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अल्पसंख्यक समुदाय के छात्रों को आर्थिक संबल प्रदान कर योगी सरकार सबका साथ, सबका विकास की अवधारणा कर रही साकार

समावेशी विकास की दिशा में योगी सरकार का सशक्त कदम, अल्पसंख्यक समुदाय के 2.39 लाख से अधिक विद्यार्थियों को मिली छात्रवृत्ति अल्पसंख्यक छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति योजना के तहत वर्ष 2025-26 में लगभग 71.35 करोड़ रुपये की धनराशि का हुआ वितरण अल्पसंख्यक समुदाय के छात्रों को आर्थिक संबल प्रदान कर योगी सरकार सबका साथ, सबका विकास की अवधारणा कर रही साकार  लखनऊ  योगी सरकार ने समावेशी विकास और सामाजिक न्याय की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए अल्पसंख्यक समुदाय के विद्यार्थियों को शिक्षा से जोड़ने के अपने संकल्प को मजबूती प्रदान की है। इस दिशा में योगी सरकार ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में अल्पसंख्यक छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति योजना के तहत 2.39 लाख से अधिक छात्र-छात्राओं को छात्रवृत्ति का लाभ प्रदान किया है। इस योजना के अंतर्गत इस वर्ष अब तक लगभग 71.35 करोड़ रुपये की धनराशि का वितरण किया जा चुका है। योगी सरकार की ये योजना प्रदेश के सिख, जैन, बौद्ध और मुस्लिम जैसे अल्पसंख्यक समुदाय के जरूरतमंद छात्र-छात्राओं को शिक्षा प्राप्त करने में आर्थिक संबल प्रदान करती है। साथ ही समाज के सभी वर्गों को विकास का समान अवसर प्रदान कर सामाजिक न्याय और समावेशी विकास की अवधारणा को साकार कर रही है।  प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति के तहत अल्पसंख्यक समुदाय के 1,09,084 छात्र हुए लाभान्वित अल्पसंख्यक छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति योजना के तहत प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति के अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2025-26 में कक्षा 9 और 10 में पढ़ने वाले अल्पसंख्यक समुदाय के लगभग 1,09,084 विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति प्रदान की जा चुकी है। योजना के तहत इस मद में लगभग 37.20 करोड़ रुपये के बजट का प्रावधान किया गया था। इसमें पहले और दूसरे चरण में लगभग 64,312 छात्र-छात्राओं को 19.03 करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति प्रदान की गई। तीसरे चरण में 25 जनवरी 2026 तक लगभग 44,772 विद्यार्थियों को 13.16 करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति का वितरण किया गया है। इस प्रकार प्री-मैट्रिक स्तर पर अब तक तीन चरणों में लगभग 32.19 करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति का वितरण किया चुका है। शेष धनराशि से वंचित विद्यार्थियों को लाभान्वित किया जा रहा है। पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति के अंतर्गत वर्ष 2025-26 में 1,30,265 छात्रों को मिली छात्रवृत्ति  राज्य सरकार, योजना के तहत पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति के अंतर्गत अल्पसंख्यक समुदाय के 11वीं और 12वीं के अलावा अन्य तकनीकी एवं व्यवसायिक शिक्षा के जरूरतमंद छात्र-छात्राओं को छात्रवृत्ति प्रदान करती है। इस क्रम में वर्ष 2025-26 में अब तक लगभग 1,30,265 छात्र-छात्राओं को छात्रवृत्ति प्रदान की है। इस दिशा में विभाग की ओर से अब तक तीन चरणों में लगभग 39.16 करोड़ रुपये की धनराशि वितरित की गई है। इसके तहत पहले और दूसरे चरण में लगभग 51,519 विद्यार्थियों को 15.72 करोड़ रुपये की छात्रवृति प्रदान की गई, जबकि तीसरे चरण में 25 जनवरी 2026 तक 78,746 विद्यार्थियों को 23.44 करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति प्रदान की जा चुकी है। सीएम योगी आदित्यनाथ के विजन के अनुरूप शिक्षा को सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण का सबसे मजबूत आधार मानते हुए प्रदेश सरकार अल्पसंख्यक समुदाय के जरूरतमंद छात्र-छात्राओं को छात्रवृत्ति प्रदान करती है ताकि कोई भी छात्र आर्थिक कारणों से पढ़ाई से वंचित न रहे, बल्कि शिक्षा के माध्यम से आत्मनिर्भर हो प्रदेश के विकास में सकारात्मक योगदान दे सके। प्रदेश सरकार की ये पहल न केवल ड्रॉपआउट दर में कमी लाने में सहायक साबित हुई है, डबल इंजन सरकार की “सबका साथ, सबका विकास” की अवधारणा को भी साकार किया है।

उत्तर प्रदेश में ‘गोदान’ फिल्म टैक्स फ्री, गो संरक्षण को बढ़ावा देने पर आधारित

उत्तर प्रदेश में फिल्म गोदान टैक्स फ्री, गो संरक्षण को बढ़ावा देने पर आधारित है फिल्म गो सरंक्षण के लिए प्रतिबद्ध हैं सीएम योगी आदित्यनाथ, करमुक्त होने से अधिक लोग देख सकेंगे फिल्म लखनऊ  उत्तर प्रदेश सरकार ने गो संरक्षण पर आधारित फिल्म गोदान को राज्य में टैक्स फ्री कर दिया है। विनोद चौधरी द्वारा निर्मित व निर्देशित फिल्म आज  देशभर के सिनेमाघरों में रिलीज हुई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में लिया गया यह निर्णय सरकार की उस नीति को रेखांकित करता है, जिसके तहत गो सुरक्षा को सामाजिक और प्रशासनिक प्राथमिकता दी गई है। सरकार का मानना है कि फिल्म के माध्यम से गो संरक्षण का संदेश व्यापक स्तर पर समाज तक पहुंचेगा और आमजन को इस विषय की गंभीरता से जोड़ने में मदद मिलेगी। अधिक दर्शक फिल्म देख सकेंगे उत्तर प्रदेश में करमुक्ति के बाद दर्शकों के लिए टिकट दरों में कमी आएगी, जिससे अधिक से अधिक लोग फिल्म देख सकेंगे। पद संभालते ही उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गो तस्करों पर ताबड़तोड़ एक्शन शुरु किया था और बड़े पैमाने पर गो तस्करों की गिरफ्तारी की गई थी। गोहत्या और तस्करी के मामलों में कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए प्रशासनिक तंत्र को स्पष्ट निर्देश दिए गए थे।  गो संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध हैं सीएम योगी गोवंश के प्रति मुख्यमंत्री के स्नेह और गो संरक्षण के लिए उनकी प्रतिबद्धता का इसी बात से पता चलता है कि पिछले नौ वर्षों में प्रदेश में साढ़े सात हजार से ज्यादा गो आश्रय स्थल बनाए गए हैं। इतना ही नहीं, 12 लाख से अधिक निराश्रित गोवंश संरक्षित किए जा चुके हैं। गो सेवा और उनके संरक्षण को और प्रभावी बनाने के लिए हर जिले में गो संरक्षण समितियों का गठन किया गया है। हर जनपद के डीएम व एसएसपी इसके नोडल अधिकारी बनाए गए हैं।  वैज्ञानिक दृष्टिकोण पर आधारित है फिल्म गोमाता के संरक्षण, भारतीय संस्कृति में उसके महत्व और पंचगव्य आधारित वैज्ञानिक दृष्टिकोण को केंद्र में रखकर बनी फिल्म ‘गोदान’ के निर्माता-निर्देशक इससे पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात कर चुके हैं। लगभग दो घंटे की इस फिल्म में गाय के धार्मिक, सामाजिक और व्यावहारिक महत्व को दर्शाया गया है।

हादसा: तेज रफ्तार कंटेनर ने 15 यात्रियों को कुचला, छह की मौत; सीएम योगी ने घटना पर लिया संज्ञान

