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रक्षा शक्ति पर बड़ा बयान, सीएम योगी ने ब्रह्मोस के जरिए दिखाया ‘हार्ड पावर’ रोडमैप

सीएम योगी ने दिया ब्रह्मोस संग ‘हार्ड पावर’ विजन   मुख्यमंत्री ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर बदली कवर इमेज अब तक का सबसे बड़ा बजट पेश करने वाली सरकार के मुखिया ने दिया ‘नए यूपी’ का संकेत   लखनऊ  उत्तर प्रदेश में अब तक का सबसे बड़ा बजट पेश करने वाली सरकार के मुखिया योगी आदित्यनाथ ने ‘नए यूपी’ की बढ़ती ताकत का संकेत दिया। बजट 2026-27 के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर कवर इमेज बदल दिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ब्रह्मोस संग अपनी फोटो लगाकर ‘हार्ड पावर’ विजन” का संदेश दिया।  सोशल मीडिया हैंडल पर मुख्यमंत्री का यह संदेश बताता है कि लखनऊ में ब्रह्मोस निर्माण के जरिए उत्तर प्रदेश एक तरफ रक्षा उत्पादन का उभरता वैश्विक हब हो गया है। वहीं दूसरी ओर 9.12 लाख करोड़ का बजट और सामरिक शक्ति के संगम का भी संकेत प्रदेशवासियों के समक्ष प्रस्तुत किया गया है। बजट के जरिए सीएम योगी ने संदेश दिया कि यूपी की अर्थव्यवस्था “फर्श से अर्श तक पहुंच गई है, जो यूपी के विकास, सुरक्षा और निवेश के त्रिवेणी मॉडल को प्रदर्शित करता है। योगी का यह “‘सुपरसोनिक केसरिया’ संदेश बताता है कि उत्तर प्रदेश विकास का इंजन और प्रदेशवासियों की सुरक्षा का कवच भी बन गया है।

पहले OBC आयोग की रिपोर्ट, फिर पंचायत चुनाव—हाईकोर्ट में योगी सरकार का रुख साफ

लखनऊ यूपी पंचायत चुनाव का टलना लगभग तय माना जा रहा है। योगी सरकार ने हाईकोर्ट को बताया कि पहले समर्पित ओबीसी आयोग बनाया जाएगा, जिसकी रिपोर्ट के आधार पर आरक्षण तय होगा। आयोग की रिपोर्ट के बाद ही चुनाव की तारीखें घोषित होने की संभावना है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के पालन में यह कदम उठाया गया है।   उत्तर प्रदेश में आगामी पंचायत चुनाव का टलना तय माना जा रहा है। चुनाव की तैयारियों के बीच योगी सरकार ने हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में हलफनामा देते हुए बताया कि एक समर्पित पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) आयोग का गठन किया जाएगा। जिसकी रिपोर्ट के बाद चुनाव कराए जाएंगे। जस्टिस राजन राय और जस्टिस अवधेश चौधरी की पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही थी। दरअसल, हाईकोर्ट में दाखिल याचिका में मौजूदा पिछड़ा वर्ग आयोग के अधिकारों को चुनौती दी गई थी, जिसके बाद सरकार ने स्पष्ट किया कि नए समर्पित आयोग की रिपोर्ट के आधार पर ही पंचायत सीटों का आरक्षण तय किया जाएगा। ओबीसी आयोग की रिपोर्ट के बाद पंचायत चुनाव यह कदम सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप उठाया जा रहा है, जिसमें स्थानीय निकाय चुनावों से पहले समर्पित आयोग का गठन जरूरी बताया गया है। प्रदेश का मौजूदा ओबीसी आयोग अक्टूबर 2025 में अपना मूल कार्यकाल पूरा कर चुका है। हालांकि सरकार ने इसका कार्यकाल अक्टूबर 2026 तक बढ़ा दिया है, लेकिन कानूनी तौर पर उसे समर्पित आयोग के अधिकार नहीं मिले हैं, जिस पर सवाल उठे थे। अब नया आयोग पिछड़े वर्गों का ‘रैपिड सर्वे’ करेगा, जिससे उनकी वास्तविक आबादी का आकलन कर आरक्षण तय किया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के मुताबिक स्थानीय निकाय चुनाव से पहले तीन साल के कार्यकाल वाला समर्पित आयोग जरूरी है। सरकार का कहना है कि आयोग की अंतिम रिपोर्ट के बाद ही पंचायत चुनाव की तारीखों का ऐलान संभव होगा। सियासी गलियारों में क्या है चर्चा? वहीं राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा आम है कि भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की चुनावी रणनीति में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले पंचायत चुनाव कराने को लेकर नेगेटिव फीडबैक है। पार्टी के कई नेताओं को आशंका है कि पंचायत चुनाव के दौरान प्रधान से लेकर जिला पंचायत के चुनाव तक पार्टी के ही नेता और कार्यकर्ता आपस में लड़ेंगे। ऐसे नेताओं को आशंका है कि पंचायत चुनाव में किसी एक कैंडिडेट का समर्थन करने से विधानसभा चुनाव में कार्यकर्ताओं के एक वर्ग की नाराजगी उठाने का खतरा है। इसलिए ये बात चल रही है कि पहले विधानसभा हो जाए, फिर तनावपूर्ण पंचायत चुनाव की बिसात बिछे। पंचायत चुनाव का टलना तय! ऐसे में अब पंचायत चुनाव का टलना लगभग तय माना जा रहा है। प्रदेश में ग्राम प्रधानों, क्षेत्र पंचायत सदस्य और जिला पंचायत सदस्यों का कार्यकाल मई के पहले सप्ताह में हो जाएगा। वहीं, ब्लॉक प्रमुख और जिला पंचायत अध्यक्षों का पांच साल का कार्यकाल जुलाई के पहले सप्ताह में पूरा होगा। ऐसे में यदि समय पर चुनाव नहीं कराए जाते हैं तो ग्राम प्रधानों, ब्लॉक प्रमुख और जिला पंचायत अध्यक्षों की जगह वहां सरकार की ओर से किसी सक्षम अधिकारी को रिसीवर (प्रशासक) नियुक्त किया जाएगा। पिछले पंचायत चुनाव 4 चरणों में हुए थे यूपी में 57 हजार से ज्यादा ग्राम पंचायतें हैं, जिला पंचायत वार्ड 3051, जिला पंचायत 75, क्षेत्र पंचायत 826 हैं। पिछले पंचायत चुनाव कोरोना लहर के बीच साल 2021 चार चरणों में हुए थे। पहले चरण में 18 जिले, दूसरे और तीसरे चरण में 20-20 जिले, और चौथे चरण में 17 जिलों में चुनाव हुए थे।  

कानपुर हिट-एंड-रन पर कानूनी ट्विस्ट: 7 घंटे में छूटा आरोपी शिवम, रिमांड पर कोर्ट सख्त

