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कटनी, लार्वा पाये जाने पर नगर निगम द्वारा काटा जाएगा चालान

कटनी, लार्वा पाये जाने पर नगर निगम द्वारा काटा जाएगा चालान कटनी :- स्वास्थ्य विभाग द्वारा विगत दिवस एक दिवसीय ट्रेनिंग शहर के 45 वार्ड दरोगाओ को मच्छर के लार्वा का सर्वे करने और लार्वा पाये जाने पर चालान काटने हेतु दिये निर्देश जिसमें श्रीमती शालिनी नामदेव जिला मलेरिया अधिकारी एवं पी के महार प्रभारी सहायक मलेरिया अधिकारी के द्वारा 45 वार्ड दरोगाओ को मलेरिया, डेंगू , चिकन गुनिया, फाई लेरिया की एक दिवसीय ट्रेनिंग ऑडिटोरियम बस स्टेंड कटनी में दी गई संजय चौदाह जयभान सिह नितिन बाल्मीकि अजित विश्वकर्मा वन्स गोपाल बेगा कौशल कुंडे संदीप यादव आदि उपस्थित रहे

नीमच. आबकारी विभाग ने बरामद की 200 लीटर कच्ची शराब

नीमच जिले में अवैध मदिरा निर्माण व अवैध शराब के विरुद्ध विशेष अभियान चलाया जा रहा है जिला कलेक्टर दिनेश जैन एवं जिला आबकारी आर एन व्यास के निर्देशन पर -उप निरीक्षक कमलेश सोलंकी ने बताया कि टीम के साथ ग्राम बरखेड़ा और ग्राम भांड्या में दबिश दी। इस दौरान 200 लीटर अवैध कच्ची शराब बरामद की गई और 1500 किलो लहान मौके पर नष्ट किया गया। अवैध कारोबार में संलिप्त एक अभियुक्त को मौके से गिरफ्तार किया गया

डीजीसीआई के परामर्श के बाद एबॉट इंडिया ने ‘डाइजीन सीरप’ के बैच वापस लिए

डीजीसीआई के परामर्श के बाद एबॉट इंडिया ने ‘डाइजीन सीरप’ के बैच वापस लिए After the advice of the DGCI, Abbott India has recalled batches of ‘Digene Syrup.’ ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया ने बीते माह चर्चित एंटासिड ‘डाइजीन’ सीरप के संबंध में शिकायत मिलने के बाद इसकी जांच की थी. इसने केमिस्ट और थोक विक्रेताओं से भी इसकी बिक्री बंद करने को कहा था. सोर्स- द वायर

ग्वालियर में बढ़ा डेंगू का खतरा, 10 साल के बच्चे सहित 17 मरीज़ों में डेंगू की हुई पुष्टि

ग्वालियर में बढ़ा डेंगू का खतरा, 10 साल के बच्चे सहित 17 मरीज़ों में डेंगू की हुई पुष्टि

रायसेन में अस्पताल की छत गिरने से एक नर्स के घायल

32 वर्षीय नर्सिंग अधिकारी ममता बैथेरी को चोट आई जब सरकारी अस्पताल के ऑपरेशन थिएटर की छत का एक हिस्सा उसके सिर पर गिरा, मध्य प्रदेश के रायसेन जिले में, यह जानकारी आधिकारिक रूप से जानकारी देने वाले विनोद सिंह परमार ने बताया। घटना बुधवार को घटी जब नर्सिंग अधिकारी ममता बैथेरी जिला अस्पताल में एक ऑपरेशन की तैयारियों में थीं। उन्हें सिर में चोट आई और उन्हें खुद जिला अस्पताल में भर्ती किया गया। उनकी (सीटी) स्कैन की गई। उन्हें खतरे से बाहर और उनकी स्थिति स्थिर है जिला अस्पताल के अधिकारियों ने कहा कि उन्होंने मध्यप्रदेश लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) को पत्र लिखा हैं ताकि अस्पताल के नए भवन को उन्हें सौंपा जा सके और ऑपरेशन थिएटर को वहाँ स्थानांतरित किया जा सके। पीडब्ल्यूडी के परियोजना कार्यान्वयन इकाई डिवीजनल इंजीनियर सुरेश कुमार मिश्रा ने कहा कि नये भवन को अस्पताल को 10 दिनों के भीतर हस्तांतरित कर दिया जाएगा