लखनऊ  उत्तर प्रदेश में यमुना एक्सप्रेसवे पर शनिवार तड़के एक बड़ा सड़क हादसा हो गया। लघुशंका के लिए बस से उतरे यात्रियों को पीछे से आ रहे तेज रफ्तार कंटेनर ने टक्कर मार दी। हादसे में छह लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि एक व्यक्ति घायल हुआ है। यह घटना सुबह करीब 2:45 बजे की बताई जा रही है। हादसे की जानकारी होने पर सीएम योगी ने दुख जताया और हादसे का संज्ञान लिया है।  सीएम योगी ने लिया संज्ञान, दिए ये निर्देश  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सड़क हादसे का संज्ञान लिया है। सीएम योगी आदित्यनाथ ने मृतकों के शोक संतप्त परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की है। उन्होंने अधिकारियों को तत्काल मौके पर पहुंच कर राहत कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। कहां और कैसे हुआ हादसा पुलिस के अनुसार, बस दिल्ली के नांगलोई से कानपुर के रसूलाबाद जा रही थी। सुरीर थाना क्षेत्र में माइल स्टोन 88 के पास कुछ यात्रियों ने लघुशंका के लिए बस रोकने को कहा। चालक ने निर्धारित सुरक्षित स्थान (ग्रीन जोन) पर बस न रोककर रास्ते में ही बस खड़ी कर दी। यात्री बस से नीचे उतरे ही थे कि पीछे से आ रहा एक तेज रफ्तार कंटेनर बस से टकरा गया। टक्कर के बाद वाहन नियंत्रण से बाहर हुआ और नीचे खड़े यात्रियों को अपनी चपेट में ले लिया। इन लोगों की हुई मौत हादसे में जिन लोगों की मौत हुई, उनकी पहचान इस प्रकार हुई है: सोनू — निवासी सरवा कटरा, औरैया देवेश — निवासी अलेवल, बस्ती असलम — निवासी गणेश का पुरवा, कन्नौज संतोष — निवासी प्रेम नगर, दिल्ली दो अन्य यात्रियों की पहचान की प्रक्रिया जारी है घटना में अमर दुबे (निवासी बेला, औरैया) घायल हुए हैं। उन्हें उपचार के लिए अस्पताल भेजा गया है। पुलिस कार्रवाई सूचना मिलने पर पुलिस और एक्सप्रेसवे की इमरजेंसी टीम मौके पर पहुंची। शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है और दुर्घटना के कारणों का पता लगाया जा रहा है। प्रारंभिक जानकारी में बस को असुरक्षित स्थान पर रोकना हादसे की बड़ी वजह माना जा रहा है।

कानपुर में मुंडन संस्कार के बाद दुखद हादसा, परिवार की कार नहर में गिरने से तीन की जान गई, एक की हालत गंभीर

 कानपुर देहात कानपुर देहात में बड़ा हादसा हो गया. जहां मुंडन संस्कार से लौट रहे कार सवार युवकों की कार अनियंत्रित होकर नहर में गिर गई. जिससे तीन लोगों की मौत हो गई. जबकि एक घायल हो गया. हादसा रसूलाबाद क्षेत्र के हरि निवादा गांव के पास हुआ. जहां कार देखते ही देखते नहर में समा गई और वाहन के अंदर पानी भर गया. घटना के बाद मौके पर मौजूद ग्रामीणों ने अद्भुत साहस का परिचय दिया. लोगों ने तुरंत कार का शीशा तोड़कर अंदर फंसे यात्रियों को बाहर निकाला और पुलिस को सूचना दी. सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और कार सवार चारों युवकों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र रसूलाबाद पहुंचाया गया. ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर शैलेन्द्र ने जांच के बाद राजेश श्रीवास्तव, मुम्मू श्रीवास्तव और चालक करिया को मृत घोषित कर दिया. जबकि घायल अभिषेक की हालत गंभीर देखते हुए उसे कानपुर के हैलट अस्पताल रेफर कर दिया गया है. घायल अभिषेक ने बताया कि सभी लोग गोंडा जिले के निवासी हैं और अकौड़िया गांव में मुंडन संस्कार में शामिल होने आए थे. कार्यक्रम से लौटते समय अचानक कार अनियंत्रित हुई और नहर में गिर गई. ग्रामीणों की मदद से उन्हें बाहर निकाला गया. लेकिन उनके पिता, चाचा और चालक की जान नहीं बच सकी. सूचना मिलते ही परिजन भी मौके पर पहुंच गए. फिलहाल पुलिस ने शवों को कब्जे में लेकर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है.    पुलिस ने बताया कि कानपुर देहात में एक कार अनियंत्रित होकर नहर में गिर गई. जिससे तीन लोगों की मौत हो गई. जबकि एक व्यक्ति घायल हो गया. मृतकों के शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है और आगे की कार्रवाई की जा रही है. 

यूपी SIR से संबंधित दावे-आपत्तियों का समय एक महीने बढ़ा, 27 मार्च तक होगी नोटिस पर सुनवाई

लखनऊ यूपी एसआईआर को लेकर बड़ा अपडेट है। राज्य निर्वाचन आयोग ने दावे और आपत्तियों का समय एक महीने के लिए बढ़ा दिया है। अब छह मार्च तक दावे और आपत्तियों की जा सकेंगी। वहीं नोटिस पर सुनवाई 27 मार्च तक की जाएगी। यूपी के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) नवदीप रिनवा ने बताया कि अब अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन 10 अप्रैल को किया जाएगा। उन्होंने बताया कि अब हर दिन सुबह 10 बजे से दोपहर 12 बजे तक बूथ पर बैठेंगे। कुल 8990 एईआरओ सुनवाई करेंगे। उन्होंने बताया, मतदाता सूची से 2.89 करोड़ लोगों के नाम काटे गए हैं। कुल 12.55 करोड़ मतदाताओं की ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी की गई है। अभी प्रतिदिन ढाई लाख से तीन लाख लोग मतदाता बनने को फॉर्म-6 भर रहे हैं। उन्होंने बताया, कुल 3.26 करोड़ मतदाताओं को नोटिस जानी है। अब तक 2.37 करोड़ लोगों को नोटिस जारी हुई है। जिसमें से 86.27 लाख को नोटिस दी जा चुकी है । 30.30 लाख वोटरों की सुनवाई हो चुकी है । 16.18 लाख लोगों ने 6 जनवरी तक फॉर्म 6 भरे थे मतदाता बनने को। 6 जनवरी से 4 फरवरी तक 37.80 लाख ने फॉर्म भरे हैं। 5 फरवरी को सर्वाधिक 3.51 लाख लोगों ने मतदाता बनने को फॉर्म 6 भरा है। बड़ी संख्या में महिला व युवा अभी भी वोटर बनने से बाकी हैं। ऐसे में यह लोग अंतिम मतदाता सूची में शामिल हो इसका भी पूरा प्रयास किया जा रहा है। ड्राफ्ट मतदाता सूची पर दावे-आपत्तियां लोग ढंग से कर सकें इसके लिए उन्हें और समय दिया गया है। नोटिस पाने वाले सिर्फ 13 प्रतिशत मतदाताओं की सुनवाई यूपी की मतदाता सूची में शामिल ऐसे मतदाता जिनके नाम का मिलान वर्ष 2003 की मतदाता सूची से नहीं हो सका है, उन्हें नोटिस भेजा गया है। अभी तक 1.72 लाख मतदाताओं को नोटिस जारी किया गया है और अभी तक 23 लाख मतदाताओं की सुनवाई की जा सकी है। यानी नोटिस पाने वालों में 13 प्रतिशत मतदाताओं की ही सुनवाई हो सकी है। जिन्हें नोटिस जारी होगी उनमें 3.26 करोड़ लोग हैं। जिसमें पुरानी सूची से मिलान न हो पाने वाले और तार्किक विसंगति वाले वोटर हैं। ऐसे में अभी 1.53 करोड़ मतदाताओं को नोटिस जारी होना बाकी है। यही कारण है कि मतदाता सूची में दावे-आपत्तियों व सुनवाई का समय बढ़ाया गया है।

ग्रामीण क्षेत्रों में आधुनिक शिक्षा ढांचा डबल इंजन सरकार की प्राथमिकता, विद्यालय संस्कार व कौशल विकास के केंद्र भी बनें