कानपुर कानपुर लैंबॉर्गिनी कांड में तंबाकू व्यापारी केके मिश्रा के बेटे शिवम मिश्रा को एसीएमएम कोर्ट ने जमानत दे दी है। कोर्ट ने शिवम को 20-20 हजार के निजी मुचलके पर रिहा करने का आदेश किया। साथ की पुलिस की 14 दिन की रिमांड अर्जी को खारिज कर दिया है। आज सुबह ही करीब 9 बजे शिवम की गिरफ्तारी हुई थी। और महज 7 घंटे में छूट गया है। हालांकि पुलिस जांच में सामने आया था कि हादसे के वक्त शिवम मिश्रा ही ड्राइविंग सीट पर था, और कार चला रहा था। आपको बता दें कानपुर के वीआईपी रोड पर करीब 12 करोड़ रुपये की लग्जरी लैंबॉर्गिनी कार से हुए हादसे के मामले में पुलिस ने बंशीधर टोबैको ग्रुप के मालिक केके मिश्रा के बेटे शिवम मिश्रा को आज ही गिरफ्तार किया था। हादसे में कई लोग घायल हुए थे, जिसके बाद मामला सुर्खियों में आ गया। पुलिस का दावा है कि दुर्घटना के समय शिवम मिश्रा खुद कार चला रहा था, जबकि बचाव पक्ष का कहना है कि वाहन ड्राइवर मोहन लाल चला रहा था। हालांकि वायरल वीडियो में शिवम ड्राइविंग सीट से बाहर निकलते हुए दिखाई दिया, जिससे पुलिस की जांच को मजबूती मिली। हादसे के बाद मौके पर मौजूद बाउंसरों की भूमिका भी सवालों में रही। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार कुछ लोग कार की नंबर प्लेट हटाने या ढकने की कोशिश करते नजर आए और उनके पास वॉकी-टॉकी भी थे। शुरुआती कार्रवाई में पुलिस पर लापरवाही के आरोप लगे, जिसके बाद ग्वालटोली थाना प्रभारी को लाइन हाजिर कर दिया गया और सीसीटीवी फुटेज व वायरल वीडियो की जांच की गई। एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस जब शिवम के घर पहुंची तो दरवाजा नहीं खोला गया, लेकिन गुरुवार को पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश कर दिया। मामले की आगे जांच जारी है।  

कानपुर हिट एंड रन: SOG ने डिकोड की पूरी साजिश, लैंबॉर्गिनी केस में मुख्य आरोपी गिरफ्तार

 कानपुर     कानपुर के चर्चित लैंबॉर्गिनी हादसे मामले में पुलिस ने आरोपी शिवम मिश्रा को गिरफ्तार कर लिया है. पुलिस ने कोर्ट को अवगत कराया कि 8 तारीख को घटना घटित होने के बाद आरोपी मौके से फरार हो गया. इसके अगले दिन, 9 तारीख को एक डमी ड्राइवर को वाहन चालक बताकर फर्जी हलफनामा तैयार किया गया. जिसे बाद में कोर्ट में भी दाखिल कर दिया गया. पुलिस जांच में स्पष्ट हुआ कि घटना के समय गाड़ी शिवम ही चला रहा था. इसके बाद पुलिस टीम नोटिस की तामील कराने उसके पास पहुंची और उसे जांच में शामिल होने के निर्देश दिए गए. लेकिन इसके बावजूद वह खुद को कानून से बचाने के लिए छिपता रहा और तरह-तरह के बहाने बनाता रहा. देर से गिरफ्तारी पर भी पुलिस का आया बयान उसकी गिरफ्तारी 35 बीएनएस का पालन न करने पर हुई है. वहीं आरोपी की देर से गिरफ्तारी को लेकर भी पुलिस का बयान आया है. पुलिस के मुताबिक मामले में लगी धाराएं 7 साल से कम सजा की होने के कारण अभियुक्त को तत्काल गिरफ्तार नहीं किया गया. बल्कि नोटिस तामील कराने के लिए पुलिस टीम उसके पास भेजी गई. हालांकि, अभियुक्त द्वारा 35-बीएस के नियमों का पालन नहीं किया गया, जिसके चलते पुलिस के पास यह अधिकार सुरक्षित है कि वह 7 साल से कम सजा वाली धाराओं में भी अभियुक्त को गिरफ्तार कर सकती है. पुलिस ने कोर्ट से यह मांग की है कि आरोपी को 14 दिन की न्याय हिरासत में भेजा जाए.  मोहन को बनाया गया था डमी ड्राइवर कानपुर लैंबॉर्गिनी एक्सीडेंट मामले में शिवम मिश्रा की तरफ से समझौते के लिए शपथ पत्र दाखिल किया गया था. वादी के वकील ने कहा कि गाड़ी ड्राइवर मोहन चला रहा था. जबकि पुलिस जांच में सामने आया कि गाड़ी शिवम मिश्रा ही चल रहा था. कोर्ट में मोहन लाल का शपथ पत्र भी दिया गया था. जिसमें घटना से जुड़े तथ्यों का जिक्र है. न्यायालय ने सभी पक्षों की दलीलें और सबूतों को सुनने के बाद अपना आदेश सुरक्षित रख लिया था. इस मामले में अधिवक्ता धर्मेद्र कुमार धर्मू ने कहा एसीजेएम-7 की कोर्ट से कार चालक का आत्मसमर्पण खारिज होने के फैसले के खिलाफ वह जिला जज कोर्ट में रिवीजन दाखिल करेंगे। चालक खुद बता रहा है कि हादसे के समय वह कार चला रहा था।शिवम की कार रिलीज अर्जी पर भी कोर्ट ने पुलिस से रिपोर्ट मांगी थी। पुलिस ने रिपोर्ट में कहा वाहन संख्या डीएल 11 सीफ 4018 लेम्बोर्गिनी कार से अपराध कारित किया है। चालक शिवम कुमार मिश्रा का नाम सामने आया है। आरोपी की ओर से कार से संबंधित दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए हैं। पुलिस की इस रिपोर्ट पर कोर्ट ने शिवम को आदेश दिया वह कार से संबंधित समस्त दस्तावेज उपलब्ध कराए। थाना प्रभारी को आदेश दिया कार का परीक्षण कर 13 फरवरी तक अपनी रिपोर्ट दें। पुलिस ने शिवम को पक्ष रखने के लिए नोटिस जारी कर तलब किया है। वहीं इस मामले में कोर्ट में समझौता पत्र दाखिल होने के बाद सामने आए वादी मो. तौफीक ने कहा हादसे में बाएं पैर में चोट आई थी। इलाज करा दिया, अब कोई शिकायत नहीं है। मो. तौफीक चमनगंज के घोसियाना में रहता है और ई-रिक्शा चलाकर परिवार का गुजर-बसर करता है। अधिवक्ता धर्मेंद्र सिंह धर्मू ने बताया कि चमनगंज घोसियाना निवासी मो. तौफीक ने मुकदमा दर्ज कराया था। उसने कोर्ट में एक समझौतानामा दाखिल किया है। उसने कहा कि हादसे में उसे चोट लगी थी। इसमें उसे इलाज का पैसा मिल गया है, जिससे वह संतुष्ट है। आपको बता दें कि कानपुर में लैंबॉर्गिनी कर दुर्घटना मामले में जितनी चर्चा दुर्घटना की है, उससे ज्यादा चर्चा इस बात की है कि गाड़ी कौन चला रहा है. क्योंकि वीडियो में शिवम मिश्रा कार से बाउंसर के साथ निकलते हुए देखा गया. साथ ही पुलिस भी कह रही है कि गाड़ी शिवम मिश्रा ही चला रहा था. लेकिन कोर्ट में शिवम मिश्रा के एडवोकेट की तरफ से दावा किया गया था कि गाड़ी ड्राइवर मोहन चल रहा था. यह दावा खुद शिवम मिश्रा के पिता केकेबमिश्रा ने भी किया था. मोहन को सोमवार को कोर्ट में सरेंडर करना था. आज तक से बातचीत करने के दौरान डमी ड्राइवर मोहन ने बताया कि गाड़ी मैं ही चल रहा था. गाड़ी ठीक करने के लिए मैं दिल्ली से आया था. गाड़ी टेस्ट कर रहा था. बगल की सीट में शिवम मिश्रा बैठे थे. तभी वह मेरे ऊपर गिर गए. मैं कुछ समझ नहीं पाया और गाड़ी का बैलेंस खो गया.

