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अखिलेश यादव सहित परिवार के पांच सदस्य निर्वाचित होकर पहुंचे लोकसभा

कन्नौज चुनावी दंगल में तो पति-पत्नी के आमने-सामने की लड़ाई के कई उदाहरण हैं, लेकिन एक अलग-अलग सीट से एक साथ जीतकर लोकसभा तक पहुंचने की नजीर कम ही मिलती है। इस बार 18वीं लोकसभा के दौरान जब सदन में सभी सांसद बैठेंगे, तो यूपी से अखिलेश यादव और डिंपल यादव के रूप में पति-पत्नी की इकलौती जोड़ी सभी का ध्यान खींचेगी। यह पहली बार है कि किसी पार्टी का मुखिया अखिलेश यादव और उनकी पत्नी डिंपल यादव एक साथ लोकसभा के लिए चुने गए हैं। अखिलेश अपनी परंपरागत सीट कन्नौज से, तो उनकी पत्नी डिंपल यादव पड़ोस की मैनपुरी सीट से सांसद चुनी गई हैं। दोनों ने ही रिकॉर्ड वोटों के अंतर से चुनाव जीता है। डिंपल यादव तो सपा की ओर से जीतने वाले सांसदों में सबसे ज्यादा वोटों के अंतर से जीतने में अव्वल हैं। उनके बाद उनके पति अखिलेश यादव की जीत का अंतर पार्टी में दूसरे नंबर पर है। यह भी एक अलग तरह का रिकॉर्ड है। ऐसे में लोकसभा की कार्रवाई के दौरान जब दोनों सदन में मौजूद रहेंगे, तो सभी की निगाहें उन पर रहेंगी। अगर दोनों के लिए बैठने की जगह भी पास-पास होगी, तो यह देखना भी दिलचस्प होगा। पिछली लोकसभा चुनाव में दोनों सदस्य रहे, साथ निर्वाचित नहीं हुए एक इत्तेफाक देखिए कि अखिलेश यादव और उनकी पत्नी डिंपल यादव पिछली लोकसभा 2019 में भी साथ-साथ लड़े थे, लेकिन सदन के सदस्य एक साथ नहीं निर्वाचित होने से साथ-साथ नहीं पहुंच सके थे। दरअसल अखिलेश यादव आजगमगढ़ से चुनाव लड़कर जीते। जबकि डिंपल यादव कन्नौज से लड़ी थीं, लेकिन चुनाव नहीं जीत सकी थीं। हालांकि सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव के निधन के बाद मैनपुरी सीट खाली हुई, तो डिंपल यादव वहां से उपचुनाव जीतकर सदन में पहुंचीं। 10 महीने बाद डिंपल उपचुनाव जीतकर लोकसभा पहुंचीं उसके पहले अखिलेश यादव विधानसभा में मैनपुरी की ही करहल विधानसभा से विधायक निर्वाचित हो गए थे। नतीजों के बाद विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी निभाने के लिए उन्होंने आजमगढ़ लोकसभा सीट से इस्तीफा दे दिया था। उनके इस्तीफा के बाद करीब 10 महीने बाद डिंपल यादव उपचुनाव जीतकर लोकसभा पहुंचीं। इस तरह 17वीं लोकसभा का सदस्य निर्वाचित होकर भी साथ में सदस्य नहीं रहे थे। सदन में तीन भाइयों के साथ मौजूद रहेंगे अखिलेश अखिलेश यादव न सिर्फ पहली बार अपनी पत्नी के साथ लोकसभा में मौजूद रहेंगे, बल्कि इस बार उनके तीन भाई भी बतौर सांसद सदन में उनके साथ रहेंगे। चूंकि सैफई परिवार के पांच सदस्य निर्वाचित होकर लोकसभा पहुंचे हैं। इसमें कन्नौज से अखिलेश यादव और मैनपुरी से डिंपल यादव के अलावा आजमगढ़ से धर्मेंद्र यादव, फिरोजाबाद से अक्षय यादव और बदायूं से आदित्य यादव भी सांसद चुने गए हैं। इस तरह पांच सदस्यों के साथ लोकसभा में देश का सबसे बड़ा कुनबा रहेगा। पिता और एक भाई के साथ सदन में रह चुके अखिलेश, पहली बार कुनबे के साथ     2000 के उपचुनाव में जब वह पहली बार कन्नौज से सांसद बने थे तो उस समय उनके पिता मुलायम सिंह यादव संभल से सांसद के रूप में उनके साथ लोकसभा में थे     2004 के लोकसभा चुनाव में कन्नौज से अखिलेश यादव और मैनपुरी से उनके चचेरे भाई धर्मेंद्र यादव लोकसभा पहुंचे थे।     2009 के लोकसभा चुनाव में भी अखिलेश यादव कन्नौज से और धर्मेंद्र यादव बदायूं से सांसद चुनकर पहुंचे थे।     2014 में पहली बार सैफई परिवार के पांच सदस्य निर्वाचित हुए थे। इसमें खुद आजमगढ़ और मैनपुरी से मुलायम सिंह यादव, कन्नौज से डिंपल यादव, बदायूं से धर्मेंद्र यादव और फिरोजाबाद से अक्षय यादव सांसद चुने गए थे। बाद में मुलायम सिंह ने आजमगढ़ सीट बरकरार रखते हुए मैनपुरी से इस्तीफा दिया। तब हुए उपचुनाव में इस परिवार की तीसरी पीढ़ी के रूप में तेज प्रताप यादव चुनाव जीतकर लोकसभा पहुंचे थे। उस दौरान अखिलेश यादव उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री थे।     2019 के लोकसभा चुनाव में परिवार से सिर्फ दो सदस्य मैनपुरी से मुलायम सिंह और आजमगढ़ से अखिलेश यादव ही सांसद बने थे। बाकी सदस्यों को शिकस्त मिली थी। पप्पू यादव और उनकी पत्नी रंजीता रंजन दो बार बन चुके सांसद इस बार अखिलेश यादव और डिंपल यादव पति-पत्नी के रूप में लोकसभा सदस्य चुनी गई हैं। इसके पहले यह उपलब्धि बिहार से पप्पू यादव और उनकी पत्नी रंजीता रंजन के नाम थी । वह दोनों 2004 और 2014 में दो बार एक साथ चुनाव जीतकर लोकसभा पहुंच थे। हालांकि दोनों अलग-अलग पार्टी से चुनाव लड़कर जीते थे। इस बार भी पप्पू यादव निर्दलीय चुनाव जीतकर लोकसभा पहुंचे हैं। उनकी पत्नी रंजीता रंजन कांग्रेस से राज्यसभा की सांसद हैं। दोनों जोड़ी के तौर पर तीसरी बार संसद में होंगे, लेकिन अलग-अलग सदन का हिस्सा होंगे।  