बच्चों के नाश्ते में मरी छिपकली निकलने के बाद करीब एक दर्जन बच्चे बीमार

कटनी जिले की रंगनाथ नगर वेद पाठशाला में बच्चों के नाश्ते में मरी छिपकली निकलने के बाद करीब एक दर्जन बच्चे बीमार हो गए। यहां वेद पुराण की पढ़ाई करने वाले छात्रों के खाने में छिपकली निकली। जिसके बाद 13 छात्र उल्टी और सिर दर्द की समस्या के चलते जिला अस्पताल में भर्ती किए गए हैं। बता दें कि इस वेद पाठशाला में जिले के अलावा बाहर से भी आकर भी बहुत से बच्चे पढ़ाई करते हैं। कलेक्टर अवि प्रसाद ने इस पूरे मामले में संज्ञान लेते हुए नोटिस जारी किया है।

पीएम मोदी के बर्थडे पर बना कीर्तिमान, महज 9 घंटे में 2 करोड़ लोगों को वैक्सीन लगी

नई दिल्ली। भारत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर शुक्रवार को महज 9घंटे में ही कोरोना वायरस के खिलाफ 2 करोड़ से ज्यादा लोगों को वैक्सीन लगाने का रिकॉर्ड बनाया है। अभी भी वैक्सीनेशन जारी है। यानी यह आंकड़ा अभी और ऊपर जाएगा। इससे पहले दोपहर डेढ़ बजे तक ही एक करोड़ से ज्‍यादा डोज लगाए जा चुके थे। वैक्‍सीनेशन प्रोग्राम की रफ्तार का अंदाजा इस बात से लगा सकते हैं कि हर सेकेंड 527 से ज्‍यादा डोज लगाए जा रहे हैं। हर घंटे 19 लाख से ज्‍यादा डोज दिए जा रहे हैं। राज्यों को 77.77 करोड़ से ज्‍यादा डोज मुहैया कराए गए स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने कहा कि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को वैक्सीन के 77.77 करोड़ से ज्‍यादा डोज उपलब्ध कराए गए है। राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के पास अभी वैक्सीन के 6.17 करोड़ से ज्‍यादा डोज उपलब्ध हैं। चौथे दिन एक करोड़ से ज्यादा वैक्सीन डोज लगे इससे पहले 27 अगस्त, 31 अगस्त और 6 सितंबर को देश में एक करोड़ से ज्यादा वैक्सीन डोज लगाए गए थे। स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया ने गुरुवार को आह्वान किया था कि देश में वैक्सीनेशन ड्राइव को रफ्तार देनी चाहिए। यह प्रधानमंत्री मोदी के जन्मदिन का सबसे अच्छा तोहफा होगा। भाजपा ने इस मौके पर देशभर में अपनी यूनिट्स को निर्देश दिया था कि ज्यादा से ज्यादा लोगों को वैक्सीन का डोज लगाया जाए। 20 दिनों का सेवा और समर्पण अभियान BJP अध्यक्ष जेपी नड्डा ने PM मोदी के जन्मदिन पर 20 दिनों का सेवा और समर्पण अभियान शुरू किया है, जो 7 अक्टूबर तक चलेगा। पार्टी इस दौरान मोदी के सार्वजनिक जीवन में दो दशक पूरा करने का भी जश्न मनाएगी। इसमें वह वक्‍त भी शामिल है, जिस दौरान मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री हुआ करते थे।