होटल में छापा, 500 लड़कियों के साथ सेक्स रैकेट का भंडाफोड़, विदेशी भी शामिल

गाजियाबाद गाजियाबाद के वैशाली में बुधवार को एक बड़े सेक्स रैकेट का खुलासा हुआ जिसे महागुन सरोवर पोर्टिगो नाम के होटल से संचालित किया जा रहा था। पुलिस ने 3 लोगों को गिरफ्तार किया है, जबकि कुछ आरोपी फरार हैं। छापेमारी के दौरान पुलिस ने होटल से 11 लड़कियों को बरामद किया गया, जो देश के अलग-अलग राज्यों की रहने वाली हैं। मैनेजर के फोन से 500 लड़कियों की तस्वीरें मिलने की बात सामने आई है, जिससे पता चलता है कि यह रैकेट कितना बड़ा है। ग्राहकों को वॉट्सऐप पर लड़कियों की तस्वीरें और रेट भेजकर जिस्म का सौदा किया जाता था। जिन लोगों को गिरफ्तार किया गया है उनमें होटल का मैनेजर राहुल शर्मा (46) भी शामिल है, जिसे रैकेट का मास्टरमाइंड बताया जा रहा है। इसके अलावा वेटर सुनील सिंह (39) और अंकित चौहान (19) को गिरफ्तार किया गया है। एसीपी इंदिरापुरम अभिषेक श्रीवास्तव ने बताया कि उन्होंने सूचना के आधार पर पुलिस टीमों के साथ सेक्टर तीन एफ वैशाली स्थित होटल पर छापेमारी की। पुलिस के होटल में पहुंचते ही अफरा-तफरी मच गई। पुलिस ने होटल के अलग अलग कमरों से देह व्यापार के लिए लाई गईं 11 युवतियों को रेस्क्यू किया। इस दौरान कुछ लोग फरार भी हो गए। चार आरोपी अब भी फरार एसीपी ने बताया कि टीम ने मौके से होटल मैनेजर राहुल शर्मा, अंकित चौहान निवासी कासिमपुर पावर हाउस थाना जवा जिला अलीगढ़ और सुनील निवासी ग्राम दभी थाना अकराबाद जिला अलीगढ़ को गिरफ्तार किया है। इस धंधे में शामिल सुमित रावत निवासी कोटद्वार उत्तराखंड , राहुल, निर्दोष और अफजल फरार हैं। पुलिस इनकी तलाश कर रही है। निर्दोष का संबंध एक राजनीतिक दल से भी बताया जा रहा है। 21 से 31साल की लड़कियां, कई राज्यों से आईं एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि गोपनीय सूचना के बाद दोपहर करीब 2 बजे होटल पर छापेमारी की गई। उन्होंने कहा, ‘होटल से रेस्क्यू की गईं लड़कियां 21 से 31 साल की हैं। ये गुजरात, दिल्ली, पश्चिम बंगाल और ओडिसा की रहने वाली हैं।’ पूछताछ के दौरान लड़कियों ने बताया कि राहुल रोजगार के नाम पर उन्हें होटल लाया था और दबाव डालकर गंदे धंधे में धकेल दिया। होटल में आती थीं विदेशी लड़कियां, ग्राहकों से लेते थे 15-20 हजार एक पुलिस अधिकारी के मुताबिक महिलाओं ने पूछताछ के दौरान बताया कि ग्राहकों से 15 से 20 हजार रुपये लिए जाते थे, जबकि उन्हें एक रात के लिए 5 हजार रुपये मिलते थे। कुछ महिलाओं ने यह भी बताया कि होटल में विदेशी लड़कियां भी सेक्स वर्कर्स के रूप में आती थीं। राहुल के मुताबिक वह ग्राहकों को वॉट्सऐप पर लड़कियों की तस्वीरें भेजता था, जिसके बाद वे होटल में आते थे। इसके अलावा लड़कियों को ग्राहकों के साथ दूसरे होटलो में भी भेजा जाता था। उनके लिए रूम की बुकिंग ऑनलाइन की जाती थी। टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक पुलिस को मैनेजर के फोन से 500 से ज्यादा लड़कियों की तस्वीरें और 100 से ज्यादा ग्राहकों के फोन नंबर मिले हैं।

विवाद बढ़ा: AIMIM नेता का बयान ‘हिंदू भाई 4 नहीं 14 बच्चे पैदा करें’

मुजफ्फरनगर एआईएमआईएम (AIMIM) के प्रदेश अध्यक्ष शौकत अली मुजफ्फरनगर पहुंचे, जहां उन्होंने दो नुक्कड़ सभाओं को संबोधित किया. मीडिया से बातचीत में उन्होंने जनसंख्या नियंत्रण के मुद्दे पर कहा कि देश की आबादी बढ़ने से राष्ट्र मजबूत होता है. शौकत अली ने हिंदू संगठनों के चार बच्चे पैदा करने वाले बयानों पर तंज कसते हुए कहा कि हिंदू भाइयों को 4 नहीं बल्कि 14 बच्चे पैदा करने चाहिए. उन्होंने चीन का उदाहरण देते हुए तर्क दिया कि चीन अपनी विशाल आबादी के कारण ही हमसे अधिक मजबूत है, इसलिए भारत को भी अपनी जनसंख्या बढ़ानी चाहिए. बाबरी मस्जिद और नामकरण पर तीखे तेवर मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद के नाम से हो रहे निर्माण पर शौकत अली ने कहा कि संविधान किसी भी नाम से धार्मिक स्थल बनाने की अनुमति देता है. उन्होंने सवाल किया कि यदि कोई अपने बेटे का नाम बाबर रखकर काम शुरू करे, तो क्या उसे लाइसेंस नहीं मिलेगा? शौकत ने आरोप लगाया कि देश में दाढ़ी, टोपी और गोश्त के नाम पर मुसलमानों को निशाना बनाया जा रहा है और मॉब लिंचिंग की घटनाएं बढ़ रही हैं. उनके अनुसार, यदि सरकार को जनसंख्या से आपत्ति है, तो वह ‘हम दो हमारे दो’ का कानून लेकर आए. चुनावों और बजट पर भी रखी अपनी बात शौकत अली ने आगामी जिला पंचायत और विधानसभा चुनाव को लेकर पार्टी की तैयारियों का जिक्र किया. उन्होंने स्वीकार किया कि 2022 के चुनाव में पार्टी को अपेक्षित सफलता नहीं मिली, इसलिए अब संगठन को मजबूत करने पर ध्यान दिया जा रहा है. बजट पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि इसमें आम जनता के लिए राहत की उम्मीद बेहद कम है. उन्होंने दावा किया कि वर्तमान परिस्थितियों में मुसलमानों के साथ अन्याय हो रहा है, जिसे लेकर उनकी पार्टी आवाज उठाती रहेगी.