Uttar Pradesh के Mau में गले में तख्ती दाल थाने पहुंचा बदमाश, ढाई साल से था फरार

मऊ उत्तर प्रदेश के दो हजार से अधिक परिषदीय शिक्षकों के अंतर जनपदीय पारस्परिक स्थानान्तरण का रास्ता साफ हो गया है। एक साल तक कानूनी लड़ाई लड़ने के बाद इन शिक्षकों की घर वापसी होगी। बेसिक शिक्षा परिषद के सचिव सुरेन्द्र कुमार तिवारी ने  सभी बेसिक शिक्षा अधिकारियों को इस संबंध में आदेश जारी किया है। उधर, बाराबंकी में एनकाउंटर में इनामी लुटेरे गोविंद को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। पुलिस उसकी निशानदेही पर तमंचा बरामद करने जा रही थी। इसी दौरान अभिरक्षा से भागते हुए बदमाश ने पुलिस टीम पर फायरिंग कर दी। जिस पर पुलिस ने जवाबी फायरिंग की तो एक गोली बदमाश के पैर में लगी और वह घायल हो गिर पड़ा।   एक लाख सालाना आय वालों को भी शादी का अनुदान, योगी सरकार ने बढ़ाई सीमा उत्‍तर प्रदेश की योगी सरकार ने पिछड़ा वर्ग कल्याण की शादी अनुदान योजना के तहत आवेदकों की आय सीमा में बड़ा बदलाव किया है। अब शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में आवेदकों की वार्षिक आय सीमा रुपये एक लाख रुपये तक बढ़ा दी गई है। सरकार के पिछड़ा वर्ग कल्याण एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) नरेन्द्र कश्यप ने यह जानकारी दी। 40 ग्राहकों के साथ बैंक में ही जालसाजी, मैनेजर ने हड़प लिए 80 लाख गोरखपुर के पीपीगंज थाना क्षेत्र के जंगल कौड़िया एसबीआई के तत्कालीन शाखा प्रबंधक श्रीकुमार भाष्कर भूषण, बैंक एकाउंटेंट अमरेंद्र कुमार सिंह, कैंटीन ब्वॉय पंकज मणि पर 80 लाख रुपये की जालसाजी का केस दर्ज किया गया है। आरोप है कि तीनों बैंक कर्मियों ने एफडी के भुगतान, केसीसी और क्रेडिट कार्ड बनवाने के नाम पर करीब 40 ग्राहकों से 80 लाख रुपये की जालसाजी की है। बरेली में सांड का हमला, किसान को पटक-पटक कर मार डाला; मचा कोहराम यूपी के बरेली में सांड के हमले में एक किसान की मौत के बाद आतंक फैल गया है। राधेश्‍याम नाम के इस 40 वर्षीय किसान को सांड ने पीट-पीटकर मार डाला। सांड ने किसान के सीने में नुकीले सींग घुसा दिए। इससे किसान की मौत हो गई। किसान पर सांड का हमला देख खेतों में काम कर रहे किसान वहां दौड़कर पहुंचे। उन्‍होंने सांड को किसी तरह से वहां से भगाया। घायल किसान को आनन-फानन में पीएचसी ले जाया गया वहां डाक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। 

शादी अनुदान योजना का लाभ ले सकेंगे, एक लाख तक आय वाले परिवार

लखनऊ उत्तर प्रदेश सरकार ने पिछड़ा वर्ग कल्याण की शादी अनुदान योजना के तहत आवेदकों की आय सीमा में बड़ा बदलाव किया है। अब शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में आवेदकों की वार्षिक आय सीमा एक लाख रुपये तक बढ़ा दी गई है। पिछड़ा वर्ग कल्याण एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) नरेंद्र कश्यप ने बताया कि इस बदलाव से पिछड़े वर्ग के अधिक परिवारों को अपनी पुत्रियों की शादी के लिए सरकारी सहायता प्राप्त करने में मदद मिलेगी। पहले शहरी क्षेत्रों में आवेदकों की आय सीमा 56,460 रुपये और ग्रामीण क्षेत्रों में 46,080 रुपये सालाना थी। अब इसे एक समान एक लाख रुपये कर दिया गया है। योजनाओं का लाभ पात्र लाभार्थियों तक पहुंचाने में लापरवाही बरतने वालों को नोटिस जारी करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग की वित्त वर्ष 2024-25 के लिए छात्रवृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति योजना के तहत प्राप्त आवेदनों और भुगतान की जिलेवार स्थिति की समीक्षा की। उन्होंने जगतगुरू रामभद्राचार्य राज्य दिव्यांग विश्वविद्यालय, चित्रकूट के संकायों में दिव्यांग और सामान्य छात्रों के प्रवेश और संकाय संचालन के लिए रिक्तियों और नियुक्तियों की स्थिति की जानकारी ली। कहा कि छात्रों की संख्या में वृद्धि की जाए। पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग में 154 रिक्त पद भरने के निर्देश नरेंद्र कश्यप ने विभागीय समीक्षा में निर्देश दिए कि विभाग के रिक्त 154 पदों को भरे जाने की आवश्यक कार्यवाही तत्काल की जाए। जिन रिक्तियों की तैनाती अन्य विभागों के माध्यम से होनी है, वहां पर पत्राचार कर तैनाती सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की लापरवाही या शिथिलता नहीं बरती जानी चाहिए।

आतंकी खतरे से निपटने केंद्र सरकार ने लिया बड़ा फैसला, रामनगरी में बनेगा एनएसजी हब

अयोध्या राम मंदिर के चलते देश-दुनिया में अयोध्या का अपना अलग स्थान है. ऐसे में इसकी सुरक्षा के लिए तमाम तरह के प्रबंध किए गए हैं. इसी कड़ी में अब रामनगरी में एनएसजी (National Security Guard) हब बनेगा. आतंकी खतरे और उससे निपटने को लेकर केंद्र सरकार ने ये फैसला लिया है. एनएसजी के ब्लैक कैट कमांडो अयोध्या में बनने वाले NSG हब में तैनात होंगे. गृह मंत्रालय सूत्रों के मुताबिक, NSG को अयोध्या में आतंकवाद विरोधी और अपहरण रोधी अभियानों का विशिष्ट दायित्व सौंपा जाएगा, जिसका काम NSG बखूबी कर रही है. सरकार अयोध्या में एनएसजी हब बनाने की दिशा में तेजी से काम कर रही है. गौरतलब है कि अयोध्या स्थित राम मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था को और चाक चौबंद करने की तैयारी की जा रही है. ऐसे में अब NSG की यूनिट अयोध्या में तैनात की जाएगी. सूत्रों का कहना है कि अयोध्या की सुरक्षा की संवेदनशीलता को देखते हुए ब्लैक कैट कमांडो तैनात किए जाएंगे. मालूम हो कि अभी तक राम मंदिर की सुरक्षा में तैनात PAC के जवानों को हर दो महीने में बदल दिया जाता है. राम मंदिर की सुरक्षा में पीएसी की 8 कंपनी यूपी एसएसएफ को दी गई हैं. एटीएस (ATS) की यूनिट भी अयोध्या में मौजूद रहती है. CRPF को सौंपी जा सकती है NSG के पास मौजूद VVIP लोगों की सुरक्षा की ज़िम्मेदारी सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, फिलहाल VIP सुरक्षा में तैनात NSG की VIP सिक्योरिटी यूनिट से ये ज़िम्मेदारी पूरी तरह से वापस लेकर इसे CRPF की VIP सिक्योरिटी यूनिट को सौंपने की तैयारी चल रही है. पार्लियामेंट की सिक्योरिटी ड्यूटी से मुक्त होने के बाद CRPF के पार्लियामेंट ड्यूटी ग्रुप (PDG) को अब VIP सुरक्षा में तैनात किया जा सकता है.   इसे लेकर गृह मंत्रालय में कई राउंड की बैठकें हो चुकी हैं, और जल्द ही इस पर फैसला भी लिया जा सकता है. NSG इस वक्त 9 VIP को सुरक्षा दे रही है. NSG की वीआईपी सिक्योरिटी यूनिट, स्पेशल रेंजर ग्रुप (SRG) की ड्यूटी, पूरी तरह से सीआरपीएफ की वीआईपी सिक्योरिटी इकाई को सौंप देने का प्लान है. एनएसजी को उसके मूल काम यानी आतंकवाद विरोधी और अपहरण रोधी अभियानों का विशिष्ट दायित्व सौंपा जाएगा, जिसका काम NSG अभी बखूबी कर रही है