यमकेश्वर/पौड़ी गढ़वाल उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को उत्तराखंड दौरे पर पौड़ी गढ़वाल के यमकेश्वर स्थित इंटर कॉलेज के नवनिर्मित भवन का लोकार्पण किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि भौतिक विकास जीवन का अंतिम लक्ष्य नहीं होता, बल्कि वह केवल आवश्यकताओं की पूर्ति का माध्यम है। वास्तविक और सार्थक विकास वही है, जो अपनी सभ्यता, संस्कृति और आध्यात्मिक मूल्यों का संरक्षण करते हुए आगे बढ़े। शिक्षा केंद्रों को इसी सोच के साथ स्वयं को तैयार करना होगा, ताकि विद्यालय केवल पुस्तक ज्ञान तक सीमित न रहें, बल्कि संस्कार, कौशल और जीवन निर्माण के केंद्र बनें। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने विद्यालय के मेधावी छात्रों को पुरस्कार देकर सम्मानित भी किया। ग्रामीण क्षेत्रों में आधुनिक शिक्षा ढांचा सरकार की प्राथमिकता नवनिर्मित इंटर कॉलेज भवन के लोकार्पण अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि यह भव्य शैक्षणिक भवन अब छात्रों व शिक्षकों को समर्पित हो चुका है। शीघ्र ही यहां आवश्यक फर्नीचर सहित सभी मूलभूत सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी। डबल इंजन की उत्तराखंड सरकार का स्पष्ट फोकस ग्रामीण क्षेत्रों में भी अत्याधुनिक शिक्षा व स्वास्थ्य इन्फ्रास्ट्रक्चर विकसित करने पर है, ताकि विद्यार्थियों को गांव छोड़कर शहरों की ओर पलायन न करना पड़े और वे अपने क्षेत्र में रहकर ही गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त कर सकें। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड अपनी स्थापना के रजत जयंती वर्ष में प्रवेश कर चुका है और यह कालखंड केवल भौतिक उपलब्धियों तक सीमित नहीं है, बल्कि सांस्कृतिक व आध्यात्मिक मूल्यों के संरक्षण के साथ विकास की नई ऊंचाइयों को छूने का अवसर है। विकास एकांगी नहीं हो सकता, यदि सभ्यता और संस्कृति सुरक्षित नहीं रहेंगी, तो भौतिक प्रगति भी अर्थहीन सिद्ध होगी। प्रगति का मार्ग सकारात्मक सोच से मुख्यमंत्री ने सनातन परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि गोत्र व्यवस्था, ऋषि परंपरा के प्रति हमारी कृतज्ञता का प्रतीक है। प्राचीन काल के गुरुकुल केवल अध्ययन के केंद्र नहीं थे, बल्कि कृषि, आयुर्वेद, कौशल व जीवन मूल्यों के प्रशिक्षण के समग्र केंद्र थे। वहां से निकला विद्यार्थी जीवन के किसी भी संघर्ष में स्वयं को असहाय नहीं पाता था। कोई कार्य उसके लिए न छोटा होता था, न कठिन। मुख्यमंत्री ने कहा कि जीवन में वही व्यक्ति सफल होता है, जो सकारात्मक सोच के साथ अपने पुरुषार्थ व परिश्रम से आगे बढ़ता है। नकारात्मकता व्यक्ति को दुर्गति की ओर ले जाती है। मेहनत करने वालों पर बरसती है मां सरस्वती की कृपा उन्होंने कहा कि कुछ लोग विद्यालयों में मां सरस्वती की प्रार्थना पर भी सवाल उठाते हैं। मां सरस्वती किसी जाति, मत या संप्रदाय की नहीं हैं, जो मेहनत करता है और सही दिशा में सोचता है, उस पर उनकी कृपा स्वतः होती है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 इसी सोच को आगे बढ़ाती है कि विद्यालय केवल किताबी ज्ञान तक सीमित न रहें, बल्कि स्किल डेवलपमेंट और समग्र व्यक्तित्व निर्माण के केंद्र बनें।  आज बेहतर संपर्क व्यवस्था से जुड़ चुका है यमकेश्वर महादेव मुख्यमंत्री ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि 1965 में जब यह इंटर कॉलेज स्थापित हुआ था, तब न बिजली थी, न सड़कें और न आधुनिक साधन। आज गांव-गांव में बिजली, पेयजल, सड़कें और बेहतर कनेक्टिविटी उपलब्ध है। यमकेश्वर महादेव मंदिर, जहां पहले पैदल यात्रा ही एकमात्र साधन थी, आज बेहतर संपर्क व्यवस्था से जुड़ चुका है। पहले का विद्यालय भवन जर्जर स्थिति में था, आज भव्य भवन उपलब्ध है। सरकार ने सुविधाएं दी हैं, अब शिक्षकों का दायित्व है कि शिक्षा की गुणवत्ता को उसी स्तर तक पहुंचाएं और छात्रों का कर्तव्य है कि वे पूरे मनोयोग से अध्ययन करें। विद्यालय केवल शिक्षा के ही नहीं, बल्कि संस्कृति और सभ्यता के भी आधार स्तंभ होने चाहिए। गांवों को फिर से बनाना होगा आत्मनिर्भर मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड देवभूमि है। यहां का युवा देश की सीमाओं की रक्षा करता है और हर क्षेत्र में अपनी प्रभावी भूमिका निभाता है। हिमालय से निकलने वाला जल पूरे उत्तर भारत की भूमि को उपजाऊ बनाता है और देश की खाद्यान्न सुरक्षा में योगदान देता है। सरकार चाहती है कि हर स्तर पर मजबूत इन्फ्रास्ट्रक्चर विकसित हो, लेकिन उसका सही उपयोग समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने गांवों को पलायन से बचाने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि गांव हमारी सभ्यता की जड़ हैं। जड़ जितनी मजबूत होगी, समाज उतना ही स्थिर और समृद्ध होगा। गांवों को शिक्षा, नवाचार, शोध और आत्मनिर्भरता के केंद्र के रूप में विकसित करना होगा। पहले गांव आत्मनिर्भर थे, सरकार पर निर्भरता न्यूनतम थी। आज जरूरत है उस आत्मनिर्भरता की भावना को फिर से जीवित करने की। प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं की तैयारी में हो विद्यालय भवन का उपयोग मुख्यमंत्री ने आदित्य बिरला समूह के सहयोग की सराहना करते हुए कहा कि उनके सहयोग से यह विद्यालय भवन समयबद्ध तरीके से बनकर तैयार हुआ। अब लक्ष्य है कि इस भवन का उपयोग प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं की तैयारी, विशेष कक्षाओं और कौशल विकास के लिए भी किया जाए। उन्होंने ‘अभ्युदय कोचिंग’ मॉडल का उल्लेख करते हुए कहा कि डिजिटल और फिजिकल दोनों माध्यमों से गरीब और ग्रामीण पृष्ठभूमि के बच्चों को आईआईटी जेईई, नीट जैसी परीक्षाओं के लिए तैयार किया जा सकता है। उन्होंने विद्यालयों को पर्यटन, बागवानी, कृषि और स्थानीय संसाधनों से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया और कहा कि यमकेश्वर क्षेत्र में प्राकृतिक संसाधनों और शुद्ध जल जैसी अमूल्य संपदा है, जिसका संरक्षण और सदुपयोग जरूरी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जो भी नया और सकारात्मक प्रयास होगा, वही समाज के लिए प्रेरणा बनेगा और इस प्रेरणा का केंद्र हमारे शिक्षण संस्थान होंगे। इस अवसर पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, पूर्व मुख्यमंत्री और हरिद्वार के सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत, शिक्षा व स्वास्थ्य मंत्री डॉ धनसिंह रावत, विधायक मीनू बिष्ट, भाजपा के जिला अध्यक्ष राजगौरव नौटियाल उपस्थित रहे।

सुव्यवस्था, स्वच्छता, जल प्रबंधन, डिजिटल मैपिंग, भीड़ प्रबंधन में दिखा प्रशासन का कौशल

