15 से 18 फीसदी राशि कमीशन बाजी में बंटती है। इस खेल को रोकने के लिए  वन मंत्री विजय शाह ने ग्लोबल टेंडर बुलाने की पहल की थी किंतु मैदानी अफसरों के विरोध के चलते वे अपने मंसूबे में सफल नहीं हो पाए थे। गौरतलब यह भी है कि मुख्यालय से विभिन्न शाखों द्वारा फंड रिलीज करने का कोई निर्धारित मापदंड नहीं है। चेहरा देखकर फंड वितरित किया जा रहा है। इसके कारण गड़बड़ी की आशंका बढ़ती जा रही है।  सरकार के निर्देशों की अवहेलना  राज्य सरकार के स्पष्ट निर्देश है कि वायरवेट, चैनलिंक और पोल की खरीदी में लघु उद्योग निगम को प्राथमिकता दें किंतु 95% खरीदी जेम्स और ई टेंडर से हो रही है। ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि लघु उद्योग निगम की दर और जेम (GEM) की दरों में डेढ़ गुना अंतर है। यानी लघु उद्योग निगम में वायरवेट किधर 83 रुपए से लेकर 85 रुपए तक निर्धारित की गई है। जबकि जेम (GEM) में ₹150 तक है। सरकार की मंशा यह भी है कि लघु और मध्यम उद्यमियों को इस कारोबार से जोड़ा जाए। मुख्यालय से लेकर फील्ड के अफसर टेंडर की शर्तों में ऐसी शर्ते जुडवा देते हैं जिसके चलते लघु और मध्यम उद्यमी प्रतिस्पर्धा के रहस्य बाहर हो जाते हैं।   चहेती फर्म को उपकृत करने जोड़ देते हैं नई शर्तें  फंड बंटवारे को लेकर दो अफसर भिड़ चुके  विभाग में फंड बंटवारे को लेकर दो सीनियर अधिकारी भिड़ चुके हैं। पीसीसीएफ कैंपा महेंद्र सिंह धाकड़ की पदस्थापना के पहले तक फॉरेस्ट प्रोटक्शन को लेकर कैंपा से फंड संरक्षण शाखा को रिलीज किया जाता था और फिर संरक्षण शाखा डीएफओ की मांग के आधार पर वितरित करता था। धाकड़ ने इस परंपरा को बदल दिया। अब वह प्रोटेक्शन की राशि भी स्वयं जारी करते हैं। पूर्व में पीसीसीएफ प्रोटेक्शन रहे अजीत श्रीवास्तव ने इसका पुरजोर विरोध किया था और तीखा पत्र भी लिखा था, लेकिन बात नहीं बनी। मुद्दे को लेकर एक बैठक में तो दोनों के बीच अच्छी बहस भी हुई पर तत्कालीन वन बल प्रमुख आरके गुप्ता ने पीसीसीएफ कैंपा धाकड़ का साथ दिया। हालांकि अजीत श्रीवास्तव जल्द ही रिटायर हो गए। मौजूदा पीसीएफ प्रोटेक्शन डॉ दिलीप कुमार किम कर्तव्यविमुढ़ की स्थिति में है और वह सेवानिवृत्ति के दिन गिन रहे हैं। ब्लैक लिस्ट फर्म कर रही हैं अभी भी धंधा  वन विभाग में अलग-अलग वन मंडलों में कई फर्म को ब्लैक लिस्ट कर दिया गया है. इसके बाद भी ब्लैक लिस्ट फर्म अपने राजनीतिक रसूख के दम पर सामग्री की सप्लाई कर रही हैं. इसकी वजह भी साफ है कि वन विभाग में ऐसी कोई भी व्यवस्था नहीं है, जहां ब्लैक लिस्ट की गई फर्म को अन्य वन मंडलों में मैसेज कर धंधा करने से रोका जाए. वैसे पीडब्ल्यूडी जल संसाधन और अन्य विभागों में ऐसी व्यवस्था है कि ब्लैक लिस्ट फर्म की सूची बनाकर मैदानी अफसरों को भेजा जाता है और उन्हें निर्देशित किया जाता है कि इनसे कोई भी वर्क आर्डर न दिया जाए. कमीशन बाजी के खेल में प्रमुख संस्थाएं तिरुपति इंजीनियरिंग वर्क बालाघाट, जबलपुर वायरस जबलपुर, श्री विनायक स्टील इंदौर, राजपूत फेसिंग पोल भोपाल, अरिहंत मेटल (नाहटा), लकी इंडस्ट्रीज इंदौर, आकांक्षा इंडस्ट्रीज विदिशा, नवकार ग्रेनाइट मंदसौर, बीएम मार्केटिंग वर्कर्स इंदौर, शारदा बारबेड  वायर एंड स्टील प्रोडक्ट मंडला, कृष्णा इंटरप्राइजेज छिंदवाड़ा, शारदा सीमेंट पाइप मंडला, ताप्ती एक्वा इंडस्ट्रीज बैतूल, शिल्पा कूलर छिंदवाड़ा, अपहरि प्लास्टिक बिलासपुर और गुरु माया इंडस्ट्रीज इटारसी.  इनका कहना  अगले वित्तीय वर्ष से टेंडर की शर्तें मुख्यालय से निर्धारित की जाएगी, ताकि उसकी एकरूपता बनी रहे। डीएफओ अपनी मनमानी शर्ते नहीं जोड़ पाएंगे. यूके सुबुद्धि पीसीसीएफ विकास