बसपा सुप्रीमो मायावती ने सख्त कार्रवाई करने के लिए सुरक्षाकर्मियों व सरकार की सराहना की

लखनऊ   बसपा सुप्रीमो मायावती ने जम्मू कश्मीर में हुए आतंकी हमलों पर सरकार व सुरक्षा बलों द्वारा की जा रही कार्रवाई की सहराहना की है साथ ही विपक्ष को नसीहत दी है।मायावती ने कहा कि जम्मू कश्मीर में अभी हाल ही में जो आतंकी वारदातें हुई हैं। जिसमें अधिकांश एक वर्ग विशेष के निर्दोष लोगों को निशाना बनाया गया है अर्थात हमला किया गया है। यह अति दुःखद व निन्दनीय है। उन्होंने कहा कि ऐसे आतंकी तत्वों को ढेर करने के लिए, सरकार व सुरक्षा बलों द्वारा जो भी सख्त कदम उठाये जा रहे हैं यह सराहनीय है। बसपा इसका समर्थन करती है लेकिन इसकी आड़ में कोई भी राजनीति करना उचित नहीं है। बता दें कि रविवार रात को जम्मू-कश्मीर के रियासी में आतंकियों ने एक बस पर हमला कर दिया था। जिससे बस अनियंत्रित होकर खाई में गिर गई जिससे करीब 10 लोगों की मौत हो गई जबकि 33 लोग घायल हो गए थे। वहीं, जिला कठुआ की तहसील हीरानगर के गांव सैडा सोहल में बुधवार दूसरे दिन फिर आतंकियों और सुरक्षाबलों के बीच मुठभेड़ हुई। सुरक्षाबलों ने दूसरे आतंकी को भी ढेर कर दिया है। पुलिस, एसओजी, सीआरपीएफ, सेना के जवानों ने इलाके की घेराबंदी की हुई है। तलाशी अभियान चल रहा है। एडीजीपी जम्मू आनंद जैन ने यह जानकारी दी है। एडजीपी ने कहा कि हीरानगर में हुई मुठभेड़ में बहादुर जवानों ने दोनों आतंकी मार गिराए हैं। हालांकि ऑपरेशन अभी चल रहा है। इलाके में किसी अन्य आतंकी के छिपे होने की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता है। ऐसे में सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है। आसपास के इलाके में भी तलाशी अभियान चलाया जा रहा है।

दरोगा ने मांगी पांच लाख रुपये की घूस, ‘EMI’ में की कन्वर्ट, 50 हजार की पहली किस्त

बरेली बरेली में रिश्वतखोरी का हैरान करने वाला मामला सामने आया है। एक दरोगा ने मुकदमे से नाम निकालने के एवज में दो लोगों से पांच लाख रुपये की रिश्वत मांगी। जब उक्त लोगों ने इतनी बड़ी रकम देने में असमर्थता जताई तो दरोगा की ऐसी दरियादिली दिखाई कि ईएमआई की तरह किस्तों में रिश्वत तय कर ली। उक्त लोगों ने इसकी शिकायत विजिलेंस में कर दी। विजिलेंस की टीम ने रिश्वत की पहली किस्त लेते दरोगा को गिरफ्तार कर लिया। जानकारी के मुताबिक किला थाने में दर्ज एक मुकदमे में आरोपी महिला और व्यक्ति निकालने को लेकर प्रेमनगर थाने के दरोगा रामौतार ने पांच लाख रुपये रिश्वत मांगी थी। इस पर व्यक्ति ने इतनी बड़ी रकम एक साथ देने में असमर्थता जताई। उसने दरोगा से किस्तों में रकम लेने का अनुरोध किया। दरोगा ने दरियादिली दिखाते हुए उससे किस्तों में पांच लाख रुपये की रिश्वत तय कर ली। उस व्यक्ति ने एसपी विजिलेंस से लिखित शिकायत की। जांच में आरोप की पुष्टि होने पर विजिलेंस की टीम ने रिश्वत की पहली किस्त के तौर पर 50 हजार रुपये लेते दरोगा को कैंट थाना क्षेत्र के नकटिया में गिरफ्तार कर लिया। आरोपी दरोगा रामौतार नरियावल स्थित एक मकान में किराये पर रहता है।  विजिलेंस एसपी अरविंद कुमार ने बताया कि दरोगा ने किश्तों में घूस की रकम देने को कहा था। पीड़ित ने शिकायत की तो टीम ने दरोगा को मौके पर पकड़ लिया। उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया जाएगा।  

करहल विधानसभा की सदस्यता से अखिलेश यादव ने इस्तीफा दे दिया, लालजी वर्मा ने भी छोड़ी सीट

लखनऊ सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव अब केंद्र की राजनीति करेंगे। उन्होंने करहल विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। वह कन्नौज लोकसभा सीट से सांसद चुने गए हैं। इसके बाद उन्हें एक सीट से इस्तीफा देना था तो उन्होंने करहल सीट छोड़ दी। विधानसभा के प्रमुख सचिव प्रदीप दुबे के अनुसार यह इस्तीफा प्राप्त हो गया है। शीघ्र ही स्वीकार करने की प्रक्रिया पूरी कर दी जाएगी। इससे पहले सपा के विधायक लालजी वर्मा भी इस्तीफा दे चुके हैं। लालजी वर्मा भी लोकसभा सदस्य चुने गए हैं। इसके अलावा, फैजाबाद लोकसभा सीट से सांसद चुने गए अवधेश प्रसाद ने भी विधानसभा से इस्तीफा दे दिया है। अखिलेश यादव यूपी विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष भी हैं। ऐसे में आने वाले समय में यह पद उनके चाचा विधायक शिवपाल सिंह यादव या फिर पीडीए के तीन विधायकों रामअचल राजभर, इंद्रजीत सरोज और कमाल अख्तर में से किसी एक को मिल सकता है। अखिलेश यादव के नेतृत्व में सपा देश की तीसरी सबसे बड़ी पार्टी बन गई है। लोकसभा चुनाव 2024 में यूपी में सपा ने अकेले दम पर 37 और इंडिया गठबंधन की सहयोगी दल कांग्रेस के साथ मिलकर कुल 43 सीटों पर जीत दर्ज की है।