अलीगढ़ से हैरान करने वाली खबर: सास दूसरी बार फरार, दो लाख रुपये भी गायब

 अलीगढ़  अलीगढ़ की वह सास, जो पिछले साल अपने होने वाले दामाद के साथ भाग गई थी, एक बार फिर चर्चा में है. करीब दस महीने तक दामाद राहुल के साथ बिहार में पति-पत्नी की तरह रहने के बाद अब उसने उसे भी अलविदा कह दिया है. इस बार वह अपने जीजा के साथ भाग गई और जाते-जाते दो लाख रुपये नकद व जेवर भी साथ ले गई. परेशान राहुल शिकायत लेकर अलीगढ़ पहुंचा, लेकिन पुलिस ने यह कहकर लौटा दिया कि मामला बिहार का है. रिश्तों की यह उलझी कहानी अब एक नए मोड़ पर खड़ी है.  जब बेटी की शादी से पहले बदल गई कहानी यह पूरा घटनाक्रम अप्रैल 2025 से शुरू होता है. 16 अप्रैल को महिला की बेटी की शादी तय थी. घर में रंगाई-पुताई, रिश्तेदारों की आवाजाही और शादी की तैयारियां जोरों पर थीं. लेकिन शादी से महज 12 दिन पहले ऐसा हुआ जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी. जिस युवक राहुल से बेटी की शादी होने वाली थी, उसी के साथ सास घर से चली गई. आरोप लगा कि वह घर से लाखों रुपये के जेवर और नकदी लेकर फरार हुई. परिवार ने तब दावा किया था कि करीब पांच लाख रुपये के जेवर और साढ़े तीन लाख रुपये कैश गायब थे. बेटी ने मीडिया के सामने कहा था, मां घर में दस रुपये भी नहीं छोड़कर गईं. मोबाइल से शुरू हुई नजदीकियां परिवार के मुताबिक, महिला ने राहुल को एक स्मार्टफोन दिलवाया था. धीरे-धीरे दोनों के बीच बातचीत बढ़ी. पहले शादी की तैयारियों के नाम पर बात होती थी, फिर घंटों-घंटों फोन कॉल चलने लगे. महिला के पति जितेंद्र ने तब आरोप लगाया था कि जब वह शादी की तैयारी के सिलसिले में घर आए तो पता चला कि पत्नी और राहुल के बीच 15-20 घंटे तक फोन पर बातचीत हो रही है. पहले उन्होंने इसे सामान्य माना, लेकिन बाद में शक गहराता गया. भागकर कहां-कहां पहुंचे जब मामला सुर्खियों में आया और पुलिस सक्रिय हुई, तब पता चला कि दोनों अलीगढ़ से कासगंज, फिर बरेली होते हुए बिहार के मुजफ्फरपुर पहुंचे थे. कुछ दिन वहीं रुके. यहां तक कि नेपाल बॉर्डर जाने की भी योजना बनाई गई थी. राहुल ने बाद में बताया था कि जब उन्होंने मोबाइल चलाया तो देखा कि दोनों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो चुकी हैं. हर तरफ चर्चा थी. तब दोनों ने खुद लौटने का फैसला किया. मुजफ्फरपुर से बस पकड़कर वे उत्तर प्रदेश लौटे और अंततः थाना दादों पहुंचकर सरेंडर कर दिया. पुलिस के सामने क्या कहा था थाने में पूछताछ के दौरान सास ने घरेलू हिंसा का आरोप लगाया था. उसने कहा कि उसका पति शराब पीकर मारपीट करता था, अपमानित करता था और अक्सर घर से निकाल देने की धमकी देता था. सास का कहना था कि जब राहुल फोन करता था तो कभी बेटी बात करती थी, कभी वह खुद. इसी बात को लेकर घर में विवाद बढ़ता गया. पति ताने मारते थे अब तो राहुल के साथ ही भाग जाओ. उसने पुलिस के सामने कहा था कि जब हालात असहनीय हो गए तो उसने वही किया जो उसे उस समय ठीक लगा. राहुल ने भी बयान दिया था कि वह महिला को पहले से जानता था और उसके कहने पर ही साथ गया. वह रोती थी, कहती थी कि अब जीने का मन नहीं करता. मुझे लगा कि उसे अकेला छोड़ना ठीक नहीं होगा. पुलिस ने कानूनी प्रक्रिया पूरी कर महिला को राहुल के साथ जाने की अनुमति दे दी थी. दस महीने साथ रहने के बाद नया मोड़ करीब दस महीने तक दोनों बिहार में साथ रहे. स्थानीय सूत्रों के अनुसार, वे पति-पत्नी की तरह रह रहे थे. लेकिन हाल ही में राहुल ने आरोप लगाया कि महिला उसे छोड़कर अपने जीजा के साथ चली गई है. राहुल का कहना है कि जाते समय वह दो लाख रुपये नकद और कुछ जेवर भी साथ ले गई. राहुल ने कहा कि मैंने उसके लिए अपना घर छोड़ा, समाज की बातें सुनीं. अब वह मुझे ही छोड़कर चली गई.  शिकायत और पुलिस का जवाब राहुल अलीगढ़ पहुंचा और थाना दादों में शिकायत दर्ज कराने की कोशिश की. लेकिन पुलिस ने क्षेत्राधिकार का हवाला देते हुए कहा कि कथित घटना बिहार में हुई है, इसलिए वहीं की पुलिस कार्रवाई करेगी. अब राहुल बिहार जाकर शिकायत दर्ज कराने की तैयारी में है.

इलेक्ट्रिक बसों की खरीद के लिए 400 करोड़ और चार्जिंग स्टेशन के लिए दिए गए 50 करोड़ रुपये

नव निर्माण के नौ वर्ष: बजट 2026-27  नागरिक उड्डयन क्षेत्र के विकास को मिले नए पंख, बजट में 2,111 करोड़ रुपये की घोषणा जेवर अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट को मिले 750 करोड़ रुपये, ऑपरेशन हब के रूप में होगा विकास इलेक्ट्रिक बसों की खरीद के लिए 400 करोड़ और चार्जिंग स्टेशन के लिए दिए गए 50 करोड़ रुपये लखनऊ प्रदेश में नागरिक उड्डयन और परिवहन अवसंरचना को सशक्त बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने बजट 2026-27 में व्यापक वित्तीय प्रावधान किए हैं। इस क्रम में वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने बजट भाषण में नागरिक उड्डयन क्षेत्र के विकास हेतु 2,111 करोड़ रुपये के प्रावधान की घोषणा की। इसमें विशेष रूप से जेवर एयरपोर्ट में नए विकास कार्यों के साथ प्रदेश के अन्य एयरपोर्टों पर हवाई पट्टियों के निर्माण के लिए बजट प्रावधान किया गया है। साथ ही सड़क परिवहन में इलेक्ट्रिक वाहनों के प्रयोग को बढ़ावा देने के लिए 400 करोड़ रुपये ईवी बसों की खरीद के लिए स्वीकृत किए गए हैं। वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने बजट भाषण के दौरान प्रदेश के महत्वाकांक्षी जेवर अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट में नए निर्माण कार्यों के लिए 750 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। उन्होंने बताया कि पीपीपी मोड पर बन रहे इस एयरपोर्ट के प्रथम चरण का विकास कार्य प्रगति पर है। राज्य सरकार ने यहां प्रस्तावित दो रनवे की संख्या बढ़ाकर पांच रनवे किए जाने का निर्णय लिया है। साथ ही जेवर एयरपोर्ट को एविएशन इनोवेशन एवं रिसर्च सेंटर के अलावा रखरखाव एवं ऑपरेशन हब के रूप में विकसित करने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है। साथ ही प्रदेश में हवाई पट्टियों के निर्माण, विस्तार, सुदृढ़ीकरण एवं भूमि अर्जन के लिए 1,100 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है, जिससे क्षेत्रीय हवाई सेवाओं को मजबूती मिलेगी। साथ ही उन्होंने बताया कि प्रदेश में हवाई कनेक्टिविटी को बढ़ाने के लिए रीजनल कनेक्टिविटी स्कीम (आरसीएस) के माध्यम से हवाई सुविधाओं का निरंतर विकास किया जा रहा है। प्रदेश सरकार के बजट 2026-27 में सड़क परिवहन को सुदृढ़ बनाने और इलेक्ट्रिक वाहनों के प्रयोग को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया गया है। वित्त मंत्री ने ईवी बसों की खरीद के लिए 400 करोड़ रुपये और बस अड्डों पर चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने के लिए 50 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। वहीं परिवहन संरचना के सुदृढ़ीकरण के उद्देश्य से बस अड्डों के निर्माण के लिए 150 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। साथ ही सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम एवं दुर्घटना के बाद त्वरित कार्रवाई के लिए मुख्यमंत्री सड़क सेफ्टी विजन योजना के अंतर्गत 50 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है। योगी सरकार की इन पहलों से प्रदेश में हवाई और सड़क परिवहन ढांचे को नई गति मिलने की उम्मीद है, जिससे कनेक्टिविटी, निवेश और आर्थिक विकास को व्यापक प्रोत्साहन मिलेगा।