MP में कोरोना के बाद वायरल फीवर-डेंगू का कहर

एमपी में कोरोना के बाद अब डेंगू और वायरल फीवर का प्रकोप बढ़ता जा रहा है. बीमारियों ने बच्चों को अपनी चपेट में ले लिया है. भोपाल/जबलपुर. कोरोना की तीसरी लहर (Corona Third Wave) की चेतावनी के बीच मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) में वायरल फीवर और डेंगू कहर बरपा रहे है. राजधानी भोपाल, जबलपुर और ग्वालियर सहित कई जगहों पर सैकड़ों की संख्या में लोग अस्पतालों में भर्ती हैं. इन मरीजों में बच्चों की संख्या ज्यादा है. भोपाल में तो बीमारी होने वाले बच्चों की संख्या ही 355 से ज्यादा है. जबलपुर में मरीजों का आंकड़ा 500 के आसपास छू रहा है. ग्वालियर में मरीजों की संख्या 40 से ज्यादा हो गई है. स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, भोपाल में वायरल फीवर बच्चों पर सीधा असर कर रहा है. राजधानी भोपाल के निजी व सरकारी अस्पतालों में 355 से ज्यादा बच्चे वायरल फीवर से पीड़ित है. यहां 50 से 60 बच्चे रोज वायरल फीवर का शिकार हो रहे हैं. इनकी संख्या लगातार बढ़ती जा रही है. ओपीडी की संख्या भी सरकारी-निजी अस्पतालों में 60% बढ़ा दी गई है. अस्पतालों में एक- एक बेड पर से दो से तीन बच्चों को भर्ती किया गया है. करीब-करीब सभी अस्पताल बच्चों से भर चुके हैं. प्रदेश में डेंगू चिकनगुनिया और स्क्रब टायफस के मरीज भी तेजी से बढ़ रहे हैं. बुधवार को डेंगू के 11, तो चिकनगुनिया के 7 मरीज मिले. शहर में डेंगू के अब तक 151, चिकनगुनिया के 47 मरीज सामने आए हैं. 9068 घरों में डेंगू का लार्वा मिला है. मलेरिया विभाग और नगर निगम की टीमें घर घर-घर जाकर सर्वे कर लार्वा नष्ट कर रही हैं. जबलपुर में बच्चों की हालत नाजुक जबलपुर में डेंगू पीड़ित मरीजों की संख्या का आंकड़ा 500 के ऊपर है. हालांकि, सरकारी आंकड़ों में मात्र 333 मरीज ही हैं. शहर के बड़े अस्पतालों में से एक विक्टोरिया अस्पताल के चाइल्ड वार्ड में एक बेड पर 2 से 3 बच्चे तक भर्ती हैं. 24 बेड की व्यवस्था वाले चाइल्ड वार्ड में 55 से 60 बच्चे एडमिट हैं. इसके बावजूद जगह कम पड़ रही है. इस जिला अस्पताल के अलावा निजी और अन्य बड़े सरकारी अस्पतालों में भी हालात भयावह है. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, जिले में अभी तक 18 साल तक उम्र के डेंगू के 124 मरीज मिले हैं. वहीं, संक्रामक बीमारियों से पीड़ित बच्चे रोजाना 100 की संख्या में सामने आ रहे हैं. औसत से कम बारिश बनी वजह इस मामले को लेकर डॉक्टरों का कहना है कि इस बार औसत से कम बारिश के चलते नमी बढ़ गई है. यही वजह है कि लार्वा और संक्रामक बीमारियां पैर पसार रही हैं. स्वास्थ्य महकमा नगर निगम के साथ मिलकर जन जागरूकता फैला रहा है. जिले में लार्वा नष्ट करने का काम भी किया जा रहा है. गौरतलब है कि, गरीब परिजन मासूम बच्चों के लिए ब्लड और प्लेटलेट की व्यवस्था में जूझ रहे हैं. वायरल फीवर के चलते उनकी हालत नाजुक बनी हुई है. दूसरी ओर, ग्वालियर में डेंगू का प्रकोप बढ़ रहा है. यहां पिछले 24 घंटे में डेंगू के 10 नए मरीज मिले. जिले में डेंगू मरीजों की संख्या 43 हो गई है. इनमें 15 बच्चे भी शामिल हैं. चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग का कहना है कि उत्तर प्रदेश या किसी अन्य राज्य की तरह मध्य प्रदेश में बच्चों में किसी भी तरह का कोई रहस्यमयी बुखार नहीं है. सिर्फ वायरल फीवर के लक्षण बच्चों में है. किसी भी तरह से वायरल को लेकर पैनिक फैलाने की जरूरत नहीं है. अस्पतालों की व्यवस्था का लगातार जायजा ले रहे हैं. वायरल की चपेट में आ रहे बच्चों की बढ़ती संख्या के बीच अस्पताल में बिस्तरों की संख्या और तमाम व्यवस्थाएं दुरुस्त करने के निर्देश अधिकारियों को दिए हैं.