यूपी राज्‍य सड़क परिवहन निगम में छह हजार ड्राइवरों की भर्ती, 20 हजार तक सैलरी मिलेगी

लखनऊ  लोकसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद योगी सरकार ने यूपी के युवाओं के लिए नौकरियों का पिटारा खोल दिया है। पहली खेप में यूपी राज्‍य सड़क परिवहन निगम में ड्राइवर पद के लिए 6 हजार वैकेंसी निकली है। चालकों की ये भर्ती संविदा पर की जाएगी। अभ्‍यर्थियों के लिए दो साल पुराना हैवी लाइसेंस होना अनिवार्य र‍खा गया है। गौरतलब है कि चुनावी रिजल्‍ट आने के बाद मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ ने अफसरों संग बैठक कर बड़े पैमाने पर भर्ती निकालने का आदेश दिया था। माना जा रहा है कि सिपाही भर्ती और आरओ/एआरओ भर्ती की जो परीक्षाएं पेपर लीक के चलते रद कर दी गई थीं, जल्‍द ही उन्‍हें दोबारा कराया जा सकता है। 60 हजार सिपाहियों की भर्ती के लिए करीब 50 लाख उम्‍मीदवारों ने फार्म खरीदा था। इस साल 8 फरवरी को इसकी परीक्षा कराई गई थी। इसी तरह समीक्षा अधिकारी भर्ती का पेपर भी लीक हुआ था। इस मामले में पुलिस ने कई कोचिंग संचालकों को अरेस्‍ट किया है। उसने लाखों रुपये लेकर बच्‍चों को पेपर बेचा था। शैक्षिक योग्‍यता जान लीजिए यूपी रोडवेज में ड्राइवर पद की भर्ती में शामिल होने के लिए कई शर्तें हैं। उम्‍मीदवारों की लंबाई कम से कम 5 फुट 3 इंच होनी चाहिए। न्‍यूनतम उम्र 23 साल 6 महीने होनी चाहिए। जाति के आधार पर आयु सीमा में छूट भी मिलेगी। आवेदक को कम से कम आठवीं पास होना चाहिए। हर महीने इतनी सैलरी और प्रोत्‍साहन राशि वेतन की बात करें तो चुने गए ड्राइवरों को हर महीने 19,953 रुपये सैलरी दी जाएगी। उन्‍हें प्रति किलोमीटर की दर से 1 रुपये 89 पैसे का भुगतान किया जाएगा। महीने पर अगर वे 22 दिन की ड्यूटी और 5 हजार किलोमीटर तक बस चलाते हैं तो प्रोत्‍साहन राशि के रूप में 3 हजार रुपये दिए जाएंगे। दुर्घटना रहित बस चलाने वाले ड्राइवरों को अतिरिक्‍त प्रोत्‍साहन राशि दी जाएगी। इसके अलावा 7.50 लाख का दुर्घटना बीमा दिया जाएगा।

हरदोई हाइवे किनारे झोपड़ी में सो रहे परिवार पर पलटा बालू लदा ट्रक, 8 लोगों की मौत

हरदोई उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले में आज तड़के सड़क किनारे झोपड़ी में रह रहे एक परिवार पर बालू लदा ट्रक पलट गया. इस हादसे में आठ लोगों की दर्दनाक मौत हो गई. मरने वालों में दो पुरुष, दो महिला और चार बच्चे शामिल हैं. सभी एक ही परिवार के बताए जा रहे हैं. हादसे के बाद चीख-पुकार मच गई. पुलिस और स्थानीय लोगों की मदद से शवों को बाहर निकाला गया. बताया जा रहा है कि ट्रक गंगा किनारे से बालू खनन कर हरदोई की तरफ जा रहा था. अधिक बालू होने के कारण मोड़ पर ट्रक पलट गया. जिसकी वजह से यह हादसा हो गया. घटना की जानकारी पाकर मौके पर पहुंची पुलिस ने ट्रक के नीचे दबे लोगों को जेसीबी की मदद से किसी तरह बाहर निकाला, लेकिन तब तक एक बच्ची को छोड़कर सभी आठ लोगों की मौत हो चुकी थी. हादसे के बाद पूरे इलाके में कोहराम मचा हुआ है. घटना मल्लावां कस्बे में चुंगी संख्या- 2 की है. एक ही परिवार के 8 लोगों की मौत दरअसल, यहां पर एक जनजाति का परिवार झोपड़ी डालकर रहता था. रोजाना की तरह परिवार सड़क के किनारे अपनी झोपड़ी में सो रहा था. तभी बुधवार तड़के मेंहदीघाट कन्नौज की तरफ से हरदोई जा रहा बालू लदा ट्रक इस झोपड़ी के ऊपर पलट गया. घटना के समय परिवार के सभी सदस्य सो रहे थे, जिससे वो बालू लदे ट्रक के नीचे दब गए. हरदोई डीएम का बयान- पहले तो काफी देर तक तो कोई जान ही नहीं पाया, जब स्थानीय लोगों को ख़बर मिली तो मामले का खुलासा हुआ. जिसके बाद पुलिस को सूचना देकर बालू हटाने का काम शुरू किया गया. जेसीबी से ट्रक हटवाकर बालू उठाई गई तो उसके नीचे दबे अवधेश उर्फ बल्ला (45), उसकी पत्नी सुधा उर्फ मुंडी (42), पुत्री सुनैना (11) , लल्ला (5), बुद्धू (4), हीरो (22) उसका पति बिलग्राम कोतवाली क्षेत्र के कासुपेट निवासी करन (25) उसकी पुत्री कोमल उर्फ बिहारी (5) की मौत हो चुकी थी. सिर्फ एक बच्ची जीवित मिली, उसका अस्पताल में इलाज चल रहा है. मरने वालों में बल्ला के घर आई उसकी पुत्री व दामाद के साथ नाती भी शामिल है. हादसे को लेकर पड़ोसी ने बताया कि हम घर के बाहर लेटे हुए थे, तभी एकदम से ट्रक लड़ने की तेज आवाज आई तो हम जाग गए. पता चला कि ट्रक बल्ला के परिवार की झोपड़ी को कुचल चुका है. फिर हमने में पुलिस को सूचना दी. परिवार में सिर्फ एक बच्ची बची है, बाकी सबकी मौत हो गई. सीएम ने लिया संज्ञान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हरदोई में हुए सड़क हादसे का संज्ञान लिया है. उन्होंने मृतकों के शोक संतप्त परिजनों के प्रति संवेदना की है.  साथ ही अधिकारियों को तत्काल मौके पर पहुंचकर राहत कार्य में तेजी लाने के दिए निर्देश दिए हैं. मुख्यमंत्री ने घायलों के समुचित उपचार के भी निर्देश दिए हैं.  