नव निर्माण के नौ वर्ष : एमएसएमई से हथकरघा और खादी तक, रोजगार व आत्मनिर्भरता को नई रफ्तार देता बजट 2026-27

एमएसएमई को 3,822 करोड़ का संबल, 3.11 करोड़ रोजगार वाले क्षेत्र को और मजबूती वस्त्रोद्योग में 5,041 करोड़ का प्रावधान, 30,000 नए रोजगार और मेगा टेक्सटाइल पार्क की तैयारी लखनऊ उत्तर प्रदेश सरकार ने वर्ष 2026-27 के बजट में सूक्ष्म लघु एवं मध्यम उद्यम, हथकरघा वस्त्र उद्योग और खादी ग्रामोद्योग क्षेत्रों को केंद्र में रखकर रोजगार और औद्योगिक विस्तार की स्पष्ट रूपरेखा प्रस्तुत की है। प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले इन क्षेत्रों के लिए बढ़े हुए बजटीय प्रावधानों के साथ नई योजनाओं और लक्ष्यों की घोषणा की गई है, जिनका उद्देश्य ग्रामीण और शहरी दोनों स्तरों पर रोजगार सृजन, परंपरागत उद्योगों का आधुनिकीकरण और आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश के विजन को गति देना है।  सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम सेक्टर की योजनाओं के लिए 3,822 करोड़ रुपये के आवंटन का प्रस्ताव किया गया है। जो वर्ष 2025-26 की तुलना में 19 प्रतिशत अधिक है। प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले इस क्षेत्र से लगभग 3.11 करोड़ लोगों को रोजगार उपलब्ध हो रहा है। उत्तर प्रदेश एमएसएमई के मामले में सभी राज्यों में अग्रणी बना हुआ है। एमएसएमई उद्योगों को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से सरदार वल्लभभाई पटेल इम्प्लायमेंट एंड इंडस्ट्रियल जोन की नई योजना प्रस्तावित की गई है, जिसके लिए 575 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है। मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान हेतु 1000 करोड़ रुपये का प्रावधान है, जिसके अंतर्गत प्रतिवर्ष 1 लाख सूक्ष्म उद्यमों की स्थापना का लक्ष्य रखा गया है और आवश्यकता अनुसार इसे बढ़ाया जाएगा। मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना के लिए 225 करोड़ रुपये तथा एक जनपद एक व्यंजन योजना के लिए 75 करोड़ रुपये की व्यवस्था प्रस्तावित है। हथकरघा एवं वस्त्र उद्योग   हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग क्षेत्र के लिए लगभग 5,041 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जो वर्ष 2025-26 की तुलना में पांच गुने से अधिक है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में वस्त्रोद्योग क्षेत्र में 30,000 रोजगार सृजन का लक्ष्य रखा गया है। प्रदेश में गारमेंटिंग हब विकसित करने के लिए पीएम मित्र पार्क योजना के अंतर्गत विश्वस्तरीय मेगा टेक्सटाइल पार्क की स्थापना की जाएगी। हथकरघा बुनकरों के साथ पावरलूम बुनकरों के उत्थान के लिए अटल बिहारी बाजपेयी पावरलूम बुनकर विद्युत फ्लैट रेट योजना हेतु 4,423 करोड़ रुपये की व्यवस्था प्रस्तावित है। उत्तर प्रदेश वस्त्र एवं गारमेंटिंग नीति 2022 के लिए 150 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

8.41 करोड़ कामगारों को फैमिली आईडी उपलब्ध, घर से दूर रहने वाले श्रमिकों के लिए लेबर अड्डों का होगा निर्माण

लखनऊ योगी सरकार के वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने सदन में 2026-27 का बजट प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि बजट में राज्य में रोजगार के अवसरों के विस्तार के लिए उत्तर प्रदेश रोजगार मिशन समिति को संस्थागत मजबूती दी गई है। इसके गठन हेतु 200 करोड़ रुपये की व्यवस्था कर सरकार ने अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया है। इसके माध्यम से श्रमिकों को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा। अपने घर और गांव से दूर शहरों में कार्यरत मजदूरों के लिए लेबर अड्डों के निर्माण की घोषणा कर श्रमिकों को संगठित, सुरक्षित और व्यवस्थित कार्यस्थल उपलब्ध कराने की दिशा में पहल की गई है। यह कदम प्रवासी श्रमिकों के श्रम प्रबंधन और सुविधा विस्तार के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। शिक्षा और स्वास्थ्य के माध्यम से श्रमिक परिवारों का सशक्तिकरण बजट 2026-27 में श्रमिक परिवारों के सामाजिक उत्थान को भी प्राथमिकता दी गई है। अटल आवासीय विद्यालयों के माध्यम से कक्षा 6 से 12 तक निःशुल्क आदर्श शिक्षा प्रदान की जा रही है। वर्तमान में इन विद्यालयों में श्रमिकों के 10,876 बच्चे अध्ययनरत हैं। इस योजना हेतु बजट में 70 करोड़ रुपये की व्यवस्था प्रस्तावित की गई है। वित्त मंत्री ने बताया कि निर्माण श्रमिकों के स्वास्थ्य परीक्षण और स्वास्थ्य शिक्षा प्रदान करने के लिए पहली बार मोबाइल हेल्थ वैन का संचालन पायलट प्रोजेक्ट के रूप में किया गया है। एक्स-ग्रेशिया अनुदान व्यवस्था के तहत पंजीकृत असंगठित श्रमिकों के दुर्घटना में मृत्यु या पूर्ण दिव्यांगता की स्थिति में 2 लाख रुपये तथा आंशिक दिव्यांगता पर 1 लाख रुपये के भुगतान का प्रावधान जारी रखा गया है।  8.41 करोड़ कामगारों को फैमिली आईडी वित्त मंत्री ने कहा कि कामगारों को मुख्यधारा की योजनाओं से जोड़ने पर विशेष बल दिया गया है। वर्तमान में ई-श्रम पोर्टल पर पंजीकृत 8.41 करोड़ कामगारों के सापेक्ष फैमिली आईडी उपलब्ध कराई गई है। इसका उद्देश्य योजनाओं का लक्षित क्रियान्वयन और पारदर्शिता को सुनिश्चित करना है। डिजिटल पहचान के माध्यम से सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का दायरा और प्रभाव दोनों बढ़ाने का संकेत बजट में स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।