शैडो वन मंत्री की कार्यशैली से विधायकों एवं कार्यकर्ताओं में नाराजगी

Dissatisfaction among MLAs and workers due to the working style of Shadow Forest Minister भोपाल। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने नागर सिंह चौहान को वन मंत्री बनाया। चौहान भानमती तो बन गए किंतु उनका मंत्रालय अपर संचालक स्तर के वित्तीय सेवा के अधिकारी रंजीत सिंह चौहान संचालित कर रहे हैं। जंगल महक में उन्हें शैडो वन मंत्री के रूप में देखा जा रहा है। विभाग में सप्लायर का वर्क आर्डर जारी करना हो या फिर ट्रांसफर पोस्टिंग, ये सभी कार्य अधिकारियों से मिलकर वह स्वयं कर रहे हैं। यही कारण है कि विधायकों और बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं की सिफारिशी तबादला आदेश चुनाव आचार संहिता लगने के पूर्व जारी नहीं हो सके। वन विभाग में अधिकांश अधिकारी वन मंत्री चौहान के अनादिकृत ओएसडी रणजीत सिंह चौहान को शैडो मंत्री के रूप में देखते हैं। फील्ड में पदस्थ डीएफओ यह मानते हैं कि रणजीत सिंह चौहान उनके नजदीकी है। उनकी मान्यताओं पर तब और बल मिलता है जब अधिकारी अपने मंत्री से मिलने जाते हैं और वे उन्हें चौहान की से मिलने का संकेत दे देते हैं। इसके कारण ही विभाग के अवसर उन्हें शैडो वन मंत्री के रूप में देखते हैं। अब नेताओं को भी ऐसा एहसास होने लगा है वह इसलिए कि धार, झाबुआ और अलीराजपुर के विधायकों एवं नेताओं ने वन विभाग के डीएफओ, एसडीओ से लेकर रेंजरों को हटाने और उनकी प्राइम पोस्टिंग करने के सिफारिश की थी। वन मंत्री चौहान ने विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से मंथन कर सूची तैयार कर मंत्रालय को भेजी। इस बीच पार्टी हाई कमान ने उनकी पत्नी अनीता सिंह चौहान को झाबुआ-रतलाम लोकसभा का प्रत्याशी घोषित कर दिया। इस घोषणा के बाद वन मंत्री नागर सिंह चौहान राजनीतिक गतिविधियों में व्यस्त हो गए और इसका लाभ उठाते हुए विधायकों के सिफारिश वाले अधिकारियों के तबादले की सूची में नाम हटाकर चौहान ने अपने पसंदीदा डीएफओ, एसडीओ और रेंजरों के तबादला आदेश आचार संहिता लगने के चंद्र घंटे पहले जारी करवा दिए। वन मंत्री के नजदीकी सूत्रों का कहना है कि विधायकों और नेताओं की अनुशंसा वाले दबा दें आदेश जारी नहीं होने के कारण वन मंत्री के प्रति नाराजगी है और वे चुनाव बाद मुख्यमंत्री मोहन सिंह यादव से शिकायत करने का मन बनाया है। सप्लायर के कारोबार में भी है दखलअंदाजीवन विभाग में लंबे समय से सप्लायर का एक नेक्सस सक्रिय है। इस सिंडिकेट से वन मंत्री चौहान के अनाधिकृत ओएसडी चौहान भी जुड़ गए है। दबाव के चलते ही महकमे में एक दर्जन से अधिक डीएफओ ने चैन लिंक और वायरबेड खरीदी की निविदा में ऐसी शर्त जोड़ दी, जिसे केवल चौहान के नजदीकी फर्म को ही वर्क आर्डर मिल सके। बताया जाता है कि डीएफओ को फोन करके अपने चहेते फर्म को ठेका दिलवाने के लिए नई-नई शर्ते जुड़वा रहे हैं। दक्षिण सागर,बैतूल और बालाघाट समेत एक दर्जन डीएफओ ने चैनलिंक और वायरबेड खरीदी के लिए निविदा आमंत्रित बुलाई गई। इस निविदा में 3 करोड़ के टर्न-ओवर के साथ यह शर्त भी जोड़ दी कि भारत मानक ब्यूरो से मान्यता प्राप्त फर्म ही निविदा में हिस्सा ले सकेंगी। यह शर्त पहली बार जोड़ी गई। इस शर्त के कारण तीन दर्जन से अधिक संस्थाएं प्रतिस्पर्धा से बाहर हो गई। मप्र में भारतीय मानक ब्यूरो से लाइसेंस प्राप्त दो फर्म ही रजिस्टर्ड हैं। यह दोनों फर्म ही कांग्रेस नेता के रिश्तेदार की है। यानी कांग्रेस नेता के रिश्तेदार को उपकृत करने के लिए प्रदेश के एक दर्जन डीएफओ ने पहली बार यह शर्त निविदा में जोड़ दी है। यह बात अलग है कि प्रतिस्पर्धा से बाहर हुई संस्थाओं ने शिकवे-शिकायतें शुरू कर दी हैं। जानकारों का कहना है कि मंत्री के यहां अनाधिकृत रूप से सक्रिय अपर संचालक स्तर के एक अधिकारी के कहने पर फील्ड के अफसरों ने निविदा में भारतीय मानक ब्यूरो की शर्त जोड़ी है। बताया जाता है कि अफसर पर दबाव बनाने वाले अनाधिकृत काम देख रहे अधिकारी का कांग्रेस नेताओं से पुराने संबंध रहे हैं। क्या है रंजीत सिंह चौहान का बैकग्राउंडरणजीत सिंह चौहान वित्तीय सेवा के अधिकारी

बफरजोन के पास जंगल में लगी भीषण आग, बुझाने में जुटा वन अमला

A massive fire broke out in the forest near the buffer zone, forest staff engaged in extinguishing it. दमोह ! तेज हवाओं के कारण वन अमले को आग बुझाने में भी कड़ी मशक्कत करनी पड़ी ओर देर शाम तक वन अमला आग बुझाने में जुटा रहा। जंगल में आग लगने से कई वन्य जीवों के रहवास भी प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।दमोह के मड़ियादो बफरजोन में कलकुआ के पास जंगल में शनिवार दोपहर भीषण आग लग गई और आग इतनी भीषण थी कि दूर से ही आग की लपटें और धुआं दिखाई दे रहा था। वन परिक्षेत्र अधिकारी हृदेश हरि भार्गव अमले के साथ मौके पर पहुंचे और आग पर नियंत्रण पाने लिए प्रयास शुरू किए गए।गर्मी शुरू होने से साथ जंगल में आग लगने की घटनाएं सामने आने लगी हैं। इस आग से जंगल में लगे वनस्पति पौधे, पेड़ , छोटे जीव आदि जल जाते है। शनिवार दोपहर तेज हवाओं के कारण आग विकराल हो गई और जंगल के एक बड़े हिस्से को अपनी चपेट में ले लिया। आग लगने का कारण अज्ञात है। तेज हवाओं के कारण वन अमले को आग बुझाने में भी कड़ी मशक्कत करनी पड़ी ओर देर शाम तक वन अमला आग बुझाने में जुटा रहा। जंगल में आग लगने से कई वन्य जीवों के रहवास भी प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। क्योंकि यह क्षेत्र पन्ना टाइगर रिजर्व का हिस्सा है और यहां तेंदुआ, नीलगाय और चीतल जैसे कई वन्यजीव हर समय बड़ी संख्या में मौजूद रहते हैं। बता दें कि सड़क के दोनों ओर घास-फूस लगी है। जिससे राहगीरों द्वारा बीड़ी पीने के दौरान फेंकी गई जलती तीली के कारण आग लगने का अंदेशा है। इसके अलावा महुआ-आचार के पेड़ के नीचे सफाई और गर्मी अधिक करने के लिए भी लोग आग लगाते हैं जो जंगल में फैल जाती है। शनिवार दोपहर लगी आग से कितना नुकसान हुआ व वन्य जीव जलने संबंधी कोई भी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है अधिकारी आग बुझाने का प्रयास कर रहे हैं। शनिवार रात तक आग नहीं बुझाई जा सकी थी।

कांग्रेस नेता के परिजन को उपकृत करने एक दर्जन डीएफओ ने पहली बार जोड़ी नई शर्तें

To oblige Congress leader’s family, a dozen DFO added new conditions for the first time भोपाल। भाजपा सरकार में भी अफसर कांग्रेस नेताओं के रिश्तेदारों की फर्म पर मेहरबान है। इसी कड़ी में जंगल महकमे में एक दर्जन डीएफओ ने चैन लिंक और वायरबेड खरीदी की निविदा में ऐसी शर्त जोड़ दी, जिसे केवल कांग्रेस नेता के रिश्तेदार की फर्म को ही वर्क आर्डर मिल सके। बैतूल और बालाघाट समेत एक दर्जन डीएफओ ने चैनलिंक और वायरबेड खरीदी के लिए निविदा आमंत्रित की थी। इस निविदा में यह शर्त भी जोड़ दी कि भारत मानक ब्यूरो से मान्यता प्राप्त फर्म ही निविदा में हिस्सा ले सकेंगी। यह शर्त पहली बार जोड़ी गई। इस शर्त के कारण तीन दर्जन से अधिक संस्थाएं प्रतिस्पर्धा से बाहर हो गई। मप्र में भारतीय मानक ब्यूरो से लाइसेंस प्राप्त दो फर्म ही रजिस्टर्ड हैं। यह दोनों फर्म ही कांग्रेस नेता के रिश्तेदार की है। यानी कांग्रेस नेता के रिश्तेदार को उपकृत करने के लिए प्रदेश के एक दर्जन डीएफओ ने पहली बार यह शर्त निविदा में जोड़ दी है। यह बात अलग है कि प्रतिस्पर्धा से बाहर हुई संस्थाओं ने शिकवे-शिकायतें शुरू कर दी हैं। जानकारों का कहना है कि मंत्री के यहां अनाधिकृत रूप से सक्रिय अपर संचालक स्तर के एक अधिकारी के कहने पर फील्ड के अफसरों ने निविदा में भारतीय मानक ब्यूरो की शर्त जोड़ी है। बताया जाता है कि अफसर पर दबाव बनाने वाले अनाधिकृत काम देख रहे अधिकारी का कांग्रेस नेताओं से पुराने संबंध रहे हैं।

खनिज पट्टा राजस्व में खनन हो रहा था वन भूमि पर, डीएफओ ने की निरस्त करने की अनुशंसा