अखिलेश, चंदन और अतुल … छोड़ेंगे विधायकी, जानें- किन सीटों पर होगा उपचुनाव

लखनऊ देश में नरेंद्र मोदी की सरकार तीसरी बार बन चुकी है. 10 जून की पहली कैबिनेट बैठक के साथ ही कामकाज भी शुरू हो चुका है. नए मंत्री अपना प्रभार ग्रहण कर रहे हैं. पुराने मंत्री अपना पुराना कामकाज ही आगे बढ़ा रहे हैं. इस बीच उत्तर प्रदेश की 9 विधानसभा और 1 विधान परिषद सीट पर अब सबकी नजरें टिकी हैं. कारण, इन सीटों से विधायक अब सांसद बन चुके हैं और एक-एक करके विधायकी से इस्तीफा देने जा रहे हैं. इसके बाद प्रदेश की 9 विधानसभा और 1 विधान परिषद सीट पर आगामी 6 महीने के भीतर उपचुनाव होगा.  दरअसल, प्रदेश की इन 9 विधानसभा सीटों पर 4 पर सपा, 3 पर बीजेपी और 1-1 पर आरएलडी-निषाद पार्टी के विधायक हैं. वहीं योगी सरकार में पीडब्लूडी मिनिस्टर जितिन प्रसाद विधान परिषद सदस्य हैं, जिन्हें बीजेपी ने इस बार पीलीभीत सीट से लोकसभा चुनाव लड़ाया. उन्होंने सपा प्रत्याशी भगवत सरन गंगवार को 164935 वोटों से हरा दिया. जितिन प्रसाद को पूर्व सांसद वरूण गांधी की जगह टिकट दिया गया था. जितिन प्रसाद ने विधान परिषद से इस्तीफा दे दिया है. उन्हें मोदी सरकार 3.0 में वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय में राज्य मंत्री और इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय में राज्य मंत्री बनाया गया है.  यूपी के ये विधायक देंगे इस्तीफा 1.सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव (मैनपुर की करहल विधानसभा सीट से विधायक) सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव प्रदेश की मैनपुरी की करहल विधानसभा सीट से विधायक हैं. इस बार उन्होंने कन्नौज से लोकसभा चुनाव लड़ा और जीता है. अब अखिलेश केंद्र की राजनीति में नजर आएंगे, इसके चलते वह विधायकी छोड़ रहे हैं. इसी के साथ अब संसद में पति-पत्नी यानी अखिलेश-डिंपल की जोड़ी नजर आएगी. डिंपल यादव मैनपुरी से चुनाव जीती हैं. 2. सपा के अवधेश प्रसाद (फैजाबाद की मिल्कीपुर विधानसभा सीट) फैजाबाद की मिल्कीपुर विधानसभा सीट से सपा के दिग्गज विधायक अवधेश प्रसाद को पार्टी ने इस बार लोकसभा चुनाव में उतारा. उन्होंने फैजाबाद सीट से बीजेपी के दो बार के सांसद लल्लू सिंह को करारी शिकस्त दी. फैजाबाद वही लोकसभा सीट है, जिसके अंतर्गत अय़ोध्या विधानसभा भी आती है. ऐसे में इस सीट पर सपा की जीत के कई मायने हैं. 9 बार के विधायक अवधेश प्रसाद अब सांसद पहुंचने पर विधायकी से इस्तीफा देंगे. यानी मिल्कीपुर विधानसभा सीट पर भी उपचुनाव होगा. 3. सपा के लालजी वर्मा (अम्बेडकर नगर की कटेहरी विधानसभा सीट) अम्बेडकर नगर की कटहेरी विधानसभा सीट से विधायक लालजी वर्मा ने इस बार के लोकसभा चुनाव में बड़ी जीत दर्ज की है. उन्होंने अम्बेडकर नगर लोकसभा सीट से सपा के टिकट पर 137247 वोटों से जीत हासिल की है. यहां उन्हें 544959 वोट मिले हैं. वहीं भाजपा से रितेश पांडेय को 407712 वोट मिले. यहां बहुजन समाज पार्टी के कमर हयात को 199499 वोट हासिल हो सके हैं. अम्बेडकर नगर लोकसभा सीट कभी बसपा प्रमुख मायावती का गढ़ माना जाता था. मायावती यहां से सांसद भी रह चुकी हैं. इस बार यहां सपा और भाजपा के बीच टक्कर रही. 4. सपा के जिया उर रहमान बर्क (मुरादाबाद की कुंदरकी विधानसभा सीट) मुरादाबाद की कुंदरकी विधानसभा सीट से विधायक जियाउर रहमान बर्क को सपा ने इस बार  संभल सीट से लोकसभा चुनाव लड़ाया. उन्होंने यहां से 121494 वोटों से जीत दर्ज की. पूर्व सांसद शफीकुर रहमान बर्क के पोते जिया उर रहमान पहली बार सांसदी का चुनाव लड़े और जीते हैं. संभल लोकसभा सीट को सपा का गढ़ माना जाता है. 2019 में यहां से शफीकुर रहमान बर्क ने जीत दर्ज की थी. सपा ने शफीकुर रहमान को ही इस बार भी टिकट दिया था, लेकिन चुनाव घोषणा के कुछ दिनों बाद ही उनका निधन हो गया, जिसके बाद पार्टी ने उनके पोते और कुंदरकी विधायक जिया उर रहमान को टिकट दिया. सांसद बनने के बाद अब वह विधायकी से इस्तीफा देंगे. 5. बीजेपी के अनूप वाल्मीकि प्रधान (अलीगढ़ की खैर विधानसभा सीट) अलीगढ़ की खैर विधानसभा सीट से विधायक अनूप वाल्मीकी प्रधान को बीजेपी ने इस बार हाथरस लोकसभा सीट से मैदान में उतारा था. उन्होंने यहां से करीब डेढ़ लाख वोटों के अंतर से जीत दर्ज की. अनूप वाल्मीकी को इस चुनाव में कुल 5 लाख 54 हजार 746 वोट मिले, जबकि उनके निकटतम प्रतिद्वंदी सपा के जसवीर वाल्मिकी को महज 3 लाख 7 हजार 428 वोट मिले. अनूप प्रधान वर्तमान में योगी सरकार में राज्य मंत्री भी हैं. गांव के पंचायत से अपनी राजनीति शुरू करने वाले अनूप प्रधान बनने के बाद विधायक चुने गए थे. अब सांसद बनने के बाद वह विधायकी से इस्तीफा देंगे. 6. बीजेपी के अतुल गर्ग (गाजियाबाद विधानसभा सीट) गाजियाबाद सदर विधानसभा सीट से 2017 और फिर 2022 में विधायक बने अतुल गर्ग को बीजेपी ने इस बार लोकसभा चुनाव में उतारा था. उन्होंने गाजियाबाद लोकसभा सीट से चुनाव लड़ते हुए INDIA गठबंधन की कांग्रेस प्रत्याशी डॉली शर्मा को 3 लाख से अधिक वोटों से हराया है. वह पिछली योगी पिछली सरकार में हेल्थ मिनिस्टर थे. अतुल गर्ग गाजियाबाद नगर निगम के पहले मेयर दिनेश चंद्र गर्ग के बेटे हैं. बीजेपी ने उन्हें इस बार गाजियाबाद के निवर्तमान सांसद वीके सिंह का टिकट काट कर उम्मीदवार बनाया था. सांसद बनने के बाद अब गर्ग विधायकी से इस्तीफा देंगे. 7. बीजेपी के प्रवीण पटेल (फूलपुर विधानसभा सीट) प्रयागराज जिले की फूलपुर विधानसभा सीट से बीजेपी विधायक प्रवीण पटेल इस बार लोकसभा चुनाव लड़े और जीते. फूलपुर लोकसभा सीट से प्रवीण पटेल ने समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी अमर नाथ सिंह मौर्य को कड़े मुकाबले के बाद महज 4,332 वोटों से हराया. बीजेपी ने यहां से अपने मौजूदा सांसद केसरी देवी पटेल का टिकट काटकर प्रवीण पटेल को उम्मीदवार बनाया था. प्रवीण पटेल कांग्रेस के पूर्व विधायक महेंद्र प्रताप पटेल के बेटे हैं. महेंद्र प्रताप पटेल झूंसी विधानसभा क्षेत्र से 1984, 1989 और 1991 में विधायक चुने गए थे. प्रवीण पटेल ने अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत बसपा से की थी. उन्होंने 2007 में बसपा के टिकट पर फूलपुर विधानसभा सीट से चुनाव जीता था, हालांकि 2012 में चुनाव हार गए थे. अब सांसद बनने के बाद पटेल विधायकी से इस्तीफा देंगे. 8. आरएलडी के चंदन चौहान (मीरापुर विधानसभा सीट) मीरापुर विधानसभा सीट से विधायक चंदन चौहान ने इस … Read more