सिंगल मदर बनीं भोपाल की संयुक्ता, स्पर्म डोनेशन के जरिए दिया बेटे को जन्म

महिला ने बताया कि, मैं मां बनना चाहती थी, इसलिए केंद्रीय दत्तक ग्रहण प्राधिकरण से बच्चा गोद लेने के लिए दो बार रजिस्ट्रेशन किया, लेकिन बच्चा गोद नहीं मिल पाया. MP : रुढ़िवादी सोच तोड़ सिंगल मदर बनीं भोपाल की संयुक्ता, स्पर्म डोनेशन के जरिए दिया बेटे को जन्म बिना पति के मां बना एक औरत के लिए आज के समय में भी बहुत बड़ा चैलेंज है. समाज ऐसी महिलाओं को स्वीकार नहीं करता है. इन जैसी और भी कई बातों और रुढ़िवादी सोच को तोड़कर भोपाल (Bhopal) की 37 साल की संयुक्ता बनर्जी ने अपने लिए कुछ अलग चुना है. हालांकि ये फैसला लेना इतना आसान नहीं था, लेकिन परिवार और दोस्तों से मिले सपोर्ट के बाद उसके लिए मुश्किले और आसान हो गई. संयुक्ता बनर्जी ने काफी सोचने के बाद बिना पार्टनर के ही मां (single mother) बनने का फैसला लिया और स्पर्म डोनेशन (sperm donation) के जरिए अगस्त में एक बेटे को जन्म दिया है संयुक्ता का आज अपने इस फैसले पर गर्व है. संयुक्ता का कहना है कि उनके परिवार और दोस्तों ने मानसिक और भावनात्मक बहुत सहयोग किया जिसकी वजह से उन्हें ये फैसला लेने में कोई मुश्किल नहीं आई. बच्चा गोद लेने का भी कोशिश की थी लेकिन गोद नहीं मिला उन्होंने बताया कि तीन बार बच्चा गोद लेने की कोशिश की थी, लेकिन बच्चा गोद नहीं मिल पाया. इसके बाद एक फैमिली डॉक्टर ने उन्हें आईसीआई तकनीक के बारे में बताया. जिसके बाद उनका मां बनने का सपना पूरा हो गया. सरोगेसी से मां बनना बहुत मंहगा प्रोसेस है संयुक्ता ने बताया कि उनकी शादी 20 अप्रैल 2008 में हुई थी. पति को बच्चा नहीं चाहिए था लेकिन मुझे मातृत्व का सुख लेना था. 2014 में दोनों की राहें अलग हो गईं और 2017 में तलाक हो गया. फिर मैंने नए सिरे से जिंदगी शुरू की. चूंकि मैं मां बनना चाहती थी, इसलिए केंद्रीय दत्तक ग्रहण प्राधिकरण से बच्चा गोद लेने के लिए दो बार रजिस्ट्रेशन किया, लेकिन बच्चा गोद नहीं मिल पाया. इसके बाद मेरे फैमिली डॉक्टर ने सेरोगेसी, आईवीएफ, आईसीआई और आईयूआई जैसी तकनीक के बारे में बताया. इसमें बिना पार्टनर के भी मां बना जा सकता है. 24 अगस्त को दिया बेटे को जन्म उन्होंने कहा कि, मैंने आईसीआई तकनीक को अपनाने का निर्णय लिया. इसमें बिना किसी के संपर्क में आए केवल स्पर्म डोनेशन लेना होता है. इसमें डोनर की पहचान गोपनीय रहती है. फरवरी में मुझे पता चला मैंने कंसीव कर लिया है. डॉक्टर की देखरेख में मैंने 24 अगस्त को बेटे को जन्म दिया. पहले मैंने सरोगेसी से बच्चा पैदा करने के बारे में सोचा था लेकिन यह तकनीक बहुत महंगी है. इसमें काफी रुपया खर्च होने के बाद भी सक्सेस रेट बहुत कम है. इसके बाद टेस्ट ट्यूब बेबी पर भी विचार किया लेकिन उसमें भी बात नहीं बनी. तब मैंने आईसीआई तकनीक को अपनाया. ‘मैं पापी हो गई हूं. मेरा पाप सामने आ गया’ संयुक्ता कहती हैं, अगर आप शादी के बंधन में हैं तो मां बने बिना एक महिला अस्तित्व ही न पूरा कर पाए. लेकिन अगर शादीनुमा संस्थान से या तो निकल गए हो या शादी ही नहीं की है तो एक महिला का मां बनना पाप माना जाता है. इस तरह से अब इस समाज की नजरों में मेरा एक पाप सामने आ चुका है और मैं पापी हो गई हूं वह कहती हैं कि मेरी मां 70 साल की उम्र में साये की तरह मेरे साथ खड़ी रहीं. कुछ दोस्तों ने भी हर मोड़ पर मेरा साथ दिया जिससे राह आसान हो गई.