Mining was being done on forest land to earn mineral lease revenue, DFO recommended its cancellation. भोपाल। विदिशा के 10 खनिज पट्टाधारकों ने वन भूमि पर खनन करने का नायाब तरीका अपनाया है। जंगल के आसपास के राजस्व भूमि पर खनिज पट्टा आवंटित कराते हैं और खनन वन भूमि पर कर अवैध परिवहन और विक्रय कर रहे हैं। मामला संज्ञान में आते ही डीएफओ ने कलेक्टर को पत्र लिखकर उसे निरस्त करने की अनुशंसा की है। दिलचस्प पहलू यह है कि मौजूदा डीएफओ के पहले यहां पदस्थ पूर्व के किसी भी डीएफओ की नजर वन भूमि पर हो रहे खनन के गोरखधंधों पर नहीं पड़ी। या यूं कहिए कि इस गोरख धंधे में पूर्ववर्ती डीएफओ भी रहे होंगे। विदिशा डीएफओ ओंकार सिंह मस्कोले ने विदिशा कलेक्टर को पत्र लिखा है कि 7 अक्टूबर 2002 को जारी वन मंत्रालय के निर्देश है कि वन सीमा के 250 मीटर के अंदर उत्खनन पट्टा स्वीकृत न किया जाय। डीएफओ ने कलेक्टर को लिखे पत्र में वन भूमि सीमा से ढाई सौ मीटर के अंदर पूर्व में दिए गए राजस्व भूमि पर पट्टे निरस्त किए जाएं। वन विभाग के मैदानी अमले के अनुसार पट्टाधारकों ने राजस्व सीमा पर आवंटित पट्टे की आड़ में वन भूमि पर बड़े पैमाने पर खनन कर रहे थे। इन्हीं सूत्रों का कहना है कि पिछले 7-8 वर्षों में खनन कारोबारियों ने करीब 6000 हेक्टेयर वन भूमि पर खनन कर डाले। खनन कारोबारी के साथ वन विभाग के मिली भगत के भी संकेत मिले हैं। सवाल यह उठता है कि पूर्ववर्ती डीएफओ ने वन भूमि सीमा के ढाई सौ मीटर के अंदर खनन के लिए कैसे अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी कर दिए? इनके पट्टे निरस्त करने की अनुशंसा बड़े पैमाने पर अतिक्रमण कर रहे हैं पट्टा धारक वन विभाग के मैदानी अमले के लिए वन अधिकार अधिनियम के तहत दिए गए पट्टा धारक भी सिरदर्द बनते जा रहे हैं। वनाधिकार के तहत पट्टे प्राप्त करने के बाद आदिवासी पट्टे की सीमावर्ती वन भूमि पर बेखौफ कब्जा करते चले जा रहे हैं। इस आशय की जानकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान एक छिंदवाड़ा सर्किल के डीएफओ ने एसीएस वन और वन बल प्रमुख असीम श्रीवास्तव को दी है। मुख्यालय के अधिकारी भी मानते हैं कि यह समस्या अकेले छिंदवाड़ा सर्कल की नहीं है। पूरे प्रदेश से ऐसी खबरें मिल रही हैं। चूंकि चुनावी वर्ष है, इसलिए अधिकारी भी असमंजस में है कि उनके साथ कैसा सलूक किया जाए..?

संघ के एमडी एक्शन मूड में, सीईओ और उत्पादन प्रभारी की ली क्लास, तीन साल का ब्यौरा मांगा

Sangh’s MD in action mood, asks for details of CEO and production in-charge, details of three years भोपाल। लघु वनोपज संघ के प्रबंध संचालक बिभाष ठाकुर ने अब एक्शन मूड में नजर आ रहें हैं। मंगलवार को प्रसंस्करण एवं अनुसंधान केंद्र (एमएफपी पार्क) बरखेड़ा पठानी के सीईओ और  प्रभारी प्रबंधक उत्पादन की जमकर क्लास ली। ठाकुर ने गत 3 साल में केंद्र में खरीदी गई जड़ी- बूटी समेत अन्य सामग्रियों का पूरा ब्यौरा मांगा है। प्रबंध संचालक द्वारा प्रसंस्करण केंद्र में उत्पादन से संबंधित समीक्षा बैठकों में कई बिंदुओं पर उत्पादन प्रभारी प्रबंधक सुनीता अहिरवार को सुधार करने की कड़ी चेतावनी दी है।  संघ के प्रबंध संचालक ठाकुर ने प्रशंसकरण एवं अनुसंधान केंद्र में लंबे समय से हो रही गड़बड़ियों को गंभीरता से लिया है। मंगलवार को बातचीत में ठाकुर ने अनौपचारिक चर्चा में बताया कि मैंने सीईओ पीजी फुलजले और उत्पादन प्रभारी प्रबंधक सुनीता अहिरवार से 3 साल में क्रय की गई सामग्रियों को बिंदुवार जानकारी मांगी है। मसलन, कितनी सामग्री, किस संस्था से और किस दर पर खरीदी की गई है ? खरीदी गई सामग्री टेंडर से परचेस किए गए हैं या फिर बिना निविदा बुलाए खरीद ली गई हैं। सभी डिटेल तीन दिन के भीतर प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने यह भी बताया कि अप्रैल से नई पॉलिसी लागू करने जा रहे हैं। मुझे उम्मीद है कि इससे गड़बड़ झाले और दलाली पर ब्रेक लगेगा। नई नीति के तहत सभी खरीदी जिला वनोपज यूनियन के अंतर्गत काम करने वाले संग्रहण कर्ताओं से की जाएगी।   4 सालों का उत्पादन रिकॉर्ड भी गायब जानकारी में आया है कि पिछले 4 सालों गंभीर अनियमितताएं की गई। सूत्रों का कहना है कि विगत 4 सालों में लगभग 90 करोड़ रुपये कि दवाईओं का उत्पादन किया गया है। लेकिन उत्पादन का रिकॉर्ड संधारित ही नहीं किया गया है। विगत वर्षों की ख़रीदी का मिलान उत्पादन रिकॉर्ड से ही किया जा सकता है, परंतु उत्पादन रिकॉर्ड के नाम पर बिल वाउचर ही मिल रहे है। जिनका सही प्रमाणीकरण सही तरीक़े से जांच द्वारा ही किया जा सकता है। इस संबंध में न तो पूर्व एसडीओ पर कार्यवाही की गई न ही प्रभारी एसडीओ सुनीता अहिरवार पर कार्यवाही की जा रही है। सीईओ फ़ुलझेले द्वारा केवल एक आदेश निकाल कर इतिश्री कर ली गई है। सुनीता अहिरवार द्वारा भी बिल्डिंग मेंटेन्स, नर्सरी रखरखाव, और फर्जी लेवर दिखा कर करोड़ों रुपए का गड़बड़ झाला किया जा चुका है। दिलचस्प पहलू है कि  अपर प्रबंध संचालक मनोज अग्रवाल के पत्र में दर्शित बिंदुओं पर जांच करने के लिये कोई कमेटी अभी तक नहीं बनी है। तीन आईएफएस आएंगे जांच की जद में  पूर्व एसडीओ पिल्लई के कार्यकाल में हुई अनियमितताएँ उस अवधि में मुख्यकार्यपालन अधिकारी रहे अफ़सरों की मिली भगत से ही संभव हुआ है। यदि एसडीओ पिल्लई पर कार्यवाही हुई तो बड़े अफ़सर भी जद में आयेंगे। इसमें पूर्व सीईओ एवं सेवानिवृत आईएफएस एलएस रावत, एपीसीसीएफ विवेक जैन वर्तमान में वन विकास निगम में प्रभारी एमडी और  प्रधान मुख्य वन संरक्षक डॉ दिलीप कुमार पर भी चार्जशीट बन सकती है। इन तीन आईएफएस अफसर को बचाने के लिए जांच कमेटी का गठन नहीं किया जा रहा है।

12 साल से एचआरडी शाखा में जमीं प्रभारी पर लगने लगी गंभीर वित्तीय अनियमितता के आरोप