प्रयागराज. संगम तट आयोजित माघ मेला 2026 ने अब तक के अपने सभी माघ मेलों के आयोजन को पीछे छोड़ दिया। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्राथमिकता और सतत निगरानी के चलते इसे मिनी कुंभ जैसी पहचान ही हासिल नहीं हुई बल्कि संस्कृति,  सुशासन, सामाजिक समरसता और आत्मानुशासन की अभिव्यक्ति का यह अद्भुत समागम बन गया।   भारत की ‘संस्कृति-आधारित सुशासन’ संगम नगरी प्रयागराज में पावन त्रिवेणी के तट पर आयोजित माघ मेला 2026 भारत की संस्कृति पर आधारित गवर्नेंस का ऐसा ब्लू प्रिंट बन रहा है जिसका अन्य कहीं कोई उदाहरण देखने को नहीं मिलता। माघ मेला अधिकारी ऋषिराज के अनुसार पौष पूर्णिमा स्नान पर्व के साथ 3 जनवरी से शुरू हुए इस आयोजन के पांच प्रमुख स्नान पर्व सकुशल संपन्न हो जाने के बाद यहां 21 करोड़ से अधिक श्रद्धालु पावन गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती में पुण्य की डुबकी लगाकर अपना संकल्प पूरा कर चुके हैं। अभी आखिरी स्नान पर्व महा शिवरात्रि शेष है। मेला प्रशासन 15 फरवरी को इसके सकुशल समापन की तैयारी में लगा है। पूर्ण अनुशासन के साथ आस्था का जन सैलाब यहां आया और सनातन की बयार की झलक दिखाकर आगे बढ़ गया।  सामाजिक समरसता, प्रकृति संतुलन और आत्मानुशासन का पर्याय कल्पवास   कुंभ और महाकुंभ को यदि सनातन के 13 अखाड़ों के वैभव का महा आयोजन माना जाता है तो माघ मेला त्रिवेणी की रेती पर एक महीने तक प्रवास करने वाले कल्पवासियों का समागम। इस बार 5 लाख से अधिक कल्पवासियों ने यहां कल्पवास किया जिन्हें प्रशासन की तरफ से हर तरह की सहूलियत मिली। कल्पवासियों को तीर्थ पुरोहित ही अपने तंबुओं से बने शिविरों में बसाते हैं। पहली बार तीर्थ पुरोहितों के लिए अलग से प्रयागवाल नगर बसाया गया। सभी तरह के जाति,  उप-जाति का भेद भुलाकर मां गंगा के पावन जल में स्नान कर इन कल्पवासियों ने अपने संकल्प पूर्ण किए। भीड़ प्रबंधन में दिखा प्रशासन का कौशल, मेला सेवा ऐप बना सारथी माघ मेले के अब तक के इतिहास में इस बार का माघ मेला सबसे अधिक विस्तारित क्षेत्र में बसाया गया। माघ मेला अधिकारी ऋषिराज के अनुसार माघ मेले का इस बार 800 हेक्टेयर तक विस्तार किया गया। मेला क्षेत्र में पहली बार सात सेक्टर और 9 पांटून पुल बनवाए गए। आवागमन सुगम बनाने के लिए मेला क्षेत्र में पहली बार गोल्फ कार्ट सेवा की शुरुआत हुई। बसंत पंचमी तक 35 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने इसकी सेवा ली। इसके अलावा शहर के अलग अलग हिस्सों से श्रद्धालुओं को मेला क्षेत्र पहुंचाने के लिए बाइक टैक्सी सेवा शुरू की गई। माघ पूर्णिमा तक 3 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने इसकी सेवा ली। श्रद्धालुओं की सहूलियत की लिए पहली बार मेला सेवा ऐप का निर्माण किया गया। भीड़ प्रबंधन के लिए 42 पार्किंग बनाई गई। माघ मेला में श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए 15 हजार से अधिक पुलिस कर्मी तैनात रहे, मेला क्षेत्र में 500 से अधिक सीसीटीवी कैमरों के अलावा ड्रोन के जरिए भीड़ की सतत निगरानी होती रही।

योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद पूरे प्रदेश में 7500 से ज्यादा गोआश्रय स्थल बनाए गए

लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ने गोवंश संरक्षण के क्षेत्र में ऐतिहासिक कीर्तिमान स्थापित किया है। योगी सरकार ने अब तक देश में सबसे अधिक रिकॉर्ड 16.35 लाख निराश्रित गोवंश का संरक्षण किया है। इससे पहले किसी भी राज्य में गोवंश संरक्षण को लेकर इतनी व्यापक, संगठित और प्रभावी व्यवस्था नहीं की गई। योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद से अब तक प्रदेशभर में 7500 से अधिक गोआश्रय स्थलों का निर्माण कराया गया। जहां निराश्रित गोवंश के लिए चारा, पानी, इलाज और देखभाल की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की गई। यही नहीं, सरकार ने हर जिले में गो संरक्षण समितियों का गठन करते हुए जिलाधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को इसका नोडल अधिकारी बनाया, जिससे निगरानी और जवाबदेही मजबूत हुई। पशुपालकों को मिला सीधा लाभ मुख्यमंत्री सहभागिता योजना और पोषण मिशन के अंतर्गत अब तक 1,13,534 पशुपालकों को 1,81,339 गोवंश उपलब्ध कराए गए, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली और पशुपालकों की आय में वृद्धि हुई। गोवंश संरक्षण को आजीविका से जोड़कर योगी सरकार ने इसे आर्थिक सशक्तिकरण का माध्यम भी बनाया है। गो तस्करों पर ताबड़तोड़ कार्रवाई सीएम योगी के नेतृत्व में गो तस्करी के खिलाफ सख्त अभियान चलाया गया। बड़े पैमाने पर गो तस्करों की गिरफ्तारी, वाहनों की जब्ती और नेटवर्क तोड़ने की कार्रवाई से प्रदेश में गोतस्करी पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित हुआ। इससे न केवल गोवंश सुरक्षित हुआ, बल्कि कानून-व्यवस्था भी सुदृढ़ हुई। गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने बताया कि धरती, कृषि, प्रकृति और मानव जीवन सभी के लिए गोमाता सबसे बड़ा आशीर्वाद हैं। प्रदेश में गोसेवा और संरक्षण के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अभूतपूर्व इंतजाम किए हैं। उत्तर प्रदेश आज गोवंश संरक्षण का राष्ट्रीय मॉडल बनकर उभरा योगी सरकार ने गोवंश संरक्षण को केवल प्रशासनिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि सांस्कृतिक, सामाजिक और मानवीय दायित्व के रूप में आगे बढ़ाया। परिणामस्वरूप उत्तर प्रदेश आज गोवंश संरक्षण का राष्ट्रीय मॉडल बनकर उभरा है।