MP : कोरोना में महा पाप: मरीजों को लगा दिए 500 नकली रेमडेसिविर

जबलपुर. नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन के मामले में पुलिस ने शहर के जाने-माने उद्योगपति और सिटी हॉस्पिटल के संचालक सरबजीत सिंह मोखा के खिलाफ FIR दर्ज की है. मोखा पर आरोप है कि इसने 500 नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन कोविड मरीजों को लगा दिए. इन मरीजों में से कई की मौत होने की आशंका जताई जा रही है. पुलिस की टीमें सरबजीत की तलाश कर रही हैं. गौरतलब है कि विगत दिनों गुजरात पुलिस ने नकली रेमडेसीवीर मामले में सपन जैन को गिरफ्तार किया था. उसने पूछताछ में सरबजीत सिंह मोखा का नाम लिया. इसके बाद पुलिस ने 48 घंटे के अंदर नकली इंजेक्शन की चैन का भंडाफोड़ कर दिया. जांच में सामने आया कि सरबजीत ने 500 नकली इंजेक्शन इंदौर से बुलवाए थे. इन इंजेक्शन को उसके अस्पताल में भर्ती मरीजों को लगवा दिया गया और उनकी जान से बड़ा खिलवाड़ किया गया. कई धाराओं में दर्ज हुए मामले देर रात जबलपुर की ओमती थाना पुलिस ने इस मामले में धारा 274, 275, 308, 420 समेत डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट और ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया. पुलिस के मुताबिक, सरबजीत सिंह मोखा ने सपन जैन के साथ मिलकर बड़ी संख्या में यह नकली इंजेक्शन मरीजों को दिए हैं. इस वजह से कई मरीजों को अपनी जान तक खोनी पड़ी है. पुलिस ने इस मामले में सिटी हॉस्पिटल में कार्यरत मैनेजर देवेश चैरसिया पर भी मामला दर्ज किया. इस तरह होता गया मामले का खुलासा बता दें, गुजरात में नकली इंजेक्शन की फैक्ट्री पर पुलिस ने कुछ दिनों पहले रेड मारी थी. जांच में पता चला था कि करीब एक लाख फर्जी रेमडेसिविर इंजेक्शन देशभर के अलग-अलग राज्यों में बेचे गए हैं. इसी कड़ी में गुजरात पुलिस 7 मई को जबलपुर आई और आधारताल निवासी दवा व्यवसायी सपन जैन को गिरफ्तार कर ले गई. इसके बाद जबलपुर पुलिस भी हरकत में आई थी और लगातार दो दिनों से ताबड़तोड़ छापे मारे. सपन जैन की तीन दवा दुकानों को पहले ही सील कर दिया गया था, जबकि पूछताछ में दो बड़े अस्पतालों के नाम भी सामने आए थे. इसी जांच में सिटी अस्पताल के संचालक का नाम उजागर हो गया.