Allegations of serious financial irregularities started being leveled against the ground in-charge of HRD branch for the last 12 years. भोपाल। शासकीय अधिवक्ता एवं आरटीआई एक्टिविस्ट कौशल पांडेय ने वन मंत्री से लेकर पीसीसीएफ एवं एपीसीसीएफ विजिलेंस को पत्र लिखकर वन विभाग के मानव संसाधन विकास शाखा में 12 साल से पदस्थ सहायक ग्रेड-2 एवं कार्यालय प्रभारी अधीक्षक विनीता फांसिस विल्सन और उनके मददगार सेवा निवृत्त कर्मचारी कृष्णन पर वित्तीय अनियमितता के आरोप लगाते हुए बर्खास्त करने की मांग की है। इसके अलावा शासकीय अधिवक्ता ने सीनियर अधिकारी से निष्पक्ष जांच का भी आग्रह किया है। वन मंत्री और सीनियर अधिकारियों को संबोधित पत्र में शासकीय अधिवक्ता पांडे ने लिखा है कि विनीता फांसिस विल्सन सहायक ग्रेड-2 कार्यालय प्रभारी अधीक्षक के पास बजट आवंटन, भंडार कक्ष, भारतीय वन सेवा प्रशिक्षण, राज्य वन सेवा प्रशिक्षण, रेजर प्रशिक्षण, उपवन क्षेत्रपाल और वनरक्षक प्रशिक्षण का प्रभार है। अपने पद का दुरूपयोग करते हुए विनीता फॉसिस विल्सन ने 65 वर्षीय सेवा निवृत्त कर्मचारी कृष्णन एवं एक अन्य महिला रिश्तेदार को जॉबदार पर कार्य पर रखा है। यही नहीं, प्रभारी अधीक्षक ने अपने घर का काम कराने के लिए एक काम वाली एक सर्वेंट को रखा है, जिसका वेतन भुगतान वनरक्षक प्रशिक्षण स्कूल के माध्यम से किया जाता है। पत्र में कथित रूप से आरोप लगाया गया है कि प्रतिमाह स्टेशनरी कय/कम्प्यूटर-प्रिंटर मरम्मत के फर्जी बिल तैयार कर भण्डार कय नियमों का उल्लघंन कर नियम विरूद्ध भुगतान किया जा रहा है। विल्सन प्रभारी अधीक्षक द्वारा एसी/ कुलर/वलफेन/हिटर/फोटो कापी मशीन / कम्प्यूटर/पिंटर/आलमरी अन्य कीमती समान सतपुड़ा भवन से वन भवन शिफ्टिंग के दौरान हेराफेरी की गई है। प्रशिक्षु रेंजर और एसीएफ से भी स्टाइफंड की राशि रिलीज़ करने सहित अन्य मसलों की आड़ में धन वसूले जाते हैं।हटाए जाने के बाद कृष्णन क्यों बैठते अधीक्षक कक्ष में..?एचआरडी शाखा में 35 साल तक सेवा देने के बाद सेवानिवृत हुए कृष्णन आज भी शाखा में बैठकर काम करते नजर आएंगे। हटाए जाने के बाद कृष्णन क्यों बैठते अधीक्षक कक्ष में..? यह सवाल वन भवन में अधिकारी एवं कर्मचारियों के बीच यक्ष प्रश्न बना हुआ है। जबकि शाखा के पीसीसीएफ बिभाष ठाकुर ने साफ तौर पर कहा है कि कृष्णन एचआरडी शाखा में ना तो संविधान नियुक्ति है और न ही उनको दैनिक वेतन भत्ते पर रखा गया है। ठाकुर ने तो यहां तक कह दिया है कि हमने उसे मना कर दिया है। इसके बाद भी कृष्णन आज भी एचआरडी शाखा के अधीक्षक कक्ष पर बैठा नजर आता है। कृष्णन पर नए रेंजर/ डिप्टी रेंजर और ट्रेनिंग स्कूलों को फंड रिलीज करने एवज में कमीशन बाजी के काम में लिप्त होने का आरोप है। इसके अलावा वह विभागीय रेंजरों की परीक्षा के पेपर की सेटिंग और परीक्षा कॉपी की डि-कोडिंग का काम करते हैं।

कमीशन खोरी पर ब्रेक लगाने एमडी ने लिया बड़ा फैसला, अब प्राइवेट फर्म से नहीं होगी खरीदी

MD took a big decision to put a stop to commission embezzlement, now purchases will not be made from private firms भोपाल। लघु वनोपज संघ के प्रसंस्करण एवं अनुसंधान केंद्र में लंबे समय से चली आ रही कमीशन खोरी पर ब्रेक लगाने के लिए प्रबंध संचालक बिभास ठाकुर ने बड़ा फैसला लिया है। ठाकुर ने तय किया है कि वन मेले में होने वाले क्रेता-विक्रेता सम्मेलन में अब निजी फर्म हिस्सा नहीं लेंगे। यानी अब खरीदी जिला वनोपज समितियों से ही होगी। संघ के प्रबंध संचालक ने यह निर्णय ऑडिट आपत्ति के बाद लिया है।संघ के एमडी विभाष ठाकुर द्वारा वन मेले में क्रेता विक्रेता अनुबंध में वनोपज समिति और वन धन केंद्रों से ही अनुबंध किया गया है। जबकि पहले प्राइवेट सप्लायर से भी अनुबंध कर के उन्हीं से ख़रीदी को प्राथमिकता दी जाती थी।पिछले 5 सालों का रिकॉर्ड देखे तो अनुबंधों में सबसे ज़्यादा ख़रीदी आर्यन फार्मेसी से की गई और तो और शहद जो की मध्यप्रदेश में वनसमिति संग्रहण करती है उसके बाद भी अदिति ट्रेडर्स राजस्थान से शहद ख़रीदा गया। आडिट रिपोर्ट में ख़रीदी प्रक्रिया पर गंभीर आपत्ति ली गई है।लैब रिपोर्ट में कई फ़ार्मो के रॉ-मटेरियल ख़राब होने के बाद भी ख़रीदी कर भुगतान कर दिया गया।सूत्रों ने बताया कि पिछले वित्तीय वर्षों के आडिट आपत्तियों में गंभीर वित्तीय अनियमितता की ओर प्रसंस्करण केंद्र के सीईओ और एमडी का ध्यान आकर्षित कराया गया है। मसलन, मशीन के रखरखाव पर एक साल में ढाई करोड रुपए का भुगतान किया गया है। कहते हैं कि इतने में तो नई मशीन आ जाती। मशीन के मेंटेनेंस का ठेका भी 3-4 सालों से एक ही फर्म को दिया जा रहा है। ऑडिट में इस बात को लेकर भी आपत्ति की गई है कि पिछले वर्ष के वन मेले में संपन्न क्रेता-विक्रेता सम्मेलन में क्रय अनुबंध प्राथमिक समितियां से किया गया। जबकि 80 लाख से अधिक की आयुर्वेद औषधि के लिए रॉ मटेरियल की खरीदी आर्यन फार्मेसी से की गई। यही नहीं, जब स्टॉक वेरिफिकेशन और उसके पेमेंट का लेखा-जोखा देखा तो ऑडिट टीम के सदस्यों की आंखें फटी रह गई। प्लास्टिक से बने डिब्बे वगैरह भी आयर्न फर्म से खरीदे गए हैं। ऑडिट रिपोर्ट में यह तथ्य भी उजागर हुआ है कि निजी फर्म से हुई खरीदी के भुगतान टुकड़ों- टुकड़ों में एक ही तारीख में हुआ है। यह सिलसिला पिछले तीन-चार सालों से जारी है। गंभीर वित्तीय ऑडिट रिपोर्ट आने के बाद मौजूदा प्रबंध संचालक विभाग ठाकुर ने निर्णय लिया है कि अब वन मेला में आयोजित क्रेता विक्रेता सम्मेलन में अधिकारियों कर्मचारियों के चहेते निजी फर्म को हिस्सा नहीं लेंगे। संघ में सदस्य अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक मनोज अग्रवाल ने भी 5 वर्षों में व्याप्त गड़बड़झाले की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए एक तीखा पत्र लिखा है। पत्र से केंद्र के अधिकारियों में हड़कंप है। जांच कहां से शुरू करें संशय में है सीईओ लघु वनोपज संघ में पदस्थ एपीपीसीएफ मनोज अग्रवाल के पत्र के बाद प्रसंस्करण एवं अनुसंधान केंद्र के सीईओ पीजी फुलजले असमंजस मैं पड़ गए हैं की जांच कहां से शुरू करें..?, क्योंकि गड़बड़ियों की फेहरिस्त बड़ी लंबी है। फुलजले ने बातचीत में यह जरूर कहा कि हमने एसडीओ को जांच के निर्देश दिए हैं। सूत्रों का कहना है कि सीईओ ने जांच की आड़ में केवल एसडीओ और प्रभारी एसडीओ एवं रेंजर सुनीता अहिरवार के बीच काम का बंटवारा कर दिया। लेकिन वित्तीय अधिकार महिला रेंजर अहिरवार के पास ही निहित है। यानी खरीदी में हुई गड़बड़ियों की जांच पर लीपा पोती के लिए अहिरवार से वित्तीय अधिकार नहीं लिया गया। इसके पीछे संघ में चर्चा है कि मंत्रालय में पदस्थ एक शीर्षस्थ अधिकारी की सिफारिश से ही केंद्र में रेंजर को एसडीओ का प्रभारी बनाया गया और वित्तीय अधिकार दिए गए हैं।इनका कहनाएपीसीसीएफ के पत्र को संज्ञान में लिया है और जांच के लिए एसडीओ को निर्देश दिए हैं।पीजी फूलजले, सीईओ प्रसंस्करण एवं अनुसंधान केंद्र बरखेड़ा पठानी