आज दंगा-दंगाई दोनों गायब, अब बेटी सुरक्षित और व्यापारी भी

लखनऊ/हरिद्वार  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश में एक समय था, जब विरासत को कोसा जाता था, अपमानित किया जाता था, लांछित किया जाता था। राम भक्तों पर गोलियां चलती थीं, उनका अपमान किया जाता था। लेकिन, यह रामभक्तों का नहीं, भारत की विरासत का अपमान होता था, भारत के आध्यात्मिक मूल्यों का अपमान होता था। इसका परिणाम यह निकला कि उत्तर प्रदेश अराजकता का अड्डा बन गया, लूट का अड्डा बन गया और दंगों की आग में झुलसने लगा। गुंडागर्दी भी चरम पर, ना बेटी सुरक्षित थी और न व्यापारी। हमारी सरकार में विरासत का सम्मान हुआ तो बेटी सुरक्षित हो गई और व्यापारी भी। आज उत्तर प्रदेश देश की दूसरे नंबर की अर्थव्यवस्था के रूप में भी आगे बढ़ रहा है। सीएम योगी शुक्रवार को हरिद्वार में आयोजित स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि जी महाराज की श्री विग्रह मूर्ति स्थापना समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि अब उत्तर प्रदेश में न अराजकता है, न फसाद है, न गुंडागर्दी है। न कर्फ्यू है, न दंगा है – यूपी में अब सब चंगा है। दंगा और दंगाई, दोनों गायब हो गए हैं। कर्फ्यू दंगाइयों पर लग गया है। यह इसलिए संभव हुआ क्योंकि नीति स्पष्ट थी, नीयत साफ थी। कोई सोचता था कि  500 वर्षों के बाद अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण हो पाएगा? लेकिन, आज भव्य राम मंदिर बन गया। आश्रम से मिला एमबीए का वास्तविक ज्ञान मुख्यमंत्री ने कहा कि लोग अक्सर पूछते हैं कि बिना किसी औपचारिक प्रशासनिक अनुभव के आप उत्तर प्रदेश कैसे चला रहे हैं,  तो मेरा उत्तर होता है कि आश्रम व्यवस्था से जुड़ा हूं। प्रशासन कैसे चलाना है, प्रबंधन कैसे करना है, भारत का संन्यासी आश्रम पद्धति से सीखता है। प्रशासन हमारे संस्कारों व जींस का हिस्सा है। एमबीए की वास्तविक शिक्षा तो भारतीय आश्रम पद्धति से ही मिलती है। यही कारण है कि उत्तर प्रदेश आज अराजकता से निकलकर विकास और सुशासन का मॉडल बनकर उभरा है। भारत की प्रशासनिक, आर्थिक और सांस्कृतिक शक्ति की जड़ें, आश्रम व गुरुकुल परंपरा में हैं। जहां कृषि, खगोल विज्ञान, आयुर्वेद, शिल्प व प्रशासन जैसे विषयों का केवल सैद्धांतिक नहीं, बल्कि व्यावहारिक ज्ञान दिया जाता है। जीवन से जुड़े हर प्रश्न का उत्तर मिलता है।  माघ मेले में अब तक 21 करोड़ श्रद्धालुओं का स्नान सीएम योगी ने बताया कि माघ मेले में अब तक 21 करोड़ से अधिक श्रद्धालु मां गंगा, मां यमुना और मां सरस्वती के त्रिवेणी संगम में डुबकी लगा चुके हैं। यहां पहले केवल अव्यवस्था देखने को मिलती थी, लेकिन आज अयोध्या, काशी, मथुरा-वृंदावन, प्रयागराज, हरिद्वार, बदरीनाथ धाम व केदारनाथ धाम केवल आस्था के केंद्र नहीं, बल्कि राष्ट्रीय चेतना के केंद्र बने हैं। भारत राष्ट्र यहीं से शक्ति प्राप्त करता है, और जब हमने इन आस्था केंद्रों को सम्मान के साथ आगे बढ़ाया, संरक्षित करने का काम किया, परिणाम भी सामने आया है। लंबे समय तक बीमारू रहा उत्तर प्रदेश आज भारत की अर्थव्यवस्था का ब्रेकथ्रू बनकर लगातार प्रगति पथ पर अग्रसर है। मुख्यमंत्री ने कहा कि मेरा जन्म इसी देवभूमि उत्तराखंड में हुआ है। वर्ष 1982 में भारत माता मंदिर के भव्य लोकार्पण का कार्यक्रम आयोजित हुआ था, जिसमें तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी व सर संघचालक बालासाहब देवरस, दोनों की उपस्थिति रही। यह स्पष्ट करता था कि राष्ट्राध्यक्ष के प्रति हमारा सम्मान सदैव रहेगा, लेकिन मूल्यों के साथ कभी कोई समझौता नहीं होगा। जब देश विपरीत परिस्थितियों से जूझ रहा था, तब पूज्य स्वामी जी महाराज ने भारत माता मंदिर के भव्य निर्माण और उसके लोकार्पण के माध्यम से पूरे देश के सामने आध्यात्मिक नेतृत्व का चिरस्थायी स्मारक समर्पित किया। न जाति का भेद और न धर्म का अंतर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तराखंड के चार धाम भारत की चेतना के आधार हैं। जब हम लोग बचपन में हरिद्वार आते थे, तो सबके मन में यह भाव रहता था कि हरि की पैड़ी में स्नान करना है और भारत माता मंदिर के दर्शन भी करने हैं। यहां न जाति भेद था और न धर्म का कोई अंतर। भारत माता मंदिर में पूरब से पश्चिम और उत्तर से दक्षिण तक, पूरे भारत का स्वरूप प्रतिबिंबित किया गया। यह उस समय की सबसे ऊंची (हाई-राइज) इमारत भी थी। मेरा सौभाग्य है कि देश के भीतर पिछले 11 वर्षों में हमने व्यापक परिवर्तन देखा है। अयोध्या, काशी, मथुरा, प्रयागराज से लेकर केदारपुरी और बदरीनाथ से हरिद्वार तक, विकास की एक लंबी गाथा विरासत को संजोते हुए बढ़ रही है। यह नए भारत निर्माण की वही गाथा है, जिसका सैकड़ों वर्षों से वर्तमान पीढ़ी को इंतजार था। यह पीढ़ी यह सोच रही थी कि क्या हमारी भावनाओं के अनुरूप भारत का निर्माण हो पा रहा है या नहीं। एक प्रकार की असमंजस की स्थिति बनी हुई थी। उस असमंजस से उबरने का कार्य पिछले 11 वर्षों में हमने स्पष्ट देखा है। भारत ऋषि परंपरा की तपस्या से निर्मित राष्ट्र मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जब हम भारत की बात करते हैं, तो भारत केवल एक भौगोलिक टुकड़ा मात्र नहीं है। भारत ऋषि परंपरा की तपस्या से निर्मित राष्ट्र है। यह किसी सत्ता की उपज नहीं है, बल्कि ऋषि परंपरा की तपस्या से निकली शाश्वत चेतना का केंद्र बिंदु है। भारत का उच्चतम न्यायालय भी इस मंत्र को अंगीकार करता है कि जहां धर्म है, वहीं विजय है। धर्म और विजय का यह शाश्वत स्वरूप हमें यह आभास कराता है कि धर्म कभी कमजोर नहीं होता, बल्कि उसे जानबूझकर कमजोर किया जाता है। इतिहास साक्षी है कि जो राष्ट्र अपनी सभ्यता और संस्कृति की उपेक्षा करता है, वह न तो वर्तमान को सुधार पाता है और न ही भविष्य को सुरक्षित रख पाता है। वैदिक भारत आत्मनिर्भर सभ्यता का प्रतीक रहा है। आक्रांताओं के आने से पहले भारत कोई अविकसित या उपेक्षित भूभाग नहीं था, बल्कि एक पूर्ण विकसित सभ्यता और समृद्ध संस्कृति था। यह राष्ट्र हमारे ऋषियों की तपस्या, किसानों के श्रम और कारीगरों की सृजनशीलता से खड़ा हुआ है। मुख्यमंत्री ने कहा कि 2000 वर्ष पहले, जिसे हम भारत का स्वर्ण युग कहते हैं, उस समय विश्व की अर्थव्यवस्था में भारत की हिस्सेदारी 44 प्रतिशत थी। इसी प्रकार आज से करीब 400 वर्ष पहले भी विश्व … Read more

जातिगत भावनाएं आहत करने, वैमनस्य फैलाने और सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने की नीयत से प्रसारण का आरोप