MP में बेशर्म सिस्टम : सरकारी अस्पताल के कोविड वार्ड में ऑक्सीजन सप्लाई रुकी, 2 मरीजों की मौत

भोपाल। मध्यप्रदेश में राजधानी भोपाल के जिला अस्पताल में बड़ी लापरवाही सामने आई है। यहां जेपी अस्पताल के कोरोना वार्ड में बुधवार देर रात दो मरीजों की मौत हो गई। मृतकों के परिजनों का आरोप है कि रात में ऑक्सीजन सप्लाई रुक गई थी, जिसके कारण मरीजों की जान चली गई। जान गंवाने वाली 50 साल की रामरती अहिरवार ICU में भर्ती थीं, जबकि सीबी मेश्राम कोरोना संदिग्ध वार्ड में भर्ती थे। आरोपों पर जेपी के सिविल सर्जन डॉ. राजेश श्रीवास्तव का कहना है कि ऑक्सीजन सप्लाई नहीं रुकी थी। दोनों मरीजों की हालत गंभीर थी। अब तक इस मामले में किसी तरह की जांच के आदेश नहीं दिए गए हैं। 11 दिसंबर 2020 को हमीदिया के कोरोना वार्ड की दो घंटे बिजली गुल होने से ऑक्सीजन सप्लाई बंद हो गई थी। तब ऑक्सीजन सपोर्ट पर चल रहे तीन मरीजों की मौत हो गई थी। हालांकि, जांच रिपोर्ट में क्लीनचिट दे दी गई थी। रामरती के बेटे जीवन ने भास्कर को बताया, ‘मां को 28 मार्च को जेपी में भर्ती कराया था, तब उन्हें तेज बुखार था। 29 को उनकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई। बुधवार रात को मां की हालत अच्छी थी। उन्होंने मुझसे बात की, दलिया खाया और सो गई थीं। मैं रात में वार्ड के बाहर ही रुका था। रात ढाई बजे वार्ड में कोई मरीज बुरी तरह चिल्ला रहा था। तब मैं वार्ड में जाना चाहता था, लेकिन गार्ड ने अंदर नहीं जाने दिया। सुबह 7 बजे डॉक्टर ने फोन कर बताया कि मां की हालत बहुत खराब है, आकर देख लो। अंदर मां बेसुध पड़ी थीं। हम मां को दूसरे अस्पताल ले जाना चाहते थे, उन्हें बाहर भी ले आए, लेकिन अस्पताल वालों ने पुलिस बुला ली और हमें मां को नहीं ले जाने दिया। अगले दिन दोपहर में शव सौंपा गया। इसके लिए भी मुझे मिन्नतें करनी पड़ीं।’ एंटीजन रिपोर्ट निगेटिव थी, फिर भी जान चली गई दूसरे मृतक सीबी मेश्राम को दो दिन पहले ही परिजनों ने यहां भर्ती किया था। उनको निमोनिया था। अस्पताल प्रबंधन की मानें तो उनकी कोरोना जांच कराई गई, लेकिन एंटीजन टेस्ट निगेटिव था। ऐसे में RTPCR सैंपल लेकर जांच के लिए भेजा गया था। रिपोर्ट नहीं आने की स्थिति में उनको कोरोना सस्पेक्टेड वार्ड में रखकर इलाज किया जा रहा था। जहां गुरुवार तड़के करीब तीन बजे उनकी मौत हो गई।