उत्तर प्रदेश क्लीन एयर मैनेजमेंट प्रोजेक्ट के लिए 194 करोड़ की व्यवस्था

लखनऊ योगी सरकार के वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने बजट में वन-पर्यावरण क्षेत्र का भी विशेष ध्यान रखा। वित्त मंत्री ने बताया कि योगी सरकार ने 2017 से प्रदेश में अब तक 242.13 करोड़ से अधिक पौधरोपण किया। आगामी वर्षाकाल-2026 में भी 35 करोड़ पौधरोपण का लक्ष्य प्रस्तावित है। वित्त मंत्री ने बताया कि योगी सरकार में किए गए कार्यों की बदौलत उत्तर प्रदेश वनावरण व वृक्षादन में वृद्धि के मामले में देश में द्वितीय स्थान पर रहा है। योगी सरकार द्वारा चलाए जा रहे पौधरोपण अभियान के कारण राज्य को यह गौरव प्राप्त होने का श्रेय है।  वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने बजट में वन एवं पर्यावरण विभाग का भी जिक्र किया और बताया कि बजट में सामाजिक वानिकी योजना के लिए 800 करोड़ रुपये की व्यवस्था प्रस्तावित की गई है। उन्होंने बताया कि पौधशाला प्रबंधन योजना के लिए 220 करोड़ रुपये तथा राज्य प्रतिकारात्मक वन रोपण योजना के लिए 189 करोड़ रुपये की व्यवस्था बजट में प्रस्तावित है।  वित्त मंत्री ने बताया कि लखनऊ स्थित कुकरैल वन क्षेत्र में नाइट सफारी पार्क की स्थापना के लिए लगभग 207 करोड़ रुपये प्रस्तावित किए गए हैं। वहीं रानीपुर बांध फाउंडेशन, चित्रकूट के कॉर्पस फंड के गठन के लिए 50 करोड़ रुपये की भी व्यवस्था प्रस्तावित की गई है।  परिसंकटमय अपशिष्ट निस्तारण सुविधा, सामूहिक जैव चिकित्सा अपशिष्ट निस्तारण सुविधा एवं ई. वेस्ट रिसाइकिलिंग एंडे ट्रीटमेंट सुविधा की स्थापना कराए जाने की कार्यवाही करायी जा रही है। उत्तर प्रदेश क्लीन एयर मैनेजमेंट प्रोजेक्ट वर्ष 2025-2026 से 2030-2031 तक क्रियान्वित होना है। यह विश्व बैंक सहायतित मल्टीसेक्टोरल योजना है। इसके लिए 194 करोड़ रुपये की व्यवस्था बजट में प्रस्तावित की गई है।

नव निर्माण के नौ वर्ष: 2025-26 के बजट की तुलना में 12.9 प्रतिशत अधिक है वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट

लखनऊ उत्तर प्रदेश के वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने बुधवार को विधानसभा में योगी सरकार का वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट प्रस्तुत किया। “नव निर्माण के नौ वर्ष” की थीम पर प्रस्तुत बजट 2026-27 का कुल आकार 9,12,696.35 करोड़ रुपये है, जो वित्तीय वर्ष 2025-26 की तुलना में लगभग 12.9 प्रतिशत अधिक है। आकार के लिहाज से योगी सरकार ने अपने इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा बजट प्रस्तुत किया है। वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने सदन को बताया कि यह बजट राज्य की बढ़ती आर्थिक क्षमता, निवेश के अनुकूल माहौल और सुदृढ़ राजकोषीय प्रबंधन का परिणाम है। यह बजट न केवल राज्य की आर्थिक मजबूती को दर्शाता है, बल्कि दीर्घकालिक वित्तीय स्थिरता और सतत विकास की स्पष्ट रूपरेखा भी प्रस्तुत करता है। बजट 2026-27 सरकार की उस सोच को प्रतिबिंबित करता है, जिसमें विकास, वित्तीय अनुशासन और भविष्य की तैयारी तीनों को समान महत्व दिया गया है। इस बजट में अन्नदाता किसान, युवा, महिला, छात्र-छात्राओं समेत हर वर्ग का ध्यान रखा गया है।  शिक्षा, स्वास्थ्य और कृषि को प्राथमिकता वित्त मंत्री ने बताया कि बजट में 19.5 प्रतिशत पूंजीगत परिव्यय का प्रावधान किया गया है, जो आधारभूत ढांचे, औद्योगिक विकास, सड़क, ऊर्जा और शहरी-ग्रामीण अधोसंरचना को नई गति देगा। पूंजीगत निवेश से रोजगार सृजन होगा और आर्थिक गतिविधियों को मजबूती मिलेगी। योगी सरकार ने सामाजिक क्षेत्रों को बजट में प्रमुख स्थान दिया है। इसके अंतर्गत शिक्षा के लिए कुल बजट का 12.4 प्रतिशत, स्वास्थ्य एवं चिकित्सा के लिए 6 प्रतिशत और कृषि एवं सम्बद्ध सेवाओं के लिए 9 प्रतिशत का आवंटन किया गया है। यह स्पष्ट संकेत है कि सरकार मानव संसाधन विकास और किसानों की आय बढ़ाने को विकास की धुरी मानकर चल रही है। राजकोषीय घाटा 3 प्रतिशत की सीमा में उन्होंने बताया कि 16वें केन्द्रीय वित्त आयोग की संस्तुतियों के अनुरूप वित्तीय वर्ष 2026-27 में राजकोषीय घाटे की सीमा 3 प्रतिशत निर्धारित की गई है, जो वर्ष 2030-31 तक लागू रहेगी। सरकार ने स्पष्ट किया कि वह राजकोषीय अनुशासन से किसी भी स्तर पर समझौता नहीं करेगी। उन्होंने बताया कि वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए राजकोषीय घाटा 1,18,480.59 करोड़ रुपये अनुमानित है, जो राज्य के अनुमानित सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) का 2.98 प्रतिशत है। यह 3 प्रतिशत की निर्धारित सीमा के भीतर है और वित्तीय अनुशासन के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है। समग्र परिप्रेक्ष्य में, बजट 2026-27 में एक ओर जहां विकासोन्मुख नई योजनाओं का विस्तार है, वहीं दूसरी ओर राजस्व बचत और नियंत्रित राजकोषीय घाटे के माध्यम से वित्तीय स्थिरता बनाए रखने का स्पष्ट प्रयास किया गया है।  डीजल से सोलर की ओर बड़ा कदम बजट में विशेष रूप से कृषि विभाग के अंतर्गत डीजल पंप सेट को सोलर पंप में परिवर्तित करने की महत्वाकांक्षी योजना के लिए 637.84 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इससे किसानों की डीजल पर निर्भरता कम होगी, लागत घटेगी और स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा मिलेगा। यह कदम कृषि क्षेत्र में हरित ऊर्जा संक्रमण की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अंतर्राष्ट्रीय महिला किसान वर्ष और एफपीओ को मजबूती संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा वर्ष 2026 को अंतर्राष्ट्रीय महिला किसान वर्ष घोषित किए जाने के मद्देनजर सरकार ने किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) के लिए रिवॉल्विंग फंड योजना के अंतर्गत 150 करोड़ रुपये का कोष नाबार्ड की सहभागी संस्था ‘नैब किसान’ के साथ मिलकर स्थापित करने का निर्णय लिया है। इसमें सरकार 75 करोड़ रुपये का अंशदान देगी। प्रत्येक पात्र एफपीओ को अधिकतम 50 लाख रुपये तक की ऋण सीमा उपलब्ध कराई जाएगी। इसके अतिरिक्त, यूपी एग्रीज के अंतर्गत प्रदेश में एग्री एक्सपोर्ट हब की स्थापना के लिए 245 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसका उद्देश्य कृषि उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देना और किसानों को वैश्विक बाजार से जोड़ना है। मुख्यमंत्री कृषक समृद्धि योजना के तहत 38 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है। साथ ही प्रदेश में 2 लाख मीट्रिक टन अतिरिक्त खाद्यान्न भंडारण क्षमता विकसित की जाएगी, जिसके लिए 25 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।  इसके अलावा, बजट में स्वच्छताकर्मियों को बड़ा तोहफा देते हुए उनके अकाउंट में सीधे 16 से 20 हजार रुपये भेजने का भी प्राविधान किया गया है। इसके लिए सारी तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी हैं। जल्द ही स्कीम का फायदा स्वच्छताकर्मियों को मिलेगा। शिक्षकों और कर्मचारियों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों, शिक्षामित्रों, विशेष शिक्षकों, अनुदेशकों, कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय के कार्मिकों तथा पीएम पोषण योजना की रसोइयों एवं उनके आश्रितों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा देने के लिए 357.84 करोड़ रुपये का प्रस्ताव किया गया है। माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों के लिए 89.25 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है। प्रदेश के विद्यालयों में अध्ययनरत छात्राओं को निशुल्क सैनेटरी नैपकिन उपलब्ध कराने के लिए 300 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जिससे स्वास्थ्य, स्वच्छता और स्कूल उपस्थिति में सुधार की उम्मीद है। स्नातक एवं स्नातकोत्तर छात्रों के लिए एआई प्रमाणन शुल्क प्रतिपूर्ति योजना हेतु 10 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसके साथ ही मुख्यमंत्री विद्यालक्ष्मी योजना के अंतर्गत मेधावी छात्रों के शिक्षा ऋण पर अतिरिक्त ब्याज सब्सिडी के लिए 30 करोड़ रुपये प्रस्तावित किए गए हैं। एमएसएमई और रोजगार को बढ़ावा सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग के तहत सरदार वल्लभभाई पटेल इंप्लॉइमेंट एंड इंडस्ट्रियल जोन की स्थापना के लिए 575 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। एक जनपद एक व्यंजन (ओडीओसी) योजना के लिए 75 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है, जिससे स्थानीय खाद्य उत्पादों को पहचान और बाजार मिलेगा। इसके साथ ही, अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास विभाग के अंतर्गत इंटरनेशनल फिल्म सिटी परियोजना को आगे बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, जिससे प्रदेश में फिल्म उद्योग और रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। यूपी एआई मिशन और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग के तहत ‘उत्तर प्रदेश एआई मिशन’ (यूपीएआई मिशन) शुरू किया जाएगा, जिसके अंतर्गत अगले तीन वर्षों में लगभग 2000 करोड़ रुपये के कार्यक्रम चरणबद्ध रूप से लागू किए जाएंगे। इसके लिए 225 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है। स्टेट डाटा सेंटर 2.0 के लिए 100 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है। इसके साथ … Read more