हरदोई में हुए युवराज हत्याकांड को लेकर जमकर हुआ बवाल, धारा 144 लागू

हरदोई यूपी के हरदोई में हुए युवराज हत्याकांड को लेकर मंगलवार को भारी बवाल हो गया। करणी सेना समर्थकों ने पुलिस पर पथराव कर दिया। वहीं, हालात पर काबू पाने के लिए पुलिस ने लाठियां भांजी। किसी तरह प्रदर्शनकारियों पर काबू पाया गया। वहीं, इलाके में 144 लगा दी गई है। एसपी केशव चंद्र गोस्वामी ने बताया कि मौके पर फोर्स तैनात की गई है। किसी भी व्यक्ति को शांति भंग की कार्रवाई नहीं की जाएगी।   पाली थाना क्षेत्र के इस्माइलपुर में हुए युवराज की हत्या का मामला 10 दिन बाद भी गर्माया हुआ है। पुलिस का दावा है कि उन्होंने इस मामले में कठोर कार्रवाई कर चुकी है। हालांकि इसके बावजूद करणी सेना के अध्यक्ष वीरेंद्र प्रताप सिंह उर्फ वीरू ने मंगलवार को मल्लावा बॉर्डर पहुंचे। जहां पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया। इस दौरान उनके साथ मौजूद लोगों को जब पुलिस ने खदेड़ने की कोशिश की तो उन्होंने पथराव शुरू कर दिया। भीड़ पर काबू पाने के लिए पुलिस को हल्का बल का प्रयोग करना पड़ा। वहीं, क्षेत्र में तनाव देखते हुए मौके पर बड़ी संख्या में कई थानों की पुलिस और पीएसी तैनात कर दी गई। इस मामले में एसपी केशव चंद्र गौस्वामी ने बताया कि करणी सेना के अध्यक्ष वीरेंद्र सिंह उर्फ वीरू ने पाली में विरोध प्रदर्शन का आह्नान किया था। लेकिन यहां धारा 144 लागू थी और 5 से अधिक लोगों को इकट्ठा होने की अनुमति नहीं थी। इसी को देखते ही फोर्स तैनात की गई थी। किसी को भी शांतिभंग की कार्रवाई नहीं करने दी जाएगी। जो शांति व्यवस्था के लिए खतरा हैं उन्हें आने से रोक दिया जाएगा। प्रेम प्रसंग में हुई थी युवराज की हत्या पाली थाना क्षेत्र के इस्माइलपुर के रहने वाले युवराज सिंह की 30 मई को प्रेम प्रसंग को लेकर हुई कहासुनी में उसकी गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर कामरान नाम के युवक को मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार कर लिया था। वहीं, अन्य चार बाल अपचारियों को भी संरक्षण में लिया था।  

अवधेश प्रसाद ने कहा- अयोध्या किसी की बपौती नहीं है, ये प्रभु श्री राम की धरती है, हमसे बड़ा राम भक्त तो कोई नहीं हो सकता

अयोध्या फैजाबाद (अयोध्या) लोकसभा सीट के परिणाम आने के बाद सियासी गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म है। इस सीट से अवधेश प्रसाद ने बीजेपी के दो बार के सांसद लल्लू सिंह को करारी हार दी है। इस पर अवधेश प्रसाद का कहना है कि अयोध्या किसी की बपौती नहीं है, ये प्रभु श्री राम की धरती है। उन्होंने कहा कि हमसे बड़ा राम भक्त तो कोई नहीं हो सकता। मेरे दादा के नाम में राम, मेरे पिता के नाम में राम, मेरे भाई के नाम में राम, मेरे ससुर के नाम में राम, मैं खुद अयोध्या का रहने वाला हूं. मुझसे ज्यादा भगवान राम के करीब और कौन हो सकता है? अवधेश प्रसाद ने कहा कि आप मुझे राम-राम से अभिवादन करें या ‘जय श्री राम’ कहकर अभिवादन करें, मुझे दोनों स्वीकार है। मैं भेदभाव या बांटने वाली राजनीति नहीं करता। ‘अखिलेश हमेशा मुझे अपने बगल में बिठाते हैं’ एक निजी चैनल पर इंटरव्यू में सपा सुप्रीमो को धन्यवाद देते हुए अवधेश प्रसाद ने कहा कि अखिलेश जी ने मुझे सामान्य सीट से चुनावी मैदान में उतारा। 6 महीने पहले उन्होंने मुझसे कहा था कि मैं आपको सम्मान देना चाहता हूं। वह हमेशा मुझे अपने बगल में बिठाते हैं। कोलकाता भी ले गए तो मुझे साथ में ले गए। राष्ट्रीय कमेटी में जब बिठाया तो मुझे बगल में बिठाया। विधानसभा में भी मैं उनके बगल में बैठता हूं। मैंने उनसे कहा कि ‘आप हमेशा मुझको सम्मान देते हैं। ‘जो राम को लाए हैं…’ के नारे पर सपा सांसद ने कसा तंज अवधेश प्रसाद ने दावा किया कि ‘मैं प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ भी अयोध्या से चुनाव लड़ने को तैयार था अगर वह आते। चर्चा भी थी कि प्रधानमंत्री मोदी खुद अयोध्या से उम्मीदवार होंगे। मैं भी खुश था कि पीएम मोदी के खिलाफ चुनाव लड़ने का मौका मिलेगा। ‘जो राम को लाए हैं…’ के नारे पर तंज कसते हुए अवधेश प्रसाद ने कहा कि बताइए भला ये लोग भगवान के साथ ऐसा करते हैं। वहीं, बीजेपी की हार पर अयोध्या के लोगों पर कथित तौर पर गलत कमेंट करने वालों पर भी अवधेश प्रसाद ने बयान दिया। उन्होंने कहा कि जो भी लोग अयोध्या हारने पर कमेंट कर रहे हैं। दरअसल वह लोग अयोध्या को जानते नहीं हैं। आम अयोध्यावासी बहुत परेशान था, लेकिन श्रद्धालु और पर्यटक में अंतर होता है। अयोध्या में लोगों की दुकानें तोड़ी गईं, मुआवजे नहीं दिए गए- सपा सांसद अवधेश प्रसाद ने कहा कि अयोध्या किसी की बपौती नहीं है, ये धरती प्रभु श्री राम की है। चौड़ी सड़के, हवाई अड्डा, रेलवे स्टेशन ये सब तो ठीक है, लेकिन अयोध्यावासी क्या एयरपोर्ट का इस्तेमाल करेंगे। अयोध्या में लोगों को बहुत तकलीफ हुई, लोगों के दुकानें तोड़ी गईं, मुआवजे नहीं दिए गए। बड़े प्रोजेक्ट के नाम पर किसानों की जमीन पर सरकार की तलवार लटक रही है, इन सबका गुस्सा लोगों में था। वहीं, अपने ऊपर खतरे की आशंका को लेकर उन्होंने कहा कि जाको राखे साइयां मार सके ना कोई। हमारे ऊपर भगवान राम और हनुमान जी की कृपा है तो कोई मेरा बाल बांका नहीं कर सकता।