मध्यप्रदेश में 3 माह तक के लिए एस्मा लागू

भोपाल. कोरोना की दूसरी लहर से संक्रमण की रफ्तार बढ़ने के साथ ही सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं पर एस्मा (अति आवश्यक सेवा घोषित) लगा दिया है। अब डॉक्टर, नर्स या फिर पैरामेडिकल स्टाॅफ डयूटी करने से इंकार नहीं कर सकेंगे। सरकार ने बुधवार देर शाम राजपत्र में इसका नोटिफिकेशन कर दिया है। जिसमें कहा गया है, स्वास्थ्य सेवाओं को 3 माह के लिए अति आवश्यक घोषित किया गया है। मध्‍य प्रदेश में सभी सरकारी और गैर सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं पर सरकार ने एस्मा कानून लागू दिया है। एस्मा लागू होने के बाद कोई भी डॉक्टर या नर्स मरीज का इलाज करने से इनकार नहीं कर सकता है। अपर मुख्य सचिव डॉ. राजेश राजौरा ने बताया है कि कोविड-19 महामारी की रोकथाम के लिये स्वास्थ्य संबंधी सेवाओं को 3 माह के लिये अत्यावश्यक सेवाओं के रूप में अधिसूचित किया गया है। डॉ. राजौरा ने बताया है कि राजपत्र में जारी अधिसूचना अनुसार मध्यप्रदेश अत्यावश्यक सेवा संधारण तथा विच्छिन्नता निवारण अधिनियम-1979 की धारा-4 की उप धारा-1 द्वारा प्रदत्त शक्तियों को प्रयोग में लाते हुए राज्य सरकार समस्त शासकीय एवं निजी स्वास्थ्य एवं चिकित्सीय संस्थानों में समस्त स्वास्थ्य सुविधाओं, डॉक्टर, नर्स और स्वास्थ्यकर्मी, स्वास्थ्य संस्थानों में स्वच्छता कार्यकर्ता, मेडिकल उपकरणों की बिक्री संधारण एवं परिवहन, दवाइयों एवं ड्रग्स की बिक्री, परिवहन एवं विनिर्माण, एम्बुलेंस सेवाएं, पानी एवं बिजली की आपूर्ति, सुरक्षा संबंधी सेवाओं, खाद्य एवं पेयजल प्रावधान एवं प्रबंधन तथा बॉयो मेडिकल वेस्ट प्रबंधन को अत्यावश्यक सेवाओं में शामिल किया गया है। उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य संबंधी उक्त कार्य करने से इंकार किये जाने का प्रतिषेध किया गया है।

आ गई बड़ी खुशखबरी, 16 जनवरी से भारत में लगने लगेगी कोरोना की वैक्सीन

नई दिल्ली . प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश में कोरोना की स्थिति और टीकाकरण की तैयारियों को लेकर शनिवार को एक उच्च-स्तरीय बैठक की। इसके साथ ही केंद्र सरकार ने देश में कोरोना वैक्सीनेशन शुरू होने की तारीख का ऐलान कर दिया। देश में 16 जनवरी से कोरोना टीकाकरण अभियान शुरू होगा। सबसे पहले करीब 3 करोड़ हेल्थकेयर और फ्रंटलाइन वर्करों को टीका लगाया जाएगा। इसके बाद 50 साल से ज्यादा उम्र के लोगों और इससे कम उम्र के उन लोगों को टीके लगेंगे जो पहले से ही किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित हैं। ऐसे लोगों की तादाद करीब 27 करोड़ है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में टीकाकरण की तैयारियों और कोरोना की स्थिति की समीक्षा के लिए शनिवार को एक उच्च-स्तरीय बैठक की समीक्षा की। बैठक में कैबिनेट सेक्रटरी, पीएम के प्रिंसिपल सेक्रटरी, हेल्थ सेक्रटरी और दूसरे बड़े अधिकारी शामिल हुए। दरअसल, भारत में बनी दो कोरोना वैक्सीनों को सरकार ने लिमिटेड इमर्जेंसी यूज की इजाजत दे चुकी है।