11 घंटे का समर तय कर त्रिदेव नामक हाथी पहुंचा कान्हा टाइगर रिजर्व

Elephant named Tridev reached Kanha Tiger Reserve after traveling 11 hours त्रिदेव हाथी को सकुशल पहुंचाने दौरान पूरे रास्ते में पुलिस दल,वनविभाग के अधिकारी/कर्मचारी मौजूद रहे। अनूपपुर। जिले के वन परिक्षेत्र जैतहरी अंतर्गत गोबरी बीट के ठाकुरबाबा के पास गोबरी गांव में विगत डेढ़ माह से निरंतर विचरण कर रहे त्रिदेव नामक हाथी को कान्हा टाइगर रिजर्व में स्थित हाथी ठहराव स्थल पर पहुंचा दिया गया है। कुचल दिया था एक व्‍यक्ति को त्रिदेव नामक हाथी ने एक व्यक्ति को कुचल दिया था। इसके बाद उपजे आक्रोश के बाद बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व की रेस्क्यू टीम द्वारा रेस्क्यू आपरेशन चलाया गया। सफलतापूर्वक ट्रेंकुलाइज किया इसके बाद तीस वर्षीय त्रिदेव नामक हाथी काे सफलतापूर्वक ट्रेंकुलाइज करने बाद ट्रक में पिंजरे में रखकर सड़क मार्ग से गोबरी से राजेन्द्रग्राम डिंडोरी, मण्डला होकर 11 घंटे का सफर तय करते हुए रविवार की रात नौ बजे मंडला जिले के कान्हा टाइगर रिजर्व स्थित हाथी ठहराव स्थल पर पहुंचा द‍िया गया। अधिकारी, कर्मचारी साथ थे त्रिदेव हाथी को सकुशल पहुंचाने दौरान पूरे रास्ते में पुलिस दल,वनविभाग के अधिकारी/कर्मचारी मौजूद रहे। बीच-बीच में बांधवगढ़ एवं संजय टाइगर रिजर्व सीधी के डाक्टर नितिन गुप्ता,डाक्टर सेंगर के साथ मंडला जिले में प्रवेश करते ही मंडला जिले के कान्हा टाइगर रिजर्व के वन अधिकारी,पार्क के डाक्टर द्वारा समय-समय पर स्वास्थ्य का परीक्षण किया गया जिसमें वह स्वस्थ पाया गया। अब ग्रामीणों ने ली चैन की सांस आक्रामक हाथी के सुरक्षित रेस्क्यू एवं जिले से बाहर कान्हा पहुंचाये जाने के बाद जैतहरी एवं अनूपपुर तहसील के विभिन्न ग्रामीण अंचलों के ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है। बताया गया अब त्रिदेव को यहां रखा जाएगा और प्रशिक्षित किया जाएगा ताकि इसका स्वभाव भी शांत हो जाए।

सांभर के शिकार के तीन आरोपी गिरफ्तार

Three accused of hunting Sambhar arrested बालाघाट। कान्हा टाईगर रिजर्व के समनापुर बफरजोन अंतर्गत अकलपुर वृत्त के सरईपतेरा भाग-1 बीट कक्ष क्रमांक 203 वनक्षेत्र में सांभर के शिकार की खबर वन अमले को 18 फरवरी को मिली थी। जिसके बाद कान्हा टाईगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक एस.के. सिंह के मागर््दर्शन में कान्हा टाईगर रिजर्व और वन परिक्षेत्र रेंगाखार की टीम की संयुक्त कार्यवाही में सांभर का अवैध शिकार में संलिप्त तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। सांभर के शिकार के बाद कान्हा टाईगर रिजर्व क्षेत्र संचालक श्री सिंह के मार्गदर्शन में वन परिक्षेत्र रेंगाखार, वन परिक्षेत्र समनापुर बफरजोन, वन परिक्षेत्र खापा बफरजोन और कान्हा की डॉग स्क्वायड टीम ने संयुक्त रूप से कड़ी मेहनत के बाद सहायक संचालक मलाजखंड अजय ठाकुर एवं रेंगागार परिक्षेत्र अधिकारी विजेन्द्र तिवारी के नेतृत्व में तीन आरोपियों छत्तीसगढ़ के सरईपतेरा निवासी 35 वर्षीय प्रभुसिंह धुर्वे पिता कुमानसिंह धुर्वे, 44 वर्षीय सोनसिंह धुर्वे पिता मोहरसिंह धुर्वे, बालाघाट जिले के बिरसा अंतर्गत अकलपुर निवासी 50 वर्षीय घासीराम पिता बिगारी परते को गिरफ्तार कर आरोपियों को गिरफ्तार किया। जिनके पास से वनविभाग की टीम ने सांभर का मांस, चमड़ा, श्रृंगाभ, मोटर सायकिल, कुल्हाड़ी और छुरी जब्त किया। आरोपियों के खिलाफ भारतीय वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 की धारा 2 की उपधारा 16(क), धारा 9, 39, 50, 51 और 52 के तहत अवन अपराध कायम कर बैहर न्यायालय में पेश किया। इस कार्यवाही मे खापा बफर रेंजर श्रीमती संध्या देशकर, समनापुर बफर परिक्षेत्र अधिकारी श्रीमती सीता जमरा, परिक्षेत्र सहायक शिवकुमार यादव, वनरक्षक नरोत्तमसिंह मेरावी, घनश्याम सैयाम, टहेलसिंह मानेश्वर, कान्हा टाईगर रिजर्व डॉग स्क्वायड टीम के सदस्य भागीरथ ककोड़िया एवं डॉग स्टार्म ने आरोपियों को पकड़ने में सराहनीय भूमिका निभाई।

पन्ना टाइगर रिजर्व के कोर जोन में लगी भीषण आग, कई बाघों का है ठिकाना

A massive fire broke out in the core zone of Panna Tiger Reserve, many tigers are missing. पन्ना टाइगर रिजर्व में लगी आग पन्ना टाइगर रिजर्व में भीषण आग लग गई है, जिसके बाद पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है। इस टाइगर रिजर्व में कई बाघ रहते हैं। खबर लिखे जाने तक आग पर काबू नहीं पाया गया है। पन्ना टाइगर रिजर्व के कोर जोन में भीषण आग लगने से हड़कंप मच गया है। बताया गया है कि पन्ना टाइगर रिजर्व के रमपुरा गेट से अंदर तालगांव क्षेत्र के जंगल में आग लग गई है। इस क्षेत्र में कई बाघों का ठिकाना है, जिससे यहां आम प्रवेश पूरी तरह से प्रतिबंधित है। कुछ समय से यहां फायर लाइन कटाई का काम चल रहा था, शायद इसी वजह से आग बहक कर घास में पहुंच गई होगी। बताया गया है कि दर्जन भर से अधिक सुरक्षा श्रमिक और वनकर्मी आग को काबू करने के प्रयास में जुटे हैं, लेकिन अभी तक आग पर काबू नहीं पाया जा सका।

प्रकृति की धरोहर गिद्ध प्रजाति को बचाने की जरूरत है विजयराघवगढ एवं रीठी में हुई गिद्धों की गणना कैमोर की पहाड़ियों में मिले गिद्ध के आशियाने वन विभाग में खुशी