‘घूसखोर पंडत’ फिल्म के निर्देशक व टीम के खिलाफ एफआईआर CM की सामाजिक सौहार्द व कानून-व्यवस्था से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति के तहत कार्रवाई  जातिगत भावनाएं आहत करने, वैमनस्य फैलाने और सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने की नीयत से प्रसारण का आरोप ओटीटी प्लेटफॉर्म नेटफ्लिक्स के आपत्तिजनक कंटेंट पर लखनऊ पुलिस की कार्रवाई,  लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की समाज में सौहार्द बिगाड़ने और धार्मिक/जातिगत भावनाओं को आहत करने वालों के विरुद्ध जीरो टॉलरेंस नीति और ऐसे तत्वों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के निर्देशों के तहत ओटीटी प्लेटफॉर्म पर प्रचारित-प्रसारित की जा रही आगामी फिल्म ‘घूसखोर पंडत’ के निर्देशक के खिलाफ राजधानी लखनऊ के थाना हजरतगंज में एफआईआर दर्ज की गई है। यह कार्रवाई समाज में वैमनस्य फैलाने, धार्मिक एवं जातिगत भावनाओं को आहत करने और शांति व्यवस्था को भंग करने के प्रयास के आरोप में की गई है। प्रथम दृश्टया आपत्तिजनक पाया गया फिल्म का कंटेंट थाना हजरतगंज के प्रभारी निरीक्षक विक्रम सिंह ने ओटीटी प्लेटफॉर्म नेटफ्लिक्स पर प्रचारित हो रही उक्त आगामी फिल्म तथा सोशल मीडिया पर शेयर किए जा रहे इसके कंटेंट पर संज्ञान लिया। उनके अनुसार, ‘घूसखोर पंडत’ नामक आगामी फिल्म का शीर्षक और उसकी प्रचारित सामग्री प्रथम दृष्टया आपत्तिजनक पाई गई है। एफआईआर में जातिगत अपमान के बिंदु पर स्पष्ट किया गया है कि फिल्म का शीर्षक एक समुदाय/जाति विशेष (ब्राह्मण) को लक्षित कर अपमानित करने के उद्देश्य से रखा गया प्रतीत होता है। इस नामकरण तथा नेटफिल्क्स व सोशल मीडिया पर प्रचारित इसके संवादों को लेकर समाज के विभिन्न वर्गों में तीव्र प्रतिक्रिया देखने को मिली है। सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने के उद्देश्य से फिल्म का प्रसारण फिल्म के नाम और उसकी सामग्री को लेकर ब्राह्मण समाज तथा विभिन्न सामाजिक संगठनों में आक्रोश है। कई संगठनों ने इसके विरोध में उग्र प्रदर्शन की चेतावनी दी है। इससे सार्वजनिक शांति और कानून-व्यवस्था के प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई थी। पुलिस ने स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए तत्काल कदम उठाया। पुलिस के अनुसार प्रथम दृष्टया यह प्रतीत होता है कि फिल्म के निर्देशक एवं उनकी टीम द्वारा समाज में वैमनस्य फैलाने, शांति व्यवस्था भंग करने और सौहार्द बिगाड़ने के उद्देश्य से फिल्म का प्रचार-प्रसार किया गया। इस तरह की सामग्री से सामाजिक ताने-बाने को नुकसान पहुंचने की संभावना रहती है, जिसे किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जा सकता। उपरोक्त तथ्यों और संवेदनशील परिस्थितियों के दृष्टिगत, थाना हजरतगंज पुलिस द्वारा फिल्म के निर्देशक एवं उनकी टीम के विरुद्ध सुसंगत धाराओं में प्रथम सूचना रिपोर्ट पंजीकृत कर ली गई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए अग्रिम विधिक कार्रवाई तथा विवेचना प्रचलित है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि जांच के दौरान उपलब्ध साक्ष्यों, प्रचारित-प्रसारित सामग्री और कानूनी प्रावधानों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

यीडा के औद्योगिक सेक्टर-33 में विकसित हो रहा टॉय पार्क, निवेश और निर्माण दोनों में आई रफ्तार

यमुना एक्सप्रेसवे पर तेजी से आकार ले रहा टॉय पार्क, 154 में से 143 प्लॉट आवंटित ड्रीम डेस्टिनेशन यूपी: योगी सरकार की औद्योगिक नीति से निवेशकों का बढ़ा भरोसा, निर्माण की ओर बढ़ी परियोजनाएं यीडा के औद्योगिक सेक्टर-33 में विकसित हो रहा टॉय पार्क, निवेश और निर्माण दोनों में आई रफ्तार 15 निवेशकों के भवन मानचित्र स्वीकृत, कुछ इकाइयों में निर्माण कार्य भी शुरू, योजना के दूसरे चरण के लिए भूमि अधिग्रहण प्रगति पर लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार की औद्योगिक विकास नीति का असर अब यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक क्षेत्र में साफ दिखाई देने लगा है। औद्योगिक सेक्टर-33 में विकसित किए जा रहे टॉय पार्क में निवेश और निर्माण दोनों ही स्तर पर तेज प्रगति दर्ज की गई है। प्राधिकरण द्वारा टॉय पार्क के लिए आरक्षित 100 एकड़ भूमि पर कुल 154 औद्योगिक भूखंड नियोजित किए गए हैं, जिनमें से 143 भूखंडों का आवंटन पूरा हो चुका है। यह आंकड़े प्रदेश में औद्योगिक निवेश को लेकर निवेशकों के बढ़ते भरोसे को दर्शाते हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राज्य सरकार का फोकस स्पष्ट है कि औद्योगिक परियोजनाओं को केवल मंजूरी तक सीमित न रखते हुए उनका समय पर क्रियान्वित सुनिश्चित करना। यमुना एक्सप्रेसवे पर विकसित हो रहा टॉय पार्क इसी नीति का उदाहरण बनकर उभर रहा है। पारदर्शी आवंटन, तेज लीज प्रक्रिया और निर्माण गतिविधियों के चलते उत्तर प्रदेश देश के प्रमुख औद्योगिक केंद्र के रूप में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रहा है। 120 आवंटियों को चेकलिस्ट जारी यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) की ताजा प्रगति रिपोर्ट के अनुसार, टॉय पार्क के अंतर्गत 143 आवंटित भूखंडों में से 124 निवेशकों द्वारा लीज प्लान प्रस्तुत किए जा चुके हैं, जबकि 19 मामलों में लीज प्लान अभी प्राप्त नहीं हुए हैं। इन निवेशकों को एक माह के भीतर आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराने के लिए कहा गया है। अब तक 120 आवंटियों को चेकलिस्ट जारी की जा चुकी है और 4 मामलों में चेकलिस्ट जारी करने की प्रक्रिया प्रगति पर है। 76 निवेशकों को मिला पजेशन भूमि हस्तांतरण के स्तर पर भी टॉय पार्क परियोजना ने ठोस रफ्तार पकड़ी है। अब तक 108 निवेशकों के पक्ष में लीज डीड का निष्पादन पूरा किया जा चुका है, जबकि 76 निवेशकों को विधिवत पजेशन भी प्रदान कर दिया गया है। इसके साथ ही परियोजना अब केवल फाइलों में नहीं, बल्कि जमीनी निर्माण की दिशा में आगे बढ़ चुकी है। निर्माण कार्य भी प्रगति पर निर्माण गतिविधियों की बात करें तो 15 निवेशकों के भवन मानचित्र स्वीकृत हो चुके हैं, जबकि 4 औद्योगिक इकाइयों में निर्माण कार्य की शुरुआत भी हो गई है। इसे टॉय पार्क के वास्तविक रूप लेने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। योगी सरकार का जोर है कि आवंटन के साथ-साथ परियोजनाएं समयबद्ध तरीके से धरातल पर उतरें, जिससे रोजगार सृजन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति मिल सके। 7 भूखंडों के अधिग्रहण की कार्रवाई जारी प्राधिकरण के अनुसार, टॉय पार्क के दूसरे चरण के अंतर्गत कुल 11 भूखंडों में से 4 भूखंडों की भूमि उपलब्ध हो चुकी है, जिन्हें नई योजना के तहत प्रकाशित किया गया है। शेष 7 भूखंड, जिनका कुल क्षेत्रफल 6.71 एकड़ है, अभी आवंटन से शेष हैं। इन भूखंडों के लिए भूमि अधिग्रहण की कार्रवाई तेजी से आगे बढ़ाई जा रही है, ताकि जल्द से जल्द इन्हें भी निवेशकों के लिए उपलब्ध कराया जा सके। टॉय इंडस्ट्री के लिए आधुनिक औद्योगिक इकोसिस्टम विकसित करने की योजना टॉय पार्क के अंतर्गत खिलौना उद्योग से जुड़ी विनिर्माण इकाइयों की स्थापना का प्रस्ताव है, जिसमें प्लास्टिक, लकड़ी, फैब्रिक, धातु एवं इलेक्ट्रॉनिक खिलौनों के निर्माण से संबंधित गतिविधियां शामिल होंगी। योजना के तहत कॉमन फैसिलिटी सेंटर, डिजाइन, पैकेजिंग, टेस्टिंग, वेयरहाउसिंग और लॉजिस्टिक्स से जुड़ा आधारभूत ढांचा विकसित किया जाना प्रस्तावित है। इसके साथ ही एमएसएमई और स्टार्टअप्स को औद्योगिक गतिविधियों से जोड़ने, कौशल विकास को बढ़ावा देने और रोजगार सृजन की दिशा में भी व्यवस्था किए जाने की परिकल्पना की गई है, जिससे यमुना एक्सप्रेसवे क्षेत्र को खिलौना उद्योग के एक संगठित औद्योगिक केंद्र के रूप में विकसित किया जा सके।