राहुल ने मोदी पर बोला सीधा निशाना, कहा- यदि मेरी बहन वाराणसी से लड़ती तो ढाई लाख वोटों से हारते मोदी

लखनऊ राहुल गांधी मंगलवार को अपने संसदीय क्षेत्र रायबरेली पहुंचे। वहां वह रायबरेली और अमेठी की जनता को धन्यवाद देने के लिए गए थे। अपने भाषण में राहुल गांधी ने पीएम मोदी पर सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा कि  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वाराणसी से कैसे भी जान बचाकर भागकर आए हैं। वो वहां से हारते-हारते बचे हैं। मैं अपनी बहन से कहता रहा हूं कि यदि वह वहां से लड़ जाती तो पीएम दो ढाई लाख वोटो से हार जाते। उनकी इस बात पर पूरा पंडाल तालियों से गूंज उठा। अयोध्या में हार गई भाजपा फैजाबाद सीट पर भाजपा के हारने पर राहुल गांधी ने चुटकी ली। उन्होंने कहा कि ये अध्योध्या की सीट हार गए हैं। इसके मतलब साफ हैं। मंदिर की प्राण  प्रतिष्ठा में अरबपति लोग बुलाए गए, पूरा बॉलीवुड आया। अंबानी और अडानी आए लेकिन एक गरीब व्यक्ति को वहां आमंत्रित नहीं किया गया। इसके जवाब उस क्षेत्र की जनता ने दिया है। जनता ने अपना महत्व बताया है। विज्ञापन संविधान को माथे पर लगाया राहुल गांधी ने कहा कि आपने देखा होगा कि इस बार मोदी ने संविधान को हाथों से उठाकर माथे पर लगाया है। आपने अपनी ताकत का एहसास उन्हें करा दिया है। यह इशारा दे दिया है कि वह संविधान को जरा सा भी छुएंगे तो जनता उनके साथ क्या करेगी। इस बार घट गया जीत का अंतर राहुल गांधी ने यह बात इसलिए कही क्योंकि इस बार पीएम मोदी के जीतने का अंतर पिछले दो चुनावों की तुलना में काफी कम हो गया। पीएम मोदी वाराणसी सीट से करीब डेढ़ लाख वोटों से जीते हैं। मतगणना के दिन वह कुछ दिन कांग्रेस प्रत्याशी अजय राय से पीछे भी चल रहे थे। वाराणसी में पीएम मोदी की जीत का मार्जिन कम होने पर बीजेपी आलाकमान भी स्थानीय नेताओं से नाराज है।

यूपी में कुछ सीटों पर मिली हार के लिए अखिलेश ने वहां के जिलाधिकारियों को बताया दोषी

इटावा समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव यूपी के कुछ जिलाधिकारियों से बेहद नाराज हैं। लोकसभा चुनाव में इन सीटों पर मिली हार को लेकर अखिलेश ने यहां तक कहा कि जिन जिलाधिकारियों ने हराया है उन्हें भूलेंगे नहीं। अखिलेश ने तीन चार जिलों का नाम लेते हुए वहां के जिलाधिकारियों को एक तरह से चेतावनी भी दी। कहा कि इन जिलाधिकारियों ने किसके दबाव में यह किया, क्यों बेइमानी की। जानबूझकर सपा प्रत्याशियों को हराया गया है। अखिलेश यादव लोकसभा चुनाव में मिली शानदार जीत के बाद इटावा और सैफई पहुंचे थे। यहां कार्यकर्ताओं से संवाद किया और उन्हें जीत के लिए बधाइयां दीं। पत्रकारों से बात करते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि इस बार जनता ने चुनाव लड़ा है। जनता ने महसूस किया कि उसका संविधान और उसका हक खतरे में है। जनता ने पीडीए और इंडिया गठबंधन पर भरोसा किया। कहा कि जो लोग डबल इंजन, ट्रिपल इंजन की सरकार कहते थे, जमीन पर जो चीजें नहीं दिखाई दीं, उसका आक्रोश दिखाई दिया है। लोकसभा चुनाव में जनता के मुद्दों की जीत हुई है। लोगों ने संविधान को बचाने के लिए वोट दिया है। अखिलेश ने कहा कि बगल के जिले फर्रुखाबाद में प्रशासन ने खासकर वहां के जिलाधिकारी ने बेइमानी का काम किया है। जिलाधिकारी पर क्या दबाव रहा होगा, जिसके कारण सपा के प्रत्याशी को उसने जानबूझकर हराया है। यह बातें भूलने वाली नहीं हैं। अधिकारी अपने पद पर रह कर यह सब कर रहा है उस पर जनता कैसे भरोसा करेगी। अफसरों पर सभी भरोसा करते हैं। जतना सोचती है कि आईएएस अधिकारी हैं, निष्पक्ष रहकर फैसला देंगे। पता नहीं उन पर क्या दबाव था। फर्रुखाबाद में समाजवादी पार्टी जीती लेकिन उसे हरा दिया गया। अखिलेश ने कहा कि न सिर्फ फर्रुखाबाद में बल्कि अलीगढ़ में इसी तरह हुआ है। वहां लाठीचार्ज हुआ, पता नहीं क्या क्या किया। फूलपुर में बहुत कम वोटों से हारे। बांसगांव के लोग धरना प्रदर्शन करते रहे लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। जनता सब देख रही है। अगले चुनाव में जनता इन सीटों पर भी लाखों लाख वोट से इन लोगों (भाजपा) को हराएगी। तब यह लोग बेइमानी करना भी चाहेंगे तो यह अधिकारी नहीं कर पाएंगे। अखिलेश यादव जिन जिलाधिकारियों के काम से नाराज हैं इन जिलों के लोकसभा चुनाव के रिजल्ट पर गौर करें तो फर्रुखाबाद में सपा केवल 26 सौं वोटों से हारी है। यहां भाजपा के मुकेश राजपूत को 4 लाख 87 हजार 963  वोट मिले। और सपा के नवल किशोर शाक्य को भाजपा से 26 सौ 78 वोट कम 4 लाख 85 बजार 285 वोट हासिल हुए हैं। इसी तरह बांसगाव में भी सपा केवल तीन हजार वोटों से हारी है। यहां भाजपा प्रत्याशी कमलेश पासवान को 4 लाख 28 हजार 693 वोट औऱ सपा के सदल प्रसाद को 3150 वोट कम 4 लाख 25 हजार 543 वोट मिले हैं। यहां दोबारा काउंटिंग की मांग भी हुई थी। फूलपुर में भी सपा केवल चार हजार वोटों से हारी है। यहां भाजपा के प्रवीण पटेल ने 4 लाख 52 हजार 600 वोट हासिल कर सपा के अमर नाथ सिंह मौर्य को 4 हजार 332 वोटों से हराया। अमरनाथ को 4 लाख 48 हजार 268 वोट मिले। अलीगढ़ में सपा 15 हजार वोटों से हारी है। यहां भाजपा के सतीश गौतम को 5 लाख 1 हजार 834 वोट और सपा के बिजेद्र सिंह को 15 हजार 647 वोट कम यानी 4 लाख 86 हजार 187 वोट हासिल हुए हैं।  