There is a need to save the nature’s heritage vulture species. Counting of vultures was done in Vijayraghavgarh and Reethi. Happiness in the Forest Department. Home of vultures found in the hills of Kaimur. कटनी । गिद्ध प्रजाति बचाने की बहुत जरूरत वन क्षेत्रों में पक्षी राज कहे जाने वाले देशी गिद्घों का कुनबा बढ़ने से वन विभाग के अधिकारियों के चेहरों में खुशी देखने को मिल रही है। मिली जानकारी के अनुसार तीन दिन चली गणना के बाद पिछली गणना से दोगुने से अधिक देशी गिद्ध जिले के दो वन परिक्षेत्रों में पाए गए हैं। गणना का कार्य पूरा होने के बाद रविवार की देर शाम तक वरिष्ठ कार्यालयों को जानकारी भेजी गई। जिले में वर्ष 2019 की गणना के दौरान विजयराघवगढ़ व रीठी वन परिक्षेत्र में 75 गिद्ध मिले थे और वर्ष 2021 में गणना में इनकी संख्या घटकर 64 हो गई थी। जिसके चलते सफाई मित्र के नाम से जाने वाली इस प्रजाति की घटी संख्या वन विभाग के लिए चिंता का विषय थी। विशेषज्ञों के साथ वन विभाग की टीम ने विजयराघवगढ़ क्षेत्र में गिद्धों की संख्या अधिक होने के कारण यहां पर जागरूकता अभियान चलाया था। जिसका असर देखने को मिला है और इस वर्ष की गणना के बाद गिद्धों की संख्या बढ़कर 191 हो गई है। जिसके बाद वन अमले के चेहरों में खुशी देखने को मिल रही है। जिले में 16 फरवरी से 18 फरवरी तक हुई गिद्ध गणना में जहां 140 व्यस्क गिद्ध मिले हैं तो वहीं 51 अव्यस्क गिद्ध वन अमले को मिले हैं।गिद्घों के मिले चार आवास, कैमोर की पहाड़ी में अधिकवन विभाग के विजयराघवगढ़ वन परिक्षेत्र के कैमोर की पहाड़ियों में गिद्धों के सबसे अधिक आशियाने वन विभाग को मिले हैं। यहां पर कैमोर से मेहगांव के बीच पहाड़ी पर गिद्धों के तीन आशियाने टीम को मिले हैं। रेंजर विवेक जैन की अगुवाई में सुबह तीन दिन हुई गणना में 51 अव्यस्क और 136 व्यस्क देशी गिद्ध आशियानों में बैठे मिले। वहीं रीठी वन परिक्षेत्र में कुम्हरवारा टैंक के पास देशी गिद्घों का एक आशियाना मिला है, जिसमें गिद्घों की संख्या चार मिली है, हालांकि पहले व दूसरे दिन यहां पर छह गिद्ध मिले थे लेकिन अंतिम गणना को मानते हुए यहां पर चार की संख्या आंकी गई है। रीठी क्षेत्र में रेंजर महेश पटेल की अगुवाई में गिद्घों की गणना हुई। दो वन परिक्षेत्रों के अलावा अन्य क्षेत्रों में गिद्धों की प्रजाति देखने को नहीं मिली।

वन विभाग के दागी अफसरों पर मेहरबान है शीर्ष अफसर

The top officer is kind to the tainted officers of the forest department भोपाल। जंगल महकमे के शीर्ष अधिकारी कुछ चहेते अफसरों को बचाने के लिए पूरी ताकत लगाते आ रहें है। शीर्ष अधिकारी गंभीर वित्तीय मामले में घिरे आईएफएस अधिकारियों बचाने के लिए आरोप पत्र को जारी करने के बजाय शो कॉज नोटिस जारी कर रहे हैं। जिनके खिलाफ आरोप पत्र जारी भी कर दिए गए हैं, उनके विरुद्ध आगे की कार्यवाही पेंडिंग कर दी जा रही है। विभाग के शीर्ष अधिकारियों की ढुलमुल रवैया के कारण आरोपित अधिकारी धीरे-धीरे रिटायर भी होते जा रहें है। विभाग सेवानिवृत्त अधिकारियों पर सद्भावना दिखाते हुए पेंशन भी स्वीकृत कर रहा है. मसलन, एम काली दुर्रई, देवेंद्र कुमार पालीवाल, प्रभात कुमार वर्मा जांच कार्यवाही के लंबित रहते हुए सेवानिवृत्त हो गए और अब उनके समस्त देयकों के भुगतान करने पर उदारता बरती जा रही है। दागी अफसरों को बचाने के लिए शीर्ष अधिकारी क्यों उदारता बरत रहे हैं, शोध का विषय है। इन अफसरों को अभयदान देने के प्रयास आरपी राय: खंडवा सर्किल में पदस्थ सीसीएफ आर पी राय के खिलाफ 10 जून 2019 को आरोप पत्र जारी हुआ था। आरोप था कि वन मंडल इंदौर के अंतर्गत वन परीक्षेत्र चोरल में बड़े पैमाने पर अवैध कटाई हुई थी। जांच के दौरान राय अपने दायित्वों का निर्वहन करने में असफल रहे। इसके कारण 6 लाख 93 हजार 361 रुपए की राजस्व हानि हुई थी। अभी इनसे वसूली नहीं हुई है। मामला विभाग में ही ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है। राय अगले मई महीने सेवानिवृत्त हो गए। यही नहीं, विभागीय मंत्री की विशेष कृपा होने के कारण इनसे छह लाख 93 हजार की वसूली नहीं हो पाई।** एपीएस सेंगर: बालाघाट सर्किल में पदस्थ सीसीएफ एपीएस सेंगर के खिलाफ 24 अगस्त 2022 को आरोप पत्र जारी हुआ। मामला तब का है, जब वे टीकमगढ़ के डीएफओ हुआ करते थे। इन पर आरोप है कि भंडार क्रय नियमों का पालन नहीं किया। खरीदी में गड़बड़ी हुई। इनके खिलाफ आरोपपत्र भी बन गया परंतु प्रशासन-1 शाखा ने उदारता दिखाते हुए शो कॉज नोटिस जारी कर उन्हें बालाघाट सर्किल में प्राइम पोस्टिंग दे दी गई है। दुर्भाग्य जनक पहलू यह है कि विभाग ने इनके खिलाफ कार्रवाई करने की अद्यतन स्थिति से शासन को अवगत नहीं कराया है। यही नहीं, बल्कि सेंगर को बालाघाट सर्किल की जिम्मेदारी भी सौंप दी गई। एम काली दुर्रई: 1996 बैच के आईएफएस अधिकारी एम काली दुर्रई प्रतिनियुक्ति पर हॉर्टिकल्चर में पदस्थ रहे। यहां पदस्थ रहते हुए दुर्रई ने किसानों की सब्सिडी देने के मामले में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की। इसके चलते उन्हें कमिश्नर हॉर्टिकल्चर पद से हटाया गया। मूल विभाग वन विभाग में लौटते ही उनके खिलाफ विभागीय जांच शुरू की गई। प्रधान मुख्य वन संरक्षक स्तर के जांच अफसर सीके पाटिल को जांच के लिए 2 साल का पर्याप्त समय मिलने के बाद भी विभागीय जांच कंप्लीट नहीं कर पाए और वे रिटायर हो गए। राजनीतिक दबाव के चलते विभाग के अफसर उनके खिलाफ कोई बड़ी कार्यवाही नहीं कर पाए। सेवानिवृत्ति के बाद मिलने वाले देयकों का भुगतान भी उदारता से किया जा रहा है। डीके पालीवाल: सीसीएफ शिवपुरी के पद से रिटायर हुए हैं। इनके पेंशन के भुगतान पर आपत्ति की गई है, क्योंकि धार और फिर गुना डीएफओ पद रहते हुए आर्थिक गड़बड़ी कर शासन को नुकसान पहुंचाया है। धार में पदस्थ रहते हुए पालीवाल ने एक रेंजर का समयमान वेतनमान का फिक्सेशन अधिक कर दिया। जब मामला संज्ञान में आया, तब तक पालीवाल वहां से स्थानांतरित हो गए थे। विभाग ने अतिरिक्त भुगतान के गए राशि वसूलने के नोटिस सेवानिवृत्त रेंजर को भेजा तो कोर्ट ने उस के पक्ष में फैसला देते हुए फिक्सेशन करने वाले अफसर पालीवाल से ₹300000 की वसूली करने के आदेश दिए। इसी प्रकार गुना में कैंपा फंड की राशि से गड़बड़झाला करने का भी आरोप है। इनके खिलाफ पूर्व एसीएस वन अशोक वर्णवाल ने आरोप पत्र जारी करने के निर्देश दिए थे। वर्णवाल के निर्देश पर विभाग ने उनके खिलाफ आरोप पत्र तैयार किया किंतु बड़े अफसरों के चहेते होने की वजह से आरोप-पत्र को शो-कॉज नोटिस परिवर्तित कर दिया गया है। बजट शाखा ने उनके पेंशन जारी करने पर आपत्ति लगाई है किंतु शीर्ष अफसरों ने शो-कॉज नोटिस जारी कर उनके पेंशन और समस्त देयकों के भुगतान के रास्ते प्रशस्त कर दिए। प्रभात कुमार वर्मा : 2001 बैच के आईएफएस अधिकारी प्रभात कुमार वर्मा जनवरी में सेवानिवृत्त हुए हैं। वे जब 2020 में वन विकास निगम में पदस्थ थे तब आर्थिक गड़बड़ियों के चलते उन्हें आरोप पत्र जारी किया गया। यही नहीं, विभाग ने 4 जनवरी 2022 को वन विकास निगम के एमडी को पत्र लिखकर गड़बड़ियों से संबंधित प्रचलित नस्ती उपलब्ध कराने के निर्देश दिए किंतु नस्ती उपलब्ध नहीं कराने के कारण उनके मामले में निर्णय नहीं हो सका। वे सेवानिवृत्त भी हो चुके हैं। जांच लंबित रहते हुए उनके देयकों के भुगतान की प्रक्रिया भी शुरू है। वर्मा पर आरोप यह भी है कि वे अपने मातहत अधिकारियों के खिलाफ दुर्भावना से कार्रवाई करते हैं। इनके शिकार खंडवा डीएफओ देवांशु शेखर, सुश्री नेहा श्रीवास्तव, अधर गुप्ता और एसडीओ विद्या भूषण मिश्रा हो चुके हैं. इनके द्वारा दुर्भावना से कार्रवाई करने की वजह से मिश्रा आईएफएस की दौड़ में पीछे रह गए हैं। दुर्भावना से की गई कार्रवाई से संबंधित दस्तावेज भी बड़े अधिकारियों को सौंपे हैं। उन पर लघु वनोपज संघ के अंतर्गत अधोसंरचना विकास के मद में भी गड़बड़ी करने के आरोप हैं। बृजेंद्र श्रीवास्तव: छिंदवाड़ा पूर्व में पदस्थ डीएफओ बृजेंद्र श्रीवास्तव के खिलाफ 21 जुलाई 2022 को नियम दस के तहत आरोप पत्र जारी किया गया था। इन पर आरोप है कि स्थानांतरण नीति के विरुद्ध जाकर कर्मचारियों के तबादले किए। आरोप पत्र का जवाब अभी तक नहीं दिया गया है। इनका तबादला वन मंत्री शाह की सिफारिश पर ग्वालियर से पूर्व छिंदवाड़ा वन मंडल जैसे महत्वपूर्ण वन मंडल में कर दिया गया है। भारत सिंह बघेल: भोपाल मुख्यालय में पदस्थ भारत सिंह बघेल को आरोप पत्र 22 मई 2006 को जारी किया गया था। बघेल ने अपने प्रभाव अवधि के दौरान पूर्व लांजी क्षेत्र में प्रभार अवधि में राहत कार्य अंतर्गत कार्यों … Read more