आवारा कुत्तों से निजात दिलाएंगे शेल्टर होम व एबीसी सेंटर

आवारा कुत्तों से निजात दिलाएंगे शेल्टर होम व एबीसी सेंटर डॉग बाइट की बढ़ती घटनाओं पर योगी सरकार गंभीर, नगर निगमों व जनपद मुख्यालयों पर डॉग शेल्टर होम व एबीसी सेंटर बनाने की कार्यवाही शुरू शेल्टर होम्स के लिए अलग डीपीआर तैयार, प्रति यूनिट 470 से 531 लाख रुपये तक लागत आने का अनुमान,  डीपीआर को सैद्धांतिक मंजूरी प्रयागराज और लखनऊ सहित कई नगर निगमों में भूमि चिह्नित, जनपद मुख्यालयों पर भी एबीसी सेंटर के लिए जमीन तय आवारा कुत्तों की समस्या के मानवीय और वैज्ञानिक समाधान के लिए सुप्रीम कोर्ट ने जारी की हैं गाइडलाइंस,  नागरिक सुरक्षा व पशु कल्याण दोनों को वरीयता लखनऊ  प्रदेश में आवारा कुत्तों की समस्या और डॉग बाइट की बढ़ती घटनाओं को योगी सरकार ने गंभीरता से लिया है। जन सुरक्षा से जुड़े इस मुद्दे पर सख्त व ठोस कदम उठाते हुए प्रदेश सरकार ने नगर निगमों एवं जनपद मुख्यालयों पर डॉग शेल्टर होम व एनिमल बर्थ कंट्रोल (एबीसी) सेंटर की स्थापना प्रक्रिया तेज कर दी है। शासन स्तर पर इसे प्राथमिकता देते हुए भूमि चिह्नीकरण, बजट निर्धारण और परियोजना स्वीकृति की कार्रवाही एक साथ आगे बढ़ाई जा रही है। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में गाइडलाइंस जारी की थीं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राज्य सरकार का स्पष्ट उद्देश्य है कि आवारा कुत्तों की समस्या का समाधान मानवीय, वैज्ञानिक व स्थायी तरीके से किया जाए। सरकार का मानना है कि डॉग शेल्टर होम और एबीसी सेंटर की प्रभावी व्यवस्था से जहां एक ओर आमजन की सुरक्षा सुनिश्चित होगी, वहीं दूसरी ओर पशु कल्याण को भी मजबूती मिलेगी। नगर निगम क्षेत्रों में पहले से संचालित अथवा प्रस्तावित एबीसी सेंटरों के साथ ही डॉग शेल्टर होम विकसित किए जाएंगे। इसके लिए प्रत्येक नगर निगम को निर्देशित किया गया है कि वह उपयुक्त भूमि उपलब्ध कराए और आवश्यक प्रशासनिक औपचारिकताओं को शीघ्र पूर्ण करे। शासन द्वारा स्पष्ट किया गया है कि यह पूरी प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस व पशु कल्याण से जुड़े मानकों के अनुरूप की जा रही है। योगी सरकार ने डॉग शेल्टर होम के लिए अलग से विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने के निर्देश दिए हैं। प्राप्त प्रस्तावों के अनुसार प्रति शेल्टर होम 470 लाख रुपये से लेकर 531 लाख रुपये तक लागत आने का अनुमान है। डीपीआर में शेल्टर होम की क्षमता, इन्फ्रास्ट्रक्चर, पशु चिकित्सा सुविधाएं, भोजन, स्वच्छता, सुरक्षा व्यवस्था और प्रशिक्षित स्टाफ की तैनाती जैसे सभी महत्वपूर्ण बिंदुओं को शामिल किया गया है। शासन स्तर पर इन डीपीआर को सैद्धांतिक मंजूरी प्रदान कर दी गई है और अब सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप अगले चरण की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। प्रगति रिपोर्ट के अनुसार प्रयागराज नगर निगम क्षेत्र में ग्राम मऊर उपरहट, तहसील सोरांव में डॉग शेल्टर होम के लिए भूमि चिह्नित कर ली गई है। लखनऊ नगर निगम में भूमि की उपलब्धता को लेकर कार्यकारिणी बोर्ड से प्रस्ताव स्वीकृत हो चुका है। वहीं अन्य नगर निगमों से भी सूचना प्राप्त की जा रही है, ताकि पूरे प्रदेश में एक समान व्यवस्था लागू की जा सके। जनपद मुख्यालयों पर भी एबीसी सेंटर एवं शेल्टर होम की स्थापना को लेकर तेजी से कार्यवाही की जा रही है। ललितपुर में 12.182 हेक्टेयर, हरदोई में 0.2 हेक्टेयर, बुलंदशहर में 2000 वर्ग मीटर तथा फतेहपुर में 0.769 हेक्टेयर भूमि एबीसी सेंटर एवं डॉग शेल्टर होम के लिए चिह्नित कर ली गई है। शेष जनपदों से सूचनाएं प्राप्त होते ही वहां भी भूमि चिह्नीकरण और परियोजना स्वीकृति की प्रक्रिया पूर्ण की जाएगी।

यूपी में गुमशुदगी का खतरनाक आंकड़ा, 2 साल में 1.08 लाख लापता, सिर्फ 9,700 मिले, हाई कोर्ट नाराज

इलाहाबाद इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने एक मामले की सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश में गुमशुदा लोगों की बढ़ती संख्या पर गंभीर चिंता जताई है। अदालत के समक्ष प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, पिछले करीब दो वर्षों में प्रदेश में 1 लाख 8 हजार 300 लोगों के लापता होने की गुमशुदगी रिपोर्ट दर्ज की गई है, लेकिन इनमें से केवल 9,700 लोगों का ही अब तक पता लगाया जा सका है। अदालत ने इस स्थिति को बेहद गंभीर और चिंताजनक बताया है। खंडपीठ ने इस पूरे मामले को ‘प्रदेश में गुमशुदा व्यक्तियों के संबंध में’ शीर्षक से जनहित याचिका के रूप में दर्ज करने का आदेश दिया है। मामले की अगली सुनवाई गुरुवार को निर्धारित की गई है। यह आदेश न्यायमूर्ति अब्दुल मोईन और न्यायमूर्ति बबीता रानी की पीठ ने विक्रमा प्रसाद द्वारा दायर याचिका पर पारित किया। क्या है मामला याची, जो लखनऊ के चिनहट क्षेत्र का निवासी है, ने अदालत को बताया कि उसका बेटा जुलाई 2024 में लापता हो गया था। इस संबंध में उसने चिनहट थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट भी दर्ज कराई, लेकिन पुलिस की ओर से कोई प्रभावी या संतोषजनक कार्रवाई नहीं की गई। इस पर न्यायालय ने न केवल याची की शिकायत पर उचित कार्रवाई के निर्देश दिए, बल्कि प्रदेश भर में लापता व्यक्तियों से जुड़ी विस्तृत जानकारी प्रस्तुत करने का आदेश अपर मुख्य सचिव (गृह) को भी दिया। अधिकारियों का रवैया लापरवाही भरा अदालत के आदेश के अनुपालन में दाखिल हलफनामे में अपर मुख्य सचिव की ओर से बताया गया कि 1 जनवरी 2024 से 18 जनवरी 2026 के बीच पुलिस के पास दर्ज मामलों के अनुसार कुल 1,08,300 लोग लापता हुए हैं, जिनमें से सिर्फ 9,700 लोगों का ही अब तक पता लगाया जा सका है। इन आंकड़ों पर टिप्पणी करते हुए न्यायालय ने कहा कि इससे साफ जाहिर होता है कि गुमशुदा व्यक्तियों के मामलों में संबंधित अधिकारियों का रवैया लापरवाही भरा रहा है।  

चाइनीज मांझे से मौत पर मर्डर केस चलेगा, योगी ने लखनऊ की घटना पर गुस्सा जताया, यूपी में रेड की गई शुरुआत