भारत बना रहा है कोरोना किलर नेजल स्प्रे, वैक्सीन की नहीं रहेगी जरूरत

नई दिल्ली। भारत को कोरोना वैक्सीन के मोर्चे पर जल्द ही एक और अच्छी खबर मिल सकती है. भारत बायोटेक देश में जल्द ही Nasal वैक्सीन का ट्रायल शुरू करने जा रहा है. नागपुर में इस वैक्सीन के पहले और दूसरे फेज का ट्रायल किया जाएगा. Nasal वैक्सीन को नाक के जरिए दिया जाता है, जबकि अभी तक भारत में जिन दो वैक्सीन (कोविशील्ड, कोवैक्सीन) को मंजूरी मिली है वो हाथ पर इंजेक्शन लगाकर दी जाती है. भारत बायोटेक के डॉ. कृष्णा इल्ला के मुताबिक, उनकी कंपनी ने वाशिंगटन यूनिवर्सिटी के साथ करार किया है. इस Nasal वैक्सीन में दो की बजाय सिर्फ एक ही डोज देने की जरूरत होगी. रिसर्च में पाया गया है कि ये काफी बेहतरीन ऑप्शन है. डॉ. चंद्रशेखर के मुताबिक, अगले दो हफ्तों में Nasal Covaxin का ट्रायल शुरू कर दिया जाएगा. इसके लिए हमारे पास जरूरी सबूत हैं कि नाक से दी जाने वाली वैक्सीन इंजेक्शन वाली वैक्सीन से बेहतर है. भारत बायोटेक जल्द ही इस ट्रायल को लेकर DCGI के सामने प्रपोजल रखेगा. जानकारी के मुताबिक, भुवनेश्वर-पुणे-नागपुर-हैदराबाद में भी इस वैक्सीन का ट्रायल होगा. जहां पर 18 से 65 साल के करीब 40-45 वॉलेंटियर्स का चयन किया जाएगा. गौरतलब है कि भारत बायोटेक अभी भी दो इंट्रा-नेसल वैक्सीन पर काम कर रहा है. दोनों ही वैक्सीन अमेरिका की हैं. आपको बता दें कि अभी तक जो भी वैक्सीन बाजार में आई हैं, उसमें व्यक्ति के हाथ पर ही टीका लगाया जाता है. लेकिन Nasal वैक्सीन को नाक के जरिए ही दिया जाएगा. चूंकि नाक से ही सबसे अधिक वायरस फैलने का खतरा रहता है, ऐसे में इस वैक्सीन के कारगर होने की अधिक संभावना है. वाशिंगटन स्कूल ऑफ मेडिसन की रिसर्च के मुताबिक, अगर नाक के द्वारा वैक्सीन दी जाती है तो शरीर में इम्युन रिस्पॉन्स काफी बेहतर तरीके से तैयार होता है. ये नाक में किसी तरह के इंफेक्शन को आने से रोकता है, ताकि आगे शरीर में ना फैल पाए. क्या इंजेक्शन से बेहतर साबित होगी ये वैक्सीन? एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर इस तरह की वैक्सीन को मंजूरी मिलती है तो कोरोना से लड़ाई में ये गेम चेंजर साबित होगी. क्योंकि जो इंजेक्शन लगाया जाता है, उससे इंसान का सिर्फ निचला लंग ही सेफ हो पाता है. लेकिन अगर नाक के जरिए वैक्सीन दी जाती है तो उससे ऊपरी और निचला लंग दोनों सेफ होने की संभावना है. Nasal वैक्सीन मौजूदा वैक्सीन के मुकाबले कम खतरनाक और आसानी से दी जाने वाली वैक्सीन है. जो किसी भी इंसान के शरीर में तेजी से असर करती है. आपको बता दें कि भारत से पहले यूनाइटेड किंगडम में Nasal वैक्सीन का ट्रायल किया जा रहा है. UK में कुल दो Nasal कोरोना वैक्सीन के फेज़ 1 का ट्रायल किया जा रहा है.

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