वन विभाग के दागी अफसरों पर मेहरबान है शीर्ष  अफसर

Top officers are kind to the tainted officers of the Forest Department विशेष संवाददाता  जंगल महकमे के शीर्ष अधिकारी कुछ चहेते अफसरों को बचाने के लिए पूरी ताकत लगाते आ रहें है। शीर्ष अधिकारी गंभीर वित्तीय मामले में घिरे आईएफएस अधिकारियों बचाने के लिए आरोप पत्र को जारी करने के बजाय शो कॉज नोटिस जारी कर रहे हैं। जिनके खिलाफ आरोप पत्र जारी भी कर दिए गए हैं, उनके विरुद्ध आगे की कार्यवाही पेंडिंग कर दी जा रही है। विभाग के शीर्ष अधिकारियों की ढुलमुल रवैया के कारण आरोपित अधिकारी धीरे-धीरे रिटायर भी होते जा रहें है। विभाग सेवानिवृत्त अधिकारियों पर सद्भावना दिखाते हुए पेंशन भी स्वीकृत कर रहा है. मसलन, एम काली दुर्रई, देवेंद्र कुमार पालीवाल, प्रभात कुमार वर्मा जांच कार्यवाही के लंबित रहते हुए सेवानिवृत्त हो गए और अब उनके समस्त देयकों के भुगतान करने पर उदारता बरती जा रही है। दागी अफसरों को बचाने के लिए शीर्ष अधिकारी क्यों उदारता बरत रहे हैं, शोध का विषय है। इन अफसरों को अभयदान देने के प्रयास  आरपी राय: खंडवा सर्किल में पदस्थ सीसीएफ आर पी राय के खिलाफ 10 जून 2019 को आरोप पत्र जारी हुआ था। आरोप था कि वन मंडल इंदौर के अंतर्गत वन परीक्षेत्र चोरल में बड़े पैमाने पर अवैध कटाई हुई थी। जांच के दौरान राय अपने दायित्वों का निर्वहन करने में असफल रहे। इसके कारण 6 लाख 93 हजार 361 रुपए की राजस्व हानि हुई थी। अभी इनसे वसूली नहीं हुई है। मामला विभाग में ही ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है। राय अगले मई महीने सेवानिवृत्त हो गए। यही नहीं, विभागीय मंत्री की विशेष कृपा होने के कारण इनसे छह लाख 93 हजार की वसूली नहीं हो पाई। एपीएस सेंगर: बालाघाट सर्किल में पदस्थ सीसीएफ एपीएस सेंगर के खिलाफ 24 अगस्त 2022 को आरोप पत्र जारी हुआ। मामला तब का है, जब वे टीकमगढ़ के डीएफओ हुआ करते थे। इन पर आरोप है कि भंडार क्रय नियमों का पालन नहीं किया। खरीदी में गड़बड़ी हुई। इनके खिलाफ आरोपपत्र भी बन गया परंतु  प्रशासन-1 शाखा ने उदारता दिखाते हुए शो कॉज नोटिस जारी कर उन्हें बालाघाट सर्किल में प्राइम पोस्टिंग दे दी गई है। दुर्भाग्य जनक पहलू यह है कि विभाग ने इनके खिलाफ कार्रवाई करने की अद्यतन स्थिति से शासन को अवगत नहीं कराया है। यही नहीं, बल्कि सेंगर को बालाघाट सर्किल की जिम्मेदारी भी सौंप दी गई।   एम काली दुर्रई:  1996 बैच के आईएफएस अधिकारी एम काली दुर्रई प्रतिनियुक्ति पर हॉर्टिकल्चर में पदस्थ रहे। यहां पदस्थ रहते हुए दुर्रई ने किसानों की सब्सिडी देने के मामले में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की। इसके चलते उन्हें कमिश्नर हॉर्टिकल्चर पद से हटाया गया। मूल विभाग वन विभाग में लौटते ही उनके खिलाफ  विभागीय जांच शुरू की गई। प्रधान मुख्य वन संरक्षक स्तर के जांच अफसर सीके पाटिल को जांच के लिए 2 साल का पर्याप्त समय मिलने के बाद भी विभागीय जांच कंप्लीट नहीं कर पाए और वे रिटायर हो गए। राजनीतिक दबाव के चलते विभाग के अफसर उनके खिलाफ कोई बड़ी कार्यवाही नहीं कर पाए। सेवानिवृत्ति के बाद मिलने वाले देयकों का भुगतान भी उदारता से किया जा रहा है।    डीके पालीवाल: सीसीएफ शिवपुरी के पद से रिटायर हुए हैं। इनके पेंशन के भुगतान पर आपत्ति की गई है, क्योंकि धार और फिर गुना डीएफओ पद रहते हुए आर्थिक गड़बड़ी कर शासन को नुकसान पहुंचाया है। धार में पदस्थ रहते हुए पालीवाल ने एक रेंजर का समयमान वेतनमान का फिक्सेशन अधिक कर दिया। जब मामला संज्ञान में आया, तब तक पालीवाल वहां से स्थानांतरित हो गए थे। विभाग ने अतिरिक्त भुगतान के गए राशि वसूलने के नोटिस सेवानिवृत्त रेंजर को भेजा तो कोर्ट ने उस के पक्ष में फैसला देते हुए फिक्सेशन करने वाले अफसर पालीवाल से ₹300000 की वसूली करने के आदेश दिए। इसी प्रकार गुना में कैंपा फंड की राशि से गड़बड़झाला करने का भी आरोप है। इनके खिलाफ पूर्व एसीएस वन अशोक वर्णवाल ने आरोप पत्र जारी करने के निर्देश दिए थे। वर्णवाल के निर्देश पर विभाग ने उनके खिलाफ आरोप पत्र तैयार किया किंतु बड़े अफसरों के चहेते होने की वजह से आरोप-पत्र को शो-कॉज नोटिस परिवर्तित कर दिया गया है। बजट शाखा ने उनके पेंशन जारी करने पर आपत्ति लगाई है किंतु शीर्ष अफसरों ने शो-कॉज नोटिस जारी कर उनके पेंशन और समस्त देयकों के  भुगतान के रास्ते प्रशस्त कर दिए।  