UP Budget 2026: आलोम्पिक 2032 एवं 2036 के लिए प्रदेश के खिलाड़ियों को किया जाएगा तैयार

लखनऊ 2026-27 के लिए प्रस्तुत बजट में प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर के लिए तैयार करने की व्यापक रूपरेखा पेश की गई है। वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने कहा कि योगी सरकार ने इसके तहत प्रत्येक मंडल में एक स्पोर्ट्स कॉलेज की स्थापना कर उन्हें सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया है। इससे वर्ष 2032 और 2036 ओलंपिक को लक्ष्य बनाकर खिलाड़ियों को तैयार किया जा सकेगा। इसके लिए अभी 80 करोड़ रुपये का प्रावधान किया जा रहा है। वहीं, प्रदेश के 403 विधानसभा क्षेत्रों में 03 लाख प्रति विधानसभा तथा 80 संसदीय क्षेत्रों में 10 लाख प्रति संसदीय क्षेत्र की दर से सांसद / विधायक खेल स्पर्धा का आयोजन किया जाएगा। इसके लिए 20 करोड़ रुपए के बजट का प्रावधान किया जा रहा है। मेजर ध्यानचंद राज्य खेल विश्वविद्यालय, मेरठ के नवीन भवन निर्माण एवं विकास कार्य के लिए 80 करोड़ रुपये, पूंजीगत परिसंपत्तियों के सृजन के लिए 30 करोड़ रुपये तथा शैक्षणिक व खेल गतिविधियों के संचालन के लिए 60 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इस प्रकार कुल 170 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान नई मांग के माध्यम से किया जा रहा है। कानपुर स्थित ग्रीनपार्क अन्तर्राष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम के उच्चीकरण और आधुनिकीकरण के लिए 45 करोड़ रुपये का बजट प्रस्तावित है, जिससे स्टेडियम का पुनर्विकास कर उसे आधुनिक सुविधाओं से लैस किया जाएगा। योगी सरकार का लक्ष्य है कि प्रदेश के खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय मंच पर तिरंगा लहराएं और उत्तर प्रदेश खेल प्रतिभा का नया केंद्र बने। वर्तमान में प्रदेश में तीन स्पोर्ट्स कॉलेज हैं। गोरखपुर में वीर बहादुर सिंह स्पोर्ट्स कॉलेज, लखनऊ में गुरु गोविंद सिंह स्पोर्ट्स कॉलेज और सैफई स्पोर्ट्स कॉलेज।

सौर, जैव ऊर्जा और ग्रीन हाइड्रोजन पर दोगुना जोर, 22,000 मेगावॉट उत्पादन का लक्ष्य

लखनऊ वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट भाषण में स्पष्ट किया कि योगी सरकार उत्तर प्रदेश को हरित और स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में अग्रणी बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। अतिरिक्त ऊर्जा स्रोतों के विकास के लिए लगभग 2,104 करोड़ रुपये की व्यवस्था प्रस्तावित की गई है, जो पिछले वित्तीय वर्ष 2025-26 की तुलना में दो गुने से अधिक है। यह प्रावधान राज्य की ऊर्जा सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास की प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है। 22,000 मेगावॉट का महत्वाकांक्षी लक्ष्य राज्य सरकार द्वारा लागू उत्तर प्रदेश सौर ऊर्जा नीति-2022, उत्तर प्रदेश राज्य जैव ऊर्जा नीति-2022 और उत्तर प्रदेश ग्रीन हाइड्रोजन नीति-2024 के तहत आगामी पांच वर्षों में 22,000 मेगावॉट विद्युत उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। यह लक्ष्य प्रदेश को पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता कम कर आत्मनिर्भर ऊर्जा राज्य बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। 2,815 मेगावॉट सौर क्षमता स्थापित प्रदेश में अब तक 2,815 मेगावॉट की सौर ऊर्जा परियोजनाएं स्थापित की जा चुकी हैं। यह उपलब्धि दर्शाती है कि नीति निर्माण के साथ-साथ क्रियान्वयन स्तर पर भी सरकार सक्रिय है। पीएम कुसुम और सूर्यघर योजना को 1,500 करोड़ पीएम कुसुम सूर्यघर योजना को प्रदेश में सघन रूप से लागू किया जा रहा है। बजट में इसके लिए 1,500 करोड़ रुपये की व्यवस्था प्रस्तावित है। इससे किसानों और घरेलू उपभोक्ताओं को सौर ऊर्जा के माध्यम से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में गति मिलेगी। 17 नगर निगम सोलर सिटी की ओर अयोध्या और मथुरा सहित 17 नगर निगमों को सोलर सिटी के रूप में विकसित किया जा रहा है। शहरी क्षेत्रों में सौर ऊर्जा आधारित ढांचे को मजबूत करने का यह प्रयास स्वच्छ ऊर्जा की व्यापक पहुंच सुनिश्चित करेगा। ग्रामीण क्षेत्रों में अब तक 5.20 लाख सोलर स्ट्रीट लाइट संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं, जिससे ऊर्जा बचत के साथ-साथ सुरक्षा और सुविधाओं में भी सुधार हुआ है। जैव ऊर्जा में देश में अग्रणी उत्तर प्रदेश राज्य जैव ऊर्जा नीति-2022 के अंतर्गत प्रदेश में 36 सीबीजी (कंप्रेस्ड बायोगैस) संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं, जो देश में सर्वाधिक हैं। इससे अपशिष्ट प्रबंधन और स्वच्छ ईंधन उत्पादन दोनों को बढ़ावा मिला है। ग्रीन हाइड्रोजन में नई पहल ग्रीन हाइड्रोजन के क्षेत्र में भी उत्तर प्रदेश ने अग्रणी कदम उठाया है। ग्रीन हाइड्रोजन नीति-2024 के तहत प्रदेश में दो सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना को स्वीकृति प्रदान की गई है। यह पहल भविष्य की स्वच्छ ऊर्जा तकनीकों के अनुसंधान और औद्योगिक उपयोग को बढ़ावा देगी।