उत्तर प्रदेश में नई ट्रांसफर नीति को मिली मंजूरी, योगी कैबिनेट में 41 प्रस्तावों पर मुहर लगी

लखनऊ लोकसभा चुनाव के चलते लगी आचार संहिता हटने के बाद मंगलवार को हुई पहली बैठक में योगी आदित्‍यनाथ कैबिनेट ताबड़तोड़ फैसले ले रही है। राज्य सरकार ने मंगलवार को नई तबादला नीति को मंज़ूरी दे दी है। इस नीति के तहत विभागाध्यक्ष 30 जून तक तबादला कर सकेंगे। इसके बाद तबादला करने के लिए मुख्यमंत्री से अनुमति लेनी होगी। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई बैठक में यह फ़ैसला हुआ। बैठक में नई ट्रांसफर नीति समेत 41 प्रस्तावों पर मुहर लगी है। इसमें से 26 प्रस्ताव जल संसाधन मंत्रालय के हैं। इसके पहले आठ जून को हुई मंत्रियों की बैठक में दोनों डिप्‍टी सीएम दिल्‍ली में होने के चलते शामिल नहीं हो पाए थे। मंगलवार की बैठक में डिप्‍टी सीएम ब्रजेश पाठक मौजूद रहे जबकि डिप्‍टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य इस बार भी शामिल नहीं हुए। बताया जा रहा है कि वह अभी भी दिल्‍ली में हैं।  कैबिनेट से तबादला नीति मंजूर होने के बाद आज ही शासनादेश जारी करने की तैयारी है। इस बार विभागाध्यक्षोंं को सिर्फ 19 दिन ही तबादले का अधिकार रहेगा। सभी विभागाध्यक्ष 30 जून तक ही कर सकेंगे। जिले में तीन और मंडल में सात साल वाले तबादले के दायरे में आएंगे। नई नीति के तहत समूह ‘क’ और ‘ख’ कर्मचारियों की कुल संख्या के अधिकतम 20 प्रतिशत तक तबादले किए जा सकेंगे। वहीं समूह ‘ग’ और ‘घ’ के कार्मिकों की संख्या के अधिकतम 10 प्रतिशत तक तबादले करने की अनुमति होगी। नई नीति में यह भी प्रावधान किया गया है कि अगर कोई विभाग समूह ग और घ में निर्धारित 10 प्रतिशत से अधिक कर्मचारियों का तबादला करना चाहता है, तो इसके लिए विभागीय मंत्री की इजाजत लेनी होगी।  इसमें अधिकतम 20 प्रतिशत कर्मचारियों का तबादला किया जा सकेगा। इन तबादलों में उन कर्मचारियों को प्राथमिकता दी जाएगी जो लंबे समय से एक ही जगह पर तैनात हैं। तबादला नीति में कहा गया है कि समूह ख और ग कर्मचारियों के ट्रांसफर में जहां तक संभव हो सके मेरिट बेस्ड ऑनलाइन ट्रांसफर सिस्टम से किया जाए। नीति के तहत असमर्थ दिव्यांग बच्चों के माता-पिता से तैनाती के लिए विकल्प लिया जाए। ऐसे कर्मचारियों का तबादला उन जगहों पर किया जाए, जहां उनकी उचित देखभाल हो सके और इलाज किया जा सके। बुंदेलखंड में दूर होगी पानी की समस्‍या  योगी कैबिनेट की बैठक में बुंदेलखंड से जुड़ी 26 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। इसमें ललितपुर, झांसी, महोबा और झांसी जैसे जिलों से जुड़ी परियोजनाएं शामिल हैं। राज्‍य विश्‍वविद्यालयों से हटेगा ये शब्‍द  कैबिनेट की बैइक में राज्‍य विश्‍वविद्यालयों से राज्‍य शब्‍द हटाने का प्रस्‍ताव भी पास हुआ। इसके साथ ही दो निजी विश्‍वविद्यालयों को लेटर ऑफ इंटेंट देने का प्रस्‍ताव भी पास किया गया है।  कुंभ के लिए विशेष प्रस्‍ताव  बैठक में 2025 में होने वाले महाकुंभ के लिए विशेष प्रस्‍ताव भी पास किया। प्रस्‍ताव के अनुसार इस बार 3200 हेक्‍टेअर से बढ़ाकर 4000 हेक्‍टेअर में मेला लगेगा। इसके साथ ही महाकुंभ में श्रद्धालुओं के भारी तादाद में आने की संभावनाओं के मद्देनज़र घाटों की संख्‍या को बढ़ाया जाएगा। वन विभाग से कुंभ में लकड़ी के लाट लेने के लिए 99 हजार के सापेक्ष 79 हजार लाट लेने के लिए 236 करोड़ का प्रस्‍ताव पास किया गया है। इसके साथ ही बिजली विभाग में एक हजार करोड़ का लोन 9.5 प्रतिशत की दर से हुडको से लेने के प्रस्‍ताव को भी मंजूरी मिली। 

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