लखऊ उत्तर प्रदेश में चाइनीज मांझे से मौत को अब हत्या माना जाएगा। ऐसी मौत मामले में मर्डर का केस चलेगा। प्रदेश में लगातार हो रहे हादसों पर सीएम योगी ने सख्ती दिखाई है। इसके इस्तेमाल और बिक्री पर रोक को लेकर सख्त रुख अपनाया है। हाल ही में हुई समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से पूछा कि प्रतिबंध के बावजूद बाजार में चाइनीज़ मांझा कैसे उपलब्ध हो रहा है। उन्होंने पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को निर्देश दिया कि प्रदेशभर में विशेष अभियान चलाकर ऐसे मांझे की बिक्री, भंडारण और सप्लाई करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। सीएम योगी ने यह भी कहा कि चाइनीज़ मांझे से होने वाली मौतों को गंभीर अपराध माना जाएगा और जरूरत पड़ने पर ऐसे मामलों को हत्या की श्रेणी में दर्ज किया जा सकता है। इसके साथ ही अधिकारियों को जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश भी दिए गए हैं, ताकि लोग इस खतरनाक मांझे के इस्तेमाल से बचें और सुरक्षित विकल्प अपनाएं। उन्होंने पुलिस प्रमुखों को स्पष्ट निर्देश दिए कि अवैध मांझे की सप्लाई चेन की पहचान कर बड़े स्तर पर छापेमारी की जाए और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। आपको बता दें 4 फरवरी को लखनऊ में चाइनीज मांझे से गर्दन कटने की वजह से एमआर की मौत हो गई थी। वह बाइक से जा रहे थे। तभी उनके गले में चाइनीज मांझा फंस गया। खून से लथपथ होकर वह बाइक समेत गिर गए और करीब 10 मिनट तक तड़पते रहे। राहगीरों ने उन्हें ट्रॉमा सेंटर पहुंचाया, जहां इलाज के दौरान दम तोड़ दिया था। चाइनीज़ मांझा बेहद खतरनाक होता है और इससे लोगों की जान को गंभीर खतरा रहता है। जिसे देखते हुए सरकार इस मामले में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं करेगी। लखनऊ में चाइनीज मांझा बना काल लखनऊ से हैरान करने वाली घटना सामने आई है. हैदरगंज पुल पर बुधवार को दर्दनाक हादसा हो गया. चाइनीज मांझे से एक युवक की गर्दन कट गई. लहूलुहान हालत में युवक को अस्पताल में भर्ती कराया गया. जहां युवक की मौत हो गई. मृतक युवक की पहचान शोएब के रूप में हुई. शोएब परिवार का एकलौता बेटा था. वहीं, शोएब की मौत पर परिवार वाले आक्रोश में हैं. चाइनीज मांझे पर प्रतिबंध की मांग की है.  बाइक सवार आया चपेट में  लखनऊ पुलिस के मुताबिक, शोएब दुबग्गा का रहने वाला था. बुधवार दोपहर वह अपनी बाइक से हैदरगंज ओवरब्रिज से जा रहा था. तभी अचानक चाइनीज मांझा उनके गले में फंस गया. मांझे से युवक की गर्दन पर गहरा घाव हो गया. युवक लहूलुहान होकर सड़क पर गिर पड़ा. राहगीर उसे अस्पताल ले गए. लेकिन चिकित्सक उसकी जान नहीं बचा पाए. बताया गया कि अस्पताल ले आते तक ब्लड ज्यादा ​बह गया था. वहीं, शोएब की मौत की खबर मिलते ही दुबग्गा स्थित उनके घर में कोहराम मच गया.  घटना की सूचना मिलते ही बाजारखाला पुलिस मौके पर पहुंची. शोएब के घर वालों ने चाइनीज मांझे पर प्रतिबंध लगाने की मांग को लेकर हंगामा किया. घर वालों का कहना है कि चाइनीज मांझा खुलेआम बिक रहा है. प्रशासन प्रतिबंध नहीं लगा पा रहा है. वहीं, इंस्पेक्टर ने बताया कि शोएब के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है. परिजनों की ओर से तहरीर पर आगे की कार्रवाई की जाएगी. चाइनीज मांझे के खिलाफ भी अभियान चलाया जाएगा. 

उत्तर प्रदेश में ‘दिव्यांगजन रोजगार अभियान 2.0’ 6 से 13 फरवरी तक

लखनऊ.  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में प्रदेश सरकार एक और ठोस पहल करने जा रही है। उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन द्वारा प्रदेश के सभी जनपदों में 06 से 13 फरवरी 2026 तक “दिव्यांगजन रोजगार अभियान 2.0” संचालित किया जाएगा। इस विशेष अभियान का उद्देश्य दिव्यांगजनों को सेवायोजन के साथ-साथ स्व-रोजगार के अवसर प्रदान करना है। योगी सरकार की यह पहल दिव्यांगजनों को सम्मानजनक आजीविका, आत्मनिर्भरता और सामाजिक मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में एक और मजबूत कदम है। तीन वर्षों में प्रशिक्षित दिव्यांगजनों को मिलेगा लाभ प्रदेश के व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिल देव अग्रवाल ने बताया कि अभियान के तहत विगत तीन वर्षों में कौशल विकास मिशन एवं आईटीआई के माध्यम से प्रशिक्षित ऐसे पात्र एवं इच्छुक दिव्यांगजनों को रोजगार से जोड़ा जाएगा, जो वर्तमान में जनपदों में उपलब्ध हैं। इसके साथ ही जनपद स्तर पर उपलब्ध अन्य इच्छुक दिव्यांगजन भी इस अभियान का लाभ ले सकेंगे। औद्योगिक इकाइयों में सेवायोजन पर जोर दिव्यांगजन रोजगार अभियान के दौरान जनपदों में संचालित औद्योगिक इकाइयों एवं अन्य अधिष्ठानों में उपलब्ध रिक्तियों के सापेक्ष दिव्यांगजनों का सेवायोजन कराया जाएगा। इसके अलावा एमएसएमई, जिला उद्योग एवं निर्यात प्रोत्साहन केंद्र तथा अन्य विभागों की स्व-रोजगार योजनाओं से भी दिव्यांगजनों को जोड़ा जाएगा। मुख्य विकास अधिकारी की अध्यक्षता में संचालन उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन के निदेशक पुलकित खरे ने बताया कि हर जनपद में यह अभियान मुख्य विकास अधिकारी की अध्यक्षता में गठित समिति द्वारा संचालित किया जाएगा, जिसमें जिला उद्योग एवं निर्यात प्रोत्साहन केंद्र, जिला दिव्यांगजन सशक्तीकरण अधिकारी, जिला रोजगार सहायता अधिकारी और उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन के जिला समन्वयक शामिल होंगे। निर्धारित अवधि में राजकीय आईटीआई को केंद्र बनाकर सेवायोजन एवं स्व-रोजगार संबंधी गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। रोजगार संगम पोर्टल से भी मिलेगा अवसर रोजगार संगम पोर्टल पर पंजीकृत इच्छुक दिव्यांगजनों को भी इस अभियान में सम्मिलित किया जाएगा। जिला रोजगार सहायता अधिकारी के माध्यम से उन्हें उपलब्ध रिक्तियों पर नियोजित कराया जाएगा। निर्देश दिए गए हैं कि अभियान का जनपद स्तर पर व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए, ताकि अधिक से अधिक दिव्यांगजन इस अवसर का लाभ उठा सकें और रोजगार की मुख्यधारा से जुड़ सकें। टॉप-5 जनपदों को मिलेगा सम्मान अभियान के सफल क्रियान्वयन पर सर्वाधिक सेवायोजन एवं स्व-रोजगार उपलब्ध कराने वाले प्रदेश के शीर्ष 05 जनपदों के जिलाधिकारियों एवं उनकी टीम को प्रशस्ति-पत्र प्रदान किया जाएगा। 13 फरवरी 2026 को सायं 5 बजे तक सभी जनपदों से सेवायोजित दिव्यांगजनों की संख्या, नियुक्ति पत्र एवं स्व-रोजगार से जुड़े साक्ष्य मांगे जाएंगे।

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