उत्तर प्रदेश एआई मिशन, एआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, इंडियन एआई डाटा लैब्स और डेटा सेंटर क्लस्टर की होगी स्थापना: : मुख्यमंत्री

डिजिटल लेनदेन की सुरक्षा और साइबर अपराध रोकने के लिए होगी साइबर सिक्योरिटी ऑपरेशन सेंटर की स्थापना बालिकाओं के स्वास्थ्य और स्वच्छता को ध्यान में रखते हुए नि:शुल्क सेनेटरी नैपकिन की व्यवस्था के लिए भी बजट में प्रावधान लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को विधानसभा के सभागार में पत्रकारों को संबोधित करते हुए वर्ष 2026-27 के बजट की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने युवाओं को डिजिटल रूप से सक्षम बनाने, शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक बनाने और उभरते तकनीकी क्षेत्रों में प्रदेश को अग्रणी बनाने की दिशा में बजट में कई अहम घोषणाएं की गई हैं। बजट में स्वामी विवेकानंद युवा सशक्तिकरण योजना के तहत युवाओं को टैबलेट और स्मार्टफोन उपलब्ध कराने के लिए पर्याप्त धनराशि की व्यवस्था की गई है। इसका उद्देश्य प्रदेश के युवाओं को डिजिटल रूप से सशक्त बनाना है, ताकि वे ऑनलाइन शिक्षा, स्किल डेवलपमेंट और रोजगार के आधुनिक अवसरों से जुड़ सकें।  साइबर सिक्योरिटी ऑपरेशन सेंटर से साइबर फ्राड पर लगेगी रोक मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि एमएसएमई सेक्टर को मजबूती देने के लिए विशेष पहल की गई है। खासतौर पर पुराने कंबल कारखानों के आधुनिकीकरण की दिशा में बजट में प्रस्ताव रखा गया है। हर वर्ष गरीबों को कंबल वितरण के लिए अतिरिक्त प्रावधान करने पड़ते हैं, ऐसे में कंबल उद्योग के आधुनिकीकरण से न केवल उत्पादन क्षमता बढ़ेगी, बल्कि स्थानीय रोजगार को भी बढ़ावा मिलेगा। आईटी और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए भी बजट में प्रावधान किए गए हैं। इसमें उत्तर प्रदेश एआई मिशन के तहत एआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस और इंडियन एआई डेटा लैब्स की स्थापना, साइबर फ्रॉड को रोकने के लिए साइबर सिक्योरिटी ऑपरेशन सेंटर की स्थापना के लिए भी बजट में प्रावधान किया गया है। प्रदेश में डेटा सेंटर की मांग तेजी से बढ़ रही है और वर्तमान में कई डेटा सेंटर की स्थापना हो रही है। इसी को ध्यान में रखते हुए एआई के लिए आवश्यक डेटा सेंटर क्लस्टर की स्थापना की घोषणा की गई है, जिसके लिए अलग से बजट का प्रावधान किया गया है। इस नई योजना से प्रदेश में तकनीकी निवेश को और गति मिलने की उम्मीद है। इसके साथ ही शिक्षा के क्षेत्र में भी सरकार ने अपने पूर्व में दिए गए सफल मॉडलों को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया है। ऑपरेशन कायाकल्प और निराश्रित बच्चों तथा निर्माण श्रमिकों के बच्चों के लिए शुरू किए गए अटल आवासीय विद्यालय के मॉडल को आधार बनाते हुए अब बेसिक शिक्षा परिषद में सीएम कंपोजिट विद्यालयों की स्थापना की जाएगी। बजट में सभी 75 जनपदों में प्रत्येक जनपद में दो-दो सीएम कंपोजिट विद्यालयों के लिए धनराशि का प्रावधान किया गया है। विकासखंडों में होगी कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय की स्थापना मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रदेश के उन विकासखंडों में जहां अब तक कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय नहीं थे या उनकी मांग लंबे समय से की जा रही थी, वहां इन विद्यालयों के विस्तार की व्यवस्था की गई है। सरकार ने परिषदीय स्कूलों, माध्यमिक स्कूलों और उच्च शिक्षण संस्थानों में कार्यरत शिक्षणेत्तर कर्मचारियों, मानदेय पर कार्यरत शिक्षकों और अन्य शिक्षकों के लिए भी बड़ी राहत की घोषणा की है। इनके लिए आयुष्मान भारत की तर्ज पर कैशलेस उपचार की सुविधा उपलब्ध कराने हेतु बजट में धनराशि का प्रावधान किया गया है, जिससे सभी प्रकार के शिक्षक इस योजना से जुड़ सकेंगे। इसके अलावा एआई का उपयोग माध्यमिक स्तर से ही प्रारंभ किया जाएगा। इसके लिए बजट में विशेष धनराशि की व्यवस्था की गई है। साथ ही बालिकाओं के स्वास्थ्य और स्वच्छता को ध्यान में रखते हुए नि:शुल्क सेनेटरी नैपकिन की व्यवस्था के लिए भी बजट में प्रावधान किया गया है। युवाओं के कौशल विकास को नई दिशा देने के लिए ड्रीम स्किल लैब क्लस्टर की स्थापना के लिए भी धनराशि का प्रावधान किया गया है। तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में प्रदेश सरकार ने शिक्षा, कौशल, तकनीक और सशक्तिकरण के समन्वय को मजबूत करने के लिए एआई, डिजिटल टेक्नोलॉजी, डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग, सेमीकंडक्टर, डाटा सेंटर और डाटा साइंस जैसे उभरते क्षेत्रों में विशेष पहल की है। इन क्षेत्रों में प्रदेश को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने के उद्देश्य से तकनीकी शिक्षा की दृष्टि से नए कार्यक्रमों की शुरुआत की गई है। एआई मिशन के जरिये एसटीईएम को दिया जाएगा बढ़ावा मुख्यमंत्री ने कहा कि साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और मैथ्स (एसटीईएम) को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश सरकार ने एसटीईएम एआई मिशन की घोषणा की गई है। इसके तहत राजकीय पॉलिटेक्निक संस्थानों और अन्य तकनीकी संस्थानों को एक बड़े कार्यक्रम के माध्यम से जोड़ा जाएगा। इसमें एआई इनेबल्ड लैब की स्थापना, स्किल डेवलपमेंट से जुड़ी गतिविधियां और एआई से संबंधित सामग्री को स्थानीय भाषा हिंदी में उपलब्ध कराने की व्यवस्था शामिल है। इसके साथ ही नॉलेज पार्टनर के रूप में डीपटेक के लिए आईआईटी कानपुर, आईआईटी बीएचयू सहित अन्य प्रतिष्ठित संस्थानों को जोड़ने की भी घोषणा की गई है, जिसके लिए बजट में विशेष धनराशि का प्रावधान किया गया है।

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