प्रभात कुमार वर्मा : 2001 बैच के आईएफएस अधिकारी प्रभात कुमार वर्मा जनवरी में सेवानिवृत्त हुए हैं। वे जब 2020 में वन विकास निगम में पदस्थ थे तब आर्थिक गड़बड़ियों के चलते उन्हें आरोप पत्र जारी किया गया। यही नहीं, विभाग ने 4 जनवरी 2022 को वन विकास निगम के एमडी को पत्र लिखकर गड़बड़ियों से संबंधित प्रचलित नस्ती उपलब्ध कराने के निर्देश दिए किंतु नस्ती उपलब्ध नहीं कराने के कारण उनके मामले में निर्णय नहीं हो सका। वे सेवानिवृत्त भी हो चुके हैं। जांच लंबित रहते हुए उनके देयकों के भुगतान की प्रक्रिया भी शुरू है। वर्मा पर आरोप यह भी है कि वे अपने मातहत अधिकारियों के खिलाफ दुर्भावना से कार्रवाई करते हैं। इनके शिकार खंडवा डीएफओ देवांशु शेखर, सुश्री नेहा श्रीवास्तव, अधर गुप्ता और एसडीओ विद्या भूषण मिश्रा हो चुके हैं. इनके द्वारा दुर्भावना से कार्रवाई करने की वजह से मिश्रा आईएफएस की दौड़ में पीछे रह गए हैं। दुर्भावना से की गई कार्रवाई से संबंधित दस्तावेज भी बड़े अधिकारियों को सौंपे हैं। उन पर  लघु वनोपज संघ के अंतर्गत अधोसंरचना विकास के मद में भी गड़बड़ी करने के आरोप हैं।  बृजेंद्र श्रीवास्तव: छिंदवाड़ा पूर्व में पदस्थ डीएफओ बृजेंद्र श्रीवास्तव के खिलाफ 21 जुलाई 2022 को नियम दस के तहत आरोप पत्र जारी किया गया था। इन पर आरोप है कि स्थानांतरण नीति के विरुद्ध जाकर कर्मचारियों के तबादले किए। आरोप पत्र का जवाब अभी तक नहीं दिया गया है। इनका तबादला वन मंत्री शाह की सिफारिश पर ग्वालियर से पूर्व छिंदवाड़ा वन मंडल जैसे महत्वपूर्ण वन मंडल में कर दिया गया है। भारत सिंह बघेल: भोपाल मुख्यालय में पदस्थ भारत सिंह बघेल को आरोप पत्र 22 मई 2006 को जारी किया गया था। बघेल ने अपने प्रभाव अवधि के दौरान पूर्व लांजी क्षेत्र में प्रभार अवधि में राहत कार्य अंतर्गत कार्यों … Read more

कैंपा फंड के फायर प्रोटेक्शन मद से उपकरणों की खरीदी में गड़बड़ झाला

Jhala: Irregularities in purchasing equipment from fire protection item of Campa Fund. उदित नारायण भोपाल। जंगल महकमे में कैंपा फंड से फायर प्रोटक्शन के लिए 11 करोड़ रूपए रिलीज किए गए हैं। 11 करोड़ रूपया रिलीज होते ही सप्लायरों का एक सिंडिकेट सक्रिय हो गया है। इस सिंडिकेट में वित्तीय सेवा के एक अधिकारी के शामिल होने की खबर विभाग में सुर्खियों में है। हालांकि शासन की ओर से अधिकारी की पदस्थापना अभी मंत्री स्टाफ में नहीं हो पाई है। बावजूद इसके, इनके द्वारा फील्ड में पदस्थ वन संरक्षक और डीएफओ पर दबाव बनाया जा रहा है। दिलचस्प पहलू यह है कि सिंडिकेट के संचालक कर्ता धार, अलीराजपुर और झाबुआ से जुड़े हैं। फायर प्रोटेक्शन के लिए कैंपा फंड से 11 करोड़ रूपया रिलीज किए गए हैं, क्योंकि 15 मार्च तक खर्च किया जाना है। 11 करोड़ रूपये से ब्रशयुक्त कटर, ब्लोअर, अग्निरोधी किट  और पानी की जैरीकेन की खरीदी होनी है। इन उपकरणों मार्केट रेट से दुगना और डेढ़ गुना दाम पर हो रही है। मसलन, ब्रशयुक्त कटर की बाजार दर 12000 से लेकर 14000 रुपए तक है किंतु विभाग 45000 रुपए में खरीद रहा है। इसी प्रकार ब्लोअर की बाजार दर अधिक से अधिक 14000 रुपए है। जबकि विभाग ₹60000 प्रति ब्लोअर की दर से भुगतान करने जा रहा है। 5000से ₹6000 में मिलने वाला अग्निरोधी किट वन विभाग ₹12000 में खरीद रहा है। सूत्रों का कहना है यह है कि यह डर इसलिए निर्धारित किए गए हैं क्योंकि अधिकारियों का सिंडिकेट संचालक कर्ता द्वारा सप्लायरों से 15% कमीशन की डिमांड किये जाने की खबर है। सूत्रों ने बताया कि वन मंत्री के नाम से सिंडिकेट में शामिल अनाधिकृत अफसर फील्ड के अफसरों (डीएफओ- सीएफ) को धमकाया जा रहा है कि वर्क ऑर्डर इन्हीं फर्मों को ही दिया जाय। यह फॉर्म में भी सिंडिकेट में शामिल सदस्यों की ही है। सूत्रों की माने तो  खंडवा सतना और दक्षिण शहडोल के अलावा किसी भी अधिकारी ने टेंडर नहीं बुलाए हैं।  एक सीनियर अधिकारी की सलाह है कि विभाग में जो भी खरीदी हो उसके टेंडर अथवा बिड विभाग की साइट पर अपलोड किए जाएं। इससे अधिक से अधिक फर्म पार्टिसिपेट कर सकेंगी और विभाग को वित्तीय फायदा भी होगा। फील्ड के अवसर दबाव में आकर बीट के द्वारा खरीदी की जाती है, जिसकी जानकारी सिर्फ सिंडिकेट के सदस्यों को ही रहती है। फायर प्रोटक्शन के लिए खरीदी होने वाली उपकरण  नाम                   संख्या            मद (करोड़)  ब्रशयुक्त कटर      4400            1.98  ब्लोअर                440             2.64  अग्निरोधी किट    4400           5.28 पानी जैरीकेन       4400           1.10

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